‘अगर बहुमत खिलाफ था तो ये आयोग के फैसले थे ही नहीं’, ईसीआई के कार्यप्रणाली पर कपिल सिब्बल

नई दिल्ली। चुनाव आयोग को लेकर राज्यसभा सांसद और वकील कपिल सिब्बल ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दो चुनाव आयुक्तों के बयान का हवाला देते हुए कहा कि पिछले दस महीनों से उनके बीच कोई चर्चा नहीं हुई। सिब्बल ने कहा कि यदि दोनों चुनाव आयुक्तों की सहमति या जानकारी के बिना फैसले लिए गए हैं, तो यह सवाल उठता है कि संबंधित निर्णय वास्तव में चुनाव आयोग के थे या केवल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के। कपिल सिब्बल ने आईएएनएस से बातचीत में बताया कि दो चुनाव आयुक्तों ने कहा है कि पिछले दस महीने से उनके बीच कोई चर्चा नहीं हुई। उन्होंने समय-सीमा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस दौरान कई चुनाव हुए और यदि दोनों चुनाव आयुक्तों को यह जानकारी ही नहीं थी कि कौन से फैसले लिए गए हैं, तो यह गंभीर सवाल है। इस संबंध में जारी प्रेस नोट का भी उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अब तक उसके सही या गलत होने को लेकर कोई खंडन सामने नहीं आया है। इसी आधार पर सिब्बल ने सवाल उठाया कि जिन फैसलों को चुनाव आयोग के फैसले के तौर पर देखा गया, क्या वे वास्तव में आयोग के सामूहिक फैसले थे? ये फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के फैसले थे। सरकारी कार्यालय में बैठक की प्रक्रिया और एजेंडे से जुड़े सवाल पर कपिल सिब्बल ने कहा कि अगर कोई एजेंडा ही नहीं होगा तो कार्यवाही कैसे होगी। उन्होंने सवाल किया कि यदि बिना एजेंडे के कार्यवाही हुई और उसकी मिनट्स भी नहीं होंगी, तो बाकी दो चुनाव आयुक्तों को यह कैसे पता चलेगा कि कौन से फैसले लिए गए हैं और वे उनका विरोध किस तरह दर्ज कराएंगे। दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्ति यही थी कि उनकी सलाह के बिना फैसले लिए जा रहे थे। यदि ऐसा हुआ है तो यह गंभीर विषय है और सुप्रीम कोर्ट को भी इस पर संज्ञान लेना चाहिए। चार राज्यों में फैसलों को रोलबैक किए जाने के सवाल पर कपिल सिब्बल ने कहा कि अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट को करना है। हालांकि, उन्होंने अपनी राय रखते हुए कहा कि यदि चुनाव आयोग में निर्णय बहुमत से लिए जाते हैं और बहुमत ही किसी फैसले के खिलाफ है, तो यह सवाल उठता है कि वह निर्णय चुनाव आयोग का निर्णय कैसे माना जा सकता है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग या तो सर्वसम्मति से निर्णय करता है या बहुमत के आधार पर। यदि बहुमत किसी निर्णय के खिलाफ था, तो उस स्थिति में संबंधित फैसलों को चुनाव आयोग के फैसले के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि अब यह अदालत पर निर्भर करेगा कि वह इन फैसलों और उनकी प्रक्रिया को किस तरह देखती है।

जम्मू-कश्मीर में कारोबार आसान बनाने और कानूनों को तर्कसंगत बनाने के लिए विधेयक पेश

