बच्चों के टीकाकरण को लेकर धार्मिक गुरूओं के साथ मुख्य विकास अधिकारी ने की बैठक

गाजियाबाद। मुख्य चिकित्सा अधिकारी सभागार गाज़ियाबाद में नियमित टीकाकरण एवं HPV टीकाकरण में प्रगति हेतु धार्मिक गुरुओं एवं जनपद के प्रभावशाली व्यक्तियों की बैठक एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संचालित विभिन्न कार्यक्रमों की बैठक मुख्य विकास अधिकारी कुमार सौरभ की अध्यक्षता में आयोजित की गयी।उक्त बैठक में समस्त जनपद के क्षेत्र जहाँ टीकाकरण कार्यक्रम में कम प्रगति एवं ऐसे परिवार जिनके द्वारा टीकाकरण नहीं करवाया जाता है उनकी सही तरीके से काउंसलिंग धार्मिक गुरुओं एवं जनपद के प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा किये जाने हेतु निर्देश दिए गए।बैठक के दौरान मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं, टीकाकरण कार्यक्रम, संस्थागत प्रसव, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम, बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, गैर-संचारी रोगों की जांच एवं उपचार, मौसमी एवं संक्रामक रोगों की रोकथाम तथा स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं की समीक्षा की गई। उन्होंने स्वास्थ्य केंद्रों पर आवश्यक दवाइयों, जांच सुविधाओं एवं चिकित्सा कर्मियों की उपलब्धता बनाए रखने के निर्देश भी दिए। बैठक में संस्थागत प्रसव एवं पूर्ण टीकाकरण की प्रगति बढ़ाने, उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की नियमित निगरानी, कुपोषण की रोकथाम तथा जन-जागरूकता गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष बल दिया गया।बैठक में समस्त मुख्य चिकित्सा, चिकित्सा अधीक्षक, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, unicef एवं JSI के प्रतिनिधि, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से सभी कर्मचारी एवं उपस्थित रहे।
मुख्य विकास अधिकारी कुमार सौरभ की पहल विकास भवन परिसर में विकसित होंगी जनसुविधाएं, स्वयं सहायता समूहों एवं दिव्यांगजनों को मिलेगा रोजगार का अवसर

गाजियाबाद। मुख्य विकास अधिकारी कुमार सौरभ की अध्यक्षता में आज विकास भवन, गाजियाबाद में विकास भवन परिसर में निर्मित दुकानों के आवंटन, संचालन एवं परिसर में विभिन्न जनसुविधाओं को विकसित किए जाने के संबंध में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।बैठक में विकास भवन परिसर में निर्मित की जा रही दुकानों को सुव्यवस्थित रूप से संचालित करने, उनकी आंतरिक एवं बाहरी साज-सज्जा, विद्युत एवं पेयजल कनेक्शन, आउटडोर स्वरूप तथा दुकानों को शीघ्र क्रियाशील किए जाने के संबंध में विस्तार से चर्चा की गई। मुख्य विकास अधिकारी ने संबंधित अधिकारियों एवं कार्यदायी संस्था के प्रतिनिधियों को आवश्यक व्यवस्थाएं समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए।विकास भवन परिसर को आम नागरिकों के लिए अधिक सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से यहां खान-पान एवं कैंटीन की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए जाने वाले उत्पादों के प्रदर्शन एवं बिक्री के लिए भी स्थान उपलब्ध कराया जाएगा। इससे स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को अपने उत्पादों के प्रदर्शन, प्रचार एवं विपणन के लिए बेहतर मंच प्राप्त होगा।परिसर में दिव्यांगजनों द्वारा संचालित कैंटीन भी प्रारंभ की जाएगी, जिससे दिव्यांगजनों को स्वरोजगार एवं आजीविका का अवसर उपलब्ध हो सके। इसके अतिरिक्त आम नागरिकों की सुविधा के लिए बैंकिंग सेवाओं एवं एटीएम आदि की सुविधा विकसित किए जाने पर भी चर्चा की गई। एसबीआई सहित संबंधित बैंक के प्रतिनिधियों से आवश्यक व्यवस्थाओं के संबंध में विचार-विमर्श किया गया।मुख्य विकास अधिकारी कुमार सौरभ ने कहा कि विकास भवन में प्रतिदिन बड़ी संख्या में आम नागरिक विभिन्न विभागों से संबंधित कार्यों के लिए आते हैं। ऐसे में परिसर में खान-पान, बैंकिंग तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं सुव्यवस्थित रूप से उपलब्ध होने से आगंतुकों को सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं एवं दिव्यांगजनों को रोजगार तथा अपने उत्पादों के विपणन के अवसर भी प्राप्त होंगे।