मुंबई में गणेशोत्सव के सातवें दिन 6,436 गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन, कोई अप्रिय घटना नहीं

मुंबई। मुंबई में गणेशोत्सव के सातवें दिन रविवार को कुल 6,436 गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के अनुसार रात 9 बजे तक विसर्जन प्रक्रिया के दौरान कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। बीएमसी की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार रात 9 बजे तक 99 सार्वजनिक गणेश प्रतिमाएं, 6,127 घरेलू गणेश प्रतिमाएं और 210 गौरी प्रतिमाओं का शहर के विभिन्न निर्धारित विसर्जन स्थलों और कृत्रिम विसर्जन कुंडों में विसर्जन किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, सबसे अधिक संख्या घरेलू गणेश प्रतिमाओं की रही, जिनका विसर्जन श्रद्धालुओं ने विभिन्न स्थानों पर किया। सार्वजनिक मंडलों की 99 प्रतिमाओं के साथ-साथ गौरी पूजन के तहत स्थापित 210 गौरी प्रतिमाओं का भी विसर्जन किया गया। बीएमसी अधिकारियों ने बताया कि विसर्जन स्थलों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही सुचारु बनाए रखने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए थे। नगर निगम की टीमें पूरे दिन विभिन्न विसर्जन स्थलों पर निगरानी करती रहीं। बीएमसी ने कहा कि रात 9 बजे तक विसर्जन के दौरान किसी भी तरह की अप्रिय घटना दर्ज नहीं हुई और पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। गणेश चतुर्थी महाराष्ट्र के सबसे बड़े धार्मिक उत्सवों में से एक है, जिसमें श्रद्धालु भगवान गणेश की स्थापना, पूजा-अर्चना और निर्धारित दिनों में प्रतिमाओं का विसर्जन करते हैं। विसर्जन को भगवान गणेश की अपने धाम वापसी का प्रतीक माना जाता है।
मालिकों और शेयरधारकों को उनके अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता, टाटा ग्रुप में विवाद पर बोले टाटा ट्रस्ट्स के वकील अभिषेक मनु सिंघवी

नई दिल्ली। टाटा संस की लिस्टिंग और एन.चंद्रशेखरन की चेयरमैन के रूप में दोबारा नियुक्ति पर टाटा ग्रुप में विवाद पर टाटा ट्रस्ट्स के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने रविवार को कहा कि कंपनी पर स्वामित्व रखने वाले शेयरहोल्डर के अधिकारों की मूल बात को इस तरह से खत्म नहीं किया जा सकता। मालिक, जो शेयरहोल्डर भी हैं, उनके अधिकारों को कमजोर या खत्म करने से भारत की सैकड़ों-हजारों कंपनियों में कॉर्पोरेट गवर्नेंस को लेकर गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में सिंघवी ने कहा कि रतन टाटा के साथ मिलकर काम करने, टाटा ग्रुप की विरासत (चाहे वह ट्रस्ट हो या कंपनियां) को बहुत करीब से देखने, दोनों तरफ के मुख्य लोगों को न सिर्फ अच्छी तरह जानने बल्कि उनके साथ बेहतरीन संबंध रखने और दोनों पक्षों के लोगों के लिए मन में सच्चा और गहरा सम्मान होने के कारण, मेरी पहली प्रतिक्रिया निराशा की है। लेकिन अब में एक पक्ष के वकील के रूप में शामिल हो रहा हूं, तो कहना चाहूंगा कि मालिक और शेयरधारकों के अधिकारों जैसी बुनियादी बात को इस तरह से खत्म नहीं किया जा सकता। शेयरधारक मालिकों के अधिकारों को कमजोर या खत्म करना, कॉर्पोरेट गवर्नेंस के लिहाज से सैकड़ों-हजारों भारतीय कंपनियों के लिए बर्बादी का कारण बन सकता है। सिंघवी ने आगे कहा कि चैरिटी कमिश्नर के अचानक आए किसी रहस्यमयी आदेश से किसी ट्रस्ट के कामकाज को रोकना और फैसले लेने की प्रक्रिया में बाधा डालना—जिसका मतलब है कि ट्रस्ट आगे क्या करना है, इस पर चर्चा के लिए बैठक भी नहीं कर सकता—ट्रस्ट के भीतर लोकतांत्रिक कामकाज को पूरी तरह से नाकाम करने का एक और तरीका है। टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच 100 साल से ज्यादा पुराने और गहरे रिश्ते को तोड़ना, और ऐसा व्यवहार करना मानो दोनों के बीच तलाक हो गया हो—कानूनी या किसी भी अन्य नजरिए से यह अकल्पनीय लगता है। सिंघवी के मुताबिक, 100 साल से अधिक समय से बने टाटा संस के नियमों की अनदेखी करना, जो कि टाटा ट्रस्ट्स के साथ कंपनी के विशिष्ट संबंधों को दिखाते हैं, सही नहीं है। मिस्त्री मामले भी सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों को माना था।
