मध्य प्रदेश: सतना प्रशासन मंदाकिनी नदी के किनारे बने निर्माण कार्यों और अतिक्रमण की जांच करेगा

सतना। मध्य प्रदेश के सतना जिले के प्रशासन ने चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के किनारे हुए निर्माण कार्यों और अतिक्रमण की जांच के लिए पांच सदस्यों की एक टीम बनाई है। यह कदम पिछले हफ्ते नदी में आई बाढ़ के बाद उठाया गया है। कलेक्टर सतीश कुमार एस. ने बताया कि मझगवां के सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट की अगुवाई वाली टीम उन ढांचों की पहचान करेगी जो नदी के प्राकृतिक बहाव में रुकावट डाल रहे हैं और मंदाकिनी नदी के हाई फ्लड लेवल (एचएफएल) का भी आकलन करेगी। उन्होंने कहा कि यह जांच सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की गाइडलाइंस के अनुसार की जाएगी। 28-29 अगस्त की रात आई बाढ़ के दौरान आरोग्यधाम के पास मंदाकिनी नदी का जलस्तर 145.76 मीटर तक पहुंच गया था, जबकि इसका तय एचएफएल 139.60 मीटर है। बाढ़ में हनुमानधारा पुल भी बह गया था। उन्होंने कहा, “टीम उन निर्माणों और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर की पहचान करेगी जो नदी के प्राकृतिक बहाव में रुकावट डाल रहे हैं। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।” इस टीम में चीफ म्युनिसिपल ऑफिसर, नायब तहसीलदार, पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट और वॉटर रिसोर्स डिपार्टमेंट के सब-डिविजनल ऑफिसर और म्युनिसिपल काउंसिल के सब-इंजीनियर शामिल हैं। जांच के दौरान नदी के किनारे गैर-कानूनी प्लॉटिंग और सरकारी व प्राइवेट निर्माण कार्यों की जांच की जाएगी। प्रशासन पुरानी और ढांचागत रूप से कमजोर इमारतों की भी पहचान करेगा और यह देखेगा कि क्या वे तय नियमों का पालन करती हैं। आधिकारिक बयान के अनुसार, नदी के किनारे वाले इलाकों में नए निर्माण और दोबारा बनाई गई इमारतों की भी सुरक्षा के नजरिए से जांच की जाएगी। कलेक्टर ने कहा, “इस कवायद का मकसद बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करना और भविष्य में नदी का जलस्तर बढ़ने पर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।” यह कदम शहरी विकास और आवास मंत्री तथा जिले के प्रभारी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के उस बयान के कुछ दिनों बाद उठाया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि मंदाकिनी नदी के बहाव में बाधा डालने वाले सरकारी और प्राइवेट अतिक्रमण हटाए जाएंगे। उम्मीद है कि इस जांच से प्रशासन को नियमों के उल्लंघन की पहचान करने और नदी के बहाव में रुकावट को रोकने के लिए आगे की कार्रवाई तय करने में मदद मिलेगी।

‘हैवान’ रिव्यू: अक्षय कुमार की खौफनाक मौजूदगी और सैफ अली खान का संयम बनाता है फिल्म को दमदार

