सीबीडीटी ने टैक्स ऑडिट रिपोर्ट की समयसीमा बढ़ाकर 21 अक्टूबर की, करदाता 21 नवंबर तक भर सकेंगे आईटीआर

नई दिल्ली। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने सोमवार को उन करदाताओं को बड़ी राहत दी है, जिनके खातों का ऑडिट आयकर अधिनियम, 1961 के तहत अनिवार्य है। बोर्ड ने आकलन वर्ष 2026-27 के लिए आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर से बढ़ाकर 21 नवंबर 2026 कर दी है। सीबीडीटी द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, इस फैसले के साथ टैक्स ऑडिट रिपोर्ट जमा करने की निर्धारित तिथि भी 30 सितंबर से बढ़ाकर 21 अक्टूबर 2026 कर दी गई है। इस संबंध में औपचारिक अधिसूचना अलग से जारी की जाएगी। पिछले कुछ सप्ताहों से चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संगठनों और कर विशेषज्ञों द्वारा समयसीमा बढ़ाने की मांग की जा रही थी। उनका कहना था कि ऑडिट प्रक्रियाओं को पूरा करने, विभिन्न वित्तीय और कर रिकॉर्ड्स का मिलान करने तथा आवश्यक खुलासों (डिस्क्लोजर) का सत्यापन करने के लिए अधिक समय की आवश्यकता है। सीबीडीटी का मानना है कि समयसीमा बढ़ाने से करदाताओं और ऑडिटरों को ऑडिट प्रक्रिया पूरी करने तथा आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल पर आवश्यक रिपोर्ट और रिटर्न दाखिल करने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। इससे अनुपालन को आसान बनाने और कारोबार सुगमता (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। इस बीच, प्रत्यक्ष कर संग्रह (डारेक्ट टैक्स कलेक्शन) के मोर्चे पर सरकार को मजबूत वृद्धि मिली है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में 1 अप्रैल से 17 सितंबर के बीच शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 13 प्रतिशत बढ़कर 12.12 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो गया। इसी अवधि में सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह 15 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 14.3 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया। आंकड़े बताते हैं कि कॉरपोरेट टैक्स संग्रह 19.48 प्रतिशत बढ़कर लगभग 5.56 लाख करोड़ रुपए रहा, जबकि व्यक्तिगत आयकर और हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) से प्राप्त कर संग्रह 6 प्रतिशत बढ़कर 6.16 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो गया। वहीं सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) संग्रह में उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 53 प्रतिशत बढ़कर 40,214 करोड़ रुपए पहुंच गया। सरकार द्वारा जारी किए गए टैक्स रिफंड में भी तेज वृद्धि देखी गई। 1 अप्रैल से 17 सितंबर के दौरान रिफंड जारी करने की राशि 29 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 2.2 लाख करोड़ रुपए के पार पहुंच गई।
फतेहपुर में सिलेंडर धमाके से दो मंजिला मकान ध्वस्त, चार की मौत, एक की हालत नाजुक

फतेहपुर। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के मलवां थाना क्षेत्र के कस्बे में सोमवार की शाम फल कारोबारी के घर में तेज धमाके से मकान की ऊपरी दो मंजिलें ढह गईं। हादसे में मलबे में दबने और झुलसने से चार लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य घायल हुए हैं। इनमें एक की हालत गंभीर बताई जा रही है और उसे वेंटिलेटर पर रखा गया है। पुलिस के मुताबिक, घटना की सूचना शाम करीब 5:30 बजे पीआरवी के जरिए मिली। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। संकरी गली होने के कारण फायर ब्रिगेड की गाड़ी घटनास्थल तक नहीं पहुंच सकी। इसके बाद जेसीबी की मदद से मलबा हटाने का अभियान शुरू किया गया। पुलिस और फायर ब्रिगेड के करीब 16 कर्मचारियों ने स्थानीय लोगों की मदद से मलबे में दबे लोगों की तलाश की। अभियान के दौरान सात लोगों को बाहर निकाला गया। सभी को उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज फतेहपुर भेजा गया, जहां चिकित्सकों ने चार को मृत घोषित कर दिया। फतेहपुर के पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक ने बताया कि सात लोगों को मलबे से निकाला गया है। इनमें चार की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि एक