‘कभी अलविदा ना कहना’ ने पूरे किए 20 साल, मेकर्स ने शेयर किए फिल्म से जुड़े अनदेखे क्लिप

मुंबई। करण जौहर की फिल्मों में एक जादू होता है। वो ऐसी कहानियां बनाते हैं जो सीधे दिल को छू जाती हैं। ‘कभी अलविदा ना कहना’ भी ऐसी ही एक फिल्म थी। मंगलवार को इस फिल्म ने अपने रिलीज के 20 साल पूरे कर लिए। फिल्म के मेकर्स ने इंस्टाग्राम पर फिल्म के कुछ क्लिप का मोंटाज वीडियो पोस्ट किया, जो फिल्म से जुड़ी कहानी की झलक देता है। मेकर्स ने लिखा, “एक ऐसी कहानी जिसे आप कभी अलविदा नहीं कह सकते। फिल्म ‘कभी अलविदा न कहना’ के रिलीज को 20 साल पूरे हो गए। यह सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि प्यार, दिल टूटने, तड़प और सीख से भरा एक इमोशन है।” करण जौहर द्वारा निर्देशित रोमांटिक ड्रामा फिल्म ‘कभी अलविदा ना कहना’ विवाहेतर संबंधों (एक्सट्रा मैरिटल अफेयर), भावनात्मक असंतोष और जटिल रिश्तों के संवेदनशील विषय पर आधारित है। इस फिल्म में शाहरुख खान, रानी मुखर्जी, अभिषेक बच्चन, प्रीति जिंटा और अमिताभ बच्चन जैसे दिग्गज कलाकार मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। फिल्म की कहानी दो विवाहित कपल के इर्द-गिर्द घूमती है। इसमें देव (शाहरुख खान) और माया (रानी मुखर्जी) दोनों अलग-अलग लोगों से विवाहित हैं, लेकिन अपने-अपने वैवाहिक जीवन में असंतुष्ट और दुखी हैं। एक समय पर दोनों की मुलाकात होती है और वे अपनी बेमेल शादियों का दर्द एक-दूसरे से साझा करते हैं। धीरे-धीरे वे दोस्त बन जाते हैं और अपने रिश्तों में खालीपन के कारण एक-दूसरे के करीब आ जाते हैं, जिसके बाद उनका विवाहेतर संबंध शुरू होता है। सच्चाई सामने आने पर उनके पुराने रिश्ते टूट जाते हैं और वे अपने जीवनसाथियों से अलग हो जाते हैं, जो मानवीय भावनाओं की जटिलता को दर्शाता है। फिल्म का संगीत शंकर-हसान-लॉय ने दिया था और इसके गाने (जैसे शीर्षक गीत ‘कभी अलविदा ना कहना’) बेहद लोकप्रिय हुए थे। रिलीज के समय इसकी कहानी पारंपरिक पारिवारिक मूल्यों से हटकर होने के कारण दर्शकों के बीच काफी विवादास्पद और बंटी हुई प्रतिक्रिया का विषय रही थी।
‘उम्र कम होने से कोई नेता नहीं बन जाता’, आकाश आनंद के ‘अंकल’ वाले बयान पर कांग्रेस का पलटवार

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती के भतीजे और पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद की ओर से राहुल गांधी को ‘अंकल’ कहे जाने और संविधान को लेकर की गई टिप्पणी पर कांग्रेस ने तीखा पलटवार किया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं प्रवक्ता अंशु अवस्थी ने आकाश आनंद को निशाने पर लेते हुए कहा कि केवल उम्र कम होने से कोई युवाओं और छात्रों का नेता नहीं बन जाता। युवाओं के मुद्दों पर बोलने और उनके लिए संघर्ष करने से ही नेतृत्व साबित होता है। अंशु अवस्थी ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि अगर आकाश आनंद खुद को युवाओं और छात्रों का नेता मानते हैं तो उन्हें पेपर लीक, बेरोजगारी और छात्रों-युवाओं पर कथित लाठीचार्ज और गोली चलाए जाने जैसे मुद्दों पर भी बोलना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इन मुद्दों पर आकाश आनंद चुप रहते हैं। उन्होंने कहा कि बहुजन समाज पार्टी लंबे समय तक बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर और कांशीराम के विचारों को अपना आधार बताती रही है। ऐसे में बाबा साहब आंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान को लेकर अपमानजनक टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए। कांग्रेस नेता अंशु अवस्थी ने कहा कि कम से कम भारत के संविधान का अपमान मत करिए। कांग्रेस और राहुल गांधी के बहाने