सलमान से जैकलीन तक, इन सितारों के घर धूमधाम से मनाया जाता है गणेश उत्सव

मुंबई। गणेश चतुर्थी आते ही मुंबई की गलियों से लेकर फिल्मी सितारों के घरों तक ‘गणपति बप्पा मोरया’ की गूंज सुनाई देने लगती है। आम लोगों की तरह बॉलीवुड के कई सितारों के लिए भी गणेश उत्सव का त्योहार बेहद खास होता है। कई सितारों के घर का बप्पा सेलिब्रेशन हर साल सुर्खियों में रहता है। आइए जानते हैं उन फिल्मी सितारों के बारे में, जिनके गणेश उत्सव में आस्था के साथ परिवार और त्योहार की रौनक भी साफ दिखाई देती है। सलमान खान- खान परिवार का गणपति उत्सव लंबे समय से लोगों का ध्यान खींचता रहा है। सलमान कई मौकों पर अपनी बहन अर्पिता खान शर्मा के घर होने वाले गणपति उत्सव में शामिल होते हैं। 2025 में भी अर्पिता के मुंबई स्थित घर पर बप्पा की स्थापना हुई थी, जहां सलमान अपने माता-पिता सलीम खान और सलमा खान के साथ आरती करते दिखाई दिए। इस दौरान परिवार के दूसरे सदस्य और करीबी दोस्त भी मौजूद थे। बाद में विसर्जन के मौके पर सलमान को बहन अर्पिता और सोनाक्षी सिन्हा के साथ डांस करते हुए भी देखा गया। सोनाली बेंद्रे- सोनाली बेंद्रे को गणेश चतुर्थी का त्योहार काफी पसंद है। वह हर साल घर पर बप्पा का स्वागत करती रही हैं। एक वक्त ऐसा भी आया जब वह इलाज के सिलसिले में न्यूयॉर्क में थीं और घर से दूर होने की वजह से गणपति की आरती में फेसटाइम के जरिए शामिल हुई थीं। इसके अगले साल वह अपने परिवार के साथ घर पर गणपति उत्सव मनाकर बेहद खुश नजर आई। उन्होंने तब पर्यावरण का ध्यान रखते हुए ईको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा रखने और घर पर ही विसर्जन करने की बात कही थी। 2025 में भी सोनाली ने घर पर गणेश चतुर्थी मनाई और साड़ी में बप्पा के साथ अपनी तस्वीर साझा की। सोनू सूद- सोनू सूद हर साल बप्पा को अपने घर लाने की परंपरा निभाते हैं और परिवार के साथ पूजा-अर्चना करते हैं। 2024 में नए घर ‘गंगोत्री निवास’ में पहली बार गणपति का स्वागत उनके लिए खास था। पत्नी सोनाली और दोनों बेटों अयान और ईशांत के साथ उन्होंने आरती की थी। उस वक्त सोनू ने कहा था कि जिस जगह से उनके संघर्ष की शुरुआत हुई, उसी इलाके में अब उनके नए घर में पहली बार बप्पा का आना उनके लिए भावुक पल है। 2025 में भी उन्होंने गणपति उत्सव मनाया और पर्यावरण का ध्यान रखते हुए ईको-फ्रेंडली प्रतिमा के साथ घर पर ही विसर्जन किया। उनके यहां यह उत्सव पांच दिनों तक मनाया गया और पूजा-पाठ के साथ परिवार और करीबी लोगों की मौजूदगी रही। कार्तिक आर्यन- गणपति उत्सव को पूरे मन से मनाने वाले सितारों में कार्तिक आर्यन भी शामिल हैं। 2025 में उन्होंने अपने मुंबई वाले घर पर परिवार के साथ गणेश उत्सव मनाया। कार्तिक ने सोशल मीडिया पर बप्पा की पूजा और घर के उत्सव की झलकियां साझा कीं थी। इस दौरान उनकी मां माला तिवारी और उनका पेट डॉग भी उनके साथ नजर आया। कार्तिक ने विसर्जन के लिए पर्यावरण के अनुकूल तरीका अपनाया और घर पर ही विसर्जन किया। बाद में उनके घर हुए गणपति विसर्जन की तस्वीरों में श्रीलीला और उनके परिवार के लोग भी नजर आए थे। जैकलीन फर्नांडीज- जैकलीन फर्नांडीज के लिए 2025 की गणेश चतुर्थी खास रही। दरअसल, उन्होंने पहली बार अपने घर पर बप्पा का स्वागत किया था। अभिनेत्री ने खुद सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें साझा करते हुए बताया कि वह पहली बार गणपति को अपने घर ला रही हैं। लाइट ग्रीन कलर की साड़ी में जैकलीन बप्पा के सामने आरती करती नजर आईं। घर में सजे गणपति की प्रतिमा के सामने उन्होंने फूल चढ़ाए और पूजा की। उन्होंने इस मौके को नई शुरुआत, प्यार और आशीर्वाद से जोड़ा।

मणिपुरी संगीतकार की हत्या पर किरेन रिजिजू बोले-‘नॉर्थ ईस्ट के लोग भी भारतीय, इसमें राजनीति नहीं,