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोमवार को विधानसभा में अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने और उन्हें तर्कसंगत बनाने, कारोबार को आसान बनाने तथा राज्य विधानमंडल के सदस्यों की पेंशन से जुड़े कानून में संशोधन के लिए विधेयक पेश किए। कानून, न्याय और संसदीय मामलों का विभाग भी संभाल रहे मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कुछ कानूनों में संशोधन कर अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने और उन्हें तर्कसंगत बनाने से जुड़ा विधेयक पेश किया। इसमें कुछ कानूनों को रद्द करने और उनसे जुड़े अन्य मामलों के प्रावधान भी शामिल हैं। यह विधेयक जम्मू-कश्मीर विधानसभा के मौजूदा शरदकालीन सत्र के दौरान पेश किया गया। इसे एलए बिल नंबर 16 ऑफ 2026 के रूप में पेश किया गया है और यह पहले ही आधिकारिक राजपत्र के विशेष अंक में प्रकाशित हो चुका है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में जम्मू-कश्मीर ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल, 2026 भी पेश किया। इसे एलए बिल नंबर 11 ऑफ 2026 के रूप में पेश किया गया है। विधेयक का उद्देश्य अनुमति आधारित व्यवस्था की जगह नियम आधारित शासन को बढ़ावा देना है, ताकि नागरिक और कारोबारी ज्यादा भरोसे के साथ योजना बना सकें, निवेश कर सकें और काम कर सकें। इसके जरिए जम्मू-कश्मीर में कारोबार करने और जीवन को आसान बनाने, रोजगार पैदा करने, निवेश आकर्षित करने और लंबे समय तक आर्थिक विकास को बनाए रखने का लक्ष्य रखा गया है। जम्मू-कश्मीर ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल, 2026 को भी आधिकारिक राजपत्र के विशेष अंक में पहले ही प्रकाशित किया जा चुका है। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने जम्मू-कश्मीर स्टेट लेजिस्लेचर मेंबर्स पेंशन एक्ट, 1984 में संशोधन से जुड़ा विधेयक भी विधानसभा में पेश किया। पेंशन कानून में संशोधन से जुड़े इस विधेयक को एलए बिल नंबर 15 ऑफ 2026 के रूप में पेश किया गया है। इसे भी आधिकारिक राजपत्र के विशेष अंक में प्रकाशित किया जा चुका है। इस तरह विधानसभा के मौजूदा शरदकालीन सत्र में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कानूनों को सरल और तर्कसंगत बनाने, कारोबार के लिए बेहतर माहौल तैयार करने और विधानमंडल के सदस्यों की पेंशन से जुड़े कानून में बदलाव के लिए तीन विधेयक पेश किए हैं।

एशियन गेम्स 2026 में गुलवीर सिंह का दूसरा मेडल, 10000 मीटर के बाद 1500 मीटर दौड़ में जीता ‘सिल्वर’

नागोया। ‘एशियन गेम्स 2026’ में भारत के लॉन्ग-डिस्टेंस रनर गुलवीर सिंह ने दूसरा सिल्वर मेडल हासिल किया। 25 सितंबर को 10,000 मीटर दौड़ में दूसरा स्थान हासिल करने के बाद, सोमवार को गुलवीर ने पुरुषों की 1500 मीटर दौड़ में एक और सिल्वर मेडल अपने नाम किया। उत्तर प्रदेश के अतरौली गांव के रहने वाले गुलवीर ने 1500 मीटर रेस में शानदार प्रदर्शन करते हुए 3:36.72 के अपने पर्सनल बेस्ट समय के साथ दूसरा स्थान हासिल किया। भारतीय एथलीट के अलावा, पोडियम पर जगह बनाने वाले शेष दो जापानी एथलीट काजुतो इजावा और नागिया मोरी थे। इजावा ने 3:36.35 के एशियन गेम्स रिकॉर्ड समय के साथ गोल्ड मेडल जीता। वह गुलवीर से सिर्फ 0.37 सेकंड आगे रहे, जबकि मोरी 3:37.92 के समय के साथ तीसरे स्थान पर रहे। एशियन गेम्स में गुलवीर का यह तीसरा मेडल है। इससे पहले उन्होंने 10,000 मीटर फाइनल में सिल्वर मेडल जीता था। इससे पहले, 2023 हांगझोऊ खेलों में भी 10,000 मीटर में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम कर चुके थे। गुलवीर ने पुरुषों की 10,000 मीटर स्पर्धा में दो एशियन गेम्स मेडल जीतने वाले पहले भारतीय बनकर भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया है। वहीं, भारत के अविनाश साबले पुरुषों की 3000 मीटर स्टीपलचेज फाइनल में मेडल जीतने में नाकाम रहे। वह चौथे स्थान पर रहे। साबले ने 8:21.67 का अपना सीजन का बेस्ट समय निकाला, लेकिन गोल्ड मेडल जीतने वाले जापान के र्युजी मिउरा से 4.31 सेकंड पीछे रह गए। जापान के र्योमा आओकी, 8:17.60 के समय के साथ दूसरे स्थान पर रहे, जबकि कतर के जकारिया इलाहलामी 8:18.13 के समय के साथ तीसरा स्थान अपने नाम किया। 1500 मीटर फाइनल की बात करें तो, यूनुस शाह भी अपनी हीट में तीसरे स्थान पर रहने के बाद मेडल की दौड़ में शामिल थे। 1500 मीटर हीट की ओवरऑल टाइमिंग में, उनका प्रदर्शन गुलवीर से भी बेहतर था। यूनुस ने 3:45.77 का समय लिया, जबकि गुलवीर ने अपनी हीट में 3:45.79 का समय लिया, जिसके परिणामस्वरूप दोनों फाइनल के लिए क्वालीफाई कर गए। हालांकि, रेस में काफी देर तक अच्छी स्थिति में रहने के बावजूद, यूनुस फाइनल में नौवें स्थान पर रहे और उन्होंने 3:43.88 का समय लिया।

