ऑस्ट्रेलिया: साउथ-वेस्ट सिडनी में फायरिंग, दो किशोर गिरफ्तार

सिडनी। साउथ वेस्ट सिडनी में मंगलवार तड़के गोलीबारी के आरोप में दो किशोरों को गिरफ्तार किया गया है। न्यू साउथ वेल्स (एनएसडब्ल्यू) पुलिस ने एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी। सिंहुआ न्यूज एजेंसी के अनुसार, बयान में कहा गया कि मंगलवार सुबह करीब 2 बजे सिडनी के बाहरी साउथ-वेस्ट इलाके ईगल वेल में एक घर पर गोलियां चलाने की सूचना मिली। इस गोलीबारी में कोई घायल नहीं हुआ। सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने शक के आधार पर वहां से तेजी से जाती सफेद हैचबैक कार को रोकने की कोशिश की। गाड़ी नहीं रुकी तो पुलिस ने पीछा शुरू किया। पुलिस से बचने की कोशिश में गाड़ी थंडरबोल्ट ड्राइव पर पेड़ से टकरा गई। इसके बाद गाड़ी में सवार तीन लोग मौके से भाग गए। पुलिस ने इलाके की तलाशी शुरू की। कुछ देर बाद, 15 और 17 साल के दो किशोरों को डकोटा प्लेस और थंडरबोल्ट ड्राइव से गिरफ्तार किया गया और कैंपबेलटाउन पुलिस स्टेशन ले जाया गया, जहां पूछताछ जारी है। तीसरे आरोपी की तलाश की जा रही है। गाड़ी भी चोरी की थी। चोरी की गाड़ी की तलाशी के दौरान, अधिकारियों ने कथित तौर पर एक बंदूक बरामद की, जिसे फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। क्राइम सीन से पुलिस जरूरी सबूत इकट्ठा कर रही है। वहीं पुलिस ने आम लोगों से इस शूटिंग से जुड़ी किसी भी तरह की जानकारी साझा करने की अपील की है। एनएसडब्ल्यू पुलिस ने कहा है कि अगर किसी के पास इन घटनाओं से जुड़ी कोई जानकारी, सीसीटीवी, डैशकैम और/या मोबाइल फोन फुटेज है तो उसे उपलब्ध कराने का कष्ट करें। हाल के दिनों में ये ऐसी दूसरी वारदात है जो इस इलाके में हुई है। गुरुवार (6 अगस्त) को साउथ वेस्ट सिडनी में ही 18 साल के एक युवक के सीने में गोली मारी गई थी। सूचना पर पहुंची पेरामेडिक्स टीम ने उसे अस्पताल पहुंचाया था।
जेपीएससी-जेएसएससी मुद्दे पर झारखंड विधानसभा में हंगामा, एनडीए ने सीबीआई जांच की मांग की

रांची। झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के चौथे दिन मंगलवार को जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं का मुद्दा सदन के भीतर और बाहर छाया रहा। विपक्षी एनडीए विधायकों ने परीक्षाओं में कथित धांधली की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग को लेकर जमकर नारेबाजी की और सदन के वेल में पहुंच गए। सदन की कार्यवाही सुबह 11 बजकर सात मिनट पर शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में भाजपा विधायक अपनी सीटों से उठ गए। उन्होंने जेपीएससी-जेएसएससी मामले में सरकार से जवाब मांगते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। देखते ही देखते कई विपक्षी विधायक वेल में पहुंच गए। विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने विपक्षी विधायकों से अपनी सीटों पर लौटने और प्रश्नकाल चलने देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सभी सदस्य छात्रों के हित की बात कर रहे हैं और सदन की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलने देना चाहिए। अध्यक्ष के बार-बार आग्रह के बावजूद हंगामा जारी रहा। स्थिति को देखते हुए अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने विपक्ष पर सदन का समय बर्बाद करने और राज्य में अराजकता का माहौल बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों के भविष्य को लेकर गंभीर है। जेपीएससी-जेएसएससी से जुड़े मामलों की जांच राज्य अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) कर रहा है। प्रदीप यादव ने कहा कि सोमवार को छात्रों ने विधानसभा का घेराव किया था और सरकार पूरे घटनाक्रम को सदन के सामने रखेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों का प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन भाजपा की ओर से भेजे गए कुछ लोगों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। प्रशासन ने प्रदर्शन समाप्त होने के बाद छात्रों को वापस भेजने के लिए वाहनों की व्यवस्था भी की थी। विपक्षी सदस्यों का कहना था कि भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई को जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। उन्होंने सोमवार को विधानसभा घेराव के दौरान छात्रों पर हुए पुलिस बल प्रयोग का मुद्दा भी उठाया।
मुंबई में ब्रिक्स फ्रेंडशिप सिटीज कॉन्क्लेव शुरू, राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा और डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे हुए शामिल

मुंबई। ब्रिक्स फ्रेंडशिप सिटीज कॉन्क्लेव 2026 का आयोजन 11 और 12 अगस्त को मुंबई के फोर सीजन्स होटल में हो रहा है। इसका आयोजन ‘मुंबई फर्स्ट’ द्वारा केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से किया जा रहा है। इस सम्मेलन में ब्रिक्स और साझेदार देशों के 15 शहरों के प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। इसका मुख्य फोकस सतत शहरी विकास पर है। कार्यक्रम में महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा और महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी शामिल हुए। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि यह गर्व की बात है कि मुंबई में ब्रिक्स फ्रेंडशिप सिटीज कॉन्क्लेव 2026 शुरू हो गया है। हम ‘मुंबई फर्स्ट’ का धन्यवाद करते हैं। शहर सिर्फ ईंट और कंक्रीट की इमारतें नहीं होते। वे देश की आर्थिक प्रगति के ‘विकास इंजन’ (ग्रोथ इंजन) होते हैं। इसलिए, शहरीकरण को समस्या के तौर पर नहीं, बल्कि एक बड़े अवसर के तौर पर देखा जाना चाहिए। आज शहरों के सामने आने वाली चुनौतियां एक जैसी हैं, इसलिए उनके समाधान भी सीमाओं से परे जाकर खोजने होंगे। लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के जरिए 21वीं सदी के नागरिक-केंद्रित शहर बनाने के लिए, ब्रिक्स देशों के शहरों को अपने अनुभव, तकनीक और नवाचार एक-दूसरे के साथ साझा करने चाहिए। सम्मेलन में शहरी विकास से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हो रही है। जिसमें, जलवायु के प्रति लचीलापन और तटीय इलाकों में अनुकूलन, शहरी आवागमन और सार्वजनिक परिवहन, गवर्नेंस में डिजिटल बदलाव और एआई, ब्रिक्स और सहयोगी देशों के बीच शहरों का आपसी सहयोग मुख्य रूप से शामिल हैं। ब्रिक्स देशों में शहरीकरण तेजी से बढ़ा है, जिसमें शहर आर्थिक विकास के प्रमुख चालक बने हैं। साथ ही जलवायु जोखिम, बुनियादी ढांचे पर दबाव, असमानता और शासन से जुड़ी चुनौतियां भी बढ़ी हैं। इन्हीं सब साझा चुनौतियों को देखते हुए संवाद, ज्ञान साझा करने और साझेदारी बनाने के लिए एक सहयोगी मंच की जरूरत है। इसी संदर्भ में ब्रिक्स फ्रेंडशिप सिटीज कॉन्क्लेव 2026, ‘मुंबई फर्स्ट’ द्वारा महाराष्ट्र सरकार और भारत सरकार के सहयोग से आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन है। 11 से 12 अगस्त तक मुंबई में चल रहा यह सम्मेलन सतत, लचीले और समावेशी शहरी विकास के लिए समन्वित, समाधान-उन्मुख दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने का प्रयास करेगा।
लंबे समय तक बैठने से होने वाली समस्याओं में कारगर है ऊर्ध्वमुख पश्चिमोत्तानासन, जानिए इसके फायदे

