आईपीयू में विश्व मच्छर दिवस पर तकनीकी संगोष्ठी का आयोजन

नई दिल्ली।गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (जीजीएसआईपीयू) ने विश्व मच्छर दिवस के अवसर पर “स्वच्छ पर्यावरण, स्वस्थ समुदाय: बड़े प्रभाव के लिए छोटे कदम” थीम के तहत वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम और नियंत्रण के लिए जलवायु-अनुकूल पर्यावरण प्रबंधन पर एक तकनीकी संगोष्ठी का आयोजन किया।इस संगोष्ठी का आयोजन सेंटर फॉर सस्टेनेबिलिटी एंड क्लाइमेट चेंज (सीएससीसी), यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ एनवायरनमेंट मैनेजमेंट (यूएसईएम), जीजीएसआईपीयू द्वारा आईसीएमआर-राष्ट्रीय मलेरिया अनुसंधान संस्थान (एनआईएमआर), कैराह वुमेन फाउंडेशन और दिल्ली नगर निगम के सहयोग से किया गया।संगोष्ठी की अध्यक्षता प्रो. वरुण जोशी, डीन, यूएसईएम, जीजीएसआईपीयू ने की। कार्यक्रम में जन-स्वास्थ्य, जलवायु विज्ञान और पर्यावरणीय सामुदायिक कार्यों से जुड़े विशेषज्ञ एक साथ आए। तकनीकी सत्र में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के एनसीडीसी के डॉ. आकाश श्रीवास्तव ने “जलवायु जनित डेंगू और मलेरिया जोखिम – ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव” विषय पर मुख्य भाषण दिया। कैराह वुमेन फाउंडेशन की डॉ. रूप कुमारी ने जलवायु परिवर्तन, वेक्टर जनित रोग और एकीकृत वेक्टर प्रबंधन पर अपने विचार रखे।कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण “वन हेल्थ इन एक्शन” विषय पर पैनल चर्चा थी, जिसकी अध्यक्षता प्रो. प्रोद्युत भट्टाचार्य, प्रमुख, सेंटर फॉर सस्टेनेबिलिटी एंड क्लाइमेट चेंज (सीएससीसी), यूएसईएम, जीजीएसआईपीयू ने की और सह-अध्यक्षता प्रो. एन.सी. गुप्ता, यूएसईएम, जीजीएसआईपीयू ने की। सत्र का संचालन डॉ. रजनी कांत, पूर्व निदेशक, आईसीएमआर-आरएमआरसी गोरखपुर और अध्यक्ष, रोग उन्मूलन, आईसीएमआर ने किया, जिसमें वक्ताओं के रूप में टीसीआई फाउंडेशन के राष्ट्रीय तकनीकी लीड और एनआईएमआर के पूर्व वैज्ञानिक जी डॉ. रमेश सी. धीमान; वैज्ञानिक जी, एनआईएमआर-आईसीएमआर डॉ. हिम्मत सिंह; और दिल्ली नगर निगम की डॉ. अंजलि शामिल थीं।कार्यक्रम में मलेरिया और वेक्टर जनित रोग नियंत्रण में विशिष्ट योगदान को मान्यता देते हुए मलेरिया एवं वेक्टर जनित रोग नियंत्रण में उत्कृष्टता के लिए प्रतिष्ठित सर रोनाल्ड रॉस पुरस्कार डॉ. तनु जैन, निदेशक, राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण केंद्र, दिल्ली को और वेक्टर नियंत्रण में उत्कृष्टता पुरस्कार डॉ. सूरजिता बनर्जी, राज्य कीट विज्ञानी, आईडीएसपी, पश्चिम बंगाल को प्रदान किया गया।छात्रों की भागीदारी के अंतर्गत एक संवादात्मक सत्र और क्विज प्रतियोगिता भी आयोजित की गई, जिसके बाद प्रमुख सिफारिशें, पुरस्कार वितरण और प्रो. पमपोश, सह-समन्वयक, सीएससीसी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया। संगोष्ठी का समापन निवारक कार्रवाई को बढ़ावा देने और स्वस्थ, जलवायु-लचीले समुदायों के निर्माण के लिए जन-स्वास्थ्य संस्थानों, पर्यावरण विशेषज्ञों, समुदायों, शोधकर्ताओं और शहरी प्राधिकरणों के बीच सहयोग को मजबूत करने पर जोर के साथ हुआ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

शिक्षा