संविधान को अपमानित मत करिए। उन्होंने दावा किया कि संविधान की रक्षा के लिए राहुल गांधी खड़े हुए और जब भाजपा पर संविधान बदलने की कोशिश के आरोप लगे, तब कांग्रेस ने इसके खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने आकाश आनंद से सवाल किया कि यदि वह भी भाजपा पर संविधान बदलने का आरोप लगाने वालों की तरह ही बात कर रहे हैं, तो फिर बसपा और भाजपा के बीच अंतर क्या रह जाता है? राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन संविधान और उसके मूल्यों का सम्मान सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है। अंशु अवस्थी ने कहा कि युवाओं की राजनीति केवल उम्र के आधार पर नहीं होती, बल्कि उनके सवालों को उठाने और उनके हक के लिए संघर्ष करने से होती है। उन्होंने आकाश आनंद पर निशाना साधते हुए कहा कि युवाओं के वास्तविक मुद्दों से दूरी बनाकर केवल राहुल गांधी और कांग्रेस पर टिप्पणी करने से कोई युवा नेतृत्व स्थापित नहीं होता। ज्ञात हो कि बसपा नेता आकाश आनंद ने हाल ही में राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए दोनों को ‘अंकल’ बताया था और कहा था कि वे युवाओं के नेता नहीं रह गए हैं।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पदक जीतने वाले शर्मिला, लवलीना, और झंडू ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में मेहमान बनेंगे

मुंबई। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पदक जीतने वाली शर्मिला धनखड़, लवलीना बोरगोहेन और झंडू कुमार टेलीविजन के लोकप्रिय क्विज शो कौन बनेगा करोड़पति में मेहमान बनेंगे। आईएएनएस को मिली जानकारी के मुताबिक, तीनों पदक विजेताओं को बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन के सामने ‘हॉट सीट’ पर बैठने का मौका मिलेगा। ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स के पदक विजेताओं वाला विशेष एपिसोड 15 अगस्त के बाद प्रसारित होने की उम्मीद है। पैरा एथलीट धनखड़ ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में एफ57 शॉट पुट इवेंट में स्वर्ण पदक जीता था। जीत के बाद धनखड़ पूरे देश में खासकर, महिलाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत के रूप में उभरी हैं। घरेलू हिंसा से बचने से लेकर कॉमनवेल्थ गेम्स में देश के लिए पदक जीतने तक उनकी कहानी देश के लिए प्रेरणादायी है। बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन भी महिलाओं की 75 किग्रा कैटेगरी में रजत पदक जीता था। वहीं, पैरा-पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने पुरुषों के हैवीवेट इवेंट में कांस्य पदक जीता था। झंडू ने 190 किग्रा के बेस्ट लिफ्ट, जो 130.9 पॉइंट्स के बराबर था, की मदद से बीते खेलों में देश को पहला पदक दिलाया था। केबीसी के ताजा सीजन का 10 अगस्त को सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन पर प्रीमियर हुआ, जिसमें यह स्पोर्ट्स तिकड़ी आइकॉनिक हॉट सीट पर अपने संघर्ष और उपलब्धियों की कहानियां लेकर आई है। तीनों पदक विजेताओं की कहानियां निश्चित रूप से देश के युवाओं को अपने सपने को हासिल करने की हिम्मत और प्रेरणा देगी। ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का प्रदर्शन अच्छा रहा था। भारतीय टीम कुल 39 पदक जीतकर पदकतालिका में चौथे स्थान पर रही थी। इन पदकों में 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदक थे। कुश्ती, शूटिंग और हॉकी जैसे खेलों के न होने के बावजूद भारत का शानदार प्रदर्शन एथलेटिक्स में देश के बेहतर भविष्य का संकेत है। भारत के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 मुक्केबाजी के लिहाज से बेहद यादगार रहा। भारतीय मुक्केबाजों ने कुल 7 स्वर्ण जीते। यह कॉमनवेल्थ गेम्स के किसी भी एक संस्करण में मुक्केबाजी में सर्वाधिक स्वर्ण जीतने का रिकॉर्ड है। भारत ने मुक्केबाजी में 7 स्वर्ण के अलावा 3 रजत सहित कुल 10 पदक जीते।
