स्पेन में सूर्य ग्रहण का रोमांच, लाखों लोगों ने डाला डेरा

मैड्रिड। पूर्ण सूर्य ग्रहण ने स्पेन को दुनिया के सबसे बड़े खगोलीय पर्यटन केंद्रों में बदल दिया है। बुधवार को लाखों लोग चंद्रमा की छाया में सूर्य को पूरी तरह गायब होते देखने के लिए स्पेन के उन इलाकों में पहुंच रहे हैं, जहां ग्रहण पूर्ण रूप से दिखाई देगा। स्थानीय मीडिया एल पायस के अनुसार, स्पेन में ग्रहण देखने के लिए करीब 60 लाख लोगों के जुटने का अनुमान है। इनमें लगभग 4.6 लाख अंतरराष्ट्रीय पर्यटक शामिल हैं। अमेरिका और जापान समेत कई देशों से लोग महीनों पहले होटल और अन्य ठहरने की जगहें बुक कर चुके हैं। नासा के अनुसार स्पेन में यह घटना एक सदी से अधिक समय बाद पूर्ण सूर्य ग्रहण के रूप में दिखाई दे रही है। ग्रहण का मार्ग स्पेन के उत्तरी हिस्से से होते हुए भूमध्यसागरीय क्षेत्र और बेलिएरिक द्वीपों तक जाता है। खगोल प्रेमियों के लिए यह केवल एक सामान्य पर्यटन यात्रा नहीं है। कई लोगों ने साफ आसमान वाले स्थान तक पहुंचने के लिए अपनी यात्रा की पूरी योजना बदल दी है। कहीं ग्रहण देखने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं तो कहीं विमानों से भी इसे देखने की तैयारी हुई है। ग्रहण के चश्मे तक कई जगहों पर बिक चुके हैं। हालांकि इस रोमांच के बीच स्पेन के सामने एक बड़ी चुनौती भी है जंगलों में आग का खतरा। देश इस समय गर्मी और बेहद शुष्क परिस्थितियों से जूझ रहा है। कुछ इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है और पहले से ही कई जगह जंगलों में आग लगी हुई है। स्पेनिश पुलिस विभाग के अनुसार, इसी वजह से अधिकारियों ने लगभग 660 आधिकारिक ग्रहण देखने वाले स्थान निर्धारित किए हैं और बड़े पैमाने पर सुरक्षा इंतजाम किए हैं। पुलिस तथा अन्य सुरक्षा बलों की बड़ी तैनाती की गई है ताकि भीड़, यातायात और आग के जोखिम को नियंत्रित किया जा सके। इस खगोलीय घटना का कुल रोमांच कुछ मिनटों का ही होगा, लेकिन इसके लिए लोगों की महीनों की तैयारी और हजारों किलोमीटर की यात्रा इसे अपने आप में एक यादगार वैश्विक आयोजन बना रही है। स्पने में सूर्य ग्रहण शाम करीब 7:30 बजे (स्थानीय समयानुसार) लगना शुरू होगा। पूर्ण अंधकार की स्थिति रात 8:26 बजे से 8:33 बजे के बीच, सूर्यास्त से ठीक पहले, कुछ मिनटों के लिए दिखाई देगी। नासा के अनुसार पूर्ण सूर्य ग्रहण का रास्ता ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी रूस, अटलांटिक महासागर, स्पेन और पुर्तगाल के एक छोटे हिस्से से होकर गुजरेगा।

