अखिलेश का बागी विधायकों पर तंज, बोले- दूसरे इस्तेमाल कर लेते हैं उसका कंधा, वर्षों बाद भी सदस्यता की पर्ची से ज्यादा कुछ नहीं मिला

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) के तीन बागी विधायकों के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने के बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन पर तीखा तंज कसा। उन्होंने शायराना अंदाज में दलबदल करने वाले नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस दल के लिए उन्होंने वर्षों तक इंतजार किया, वहां भी उन्हें सदस्यता की पर्ची से अधिक कुछ नहीं मिला। अखिलेश ने संकेतों में कहा कि ऐसे नेताओं को दूसरे दल में भी राजनीतिक सम्मान और उम्मीदवारी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा, “अपने कबीले से जो दगा करता है बंदा, चलता उसके मान पर अपमान का रंदा। कार्यकर्ता बनकर उठाना पड़ता है झंडा, दूसरे इस्तेमाल कर लेते हैं उसका कंधा। सिर झुकाकर करना पड़ता काला धंधा, चुराना पड़ता उसको दान-चढ़ावा-चंदा। अब तक जो कमाया वो नाम होता गंदा।” उन्होंने आगे लिखा कि वर्षों की प्रतीक्षा के बाद भी सदस्यता की पर्ची से अधिक कुछ नहीं मिला। जिस दल में गए हैं, उसके पुराने दावेदार कह रहे हैं कि ऐसे लोग तो आते-जाते रहते हैं। सपा प्रमुख ने तंज कसते हुए कहा कि जिस दल से जीते, उसके नहीं हुए तो जिस दल के सदस्य बनने में सालों लग गए, वहां ‘प्रत्याशी’ नहीं, बल्कि ‘प्रतीक्षार्थी’ बनकर ही कई साल रहेंगे। बता दें कि बुधवार को समाजवादी पार्टी के तीन बागी विधायक औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल हो गए। इनमें अमेठी की गौरीगंज सीट से विधायक राकेश प्रताप सिंह, अयोध्या की गोसाईगंज सीट से विधायक अभय सिंह और जालौन की कालपी सीट से विधायक विनोद चतुर्वेदी शामिल हैं। इन विधायकों के भाजपा में शामिल होने को 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश की सियासत में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है।

अंकिता भंडारी प्रकरण: न्याय के लिए हर स्तर पर मजबूती से खड़ी रही धामी सरकार

देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड में दोषियों को उम्रकैद की सजा मिलना इस बात का प्रमाण है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने इस संवेदनशील प्रकरण में पहले दिन से लेकर न्यायालय के अंतिम फैसले तक अपराधियों को कठोर सजा दिलाने के लिए पूरी गंभीरता और मजबूती से कार्य किया। घटना सामने आने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तत्काल कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए। 24 घंटे के भीतर आरोपियों को जेल भेजा गया और मामले की निष्पक्ष एवं गहन जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया। आरोपियों के विरुद्ध गैंगस्टर अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई। जांच के दौरान करीब 500 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट तैयार की गई, जिसमें लगभग 100 गवाहों के बयान सहित महत्वपूर्ण साक्ष्यों को शामिल किया गया। न्यायालय में अभियोजन पक्ष द्वारा लगातार मजबूती से पैरवी की गई, जिसके चलते आरोपियों की जमानत अर्जियां बार-बार खारिज हुईं और वे मुकदमे के दौरान सलाखों के पीछे रहे। मजबूत जांच और प्रभावी अभियोजन के परिणामस्वरूप अंततः अंकिता के कातिलों को उम्रकैद की सजा मिली। प्रदेश सरकार ने पूरी प्रक्रिया के दौरान अंकिता के माता-पिता और परिवार की भावनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। परिजनों की मांग के अनुरूप तीन बार सरकारी अधिवक्ता बदले गए। इतना ही नहीं, अंकिता के माता-पिता द्वारा सीबीआई जांच की मांग किए जाने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए प्रकरण की सीबीआई जांच के आदेश भी दिए। सरकार ने परिवार को संबल प्रदान करने के लिए 25 लाख रुपए की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई। इसके साथ ही दिवंगत अंकिता के भाई और उनके पिता को सरकारी नौकरी प्रदान कर परिवार के साथ खड़े होने की अपनी प्रतिबद्धता को भी पूरा किया। इस पूरे प्रकरण में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का रुख पहले दिन से स्पष्ट रहा कि अपराधी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे कानून के कठघरे तक पहुंचाकर कठोरतम सजा दिलाई जाएगी। जांच को लेकर उठाए गए सवालों के बीच न्यायिक स्तर पर भी जांच प्रक्रिया को संतोषजनक माना गया और मजबूत अभियोजन के परिणामस्वरूप दोषियों को सजा तक पहुंचाया गया। वहीं, तथाकथित ‘वीआईपी’ के नाम पर कांग्रेस और आशुतोष नेगी जैसे लोगों द्वारा लगातार सवाल उठाकर जनता के बीच भ्रम फैलाने का प्रयास किया गया। यदि इस संबंध में किसी के पास कोई ठोस तथ्य अथवा साक्ष्य था तो उसे जांच एजेंसियों और न्यायालय के समक्ष रखा जाना चाहिए था। अदालत के बाहर राजनीतिक लाभ के लिए आरोप लगाना और जनता को भ्रमित करना न्याय की लड़ाई नहीं, बल्कि बेटी अंकिता से जुड़े अत्यंत संवेदनशील प्रकरण का राजनीतिक इस्तेमाल है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पहले दिन ही स्पष्ट कर दिया था कि बेटी अंकिता को न्याय दिलाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। त्वरित गिरफ्तारी, एसआईटी जांच, मजबूत चार्जशीट, गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई, आरोपियों को जमानत न मिलने देना, परिवार की मांग के अनुसार अभियोजन व्यवस्था में बदलाव, आर्थिक सहायता और रोजगार से लेकर माता-पिता की मांग पर सीबीआई जांच के आदेश तक—सरकार ने हर स्तर पर संवेदनशीलता और दृढ़ता के साथ निर्णय लिए। अंकिता को न्याय दिलाने की लड़ाई में धामी सरकार केवल आश्वासनों तक सीमित नहीं रही, बल्कि कार्रवाई, मजबूत पैरवी और निर्णायक परिणाम के साथ परिवार के साथ खड़ी रही।