निर्देशक: प्रियदर्शन, कलाकार: सैफ अली खान, अक्षय कुमार, बोमन ईरानी, श्रिया पिलगांवकर, सैयामी खेर, मोहनलाल, असरानी, शारिब हाशमी, पहल चौधरी, अवधि: 2 घंटे 44 मिनट, रेटिंग: 4/5 फिल्म ‘हैवान’ की सबसे बड़ी ताकत इसके दो ऐसे कलाकार हैं, जो कहानी में एक-दूसरे के बिल्कुल उलट खड़े नजर आते हैं। एक तरफ अक्षय कुमार का खतरनाक और डर पैदा करने वाला किरदार है, तो दूसरी तरफ सैफ अली खान का शांत और समझदार अंदाज। निर्देशक प्रियदर्शन की यह साइकोलॉजिकल एक्शन क्राइम थ्रिलर 18 साल बाद अक्षय कुमार और सैफ अली खान को एक साथ लेकर आती है। कहानी मूल रूप से एक खतरनाक अपराधी और दृष्टिबाधित व्यक्ति के बीच चलने वाली ऐसी जंग है, जिसमें ताकत के साथ-साथ दिमाग, सूझबूझ और हिम्मत भी मायने रखती है। फिल्म का पहला बड़ा टॉकिंग पॉइंट अक्षय कुमार हैं, जिन्होंने अब तक की अपनी सबसे डार्क और सबसे खतरनाक परफॉर्मेंस में से एक दी है। वह विलेन के किरदार को ऊंची आवाज और जरूरत से ज्यादा गुस्से के साथ पेश नहीं करते। इसके बजाय उनके किरदार में एक अजीब सी शांति है, जो उसे और ज्यादा डरावना बनाती है। उनके चेहरे के एक्सप्रेशन, बॉडी लैंग्वेज और डायलॉग बोलने का अंदाज देखकर परशुराम की अगली चाल का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। उनके अभिनय में मौजूद यह शांत खौफ फिल्म में एक टेंशन का एलिमेंट लगातार बनाए रखता है। वहीं सैफ अली खान श्याम के किरदार में बेहद प्रभावी दिख रहे हैं। दृष्टिबाधित श्याम अचानक एक बेहद खतरनाक स्थिति में फंस जाता है और उससे निकलने के लिए उसे अपनी समझ, सुनने की क्षमता, आसपास की चीजों को महसूस करने की ताकत और हिम्मत पर भरोसा करना पड़ता है। सैफ इस किरदार की कमजोरी को जरूरत से ज्यादा दिखाने की कोशिश नहीं करते। वह श्याम की समझदारी और जुझारूपन को भी सामने रखते हैं। खासकर अक्षय के साथ आमने-सामने वाले सीन में सैफ का संयम और अभिनय बेहद असरदार लगता है। यही अक्षय और सैफ की भिड़ंत ‘हैवान’ का सबसे बड़ा आकर्षण है। दोनों के बीच होने वाला टकराव सिर्फ फिजिकल नहीं है, बल्कि दिमागी खेल भी है। परशुराम के पास ताकत, आत्मविश्वास और परिस्थितियों को अपने हिसाब से मोड़ने की क्षमता है, जबकि श्याम को हर कदम पर अपनी समझ और सहज बुद्धि का सहारा लेना पड़ता है। यही अंतर दोनों के सीन में रोमांच पैदा करता है। दर्शक लगातार यह जानने के लिए उत्सुक रहता है कि अगली चाल किसकी होगी। फिल्म में पहल चौधरी एक बड़ा सरप्राइज बनकर सामने आती हैं। युवा कलाकार ने अपने किरदार को काफी आत्मविश्वास के साथ निभाया है। उनके अभिनय में मासूमियत और सच्चाई है। उनकी मौजूदगी कहानी में भावनात्मक जुड़ाव पैदा करती है और दर्शक को किरदारों के साथ जोड़ने में मदद करती है। बड़े कलाकारों के बीच भी वह अपनी अलग जगह बनाने में सफल रहती हैं। सहायक कलाकारों ने भी फिल्म को मजबूती दी है। सैयामी खेर, श्रिया पिलगांवकर और बोमन ईरानी अपने-अपने किरदारों में सहज और प्रभावी नजर आते हैं। शारिब हाशमी पुलिस अधिकारी की भूमिका में कहानी के जांच वाले हिस्से को स्वाभाविक बनाए रखते हैं। वहीं दिवंगत अभिनेता असरानी का अभिनय भी दिल छूता है और याद रह जाता है। स्क्रीन पर उनका आखिरी बार दिखना उनकी मौजूदगी को और भी इमोशनल अहमियत देता है। प्रियदर्शन एक बार फिर साबित करते हैं कि उन्हें कमर्शियल सिनेमा की नब्ज अच्छी तरह समझ आती है। ‘हैवान’ उनके करियर की 98वीं फिल्म है और इसमें वह भावनाओं, रोमांच, तनाव और मनोरंजन के बीच अच्छा संतुलन बनाए रखते हैं। फिल्म की लंबाई 2 घंटे 44 मिनट है, लेकिन ऐसा कम ही लगता है कि कहानी को बेवजह खींचा जा रहा है। परफॉर्मेंस, टकराव और थ्रिलर का लगातार आगे बढ़ना कहानी को आगे बढ़ाता है। फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक भी इसके माहौल को बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभाता है। खासकर टकराव वाले सीन में संगीत तनाव को और बढ़ाता है और दर्शक को अगले पल के लिए तैयार करता है। यह संगीत कलाकारों के अभिनय पर हावी नहीं होता, बल्कि सीन के प्रभाव को बढ़ाता है। प्रीतम का संगीत भी कहानी के साथ जुड़ा हुआ महसूस होता है। ‘मेरे हीरो है वो’ भावनात्मक असर पैदा करता है, जबकि ‘रंगियारा’ यात्रा वाले हिस्सों में अच्छी तरह बैठता है। गाने फिल्म के माहौल को थोड़ा हल्का करने के साथ-साथ जुड़े रहते हैं। ‘हैवान’ प्रियदर्शन की मलयालम थ्रिलर ‘ओप्पम’ का हिंदी रूपांतरण है। मूल फिल्म से परिचित दर्शक इसकी कहानी से अनजान नहीं होंगे, लेकिन हिंदी रूपांतरण को अलग अंदाज, प्रस्तुति और व्यावसायिक रंग देने की कोशिश की गई है। कलाकारों का अभिनय कहानी में नई ऊर्जा भरता है। वहीं मोहनलाल की स्पेशल अपीयरेंस, जिसमें वह मूल फिल्म की अपनी मौजूदगी को दोहराते हैं, ‘ओप्पम’ देखने वाले दर्शकों के लिए खास आकर्षण है और दोनों फिल्मों के बीच एक खूबसूरत कड़ी बनाती है। ‘हैवान’ की सबसे बड़ी खूबी इसके कलाकारों का अभिनय है। अक्षय कुमार बिना ज्यादा शोर किए अपने किरदार में खौफ पैदा करते हैं, जबकि सैफ अली खान अपने संयम और बारीक अभिनय से तनाव पैदा करते हैं। दोनों का यह अलग अंदाज उनकी भिड़ंत को एक सामान्य नायक-विलेन की लड़ाई नहीं बनने देता। दर्शक लगातार दोनों की अगली चाल का इंतजार करता रहता है और यहीं फिल्म अपनी सबसे मजबूत पकड़ बनाती है। कुल मिलाकर ‘हैवान’ अपने जरूरी हिस्सों को सही तरीके से जोड़ने में सफल रहती है। अक्षय कुमार का किरदार परशुराम खौफ पैदा करता है, सैफ अली खान का श्याम कहानी को इंसानी भावनाओं से जोड़ता है और पहल चौधरी एक शानदार अंदाज में सामने आती हैं। सहायक कलाकार कहानी को मजबूती देते हैं, जबकि प्रियदर्शन रोमांच और भावनाओं का संतुलन बनाए रखते हैं। ‘हैवान’ एक ऐसी थ्रिलर है, जिसमें उसके सबसे जरूरी हिस्से सही जगह पर काम करते हैं। अक्षय कुमार को अपने करियर का एक बेहद दमदार नकारात्मक किरदार मिला है, सैफ अली खान ने चुनौतीपूर्ण भूमिका को गहराई और संयम के साथ निभाया है और पहल चौधरी ने अपनी मौजूदगी से चौंकाया है। लेकिन फिल्म की असली जान अक्षय और सैफ की भिड़ंत है। प्रियदर्शन का निर्देशन इस टकराव के तनाव को बनाए रखता है और रोमांच, भावना, ड्रामा

