मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग को लेकर पंजाब में कांग्रेस का प्रदर्शन

फिरोजपुर। पंजाब के फिरोजपुर में सोमवार को हजारों कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने उन पर देश की लोकतांत्रिक और चुनावी प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पुतले भी जलाए। इस मौके पर पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में चुनावी प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाया गया है। उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूचियों से नाम हटाकर 13.8 करोड़ लोगों को मतदान के अधिकार से वंचित किया गया। वड़िंग ने बिहार, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और हरियाणा का उदाहरण देते हुए दावा किया कि इन राज्यों के चुनावी नतीजे जमीनी हकीकत और लोगों की धारणा से अलग रहे। उन्होंने चुनाव आयोग पर भाजपा के साथ मिलकर काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि ऐसे मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं, जिन्हें भाजपा अपने खिलाफ मानते हैं। वड़िंग ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने तीन साल पहले यह मुद्दा उठाया था, लेकिन उस समय चुनाव आयोग ने इन आरोपों से इनकार किया था। उन्होंने दावा किया कि अब चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने उन बातों को स्वीकार किया है, जिन्हें राहुल गांधी पिछले तीन वर्षों से उठाते आ रहे हैं। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष ने पार्टी कार्यकर्ताओं से मतदाता सूचियों से नाम हटाए जाने को लेकर सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्यों में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कर वोटों को हटाना और इससे भाजपा को फायदा पहुंचाना चुनाव आयोग की सामान्य प्रक्रिया बन गई है। उन्होंने दावा किया कि पंजाब में भी ऐसा ही हो रहा है। वड़िंग ने दावा किया कि पंजाब की मतदाता सूची से अब तक 20 लाख वोट हटाए जा चुके हैं और यह आंकड़ा आगे और बढ़ सकता है। उन्होंने पंजाब की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि आप और भाजपा एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। वड़िंग ने पंजाब की नगर समितियों के चुनावी नतीजों का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी ने उनके नतीजों को प्रभावित किया था। उन्होंने राज्य सरकार पर पंजाब की राजनीति में अपराधीकरण को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया। वड़िंग ने आशंका जताई कि अगर यही स्थिति जारी रही तो वह समय दूर नहीं, जब गंभीर आपराधिक मामलों का सामना कर रहे जग्गू भगवानपुरिया और गुरप्रीत सेखों जैसे अपराधी और गैंगस्टर ही चुनाव लड़ते नजर आएंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान और शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल पर भी राज्य में गैंगस्टर संस्कृति को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। वड़िंग ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर दिल्ली के नेताओं के सामने झुकने का आरोप लगाते हुए उन पर तंज कसा। उन्होंने दावा किया कि मंत्रियों के लिए बने 10 सरकारी बंगलों को दिल्ली और राजस्थान के अनधिकृत लोगों को आवंटित किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बाहरी लोग इन सरकारी बंगलों में रह रहे हैं, जबकि राज्य के मंत्रियों को गेस्ट हाउस में रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज और इससे संबद्ध अस्पतालों की केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने प्रगति की समीक्षा की

