दिल्ली सरकार की बस ऑपरेटरों को चेतावनी, यात्री सुरक्षा नियमों में लापरवाही पर तय कार्रवाई

नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने सभी बस ऑपरेटरों को यात्रियों की सुरक्षा और सुचारू संचालन से जुड़े निर्धारित मानकों का सख्ती से पालन करने के निर्देश जारी किए हैं। परिवहन मंत्री पंकज कुमार सिंह ने कहा, “सुरक्षा उपाय केवल कागजों पर नहीं, बल्कि पूरी तरह से लागू होने चाहिए। बस ऑपरेटर सुनिश्चित करें कि सभी आवश्यक सिस्टम, उपकरण और प्रक्रियाएं सही तरीके से काम कर रही हों।” उन्होंने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सरकार सख्त कार्रवाई करेगी। परिवहन विभाग इन निर्देशों और मोटर वाहन अधिनियम, 1988 तथा उसके तहत बनाए गए नियमों के अनुपालन की जांच के लिए विशेष अभियान चलाएगा। बस ऑपरेटरों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे इन दिशानिर्देशों की जानकारी ड्राइवरों और अन्य कर्मचारियों तक पहुंचाएं और उनका सख्ती से पालन सुनिश्चित करें। परिवहन विभाग द्वारा यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जारी किए गए निर्देश दिल्ली में चलने वाली सभी बसों पर लागू होंगे, जिनमें अन्य राज्यों से दिल्ली आने वाली और यहां संचालित होने वाली बसें भी शामिल हैं। सरकार ने विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर जोर दिया है। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। पंकज कुमार सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में यात्रियों की सुरक्षा मजबूत करने और अनिवार्य सुरक्षा मानकों को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्री के निर्देशों के बाद परिवहन विभाग ने सभी बस ऑपरेटरों को यह सुनिश्चित करने को कहा है कि व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस और पैनिक बटन हर समय चालू और कार्यशील रहें। पैनिक बटन यात्रियों की पहुंच में हों और सही स्थिति में बनाए रखे जाएं। सभी बसों में काम करने योग्य अग्निशामक यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) और फर्स्ट एड किट रखना भी अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा, बसों को रात या खाली समय में केवल अधिकृत, सुरक्षित और पर्याप्त रोशनी वाले स्थानों पर ही खड़ा किया जाना चाहिए। निर्देशों के अनुसार, हर बस के पास वैध फिटनेस सर्टिफिकेट होना चाहिए और वाहन पूरी तरह से तकनीकी रूप से फिट होना चाहिए। साथ ही प्रदूषण संबंधी मानकों का पालन और वैध पीयूसी प्रमाण पत्र रखना भी जरूरी होगा। ऑपरेटरों को यातायात नियमों और निर्धारित बस लेन के पालन का निर्देश दिया गया है। यात्रियों को बस में चढ़ाने और उतारने का कार्य केवल अधिकृत बस स्टॉप या निर्धारित स्थानों पर ही किया जा सकेगा। सड़क के बीच में, चौराहों पर या किसी असुरक्षित और गैर-अधिकृत स्थान पर बस रोकने पर सख्त रोक लगाई गई है।

बीडब्ल्यूएफ चाइना मास्टर्स: लोह कीन से मिली करारी हार, चीन के युकी पहले ही राउंड में बाहर