लोकसभा और राज्यसभा में फिर हंगामा, दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित

नई दिल्ली। राज्यसभा और लोकसभा में मंगलवार को एक बार फिर हंगामा व नारेबाजी हुई। संसद में जारी गतिरोध और हंगामे के कारण राज्यसभा व लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के कुछ देर बाद ही स्थगित करनी पड़ी। लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई, वहीं राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। कार्यवाही स्थगित किए जाने से पहले, राज्यसभा में हंगामे के बीच नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे बोलने के लिए सदन में खड़े हुए। हालांकि राज्यसभा में जारी हंगामे के कारण वह अपनी बात नहीं रख सके। दरअसल राज्यसभा में सदन की कार्यवाही शुरू होने के कुछ देर तक शांति बनी रही। इस दौरान संसद की विभिन्न समितियों से जुड़ी कई रिपोर्टों व पेपर सदन में रखे गए। कई सदस्यों ने यहां अपनी अपनी समितियों से जुड़ी रिपोर्ट व पेपर सदन में प्रस्तुत किए। इस कार्यवाही के बाद राज्यसभा में शून्यकाल की कार्यवाही शुरू की जानी थी। लेकिन तभी विपक्षी सांसदों ने जमकर नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्ष के कई सांसद दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस बल के उपयोग का मुद्दा सदन में उठाना चाहते है। वहीं कई सांसद राम मंदिर चढ़ावे का मुद्दा उठा रहे हैं। इसको लेकर सदन में लगातार हंगामा व नारेबाजी होती रही। राज्यसभा व लोकसभा दोनों ही सदनों में मंगलवार को यह हंगामा जारी रहा। लोकसभा में सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही प्रारंभ होने के साथ ही सदन में हंगामा शुरू हो गया। लोकसभा में विपक्षी सांसदों की नारेबाजी को देखते हुए कार्यवाही शुरू होने के कुछ देर बाद ही सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। वहीं राज्यसभा में भारी हंगामे व नारेबाजी के बीच कुछ देर के लिए सदन की कार्यवाही संचालित की गई। लेकिन कुछ ही देर बाद कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दिया गया। गौरतलब है कि संसद में लगातार हंगामा व गतिरोध बना हुआ है जिससे विधायी कार्य प्रभावित हो रहे हैं। दोनों सदनों में विशेष उल्लेख शून्यकाल व प्रश्न काल जैसी महत्वपूर्ण कार्यवाही प्रभावित हुई हैं। मानसून सत्र के दौरान लगातार यह स्थिति बनी हुई है।
अमित शाह के समर्थन में एनडीए सांसदों ने निकाला मार्च, झारखंड मुद्दे पर विपक्ष पर साधा निशाना

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के समर्थन और विपक्ष के विरोध में एनडीए सांसदों ने मंगलवार को संसद के मकर द्वार की ओर मार्च किया। उन्होंने झारखंड में प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से जवाब मांगा। भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने कहा, ‘हम सब हर चर्चा के लिए तैयार हैं, उसके बाद भी राहुल गांधी चर्चा नहीं होने दे रहे हैं। हर बार सदन की कार्यवाही को रोक रहे हैं, इसलिए हम लोग उनके खिलाफ मार्च कर रहे हैं।” भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा,”झारखंड के युवाओं के साथ न्याय हो। उन पर जिस तरह से अत्याचार किया गया ये राहुल गांधी की सोच दिखाती है कि उनके समर्थक राज्य में कैसे युवाओं के साथ अत्याचार हो रहा है और न्याय नहीं हो रहा है। दूसरी ओर वे गृह मंत्री से जवाब मांगते हैं और खुद सदन में नहीं आते हैं। गृह मंत्री जवाब