नई दिल्ली। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मणिपुर के संगीतकार चोंगथम विक्रम सिंह की हत्या के मामले पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि यह बहुत दुखद घटना है और इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। किरेन रिजिजू ने पत्रकारों से बताया, “ये बहुत दुखद घटना है। विक्रम सिंह जो मणिपुर से हैं, एक संगीतकार हैं, उन्हें दक्षिणी दिल्ली के कुछ डिलीवरी बॉयज और ढाबा कर्मचारियों से रात को झगड़ा हुआ, मारपीट हुई और बाद में उनकी मौत हो गई।” उन्होंने कहा कि उन्होंने इस मामले में साउथ दिल्ली रेंज के आईजीपी और दिल्ली में स्पेशल पुलिस सेल के डीसीपी और ज्वाइंट कमिश्नर से बात की है। जो आठ लोग इसमें शामिल हैं, आठों की गिरफ्तारी हो चुकी है। मणिपुर के निवासी विक्रम सिंह के परिवार के लोगों से भी पुलिस ने मुलाकात की है। बुधवार को उनके शव को मणिपुर ले जाया जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पुलिस से बात करने के बाद पता चला है कि 8 लोगों का बैकग्राउंड साफ है और ये ढाबे में काम करने वाले लोग हैं। रात में शोर-शराबे को लेकर यह घटना हुई। पुलिस ने बताया है कि 2 हफ्तों के अंदर कठोर चार्जशीट दायर की जाएगी और कठोर सजा होनी चाहिए। ये 8 लोग अलग-अलग राज्यों से हैं। वहीं, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मणिपुरी संगीतकार चोंगथम विक्रम सिंह की मौत पर तेजी से जांच कर न्याय की मांग की है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए किरेन रिजिजू ने कहा कि जब भी कोई हत्या या मौत होती है तो यह नहीं देखना चाहिए कि वह किस राज्य का है। उन्होंने कहा, “जब भी कोई हत्या होती है, मौत होती है या कोई पीड़ित होता है, तो यह क्यों देखना चाहिए कि वह किस राज्य से है? वे सभी भारतीय हैं। वे भारत के नागरिक हैं। हमारे नॉर्थ ईस्ट के लोग भी भारतीय हैं। यह राजनीति करने का विषय नहीं है। निर्णायक कार्रवाई होगी।” उन्होंने कहा, “ढाबे में काम करने वाले लोग और खाना डिलीवर करने वाले डिलीवरी वर्कर अलग-अलग राज्यों से आए थे। रात में झगड़ा कैसे हुआ, जो भी हुआ, एक जान चली गई। घटना की गंभीरता को देखते हुए तुरंत कार्रवाई की गई। ये लोग भाग गए थे लेकिन दिल्ली पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की और बहुत कम समय में उन्हें पकड़ लिया।” उन्होंने बताया कि दिल्ली पुलिस ने कहा है कि लगभग 8-10 दिन के अंदर कोर्ट में चार्जशीट दायर हो जाएगी ताकि जल्दी सजा दिलाई जा सके। उन्होंने कहा कि इसमें बहुत कठोर सजा दिलानी जरूरी है और इस घटना को हल्के में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने कहा, “मैं चोंगथम विक्रम सिंह के परिवार के लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं और अपनी सहानुभूति देता हूं। साथ ही मैं आश्वासन भी देता हूं कि जो भी कार्रवाई होगी बहुत तेजी से होगी और बहुत कड़ी कार्रवाई होगी। यह कोई राजनीति का विषय नहीं है।

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से माल ढुलाई होगी तेज, किसानों और उद्योगों को मिलेगा बड़ा फायदा: पीएम मोदी