नई दिल्ली। केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज (लेएचएमसी) और इससे संबद्ध अस्पतालों ‘श्रीमती सुचेता कृपलानी अस्पताल’ (एसएसकेएच) तथा कलावती सरन चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल (केएससीएच) की प्रगति की समीक्षा की। समीक्षा के दौरान स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे, विशेषीकृत नैदानिक सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और मरीजों की देखभाल को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया। समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री को कलावती सरन चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल के चल रहे विस्तार कार्य से अवगत कराया गया। इस परियोजना के तहत अस्पताल की कुल बिस्तर क्षमता 394 से बढ़ाकर 894 करने, आईसीयू की क्षमता 40 से बढ़ाकर 200 बिस्तर करने तथा ऑपरेशन थिएटरों की संख्या 4 से बढ़ाकर 12 करने की योजना है। केएससीएच परिसर में निर्माण कार्य जारी है। इसका उद्देश्य तृतीयक और सुपर-स्पेशियलिटी बाल चिकित्सा देखभाल को मजबूत करने के साथ-साथ स्नातक, स्नातकोत्तर और सुपर-स्पेशियलिटी चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण की क्षमता का विस्तार करना है। समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए जेपी नड्डा ने जोर दिया कि एलएचएमसी और इससे संबद्ध अस्पतालों में चल रही तथा आगामी परियोजनाओं की योजना मरीज-केन्द्रित और भविष्य उन्मुख दृष्टिकोण के साथ बनाई जानी चाहिए, जिसमें बदलती चिकित्सा आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि योजना और डिजाइन तैयार करते समय संबंधित क्षेत्रों के अग्रणी संस्थानों की विशेषज्ञता और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का लाभ उठाया जाना चाहिए। साथ ही, निर्माण की उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करने और परियोजनाओं की समय सीमा की कड़ाई से निगरानी करने पर भी जोर दिया। उन्होंने मंजूरी और स्वीकृति से संबंधित ऐसे मुद्दों, जिनमें मंत्रालय के हस्तक्षेप की आवश्यकता हो, को समय पर मंत्रालय के समक्ष उठाने का आह्वान किया। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि बुनियादी ढांचे के विस्तार के साथ-साथ नर्सों, डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्य पेशेवरों की भर्ती भी समानांतर रूप से आगे बढ़नी चाहिए। भविष्य की दिशा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने दीर्घकालिक संस्थागत दृष्टिकोण के साथ एक व्यापक मास्टर प्लान तैयार करने का आह्वान किया। इसमें तत्काल प्राथमिकताओं को चरणबद्ध विकास और आने वाले दशकों के लिए दूरदर्शी दृष्टिकोण के साथ समाहित किया जाना चाहिए। उन्होंने बड़े पैमाने की परियोजनाओं की योजना बनाने और उन्हें लागू करने में, जहां उपयुक्त हो, निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता और साझेदारियों की संभावनाओं का पता लगाने के लिए भी प्रोत्साहित किया। साथ ही, उन्होंने यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि ऐसी सभी पहलों में गुणवत्ता, दक्षता और मरीजों की देखभाल को केन्द्र में रखा जाए। यात्रा के दौरान केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में अत्याधुनिक स्किल लैब का दौरा किया। यह एक व्यापक बहु-विषयक सिमुलेशन-आधारित प्रशिक्षण सुविधा है, जो सुरक्षित और नियंत्रित वातावरण में व्यावहारिक एवं दक्षता-आधारित प्रशिक्षण प्रदान करती है। इस सुविधा में आईसीयू, सर्जिकल कौशल, सिमुलेटेड ओटी, प्रसूति ओटी, एनआईसीयू, ट्रॉमा, ईएनटी और नेत्र विज्ञान के लिए समर्पित सिमुलेशन क्षेत्र हैं। इसके साथ ही ब्रीफिंग और डीब्रीफिंग क्षेत्र तथा प्रक्रियात्मक कौशल के प्रशिक्षण के लिए टास्क ट्रेनर भी उपलब्ध हैं। स्किल लैब स्नातक एवं स्नातकोत्तर प्रशिक्षण, प्रक्रियात्मक कौशल विकास, संकाय विकास, बहुविषयक टीम प्रशिक्षण तथा दक्षता-आधारित मूल्यांकन के लिए एक एकीकृत मंच प्रदान करती है। इस सुविधा में सिमुलेशन-आधारित शिक्षण, सुनियोजित अभ्यास और संरचित फीडबैक के