पहले पैसा देना, बाकी चीजें बाद में’, काजल राघवानी ने बप्पा से की प्रार्थना

मुंबई। भोजपुरी सिनेमा की लोकप्रिय अभिनेत्री काजल राघवानी इन दिनों अपनी निजी जिंदगी और बयानों को लेकर सुर्खियों में बनी हुई हैं। अभिनेत्री ने बुधवार को एक खास पोस्ट शेयर की। अभिनेत्री ने इंस्टाग्राम पर अपनी तस्वीर पोस्ट की, जिसके जरिए उन्होंने अपने दिल की बात बयां करते हुए लिखा, “बप्पा, अगला जन्म देना होगा तो, सबसे पहले पैसा देना, बाकी चीजें बाद में देना। क्योंकि जहां पैसा वहां सब सुनते है और अच्छा भी कहते है। जहां नहीं वहां तकलीफ ही तकलीफ होती हैं। साथ ही, उन तमाम लोगों को भी खूब सारा पैसा देना जो बस पैसा न होने के कारण आज भी अपने न्याय के लिए सालों से अदालत की चौखट पर जाकर गिड़गिड़ा रहे हैं। चाहे लड़की वालों की तरफ से हो या लड़के की तरफ से।” काजल की पोस्ट को फैंस काफी पसंद कर रहे हैं और कई यूजर्स कमेंट सेक्शन पर कमेंट कर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। बता दें कि अभिनेत्री ने हाल ही में रियलिटी शो ‘भोजपुरी बवाल’ और उनके पुराने रिश्तों से जुड़े विवादों और इंडस्ट्री में हुए फेवरेटिज्म को लेकर खुलकर बात की, जिसके बाद विवाद बढ़ता दिख रहा है। उन्होंने शो के दौरान पवन सिंह पर शूटिंग में जबरदस्ती किसिंग सीन करवाने का आरोप लगाया, और बिना नाम लिए खेसारी लाल यादव पर धोखा, मारपीट व धमकी देने जैसे गंभीर दावे किए। साथ ही उन्होंने निरहुआ व आम्रपाली दुबे पर भी तीखे बयान दिए हैं। शो के दौरान काजल ने आम्रपाली से डायरेक्ट सवाल किया था कि क्या आम्रपाली उनसे असहज महसूस करती हैं। साथ ही, काजल ने निरहुआ के एक पुराने बयान को लेकर निशाना साधा जिसमें उन्होंने अपनी पत्नी को लेकर बात की थी। काजल ने कहा कि जो व्यक्ति अपनी पत्नी को सम्मान नहीं दे सकता, वह दूसरों को क्या इज्जत देगा। काजल ने यह भी दावा किया कि निरहुआ के चलते उन्हें फिल्मों से हटाया गया, जिसके बाद आम्रपाली और निरहुआ ने भी पलटवार करते हुए उनके बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। अभी हाल -फिलहाल में भोजपुरी इंडस्ट्री में ये मुद्दा गरमाया हुआ है।

तिरंगा हमारी माटी के स्वाभिमान का प्रतीक, अमित शाह के सदन में आने पर विपक्ष की होगी अग्निपरीक्षा : राजीव रंजन

