माइकल ब्लूमबर्ग का विजन भारत के लिए भी अहम; राष्ट्र निर्माण में पूंजी, सुशासन और क्रियान्वयन जरूरी: गौतम अदाणी

अहमदाबाद। अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने बुधवार को कहा कि नेतृत्व का आकलन आज हासिल किए गए पड़ावों से नहीं, बल्कि इस बात से होता है कि हम भविष्य में मानवता की संभावनाओं का कितना विस्तार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि माइकल ब्लूमबर्ग उन चुनिंदा लोगों में शामिल हैं जो इस सोच का सबसे बेहतर प्रतिनिधित्व करते हैं। लिंक्डइन पर एक पोस्ट में अदाणी ग्रुप के चेयरमैन ने नई दिल्ली में आयोजित ‘ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम’ के दौरान माइकल ब्लूमबर्ग के साथ हुई मुलाकात का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “उनके सवालों ने मेरे मन में एक विचार को और स्पष्ट कर दिया। किसी भी देश को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने के लिए दो तरह के बुनियादी ढांचे की जरूरत होती है। पहला वह है जो दिखाई देता है, जिसमें बंदरगाह, ट्रांसमिशन कॉरिडोर, ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र, गीगावाट स्तर के कंप्यूटिंग क्लस्टर और ट्रांजिट सिस्टम शामिल हैं। दूसरा बुनियादी ढांचा दिखाई नहीं देता, लेकिन वही निर्णायक होता है क्योंकि वही पहले वाले ढांचे को सक्षम बनाता है। यह विश्वसनीय डेटा, जवाबदेह संस्थानों और ऐसी शासन व्यवस्था पर आधारित होता है जिसे केवल घोषणाओं का मंच नहीं, बल्कि एक कार्यशील अनुशासन माना जाता है।” उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में विकास के लिए काम कर रहे दो लोग हर उपलब्धि को एक ही नजरिए से नहीं देख सकते। अदाणी ने कहा, “हमारे दृष्टिकोण हमारी कार्य परिस्थितियों को दर्शाते हैं। एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था के लिए प्राथमिकता तत्काल होती है। इसका अर्थ है कि करोड़ों लोगों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए बिना देरी के आधारभूत बिजली, औद्योगिक क्षमता और डिजिटल पहुंच उपलब्ध कराई जाए। वहीं, विकसित पूंजी बाजारों में अक्सर ध्यान डीकार्बोनाइजेशन की गति और नियामकीय सामंजस्य पर अधिक रहता है।” गौतम अदाणी ने कहा कि इन भिन्नताओं के बावजूद एक साझा विश्वास मौजूद है कि स्वच्छ ऊर्जा और वहनीयता को साथ-साथ आगे बढ़ना चाहिए। अदाणी ने कहा, “डीकार्बोनाइजेशन एक वैचारिक आदेश नहीं बन सकता, जो आम नागरिकों पर अतिरिक्त बोझ डाले, कारखानों को बंद कर दे या वैश्विक दक्षिण की प्रगति को रोक दे। यदि हरित ऊर्जा गुजरात के किसी छोटे कारोबारी या उत्तर प्रदेश के किसी परिवार के लिए विश्वसनीय और व्यवहारिक नहीं है, तो यह बदलाव अपने ही बोझ तले दब जाएगा।” उन्होंने कहा कि दूसरी ओर पुरानी प्रणालियों से चिपके रहना जलवायु अस्थिरता की वास्तविक चुनौती को नजरअंदाज करना है। वास्तविक प्रगति के लिए पूंजी, नीति और क्रियान्वयन को मिलकर काम करना होगा, ताकि हरित ऊर्जा की अतिरिक्त लागत कम हो और स्वच्छ ऊर्जा सबसे सस्ता और बेहतर विकल्प बन सके। गौतम अदाणी ने आगे कहा, “यही व्यावहारिक सोच माइक के कार्यों को प्रेरणादायक बनाती है। जब उन्होंने दिल्ली में ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम को संबोधित किया, तो उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), उन्नत विनिर्माण और हरित बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) में भारत की प्रगति पर पूरे विश्वास के साथ बात की। यह मंच के लिए तैयार किया गया भाषण नहीं था। ब्लूमबर्ग पिछले 30 वर्षों से भारत में सक्रिय हैं और करीब दो दशकों से परोपकारी साझेदारी के माध्यम से भी जुड़े हुए हैं।” माइकल ब्लूमबर्ग और गौतम अदाणी के बीच मुंबई के धारावी पुनर्विकास परियोजना पर भी चर्चा हुई, जिसे अदाणी ने सामूहिक क्षमता की परीक्षा बताया। उन्होंने कहा, “न्यूयॉर्क में माइक के कार्यकाल ने दिखाया कि नगर प्रशासन से जुड़ा डेटा और सख्त क्रियान्वयन किस तरह घनी आबादी वाले शहरी समुदायों की सेवा कर सकता है। धारावी को केवल रियल एस्टेट परियोजना के रूप में नहीं देखा जा सकता। यह सूक्ष्म उद्यमियों, कई पीढ़ियों