नई दिल्ली। लंबे समय तक बैठे रहने, कंधा जकड़े रहने और पैरों में खिंचाव आम हो गया है। ऐसे में योग सिर्फ शरीर को मोड़ने का नाम नहीं है, बल्कि खुद से जुड़ने का एक जरिया है। ऐसे ही योग पद्धति में ऊर्ध्वमुख पश्चिमोत्तानासन सबसे शरीर की जकड़न खोलने, पाचन तंत्र को बेहतर बनाने समेत कई शारीरिक स्वास्थ संबंधित समस्याओं का समाधान है। ऊर्ध्वमुख पश्चिमोत्तानासन तीन शब्दों से मिलकर बना है, ऊर्ध्व मुख का अर्थ है ऊपर की तरफ चेहरा, पश्चिम का अर्थ होता है शरीर का पिछला हिस्सा, उत्तान का अर्थ होता है, गहरा खिंचाव और आसन की अर्थ मुद्रा। इस आसन को अंग्रेजी में अपवर्ड फेसिंग इंटेंस वेस्ट स्ट्रेच कहते हैं। इस आसन में आप उभय पादांगुष्ठासन की तरह पैर के अंगूठों को पकड़कर बैलेंस बनाते हैं और साथ ही धड़ को आगे की तरफ पैरों की ओर झुकाते हैं। यह आसन अष्टांग योग की प्राथमिक शृंखला में आता है और उभय पादांगुष्ठासन के बाद का अगला लेवल माना जाता है। योग परंपरा में ऊर्ध्वमुख पश्चिमोत्तानासन एक उन्नत आसन है, जो पश्चिमोत्तानासन और संतुलन का मिला-जुला रूप है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने भी इस आसन को लेकर प्रतिक्रिया दी। उनके अनुसार, ऊर्ध्व मुख पश्चिमोत्तानासन एक उन्नत योगासन है, जिसमें शरीर का संतुलन कूल्हों (सिट बोन्स) पर रखा जाता है और दोनों पैरों को ऊपर आकाश की ओर सीधा खींचकर हाथों से पंजों को पकड़ा जाता है। यह अभ्यास कोर शक्ति, रीढ़ के लचीलेपन और संतुलन को सुधारता है। यह एक ऐसा योग आसन है जिसमें बैठकर पैर सीधे रखते हुए आगे झुकते हैं और अंगूठे पकड़कर रीढ़ और पैरों के पिछले हिस्से को गहराई से स्ट्रेच करते हैं। इस आसन के नियमित अभ्यास करने से हैमस्ट्रिंग यानी जांघ के पीछे की मांसपेशियां, पैसिव तरीके से लंबी और लचीली होती हैं। यह एकमात्र ऐसा योग आसन है जो शरीर के पीछे वाले हिस्से का लचीलापन और आगे वाले हिस्से की ताकत दोनों को एक साथ बढ़ाता है, ताकि वह लचीलापन सिर्फ बैठे-बैठे न रहे, बल्कि काम करते समय भी टिके रहे।
बिहार: खगड़िया में ‘प्रसाद’ खाने से 165 से ज्यादा लोग बीमार, गांव में मचा हड़कंप

पटना। बिहार के खगड़िया से हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। जिले के अमनी पंचायत के हियादतपुर गांव में सत्यनारायण की पूजा के बाद प्रसाद खाने से 165 से ज्यादा लोग बीमार हो गए हैं। गांव में लगभग एक ही समय पर बड़ी संख्या में लोगों के बीमार पड़ने से हड़कंप मच गया, जिसके बाद परिवार के सदस्यों और ग्रामीणों ने प्रभावित लोगों को खगड़िया सदर अस्पताल पहुंचाया। देर रात तक अस्पताल में मरीजों के आने का सिलसिला जारी रहा। शुरुआती जानकारी के अनुसार, सोमवार शाम करीब 7 बजे मायाराम चौधरी के बेटे सुबोध चौधरी के घर पर सत्यनारायण पूजा का आयोजन किया गया था। धार्मिक अनुष्ठान के बाद भक्तों को प्रसाद बांटा गया। अनुमान है कि 250 से ज्यादा लोगों ने प्रसाद खाया। प्रसाद खाने के कुछ ही देर बाद, कई लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होने लगीं। बच्चों ने उल्टी और दस्त की शिकायत की, जबकि बड़ों में चक्कर आना, कमजोरी और बेचैनी जैसे लक्षण दिखे। जैसे-जैसे प्रभावित लोगों की संख्या बढ़ी, पूरे गांव में चिंता फैल गई। गांव वालों ने मानसी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सूचना दी। जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई की और प्रभावित लोगों को इलाज के लिए ले जाने की व्यवस्था की गई। इसके बाद बड़ी संख्या में मरीजों को खगड़िया सदर अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया। बड़ी संख्या में मरीजों के आने के कारण अस्पताल में देर रात तक गहमागहमी बनी रही। सदर अस्पताल के मैनेजर प्रणव कुमार ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही एम्बुलेंस भेज दी गई थीं। उन्होंने कहा कि अस्पताल पहुंचते ही मरीजों के इलाज की व्यवस्था की गई। स्वास्थ्य विभाग की एक टीम ने भी घटना के बारे में जानकारी जुटाना शुरू कर दिया है और प्रभावित लोगों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। प्रसाद की गुणवत्ता और इसमें किसी तरह की मिलावट की संभावना को लेकर चिंता बढ़ गई है। हालांकि, अधिकारियों ने अभी तक यह पुष्टि नहीं की है कि बीमारी की वजह प्रसाद ही था। इस घटना के बाद हियादतपुर गांव में चिंता का माहौल बना हुआ है।