शेनझेन (चीन)। बीडब्ल्यूएफ चाइना मास्टर्स 2026 में चीन के शी युकी को सिंगापुर के लोह कीन यू के हाथों सीधे गेम में 21-11, 21-10 से हार का सामना करना पड़ा। मंगलवार को शेनझेन में खेला गया यह मुकाबला 30 मिनट तक चला, जिसमें हार के बाद युकी वर्ल्ड चैंपियनशिप के बाद लगातार दूसरे टूर्नामेंट के शुरुआती दौर में ही बाहर हो गए। छठी वरीयता प्राप्त शी युकी और लोह के बीच का मुकाबला पहले दिन के मुख्य आकर्षणों में से एक था, क्योंकि दोनों खिलाड़ी क्रमशः 2025 और 2021 में वर्ल्ड चैंपियन रह चुके हैं। हालांकि, शी पूरे मैच में संघर्ष करते नजर आए। एक अन्य चीनी खिलाड़ी हू झेआन को डेनमार्क के पांचवीं वरीयता प्राप्त एंडर्स एंटोनसेन से हार का सामना करना पड़ा। एंटोनसेन ने पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए 19-21, 21-11, 21-16 से जीत हासिल की। वहीं, विमेंस सिंगल्स में, चीन की हान कियानक्सी ने चीनी ताइपे की पाई यू-पो को आसानी से 21-10, 21-9 से शिकस्त दी। अब अगले राउंड में उनका मुकाबला साउथ कोरिया की शीर्ष वरीयता प्राप्त एन से-यंग से होगा। एन ने चीनी ताइपे की लिन शियांग-टी को 21-11, 21-3 से शिकस्त देकर अगले दौर में जगह बनाई। थाईलैंड की पोर्नपावी चोचुवोंग को चीनी ताइपे की चिउ पिन-चियान ने 21-14, 21-15 से हराया। मेंस डबल्स में शीर्ष वरीयता प्राप्त साउथ कोरिया की जोड़ी किम वॉन-हो और सियो सेउंग-जे भी पहले राउंड में बाहर हो गई। उन्हें इंडोनेशिया के लियो रोली करनांडो और डैनियल मार्थिन से 21-19, 21-19 से हार का सामना करना पड़ा। मिक्स्ड डबल्स में, चीन के टॉप सीड फेंग यानझे और हुआंग डोंगपिंग ने जापान के युता वातानाबे और माया तागुची के खिलाफ एक रोमांचक मुकाबले में जीत हासिल की। ​​दोनों जोड़ियों के बीच मुकाबला निर्णायक गेम तक खिंचा, जिसमें फेंग और हुआंग ने छह मैच प्वाइंट्स गंवाए, लेकिन आखिर में संयम बनाए रखते हुए 27-25 से जीत दर्ज की और अंतिम 16 में अपनी जगह सुनिश्चित की।

उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में बारिश का अलर्ट, उधम सिंह नगर के साथ ही लखीमपुर खीरी के स्कूलों में अवकाश

देहरादून/लखनऊ। उत्तर भारत में लगातार हो रही भारी बारिश और मौसम विभाग के पूर्वानुमानों के बाद प्रशासन अलर्ट मोड में है। इसी कड़ी में उत्तराखंड के उधम सिंह नगर और उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में 2 सितंबर को स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया गया है। मौसम विज्ञान विभाग, देहरादून द्वारा 1 सितंबर को शाम 3:30 बजे जारी पूर्वानुमान में ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया गया है। विभाग के अनुसार राज्य के विभिन्न जनपदों में कहीं-कहीं गरज के साथ आकाशीय बिजली चमकने और भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश से नदियों और नालों का जलस्तर भी बढ़ा हुआ है। इसे देखते हुए जिलाधिकारी नितिन भदौरिया ने बड़ा निर्देश दिया है। जिलाधिकारी ने जनपद आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष के तौर पर आदेश जारी किया है कि उधम सिंह नगर के अंतर्गत संचालित सभी शासकीय, अर्द्धशासकीय और निजी विद्यालयों में कक्षा 1 से 12 तक के छात्रों और सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में 2 सितंबर, बुधवार को अवकाश रहेगा। हालांकि, शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अपने-अपने केंद्रों पर उपस्थित रहेंगे और विभागीय कार्यों का निर्वहन करेंगे। आदेश का उल्लंघन करने पर आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 51 के तहत कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा। उधर, यूपी के लखीमपुर खीरी में भी लगातार बारिश, जलभराव और अतिवृष्टि की संभावना को देखते हुए स्कूलों को बंद करने का निर्णय लिया गया है। इसको लेकर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रवीण कुमार तिवारी ने आदेश जारी किया है। आदेश के अनुसार, जनपद के सभी परिषदीय, मान्यता प्राप्त, सहायता प्राप्त, सीबीएसई, आईसीएसई और अन्य बोर्ड से संचालित हिंदी और अंग्रेजी माध्यम के कक्षा 1 से 8 तक के विद्यालयों में 2 सितंबर को अवकाश घोषित किया जाता है। सभी शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारी विद्यालय में उपस्थित होकर अपार आईडी, डीबीटी, यू-डायस और अन्य विभागीय कार्यों को पूरा करेंगे। आदेश का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। दोनों जिलों में प्रशासन ने अभिभावकों से अपील की है कि खराब मौसम में बच्चों को घर पर ही सुरक्षित रखें और अफवाहों पर ध्यान न दें।