से रह रहे परिवारों और मानवीय संघर्षों का एक जीवंत और आत्मनिर्भर इकोसिस्टम है। इसके पुनर्विकास का आकलन केवल निर्मित क्षेत्रफल से नहीं किया जा सकता। इसे जलवायु के अनुकूल आवास, आधुनिक स्वच्छता, भरोसेमंद बिजली और सुरक्षित आजीविका के माध्यम से लोगों के जीवन में आने वाले वास्तविक सुधार के आधार पर परखा जाना चाहिए।” अदाणी ने कहा कि यदि इंजीनियरिंग क्षमता और सामुदायिक विश्वास को साथ जोड़ा जाए तो धारावी का पुनर्विकास विकासशील देशों के लिए शहरी पुनर्जीवन का एक स्थायी मानक बन सकता है। उन्होंने कहा, “सच्चे राष्ट्र निर्माण के लिए चार अप्रतिस्पर्धी शक्तियां आवश्यक हैं – धैर्यपूर्ण पूंजी, मजबूत भौतिक क्रियान्वयन, पारदर्शी शासन व्यवस्था और सक्षम स्थानीय नेतृत्व। इनमें से कोई भी दूसरे का विकल्प नहीं हो सकता।” उन्होंने कहा कि ब्रिज के निर्माण के लिए इंजीनियरिंग की आवश्यकता होती है, लेकिन समुदाय भरोसे पर टिका रहता है। माइकल द्वारा अपनी यात्रा साझा करते समय मेरे मन में यही विचार आए। उन्होंने पोस्ट में आगे कहा, “हमारी चर्चा समाप्त होने पर, सबसे अधिक प्रभावित करने वाली बात कोई मापदंड या नीतिगत प्रस्ताव नहीं थी, बल्कि माइक की हर कमरे में मौजूद जीवंतता थी। एक ऐसे दिमाग को देखना एक दुर्लभ शक्ति है जो उस प्रगतिशील गति से काम करता है, मान्यताओं की पड़ताल करता है, बाधाओं को दूर करता है और व्यवस्थागत सीमाओं की ओर इस तरह अग्रसर होता है मानो उसका काम उसी सुबह शुरू हुआ हो।” गौतम अदाणी ने कहा कि “नेतृत्व का माप आज की उपलब्धियों से नहीं, बल्कि भविष्य में मानवता की क्षमताओं को और अधिक विस्तारित करने की प्रतिबद्धता से होता है। माइकल ब्लूमबर्ग से बेहतर इस बात का उदाहरण शायद ही कोई हो।
कुणाल खेमू की बहन ने ‘हनुमान अंश’ के गाने पर किया जबरदस्त डांस, सोहा ने की तारीफ

मुंबई। फिल्म ‘हनुमान अंश’ का चर्चित बुंदेलखंडी लोक-भक्ति गीत ‘जब जिद पे आ गई पार्वती’ काफी समय से सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। इस बीच बुधवार को अभिनेता कुणाल खेमू की बहन करिश्मा खेमू ने इस गाने पर शानदार डांस परफॉर्मेंस देकर सबका ध्यान खींच लिया। करिश्मा खेमू ने इंस्टाग्राम पर अपनी डांस परफॉर्मेंस का वीडियो पोस्ट किया, जिसमें वह शानदार एक्सप्रेशन और क्लासिकल अंदाज में थिरकती नजर आ रही हैं। करिश्मा खेमू ने बताया कि उन्होंने यह नृत्य माता रानी के लिए तैयार किया है। उनका मानना है कि माता रानी में प्रेम और कोमलता के साथ-साथ प्रचंडता भी निहित है। करिश्मा ने लिखा, “शक्ति कभी ढ़ूंढ़ने से नहीं मिलती बल्कि, यह आपके अंदर ही होती है। इस नवरात्रि के अवसर पर मां पार्वती के लिए नृत्य कर रही हूं, क्योंकि जो देवी प्रेम करती है, वही लड़ना भी जानती है। वो एक साथ कोमल भी है और प्रचंड भी। जय माता दी।” करिश्मा का यह परफॉर्मेंस सोशल मीडिया पर काफी पसंद किया जा रहा है। उनकी भाभी और अभिनेत्री सोहा अली खान समेत कई लोगों ने कमेंट सेक्शन के जरिए करिश्मा के डांस की तारीफ की। अभिनेत्री सोहा अली खान ने लिखा, “बहुत शानदार।” ‘जब जिद पे आ गई पार्वती’ गीत को साधु एस. तिवारी ने गाया और संगीतबद्ध किया है। यह गाना माता पार्वती की उस दृढ़ जिद और संकल्प पर आधारित है, जब वे भोलेनाथ (शिव) से विवाह करने पर अड़ जाती हैं। गीत में सप्तऋषि माता पार्वती को समझाते हैं कि शिव तो एक तपस्वी हैं, जिनके सिर पर गंगा और गले में सांप रहते हैं, वे गृहस्थी के लिए कैसे उपयुक्त होंगे। इस लोक-भक्ति गीत में बुंदेली हास्य और गहरी श्रद्धा का सुंदर मेल देखने को मिलता है। ‘हनुमान अंश’ महान संत श्री नीम करौली बाबा के जीवन और उनकी शिक्षाओं पर आधारित है। यह फिल्म एक ऐसे लड़के की भावनात्मक और आध्यात्मिक यात्रा को दिखाती है जो अपनी दिवंगत मां की याद में ईश्वर की तलाश में निकलता है। फिल्म में बाबा के प्रेम, सादगी, मानवता की सेवा और उनके जीवन से जुड़े चमत्कारों को पर्दे पर उतारा गया है।
बालों को सफेद होने से रोकने के लिए अपनाएं ये घरेलू उपाय, इन चीजों को डाइट में करें शामिल