मां के साथ जिम पहुंचीं अक्षरा सिंह, बोलीं-अब तक का सबसे अच्छा वर्कआउट पार्टनर

मुंबई। भोजपुरी सिनेमा की लोकप्रिय अभिनेत्री अक्षरा सिंह अपनी फिल्मों और गानों के साथ-साथ अपनी निजी जिंदगी के खास पल भी फैंस के साथ साझा करती रहती हैं। उनका अपनी मां नीलिमा सिंह के साथ एक मजबूत रिश्ता भी अक्सर सोशल मीडिया पर देखने को मिलता है। इस कड़ी में एक बार भी अक्षरा ने अपनी मां के साथ मजेदार वीडियो शेयर किया है, जिसमें वह एक्सरसाइज करती नजर आ रही हैं। अक्षरा सिंह ने यह वीडियो अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट किया। इसमें वह अपनी मां के साथ जिम में नजर आ रही हैं। वीडियो में मां-बेटी दोनों हाथों में डंबल उठाकर कसरत करती दिखाई देती हैं। दोनों पूरी ताकत के साथ एक्सरसाइज करती दिख रही। इस दौरान दोनों एक-दूसरे का लगातार हौसला बढ़ा रही हैं। इस वीडियो के साथ अक्षरा ने कैप्शन में लिखा, ”मम्मा और मैं, एक-दूसरे को मोटिवेट कर रहे हैं। इसमें भरपूर मजा और हंसी है। अब तक का सबसे अच्छा वर्कआउट पार्टनर।” अक्षरा के इस वीडियो को लोग काफी पसंद कर रहे हैं। अक्षरा सिंह के काम की बात करें तो उन्होंने भोजपुरी सिनेमा में अपने अभिनय करियर की शुरुआत साल 2010 में रवि किशन के साथ फिल्म ‘सत्यमेव जयते’ से की थी। इसके बाद उन्होंने ‘सौगंध गंगा मैया के’, ‘दिलेर’ और ‘साथिया’ जैसी फिल्मों में काम किया और धीरे-धीरे भोजपुरी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बना ली। ‘सौगंध गंगा मैया के’ में उनके अभिनय को दर्शकों ने पसंद किया, वहीं ‘दिलेर’ में वह दिनेश लाल यादव निरहुआ के साथ नजर आईं। इसके बाद अक्षरा ने ‘सत्या’, ‘तबादला’, ‘धड़कन’ और ‘सरकार राज’ जैसी फिल्मों में काम किया। इनमें से कुछ में उनकी जोड़ी पवन सिंह के साथ दिखाई दी। ‘मां तुझे सलाम’ में अक्षरा ने देशभक्ति से जुड़ी कहानी का हिस्सा बनकर दर्शकों का मनोरंजन किया। इसके अलावा वह ‘लव मैरिज’ जैसी फिल्म में भी नजर आईं। अभिनय के साथ उन्होंने म्यूजिक इंडस्ट्री में भी अपनी पहचान बनाई है। उनके कई भोजपुरी गाने लोकप्रिय हुए हैं।
पीएम ई-ड्राइव योजना मार्च 2028 तक बढ़ी, इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर मिलेगी 5,000 रुपए तक की सब्सिडी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री ई-ड्राइव (पीएम ई-ड्राइव) योजना की अवधि दो वर्ष बढ़ाकर 31 मार्च 2028 तक कर दी है। इस योजना के तहत इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों (ईवी-2डब्ल्यू) की खरीद पर प्रोत्साहन राशि जारी रहेगी। सरकार का लक्ष्य देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को गति देना, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करना और घरेलू ईवी विनिर्माण को मजबूत बनाना है। भारी उद्योग मंत्रालय के अनुसार, विस्तारित पीएम ई-ड्राइव योजना के लिए 11,900 करोड़ रुपए का कुल प्रावधान किया गया है। योजना का फोकस इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने, चार्जिंग नेटवर्क विकसित करने और भारत को ईवी निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने पर रहेगा। नई व्यवस्था के तहत 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2028 के बीच खरीदे गए पंजीकृत इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर खरीद प्रोत्साहन (इंसेंटिव) दिया जाएगा। सरकार ने यह प्रोत्साहन 