वडोदरा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को देशभर में समर्पित माल गलियारा (डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर-डीएफसी) नेटवर्क के पूरा होने को भारत की लॉजिस्टिक्स व्यवस्था के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना माल ढुलाई का समय घटाने, परिवहन लागत कम करने और किसानों को अपने उत्पाद तेजी से बाजार तक पहुंचाने में मदद करेगी। गुजरात के वडोदरा में आयोजित कार्यक्रम में पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डब्ल्यूडीएफसी) के अंतिम महत्वपूर्ण खंडों को राष्ट्र को समर्पित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि 2,800 किलोमीटर से अधिक लंबे समर्पित माल गलियारे का निर्माण 21वीं सदी के भारत की एक बड़ी उपलब्धि है। पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के अंतिम तीन खंडों की कुल लंबाई 326 रूट किलोमीटर है और इनके विकास पर 20,700 करोड़ रुपए से अधिक की लागत आई है। इन खंडों के चालू होने के साथ ही पूर्वी और पश्चिमी दोनों समर्पित माल गलियारे पूरी लंबाई में परिचालित हो गए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि “डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर तेजी से विकसित हो रहे भारत की जीवनरेखा है।” उन्होंने कहा कि इस परियोजना ने देश के परिवहन क्षेत्र में संरचनात्मक बदलाव लाया है। प्रधानमंत्री ने बताया कि पहले मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों को एक ही रेल पटरी का इस्तेमाल करना पड़ता था, जिससे दोनों की गति प्रभावित होती थी। अब अलग फ्रेट कॉरिडोर होने से मालगाड़ियां बिना बाधा अपने निर्धारित मार्गों पर चल सकेंगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में पूर्वी और पश्चिमी फ्रेट कॉरिडोर पर प्रतिदिन 430 से अधिक मालगाड़ियां संचालित हो रही हैं। प्रधानमंत्री ने बताया कि जहां पहले मालगाड़ी को 100 किलोमीटर की दूरी तय करने में लगभग साढ़े छह घंटे लगते थे, वहीं अब वही दूरी आधे से भी कम समय में पूरी की जा सकती है। उन्होंने सड़क परिवहन से तुलना करते हुए कहा कि जो माल ढुलाई ट्रकों के जरिए लगभग 30 घंटे में पूरी होती थी, वही अब फ्रेट कॉरिडोर के माध्यम से 10 से 12 घंटे में संभव हो सकेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस परियोजना के फायदे केवल समय बचाने तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने कहा, “ईंधन की बचत हो रही है, माल ढुलाई की लागत घटी है, समय बचा है और पर्यावरण को भी लाभ मिला है। रेलवे ट्रैक में किया गया एक निवेश कई प्रकार के फायदे दे रहा है।” सरकार का मानना है कि तेज और सस्ती माल ढुलाई से भारतीय उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और निर्यात-आयात गतिविधियां अधिक कुशल बनेंगी। नए चालू किए गए तीन खंड साणंद (नॉर्थ)-मकरपुरा, न्यू उंबरगांव-न्यू सफाले और न्यू सफाले-जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (जेएनपीए) को जोड़ते हैं, जिससे देश के सबसे महत्वपूर्ण बंदरगाहों में से एक जेएनपीए तक सीधी माल ढुलाई सुविधा उपलब्ध हो गई है। सरकार के अनुसार, इससे निर्यात-आयात (एक्जिम) कार्गो की आवाजाही तेज होगी, लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और मुंबई रेल नेटवर्क पर दबाव भी घटेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस परियोजना का बड़ा लाभ किसानों को भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि पूर्वी और पश्चिमी भारत के किसान अब अपने उत्पाद तेजी से बड़े बाजारों तक भेज सकेंगे। विशेष रूप से फल, सब्जियां और फूल जैसे जल्दी खराब होने वाले कृषि उत्पाद कम समय में उपभोक्ताओं तक पहुंच पाएंगे, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी। प्रधानमंत्री ने हाल ही में जेएनपीटी से वडोदरा के बीच संचालित डबल-स्टैक कंटेनर मालगाड़ी का उल्लेख करते हुए कहा कि इस एक ट्रेन ने 250 से अधिक ट्रकों के बराबर माल एक साथ ढोया था। इससे माल ढुलाई की क्षमता में आए बड़े बदलाव का अंदाजा लगाया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर जोबट-टांडा रोड रेलवे लाइन राष्ट्र को समर्पित की। यह लाइन छोटा उदयपुर-धार रेल परियोजना का हिस्सा है और मध्य प्रदेश के अलीराजपुर सहित दूरदराज एवं आदिवासी क्षेत्रों को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ती है। कार्यक्रम के दौरान न्यू साणंद (नॉर्थ), न्यू मकरपुरा, न्यू उंबरगांव और न्यू जेएनपीटी से नई मालगाड़ी सेवाओं की शुरुआत भी की गई। साथ ही वडोदरा और टांडा रोड के बीच नई यात्री ट्रेन को भी हरी झंडी दिखाई गई। प्रधानमंत्री ने कहा कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर देशभर में सड़कों, रेलवे, बंदरगाहों और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के व्यापक अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य लोगों और माल दोनों की आवाजाही को अधिक तेज, सस्ता और कुशल बनाना है।

राहुल गांधी को हाईकोर्ट से झटका, ‘चौकीदार चोर है’ वाले मामले को रद्द करने से अदालत ने किया इनकार

मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित ‘चौकीदार चोर है’ की टिप्पणी को लेकर कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बड़ा झटका लगा है। उनकी इस टिप्पणी पर आपराधिक मानहानि केस रद्द करने से हाई कोर्ट ने इनकार कर दिया है। इस मामले में राहुल गांधी ने मजिस्ट्रेट कोर्ट की ओर से जारी समन को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी। उनकी ओर से तर्क दिया गया था कि शिकायत सुनवाई योग्य नहीं है। उनकी ओर से कहा गया था कि कथित बयान में किसी राजनीतिक दल का नाम नहीं लिया था और न ही किसी ‘पहचाने जा सकने वाले या निश्चित वर्ग’ को निशाना बनाया था। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस नितिन बोरकर की सिंगल बेंच ने राहुल गांधी की दलील को खारिज करते हुए कहा कि भाजपा एक पंजीकृत राष्ट्रीय राजनीतिक दल है और इसलिए वह निश्चित रूप से एक पहचान योग्य संस्था है। कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता का दावा है कि वह दो दशक से भाजपा का सक्रिय सदस्य रहा है। पहली नजर में प्रधानमंत्री को, जो भाजपा के सदस्य हैं, ‘कमांडर-इन-थीफ’ बताने वाले बयान को सिर्फ पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व तक सीमित नहीं माना जा सकता। कोर्ट के मुताबिक, इस बयान का वास्तविक आशय क्या था और इसका पार्टी के सदस्यों पर क्या प्रभाव पड़ा, यह सवाल मुकदमे के दौरान विचार किया जाना है। राहुल गांधी के वकील सुदीप पासबोला ने हाईकोर्ट में दलील दी कि कथित ट्वीट में राहुल गांधी ने भाजपा या किसी राजनीतिक दल का नाम नहीं लिया था। उन्होंने कहा कि किसी ‘पहचाने जा सकने वाले या निश्चित वर्ग’ को निशाना नहीं बनाया गया है। ऐसे में कोई स्पष्ट रूप से पीड़ित व्यक्ति या समूह मौजूद नहीं है, इसलिए शिकायतकर्ता के पास आपराधिक मानहानि का मामला चलाने का अधिकार नहीं है। राहुल गांधी की याचिका पर महाराष्ट्र सरकार की ओर से भी विरोध किया गया। महाराष्ट्र के एडवोकेट जनरल की ओर से कहा गया कि कोर्ट को यह देखना होगा कि मानहानि के अपराध के लिए जरूरी तत्व मौजूद हैं या नहीं। साथ ही यह भी देखना होगा कि क्या टिप्पणी किसी निश्चित एवं पहचान योग्य समूह से संबंधित थी।

आईएफएफजेके में निर्देशक श्रीराम राघवन ने की शिरकत, कहा- जम्मू-कश्मीर के युवाओं को मिलेगा हौसला

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर का पहला इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ जम्मू एंड कश्मीर (आईएफएफजेके) श्रीनगर में आयोजित किया जा रहा है, जहां फिल्म इंडस्ट्री के दिग्गज निर्देशक और लेखक श्रीराम राघवन भी आयोजन में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने आयोजन की जमकर सराहना की। उन्होंने आईएएनएस के साथ बातचीत में कहा कि यह समारोह घाटी के साथ बॉलीवुड के रिश्ते को फिर से मजबूत कर सकता है। साथ ही, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया है कि समारोह से जम्मू-कश्मीर के लोगों को मनोरंजन जगत में आने के लिए हौसला मिलेगा। उन्होंने कहा, “अभी फिल्ममेकिंग के हर क्षेत्र में काफी लोगों की जरूरत है और मुझे यकीन है कि इस समारोह से उन लोगों को भी हौसला मिलेगा, जो मनोरंजन जगत में आना चाहते हैं। उन्हें लगेगा कि हां, हम भी कोशिश कर सकते हैं।” हालांकि, निर्देशक ने यह भी स्पष्ट किया कि समारोह का नतीजा हाल ही में न सही लेकिन कुछ समय के बाद जरूर देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि इस समारोह से लोगों को थोड़ी मदद मिलेगी और इसका फर्क तुरंत नहीं लेकिन कुछ सालों में जरूर दिखेगा।” श्रीराम राघवन का मानना है कि इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ जम्मू एंड कश्मीर (आईएफएफजेके) को हिंदी सिनेमा को एक अवसर के तौर पर देखना चाहिए। उन्होंने कहा, “हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को इसे एक अवसर के तौर पर लेना चाहिए, क्योंकि आज हर राज्य का अपना सांस्कृतिक सिनेमा है, बहुत सारी रीजनल फिल्में भी अच्छा कर रही हैं। बहुत कुछ हो रहा है और शायद यहां भी होगा।” उन्होंने कहा कि समारोह में भीड़ बहुत थी, जिसे देखकर वे काफी खुश नजर आए। उन्होंने क्राउड को लेकर कहा, “यहां पर भारी मात्रा में लोग देखने को मिले, इतना तो मुंबई में भी नहीं देखा होगा। वहां तो 40-50 लोग होते थे और यहां तो पूरा हॉल भरा हुआ था। मैं बस यही चाहता था कि यहां पर और एक दो घंटा कर पाता और मुझे लगा कि मैं यहां पर एक पूरा दिन बिता सकता था।” जम्मू-कश्मीर का पहला इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ जम्मू एंड कश्मीर 7 सितंबर से 10 सितंबर 2026 तक श्रीनगर में आयोजित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में इस महोत्सव का उद्घाटन किया। इस फेस्टिवल का मुख्य विषय है- ‘रंग-ए-सिनेमा’।

एएसआई के सहारनपुर दौरे पर इमरान मसूद बोले, मस्जिद के रिकॉर्ड देखकर हो जाएगी स्थिति स्पष्ट