बैठक में दुकानों के आवंटन एवं संचालन, आवंटित दुकानों को शीघ्र प्रारंभ कराने, दुकानों की साज-सज्जा, परिसर के बाहरी स्वरूप को आकर्षक एवं व्यवस्थित बनाने तथा विद्युत-पानी सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करने के संबंध में संबंधित अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों के साथ विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।बैठक में परियोजना निदेशक, ग्रामीण विकास विभाग प्रदीप पांडे, जिला विकास अधिकारी प्रज्ञा श्रीवास्तव, जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी अंशुल चौहान, अग्रणी जिला प्रबंधक (LDM) बुद्धराम, भागीरथ सेवा संस्थान के संचालक अमिताभ शुक्ल, नीव शक्ति संस्थान से ऋचा वल्लभ, विद्युत विभाग एवं कार्यदायी संस्था के प्रतिनिधियों के साथ-साथ संबंधित बैंकों के प्रतिनिधि एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।मुख्य विकास अधिकारी ने सभी संबंधित विभागों, बैंकों एवं संस्थाओं को आपसी समन्वय स्थापित करते हुए आवश्यक कार्यवाही शीघ्र पूर्ण करने तथा विकास भवन परिसर में प्रस्तावित दुकानों एवं जनसुविधाओं को व्यवस्थित एवं प्रभावी रूप से संचालित कराने के निर्देश दिए।
योगी सरकार के निपुण मॉडल को समझने गाजियाबाद पहुंचे पांच देशों के प्रतिनिधि, 11 परिषदीय विद्यालयों में देखा कक्षा शिक्षण

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बुनियादी शिक्षा और बच्चों की सीखने की क्षमता को मजबूत करने के प्रयास अब अंतरराष्ट्रीय पीयर-लर्निंग का विषय बन रहे हैं। निपुण भारत मिशन के अंतर्गत भारत में बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (एफएलएन) सुधारों को समझने के उद्देश्य से केन्या, ब्राजील, अर्जेंटीना, दक्षिण अफ्रीका और सेनेगल के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों एवं नागरिक समाज के प्रतिनिधियों का लगभग 70 सदस्यीय दल गाजियाबाद पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने परिषदीय विद्यालयों में कक्षा शिक्षण का प्रत्यक्ष अवलोकन कर निपुण भारत की नीतियों के जमीनी क्रियान्वयन को समझा।23 से 27 अगस्त तक चल रहे सप्ताहभर के पीयर-लर्निंग इमर्शन कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिनिधिमंडल को छोटे-छोटे समूहों में विभाजित कर गाजियाबाद के नगर, राजापुर, लोनी और मुरादनगर ब्लॉकों के 11 विद्यालयों का भ्रमण कराया गया। प्रतिनिधियों ने कक्षा-कक्ष में शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया देखी तथा विद्यार्थियों, शिक्षकों, प्रधानाचार्यों, अकादमिक रिसोर्स पर्सन्स (एआरपी) और राज्य संसाधन समूह के अधिकारियों से संवाद किया।गाजियाबाद के परिषदीय विद्यालयों में पांच देशों के प्रतिनिधियों का यह अध्ययन दौरा उत्तर प्रदेश में निपुण भारत मिशन के अंतर्गत एफएलएन सुधारों को नीति से कक्षा तक पहुंचाने की प्रक्रिया को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साझा सीख का अवसर प्रदान कर रहा है। यह है उद्देश्य कार्यक्रम का उद्देश्य भारत में निपुण भारत मिशन के अंतर्गत एफएलएन सुधारों को समझना और अनुभव साझा करना है। गाजियाबाद के विद्यालयों में कक्षा शिक्षण के प्रत्यक्ष अवलोकन और शिक्षा अधिकारियों के साथ तकनीकी संवाद के माध्यम से प्रतिनिधियों ने एफएलएन सुधारों के जमीनी क्रियान्वयन को करीब से समझा। शिक्षा विभाग के साथ हुई तकनीकी चर्चा विद्यालयों के दौरे के बाद उत्तर प्रदेश शिक्षा विभाग के साथ विस्तृत तकनीकी चर्चा हुई। इसमें गाजियाबाद के जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, बेसिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी और राज्य संसाधन समूह के सदस्य शामिल हुए। चर्चा में पाठ्यक्रम एवं अध्ययन उद्देश्यों, संरचित शिक्षण-अधिगम सामग्री, शिक्षक मार्गदर्शन एवं मेंटरिंग, आकलन और आंकड़ों के उपयोग पर विचार-विमर्श हुआ। साथ ही सुधारों को बड़े स्तर पर लागू करने में मिडिल टीयर की भूमिका पर भी चर्चा की गई। नीति से कक्षा तक की प्रक्रिया को समझा विद्यालय भ्रमण के दौरान प्रतिनिधियों ने यह जाना कि निपुण भारत मिशन के अंतर्गत तैयार नीतियों और एफएलएन सुधारों को कक्षा स्तर पर किस तरह लागू किया जा रहा है। विद्यार्थियों और शिक्षकों से सीधे संवाद के माध्यम से शिक्षण प्रक्रिया, अकादमिक सहयोग और बच्चों की सीख से जुड़े अनुभवों को समझा गया।