9/11 हमले की 25वीं बरसी पर पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि, आतंकवाद पर दिया कड़ा संदेश

नई दिल्ली। अमेरिका में हुए 9/11 आतंकी हमले की 25वीं बरसी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीड़ितों को याद किया और उनके परिवारों के प्रति एकजुटता जताई। पीएम मोदी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर आतंकवाद के खिलाफ भारत की अटूट लड़ाई का जिक्र किया। पीएम मोदी ने लिखा, “25 साल पहले हुए भयानक 9/11 हमलों के बाद, हम पीड़ितों को याद करते हैं और उन्हें सम्मान देते हैं और उन परिवारों के साथ एकजुटता से खड़े हैं जिनके परिजनों ने उस हमले में जान गंवाई।” उन्होंने कहा, “आतंकवाद ने दुनिया भर में अनगिनत जिंदगियां ली हैं। सीमा पार आतंकवाद के पीड़ित के रूप में, भारत कई दशकों से इस लड़ाई में सबसे आगे रहा है। खतरा लगातार बदल रहा है लेकिन आतंकवाद के सभी रूपों के प्रति हमारा संकल्प और विरोध अटूट बना हुआ है। हम इस अभिशाप से लड़ने के सभी प्रयासों के साथ एकजुटता से खड़े हैं।” पीएम मोदी ने अपने पोस्ट के साथ 2014 में 9/11 मेमोरियल और म्यूजियम की अपनी यात्रा की कुछ तस्वीरें भी शेयर कीं। बता दें कि 11 सितंबर 2001 को अमेरिका में हुआ 9/11 हमला आधुनिक इतिहास का सबसे बड़ा आतंकी हमला था, जिसमें करीब 3,000 लोगों की जान चली गई थी। इस हमले की योजना आतंकी संगठन अल-कायदा ने बनाई थी और इसका मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन था। 19 आतंकवादियों ने 4 कमर्शियल विमानों को हाइजैक कर लिया था। पहले दो विमान न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के ट्विन टावरों से टकराए, जिससे दोनों इमारतें ढह गईं। तीसरा विमान वाशिंगटन के पास अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन से टकराया। चौथे विमान को यात्रियों ने आतंकवादियों से छुड़ाने की कोशिश की, जिसके बाद वह पेंसिल्वेनिया के एक खुले मैदान में गिर गया। नेशनल मेमोरियल एंड म्यूजियम न्यूयॉर्क सिटी में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर साइट पर स्थित एक श्रद्धांजलि और ऐतिहासिक संस्थान है। यह 11 सितंबर 2001 के हमलों के पीड़ितों और 1993 के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर बम विस्फोट के छह पीड़ितों को सम्मान देता है। इसका डिजाइन माइकल अराड और पीटर वॉकर ने तैयार किया है। मेमोरियल में ट्विन टावरों की जगह पर दो बड़े वॉटरफॉल पूल बनाए गए हैं, जिन्हें रिफ्लेक्टिंग एब्सेंस कहा जाता है।