सहारनपुर। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) टीम के सहारनपुर दौरे को लेकर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद की प्रतिक्रिया सामने आई है। आईएएनएस से बातचीत करते हुए इमरान मसूद ने कहा, “हम तो पहले दिन से कह रहे हैं कि प्राचीन मस्जिद है। वजू करने के लिए मस्जिदों में कुआं होता था। हो सकता है कुआं 300 वर्षों से भी पुराना हो। मस्जिद के कागज के देख लेना चाहिए कि कब से हैं। मस्जिद के अंदर ही कुआं होता है। कई जगह अभी भी हैं।” राशिद अल्वी के बयान पर इमरान मसूद ने कहा कि राम मंदिर के मुद्दे पर भाजपा ने 2024 में भी चुनाव लड़ा था। हश्र देखा क्या हुआ? भगवान राम सबके हैं। भगवान राम न्याय के प्रतीक हैं। राम तो इस देश के कण-कण में हैं। संभल को लेकर इमरान मसूद ने कहा कि सौहार्द्र बनाए रखने के लिए सहारनपुर के लोगों का धन्यवाद। अष्टमी के दिन शराब की दुकानों को बंद करने के बंगाल सरकार के फैसले पर इमरान मसूद ने कहा कि न तो मैं शराब पीता हूं और न तो मांस खाता हूं। सबको बंद कर दो, मुझे फर्क नहीं पड़ता। इस देश 82 प्रतिशत लोग मांसाहारी हैं। नॉर्थ ईस्ट में पूरी राजनीति इस पर निर्भर है। समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी ने कहा कि ये लोग हिंदू-मुस्लिम करके चुनाव जीतना चाहते हैं। इनको विकास से कोई मतलब नहीं है। उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति बहुत ही खराब है। धर्म के नाम पर बांट कर राजनीति कर रहे हैं। हम लोगों की ओर से इसका खुला विरोध किया जा रहा है। मौलाना तौकीर रजा को जमानत न मिलने पर उन्होंने कहा कि यह बहुत अफसोस की बात है, कोर्ट में इंसाफ नहीं मिलेगा तो लोग कहां जाएंगे।

ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होंगे राष्ट्रपति पुतिन, पीएम मोदी से करेंगे द्विपक्षीय बैठक : क्रेमलिन प्रवक्ता पेस्कोव

नई दिल्ली। दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात तय है। क्रेमलिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की शुक्रवार को होने वाली द्विपक्षीय बैठक की पुष्टि करते हुए भारत को रूस का “रणनीतिक साझेदार” बताया है। रूसी राष्ट्रपति के दिल्ली पहुंचने से पहले क्रेमलिन के प्रवक्ता और राष्ट्रपति पुतिन के प्रेस सचिव दिमित्री पेस्कोव ने मंगलवार को मीडिया से वर्चुअल बातचीत की। उनके बयानों में भारत-रूस रिश्तों की गर्माहट के साथ-साथ बदलती वैश्विक व्यवस्था की झलक भी दिखाई दी। पेस्कोव ने कहा, “दोनों देशों के बीच आपसी संपर्क बहुत अहम होंगे, खासकर प्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठक। जैसा कि आप जानते हैं, भारत और रूस के नेताओं के बीच बहुत करीबी संबंध हैं। उनके संबंध बहुत व्यावहारिक हैं और वे एक-दूसरे के साथ इतने ईमानदार हैं कि वैश्विक एजेंडे और हमारे आपसी संबंधों से जुड़े सबसे संवेदनशील मुद्दों पर बहुत खुले और रचनात्मक तरीके से चर्चा कर सकते हैं।” यह मुलाकात ऐसे समय हो रही है जब दुनिया बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ने, पश्चिमी प्रतिबंधों और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे कई बड़े सवालों से जूझ रही है। ब्रिक्स की अहमियत पर पेस्कोव ने प्रकाश डालते हुए कहा,” मैं आपको याद दिलाना चाहता हूं कि ब्रिक्स कोई संगठन नहीं है; यह एक क्लब है। हमारे पास कोई चार्टर, नियम या स्थायी कार्यालय नहीं है। बल्कि, यह उन देशों का एक क्लब है जो इस बात पर एक जैसी सोच रखते हैं कि दुनिया में काम कैसे होने चाहिए और अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग कैसे किया जाना चाहिए।” उन्होंने ब्रिक्स के तीन प्रमुख स्तंभों का जिक्र करते हुए कहा, “रूस ब्रिक्स सहयोग के तीन मुख्य स्तंभों – राजनीति और सुरक्षा; अर्थव्यवस्था और वित्त; और सांस्कृतिक व मानवीय संपर्क – के और विकास में योगदान देने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। बेशक, हमारी अपनी कई पहल हैं जिन्हें हम इस समूह के भीतर बढ़ावा दे रहे हैं। हम ब्रिक्स के भीतर सहयोग के अलग-अलग तरीकों में ज्यादा से ज्यादा देशों को शामिल करने के विचार का समर्थन करते हैं।” पार्टनर कंट्री के कॉन्सेप्ट की प्रशंसा करते हुए पेस्कोव बोले, ” 2024 में, पार्टनर देशों की एक नई श्रेणी – ‘ब्रिक्स पार्टनर कंट्री’ श्रेणी – बनाई गई थी, और अब यह बहुत अच्छी तरह से विकसित हो रही है। बेलारूस, बोलीविया, वियतनाम, कजाकिस्तान, क्यूबा, ​​नाइजीरिया, मलेशिया, थाईलैंड, युगांडा और उज्बेकिस्तान को पार्टनर का दर्जा दिया गया है। इन देशों के प्रतिनिधियों को धीरे-धीरे अलग-अलग वर्किंग ग्रुप और फॉर्मेट में शामिल किया जा रहा है, और हम इसे एक बहुत ही सकारात्मक विकास मानते हैं।” उन्होंने बताया कि रियो डी जनेरियो में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान, रूसी प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त राष्ट्र में सुधार और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के कामकाज को बेहतर बनाने से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर एक्सपर्ट लेवल पर बातचीत शुरू करने की पहल की। बोले, “हम इस पहल को बहुत महत्वपूर्ण मानते हैं, और ब्रिक्स के भीतर कई देशों ने इसका समर्थन किया।” पेस्कोव ने बताया कि रूस और ब्रिक्स देशों के बीच अब करीब 90 प्रतिशत भुगतान राष्ट्रीय मुद्राओं में हो रहा है। यह बयान ऐसे समय आया है जब डॉलर के प्रभुत्व और वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों को लेकर ब्रिक्स देशों के बीच चर्चा तेज है। भारत के रूसी ऊर्जा आयात पर अमेरिका की ओर से प्रतिबंध लगाने संबंधी प्रस्ताव पर पेस्कोव ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने अमेरिकी प्रतिबंध विधेयक को “अवैध” करार दिया। पीएम मोदी-राष्ट्रपति पुतिन बातचीत के दौरान यूक्रेन युद्ध और शांति की कोशिशें भी अहम मुद्दा हो सकती हैं। भारत ने शुरुआत से ही युद्ध के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति का रास्ता अपनाने पर जोर दिया है। भारत की इसी भूमिका को लेकर पूछे गए सवाल पर पेस्कोव ने कहा, “हम भारतीय प्रयासों का स्वागत करते हैं।” पेस्कोव ने ब्रिक्स को सिर्फ आर्थिक समूह के रूप में देखने से आगे बढ़ते हुए इसे बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि भारत ने अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता में काफी निवेश किया है और संगठन की विचारधारा बहुध्रुवीय दुनिया की विचारधारा है। उनके अनुसार एकध्रुवीय दुनिया ढह रही है और अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता खो रही है। उनके मुताबिक, दिल्ली में होने वाला ब्रिक्स सम्मेलन केवल सदस्य देशों की बैठक नहीं है। इसके पीछे दुनिया की उस नई व्यवस्था की बहस भी है जिसमें रूस, भारत, चीन और दूसरे उभरते देश वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रभाव की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही पेस्कोव ने भारत-रूस संबंधों को काफी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, “कहानी केवल तेल और रक्षा तक सीमित नहीं है।” पेस्कोव ने भारत में नए परमाणु संयंत्र के विकास में आगे प्रगति की उम्मीद जताई। उन्होंने रूस में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों का भी स्वागत किया।