देने को तैयार हैं, लेकिन राहुल गांधी केवल सुर्खियों में बने रहने के लिए झूठे बयान दे रहे हैं।” झारखंड में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को लेकर एनडीए सांसदों ने संसद परिसर में मार्च निकाला। भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा, “कांग्रेस पार्टी ‘झूठ की दुकान’ बन गई है। कांग्रेस छात्रों का इस्तेमाल करके राजनीति करने की कोशिश करती है, लेकिन जब छात्रों को न्याय दिलाने की बात आती है तो राहुल गांधी, कांग्रेस और उनके सहयोगी पीछे हट जाते हैं।” भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने कहा, “रांची में जिस तरह से उनकी सरकार है और जिस तरह से पुलिस ने लाठीचार्ज किया है, वाटर कैनन चलाए हैं आज वे चुप हैं? यहां पर हंगामा है। आज उनकी चुप्पी से वे देश के सामने बेनकाब हो रहे हैं।” केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा, “जिस तरह से विपक्ष पूरे सत्र को बाधित करता रहा। आज जब सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है तो विपक्ष गोलपोस्ट बदलता रहता है। कभी कहता है कि वे एक मुद्दा उठाना चाहते हैं, तो कभी दूसरे पर जवाब मांग रहे हैं। गोलपोस्ट बदलते रहने की विपक्ष और राहुल (गांधी) की इस प्रवृत्ति ने सदन के कामकाज को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है।” भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा, “झारखंड में राहुल गांधी विपक्ष के नेता की तरह जवाब दे रहे हैं। वह जो कहते हैं उसे टाल देते हैं। वह भूल रहे हैं कि झारखंड में छात्र जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। राहुल गांधी शायद भूल रहे हैं कि उनकी पार्टी झारखंड में सरकार में भागीदार है। छात्र बयान नहीं चाहते, वे कार्रवाई चाहते हैं।” भाजपा सांसद निशिकांत दूबे ने कहा, “ये जो राहुल गांधी का दोहरा चरित्र है जिस तरह से मोदी विरोध की उनकी आग है जिसमें देश तोड़ने वाले तत्वों के साथ वो हमेशा शामिल रहते हैं, उनके लिए संदेश है कि अपनी दोहरी मानसिकता को बंद करें। आप छात्रों के साथ आएं और उनको न्याय दिलाएं।” झारखंड में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन पर भाजपा सांसद अशोक मित्तल ने कहा, “छात्रों के साथ हिंसा हुई है। उन्हें पीटा गया और विधानसभा परिसर के अंदर हम पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए। यह बेहद निंदनीय है और वहां की सरकार की ओर से किया गया शर्मनाक काम है, जिसमें कांग्रेस पूरी तरह शामिल है। छात्रों को जिस तरह से पीटा गया, वह बहुत निंदनीय है। दिल्ली में तो उनका दोहरा रवैया रहता था, लेकिन अब वहां पहुंचने पर क्या हो गया है? छात्रों पर लाठीचार्ज किया जा रहा है। मैं इसकी निंदा करता हूं और कहना चाहता हूं कि यही कांग्रेस का असली चेहरा है। हमें इससे खुद को बचाना होगा। छात्रों को इससे बचाना होगा।
हर घर तिरंगा अभियान के तहत प्रयागराज में निकाली गई मोटरसाइकिल रैली

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में स्वतंत्रता दिवस से पहले ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत मंगलवार को तिरंगा यात्रा निकाली गई। सिविल डिफेंस के चीफ वार्डन अनिल गुप्ता ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “हर घर तिरंगा अभियान के तहत मोटरसाइकिल रैली निकाली गई। सुभाष चौक से लेकर शेखर आजाद पार्क तक निकाली जा रही रैली में सिविल डिफेंस, भारत स्काउट, होमगार्ड और पुलिस के जवान शामिल हुए। रीजनल आर्काइव्स ऑफिसर राकेश कुमार वर्मा ने कहा, “पूरे देश में ‘हर तिरंगा अभियान’ के तहत रैलियां निकाली जा रही है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा से पूरे