भारत का बड़ी आर्थिक शक्ति बनना ‘ग्लोबल साउथ’ देशों की मदद में सहायक: विदेश मंत्री जयशंकर

संयुक्त राष्ट्र। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने लैटिन अमेरिका और कैरिबियन देशों को भरोसा दिलाया कि एक बड़ी आर्थिक शक्ति के तौर पर भारत का उभरना, उसे ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों की साझा समृद्धि हासिल करने में मदद करने में सक्षम बनाता है। उन्होंने मंगलवार को यहां ‘कम्युनिटी ऑफ लैटिन अमेरिकन एंड कैरिबियन स्टेट्स’ (सीईएलएसी) के विदेश मंत्रियों से कहा, “पिछले दशक में भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनकर उभरा है। हमारी जीडीपी दोगुनी से अधिक हो गई है और विकास दर मजबूत बनी हुई है।” उन्होंने बताया कि “आज भारत के पास बड़ी और तेजी से कुशल हो रही मानव संसाधन क्षमता, बढ़ती हुई क्षमताएं, एक बढ़ता हुआ बाजार, मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बढ़ती क्षमताएं मौजूद हैं।” उन्होंने कहा, “इससे वैश्विक विकास और ‘ग्लोबल साउथ’ के साझेदारों के लिए सार्थक योगदान देने की हमारी क्षमता मजबूत हुई है।” उन्होंने कहा कि ‘ग्लोबल साउथ’ के साथ भारत का जुड़ाव संकीर्ण राष्ट्रीय हितों से प्रेरित नहीं है, बल्कि यह “हमारी एकजुटता और साझा समृद्धि के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।” उन्होंने पिछले साल जमैका में आए हरिकेन मेलिसा और इस साल वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के दौरान भारत की मदद, कैरिबियन में विकास कार्यक्रमों के लिए समर्थन और लैटिन अमेरिकी देशों को दवाइयों की सप्लाई का जिक्र किया। विदेश मंत्री जयशंकर ने उरुग्वे के विदेश मंत्री मारियो लुबेटकिन के साथ 33 सदस्यों वाले सीईएलएसी के विदेश मंत्रियों की बैठक की सह-अध्यक्षता की। बैठक के बाद उन्होंने एक्स पर कहा कि मंत्री स्वास्थ्य और फार्मा, खाद्य और कृषि, ऊर्जा और संसाधन, छोटे और मध्यम उद्यमों और डिजिटल टेक्नोलॉजी के क्षेत्रों में सहयोग करने पर सहमत हुए। उन्होंने कहा कि उन्होंने भारत की अगुवाई वाली पहलों, जैसे इंटरनेशनल सोलर अलायंस, कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर, इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस, ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस और मिशन लाइफ के लिए भी समर्थन दिया।
दिल्ली : मदीना मस्जिद पर अतिक्रमण कार्रवाई के बाद बवाल, इमाम बोले – कुरान तक निकालने नहीं दी

नई दिल्ली। दिल्ली के शालीमार बाग इलाके में मैक्स हॉस्पिटल रोड चौड़ीकरण के तहत देर रात प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई की। इस कार्रवाई के दौरान मदीना मस्जिद और उसके आसपास बने कई मकानों सहित सड़क पर मौजूद अवैध कब्जों को हटाया गया। वहीं, मदीना मस्जिद पर हुई कार्रवाई की खबर फैलते ही इलाके में तनाव का माहौल बन गया। घटना की जानकारी मिलने पर एआईएमआईएम के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष शोएब जमाई देर रात करीब 11:30 बजे शालीमार बाग पहुंचे। उन्होंने स्थानीय लोगों से मुलाकात की और इस कार्रवाई को असंवैधानिक बताते हुए इसका कड़ा विरोध किया। मदीना मस्जिद के इमाम जरीफुर रहमान ने प्रशासन के दावे पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, “इस मस्जिद को गैर-कानूनी बताया जा रहा है, लेकिन सच्चाई यह है कि शालीमार में लगभग हर घर जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) के आधार पर बना हुआ है। पूरा इलाका इसी दस्तावेज के सहारे बसा है, फिर भी केवल मस्जिद को ही अवैध करार दिया जा रहा है। यह भेदभावपूर्ण रवैया है।” इमाम ने बताया, “हमने वकील के माध्यम से अदालत में अपना पक्ष रखा और सभी जरूरी जवाब दाखिल किए। इसके बाद कोर्ट ने एमसीडी को नोटिस भेजा। एमसीडी ने हमें सुनवाई के लिए बुलाया, जहां हमने अपना सारा पक्ष और दस्तावेज उनके सामने रखे। लेकिन सुनवाई के अगले ही दिन एमसीडी ने एक नोटिस जारी कर