सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक और याचिका, चुनाव आयोग के कामों को लेकर न्यायिक जांच की मांग

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को एक और याचिका दाखिल की गई, भारतीय निर्वाचन आयोग के कार्य करने के तरीकों और रिकॉर्ड की न्यायिक या एसआईटी जांच की मांग की गई है। राकेश कुमार सिंह उर्फ ​​राकेश सिंह नाम के व्यक्ति ने यह याचिका दाखिल की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कई सदस्यों वाली संस्था के तौर पर पोल पैनल को मिली शक्तियों का इस्तेमाल, संविधान के आर्टिकल 324 और 2023 एक्ट के सेक्शन 18 के तहत तय सामूहिक फैसले लेने की प्रक्रिया का पालन किए बिना किया गया। याचिका में फॉर्म-6 में जुलाई 2026 में किए गए बदलाव और कुछ दूसरी कार्रवाइयों को रद्द करने की मांग की गई है। इसमें कहा गया है कि अगर रिकॉर्ड में बिना इजाजत के फैसले लेने का खुलासा होता है तो न्यायिक आयोग या एसआईटी से जांच कराई जाए। याचिका में इससे संबंधित रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने, फॉर्म-6 में और बड़े बदलावों पर रोक लगाने,और मुख्य चुनाव आयोग (सीईसी) को कार्रवाई पेंडिंग रहने तक अपने काम करने से रोकने का निर्देश देने की भी मांग की गई है। याचिका में इस बात पर जोर दिया गया है कि ‘मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023’ के अनुसार, ईसीआई का कामकाज जहां तक ​​संभव हो, आम सहमति से किया जाना चाहिए। और अगर किसी मामले पर मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की राय अलग-अलग होती है, तो उस मामले का फैसला बहुमत की राय के आधार पर किया जाए। याचिका में यह निर्देश देने की भी मांग की गई है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत की गई सभी कार्रवाइयां, फैसले, निर्देश और उससे जुड़े उपाय शुरू से ही शून्य और बिना कानूनी अधिकार के माने जाएं।

अजित पवार को याद कर भावुक हुईं उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा, कहा-आपको कभी न भूल पाएंगे

बारामती। महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजितदादा पवार ने सोमवार सुबह बारामती स्थित विद्या प्रतिष्ठान परिसर में दिवंगत लोकनेता अजितदादा पवार के स्मृतिस्थल पर जाकर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। अजित पवार की हादसे में हुई मौत के आठ महीने बाद सुनेत्रा पवार ने स्मृतिस्थल पर पहुंचकर पुष्प अर्पित किए और उनकी स्मृतियों को नमन किया। इसके बाद सुनेत्रा पवार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक भावुक संदेश भी लिखा। उन्होंने कहा, “दादा… मेरा दिल अभी भी यह मानने को तैयार नहीं है कि आप हमारे बीच नहीं रहे। आज, जब मैं विद्या प्रतिष्ठान में बने आपके स्मारक पर श्रद्धा से सिर झुका रही हूं, तो अपने दिल की गहरी भावनाएं आप तक पहुंचा रही हूं।” उन्होंने कहा, “आठ महीने बीत चुके हैं… फिर भी, हर पार्टी कार्यकर्ता और हर आम नागरिक की जुबान पर बस एक ही शब्द है – ‘दादा’! यह एक शब्द आपके प्रति उनके प्यार, भरोसे और जुड़ाव को बयां करता है। आज, मैं उन्हीं भावनाओं को अपने दिल में लिए आपके सामने खड़ी हूं।” उन्होंने कहा, “आपके जाने के बाद, आपकी जीवनसंगिनी के तौर पर इस जिम्मेदारी को संभालते हुए, मेरा एक ही संकल्प है-आपके देखे हुए सपनों को पूरा करना और इंसानियत की उस विरासत को आगे बढ़ाना जिसे आप बहुत मानते थे। आपने जो सीख दी और लोगों के साथ जो रिश्ता बनाया, उसे मैं जीवन भर पूरे दिल से संजोकर रखूंगी।” बता दें कि अजित पवार का 28 जनवरी 2026 को एक विमान हादसे में निधन हो गया था। बारामती से पुणे आते समय उनका विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें उनका असामयिक निधन हो गया था। उनके निधन से पूरे महाराष्ट्र की राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई थी। अजितदादा पवार को महाराष्ट्र के एक कद्दावर नेता के रूप में जाना जाता था। उन्होंने राज्य के उपमुख्यमंत्री के तौर पर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली थीं।

ताजमहल की सुरक्षा को लेकर बड़ी मॉक ड्रिल, आतंकी हमले की स्थिति से निपटने का हुआ अभ्यास