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को लेकर भाजपा नेताओं ने इसे उत्सव की तरह मनाने की अपील की है। इस पर जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि तिरंगा हमारी माटी के स्वाभिमान का प्रतीक है। राजीव रंजन प्रसाद ने आईएएनएस से कहा, “पीएम मोदी का साफ संदेश है कि हर घर तिरंगा को उत्सव की तरह बनाएं। यह आजादी हमारे पुरखों के त्याग और बलिदान के बाद मिली है। और तिरंगा हमारी माटी के स्वाभिमान का प्रतीक है। तिरंगे को घर-घर पहुंचाना उसी महाअभियान का हिस्सा है।” उन्होंने कहा, “विपक्ष ने कई बार कहा कि दिल्ली में जो हुआ उसके जवाब के लिए अमित शाह को सदन में आना चाहिए, तो अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अब सदन में आ रहे हैं। अब विपक्ष के समक्ष यह चुनौती है, कि जिस तरीके से उन्होंने झूठ फैलाने का काम किया है। आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह संसद को संबोधित करेंगे, तो उस समय विपक्ष को भागने की जरूरत नहीं है, उन्हें सुनना होगा। और मुझे लगता है कि यह विपक्ष के लिए अग्निपरीक्षा की तरह होगी।” एफसीआरए बिल को जेपीसी को भेजे जाने पर राजीव रंजन ने कहा, “यह एक स्वागत योग्य कदम है। विदेशी धन जिन संस्थाओं के जरिए भारत में आता है, उनके नियमन के दृष्टि से ये विधेयक बेहद जरूरी है। अब जेपीसी इस पर अपनी विचार रखेगी।” एयर इंडिया के पायलट के गांजा टेस्ट में पॉजिटिव आने पर उन्होंने कहा, “सुरक्षा नियमों की इस तरह से कतई खिलवाड़ नहीं हो सकता। डॉप टेस्ट की मॉनिटरिंग लगातार जारी रहनी चाहिए।” उन्होंने कहा, “झारखंड में हो रहे प्रोटेस्ट पर कांग्रेस की चुप्पी संदेह पैदा करने वाली है।” जदयू प्रवक्ता ने सवाल उठाते हुए कहा, “आपके पास दिल्ली और उत्तर प्रदेश के लिए वक्त है लेकिन रांची क्यों नहीं जा रहे हैं। झारखंड सरकार पर दबाव क्यों नहीं बना रहे हैं कि वे सीबीआई जांच कराए।” बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “तेजस्वी यादव भी इंडिया ब्लॉक का हिस्सा हैं, तो मुझे उम्मीद थी कि वह वहां जाएंगे, सरकार पर दबाव बनाएंगे और छात्रों को न्याय दिलाएंगे।

सैंड आर्टिस्ट ने ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को बढ़ावा देने के लिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस की थीम पर बनाई मूर्ति

अगरतला। स्वतंत्रता दिवस समारोह से पहले देशभर में चलाए जा रहे ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत सैंड आर्टिस्ट कृष्णा देबनाथ ने बुधवार को अगरतला में रेत से एक कलाकृति बनाई। इस मूर्ति में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की तस्वीर के साथ-साथ ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को दर्शाने वाले तत्व भी शामिल हैं। यह अभियान लोगों को राष्ट्रीय ध्वज फहराने और पूरे देश में देशभक्ति की भावना का जश्न मनाने के लिए प्रोत्साहित करता है। पत्रकारों से बात करते हुए देबनाथ ने कहा, “स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आयोजित किए जा रहे महीने भर चलने वाले कार्यक्रमों के तहत मैंने ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के साथ नेताजी सुभाष चंद्र बोस की तस्वीर वाली यह रेत की मूर्ति बनाई है।” इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया और स्वतंत्रता दिवस से पहले लोगों से एक खास अपील की गई। ​​वीडियो में उन्होंने देशभर के लोगों से ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को हर घर में एक त्योहार की तरह मनाने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने नागरिकों से यह भी अपील की कि वे अपने घरों पर तिरंगा फहराएं और 15 अगस्त को गर्व, उत्साह और देशभक्ति की भावना के साथ मनाएं। उनकी यह अपील ऐसे समय में आई है, जब भारत 15 अगस्त, 2026 को अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी कर रहा है। राष्ट्रीय समारोहों से पहले पूरे देश में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही विभिन्न राज्यों में तिरंगा यात्राएं और अन्य देशभक्तिपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। ‘हर घर तिरंगा 2026’ अभियान अभी चल रहा है। यह नागरिकों को राष्ट्रीय ध्वज फहराकर, सेल्फी अपलोड करके और स्वतंत्रता दिवस समारोह से जुड़ी गतिविधियों में हिस्सा लेकर इस देशव्यापी पहल में शामिल होने का मौका देता है। केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत द्वारा शुरू किया गया यह अभियान 9 अगस्त से 17 अगस्त तक चलेगा। इस साल के आयोजन में ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ पर खास जोर दिया गया है और लोगों को जश्न के हिस्से के तौर पर राष्ट्रीय गीत सीखने और गाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। लोग ‘हर घर तिरंगा’ के लिए बने खास प्लेटफॉर्म के जरिए इस कैंपेन में हिस्सा ले सकते हैं। इस पोर्टल पर यूजर्स अपनी भागीदारी रजिस्टर कर सकते हैं, वर्चुअली तिरंगा फहरा सकते हैं, सेल्फी अपलोड कर सकते हैं और सभी गतिविधियां पूरी करने के बाद सर्टिफ़िकेट या यादगार वीडियो डाउनलोड कर सकते हैं। इसमें हिस्सा लेने के लिए नागरिकों को ‘हर घर तिरंगा’ की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा, “होइस्ट फ्लैग” (झंडा फहराने) का विकल्प चुनना होगा। अपनी जानकारी दर्ज करनी होगी और पोर्टल पर दिए गए निर्देशों का पालन करना होगा। गतिविधि पूरी करने के बाद प्रतिभागी अपने सर्टिफ़िकेट डाउनलोड कर सकते हैं (जहां वे उपलब्ध हों)। इस अभियान का मकसद नागरिकों को गर्व के साथ राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए प्रेरित करना है। साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि ‘फ्लैग कोड ऑफ़ इंडिया’ के तहत बताए गए सम्मान और गरिमा के साथ इसका मान-सम्मान बनाए रखा जाए।