कांग्रेस सांसद एवं पूर्व जेएनयू प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम हो तत्काल गिरफ्तार: अभाविप

नई दिल्ली। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप), जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) इकाई द्वारा बुधवार को विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर कांग्रेस सांसद एवं जेएनयू प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम के विरुद्ध यौन उत्पीड़न के आरोपों के मामले में गिरफ्तारी की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन और पुतला दहन कर अपना विरोध दर्ज कराया। अभाविप ने मांग की है कि विश्वविद्यालय द्वारा प्रोफेसर पद से बर्खास्त किए जा चुके अंगोमचा बिमोल अकोइजम के मामले में पुलिस त्वरित एवं निष्पक्ष कार्रवाई करे तथा कानून के अनुरूप उनकी तत्काल गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए। एक ओर ‘लड़की हूं लड़ सकती हूं’ नारा और दूसरी ओर कांग्रेस के सांसद-विधायक द्वारा समय-समय पर यौन शोषण की घटना के बाद कांग्रेस का ‘मौन’ उनके पाखंडी चरित्र को उजागर कर रही है। एक ओर महिला सुरक्षा और अधिकारों की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी के जनप्रतिनिधियों से जुड़े यौन उत्पीड़न के गंभीर मामलों में स्पष्ट जवाबदेही के प्रश्न पर कांग्रेस पार्टी की चुप्पी उनकी राजनैतिक मानसिकता को दर्शाता है। बता दें कि महिला सुरक्षा और महिलाओं के सम्मान का ढोंग करने वाली पार्टी अपने सांसद से जुड़े इस गंभीर मामले में तटस्थ रुख अपना रही है। जब किसी शैक्षणिक संस्थान के द्वारा कार्यवाही और पुलिस में एफआईआर भी दर्ज हो गई हो, तब मामले को केवल राजनीतिक विवाद बताकर टालना उचित नहीं है। कांग्रेस पार्टी इस मामले में स्पष्ट जवाबदेही सुनिश्चित करे और कानून के अनुसार होने वाली कार्रवाई में किसी प्रकार का राजनीतिक दबाव बाधा न बने। यह पहली घटना नहीं है जहां किसी कांग्रेस या एनएसयूआई से जुड़े व्यक्ति पर यौन शोषण के आरोप लगे है इससे पूर्व भी कांग्रेसी ऐसे मामलों में संलिप्त पाएं गए है। शैक्षणिक संस्थानों में छात्राओं की सुरक्षा, गरिमा और सम्मान सर्वोपरि हैं। किसी भी व्यक्ति का राजनीतिक पद, प्रभाव अथवा संगठनात्मक निकटता कानून के समक्ष जवाबदेही से बचने का आधार नहीं बनना चाहिए। हम दिल्ली पुलिस प्रशासन से यह मांग करते है कि किसी भी राजनीतिक दबाव के बिना कार्रवाई की जाए और छात्राओं के लिए सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित किया जाए। जेएनयू अभाविप इकाई अध्यक्ष मयंक पांचाल ने कहा, “महिला सुरक्षा केवल नारों और भाषणों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। “लड़की हूं लड़ सकती हूं” आंदोलन करके महिला अधिकारों की बात करने वाली कांग्रेस को अपने जनप्रतिनिधियों से जुड़े गंभीर मामलों पर भी स्पष्ट और जवाबदेह रुख अपनाना चाहिए। जेएनयू में छात्राओं की शिकायतों पर आंतरिक समिति की जांच के बाद अंगोमचा बिमोल अकोइजम को प्रोफेसर पद से बर्खास्त किया जा चुका है और मामले में एफआईआर भी दर्ज है। अभाविप की स्पष्ट मांग है कि इस अपराधी को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो। महिला सुरक्षा के मुद्दे पर राजनीतिक सुविधा के अनुसार अलग-अलग मानदंड स्वीकार्य नहीं हैं। छात्राओं को न्याय मिलना चाहिए और किसी भी प्रकार का राजनीतिक संरक्षण कानून के रास्ते में बाधा नहीं बनना चाहिए।” जेएनयू अभाविप इकाई मंत्री प्रवीण कुमार पीयूष ने कहा, “अभाविप ने जेएनयू में छात्राओं की सुरक्षा और न्याय के लिए लगातार आवाज उठाई है। हमारा स्पष्ट मत है कि किसी का राजनीतिक पद या प्रभाव निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई के आड़े नहीं आना चाहिए। कांग्रेस को महिला अधिकारों पर अपने सार्वजनिक रुख के अनुरूप अपने जनप्रतिनिधियों से जुड़े गंभीर मामलों में भी जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए। अभाविप की मांग है कि अंगोमचा बिमोल अकोइजम को तुरंत गिरफ्तार किया जाए, मामले की निष्पक्ष जांच हो और कानून के अनुसार कार्रवाई आगे बढ़े। छात्राओं की सुरक्षा, सम्मान और न्याय किसी राजनीतिक दल की छवि से बड़ा प्रश्न है।

