पीएम मोदी संग एनडीए सांसदों की मंगल बैठक, तिरंगा लहराकर दिया एकजुटता का संदेश

नई दिल्ली। एनडीए सांसदों की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मंगल बैठक वंदे मातरम नारे के साथ शुरू हुई। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन और एनडीए के अन्य नेता तिरंगा लहराते नजर आए। नई दिल्ली में मंगलवार को संसद पुस्तकालय में आयोजित ‘मंगल मिलन’ कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तिरंगा ध्वज के साथ नजर आए। सांसद हाथ में पोस्टर लेकर सदन में प्रवेश करेंगे, जिनमें लिखा होगा सरकार छात्रों के प्रदर्शन पर चर्चा चाहती है, लेकिन कांग्रेस इसे चाहकर भी अब इससे भाग रही है। सांसदों के हाथों में झारखंड सरकार को लेकर भी पोस्टर होंगे। उन पोस्टरों पर झारखंड में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर अत्याचार का मुद्दा उठाया जाएगा। पिछले सप्ताह ‘मंगल मिलन’ बैठक के बाद भाजपा सांसदों ने पत्रकारों से बातचीत की थी। उन्होंने सरकार की उपलब्धियों, रोजगार, खेल, आर्थिक विकास और संसद की कार्यवाही को लेकर अपनी बात रखी थी। साथ ही, विपक्ष पर संसद की कार्यवाही को बाधित करने का आरोप भी लगाया था। भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने आईएएनएस से कहा था कि भारत तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा है और रोजगार के क्षेत्र में देश की स्थिति लगातार मजबूत हुई है। रोजगार का अनुपात अन्य देशों की तुलना में बेहतर हुआ है और बेरोजगारी में भी कमी आई है। 25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं, जो सरकार की नीतियों का परिणाम है। भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने कहा था कि ‘मंगल मिलन’ कार्यक्रम में देश में हो रहे विभिन्न विकास कार्यों और सरकार की उपलब्धियों पर विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने आरोप लगाया था कि विपक्ष संसद में लगातार हंगामा कर रहा है और महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा नहीं होने दे रहा है। बैठक में सभी सांसदों ने यह तय किया कि संसद की कार्यवाही के दौरान उनकी उपस्थिति हर हाल में सुनिश्चित रहेगी, ताकि सरकार आवश्यक विधेयकों को पारित करा सके। भाजपा के राज्यसभा सदस्य अशोक मित्तल ने कहा था कि बैठक में खेलों के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने कहा था कि हाल में संपन्न ग्लासगो कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप सहित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के प्रदर्शन की तुलना यदि यूपीए सरकार के दस वर्षों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले पिछले दस वर्षों से की जाए तो सकारात्मक बदलाव स्पष्ट दिखाई देता है। खेलों के क्षेत्र में भारत की वैश्विक पहचान लगातार मजबूत हुई है। वहीं, भाजपा सांसद रवि किशन ने कहा था कि देश आर्थिक और सामाजिक विकास के रास्ते पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है। बैठक में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि, रोजगार और युवाओं के लिए बढ़ते अवसरों पर चर्चा हुई। रवि किशन ने भी विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि आखिर विपक्ष संसद को सुचारु रूप से क्यों नहीं चलने दे रहा है।
सिंकफील्ड कप: आर. प्रज्ञानंदा ने सेवियन के खिलाफ आसान ड्रॉ के साथ अभियान शुरू किया