लुंगीवाला’ टिप्पणी पर जेपी नड्डा बोले- हर राज्य की वेशभूषा का करते हैं सम्मान, दूसरा पक्ष भी सुना जाए

नई दिल्ली। राज्यसभा में बुधवार को ‘लुंगीवाला’ टिप्पणी को लेकर जोरदार हंगामा देखने को मिला। सीपीआई (एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने आरोप लगाया है कि सदन में एक महिला सांसद द्वारा उन्हें ‘लुंगीवाला’ कहा गया। वहीं नेता सदन जेपी नड्डा ने कहा कि हर राज्य की वेशभूषा का सम्मान किया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हम निश्चित रूप से हर राज्य की वेशभूषा का सम्मान करते हैं। हम ऐसी बातों का समर्थन नहीं करते हैं। हालांकि, नड्डा ने यह भी कहा कि इस मामले में सांसद सुष्मिता देव का पक्ष भी सुना जाना चाहिए। उन्होंने सभापति से आग्रह किया, ”सुष्मिता देव को भी अपनी बात रखने का अवसर दिया जाना चाहिए। सुष्मिता देव को बोलने की अनुमति दें।” गौरतलब है कि सुष्मिता देव भाजपा से राज्यसभा सांसद हैं। इस बीच संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि हम बिना किसी भेदभाव के राष्ट्र की एकता के पक्ष में हैं। उन्होंने कहा कि एक पक्ष के सदस्य द्वारा दूसरे सदस्य पर आरोप लगाए जाने के बाद विरोध की स्थिति बनी है। उन्होंने दूसरे पक्ष को भी सुनने की मांग की। उन्होंने कहा कि दूसरे पक्ष की बात भी रिकॉर्ड पर आनी चाहिए। रिजिजू ने कहा कि सदन में सभी सदस्यों को अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए और किसी एक सदस्य की शिकायत के आधार पर दूसरे सदस्यों को अपनी बात रखने से नहीं रोका जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ”हम किसी भी तरह के भेदभाव के बिना राष्ट्र की एकता के पक्ष में हैं।” रिजिजू ने यह भी कहा कि कुछ अन्य सांसद इस संबंध में एक बयान देना चाहती हैं। इन महिला सांसदों के बयान को भी सदन के रिकॉर्ड में दर्ज कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी सदस्यों को अपनी बात रखने का समान अवसर मिलना जरूरी है। जॉन ब्रिटास की आपत्ति का जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सदन में हर सदस्य समान है और सभी भारतीय हैं। इस सदन में हर सदस्य बराबर है। हम सभी समान भारतीय हैं। रिजिजू ने सभापति से आग्रह किया कि यदि कोई ऐसी टिप्पणी की गई है, जो आपत्तिजनक है अथवा सदन की गरिमा के अनुरूप नहीं है, तो संबंधित सदस्य को अपने कक्ष में बुलाकर पूरे मामले को सुना जाए। इस बीच सदन में लगातार हंगामा और नारेबाजी चलती रही जिसके कारण राज्यसभा की कार्यवाही को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