दिया, जिसमें मस्जिद को 15 दिनों के भीतर खुद हटाने या नगर निगम की कार्रवाई के लिए तैयार रहने को कहा गया। इसके बाद हम दोबारा कोर्ट गए, जहां से हमें केवल ग्राउंड फ्लोर पर स्टे मिला, ऊपरी मंजिलों के लिए कोई राहत नहीं मिली।” मदीना मस्जिद के प्रेसिडेंट मोविन खान ने कानूनी प्रक्रिया पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा, “वकील की सलाह पर हमने अदालत में एक नई अर्जी दाखिल की थी, जिसमें हमने एमसीडी से दस्तावेजों की स्पष्ट कॉपी मांगी थी, ताकि हम एक सटीक और सही जवाब तैयार कर सकें। लेकिन इस बीच एमसीडी ने लगातार तीन नोटिस जारी कर दिए, जिसमें कहा गया कि 15 दिनों के अंदर तोड़फोड़ की कार्रवाई की जाएगी।” मोविन खान ने आगे बताया, “इसके बाद हमने अपीलेट ट्रिब्यूनल में केस दायर किया। 15 तारीख को हुई पहली सुनवाई में ट्रिब्यूनल ने कहा कि जिस मंजिल पर बिजली का मीटर लगा है, उसे मान्यता दी गई है, लेकिन बाकी के हिस्से को नया निर्माण माना गया है। हमने अदालत से अनुरोध किया कि वह दीवारों पर लगे प्लास्टर की उम्र की जांच करे। हमने बताया कि हमने यह तीन मंजिलें साल 2001 में ही बनाई थीं और कोर्ट में उस समय का साइट प्लान भी जमा किया था। लेकिन जज ने हमारे नक्शों और दलीलों पर ध्यान नहीं दिया और आदेश दे दिया कि ऊपरी मंजिलों को गिराया जा सकता है।” इस पूरे मामले में एआईएमआईएम ने इसे धार्मिक भावनाओं से जोड़ते हुए प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एआईएमआईएम के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष शोएब जमाई ने कहा, “हमें देर रात करीब 11:30 बजे पार्टी नेता असदुद्दीन ओवैसी का संदेश मिला कि शालीमार बाग में ऐसी घटना हुई है। मैंने तुरंत अपनी लोकल टीम को मौके पर हालात का जायजा लेने के लिए भेजा।” शोएब जमाई ने आरोप लगाया, “पता चला कि शालीमार गांव में, जहां मस्जिद को लेकर कोर्ट में मामला अभी भी विचाराधीन था, वहां देर रात अंधेरे में, इलाके की सारी लाइटें बंद करके बुलडोजर से कार्रवाई की गई। मस्जिद के इमाम और स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें मस्जिद के अंदर से पवित्र कुरान और अन्य धार्मिक किताबों को निकालने तक का समय नहीं दिया गया। यह जुल्म की हद है। देश की राजधानी में बिना किसी को जानकारी दिए अंधेरे में इस तरह की कार्रवाई करना बेहद निंदनीय है, इसलिए हमने अपनी लोकल टीम और मीडिया को इसकी सूचना दी।” शोएब जमाई ने इस मुद्दे पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को भी घेरा। उन्होंने कहा, “मैं दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से पूछना चाहता हूं कि यह आपका ही इलाका शालीमार बाग है न? जब यहां हमारे हिंदू भाइयों के घरों पर बुलडोजर चला था, तब भी हमने आवाज उठाई थी। और आज जब मस्जिद पर बुलडोजर चल रहा है, तब भी हम आवाज उठा रहे हैं। हम यहां कोई भेदभाव नहीं करते। लेकिन दिल्ली की मुख्यमंत्री के अपने इलाके में बुलडोजर चल रहा है, और वह भी उनके कहने पर? रात के अंधेरे में उनके इशारे पर बुलडोजर चलाना, यह अहंकार और घमंड बहुत भारी पड़ेगा।” उन्होंने आगे सवाल उठाते हुए कहा, “आखिर ऐसी क्या इमरजेंसी आ गई थी कि आधी रात को मस्जिद पर बुलडोजर चलाना पड़ा? कुरान या दूसरी धार्मिक किताबों को हटाने का समय तक क्यों नहीं दिया गया? हमें स्थानीय एआईएमआईएम नेताओं से और हमारे नेता ओवैसी से कॉल आया था, उन्होंने स्थिति समझाई, जिसके बाद हमारी पूरी टीम तुरंत यहां इकट्ठा हुई। देश की राजधानी में आधी रात को इस तरह का दमन बिल्कुल मंजूर नहीं है।
अमेरिका की प्रथम महिला मेलानिया ने बच्चों के लिए वैश्विक प्रौद्योगिकी और शिक्षा गठबंधन का दायरा बढ़ाया