माध्यम से नैदानिक एवं शल्य चिकित्सा दक्षता, निर्णय लेने की क्षमता, टीमवर्क, संचार तथा संकट-प्रबंधन कौशल के विकास में सहायता मिलती है, साथ ही रोगी सुरक्षा को बेहतर बनाने में भी योगदान मिलता है। मंत्री ने कलावती सरन चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल में हाल ही में कार्यशील हुए ऑगमेंटेड लेवल III-बी नवजात देखभाल केन्द्र का भी दौरा किया और नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए उपलब्ध उन्नत सुविधाओं की समीक्षा की। नियोनेटोलॉजी विभाग में 80 गहन चिकित्सा बिस्तर हैं और यहां प्रतिवर्ष 10,000 से अधिक प्रसव तथा 2,500 एनआईसीयू में भर्ती होने वाले नवजात शिशुओं की देखभाल की जाती है। यहां समग्र जीवित रहने की दर 93 प्रतिशत से अधिक है। नवजात देखभाल सुविधा में हाई-फ्रीक्वेंसी ऑसिलेटरी वेंटिलेशन (एचएफओवी), इनहेल्ड नाइट्रिक ऑक्साइड थेरेपी, चिकित्सीय हाइपोथर्मिया, उन्नत निगरानी तथा व्यापक श्वसन सहायता सहित उन्नत सेवाएं उपलब्ध हैं। हाल ही में कार्यशील हुए एनआईसीयू-बी में 7 एनआईसीयू बिस्तर, 8 एचडीयू बिस्तर, 15 कंगारू मदर केयर (केएमसी) शय्याएं तथा माताओं के लिए 12 कॉट हैं। यहां परिवार-एकीकृत देखभाल, कंगारू मदर केयर और स्तनपान सहायता पर विशेष जोर दिया जाता है। समीक्षा और दौरे के दौरान एलएचएमसी तथा इसके संबद्ध अस्पतालों द्वारा उन्नत रोगी देखभाल, विशेषज्ञ बाल एवं नवजात सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा, सिमुलेशन-आधारित प्रशिक्षण और अनुसंधान को मजबूत करने के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों पर प्रकाश डाला गया। इसके साथ ही स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे के निरंतर विस्तार और आधुनिकीकरण पर भी जोर दिया गया। समीक्षा बैठक में सुनील कुमार बर्नवाल, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ), राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए); डॉ. एलजी कृष्णा, महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं (डीजीएचएस); जीएस चित्रा, संयुक्त सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय; तथा डॉ. हिमानी आहलूवालिया, निदेशक, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज (एलएचएमसी); डॉ. अरविंद कुमार, चिकित्सा अधीक्षक, एलएचएमसी; डॉ. विक्रम दत्ता, चिकित्सा अधीक्षक, एलएचएमसी और डॉ. सुजाता गौतम, प्राचार्य, एलएचएमसी उपस्थित थे।
बच्चों की दूसरी मां हैं आंगनबाड़ी वर्कर्स: डॉ स्वप्ना वर्मा

शहडोल। भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की प्रदेश महामंत्री और शहडोल संभाग की प्रभारी डॉ. स्वप्ना वर्मा ने कहा कि मां अपने बच्चों की घर में देखभाल करती है तो आंगनबाड़ी केंद्र में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता इस तरह बच्चों की दूसरी मां के समान हैं। भाजपा द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने पर सेवा संकल्प अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत आंगन मिलन सेवा कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। महिला मोर्चा की पदाधिकारी और कार्यकर्ता आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचकर बच्चों उनकी माता, लाभार्थियों से सीधे संवाद कर रही हैं। साथ ही बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं को भी करीब से देख रही हैं। भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश महामंत्री और शहडोल की प्रभारी डॉ. वर्मा सोमवार को शहडोल जिले के प्रवास पर थीं और उन्होंने गोहपारू के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आयोजित समारोह में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका को सम्मानित किया। इस मौके पर डॉ. वर्मा ने लाभार्थियों से सीधे संवाद किया और कहा कि देश की यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जमीनी कार्यकर्ताओं को पहचाना है और उन्हें सम्मान दिलाया है। प्रधानमंत्री की नेतृत्व में केंद्र तथा राज्य की योजनाओं ने महिलाओं के साथ हर वर्ग की जिंदगी में बड़ा बदलाव लाया है। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की भूमिका की चर्चा करते हुए कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र तक आने वाला बच्चा भले ही उनकी कोख से न जन्मा हो, मगर वे उसकी देखभाल अपने बच्चों के समान करती हैं। इसके साथ ही जो माताएं अपने बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र तक भेजते हैं, वे यह महसूस करती हैं कि उनका बच्चा पूरी तरह सुरक्षित है। शहडोल संभाग की प्रभारी डॉ. वर्मा ने लाभार्थियों से संवाद किया और कहा कि हमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री मोहन यादव के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करना चाहिए, साथ ही उनकी दीर्घायु की भी कामना हम करें। भाजपा महिला मोर्चा द्वारा प्रदेश में आंगन मिलन समारोह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। तमाम पदाधिकारी आंगनबाड़ी केंद्रों में पहुंचकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और लाभार्थियों से सीधे संवाद कर रहे हैं।
मुंबई: 39 हजार झुग्गियों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी, अबू आजमी ने कार्रवाई रोकने की मांग की

मुंबई। महाराष्ट्र समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और विधायक अबू आजमी ने 14 फीट से ऊंची झुग्गी-झोपड़ियों को गिराने के प्रस्ताव को लेकर बीएमसी कमिश्नर अश्विनी भिड़े से मुलाकात की। उन्होंने नगर निकाय की प्रस्तावित कार्रवाई को रोकने की मांग की। इसके अलावा, उन्होंने उज्जैन में मस्जिद से जुड़े विवाद, आईआईटी बॉम्बे के छात्र की मौत के बाद परिजनों के प्रदर्शन और सांताक्रूज सीवर हादसे को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। बीएमसी कमिश्नर से मुलाकात के बाद अबू आजमी ने कहा कि प्रस्तावित कार्रवाई को लेकर अधिकारियों से बातचीत हुई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इतनी बड़ी संख्या में कार्रवाई एक दिन में नहीं हो सकती। करीब 39 हजार झुग्गियों को लेकर कार्रवाई की बात सामने आई है, लेकिन यह काम एक साथ नहीं किया जा सकता। अवैध निर्माण पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन इसके लिए कोई रास्ता निकाला जाना जरूरी है। इस पूरे मामले को लेकर बातचीत चल रही है और संबंधित योजनाओं को जल्द लागू करने की कोशिश की जा रही है। आईआईटी बॉम्बे में छात्र की मौत के बाद उसके परिजनों के भूख हड़ताल पर बैठने के सवाल पर अबू आजमी ने कहा कि जब कोई माता-पिता अपने बेटे को पढ़ने के लिए भेजते हैं और उसकी मौत हो जाती है तो यह गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि छात्र को दलित और निचली जाति से होने के कारण अपमान का सामना करना पड़ा और इसी वजह से उसने आत्महत्या की। अगर ऐसा हुआ है तो जिम्मेदार व्यक्ति को तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। उज्जैन में मस्जिद से जुड़े विवाद पर अबू आजमी ने कहा कि 1947 से पहले मौजूद इबादतगाहों और पूजा स्थलों को उसी जगह पर रहना चाहिए और अगर सड़क के विस्तार या निर्माण की जरूरत है तो उसका रास्ता कहीं और से निकाला जाना चाहिए। किसी मस्जिद को तोड़ने का ऐलान करना उचित नहीं है। आजमी ने आरोप लगाया कि मुसलमानों के साथ जानबूझकर ज्यादती की जा रही है और ऐसे मुद्दों के जरिए राजनीतिक ध्रुवीकरण करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि राजनीति में मंदिर-मस्जिद और हिंदू-मुस्लिम जैसे मुद्दों को लगातार उठाया जा रहा है। आजमी ने इसे लेकर सरकार और राजनीतिक दलों पर निशाना साधा। सांताक्रूज सीवर हादसे को लेकर अबू आजमी ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि लोगों की समस्याओं और हादसों पर ध्यान देने के बजाय मंदिर-मस्जिद के मुद्दों पर ज्यादा चर्चा हो रही है। आजमी ने आरोप लगाया कि सांप्रदायिकता फैलाने और सत्ता में बने रहने की राजनीति के बीच आम लोगों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हादसे में लोगों की जान गई, लेकिन सरकार को इसकी परवाह नहीं है। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसी सरकार को जल्द से जल्द सत्ता से हटाया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लोगों की सुरक्षा और उनकी समस्याओं के बजाय दूसरे राजनीतिक मुद्दों पर ध्यान दे रही है।
‘अगर बहुमत खिलाफ था तो ये आयोग के फैसले थे ही नहीं’, ईसीआई के कार्यप्रणाली पर कपिल सिब्बल

नई दिल्ली। चुनाव आयोग को लेकर राज्यसभा सांसद और वकील कपिल सिब्बल ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दो चुनाव आयुक्तों के बयान का हवाला देते हुए कहा कि पिछले दस महीनों से उनके बीच कोई चर्चा नहीं हुई। सिब्बल ने कहा कि यदि दोनों चुनाव आयुक्तों की सहमति या जानकारी के बिना फैसले लिए गए हैं, तो यह सवाल उठता है कि संबंधित निर्णय वास्तव में चुनाव आयोग के थे या केवल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के। कपिल सिब्बल ने आईएएनएस से बातचीत में बताया कि दो चुनाव आयुक्तों ने कहा है कि पिछले दस महीने से उनके बीच कोई चर्चा नहीं हुई। उन्होंने समय-सीमा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस दौरान कई चुनाव हुए और यदि दोनों चुनाव आयुक्तों को यह जानकारी ही नहीं थी कि कौन से फैसले लिए गए हैं, तो यह गंभीर सवाल है। इस संबंध में जारी प्रेस नोट का भी उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अब तक उसके सही या गलत होने को लेकर कोई खंडन सामने नहीं आया है। इसी आधार पर सिब्बल ने सवाल उठाया कि जिन फैसलों को चुनाव आयोग के फैसले के तौर पर देखा गया, क्या वे वास्तव में आयोग के सामूहिक फैसले थे? ये फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के फैसले थे। सरकारी कार्यालय में बैठक की प्रक्रिया और एजेंडे से जुड़े सवाल पर कपिल सिब्बल ने कहा कि अगर कोई एजेंडा ही नहीं होगा तो कार्यवाही कैसे होगी। उन्होंने सवाल किया कि यदि बिना एजेंडे के कार्यवाही हुई और उसकी मिनट्स भी नहीं होंगी, तो बाकी दो चुनाव आयुक्तों को यह कैसे पता चलेगा कि कौन से फैसले लिए गए हैं और वे उनका विरोध किस तरह दर्ज कराएंगे। दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्ति यही थी कि उनकी सलाह के बिना फैसले लिए जा रहे थे। यदि ऐसा हुआ है तो यह गंभीर विषय है और सुप्रीम कोर्ट को भी इस पर संज्ञान लेना चाहिए। चार राज्यों में फैसलों को रोलबैक किए जाने के सवाल पर कपिल सिब्बल ने कहा कि अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट को करना है। हालांकि, उन्होंने अपनी राय रखते हुए कहा कि यदि चुनाव आयोग में निर्णय बहुमत से लिए जाते हैं और बहुमत ही किसी फैसले के खिलाफ है, तो यह सवाल उठता है कि वह निर्णय चुनाव आयोग का निर्णय कैसे माना जा सकता है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग या तो सर्वसम्मति से निर्णय करता है या बहुमत के आधार पर। यदि बहुमत किसी निर्णय के खिलाफ था, तो उस स्थिति में संबंधित फैसलों को चुनाव आयोग के फैसले के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि अब यह अदालत पर निर्भर करेगा कि वह इन फैसलों और उनकी प्रक्रिया को किस तरह देखती है।
जम्मू-कश्मीर में कारोबार आसान बनाने और कानूनों को तर्कसंगत बनाने के लिए विधेयक पेश

