एक्मे बुलेवार्ड हाउसिंग घोटाला: सीबीआई ने पांच पूर्व प्रमोटरों और निदेशकों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट

मुंबई। घर खरीदारों से बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी के मामले की जांच के बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने एक्मे रियल्टीज प्राइवेट लिमिटेड और उसकी होल्डिंग कंपनी एक्मे हाउसिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के पांच पूर्व प्रमोटरों और निदेशकों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है। यह मामला मुंबई के जोगेश्वरी (पूर्व) में सर्वोदय नगर, गांव माजस में स्थित हाउसिंग प्रोजेक्ट ‘एक्मे बुलेवार्ड’ से जुड़ी धोखाधड़ी की गतिविधियों से संबंधित है। चार्जशीट मुंबई की एस्प्लेनेड कोर्ट की तीसरी अदालत में एसीजेएम के समक्ष दाखिल की गई है। सीबीआई की जांच से पता चला है कि आरोपी बिल्डर कंपनी और उसके प्रमोटरों/डायरेक्टरों ने कथित तौर पर झूठे वादों और धोखाधड़ी वाली बातों से घर खरीदारों को बहलाया-फुसलाया और गैरकानूनी व धोखेपूर्ण तरीकों से आर्थिक लाभ उठाया। सीबीआई की जांच में ठोस सबूत मिले हैं और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की संबंधित धाराओं के तहत सक्षम अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई है। ये धाराएं आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और बेईमानी से चोरी की संपत्ति प्राप्त करने से संबंधित हैं। सीबीआई अभी देशभर में विभिन्न बिल्डर कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ 32 अन्य मामलों की जांच कर रही है। ये मामले माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर दर्ज किए गए हैं और इनमें घर खरीदारों से जुड़ी कथित धोखाधड़ी और फंड के गलत इस्तेमाल (डायवर्जन) के आरोप शामिल हैं। सीबीआई ने पहले रुद्र बिल्डवेल कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड, ड्रीम प्रोकॉन प्राइवेट लिमिटेड, जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड, एवीजे डेवलपर्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड, सीएचडी डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, सीक्वेल बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड, लॉजिक्स सिटी डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, मंजू जे होम्स इंडिया लिमिटेड, शुभकामना बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड, नाइनक्स डेवलपर्स लिमिटेड, डिसेंट बिल्डवेल प्राइवेट लिमिटेड, रुद्र बिल्डवेल प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, इथाका एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड, एलजीसीएल अर्बन होम्स (इंडिया) एलएलपी, साहा इंफ्राटेक प्राइवेट, लिमिटेड-मेसर्स एमकेएचएस हाउसिंग एलएलपी, ओजोन अर्बाना इंफ्रा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स अर्थकॉन यूनिवर्सल इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड और अजनारा इंडिया लिमिटेड के साथ-साथ कुछ बैंकों और वित्तीय निवेशकों के अधिकारियों के खिलाफ भी 20 अनचाहा एंजेल की जगहें हैं। इसी के साथ सीबीआई आर्थिक अपराधों, भ्रष्टाचार और जनता के साथ धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करने के अपने संकल्प को दोहराती है, खासकर उन मामलों में जो आम नागरिकों और घर खरीदारों के हितों पर बुरा असर डालते हैं।
टूरिज्म एक्सपो जापान 2026 में तमिलनाडु ने पेश की सांस्कृतिक और बौद्ध विरासत की झलक, पर्यटकों को लुभाने की तैयारी

टोक्यो। टोक्यो में आयोजित चार दिवसीय टूरिज्म एक्सपो जापान 2026 में तमिलनाडु ने अपनी सांस्कृतिक ताकत का दमदार प्रदर्शन किया। 