संयुक्त राष्ट्र। अमेरिका की प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप ने बच्चों के लिए 57 देशों तक अपने वैश्विक प्रौद्योगिकी और शिक्षा गठबंधन का दायरा बढ़ाया है। उन्होंने छह बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों के साथ साझेदारी की घोषणा की है। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के साथ आयोजित एक सभा के दौरान मेलानिया ट्रंप ने ‘फोस्टरिंग द फ्यूचर टुगेदर’ के विस्तार की जानकारी दी। उन्होंने ब्रिटेन, दक्षिण कोरिया, फिलीपींस, पोलैंड, यूक्रेन, तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात, पनामा और कनाडा समेत कई देशों के नेताओं और प्रतिनिधियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा, “हम सब मिलकर संस्कृतियों, भाषाओं, इतिहास और परंपराओं का एक सुंदर संगम हैं। फिर भी, हम एक शाश्वत सत्य के लिए एकजुट हैं। हमारी दुनिया का भविष्य इस बात से तय होगा कि आज हम अपने बच्चों के लिए क्या करते हैं।” ‘फोस्टरिंग द फ्यूचर टुगेदर’ का उद्देश्य बच्चों की प्रौद्योगिकी और शिक्षा तक पहुंच बढ़ाना है। साथ ही, उन्हें नए उपकरणों का इस्तेमाल करने के लिए आवश्यक ज्ञान और कौशल विकसित करने में मदद करना है। अमेरिका की प्रथम महिला ने कहा कि युवाओं को सशक्त बनाने के लिए केवल प्रौद्योगिकी तक पहुंच ही पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि बच्चों को यह भी सीखना चाहिए कि नई टेक्नोलॉजी का जिम्मेदारीपूर्वक और प्रभावी ढंग से उपयोग कैसे किया जाए। उन्होंने कहा, “हम मानव इतिहास के एक असाधारण दौर में जी रहे हैं। हम एक तकनीकी क्रांति की दहलीज पर एक साथ खड़े हैं।” नए निजी क्षेत्र के साझेदार एडोब, अमेजन, गूगल, इंटेल, स्टारलिंक और जूम हैं। इस कार्यक्रम में एप्पल के टिम कुक और पेपाल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एनरिक लोरेस भी उपस्थित थे। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, वीडियो कॉलिंग, मोबाइल कंप्यूटर, स्वचालित वाहन, आभासी वातावरण और बायोमेट्रिक पहचान को उन प्रौद्योगिकियों के उदाहरण के रूप में उद्धृत किया जो विज्ञान कथाओं से निकलकर रोजमर्रा की जिंदगी में आ चुकी हैं। उन्होंने कहा, “कृत्रिम बुद्धिमत्ता पूरे व्यावसायिक क्षेत्र को बदल रही है और मानवता के लिए अब तक उपलब्ध जानकारी के सबसे बड़े भंडार तक पहुंच के दायरे को बढ़ा रही है। लेकिन सिर्फ पहुंच ही सशक्तिकरण नहीं है। हमें अपने बच्चों को टूल्स देने होंगे और उन्हें यह सिखाना होगा कि उन टूल्स का समझदारी से इस्तेमाल कैसे किया जाए।” प्रथम महिला ने 2026 के शेष बचे समय के लिए ‘फोस्टरिंग द फ्यूचर टुगेदर’ के चार कार्यक्रमों की भी घोषणा की। वह दिसंबर में फ्लोरिडा के मियामी में गठबंधन के पहले जी20 कार्यक्रम की मेजबानी करेंगी। फिलीपींस की प्रथम महिला लिजा अरानेटा मार्कोस मनीला में आसियान सम्मेलन के दौरान एक कार्यक्रम की मेजबानी करेंगी। पोलैंड की प्रथम महिला मार्टा नवरोका एक यूरोपीय क्षेत्रीय बैठक का आयोजन करेंगी, जबकि सेंट किट्स और नेविस के डियानी प्रिंस-डू कैरेबियन सम्मेलन की मेजबानी करेंगे। उन्होंने जीवनसाथियों और अन्य नेताओं से बच्चों को ज्ञान के नए क्षेत्रों का पता लगाने, सोच-समझकर जोखिम उठाने और सामाजिक प्रगति में योगदान देने में मदद करने का आह्वान किया। मेलानिया ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र के दौरान ‘फोस्टरिंग द फ्यूचर टुगेदर’ पहल की शुरुआत की। इस पहल का उद्देश्य शुरू में सरकारों को एक साझा लक्ष्य के लिए एकजुट करना था। साथ ही, प्रौद्योगिकी और शिक्षा के जरिए बच्चों को सशक्त बनाना था।
इंग्लैंड की श्रीलंका पर 89 रन की जीत में चमके विल जैक्स, ऑलराउंडर के नाम जुड़े ये रिकॉर्ड चेस्टर ली