आगरा। दुनिया के सात अजूबों में शामिल आगरा के ताज महल की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए कई एजेंसियों ने मिलकर एक बड़ी मॉक ड्रिल की। यह अभ्यास ताज महल के रिवरसाइड इलाके में किया गया, जहां हथियारों से लैस आतंकी हमले की स्थिति बनाकर सुरक्षा एजेंसियों की तैयारियों को परखा गया। इस संबंध में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के आधिकारिक ‘एक्स’ अकाउंट पर पोस्ट करते हुए जानकारी दी गई। सीआईएसएफ ने लिखा, “आगरा के ताजमहल में सुरक्षा तैयारियों को मज़बूत करने के लिए कई एजेंसियों की मॉक ड्रिल की गई।” सीआईएसएफ के मुताबिक इस मॉक ड्रिल में सीआईएसएफ के साथ-साथ यूपी पुलिस, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) मैनेजमेंट, फायर सर्विस, बम डिस्पोजल स्क्वॉड (बीडीडीएस), डॉग स्क्वॉड, लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (एलआईयू) और मेडिकल टीम ने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। ड्रिल के दौरान दो आतंकवादियों द्वारा हथियारों से लैस हमले की काल्पनिक स्थिति बनाई गई। हमले की सूचना मिलते ही तुरंत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) लागू किए गए और सभी एजेंसियों ने मिलकर संयुक्त कार्रवाई की। अभ्यास के दौरान सीआईएसएफ की क्विक रिस्पॉन्स टीम (क्यूआरटी) ने सबसे पहले खतरे को रोका और मोर्चा संभाला। इसके बाद असॉल्ट पार्टी ने जवाबी कार्रवाई करते हुए दोनों आतंकवादियों को मार गिराया। इस दौरान यूपी पुलिस ने ताज महल के बाहरी इलाके की घेराबंदी कर रखी थी ताकि कोई संदिग्ध बाहर न भाग सके। आतंकियों को मार गिराने के बाद सीआईएसएफ, यूपी पुलिस, बीडीडीएस और डॉग स्क्वॉड ने मिलकर पूरे परिसर में सर्च ऑपरेशन चलाया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं कोई विस्फोटक या अन्य खतरा तो नहीं छिपा है। सीआईएसएफ ने बताया कि यह पूरा अभ्यास आगरा में सीआईएसएफ यूनिट ताज महल के कमांडेंट ऋषि कौशिक की देखरेख में किया गया। इस मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य ऑपरेशनल तैयारी, विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देने के तरीकों की जांच करना था। बता दें कि ताजमहल देश के सबसे संवेदनशील और हाई-सिक्योरिटी स्मारकों में से एक है। यहां हर दिन हजारों देशी-विदेशी पर्यटक आते हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियां समय-समय पर इस तरह की मॉक ड्रिल करती रहती हैं ताकि किसी भी आतंकी खतरे या आपात स्थिति से निपटा जा सके।

‘दृढ़ संकल्प और सादगी का संगम थे अशोक सिंहल’, जन्मशताब्दी पर पीएम मोदी ने लिखा भावुक लेख

नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ प्रचारक और विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंहल के जन्मशताब्दी वर्ष के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके जीवन, व्यक्तित्व और राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण पर एक विशेष लेख लिखा है। पीएम मोदी ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस लेख का लिंक शेयर किया। पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, “अशोक सिंहल का व्यक्तित्व दृढ़ संकल्प और सादगी का अद्भुत संगम था। संगठन के कार्यों के प्रति उनकी निष्ठा, आध्यात्मिक आस्था और सामाजिक एकता के लिए समर्पण हर किसी को प्रेरित करता रहेगा। उनके जीवन और विचारों को समर्पित मेरा यह आलेख…” अपने विस्तृत आलेख में पीएम मोदी ने अशोक सिंहल को युगपुरुष बताते हुए उनके साथ जुड़े व्यक्तिगत संस्मरणों को भी साझा किया। पीएम मोदी ने अपने आलेख की शुरुआत एक सुंदर सुभाषित से की। उन्होंने लिखा, “एक बहुत सुंदर सुभाषित है, ‘वृक्ष कबहुं नहिं फल भखै, नदी न संचै नीर। परमारथ के कारने, साधुन धरा शरीर।’ इसका मतलब है कि पेड़ कभी अपने फल स्वयं नहीं खाता, नदी अपना जल अपने पास नहीं रखती। इसी तरह, संत स्वभाव के लोग भी स्वयं को प्राथमिकता न देते हुए, सदैव दूसरों की सेवा के लिए तत्पर रहते हैं, अपना जीवन लोक कल्याण के लिए समर्पित कर देते हैं। सदियों से हमारे ऋषियों ने हमें यही सिखाया है कि मानवता के कल्याण के लिए समर्पित जीवन का महत्व व्यक्तिगत उपलब्धियों से कहीं अधिक होता है। श्रद्धेय अशोक सिंहल का जीवन इस भावना का पुण्य उदाहरण है।” पीएम ने बताया कि 27 सितंबर से हम अशोक सिंहल का जन्म-शताब्दी वर्ष मना रहे हैं। यह एक महान विभूति के सम्मान का सुअवसर है। उन्होंने आध्यात्मिक साधना, सांस्कृतिक जागरण और दशकों तक समर्पित भाव से समाज एवं संगठन के कार्यों को आगे बढ़ाया। प्रधानमंत्री ने अपने युवा कार्यकर्ता जीवन का एक प्रसंग याद किया। उन्होंने लिखा, “यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि मुझे अशोक सिंहल जी के साथ लंबे समय तक कार्य करने, उनसे सीखने, उनसे संवाद करने और उनका स्नेह प्राप्त करने का अवसर मिला। मुझे 1981 का एक प्रसंग याद आता है। उस समय मैं एक युवा कार्यकर्ता के तौर पर संगठन की ओर से मिली जिम्मेदारियां निभा रहा था। तब मुझे अशोक जी का हाथ से लिखा एक पत्र मिला। उन्होंने पत्र में आने वाले एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी थी और मुझे कुछ जिम्मेदारियां सौंपी थीं। उस समय अशोक सिंहल से पत्र पाना, मेरे लिए बहुत विशेष और यादगार क्षण बन गया था।” पीएम मोदी ने लिखा कि उन्होंने अशोक जी को कई दशकों तक दिन-रात काम करते देखा। वे देश के दूरदराज क्षेत्रों की लंबी और कई बार कठिन यात्राएं किया करते थे। गुजरात के आदिवासी क्षेत्रों में जाना उन्हें विशेष रूप से प्रिय था। वे लगातार इस पर चिंतन करते थे कि समाज के वंचित और अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों के लिए और क्या किया जा सकता है। जब भी देश में कहीं प्राकृतिक आपदा आती, तो अशोक सिंहल जी सबसे पहले वहां पहुंचने वालों में होते। पीएम ने 2001 के कच्छ भूकंप का जिक्र करते हुए लिखा, “वर्ष 2001 में कच्छ में आए भूकंप के बाद उनके साथ का मेरा अनुभव अविस्मरणीय बन गया।” पीएम ने अशोक सिंहल के परिवार की पृष्ठभूमि का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि अशोक सिंहल जी अत्यंत प्रतिष्ठित और संपन्न परिवार से थे। उनके पिता महावीर जी की एक प्रशासक के रूप में पहचान थी। उनके एक भाई बीपी सिंहल पुलिस अधिकारी बने और बाद में संसद सदस्य भी रहे। दूसरे भाई वी.पी. सिंहल त्रिपुरा के तब मुख्य सचिव बने, जब यह नया राज्य बना था। परिवार के अन्य सदस्यों ने भी कॉमर्स और कृषि के क्षेत्र में सफलता हासिल की। हालांकि शुरू से ही अशोक जी का झुकाव बिल्कुल अलग दिशा में था। बहुत कम उम्र में ही उनके व्यवहार में दूसरों के प्रति करुणा और सेवा की अद्भुत भावना दिखने लगी थी। पीएम मोदी ने लिखा, “प्रयागराज में पले-बढ़े अशोक जी कई घंटे संगम के तट पर बैठा करते थे। नदी के प्रति उनका स्वाभाविक आकर्षण था। वहां आने वाले साधु-संत और श्रद्धालुओं से भी उनकी बहुत आत्मीयता थी। इससे भारत के सांस्कृतिक लोकाचार की उनकी समझ और समृद्ध हुई। दूसरों के लिए जीने की यही ललक उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में ले आई।” पीएम मोदी ने बताया कि अशोक सिंहल जी ने अपने निरंतर प्रयास और अथक परिश्रम से अनेक संस्थाओं और आंदोलनों को मजबूत किया। अपनी ओजस्वी वाणी और अभिव्यक्ति की अद्भुत शैली से वे पूरी सभा को मंत्रमुग्ध कर देते थे। संत समाज के साथ उनके संबंध बहुत प्रगाढ़ थे। देशभर के साधु-संतों के बीच भी उनका काफी सम्मान था। उन्होंने दो घटनाओं का जिक्र किया। पहली घटना 1993 की है जब विश्व हिंदू परिषद ने स्वामी विवेकानंद जी के शिकागो संबोधन के 100 वर्ष पूरे होने पर अमेरिका में एक सम्मेलन आयोजित किया था। विदेश में ऐसे भव्य सम्मेलन का विजन और प्लानिंग अशोक जी के संगठनात्मक कौशल का परिचायक था। दूसरी घटना 2000 की है, जब त्रिनिदाद और टोबैगो के पोर्ट ऑफ स्पेन में विश्व हिंदू सम्मेलन हुआ, जहां पीएम मोदी भी मौजूद थे। पीएम मोदी ने लिखा कि राम जन्मभूमि आंदोलन में अशोक सिंहल जी की ऐतिहासिक भूमिका का स्मरण किए बिना उनका कोई भी उल्लेख अधूरा है। वर्ष 1991 की बोट क्लब रैली में दिए गए उनके ओजस्वी संबोधन को कौन भूल सकता है? आंदोलन के चरम पर लहूलुहान और घायल अवस्था में अशोक जी की वह ऐतिहासिक तस्वीर भला किसकी स्मृति से मिट सकती है? आज अयोध्या में भव्य राम मंदिर है, तो इसके पीछे अशोक सिंहल जैसी विभूतियों का निस्वार्थ समर्पण है। पीएम मोदी ने लिखा, “आज यदि अशोक जी हमारे बीच होते तो अयोध्या में राम मंदिर को देखकर वो सबसे अधिक भावुक एवं प्रसन्न होते।” पीएम मोदी ने बताया कि अशोक जी सामाजिक एकता और समानता के प्रबल समर्थक थे। उनका साफ मत था कि समाज में किसी प्रकार का कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। यही वजह थी कि उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर की पहली ईंट रखने के लिए बिहार के वीएचपी कार्यकर्ता और