पंजाब भाजपा प्रमुख ने ड्रग्स के खिलाफ आवाज उठाने वालों को ‘दबाने’ को लेकर आप सरकार पर निशाना साधा

चंडीगढ़। पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने रविवार को राज्य में आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने सरकार पर ड्रग्स की समस्या को रोकने में नाकाम रहने और राज्य में ड्रग्स की खुलेआम बिक्री के खिलाफ आवाज उठाने वालों को चुप कराने की कोशिश करने का आरोप लगाया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में, ढिल्लों ने उन लोगों से जुड़ी तीन कथित घटनाओं का जिक्र किया जिन्होंने ड्रग्स को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने इन घटनाओं को मुख्यमंत्री भगवंत मान के गृह जिले संगरूर से जोड़ा। ढिल्लों ने लिखा कि पहले, शेरॉन गांव के मोहनजीत सिंह… फिर तुर बंजारा के दलित परिवार से गुलजार सिंह… और अब नमोल गांव के एक गरीब मजदूर जगसीर जागा। आप सरकार पर निशाना साधते हुए पंजाब भाजपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि अधिकारी ड्रग्स की समस्या को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने के बजाय, इसके खिलाफ आवाज उठाने वालों को दबाने पर ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा कि ड्रग्स को रोकने में नाकाम रही ‘आप’ सरकार अब ड्रग्स के खिलाफ उठने वाली आवाजों को दबाने पर ध्यान दे रही है। ढिल्लों ने दावा किया कि जगसीर सिंह ने अपने गांव में ड्रग्स की कथित खुलेआम बिक्री के खिलाफ आवाज उठाई थी, लेकिन उनके साथ भी वैसा ही व्यवहार किया गया जैसा गुलजार सिंह के साथ हुआ था। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि इस घटना से जगसीर इतने टूट गए कि उन्हें जहर खाने के लिए मजबूर होना पड़ा। गुस्सा जाहिर करते हुए भाजपा नेता ने कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि मुख्यमंत्री के गृह जिले संगरूर में एक ही महीने में कथित तौर पर ऐसी तीन घटनाएं हुईं। उन्होंने पूछा कि अगर मुख्यमंत्री अपने ही इलाके के लोगों को ड्रग्स और माफिया से नहीं बचा सकते, तो बाकी पंजाब का क्या होगा? ढिल्लों का यह बयान ऐसे समय में आया है जब आप सरकार पंजाब में पिछले साढ़े चार साल की अपनी उपलब्धियों के बारे में लोगों को बताने के लिए घर-घर जाकर अभियान चला रही है। ड्रग्स के खिलाफ अभियान चलाने वालों को भाजपा का समर्थन दोहराते हुए ढिल्लों ने कहा कि उनकी पार्टी बेगुनाह लोगों की आवाज को दबने नहीं देगी और ड्रग्स के खिलाफ लड़ रहे जगसीर सिंह और अन्य लोगों के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी।
नागालैंड: एनएसएफ प्रतिनिधिमंडल को रोकने पर असम राइफल्स का स्पष्टीकरण, ‘सीमा पार करने के लिए जरूरी अनुमति नहीं थी’