स्ट्रीट। इंग्लैंड दौरे पर टी20 सीरीज में बुरी तरह हारने वाली श्रीलंका के लिए वनडे सीरीज का आगाज भी निराशाजनक रहा है। श्रीलंका को मंगलवार को खेले गए पहले वनडे में इंग्लैंड ने 89 रन से हरा दिया। इंग्लैंड की जीत के हीरो ऑलराउंडर विल जैक्स रहे। प्लेयर ऑफ द मैच रहे जैक्स के नाम इस मैच में कई रिकॉर्ड जुड़े। विल जैक्स ने छठे नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए 47 गेंदों पर नाबाद 46 रन की पारी खेली। इसके बाद गेंदबाजी के दौरान भी जैक्स छठे नंबर पर आए और 7 ओवर में 22 रन देकर 5 विकेट लिए। उनके इस ऑलराउंड प्रदर्शन ने इंग्लैंड को जीत दिलाया और उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच पुरस्कार। विल जैक्स के नाम इस मैच के दौरान कई रिकॉर्ड भी जुड़े। जैक्स ने पहली बार वनडे में 5 विकेट लिए हैं। इंग्लैंड की तरफ से किसी स्पिनर का वनडे में किया गया यह दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। पहले स्थान पर विक मार्क्स हैं। मार्क्स ने 1984 में न्यूजीलैंड के खिलाफ 20 रन देकर 5 विकेट लिए थे। आदिल रशीद अब तीसरे नंबर पर चले गए हैं। रशीद ने 2017 में ब्रिस्टल में आयरलैंड के खिलाफ 27 रन देकर 5 विकेट लिए थे। जैक्स इंग्लैंड के चौथे ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने किसी वनडे में 40 से अधिक रन बनाने के साथ ही 5 या उससे अधिक विकेट लिए हैं। उनसे पहले ग्रिम हिक ने 2000 में जिम्बाब्वे के खिलाफ हरारे में 80 रन बनाने के साथ ही 33 रन देकर 5 विकेट लिए थे। रोनी ईरानी ने 2002 में द ओवल में भारत के खिलाफ 53 रन बनाने के अलावा 26 रन देकर 5 विकेट लिए थे। पॉल कोलिंगवुड ने 2005 में बांग्लादेश के खिलाफ 112 रन बनाने के अलावा 31 रन देकर 6 विकेट लिए थे। विल जैक्स वनडे में श्रीलंका के खिलाफ 5 या उससे अधिक विकेट लेने वाले इंग्लैंड के छठे गेंदबाज हैं। उनसे पहले क्रिस वोक्स, क्रिस जॉर्डन, मार्क एल्हम, विक मार्क्स और सैम करन ये उपलब्धि हासिल कर चुके हैं। मैच की बात करें तो रिवरसाइड ग्राउंड में खेले गए मुकाबले में इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया था और कप्तान हैरी ब्रूक के 67, विल जैक्स के 46 और जो रूट के 44 रनों की मदद 48.1 ओवर में 265 रन बनाए थे। श्रीलंका 37 ओवर में 176 रन पर सिमट गई और 89 रन के बड़े अंतर से मैच हार गई।
मध्य प्रदेश : सागर जहरीली शराब कांड का मुख्य आरोपी पुलिस मुठभेड़ में घायल, साथी समेत गिरफ्तार

सागर (मध्य प्रदेश)। मध्य प्रदेश के सागर में जहरीली शराब से हुई मौतों के मामले में वांछित मनीष लोधी और उसके साथी आशीष साहू को मध्य प्रदेश पुलिस के साथ मुठभेड़ में घायल होने के बाद गिरफ्तार कर लिया गया। 30,000 रुपए के इनामी अपराधी लोधी और उसके साथी आशीष साहू घायल हो गए और अभी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। अधिकारियों ने बताया कि उनके पास से दो देसी पिस्तौल, पांच कारतूस और एक बेसबॉल बैट बरामद किया गया। पुलिस ने बुधवार तड़के में एक छोटी सी मुठभेड़ में मनीष लोधी उर्फ यशवंत को पकड़ा, जो बांदा, सागर में कई लोगों की जान लेने वाली जहरीली शराब त्रासदी का मुख्य आरोपी था। सागर पुलिस मनीष लोधी को पकड़ने के लिए लगातार ऑपरेशन चला रही थी। सुबह करीब 3:00 बजे, जहरीली शराब के मामले में तलाशी के दौरान, पुलिस टीम का सामना मालथौन पुलिस स्टेशन इलाके में नोनिया सेसाई रोड घाटी पर उससे हुआ। पुलिस के अनुसार, लोधी और उसके साथी आशीष ने पुलिस टीम पर गोलीबारी की। पुलिस की ओर से आत्मरक्षा में चलाई गई गोली लोधी के पैर में लगी, जिससे वह घायल हो गया। गिरफ्तारी से बचने की कोशिश कर रहा आशीष भी भागते समय घायल हो गया। पुलिस अधिकारी ने कहा, “घटनास्थल पर जरूरी कार्रवाई, हथियार और अन्य सबूत इकट्ठा करना और घायलों की मेडिकल जांच की जा रही है। नियमों के अनुसार कानूनी कार्रवाई और विस्तृत जांच चल रही है।” यह त्रासदी सितंबर की शुरुआत में सागर जिले के बांदा और शाहगढ़ इलाकों में हुई थी, जब कई लोगों ने कथित तौर पर जहरीली शराब पी ली थी और उन्हें गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो गई थीं। प्रभावित कई लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया था, और इस घटना के बाद पुलिस और आबकारी विभाग ने सख्त कार्रवाई शुरू की थी। पुलिस ने दो थानों में 33 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की और लगभग 19 आरोपियों को गिरफ्तार किया। इससे पहले 11 सितंबर को, जहरीली शराब त्रासदी का मुख्य आरोपी रवि लखेरा, गिरफ्तारी से बचने की कोशिश के दौरान बरायथा जंगल में पुलिस के साथ हुई संक्षिप्त मुठभेड़ में घायल हो गया था। लखेरा के पैर में गोली लगी थी और उसे इलाज के लिए बांदा अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी में मदद करने वाली जानकारी के लिए 20,000 रुपए के इनाम की घोषणा की थी।
चंडीगढ़ में बम की धमकियों पर पुलिस अलर्ट, स्टेकहोल्डर्स के साथ की बड़ी बैठक

चंडीगढ़। शहर में हाल ही में ईमेल के जरिए मिल रही बम की धमकियों को गंभीरता से लेते हुए चंडीगढ़ पुलिस ने मंगलवार को सभी संबंधित विभागों और संस्थानों के साथ एक अहम सलाह-मशविरा बैठक की। बैठक का उद्देश्य ऐसी धमकियों से निपटने के लिए एक पुख्ता और समन्वित एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) तैयार करना था। चंडीगढ़ पुलिस के पीआरओ से मिली जानकारी के अनुसार, इस बैठक की अध्यक्षता एसएसपी कंवरदीप कौर ने की। बैठक में एसएसपी ऑपरेशन्स राजेश शर्मा और एसपी सिटी विजय कुमार के अलावा शहर के कई अहम विभागों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। इसमें प्राइवेट और सरकारी स्कूलों, बड़े अस्पतालों, फायर और इमरजेंसी सर्विसेज और इंजीनियरिंग विभागों के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। पिछले कुछ महीनों में देश के कई शहरों में स्कूलों, अस्पतालों और सरकारी इमारतों को ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकियां मिली हैं। चंडीगढ़ में भी इस तरह के मामले सामने आने के बाद पुलिस ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। बैठक के दौरान एसएसपी कंवरदीप कौर ने सभी संस्थानों को अपने परिसरों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी स्कूलों, अस्पतालों और अन्य संस्थानों को अपने यहां डीएफएम सुरक्षा उपायों को अनिवार्य रूप से लागू करना होगा। इसमें सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाना, डीएफएमडी (डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर) लगाना और अन्य जरूरी सुरक्षा उपकरणों की व्यवस्था करना शामिल है। इसके साथ ही सभी संस्थानों को हर महीने कम से कम एक बार मॉक ड्रिल करने की सलाह भी दी गई है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में छात्र, स्टाफ, मरीज और आम लोग घबराएं नहीं और सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला जा सके। पुलिस ने स्पष्ट किया कि ईमेल से मिलने वाली बम की धमकियों को लेकर जो एसओपी तैयार की जा रही है, उसमें स्टेकहोल्डर्स से मिले सुझावों और फीडबैक को भी शामिल किया जाएगा। इसका मकसद एक ऐसा स्पष्ट, व्यावहारिक और समन्वित रिस्पॉन्स सिस्टम बनाना है जिससे किसी भी धमकी की स्थिति में तुरंत और प्रभावी कार्रवाई की जा सके और आम जनता, छात्रों और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। चंडीगढ़ पुलिस ने लोगों से भी अपील की है कि किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और ऐसी किसी भी संदिग्ध ईमेल या गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।
ट्रंप ने ग्रीनलैंड रक्षा समझौते को अंतिम रूप दिया

संयुक्त राष्ट्र। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन और ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक निल्सन ने एक नए रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत 1951 के समझौते को अपडेट किया गया है और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण आर्कटिक क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग को बढ़ाया गया है। ट्रंप ने इस समझौते को लंबी कोशिशों का नतीजा बताया और कहा कि इससे अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच रिश्ते मजबूत होंगे। ट्रंप ने तीनों देशों के बीच हुए समझौते पर दस्तखत करने के कार्यक्रम में कहा, “हमारे रिश्ते बहुत शानदार और सुरक्षित होंगे, और हम इसका बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।” उन्होंने कहा, “इस पर काफी समय से काम चल रहा था। कुछ लोग सच में यह समझौता करना चाहते थे लेकिन कभी हो नहीं पाया, पर अब हम इसे पूरा कर रहे हैं।” ट्रंप ने कहा कि यह समझौता ‘यूरोप, अमेरिका और सभी के लिए बहुत बढ़िया’ होगा और ग्रीनलैंड के लिए तो ‘अद्भुत’ साबित होगा। फ्रेडरिकसेन ने इस समझौते को अमेरिका के साथ डेनमार्क के लंबे समय से चले आ रहे सहयोग में एक अहम पड़ाव बताया। उन्होंने कहा, “75 साल पहले, हमने ग्रीनलैंड की सुरक्षा को लेकर एक समझौता किया था। आज, हम उससे भी बड़ा और बेहतर समझौता कर रहे हैं, एक ऐसा समझौता जो हमेशा कायम रहेगा।” डेनमार्क की नेता ने कहा कि इस समझौते से सुरक्षा और प्रतिरोध क्षमता मजबूत होगी और साथ ही विरोधी ताकतों को ग्रीनलैंड में पैर जमाने से रोका जा सकेगा। फ्रेडरिकसेन ने कहा, “हम यह पक्का कर रहे हैं कि उन्हें ग्रीनलैंड पर कोई नियंत्रण या बड़ा असर डालने की इजाजत न मिले। और हम यह भी पक्का कर रहे हैं कि आर्कटिक में एक ही समय में हमारे और सहयोगी देश भी मौजूद रहें।” उन्होंने कहा कि इस समझौते में ग्रीनलैंड और नॉर्थ अटलांटिक संधि वाले इलाके की सुरक्षा में अमेरिका के ऐतिहासिक और जारी योगदान को मान्यता दी गई है। उन्होंने कहा कि इसमें डेनमार्क साम्राज्य की क्षेत्रीय अखंडता और ग्रीनलैंड के आत्म-निर्णय के अधिकार का भी सम्मान किया गया है। फ्रेडरिकसेन ने इस समझौते को भू-राजनीतिक तनाव के इस दौर में नाटो को मजबूत करने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा, “अगर हम सहयोगी देशों के तौर पर बंट जाते हैं, तो हम अपने दुश्मनों की मदद करते हैं। हम ऐसा होने से रोकने के लिए हर मुमकिन कोशिश करेंगे।” नीलसन ने कहा कि इस समझौते से 1951 का रक्षा समझौता ‘2026 के दौर’ के हिसाब से अपडेट हो गया है और यह पक्का हो गया है कि ग्रीनलैंड के इलाके और वहां के लोगों पर असर डालने वाले फैसलों में ग्रीनलैंड सीधे तौर पर शामिल होगा। उन्होंने कहा, “ग्रीनलैंड के लिए, यह सिर्फ हमारे बारे में समझौता नहीं है, बल्कि यह हमारे साथ किया गया समझौता है। इसमें ग्रीनलैंड के लोगों, हमारे अधिकारों, हमारी आजीविका और हमारे देश के विकास का ध्यान रखा गया है।” नीलसन ने कहा कि दूसरे विश्व युद्ध और शीत युद्ध के दौरान ग्रीनलैंड ने सुरक्षा के लिहाज से अहम भूमिका निभाई थी और वह अमेरिका की घरेलू सुरक्षा में भी मदद करता रहा है। उन्होंने आर्कटिक में सुरक्षा को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच नाटो और पश्चिमी गठबंधन के प्रति ग्रीनलैंड की प्रतिबद्धता पर भी जोर दिया। नीलसन ने कहा, “इस समझौते से आज और भविष्य में इस बात को लेकर कोई शक नहीं रह जाना चाहिए कि ग्रीनलैंड की वफादारी किसके साथ है। हम अमेरिका के पक्के दोस्त रहे हैं और आगे भी रहेंगे, साथ ही पश्चिमी गठबंधन का हिस्सा भी बने रहेंगे।” नीलसन ने इस समझौते को ‘तीनों पक्षों के लिए फायदेमंद’ बताया, जो साझा जिम्मेदारी, आपसी सम्मान और आर्कटिक में शांति बनाए रखने के लक्ष्य पर आधारित है। ट्रंप ने उस पत्रकार के सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया जिसने पूछा था कि क्या ग्रीनलैंड पर अमेरिका के मालिकाना हक की बात अब खत्म हो गई है। जब उनसे पूछा गया कि ग्रीनलैंड के लोगों के लिए उनका क्या संदेश है, तो ट्रंप ने कहा, “मुझे ग्रीनलैंड के लोग बहुत पसंद हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि “उनके प्रधानमंत्री उनका बहुत अच्छी तरह से प्रतिनिधित्व करते हैं।” वॉशिंगटन और कोपेनहेगन के बीच 1951 में हुए रक्षा समझौते ने ग्रीनलैंड में अमेरिकी सेना की मौजूदगी का आधार तैयार किया था। 2004 में अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच हुए एक समझौते के जरिए इसमें बदलाव किए गए थे।
भगवान वामन की जयंती पर नेताओं ने की प्रार्थना : सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और यश की वृद्धि हो