यह सिर्फ दिल्ली पुलिस का फैसला नहीं, गृह मंत्रालय के निर्देश पर हो रहा है: कांग्रेस सांसद

नई दिल्ली। एनएसयूआई के विरोध प्रदर्शन के दौरान लड़कियों और युवाओं पर हुए कथित पुलिस उत्पीड़न को लेकर कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने केंद्र सरकार और गृह मंत्री अमित शाह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ दिल्ली पुलिस का फैसला नहीं है, बल्कि अमित शाह के निर्देश पर हो रहा है और पुलिस सुरक्षा कवच की तरह काम करने के बजाय युवाओं पर अटैक कर रही है। कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने कहा, “लड़कियों को चोटें आई हैं, वो बच्चियां हैं। महिलाओं और युवाओं का उत्पीड़न किया जा रहा है। ये सिर्फ दिल्ली पुलिस का फैसला नहीं है, अमित शाह के निर्देश पर ये हो रहा है। जो गुजरात में बहुत साल पहले हुआ था, वो अब यहां दिल्ली में किया जा रहा है। वह बहुत ही खतरनाक खेल खेल रहे हैं, लेकिन हमें युवा और लड़कियों पर गर्व है, जो लोकतंत्र की रक्षा के लिए यहां हैं और लड़ाई लड़ रही हैं।” उन्होंने कहा कि पुलिस को एक सुरक्षा कवच की तरह काम करना चाहिए था, लेकिन यहां पर वो अटैक कर रहे हैं, लेकिन राहुल गांधी एक भाई और देवदूत की तरह हैं, जो इनकी सुरक्षा के लिए आए हैं। उन्होंने यह सुनिश्चित किया है कि किसी पुलिसकर्मी में फिर से इतनी हिम्मत ना हो कि वो इस तरह की बर्बरता करें। कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने कहा, “भाजपा के पास सिर्फ ध्यान भटकाने की तरकीबें हैं। सब जानते हैं कि राहुल गांधी कौन हैं और वह किस बात के लिए खड़े हैं। भाजपा के पास कोई जवाब नहीं है और वह ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। जो युवा सड़कों पर आए हैं, क्या वे किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़े हैं?” उन्होंने कहा कि ये युवा देश को बचाने के लिए सड़कों पर उतरे हैं, इसलिए भाजपा की इस तरह की रणनीति चलती रहेगी। इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता है। राहुल गांधी इस लड़ाई को लड़ना जारी रखेंगे। 2029 में भाजपा की जीत के दावे पर कांग्रेस सांसद ने कहा कि वर्तमान समय में देश में ऐसे हालात बने हुए हैं, और ये 2029 में जीत की बात कर रहे हैं। चुनाव पर कब्जा करके ये जीत का दावा करते हैं। भाजपा डरी और घबराई हुई है। हम राहुल गांधी के नेतृत्व में अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। इसके अलावा, एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने कहा कि इस देश में लोकतंत्र खत्म हो गया है। पुलिस गुंडागर्दी पर उतर आई है। उनका काम आम लोगों और स्टूडेंट्स की आवाज उठाना, उनकी रक्षा करना और उनका साथ देना है, लेकिन अब यह उनकी प्राथमिकता नहीं रही। उनकी एकमात्र चिंता यह है कि ज्ञानेश कुमार की रक्षा कैसे की जाए और सरकार के खिलाफ किसी भी प्रोटेस्ट को कैसे रोका जाए।