यूपी टेक्सटाइल कॉन्क्लेव में सीएम योगी बोले- उत्तर प्रदेश अब माफिया नहीं, निवेश और रोजगार की पहचान

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने टेक्सटाइल कॉन्क्लेव के मंच से प्रदेश की बदली तस्वीर और सरकार की आर्थिक नीति का सियासी खाका पेश किया। लखनऊ में मंगलवार को यूपी टेक्सटाइल कॉन्क्लेव-2026 का उद्घाटन करते हुए सीएम योगी ने एक ओर उत्तर प्रदेश की हजारों वर्ष पुरानी वस्त्र परंपरा को वैश्विक बाजार से जोड़ने का संकल्प जताया, तो दूसरी ओर 2017 से पहले की कानून-व्यवस्था और निवेश के माहौल पर विपक्ष को घेरा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की पहचान अब दंगा, माफिया और वसूली से नहीं, बल्कि निवेश, रोजगार और विकास से हो रही है। प्रदेश में आज कानून का राज है और अपराध तथा अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति लागू है। पहले निवेशक कारोबार की उम्मीद लेकर आते थे और वसूली की पर्ची लेकर लौटते थे, लेकिन अब व्यापारी और निवेशक सुरक्षित माहौल में कारोबार कर सकते हैं। सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में आए दिन दंगे होते थे और माफिया सत्ता के समानांतर अपनी व्यवस्था चलाते थे। यूपी के नागरिकों को दूसरे राज्यों में किराए का मकान और होटल में कमरा तक मिलने में दिक्कत होती थी। उन्होंने कहा कि उस दौर में उद्योग लगाने की कल्पना करना भी मुश्किल था, जबकि आज यूपी दंगा और कर्फ्यू मुक्त प्रदेश है। उन्होंने टेक्सटाइल क्षेत्र को उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और रोजगार का बड़ा आधार बताते हुए कहा कि प्रदेश के पास विरासत, हुनर, मानव संसाधन और देश का बड़ा बाजार मौजूद है। बनारस के रेशम से लेकर भदोही के कालीन और कानपुर के औद्योगिक आधार तक प्रदेश की अपनी मजबूत टेक्सटाइल पहचान है। वैदिक साहित्य, रामायण और महाभारत में भी काशी के वस्त्रों का उल्लेख मिलता है। सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश के 17 टेक्सटाइल उत्पादों को जीआई पहचान मिल चुकी है और करीब पांच लाख बुनकर इस क्षेत्र से जुड़े हैं। देश के कुल फैब्रिक उत्पादन में यूपी की हिस्सेदारी करीब 14 प्रतिशत है। सरकार का लक्ष्य फाइबर से लेकर तैयार उत्पाद और वैश्विक बाजार तक पूरी मूल्य श्रृंखला प्रदेश में विकसित करना है। उत्तर प्रदेश को केवल उत्पादन केंद्र नहीं, बल्कि वैश्विक टेक्सटाइल हब बनाना है। उन्होंने एमएसएमई को उप-ठेकेदार से निर्यातक और बुनकरों को सप्लायर से ब्रांड मालिक बनाने पर जोर दिया। प्रदेश में 36 सेक्टर आधारित नीतियां और करीब 75 हजार एकड़ का लैंड बैंक उपलब्ध होने का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि निवेशकों के लिए ऑनलाइन प्रोत्साहन वितरण और योजनाओं की मुख्यमंत्री कार्यालय से निगरानी की व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि पिछले 9 वर्षों में प्रदेश में एक्सप्रेसवे, लॉजिस्टिक्स और मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी का मजबूत नेटवर्क तैयार हुआ है। टेक्सटाइल क्षेत्र में करीब 5,354 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव सामने आए हैं। संत कबीर टेक्सटाइल पार्क के तहत 10 पार्क विकसित करने की योजना है, जिनमें पांच पर काम शुरू हो चुका है। कॉन्क्लेव में उद्योग जगत ने भी यूपी में निवेश की संभावनाओं को स्वीकार किया। साथ ही कुशल श्रमशक्ति, प्रसंस्करण इकाइयों, टेक्सटाइल मशीनरी और तकनीकी वस्त्रों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर जोर दिया गया। इस तरह टेक्सटाइल कॉन्क्लेव के जरिए योगी सरकार ने विकास और निवेश के साथ अपनी कानून-व्यवस्था की उपलब्धियों को भी चुनावी विमर्श के केंद्र में रखने का संकेत दिया।

