भगवान वामन की जयंती पर नेताओं ने की प्रार्थना : सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और यश की वृद्धि हो

नई दिल्ली। भगवान विष्णु के पांचवें अवतार भगवान वामन की जयंती पर कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने सुख-समृद्धि के लिए कामना की। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक्स पर पोस्ट किया, “नमः शांग धनुर्याण पाठये वामनाय च। यज्ञभुव फलदा त्रेच वामनाय नमो नमः। सृष्टि के पालनहार भगवान श्री विष्णु के पंचम अवतार भगवान श्री वामन जी की पावन जयंती की आप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं! भगवान श्री वामन की कृपा से आप सभी का जीवन सुख, समृद्धि एवं आरोग्यता से परिपूर्ण हो, यही प्रार्थना है।” मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक्स पर लिखा, “नमामि देवं विश्वेशं वामनं विष्णुरूपिणम्। बलिदर्पहरं शान्तं शाश्वतं पुरुषोत्तमम्॥ भगवान श्री विष्णु जी के पांचवें अवतार भगवान वामन जी के प्राकट्य दिवस की समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। भक्ति, धर्म एवं दानशीलता के स्वरूप भगवान वामन जी की कृपा से हम सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और यश की वृद्धि हो, यही मंगलकामना है।” उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पोस्ट में कहा, “श्री हरि के पंचम अवतार, भगवान श्री वामन की जयंती पर सभी श्रद्धालुओं व प्रदेश वासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। भगवान वामन हमें धर्म, मर्यादा, त्याग और लोक-कल्याण के पथ पर चलने की प्रेरणा देते हैं। प्रभु की कृपा संपूर्ण सृष्टि पर बनी रहे, यही प्रार्थना है।” राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एक्स पर लिखा, “भगवान श्रीहरि विष्णु के पंचम अवतार भगवान श्री वामन की जयंती की समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं! भगवान श्री वामन से प्रार्थना है कि उनकी कृपादृष्टि सदैव सभी पर बनी रहे तथा राजस्थान में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली का वास हो।” उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पोस्ट में कहा, “समस्त प्रदेशवासियों को भगवान श्रीहरि विष्णु के अवतार भगवान श्री वामन जी की जयंती की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। भगवान वामन का अवतार धर्म, मर्यादा, सत्य और विनम्रता की शक्ति का संदेश देता है। भगवान श्री वामन जी की कृपा से सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सद्भाव का संचार हो, यही प्रार्थना है।” उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने एक्स पर पोस्ट किया, “सृष्टि के पालनहार भगवान श्रीहरि विष्णु के पंचम अवतार, धर्म और मर्यादा के प्रतीक भगवान श्रीवामन जी की जयंती पर समस्त देश एवं प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं! भगवान श्री वामन जी की कृपा से सभी के जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि का वास हो तथा सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्राप्त हो, यही प्रार्थना है।
कमर दर्द और सर्वाइकल से हैं परेशान? रोज करें अर्धचक्रासन, मिलेगा आराम

नई दिल्ली। आजकल लंबे समय तक बैठकर काम करना, लगातार मोबाइल या लैपटॉप देखना और गलत पोश्चर में रहने की आदत आम हो गई है। इसका सीधा असर हमारी रीढ़, गर्दन और पीठ पर पड़ सकता है। ऐसे में योग के कुछ आसान शरीर को स्ट्रेच करने और रीढ़ की लचक बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। इन्हीं में से एक है अर्धचक्रासन। अर्धचक्रासन में शरीर को पीछे की ओर हल्का मोड़ा जाता है। देखने में यह आसन आसान लग सकता है, लेकिन इसे करते समय शरीर का संतुलन और सही तकनीक बेहद जरूरी है। नियमित और सही तरीके से अभ्यास करने पर यह रीढ़ की लचक को बेहतर करने के साथ पीठ और उससे जुड़ी मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद कर सकता है। आयुष मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि अर्धचक्रासन के अभ्यास का पीठ, कंधे और रीढ़ के आसपास की मांसपेशियों पर असर होता है। इससे इन मांसपेशियों को मजबूत रखने में मदद मिल सकती है। शरीर का पोश्चर बेहतर बनाए रखने के लिए भी मजबूत पीठ जरूरी होती है। इसके अलावा यह आसन शरीर में खिंचाव और सक्रियता का एहसास कराता है। अर्धचक्रासन को सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइसिस में भी फायदेमंद माना जाता है। नियमित योगाभ्यास के साथ इसे शामिल करने से शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है। हर योग की तरह इसमें भी कुछ सावधानियां बरतनी जरूरी हैं। अगर आपको चक्कर आते हैं या चलते-फिरते लड़खड़ाने की समस्या है तो इस आसन को करने से बचें। वहीं, हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन के मरीजों को भी पीछे झुकते समय बहुत सावधानी बरतनी चाहिए, धीरे-धीरे और डॉक्टर की सलाह पर ही इसे करें। यदि आप यह आ सर कर भी रहे हैं तो किसी भी तरह की असहजता, दर्द या चक्कर महसूस हो तो तुरंत आसन रोक दें।
कैंसर जैसी दवाओं की कीमतों में 10 गुना अंतर पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, एमआरपी तय करने के तरीके पर उठाए सवाल

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की दवाओं की कीमतों में बड़े अंतर को लेकर सख्त सवाल उठाए हैं। अदालत ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी की। मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी। जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच दवाओं की कीमतों और उनकी बिक्री से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही थी। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि अगर किसी दवा को कंपनी दुकानदार को 2,700 रुपए में बेचती है और उसी दवा पर 27,000 अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) लिखा जाता है, तो यह बहुत बड़ा अंतर है। कोर्ट ने पूछा कि ऐसी कीमतों पर रोक लगाने वाली अथॉरिटी चुप क्यों है? सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि जब कोई दवा कंपनी दुकानदार को 2,700 में बेच रही है, तो उसका एमआरपी 27,000 क्यों रखा जा रहा है? कोर्ट ने कहा कि अगर दवा की कीमत में 10 गुना का अंतर है, तो इसका कारण समझना जरूरी है। कोर्ट ने यह भी पूछा कि दवाओं की कीमत पर नजर रखने वाली सरकारी अथॉरिटी इस मामले में क्या कर रही है? याचिकाकर्ता किशन चंद जैन ने कोर्ट को बताया कि दवा (मूल्य नियंत्रण) आदेश, 2013 के तहत करीब 1,000 दवाओं की कीमत पर सीधा नियंत्रण है। लेकिन जो दवाएं इस सूची में नहीं हैं, उनकी शुरुआती कीमत तय करने पर वैसी रोक नहीं है। उनके मुताबिक, कोई कंपनी नई दवा बाजार में उतारते समय अपनी शुरुआती कीमत खुद तय कर सकती है। कीमत तय होने के बाद उसमें सालाना 10 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ोतरी नहीं करने का नियम है। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि बाजार में करीब 82 प्रतिशत दवाएं ऐसी हैं, जो तय कीमत वाली सूची में नहीं आतीं। उन्होंने यह भी बताया कि बाजार में करीब 60 हजार ब्रांड हैं, जबकि कीमत तय करने की व्यवस्था 5 हजार से कम दवाओं पर लागू होती है। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि अगर दवाओं की कीमतों की जानकारी दुकानदारों के पास उपलब्ध रहेगी, तो क्या इससे मरीज को वास्तव में फायदा होगा? जस्टिस मेहता ने कहा कि जब किसी मरीज को इमरजेंसी में तुरंत दवा की जरूरत होती है, तब उसका परिवार दवा लेने से पहले कीमतों की लंबी जांच नहीं करेगा। एडवोकेट कपिल सिब्बल ने इंडियन फार्मास्युटिकल अलायंस (आईपीए) की ओर से कोर्ट में कहा कि दवाओं की ऊंची कीमत के लिए निर्माता जिम्मेदार नहीं हैं। रिटेलर्स दवाओं पर बहुत ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं। इस पर जस्टिस मेहता ने सवाल उठाते हुए कहा कि दवाओं पर एमआरपी तो निर्माता ही तय करते हैं। अगर किसी दवा की एमआरपी बहुत ज्यादा है, तो यह सवाल उठता है कि इतनी ऊंची कीमत तय कौन कर रहा है?