नई दिल्ली। आजकल कम उम्र में ही बालों का सफेद होना आम समस्या बनती जा रही है। कई लोगों के बाल 20 से 30 साल की उम्र में ही सफेद होने लगते हैं। सफेद बालों को देखकर लोग अक्सर परेशान हो जाते हैं और उन्हें छिपाने के लिए बार-बार हेयर कलर या डाई का इस्तेमाल करने लगते हैं। हालांकि, बालों का सफेद होना हमेशा किसी बीमारी का संकेत नहीं होता। उम्र बढ़ने के साथ बालों में मेलेनिन का बनना कम होता है, जिससे बालों का रंग धीरे-धीरे सफेद होने लगता है। लेकिन अगर कम उम्र में बाल तेजी से सफेद हो रहे हैं, तो खान-पान, तनाव, नींद और शरीर में कुछ पोषक तत्वों की कमी जैसी चीजों पर ध्यान देना जरूरी है। बालों को स्वस्थ रखने के लिए सबसे पहले खान-पान पर ध्यान देना चाहिए। डाइट में प्रोटीन, आयरन, विटामिन बी12, फोलेट, जिंक और दूसरे जरूरी पोषक तत्वों की कमी नहीं होनी चाहिए। इसके लिए हरी सब्जियां, दालें, अंडे, दूध-दही, पनीर, फल, मेवे और बीज जैसी चीजों को खाने में शामिल किया जा सकता है। आंवला भी बालों की देखभाल के लिए लंबे समय से इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसमें विटामिन सी और कई एंटीऑक्सीडेंट कंपाउंड्स पाए जाते हैं, जो बालों को हेल्दी बनाने में मदद करते है। नारियल तेल से सिर की हल्की मालिश करना भी बालों की देखभाल का आसान तरीका है। इससे बालों और स्कैल्प में नमी बनाए रखने में मदद मिलती है और रूखे बालों की समस्या कम होती है। तनाव को कम करना भी जरूरी है। लगातार तनाव शरीर पर कई तरह का असर डाल सकता है और कुछ मामलों में बालों की समस्याओं से भी जुड़ा हो सकता है। इसलिए रोजाना थोड़ा समय टलहना, एक्सरसाइज, योगा या मेडिटेशन के लिए निकालना मददगार हो सकता है। इसके साथ पर्याप्त नींद लेना भी जरूरी है। धूम्रपान से दूरी बनाना भी बालों की सेहत के लिए जरूरी है। कुछ रिसर्च में स्मोकिंग और समय से पहले बाल सफेद होने के बीच संबंध पाया गया है। इसलिए अगर कोई व्यक्ति धुम्रपान करता है, तो इसे छोड़ना बालों के साथ-साथ पूरी सेहत के लिए बेहतर कदम है। बालों को बार-बार बहुत ज्यादा हीट देना, बहुत टाइट हेयरस्टाइल बनाना या केमिकल प्रोडक्ट्स का लगातार इस्तेमाल करना भी बालों को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए माइल्ड शैम्पू का इस्तेमाल करें, बालों को जरूरत के हिसाब से धोएं और बहुत ज्यादा हीट स्टाइलिंग से बचें। अगर कम उम्र में अचानक बहुत तेजी से बाल सफेद होने लगें, तो सिर्फ घरेलू नुस्खों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। विटामिन बी12, आयरन या थायराइड जैसी समस्याओं की जांच की जरूरत कुछ लोगों में हो सकती है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
यूपी : पशुधन भर्ती मामले में पूर्व प्रमुख सचिव योगेश कुमार गिरफ्तार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2014 के पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती घोटाले में आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तत्कालीन प्रमुख सचिव और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी योगेश कुमार को गिरफ्तार किया है। 1980 बैच के अधिकारी योगेश कुमार को बुधवार को लखनऊ के गोमती नगर से गिरफ्तार किया गया। उन पर भर्ती प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन नहीं करने और ओएमआर शीट के मूल्यांकन व मेरिट सूची तैयार करने में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में कार्रवाई की गई है। वर्ष 2014 के पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती घोटाले में आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) ने तत्कालीन प्रमुख सचिव एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी योगेश कुमार को गिरफ्तार किया है। भर्ती प्रक्रिया के दौरान योगेश कुमार पशुपालन विभाग में प्रमुख सचिव के पद पर कार्यरत थे। ईओडब्ल्यू के मुताबिक, उन्हें लखनऊ के गोमती नगर से गिरफ्तार किया गया है। पशुपालन विभाग में हुई इस भर्ती में कुल 1,198 पशुधन प्रसार अधिकारियों के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। शासन ने सहारनपुर मंडल को छोड़कर प्रदेश के 17 मंडलों में इन पदों पर भर्ती की स्वीकृति दी थी। इसके लिए दो फरवरी 2014 को लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में निर्धारित सेवा नियमावली के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया और ओएमआर शीट के मूल्यांकन से लेकर मेरिट सूची तैयार करने तक अनियमितताएं की गईं। ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया कि मंडलीय चयन समितियों के अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर ओएमआर शीट का केंद्रीकृत मूल्यांकन कराने के लिए रायबरेली स्थित फिरोज गांधी इंस्टीट्यूट को नामित किया गया था। आरोप है कि नियमों के विपरीत फैसले लेकर ओएमआर शीट में छेड़छाड़ की गई, जिससे पात्र अभ्यर्थियों को नुकसान पहुंचा और अपात्र अभ्यर्थियों को लाभ मिला। इस मामले की जांच वर्ष 2017 में शासन की ओर से विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंपी गई थी। जांच के बाद वर्ष 2019 में एसआईटी थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। इसमें भारतीय दंड संहिता की धाराओं 409, 420, 467, 468, 471, 120बी और 201 के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(डी) के तहत आरोप दर्ज किए गए। जांच एजेंसी के अनुसार, मामले में छह नामजद और विवेचना के दौरान सामने आए 22 अन्य आरोपियों समेत कुल 28 लोगों को अभियुक्त बनाया गया। इनमें से 25 आरोपियों के खिलाफ विभिन्न तिथियों में आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं। योगेश कुमार की गिरफ्तारी को भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जांच और अभियोजन की प्रक्रिया के तहत की जाएगी।
मुंबई के नालासोपारा में बहुमंजिला इमारत में लगी भीषण आग, 2 महिलाओं की मौत

वसई-विरार। महाराष्ट्र के नालासोपारा-वसई लिंक रोड स्थित अचोले क्षेत्र की बहुमंजिला इंपीरियल हाइट्स इमारत में भीषण आग लगने से दो महिलाओं की मौत हो गई। मंगलवार आधी रात के करीब लगी आग से इमारत में अफरातफरी मच गई और कई लोग ऊपरी मंजिलों पर फंस गए। सूचना मिलते ही वसई-विरार शहर महानगरपालिका के अग्निशमन विभाग, पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं। वसई-विरार शहर महानगरपालिका के आयुक्त पृथ्वीराज बी.पी.ने बताया कि आग लगने की सूचना मंगलवार रात 11:30 बजे मिली थी। इसके बाद अग्निशमन विभाग, पुलिस विभाग और प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी तुरंत बचाव कार्य में जुट गए। टीटीएल मशीन और अग्निशमन कर्मियों की मदद से 15 से 20 लोगों को तत्काल बचाया गया जबकि कई लोग स्वयं भी सुरक्षित नीचे आ गए। आयुक्त ने बताया कि प्रभावित परिवारों को अस्थायी ठहरने की सुविधा देने के लिए आसपास के बैंक्वेट हॉल और होटल उपलब्ध कराए गए हैं। आग लगने के कारणों की विस्तृत जांच की जाएगी। इसमें इमारत की बिल्डिंग परमिशन, फायर परमिशन, अग्निशमन प्रणालियों की स्थिति और इलेक्ट्रिकल पैनल में संभावित शॉर्ट सर्किट सहित सभी पहलुओं की जांच होगी। यदि किसी प्रकार की लापरवाही या कमी सामने आती है, तो उचित कार्रवाई की जाएगी। आयुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान लोगों की जान बचाना सर्वोच्च प्राथमिकता थी। सीढ़ियों में अत्यधिक गर्मी के कारण अग्निशमन कर्मियों ने स्थिति का आकलन करते हुए फंसे लोगों को सुरक्षित रखने और उन्हें योजनाबद्ध तरीके से बाहर निकालने का प्रयास किया। वसई-विरार शहर महानगरपालिका के चीफ फायर अधिकारी रोहन मोरे ने बताया कि रात 12 बजे स्थानीय नगरसेवक अशोक शेल्के ने उन्हें फोन कर घटना की जानकारी दी। हालांकि, तब तक अचोले क्षेत्र की दो दमकल गाड़ियां घटनास्थल की ओर रवाना हो चुकी थीं। शुरुआत में चौथी मंजिल पर आग लगने की सूचना मिली थी लेकिन मौके पर पहुंचने के बाद आग की गंभीरता का पता चला। रोहन मोरे के मुताबिक, इमारत की ऊपरी मंजिलों पर कई लोग फंसे हुए थे। ऐसे में उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना अग्निशमन विभाग की पहली प्राथमिकता थी। विशेष टीटीएल (टर्नटेबल लैडर) मशीन की मदद से आठ लोगों को बाहर से रेस्क्यू किया गया। अन्य स्थानों से लोगों को निकालने सहित कुल 25 से 30 लोगों को सुरक्षित बाहर लाने की जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि 13वीं और 14वीं मंजिल पर आग की गंभीरता अधिक थी। इसके अलावा तीसरी