जब प्यार जताने गए थे अक्षय कुमार, सरेआम पिट कर आ गए थे वापस

मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार आज भले ही करोड़ों दिलों की धड़कन हों, लेकिन उनकी जिंदगी में एक ऐसा दौर भी आया जब किसी लड़की को प्रभावित करने की कोशिश उन्हें भारी पड़ गई। कॉलेज के दिनों में उन्हें एक लड़की पसंद थी और उसे इंप्रेस करने के लिए गाना भी गाया, जिसके बाद लड़की के पड़ोसियों ने उन्हें और उनके दोस्त को पीट दिया था। उन्होंने कहा कि उस घटना ने उन्हें यह सिखाया कि किसी को प्रभावित करने के लिए बनावटीपन नहीं, बल्कि सादगी और आत्मविश्वास ज्यादा मायने रखता है। अभिनेता का यह पुराना किस्सा उनके संघर्ष, मासूमियत और युवावस्था की यादों की एक दिलचस्प झलक पेश करता है, जिसे सुनकर दर्शक भी खूब मुस्कुराए थे। अक्षय कुमार का जन्म 9 सितंबर 1967 को हुआ था और उनका बचपन दिल्ली के चांदनी चौक इलाके में बीता। उनका असली नाम राजीव हरिओम भाटिया है। उनके पिता सेना में थे और बचपन से ही अक्षय को खेल-कूद और कुश्ती में दिलचस्पी थी। उन्होंने मुंबई के खालसा कॉलेज में दाखिला लिया, लेकिन पढ़ाई बीच में छोड़ दी। इसके बाद उन्होंने मार्शल आर्ट सीखने का फैसला किया और पिता की मदद से बैंकॉक चले गए। बैंकॉक में अक्षय ने मार्शल आर्ट सीखा। साथ ही, उन्होंने अपना खर्च चलाने के लिए एक रेस्टोरेंट में वेटर और कुक के तौर पर काम किया। दिन में काम और खाली समय में मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग उनका रोज का जीवन बन गया था। अक्षय कई इंटरव्यू में बता चुके हैं कि उनके पिता ने उन्हें बैंकॉक भेजने के लिए पैसे जुटाए थे और इस सफर ने उनकी जिंदगी को बदलने में बड़ी भूमिका निभाई। भारत लौटने के बाद भी अक्षय के लिए बॉलीवुड का रास्ता तुरंत नहीं खुला। उन्होंने कुछ समय दिल्ली में आर्टिफिशियल ज्वेलरी बेचने का काम किया। मुंबई लौटकर वह मार्शल आर्ट सिखाने लगे। इसी दौरान उनके एक छात्र के पिता ने उन्हें मॉडलिंग करने की सलाह दी। अक्षय ने यह मौका आजमाया और एक फर्नीचर स्टोर के लिए मॉडलिंग की। उन्होंने बताया कि उस एक काम के लिए उन्हें 21 हजार रुपए मिले, जबकि वह पूरे महीने मार्शल आर्ट सिखाकर करीब 5 हजार रुपए कमाते थे। यहीं से उन्हें लगा कि मॉडलिंग के रास्ते से वह आगे बढ़ सकते हैं। फिल्मों में आने से पहले अक्षय ने फोटोग्राफर जयेश सेठ के साथ लाइट असिस्टेंट के तौर पर भी काम किया। इस दौरान उन्हें गोविंदा, रेखा, जैकी श्रॉफ और संगीता बिजलानी जैसे बड़े सितारों के फोटोशूट देखने का मौका मिला। अक्षय ने अनुपम खेर के शो में बताया था कि गोविंदा ने एक दिन उन्हें देखकर पूछा था कि वह खुद हीरो क्यों नहीं बनते। इसके बाद अक्षय ने फिल्मों की तरफ कदम बढ़ाया और 1987 की फिल्म ‘आज’ में छोटे रोल से उनकी स्क्रीन पर शुरुआत हुई। इसके कुछ साल बाद अक्षय को वह पहचान मिली, जिसने उन्हें ‘खिलाड़ी कुमार’ बना दिया। 1991 में ‘सौगंध’ से बतौर लीड एक्टर करियर शुरू करने के बाद 1992 में आई ‘खिलाड़ी’ ने उनकी एक्शन हीरो वाली पहचान मजबूत कर दी। इसके बाद ‘मोहरा’, ‘मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी’, ‘सबसे बड़ा खिलाड़ी’ और ‘खिलाड़ियों का खिलाड़ी’ जैसी फिल्मों ने उन्हें एक्शन फिल्मों का बड़ा चेहरा बना दिया, लेकिन अक्षय सिर्फ एक्शन तक सीमित नहीं रहे। ‘ये दिल्लगी’, ‘हेरा फेरी’, ‘गरम मसाला’, ‘भूल भुलैया’ और ‘नमस्ते लंदन’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाकर खुद को साबित तिया। दिखाई। अक्षय ने इस साल एक टीवी शो में एक किस्सा सुनाया था। उन्होंने बताया कि करीब 40 साल पहले कॉलेज में उन्हें एक लड़की बहुत पसंद थी। वह उसे इंप्रेस करना चाहते थे, इसलिए उन्होंने उसके लिए गाना सीखा। उनका एक दोस्त गिटार बजाना जानता था। दोनों मिलकर लड़की के घर के बाहर पहुंचे। अक्षय ने गाना गाया और दोस्त गिटार बजाता रहा। उन्हें लगा होगा कि यह कोशिश लड़की को पसंद आएगी, लेकिन कहानी में आगे कुछ और ही हुआ। गाना खत्म होने के बाद उन्हें और उनके दोस्त को लड़की के पड़ोसियों ने पीट दिया। अक्षय ने कई बड़े सम्मान अपने नाम किए। उन्हें 2009 में भारत सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित किया। ‘रुस्तम’ के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला और ‘पैडमैन’ के लिए भी राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला। फिल्मफेयर समेत कई बड़े पुरस्कार उनके नाम हैं। तीन दशक से ज्यादा लंबे करियर में वह 100 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके हैं।