व्यक्ति 90 प्रतिशत से अधिक झुलसा है और उसकी हालत बेहद गंभीर है। उसे वेंटिलेटर पर रखा गया है। दो अन्य घायलों की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। एसपी ने बताया कि घटनास्थल पर मौजूद लोगों से पूछताछ में एक सिलेंडर फटने की बात सामने आई है। मौके पर चार गैस सिलेंडर मिले हैं, जिनमें दो के फटने की बात कही जा रही है। हालांकि, विस्फोट का वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं है। फोरेंसिक और फायर विभाग की टीमें मौके पर जांच कर रही हैं। उन्होंने बताया कि धमाके की वजह से मुख्य मकान की दो मंजिलें ढह गईं। आसपास के कुछ मकानों की बीम को भी नुकसान पहुंचा है, हालांकि वहां कोई जनहानि नहीं हुई है। राहत एवं बचाव कार्य के लिए एसडीआरएफ को भी बुलाया गया है। पुलिस के अनुसार, रात में मलबा हटाने के लिए पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था की जा रही है। बिजली विभाग और स्थानीय स्तर पर लाइट की व्यवस्था की गई है, जबकि जरूरत पड़ने पर बड़ी लाइटें भी मंगाई जाएंगी। मलबे के भीतर किसी अन्य व्यक्ति के दबे होने की सूचना मिलने पर बचाव अभियान जारी रखा जाएगा। हादसे के बाद गृहस्वामी सुरेश उर्फ धुन्नर गुप्ता की भी सदमे से हालत बिगड़ गई। उन्हें भी चिकित्सकीय सहायता दी गई है। पुलिस और प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर मौजूद हैं। विस्फोट क्यों और किन परिस्थितियों में हुआ, इसकी जांच जारी है।
भारत और साइप्रस ने कनेक्टिविटी, ट्रांसपोर्ट और समुद्री क्षेत्र को मजबूत करने के तरीकों पर की चर्चा

निकोसिया। भारत और साइप्रस ने कनेक्टिविटी, परिवहन और समुद्री क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की। निकोसिया स्थित भारतीय उच्चायोग ने सोमवार को बताया कि उच्चायुक्त मनीष और साइप्रस की परिवहन, संचार एवं कार्य मंत्री एवी त्सोलाकी के बीच बैठक हुई। भारतीय उच्चायोग ने एक्स पर कहा, “उच्चायुक्त मनीष ने साइप्रस गणराज्य की परिवहन, संचार और कार्य मंत्री सुश्री एवी त्सोलाकी से मुलाकात की और कनेक्टिविटी, परिवहन और समुद्री क्षेत्र में भारत-साइप्रस सहयोग को और मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की।” उच्चायोग ने कहा, “बातचीत में इन क्षेत्रों में गहरे संबंधों और व्यावहारिक सहयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया, जो दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में बढ़ती गति में योगदान दे रहा है।” 18 सितंबर को उच्चायुक्त मनीष ने विदेश मंत्रालय में उप राजनीतिक निदेशक पॉली इओनौ, राष्ट्रपति के राजनयिक कार्यालय के अधिकारी डेमेट्रिस असोस और एशिया एवं ओशिनिया विभाग के प्रमुख जॉर्जियोस जॉर्जियो के साथ अपनी बैठक के दौरान द्विपक्षीय एजेंडे की व्यापक समीक्षा की थी। भारतीय उच्चायोग ने एक्स पर कहा, “उच्चायुक्त मनीष ने विदेश मंत्रालय में उप राजनीतिक निदेशक सुश्री पॉली इओनौ, राष्ट्रपति के राजनयिक कार्यालय के अधिकारी डेमेट्रिस असोस और एशिया एवं ओशिनिया विभाग के प्रमुख जॉर्जियोस जॉर्जियो से मुलाकात की।” उच्चायोग ने कहा, “उच्चायुक्त ने अधिकारियों को उनकी नई नियुक्तियों पर बधाई दी। चर्चा में भारत-साइप्रस द्विपक्षीय एजेंडे और सहयोग के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में प्रगति की व्यापक समीक्षा शामिल थी। दोनों पक्षों ने निकट समन्वय बनाए रखने और भारत और साइप्रस के नेताओं के दृष्टिकोण को ठोस परिणामों में बदलने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की, जो द्विपक्षीय साझेदारी को और मजबूत करे।” मई में साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स ने भारत का दौरा किया था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक की थी, जिसके दौरान दोनों नेताओं ने दोनों देशों के बीच संबंधों को रणनीतिक स्तर तक बढ़ाने पर सहमति जताई थी, जिसमें रक्षा और परिवहन कनेक्टिविटी में गहरा सहयोग शामिल है।
विथ्या रामराज: ड्राइवर पिता ने सुने समाज के ताने, आर्थिक तंगी से जूझकर बेटी ने किया देश का नाम रोशन