केरल: राहुल गांधी पर टिप्पणी को लेकर वीडी सतीशन का राजीव चंद्रशेखर पर पलटवार

तिरुवनंतपुरम। केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने सोमवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर की गई व्यक्तिगत टिप्पणियों को लेकर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयानों को न तो कांग्रेस और न ही केरल की जनता स्वीकार करेगी। वीडी सतीशन ने कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता के रक्षक हैं। उन्होंने राजीव चंद्रशेखर और भाजपा के अन्य नेताओं को चुनौती दी कि वे अपने दिल पर हाथ रखकर बताएं कि क्या वे भी धर्मनिरपेक्षता की रक्षा के लिए खड़े हैं। उन्होंने कहा कि राजीव चंद्रशेखर ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ व्यक्तिगत हमला किया है, जबकि राहुल गांधी देश के करोड़ों लोगों के दिलों में जगह रखते हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक गरिमा और मर्यादा बनाए रखने की जिम्मेदारी वाले पद पर रहते हुए राजीव चंद्रशेखर ने आधारहीन आरोप और हल्की बयानबाजी करके अपने राजनीतिक दिवालियापन को उजागर किया है। मुख्यमंत्री ने कहा, “राजीव चंद्रशेखर को यह नहीं भूलना चाहिए कि जब वह राहुल गांधी की तरफ एक उंगली उठाते हैं, तो बाकी उंगलियां उनकी अपनी ओर होती हैं।” सतीशन ने चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और स्वायत्त संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के कामकाज पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के संविधान और संस्थाओं को एक खास समूह के हितों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। वीडी सतीशन के मुताबिक, राहुल गांधी और कांग्रेस इन मुद्दों के खिलाफ बिना डरे आवाज उठा रहे हैं और इसी कारण संघ परिवार में बेचैनी है। उन्होंने कहा कि असली मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए इस तरह की बयानबाजी सफल नहीं होगी। सतीशन ने कहा कि धमकियों या चुनौतियों से नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा और सभी के लिए समान न्याय सुनिश्चित करने की राहुल गांधी और कांग्रेस की कोशिशों को कमजोर नहीं किया जा सकता। उन्होंने राजीव चंद्रशेखर और भाजपा से कहा कि खोखले दावे करने और जिन नीतियों को वह “जनविरोधी” बताते हैं, उन्हें आगे बढ़ाने के बजाय जनता से जुड़े असली मुद्दों का सामना करने का साहस दिखाएं। यह बयान ऐसे समय आया है, जब चुनाव आयोग, मतदाता सूचियों और चुनाव आयोग को लेकर राहुल गांधी की आलोचना के मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। सतीशन ने भाजपा की ओर से राहुल गांधी पर किए गए हमले को लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता से जोड़ते हुए भाजपा पर पलटवार किया।