सेंट लुइस। ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानंदा ने ग्रैंड चेस टूर के आखिरी से पहले इवेंट के शुरुआती राउंड में अपने अमेरिकी साथी सैमुअल सेवियन के खिलाफ आसान ड्रॉ के साथ अपने सिंकफील्ड कप कैंपेन की शुरुआत की। काले मोहरों से खेलते हुए, आर. प्रज्ञानंदा ने रुई लोपेज के आर्कान्जेस्क वेरिएशन ने काफी शांत मुकाबला किया। मुकाबले के दौरान भारतीय खिलाड़ी ज्यादा बेहतर और तैयारी लगे। खिलाड़ियों ने जल्दी ही मोहरों की अदला-बदली शुरू कर दी, और 11वीं चाल में ही रूक की एक जोड़ी बोर्ड से हट गई। आगे की अदला-बदली के बाद क्वीन-और-माइनर-मोहरे का एंडगेम हुआ जिसमें दोनों खिलाड़ियों के पास दो-दो घोड़े थे, जिससे दोनों में से किसी के भी जीतने का कोई खास मौका नहीं बचा। एक बार जब क्वींस ट्रेड हो गईं, तो नतीजा लगभग तय हो गया और गेम आखिरकार 48 चालों के बाद ड्रॉ पर समाप्त हुआ, हालांकि खिलाड़ी पहले पॉइंट बांटने पर सहमत हो सकते थे। टॉप सीड फैबियानो कारुआना 10 खिलाड़ियों वाले, नौ राउंड के टूर्नामेंट के शुरुआती राउंड में जीत दर्ज करने वाले अकेले खिलाड़ी थे। अमेरिकी खिलाड़ी ने नीदरलैंड्स के जॉर्डन वैन फॉरेस्ट को हराकर शुरुआती बढ़त हासिल की। कारुआना ने एक बार फिर दिखाया कि वह इस सीजन में ग्रैंड चेस टूर के सबसे अच्छे खिलाड़ी क्यों रहे हैं। उन्होंने शुरू में बराबरी की स्थिति से वैन फॉरेस्ट को हराया। डच खिलाड़ी की मिडिलगेम में एक रणनीतिक गलती की वजह से उन्हें एक पॉन गंवाना पड़ा, जिससे कारुआना को फायदा मिल गया। इसके बाद अमेरिकी खिलाड़ी ने 55 चालों के बाद खास तकनीक दिखाई। दूसरी तरफ, वर्ल्ड चैंपियनशिप के दावेदार उज्बेकिस्तान के जावोखिर सिंडारोव ने अर्मेनियाई से अमेरिकी बने लेवोन एरोनियन के साथ ड्रॉ खेला। सफेद मोहरों से खेलते हुए, सिंडारोव ने अनियमित क्वीन पॉन सेट-अप चुना और ऐसा लगा कि जब एरोनियन ने एक पॉन गिरा दिया तो उन्हें मौका मिल गया। हालांकि, इसके नतीजे में उलटे रंग के बिशप के एंडगेम में जीतने का कोई असली मौका नहीं मिला, और गेम आखिरकार ड्रॉ हो गया। जर्मनी के विंसेंट कीमर को भी अमेरिका के वेस्ली सो के खिलाफ आधे पॉइंट से ही संतोष करना पड़ा। कीमर ने सो के किंग के खिलाफ अटैक करने की कोशिश की, लेकिन अमेरिकन ने आराम से डिफेंड किया और खतरे को बेअसर कर दिया। नीदरलैंड के अनीश गिरी ने फ्रांस के मैक्सिम वाचियर-लाग्रेव के खिलाफ दिन का दूसरा ड्रॉ पूरा किया। गिरी कुछ खास प्रोग्रेस नहीं कर पाए और गेम आखिरकार रूक-एंड-पॉन्स एंडिंग पर पहुंच गया, जो आखिर तक चला, इससे पहले कि खिलाड़ी ड्रॉ पर सहमत हुए।
सीआरपीएफ ने श्रीनगर के लाल चौक पर निकाली तिरंगा रैली, बच्चों को बताया आजादी का महत्व

श्रीनगर। स्वतंत्रता दिवस से पहले सीआरपीएफ ने श्रीनगर के ऐतिहासिक लाल चौक पर छात्रों के साथ एक भव्य तिरंगा रैली का आयोजन किया। इस रैली का मकसद सिर्फ 15 अगस्त का जश्न मनाना नहीं था, बल्कि आने वाली पीढ़ी को देश की आजादी की कीमत और तिरंगे के सम्मान के बारे में बताना था। सीआरपीएफ के असिस्टेंट कमांडेंट प्रह्लाद सिंह ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने भारत की स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ पर लाल किले से “हर घर तिरंगा” अभियान की घोषणा की थी। उसी संदेश को आगे बढ़ाते हुए हर साल 15 अगस्त के उपलक्ष्य में यह रैली निकाली जाती है। उन्होंने कहा, “आज हमने इस तिरंगा रैली में पास के स्कूल के बच्चों को शामिल किया है, क्योंकि यही हमारे जम्मू-कश्मीर और भारत का भविष्य हैं। हम चाहते हैं कि ये बच्चे जानें कि हमारे