न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक घोटाला: 122 करोड़ के गबन में ईडी ने 8 लोगों के खिलाफ दायर की चार्जशीट

मुंबई। एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ईडी) के मुंबई जोनल ऑफिस ने न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (एनआईसीबीएल) में 122 करोड़ रुपए के फंड गबन मामले में बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने बैंक के पूर्व जनरल मैनेजर हितेश मेहता और 7 अन्य लोगों के खिलाफ मुंबई की स्पेशल पीएमएलए कोर्ट में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर की है। कोर्ट ने इस मामले में आरोपियों को प्री-कॉग्निजेंस नोटिस जारी करने का आदेश दिया है। ईडी ने यह जांच मुंबई पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (ईओडब्ल्यू) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी, जो लगभग 122 करोड़ रुपए के फंड के गबन से जुड़ी थी। जांच में पता चला कि बैंक के पूर्व जनरल मैनेजर और अकाउंट्स हेड हितेश प्रवीणचंद्र मेहता ने अकाउंटिंग सिस्टम में हेरफेर करके और बैंक की शाखाओं के बीच कैश ट्रांसफर के फर्जी रिकॉर्ड बनाकर बैंक फंड को हड़पने में अहम भूमिका निभाई थी। पूछताछ में उन्होंने लंबे समय तक फंड निकालने की बात स्वीकार भी की है। ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि ये गतिविधियां एक अन्य आरोपी, बैंक के पूर्व चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन के कहने पर की गई थीं। इन दोनों का कई सालों तक बैंक के कामकाज पर सीधा और अप्रत्यक्ष नियंत्रण था, जो सहयोगियों और परिवार के सदस्यों के जरिए चलता था। इस मामले में अपराध से हुई कमाई को मुख्य आरोपी समेत कई लोगों और संस्थाओं को ट्रांसफर किया गया था। संबंधित समय के दौरान बैंक के पूर्व और कार्यकारी चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन को भी लगभग 26 से 30 करोड़ रुपए की रकम ट्रांसफर की गई थी। जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। आरोपी हिरेन भानु ने कथित तौर पर बैंक के कुछ उधारकर्ताओं के साथ मिलीभगत करके काम किया और बिना कोई बिक्री मूल्य चुकाए भारत के बाहर एक कंपनी और बिजनेस इकाई हासिल कर ली। इसके बाद उन्होंने उन भारतीय उधारकर्ताओं के जरिए इन विदेशी कंपनियों के खातों में फंड प्राप्त किया, जिन्हें एनआईसीबी बैंक ने बड़ी मात्रा में लोन मंजूर किए थे। इससे पहले ईडी ने पीएमएलए, 2002 के तहत आरोपियों और संदिग्धों से जुड़ी लगभग 16.95 करोड़ रुपए की 33 चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया था। इनमें फिक्स्ड डिपॉजिट, बैंक बैलेंस, फ्लैट, कमर्शियल ऑफिस और कृषि भूमि शामिल हैं। इस जब्ती की पुष्टि पीएमएलए के एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने भी कर दी है। मुंबई की ईओडब्ल्यू ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी है और एक आरोपी हिरेन भानु के खिलाफ गैर-जमानती वारंट और उद्घोषणा की कार्यवाही भी शुरू की गई है। जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी अभी भारत से बाहर है और जांच में सहयोग नहीं कर रहा है।

एमएलसी चुनाव को लेकर भाजपा की तैयारी तेज, रोहन गुप्ता बोले- बिहार से उठी आवाज पूरे देश में गूंजेगी