हमें अमित शाह का बयान सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं, छात्रों के मुद्दों पर जवाब देना चाहिए : राहुल गांधी

नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बुधवार को संसद परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का बयान या “लेक्चर” सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं है। उनकी प्राथमिकता देश की युवा पीढ़ी से जुड़े उन सवालों का जवाब पाना है, जिनका संबंध छात्रों पर हुई कथित हिंसा से है। राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस की है और विपक्ष की अन्य पार्टियों ने भी अपना रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष जानना चाहता है कि दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर गोली चलाने का आदेश किसने दिया, किसके आदेश से छात्रों पर लाठीचार्ज हुआ और एक छात्र की आंख की रोशनी जाने की घटना के लिए कौन जिम्मेदार है। उन्होंने गृह मंत्रालय की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि छात्रों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश गृह मंत्रालय के स्तर से लागू किया गया था। राहुल गांधी ने सीधे अमित शाह से सवाल किया कि क्या उन्होंने छात्रों पर गोली चलाने का आदेश दिया था।उन्होंने कहा कि यदि ऐसा आदेश गृह मंत्री ने दिया था तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए क्योंकि तब वे इस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार होंगे। वहीं, अगर उन्होंने ऐसा आदेश नहीं दिया था तो राहुल गांधी ने उनकी क्षमता पर सवाल उठाते हुए इस्तीफे की मांग की। राहुल गांधी ने कहा कि अमित शाह पिछले 20 दिनों से सदन में नजर नहीं आए हैं। गृह मंत्री में सदन का सामना करने की हिम्मत नहीं है और वे संसद में आकर इन सवालों का जवाब नहीं दे सकते। राहुल गांधी ने छात्रों पर कथित तौर पर कील लगी लाठियों से हमला किए जाने का भी उल्लेख किया और पूछा कि इस तरह की कार्रवाई का आदेश किसने दिया था। वहीं, झारखंड में छात्रों के विरोध प्रदर्शन के मुद्दे पर राहुल गांधी ने अपने ऊपर लगाए जा रहे चुप रहने के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि वह झारखंड के मामले पर चुप नहीं हैं और अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट रूप से कह चुके हैं कि छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की हिंसा को सही नहीं माना जा सकता। राहुल गांधी ने कहा कि वह इस मुद्दे पर खुलकर बोल रहे हैं और विपक्ष का मकसद छात्रों के खिलाफ हिंसा के मामलों में जवाबदेही तय कराना है। उन्होंने कहा कि युवाओं और छात्रों से जुड़े इन सवालों का जवाब मिलना जरूरी है और सरकार को इस पर स्पष्ट स्थिति सामने रखनी चाहिए।