आयुष्मान खुराना और सारा अली खान की फिल्म ‘उड़ता तीर’ का ‘भूतनी का’ गाना रिलीज

मुंबई। अभिनेता आयुष्मान खुराना और अभिनेत्री सारा अली खान की आने वाली फिल्म ‘उड़ता तीर’ के जबरदस्त ट्रेलर से चर्चा बटोरने के बाद मेकर्स ने फिल्म का गाना ‘भूतनी का’ रिलीज कर दिया है। म्यूजिक कंपोजर जोड़ी सचिन-जिगर ने इस गाने का म्यूजिक तैयार किया है और इसके बोल अमिताभ भट्टाचार्य ने लिखे हैं। ‘भूतनी का’ गाना काका, ट्विंकल अग्रवाल और अमिताभ भट्टाचार्य ने गाया है। अपने नए गाने के बारे में बात करते हुए कंपोजर जोड़ी सचिन-जिगर ने कहा कि ‘भूतनी का’ को कंपोज करने में सच में बहुत मजा आया, क्योंकि अमिताभ भाई ने इसके बोल इस तरह लिखे थे कि आपको हमेशा यह जानने की उत्सुकता बनी रहती थी कि आगे क्या होने वाला है। चुनौती यह थी कि म्यूजिक से उस उलझन को सपोर्ट किया जाए और साथ ही गाना सुनने में मजेदार भी लगे। हमने गाने की रफ्तार, साउंड और अरेंजमेंट के साथ कई प्रयोग किए, ताकि ऐसा लगे कि गाना हर पल कोई नया मोड़ लेने वाला है। इस वजह से यह प्रोसेस बहुत रोमांचक रहा। यह एक मजेदार गाना है, लेकिन इसका सही बैलेंस बनाना उतना आसान नहीं था जितना सुनने में लगता है। सिंगर काका ने कहा कि गाने के बोल सुनकर मुझे कहानी जानने की बहुत उत्सुकता हुई। मैं सोच रहा था कि इतना एनर्जेटिक गाना है, थोड़ा मजेदार है और इसका साउंड भी इतना अलग है तो फिल्म में असल में क्या हो रहा है। रिकॉर्डिंग के समय भी मेरे मन में यही ख्याल था कि इसके पीछे जरूर कोई दिलचस्प कहानी होगी। अब टीजर देखने के बाद उत्सुकता और बढ़ गई है, क्योंकि किरदारों को देखकर और भी सवाल मन में आ रहे हैं। अब बस फिल्म देखने का इंतजार है। सिंगर ट्विंकल अग्रवाल ने कहा कि ‘भूतनी का’ को रिकॉर्ड करने में बहुत मजा आया, क्योंकि इसके बोल में बहुत कुछ हो रहा है। उन्होंने कहा कि आपको एनर्जी बनाए रखनी होती है और साथ ही यह भी ध्यान रखना होता है कि हर शब्द सही ढंग से सुनाई दे। काका ने इसमें बहुत मजेदार एनर्जी डाली और मुझे उनके साथ तालमेल बिठाने में बहुत मजा आया। यह ऐसा गाना है जो गाते समय आपका मूड अच्छा कर देता है। ‘उड़ता तीर’ 9 अक्टूबर, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

एशियन गेम्स: मेंस जैवलिन थ्रो में भारत का ‘डबल धमाल’, यशवीर को सिल्वर, रोहित ने जीता ब्रॉन्ज