ज्ञात हो कि लाइटहाउस इंडिया इमर्शन कार्यक्रम की मेजबानी सेंट्रल स्क्वेयर फाउंडेशन कर रहा है। यह भारत की एंकर लाइटहाउस संस्था है। कार्यक्रम में सेंट्रो लेमन और लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन का सहयोग प्राप्त है तथा ग्लोबल स्कूल फोरम, ऑप्टिमा और गेट्स फाउंडेशन द्वारा इसका वित्तपोषण किया जा रहा है।
रक्षाबंधन की खरीदारी से देशभर के बाज़ारों में रौनक, ‘विकसित भारत’, ‘मोदी गारंटी’ और ‘ब्रह्मोस’ राखियां बनीं पहली पसंद : खंडेलवाल

नई दिल्ली।रक्षाबंधन पर्व में अब केवल चार दिन शेष रहने के साथ ही दिल्ली सहित देशभर के बाजारों में खरीदारी अपने चरम पर पहुंच गई है। दिल्ली के चांदनी चौक, सदर बाजार, करोल बाग, लाजपत नगर, कमला नगर, राजौरी गार्डन, गांधी नगर, खारी बावली, लक्ष्मी नगर तथा विभिन्न स्थानीय बाजारों में ग्राहकों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। शाम के समय बाजारों में विशेष रौनक है और व्यापारियों के अनुसार इस वर्ष रक्षाबंधन का उत्साह पिछले वर्षों की तुलना में कहीं अधिक दिखाई दे रहा है वहीं देश भर के अन्य राज्यों के बाजारों में भी राखी की त्यौहारी खरीदारी को लेकर ग्राहकों में भारी उत्साह है।इसी क्रम में आज चांदनी चौक के सांसद एवं कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल के कार्यालय में महिला उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों तथा कारीगरों ने देशभक्ति एवं राष्ट्र निर्माण की भावना से प्रेरित विशेष थीम आधारित राखियों के निर्माण का लाइव प्रदर्शन किया। इस अवसर पर महिला कारीगरों ने अपने हाथों से तैयार अनूठी राखियों का प्रदर्शन भी किया।खंडेलवाल ने कहा कि इस वर्ष पारंपरिक राखियों के साथ-साथ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की जनकल्याणकारी योजनाओं, भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा तथा ‘विकसित भारत-2047’ के संकल्प से प्रेरित राखियां विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। विशेष रूप से ‘विकसित भारत राखी’, ‘मोदी गारंटी राखी’, ‘ब्रह्मोस राखी’, ‘नारी वंदन राखी’, ‘आत्मनिर्भर भारत राखी’, ‘वोकल फॉर लोकल राखी’, ‘भारत गौरव राखी’, ‘लखपति दीदी राखी’, ‘नमामि गंगे राखी’, ‘राष्ट्र रक्षा सूत्र राखी’ और ‘अमृतकाल राखी’ की मांग लगातार बढ़ रही है।उन्होंने बताया कि युवाओं और बच्चों में विशेष रूप से ‘ब्रह्मोस राखी’, ‘राष्ट्र रक्षा सूत्र राखी’ और ‘विकसित भारत राखी’ को लेकर असाधारण उत्साह देखा जा रहा है। वहीं महिलाओं के बीच ‘नारी वंदन राखी’ तथा ‘लखपति दीदी राखी’ विशेष लोकप्रिय हो रही हैं, जो महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का संदेश दे रही हैं।खंडेलवाल ने कहा कि कैट को देशभर के व्यापारिक संगठनों से प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार इस वर्ष रक्षाबंधन पर केवल राखियों का कारोबार लगभग ₹25 हजार करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि अकेले दिल्ली में यह कारोबार ₹4 हजार करोड़ के आसपास रहने की संभावना है। यदि उपहार, मिठाइयों, परिधानों, इलेक्ट्रॉनिक्स, सजावटी वस्तुओं, ड्राई फ्रूट्स, पूजा सामग्री और अन्य त्योहारी उत्पादों को भी शामिल किया जाए तो रक्षाबंधन से संबंधित कुल व्यापार ₹30 हजार करोड़ से अधिक होने की संभावना है।उन्होंने बताया कि इस वर्ष बाजारों में उपहार पैकेज, चॉकलेट हैम्पर, ड्राई फ्रूट गिफ्ट बॉक्स, हस्तशिल्प उत्पाद, एथनिक परिधान और पारंपरिक मिठाइयों की बिक्री में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा रही है। ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की मौजूदगी के बावजूद बड़ी संख्या में उपभोक्ता स्थानीय बाजारों में जाकर खरीदारी करना पसंद कर रहे हैं, जिससे बाजारों में नई ऊर्जा का संचार हुआ है। खंडेलवाल ने कहा कि देश के विभिन्न क्षेत्रों की कला और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने वाली राखियां भी लोगों को आकर्षित कर रही हैं। इनमें नागपुर की खादी राखी, जयपुर की सांगानेरी कला राखी, पुणे की सीड राखी, असम की चाय पत्ती राखी, कोलकाता की जूट राखी, जनजातीय बांस राखी, मुंबई की सिल्क राखी तथा बिहार की मधुबनी कला राखी प्रमुख हैं। पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ तैयार की गई बीज (सीड) राखियों और प्राकृतिक सामग्री से बनी इको-फ्रेंडली राखियों की मांग भी लगातार बढ़ रही है।उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन का यह पर्व केवल भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक नहीं रह गया है, बल्कि अब यह स्वदेशी, आत्मनिर्भरता, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र गौरव का भी उत्सव बन चुका है। स्वदेशी राखियों की बढ़ती मांग से लाखों महिला उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों, कुटीर उद्योगों और स्थानीय कारीगरों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिल रहा है। खंडेलवाल ने व्यापारियों और उपभोक्ताओं से अपील करते हुए कहा कि आगामी सभी त्योहारों पर भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता देकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘लोकल फॉर ग्लोबल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को और अधिक मजबूत बनाएं।उन्होंने कहा, “आज की स्वदेशी राखी केवल रक्षा सूत्र नहीं, बल्कि विकसित भारत, आत्मनिर्भर भारत, महिला सशक्तिकरण और राष्ट्र गौरव का सशक्त प्रतीक बन चुकी है। प्रत्येक राखी भारतीय कारीगरों के श्रम, भारतीय संस्कृति की समृद्धि और भारत के उज्ज्वल भविष्य का संदेश लेकर आ रही है।
थॉमस कुक इंडिया ने इंडिया फॉरेक्स रिपोर्ट 2026 जारी की

नई दिल्ली। थॉमस कुक (इंडिया) लिमिटेड ने अपनी इंडिया फॉरेक्स रिपोर्ट 2026 जारी की है। यह रिपोर्ट अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के दौरान कंपनी के फॉरेक्स लेनदेन के आंकड़ों पर आधारित है और इस बात का विश्लेषण करती है कि भारतीय ग्राहक छुट्टियों, विदेश में शिक्षा और व्यावसायिक यात्राओं के लिए विदेशी मुद्रा कैसे खरीदते और उसका उपयोग करते हैं।महत्त्वाची निरीक्षणे:उभरते शहर फॉरेक्स वृद्धि के अगले चरण को गति दे रहे हैं: टियर 2 और टियर 3 शहर मिलकर कुल फॉरेक्स मांग में 53% का योगदान देते हैं, जिसमें टियर 2 शहरों की हिस्सेदारी 41% और टियर 3 शहरों की 12% है। आंकड़े भारत के प्रमुख महानगरों से परे अंतरराष्ट्रीय यात्रा, विदेश में शिक्षा और वैश्विक स्तर पर बढ़ती गतिशीलता को दर्शाते हैं।यात्री अब केवल अमेरिकी डॉलर तक सीमित नहीं हैं: जहां फॉरेक्स मांग में अमेरिकी डॉलर की हिस्सेदारी 49% है, वहीं यूरोप से संबंधित मुद्राओं का योगदान 23% और एशियाई मुद्राओं का 11% है। थाई बाथ, सिंगापुर डॉलर और वियतनामी डोंग जैसी मुद्राओं की बढ़ती मांग यह दर्शाती है कि यात्री अब अपने गंतव्य देश की मुद्रा साथ रखने को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं।युवा ग्राहक डिजिटल फॉरेक्स अपनाने को बढ़ावा दे रहे हैं: अब 25% ग्राहक वेबसाइट, ऐप, व्हाट्सऐप और क्विक कॉमर्स के माध्यम से डिजिटल रूप से लेनदेन कर रहे हैं। पिछले दो वर्षों में DIY यानी स्वयं-सेवा प्लेटफॉर्म का उपयोग साल-दर-साल 50% बढ़ा है। जहां शाखा की सहायता से लेनदेन करने वाले ग्राहकों की औसत आयु 42 वर्ष है, वहीं क्विक कॉमर्स के माध्यम से लेनदेन करने वाले ग्राहकों की औसत आयु 31 वर्ष है।