24 से 27 सितंबर तक चले इस वैश्विक मेले में राज्य ने अपने प्राचीन मंदिरों, बौद्ध परंपरा से जुड़े स्थलों, विविध भू-दृश्यों, खान-पान, त्योहारों और नए पर्यटन अनुभवों को जापानी पर्यटन कारोबारियों के सामने रखा। तमिलनाडु के पैवेलियन का उद्घाटन जापान में भारत की राजदूत नगमा मोहम्मद मल्लिक ने किया। इस दौरान तमिलनाडु के पर्यटन विभाग की प्रधान सचिव डॉ. एस. स्वर्णा, केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय के अपर सचिव एवं महानिदेशक सुमन बिल्ला और राजस्थान की पर्यटन सचिव सुचि त्यागी भी मौजूद रहीं। समारोह में डॉ. स्वर्णा ने कहा कि जापान और तमिलनाडु बौद्ध विरासत की साझा डोर से बंधे हैं और यह एक्सपो जापानी सैलानियों को इस विरासत को करीब से देखने का न्योता है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की पहचान सिर्फ उसके ऐतिहासिक स्मारक नहीं, बल्कि हजारों साल पुरानी संगम साहित्य परंपरा भी है, जिसमें कुरिंजी (पर्वतीय), मुल्लई (वन), मरुथम (खेत), नेइथल (समुद्र तट) और पलाई (मरुस्थल) जैसे पांच पारिस्थितिक क्षेत्रों का उल्लेख है। यही विविधता तमिलनाडु को पहाड़ों की ट्रेकिंग से लेकर तटीय जीवन तक का अनूठा अनुभव बनाती है। उन्होंने बताया कि टोक्यो में जेएटीए और ओसाका में रोड-शो के जरिए तमिलनाडु जापानी पर्यटन उद्योग के साथ अपने रिश्ते मजबूत कर रहा है, जिसमें पर्यावरण और संस्कृति के अनुकूल टिकाऊ पर्यटन पर जोर है। इसी कड़ी में राज्य ने ‘डिस्कवर तमिलनाडु- इंटरनेशनल एडिशन 2026-27’ के लिए पंजीकरण शुरू किया है। यह विशेष एफएएम यात्रा 12 से 20 जनवरी 2027 तक पोंगल पर्व के दौरान आयोजित होगी, जिसमें दुनियाभर से 10 ट्रैवल इन्फ्लुएंसर, पत्रकार, टूर ऑपरेटर और एजेंटों को चुना जाएगा ताकि वे तमिलनाडु को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत कर सकें। टोक्यो एक्सपो में तमिलनाडु पर्यटन विभाग ने जापानी टूर ऑपरेटरों और निवेशकों के साथ जापान से पर्यटकों की आवक बढ़ाने पर गहन मंथन किया। राज्य ने जापानी उद्योग जगत के सामने हेरिटेज होटल, ईको-टूरिज्म, एडवेंचर और अनुभव आधारित पर्यटन में निवेश और साझेदारी के बड़े अवसर रखे। पर्यटकों ने तमिलनाडु की विरासत, प्राकृतिक और रोमांचक यात्राओं का जायजा लिया, जिसने वैश्विक स्तर पर राज्य की अपील को और मजबूत किया। दक्षिण भारत में बौद्ध धर्म के इतिहास में तमिलनाडु की भूमिका बेहद अहम रही है। कांचीपुरम, नागपट्टिनम और पूमपुहार जैसे प्राचीन बंदरगाह नगर कभी समुद्री और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के केंद्र थे, जहां से बौद्ध धर्म एशिया के कई देशों तक पहुंचा। कांचीपुरम से जुड़े महान बौद्ध भिक्षु बोधिधर्म की चीन यात्रा आज भी पूर्वी एशिया की बौद्ध परंपरा में सम्मान के साथ याद की जाती है। तमिलनाडु सात यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों का घर है। डिस्कवर तमिलनाडु एफएएम ट्रिप (12 से 20 जनवरी 2027) पोंगल के समय पर आयोजित की गई है ताकि प्रतिभागी त्योहार का प्रत्यक्ष अनुभव कर सकें।
यूएनएससी में सुधार के लिए आईबीएसए का अल्टीमेटम, भारत-ब्राजील को स्थायी सीट देने की मांग

नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी दस्तावेज के अनुसार 14वें भारत-ब्राजील-दक्षिण अफ्रीका (आईबीएसए) त्रिपक्षीय मंत्रिस्तरीय आयोग की बैठक न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र यूएनजीए81 के मौके पर हुई। बैठक में दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्री रोनाल्ड लामोला, भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और ब्राजील के विदेश मंत्री मौरो विएरा ने हिस्सा लिया। बैठक का मुख्य फोकस 4 बड़े मुद्दों पर रहा। यूएनएससी सुधार पर सख्त रुख: तीनों देशों ने सुरक्षा परिषद सुधार पर अंतर-सरकारी वार्ता (आईजीएन) में लगातार गतिरोध पर गहरी चिंता जताई। मंत्रियों ने कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक वास्तविकता के हिसाब से सुरक्षा परिषद को बदलना जरूरी है। इसके लिए यूएनजीए81 के दौरान ही औपचारिक, पाठ-आधारित (टेक्स्ट आधारित) वार्ता एक तय समय-सीमा के अंदर शुरू करने की मांग की। साथ ही कहा कि सुरक्षा परिषद की निष्क्रियता के कारण संयुक्त राष्ट्र के कामकाज को पंगु नहीं होने देना चाहिए, इसलिए महासभा के अधिकारों को मजबूत किया जाए। अफ्रीका को सुरक्षा परिषद में स्थायी प्रतिनिधित्व और भारत-ब्राजील की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का भी खुला समर्थन किया गया। क्रिटिकल मिनरल्स पर भारत की पहल को समर्थन: आईबीएसए ने जी20 के तहत भारत द्वारा प्रस्तावित महत्वपूर्ण खनिज परिपत्र पहल का औपचारिक समर्थन किया। इसका मकसद रीसाइक्लिंग, अर्बन माइनिंग और सेकंड-लाइफ बैटरी जैसी तकनीकों को बढ़ावा देना है ताकि ऊर्जा ट्रांजिशन और सप्लाई चेन मजबूत हो। मंत्रियों ने माना कि विकासशील खनिज उत्पादक देशों में निवेश