नागोया। एशियन गेम्स 2026 में सोमवार को पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा के फाइनल में भारत ने दो मेडल हासिल किए। यशवीर सिंह ने देश के लिए सिल्वर मेडल जीता, जबकि रोहित यादव ने ब्रॉन्ज मेडल पर कब्जा किया। इस प्रतियोगिता का गोल्ड मेडल श्रीलंका के रुमेश थारंगा ने हासिल किया। नागोया सिटी मिजुहो पार्क एथलेटिक स्टेडियम में भारत के यशवीर सिंह ने 85.72 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ दूसरा स्थान अपने नाम किया। यशवीर ने अपने छठे प्रयास में 85.72 मीटर की दूरी तय की। इससे पहले उनका सर्वश्रेष्ठ प्रयास 85.14 मीटर था। रोहित ने पहले प्रयास में 83.56 मीटर, दूसरे में 82.99 मीटर, तीसरे में 82.42 मीटर और चौथे प्रयास में 84.31 मीटर की दूरी तय की। उनका का पांचवां प्रयास 85.14 मीटर रहा था, जिसके बाद उन्होंने अंतिम प्रयास में सबसे अधिक दूरी तय की। वहीं, रोहित यादव ने 84.35 मीटर के अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ देश के लिए ब्रॉन्ज मेडल जीता। रोहित ने अपने तीसरे प्रयास में यह दूरी तय की थी। रोहित ने पहले प्रयास में 77.25 मीटर, दूसरे में 82.40 मीटर, तीसरे में 84.35 मीटर, चौथे में 82.16 मीटर और पांचवें प्रयास में 82.15 मीटर का थ्रो किया। हालांकि, उनका छठा प्रयास फाउल रहा। श्रीलंका के रुमेश थारंगा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया। रुमेश ने अपने चौथे प्रयास में 88 मीटर की दूरी को पार कर लिया था, जिसके बाद छठे और अंतिम प्रयास में 88.55 मीटर की दूरी तय करते हुए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। थारंगा ने पहले प्रयास में 73.53 मीटर दूरी तय की, जिसके बाद अगले प्रयास में 83.34 मीटर दूर भाला फेंका। उनका तीसरा प्रयास मान्य नहीं था, जिसके बाद 88.33 मीटर की दूरी तय करते हुए पहला स्थान हासिल कर लिया था। थारंगा का पांचवां प्रयास फाउल रहा; उन्होंने छठे प्रयास में 88.55 की दूरी तय करते हुए खिताबी जीत पर मुहर लगाई।

भारत-यूएई आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का अवसर, निवेशकों के लिए कई क्षेत्रों में अपार संभावनाएं: पीयूष गोयल

नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को भारत की मजबूत आर्थिक विकास दर और विभिन्न क्षेत्रों में मौजूद व्यापक निवेश अवसरों को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत-यूएई व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (सीईपीए) दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश सहयोग को नई गति दे रहा है। उन्होंने कहा कि भारत में यूएई निवेशकों के लिए कई क्षेत्रों में आकर्षक अवसर उपलब्ध हैं। पीयूष गोयल ने अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (एडीआईए) के प्रबंध निदेशक शेख हमेद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात के बाद कहा कि दोनों पक्षों के बीच भारत-यूएई आर्थिक साझेदारी को तेज करने और सीईपीए के लाभों का अधिकतम उपयोग करने पर सार्थक चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि यह समझौता व्यापार बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और मजबूत आपूर्ति शृंखलाएं विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में कहा, “भारत और यूएई के बीच आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं और दोनों देश इस साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।” उन्होंने भारत की तेज आर्थिक वृद्धि और सुधार आधारित नीतियों को विदेशी निवेश के लिए अनुकूल बताया। मंत्री ने कहा कि भारत और यूएई ने समुद्री क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए छह प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की है, जिनमें जहाज स्वामित्व, आधुनिक बंदरगाह, जहाज निर्माण, जहाज मरम्मत एवं रखरखाव, शिपब्रेकिंग और कंटेनर निर्माण शामिल हैं। इन क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए एक कार्य समूह गठित किया जाएगा, जिसमें भारतीय पक्ष का नेतृत्व पोत परिवहन मंत्रालय करेगा। इससे पहले पीयूष गोयल ने यूएई के विदेश व्यापार मंत्री डॉ. थानी बिन अहमद अल जेयौदी से भी मुलाकात की और भारत-यूएई सीईपीए के तहत हुई प्रगति तथा व्यापार एवं निवेश साझेदारी को और मजबूत बनाने के नए अवसरों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में चल रही चर्चाएं भारत में यूएई निवेश को बढ़ाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं। सरकार का लक्ष्य भारत में यूएई के कुल निवेश को मौजूदा लगभग 25 अरब डॉलर से बढ़ाकर 100 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। गोयल ने बताया कि यूएई की रुचि भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र, स्टार्टअप इकोसिस्टम, बंदरगाह विकास, जहाज निर्माण उद्योग और भारतीय शेयर बाजार में निवेश जैसे क्षेत्रों में बढ़ रही है। इससे दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग का दायरा और व्यापक होने की संभावना है। उन्होंने यह भी कहा, “भारत-यूएई स्थानीय मुद्रा व्यापार पहले ही दोहरे अंकों के स्तर तक पहुंच चुका है और दोनों देश इसे और तेजी से विस्तार देने की दिशा में काम कर रहे हैं।” मंत्री ने कहा कि ये चर्चाएं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मई 2026 की यूएई यात्रा के दौरान हुए समझौतों की निरंतरता हैं। उस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने कच्चे तेल भंडारण, रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार, एलएनजी और एलपीजी अवसंरचना विकास तथा दीर्घकालिक एलपीजी आपूर्ति व्यवस्था जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की योजनाओं की घोषणा की थी। उन्होंने विश्वास जताया कि सीईपीए, बढ़ते निवेश, ऊर्जा सहयोग और नई आर्थिक पहलों के जरिए भारत-यूएई संबंध आने वाले वर्षों में और मजबूत होंगे तथा दोनों देशों की आर्थिक वृद्धि को नई गति देंगे।