देश की संस्कृति, हमारी धरोहर और हमारी आजादी किन परिस्थितियों में मिली है। आजादी मुफ्त में नहीं मिली। इसके लिए लोगों ने बलिदान दिया है। इसका सम्मान करना और इसे याद रखना हम सभी का कर्तव्य है।” रैली में शामिल छात्र आदित्य राज सिंह ने कहा कि इस तिरंगा रैली का महत्व बहुत ज्यादा है। इसका नाम ही “हर घर तिरंगा रैली” है, तो हर घर में तिरंगा लहराना चाहिए। उन्होंने कहा, “हर एक इंसान, जो इस देश में रह रहा है, उसे यहां के इतिहास का पता होनी चाहिए। आज अगर हम आजादी से जी रहे हैं तो उसकी बहुत बड़ी कीमत चुकाई गई है। हर एक इंसान को अपने देश पर गर्व होना चाहिए। उसे पता होना चाहिए कि इस तिरंगे की अहमियत क्या है?” टिंडेल बिस्को स्कूल में पढ़ने वाले 9वीं क्लास के छात्र नील ने कहा, “हमें तिरंगा रैलियों और सरकार व अन्य संस्थाओं द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में हिस्सा लेना चाहिए, ताकि हम अपने देश का मान बढ़ा सकें। यही संदेश है।” नील ने बताया कि यह दूसरी बार है जब वह इस रैली में शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा, “मैं पिछले साल भी यहां आया था। अनुभव काफी हद तक वैसा ही रहा है, लेकिन दोनों ही बार मुझे गर्व महसूस हुआ है और देश के लिए कुछ करने की भावना रही है क्योंकि हम यहां आए हैं।
ईरान की सैन्य कमान का विस्तार, सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने छह शीर्ष पदों पर नए कमांडर नियुक्त किए

नई दिल्ली। पूर्व इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) कमांडर मोहसिन रेजाई को सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (एसएनएससी) में अपना प्रतिनिधि नियुक्त करने के बाद इस्लामी क्रांति के नेता अयातुल्लाह सैय्यद मोजतबा हुसैनी खामेनेई ने अलग-अलग आदेश जारी कर छह सैन्य कमांडरों की नियुक्ति की। ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के सभी सशस्त्र बलों की कमान संभालने वाले इस्लामी क्रांति के नेता अयातुल्लाह सैयद मोजतबा हुसैनी खामेनेई ने सेना के छह शीर्ष पदों पर नई नियुक्तियां कीं, जिनमें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) के प्रमुख का पद भी शामिल है। मेहर न्यूज के अनुसार, सुप्रीम लीडर ने मेजर जनरल अली अब्दोल्लाही को ईरानी सशस्त्र बलों का चीफ ऑफ स्टाफ नियुक्त किया। साथ ही ब्रिगेडियर जनरल कियमार्स हैदरी को ईरानी सशस्त्र बलों का डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ बनाया गया। उन्होंने मेजर जनरल अहमद वाहिदी को आईआरजीसी का मुख्य कमांडर नियुक्त किया। मेहर न्यूज के अनुसार, ईरानी सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर ने मेजर जनरल मुस्तफा इजादी को आईआरजीसी का डिप्टी कमांडर-इन-चीफ नियुक्त किया। सुप्रीम लीडर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, ”अत्यंत दयालु और कृपालु ईश्वर के नाम पर…मेजर जनरल मुस्तफा इजादी, आपकी निष्ठा, क्षमता और बहुमूल्य अनुभव को देखते हुए और आईआरजीसी के कमांडर-इन-चीफ की सिफारिश पर मैं आपको आईआरजीसी के डिप्टी कमांडर-इन-चीफ के पद पर नियुक्त करता हूं।” इसके अलावा, उन्होंने रियर एडमिरल अली ओजमाई को आईआरजीसी नौसेना का कमांडर बनाया गया। सुप्रीम लीडर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, ”रियर एडमिरल अली ओजमाई, रियर एडमिरल तंगसिरी की शहादत को देखते हुए और आपकी लगन, काबिलियत और अनुभव को ध्यान में रखते हुए, आईआरजीसी के कमांडर-इन-चीफ की सिफारिश पर, मैं आपको