तमिलनाडु में 25 टोल प्लाजा पर टोल शुल्क बढ़ाए गए

चेन्नई। तमिलनाडु में मंगलवार से 25 टोल प्लाजा पर संशोधित यूजर फीस लागू हो गई है, जिससे निजी वाहनों, कमर्शियल गाड़ियों और बसों के लिए सड़क यात्रा महंगी हो गई है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) राज्य में 77 टोल प्लाजा चलाती है, जहां आमतौर पर साल में दो बार शुल्क में बदलाव किया जाता है। हालिया बदलाव के तहत गाड़ी की कैटेगरी और टोल प्लाजा के आधार पर टोल दरों में 5 से 30 रुपए तक की बढ़ोतरी हुई है। चेन्नई-त्रिची नेशनल हाईवे पर विल्लुपुरम के पास विक्रावंडी टोल प्लाजा पर कारों, जीपों और पैसेंजर वैन के लिए सिंगल-ट्रिप का शुल्क 105 रुपए से बढ़कर 110 रुपए हो गया है। कई बार की यात्रा (मल्टीपल जर्नी) के लिए शुल्क 160 रुपए से बढ़कर 165 रुपए हो गया है। हल्के कमर्शियल वाहनों के लिए सिंगल यात्रा का शुल्क अब 190 रुपए होगा (पहले यह 185 रुपए था), जबकि मल्टीपल-ट्रिप की दर 275 रुपए से बढ़ाकर 290 रुपए कर दी गई है। बसों और ट्रकों के लिए सिंगल-ट्रिप शुल्क 370 रुपए से बढ़कर 385 रुपए और मल्टीपल-ट्रिप शुल्क 555 रुपए से बढ़कर 575 रुपए हो गया है। उलुंदुरपेट के पास सेंगुरीची टोल प्लाजा पर कारों, जीपों और वैन के लिए सिंगल-ट्रिप शुल्क 70 रुपए ही रहेगा। हालांकि, मल्टीपल-ट्रिप शुल्क 100 रुपए से बढ़कर 105 रुपए हो गया है। हल्के कमर्शियल वाहनों के लिए सिंगल यात्रा का शुल्क 120 रुपए से बढ़कर 125 रुपए और मल्टीपल ट्रिप के लिए शुल्क 180 रुपए से बढ़कर 185 रुपए हो जाएगा। बसों और ट्रकों के लिए शुल्क सिंगल यात्रा के लिए 240 रुपए से बढ़कर 250 रुपए और मल्टीपल ट्रिप के लिए 355 रुपए से बढ़कर 375 रुपए हो गया है। इरोड जिले के विजयमंगलम में, कारों, जीपों और पैसेंजर वैन के लिए एक बार के सफर का किराया 70 रुपए से बढ़कर 75 रुपए हो गया है, जबकि कई बार के सफर की फीस 105 रुपए से बढ़कर 110 रुपए हो गई है। हल्के कमर्शियल वाहनों के लिए एक बार के सफर का किराया 125 रुपए ही रहेगा, लेकिन कई बार के सफर का रेट 165 रुपए से बढ़कर 190 रुपए हो गया है। बस और ट्रक के लिए एक बार के सफर का किराया 255 रुपए और कई बार के सफर का किराया 380 रुपए होगा। कोडाई रोड के पास डिंडीगुल-मदुरै फोर-लेन हाईवे पर कोझिंजिप्टी टोल प्लाजा पर कारों, जीपों और वैन के लिए एक बार के सफर का किराया 80 रुपए और वापसी के सफर का किराया 120 रुपए होगा। पहले यह किराया 75 रुपए और 115 रुपए था। हल्के कमर्शियल वाहनों के लिए एक बार के सफर की फीस 135 रुपए से बढ़कर 140 रुपए हो गई है, जबकि बस और ट्रक के लिए अब एक बार के सफर का किराया 280 रुपए और वापसी के सफर का किराया 470 रुपए होगा। इस बदलाव से रोजाना सफर करने वालों और बिजनेस के लिए ट्रांसपोर्टेशन का खर्च बढ़ने की उम्मीद है।