नागोया। एशियन गेम्स 2026 में सोमवार को विथ्या रामराज ने महिलाओं की 400 मीटर हर्डल्स स्पर्धा के फाइनल में 54.75 सेकंड के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता। इसी के साथ विथ्या ने दिग्गज भारतीय एथलीट पीटी उषा के 42 साल पुराने नेशनल रिकॉर्ड को तोड़ दिया। विथ्या ने यह मेडल जुड़वां बहन को समर्पित करते हुए सरकार और संगठनों का भी आभार जताया, जिन्होंने उनके सफर में मदद की। इसके साथ ही उन्होंने पिता से मिले समर्थन को भी याद किया, जिन्होंने समाज के ताने सुनते हुए और आर्थिक संकट से जूझकर देश का नाम रोशन किया। सोमवार को ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद विथ्या ने ‘आईएएनएस’ से कहा, “मैं यह मेडल अपनी जुड़वां बहन को समर्पित करती हूं, क्योंकि वह हमेशा मेरे साथ रहती हैं। वह हमेशा मेरा साथ देती हैं। जब भी मैं उससे कुछ मांगती हूं, वह मुझे भेज देती हैं। मैं खुश हूं।” विथ्या ने टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टॉप्स), अपनी राज्य सरकार, जेएसडब्ल्यू और इंडियन रेलवे (जहां वह काम करती हैं) से मिले सहयोग को याद करते हुए कहा, “टॉप्स मुझे बहुत सपोर्ट कर रहा है, और मेरी राज्य सरकार भी मुझे बहुत सपोर्ट कर रही है। जेएसडब्ल्यू और इंडियन रेलवे भी मुझे बहुत सपोर्ट कर रहे हैं। मैं इंडियन रेलवे में काम करती हूं। इसी वजह से मैं यहां आ पाई और अब मैं बहुत खुश हूं। आजकल मुझे किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है, इसलिए मैं खुश हूं।” विथ्या को यह सफलता परिवार के कई वर्षों के संघर्ष के बाद मिली है। विथ्या ने चुनौतियों को याद करते हुए बताया कि उनका परिवार किराए के घर में रहता था और पिता को अपनी तीन बेटियों के भविष्य को लेकर लोगों के सवालों का सामना करना पड़ता था। उन्होंने कहा, “पहले हम किराए के घर में रहते थे। जब हम बड़े हो रहे थे, तो लोग कहते थे, ‘बच्चे बड़े हो रहे हैं, अब तुम क्या करोगे?’ यहां तक कि मेरी दादी और पिता से भी कहा जाता था, ‘तुम्हारी तीन बेटियां हैं, उनका क्या करोगे?’” विथ्या के पिता ड्राइवर थे, जो बमुश्किल महीनेभर में 15,000 रुपये कमा पाते। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने अपनी बेटियों का साथ देना जारी रखा। विथ्या ने बताया, “मेरे पिता ड्राइवर हैं। वह लगभग 15,000 रुपये कमाते थे, इसलिए हमारे पास ज्यादा पैसे नहीं होते थे। साल 2009 में भी जूतों की कीमत 2,000 से 5,000 रुपये तक होती थी। फिर भी उन्होंने हम पर वो पैसे खर्च किए। जब मैं और मेरी जुड़वां बहन एक साथ दो खेल खेल रही थीं, तो हर चीज, ड्रेस, जूते और उपकरण पर बहुत खर्च आता था, लेकिन उन्होंने इसका इंतजाम किया। इसीलिए हम आज यहां हैं।” 28 वर्षीय विथ्या ने अपने कोच को भी इस उपलब्धि का श्रेय दिया, जिन्हें विश्वास था कि विथ्या 55 सेकंड का बैरियर तोड़ सकती हैं, जबकि खुद विथ्या को इसका भरोसा नहीं था। विथ्या ने कहा, “नहीं, मुझे विश्वास नहीं था। सिर्फ मेरे कोच को विश्वास था। मुझे अपने कोच पर भरोसा है, इसलिए वह जो भी कहते हैं, मैं करती हूं। मैं इतने वर्षों से वही कर रही हूं, जो उन्होंने मुझे करने के लिए कहा है। बस ऐसा ही हुआ।” विथ्या ने 2023 में हांगझोऊ में इसी इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। वह नागोया के ट्रैक से खुश हैं। उन्होंने कहा, “यह ट्रैक बहुत ही बढ़िया है। मैंने सिंथेट और मोंडो ट्रैक देखे हैं, लेकिन यह ट्रैक थोड़ा अलग है। मुझे लगता है कि यह एक स्पीड ट्रैक है, इसलिए मैं इस ट्रैक से बहुत खुश हूं।” इस ब्रॉन्ज मेडल के साथ विथ्या ने इस इवेंट में लगातार दूसरा एशियाई गेम्स मेडल जीता और एक यादगार प्रदर्शन किया। इसी संस्करण में विथ्या ने मिक्स्ड 4×400 मीटर रिले टीम इवेंट में सिल्वर दिलाया था।
सैनिकों के सम्मान में दौड़ेगा अहमदाबाद, मैराथन को मिला हर्ष संघवी का समर्थन