वाराणसी में फिर बढ़ने लगा गंगा का जलस्तर, 12 घंटे में 9 सेंटीमीटर का उछाल

वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने लगा है। पिछले कुछ दिनों तक स्थिर रहने के बाद, अब नदी के जलस्तर में दो सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ोतरी हो रही है। बीते 12 घंटों में गंगा का जलस्तर नौ सेंटीमीटर तक बढ़ चुका है। सेंट्रल वॉटर कमीशन के मुताबिक, गुरुवार रात 8 बजे वाराणसी में गंगा का जलस्तर 69.31 मीटर पर पहुंच गया। यह चेतावनी स्तर 70.262 मीटर से अभी भी लगभग 1 मीटर नीचे है, लेकिन लगातार हो रही बढ़ोतरी ने प्रशासन और घाटों पर रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल गंगा में नावों के संचालन पर पूरी तरह से रोक लगी हुई है। जलस्तर बढ़ने का असर सीधे तौर पर घाटों पर दिख रहा है। कई छोटे घाट अभी भी पानी में डूबे हुए हैं, जिससे वहां दुकान लगाने वाले नाविकों और दुकानदारों को काफी परेशानी हो रही है। तीर्थयात्रियों के लिए भी मुश्किलें बढ़ गई हैं। वाराणसी के नाविक शिवानंद साहनी ने आईएएनएस को बताया, “घाटों पर दुकानदारों को बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और आने वाले तीर्थयात्रियों को भी परेशानी हो रही है, क्योंकि कपड़े बदलने के लिए कोई जगह नहीं बची है। बाढ़ की वजह से उपलब्ध जगह कम हो गई है, जिससे बहुत ज्यादा भीड़-भाड़ हो गई है और लोगों को धक्का-मुक्की का सामना करना पड़ रहा है।” उनका कहना है कि घाटों पर जगह की कमी के कारण अव्यवस्था जैसी स्थिति बन गई है। गंगा आरती और स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को सीमित जगह में ही अपना काम करना पड़ रहा है। वहीं, जिला प्रशासन ने भी लोगों से सहयोग की अपील की है। प्रशासन का कहना है कि भीड़ बढ़ने के साथ-साथ चोरी जैसी घटनाओं का भी खतरा बढ़ जाता है। लोगों से कहा गया है कि वे अपने सामान का ध्यान रखें और सतर्क रहें। प्रशासन ने यह भी कहा है कि अगर कोई भी संदिग्ध व्यक्ति या चोरी की घटना दिखती है तो तुरंत प्रशासन को सूचना दें या उस व्यक्ति को प्रशासन के पास लेकर आएं। फिलहाल प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है। जलस्तर चेतावनी निशान से नीचे है, इसलिए अभी बाढ़ का बड़ा खतरा नहीं है, लेकिन अगर इसी रफ्तार से पानी बढ़ता रहा तो आने वाले दिनों में मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

असम : सीएम ने वन विभाग के शहीदों को दी श्रद्धांजलि, ‘वन दुर्गा’ की भूमिका को बताया अहम

दिसपुर। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने गुरुवार को राष्ट्रीय वन शहीद दिवस के मौके पर अपने कर्तव्य के दौरान जान गंवाने वाले वनकर्मियों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि राज्य वन सुरक्षा को मजबूत करने और वन्यजीवों व प्राकृतिक विरासत की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने ‘एक्स’ में लिखा, “राष्ट्रीय वन शहीद दिवस पर, मैं उन लोगों को नमन करता हूं जिन्होंने हमारे जंगलों, वन्यजीवों और प्राकृतिक विरासत की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया।” उन्होंने कहा कि वनकर्मियों का बलिदान इस बात की याद दिलाता है कि असम के जंगलों और वन्यजीवों की रक्षा में कितना जोखिम है। उन्होंने कहा कि असम वन शहीदों के साहस को आगे ले जाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए अपने जंगलों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है। सीएम सरमा ने राज्य के वन बल को मजबूत करने और वन दुर्गा पहल के जरिए महिलाओं को सशक्त बनाने के प्रयासों पर जोर दिया। राज्य की रणनीति की एक अहम कड़ी वन दुर्गा टीमों के जरिए अग्रिम पंक्ति में महिलाओं की भागीदारी है। इनके काम में संवेदनशील इलाकों में गश्त करना, निगरानी में मदद करना, वन अपराधों की रिपोर्ट करना, वन्यजीव संरक्षण में सहयोग करना और संरक्षित तथा वन क्षेत्रों में फील्ड में मौजूदगी बनाए रखने में मदद करना शामिल है। मुख्यमंत्री द्वारा साझा की गई तस्वीरों में वन दुर्गा कर्मी जंगल के अंदर फील्ड ड्यूटी करते हुए नजर आईं, जो गश्त और सुरक्षा कार्य के लिए पूरी तरह तैयार थीं। असम में संरक्षित परिदृश्यों का एक बड़ा नेटवर्क है, जिसमें राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, टाइगर रिजर्व और हाथी रिजर्व शामिल हैं। राज्य वन विभाग के अनुसार, असम में पांच राष्ट्रीय उद्यान, 20 वन्यजीव अभयारण्य, तीन टाइगर रिजर्व और पांच हाथी रिजर्व हैं। विभाग के व्यापक संरक्षण कार्यों में वनों और वन्यजीव आवासों की सुरक्षा और प्रबंधन, वनीकरण, खराब हो चुके जंगलों का पुनरुद्धार, वृक्षारोपण गतिविधियां और सामुदायिक भागीदारी शामिल है। राष्ट्रीय वन शहीद दिवस हर साल 11 सितंबर को उन वनकर्मियों की याद में मनाया जाता है जिन्होंने जंगलों और वन्यजीवों की रक्षा करते हुए अपनी जान गंवा दी।