कोहिमा। नागालैंड के मेलुरी जिले के अवांगखु में नागा स्टूडेंट्स फेडरेशन (एनएसएफ) के प्रतिनिधिमंडल को म्यांमार जाने से रोके जाने के मामले में असम राइफल्स ने स्पष्टीकरण जारी किया है। असम राइफल्स के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल को उसकी पहचान या प्रस्तावित यात्रा के उद्देश्य के कारण नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करने के लिए आवश्यक वैध अनुमति और दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के कारण रोका गया। असम राइफल्स ने उन मीडिया रिपोर्टों का खंडन किया है, जिनमें कहा गया था कि एनएसएफ प्रतिनिधिमंडल को म्यांमार जाते समय अवांगखु में रोक दिया गया। बल का कहना है कि इस मामले को नागा पहचान या लोगों के बीच सांस्कृतिक संपर्क से जोड़ने के बजाय निर्धारित सीमा नियमों और आवश्यक दस्तावेजों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। असम राइफल्स द्वारा जारी स्पष्टीकरण के अनुसार, 19 सितंबर को सुबह करीब 11:30 बजे आठ लोग तीन वाहनों में निर्धारित सीमा पारगमन स्थल पर पहुंचे थे। प्रतिनिधिमंडल ने म्यांमार के त्सेरा जाने के लिए भारत-म्यांमार सीमा पार करने की इच्छा जताई थी। स्पष्टीकरण में कहा गया है कि सीमा पार करने के लिए आवश्यक दस्तावेज मांगे जाने पर प्रतिनिधिमंडल सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी वैध बॉर्डर पास या अनुमति प्रस्तुत नहीं कर सका। इसी आधार पर प्रतिनिधिमंडल को सीमा पार करने की अनुमति नहीं दी गई। असम राइफल्स ने कहा कि यह मामला सांस्कृतिक संबंधों या लोगों के बीच संपर्क को रोकने का नहीं, बल्कि सीमा पार आवाजाही के लिए लागू नियमों के अनुपालन का है। आधिकारिक बयान में इस बात पर भी आपत्ति जताई गई कि सोशल मीडिया और कुछ मीडिया मंचों पर इस घटना को नागा पहचान से जोड़कर पेश किया जा रहा है। असम राइफल्स का कहना है कि सीमा नियमन से जुड़े एक विशिष्ट मामले को समुदाय और सुरक्षा बलों के बीच टकराव के व्यापक मुद्दे के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं है। बल ने दोहराया कि भारत-म्यांमार सीमा पर आवाजाही इस संबंध में निर्धारित सरकारी नीति और शर्तों के अधीन है। असम राइफल्स के स्पष्टीकरण में कहा गया कि मौजूदा विनियमित आवाजाही व्यवस्था के तहत निर्धारित सीमा पारगमन स्थलों से आवाजाही के लिए पात्रता और आवश्यक दस्तावेजों की शर्तें लागू होती हैं। आधिकारिक संचार में उद्धृत प्रावधानों के अनुसार, फ्री मूवमेंट रिजीम की सुविधा भारत-म्यांमार सीमा के दोनों ओर 10 किलोमीटर के दायरे में स्थित पात्र गांवों के लिए लागू होती है। बयान के अनुसार, एनएसएफ प्रतिनिधिमंडल नागालैंड की राजधानी कोहिमा से आया था। ऐसे में केवल प्रस्तावित सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम या किसी संगठन के संदर्भ पत्र के आधार पर प्रतिनिधिमंडल को स्वतः अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करने का अधिकार नहीं मिलता। असम राइफल्स ने स्पष्ट किया कि किसी नागरिक संगठन द्वारा जारी रेफरेंस लेटर या सिफारिश पत्र अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करने की वैध अनुमति का विकल्प नहीं है। असम राइफल्स ने अपने पक्ष के समर्थन में सीमा पार आवाजाही के आंकड़े भी साझा किए हैं। आधिकारिक स्पष्टीकरण के मुताबिक, संबंधित व्यवस्था के तहत अब तक 16,428 बॉर्डर पास जारी किए जा चुके हैं। बल का कहना है कि यह आंकड़ा दर्शाता है कि निर्धारित शर्तों और दस्तावेजी आवश्यकताओं को पूरा करने वाले लोगों की सीमा पार आवाजाही को नियमानुसार सुगम बनाया जा रहा है। असम राइफल्स ने मीडिया संस्थानों से संवेदनशील सीमा संबंधी मामलों में खबर प्रकाशित करने से पहले संबंधित सक्षम अधिकारियों से तथ्यों की पुष्टि करने की अपील की है। बयान में कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करने जैसे संवेदनशील विषयों पर अधूरी या अपुष्ट जानकारी प्रकाशित करने से पहले उचित सावधानी बरती जानी चाहिए और खबरों में इस विषय पर लागू सरकारी नीतियों तथा नियमों का संदर्भ भी शामिल किया जाना चाहिए।