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोमवार को विधानसभा में अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने और उन्हें तर्कसंगत बनाने, कारोबार को आसान बनाने तथा राज्य विधानमंडल के सदस्यों की पेंशन से जुड़े कानून में संशोधन के लिए विधेयक पेश किए। कानून, न्याय और संसदीय मामलों का विभाग भी संभाल रहे मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कुछ कानूनों में संशोधन कर अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने और उन्हें तर्कसंगत बनाने से जुड़ा विधेयक पेश किया। इसमें कुछ कानूनों को रद्द करने और उनसे जुड़े अन्य मामलों के प्रावधान भी शामिल हैं। यह विधेयक जम्मू-कश्मीर विधानसभा के मौजूदा शरदकालीन सत्र के दौरान पेश किया गया। इसे एलए बिल नंबर 16 ऑफ 2026 के रूप में पेश किया गया है और यह पहले ही आधिकारिक राजपत्र के विशेष अंक में प्रकाशित हो चुका है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में जम्मू-कश्मीर ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल, 2026 भी पेश किया। इसे एलए बिल नंबर 11 ऑफ 2026 के रूप में पेश किया गया है। विधेयक का उद्देश्य अनुमति आधारित व्यवस्था की जगह नियम आधारित शासन को बढ़ावा देना है, ताकि नागरिक और कारोबारी ज्यादा भरोसे के साथ योजना बना सकें, निवेश कर सकें और काम कर सकें। इसके जरिए जम्मू-कश्मीर में कारोबार करने और जीवन को आसान बनाने, रोजगार पैदा करने, निवेश आकर्षित करने और लंबे समय तक आर्थिक विकास को बनाए रखने का लक्ष्य रखा गया है। जम्मू-कश्मीर ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल, 2026 को भी आधिकारिक राजपत्र के विशेष अंक में पहले ही प्रकाशित किया जा चुका है। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने जम्मू-कश्मीर स्टेट लेजिस्लेचर मेंबर्स पेंशन एक्ट, 1984 में संशोधन से जुड़ा विधेयक भी विधानसभा में पेश किया। पेंशन कानून में संशोधन से जुड़े इस विधेयक को एलए बिल नंबर 15 ऑफ 2026 के रूप में पेश किया गया है। इसे भी आधिकारिक राजपत्र के विशेष अंक में प्रकाशित किया जा चुका है। इस तरह विधानसभा के मौजूदा शरदकालीन सत्र में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कानूनों को सरल और तर्कसंगत बनाने, कारोबार के लिए बेहतर माहौल तैयार करने और विधानमंडल के सदस्यों की पेंशन से जुड़े कानून में बदलाव के लिए तीन विधेयक पेश किए हैं।
एशियन गेम्स 2026 में गुलवीर सिंह का दूसरा मेडल, 10000 मीटर के बाद 1500 मीटर दौड़ में जीता ‘सिल्वर’

नागोया। ‘एशियन गेम्स 2026’ में भारत के लॉन्ग-डिस्टेंस रनर गुलवीर सिंह ने दूसरा सिल्वर मेडल हासिल किया। 25 सितंबर को 10,000 मीटर दौड़ में दूसरा स्थान हासिल करने के बाद, सोमवार को गुलवीर ने पुरुषों की 1500 मीटर दौड़ में एक और सिल्वर मेडल अपने नाम किया। उत्तर प्रदेश के अतरौली गांव के रहने वाले गुलवीर ने 1500 मीटर रेस में शानदार प्रदर्शन करते हुए 3:36.72 के अपने पर्सनल बेस्ट समय के साथ दूसरा स्थान हासिल किया। भारतीय एथलीट के अलावा, पोडियम पर जगह बनाने वाले शेष दो जापानी एथलीट काजुतो इजावा और नागिया मोरी थे। इजावा ने 3:36.35 के एशियन गेम्स रिकॉर्ड समय के साथ गोल्ड मेडल जीता। वह गुलवीर से सिर्फ 0.37 सेकंड आगे रहे, जबकि मोरी 3:37.92 के समय के साथ तीसरे स्थान पर रहे। एशियन गेम्स में गुलवीर का यह तीसरा मेडल है। इससे पहले उन्होंने 10,000 मीटर फाइनल में सिल्वर मेडल जीता था। इससे पहले, 2023 हांगझोऊ खेलों में भी 10,000 मीटर में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम कर चुके थे। गुलवीर ने पुरुषों की 10,000 मीटर स्पर्धा में दो एशियन गेम्स मेडल जीतने वाले पहले भारतीय बनकर भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया है। वहीं, भारत के अविनाश साबले पुरुषों की 3000 मीटर स्टीपलचेज फाइनल में मेडल जीतने में नाकाम रहे। वह चौथे स्थान पर रहे। साबले ने 8:21.67 का अपना सीजन का बेस्ट समय निकाला, लेकिन गोल्ड मेडल जीतने वाले जापान के र्युजी मिउरा से 4.31 सेकंड पीछे रह गए। जापान के र्योमा आओकी, 8:17.60 के समय के साथ दूसरे स्थान पर रहे, जबकि कतर के जकारिया इलाहलामी 8:18.13 के समय के साथ तीसरा स्थान अपने नाम किया। 