प्रयागराज में विभिन्न तरह की रैलियां निकाली जा रही हैं। तिरंगा मोटरसाइकिल रैली नेता सुभाष चंद्र पार्क से निकलकर चंद्रशेखर शहीद स्थल तक जाएगी। इसी के साथ कई सांस्कृतकि कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।” वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार ने ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को प्रदेश के सभी मदरसों तक पहुंचाने की तैयारी शुरू कर दी है। अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ एवं हज विभाग के राज्यमंत्री दानिश अंसारी ने प्रमुख सचिव, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को सभी मदरसों में अभियान से जुड़े कार्यक्रम आयोजित कराने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने के निर्देश दिए हैं। हर घर तिरंगा भारत सरकार की संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत ‘मेरी सरकार’ के सहयोग से शुरू की गई एक पहल है, जिसका उद्देश्य नागरिकों और भारतीय राष्ट्रीय ध्वज, तिरंगे के बीच एक व्यक्तिगत जुड़ाव को बढ़ावा देना है। यह अभियान प्रत्येक भारतीय को तिरंगे को अपने घर लाने और गर्व से फहराने के लिए प्रोत्साहित करता है, जिससे ध्वज के साथ संबंध एक औपचारिक प्रतीक से बदलकर राष्ट्रीय गौरव की एक भावपूर्ण अभिव्यक्ति बन जाता है। यह अभियान आजादी का अमृत महोत्सव का एक हिस्सा है, जो भारत की स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने का एक व्यापक उत्सव है। यह महोत्सव देशभक्ति गतिविधियों में नागरिकों की भागीदारी को प्रोत्साहित करते हुए देश के इतिहास, संस्कृति और उपलब्धियों को उजागर करता है। हर घर तिरंगा नागरिकों को स्वतंत्रता और एकता का जश्न मनाने में सीधे तौर पर शामिल करने का एक मंच प्रदान करता है।
मोहसिन रजा का राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर तंज, बोले- जेन-जी समझ गए हैं कि कौन उनके साथ खड़ा है

लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता मोहसिन रजा ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के नेता आकाश आनंद के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव को अंकल कहा। भाजपा नेता मोहसिन रजा ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा, ” अब ‘जेन-जी’ सब कुछ समझता है। देश के युवा छात्र और आने वाली पीढ़ी जानती है कि कौन उनके साथ खड़ा है और कौन उनके खिलाफ। इसीलिए उस युवा ने उन्हें ‘अंकल’ कहा। अब आप सच में अंकल हैं। आप देश हित में काम नहीं कर सकते। एक अंकल की तरह किनारे बैठ जाइए। अगर आप देश हित में काम करना चाहते हैं तो देश के हमारे ‘प्रधान सेवक’ को देखिए, जो सबकी बात सुनते हैं और सभी के साथ चर्चा करते हैं।” भाजपा नेता ने रांची में छात्र आंदोलन के दौरान की गई कार्रवाई पर कहा कि जहां भी कांग्रेस समर्थित या कांग्रेस की सरकारें हैं, वहां छात्रों और जनता के साथ इमरजेंसी जैसा बर्ताव किया जा रहा है। शांतिपूर्ण तरीके से चल रहे छात्र आंदोलन में लाठीचार्ज किया गया, आंसू गैस के गोल दागे गए। यह इमरजेंसी की याद दिलाता है। युवा छात्र और आम जनता कांग्रेस को कभी माफ नहीं करेगी। दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन को लेकर संसद में विपक्ष चर्चा करना चाहता है। इस पर मोहसिन रजा ने कहा कि बिल्कुल, भाजपा का हमेशा कहना है कि सदन चर्चा के लिए होता है। पूरा देश जानता है कि कांग्रेस भागती है। जंतर-मंतर के मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने जनता को गुमराह करने का काम किया है, उसको उजागर करने का काम भारतीय जनता पार्टी करेगी। अच्छा तब होता जब कांग्रेस इस चर्चा में शामिल होती, लेकिन कांग्रेस सदन