बैंकॉक में बाढ़ से बिगड़े हालात: 8 की मौत, लाखों बेघर

बैंकॉक। थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में लगातार भारी बारिश के बाद बाढ़ ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। डिजास्टर प्रिवेंशन एंड मिटिगेशन डिपार्टमेंट ने सोमवार को बताया कि 16 सितंबर से थाईलैंड में आई बाढ़ की वजह से आठ लोगों की मौत हो गई है। सिंहुआ समाचार एजेंसी के अनुसार बैंकॉक समेत 28 प्रांत अभी भी इस आपदा की चपेट में हैं। खासकर थाईलैंड के मध्य, उत्तरी, पूर्वी और पूर्वोत्तर इलाकों के हालात बेहद खराब हैं। इस बीच, थाईलैंड की कैबिनेट ने बैंकॉक और उसके आस-पास के तीन प्रांतों में सोमवार और मंगलवार को सार्वजनिक अवकाश घोषित कर दिया है। बाढ़ के कारण होने वाली परेशानियों को कम करने के लिए सरकारी दफ्तर और स्कूल बंद रहेंगे। थाईलैंड के मौसम विभाग का अनुमान है कि सोमवार को उत्तरी, मध्य और पूर्वी थाईलैंड के कुछ हिस्सों में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश जारी रहेगी। वहीं, बैंकॉक मेट्रोपॉलिटन एडमिनिस्ट्रेशन ने सोमवार को बताया कि राजधानी में आई भीषण बाढ़ से लगभग 3,29,000 परिवार और करीब 7,00,000 लोग प्रभावित हुए हैं। विभाग के अनुसार, 16 से 28 सितंबर के बीच 42 प्रांतों में बाढ़ आई, जिससे 18 लाख लोग प्रभावित हुए। शहर की डिप्टी गवर्नर ताविडा कामोलवेज ने बताया कि राजधानी के लैट क्राबांग जिले पर बाढ़ का सबसे ज्यादा असर पड़ा है, यहां 30,000 से 40,000 लोग बाढ़ की चपेट में आए हैं। सभी 50 जिलों को बाढ़-आपदा क्षेत्र घोषित किया गया है। रविवार देर रात तक करीब 4,900 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर बनाए गए राहत शिविरों में पहुंचाया गया है, जबकि लगभग 52 हजार घर बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। गुरुवार से रविवार के बीच बैंकॉक के कुछ इलाकों में 330 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई थी। कई प्रमुख सड़कें पानी में डूब गईं और कुछ इलाकों में पानी कमर तक पहुंच गया। कई जगहों पर कारें और दूसरे वाहन पानी में आधे से अधिक डूब गए। बाढ़ की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कई परिवारों को अपना घर छोड़कर स्कूलों और अन्य अस्थायी राहत केंद्रों में जाना पड़ा। बैंकॉक मेट्रोपॉलिटन एडमिनिस्ट्रेशन के अनुसार, हजारों लोग इन केंद्रों में रात बिताने को मजबूर हुए। कुछ स्कूलों में कक्षाओं को खाली कर वहां लोगों के रहने की व्यवस्था की गई है। सोमवार को शहर के सैकड़ों स्कूल बंद रखने की योजना है। बैंकॉक पोस्ट के अनुसार, डिप्टी गवर्नर विसानु सबसोमपोन ने सोमवार को कहा कि पूर्वी बैंकॉक की मुख्य जलधाराओं सैन सैप और प्रावेट बुरिरोम नहरों का जलस्तर कम करने के लिए पानी निकालने का काम तेजी से किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “मुख्य रणनीति सैन सैप और प्रावेट बुरिरोम नहरों से पानी की निकासी है, जिससे उनसे जुड़ी छोटी नहरों का जलस्तर भी कम हो जाएगा।” डिप्टी गवर्नर ने उम्मीद आगे कहा, “आज (सोमवार) रामखमहेन्ग रोड के शुरुआती हिस्से में बाढ़ की स्थिति में सुधार होना चाहिए। ख्लोंग चान में ज्यादा समय लग सकता है क्योंकि वह दूर है। मुख्य नहरों से पानी पूरी तरह निकालने में तीन दिन लगेंगे।” विसानु ने कहा, “ओवरफ्लो हो रही नहरों से रिहायशी इलाकों का पानी निकालना इतना आसान नहीं होगा। बुरी तरह बाढ़ प्रभावित लैट क्राबांग में पानी निकालने में लगभग एक हफ्ता लगेगा।” अधिकारियों ने शहर की नहरों से पानी निकालने का काम तेज कर दिया है। बारिश कम होने के बाद रविवार को बैंकॉक के कई हिस्सों में जलस्तर घटने लगा, लेकिन कई प्रमुख नहरों में पानी अब भी काफी ऊंचा था। प्रशासन ने लोगों से गैर-जरूरी यात्रा से बचने की अपील की है। इससे पहले करीब 48 घंटे में लगभग 300 मिलीमीटर बारिश के बाद बैंकॉक प्रशासन ने राजधानी को आपदा प्रभावित क्षेत्र घोषित किया था। सेना ने राहत कार्यों में मदद के लिए अस्थायी शिविर और सामुदायिक रसोई तैयार कीं। प्रशासन ने लोगों से निचले इलाकों और नहरों के आसपास से सामान हटाकर ऊंचे स्थानों पर रखने को कहा था। सितंबर बैंकॉक में बारिश के मौसम का चरम महीना होता है, लेकिन इस बार कुछ इलाकों में हुई अत्यधिक बारिश ने शहर की जल निकासी व्यवस्था पर गंभीर दबाव डाल दिया। फिलहाल अधिकारियों का ध्यान पानी निकालने, प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और संभावित नई बारिश से निपटने पर है।