महाराष्ट्र: एक स्कूल में परोसे गए खाने में गिरी छिपकली, 31 छात्र अस्पताल में भर्ती

मुंबई। महाराष्ट्र के चंद्रपुर में एक स्कूल में मंगलवार को दोपहर का खाना खाने के बाद बीमार पड़ने पर 31 छात्रों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले की जिवती तहसील में स्थित नगरला के अंब्रू नाइक सेकेंडरी आश्रम स्कूल में छात्रों को कथित तौर पर ऐसा खाना परोसा गया, जिसमें खाना पकते समय छिपकली गिर गई थी। यह खाना छात्रों को मंगलवार को दोपहर करीब 2:30 बजे परोसा गया। बताया जा रहा है कि खाना बनाते समय उसमें गिरी छिपकली पर किसी भी कर्मचारी की नजर नहीं पड़ी। खाना खाने के कुछ ही देर बाद छात्र बीमार पड़ने लगे। जी मिचलाने, उल्टी, पेट दर्द और चक्कर आने की शिकायत के बाद कुल 31 छात्रों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्रभावित छात्रों को तुरंत इलाज के लिए जिवती के प्राथमिकी स्वास्थ केंद्र ले जाया गया। हालांकि, वहां पर्याप्त मेडिकल सुविधाएं न होने के कारण उन्हें दूसरी जगह रेफर कर दिया गया और बाद में राजुरा के सब-डिस्ट्रिक्ट रूरल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। मेडिकल अधिकारियों के अनुसार, अस्पताल में भर्ती सभी छात्रों की हालत अभी स्थिर है और डॉक्टर उन पर नजर रखे हुए हैं। इस घटना ने आश्रम स्कूल प्रशासन के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसके अलावा, स्कूल प्रशासन के खिलाफ माता-पिता और ग्रामीणों में गुस्सा है। उनका आरोप है कि स्कूल प्रशासन की लापरवाही के कारण मासूम छात्रों की जान खतरे में पड़ सकती थी। माता-पिता और स्थानीय लोगों ने इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी कर्मचारियों व संस्थान के प्रशासकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल, शिक्षा विभाग और पुलिस इस मामले की जांच कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद ही यह पता चल पाएगा कि क्या छिपकली गिरने के बावजूद छात्रों को खाना परोसा गया था और इस घटना के लिए किसकी लापरवाही जिम्मेदार है। साथ ही, आश्रम स्कूल में बच्चों को दिए जाने वाले खाने की क्वालिटी और सुरक्षा की निगरानी पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। इस तरह की एक घटना में, 22 अगस्त को मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के सांवेर इलाके में एक सरकारी स्कूल में मिड-डे मील खाने के बाद 30 से ज्यादा बच्चे बीमार पड़ गए थे।

आंध्र प्रदेश : जगन मोहन रेड्डी ने स्थानीय निकाय चुनाव की सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया

अमरावती। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष और आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने मंगलवार को पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से कहा कि वे आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को एक बड़ी राजनीतिक चुनौती के तौर पर लें और हर सीट पर चुनाव लड़ने की तैयारी करें, ताकि विरोधियों को बिना मुकाबले के जीत हासिल करने का कोई मौका न मिले। वाईएसआर कडपा जिले के पुलिवेंदुला दौरे के दौरान, जगन मोहन रेड्डी ने भाकरापुरम कैंप ऑफिस में ‘प्रजा दरबार’ लगाया। यहां बड़ी संख्या में पार्टी नेता, कार्यकर्ता, समर्थक और आम लोग उनसे मिले और अपनी शिकायतें बताईं। पार्टी की एक विज्ञप्ति के अनुसार, उन्होंने धैर्यपूर्वक लोगों की बातें सुनीं और पार्टी नेताओं के साथ स्थानीय राजनीतिक हालात, संगठन से जुड़े मुद्दों और आगामी चुनावों की रणनीति पर चर्चा की। जगन मोहन रेड्डी ने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे गांव के स्तर पर पार्टी को मजबूत करें, लोगों से लगातार जुड़े रहें और उनकी समस्याओं को हल करने में उनका साथ दें। उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों की पहचान पहले ही कर ली जानी चाहिए और तैयारी शुरू कर देनी चाहिए ताकि वाईएसआरसीपी स्थानीय निकाय की हर सीट पर चुनाव लड़ सके। उन्होंने चेतावनी दी कि विपक्षी उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं को डराने-धमकाने के लिए सरकारी सत्ता या पुलिस के दुरुपयोग की किसी भी कोशिश का मज़बूती और एकजुटता से सामना किया जाना चाहिए। उन्होंने कार्यकर्ताओं को भरोसा दिलाया कि पार्टी हर तरह से उनके साथ खड़ी रहेगी। जगन मोहन रेड्डी ने नेताओं से कहा कि वे वाईएसआरसीपी सरकार के तहत हुए कल्याणकारी कार्यों और विकास की जानकारी हर घर तक पहुंचाएं। इनमें विलेज सेक्रेटेरिएट, वॉलंटियर सिस्टम, नाडु-नेडु, आरोग्यश्री का विस्तार, शिक्षा में सुधार और किसानों, महिलाओं, छात्रों व गरीबों को दी गई मदद शामिल है। उन्होंने पार्टी को यह भी निर्देश दिया कि वे गठबंधन सरकार द्वारा चुनावी वादों को पूरा न करने की विफलता को उजागर करें और लोगों को हो रही परेशानियों को सामने लाएं। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा, “लोगों के बीच रहें, उनके मुद्दों के लिए लड़ें और उन्हें वाईएसआरसीपी के शासनकाल में किए गए अच्छे कामों की याद दिलाएं। अगर हम ऐसा करते हैं, तो स्थानीय निकाय चुनावों में जीत हासिल करना मुश्किल नहीं होगा।

हरियाणा विधानसभा ने गुरु रविदास संकल्प अभियान पर प्रस्ताव पारित किया

चंडीगढ़। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मंगलवार को संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास के 650वें प्रकाश पर्व को समर्पित राष्ट्रव्यापी ‘गुरु रविदास महाराज समरसता संकल्प अभियान’ पर विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश किया और इसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। प्रस्ताव पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के मौके पर शुरू किया गया यह अभियान 20 फरवरी, 2027 तक चलेगा। इस अभियान का मकसद संत शिरोमणि गुरु रविदास के समानता, करुणा, सेवा, भक्ति, सामाजिक न्याय और सामाजिक सद्भाव के शाश्वत संदेश को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना और अलग-अलग समुदायों के बीच सामाजिक एकता को और मजबूत करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अभियान की शुरुआत वाराणसी में संत शिरोमणि गुरु रविदास की पवित्र जन्मस्थली ‘सर गोबरधन’ से की गई थी। उन्होंने बताया कि इस मौके पर उनकी जन्मस्थली की पवित्र मिट्टी से भरे कलश का सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया और फिर उसे देश भर के विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों को सौंपा गया। सीएम सैनी ने कहा कि श्री गुरु रविदास की जन्मस्थली से पवित्र मिट्टी लेकर निकली कलश यात्रा 4 अगस्त को हरियाणा पहुंची। 5 अगस्त को गुरुग्राम के माता शीतला मंदिर परिसर में एक भव्य स्वागत समारोह आयोजित किया गया। हरियाणा से लाए गए कलश को जिला और गांव के स्तर पर ले जाया जा रहा है, जहां श्रद्धालु पवित्र मिट्टी को स्थानीय मंदिरों की मिट्टी में मिला रहे हैं और संत शिरोमणि गुरु रविदास के सामाजिक सद्भाव के संदेश को लोगों तक पहुंचा रहे हैं। मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि समरसता यात्रा 5 अक्टूबर को हरियाणा पहुंचेगी और 5 नवंबर तक चलेगी। यात्रा के रास्ते में पूरे राज्य में स्वागत द्वार और स्वागत केंद्र बनाए जाएंगे, और जनसभाएं भी आयोजित की जाएंगी। इसके अलावा, 26 नवंबर से 15 जनवरी 2027 तक हॉस्टल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी और कोचिंग सेंटरों में विशेष बातचीत कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि संत शिरोमणि गुरु रविदास का जन्म काशी के पवित्र शहर में माघ पूर्णिमा के पावन अवसर पर हुआ था। उनका व्यक्तित्व पूर्णिमा के चांद की तरह शांत और तेजस्वी था। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संत श्री गुरु रविदास की 649वीं जयंती के मौके पर 1 फरवरी को डेरा सचखंड बल्लान में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में हिस्सा लिया था।