बिहार: मोकामा-बख्तियारपुर हाईवे पर हादसा, तेज रफ्तार कार के डिवाइडर से टकराने से तीन की मौत

पटना। बिहार के मोकामा-बख्तियारपुर राजमार्ग पर हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई। पटना से खगड़िया की ओर जा रही तेज रफ्तार कार संतुलन बिगड़ने से सड़क किनारे डिवाइडर से टकरा गई, जिससे यह हादसा हुआ। जानकारी के मुताबिक, तेज रफ्तार की वजह से ड्राइवर का गाड़ी से कंट्रोल हट गया और गाड़ी डिवाइडर से टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार में सवार तीनों लोग अंदर ही फंस गए। टक्कर की आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण और राहगीर मौके पर पहुंचे और बचाव कार्य शुरू किया। गाड़ी के दरवाजे जाम हो गए थे, इसलिए स्थानीय लोगों ने कार के क्षतिग्रस्त हिस्से को कटर से काटकर कार सवारों को बाहर निकाला। हादसे की सूचना मिलने पर मोकामा पुलिस स्टेशन की एक टीम मौके पर पहुंची। स्थानीय लोगों की मदद से तीनों घायलों को मोकामा ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया। हालांकि, अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया। मृतकों की पहचान पवन गुप्ता, सुलोचना देवी और ड्राइवर सलमान के तौर पर हुई; ये सभी खगड़िया के रहने वाले थे। पुलिस ने शवों को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पहचान होने के बाद मृतकों के परिवारों को सूचना दी गई। शुरुआती जांच से पता चलता है कि तेज रफ्तार और उसके बाद गाड़ी से कंट्रोल खो देना ही हादसे की मुख्य वजह हो सकती है। पुलिस घटना के अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है। तीन लोगों की मौत की खबर सुनकर परिवार गहरे सदमे में डूब गए। परिवारवालों का रो-रोकर बुरा हाल है। इस दुखद हादसे के बाद पूरे इलाके में मातम का माहौल है। वहीं, एक और हादसे में मंगलवार सुबह पश्चिम चंपारण जिले में एक यात्री बस के बेकाबू होकर सड़क किनारे पलटने से दो महिलाएं घायल हो गईं। यह हादसा पुरुषोत्तमपुर पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में आने वाले मैनाटांड ब्लॉक के तिलंघी बहुअरवा गांव के पास हुआ।