नई दिल्ली। भगवान विष्णु के पांचवें अवतार भगवान वामन की जयंती पर कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने सुख-समृद्धि के लिए कामना की। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक्स पर पोस्ट किया, “नमः शांग धनुर्याण पाठये वामनाय च। यज्ञभुव फलदा त्रेच वामनाय नमो नमः। सृष्टि के पालनहार भगवान श्री विष्णु के पंचम अवतार भगवान श्री वामन जी की पावन जयंती की आप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं! भगवान श्री वामन की कृपा से आप सभी का जीवन सुख, समृद्धि एवं आरोग्यता से परिपूर्ण हो, यही प्रार्थना है।” मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक्स पर लिखा, “नमामि देवं विश्वेशं वामनं विष्णुरूपिणम्। बलिदर्पहरं शान्तं शाश्वतं पुरुषोत्तमम्॥ भगवान श्री विष्णु जी के पांचवें अवतार भगवान वामन जी के प्राकट्य दिवस की समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। भक्ति, धर्म एवं दानशीलता के स्वरूप भगवान वामन जी की कृपा से हम सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और यश की वृद्धि हो, यही मंगलकामना है।” उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पोस्ट में कहा, “श्री हरि के पंचम अवतार, भगवान श्री वामन की जयंती पर सभी श्रद्धालुओं व प्रदेश वासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। भगवान वामन हमें धर्म, मर्यादा, त्याग और लोक-कल्याण के पथ पर चलने की प्रेरणा देते हैं। प्रभु की कृपा संपूर्ण सृष्टि पर बनी रहे, यही प्रार्थना है।” राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एक्स पर लिखा, “भगवान श्रीहरि विष्णु के पंचम अवतार भगवान श्री वामन की जयंती की समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं! भगवान श्री वामन से प्रार्थना है कि उनकी कृपादृष्टि सदैव सभी पर बनी रहे तथा राजस्थान में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली का वास हो।” उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पोस्ट में कहा, “समस्त प्रदेशवासियों को भगवान श्रीहरि विष्णु के अवतार भगवान श्री वामन जी की जयंती की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। भगवान वामन का अवतार धर्म, मर्यादा, सत्य और विनम्रता की शक्ति का संदेश देता है। भगवान श्री वामन जी की कृपा से सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सद्भाव का संचार हो, यही प्रार्थना है।” उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने एक्स पर पोस्ट किया, “सृष्टि के पालनहार भगवान श्रीहरि विष्णु के पंचम अवतार, धर्म और मर्यादा के प्रतीक भगवान श्रीवामन जी की जयंती पर समस्त देश एवं प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं! भगवान श्री वामन जी की कृपा से सभी के जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि का वास हो तथा सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्राप्त हो, यही प्रार्थना है।
कमर दर्द और सर्वाइकल से हैं परेशान? रोज करें अर्धचक्रासन, मिलेगा आराम

नई दिल्ली। आजकल लंबे समय तक बैठकर काम करना, लगातार मोबाइल या लैपटॉप देखना और गलत पोश्चर में रहने की आदत आम हो गई है। इसका सीधा असर हमारी रीढ़, गर्दन और पीठ पर पड़ सकता है। ऐसे में योग के कुछ आसान शरीर को स्ट्रेच करने और रीढ़ की लचक बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। इन्हीं में से एक है अर्धचक्रासन। अर्धचक्रासन में शरीर को पीछे की ओर हल्का मोड़ा जाता है। देखने में यह आसन आसान लग सकता है, लेकिन इसे करते समय शरीर का संतुलन और सही तकनीक बेहद जरूरी है। नियमित और सही तरीके से अभ्यास करने पर यह रीढ़ की लचक को बेहतर करने के साथ पीठ और उससे जुड़ी मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद कर सकता है। आयुष मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि अर्धचक्रासन के अभ्यास का पीठ, कंधे और रीढ़ के आसपास की मांसपेशियों