केंद्र पर सत्तावाद को संस्थागत रूप देने का आरोप, शिवसेना (यूबीटी) ने ‘सामना’ में साधा निशाना

मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) ने बुधवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा और उस पर सत्तावाद को संस्थागत रूप देने और सार्वजनिक असहमति को व्यवस्थित तरीके से दबाने का आरोप लगाया। ठाकरे गुट की यह आलोचना दिल्ली पुलिस द्वारा जंतर-मंतर से दशकों पुराने प्रदर्शन स्थल का दर्जा हटाने के फैसले के बाद आई है। पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में संपादकीय में ठाकरे गुट ने कहा कि नए पुलिस आदेशों के तहत विरोध प्रदर्शनों को सत्ता के केंद्र से दूर धकेल दिया गया है। अब प्रदर्शन के लिए रामलीला मैदान (4 किमी दूर), शाहदरा में सीबीडी ग्राउंड (12 किमी दूर) और बुराड़ी ग्राउंड (20-21 किमी दूर) जैसी दूर की जगहें तय की गई हैं। सामना में तर्क दिया गया कि यह एक सोची-समझी रणनीति है ताकि जनता के आंदोलन की कोई गूंज संसद या राष्ट्रीय चेतना में न पहुंचे। लोकतांत्रिक अधिकारों के व्यावसायीकरण को उजागर करते हुए संपादकीय में बताया गया कि रामलीला मैदान जैसे स्थलों की लागत प्रतिदिन 1.5 लाख रुपए से अधिक है, महीनों पहले बुकिंग करनी पड़ती है और ये अक्सर धार्मिक या सत्तारूढ़ दल के कार्यक्रमों के लिए बुक रहते हैं। संपादकीय में कहा गया कि शांतिपूर्ण सभा संवैधानिक रूप से संरक्षित अधिकार है। आवाजों को शहर की सीमा से बाहर धकेलना गहरे प्रशासनिक डर का संकेत है। यह प्रशासनिक कार्रवाई चुनावी अखंडता पर जवाबदेही की मांग करने वाले समूहों के प्रदर्शनों के बाद आई, जिससे राजधानी में भारी सुरक्षा तैनाती और बड़े पैमाने पर निवारक हिरासत हुई। ठाकरे गुट ने कहा कि राहुल गांधी सहित विपक्षी नेताओं ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है, जबकि जंतर-मंतर की गैर-अधिसूचना के खिलाफ कानूनी चुनौतियां तेजी से दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गई हैं। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने दावा किया कि जब कोई सरकार “अपनी ही जनता से डरने लगती है, तो उसके अंत की उलटी गिनती आधिकारिक रूप से शुरू हो जाती है।

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