की कमी और लोकल प्रोसेसिंग न होने की बड़ी चुनौती है, इसलिए खनिज संपन्न देशों में ही वैल्यू रिटेंशन बढ़ाने पर जोर दिया गया। आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस: मंत्रियों ने अप्रैल 2025 में पहलगाम, जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले में नागरिकों की जघन्य हत्या की कड़ी निंदा की। दोहरे मापदंड को खारिज करते हुए अल-कायदा, ISIS/दाइश, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद समेत सभी यूएन-सूचीबद्ध आतंकी संगठनों और प्रॉक्सी समूहों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की मांग की। साथ ही अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन (सीसीआईटी) को जल्द अपनाने का आह्वान किया। कुल मिलाकर यह बैठक ग्लोबल साउथ की एकजुटता, बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार और साउथ-साउथ सहयोग को नई गति देने के संकल्प के रूप में देखी जा रही है। बहुपक्षवाद और साउथ-साउथ सहयोग को मजबूती: तीनों मंत्रियों ने नियम आधारित बहुपक्षीय व्यवस्था, डब्ल्यूटीओ सुधार, सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) और जलवायु न्याय पर जोर दिया। आईबीएसए फंड के जरिए विकासशील देशों में गरीबी उन्मूलन और क्षमता निर्माण की परियोजनाओं को जारी रखने पर सहमति बनी। साथ ही ग्लोबल साउथ की आवाज को जी20, यूएन और अन्य वैश्विक मंचों पर और मजबूत करने का संकल्प लिया गया।
राज्यसभा चुनाव में भी भाजपा को हराएंगे, तीसरा प्रत्याशी भी उतारेगी सपा: मनोज पारस

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के विधायक मनोज पारस ने राज्यसभा चुनाव को लेकर हुई पार्टी की बैठक, पीडीए को मजबूत करने, चंद्रशेखर आजाद को लेकर मायावती की टिप्पणी, सपा पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान और इंडिया गठबंधन की प्रस्तावित बैठक पर टिप्पणी की। इस दौरान उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राज्यसभा चुनाव में भी पीडीए को मजबूत करने पर पार्टी का जोर रहेगा। राज्यसभा चुनाव को लेकर हुई बैठक के बारे में मनोज पारस ने कहा कि पीडीए को मजबूत करने को लेकर चर्चा हुई। इसका असर राज्यसभा चुनाव में भी देखने को मिलेगा। समाजवादी पार्टी पीडीए के माध्यम से भाजपा को हराने की दिशा में आगे बढ़ रही है। लोकसभा चुनाव में भाजपा को हराया गया और अब राज्यसभा चुनाव के साथ आने वाले 2027 के विधानसभा चुनाव में भी पीडीए के माध्यम से भाजपा को हराने का लक्ष्य है। उन्होंने दावा किया कि आगामी चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनेगी। राज्यसभा प्रत्याशियों के नामों को लेकर पूछे गए सवाल पर पारस ने कहा कि बैठक में इस विषय पर चर्चा हुई है। पार्टी तीसरा प्रत्याशी भी उतारने की तैयारी में है। अन्य नाम को लेकर चर्चा चल रही है। बसपा प्रमुख मायावती द्वारा सांसद चंद्रशेखर आजाद को लेकर की गई आलोचना पर मनोज पारस ने कहा कि वह मायावती के बयान पर टिप्पणी नहीं करना चाहते, लेकिन उन्होंने चंद्रशेखर आजाद पर युवाओं को भड़काने का आरोप लगाया। पारस ने कहा कि कई घटनाओं में पहले से योजना बनाकर युवाओं को वहां पहुंचाया जाता है और इसके बाद आक्रोशित युवा बैरिकेडिंग तोड़ने जैसी गतिविधियों में शामिल हो जाते हैं। इसके बाद युवाओं पर मुकदमे दर्ज होते हैं और इन मुकदमों का असर उनके भविष्य पर पड़ता है। मेरठ और इलाहाबाद में हुए मुकदमों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जिन युवाओं पर मामले दर्ज हुए, उन्हें बाद में किसी तरह की मदद नहीं मिली। इस तरह की गतिविधियों से दलित समाज के युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे किसी के धार्मिक प्रचार, सोशल मीडिया रील या भीड़ के प्रभाव में आकर ऐसा कोई कदम न उठाएं, जिससे उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हो जाए। उन्होंने कहा कि मुकदमा दर्ज होने के बाद इसका असर सरकारी या निजी नौकरी के चयन और वेरिफिकेशन जैसी प्रक्रियाओं पर पड़ सकता है। किसी व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा होने की स्थिति में उसके भविष्य पर असर पड़ सकता है और बाद में परिवार को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पारस ने खास तौर पर दलित, पिछड़े और मुस्लिम समाज के युवाओं से अपील की कि वे