फॉरेक्स भुगतान अब केवल नकदी तक सीमित नहीं हैं: छुट्टियों के लिए यात्रा करने वाले ग्राहकों के बीच नकदी का हिस्सा 75% लेनदेन में है, जबकि कार्ड का हिस्सा 25% है। हालांकि, कुल फॉरेक्स मूल्य में से 39% मूल्य कार्ड पर लोड किया जाता है, जो नियोजित और अधिक मूल्य वाले खर्चों के लिए कार्ड के बढ़ते उपयोग और भरोसे को दर्शाता है। कॉन्टैक्टलेस और ऑनलाइन लेनदेन पहले ही फॉरेक्स कार्ड के उपयोग में 57% का योगदान देते हैं, जिसे अधिक सहज डिजिटल भुगतान अनुभव का समर्थन मिल रहा है।विदेश में शिक्षा का बाजार पारंपरिक गंतव्यों से आगे बढ़ रहा है: विदेश में शिक्षा से संबंधित फॉरेक्स मांग में यूरोप की हिस्सेदारी 38%, अमेरिका की 34% और ऑस्ट्रेलिया की 10% है। पारंपरिक अमेरिका और यूके के बाजारों से आगे अन्य गंतव्यों की बढ़ती हिस्सेदारी भारतीय छात्रों के बीच बढ़ते विकल्पों को दर्शाती है। शिक्षा से जुड़े फॉरेक्स आउटफ्लो में 81% हिस्सा विश्वविद्यालय की फीस का है, जबकि रहने-खाने जैसे जीवन-यापन के खर्चों से जुड़े लेनदेन में फॉरेक्स कार्ड की हिस्सेदारी 73% है।व्यावसायिक यात्री फॉरेक्स कार्ड को स्पष्ट रूप से प्राथमिकता दे रहे हैं: कॉर्पोरेट फॉरेक्स उपयोग में फॉरेक्स कार्ड की हिस्सेदारी 84% है, जबकि नकदी की हिस्सेदारी 16% है। कॉर्पोरेट कार्ड के उपयोग में मल्टी-करेंसी कार्ड की हिस्सेदारी 76% है, जो कई देशों और मुद्राओं में लचीले भुगतान विकल्पों की आवश्यकता को दर्शाती है। कॉर्पोरेट यात्रा के लिए यूरोप 45% हिस्सेदारी के साथ प्रमुख क्षेत्र है, इसके बाद उत्तरी अमेरिका 23% और एशिया 19% पर है।थॉमस कुक (इंडिया) लिमिटेड के चीफ बिजनेस ऑफिसर – फॉरेन एक्सचेंज,दीपेश वर्मा ने कहा: “इंडिया फॉरेक्स रिपोर्ट 2026 हमें इस बात की स्पष्ट तस्वीर देती है कि भारत की फॉरेक्स जरूरतें किस तरह बदल रही हैं। हम टियर 2 और टियर 3 शहरों से बढ़ती मांग, डिजिटल फॉरेक्स चैनलों को तेजी से अपनाने, गंतव्य-विशिष्ट मुद्राओं के बढ़ते उपयोग और छात्रों तथा व्यावसायिक यात्रियों के बीच फॉरेक्स कार्ड की मजबूत प्राथमिकता देख रहे हैं। ये रुझान भारत से बढ़ती अंतरराष्ट्रीय यात्राओं, विदेश में शिक्षा और वैश्विक व्यावसायिक गतिविधियों को दर्शाते हैं।
अनंत नाद देवी चित्रलेखाजी द्वारा जब संगीत बना आत्मिक अनुभव, यशोभूमि में गूंजा भक्ति और भारतीय संगीत का स्वर

नई दिल्ली।नई दिल्ली के यशोभूमि में देवी चित्रलेखाजी की संकल्पना और आध्यात्मिक मार्गदर्शन में Anant Naad – Music for the Soul का भव्य आयोजन हुआ। यह ऐसा अनूठा Spiritual Music Concert रहा, जिसमें भक्ति, भारतीय संगीत और आधुनिक लाइव कॉन्सर्ट अनुभव को एक साथ प्रस्तुत किया गया। खास बात यह रही कि इस अनुभव ने Gen Z और Alpha generation को भी भारतीय आध्यात्मिकता और संगीत से जोड़ने का प्रयास किया।कार्यक्रम में देवी चित्रलेखाजी की मधुर आवाज़ और सितार साधक भगीरथ भट्ट की प्रस्तुति ने संगीत और आध्यात्मिकता के इस संगम को विशेष बनाया। Anant Naad की संकल्पना का vision जुलाई 2025 में माधव तिवारी, राजकुमार सिंह और नितिन समाधिया ने देखा था, जो अब यशोभूमि के मंच पर साकार हुआ।Sameer Sata (Alphonso Studios) ने Anant Naad की इस संकल्पना को आगे बढ़ाने और इसे बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके प्रयासों से 21 शो पहले ही लॉक हो चुके हैं, जो Anant Naad को भारत के विभिन्न शहरों और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।Anant Naad अब अपनी आगे की संगीत यात्रा के लिए तैयार है, जहां भक्ति, भारतीय संगीत और आध्यात्मिकता के इस अनूठे अनुभव को देश और विदेश के और बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचाया जाएगा।
शिवोत्सव 2026 ने दिल्ली में रचा भक्ति, संगीत और संस्कृति का अनूठा संगम