और नौवीं मंजिल पर भी आग या अंगारों के कुछ हिस्से मिले, जबकि 12वीं मंजिल के रिफ्यूज फ्लोर का दरवाजा भी आग की चपेट में आ गया था। अग्निशमन कर्मियों ने अलग-अलग मंजिलों पर आग बुझाने के साथ फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने का अभियान चलाया। आग पर काबू पाने के लिए दमकल की कई गाड़ियों, पानी के टैंकरों, वॉटर ब्राउजर और विशेष वॉटर टावर की मदद ली गई। पानी के निजी टैंकर भी बुलाए गए। चीफ फायर अधिकारी ने कहा कि आग लगने का वास्तविक कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। इस दर्दनाक अग्निकांड में फाल्गुनी शाह (50 वर्ष) और अश्विनी पारकर (50 वर्ष) की मौत की पुष्टि हुई है। वसई-विरार शहर महानगरपालिका के तुलिंज अस्पताल की इंचार्ज डॉ. कविता जगदा ने समाचार एजेंसी आईएएनएस को बताया कि दोनों महिलाओं के शरीर पर जलने की चोटें अधिक नहीं थीं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आग से निकला धुआं फेफड़ों में जाने के कारण उनकी मौत होने की आशंका है। दोनों शवों का पंचनामा करने के बाद उन्हें वसई पश्चिम स्थित पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का अंतिम कारण स्पष्ट होगा।
राजभर का अखिलेश पर तीखा हमला, बोले- ‘सत्ताइस में सपा साफ’ होने जा रही है

लखनऊ। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने विपक्षी गठबंधन में अखिलेश यादव की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उन्हें दिल्ली में अपने राजनीतिक सहयोगियों के बीच कथित तौर पर तिरस्कार का सामना करने वाला बताया। ओमप्रकाश राजभर ने राहुल गांधी का नाम लेकर भी निशाना साधा और दावा किया कि समाजवादी पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव में कमजोर पड़ने जा रही है। राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा है, “अखिलेश यादव, दिल्ली में पिछलग्गू बनके घूमने में मजा आ रहा है कि नहीं? ठगबंधन में आपकी असली हैसियत आपके दिल्ली वाले मतलबी दोस्तों ने सबके सामने दिखा दी। ऐसा लग रहा है आपको बराती वाले ट्रैक्टर पर जबरिया ठूंस दिया गया हो। जैसे कि आप दूल्हा के दोस्त के ममेरे भाई के नाराज फूफा जी हों।” उन्होंने आगे लिखा, “आपके समर्थक भी सोच रहे होंगे कि हम लोग जिनको ‘अवतारी भैया-जी’ बताते नहीं थकते थे, हमारे वही भइया जी, सबके सामने खुद ही ‘लोडर’ बनके भीड़ में खो जा रहे हैं। कुर्सी की ख्वाहिश पाले दरी बिछाने में लगे हैं। नैया की पतवार बड़के भैया राहुल जी के हाथ में चली गई है। और जाइए, भाग-भाग के दिल्ली! करा लिए न घनघोर बेइज्जती?” राजभर ने यह भी कहा कि चुनाव उत्तर प्रदेश में हैं और अखिलेश यादव दिल्ली की दौड़ लगा रहे हैं। उन्होंने लिखा, “वे दूसरे की बारात में कब तक सहबाला बनेंगे? उन्हें जान लेना चाहिए कि दिल्ली वाले मतलबी दोस्तों से अखिलेश को सिवाय तिरस्कार के कुछ नहीं मिलने वाला। जैसे वे (अखिलेश) दिल्ली की भीड़ में खो गए, वैसे ही इस बार यूपी में भी विपक्ष की भीड़ में कहां होंगे पता नहीं चलेगा।” वहीं, समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में राजभर ने अखिलेश यादव और सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘इंडिया ब्लॉक’ के विरोध प्रदर्शन पर जवाब दिया। उन्होंने कहा, “विपक्ष के पास कोई काम नहीं बचा है। इसलिए वे लगातार विरोध कर रहे हैं।” अखिलेश के बयान ‘भाजपा पैसे को छोड़कर किसी की सगी नहीं है’ पर राजभर ने कहा, “जब वो (अखिलेश यादव) अल्लाह को धोखा दे दिए, भगवान राम को धोखा दे दिए, तो अपने गिरेबान में झांक के देखें, दूसरे को क्या कह रहे हैं।” समाजवादी पार्टी के तीन बागी विधायकों के भाजपा में शामिल होने पर राजभर ने कहा, “वे लंबे समय से भाजपा के साथ हैं। आज बस औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। समाजवादी पार्टी के जो अन्य विधायक पार्टी से नाखुश हैं, वे भी इसे छोड़कर भाजपा में शामिल होंगे।
केंद्र पर सत्तावाद को संस्थागत रूप देने का आरोप, शिवसेना (यूबीटी) ने ‘सामना’ में साधा निशाना

मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) ने बुधवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा और उस पर सत्तावाद को संस्थागत रूप देने और सार्वजनिक असहमति को व्यवस्थित तरीके से दबाने का आरोप लगाया। ठाकरे गुट की यह आलोचना दिल्ली पुलिस द्वारा जंतर-मंतर से दशकों पुराने प्रदर्शन स्थल का दर्जा हटाने के फैसले के बाद आई है। पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में संपादकीय में ठाकरे गुट ने कहा कि नए पुलिस आदेशों के तहत विरोध प्रदर्शनों को सत्ता के केंद्र से दूर धकेल दिया गया है। अब प्रदर्शन के लिए रामलीला मैदान (4 किमी दूर), शाहदरा में सीबीडी ग्राउंड (12 किमी दूर) और बुराड़ी ग्राउंड (20-21 किमी दूर) जैसी दूर की जगहें तय की गई हैं। सामना में तर्क दिया गया कि यह एक सोची-समझी रणनीति है ताकि जनता के आंदोलन की कोई गूंज संसद या राष्ट्रीय चेतना में न पहुंचे। लोकतांत्रिक अधिकारों के व्यावसायीकरण को उजागर करते हुए संपादकीय में बताया गया कि रामलीला मैदान जैसे स्थलों की लागत प्रतिदिन 1.5 लाख रुपए से अधिक है, महीनों पहले बुकिंग करनी पड़ती है और ये अक्सर धार्मिक या सत्तारूढ़ दल के कार्यक्रमों के लिए बुक रहते हैं। संपादकीय में कहा गया कि शांतिपूर्ण सभा संवैधानिक रूप से संरक्षित अधिकार है। आवाजों को शहर की सीमा से बाहर धकेलना गहरे प्रशासनिक डर का संकेत है। यह प्रशासनिक कार्रवाई चुनावी अखंडता पर जवाबदेही की मांग करने वाले समूहों के प्रदर्शनों के बाद आई, जिससे राजधानी में भारी सुरक्षा तैनाती और बड़े पैमाने पर निवारक हिरासत हुई। ठाकरे गुट ने कहा कि राहुल गांधी सहित विपक्षी नेताओं ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है, जबकि जंतर-मंतर की गैर-अधिसूचना के खिलाफ कानूनी चुनौतियां तेजी से दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गई हैं। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने दावा किया कि जब कोई सरकार “अपनी ही जनता से डरने लगती है, तो उसके अंत की उलटी गिनती आधिकारिक रूप से शुरू हो जाती है।
रामनाथ कोविंद की आत्मकथा नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत, उन्होंने अभावों को कभी ढाल नहीं बनाया : सीएम योगी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवाओं को सोशल मीडिया की आभासी दुनिया से निकलकर पुस्तकों से जुड़ने की सीख दी। उन्होंने कहा कि आज लोग स्मार्टफोन और सोशल मीडिया पर पांच से सात घंटे बिता रहे हैं। इसमें से एक-दो घंटे भी अच्छी पुस्तकें पढ़ने में लगाएं तो जीवन को नई दिशा मिल सकती है। सोशल मीडिया पर रील बनाकर लाइक्स जुटाने के बजाय अपनी रियल लाइफ में आगे बढ़ना अधिक उपयोगी है। अच्छी पुस्तकें जीवन की सबसे महत्वपूर्ण मार्गदर्शक होती हैं। युवाओं को महापुरुषों की जीवनी और आत्मकथाएं पढ़नी चाहिए, जिनसे संघर्षों के बीच आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। मुख्यमंत्री योगी ने बुधवार को लोकभवन सभागार में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ के हिंदी संस्करण के विमोचन समारोह को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसे भारतीय की जीवनगाथा है, जिसने अभावों को अपनी ढाल नहीं बनाया, बल्कि संघर्ष, परिश्रम और पुरुषार्थ के बल पर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने का मार्ग प्रशस्त किया। यह आत्मकथा नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी। सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से प्रदेश की हर ग्राम पंचायत में पुस्तकालय की व्यवस्था की जा रही है। प्रदेश में 57,600 ग्राम सचिवालय बन चुके हैं। इनमें एक कक्ष पुस्तकालय के लिए निर्धारित है, जहां गांव के बच्चे अध्ययन कर रहे हैं। डिजिटल लाइब्रेरी भी विकसित की जा रही हैं। बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों से लेकर महाविद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों तक पुस्तकालयों का विस्तार हो रहा है। उन्होंने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति की आत्मकथा भी व्यापक स्तर पर पुस्तकालयों तक पहुंचनी चाहिए। सरकार इस दिशा में प्रयास करेगी। मुख्यमंत्री योगी ने राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के पुस्तक मेलों का उल्लेख करते हुए कहा कि