दिखावे, रील और भीड़ के पीछे चलकर अपना भविष्य खराब न करें। मुकदमा दर्ज होने के बाद उन्हें बचाने कोई नहीं आएगा। इंडिया गठबंधन की प्रस्तावित बैठक में समाजवादी पार्टी की भागीदारी को लेकर पारस ने कहा कि बैठक में कौन जाएगा, किसे अधिकृत किया जाएगा या राष्ट्रीय अध्यक्ष खुद जाएंगे, इसका फैसला पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का अधिकार है। इस संबंध में वह कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते, क्योंकि यह निर्णय पार्टी नेतृत्व को लेना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा समाजवादी पार्टी के नेताओं को ‘गिरगिट की तरह रंग बदलने वाला’ बताए जाने के सवाल पर मनोज पारस ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि कौन गिरगिट की तरह रंग बदलता है, यह जनता अच्छी तरह देख रही है। जनता के सामने सब कुछ स्पष्ट है और मीडिया भी इसे दिखा रहा है। इसलिए यह बताने की जरूरत नहीं है कि गिरगिट की तरह रंग कौन बदलता है।
वित्त मंत्री सीतारमण ने जॉर्डन की मंत्री से की मुलाकात, कई क्षेत्रों में आपसी सहयोग को मजबूत करने पर हुई चर्चा

नई दिल्ली। वित्त मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कतर के दोहा में एआईआईबी 2026 की सालाना बैठक के दौरान जॉर्डन की एमओपीआईसी (योजना और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग मंत्रालय) की मंत्री जेइना जैद तौकान से मुलाकात की। इस दौरान, दोनों मंत्रियों ने भारत और जॉर्डन के बीच कई क्षेत्रों में आपसी सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की। वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज कतर के दोहा में एआईआईबी 2026 की सालाना बैठक के दौरान जॉर्डन की एमओपीआईसी की मंत्री जेइना जैद तौकान से मुलाकात की।” मंत्रालय ने बताया कि दोनों मंत्रियों ने भारत और जॉर्डन के बीच कई क्षेत्रों में आपसी सहयोग को, मजबूत करने पर चर्चा की, खासकर खाद्य सुरक्षा, उर्वरक, व्यापार और निवेश के मामलों में। केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि भारत जॉर्डन का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और 2030 तक आपसी व्यापार को बढ़ाकर 5 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य पर जोर दिया। जेइना ज़ैद तौकान ने कहा कि भारत जॉर्डन के लिए एक अहम बाजार है और जॉर्डन उर्वरक, ऊर्जा, पानी और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं सहित कई क्षेत्रों में सहयोग जारी रखने और उसे मजबूत करने का इच्छुक है, साथ ही वे जॉर्डन में निवेश के और मौकों की उम्मीद कर रहे हैं। इससे पहले, सोमवार को एक बयान में कहा गया था कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (एआईआईबी) की 11वीं वार्षिक बैठक में भाग लेने के लिए कतर पहुंच गई हैं। वित्त मंत्रालय ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “केंद्रीय वित्त मंत्री अगले दो दिनों के दौरान दोहा में एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (एआईआईबी) की 11वीं वार्षिक बैठक और एआईआईबी इन्वेस्टर्स डायलॉग 2026 में भाग लेंगी।” वह एआईआईबी के अध्यक्ष के साथ-साथ जॉर्डन, स्विट्जरलैंड, अल्जीरिया, सऊदी अरब और नेपाल के अपने समकक्षों के साथ अन्य महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगी। वित्त मंत्री एआईआईबी में भारत के गवर्नर के रूप में बैंक की वार्षिक बैठक में भाग लेंगी। आधिकारिक यात्रा के दौरान वित्त मंत्री कतर सरकार के शीर्ष नेतृत्व से भी मुलाकात करेंगी। इसके अलावा, वह कतर के कारोबारी नेताओं और निवेशकों के साथ भी बातचीत करेंगी। एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक एक बहुपक्षीय विकास बैंक है, जो एशिया और दुनिया भर में आर्थिक एवं सामाजिक परिस्थितियों में सुधार के लिए सड़कों, स्वच्छ ऊर्जा और जल प्रणालियों जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के निर्माण के लिए वित्त पोषण करता है। बीजिंग में मुख्यालय वाले इस बैंक जनवरी 2016 में 100 अरब डॉलर की पूंजी के साथ काम शुरू किया था। बैंक के 111 स्वीकृत सदस्य देश हैं। बैंक के प्रमुख क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और पर्यावरण की रक्षा करने वाली परियोजनाओं के लिए वित्त पोषण करना, परिवहन एवं डिजिटल नेटवर्क को बेहतर बनाना और देशों के बीच जल संबंधी बुनियादी ढांचे को मजबूत करना शामिल है। इसके अलावा, बैंक बड़े पैमाने पर सार्वजनिक और निजी विकास परियोजनाओं के वित्त पोषण के लिए निजी निवेशकों के साथ भी काम करता है। भारत और कतर के बीच मजबूत द्विपक्षीय ऊर्जा संबंध हैं। भारत की पेट्रोनेट एलएनजी और कतरएनर्जी के बीच 20 साल का एलएनजी समझौता है, जिसके तहत 2028 से 2048 तक हर साल 75 लाख टन एलएनजी की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।