नई दिल्ली। गुजरात के उप मुख्यमंत्री और खेल मंत्री हर्ष संघवी ने 10वें अदाणी अहमदाबाद मैराथन को अपना समर्थन दिया है, जिसका आयोजन 29 नवंबर को होगा। मैराथन से पहले अदाणी स्पोर्ट्सलाइन के चीफ बिजनेस ऑफिसर संजय अदेसारा ने हर्ष संघवी को आधिकारिक जर्सी भेंट की। 10वां एडिशन मैराथन की ‘रन फॉर आर सोल्जर’ पहल को जारी रखेगा, जिसने पिछले एक दशक में भारत के सैनिकों के साहस, सेवा और बलिदान का सम्मान करने के लिए नागरिकों और सशस्त्र बलों के जवानों को एक साथ लाया है। यह खास एडिशन ऐसे समय में हो रहा है, जब अहमदाबाद कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की मेजबानी की तैयारी करने जा रहा है। उप मुख्यमंत्री संघवी ने कहा, “अदाणी अहमदाबाद मैराथन का अपना 10वां एडिशन पूरा करना अहमदाबाद के लिए गर्व का पल है और यह दिखाता है कि खेल कैसे लोगों को एक बड़े मकसद के लिए एकजुट कर सकता है। एक दशक से, मैराथन ने ‘रन फॉर आर सोल्जर’ की भावना को आगे बढ़ाया है, जिससे हजारों नागरिकों को हमारे सशस्त्र बलों के साहस, सेवा और बलिदान के सम्मान में दौड़ने का मौका मिला है। 1947 की ऐतिहासिक लड़ाइयों से लेकर ऑपरेशन सिंदूर के दृढ़ संकल्प तक, हमारे सैनिक लगातार हमारे देश की अटूट ढाल बनकर खड़े रहे हैं। यह देखकर अच्छा लगता है कि सशस्त्र बलों के जवान खुद इस यात्रा का हिस्सा बन रहे हैं और शहर साल-दर-साल उनके सम्मान में एकजुट हो रहा है।” उन्होंने कहा, “जैसे-जैसे अहमदाबाद कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 के लिए तैयारी कर रहा है और ग्लोबल स्पोर्ट्स के नक्शे पर अपनी जगह मजबूत कर रहा है। ऐसे प्रयास खेल के आस-पास फिटनेस, भागीदारी और समुदाय की मजबूत संस्कृति बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। मैं इस अहम पड़ाव को पूरा करने और अहमदाबाद के बढ़ते स्पोर्ट्स इकोसिस्टम में सक्रिय रूप से योगदान देने के लिए अदाणी स्पोर्ट्सलाइन को बधाई देता हूं। 10वें एडिशन की जर्सी इस दशक भर की यात्रा और उस भावना का सही प्रतीक है जो शहर को एक साथ लाती रहती है।” अदाणी स्पोर्ट्सलाइन के चीफ बिजनेस ऑफिसर संजय अदेसारा ने कहा, “अदाणी अहमदाबाद मैराथन के 10वें संस्करण के मौके पर हम गुजरात के उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी के सहयोग के लिए आभारी हैं। उन्हें आधिकारिक जर्सी भेंट करना हमारे लिए गर्व का पल है, क्योंकि हम अपनी सशस्त्र बलों के सम्मान में दौड़ने के एक दशक का जश्न मना रहे हैं। जैसे-जैसे अहमदाबाद कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की तैयारी कर रहा है, हम शहर की स्पोर्ट्स यात्रा में योगदान देने के लिए उत्सुक हैं।” इस मैराथन की शुरुआत नवंबर 2017 में हुई थी और नवंबर 2021 में इसका पांचवां संस्करण आयोजित किया गया। मैराथन की श्रेणी में फुल मैराथन, हाफ मैराथन, 10 किमी दौड़ और 5 किलोमीटर दौड़ शामिल हैं। पहले दो संस्करणों में लगभग 20,000 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था, जबकि तीसरे और चौथे संस्करण में 17,000 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए। साल 2022 में अहमदाबाद मैराथन को ‘ग्लोबल मैराथन इवेंट लिस्ट- एम्स वर्ल्ड रनिंग’ में शामिल किया गया। यह इस ग्लोबल लिस्ट में शामिल होने वाली अहमदाबाद की एकमात्र दौड़ थी। साल 2025 में सशस्त्र सेनाओं के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए रन फॉर आर सोल्जर इवेंट में 24,000 से ज्यादा प्रतिभागी शामिल हुए थे। पिछले साल इस दौड़ में 3,000 से ज्यादा रक्षाकर्मियों ने हिस्सा लिया था। इससे होने वाली कमाई का एक बड़ा हिस्सा सशस्त्र सेनाओं के कल्याण के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
दिल्ली के बेला एस्टेट में अधिकांश नाम हटने के दावों पर चुनाव आयोग बोला, कोई पात्र मतदाता सूची से बाहर नहीं होगा

नई दिल्ली। दिल्ली के चांदनी चौक विधानसभा क्षेत्र के बेला एस्टेट में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में नहीं होने के मामले में निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) ने स्थिति स्पष्ट की है। 10 सितंबर को जारी प्रेस नोट में कहा गया कि जिन पात्र मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल नहीं हैं, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह स्पष्टीकरण उन मीडिया रिपोर्टों के बाद जारी किया गया था, जिनमें दावा किया गया था कि जेजे बेला एस्टेट, विजय घाट के 729 मतदाताओं में से एक को छोड़कर बाकी सभी के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) ने मतदाताओं के रजिस्टर्ड पते पर जाकर एन्यूमरेशन फॉर्म बांटे और बाद में उन्हें एकत्र किया। बेला एस्टेट से संबंधित पुराने पोलिंग स्टेशन नंबर 33 की मतदाता सूची की जांच में सामने आया कि ज्यादातर मतदाताओं के पते के स्थान पर “एग्रीकल्चर” दर्ज था, जबकि कुछ मतदाताओं के रिकॉर्ड