छात्र आत्महत्या मामले में मुंबई अपराध शाखा आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर से पूछताछ करेगी

मुंबई। आईआईटी बॉम्बे के द्वितीय वर्ष के छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या के संबंध में मुंबई अपराध शाखा प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला को पूछताछ के लिए तलब करने जा रही है। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि प्रोफेसर का बयान अभी तक दर्ज नहीं किया गया है, हालांकि जांचकर्ताओं ने छात्र के माता-पिता के बयान ले लिए हैं। ऊर्जा विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग के 20 वर्षीय बीटेक छात्र और यवतमाल जिले के निवासी साहिल वाकोडे 18 सितंबर की शाम को पवई परिसर के हॉस्टल 4 स्थित अपने कमरे में मृत पाए गए थे। यह घटना मध्यावधि परीक्षा के दौरान कथित तौर पर मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए पकड़े जाने के कुछ घंटों बाद हुई। प्रोफेसर दूल्ला ने संस्थान की प्रक्रिया के अनुसार मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई। शुरुआती खबरों में बताया गया था कि छात्र ने प्रश्न पत्र को एआई प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया था, हालांकि संस्थान ने बाद में जांच लंबित होने के कारण घटनाओं के विस्तृत विवरण को वापस ले लिया। साहिल के पिता, रविंद्र वाकोडे की शिकायत के आधार पर, पुलिस ने दूल्ला और अन्य अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। क्राइम ब्रांच सूत्रों के अनुसार, शिकायत में कई महीनों तक लगातार उत्पीड़न का आरोप लगाया गया है और इसमें आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के साथ-साथ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम का भी उल्लेख किया गया है। माता-पिता के बयान एफआईआर का हिस्सा हैं। कमरे से कोई आत्महत्या नोट बरामद नहीं हुआ है। जांचकर्ता छात्र के मोबाइल फोन, परीक्षा हॉल, परिसर और छात्रावास के सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रहे हैं। यह मामला 19 सितंबर की देर रात पवई पुलिस से क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया था, जिसकी जांच का नेतृत्व एक सहायक पुलिस आयुक्त कर रहे हैं। क्राइम ब्रांच के एक वरिष्ठ सूत्र ने दोहराया कि प्रोफेसर दूल्ला का औपचारिक बयान अभी लंबित है और उन्हें जल्द ही बुलाया जा सकता है। अधिकारियों ने जोर दिया कि जांच जारी है और इस स्तर पर कोई निष्कर्ष या क्लीन चिट नहीं दी गई है। आईआईटी बॉम्बे ने स्वतंत्र जांच की सुविधा के लिए दूल्ला को प्रशासनिक मामलों के डीन के पद से अस्थायी रूप से मुक्त कर दिया है, साथ ही यह स्पष्ट किया है कि वे संकाय सदस्य के रूप में बने रहेंगे।
अनंत चतुर्दशी पर क्यों बांधा जाता है 14 गांठों वाला अनंत सूत्र? जानें धार्मिक महत्व

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में अनंत चतुर्दशी का पर्व विशेष धार्मिक महत्व रखता है। यह दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप को समर्पित माना जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालु भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करते हैं और अनंत सूत्र धारण कर सुख, समृद्धि और शांति की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विधि-विधान से अनंत चतुर्दशी का व्रत और पूजन करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। इस वर्ष अनंत चतुर्दशी का पर्व 25 सितंबर को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ गणेश उत्सव का भी समापन होगा। गणेश चतुर्थी से शुरू होने वाले 10 दिवसीय गणपति उत्सव के अंतिम दिन घरों और सार्वजनिक पंडालों में स्थापित गणेश प्रतिमाओं का विधि-विधान से विसर्जन किया जाता है। अनंत चतुर्दशी के दिन श्रद्धालु सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल की साफ-सफाई कर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है। पूजा में भगवान विष्णु को पीले फूल, फल, पंचामृत, धूप और दीप अर्पित किए जाते हैं। पूजा के दौरान भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए अनंत चतुर्दशी व्रत का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद अनंत देव की पूजा और व्रत