शराबबंदी पर एनसीएईआर की रिपोर्ट से बिहार में छिड़ी नई बहस

पटना। बिहार में पूर्ण शराबबंदी के करीब एक दशक बाद एक शोध रिपोर्ट ने इस नीति को लेकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। देश के प्रमुख आर्थिक शोध संस्थानों में शामिल नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर) की एक स्टडी में बिहार में पूर्ण शराबबंदी खत्म कर नियंत्रित तरीके से शराब की बिक्री शुरू करने और आबकारी कर व्यवस्था बहाल करने की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसा होने पर राज्य के अपने राजस्व में करीब 14 से 15 फीसदी तक की वृद्धि हो सकती है। रिपोर्ट में शराबबंदी के बाद अवैध शराब की तस्करी, दूसरे नशीले पदार्थों के इस्तेमाल और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों का भी उल्लेख किया गया है। इसके बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या भाजपा के नेतृत्व वाली सम्राट चौधरी सरकार शराबबंदी को खत्म करने की दिशा में कदम उठाएगी और क्या मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) इसके लिए तैयार होगी। हालांकि, सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर फिलहाल शराबबंदी खत्म करने को लेकर कोई स्पष्ट सहमति दिखाई नहीं दे रही है। जदयू की ओर से शराबबंदी की समीक्षा या इसे समाप्त करने के सवाल को खारिज किया गया है। शराबबंदी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत और सामाजिक सुधार के प्रमुख एजेंडे का हिस्सा रही है। अप्रैल 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिलाओं की मांग और सामाजिक सुधार को आधार बनाकर बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू की थी। इसके बाद यह नीति उनकी सरकार की प्रमुख पहचान बन गई। शराबबंदी लागू होने के बाद से ही अवैध शराब की तस्करी और कानून के क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठते रहे हैं। सत्ता पक्ष के कुछ नेता भी समय-समय पर इसकी समीक्षा और प्रभावी क्रियान्वयन की मांग करते रहे हैं। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी लंबे समय से शराबबंदी कानून के क्रियान्वयन पर सवाल उठाते रहे हैं। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद उन्होंने गुजरात की तर्ज पर बिहार में शराबबंदी कानून लागू करने की बात कही है। वहीं, राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने भी शराबबंदी कानून को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बिहार में शराबबंदी बिना किसी सर्वे के लागू की गई थी और वह खुद इसके गवाह हैं। उन्होंने नेपाल, झारखंड और छत्तीसगढ़ की सीमाओं से शराब की तस्करी रोकने के लिए सरकार से गंभीर कार्रवाई की मांग की। भाई वीरेंद्र ने अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि शराब की बड़ी खेप में कार्रवाई के नाम पर कुछ ही ट्रकों को पकड़कर उपलब्धि दिखाई जाती है। इधर, भाजपा प्रवक्ता कुंतल कृष्ण ने कहा कि विभिन्न शोध संस्थानों की रिपोर्ट समय-समय पर सामने आती हैं और बिहार सरकार सभी विषयों पर विचार करती है। उन्होंने कहा कि शराबबंदी और पूर्ण शराबबंदी का फैसला सामूहिक निर्णय था और 2016 में लगभग सभी राजनीतिक दलों ने इसका समर्थन किया था। उन्होंने कहा कि शराबबंदी की समय-समय पर समीक्षा होती रही है और सामने आ रही नई रिपोर्टों की भी समीक्षा की जाएगी। आगे क्या निर्णय लिया जाना है, यह कैबिनेट का सामूहिक फैसला होगा। कुंतल कृष्ण ने कहा कि बिहार की जनता ने दो आम चुनावों में पूर्ण शराबबंदी के मुद्दे पर अपना समर्थन दिया है और यह भी विचार करने योग्य तथ्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू है। ऐसे में इस रिपोर्ट ने शराबबंदी को लेकर आर्थिक फायदे-नुकसान, सामाजिक प्रभाव और राजनीतिक प्रतिबद्धता के बीच नई बहस जरूर शुरू कर दी है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार इस शोध के निष्कर्षों को किस तरह देखती है और भविष्य में शराबबंदी की नीति को लेकर क्या फैसला लिया जाता है।

विधानसभा घेरने की कोशिश कर रहे एबीवीपी कार्यकर्ता हिरासत में, झारखंड बंद के दौरान कई जगह सड़क जाम