छत्तीसगढ़: आदिवासी कल्याण विभाग के ड्राइवर की संदिग्ध हालात में मौत

सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में आदिवासी कल्याण विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर के ड्राइवर की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, वह पारंपरिक इलाज के लिए एक रिश्तेदार के साथ दूर-दराज के एक गांव गया था। मृतक की पहचान लखनराम के तौर पर हुई है। वह ओडागी पुलिस स्टेशन इलाके के पर्सिया गांव में अपने जीजा के साथ पारंपरिक इलाज और झाड़-फूंक के लिए गया था। पुलिस के अनुसार, गांव से लौटते समय लखनराम ने बहुत ज्यादा शराब पी ली थी, जिसकी वजह से वह चल नहीं पा रहा था। एक दूसरे व्यक्ति की मदद से उसे एक नाले के पार ले जाया गया और एक परिचित के घर सोने के लिए छोड़ दिया गया। अगली सुबह जब उसका जीजा उसे देखने गया, तो लखनराम वहां नहीं मिला। बाद में उसका शव घर से लगभग 100-200 मीटर दूर एक गड्ढे में मिला। सूरजपुर के एडिशनल सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (एएसपी) योगेश कुमार देवांगन ने बताया कि पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस को शक है कि ज्यादा शराब पीने और गड्ढे में गिरने की वजह से मौत हुई होगी। हालांकि, मौत की असल वजह का पता पोस्टमार्टम और आगे की जांच के बाद ही चलेगा। इस घटना ने मृतक के परिवार वालों और अन्य लोगों के मन में उसकी मौत के हालात को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस बीच, खराब सड़कों की वजह से लखनराम के शव को दूर-दराज के गांव से बाहर निकालना मुश्किल साबित हुआ। कीचड़ और खराब सड़कों के कारण गांव तक गाड़ियां नहीं पहुंच पा रही थीं, इसलिए ग्रामीणों और अन्य लोगों ने बेडशीट, कंबल और बांस से एक कामचलाऊ स्ट्रेचर बनाया और शव को कंधे पर उठाकर उस जगह तक ले गए जहां गाड़ियां पहुंच सकती थीं। इस घटना ने इलाके में अच्छी सड़क सुविधा न होने की बात को भी उजागर किया है। ग्रामीणों ने हाल ही में परसिया गांव तक जाने वाली सड़क को बेहतर बनाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। पुलिस मौत की सही वजह का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। आगे की जांच चल रही है।
बीजापुर: जंगल में छिपाकर रखा गया हथियारों का जखीरा बरामद, एके-47 समेत चार हथियार और 76 जिंदा कारतूस जब्त

बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में नक्सल विरोधी अभियान के बीच भैरमगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम उतला के जंगल में पुलिस ने जमीन के भीतर छिपाकर रखा गया हथियारों का जखीरा बरामद किया है। पुलिस के मुताबिक, आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों से पूछताछ के दौरान मिली सूचना के आधार पर चलाए गए सर्च ऑपरेशन में एके-47 समेत चार हथियार और कुल 76 जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। पुलिस के अनुसार, पुलिस अधीक्षक उमेश प्रसाद गुप्ता के निर्देश और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नक्सल अमन झा के नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई। आत्मसमर्पित नक्सलियों से मिली सूचना के बाद थाना भैरमगढ़ से पुलिस बल को ग्राम उतला के जंगल की ओर रवाना किया गया। अभियान से पहले अनुविभागीय अधिकारी पुलिस भैरमगढ़ नवीन एक्का ने जवानों को सुरक्षा संबंधी आवश्यक दिशा-निर्देश और ब्रीफिंग दी। पुलिस टीम ने निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन करते हुए उतला के जंगल में सर्चिंग अभियान चलाया। इसी दौरान जवानों को जमीन के भीतर छिपाकर रखा गया एक डम्प मिला। पुलिस ने डम्प को बाहर निकालकर उसकी जांच की तो उसमें हथियार