शुरुआत में आयोजकों को आशंका थी कि आज के दौर में पुस्तकें कौन खरीदेगा। लखनऊ में पुस्तक मेला लगा तो बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। इसके बाद गोरखपुर में उससे भी अधिक पुस्तकें बिकीं। हाल में लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित पुस्तक मेले में भी युवाओं और विद्यार्थियों की अच्छी भागीदारी रही। उन्होंने कहा कि लोगों में पढ़ने की रुचि है, जरूरत उन्हें उचित मंच उपलब्ध कराने की है। उन्होंने कहा कि कानपुर के परौंख गांव में जन्मे रामनाथ कोविंद ने बचपन में ही मां को खो दिया। गांव के विद्यालय से पढ़ाई शुरू की और उच्च शिक्षा प्राप्त कर अधिवक्ता के रूप में गरीबों तथा वंचितों की आवाज बने। भाजपा संगठन, राज्यसभा, बिहार के राज्यपाल और राष्ट्रपति के रूप में जिम्मेदारियां निभाईं। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि बड़ा वही होता है जिसमें संघर्ष का जज्बा हो। विपरीत परिस्थितियों से पलायन के बजाय उनका मुकाबला करना महानता की पहचान है। सीएम योगी ने कहा कि सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंचने के बाद भी रामनाथ कोविंद अपनी जन्मभूमि परौंख से लगाव बना रहा। वह अवसर मिलते ही गांव जाते हैं। पुराने साथियों और चाय-चाट वालों से भी उनके संबंध कायम हैं। उन्होंने गांव में शिक्षा सुविधाओं के विकास के लिए प्रयास किए। वहां के विद्यालय भवन को विकसित कर राज्य सरकार को समर्पित किया गया, जिसे आवासीय विद्यालय के रूप में आगे बढ़ाया गया। मुख्यमंत्री योगी ने भगवान श्रीराम के जन्मभूमि प्रेम का उदाहरण देते हुए कहा कि जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर हैं। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति की आत्मकथा सार्वजनिक जीवन में शुचिता, सादगी और अहंकार से मुक्त रहने की प्रेरणा देती है। व्यक्ति कितना भी बड़ा पद प्राप्त कर ले, उसके संस्कार और विचार नहीं बदलने चाहिए। रामनाथ कोविन्द का जीवन इसका उदाहरण है। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि कानपुर के छोटे से गांव में जन्मा गरीब परिवार का व्यक्ति अपनी योग्यता और कार्यक्षमता के बल पर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंच सकता है। यही भारतीय गणतंत्र की खूबसूरती है। पूर्व राष्ट्रपति का जीवन लोकतांत्रिक मूल्यों और पारदर्शिता की मिसाल है। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने पूर्व राष्ट्रपति के जीवन को ‘कच्चे घर, पक्के इरादे’ की यात्रा बताया। उन्होंने प्रकाशक से विधानसभा सदस्यों के लिए पुस्तक की 500 प्रतियां उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। रूपा पब्लिकेशंस के प्रबंध निदेशक कपिश मेहरा ने कहा कि प्रदेश के विद्यालयों और पुस्तकालयों में अच्छी हिंदी पुस्तकों की पहुंच बढ़ी है। किताबें बच्चों तक पहुंच रही हैं। कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय गीत के गायन से हुआ। मुख्यमंत्री योगी ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया। उनकी पत्नी सविता कोविंद का भी स्वागत किया। पूर्व राष्ट्रपति ने अतिथियों के साथ आत्मकथा के हिंदी संस्करण का विमोचन किया।
भारत-अमेरिका संबंध और मजबूत होंगे, किसी बड़ी बाधा की आशंका नहीं : पीयूष गोयल

नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को कहा कि भारत और अमेरिका के संबंध बेहद महत्वपूर्ण हैं और दोनों देशों में राजनीतिक सोच में बदलाव होने के बावजूद यह साझेदारी आगे और मजबूत होती जाएगी। राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच संबंध पहले से ही काफी मजबूत हैं और फिलहाल उन्हें कोई समस्या नजर नहीं आती। उन्होंने कहा, “मेरे विचार में दोनों देशों के बीच साझेदारी बेहद ठोस और दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि दोनों बड़े लोकतांत्रिक देश हैं। यह याद रखना जरूरी है कि यह संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और मेरा मानना है कि आने वाले वर्षों में भी वह ऐसा ही बना रहेगा। कुल मिलाकर, मुझे अमेरिका के साथ समझौते करने में कोई बड़ी बाधा दिखाई नहीं देती।” मंत्री ने आगे कहा कि यह साझेदारी