रांची। झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों पर सोमवार को हुए लाठीचार्ज के विरोध में मंगलवार को राजधानी रांची में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बंद और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के विधानसभा घेराव का मिला-जुला असर देखने को मिला। शहर के कई हिस्सों में भाजपा कार्यकर्ताओं ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया, जबकि एबीवीपी कार्यकर्ताओं को विधानसभा की ओर बढ़ने से पहले ही पुलिस ने हिरासत में ले लिया। सुबह रांची के अधिकांश इलाकों में दुकानें खुली रहीं और छोटे-बड़े वाहनों की आवाजाही सामान्य रही। सुबह आठ बजे से ही भाजपा कार्यकर्ता अलग-अलग इलाकों में सड़कों पर उतरे और दुकानों को बंद कराना शुरू किया। कांके रोड, रातू रोड, हरमू चौक, अरगोड़ा चौक, बोड़ेया और सीएमपीडीआई गेट के पास कार्यकर्ताओं ने सड़क जाम किया। कई स्थानों पर टायर भी जलाए गए। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जाम हटाया। नामकुम में सुबह करीब 11 बजे भाजपा कार्यकर्ताओं ने बाजार चौक पर सड़क पर बैठकर प्रदर्शन किया और टायर जलाकर रांची-जमशेदपुर मुख्य मार्ग को जाम कर दिया। करीब साढ़े 11 बजे पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर सड़क खाली कराई। इस दौरान सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। लोवाडीह में भी भाजपा मंडल अध्यक्ष अशोक गोप के नेतृत्व में बंद कराया गया। पुलिस के अनुसार, लोवाडीह से 11 और नामकुम से 17 बंद समर्थकों को हिरासत में लेकर थाने लाया गया। फिलहाल सभी को थाने में रखा गया है। हालांकि, बंद का असर पूरे शहर में एक जैसा नहीं रहा। मेन रोड, बरियातू और मोरहाबादी सहित कई इलाकों में दुकानें खुली रहीं और वाहनों का आवागमन सामान्य रहा। इधर, जेपीएससी-जेएसएससी आंदोलन के दौरान छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में एबीवीपी ने विधानसभा घेराव का ऐलान किया था। राज्यभर से पहुंचे एबीवीपी कार्यकर्ता पुराने विधानसभा परिसर के पास जुटे और सड़क पर बैठकर नारेबाजी करने लगे। पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हल्की नोकझोंक और धक्का-मुक्की भी हुई। बाद में पुलिस ने एबीवीपी कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर बस में बैठा दिया। कुछ छात्र नेता बस की छत पर चढ़कर नारेबाजी करते रहे। कुछ कार्यकर्ता बस के आगे और पीछे सड़क पर लेट गए।

आईटीबीपी के डीजी ने सिक्किम में 11वीं और 48वीं बटालियन की फॉरवर्ड सीमा चौकियों का दौरा किया

गंगटोक। आईटीबीपी के डीजी शत्रुजीत कपूर ने मंगलवार को सिक्किम में 17,000 फीट तक की ऊंचाई पर स्थित 11वीं और 48वीं बटालियन की फॉरवर्ड सीमा चौकियों (बीओपीज) का दौरा किया। ऑपरेशनल तैयारी की समीक्षा करते हुए उन्होंने जवानों से बातचीत की। डीजी शत्रुजीत कपूर ने सैनिक सम्मेलन को संबोधित किया और हिमवीरों का मनोबल बढ़ाया। सोमवार को आईटीबीपी के डीजी शत्रुजीत कपूर ने सिक्किम में 13वीं बटालियन और फॉरवर्ड लोकेशन्स का दौरा किया था। उन्होंने हिमवीरों से बातचीत की थी और सैनिक सम्मेलन आयोजित किया और ऑपरेशनल तैयारियों का जायजा लिया था। दौरे के दौरान, उन्होंने फॉरवर्ड लोकेशन्स पर भारतीय सेना के अधिकारियों से भी मुलाकात की थी। हर घर तिरंगा अभियान के अंतर्गत आईटीबीपी की ओर से हर घर तिरंगा रैली में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया जा रहा है। सोमवार को आईटीबीपी की 15वीं बटालियन की ओर से ऊधमपुर में तिरंगा रैली निकाली गई एवं वंदे मातरम का सामूहिक गायन किया गया था। हिमवीरों, बैंड प्लाटून एवं एनसीसी कैडेट्स ने उत्साहपूर्वक सहभागिता कर राष्ट्रप्रेम, राष्ट्रीय एकता एवं तिरंगे के सम्मान का संदेश दिया था। हर घर तिरंगा अभियान के अंतर्गत आईटीबीपी की 35वीं बटालियन की ओर से उत्तरकाशी में भव्य तिरंगा रैली का आयोजन किया गया था। इस अवसर पर आईटीबीपी पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों एवं हिमवीरों की ओर से सामूहिक रूप से राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ का गायन किया गया था। आईटीबीपी की 54वीं बटालियन की ओर से कमांडेंट कलीम एम. खान के नेतृत्व में स्वतंत्रता दिवस से पहले तैयारी के तौर पर भालुकपोंग कैंपस में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान आयोजित किया था। इस कार्यक्रम में देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता और तिरंगे के प्रति गर्व का जश्न मनाया गया था।