पर असर होता है। इससे इन मांसपेशियों को मजबूत रखने में मदद मिल सकती है। शरीर का पोश्चर बेहतर बनाए रखने के लिए भी मजबूत पीठ जरूरी होती है। इसके अलावा यह आसन शरीर में खिंचाव और सक्रियता का एहसास कराता है। अर्धचक्रासन को सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइसिस में भी फायदेमंद माना जाता है। नियमित योगाभ्यास के साथ इसे शामिल करने से शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है। हर योग की तरह इसमें भी कुछ सावधानियां बरतनी जरूरी हैं। अगर आपको चक्कर आते हैं या चलते-फिरते लड़खड़ाने की समस्या है तो इस आसन को करने से बचें। वहीं, हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन के मरीजों को भी पीछे झुकते समय बहुत सावधानी बरतनी चाहिए, धीरे-धीरे और डॉक्टर की सलाह पर ही इसे करें। यदि आप यह आ सर कर भी रहे हैं तो किसी भी तरह की असहजता, दर्द या चक्कर महसूस हो तो तुरंत आसन रोक दें।
कैंसर जैसी दवाओं की कीमतों में 10 गुना अंतर पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, एमआरपी तय करने के तरीके पर उठाए सवाल

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की दवाओं की कीमतों में बड़े अंतर को लेकर सख्त सवाल उठाए हैं। अदालत ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी की। मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी। जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच दवाओं की कीमतों और उनकी बिक्री से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही थी। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि अगर किसी दवा को कंपनी दुकानदार को 2,700 रुपए में बेचती है और उसी दवा पर 27,000 अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) लिखा जाता है, तो यह बहुत बड़ा अंतर है। कोर्ट ने पूछा कि ऐसी कीमतों पर रोक लगाने वाली अथॉरिटी चुप क्यों है? सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि जब कोई दवा कंपनी दुकानदार को 2,700 में बेच रही है, तो उसका एमआरपी 27,000 क्यों रखा जा रहा है? कोर्ट ने कहा कि अगर दवा की कीमत में 10 गुना का अंतर है, तो इसका कारण समझना जरूरी है। कोर्ट ने यह भी पूछा कि दवाओं की कीमत पर नजर रखने वाली सरकारी अथॉरिटी इस मामले में क्या कर रही है? याचिकाकर्ता किशन चंद जैन ने कोर्ट को बताया कि दवा (मूल्य नियंत्रण) आदेश, 2013 के तहत करीब 1,000 दवाओं की कीमत पर सीधा नियंत्रण है। लेकिन जो दवाएं इस सूची में नहीं हैं, उनकी शुरुआती कीमत तय करने पर वैसी रोक नहीं है। उनके मुताबिक, कोई कंपनी नई दवा बाजार में उतारते समय अपनी शुरुआती कीमत खुद तय कर सकती है। कीमत तय होने के बाद उसमें सालाना 10 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ोतरी नहीं करने का नियम है। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि बाजार में करीब 82 प्रतिशत दवाएं ऐसी हैं, जो तय कीमत वाली सूची में नहीं आतीं। उन्होंने यह भी बताया कि बाजार में करीब 60 हजार ब्रांड हैं, जबकि कीमत तय करने की व्यवस्था 5 हजार से कम दवाओं पर लागू होती है। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि अगर दवाओं की कीमतों की जानकारी दुकानदारों के पास उपलब्ध रहेगी, तो क्या इससे मरीज को वास्तव में फायदा होगा? जस्टिस मेहता ने कहा कि जब किसी मरीज को इमरजेंसी में तुरंत दवा की जरूरत होती है, तब उसका परिवार दवा लेने से पहले कीमतों की लंबी जांच नहीं करेगा। एडवोकेट कपिल सिब्बल ने इंडियन फार्मास्युटिकल अलायंस (आईपीए) की ओर से कोर्ट में कहा कि दवाओं की ऊंची कीमत के लिए निर्माता जिम्मेदार नहीं हैं। रिटेलर्स दवाओं पर बहुत ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं। इस पर जस्टिस मेहता ने सवाल उठाते हुए कहा कि दवाओं पर एमआरपी तो निर्माता ही तय करते हैं। अगर किसी दवा की एमआरपी बहुत ज्यादा है, तो यह सवाल उठता है कि इतनी ऊंची कीमत तय कौन कर रहा है?