आईआरजीसी नेवी का कमांडर नियुक्त करता हूं।” इसके अलावा उन्होंने नेता ने हुसैन ताएब को आईआरजीसी की बसीज संगठन का प्रमुख नियुक्त किया। सुप्रीम लीडर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, ”हुज्जत-उल-इस्लाम हुसैन ताएब, जायोनी-अमेरिकी दुश्मन के हाथों मेजर जनरल सुलेमानी की शहादत को देखते हुए और आपकी प्रतिबद्धता, काबिलियत व अनुभव को ध्यान में रखते हुए, आईआरजीसी के कमांडर-इन-चीफ की सिफारिश पर, मैं आपको आईआरजीसी बासिज संगठन का प्रमुख नियुक्त करता हूं।
ईरान को साइबर सुरक्षा और निष्क्रिय रक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत: उपराष्ट्रपति रजा आरिफ

नई दिल्ली। ईरान के उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने कहा कि हमारे दुश्मन साजिशें रचेंगे और देश को नुकसान पहुंचाने का मौका तलाशते रहेंगे। इसलिए देश की साइबर सुरक्षा और निष्क्रिय रक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि विरोधियों की साजिशों से निपटने के लिए ईरान को पूरी तरह तैयार रहना होगा। इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी (आईआरएनए) की रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विकास मुख्यालय की बैठक में आरिफ ने दुश्मनों की साजिशों को नाकाम करने के लिए देश को साइबर सुरक्षा और निष्क्रिय रक्षा के क्षेत्र में अपनी स्थिति और मजबूत करनी होगी। उन्होंने कहा कि शहीद इस्लामी क्रांति के नेता की ओर से तय किए गए विकास दृष्टि कार्यक्रम के तहत ईरान को उन्नत तकनीकों के क्षेत्र में क्षेत्रीय स्तर पर अग्रणी स्थान हासिल करना चाहिए और वैश्विक स्तर पर भी एक प्रभावशाली भूमिका निभानी चाहिए। आईआरएनए के अनुसार, उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा को मजबूत करना एक जरूरी रणनीति है, क्योंकि दुश्मन ईरानी जनता के सामने हाल की अपनी हार के बावजूद साजिशें रचना बंद नहीं करेगा और हमारे देश को नुकसान पहुंचाने का मौका तलाशता रहेगा। हमें पूरी तरह तैयार रहते हुए विरोधियों की साजिशों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए और निष्क्रिय रक्षा पर भी ज्यादा ध्यान देना चाहिए। मोहम्मद रजा आरिफ ने कहा कि अमेरिका और इजराइल ने जून 2025 में ईरान के खिलाफ अपना पहला युद्ध शुरू किया था, जो 12 दिन तक चला। इसके बाद उनका दूसरा सैन्य हमला इस वर्ष 2026 में 28 फरवरी को शुरू हुआ और 40 दिन के बाद अप्रैल की शुरुआत में रुक गया। मोहम्मद रजा आरिफ ने दावा किया कि दोनों युद्धों में ईरान के मजबूत प्रतिरोध और जवाबी सैन्य अभियानों ने विरोधियों को युद्धविराम स्वीकार करने पर मजबूर कर दिया।
यूक्रेन के ओडेसा क्षेत्र में मिग-29 लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त, मिशन के दौरान लगी आग

नई दिल्ली। यूक्रेन के ओडेसा क्षेत्र में सोमवार शाम यूक्रेनी वायु सेना का एक मिग-29 लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे के दौरान विमान ओडेसा क्षेत्र में हवाई लक्ष्यों को नष्ट करने के मिशन पर था। हादसे में पायलट समय रहते इजेक्ट कर गया और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। रूसी समाचार एजेंसी ‘टास’ के अनुसार, वायु सेना ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टेलीग्राम चैनल और फेसबुक पेज पर हादसे की जानकारी साझा की। यूक्रेनी वायु सेना ने बताया कि एक मिग-29 लड़ाकू विमान दक्षिणी यूक्रेन के ओडेसा क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। यूक्रेनी