में ही मकान नंबर दर्ज थे। प्रेस नोट के मुताबिक, यह इलाका यमुना नदी के पश्चिमी किनारे पर स्थित है। यहां रहने वाले बड़ी संख्या में मतदाता यमुना किनारे और आसपास के क्षेत्र में कृषि गतिविधियों से जुड़े हुए थे। चुनाव अधिकारी ने बताया कि इस इलाके में कृषि गतिविधियां और खेती 2021 में बंद हो गई थी। इसके बाद 2022-23 में यहां मौजूद रिहायशी ढांचों को भी गिरा दिया गया था। इस कारण पुरानी मतदाता सूची तैयार किए जाने के बाद से इलाके की भौतिक और आवासीय स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। एसआईआर के दिशा-निर्देशों के तहत बीएलओ को मतदाताओं के रजिस्टर्ड पते पर घर-घर जाकर एन्यूमरेशन फॉर्म देना था, हालांकि रिहायशी ढांचे गिराए जाने के कारण संबंधित मतदाता मतदाता सूची में दर्ज पते पर नहीं रह रहे थे। निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक, इससे जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 20 (7) और चुनावी पंजीकरण से जुड़े निर्देशों के तहत उनकी “सामान्य निवासी” की स्थिति बदल गई। इसी आधार पर बीएलओ ने इन मतदाताओं को एएसडीडी सूची में रखा। हालांकि प्रेस नोट में स्पष्ट किया गया है कि इसका मतलब यह नहीं है कि कोई पात्र मतदाता अपना नाम अब मतदाता सूची में नहीं जुड़वा सकता। चुनाव आयोग के प्रावधानों के मुताबिक, अगर किसी मतदाता का नाम मतदाता सूची में नहीं है और वह जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 19 तथा अन्य संबंधित नियमों के तहत मतदाता के रूप में पंजीकरण की पात्रता पूरी करता है, तो वह जरूरी दस्तावेजों के साथ फॉर्म-6 जमा कर अपना नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकता है। प्रेस नोट में बताया गया कि दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि 31 अगस्त से 30 सितंबर 2026 तक है। इस दौरान आवेदन करने वाले पात्र मतदाताओं के दावों पर विचार किया जाएगा। अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर 2026 को प्रकाशित की जानी है। निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, नए मतदाता के पंजीकरण के लिए फॉर्म-6, प्रवासी भारतीय मतदाता के लिए फॉर्म-6ए, किसी प्रस्तावित नाम पर आपत्ति या मौजूदा नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 और पता बदलने, विवरण में सुधार, बिना सुधार के नया ईपीआईसी लेने या दिव्यांग मतदाता के रूप में चिन्हित कराने के लिए फॉर्म-8 का इस्तेमाल किया जा सकता है। इन फॉर्म को निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी, सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ), बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) या निर्धारित मतदान केंद्रों पर व्यक्तिगत रूप से जमा किया जा सकता है। मतदाता ऑनलाइन भी आवेदन कर सकते हैं। निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि चुनाव आयोग पारदर्शी, भागीदारीपूर्ण और समावेशी मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया के लिए प्रतिबद्ध है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रहे और किसी अपात्र व्यक्ति का नाम इसमें शामिल न हो।
एक्मे बुलेवार्ड हाउसिंग घोटाला: सीबीआई ने पांच पूर्व प्रमोटरों और निदेशकों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट

मुंबई। घर खरीदारों से बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी के मामले की जांच के बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने एक्मे रियल्टीज प्राइवेट लिमिटेड और उसकी होल्डिंग कंपनी एक्मे हाउसिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के पांच पूर्व प्रमोटरों और निदेशकों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है। यह मामला मुंबई के जोगेश्वरी (पूर्व) में सर्वोदय नगर, गांव माजस में स्थित हाउसिंग प्रोजेक्ट ‘एक्मे बुलेवार्ड’ से जुड़ी धोखाधड़ी की गतिविधियों से संबंधित है। चार्जशीट मुंबई की एस्प्लेनेड कोर्ट की तीसरी अदालत में एसीजेएम के समक्ष दाखिल की गई है। सीबीआई की जांच से पता चला है कि आरोपी बिल्डर कंपनी और उसके प्रमोटरों/डायरेक्टरों ने कथित तौर पर झूठे वादों और धोखाधड़ी वाली बातों से घर खरीदारों को बहलाया-फुसलाया और गैरकानूनी व धोखेपूर्ण तरीकों से आर्थिक लाभ उठाया। सीबीआई की जांच में ठोस सबूत मिले हैं और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की संबंधित धाराओं के तहत सक्षम अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई है। ये धाराएं आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और बेईमानी से चोरी की संपत्ति प्राप्त करने से संबंधित हैं। सीबीआई अभी देशभर में विभिन्न बिल्डर कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ 32 अन्य मामलों की जांच कर रही है। ये मामले माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर दर्ज किए गए हैं और इनमें घर खरीदारों से जुड़ी कथित धोखाधड़ी और फंड के गलत इस्तेमाल (डायवर्जन) के आरोप शामिल हैं। सीबीआई ने पहले रुद्र बिल्डवेल कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड, ड्रीम प्रोकॉन प्राइवेट लिमिटेड, जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड, एवीजे डेवलपर्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड, सीएचडी डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, सीक्वेल बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड, लॉजिक्स सिटी डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, मंजू जे होम्स इंडिया लिमिटेड, शुभकामना बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड, नाइनक्स डेवलपर्स लिमिटेड, डिसेंट बिल्डवेल प्राइवेट लिमिटेड, रुद्र बिल्डवेल प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, इथाका एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड, एलजीसीएल अर्बन होम्स (इंडिया) एलएलपी, साहा इंफ्राटेक प्राइवेट, लिमिटेड-मेसर्स एमकेएचएस हाउसिंग एलएलपी, ओजोन अर्बाना इंफ्रा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स अर्थकॉन यूनिवर्सल इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड और अजनारा इंडिया लिमिटेड के साथ-साथ कुछ बैंकों और वित्तीय निवेशकों के अधिकारियों के खिलाफ भी 20 अनचाहा एंजेल की जगहें हैं। इसी के साथ सीबीआई आर्थिक अपराधों, भ्रष्टाचार और जनता के साथ धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करने के अपने संकल्प को दोहराती है, खासकर उन मामलों में जो आम नागरिकों और घर खरीदारों के हितों पर बुरा असर डालते हैं।
टूरिज्म एक्सपो जापान 2026 में तमिलनाडु ने पेश की सांस्कृतिक और बौद्ध विरासत की झलक, पर्यटकों को लुभाने की तैयारी

टोक्यो। टोक्यो में आयोजित चार दिवसीय टूरिज्म एक्सपो जापान 2026 में तमिलनाडु ने अपनी सांस्कृतिक ताकत का दमदार प्रदर्शन किया। 24 से 27 सितंबर तक चले इस वैश्विक मेले में राज्य ने अपने प्राचीन मंदिरों, बौद्ध परंपरा से जुड़े स्थलों, विविध भू-दृश्यों, खान-पान, त्योहारों और नए पर्यटन अनुभवों को जापानी पर्यटन कारोबारियों के सामने रखा। तमिलनाडु के पैवेलियन का उद्घाटन जापान में भारत की राजदूत नगमा मोहम्मद मल्लिक ने किया। इस दौरान तमिलनाडु के पर्यटन विभाग की प्रधान सचिव डॉ. एस. स्वर्णा, केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय के अपर सचिव एवं महानिदेशक सुमन बिल्ला और राजस्थान की पर्यटन सचिव सुचि त्यागी भी मौजूद रहीं। समारोह में डॉ. स्वर्णा ने कहा कि जापान और तमिलनाडु बौद्ध विरासत की साझा डोर से बंधे हैं और यह एक्सपो जापानी सैलानियों को इस विरासत को करीब से देखने का न्योता है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की पहचान सिर्फ उसके ऐतिहासिक स्मारक नहीं, बल्कि हजारों साल पुरानी संगम साहित्य परंपरा भी है, जिसमें कुरिंजी (पर्वतीय), मुल्लई (वन), मरुथम (खेत), नेइथल (समुद्र तट) और पलाई (मरुस्थल) जैसे पांच पारिस्थितिक क्षेत्रों का उल्लेख है। यही विविधता तमिलनाडु को पहाड़ों की ट्रेकिंग से लेकर तटीय जीवन तक का अनूठा अनुभव बनाती है। उन्होंने बताया कि टोक्यो में जेएटीए और ओसाका में रोड-शो के जरिए तमिलनाडु जापानी पर्यटन उद्योग के साथ अपने रिश्ते मजबूत कर रहा है, जिसमें पर्यावरण और संस्कृति के अनुकूल टिकाऊ पर्यटन पर जोर है। इसी कड़ी में राज्य ने ‘डिस्कवर तमिलनाडु- इंटरनेशनल एडिशन 2026-27’ के लिए पंजीकरण शुरू किया है। यह विशेष एफएएम यात्रा 12 से 20 जनवरी 2027 तक पोंगल पर्व के दौरान आयोजित होगी, जिसमें दुनियाभर