कथा का पाठ किया जाता है। पूजा के समय 14 गांठ वाला अनंत सूत्र भगवान विष्णु को अर्पित करने के बाद श्रद्धालु इसे अपने हाथ में धारण करते हैं। पूजा के अंत में भगवान विष्णु की आरती की जाती है और प्रसाद का वितरण किया जाता है। अनंत चतुर्दशी पर अनंत सूत्र बांधने की परंपरा है। इस सूत्र में 14 गांठें होती हैं। धार्मिक मान्यताओं में इन गांठों को 14 लोकों से जोड़कर देखा जाता है। इसे भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालु अनंत सूत्र धारण कर परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और संकटों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं। अनंत चतुर्दशी से जुड़ी एक प्रमुख धार्मिक कथा पांडवों से संबंधित है। मान्यता के अनुसार, जब पांडव द्यूत क्रीड़ा में अपना राज-पाट हारकर वनवास के दौरान कठिनाइयों का सामना कर रहे थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को अनंत चतुर्दशी का व्रत करने की सलाह दी थी। कहा जाता है कि युधिष्ठिर ने अपने भाइयों और द्रौपदी के साथ विधि-विधान से अनंत देव की पूजा की और अनंत सूत्र धारण किया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसके बाद पांडवों के जीवन में आए संकट दूर हुए और उन्हें कष्टों से मुक्ति मिली। अनंत चतुर्दशी का दिन गणेश भक्तों के लिए भी खास होता है। इसी दिन 10 दिवसीय गणेश उत्सव का समापन होता है। श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों और भक्ति भाव के साथ भगवान गणेश की प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए ले जाते हैं। विसर्जन के दौरान गणपति बप्पा से अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना की जाती है।
रेवाड़ी पुलिस ने कथित सेक्स रैकेट का किया भंडाफोड़, सात महिलाएं और चार पुरुष हिरासत में

रेवाड़ी (हरियाणा)। पुलिस ने मंगलवार को रेवाड़ी के दो होटलों से संचालित हो रहे एक कथित सेक्स रैकेट का भंडाफोड़ किया। अधिकारियों ने बताया कि एक साथ की गई छापेमारी में सात महिलाएं और चार पुरुष हिरासत में लिए गए। होटल संचालक को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक हेमेंद्र मीना के निर्देश पर की गई। पुलिस की दो टीमों ने शहर के अलग-अलग हिस्सों में स्थित होटलों पर समन्वित छापेमारी की। इससे पहले, रैकेट के बारे में मिली जानकारी की पुष्टि करने के लिए नकली ग्राहकों को भेजा गया था। पहली छापेमारी रामपुरा पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में आने वाली सीएसडी कैंटीन के पास एक होटल में की गई। एएसपी दीपिका अग्रवाल के नेतृत्व वाली टीम ने संदिग्ध हालत में पाई गई चार महिलाओं और दो पुरुषों को हिरासत में लिया। दूसरी छापेमारी बावल रोड पर बिठवाना चौक के पास एक होटल में की गई। डीएसपी मुख्यालय संजीव बलहारा के नेतृत्व वाली टीम ने इस अभियान के दौरान तीन महिलाओं और दो पुरुषों को हिरासत में लिया। प्रारंभिक जांच के अनुसार, सौदे कथित तौर पर 1,500 रुपए से 2,000 रुपए के बीच तय किए जा रहे थे। पुलिस होटल संचालक से पूछताछ कर रही है ताकि उसकी कथित भूमिका का पता लगाया जा सके और यह निर्धारित किया जा सके कि क्या परिसर का उपयोग अवैध गतिविधि को सुविधाजनक बनाने के लिए किया जा रहा था। अधिकारियों ने बताया कि ये एक साथ की गई छापेमारी शहर के होटलों में संदिग्ध अनैतिक गतिविधियों के बारे में मिली सूचना के आधार पर एक सुनियोजित अभियान का हिस्सा थी। डीएसपी मुख्यालय संजीव बलहारा ने कहा कि पुलिस जिले में ऐसी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करेगी और इसमें शामिल पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने बताया कि हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ की जा रही है और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सूत्रों ने बताया कि रेवाड़ी के कई अन्य होटल भी पुलिस की निगरानी में हैं और चल रही कार्रवाई के तहत उनकी भी जांच की जा सकती है। पुलिस टीमें इन प्रतिष्ठानों में संदिग्ध अवैध गतिविधियों से संबंधित जानकारी की पुष्टि करेंगी। पूरे नेटवर्क का पता लगाने, कथित तौर पर शामिल अन्य व्यक्तियों की पहचान करने और होटल संचालकों की भूमिका निर्धारित करने के लिए आगे की जांच जारी है।