चुनाव आयोग में नियमित संवाद और बैठकों से सुलझते थे मतभेद : पूर्व सीईसी एसवाई कुरैशी

नई दिल्ली। भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों और बैठकों को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान आयोग में नियमित रूप से बैठकें होती थीं और किसी भी मुद्दे पर मतभेद होने की स्थिति में उन्हें बातचीत के जरिए सुलझाने का प्रयास किया जाता था। एसवाई कुरैशी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में जब कोई चुनाव नहीं होता था, तब भी चुनाव आयोग के सदस्य सप्ताह में कम से कम दो बार बैठक करते थे। चुनाव के दौरान बैठकों की आवृत्ति बढ़ जाती थी तथा सदस्य लगभग रोजाना मिलते थे। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग का काम एक गंभीर संवैधानिक जिम्मेदारी है और इसके लिए सदस्यों के बीच नियमित संवाद जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) यह कहती है कि उनके कार्यकाल के दौरान भी आयोग के सदस्यों के बीच मतभेद होते थे, तो यह बात सही हो सकती है। उन मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिश की जाती थी। यदि किसी मुद्दे पर सहमति नहीं बनती थी, तो बहुमत के आधार पर निर्णय लिया जाता था। कुरैशी ने कहा कि चुनाव आयोग तीन सदस्यीय संस्था है और तीनों सदस्यों के मतों का समान महत्व होता है। उन्होंने कहा कि यदि मुख्य चुनाव आयुक्त की राय बाकी सदस्यों से अलग भी हो जाए, तो संस्थागत निर्णय तीनों सदस्यों के मतों के आधार पर लिया जाता है। अंतिम निर्णय को चुनाव आयोग का सामूहिक निर्णय माना जाता है। हाल में हुई चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस और उसमें सामने आए नोट्स का जिक्र करते हुए कुरैशी ने सवाल उठाया कि यदि अब आयोग की ओर से नियमित बैठकें करने, बैठक की कार्यवाही (मिनट्स) जारी करने और अधिकारियों को सदस्यों की बात सुनने की बात कही जा रही है, तो क्या इसका मतलब यह है कि पहले ऐसा नहीं होता था? उन्होंने कहा कि इन बातों से आयोग के भीतर की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल सामने आते हैं। भविष्य में व्यवस्था सुधारने की बात अपनी जगह है, लेकिन यह भी बताया जाना चाहिए कि अतीत में जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई या उसे ठीक करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने चुनाव आयोग में पारदर्शिता, नियमित संवाद और सामूहिक निर्णय प्रक्रिया के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाओं में आपसी समन्वय और विश्वास बनाए रखना जरूरी है।
स्पेसएक्स का स्टारशिप उपग्रह कक्षा में पहुंचा, 26 अगली पीढ़ी के स्टारलिंक उपग्रहों को किया तैनात

नई दिल्ली। एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने सोमवार को अंतरिक्ष अभियान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। कंपनी का विशाल अंतरिक्ष यान स्टारशिप सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा में पहुंच गया और इसके साथ ही उसने 26 अगली पीढ़ी के स्टारलिंक वी3 उपग्रहों की सफल तैनाती भी की। यह उपलब्धि चंद्रमा और मंगल ग्रह के भविष्य के अभियानों के लिए पूरी तरह पुन: उपयोग योग्य प्रक्षेपण प्रणाली विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। हालांकि मिशन पूरी तरह सहज नहीं रहा। उड़ान के दौरान वाहन के छह रैप्टर वैक्यूम (आरवी) इंजनों में से एक इंजन बंद हो गया, जिससे मिशन कंट्रोल टीम के सामने कुछ समय के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा हो गई। लेकिन शेष इंजनों के प्रदर्शन और उनकी स्थिति का मूल्यांकन करने के बाद इंजीनियरों ने मिशन को जारी रखने का निर्णय लिया और अंतरिक्ष यान को सफलतापूर्वक कक्षा तक पहुंचाया। स्पेसएक्स के अनुसार, स्टारशिप लगभग 10 घंटे की