वायु सेना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘फेसबुक’ पोस्ट में लिखा, ”10 अगस्त, 2026 की शाम को, एयर फोर्स का एक मिग-29 फाइटर एक कॉम्बैट मिशन करते समय खो गया। पायलट ओडेसा इलाके में दुश्मन के हवाई टारगेट को नष्ट करने के लिए एक कॉम्बैट मिशन कर रहा था। शुरुआती जानकारी के अनुसार, एक एयरक्राफ्ट मिसाइल के लॉन्च के दौरान एक इमरजेंसी सिचुएशन हुई, जिसके कारण प्लेन में आग लग गई और पायलट ने कंट्रोल खो दिया, हालांकि उसने विमान को बचाने की कोशिश की। पायलट सफलतापूर्वक इजेक्ट हो गया और उसे एक चिकित्सा केंद्र में ले जाया गया। घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है।” ‘टास’ के अनुसार, वायु सेना ने बताया कि 10 अगस्त की शाम वायु सेना का एक मिग-29 लड़ाकू विमान लड़ाकू मिशन के दौरान खो गया। पायलट ओडेसा क्षेत्र में हवाई लक्ष्यों को नष्ट करने के मिशन पर था। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, मिसाइल दागने के दौरान किसी अज्ञात आपात स्थिति के कारण विमान में आग लग गई और वह नियंत्रण से बाहर हो गया। पायलट विमान को बचाने में सफल नहीं हो सका। ‘टास’ समाचार एजेंसी के अनुसार, यूक्रेनी सेना ने कहा कि पायलट ने समय रहते सुरक्षित रूप से इजेक्ट कर लिया और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हादसे के कारणों की जांच की जा रही है।” पिछले दो सप्ताह से भी कम समय में यूक्रेन में इस तरह की यह दूसरी घटना है। यूक्रेनी वायु सेना ने 29 जुलाई को टेलीग्राम पर बताया था कि एक एफ-16 लड़ाकू विमान भी खो गया था, जब विमान में आई एक अज्ञात आपात स्थिति के कारण पायलट को इजेक्ट करना पड़ा था।
बराक ओबामा लेकर आ रहे हैं नया पॉडकास्ट, बताएंगे किन छह किताबों ने बदल डाली उनकी सोच

वॉशिंगटन। किताबों को यूं ही इंसानों का सच्चा दोस्त नहीं कहा जाता। जिंदगी जहां अटकती है, भटकाव आता है वहां ये संभालने का पूरा प्रयास करती हैं। ऐसा शायद अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा भी सोचते हैं। तभी तो अब राजनीति से इतर अपने एक और पसंदीदा शगल के जरिए लोगों से जुड़ने का मन बना चुके हैं। ओबामा एक नया पॉडकास्ट शुरू करने वाले हैं, जिसमें वे उन किताबों पर चर्चा करेंगे जिन्होंने उनके सोचने के तरीके, उनके विश्वास और दुनिया को देखने के नजरिए को प्रभावित किया। ‘अ ग्रेट बुक विद ओबामा’ नाम का यह छह एपिसोड वाला पॉडकास्ट 24 सितंबर से ऑडिबल पर उपलब्ध होगा। इसे ओबामा और उनकी पत्नी मिशेल ओबामा की प्रोडक्शन कंपनी हायर ग्राउंड और ऑडिबल मिलकर तैयार कर रहे हैं। पूर्व राष्ट्रपति ने एक तस्वीर के साथ ये जानकारी अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए साझा की। इस सीरीज में ओबामा छह ऐसी चर्चित किताबों को चुनकर उनके बारे में विस्तार से बात करेंगे, जो उनके जीवन और विचारों पर गहरा असर डाल चुकी हैं। इनमें टोनी मॉरिसन की ‘सॉन्ग ऑफ सोलोमन’, जेम्स बाल्डविन की ‘द फायर नेक्स्ट टाइम’, जॉन ले कैरे की ‘टिंकर टेलर सोल्जर स्पाई’, कॉर्मैक मैकार्थी की ‘ ऑल द प्रिटी हॉर्सेस’, मर्लिन रॉबिन्सन की ‘गिलियड’ और रॉबर्ट पेन वॉरेन की ‘ऑल द किंग्स मैन’ शामिल हैं। हर एपिसोड में ओबामा एक किताब को केंद्र में रखकर एक अतिथि के साथ बातचीत करेंगे। हालांकि, मेहमानों के नाम अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। ओबामा लंबे समय से किताबों के शौकीन माने जाते हैं। राष्ट्रपति पद पर रहने के दौरान भी उनकी पढ़ने की आदत और किताबों की पसंद