नई दिल्ली। सावन के पावन महीने में इस बार दिल्ली की राजधानी ने भगवान शिव की भक्ति का एक अत्यंत भव्य, आधुनिक और अलौकिक रूप देखा। ‘शिवोत्सव 2026 – इस सावन शिव जी की संगीतमय बारात’ का आयोजन औरीएट बैंक्वेट, यमुना स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स, दिल्ली में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस भव्य आयोजन में भक्ति, संगीत, संस्कृति और लाइव एंटरटेनमेंट का ऐसा अनूठा संगम देखने को मिला, जिसने उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। बज़स्टेज और कीडीवीडि द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में परिवारों, युवाओं, शिव भक्तों, कलाकारों, उद्यमियों और दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य लोगों ने भारी संख्या में हिस्सा लिया।इस आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण भव्य शिव जी की संगीतमय बारात रही, जिसमें श्रद्धालुओं और दर्शकों ने भक्ति और उत्साह के साथ बढ़-चढ़कर भाग लिया। इसके अतिरिक्त, महाकाल भस्म आरती का जीवंत अनुभव, लाइव भजन संध्या, मनमोहक डमरू प्रदर्शन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और मंत्रम बैंड की लाइव परफॉरमेंस ने इस शाम को ऐतिहासिक बना दिया।शिवोत्सव का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक सावन उत्सव को आधुनिक लाइव एंटरटेनमेंट के माध्यम से आज की युवा पीढ़ी तक पहुंचाना था। जहां सावन और भगवान शिव से जुड़े आयोजन आमतौर पर पारंपरिक मंदिरों या सीमित भजन संध्याओं तक ही सीमित रहते हैं, वहीं शिवोत्सव ने इन्हीं गहरी आस्था और भावनाओं को संगीत, भव्य मंच सज्जा और सक्रिय दर्शक सहभागिता (Audience Participation) के साथ एक बिल्कुल नए और आधुनिक प्रारूप में प्रस्तुत किया।इस अनूठे आयोजन को आकार देने और इसके सफल संचालन में बज़स्टेज की पूरी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। रोहन शर्मा (फाउंडर, बज़स्टेज) के नेतृत्व में इस आयोजन के समग्र अनुभवात्मक संकल्पना, ब्रांडिंग और क्रियान्वयन को एक नई ऊँचाई मिली। अक्षिता जैन ने आयोजन की रणनीतिक योजना, समन्वय और ऑन-ग्राउंड प्रबंधन में अहम जिम्मेदारी निभाई। इस सफल आयोजन में प्रिया जैन की भूमिका भी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही।इस कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने के लिए दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों से कई प्रसिद्ध हस्तियां और बिज़नेस लीडर्स उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विशेष रूप से संजय मित्तल (‘वर्क किंग ऑफ़ इंडिया’) और दिल्ली की डिप्टी मेयर डॉ. मोनिका पंत की गरिमामयी उपस्थिति रही। मंत्रम बैंड की मंत्रमुग्ध कर देने वाली प्रस्तुति ने पूरे प्रांगण को शिवमय कर दिया। इस उत्सव की सबसे खास बात यह रही कि इसमें बुजुर्गों से लेकर युवाओं और बच्चों तक, हर आयु वर्ग के लोग एक साथ झूमते नजर आए।कार्यक्रम की सफलता पर अपने विचार साझा करते हुए बज़स्टेज के फाउंडर रोहन शर्मा ने कहा, “शिवोत्सव हमारे लिए केवल एक इवेंट नहीं था, बल्कि हमारा प्रयास था कि महादेव की भक्ति और सावन की परंपरा को एक ऐसा जीवंत अनुभव बनाया जाए, जिससे परिवार, युवा और सभी शिव भक्त एक साथ जुड़ सकें। जिस अपार स्नेह और ऊर्जा के साथ लोगों ने शिव जी की संगीतमय बारात और पूरे आयोजन में हिस्सा लिया, वह हमारे लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है।सह-आयोजक अक्षिता जैन ने कहा, “इस भव्य आयोजन के पीछे पूरी टीम की महीनों की कड़ी मेहनत थी। हमारा उद्देश्य हर आयु वर्ग के लिए एक ऐसा आनंदमय और आध्यात्मिक माहौल तैयार करना था, जहां लोग भक्ति के साथ-साथ भरपूर मनोरंजन का भी अनुभव कर सकें। दर्शकों की असीम ऊर्जा ने इस शाम को वास्तव में खास बना दिया।शिवोत्सव के इस पहले संस्करण को मिली अभूतपूर्व सफलता और जनसमर्थन के बाद, आयोजकों ने संकेत दिया है कि वे भविष्य में इसे एक वार्षिक उत्सव के रूप में आगे बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं। आने वाले समय में ऐसे और भी भव्य आयोजनों की रूपरेखा तैयार की जा रही है, जिनके माध्यम से भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं, भक्ति, संगीत और अनोखे मनोरंजन को एक मंच पर प्रस्तुत किया जा सके।
डॉ. केयर हॉस्पिटल्स ने शुरू किया 100 दिवसीय एंटीबायोटिक जागरूकता अभियान