‘जनता की भावनाओं को भड़काकर सफल नहीं हो सकते अखिलेश यादव’, आरक्षण विरोधी बताने पर भाजपा ने किया पलटवार

लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा को आरक्षण विरोधी बताने पर पार्टी नेताओं ने कहा कि अखिलेश यादव जनता की भावनाओं को भड़काकर सफलता हासिल नहीं कर सकते हैं। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने शुक्रवार को पत्रकारों से बात करते कहा, “समाजवादी पार्टी तरह-तरह के गुमराह करने वाले और गैर-जिम्मेदाराना बयान दे रही है। वे विकास के मुद्दे पर बात क्यों नहीं करते? वे कानून-व्यवस्था पर बात करें। इस तरह जनता की भावनाओं को भड़काकर आप सफलता हासिल नहीं कर सकते।” अखिलेश यादव के बयान पर मंत्री दयाशंकर सिंह ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा, “भारतीय जनता पार्टी में समाज का अंतिम व्यक्ति भी देश के सर्वोच्च स्थान पर जाने का सपना देख सकता है।” उन्होंने कहा, “हमारे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक सामान्य परिवार से आते हैं। आज दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता हैं। हमारी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु आज देश की प्रथम महिला हैं। यह भाजपा में संभव है, सपा समाजवाद की बात जरूर करती है लेकिन सत्ता पूरी अपने घर में रखने का काम करती है। सपा का एक कार्यकर्ता पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष या मुख्यमंत्री बनने का सपना नहीं देख सकता है। उन्हीं की समाज (यादव) से कई लोग हैं, जो भाजपा में शासित राज्यों में मुख्यमंत्री बन चुके हैं।” इससे पहले, गुरुवार को अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी प्रदेश मुख्यालय पर आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में आरक्षण का मुद्दा उठाया। उन्होंने अपने बयान में कहा, “कहा कि भाजपा सरकार अलोकतांत्रिक है। लोकतांत्रिक मूल्यों को नहीं मानती है। भाजपा आरक्षण के खिलाफ है। पिछड़े, दलितों और आदिवासियों के आरक्षण के साथ ही महिला आरक्षण के भी खिलाफ है। यह सरकार अल्पसंख्यकों का हक और सम्मान नहीं देना चाहती। अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थानों और मदरसों पर इनकी नजर है।

‘घर पर बच्चों को संभाल रहीं उषा,’ डलास में रिपब्लिकन मध्यावधि सम्मेलन के मंच से बोले जेडी वेंस

वॉशिंगटन। उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने अमेरिकी पारिवारिक मूल्यों का समर्थन किया है। उन्होंने नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी की जीत की अपील करने के लिए अपनी पत्नी ऊषा और अपने नवजात बेटे को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया। डलास में रिपब्लिकन मध्यावधि सम्मेलन के दौरान वेंस ने बताया कि उनकी पत्नी उषा उनके परिचय के लिए (मंच पर) नहीं आ सकीं। उन्होंने कहा कि उषा इस समय अपने छह हफ्ते के नवजात बेटे और तीन अन्य छोटे बच्चों की देखरेख में व्यस्त हैं। वेंस ने कहा, “जुलाई में, मेरी खूबसूरत उषा ने एक बेटे, छोटे एलेक, को जन्म दिया – बस छह सप्ताह पहले।” उन्होंने कहा कि आयोजकों ने उषा से तब संपर्क किया था जब उनका बेटा सिर्फ दो हफ्ते का था। वेंस ने कहा, “उन्होंने कहा, ‘बिल्कुल नहीं! मुझे चार बच्चों की देखभाल करनी है।’ लेकिन वह अपना प्यार भेज रही हैं और मुझे पता है कि वह घर से देख रही हैं।” उपराष्ट्रपति ने परिवार की इस कहानी का इस्तेमाल एक बड़ी बात कहने के लिए किया, जिसे उन्होंने अमेरिकी बच्चों का जन्मसिद्ध अधिकार बताया। उन्होंने कहा, “देवियों और सज्जनों, मैंने इस बात पर बहुत सोचा है कि अमेरिकियों में सबसे नए सदस्य, मेरे छोटे बेटे का जन्मसिद्ध अधिकार क्या है। वह अब हमारा साथी नागरिक है, भले ही उसे यह पता न हो।” उन्होंने अपनी चार साल की बेटी मीरा के बारे में बात की, जो अपने भाई को खाना खिलाना चाहती थी, और बड़े बच्चों के बारे में बताया जो नवजात को मुस्कुराते हुए देख रहे थे। उन्होंने कहा, “इसी परिवार के बीच मैंने उषा को उन चार बच्चों के साथ बहुत धैर्य दिखाते हुए देखा है।” वेंस ने मिशिगन से डेमोक्रेटिक सीनेट उम्मीदवार अब्दुल अल-सैयद की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि अल-सैयद ने सवाल उठाया था कि क्या वेंस ऊषा को समय में पीछे ले जाकर अपने दिवंगत दादा से मिलवाते, जिन्हें वे “पापॉ” कहते थे। वेंस ने इस टिप्पणी को इस सवाल पर हमले के तौर पर देखा कि क्या उनके श्वेत दादा ऊषा को स्वीकार कर सकते थे और उनसे प्यार कर सकते थे। वेंस ने कहा, “अब्दुल उन्हें देखते हैं, उनकी त्वचा का रंग देखते हैं, उनकी पृष्ठभूमि देखते हैं और तय कर लेते हैं कि वह मेरी पत्नी से कभी प्यार नहीं कर सकते थे।” उपराष्ट्रपति ने कहा कि अल-सैयद खुद गोरे सौतेले दादा-दादी द्वारा पाले-पोसे गए थे। उन्होंने कहा, “वे कहते हैं कि जेम्स वेंस जैसे नाम वाले लोग उषा जैसे नाम वाले लोगों से प्यार करने में असमर्थ होते हैं, और वे इससे ज़्यादा गलत नहीं हो सकते।” बता दें कि भारतीय मूल की उषा वेंस, अमेरिका की पहली भारतीय-अमेरिकी और पहली हिंदू ‘सेकंड लेडी’ बनीं, जब उनके पति ने उपराष्ट्रपति का पद संभाला। इस जोड़े की मुलाकात येल लॉ स्कूल में पढ़ाई के दौरान हुई थी। उनके चार बच्चे हैं। पेशे से वकील उषा वेंस अक्सर अपने पति के साथ बड़े राजनीतिक कार्यक्रमों में नजर आती रही हैं, लेकिन आम तौर पर वे सार्वजनिक रूप से कम ही चर्चा में रहती हैं।