अक्सर चर्चा में रही। वह हर साल अपनी पसंदीदा किताबों की सूची भी साझा करते हैं। हाल में जारी उनकी 2026 की समर रीडिंग लिस्ट में भी कई समकालीन लेखकों की किताबें शामिल थीं। इस नए पॉडकास्ट के पीछे ओबामा की सोच सिर्फ किताबों की सिफारिश करने तक सीमित नहीं है। उनका मानना है कि कुछ किताबें केवल कहानियां नहीं सुनातीं, बल्कि इंसान के दुनिया को देखने के नजरिए को बदल देती हैं। यही वजह है कि उन्होंने उन किताबों को चुना है जो परिवार, धर्म, नस्ल, राजनीति और अमेरिका जैसे विषयों पर उनके विचारों को आकार देने में महत्वपूर्ण रही हैं। ओबामा के लिए यह पॉडकास्ट उनकी सार्वजनिक जिंदगी का एक अलग पहलू सामने लाने का मौका भी है। राष्ट्रपति और राजनेता के रूप में उन्हें पूरी दुनिया ने देखा, लेकिन किताबों के जरिए उनकी व्यक्तिगत सोच और उन विचारों की जड़ों को समझने का यह एक अलग अवसर होगा। ऐसे समय में जब लोग तेजी से छोटे वीडियो और सोशल मीडिया कंटेंट की ओर बढ़ रहे हैं, ओबामा का किताबों पर केंद्रित पॉडकास्ट शुरू करना अपने आप में दिलचस्प है। यह इस बात की याद भी दिलाता है कि अच्छी किताब का असर पढ़ना खत्म होने के बाद भी लंबे समय तक बना रह सकता है। 24 सितंबर से श्रोता यह जान सकेंगे कि आखिर वे कौन-सी किताबें थीं जिन्होंने बराक ओबामा को एक लोकप्रिय और विचारशील व्यक्ति बनाया। एक ऐसा व्यक्ति जिसकी सुलझी सोच के कई लोग कायल हैं।
बेटे विहान के बर्थडे पर अभिनेत्री स्नेहा का खास पोस्ट, लिखा-हर कामयाबी, गलती, खुशी के पल में तुम्हारे साथ रहूंगी

मुंबई। साउथ सिनेमा की लोकप्रिय अभिनेत्री स्नेहा ने मंगलवार को अपने बेटे विहान के जन्मदिन पर उसके लिए प्यारा नोट शेयर किया। अभिनेत्री ने इस पोस्ट के जरिए बेटे को भगवान का सबसे बड़ा आशीर्वाद बताया। अभिनेत्री स्नेहा ने इंस्टाग्राम पर बेटे की कुछ तस्वीरें पोस्ट कीं। इसमें अभिनेत्री के बेटे विहान की तस्वीरें हैं, जबकि कुछ में वे अपने दोनों बच्चों के साथ नजर आ रही हैं। अभिनेत्री स्नेहा ने लिखा, “हैप्पी 11 बर्थडे विहान, तुम मेरे दिल और सबसे बड़ी खुशी हो। 11 साल पहले तुम मेरी जिंदगी में आए और मुझे ऐसा प्यार दिया, जिसका अहसास मुझे पहले कभी नहीं हुआ था। तुम्हें बड़ा होते, सीखते, हंसते और इतना अच्छा बच्चा बनते देखना मेरी सबसे बड़ी खुशी और गर्व की बात है।” अभिनेत्री ने लिखा, “मेरी बस यही दुआ है, तुम दयालु बनो, बहादुर बनो, मजबूत बनो, अपने सपने पूरे करो और कभी कोशिश करने से मत डरो। हर कामयाबी, गलती, खुशी के पल में मैं तुम्हारे साथ रहूंगी। मेरे बच्चे, मैं तुमसे इतना प्यार करती हूं, जिसे मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकती हूं। तुम हमेशा मेरे दिल का एक टुकड़ा रहोगे, जो बाहर चलता-फिरता है।” इस साल की शुरुआत में पॉपुलर तमिल एक्ट्रेस स्नेहा ने पति एक्टर प्रसन्ना के लिए शादी की 14वीं सालगिरह पर एक प्यारा सा पोस्ट लिखा था। स्नेहा का असली नाम सुहासिनी राजाराम है। उन्होंने साल 2012 में अभिनेता प्रसन्ना से शादी की। उनके दो बच्चे बेटा विहान और एक बेटी आद्या। वह अपने परिवार के साथ चेन्नई में रहती हैं। अभिनेत्री की बात करें तो उन्होंने तमिल और तेलुगु फिल्मों के साथ-साथ मलयालम और कन्नड़ फिल्मों में भी अपने अभिनय का जलवा बिखेरा है। उन्हें उनकी मनमोहक मुस्कान के कारण ‘पुन्नगई अरसी’ (मुस्कान की रानी) भी कहा जाता है। फिल्मों के अलावा उन्होंने कुछ तमिल डांस और रियलिटी शो में जज की भूमिका भी निभाई है।