नई दिल्ली। डॉ. केयर हॉस्पिटल्स ने लोगों को एंटीबायोटिक दवाओं के उचित और जिम्मेदार उपयोग के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से 100 दिवसीय एंटीबायोटिक जागरूकता अभियान शुरू किया है। यह अभियान 15 अगस्त से 14 नवंबर तक चलेगा। अभियान से पहले तेलंगाना के विभिन्न शहरों और गांवों में 60 दिनों तक किए गए सर्वेक्षण में दवाओं और एंटीबायोटिक के अनावश्यक उपयोग को लेकर महत्वपूर्ण चिंताएं सामने आईं।डॉ. ए. एम. रेड्डी, चेयरमैन, डॉ. केयर हॉस्पिटल्स ने कहा कि एंटीबायोटिक का बिना आवश्यकता और चिकित्सकीय सलाह के उपयोग शरीर के लाभकारी सूक्ष्मजीवों को प्रभावित कर सकता है तथा एंटीबायोटिक प्रतिरोध जैसी गंभीर समस्या को बढ़ावा दे सकता है।डॉ. गौरी शंकर, डायरेक्टर, डॉ. कैंसर केयर ने अत्यधिक दवा सेवन और आंतों के स्वास्थ्य पर इसके प्रभाव के प्रति सावधान किया।डॉ. अमरावती, डायरेक्टर, डॉ. स्किन ने लोगों से बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक लेने से बचने और चिकित्सकों से इनका विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करने की अपील की।डॉ. केयर हॉस्पिटल्स ने सभी नागरिकों से इस अभियान से जुड़कर जिम्मेदार एंटीबायोटिक उपयोग और स्वस्थ भविष्य के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
राजस्थानी लोकनृत्य और चित्रकला की रंगीन छटा से सजेगा राजधानी का मंच

नई दिल्ली। राजस्थानी अकादमी द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में 34वीं राजस्थानी लोक नृत्य प्रतियोगिता, 10वें सुभाष लखोटिया श्रवण कुमार पुरस्कार एवं 14वीं राजस्थानी चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित रशियन सेंटर ऑफ साइंस एंड कल्चर, फिरोजशाह रोड में किया जाएगा।राजस्थानी अकादमी के अध्यक्ष डॉ. गौरव गुप्ता ने बताया कि राजस्थानी लोक संस्कृति, कला और परम्पराओं को देश की राजधानी में नई पीढ़ी तक पहुँचाने तथा प्रवासी राजस्थानियों को अपनी माटी की संस्कृति से जोड़ने के उद्देश्य से यह आयोजन प्रति वर्ष किया जाता है । राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति देश-दुनिया में अपनी विशिष्ट पहचान रखती है। लोकनृत्य, लोकसंगीत, चित्रकला और पारम्परिक कलाएं राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत की जीवंत अभिव्यक्ति हैं। अकादमी का प्रयास है कि इन कलाओं को संरक्षण देने के साथ-साथ प्रतिभाशाली कलाकारों और नई पीढ़ी के रचनाकारों को उचित मंच एवं प्रोत्साहन मिले।डॉ गौरव गुप्ता ने कहा कि राजस्थानी लोक नृत्य प्रतियोगिता के माध्यम से राजस्थान के विभिन्न अंचलों की लोकनृत्य परम्पराओं को राजधानी में प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से राजस्थान की विविध लोक संस्कृतियों, वेशभूषाओं, लोकधुनों और पारम्परिक नृत्य शैलियों की मनोहारी झलक प्रस्तुत करेंगे। इससे दिल्ली में रह रहे प्रवासी राजस्थानी परिवारों के साथ-साथ अन्य राज्यों के कला प्रेमियों को भी राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को करीब से जानने का अवसर मिलेगा।डॉ. गुप्ता ने बताया कि सुभाष लखोटिया श्रवण कुमार पुरस्कार के माध्यम से समाज और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली ऐसी प्रतिभाओं एवं व्यक्तित्वों को जो कि अपने माता /पिता की निस्वार्थ भाव से सेवा करते हैं को सम्मानित करने की परम्परा को आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मान समाज में सेवा, समर्पण और सांस्कृतिक चेतना के प्रति सकारात्मक वातावरण निर्मित करते हैं।इसी अवसर पर आयोजित होने वाली 14वीं राजस्थानी चित्रकला प्रतियोगिता में कलाकार राजस्थान की लोकजीवन परम्पराओं, ग्रामीण परिवेश, लोकदेवताओं, मेलों-त्योहारों और सांस्कृतिक विरासत को अपनी कला के माध्यम से कैनवास पर उकेरेंगे। प्रतियोगिता का उद्देश्य युवा और उभरते चित्रकारों को प्रोत्साहित करना तथा राजस्थानी कला की विशिष्ट शैली को व्यापक मंच प्रदान करना है।