कर्नाटकः रायचूर जिले में भगवान गणेश की मूर्ति के नीचे दबकर युवक की मौत

रायचूर। कर्नाटक के रायचूर जिले में एक युवक की भगवान गणेश की मूर्ति के नीचे दबकर दर्दनाक मौत हो गई। स्थानीय पुलिस ने केस दर्ज करते हुए मौत का असली कारण पता लगाने के लिए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। दरअसल, रायचूर जिले के सिरवार तालुक के अट्टानूर गांव में शुक्रवार तड़के सिरवार शहर के वार्ड नंबर 20 के रहने वाले प्रेम कुमार (23) के मौत हो गई। प्रेम कुमार गणेश जी की मूर्ति ले जा रहा था, तभी मूर्ति बिजली के तार के संपर्क में आ गई और हादसा हो गया। बताया जा रहा है कि प्रेम कुमार दो दिन पहले अपने दोस्तों के साथ गणेश जी की मूर्ति लेने हैदराबाद गया था। शुक्रवार को तड़के करीब 2:30 बजे मूर्ति को अट्टानूर गांव लाया जा रहा था। बताया जाता है कि बड़ी मूर्ति इस दौरान बिजली के तार से छू गई और झटका लगने से मूर्ति प्रेम कुमार पर गिर गई, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। शव को पोस्टमार्टम के लिए रायचूर के आरआईएमएस अस्पताल भेजा गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह साफ हो जाएगा कि मौत बिजली का झटका लगने से हुई या मूर्ति के गिरने से लगी चोट के कारण। इस घटना के संबंध में सिरवार पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है और पुलिस जांच कर रही है। इसी तरह महाराष्ट्र के मुंबई के भुलेश्वर में अगस्त में हादसा हुआ था। ‘भुलेश्वर चा राजा’ के नाम से मशहूर भगवान गणेश की 22 फीट ऊंची मूर्ति लाते समय संतुलन बिगड़ने के कारण गिर गई थी। मूर्ति की चपेट में आने से दो लोगों की मौत हो गई और पांच अन्य घायल हो गए। मृतकों की पहचान 33 वर्षीय संकेत नेवशे और 30 वर्षीय बृजेश हेमंत जोशी के रूप में हुई थी। वहीं, वैभव घेनांद (38), पवन चौरसिया (25), लावण्या गनेर (5), दिव्या गनेर (7) और कुणाल काशिद (26) घायल हुए थे। गौरतलब है कि गणेशोत्सव 14 सितंबर से शुरू होगा। दस दिन चलने वाले इस त्योहार में घरों के साथ सार्वजनिक पंडालों में गणेश प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। इसी कड़ी में गणेश जी मूर्तियां अभी से पांडालों में लाई जा रही हैं।

राजस्थान निकाय चुनाव: अंतिम चरण का मतदान जारी, नेताओं ने बड़ी संख्या में मतदान करने की अपील की