बुनियादी ढांचे, कृषि विस्तार और प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण को नई गति देने के उद्देश्य से लगभग 13 हजार 790 करोड़ रुपए की स्वीकृति

भोपाल। मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रि-परिषद की बैठक मंत्रालय में हुई। मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रदेश में बुनियादी ढांचे, कृषि विस्तार और प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण को नई गति देने के उद्देश्य से लगभग 13 हजार 790 करोड़ रुपए से अधिक के वित्तीय प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट बैठक में खिलाड़ियों और खेलों के विकास, किसानों, युवाओं, न्यायिक व्यवस्था और आम नागरिकों से जुड़े कई दूरगामी व जनहितैषी निर्णय लिए गए। प्रदेश की खेल और युवा प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के 140 विधानसभा क्षेत्रों में खेल परिसरों के निर्माण व संचालन के लिए 962 करोड़ 50 लाख रुपए की सैद्धांतिक सहमति प्रदान की गई। इन खेल परिसरों का नाम मुख्यमंत्री स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स होगा। 16वें वित्त आयोग के तहत उच्च न्यायालय (भारित), परिवार न्यायालयों, ग्राम न्यायालयों और विधिक सहायता बोर्ड के सुचारू संचालन के लिए 4,000 करोड़ रुपए से अधिक की वित्तीय निरंतरता मंजूर की गई। इसके अतिरिक्त वाणिज्यिक कर विभाग की 6 प्रमुख योजनाओं, शासकीय दंत चिकित्सा महाविद्यालय इंदौर में निरंतरता के साथ ही 13 नवीन पदों तथा नवगठित जिलों मैहर, पांढुर्णा एवं सिंगरौली में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के नए कार्यालयों व पदों के सृजन को भी मंजूरी दी गई। खेतों में सिंचाई को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आगामी पांच वर्षों 2026-2031 के लिए नीमच की महत्वाकांक्षी जावद-नीमच दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई परियोजना के लिए 4,197 करोड़ 58 लाख रुपए तथा राजगढ़ की सुठालिया एवं पार्वती रिन्सी परियोजनाओं के लिए क्रमशः 262 करोड़ 63 लाख रुपए और 507 करोड़ 23 लाख रुपए की निरंतरता की स्वीकृत दी गई, इससे 88 हजार हैक्टेयर से अधिक अतिरिक्त क्षेत्र में सिंचाई क्षमता में वृद्धि होगी। इसके साथ ही प्रदेश की भविष्य की बिजली जरूरतों को सुरक्षित करने के लिए 2800 मेगावॉट ताप विद्युत क्रय करने के प्रस्ताव को हरी झंडी दी गई। मंत्रिपरिषद ने राजगढ़ जिले की सुठालिया सिंचाई परियोजना की 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की निरंतरता के लिए 262 करोड़ 63 लाख रुपए की स्वीकृति दी है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य राजगढ़ जिले के 40,000 हैक्टेयर क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई पद्धति द्वारा सिंचाई क्षमता में वृद्धि करना है। मंत्रिपरिषद ने नीमच जिले की जावद-नीमच दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई परियोजना की आगामी 5 वर्षों 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की निरन्तरता के लिए 4 हजार 197 करोड़ 58 लाख रुपए की स्वीकृति दी है। जावद नीमच परियोजना एक दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई योजना है, जिससे सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के माध्यम से खेतों तक पानी पहुंचाया जाएगा। परियोजना का मुख्य उद्देश्य उन्नत सिंचाई तकनीक (दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई) के माध्यम से पानी की बचत और सिंचाई क्षमता में वृद्धि करते हुये क्षेत्र की उत्पादकता बढ़ाना है। मंत्रिपरिषद ने राजगढ़ की पार्वती रिन्सी सिंचाई परियोजना की आगामी 05 वर्षों यानि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की निरंतरता के लिए 507 करोड़ 23 लाख रुपए की स्वीकृति दी है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य बांध निर्माण कर राजगढ़ जिले की 48,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता को बढ़ाना है। मंत्रिपरिषद ने ऊर्जा विभाग की एम.