में रहना ही नहीं चाहती। राहुल गांधी की तर्ज पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव जेन-जी को साधने के लिए उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में युवा योद्धा महासम्मेलन करने वाले हैं। इस पर भाजपा नेता मोहसिन रजा ने तंज कसते हुए कहा कि जब ये दोनों युवा थे, तब एक दूसरे की बांहों में बांहें डालकर साल 2017 में एक ही राह पर चले थे, तब प्रदेश की जनता ने नकार दिया। इसलिए अब ये कोई भी आंदोलन करें, सबको लगता है कि ये हमारे खिलाफ ही बात करेंगे, अपने हित की बात करेंगे, लेकिन देशहित की बात नहीं करेंगे।
वनडे सीरीज: गुरबाज की तूफानी पारी, आयरलैंड की 3 विकेट से हार, अफगानिस्तान ने बनाई 2-0 से लीड

बेलफास्ट। अफगानिस्तान ने आयरलैंड के खिलाफ सोमवार को सिविल सर्विस क्रिकेट क्लब में खेले गए तीसरे वनडे मैच को 3 विकेट से अपने नाम किया। इसी के साथ मेहमान टीम ने पांच मुकाबलों की सीरीज में 2-0 से बढ़त हासिल कर ली है। दोनों देशों के बीच पहला मुकाबला बारिश के चलते रद्द हो गया था। इस मैच में टॉस भी नहीं हो सका था। अगले मैच में बारिश के चलते 3-3 ओवरों की कटौती हुई और अफगानिस्तान ने 92 रन से जीत हासिल की। सीरीज के तीसरे मैच में टॉस गंवाकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी आयरलैंड की टीम 46.3 ओवरों में 206 रन पर सिमट गई। इस टीम ने 19 के स्कोर पर एंड्रयू बालबर्नी (7) का विकेट गंवा दिया था। यहां से कप्तान पॉल स्टर्लिंग ने कैड कारमाइकल के साथ दूसरे विकेट के लिए 50 गेंदों में 44 रन की साझेदारी की। पॉल 31 गेंदों में 23 रन बनाकर आउट हुए, जबकि कैड कारमाइकल ने 52 गेंदों में 4 चौकों के साथ 32 रन की पारी खेली। इस टीम ने 89 रन पर 5 विकेट गंवाने के बाद 128 रन तक अपना आठवां विकेट भी खो दिया था। यहां से जय मूंदड़ा ने गैविन होए के साथ 9वें विकेट के लिए 97 गेंदों में 76 रन जुटाकर टीम को 200 के पार पहुंचाया। गैविन होए ने 2 चौकों के साथ 36 रन बनाए, जबकि जय मूंदड़ा ने 33 गेंदों में 5 चौकों के साथ 31 रन की पारी खेली। अफगान खेमे से एएम गजनफर और राशिद खान ने 3-3 विकेट अपने नाम किए। यामीन अहमदजई को 2 विकेट हाथ लगे। इसके जवाब में अफगानिस्तान ने 44.5 ओवरों में जीत हासिल कर ली। रहमानुल्लाह गुरबाज ने इब्राहिम जादरान के साथ पहले विकेट के लिए 53 रन की साझेदारी की। जादरान 12 रन बनाकर पवेलियन लौटे, जिसके बाद गुरबाज ने सेदिकुल्लाह अटल (27) के साथ दूसरे विकेट के लिए 31 रन जोड़कर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। गुरबाज 77 गेंदों में 5 छक्कों और 2 चौकों के साथ 71 रन बनाकर आउट हुए, जबकि हशमतुल्लाह शाहिदी ने 22 रन जुटाए। इनके अलावा, राशिद खान ने 4 चौकों की मदद से 37 रन की नाबाद पारी खेली। मेजबान टीम से गैविन होए ने 34 रन देकर 4 विकेट हासिल किए, जबकि मार्क अडायर ने 2 विकेट निकाले। बायरन मैकडोनो ने 1 विकेट चटकाया।
रागिनी नायक ने शिक्षा प्रणाली पर उठाए सवाल, संसद में गतिरोध पर केंद्र की आलोचना की

नई दिल्ली। कांग्रेस प्रवक्ता रागिनी नायक ने छात्रों के मुद्दों पर संसद में गतिरोध और बिहार में छात्रों पर कथित एके-47 फायरिंग पर कांग्रेस की फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट के नतीजों पर टिप्पणी की। छात्रों के मुद्दों पर संसद में गतिरोध को लेकर कांग्रेस नेता ने कहा कि सत्ता पक्ष चाहे तो संवाद है और न चाहे तो कोई चर्चा नहीं होगी। संसद लोकतंत्र का मंदिर है, चर्चा जरूर करो, लेकिन जिम्मेदारी तय करो। रागिनी नायक ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि सरकार की भ्रष्ट शिक्षा प्रणाली विफल रही है। बिके हुए शिक्षा के सिस्टम के खिलाफ युवा