जयपुर। राजस्थान में नगर निकाय चुनाव के अंतिम चरण का मतदान शुक्रवार को जारी है। भरतपुर के जिला चुनाव अधिकारी कमर चौधरी की ओर से लोगों के वोट देने की अपील की गई। कमर चौधरी ने कहा, “भरतपुर के उन सभी निवासियों से, जिनके नगर निकाय चुनाव 11 सितंबर को होने हैं, मेरी अपील है कि वे बड़ी संख्या में बाहर निकलें और वोट दें। हमारा पिछला अनुभव बताता है कि नगर निकाय और पंचायत चुनावों के दौरान लोग पूरे उत्साह के साथ वोट करते हैं क्योंकि उम्मीदवार उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए घर-घर जाते हैं। हम अक्सर शिकायत करते हैं कि कुछ काम नहीं हो रहे हैं, लेकिन जब तक हम अपनी जिम्मेदारी (वोट देने और अपना उम्मीदवार चुनने की जिम्मेदारी) पूरी नहीं करते, तब तक हमें सोचना चाहिए कि हमें शिकायत करने का कितना अधिकार है।” स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर मंत्री राज्यवर्धन राठौर ने आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, “यह बहुत अच्छी बात है कि आप मुझे सुबह-सुबह ही बता रहे हैं कि वोटिंग का प्रतिशत ज्यादा है; वोटर्स बहुत जागरूक हो गए हैं और वोट की कीमत बहुत ज्यादा है। देखिए, आपको पांच वर्ष में एक बार मौका मिलता है और अपना भविष्य तय करने का अवसर मिलता है। लोकतंत्र हर बार यह दिखाता है कि देश का शासन, देश की बागडोर लोगों के हाथों में है।” मंत्री मदन दिलावर ने आईएएनएस से कहा, “ताकत इस बात पर निर्भर करती है कि वोटर कितने जागरूक हैं। मेरा मानना ​​है कि वोटर अब बहुत जागरूक हो गए हैं। जैसा कि आपने अभी देखा, वोट डालने के लिए वोटरों की लंबी लाइनें लगी हैं और हर कोई पूरे जोश के साथ अपने वोट का अधिकार इस्तेमाल करना चाहता है। उत्साह, खुशी और जोश का माहौल है। अपना चेयरमैन चुनने के लिए हर किसी को 21 तारीख का इंतजार है।” भाजपा विधायक अनीता भदेल ने कहा, “पहला वोट भारतीय जनता पार्टी को, यानी कमल के फूल के निशान को गया। मैं अपनी पोलिंग टीम को उनकी पूरी तैयारी और सुबह ठीक 7:00 बजे वोटिंग प्रक्रिया शुरू करने के लिए धन्यवाद देना चाहती हूं। मैं जनता और सभी वोटरों से यह भी अपील करती हूं कि वे बाकी सभी काम छोड़कर वोट डालने को प्राथमिकता दें।” राज्य विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने पत्रकारों से कहा कि ‘एक राज्य, एक चुनाव’ को लेकर लिया गया फैसला काफी अच्छा है। बार-बार लागू होने वाली आदर्श आचार संहिता से विकास कार्यों पर ब्रेक लग जाता था, अब कोई मुद्दा नहीं रहेगा। उन्होंने आगे कहा, “इस प्रणाली के आधार पर पूरे राजस्थान में एक साथ स्थानीय निकाय चुनाव कराने से लोगों को एक साथ मतदान करने का मौका मिलता है और मैं ऐसा करने के लिए प्रशासन की सराहना करता हूं। आज मैंने भी लोकतंत्र के इस शहरी उत्सव में अपने मताधिकार का प्रयोग किया। हर शहरवासी को मतदान करना चाहिए और इसे मजबूत करने के लिए इस उत्सव में भाग लेना चाहिए।” सीकर में एक महिला मतदाता ने कहा, “हम चाहते हैं कि जो भी जीते, वह कॉलोनी और पूरे वार्ड के विकास पर पूरा ध्यान दे, इसमें साफ-सफाई और वार्ड की दूसरी जरूरी चीजें भी शामिल हों। ऐसा नहीं होना चाहिए कि वे वोट मांगने के लिए पांच साल बीत जाने के बाद ही आएं।” एक और महिला मतदाता ने कहा, “मैं आज पहली बार नगर परिषद चुनाव में वोट देने आई हूं। मैं वोट देने के लिए काफी उत्साहित हूं और चाहती हूं कि वार्ड के लिए ऐसा उम्मीदवार चुना जाए जिसकी छवि साफ-सुथरी हो और जो वार्ड का विकास कर सके, साथ ही साफ-सफाई, बिजली और ऐसी ही अन्य सभी चीजों का ध्यान रख सके।

कांग्रेस ‘ब्रिक्स’ को लेकर नकारात्मकता फैला रही है, उसे आईना दिखाने की जरूरत : संबित पात्रा