और कारतूस मिले। पुलिस के मुताबिक, बरामद सामग्री में एक एके-47 रायफल, एक 315 बोर रायफल, एक सिंगल शॉट रायफल और एक 9 एमएम पिस्टल शामिल है। इसके अलावा पुलिस ने एके-47 की दो मैगजीन, एके-47 के 45 जिंदा राउंड, 9 एमएम के 25 जिंदा राउंड और 315 बोर रायफल के 6 जिंदा राउंड बरामद करने की बात कही है। इस तरह ऑपरेशन में कुल 76 जिंदा कारतूस बरामद किए गए। पुलिस का कहना है कि आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों से संगठन की गतिविधियों और पूर्व की घटनाओं के संबंध में लगातार जानकारी जुटाई जा रही है। इसी प्रक्रिया में मिली सूचनाओं के आधार पर जंगलों में छिपाए गए हथियारों और अन्य सामग्री की तलाश भी की जा रही है। पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पित नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से विभिन्न सामाजिक कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं। पुलिस का दावा है कि इन प्रयासों से आत्मसमर्पण करने वालों का पुलिस और प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ाने के साथ उन्हें सामान्य जीवन में लौटने में मदद मिल रही है। पुलिस ने उतला के जंगल से बरामद हथियारों और कारतूसों को थाना भैरमगढ़ लाकर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस अधीक्षक उमेश प्रसाद गुप्ता ने अभियान में शामिल अधिकारियों और जवानों को कार्रवाई के लिए बधाई देते हुए भविष्य में भी इस तरह के अभियान जारी रखने के निर्देश दिए हैं। पुलिस के मुताबिक, जिले के संवेदनशील और नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों की ओर से लगातार सर्चिंग और निगरानी अभियान चलाए जा रहे हैं।
तेलंगाना में कार में बंद होने से चार साल की बच्ची की मौत

हैदराबाद। एक दुखद घटना में, रविवार को तेलंगाना के भद्राद्री कोठागुडेम जिले में खड़ी कार के अंदर बंद हो जाने से दम घुटने के कारण चार साल की बच्ची की मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि यह घटना जुलुरुपाडु मंडल के विनोबा नगर गांव में हुई। बच्ची की पहचान विनोबा नगर के सरपंच गंगावत नवीन की बेटी तन्विश्री के तौर पर हुई है। घर के पास खेलते समय बच्ची ने खड़ी कार का दरवाजा खोल दिया। किसी को पता नहीं चला और बच्ची के अंदर होने पर गाड़ी का दरवाजा लॉक हो गया। जब तन्विश्री काफी देर तक घर नहीं लौटी, तो परिवार वालों ने आस-पड़ोस में उसे खोजना शुरू किया। दो घंटे की खोजबीन के बाद, किसी ने कार के अंदर झांका और बच्ची को आगे की दो सीटों के बीच पड़ा हुआ देखा। उन्होंने खिड़की के शीशे तोड़े और बच्ची को बाहर निकाला। उसे कोठागुडेम के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस को शक है कि बंद कार के अंदर हवा न आने की वजह से दम घुटने से लड़की की मौत हो गई होगी। इस घटना से गांव वाले हैरान रह गए। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आगे की जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने माता-पिता को सावधान रहने और यह पक्का करने की सलाह दी है कि बच्चे खड़ी गाड़ियों तक न पहुंच पाएं। उन्होंने लोगों से यह भी कहा कि वे कार को लॉक करने से पहले उसे अच्छी तरह जांच लें, खासकर तब जब आस-पास बच्चे हों। अप्रैल 2026 में नलगोंडा जिले में भी ऐसी ही एक घटना हुई थी। एक पांच साल की लड़की की मौत खड़ी कार के अंदर लॉक हो जाने के कारण हो गई थी। पिछले साल अप्रैल में, रंगा रेड्डी जिले के चेवेल्ला के डामारागिड्डा गांव में खड़ी कार के अंदर फंसे दो बच्चों की दम घुटने से मौत हो गई थी। एक पांच साल की लड़की और चार साल का लड़का घर के बाहर खेलते समय एक रिश्तेदार की गाड़ी में घुस गए थे। बताया जाता है कि दरवाजे लॉक हो गए और बच्चे उन्हें खोल नहीं पाए, जिससे दम घुटने से उनकी मौत हो गई।