जम्मू-कश्मीर : पुंछ में टनल साइट के पास संदिग्ध गतिविधि के बाद सर्च ऑपरेशन जारी

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में सुरंग निर्माण स्थल के पास संदिग्ध गतिविधि देखे जाने के बाद मंगलवार को सुरक्षा बलों ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया है। अधिकारियों के अनुसार, निर्माण स्थल पर तैनात एक सुरक्षा गार्ड ने मंगलवार सुबह संदिग्ध गतिविधि देखी और एहतियात के तौर पर तीन से चार राउंड फायरिंग की। अधिकारियों ने कहा, “किसी के हताहत होने या संपत्ति के नुकसान की कोई खबर नहीं है। इस घटना के बाद, आज सुबह करीब 6 बजे जम्मू-कश्मीर पुलिस, स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप और सीआरपीएफ के जवानों ने भाटा दुरियन, संगीओट और आसपास के जंगली इलाकों में एक संयुक्त सर्च ऑपरेशन शुरू किया।” उन्होंने कहा कि अब तक सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच कोई मुठभेड़ या गोलीबारी नहीं हुई है। पुंछ जिले के मेंढर सेक्टर में संदिग्ध गतिविधि की सूचना के बाद टनल के पास बड़े पैमाने पर संयुक्त तलाशी अभियान चलाया गया। इसके अलावा सुरनकोट और मनकोट में भी अतिरिक्त अभियान जारी हैं। राजौरी जिले में भी सीमा से सटे इलाकों और नौशेरा के आसपास अभियान तेज कर दिए गए हैं। यह कदम खुफिया इनपुट और गांवों के क्षेत्रों में संदिग्ध लोगों के देखे जाने की स्थानीय रिपोर्टों के बाद उठाया गया है। ये अभियान राष्ट्रीय राइफल्स, जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप और सीआरपीएफ द्वारा चलाए जा रहे हैं। घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ी रास्तों को साफ करने के लिए ड्रोन और स्निफर डॉग्स जैसे हाई-टेक उपकरण तैनात किए गए हैं। सुरक्षा बलों ने पिछले समय में भी पुंछ और राजौरी के सीमावर्ती जिलों में कई बार संदिग्ध गतिविधियों और एलोसी के पास सुरक्षा अलर्ट के बाद बड़े पैमाने पर संयुक्त घेराबंदी और तलाशी अभियान चलाए हैं। वर्तमान में सुरक्षा बलों ने पीर पंजाल क्षेत्र में समन्वित, खुफिया आधारित घेराबंदी और तलाशी अभियान को तेज कर दिया है। इसमें पुंछ और राजौरी दोनों जिलों के विशिष्ट ग्रामीण क्षेत्रों और घने जंगल वाले इलाकों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।