ममता बनर्जी पर हमला लोकतंत्र पर सीधा आघात: ‘सामना’ शिवसेना (यूबीटी)

मुंबई। शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे (यूबीटी) ने मंगलवार को दावा किया कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी पर हुआ हमला केवल एक व्यक्तिगत राजनीतिक हस्ती पर हमला नहीं है, यह हमारे गणतंत्र के लोकतांत्रिक ताने-बाने पर सीधा प्रहार है। पार्टी ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में कहा, “पत्थरों, लाठियों और लोहे की छड़ों से लैस एक भीड़ ने उनके वाहन को घेर लिया, जिसका स्पष्ट उद्देश्य एक सशक्त विपक्षी आवाज को खत्म करना प्रतीत होता था। उनका बच जाना महज संयोग की बात है, लेकिन इस घटना से एक भयावह सच्चाई सामने आती है, पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा की स्थिति सभी स्वीकार्य सीमाओं को पार कर चुकी है।” ‘सामना’ के संपादकीय में कहा गया है कि राज्य में हाल ही में हुए राजनीतिक समीकरणों में बदलाव के बाद से तृणमूल कांग्रेस के नेताओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। जिनमें अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी जैसे सांसद और विधायक शामिल हैं, सत्ताधारी दल के रवैये में यह विरोधाभास साफ तौर पर दिखाई देता है। उन्होंने आगे लिखा कि जहां केंद्रीय नेतृत्व दलबदलुओं का गर्मजोशी से स्वागत करता है, वहीं राज्य में राजनीतिक आधार तैयार करने वाले नेता जानलेवा हमलों के शिकार हो रहे हैं। जब केंद्र सरकार ने पहले पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था के पतन का हवाला देकर अपने हस्तक्षेपों को उचित ठहराया था, तो यह सवाल उठता है, क्या अनियंत्रित शत्रुता और राज्य द्वारा स्वीकृत मनमानी का यह मौजूदा माहौल ही उनके लिए कानून व्यवस्था की परिभाषा है? संपादकीय में आगे कहा गया कि विधानसभा चुनावों के दौरान, केंद्र प्रशासन ने निष्पक्ष प्रक्रिया सुनिश्चित करने और व्यवस्था बनाए रखने के बहाने लाखों केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को तैनात किया था। आज, जब लक्षित राजनीतिक हिंसा बढ़ रही है, तो वह तत्परता स्पष्ट रूप से गायब हो गई है। शांति बहाल करने के लिए आवश्यक केंद्रीय बलों को तैनात करने में अनिच्छा एक चिंताजनक दोहरे मापदंड को उजागर करती है। जब पूर्व मुख्यमंत्री, मौजूदा सांसद और निर्वाचित प्रतिनिधि बार-बार सड़क हिंसा का शिकार होते हैं, तो यह संस्थागत शासन के पूर्ण पतन को दर्शाता है।” संपादकीय में आगे कहा कि राज्य में विपक्षी नेतृत्व की आधिकारिक प्रतिक्रिया भी उतनी ही चिंताजनक है। एक वरिष्ठ राजनीतिक हस्ती पर हुए हिंसक हमले को महज ‘जनता और एक राजनीतिक दल के बीच की लड़ाई’ बताकर पेश करना गैर-जिम्मेदाराना और खतरनाक दोनों है। इस तरह की बयानबाजी भीड़ हिंसा को तर्कसंगत ठहराती है और राज्य की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने का संकेत देती है। इस गलत तर्क के आधार पर, जंतर-मंतर पर युवाओं के विरोध प्रदर्शन सहित किसी भी सार्वजनिक प्रदर्शन या शिकायत को नागरिकों और प्रधानमंत्री के बीच व्यक्तिगत संघर्ष के रूप में गलत तरीके से पेश किया जा सकता है, जिससे राज्य अपने व्यवस्था बनाए रखने के मूलभूत कर्तव्य से विमुख हो जाता है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने तर्क दिया कि एक कार्यशील लोकतंत्र में चुनावी जीत-हार मतपेटी में तय होती है। राजनीतिक सत्ता के लिए संयम, जवाबदेही और संवैधानिक मानदंडों की रक्षा के प्रति प्रतिबद्धता आवश्यक है। शिवसेना