नई दिल्ली। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और लोकसभा सांसद संबित पात्रा ने ब्रिक्स समिट को लेकर कांग्रेस समेत विपक्षी दलों पर निशाना साधा है। उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि आज ब्रिक्स समिट को लेकर कांग्रेस पार्टी और कुछ विपक्षी दल जिस प्रकार की नेगेटिविटी फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, नकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें आईना दिखाने की जरूरत है। संबित पात्रा ने ब्रिक्स को लेकर 2011 और 2012 के प्रमुख अखबारों में छपे दो महत्वपूर्ण आर्टिकल का जिक्र किया। संबित पात्रा ने कहा, “मैं पहला आर्टिकल 2012 का दिखाता हूं जिसका हेडलाइन है ‘इंडिया लीस्ट अट्रैक्टिव ब्रिक मेंबर इन वैल्यूएशन टर्म्स गोल्डमैन सैक्स’। गोल्डमैन सैक्स स्पष्ट रूप से कहती है कि 2012 में अगर सबसे कम आकर्षक सदस्य कोई था तो वह भारत था।” उन्होंने बताया कि इस आर्टिकल में गोल्डमैन सैक्स के चेयरमैन जिम ओ नील का इंटरव्यू था। उनसे सवाल पूछा गया था, “क्या आपको लगता है कि ब्रिक्स का सबसे अच्छा दौर अब हमारे पीछे छूट गया है? ब्रिक्स देशों के लिए जिस तरह से हालात बन रहे हैं, उसे देखते हुए? क्या आपको लगता है कि ब्राजील सबसे मजबूत ब्रिक्स देश है और भारत सबसे कमजोर ब्रिक्स देश है?” इस पर जिम ओ नील ने क्या कहा, इसका जिक्र करते हुए संबित पात्रा ने बताया, “भारत, चीन और रूस के लिए पिछले दशक की तरह उसी दर से बढ़ना मुश्किल हो सकता है, और इस दशक में ब्राजील अलग है क्योंकि यह हमें ऊपर की ओर सरप्राइज कर सकता है।” संबित पात्रा ने कहा कि जिम ओ नील ने आगे कहा था, “वैल्यूएशन के मामले में, इंडिया सबसे कम अट्रैक्टिव है, चीन सबसे ज्यादा अट्रैक्टिव होगा। भारत तुलनात्मक रूप से सबसे कम होगा। यह कुछ हद तक साइक्लिकल एडजस्टेड (पीई) अनुपात और फॉरवर्ड पीई अनुपात जैसी सिंपल चीजों की वजह से है, जो एक जैसे हैं, क्योंकि मार्केट इंडिया को लेकर बहुत परेशान हैं, जैसा कि मैंने पहले बताया था। अगर हम सच में कुछ रिफॉर्म करते हैं, तो शायद इंडिया दूसरे मार्केट के मुकाबले इस कदम से पहले और तेजी से बढ़ेगा। मेरे हिसाब से चीन नंबर वन है। मेरे हिसाब से चीन शायद अभी नंबर वन है, ब्राजील नंबर दो पर, रूस नंबर तीन पर, और इंडिया नंबर चार पर है।” संबित पात्रा ने कहा कि आप बताइए भारतवर्ष को उस समय पीछे छोड़ दिया गया था और इस आर्टिकल की आखिरी लाइन में कहा गया है कि भारत को अगर इंडोनेशिया रिप्लेस कर दे तो ये कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी।” उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर इस आर्टिकल के निचोड़ का बात करें, तो इसमें कहा गया है कि 2012 में भारत में किसी प्रकार का रिफॉर्म नहीं है। भारत पीछे जा रहा है। इन्फ्लेशन है और भारत की स्थिति ऐसी है, मार्केट की परिस्थिति ऐसी है कि ब्रिक्स नेशन में आज सबसे पीछे कोई खड़ा है तो वह भारत है। संबित पात्रा ने दूसरा आर्टिकल 21 सितंबर 2011 का बताया। उन्होंने बताया कि उसका हेडलाइन है ‘विद हाई इन्फ्लेशन एंड वीक करेंसी, इंडिया नॉट लाइक अदर ब्रिक कंट्रीज। इसका जिक्र करते हुए भाजपा प्रवक्ता ने कहा, “तथाकथित ब्रिक्स देशों में भारत में महंगाई सबसे खराब है। करंट अकाउंट डेफिसिट चिंता का विषय है, फिस्कल डेफिसिट चिंता का विषय है, खराब इंफ्रास्ट्रक्चर के बावजूद नए इन्वेस्टमेंट रुके हुए हैं। गोल्डमैन सैक्स के जिम ओ’नील के एक्रोनिम बनाने के बाद शायद दस साल में पहली बार ब्रिक्स कमजोर हो रहा है और इसमें ‘आई’ कमजोर हो रहा है।” संबित पात्रा ने कहा कि इसमें लिखा गया है कि ब्रिक्स में जो ‘आई’ है वो कहीं न कहीं अस्थिर है, यानी वह गिरता हुआ नजर आ रहा है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा, “आप चिंता करिए 2011-12 में जहां ब्रिक्स में भारत खोता हुआ नजर आ रहा था, आज सभी राष्ट्र, ब्रिक्स के सभी राष्ट्राध्यक्ष भारत में हैं। आज भारत ब्रिक्स समिट को ऐसे मना रहा है जैसा पहले कभी नहीं मनाया गया। आज भारत ने ग्लोबल लेवल पर अपनी जगह बनाई है, जैसी पहले कभी नहीं बनाई गई। और फिर भी हमारे कुछ नेता हैं, हमारे कुछ विरोधी लोग हैं जो इसे पचा नहीं पा रहे हैं।” उन्होंने कहा कि आज कुछ लोगों को, विपक्ष के कुछ सदस्यों को, कांग्रेस पार्टी को अपच हो रहा है क्योंकि भारत आगे बढ़ रहा है। संबित पात्रा ने कहा, “याद रखिए ब्रिक्स में जो ‘आई’ था वो ‘आई’ इंडिया है और ब्रिक्स में जो इंडिया है और उसमें जो ‘आई’ है वो 140 करोड़ जनता है। मैं भारत हूं। मैं ब्रिक्स का सबसे मजबूत, सबसे मजबूत पार्टनर में से एक हूं और मुझे इस पर गर्व है।