सरकार 25 करोड़ लोगों को दे रही ईएसआईसी हेल्थ सिक्योरिटी : डॉ. मनसुख मंडाविया

नई दिल्ली। केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने सोमवार को कहा कि भारत ‘कर्मचारी राज्य बीमा निगम’ (ईएसआईसी) के जरिए 25 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा दे रहा है। उन्होंने सरकार के सामाजिक सुरक्षा और कल्याण कार्यक्रमों का भी जिक्र किया। ‘औद्योगिक संबंध और श्रम एवं पुरस्कार 2026’ पर सीआईआई-ईएफआई राष्ट्रीय सम्मेलन में बोलते हुए, मंडाविया ने कहा कि सरकार 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज भी उपलब्ध करा रही है। उन्होंने कहा कि 10 करोड़ किसानों को हर चार महीने में उनके बैंक खातों में सीधे 2,000 रुपए मिलते हैं। मंत्री ने कहा, “आज देश में 10 ऐसे राज्य हैं जो महिलाओं के खातों में हर महीने 2,000 रुपए, 1,500 रुपए या 1,200 रुपए जैसी रकम जमा करते हैं।” केंद्रीय मंत्री ने औद्योगिक संबंधों और अंतरराष्ट्रीय श्रम तौर-तरीकों एवं भारत की अपनी परंपराओं और प्रणालियों के बीच संतुलन पर बात करते हुए कहा, “जब हम औद्योगिक संबंधों की बात करते हैं… तो एक तरफ आईएलओ के अंतरराष्ट्रीय तौर-तरीके और अंतरराष्ट्रीय ढांचे होते हैं, और दूसरी तरफ भारत की अपनी परंपराएं और संबंध; तो मुझे यह थोड़ा अलग लगता है।” मांडविया ने कहा कि पिछले 10-11 वर्षों में कई मंत्रालयों में मंत्री के तौर पर काम करने के उनके अनुभव ने उन्हें भारत और विदेशों में विभिन्न मंचों और हितधारकों के साथ जुड़ने का मौका दिया है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक संबंधों के प्रति भारत के दृष्टिकोण में अंतरराष्ट्रीय ढांचे और देश के अपने सामाजिक और आर्थिक संदर्भ, दोनों को ध्यान में रखने की जरूरत है। इससे पहले सितंबर में, मंत्री ने राज्य सरकारों से कहा था कि वे सेस फंड के मौजूदा इस्तेमाल का विस्तृत आकलन करें, कमियों की पहचान करें और श्रमिकों के दीर्घकालिक कल्याण और सामाजिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इनके प्रभावी इस्तेमाल के नए तरीके खोजें। मंत्री ने राज्यों से आगे कहा कि वे श्रम संहिताओं के लागू होने के एक साल बाद उनके असर का व्यापक आकलन करें और उन क्षेत्रों की पहचान करें जहां उन्हें और बेहतर ढंग से लागू करने की जरूरत हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में बार-बार हो रहे रेप और यौन उत्पीड़न के मामलों का लिया स्वतः संज्ञान