से 10 ट्रैवल इन्फ्लुएंसर, पत्रकार, टूर ऑपरेटर और एजेंटों को चुना जाएगा ताकि वे तमिलनाडु को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत कर सकें। टोक्यो एक्सपो में तमिलनाडु पर्यटन विभाग ने जापानी टूर ऑपरेटरों और निवेशकों के साथ जापान से पर्यटकों की आवक बढ़ाने पर गहन मंथन किया। राज्य ने जापानी उद्योग जगत के सामने हेरिटेज होटल, ईको-टूरिज्म, एडवेंचर और अनुभव आधारित पर्यटन में निवेश और साझेदारी के बड़े अवसर रखे। पर्यटकों ने तमिलनाडु की विरासत, प्राकृतिक और रोमांचक यात्राओं का जायजा लिया, जिसने वैश्विक स्तर पर राज्य की अपील को और मजबूत किया। दक्षिण भारत में बौद्ध धर्म के इतिहास में तमिलनाडु की भूमिका बेहद अहम रही है। कांचीपुरम, नागपट्टिनम और पूमपुहार जैसे प्राचीन बंदरगाह नगर कभी समुद्री और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के केंद्र थे, जहां से बौद्ध धर्म एशिया के कई देशों तक पहुंचा। कांचीपुरम से जुड़े महान बौद्ध भिक्षु बोधिधर्म की चीन यात्रा आज भी पूर्वी एशिया की बौद्ध परंपरा में सम्मान के साथ याद की जाती है। तमिलनाडु सात यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों का घर है। डिस्कवर तमिलनाडु एफएएम ट्रिप (12 से 20 जनवरी 2027) पोंगल के समय पर आयोजित की गई है ताकि प्रतिभागी त्योहार का प्रत्यक्ष अनुभव कर सकें।
यूएनएससी में सुधार के लिए आईबीएसए का अल्टीमेटम, भारत-ब्राजील को स्थायी सीट देने की मांग

नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी दस्तावेज के अनुसार 14वें भारत-ब्राजील-दक्षिण अफ्रीका (आईबीएसए) त्रिपक्षीय मंत्रिस्तरीय आयोग की बैठक न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र यूएनजीए81 के मौके पर हुई। बैठक में दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्री रोनाल्ड लामोला, भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और ब्राजील के विदेश मंत्री मौरो विएरा ने हिस्सा लिया। बैठक का मुख्य फोकस 4 बड़े मुद्दों पर रहा। यूएनएससी सुधार पर सख्त रुख: तीनों देशों ने सुरक्षा परिषद सुधार पर अंतर-सरकारी वार्ता (आईजीएन) में लगातार गतिरोध पर गहरी चिंता जताई। मंत्रियों ने कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक वास्तविकता के हिसाब से सुरक्षा परिषद को बदलना जरूरी है। इसके लिए यूएनजीए81 के दौरान ही औपचारिक, पाठ-आधारित (टेक्स्ट आधारित) वार्ता एक तय समय-सीमा के अंदर शुरू करने की मांग की। साथ ही कहा कि सुरक्षा परिषद की निष्क्रियता के कारण संयुक्त राष्ट्र के कामकाज को पंगु नहीं होने देना चाहिए, इसलिए महासभा के अधिकारों को मजबूत किया जाए। अफ्रीका को सुरक्षा परिषद में स्थायी प्रतिनिधित्व और भारत-ब्राजील की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का भी खुला समर्थन किया गया। क्रिटिकल मिनरल्स पर भारत की पहल को समर्थन: आईबीएसए ने जी20 के तहत भारत द्वारा प्रस्तावित महत्वपूर्ण खनिज परिपत्र पहल का औपचारिक समर्थन किया। इसका मकसद रीसाइक्लिंग, अर्बन माइनिंग और सेकंड-लाइफ बैटरी जैसी तकनीकों को बढ़ावा देना है ताकि ऊर्जा ट्रांजिशन और सप्लाई चेन मजबूत हो। मंत्रियों ने माना कि विकासशील खनिज उत्पादक देशों में निवेश की कमी और लोकल प्रोसेसिंग न होने की बड़ी चुनौती है, इसलिए खनिज संपन्न देशों में ही वैल्यू रिटेंशन बढ़ाने पर जोर दिया गया। आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस: मंत्रियों ने अप्रैल 2025 में पहलगाम, जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले में नागरिकों की जघन्य हत्या की कड़ी निंदा की। दोहरे मापदंड को खारिज करते हुए अल-कायदा, ISIS/दाइश, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद समेत सभी यूएन-सूचीबद्ध आतंकी संगठनों और प्रॉक्सी समूहों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की मांग की। साथ ही अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन (सीसीआईटी) को जल्द अपनाने का आह्वान किया। कुल मिलाकर यह बैठक ग्लोबल साउथ की एकजुटता, बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार और साउथ-साउथ सहयोग को नई गति देने के संकल्प के रूप में देखी जा रही है। बहुपक्षवाद और साउथ-साउथ सहयोग को मजबूती: तीनों मंत्रियों ने नियम आधारित बहुपक्षीय व्यवस्था, डब्ल्यूटीओ सुधार, सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) और जलवायु न्याय पर जोर दिया। आईबीएसए फंड के जरिए विकासशील देशों में गरीबी उन्मूलन और क्षमता निर्माण की परियोजनाओं को जारी रखने पर सहमति बनी। साथ ही ग्लोबल साउथ की आवाज को जी20, यूएन और अन्य वैश्विक मंचों पर और मजबूत करने का संकल्प लिया गया।