ने कहा कि वर्तमान स्थिति जहां असहमति को अत्यधिक बल प्रयोग से दबाया जाता है, छात्र आंदोलनों को कुचला जाता है और विपक्षी नेताओं को लगातार शारीरिक धमकियों का सामना करना पड़ता है। एक ऐसे वातावरण की ओर इशारा करती है जहां गैर-सरकारी संगठन राजनीतिक इच्छाशक्ति को लागू करने के लिए बेखौफ महसूस करते हैं। ठाकरे खेमे का दावा था कि यदि विपक्ष को शासन का एक अनिवार्य स्तंभ मानने के बजाय शारीरिक रूप से समाप्त किए जाने वाले शत्रु के रूप में देखा जाए तो लोकतंत्र जीवित नहीं रह सकता। हिंसक तत्वों को बिना किसी दंड के सक्रिय रहने देना शक्ति का प्रदर्शन नहीं है; यह अराजकता की ओर ले जाने वाला संकेत है जो अंततः राष्ट्र को बनाए रखने के लिए गठित संस्थाओं को ही कमजोर कर देगा।
पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से कीमती धातुओं ने पकड़ी रफ्तार, सोने-चांदी में 2 प्रतिशत से ज्यादा तक की बढ़ोतरी

नई दिल्ली, 11 अगस्त (आईएएनएस)। अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ते तनाव के बीच हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को घरेलू कमोडिटी मार्केट में कीमती धातुओं की कीमतों (सोने-चांदी) में तेजी देखने को मिली। शुरुआती कारोबारी में पीले धातु (सोने) की कीमतों में 1.5 प्रतिशत यानी 2,000 रुपए से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि चांदी की कीमतों में 2 प्रतिशत से ज्यादा यानी 5,000 रुपए से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई। मंगलवार को अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना अपने पिछले बंद 1,53,099 रुपए से 1.04 प्रतिशत यानी 1,600 रुपए की बढ़त के साथ 1,54,699 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला। वहीं सत्र के दौरान इसने 2,338 रुपए यानी 1.52 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,55,437 रुपए का इंट्रा-डे हाई टच किया। हालांकि खबर लिखे जाने तक पीली धातु 895 रुपए यानी 0.58 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,53,994 रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करते हुए नजर आई। वहीं, सितंबर डिलीवरी वाली चांदी अपने पिछले बंद 2,36,867 रुपए से 3,132 रुपए यानी 1.32 प्रतिशत की उछाल के साथ 2,39,999 रुपए प्रति किलोग्राम पर खुली और दिन के दौरान इसने 5,132 रुपए यानी 2.16 प्रतिशत का उच्चतम स्तर छुआ। हालांकि खबर लिखे जाने तक यह सफेद धातु 371 रुपए यानी 0.16 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,36,496 रुपए प्रति किलोग्राम पर ट्रेड करती नजर आई। दरअसल, सोने और चांदी की कीमतों पर वैश्विक व्यापक आर्थिक बदलावों, भू-राजनीतिक जोखिमों और घरेलू मांग में परिवर्तन का गहरा प्रभाव पड़ रहा है। अमेरिका की उदार मौद्रिक नीति की उम्मीदें बढ़ने से सोने की कीमतों में नई मजबूती आई है, वहीं डॉलर के कमजोर होने से इसकी मांग और भी बढ़ गई है। वहीं, सिल्वर में निवेश में रुचि और उपभोक्ताओं की बदलती प्राथमिकताओं के समर्थन से इसकी कीमतों को सपोर्ट मिला। हालांकि, मुद्रास्फीति के आंकड़ों और केंद्रीय बैंक के संकेतों के प्रति दृष्टिकोण संवेदनशील बना हुआ है, जिससे कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव की संभावना है। साथ ही, सोने की ऊंची कीमतों का असर व्यापक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। इन सभी कारकों के संयोजन से आने वाले दिनों में कीमती धातुओं के बाजार की दिशा तय होने की उम्मीद है।