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली-एनसीआर में हाल ही में सामने आए रेप और यौन उत्पीड़न के मामलों का स्वतः संज्ञान लिया। इनमें दिल्ली के कालकाजी मंदिर के पास एक पार्क में 17 साल की लड़की के साथ कथित गैंगरेप और चलती स्लीपर बस में एक नाबालिग के साथ कथित यौन उत्पीड़न का मामला शामिल है। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में यौन अपराधों की बार-बार हो रही घटनाओं पर चिंता जताई। बेंच ने सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री को इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका (पीआईएल) दर्ज करने और सुनवाई के लिए लिस्ट करने का निर्देश दिया। जस्टिस पारदीवाला की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में यौन अपराधों की हालिया रिपोर्टों के साथ इन घटनाओं को देखने पर सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार कानून लागू करने वाली एजेंसियों और प्रशासनिक अधिकारियों के कामकाज को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा होती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि सम्मान के साथ और हिंसा के डर के बिना जीने का अधिकार, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का एक अहम हिस्सा है। बेंच ने यह भी कहा कि अपर्याप्त रोशनी, निगरानी, ​​गश्त या अन्य ऐसी प्रशासनिक कमियों की वजह से पार्क, सड़कें, बसें, मेट्रो स्टेशन, सबवे और फुटब्रिज को ‘हाई-रिस्क ज़ोन’ (खतरे वाली जगह) नहीं बनने दिया जा सकता, जिन्हें रोका जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों से ठोस कार्रवाई की मांग की और उन लोगों की जवाबदेही तय करने पर ज़ोर दिया जिनकी जिम्मेदारी अपराध रोकना, कानून-व्यवस्था बनाए रखना और कमजोर लोगों की सुरक्षा करना है। सुप्रीम कोर्ट का यह दखल ऐसे समय में आया है, जब हाल के सप्ताह में दिल्ली और उससे सटे एनसीआर में कई यौन अपराधों की खबरें सामने आई हैं। चिंता बढ़ाने वाली हालिया घटना में दिल्ली में कालकाजी मंदिर के पास एक पार्क में पुलिसकर्मी बनकर आए तीन लोगों ने कथित तौर पर 17 साल की लड़की के साथ गैंगरेप किया। पुलिस के मुताबिक, लड़की 22 सितंबर को अपने एक पुरुष दोस्त के साथ कालकाजी मंदिर गई थी और बाद में पास के एक पार्क में चली गई। तीनों आरोपियों ने कथित तौर पर उनके पास आकर खुद को पुलिसकर्मी बताया, उन्हें धमकाया और उनके मोबाइल फोन छीन लिए। पीड़िता ने बाद में पुलिस को बताया कि उनमें से दो लोग उसे पार्क के एक सुनसान हिस्से में ले गए, जहां उसके साथ कथित तौर पर यौन उत्पीड़न किया गया। उसने यह भी आरोप लगाया कि आसिफ नाम के एक आरोपी ने उसे धमकाते हुए बंदूक दिखाई थी। पीसीआर कॉल मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। बाद में मुठभेड़ के दौरान आसिफ को पकड़ लिया गया और उसे गोली लगी। बाकी दो आरोपियों का पता लगाने की कोशिशें जारी थीं। सुप्रीम कोर्ट की स्वतः संज्ञान वाली कार्यवाही में ग्रेटर नोएडा-दिल्ली इलाके में चलती स्लीपर बस के अंदर 16 साल की लड़की के साथ कथित यौन उत्पीड़न का मामला भी शामिल है। अगस्त में सामने आई इस घटना में उत्तर प्रदेश के मैनपुरी की एक लड़की शामिल थी, जो नोएडा आई थी और अपना स्टॉप छूटने के बाद एक स्लीपर बस में सवार हो गई थी। आरोप है कि बस के ड्राइवर और कंडक्टर ने उसके साथ यौन उत्पीड़न किया और बाद में उसे दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास छोड़ दिया। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने पहले ही इस घटना का स्वतः संज्ञान लिया था और दिल्ली व गौतम बुद्ध नगर के पुलिस कमिश्नर और मैनपुरी के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को नोटिस जारी कर जांच और पीड़िता को दिए गए मुआवज़ (यदि कोई हो) के बारे में रिपोर्ट मांगी थी। पुलिस ने ड्राइवर और कंडक्टर को गिरफ्तार कर लिया और फोरेंसिक जांच के लिए स्लीपर बस को ज़ब्त कर लिया। जांचकर्ताओं ने गाड़ी की आवाजाही और घटनाक्रम का पता लगाने के लिए रास्ते के सीसीटीवी फुटेज भी इकट्ठा किए।

सहायक निर्देशक से हीरोइन बनीं शरवरी वाघ, बोलीं-बॉलीवुड के गानों ने बनाया अभिनेत्री