उड़ान के दौरान पृथ्वी की छह परिक्रमाएं पूरी करेगा और इसके बाद चिली के पश्चिम में प्रशांत महासागर में नियंत्रित लैंडिंग (स्प्लैशडाउन) करेगा। कंपनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि “सभी 26 स्टारलिंक वी3 परिचालन उपग्रह सफलतापूर्वक तैनात कर दिए गए हैं और सामान्य रूप से कार्य कर रहे हैं।” इस मिशन का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य नई पीढ़ी के स्टारलिंक वी3 उपग्रहों को अंतरिक्ष में स्थापित करना था। स्पेसएक्स का कहना है कि ये उपग्रह वैश्विक इंटरनेट सेवा की गति, नेटवर्क की विश्वसनीयता और सिस्टम की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार लाएंगे। तकनीकी रूप से स्टारलिंक वी3 उपग्रह पिछले संस्करणों की तुलना में कहीं अधिक उन्नत हैं। कंपनी के अनुसार, प्रत्येक उपग्रह 1 टेराबिट प्रति सेकंड (टीबीपीएस) तक की डाउनलिंक क्षमता और 160 गीगाबिट प्रति सेकंड (जीबीपीएस) तक की अपलिंक क्षमता प्रदान करने में सक्षम है। यह स्टारलिंक वी2 उपग्रहों की तुलना में डाउनलिंक क्षमता में लगभग 10 गुना और अपलिंक प्रदर्शन में 22 गुना वृद्धि दर्शाता है। तैनाती के बाद उपग्रह अपने एंटेना खोलेंगे, सौर पैनलों को विस्तारित करेंगे और रेडियो फ्रीक्वेंसी तथा लेजर लिंक के माध्यम से ग्राउंड स्टेशनों और व्यापक स्टारलिंक नेटवर्क से प्रारंभिक संपर्क स्थापित करेंगे। इसके बाद वे अपने ऑनबोर्ड थ्रस्टर्स की मदद से धीरे-धीरे निर्धारित परिचालन कक्षा तक पहुंचेंगे। स्पेसएक्स ने बताया कि वी3 उपग्रहों की बेहतर क्षमता का आधार कंपनी द्वारा विकसित अगली पीढ़ी के बीमफॉर्मिंग चिप्स हैं। यह तकनीक विभिन्न डेटा बीमों के बीच ट्रैफिक को अधिक कुशलता से संचालित करने में सक्षम है और पहले के सिस्टम की तुलना में मॉडेम थ्रूपुट क्षमता को 64 गुना तक बढ़ाती है। कंपनी का कहना है कि इससे घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ दूरदराज और कम कनेक्टिविटी वाले इलाकों में भी बेहतर इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। साथ ही नेटवर्क मांग के अनुसार अपनी क्षमता को गतिशील रूप से समायोजित करने में सक्षम होगा।
दिल्ली में आप विधायक जरनैल सिंह के खिलाफ एफआईआर, पीडब्ल्यूडी इंजीनियरों ने दर्ज कराई शिकायत

नई दिल्ली। दिल्ली के तिलक नगर में सड़क निर्माण कार्य को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल समेत तमाम आप नेता और कार्यकर्ता सोमवार को घटनास्थल पर पहुंचे और भाजपा पर तीखा हमला बोला। दिल्ली में पीडब्ल्यूडी इंजीनियरों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने आप विधायक जरनैल सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। मिली जानकारी के मुताबिक, विधायक जरनैल सिंह के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने और डराने-धमकाने से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। एक बयान में कहा गया है कि पीडब्ल्यूडी के असिस्टेंट इंजीनियर की शिकायतों के आधार पर कानून की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। इस घटना के संबंध में कुछ अन्य शिकायतें भी मिली हैं, जिन पर जांच के दौरान कार्रवाई की जाएगी। यह एफआईआर ऐसे समय में दर्ज हुई है, जब पश्चिमी दिल्ली के तिलक नगर इलाके में सड़क निरीक्षण के दौरान हुए विवाद को लेकर आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच राजनीतिक घमासान जारी है। इससे पहले सड़क निरीक्षण के दौरान दिल्ली के उपमुख्यमंत्री और लोक निर्माण विभाग का जिम्मा संभाल रहे प्रवेश वर्मा पर साहिब सिंह नाम के शख्स को थप्पड़ मारने का आरोप लगा था। घटना के बाद साहिब सिंह ने प्रवेश वर्मा के इस्तीफे और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। उनका दावा था कि वह घटना के समय आप विधायक जरनैल सिंह के इंस्टाग्राम पेज पर लाइव वीडियो बना रहे थे। साहिब सिंह के मुताबिक, वह विधायक जरनैल सिंह के साथ वहां गया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि सड़क की खराब गुणवत्ता दिखाने के दौरान विवाद हुआ और प्रवेश वर्मा ने पहले उनका मोबाइल नीचे किया और फिर उन्हें थप्पड़ मार दिया। प्रवेश वर्मा ने अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब देते हुए दावा किया था कि युवक ने उनके परिवार के सदस्यों के लिए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया था और उन्होंने उसी पर प्रतिक्रिया दी थी। युवक ने इस आरोप से इनकार किया था। घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया। आम आदमी पार्टी ने प्रवेश वर्मा के खिलाफ कार्रवाई की मांग की । अब इसी घटनाक्रम के बीच पीडब्ल्यूडी इंजीनियरों की शिकायत पर आप विधायक जरनैल सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। उन पर सरकारी काम में बाधा डालने और डराने-धमकाने के आरोप लगाए गए हैं।