1500 मीटर फाइनल की बात करें तो, यूनुस शाह भी अपनी हीट में तीसरे स्थान पर रहने के बाद मेडल की दौड़ में शामिल थे। 1500 मीटर हीट की ओवरऑल टाइमिंग में, उनका प्रदर्शन गुलवीर से भी बेहतर था। यूनुस ने 3:45.77 का समय लिया, जबकि गुलवीर ने अपनी हीट में 3:45.79 का समय लिया, जिसके परिणामस्वरूप दोनों फाइनल के लिए क्वालीफाई कर गए। हालांकि, रेस में काफी देर तक अच्छी स्थिति में रहने के बावजूद, यूनुस फाइनल में नौवें स्थान पर रहे और उन्होंने 3:43.88 का समय लिया।
केरल: राहुल गांधी पर टिप्पणी को लेकर वीडी सतीशन का राजीव चंद्रशेखर पर पलटवार

तिरुवनंतपुरम। केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने सोमवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर की गई व्यक्तिगत टिप्पणियों को लेकर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयानों को न तो कांग्रेस और न ही केरल की जनता स्वीकार करेगी। वीडी सतीशन ने कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता के रक्षक हैं। उन्होंने राजीव चंद्रशेखर और भाजपा के अन्य नेताओं को चुनौती दी कि वे अपने दिल पर हाथ रखकर बताएं कि क्या वे भी धर्मनिरपेक्षता की रक्षा के लिए खड़े हैं। उन्होंने कहा कि राजीव चंद्रशेखर ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ व्यक्तिगत हमला किया है, जबकि राहुल गांधी देश के करोड़ों लोगों के दिलों में जगह रखते हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक गरिमा और मर्यादा बनाए रखने की जिम्मेदारी वाले पद पर रहते हुए राजीव चंद्रशेखर ने आधारहीन आरोप और हल्की बयानबाजी करके अपने राजनीतिक दिवालियापन को उजागर किया है। मुख्यमंत्री ने कहा, “राजीव चंद्रशेखर को यह नहीं भूलना चाहिए कि जब वह राहुल गांधी की तरफ एक उंगली उठाते हैं, तो बाकी उंगलियां उनकी अपनी ओर होती हैं।” सतीशन ने चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और स्वायत्त संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के कामकाज पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के संविधान और संस्थाओं को एक खास समूह के हितों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। वीडी सतीशन के मुताबिक, राहुल गांधी और कांग्रेस इन मुद्दों के खिलाफ बिना डरे आवाज उठा रहे हैं और इसी कारण संघ परिवार में बेचैनी है। उन्होंने कहा कि असली मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए इस तरह की बयानबाजी सफल नहीं होगी। सतीशन ने कहा कि धमकियों या चुनौतियों से नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा और सभी के लिए समान न्याय सुनिश्चित करने की राहुल गांधी और कांग्रेस की कोशिशों को कमजोर नहीं किया जा सकता। उन्होंने राजीव चंद्रशेखर और भाजपा से कहा कि खोखले दावे करने और जिन नीतियों को वह “जनविरोधी” बताते हैं, उन्हें आगे बढ़ाने के बजाय जनता से जुड़े असली मुद्दों का सामना करने का साहस दिखाएं। यह बयान ऐसे समय आया है, जब चुनाव आयोग, मतदाता सूचियों और चुनाव आयोग को लेकर राहुल गांधी की आलोचना के मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। सतीशन ने भाजपा की ओर से राहुल गांधी पर किए गए हमले को लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता से जोड़ते हुए भाजपा पर पलटवार किया।
आयुष्मान खुराना और सारा अली खान की फिल्म ‘उड़ता तीर’ का ‘भूतनी का’ गाना रिलीज