‘एसी कमरे में बैठकर नहीं समझेंगे हालात’, छात्रों की दुर्दशा पर भड़के अमित ठाकरे

पुणे। पुणे के सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज में छात्रों की स्थिति पर रविवार को महाराष्ट्र नवनिर्माण विद्यार्थी सेना (एमएनवीएस) के अध्यक्ष अमित ठाकरे ने सख्त नाराजगी जताई। दौरे के बाद उन्होंने कॉलेज प्रिंसिपल और पुलिस से तुरंत सुधार की अपील करते हुए चेतावनी दी कि गणेशोत्सव खत्म होते ही वे दोबारा निरीक्षण करने आएंगे। इसी दौरान एमएनवीएस अध्यक्ष ने मराठवाड़ा और विदर्भ में सूखे जैसे हालात पर सरकार को घेरा। पॉलिटेक्निक कॉलेज के दौरे को लेकर एमएनवीएस के अध्यक्ष अमित ठाकरे ने कहा, “मैं वहां फिर से जाऊंगा। जैसे ही गणेशोत्सव खत्म होगा। मैं यह देखने के लिए सबसे पहले वहां जाऊंगा कि क्या समस्याएं हल हो गई हैं? मैं पुलिस और प्रिंसिपल से भी अपील करता हूं, जैसा कि मैंने पहले कहा है कि वहां की समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए। ये बच्चे कीड़े वाला खाना खा रहे हैं। उनके पीने के पानी में कीड़े हैं। उनके शौचालय की हालत बहुत खराब और गंदी है। उनके हॉस्टल की हालत भी गंदी है। छात्रों को ऐसी हालत में नहीं रहना चाहिए, चाहे वे सरकारी या प्राइवेट संस्थान हों।” महाराष्ट्र नवनिर्माण विद्यार्थी सेना के अध्यक्ष ने कहा कि एसी कमरे में बैठकर आप जमीनी हालात को नहीं समझ पाएंगे। किसानों से मिलिए। मैंने कई वीडियो देखे हैं, जिसमें किसान मंत्रियों के पास जाकर कहते हैं कि ‘प्लीज हमारे बारे में सोचिए और हमसे मिलने आइए।’ वे रो रहे होते हैं, जबकि मंत्री उनकी बात सुने बिना चले जाते हैं। मुझे लगता है कि आपने भी ये वीडियो देखे होंगे। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि सूखे की स्थिति घोषित कर देनी चाहिए और किसानों को जो राहत चाहिए, वह उन्हें दी जानी चाहिए। हो सकता है आपने (सरकार) अभी तक ऐसी घोषणा न की हो, लेकिन कुदरत ने पहले ही सूखे जैसी स्थिति बना दी है।” अमित ठाकरे ने कहा कि मैं हर साल पुणे आता हूं और गणेशोत्सव का अनुभव करने के लिए यहां आना मुझे बहुत अच्छा लगता है। जिस तरह से लोग गौरी गणपति के बाद या पांचवें दिन गणपति दर्शन के लिए आते हैं, उससे उत्साह का एक बिल्कुल अलग माहौल बन जाता है। शहर में घूमना और पैदल गणपति पंडालों में जाना अपने आप में एक अनुभव है। मराठवाड़ा और विदर्भ इलाकों में सूखे जैसे हालात को लेकर एमएनवीएस अध्यक्ष ने कहा कि मैं इलाके का दौरा करने जा रहा हूं। जिम्मेदार मंत्रियों को सूखे की स्थिति घोषित करनी चाहिए।
ओडिशा विधानसभा सत्र से पहले पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा, 22 सितंबर से 3 अक्टूबर तक चलेगा सदन

भुवनेश्वर। ओडिशा विधानसभा के 17वें कार्यकाल का सातवां सत्र 22 सितंबर से 3 अक्टूबर तक चलेगा। इसे देखते हुए कमिश्नरेट पुलिस ने भुवनेश्वर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। जानकारी के अनुसार, सत्र के दौरान कड़ी सुरक्षा और यातायात व्यवस्था सुचारू रखने के लिए पुलिस बल की 36 पलटन तैनात की गई हैं। इसके अलावा दो पुलिस उपायुक्त (डीसीपी), छह अतिरिक्त डीसीपी, 24 सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी), 134 इंस्पेक्टर, सब-इंस्पेक्टर और एएसआई, एक विशेष टैक्टिकल यूनिट और 60 यातायात कर्मियों को तैनात किया गया है। कुल 11 क्विक रिस्पॉन्स टीमें (क्यूआरटी) भी तैनात की गई हैं। इनमें से सात टीमें विधानसभा के अंदर रहेंगी, जबकि दो मोबाइल क्यूआरटी विधानसभा के आसपास तैनात रहेंगी। एक टीम ट्रैफिक पुलिस स्टेशन-1 