डिजिटल टोलिंग को नई गति, ‘फास्टैग एनुअल पास’ ने छुआ 1 करोड़ का आंकड़ा: सरकार

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सोमवार को कहा कि ‘फास्टैग एनुअल पास’ ने लॉन्च के बाद एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए एक करोड़ उपयोगकर्ताओं का आंकड़ा पार कर लिया है। यह योजना पिछले वर्ष 15 अगस्त को शुरू की गई थी और राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा करने वाले वाहन चालकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हुई है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, यह वार्षिक पास देशभर के लगभग 1,150 टोल प्लाजा पर लागू है, जिनमें राष्ट्रीय राजमार्ग और राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे शामिल हैं। इस सुविधा के तहत वाहन मालिकों को बार-बार फास्टैग रिचार्ज कराने की जरूरत नहीं पड़ती। एक बार 3,075 रुपए का भुगतान करने पर पास एक वर्ष या 200 टोल क्रॉसिंग तक वैध रहता है। मंत्रालय ने बताया कि यह सुविधा सभी गैर-व्यावसायिक वाहनों के लिए उपलब्ध है, जिनमें वैध फास्टैग लगा हुआ है। एकमुश्त शुल्क का भुगतान राजमार्ग यात्रा ऐप के माध्यम से करने के बाद वार्षिक पास वाहन से जुड़े मौजूदा फास्टैग पर ही सक्रिय हो जाता है। सरकार का कहना है कि फास्टैग एनुअल पास को मिल रही बढ़ती स्वीकृति यह दर्शाती है कि यह योजना राष्ट्रीय राजमार्गों पर निर्बाध और किफायती यात्रा को बढ़ावा देने में प्रभावी साबित हो रही है। इससे टोल भुगतान प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक बनी है और यात्रियों का समय भी बच रहा है। इस बीच, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने पिछले महीने ‘वनटैग’ सुविधा भी शुरू की थी, जो फास्टैग पोर्टेबिलिटी सेवा है। इसके जरिए उपयोगकर्ता अपने वाहन पर लगे मौजूदा फास्टैग को बदले बिना उसका जारीकर्ता बैंक बदल सकते हैं। इससे नए फिजिकल टैग लेने की आवश्यकता समाप्त हो जाती है। मंत्रालय के अनुसार, देश में फास्टैग की पहुंच अब 98 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है और इसके उपयोगकर्ताओं की संख्या लगभग 13 करोड़ तक पहुंच गई है। फास्टैग ने भारत में इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन प्रणाली को पूरी तरह बदल दिया है और टोल प्लाजा पर पारदर्शिता तथा दक्षता बढ़ाई है। वनटैग सुविधा के तहत फास्टैग उपयोगकर्ता राजमार्गयात्रा ऐप में लॉग-इन कर अपने वाहन का पंजीकरण नंबर दर्ज कर पात्रता की जांच कर सकते हैं। इसके बाद वर्तमान जारीकर्ता बैंक की ओर से एक 6 अंकों का मोबाइल वेरिफिकेशन कोड (एमवीसी) भेजा जाता है। सत्यापन पूरा होने के बाद उपयोगकर्ता नया जारीकर्ता चुनकर आवश्यक केवाईसी और वॉलेट ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया पूरी कर सकता है। सरकार का कहना है कि फास्टैग एनुअल पास और वनटैग जैसी सुविधाएं देश की डिजिटल टोलिंग व्यवस्था को और मजबूत करेंगी। साथ ही हाईवे यात्रियों को अधिक सुविधा, लचीलापन और बेहतर यात्रा अनुभव उपलब्ध कराने में मदद करेंगी।