अगस्त में पेट्रोल-डीजल की खपत में जोरदार बढ़ोतरी, आर्थिक गतिविधियों में तेजी के संकेत

नई दिल्ली। देश में पेट्रोल और डीजल की खपत में अगस्‍त में पिछले साल के इसी महीने की तुलना में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह देश में उस महीने के दौरान बढ़ी हुई आर्थिक गतिविधियों को दर्शाता है। ये आकलन पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के योजना प्रकोष्‍ठ के आंकड़ों के अनुसार है। देश में सबसे ज्‍यादा बिकने वाले पेट्रोलियम उत्पाद, डीजल का इस्तेमाल ट्रांसपोर्ट और खेती के क्षेत्रों में होता है। इसकी खपत पिछले साल के इसी महीने में 6.58 मिलियन टन थी, जो बढ़कर 7.00 मिलियन टन हो गई, यानी इसमें 6.46 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। देश के हाईवे नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ है, जिससे कनेक्टिविटी बेहतर हुई है और पूरे देश में सामान की आवाजाही बढ़ी है, जिसके कारण डीजल की खपत में भी बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह देश में ट्रैक्टरों की संख्या बढ़ने से भी ईंधन की खपत बढ़ी है। इस साल अगस्त में कमजोर मानसून के कारण किसानों को सिंचाई के लिए डीजल से चलने वाले पानी के पंपों पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ा, जिससे खपत में बढ़ोतरी हुई है। अगस्त में पेट्रोल की खपत सालाना आधार पर 7.88 प्रतिशत बढ़कर 3.82 मिलियन टन हो गई, जबकि पिछले साल इसी महीने में यह 3.54 मिलियन टन थी। बढ़ती अर्थव्यवस्था में शहरों, कस्बों और ग्रामीण इलाकों में कारों और दोपहिया वाहनों की बिक्री बढ़ने से पेट्रोल की बिक्री में बढ़ोतरी हुई है। सरकारी आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि खाना पकाने में इस्तेमाल होने वाली लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की खपत में अगस्त के दौरान भारी गिरावट दर्ज की गई। अगस्त में एलपीजी की खपत सालाना आधार पर 16.15 प्रतिशत घटकर 2.42 मिलियन टन रह गई, जबकि पिछले साल इसी महीने में यह 2.89 मिलियन टन थी। पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट आई है, जहां से दुनिया का 20 प्रतिशत तेल और गैस निर्यात होता है। इस वजह से उस क्षेत्र से एजपीजी के आयात में बाधा आई है। सामान्य समय में भारत अपनी एलपीजी का 50 प्रतिशत से ज्‍यादा आयात इसी रास्ते से करता है, लेकिन अब उसे दूर के देशों से ईंधन मंगाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। सरकार ने ग्राहकों को खाना पकाने के लिए एलपीजी से पाइप वाली नेचुरल गैस (पीएनजी) पर स्विच करने के लिए प्रोत्साहित किया है और संकट से निपटने के लिए घरेलू पीएनजी कनेक्शन बढ़ाने के मकसद से सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए इंसेंटिव भी शुरू किए हैं।