पटना। राघोपुर में गंगा नदी में नाव पलटने से 13 लोगों की मौत को बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने अत्यंत दुखद और प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम बताते हुए उच्चस्तरीय जांच और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की बात कही। दूसरी तरफ, बिहार में आगामी विधान परिषद की 8 सीटों पर होने वाले चुनावों को लेकर भाजपा ने संगठनात्मक तैयारी तेज कर दी है। गुजरात कैडर के अनुभवी नेता और पार्टी के राष्ट्रीय सचिव रोहन गुप्ता को बिहार का को-इन-चार्ज बनाए जाने के बाद अपने पहले पटना दौरे पर उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी और पार्टी पदाधिकारियों के साथ ग्रेजुएट और टीचर्स निर्वाचन क्षेत्रों को लेकर रणनीतिक बैठक की। बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा, “हमारे किसान भाइयों की फसलें कुदरती आफतों की वजह से खराब हो गईं। त्योहारों के मौसम को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में दुर्गा पूजा से पहले 125 करोड़ रुपए की मदद ट्रांसफर की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो बाकी किसान छूट गए थे, उन्हें भी दुर्गा पूजा के बाद मदद मिलेगी।” राघोपुर में गंगा नदी पार करते समय नाव पलटने से 13 लोगों की मौत पर उन्होंने कहा कि यह दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रशासन इस घटना की पूरी जांच कर रहा है, और यह सुनिश्चित करने के लिए सबक सीखना चाहिए कि ऐसी लापरवाही दोबारा न हो। भाजपा के राष्ट्रीय सचिव रोहन गुप्ता के पटना दौरे पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा, “को-इन-चार्ज बनाए जाने के बाद हमारे राष्ट्रीय सचिव रोहन गुप्ता, जो गुजरात से हैं और जिन्हें संगठन का बहुत अनुभव है, पहली बार बिहार आ रहे हैं। पटना ग्रेजुएट और टीचर्स चुनाव क्षेत्रों के बारे में खास नेताओं के साथ एक मीटिंग हुई। हम दोनों सीटें भारी बहुमत से जीतेंगे और एनडीए पूरे बिहार में सभी आठ विधान परिषद सीटें जीतेगा।” एमएलसी चुनावों पर भाजपा के राष्ट्रीय सचिव रोहन गुप्ता ने कहा कि एमएलसी चुनावों को लेकर पार्टी वर्कर्स और ऑफिस-बेयरर्स के साथ मीटिंग हुई। बिहार में अभी जो माहौल है, मुझे नहीं लगता कि हमें जीतने में कोई मुश्किल होगी, लेकिन विपक्ष प्रोपेगैंडा फैला रहा है और बिहार के पास इसका जवाब देने का मौका है। बिहार से जो आवाज उठेगी, वह पूरे देश में गूंजेगी। विपक्ष जनता की अदालत में पहले ही हार चुका है। वहीं, बिहार के लिए भाजपा के को-इन-चार्ज बनाए जाने पर रोहन गुप्ता ने कहा कि पार्टी ने मुझे एक बड़ी जिम्मेदारी दी है। मैंने चुनाव के दौरान करीब छह महीने बिहार में काम किया और अपने सभी साथियों को जाना। जिस ऊर्जा के साथ हमने काम किया, उसके लिए जनता ने हमें आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा कि अब चुनौती उस भरोसे पर खरा उतरने, किए गए वादों को पूरा करने और अपने काम को हर व्यक्ति तक पहुंचाने की है। मुझे यह अतिरिक्त जिम्मेदारी देने के लिए मैं लोगों और पार्टी का शुक्रगुजार हूं। मुझे जो काम दिए गए हैं, मैं उसे सफलतापूर्वक पूरा करने की पूरी कोशिश करूंगा।

अंकिता भंडारी के माता-पिता न्याय की गुहार लेकर इंडिया गेट पर बैठे, राहुल गांधी ने की मुलाकात

नई दिल्ली। उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर अंकिता के माता-पिता बुधवार को दिल्ली के इंडिया गेट के पास धरने पर बैठ गए। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी उनसे मिलने पहुंचे और न्याय की लड़ाई में साथ खड़े रहने का भरोसा दिलाया। राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, “चार साल से अंकिता भंडारी के परिवार को इंसाफ नहीं मिला, लेकिन एक ‘वीआईपी’ आरोपी को संरक्षण और संवैधानिक पद का इनाम जरूर मिला। जहां बलात्कारियों और हत्यारों का फूल-मालाओं से स्वागत होता है और अपराधियों को सत्ता की ताकत से नवाज़ा जाता है, उस महिला-विरोधी भाजपा से कोई उम्मीद की भी नहीं जा सकती। आज, अंकिता के माता-पिता अपनी बच्ची के लिए न्याय की गुहार ले कर, अपने घर से मीलों दूर, इंडिया गेट पर बैठे हैं। मैं और कांग्रेस पार्टी उनके साथ खड़े हैं – उनके दुख में भी और इंसाफ की इस लड़ाई में भी।” दूसरी ओर, पुष्कर सिंह धामी सरकार ने राहुल गांधी के आरोपों और प्रदर्शन के बीच अपना पक्ष रखते हुए कहा कि दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दिलाना इस बात का प्रमाण है कि सरकार ने “पहले दिन से ही पूरी गंभीरता के साथ काम किया” ताकि अपराधियों को सजा मिल सके। उत्तराखंड सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया कि मामले में आरोपियों को 24 घंटे के भीतर जेल भेजा गया और निष्पक्ष व गहन जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया। आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई। बयान के अनुसार, जांच के दौरान लगभग 500 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट तैयार की गई, जिसमें महत्वपूर्ण सबूत और करीब 100 गवाहों के बयान शामिल किए गए। अभियोजन पक्ष द्वारा मजबूत पैरवी के चलते आरोपियों की जमानत याचिकाएं बार-बार खारिज हुईं और वे पूरे ट्रायल के दौरान जेल में रहे। अंततः अंकिता के हत्यारों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। सरकार ने कहा कि पूरी प्रक्रिया के दौरान राज्य सरकार ने अंकिता के माता-पिता और परिवार की भावनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। परिवार की मांग के अनुसार तीन बार लोक अभियोजकों को बदला गया। इसके अलावा, जब उनके माता-पिता ने सीबीआई जांच की मांग की तो मुख्यमंत्री धामी ने वही आदेश दिया। गौरतलब है कि 2022 में उत्तराखंड के एक रिसॉर्ट में अंकिता भंडारी की कथित तौर पर हत्या कर दी गई थी।