मुंबई। अभिनेता आयुष्मान खुराना और अभिनेत्री सारा अली खान की आने वाली फिल्म ‘उड़ता तीर’ के जबरदस्त ट्रेलर से चर्चा बटोरने के बाद मेकर्स ने फिल्म का गाना ‘भूतनी का’ रिलीज कर दिया है। म्यूजिक कंपोजर जोड़ी सचिन-जिगर ने इस गाने का म्यूजिक तैयार किया है और इसके बोल अमिताभ भट्टाचार्य ने लिखे हैं। ‘भूतनी का’ गाना काका, ट्विंकल अग्रवाल और अमिताभ भट्टाचार्य ने गाया है। अपने नए गाने के बारे में बात करते हुए कंपोजर जोड़ी सचिन-जिगर ने कहा कि ‘भूतनी का’ को कंपोज करने में सच में बहुत मजा आया, क्योंकि अमिताभ भाई ने इसके बोल इस तरह लिखे थे कि आपको हमेशा यह जानने की उत्सुकता बनी रहती थी कि आगे क्या होने वाला है। चुनौती यह थी कि म्यूजिक से उस उलझन को सपोर्ट किया जाए और साथ ही गाना सुनने में मजेदार भी लगे। हमने गाने की रफ्तार, साउंड और अरेंजमेंट के साथ कई प्रयोग किए, ताकि ऐसा लगे कि गाना हर पल कोई नया मोड़ लेने वाला है। इस वजह से यह प्रोसेस बहुत रोमांचक रहा। यह एक मजेदार गाना है, लेकिन इसका सही बैलेंस बनाना उतना आसान नहीं था जितना सुनने में लगता है। सिंगर काका ने कहा कि गाने के बोल सुनकर मुझे कहानी जानने की बहुत उत्सुकता हुई। मैं सोच रहा था कि इतना एनर्जेटिक गाना है, थोड़ा मजेदार है और इसका साउंड भी इतना अलग है तो फिल्म में असल में क्या हो रहा है। रिकॉर्डिंग के समय भी मेरे मन में यही ख्याल था कि इसके पीछे जरूर कोई दिलचस्प कहानी होगी। अब टीजर देखने के बाद उत्सुकता और बढ़ गई है, क्योंकि किरदारों को देखकर और भी सवाल मन में आ रहे हैं। अब बस फिल्म देखने का इंतजार है। सिंगर ट्विंकल अग्रवाल ने कहा कि ‘भूतनी का’ को रिकॉर्ड करने में बहुत मजा आया, क्योंकि इसके बोल में बहुत कुछ हो रहा है। उन्होंने कहा कि आपको एनर्जी बनाए रखनी होती है और साथ ही यह भी ध्यान रखना होता है कि हर शब्द सही ढंग से सुनाई दे। काका ने इसमें बहुत मजेदार एनर्जी डाली और मुझे उनके साथ तालमेल बिठाने में बहुत मजा आया। यह ऐसा गाना है जो गाते समय आपका मूड अच्छा कर देता है। ‘उड़ता तीर’ 9 अक्टूबर, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
एशियन गेम्स: मेंस जैवलिन थ्रो में भारत का ‘डबल धमाल’, यशवीर को सिल्वर, रोहित ने जीता ब्रॉन्ज

नागोया। एशियन गेम्स 2026 में सोमवार को पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा के फाइनल में भारत ने दो मेडल हासिल किए। यशवीर सिंह ने देश के लिए सिल्वर मेडल जीता, जबकि रोहित यादव ने ब्रॉन्ज मेडल पर कब्जा किया। इस प्रतियोगिता का गोल्ड मेडल श्रीलंका के रुमेश थारंगा ने हासिल किया। नागोया सिटी मिजुहो पार्क एथलेटिक स्टेडियम में भारत के यशवीर सिंह ने 85.72 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ दूसरा स्थान अपने नाम किया। यशवीर ने अपने छठे प्रयास में 85.72 मीटर की दूरी तय की। इससे पहले उनका सर्वश्रेष्ठ प्रयास 85.14 मीटर था। रोहित ने पहले प्रयास में 83.56 मीटर, दूसरे में 82.99 मीटर, तीसरे में 82.42 मीटर और चौथे प्रयास में 84.31 मीटर की दूरी तय की। उनका का पांचवां प्रयास 85.14 मीटर रहा था, जिसके बाद उन्होंने अंतिम प्रयास में सबसे अधिक दूरी तय की। वहीं, रोहित यादव ने 84.35 मीटर के अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ देश के लिए ब्रॉन्ज मेडल जीता। रोहित ने अपने तीसरे प्रयास में यह दूरी तय की थी। रोहित ने पहले प्रयास में 77.25 मीटर, दूसरे में 82.40 मीटर, तीसरे में 84.35 मीटर, चौथे में 82.16 मीटर और पांचवें प्रयास में 82.15 मीटर का थ्रो किया। हालांकि, उनका छठा प्रयास फाउल रहा। श्रीलंका के रुमेश थारंगा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया। रुमेश ने अपने चौथे प्रयास में 88 मीटर की दूरी को पार कर लिया था, जिसके बाद छठे और अंतिम प्रयास में 88.55 मीटर की दूरी तय करते हुए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। थारंगा ने पहले प्रयास में 73.53 मीटर दूरी तय की, जिसके बाद अगले प्रयास में 83.34 मीटर दूर भाला फेंका। उनका तीसरा प्रयास मान्य नहीं था, जिसके बाद 88.33 मीटर की दूरी तय करते हुए पहला स्थान हासिल कर लिया था। थारंगा का पांचवां प्रयास फाउल रहा; उन्होंने छठे प्रयास में 88.55 की दूरी तय करते हुए खिताबी जीत पर मुहर लगाई।