उठ खड़ा हुआ है। पहले केंद्र सरकार को इसका आभास नहीं था कि मामला इतना बड़ा हो जाएगा। उन्हें लग रहा था पुलिस प्रशासन और लाठीचार्ज से छात्रों के आंदोलन को कुचल देंगे, लेकिन छात्रों का आंदोलन पूरे देश में फैल रहा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन चली हो तो सरकार के लोग जिम्मेदार हैं। वहीं, बिहार में हुई घटनाओं के लिए सीएम सम्राट चौधरी जिम्मेदार हैं। एके-47 फायरिंग चलने और लाठीचार्ज से तीन छात्र घायल पड़े हैं। पुलिस वालों ने छात्रों को इतना मारा कि किसी का सिर फूटा तो किसी का पैर टूटा। कांग्रेस नेता ने कहा कि 15 से 17 साल के बच्चों को हत्या के प्रयास जैसे गंभीर आरोपों में ज्यूडीशियल कस्टडी में डाल दिया गया। परिजन बच्चों के भविष्य को लेकर रो रहे हैं। इन सब घटनाओं के लिए जवाबदेही तय होनी बहुत जरूरी है। उन्होंने सवाल किया कि क्या दिल्ली में पैलेट गन किसके आदेश पर चलाई गई थी? क्या सिवान में एके-47 चलाने का निर्देश दिल्ली से पुलिस को दिया गया था? या इसका फैसला सीएम ने खुद लिया? कांग्रेस नेता ने कहा कि इस तरह के तमाम सवाल हैं, जो पूछे जाने चाहिए। इस बात का गर्व है कि राहुल गांधी ने यह सिद्ध किया कि ये देश पुलिस की लाठी से नहीं, छात्रों की गूंज से चल रहा है।
विदेश मंत्री जयशंकर ने बिमल पटेल से की मुलाकात, आईटीएलओएस के जज चुने जाने की दी बधाई

नई दिल्ली। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने सोमवार को बिमल एन. पटेल से मुलाकात की और उन्हें इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल ऑफ द लॉ ऑफ द सी (आईटीएलओएस) के जज के तौर पर हाल ही में चुने जाने पर बधाई दी। विदेश मंत्री जयशंकर ने मुलाकात की तस्वीर साझा कर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “आज प्रो. डॉ. बिमल एन. पटेल से मिलकर खुशी हुई। इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल ऑफ द लॉ ऑफ द सी के जज के तौर पर हाल ही में चुने जाने पर उन्हें बधाई दी। उनके सफल कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं दीं।” पटेल को यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ द सी (यूएनसीएलओएस) के हस्ताक्षर करने वाले देशों ने चुना था और वह सितंबर में ट्रिब्यूनल में शामिल होंगे। उनके (पटेल) चुने जाने के साथ, सितंबर में जब नीरू चड्ढा अपना नौ साल का कार्यकाल पूरा करेंगी, इसके बाद भी ट्रिब्यूनल में भारत का प्रतिनिधित्व जारी रहेगा। पटेल अंतरराष्ट्रीय कानून के जानकार हैं और अभी यूएन के अंतरराष्ट्रीय कानून आयोग में काम करते हैं। इसके साथ ही वो गुजरात में राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं। उनके पास जो अलग-अलग पद हैं, उनमें राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजरी बोर्ड की सदस्यता भी शामिल है। भारत के यूएन मिशन ने एक्स पर कहा कि पटेल का चुनाव बहुपक्षवाद और समुद्र के कानून के प्रति भारत के पक्के वादे को आगे बढ़ाता है। पिछले साल से ही भारतीय डिप्लोमैट्स यूएन में उनके चुनाव के लिए कैंपेन कर रहे थे। इस साल ट्रिब्यूनल की जिन सात सीटों पर चुनाव होने थे, उनमें से दो एशियाई क्षेत्र के लिए थीं और उन्हें पटेल और वियतनाम के गुयेन लैन-अन्ह थी ने जीता। पटेल को 168 वैद्य मतों में से 115 मत मिले। यह चुनाव समुद्री कानून कन्वेंशन के स्टेट्स पार्टीज की 36वीं मीटिंग के दौरान हुआ था। जर्मनी के हैम्बर्ग में मौजूद इस ट्रिब्यूनल में 21 जज हैं, जो समुद्र और महासागरों से जुड़े झगड़ों पर फैसला सुनाते हैं और समुद्र के कानून की व्याख्या करते हैं। ईएएम जयशंकर ने पटेल के चुनाव के बाद यूएनसीएलओएस के सदस्यों को सपोर्ट के लिए धन्यवाद दिया था।