कांग्रेस और ‘आप’ की नूरा-कुश्ती सब जानते हैं, प्रॉक्सी टीम से देश के कानून को तोड़ने की कोशिश: शाजिया इल्मी

नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शन के तरीके पर भाजपा नेता शाजिया इल्मी ने निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस एवं कॉकरोच जनता पार्टी यानी आम आदमी पार्टी के बीच चल रही नूरा-कुश्ती किसी से छिपी नहीं है, लेकिन प्रोटेस्ट के नाम पर तिरंगे का इस्तेमाल कर कानून तोड़ने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती। भाजपा नेता शाजिया इल्मी ने कहा, “एक तरफ राहुल गांधी और कांग्रेस, दूसरी तरफ कॉकरोच जनता पार्टी यानी आम आदमी पार्टी की प्रॉक्सी टीम, दोनों के बीच जितनी नूरा कुश्ती है, ये सब जानते हैं, लेकिन जब बात प्रोटेस्ट की आती है तो देखिए कि राहुल गांधी किस तरह से तिरंगे का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन्हें लगता है कि ये तिरंगे की आड़ में कानूनी नियमों के खिलाफ जाएंगे। सौरव दास समेत सीजेपी के तमाम साथियों के बॉन्ड पर हस्ताक्षर हैं, उसके बावजूद आप दीवारें फांदकर उस साइट पर पहुंचेंगे और तिरंगे की आड़ में आप कानून को तोड़ेंगे?” उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी को मैं ये कहना चाहती हूं कि अगर आपको लगता है कि अपनी प्रॉक्सी टीम के जरिए देश के कानून को तोड़ेंगे तो इसकी इजाजत नहीं मिलेगी। राहुल गांधी किस शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन की बात कर रहे हैं? वो शांतिपूर्ण प्रदर्शन, जहां एक महिला पत्रकार को, जो आपसे सख्त सवाल पूछती है, आप गर्भवती महिला के साथ मारपीट करवाएंगे। अपने ही मुख्यमंत्रियों को बख्सते नहीं हैं। शाजिया इल्मी ने कहा कि पूरी दुनिया ने देखा है कि किस तरह से आपने मर्यादा को लांघा है। पूरी दुनिया ने देखा है कि किस तरह से प्रियंका गांधी हाथापाई कर रही हैं, राहुल गांधी का अन्य प्रोटेस्टर्स और अपने नेताओं के साथ क्या रवैया रहा है। आप तिरंगे का इस्तेमाल कर रहे हैं, उसका अपमान कर रहे हैं। आप जब-जब कानून का अपमान करेंगे, तिरंगे का भी अपमान करेंगे। भाजपा एमएलसी श्रीकांत पंडितराव भारतीय ने कहा कि लोकतंत्र की बात कौन कर रहा है राहुल गांधी? जिसके परिवार ने भारत में इमरजेंसी लगाई, उसका डीएनए डेमोक्रेसी की बात करने वाला है? और क्या यही डेमोक्रेसी है, सड़कों पर उतरकर भारत के संवैधानिक संस्थानों के बारे में गलतफहमियां पैदा करना? पूरा देश राहुल गांधी के इरादे को जानता है और जिसे उन्होंने ‘मिशन’ कहा, उसके बारे में मैं राहुल गांधी से बस इतना कहना चाहता हूं कि उन्हें पहले यह समझना चाहिए कि ‘मिशन’ शब्द का क्या मतलब है? उन्होंने कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी के संदर्भ में कॉकरोच जनता पार्टी का जिक्र करने की कोई वजह नहीं है, लेकिन जिस तरह से राजनीतिक पार्टियां व्यवहार कर रही हैं, वह सिर्फ ऊपर-ऊपर जो दिख रहा है, उतना ही नहीं है। इसके पीछे एक बहुत बड़ी अंतरराष्ट्रीय साजिश लगती है। देश के लोकतंत्र में अगर कोई राजनीतिक पार्टी जन मुद्दों को लेकर आंदोलन या विरोध प्रदर्शन करती है तो मैं समझ सकता हूं। भाजपा एमएलसी ने कहा कि अगर सूखे को लेकर लोग सड़कों पर उतरते हैं तो मैं समझ सकता हूं। हालांकि, भारत के लोकतंत्र के भीतर सभी संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करने की जो कोशिश कांग्रेस और राहुल गांधी द्वारा की जा रही है, वह सबसे बड़ी साजिश है। भाजपा विधायक प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष भी हैं, उनसे एक अपेक्षा की जाती है कि वो मर्यादित बातचीत करें। राजनीतिक क्षेत्र में उन्हें आलोचना करने का अधिकार है, लेकिन उसमें भी संयमित व्यवहार होना चाहिए। प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के लिए क्या कुछ नहीं कहा जाता है। उन्होंने आगे कहा कि राजनीतिक दृष्टि से आप किसी की भी आलोचना कर सकते हैं, लेकिन जिन्होंने पूरा जीवन राष्ट्रीय सुरक्षा में दे दिया हो, जिनका राजनीति से कोई सरोकार न हो, आप उनके बारे में इस तरह से अमर्यादित टिप्पणी कर रहे हैं।