महाराष्ट्र ने 2029 तक ड्रग्स को पूरी तरह खत्म करने के लिए नीति बनाई

मुंबई। राज्य के भविष्य को सुरक्षित करने के मकसद से एक अहम फैसले में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता वाली महाराष्ट्र कैबिनेट ने मंगलवार को 2029 तक राज्य से नशीले पदार्थों और सिंथेटिक ड्रग्स को पूरी तरह खत्म करने की एक व्यापक नीति को मंजूरी दी। इस कदम के साथ महाराष्ट्र भारत का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जिसने केंद्र सरकार के राष्ट्रीय ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ के तहत इतने बड़े पैमाने पर कई विभागों को मिलाकर एक साथ अभियान शुरू किया है। यह राज्य स्तर पर काम करने का एक नया मानक (बेंचमार्क) स्थापित करेगा। नई मंजूर की गई पॉलिसी में ‘पूरे सरकारी तंत्र के मिलकर काम करने के तरीके’ को अपनाया गया है। इसमें जमीनी स्तर की ग्राम पंचायतों से लेकर जिला, डिवीजन और मंत्रालय स्तर तक सभी प्रशासनिक स्तरों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी कर दिया गया है। सख्त जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए हर सरकारी विभाग ‘एंटी-ड्रग टास्क फोर्स’ (एएनटीएफ) के साथ सीधे तालमेल बिठाने के लिए उप सचिव रैंक के एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति करेगा। एक बयान में कहा गया, “इस पॉलिसी के तहत राज्य में गैर-कानूनी ड्रग्स बनाने वाली फसलों की खेती, ड्रग्स का उत्पादन, ट्रांसपोर्टेशन, बिक्री और प्राकृतिक और सिंथेटिक ड्रग्स के सेवन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, इस बारे में बड़े पैमाने पर जन-जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। इस अभियान को सफल बनाने के लिए सभी विभागों को ‘एंटी-ड्रग टास्क फोर्स’ (एएनटीएफ) के साथ मिलकर काम करना होगा। इसके लिए, मंत्रालय स्तर पर तालमेल बिठाने के लिए हर विभाग से उप सचिव रैंक के एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी।” इस नीति को लागू करने के लिए अलग-अलग विभागों के लिए एक्शन प्लान तैयार किए गए हैं। इसमें अगले शैक्षणिक वर्ष (2027) से कक्षा 5 और उससे ऊपर की स्कूली शिक्षा में ड्रग्स के बारे में जागरूकता का एक पाठ शामिल किया जाएगा। ‘मुख्यमंत्री माझी शाला, सुंदर शाला’ फेज-3 में ड्रग-विरोधी जागरूकता के लिए अतिरिक्त अंक दिए जाएंगे। उच्च और तकनीकी शिक्षा विभाग को सभी शिक्षण संस्थानों के परिसर को ड्रग-मुक्त कैंपस बनाए रखने के लिए कार्रवाई करनी होगी। ‘मुख्यमंत्री समृद्धि पंचायत राज अभियान’ और ‘माझा गांव, आरोग्य संपन्न गांव अभियान’ में भी अतिरिक्त अंक दिए जाएंगे। इसके अलावा, हर साल 26 जून को सबसे अच्छे ड्रग-मुक्त जिले के लिए पुरस्कारों की घोषणा की जाएगी। इसमें 2 अक्टूबर से 30 अप्रैल तक हर जिले के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाएगा। पॉलिसी में ड्रग्स पर नियंत्रण के लिए चार मुख्य आधार तय किए गए हैं। इनमें प्रभावी ढंग से लागू करना, ड्रग्स की सप्लाई में भारी कमी लाना, ड्रग्स की मांग में प्रभावी कमी लाना, और लत, इलाज व पुनर्वास शामिल हैं। ड्रग कंट्रोल को असरदार ढंग से लागू करने की जिम्मेदारी गृह, परिवहन, बंदरगाह, और कानून व न्याय विभागों की होगी। ड्रग्स की सप्लाई रोकने की जिम्मेदारी राजस्व, कृषि और वन विभागों को सौंपी गई है। वहीं, फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन विभाग और उद्योग विभाग को आर्टिफिशियल तरीके से बनाई जाने वाली गैर-कानूनी ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई करनी होगी। ड्रग्स की मांग को असरदार ढंग से कम करने की जिम्मेदारी स्कूल शिक्षा विभाग, उच्च और तकनीकी शिक्षा, खेल विभाग, ग्रामीण विकास, जन स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, कौशल और उद्यमिता, और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग को दी गई है। नशा छुड़ाने, इलाज और पुनर्वास की जिम्मेदारी सामाजिक न्याय और विशेष सहायता, जन स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा विभाग, शहरी विकास के साथ-साथ कौशल, रोजगार, उद्यमिता और इनोवेशन विभाग की होगी।