राज्यसभा चुनाव में भी भाजपा को हराएंगे, तीसरा प्रत्याशी भी उतारेगी सपा: मनोज पारस

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के विधायक मनोज पारस ने राज्यसभा चुनाव को लेकर हुई पार्टी की बैठक, पीडीए को मजबूत करने, चंद्रशेखर आजाद को लेकर मायावती की टिप्पणी, सपा पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान और इंडिया गठबंधन की प्रस्तावित बैठक पर टिप्पणी की। इस दौरान उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राज्यसभा चुनाव में भी पीडीए को मजबूत करने पर पार्टी का जोर रहेगा। राज्यसभा चुनाव को लेकर हुई बैठक के बारे में मनोज पारस ने कहा कि पीडीए को मजबूत करने को लेकर चर्चा हुई। इसका असर राज्यसभा चुनाव में भी देखने को मिलेगा। समाजवादी पार्टी पीडीए के माध्यम से भाजपा को हराने की दिशा में आगे बढ़ रही है। लोकसभा चुनाव में भाजपा को हराया गया और अब राज्यसभा चुनाव के साथ आने वाले 2027 के विधानसभा चुनाव में भी पीडीए के माध्यम से भाजपा को हराने का लक्ष्य है। उन्होंने दावा किया कि आगामी चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनेगी। राज्यसभा प्रत्याशियों के नामों को लेकर पूछे गए सवाल पर पारस ने कहा कि बैठक में इस विषय पर चर्चा हुई है। पार्टी तीसरा प्रत्याशी भी उतारने की तैयारी में है। अन्य नाम को लेकर चर्चा चल रही है। बसपा प्रमुख मायावती द्वारा सांसद चंद्रशेखर आजाद को लेकर की गई आलोचना पर मनोज पारस ने कहा कि वह मायावती के बयान पर टिप्पणी नहीं करना चाहते, लेकिन उन्होंने चंद्रशेखर आजाद पर युवाओं को भड़काने का आरोप लगाया। पारस ने कहा कि कई घटनाओं में पहले से योजना बनाकर युवाओं को वहां पहुंचाया जाता है और इसके बाद आक्रोशित युवा बैरिकेडिंग तोड़ने जैसी गतिविधियों में शामिल हो जाते हैं। इसके बाद युवाओं पर मुकदमे दर्ज होते हैं और इन मुकदमों का असर उनके भविष्य पर पड़ता है। मेरठ और इलाहाबाद में हुए मुकदमों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जिन युवाओं पर मामले दर्ज हुए, उन्हें बाद में किसी तरह की मदद नहीं मिली। इस तरह की गतिविधियों से दलित समाज के युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे किसी के धार्मिक प्रचार, सोशल मीडिया रील या भीड़ के प्रभाव में आकर ऐसा कोई कदम न उठाएं, जिससे उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हो जाए। उन्होंने कहा कि मुकदमा दर्ज होने के बाद इसका असर सरकारी या निजी नौकरी के चयन और वेरिफिकेशन जैसी प्रक्रियाओं पर पड़ सकता है। किसी व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा होने की स्थिति में उसके भविष्य पर असर पड़ सकता है और बाद में परिवार को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पारस ने खास तौर पर दलित, पिछड़े और मुस्लिम समाज के युवाओं से अपील की कि वे दिखावे, रील और भीड़ के पीछे चलकर अपना भविष्य खराब न करें। मुकदमा दर्ज होने के बाद उन्हें बचाने कोई नहीं आएगा। इंडिया गठबंधन की प्रस्तावित बैठक में समाजवादी पार्टी की भागीदारी को लेकर पारस ने कहा कि बैठक में कौन जाएगा, किसे अधिकृत किया जाएगा या राष्ट्रीय अध्यक्ष खुद जाएंगे, इसका फैसला पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का अधिकार है। इस संबंध में वह कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते, क्योंकि यह निर्णय पार्टी नेतृत्व को लेना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा समाजवादी पार्टी के नेताओं को ‘गिरगिट की तरह रंग बदलने वाला’ बताए जाने के सवाल पर मनोज पारस ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि कौन गिरगिट की तरह रंग बदलता है, यह जनता अच्छी तरह देख रही है। जनता के सामने सब कुछ स्पष्ट है और मीडिया भी इसे दिखा रहा है। इसलिए यह बताने की जरूरत नहीं है कि गिरगिट की तरह रंग कौन बदलता है।