108 मुफ्त एम्बुलेंस कर्मचारियों की हड़ताल की चेतावनी प्रशासनिक विफलता : भाजपा

बेंगलुरु। कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता और भाजपा के वरिष्ठ नेता आर अशोक ने बुधवार को राज्य सरकार पर प्रशासनिक विफलता का आरोप लगाते हुए कहा कि 108 मुफ्त एम्बुलेंस सेवा के कर्मचारियों को अपनी जायज मांगों को मनवाने के लिए हड़ताल की चेतावनी देने पर मजबूर होना पड़ा है। गौरतलब है कि एम्बुलेंस चालकों ने अपनी कई मांगों को पूरा करने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि वे आज रात 10 बजे से ड्यूटी पर नहीं आएंगे। सरकार और एम्बुलेंस चालकों के बीच बातचीत चल रही है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है। एक बयान में अशोक ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से सवाल किया कि 22 सितंबर को कर्मचारियों के साथ बैठक कर उनकी मांगें पूरी करने का आश्वासन देने के बावजूद सरकार आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं देने वाले कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान क्यों नहीं कर सकी। उन्होंने कहा कि वेतन संशोधन, समान वेतन, समय पर वेतन भुगतान और दुर्घटना में मौत या स्थायी रूप से विकलांग होने वाले कर्मचारियों के लिए 50 लाख रुपए मुआवजे जैसी कई मांगें अब भी लंबित हैं। अशोक ने स्वास्थ्य मंत्री यूटी खादर की भी आलोचना करते हुए कहा, “क्या जीवन बचाने वाली सेवाएं देने वाले कर्मचारियों की समस्याओं पर ध्यान देना आपकी जिम्मेदारी नहीं है?” राज्य की वित्तीय स्थिति को खराब करने का आरोप लगाते हुए अशोक ने कहा कि सरकार अब आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को भी अनिश्चितता की स्थिति में धकेल रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 108 एम्बुलेंस सेवा बाधित होती है, तो इसका सबसे ज्यादा असर आम लोगों पर पड़ेगा। उन्होंने सरकार से अपील की कि मरीजों की जान खतरे में पड़ने से पहले स्थिति को संभाला जाए। अशोक ने सरकार से कर्मचारियों की समस्याओं का तुरंत समाधान करने और लोगों की जान की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की मांग की। गौरतलब है कि 108 आरोग्य कवच चिकित्सा और सड़क दुर्घटना जैसी आपात स्थितियों के लिए एक टोल-फ्री एम्बुलेंस सेवा है। यह सेवा कॉल करने से लेकर मरीज को अस्पताल पहुंचाने तक पूरी तरह मुफ्त है। इस सेवा का संचालन और प्रबंधन कर्नाटक के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के तहत किया जाता है।

ओडिशा कैबिनेट ने 11 विभागों के 16 प्रस्तावों को मंजूरी दी, कक्षा 9 और 10 के लिए मुफ्त पाठ्यपुस्तकें देने की घोषणा