बंगाल में आद्रा और जॉयचंडी पहाड़ के बीच 11 किलोमीटर लंबी बाईपास लाइन को मंजूरी

कोलकाता। साउथ ईस्टर्न रेलवे (एसईआर) के माल ढुलाई (फ्रेट ट्रांसपोर्टेशन) को बड़ा बढ़ावा मिला है। भारतीय रेलवे ने पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में आद्रा और जॉयचंडी पहाड़ के बीच 272 करोड़ रुपए की लागत से 11 किलोमीटर लंबी बाईपास लाइन के निर्माण को मंजूरी दे दी है। यह प्रोजेक्ट आने वाली तीसरी लाइन के लिए अलग रास्ता और दोनों तरफ से आने-जाने की सुविधा (बाई-डायरेक्शनल कनेक्शन) देगा। इससे रोजाना 6.065 फ्रेट रेक (मालगाड़ी के डिब्बों की कतार) की आवाजाही आसान होगी और औद्योगिक ट्रैफिक में होने वाली संभावित बढ़ोतरी को संभालने में मदद मिलेगी। रेलवे ने कहा, “यह बाईपास खास तौर पर सेल (एसएआईएल) की 23.40 एमटीपीए आयरन ओर (लौह अयस्क) की मांग और भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) के रोजाना 45 कोल रेक के अनुमान से जुड़ी माल ढुलाई में मदद करेगा।” चक्रधरपुर डिवीजन से आयरन ओर, आद्रा होते हुए आसनसोल और दुर्गापुर के स्टील-उत्पादक क्षेत्र और उसके आसपास के स्टील प्लांट तक जाता है। इसी तरह, उस बेल्ट में बीसीसीएल की खदानों से कोकिंग कोल भी आद्रा-जॉयचंडीपहाड़ सेक्शन का इस्तेमाल करता है। रेलवे ने आगे कहा, “आद्रा-जॉयचंडी पहाड़-सांका बाईपास, आद्रा-जॉयचंडी पहाड़ सेक्शन पर मौजूदा ऑपरेशनल रुकावटों और सरफेस-क्रॉसिंग (सड़क या दूसरी पटरी को पार करने) के कारण होने वाली देरी को खत्म करने में मदद करेगा। मौजूदा नेटवर्क 71 प्रतिशत क्षमता पर काम कर रहा है और सरफेस-क्रॉसिंग के कारण मालगाड़ियों की गति प्रभावित होती है। ऐसे में यह बाईपास ऑपरेशनल क्षमता को बेहतर बनाने और आगे की भीड़भाड़ को रोकने में मदद करेगा।” इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से 8.88 एमटीपीए का अतिरिक्त ट्रैफिक संभालने में मदद मिलने की उम्मीद है। जॉयचंडी पहाड़-आद्रा सेक्शन की मौजूदा लाइन क्षमता 47.50 प्रतिशत है, जिसके 2028-29 तक बढ़कर 56.45 प्रतिशत होने की उम्मीद है। रेल मंत्रालय ने कहा, “यह बाईपास भारतीय रेलवे के लिए पहचाने गए एनर्जी, मिनरल और सीमेंट कॉरिडोर का हिस्सा है। अतिरिक्त क्षमता और माल की आसान आवाजाही प्रदान करके, यह प्रोजेक्ट औद्योगिक सामानों के परिवहन को मजबूत करेगा और भविष्य में ट्रैफिक बढ़ने पर ज्‍यादा माल ढुलाई (थ्रूपुट) को संभव बनाएगा।” यह प्रोजेक्ट निर्बाध आवाजाही के जरिए अतिरिक्त क्षमता बनाकर आद्रा-जॉयचंडी पहाड़ कॉरिडोर में माल ढुलाई के बुनियादी ढांचे को मज़बूत करेगा, जिससे माल ढुलाई कार्यों की दक्षता में सुधार होगा।