मुंबई। बॉलीवुड में सहायक निर्देशक से अपने करियर की शुरुआत करने वाली अभिनेत्री शरवरी वाघ पारिवारिक ड्रामा फिल्म ‘ये प्रेम मोल लिया’ में नजर आएंगी। अभिनेत्री का कहना है कि बॉलीवुड के गाने और डांस ने ही उन्हें अभिनेत्री बनने के लिए प्रेरित किया। अभिनेत्री ने कहा, “बॉलीवुड के गाने और डांस ही एक बड़ी वजह है कि मैं अभिनेत्री बनना चाहती थी। साथ ही, मैं माधुरी दीक्षित को ‘दीदी तेरा देवर दीवाना’ में और करिश्मा मैम और सोनाली मैम को ‘मैय्या यशोदा’ में देखते हुए बड़ी हुई हूं और मैं घर आकर इन गानों पर डांस करती थी और खुद को एक दिन स्क्रीन पर उस हीरोइन के रूप में कल्पना करती थी।” अभिनेत्री ने इन पलों को बॉलीवुड से प्यार होने की वजह बताया। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि कहीं न कहीं, इन्हीं पलों ने मुझे बॉलीवुड के विचार से प्यार करना सिखाया।” अभिनेत्री ने बताया कि उन्हें पर्दे पर हमेशा से ही रोमांस करना पसंद है। अभिनेत्री शरवरी वाघ ने बताया, “मुझे हमेशा से क्लासिक बॉलीवुड गानों का रोमांस, इमोशन और बड़े पर्दे वाला जादू पसंद रहा है, जिस तरह से आप एक गाने और डांस के जरिए पूरी कहानी बता सकते हैं। इसलिए सूरज बड़जात्या जी की ‘ये प्रेम मोल लिया’ के साथ इसका अनुभव करना अविश्वसनीय रूप से खास लग रहा है।” शरवरी ने कहा, “यह एक खूबसूरत पल जैसा लग रहा है, उस तरह के बॉलीवुड को जीने का, जिसे देखते हुए और जिसके सपने देखते हुए मैं बड़ी हुई हूं। मैं सच में इसके हर पल का आनंद ले रही हूं।” फिल्म ‘ये प्रेम मोल लिया’ का टाइटल ट्रैक हाल ही में रिलीज हुआ था, जिसमें फिल्म की हल्की झलक देखने को मिली। हालांकि फिल्म से जुड़ी बाकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। इस फिल्म से राजश्री का आइकॉनिक किरदार ‘प्रेम’ 12 साल बाद बड़े पर्दे पर वापसी कर रहा है, जिसे आयुष्मान खुराना निभा रहे हैं। फिल्म ‘ये प्रेम मोल लिया’ एक पारिवारिक और रोमांटिक ड्रामा है, जिसमें पहली बार आयुष्मान और शरवरी साथ में स्क्रीन पर नजर आएंगे।

भले ही स्‍थित‍ि विनाशकारी युद्ध में तब्दील हो जाए, आक्रामकता के खिलाफ खड़ा रहेगा ईरान : अराघची

न्यूयॉर्क। अमेरिका की ओर से सात द‍िन के प्रस्‍ताव को ठुकराने के बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि वो प्लान को क्यों ठुकरा रहे हैं, यह एक अहम सवाल है। यह प्रस्‍ताव हालात सामान्‍य बना सकता है। तेहरान वास्तविक कूटनीति के लिए है। साथ ही, किसी भी आक्रामकता के खिलाफ दृढ़ता से खड़ा भी रहेगा, भले ही स्थिति एक विनाशकारी युद्ध में तब्दील हो जाए। ईरान के शीर्ष राजनयिक ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पोस्‍ट में ल‍िखा, ”राष्ट्रपति पेजेश्‍क‍ियन और मैं न्यूयॉर्क युद्ध की बात करने नहीं आए हैं। हम यहां शांति की राह बनाने आए हैं। इसके बावजूद, ईरान किसी भी तरह के हमले के सामने मजबूती से खड़ा रहेगा, भले ही हालात एक बेहद विनाशकारी युद्ध तक क्यों न पहुंच जाएं। साथ ही, हम वास्तविक और गंभीर कूटनीतिक बातचीत के लिए भी तैयार हैं।” ‘मीट द प्रेस’ से एक बातचीत के दौरान अराघची ने कहा क‍ि अमेरिकी राजदूत की बात सुनना काफी दिलचस्प है। सवाल सिर्फ इतना है कि वे सात दिन के प्लान को क्यों ठुकरा रहे हैं? यह सात दिन का प्लान फारस की खाड़ी और होर्मुज स्‍ट्रेट में हालात को फिर से सामान्य बना सकता है। आखिर वे इसे क्यों ठुकरा रहे हैं? यह बेहद अहम सवाल है और उन्हें इसका जवाब देना चाहिए। उन्‍होंने कहा क‍ि मुझे इस बात पर भी हैरानी है कि राजदूत सात दिन के प्लान के बारे में बात कर रहे हैं, जबकि उन्होंने इसे पढ़ा ही नहीं है। हो सकता है, शायद उन्हें इसकी कॉपी ही नहीं दी गई हो। अराघची ने कहा क‍ि हमारा प्रस्ताव बिल्कुल साफ है। अगर अमेरिका कुछ कदम उठाता है, तो हम होर्मुज स्‍ट्रेट को खोलने के लिए तैयार हैं। और हम जो मांग रहे हैं, वह कोई नई बात नहीं है, न ही ये मांगें अचानक कहीं से आई हैं। ये हमारे अधिकार हैं और हम चाहते हैं कि उनका सम्मान किया जाए। उन्‍होंने कहा क‍ि सबसे पहले, हम चाहते हैं कि यह युद्ध खत्म हो, जिसे हम आक्रामक युद्ध मानते हैं। उन्होंने यह युद्ध आठ महीने पहले इस उम्मीद के साथ शुरू किया था कि वे दो-तीन दिनों में इसे जीत लेंगे। अब आठ महीने हो चुके हैं और हम चाहते हैं कि यह युद्ध खत्म हो। अराघची ने कहा क‍ि हम चाहते हैं कि हमारा पैसा और हमारी संपत्तियां, जिन्हें गैरकानूनी तरीके से फ्रीज किया गया है, उन्हें जारी किया जाए। हम चाहते हैं कि हमें अपना तेल बेचने की इजाजत मिले। इसलिए हम ऐसी कुछ चीजों की मांग कर रहे हैं, जिनके लिए अमेरिका पहले हुए समझौतों में पहले ही प्रतिबद्धता जता चुका है।