2,500 रुपए प्रति किलोवाट-घंटा (केडब्ल्यूएच) निर्धारित किया है, जिसकी अधिकतम सीमा 5,000 रुपए प्रति वाहन होगी। हालांकि, इस लाभ के लिए पात्र इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन की अधिकतम एक्स-फैक्ट्री कीमत 1.5 लाख रुपए से अधिक नहीं होनी चाहिए। सरकार ने योजना के तहत अधिकतम 45.79 लाख इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों को सहायता देने का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए मंत्रालय द्वारा 2,767 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। हालांकि नई योजना में मिलने वाली सब्सिडी पहले की तुलना में कम है। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर 5,000 रुपए प्रति केडब्ल्यूएच की दर से प्रोत्साहन दिया जाता था, जिसकी अधिकतम सीमा 10,000 रुपए प्रति वाहन थी। मंत्रालय ने कहा है कि भविष्य में ईवी की लागत में कमी को देखते हुए प्रति केडब्ल्यूएच प्रोत्साहन राशि की समय-समय पर समीक्षा की जा सकती है। इसके अलावा, सब्सिडी की राशि वाहन की एक्स-फैक्ट्री कीमत के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी। यानी अधिकतम निर्धारित प्रोत्साहन या वाहन की कीमत का 15 प्रतिशत, दोनों में जो कम होगा, वही लाभ दिया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पीएम ई-ड्राइव एक फंड-सीमित योजना के रूप में संचालित होगी। इसका मतलब है कि कुल भुगतान 11,900 करोड़ रुपए के निर्धारित बजट तक ही सीमित रहेगा। यदि योजना के लिए निर्धारित राशि या किसी विशेष घटक के लिए आवंटित फंड पहले ही समाप्त हो जाते हैं, तो उस घटक को बंद किया जा सकता है और उसके बाद नए दावों पर विचार नहीं किया जाएगा। योजना के तहत सभी श्रेणियों के लिए 31 मार्च 2028 अंतिम तारीख होगी, जबकि सब्सिडी दावों को जमा करने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2027 निर्धारित की गई है।
इतिहास मनमोहन सिंह को सबसे अहम प्रधानमंत्री के तौर पर याद रखेगा: सोनिया गांधी

नई दिल्ली। कांग्रेस संसदीय दल (सीपीपी) की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मंगलवार को कहा कि इतिहास निश्चित रूप से पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को एक शांत, सौम्य और एक बेहद अहम प्रधानमंत्री के तौर पर अच्छे शब्दों में याद रखेगा। इंडियन एक्सप्रेस में लिखे एक कॉलम में सोनिया गांधी ने कहा, “इतिहास निश्चित रूप से डॉ. मनमोहन सिंह को अच्छे नजरिए से याद रखेगा। 29 जुलाई, 2026 की तारीख हमारे हालिया राजनीतिक इतिहास में एक अहम लेकिन नजरअंदाज किया गया दिन था। एक फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने कथित ‘कोल ब्लॉक आवंटन घोटाले’ में डॉ. मनमोहन सिंह को सीबीआई से मिली क्लीन चिट को सही ठहराया। इससे भी अहम बात यह है कि कोर्ट ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करने और बिना किसी ‘ठोस वजह’ के पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ नकारात्मक टिप्पणी करने के लिए ट्रायल कोर्ट को फटकार लगाई।” सोनिया गांधी ने आगे लिखा कि उनके खिलाफ लॉबी सुनियोजित और संगठित थी। उन्होंने लिखा, “इस फैसले से हमारे सार्वजनिक विमर्श के सबसे दुखद अध्यायों में से एक (डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ चलाए गए अभियान) का अंत हो गया है। डॉ. मनमोहन सिंह असाधारण ईमानदारी और सत्यनिष्ठा वाले व्यक्ति थे। उनके खिलाफ लॉबी सुनियोजित और संगठित थी, जिसमें नौकरशाही से लेकर मीडिया, न्यायपालिका, नागरिक समाज और निश्चित रूप से आरएसएस और भाजपा तक के लोग शामिल थे।” सोनिया गांधी ने आगे लिखा, “आज, उनकी झूठी मुहिम का अंत कुछ न हासिल होने के साथ हुआ है। डॉ. मनमोहन सिंह हर मामले में सही साबित हुए। ईमानदारी