आईएसआईएस से जुड़े ‘वॉयस ऑफ हिंद’ मॉड्यूल पर बड़ा फैसला, एनआईए कोर्ट ने चार दोषियों को सुनाई सजा

नई दिल्ली। दिल्ली की राऊज एवेन्यू जिला अदालत परिसर स्थित एनआईए की विशेष अदालत ने सोमवार को प्रतिबंधित आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट इन इराक एंड सीरिया (आईएसआईएस) से जुड़े ‘वॉयस ऑफ हिंद’ आतंकी साजिश मामले में चार दोषियों को सजा सुनाई। एनआईए के अनुसार, उमर निसार उर्फ कासिम खुरासानी, रमीज अहमद लोन और तनवीर अहमद भट को छह-छह साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। वहीं अफशान परवेज जराबी को पांच साल के कठोर कारावास की सजा दी गई है। अदालत ने उमर निसार पर 36 हजार रुपए, रमीज अहमद लोन पर 31 हजार रुपए, तनवीर अहमद भट पर 23 हजार रुपए और अफशान परवेज जराबी पर 9 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। चारों आरोपियों को विशेष अदालत ने इससे पहले 17 सितंबर को दोषी ठहराया था। अदालत ने उन्हें आपराधिक साजिश और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए तथा भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत अलग-अलग अपराधों का दोषी पाया था। एनआईए के मुताबिक मामला आईएसआईएस से जुड़ी सामग्री के प्रसार, युवाओं को कट्टरपंथ की ओर ले जाने, उनकी भर्ती करने और प्रतिबंधित आतंकी संगठन की गतिविधियों को आगे बढ़ाने से जुड़ा है। एनआईए के केस के मुताबिक, साजिश का उद्देश्य भारत में युवाओं को कट्टरपंथ की ओर ले जाकर उनकी भर्ती करना और उन्हें भारत के खिलाफ हिंसक गतिविधियों के लिए प्रेरित करना था। जांच एजेंसी के अनुसार, अलग-अलग संघर्ष वाले क्षेत्रों से काम कर रहे आईएसआईएस से जुड़े लोगों ने भारत में मौजूद अपने सदस्यों के साथ मिलकर फर्जी ऑनलाइन पहचान के जरिए एक नेटवर्क तैयार किया था। इसका इस्तेमाल आईएसआईएस से जुड़े प्रचार के प्रसार के लिए किया जाता था। एनआईए ने दावा किया कि ऑनलाइन गतिविधियों के साथ जमीन पर आतंकी फंडिंग से जुड़ी गतिविधियां भी की जा रही थीं। एनआईए की जांच में सामने आया कि इस नेटवर्क से जुड़े लोग भारत केंद्रित आईएसआईएस प्रचार पत्रिका ‘सौत-अल-हिंद (द वॉयस ऑफ हिंद)’ के लिए सामग्री तैयार करने, उसे संपादित करने, प्रकाशित करने और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए फैलाने में शामिल थे। जांच एजेंसी के अनुसार, यह नेटवर्क भारतीयों को सीरिया, इराक और अफगानिस्तान समेत आईएसआईएस से प्रभावित अन्य क्षेत्रों में जाने के लिए प्रेरित करने और इसमें मदद करने का भी काम करता था। एनआईए ने जांच के दौरान बड़ी संख्या में आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल सामग्री बरामद करने का दावा किया। इनमें ‘वॉयस ऑफ हिंद’ की पीडीएफ, मारे गए आतंकियों के पोस्टर, कट्टरपंथ से जुड़ी सामग्री, आईएसआईएस के प्रचार से जुड़े वेब लिंक, आईएसआईएस के झंडे वाली टी-शर्ट, हथियार हासिल करने से संबंधित चैट और ऑडियो रिकॉर्डिंग तथा आईएसआईएस के बैनर और झंडे शामिल थे। एजेंसी के मुताबिक, अदालत ने चारों दोषियों की अलग-अलग भूमिकाओं को भी माना है। उमर निसार को ‘वॉयस ऑफ हिंद’ पत्रिका, टेलीग्राम और अन्य ऑनलाइन माध्यमों के जरिए आईएसआईएस से जुड़ी सामग्री फैलाने और युवाओं को संगठन से जोड़ने की गतिविधियों में शामिल पाया गया। रमीज अहमद लोन और तनवीर अहमद भट को आईएसआईएस की विचारधारा का प्रचार करने और युवाओं को कट्टरपंथ की ओर ले जाकर संगठन में शामिल होने के लिए प्रेरित करने में शामिल पाया गया। वहीं, अफशान परवेज जराबी को टेलीग्राम चैनलों के जरिए ‘वॉयस ऑफ हिंद’ पत्रिका के लिए लेख प्रकाशित और प्रसारित करने के साथ आईएसआईएस की विचारधारा का प्रचार करने और युवाओं को संगठन में शामिल होने के लिए प्रेरित करने में शामिल पाया गया। एनआईए ने इस मामले में कुल आठ आरोपियों के खिलाफ एक मुख्य चार्जशीट और चार सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, जांच में आरोपियों के आईएसआईएस के ‘वॉयस ऑफ हिंद’ मॉड्यूल से जुड़े होने और ऑनलाइन गतिविधियों के जरिए प्रतिबंधित आतंकी संगठन के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका सामने आई। मामले में बाकी आरोपियों के खिलाफ सुनवाई अभी जारी है।