भू-राजनीतिक संकटों के बावजूद भारत ने सुनिश्चित की ऊर्जा आपूर्ति, ऊर्जा कूटनीति रही सफल: हरदीप पुरी

नई दिल्ली। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोमवार को कहा कि हाल के भू-राजनीतिक संकटों और वैश्विक आपूर्ति शृंखला में व्यवधानों के बावजूद भारत ने अपनी ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अपनाई गई ऊर्जा कूटनीति और पिछले एक दशक में की गई रणनीतिक तैयारियों का परिणाम है। राष्ट्रीय राजधानी में मर्चेंट्स चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के सदस्यों को संबोधित करते हुए पुरी ने कहा कि आज ऊर्जा सुरक्षा का अर्थ केवल ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना नहीं है, बल्कि संघर्षों, रणनीतिक समुद्री मार्गों में रुकावटों, कीमतों में अस्थिरता और अचानक आने वाले व्यवधानों के बीच भी देश की अर्थव्यवस्था को सुचारु रूप से चलाए रखना है। उन्होंने कहा, “भारत इन चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना इसलिए कर सका क्योंकि ऊर्जा क्षेत्र ने पहले से ही व्यापक तैयारी कर ली थी। पिछले 10 वर्षों में भारत ने कच्चे तेल के आयात स्रोतों को 27 देशों से बढ़ाकर 41 देशों तक किया है। इसके साथ ही 5.33 मिलियन टन रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार तैयार किए गए, रिफाइनिंग क्षमता 215 एमएमटीपीए से बढ़ाकर 267 एमएमटीपीए की गई और देशभर में ईंधन आउटलेट्स की संख्या लगभग 52,000 से बढ़कर एक लाख से अधिक हो गई।” केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि एलपीजी आयात टर्मिनलों की संख्या भी 11 से बढ़ाकर 22 कर दी गई है। इन तैयारियों का परिणाम यह रहा कि जब दुनिया के कई हिस्सों में ऊर्जा संकट और कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला, तब भी भारत में पेट्रोल पंपों पर आपूर्ति सामान्य बनी रही, रसोई गैस सिलेंडरों की उपलब्धता बाधित नहीं हुई और खुदरा ईंधन कीमतों को अपेक्षाकृत नियंत्रित रखा जा सका। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का विषय ‘भारत की ऊर्जा सुरक्षा: भू-राजनीतिक अनिश्चितता से निपटना’ मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए बेहद प्रासंगिक है, क्योंकि दुनिया अभी भी अनेक भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है। पेट्रोलियम मंत्री ने पश्चिम बंगाल की ऊर्जा क्षमता का भी विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य में ऊर्जा क्षेत्र में मौजूद संभावनाएं उद्योग, निवेश, रोजगार और क्षेत्रीय संपर्क को नई गति दे सकती हैं। वर्तमान में पश्चिम बंगाल में 17,600 करोड़ रुपए की तेल एवं गैस परियोजनाओं पर काम चल रहा है, जिससे राज्य का ऊर्जा बुनियादी ढांचा तेजी से मजबूत हो रहा है। उन्होंने बताया कि हल्दिया रिफाइनरी, जिसकी क्षमता 1975 में 2.5 एमएमटीपीए थी, अब बढ़कर 8 एमएमटीपीए हो गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में इस रिफाइनरी ने 8.5 मिलियन टन कच्चे तेल का प्रसंस्करण किया। पुरी ने कहा कि वर्ष 2018 में अशोकनगर में हुई तेल खोज अब व्यावसायिक उत्पादन के चरण में पहुंच चुकी है। लगभग 1,000 करोड़ रुपए के निवेश के बाद ओएनजीसी द्वारा उत्पादित पहला कच्चे तेल का खेप अगस्त 2026 में हल्दिया पहुंचा। उन्होंने कहा कि यह विकास पश्चिम बंगाल की ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा स्रोतों में विविधता, रणनीतिक भंडारण, रिफाइनिंग क्षमता का विस्तार और बुनियादी ढांचे में निवेश जैसे कदमों ने भारत को वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में भी ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने में सक्षम बनाया है। उन्होंने बताया कि यही रणनीति भविष्य में भी देश की ऊर्जा जरूरतों और आर्थिक विकास को मजबूती प्रदान करेगी।

जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने अमेरिका जाएंगे पीयूष गोयल, द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर भी होगी चर्चा

नई दिल्ली। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 29 सितंबर से 5 अक्टूबर तक अमेरिका के एक सप्ताह के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के साथ-साथ कई द्विपक्षीय बैठकों और व्यापारिक संवादों में शामिल होंगे। मंत्रालय के अनुसार, इस यात्रा का उद्देश्य भारत के व्यापार और निवेश संबंधों को और मजबूत करना है। पीयूष गोयल 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को अमेरिका के विस्कॉन्सिन राज्य के मिल्वौकी में आयोजित होने वाली जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेंगे। यह बैठक अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) के निमंत्रण पर आयोजित की जा रही है, जिसमें जी20 देशों के व्यापार मंत्री वैश्विक व्यापार से जुड़े प्रमुख मुद्दों और बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली के भविष्य पर चर्चा करेंगे। बैठक के दौरान भारत नियम-आधारित, खुली, समावेशी, पारदर्शी, न्यायसंगत और भेदभावरहित वैश्विक व्यापार व्यवस्था की वकालत करेगा, जिसमें विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की केंद्रीय भूमिका बनी रहे। भारत विकासशील देशों के लिए पर्याप्त नीतिगत लचीलापन बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर देगा और अन्य जी20 देशों के साथ रचनात्मक संवाद करेगा। जी20 बैठक के इतर पीयूष गोयल कई देशों के अपने समकक्ष मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे। इन चर्चाओं का फोकस किसानों, मछुआरों, महिला उद्यमियों, स्टार्टअप्स, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) और अन्य व्यवसायों के लिए नए व्यापारिक अवसर सृजित करने पर रहेगा। दौरे का एक प्रमुख आकर्षण भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर होने वाली बातचीत होगी। गोयल अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि के साथ बैठक कर दोनों देशों के बीच संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौते की दिशा में जारी वार्ताओं को आगे बढ़ाएंगे। दोनों देश 7 फरवरी 2026 को जारी संयुक्त बयान के अनुरूप एक अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में भी काम करेंगे। माना जा रहा है कि यह वार्ता भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों को और नई गति दे सकती है। आधिकारिक कार्यक्रमों के अलावा, वाणिज्य मंत्री मिल्वौकी और शिकागो में विनिर्माण, उपभोक्ता वस्तुओं, कृषि व्यवसाय, रिटेल और प्रौद्योगिकी क्षेत्र की अग्रणी अमेरिकी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में भारत में निवेश की संभावनाओं, विनिर्माण विस्तार और कारोबारी साझेदारी के अवसरों पर चर्चा होगी। गोयल विभिन्न उद्योग समूहों, स्टार्टअप्स और नवाचार आधारित कंपनियों के साथ गोलमेज बैठकों में भी भाग लेंगे। इन मंचों पर वह भारत को एक उभरते वैश्विक विनिर्माण और निवेश केंद्र के रूप में प्रस्तुत करेंगे तथा भारतीय और अमेरिकी कंपनियों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर देंगे। शिकागो में अपने प्रवास के दौरान पीयूष गोयल गांधी जयंती के अवसर पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इसके साथ ही वह स्वामी विवेकानंद को भी श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे और भारतीय मूल के पेशेवर संगठनों तथा प्रवासी भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों से संवाद करेंगे।