और जवाबदेही का उनका रिकॉर्ड नरेंद्र मोदी सरकार के काम करने के तरीके के बिल्कुल उलट था, जो अपराध और भ्रष्टाचार की जांच करने वाली एजेंसियों जैसे ईडी और सीबीआई का साफ तौर पर और बुरी तरह से दुरुपयोग करती रही हैं।” सोनिया गांधी ने आगे लिखा, “इसका मकसद राजनेताओं पर दबाव बनाना रहा है। नेताओं को या तो जबरदस्ती चुप करा दिया जाता है या चालाकी से भाजपा में शामिल कर लिया जाता है या, कुछ खास मामलों में, मंत्री पद का इनाम भी दिया जाता है। जब भ्रष्टाचार के विश्वसनीय आरोप सामने आते हैं, तो वर्तमान केंद्र सरकार उन्हें बस नजरअंदाज कर देती है। विपक्ष में रहने पर भ्रष्ट, लेकिन पाला बदलते ही अचानक पाक-साफ।” उन्होंने आगे लिखा कि यह कोई इत्तेफाक नहीं है कि प्रधानमंत्री भी डॉ. मनमोहन सिंह पर हमला करने वालों में सबसे आगे थे। उन्होंने लिखा, “राज्यसभा में 8 फरवरी 2017 को डॉ. मनमोहन सिंह पर की गई अमर्यादित और कटाक्षपूर्ण टिप्पणी कि “रेनकोट पहनकर नहाना प्रधानमंत्री को ही आता है”, हमारी संसदीय परंपरा का एक निम्नतम बिंदु थी। यदि नरेंद्र मोदी आज छात्रों को क्षमा कर रहे हैं, तो उन्हें डॉ. मनमोहन सिंह पर की गई अपनी इस अशोभनीय टिप्पणी के लिए स्वयं को भी क्षमा करना चाहिए।” सोनिया गांधी ने लिखा, “आत्म-मंथन, दान की तरह, घर से ही शुरू होना चाहिए। असल में, डॉ. मनमोहन सिंह पर हमला इसलिए किया गया था क्योंकि वे लोगों का ध्यान उनके शानदार गवर्नेंस रिकॉर्ड से हटाना चाहते थे। मनमोहन सिंह की सरकार ने जबरदस्त आर्थिक बदलाव की शुरुआत की, जिसमें विकास की अभूतपूर्व दरें और खपत व प्राइवेट इन्वेस्टमेंट में तेजी आई, जिससे हम मध्यम-आय वाले देशों की श्रेणी में शामिल हो गए।” सोनिया गांधी ने आगे लिखा कि 2008 में, जब ग्लोबल इकॉनमी उथल-पुथल और पतन का सामना कर रही थी, तब भारत ने अपनी मजबूती दिखाई। सोनिया गांधी ने लिखा, “उनके कार्यकाल के दौरान, रोजगार के पैटर्न में साफ बदलाव दिखा, जिसमें लाखों लोग ज्यादा प्रोडक्टिविटी वाले कामों की ओर बढ़े। हालांकि, पिछले दशक में यह बदलाव उलटा हो गया है। पिछली सरकार की ओर से शुरू किए गए प्रोग्राम और विकास दर में तेजी के कारण, भारत ने गरीबी और अभाव के खिलाफ लड़ाई में निर्णायक रूप से जीतना शुरू कर दिया था। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि भारत की जीडीपी की ग्रोथ की गणना के तरीके में बदलाव के बावजूद, यूपीए सरकार के 10 सालों में पिछले 12 सालों की तुलना में ज्यादा आर्थिक विकास हुआ, जिसके परिणामस्वरूप लाखों लोग गरीबी से बाहर निकले।” कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने आगे लिखा कि मनमोहन सिंह सरकार ने एक क्रांति को मुमकिन बनाया। उन्होंने लिखा, “सामाजिक रूप से, मनमोहन सिंह सरकार ने एक ऐसी क्रांति को मुमकिन बनाया जिसने सभी भारतीयों, खासकर हमारे समाज के सबसे वंचित वर्गों को अधिकार दिलाए। इसने ‘शिक्षा के अधिकार’ के संवैधानिक वादे को पूरा किया और आईआईटीज और आईआईएम जैसे केंद्र से फंड पाने वाले उच्च शिक्षा संस्थानों में ओबीसी रिजर्वेशन लागू करके सामाजिक न्याय का दायरा बढ़ाया। ‘वन अधिकार अधिनियम’ ने दशकों के संघर्ष के बाद हमारे आदिवासी और जंगल में रहने वाले समुदायों के पुश्तैनी अधिकारों को मान्यता दी।” सोनिया गांधी ने आगे लिखा कि वर्तमान सरकार ने हाल ही में ‘मनरेगा’ को खत्म कर दिया है, जबकि यह दुनिया भर में शुरू की गई सबसे असरदार सामाजिक सुरक्षा योजना थी। उन्होंने लिखा, “कोविड महामारी के दौरान, जब पूरी अर्थव्यवस्था बुरी तरह लड़खड़ा गई थी, तो ‘मनरेगा’ उन दो तरीकों में से एक था जिनसे सरकार समाज के गरीब और सबसे कमजोर वर्गों तक पहुंच पाई। दूसरा तरीका मनमोहन सिंह की सरकार की एक और बड़ी उपलब्धि (नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट, 2013) थी, जिसने करोड़ों परिवारों की पहचान की और उन्हें बुनियादी राशन मिलने की गारंटी दी। अब इसमें बदलाव करने की कोशिश की जा रही है। पद छोड़ने के तुरंत बाद ही उन्होंने चेतावनी दी थी कि अधिकारों पर आधारित इस कानून पर हमले होंगे, और दुख की बात है कि उनकी यह आशंका सच साबित हुई है।” कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री के तौर पर मनमोहन सिंह का दशक राज्य और नागरिक समाज के लोकतांत्रिक संस्थानों के विकास और मजबूती के लिए जाना जाता है। सोनिया गांधी ने लिखा, “डॉ. मनमोहन सिंह ने ऐतिहासिक ‘सूचना का अधिकार कानून’ (आरटीआई) के जरिए सरकार में पारदर्शिता का एक नया दौर शुरू किया, जिससे नागरिकों को सरकार के कामकाज को जानने का मौका मिला। आज आरटीआई पूरी तरह से कमजोर हो चुका है। उस समय स्वतंत्र मीडिया का तेजी से विस्तार हुआ और उसमें एक ऐसी निडरता थी जो आज की कमजोर
ओबेरॉय होटल्स की मालिक कंपनी ईआईएच का पहली तिमाही में मुनाफा 52 प्रतिशत घटा, राजस्व में भी आई 26 प्रतिशत की गिरावट

नई दिल्ली। ओबेरॉय ग्रुप की प्रमुख हॉस्पिटैलिटी कंपनी ईआईएच लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की 30 जून, 2026 को समाप्त पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के नतीजे जारी कर दिए हैं। इस दौरान, कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ (नेट प्रॉफिट) तिमाही आधार पर करीब 52 प्रतिशत घटकर 120.31 करोड़ रुपए रह गया, जो पिछले वित्त वर्ष की मार्च तिमाही में 249.10 करोड़ रुपए था। हालांकि सालाना आधार पर कंपनी के प्रदर्शन में सुधार देखने को मिला है। स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, जून 2026 तिमाही में कंपनी का परिचालन राजस्व (रेवेन्यू) 656.96 करोड़ रुपए रहा, जो मार्च 2026 तिमाही के 895.22 करोड़ रुपए की तुलना में 26.61 प्रतिशत कम है। हालांकि पिछले वर्ष की समान तिमाही में कंपनी का राजस्व 573.58 करोड़ रुपए था, जिसके मुकाबले इस बार अच्छी वृद्धि दर्ज की गई है। कंपनी का शुद्ध लाभ (पीएटी) भी सालाना आधार पर मजबूत रहा। जून 2025 तिमाही में ईआईएच का मुनाफा 36.88 करोड़ रुपए था, जो बढ़कर इस वर्ष 120.31 करोड़ रुपए हो गया। तिमाही के दौरान कंपनी की कुल आय घटकर 697.94 करोड़ रुपए रह गई, जबकि मार्च तिमाही में यह 953.95 करोड़ रुपए थी। हालांकि वर्ष-दर-वर्ष आधार पर यह 609.06 करोड़ रुपए से बढ़ी है, जो कंपनी के परिचालन में सुधार का संकेत देती है। वहीं, कंपनी के कुल खर्च जून तिमाही में 533.02 करोड़ रुपए रहे, जो मार्च तिमाही के 605.33 करोड़ रुपए से कम है, लेकिन एक साल पहले की समान अवधि के 452.95 करोड़ रुपए की तुलना में अधिक है। विशेष मदों, सहयोगी कंपनियों और संयुक्त उपक्रमों से प्राप्त लाभांश तथा कर से पहले कंपनी का लाभ 164.92 करोड़ रुपए रहा। यह पिछले मार्च तिमाही के 348.62 करोड़ रुपए की तुलना में काफी कम है, लेकिन जून 2025 तिमाही के 156.11 करोड़ रुपए से बेहतर है। इसी प्रकार, कर-पूर्व लाभ (पीबीटी) जून 2026 तिमाही में 169.31 करोड़ रुपए रहा, जबकि मार्च तिमाही में यह 368.34 करोड़ रुपए था। वहीं एक वर्ष पहले यह केवल 54.18 करोड़ रुपए था। कंपनी ने बताया कि चालू तिमाही में कोई असाधारण मद नहीं रही। इसके विपरीत, जून 2025 तिमाही में 110.49 करोड़ रुपए और मार्च 2026 तिमाही में 132.08 करोड़ रुपए की असाधारण मदें शामिल थीं, जिसका असर लाभ के आंकड़ों पर पड़ा था। कर व्यय भी तिमाही आधार पर घटकर 49 करोड़ रुपए रह गया, जबकि मार्च तिमाही में यह 119.24 करोड़ रुपए था। एक साल पहले इसी अवधि में कर व्यय 17.30 करोड़ रुपए था। इसके अलावा, कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि 31 मार्च 2026 को समाप्त तीन महीनों के आंकड़े ऑडिटेड वार्षिक परिणामों और 31 दिसंबर 2025 तक के नौ महीनों के प्रकाशित लेकिन सीमित समीक्षा वाले वित्तीय आंकड़ों के बीच संतुलनकारी आंकड़े हैं।