पी. पॉवर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड द्वारा विद्युत मंत्रालय , भारत सरकार द्वारा जारी डीबीएफओओ मॉडल बिडिंग दस्तावेजों के आधार पर कुल 2800 मेगावॉट ताप विद्युत जिसके अंतर्गत मध्य प्रदेश में मौजूदा निर्माणाधीन एवं राज्य में ही प्रस्तावित नवीन (ग्रीन फील्ड/ब्राउन फील्ड) ताप विद्युत परियोजनाओं से प्रतिस्पर्धात्मक निविदा प्रक्रिया के माध्यम से विद्युत क्रय के लिए आवश्यक कार्यवाही करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। मंत्रिपरिषद द्वारा 24 जनवरी 2025 को लिए निर्णय अंतर्गत 900 मेगावॉट ताप विद्युत क्रय से संबंधित अनुमोदन उक्त निविदा के निरस्त हो जाने के फलस्वरूप वर्तमान प्रस्ताव के अनुसार 2800 मेगावॉट ताप विद्युत क्रय में समाहित माना जाएगा। एम.पी. पॉवर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड द्वारा विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी डीबीएफओओ मॉडल बिडिंग दस्तावेजों के आधार पर कुल 2800 मेगावॉट ताप विद्युत अंतर्गत मध्यप्रदेश में मौजूदा/निर्माणाधीन एवं राज्य में ही प्रस्तावित नवीन (ग्रीन फील्ड/ब्राउन फील्ड) ताप विद्युत परियोजनाओं से प्रतिस्पर्धात्मक निविदा प्रक्रिया के माध्यम से विद्युत क्रय के लिए आवश्यक कार्यवाही किए जाने की स्वीकृति दी है। प्रकरण में नियामक आयोग के अनुमोदन एवं आदेश के अनुसार समस्त आगामी कार्यवाही के लिए प्रबंध संचालक एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी को अधिकृत किया गया है। मंत्रिपरिषद ने खेल एवं युवा कल्याण विभाग के तहत प्रदेश के 140 विधानसभा क्षेत्रों में खेल परिसर निर्माण व संचालन के लिए के लिए 962 करोड़ 50 लाख रुपए की सैध्दांतिक सहमति प्रदान की है। इन खेल परिसरों का नामकरण मुख्यमंत्री स्पोर्ट्स काम्पलेक्स किए जाने के साथ ही मुख्य मैदान के बीच में स्थायी हैलीपैड बनाने का भी निर्णय लिया गया। हैलीपैड बनने से पीएमश्री योजना के हैलीकाप्टर्स का आवागमन सुगम और सुचारू हो सकेगा। मंत्रिपरिषद ने ग्राम न्यायालय योजना को 16वें वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रेल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की निरंतरता के लिए 554 करोड़ 61 लाख रुपए की स्वीकृति दी है। इस योजना में राज्य के समस्त ग्राम न्यायालयों में पदस्थ समस्त न्यायिक अधिकारियों एवं न्यायालयीन कर्मचारियों के वेतन, भत्ते एवं कार्यालयीन व्ययों का भुगतान किया जाता है। ग्राम न्यायालयों में विधि अनुसार प्रस्तुत प्रकरणों का निराकरण भी किया जाता है मंत्रिपरिषद ने विधि विभाग के अंतर्गत म.प्र. विधिक सहायता तथा विधिक सलाह बोर्ड की स्थापना योजना को 16वें वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रेल 2026 से 31 मार्च 2031 के लिए निरंतरता के लिए 524 करोड़ रुपए की अनुमति प्रदान की है। मंत्रिपरिषद ने विधि एवं विधायी कार्य विभाग के पंजीयक, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के अंतर्गत संचालित योजना ‘परिवार न्यायालयों की स्थापना’ को 16वें वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 के लिये निरंतरता के लिए 1 हजार करोड़ रुपए की स्वीकृति प्रदान की है। मंत्रिपरिषद ने विधि एवं विधायी कार्य विभाग के पंजीयक, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के अंतर्गत संचालित योजना “उच्च न्यायालय (भारित)” को 16वें वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरंतरता के लिए 2,015 करोड़ 60 लाख रुपए की स्वीकृति प्रदान की है। मंत्रिपरिषद ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए वाणिज्यिक कर विभाग के अंतर्गत संचालित 6 योजनाओं को आगामी पांच वर्षों वित्तीय वर्ष 2026-2027 से वर्ष 2030- 2031 तक की अवधि के लिए निरंतर रखने के लिए कुल 969 करोड़
महाराष्ट्र: बढ़ते कृषि संकट के बीच एनसीपी ने चिंतन शिविर टाला

मुंबई। पूरे महाराष्ट्र में सूखे के बिगड़ते हालात को देखते हुए अजित पवार की पार्टी राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने रविवार, 27 सितंबर को नासिक में होने वाला अपना एक दिन का राज्य स्तरीय चिंतन शिविर टाल दिया है। पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने मंत्री छगन भुजबल से मीटिंग और पार्टी सांसद पार्थ पवार से बात करने के बाद इस फैसले की आधिकारिक घोषणा की। लंबे समय तक सूखे की वजह से खड़ी फसलें बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गई हैं, जिससे किसान गंभीर वित्तीय संकट में फंस गए हैं। जहां राज्य