और एक अन्य लोक सेवा भवन में तैनात रहेगी। ट्विन सिटी पुलिस ने तीन कंट्रोल रूम भी बनाए हैं। इनमें एक ओडिशा विधानसभा के उत्तरी गेट पर, दूसरा एमजी मार्ग स्थित यूनिफाइड कंट्रोल रूम में और तीसरा निर्धारित धरना स्थल पर बनाया गया है। ये तीनों कंट्रोल रूम चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं। पिछले दिनों आत्मदाह की कोशिशों की बार-बार हुई घटनाओं को देखते हुए ऐसी कोशिशों को रोकने के लिए सादे कपड़ों में एक विशेष टीम बनाई गई है। कैपिटल पुलिस स्टेशन के प्रभारी निरीक्षक इस टीम के कामकाज की निगरानी करेंगे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, किसी भी अप्रत्याशित घटना से निपटने के लिए विधानसभा भवन की छत और अन्य महत्वपूर्ण तथा संवेदनशील स्थानों पर भी पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की गई है। दमकल, चिकित्सा सहायता, सीसीटीवी निगरानी, संचार व्यवस्था, पीने के पानी और अन्य जरूरी सुविधाओं के इंतजाम भी किए गए हैं। किसी भी स्थिति में तुरंत कार्रवाई के लिए एक बम निरोधक दस्ता तैनात किया गया है। भीड़ की गतिविधियों पर नजर रखने और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए जरूरत के अनुसार ड्रोन का भी इस्तेमाल किया जाएगा। ट्रैफिक डीसीपी विधानसभा परिसर के अंदर वाहनों की पार्किंग व्यवस्था की निगरानी करेंगे और बाहर यातायात को नियंत्रित करेंगे, ताकि जाम की स्थिति न बने। जरूरी कानूनी प्रक्रियाओं के लिए भुवनेश्वर यूपीडी के क्षेत्रीय कार्यालय में एक अस्थायी टीम भी काम करेगी। कमिश्नरेट पुलिस ने कहा कि सभी इकाइयों को जरूरी निर्देश दे दिए गए हैं और विधानसभा सत्र के दौरान किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पुलिस पूरी तरह तैयार है।
मध्य नाइजीरिया में अलग-अलग हमलों में कम से कम नौ लोगों की मौत

अबुजा। मध्य नाइजीरिया के प्लेटो राज्य में अज्ञात बंदूकधारियों द्वारा किए गए अलग-अलग हमलों में कम से कम नौ लोगों की मौत हो गई। हमलों के बाद प्रभावित इलाकों में तनाव का माहौल है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शनिवार रात से रविवार सुबह के बीच बरकिन लाडी, रियोम और आसपास के कई समुदायों में बंदूकधारियों ने हमला किया। बरकिन लाडी इलाके में शनिवार रात एक बस पर हमला किया गया, जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई। वहीं रविवार सुबह चर्च जा रहे चार अन्य लोगों की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई। स्थानीय समुदाय संगठन म्वाघावुल डेवलपमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष बुलुस डाबिट ने बताया कि बस में सवार लोग दूसरे शहर में काम पर जा रहे मजदूर थे। हमलों के बाद कई लोगों ने अपने गांव छोड़ दिए हैं, जबकि कुछ स्थानीय लोग आगे के हमलों का सामना करने के लिए अपने समुदायों में ही डटे हुए हैं। बरकिन लाडी शाखा के मियेट्टी अल्लाह कैटल ब्रीडर्स एसोसिएशन ऑफ नाइजीरिया के सचिव गाम्बो अबुबकर ने दावा किया कि कुछ मवेशियों की कथित चोरी की गई थी और हमला उसी विवाद से जुड़ा हो सकता है। हालांकि, अभी तक किसी संगठन ने हमलों की जिम्मेदारी नहीं ली है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और हमलावरों की तलाश के लिए अभियान चलाया जा रहा है। गौरतलब है कि प्लेटो राज्य नाइजीरिया के ‘मिडिल बेल्ट’ क्षेत्र में स्थित है, जहां भूमि और संसाधनों को लेकर विभिन्न समुदायों के बीच हिंसक झड़पें अक्सर होती रहती हैं। इससे पहले 13 सितंबर को भी प्लेटो राज्य में मोटरसाइकिल सवार बंदूकधारियों ने एक व्यावसायिक बस पर हमला किया था, जिसमें नौ लोगों की मौत हुई थी। उस मामले की जांच भी जारी है।