बिहार : दर्द से बेपरवाह बाबा की भक्ति में लीन सुबोध, घुटनों के बल तय कर रहे बाबाधाम का सफर

मुंगेर। बाबा बैद्यनाथ के दरबार तक पहुंचने के लिए श्रद्धालु अलग-अलग तरीके से आस्था का सफर तय करते हैं। कोई पैदल कांवड़ लेकर पहुंचता है तो कोई दंडवत यात्रा करता है। लेकिन लखीसराय के सुबोध कुमार सिंह की बाबाधाम यात्रा आस्था, संकल्प और हौसले की ऐसी कहानी है, जिसे देखकर हर कोई हैरान रह जाता है। सुबोध ने घुटनों के बल चलकर बाबा बैद्यनाथ के दरबार पहुंचने का संकल्प लिया है। वे प्रतिदिन एक से डेढ़ किलोमीटर की यात्रा कर पा रहे हैं। वे 18 किलोमीटर की यात्रा कर चुके है, इस दौरान उनके दोनों घुटनों की खाल तक निकल गई, गहरे जख्म हो गए और दर्द भी बढ़ता गया, लेकिन बाबा के दरबार तक पहुंचने की उनकी ललक कम नहीं हुई। लखीसराय निवासी सुबोध कुमार सिंह 28 जुलाई को सुल्तानगंज से गंगाजल उठाकर अपने बेटे और एक दोस्त के साथ बाबाधाम की यात्रा पर निकले। खास बात यह है कि उन्होंने पैदल चलने के बजाय घुटनों के बल चलकर देवघर पहुंचने का संकल्प लिया है। उनके लिए यह यात्रा किसी मनोकामना की पूर्ति नहीं, बल्कि बाबा बैद्यनाथ के प्रति अपनी आस्था और विश्वास को समर्पित एक अलग तरह की साधना है। सुबोध बताते हैं, “इससे पहले वह अपने गुरु के साथ 9 बार दंडवत यात्रा करते हुए बाबाधाम जा चुके हैं। वर्ष 2009 में उन्होंने अपने गुरु श्री श्री 108 दयाराम दास जी महाराज के साथ दंड यात्रा शुरू की थी। बीच में कुछ वर्षों तक यात्रा छूटी भी, लेकिन अब तक करीब 9 बार वह दंडवत यात्रा कर चुके हैं। इस बार उनके मन में कुछ अलग करने का विचार आया और उन्होंने घुटनों के बल बाबाधाम जाने का निर्णय लिया।” सुबोध के इस फैसले से उनके परिवार वाले भी नाराज हुए। उन्होंने बताया कि घरवालों ने इस यात्रा का विरोध किया, लेकिन उनका मन नहीं माना। इसके बाद उन्होंने अपने बेटे और दोस्त को साथ लिया और सुल्तानगंज से निकल पड़े। यात्रा के शुरुआती दो दिनों में उन्होंने पांच से छह किलोमीटर से अधिक दूरी तय कर ली। इसके बाद लगातार जमीन पर घुटनों के बल चलने के कारण दोनों घुटने बुरी तरह छिल गए। जख्म गहरे होते गए और दर्द भी बढ़ता गया। इसके बावजूद सुबोध ने यात्रा रोकने से इनकार कर दिया। वह कहते हैं कि उन्हें खुद नहीं पता कि बाबा बैद्यनाथ के दरबार तक पहुंचने में कितना समय लगेगा। सामान्य परिस्थितियों में 15 किलोमीटर की दूरी कुछ घंटों में पूरी की जा सकती है, लेकिन घुटनों के बल चलकर इतनी दूरी तय करना उनके लिए हर कदम पर परीक्षा जैसा है। फिर भी उनका कहना है कि मंजिल कितनी भी दूर हो, संकल्प बाबा के दरबार तक पहुंचने का है और यात्रा तब तक जारी रहेगी, जब तक बाबा के चरणों तक नहीं पहुंच जाते। सुबोध इसे ‘हठ योग’ बताते हैं। उनका कहना है कि इसके पीछे कोई खास मनोकामना नहीं है। उन्होंने कहा कि महादेव अंतर्यामी हैं और उनसे कुछ छिपा नहीं है। जिस तरह कोई धार्मिक कार्य करने का विचार पहले मन में आता है, उसी तरह इस बार उनके मन में घुटनों के बल बाबा के दरबार जाने की प्रेरणा आई। सुबोध को भरोसा है कि जिस तरह पहले दंडवत यात्राओं में बाबा ने उन्हें अपनी मंजिल तक पहुंचाया, उसी तरह इस बार भी बाबा बैद्यनाथ उनका रास्ता आसान करेंगे। घुटनों के गहरे जख्म के बावजूद उनके चेहरे पर विश्वास और आंखों में मंजिल तक पहुंचने का संकल्प साफ नजर आता है। उनके लिए यह यात्रा सिर्फ दूरी तय करने का नाम नहीं, बल्कि आस्था की उस शक्ति का प्रतीक है, जो दर्द और मुश्किलों के बीच भी इंसान को आगे बढ़ने का हौसला देती है।