सरकार राहत के उपायों का आकलन कर रही है, वहीं विपक्षी पार्टियों ने प्रभावित किसानों के लिए बिना शर्त फाइनेंशियल मदद की मांग करते हुए दबाव बढ़ा दिया है। पार्टी के बड़े नेताओं ने चेतावनी दी कि एक हाई-प्रोफाइल पॉलिटिकल गैदरिंग करने से पार्टी की पब्लिक इमेज को नुकसान होगा। अंदरूनी सोच-विचार के बाद इवेंट पर फिर से सोचने की मांग तेज हो गई, जिससे आखिरकार इसे पोस्टपोन कर दिया गया। मंत्री छगन भुजबल नासिक कैंप होस्ट कर रहे थे, जिसकी तैयारियां पहले से ही चल रही थीं। पार्टी ने नासिक के होटलों में मंत्रियों, विधायकों और वरिष्ठ नागरिक के रहने का इंतजाम किया था। हालांकि, कई नेताओं ने तर्क दिया कि गंभीर कृषि संबंधी संकट के दौरान एक शानदार पॉलिटिकल इवेंट होस्ट करने से गलत मैसेज गया। इवेंट पोस्टपोन करके पार्टी का मकसद किसान समुदाय के प्रति एक हमदर्दी और रिस्पॉन्सिव रुख दिखाना है। टाइमिंग को और मुश्किल बनाते हुए कृषि मंत्री दत्ता भरणे ने 26 सितंबर को नासिक में एक रीजनल सूखे की रिव्यू मीटिंग बुलाई है। नेताओं को उम्मीद थी कि कैंप के दौरान सूखे के मैनेजमेंट पर पार्टी के रुख पर मीडिया में कड़ी जांच होगी, जिससे यह इवेंट राजनीतिक रूप से सेंसिटिव हो जाएगा। इन बातों को ध्यान में रखते हुए सुनेत्रा पवार ने मीटिंग पूरी तरह से कैंसिल करने का फैसला किया। एनसीपी ने एकता के लिए एक रोडमैप, 22 जिला परिषदों के चुनावों की स्ट्रैटेजी, बूथ-लेवल के कैडर में जोश भरने के लिए सुनेत्रा पवार, मंत्रियों और पार्टी के पदाधिकारियों के राज्य भर के दौरे और वोटर एनरोलमेंट पर चर्चा करने का प्रस्ताव रखा था। एनसीपी का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब लंबे समय से सूखे और अनियमित मानसून ने महाराष्ट्र के खेती वाले इलाकों, खासकर मराठवाड़ा और विदर्भ, को बुरी तरह प्रभावित किया है। सूखे की घोषणा और राहत पैकेज की मांग उठ रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को हुई वीकली कैबिनेट मीटिंग के बाद राहत के उपायों के बारे में जरूरी फैसले लेने के लिए रेवेन्यू मिनिस्टर की अगुवाई में एक कैबिनेट सब-कमेटी बनाने की घोषणा की। इस बीच सुनेत्रा पवार ने पार्टी के मंत्रियों, विधायकों और ऑफिस वालों से अपील की कि वे राहत के उपायों पर फोकस करने और अपने-अपने इलाकों में सूखे के संभावित संकट से निपटने के लिए लोकल एडमिनिस्ट्रेशन के साथ मिलकर काम करें।
किदवई नगर में NBCC का ईको पार्क आकर्षण का केंद्र

नई दिल्ली। किदवई नगर में NBCC द्वारा करीब 14 एकड़ क्षेत्र में विकसित ईको पार्क इन दिनों लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पार्क में हरियाली, पेड़-पौधों और खूबसूरत लैंडस्केपिंग का विशेष ध्यान रखा गया है।आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित यह ईको पार्क क्षेत्र के पर्यावरण को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यहां विकसित हरित क्षेत्र लोगों को स्वच्छ और प्राकृतिक वातावरण उपलब्ध करा रहे हैं।NBCC ने इस परियोजना में पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए हरित विकास पर विशेष जोर दिया है। ईको पार्क किदवई नगर के सौंदर्य को बढ़ाने के साथ यह संदेश भी देता है कि आधुनिक विकास के साथ पर्यावरण और हरियाली का संरक्षण भी जरूरी है।स्थानीय लोगों के बीच भी पार्क को लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है। NBCC का यह प्रयास राजधानी में हरित और टिकाऊ शहरी विकास की दिशा में एक उल्लेखनीय पहल के रूप में देखा जा रहा है।
पुष्पांजलि मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च सेंटर ने CAHO के सहयोग से पेशेंट सेफ्टी वर्कशॉप का सफल आयोजन किया

