दिल्ली कला महोत्सव में शास्त्रीय नृत्य नाटक परिजात हरण का विशेष मंचन

नई दिल्ली। भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को अधिक से अधिक लोगों तक पहुचाने के उद्देश्य से दिल्ली कला महोत्सव 2026 में श्रीमंत शंकरदेव के शास्त्रीय नृत्य नाटक परिजात हरण का विशेष मंचन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में दर्शक शामिल हुए। 31 अगस्त तक चल रहे दिल्ली कला महोत्सव का आयोजन कला और संस्कृति के क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाओं निश्रेयस और वाग्भामिनी द्वारा दिल्ली पर्यटन दिल्ली सरकार के सहयोग से किया जा रहा है। महोत्सव में सत्रीया, भरतनाट्यम, कथकली, ओडिसी, कथक, छऊ और मणिपुरी जैसी भारत की प्रमुख शास्त्रीय नृत्य शैलियों को प्रस्तुत किया जा रहा है। सुमन्या कश्यप और डॉ. सुकन्या बरुआ के निर्देशन में तैयार परिजात हरण में रुक्मिणी और सत्यभामा के अलग-अलग भावों के माध्यम से भगवान कृष्ण की दिव्य लीला को प्रस्तुत किया गया। संगीत,नृत्य और अभिनय के माध्यम से प्रेम, ईष्या, गर्व, भक्ति और समर्पण जैसे भावों को खूबसूरती से मंच पर उतारा गया। प्रस्तुति ने श्रीमंत शंकरदेव की विरासत के साथ-साथ असम की सत्रीया और अंकिया नाट परंपरा को भी दर्शाया। प्रस्तुति की सराहना करते हुए केन्द्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा यह खुशी की बात है कि इस वर्ष के महोत्सव में देश की अलग-अलग शास्त्रीय नृत्य शैलियों को प्रस्तुत किया जा रहा है और असम की सत्रीया पर विशेष ध्यान दिया गया है। प्रो. रजनीश कुमार मिश्रा, अध्यक्ष, आयोजन समिति, कला-तरंगिणी ने कहा कला-तरंगिणी दिल्ली कला महोत्सव 2026 दिल्ली पर्यटन के सहयोग से भारत की समृद्ध और विविध सांस्कृतिक विरासत को सामने लाने का प्रयास है। यह महोत्सव हमारी सांस्कृतिक परंपराओं की निरंतरता को दिखाता है। आज हमें असम की उस समृद्ध परंपरा को देखने का अवसर मिला जो भागवत पुराण और हरिवंश की कहानियों से जुड़ी है। भरत गुप्त, एनएसडी सोसाइटी के उपाध्यक्ष ने कहा मैं कला-तरंगिणी में प्रसिद्ध नृत्य-नाटिका पारिजात हरण का हिस्सा बनकर बेहद उत्साहित हूं। हमें ऐसे और अधिक उत्सवों की आवश्यकता है, जो न केवल हमारे देश की समृद्ध विरासत को उजागर करें, बल्कि हमारी जीवंत परंपराओं और इतिहास को संरक्षित करने में भी योगदान दें। कार्यक्रम पर चित्तरंजन त्रिपाठी, निदेशक एनएसडी ने कहा हमें कला-तरंगिणी की मेजबानी करते हुए गर्व है। यह महोत्सव देश की अलग-अलग सांस्कृतिक परंपराओं और उनकी कला को एक मंच पर लाता है और भारतीय प्रदर्शन कलाओं की विविधता को दर्शाता है।

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