उज्जैन में बवाल के बाद मस्जिद का हिस्सा तोड़ने को खुद तैयार हुआ मुस्लिम समाज

उज्जैन। मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में शाही मस्जिद का हिस्सा तोड़ने को लेकर हुए बवाल के बाद मुस्लिम समाज खुद प्रस्तावित हिस्से को तोड़ने को तैयार हो गया है । पथराव करने के मामले में पुलिस ने 10 लोगों पर प्रकरण दर्ज किया है और हिरासत में लेने का दौर भी शुरू हो गया है। उज्जैन में वर्ष 2028 में सिंहस्थ का आयोजन किया जाने वाला है। इसके मद्देनजर सड़कों को चौड़ा किया जा रहा है। इसी क्रम में शाही मस्जिद का हिस्सा तोड़ने को लेकर बवाल हो गया। भीड़ ने पुलिस पर पथराव किया तो वही पुलिस को आंसू गैस के गोले भी छोड़ने पड़े। इस दौरान एक महिला पुलिस अधिकारी के हाथ में चोट भी लगी है। करीब 2 घंटे चले हंगामा के बाद स्थितियां काबू में आ गई हैं। वहीं, मस्जिद के जिस हिस्से को हटाया जाना है उसे तोड़ने के लिए मुस्लिम समाज तैयार हो गया है। पुलिस ने इस मामले में 10 लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है और उन्हें हिरासत में लेना भी शुरू कर दिया है। दरअसल सिंहस्थ में 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है, इसको ध्यान में रखते हुए यातायात व्यवस्था को सुगम किया जा रहा है और जो मार्ग संकरे हैं उन्हें चौड़ा किया जा रहा है। इसी क्रम में कंठल चौराहे से गोपाल मंदिर तक की सड़क को 15 मीटर चौड़ा किया जाना है जबकि इसके बीच में शाही मस्जिद आती है। मस्जिद का भी हिस्सा हटाया जाना है, जिसे हरे कपड़े से ढक दिया गया था और इसे तोड़ने की विरोध में महिलाएं सड़क पर आकर बैठ गईं, जिससे यातायात प्रभावित हुआ। पुलिस ने महिलाओं को हटाने की कोशिश की। इसी दौरान पथराव हो गया, पुलिस को भी भीड़ को तितर बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। मौके पर स्थितियां तनावपूर्ण बनी और भारी पुलिस बल की तैनाती की गई, वहीं मस्जिद के आसपास बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग जमा हो गए और वह मस्जिद का हिस्सा हटाए जाने का विरोध करते रहे। पथराव और आंसू गैस की गोले छोड़ें के जाने के दौरान पुलिस निरीक्षक पुष्पा पंचाल के हाथ में चोट आई है। उन्होंने बताया कि महिलाएं लोहे की टीन के पीछे थी और उन्हें बचाने की कोशिश में उनके हाथ में लोहे के टीन से कट लग गया है और उपचार के बाद फिर भी अपने काम में जुटी हुई है । सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए सड़कों को चौड़ा किया जा रहा है और राज्य के मुख्यमंत्री मोहन यादव का पैतृक निवास भी सड़क के किनारे है जिस पर उन्होंने स्वयं रविवार को कुदाली चलाई थी और उसे तोड़ने की कार्रवाई की जा रही है। उस दौरान मुख्यमंत्री भावुक भी हो गए थे। वहीं, उज्जैन के कई दूसरे इलाकों में लोगों ने स्वेच्छा से अपने मकान के हिस्सों को तोड़ा है ताकि सड़क चौड़ी हो सके।