राजस्थानी अकादमी के अध्यक्ष डॉ. गौरव गुप्ता ने कहा कि राजस्थान केवल भौगोलिक सीमा का नाम नहीं, बल्कि अपनी लोकभाषा, लोकसंगीत, लोककला, परम्पराओं और जीवन-मूल्यों के कारण एक विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान है। अकादमी इस पहचान को देश की राजधानी में निरन्तर मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।उन्होंने कहा कि आज जब वैश्वीकरण के दौर में नई पीढ़ी तेजी से आधुनिक जीवनशैली की ओर बढ़ रही है, ऐसे समय में अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से उसका जुड़ाव और भी आवश्यक हो गया है। लोककलाओं के संरक्षण और कलाकारों को सम्मान देने से संस्कृति की यह धरोहर आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रूप से पहुँचाई जा सकती है।9 अक्टूबर को होने वाला यह आयोजन राजस्थान की लोक संस्कृति, कला और परम्परा का राजधानी दिल्ली में एक भव्य सांस्कृतिक उत्सव साबित होगा। अकादमी को विश्वास है कि बड़ी संख्या में कला एवं संस्कृति प्रेमी इस आयोजन में सहभागी बनकर राजस्थान की रंग-बिरंगी लोक विरासत का आनंद उठाएंगे।
गुरुग्राम में भारी बारिश के बीच सनाथ रोड बनी मिसाल

गुरुग्राम। साइबर सिटी गुडग़ांव में मंगलवार को हुई भारी बारिश ने कई इलाकों की रफ्तार थाम दी। शहर की प्रमुख सडक़ों पर जलजमाव के कारण ट्रैफिक प्रभावित हुआ और लोगों को घंटों परेशानियों का सामना करना पड़ा। हालांकि, इस बीच सनाथ रोड ने एक अलग मिसाल पेश की। यहां न तो सडक़ पर पानी जमा हुआ और न ही पैदल यात्रियों एवं साइकिल चालकों को किसी तरह की परेशानी हुई। साफ-सुथरे फुटपाथ और सुचारु जल निकासी व्यवस्था ने यह साबित कर दिया कि बेहतर योजना और आधुनिक सडक़ डिजाइन से जलभराव जैसी समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।सनाथ रोड को गुरुग्राम की मॉडल कम्प्लीट स्ट्रीट के रूप में विकसित किया गया है। इस परियोजना को राहगिरी फाउंडेशन, गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (जीएमडीए), नगर निगम गुरुग्राम (एमसीजी) तथा अन्य सहयोगी संस्थाओं ने मिलकर तैयार किया है। सडक़ पर बायोस्वेल्स, रेन गार्डन, वैज्ञानिक ढलान, आधुनिक जल इनलेट और हरित क्षेत्र विकसित किए गए हैं, जो वर्षा जल को रोकने, उसकी गति कम करने और उसे जमीन में समाहित करने का कार्य करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, बायोस्वेल्स अपने आसपास आने वाले लगभग 80 प्रतिशत वर्षा जल को सोख लेते हैं, जबकि अतिरिक्त पानी को व्यवस्थित ड्रेनेज सिस्टम के माध्यम से बाहर निकाल दिया जाता है।राहगिरी फाउंडेशन की फाउंडर ट्रस्टी सारिका पांडा भट्ट ने कहा कि मंगलवार को हुई बारिश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बाढ़ केवल अधिक वर्षा का परिणाम नहीं होती, बल्कि यह इस बात पर भी निर्भर करती है कि सडक़ें किस प्रकार डिजाइन की गई हैं। उन्होंने कहा कि सनाथ रोड पर पेड़, बायोस्वेल्स, जल इनलेट, सुरक्षित फुटपाथ, साइकिल ट्रैक और सुविचारित लैंडस्केप एक साथ मिलकर काम करते हैं। यदि शहरों की योजना प्रकृति के अनुरूप बनाई जाए तो सडक़ें समस्या नहीं, बल्कि समाधान बन सकती हैं।वहीं, गुरुग्राम नगर निगम आयुक्त प्रदीप दहिया ने भी जलजमाव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए आधुनिक और टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर बल दिया। उनका कहना है कि उद्देश्य केवल मानसून के दौरान पानी निकालना नहीं, बल्कि शहर में जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित करना होना चाहिए।बारिश के दौरान नरसिंहपुर, हीरो होंडा चौक, राजीव चौक, इफको चौक, ओल्ड दिल्ली रोड और सोहना रोड सहित कई स्थानों पर जलभराव की स्थिति देखने को मिली, जबकि सनाथ रोड पूरी तरह सामान्य रही। यह सडक़ दिखाती है कि बेहतर शहरी डिजाइन, प्रभावी जल प्रबंधन और विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि गुरुग्राम सहित देश के अन्य शहरों में भी ‘कम्प्लीट स्ट्रीट’ मॉडल अपनाकर सुरक्षित, हरित और जलभराव मुक्त शहरी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा सकते हैं।