व्यापार से आगे बढ़कर रक्षा सहयोग, प्रौद्योगिकी, महत्वपूर्ण आपूर्ति शृंखलाओं और लोगों के बीच मजबूत संपर्क तक फैली हुई है। उन्होंने कहा, “हकीकत यह है कि भारत और अमेरिका के बीच बहुत करीबी संबंध हैं और दोनों कई क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं। इनमें संयुक्त रक्षा अभ्यास और प्रौद्योगिकी, वस्तुओं तथा सेवाओं की खुली आपूर्ति शृंखलाओं को सुनिश्चित करने के लिए सहयोग भी शामिल है। भारत-अमेरिका संबंध बेहद महत्वपूर्ण हैं और मेरा मानना है कि दोनों देशों में राजनीतिक सोच में किसी भी बदलाव के बावजूद ये संबंध और मजबूत होंगे।” गोयल ने कहा कि इस संबंध की मजबूती “हमारी आर्थिक, राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं” से आती है। उन्होंने कहा, “इसलिए यह एक स्थिर और मजबूत साझेदारी है और मुझे नहीं लगता कि दुनिया के बाकी देशों को इसे लेकर चिंता करने की जरूरत है।” मंत्री ने कहा कि पिछले चार से साढ़े चार वर्षों में भारत ने 38 विकसित देशों के साथ वरीयता प्राप्त व्यापार समझौतों (प्रेफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट्स) में प्रवेश किया है। उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य भारत के बाजारों को दुनिया के लिए खोलना है, साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि भारतीय कारोबारों के लिए भी दूसरे देशों के बाजार समान रूप से सुलभ हों। वर्ष 2014 तक भारत को लगभग 10 ट्रिलियन डॉलर की संयुक्त जीडीपी वाली अर्थव्यवस्थाओं तक वरीयता प्राप्त बाजार पहुंच प्राप्त थी। आज हमारे व्यापार समझौते लगभग 70 ट्रिलियन डॉलर जीडीपी का प्रतिनिधित्व करने वाली अर्थव्यवस्थाओं को कवर करते हैं।
खड़गे बोले- ‘पहले वोट चोरी और फिर विरोध करने के अधिकार की चोरी, भाजपाई तानाशाही का प्रमाण’

नई दिल्ली। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि पहले ‘वोट चोरी’ और फिर ‘विरोध करने के अधिकार की चोरी’ भाजपाई तानाशाही का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि सरकार की दमनकारी नीतियों के आगे अब कोई नहीं झुकेगा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुधवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा, “गृह मंत्री (अमित शाह) की ओर से एसआईआर में बाहर 13.3 करोड़ भारतीयों को ‘घुसपैठिया’ घोषित करना भारतीयता का अपमान है।” उन्होंने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, “सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद, जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल से हटाकर, पहले ‘वोट चोरी’ फिर ‘विरोध करने के अधिकार की चोरी’ भाजपाई तानाशाही का प्रमाण है। ज्ञानेश कुमार को बचाना बंद कीजिए। सत्ता से सवाल पूछने वालों को जेल, युवाओं को लाठी-डंडे, जबरन हिरासत, हमारी बेटियों से पुलिसिया बर्बरता और आरएसएस के गुंडों को खुलेआम छूट, मोदी-शाह की दमनकारी नीतियों के आगे अब कोई नहीं झुकेगा।” मल्लिकार्जुन खड़गे ने यह भी कहा कि देश आवाज उठा रहा है, भाजपा से एक-एक बात का हिसाब लेकर रहेगा। वहीं, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “एसआईआर का लगातार बचाव कर रहे केंद्रीय गृह मंत्री से तीन बेहद सरल और सीधे सवाल हैं। पहला- कितने घुसपैठियों की पहचान हुई?, दूसरा- कितने घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए? और कितने घुसपैठियों को देश से बाहर भेजा गया?” जयराम रमेश ने लिखा, “100 करोड़ भारतीयों को एसआईआर की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा है। उन्हें इसके नतीजे जानने का पूरा अधिकार है। हकीकत यह है कि ‘शाह इंस्टीगेट रिमूवल’ (एसआईआर) के सूत्रधार बार-बार घुसपैठियों का तर्क देकर असल मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। जबकि असलियत यह है कि पीएम-गृह मंत्री की हताश जोड़ी ने करीब 14 करोड़ भारतीयों से उनका वोट देने का संवैधानिक अधिकार छीन लिया है।” कांग्रेस नेता ने यह भी पूछा कि क्या गृह मंत्री यह कहना चाहते हैं कि ये 14 करोड़ भारतीय घुसपैठिए हैं? क्या गृह मंत्री के तौर पर उनकी निगरानी में देश में घुसपैठियों की संख्या में इतनी भारी बढ़ोतरी हुई है?