बांग्लादेश: पुलिस ने राजनीतिक दल के कार्यालय पर मारा छापा, 27 को भेजा जेल

ढाका। बांग्लादेश की एक राजनीतिक पार्टी जातीय समाजतांत्रिक दल (जासद) के कार्यालय से पकड़े गए 27 लोगों को जेल भेज दिया गया है। ढाका की एक अदालत ने ये फैसला सुनाया। सभी को पार्टी के केंद्रीय कार्यालय से हिरासत में लिया गया था। ढाका के एडिशनल चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट जशिता इस्लाम ने रविवार को यह आदेश तब दिया जब पुलिस ने उन्हें कोर्ट में पेश किया और उन्हें हिरासत में रखने की मांग की। बांग्लादेशी मीडिया आउटलेट बीडीन्यूज24 की रिपोर्ट के मुताबिक, अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि हिरासत में लिए गए लोगों ने जासद ऑफिस के अंदर “अस्थिर और अव्यवस्थित माहौल” बनाया और “जॉय बांग्ला” के नारे लगाए। शनिवार को, पुलिस ने ढाका के गुलिस्तान में जासद हेडक्वार्टर पर एक बड़े छापे के दौरान सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया। पुलिस का आरोप था कि अवामी लीग के नेता और कार्यकर्ता वहां एक “गुप्त बैठक” के लिए जमा हुए थे, जबकि जासद ने इस दावे को खारिज कर दिया। खबरों के मुताबिक, यह घटना तब हुई जब बीएनपी और उसके युवा विंग ‘जुबो दल’ के कार्यकर्ताओं ने जासद हेडक्वार्टर को घेर लिया और ऑफिस में घुस गए। उनका आरोप था कि वहां एक गुप्त बैठक में अवामी लीग के सदस्य मौजूद थे। इसके बाद पुलिस ने इमारत में धावा बोला और लोगों को हिरासत में लेना शुरू कर दिया। बांग्लादेशी दैनिक ‘ढाका ट्रिब्यून’ की रिपोर्ट के अनुसार, जासद ने इसे प्रतिनिधियों की पहले से तय बैठक बताया था, लेकिन पुलिस की कार्रवाई ने इसे राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के एक बड़े ऑपरेशन में बदल दिया। इस घटना के बाद, बांग्लादेश की अवामी लीग ने जासद के केंद्रीय कार्यालय पर हुए “शर्मनाक हमले, तोड़फोड़ और कब्जे” तथा पार्टी की प्रतिनिधि बैठक में मौजूद नेताओं के अंधाधुंध सामूहिक हिरासत की कड़ी निंदा की। गहरी चिंता व्यक्त करते हुए, अवामी लीग ने आरोप लगाया कि यह हमला पुलिस की सुरक्षा में बीएनपी और जुबो दल के कार्यकर्ताओं द्वारा दिन-दहाड़े “फासीवादी तरीके” से किया गया। पार्टी ने कहा, “यह हमला बांग्लादेश के लिए एक चेतावनी का संकेत है। हमने बार-बार कहा है कि लोकतंत्र के बैनर तले काम करने के बावजूद, बीएनपी मूल रूप से एक लोकतंत्र-विरोधी ताकत है। छावनी (कैंटोनमेंट) में पैदा हुई यह पार्टी कभी भी लोगों के संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों में विश्वास नहीं करती है। चाहे वह इसे कितना भी छिपाने की कोशिश करे, उसका फासीवादी चरित्र समय-समय पर सामने आ ही जाता है।” पार्टी ने आगे कहा, “इस हमले और गिरफ्तारी से पत्रकार भी नहीं बच पाए। इस हमले, कब्जे और गिरफ्तारी के जरिए बीएनपी का असली चेहरा एक बार फिर लोगों के सामने आ गया है।” अवामी लीग ने कहा है कि 5 अगस्त, 2024 को हुए राजनीतिक बदलाव के बाद से बांग्लादेश में “धर्मनिरपेक्ष और प्रगतिशील लोकतांत्रिक राजनीतिक ताकतों” को खत्म करने की योजना पर काम किया जा रहा है। पार्टी ने देश भर में अवामी लीग और मुक्ति संग्राम (लिबरेशन वॉर) का समर्थन करने वाली अन्य राजनीतिक पार्टियों के दफ्तरों में तोड़-फोड़, आगजनी और उन पर कब्जा करने की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसा माहौल एक आजाद और लोकतांत्रिक देश की राजनीतिक संस्कृति के लिए बहुत बड़ा खतरा है और यह बहु-दलीय राजनीति के रास्ते में बाधा डालता है। पार्टी ने कहा, “फिर भी, धांधली वाले चुनाव के जरिए सत्ता में आई तथाकथित राजनीतिक पार्टी खुद को बहु-दलीय लोकतंत्र का सबसे बड़ा समर्थक बताती है। असल में, उनके बहु-दलीय लोकतंत्र का मतलब है राजनीति में आजादी-विरोधी और प्रतिक्रियावादी ताकतों को फिर से स्थापित करना और यह बात अब देश की जनता को साफतौर पर समझ आ गई है।