नई दिल्ली।पुष्पांजलि मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च सेंटर (PMERC) ने कंसोर्टियम ऑफ एक्रेडिटेड हेल्थकेयर ऑर्गनाइजेशंस (CAHO) के सहयोग से पुष्पांजलि मेडिकॉन 2026 के तहत व्यापक पेशेंट सेफ्टी वर्कशॉप का सफल आयोजन किया। इसमें वरिष्ठ चिकित्सकों, डॉक्टरों, अस्पताल प्रबंधन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों, प्रशासकों और विभिन्न क्षेत्रों के स्वास्थ्य पेशेवरों सहित हेल्थकेयर क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया। वर्कशॉप में मरीजों की सुरक्षा को मजबूत करने, अधिक सक्षम और लचीली स्वास्थ्य प्रणालियां विकसित करने तथा स्वास्थ्य संस्थानों के सामने उभरती चुनौतियों से निपटने को लेकर विशेषज्ञों ने विचार-विमर्श किया।रिस्क, रेजिलिएंस एंड प्रॉफिटेबिलिटी” थीम पर आयोजित इस वर्कशॉप में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि पेशेंट सेफ्टी को केवल एक अलग गुणवत्ता पहल के रूप में देखने के बजाय इसे अस्पतालों की क्लीनिकल, ऑपरेशनल और संस्थागत प्रक्रियाओं का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए। कार्यक्रम में प्रभावी जोखिम प्रबंधन, आपात स्थितियों के लिए तैयारी, मजबूत और लचीली स्वास्थ्य प्रणालियों तथा सुरक्षा की संस्कृति विकसित करने जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि इन प्रयासों से मरीजों के बेहतर उपचार परिणाम सुनिश्चित करने के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, टिकाऊ और व्यवस्थित बनाया जा सकता है।पुष्पांजलि मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च सेंटर के सीएमडी डॉ. विनय अग्रवाल ने कहा, “पेशेंट सेफ्टी वर्कशॉप में मिली व्यापक भागीदारी और सक्रिय सहभागिता यह दर्शाती है कि स्वास्थ्य सेवाओं के केंद्र में मरीजों की सुरक्षा को बनाए रखने की आवश्यकता को लेकर जागरूकता लगातार बढ़ रही है। नौ केंद्रित सत्रों और सात घंटे की संरचित लर्निंग के माध्यम से इस वर्कशॉप में चिकित्सकों, हेल्थकेयर लीडर्स, प्रशासकों और विशेषज्ञों के विविध अनुभवों को एक मंच पर लाया गया, जहां जोखिम, रेजिलिएंस और टिकाऊ स्वास्थ्य प्रणालियों को लेकर व्यावहारिक दृष्टिकोणों पर चर्चा हुई। CAHO के साथ हमारी साझेदारी ने कार्यक्रम की अकादमिक और पेशेवर प्रासंगिकता को और मजबूत किया। हेल्थकेयर क्षेत्र से मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया से हम उत्साहित हैं और हमारा विश्वास है कि ऐसे मंच स्वास्थ्य संस्थानों को अपनी पेशेंट सेफ्टी प्रक्रियाओं का लगातार मूल्यांकन, सुदृढ़ीकरण और सुधार करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।वर्कशॉप में कुल नौ सत्रों के माध्यम से सात घंटे की लर्निंग प्रदान की गई। व्यापक अकादमिक कार्यक्रम के दौरान पेशेंट सेफ्टी और हेल्थकेयर मैनेजमेंट के विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञों ने जानकारी साझा की। इंटरैक्टिव सत्रों में विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों के बीच संवाद को बढ़ावा दिया गया, जिससे प्रतिभागियों को वास्तविक परिस्थितियों में सामने आने वाली चुनौतियों पर चर्चा करने, अपने अनुभव साझा करने और अपने-अपने स्वास्थ्य संस्थानों में लागू किए जा सकने वाले व्यावहारिक उपायों को समझने का अवसर मिला।वर्कशॉप में हेल्थकेयर इकोसिस्टम के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिभागियों की मौजूदगी ने संस्थानों के बीच अनुभव और ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए भी महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया। वरिष्ठ स्वास्थ्य पेशेवरों और अस्पताल नेतृत्व की भागीदारी ने चर्चाओं को और व्यापक बनाया। प्रतिनिधियों ने इस बात पर विचार किया कि पेशेंट सेफ्टी के सिद्धांतों को अस्पतालों में मापने योग्य, प्रभावी और लंबे समय तक टिकाऊ प्रक्रियाओं में किस तरह परिवर्तित किया जा सकता है।कार्यक्रम को अतिरिक्त अकादमिक मान्यता प्रदान करते हुए दिल्ली मेडिकल काउंसिल (DMC) द्वारा 5.5 घंटे के लिए मान्यता दी गई। इससे मेडिकल प्रोफेशनल्स के लिए वर्कशॉप की शैक्षणिक उपयोगिता को मान्यता मिली और सतत चिकित्सा शिक्षा तथा पेशेवर विकास पर इसके फोकस को भी मजबूती मिली।पेशेंट सेफ्टी वर्कशॉप पुष्पांजलि मेडिकॉन 2026 का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही। यह पुष्पांजलि मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च सेंटर की वार्षिक मेडिकल एजुकेशन पहल का पांचवां संस्करण है, जिसे इस वर्ष पहले से कहीं अधिक व्यापक स्तर पर आयोजित किया जा रहा है। इसके माध्यम से हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स को अकादमिक लर्निंग, कौशल विकास, पेशेवर संवाद और ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए व्यापक मंच उपलब्ध कराया जा रहा है।