भुवनेश्वर। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में ओडिशा कैबिनेट ने 11 विभागों के 16 प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इन विभागों में राजस्व और आपदा प्रबंधन, उद्योग, वित्त, कौशल विकास और तकनीकी शिक्षा और कृषि एवं किसान सशक्तिकरण आदि शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई है कि इससे सुशासन, समावेशी विकास और ‘समृद्ध ओडिशा’ के विजन को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से बुधवार को प्रस्तावों की जानकारी एक्स पोस्ट के माध्यम से दी गई है। कक्षा 9 और 10 के लिए मुफ्त पाठ्यपुस्तकेंः 284.07 करोड़ की लागत वाली इस स्कीम के तहत 2025-26 से 2029-30 तक पांच वर्षों में अनुमानित 28.7 लाख छात्रों को मुफ्त पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी। इंडस्ट्रियल रीस्ट्रक्चरिंग: इस संशोधन से योग्य इंडस्ट्रियल रीस्ट्रक्चरिंग स्कीम के लिए स्टाम्प ड्यूटी को तर्कसंगत बनाया जाएगा, जिससे बीमार इकाइयों को फिर से शुरू करने, बिजनेस को जारी रखने और नौकरियों को बचाने में मदद मिलेगी। एलिमेंट्री एजुकेशन नियमों में संशोधनः 1997 के नियमों में किए गए इस संशोधन से लेवल-2 अधिकारियों की सीनियरिटी का निर्धारण लेवल-3 में सेवा की अवधि के बजाय सेलेक्ट लिस्ट में उनके स्थान के आधार पर किया जाएगा। डिप्लोमा इंजीनियरों के सर्विस कैडर का रीस्ट्रक्चरिंगः जूनियर इंजीनियर-असिस्टेंट इंजीनियर के अनुपात को संशोधित करके 60:40 कर दिया गया है, जिससे कुल स्वीकृत संख्या बढ़ाए बिना प्रमोशन की संभावनाओं में सुधार होगा। तुस्तापल्ली इन-स्ट्रीम स्टोरेज प्रोजेक्टः 105.62 करोड़ की लागत वाले इस प्रोजेक्ट से बोलांगीर के सूखे की चपेट में आने वाले 12 गांवों के लिए जल सुरक्षा मजबूत होगी और ग्रामीण आजीविका को सहारा मिलेगा। कक्षा 9 और 10 के लिए मुफ्त पाठ्यपुस्तकेंः 284.07 करोड़ की लागत वाली इस स्कीम के तहत 2025-26 से 2029-30 तक पांच वर्षों में अनुमानित 28.7 लाख छात्रों को मुफ्त पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी। अस्तारंगा फिशिंग हार्बर स्टेज-2: 133.81 करोड़ के इस प्रोजेक्ट से 1,960 मशीनीकृत मछली पकड़ने वाली नावों के लिए लैंडिंग और बर्थिंग की सुविधा मिलेगी और लगभग 35,000 लोगों को लाभ होगा। इससे फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को 20 फीसदी से घटाकर 7 फीसदी तक लाने की भी उम्मीद है। रायरंगपुर में पोस्टल इंफ्रास्ट्रक्चरः इस फैसले के तहत पोस्टल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सरकारी जमीन को मंजूरी दी गई है, जिसमें आधार केंद्र और पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र शामिल हैं, जिससे जरूरी सेवाओं तक पहुंच बेहतर होगी। खाद और बीज की सप्लाई के लिए 1,360 करोड़ रुपये का कॉर्पस फंडः 2026-27 से 2029-30 तक चलने वाली यह चार साल की योजना, समय पर खाद और अच्छी क्वालिटी के बीज उपलब्ध कराने में मदद के लिए ओएससीएमएफ और ओएसएससी को बिना ब्याज वाला रिवॉल्विंग फंड देगी। 500 करोड़ रुपये का शहरी स्टॉर्म-वॉटर ड्रेनेज प्रोग्रामः 2026-27 से 2030-31 तक चलने वाला यह पांच साल का प्रोग्राम शहरी लोकल बॉडीज और चुने हुए ब्लॉक हेडक्वार्टर में ड्रेनेज सिस्टम को बेहतर बनाएगा, जिससे जल-जमाव और स्थानीय स्तर पर बाढ़ की समस्या कम होगी। कटक में महानदी वॉटरफ्रंट का विकासः 133.72 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट में रिवरफ्रंट प्रोमेनेड, लैंडस्केप वाली जगहें, कटक हाट, एक ओपन-एयर थिएटर और लोगों के लिए सुविधाएं विकसित की जाएंगी। ओडिशा सेकेंडरी एजुकेशन नियम, 2026: नए नियम 1993 के नियमों की जगह लेंगे, सर्विस से जुड़ी विसंगतियों को दूर करेंगे, राज्य स्तर पर एक समान कैडर पदानुक्रम बनाएंगे और हिंदी व संस्कृत शिक्षकों को कैडर का दर्जा और प्रमोशन के मौके देंगे। ओडिशा सबऑर्डिनेट फिशरीज सर्विस कैडर का पुनर्गठन: मंजूर पदों की संख्या 445 से बढ़कर 774 हो जाएगी, जिससे फील्ड-लेवल पर मैनपावर और फिशरीज सर्विस डिलीवरी मजबूत होगी। केन्दुझार में डिजास्टर रिकवरी-कम-डेटा सेंटर: 176.83 करोड़ रुपये की लागत वाला यह सेंटर डिजास्टर रिकवरी को मजबूत करेगा और ज़रूरी सरकारी डिजिटल सेवाओं के लगातार चलने में मदद करेगा। दक्षता विकास योजना: 2026-27 से 2028-29 तक 7450 करोड़ रुपये की लागत वाली इस योजना का मकसद प्लेसमेंट से जुड़ी ट्रेनिंग, डिजिटल स्किलिंग और विदेश में नौकरी में मदद के जरिए 4.20 लाख युवाओं को स्किल सिखाल सिखाना है।