रांची : जगन्नाथपुर मंदिर प्रबंधन का विवाद, न्यास बोर्ड ने हाईकोर्ट में पेश की संशोधित स्कीम, 11 सदस्यीय कमेटी करेगी अध्ययन

रांची। रांची के ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मंदिर के संचालन और प्रबंधन को लेकर चल रहे विवाद की सुनवाई बुधवार को झारखंड हाईकोर्ट में हुई। सुनवाई के दौरान झारखंड हिंदू धार्मिक न्यास बोर्ड की ओर से मंदिर के संचालन और प्रबंधन की संशोधित स्कीम अदालत में पेश की गई। हाईकोर्ट ने स्कीम के अध्ययन और उसपर रिपोर्ट देने के लिए महाधिवक्ता रोहित राय की अध्यक्षता में 11 सदस्यीय कमेटी गठित की है। न्यायमूर्ति आनंदा सेन की अदालत ने कमेटी को संशोधित स्कीम का अध्ययन कर तीन सितंबर तक अपनी रिपोर्ट अदालत में पेश करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई सात सितंबर को होगी। बोर्ड की ओर से अधिवक्ता भरत कुमार ने अदालत में पक्ष रखा। मामले की पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने झारखंड हिंदू धार्मिक न्यास बोर्ड को जगन्नाथपुर मंदिर के संचालन और प्रबंधन के लिए विधिसम्मत स्कीम प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। अदालत ने स्पष्ट किया था कि स्कीम झारखंड हिंदू धार्मिक ट्रस्ट बोर्ड अधिनियम की धारा 32 के तहत तैयार की जानी चाहिए। इसके बाद बोर्ड ने संशोधित स्कीम अदालत में पेश की। जगन्नाथपुर मंदिर के प्रबंधन को लेकर विवाद वर्ष 2021 में उस समय शुरू हुआ था, जब झारखंड हिंदू धार्मिक न्यास बोर्ड ने मंदिर की पुरानी प्रबंधन समिति को हटा दिया था। बोर्ड ने आठ जुलाई 2021 को नई समिति का गठन किया था। पुरानी व्यवस्था में रांची के उपायुक्त और अनुमंडल पदाधिकारी पदेन सदस्य के तौर पर समिति से जुड़े रहते थे। नई समिति के गठन में प्रशासनिक अधिकारियों, मुख्य पुजारी और स्थानीय धार्मिक प्रतिनिधियों को शामिल नहीं किए जाने पर भी सवाल उठे थे। मामले में मंदिर की आय-व्यय और खातों में पारदर्शिता को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं। मंदिर के वित्तीय प्रबंधन की जांच और विशेष ऑडिट की मांग को लेकर भी अदालत का ध्यान आकृष्ट कराया गया है। मंदिर की सुरक्षा का मुद्दा भी सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण रहा है। अप्रैल 2026 में मंदिर परिसर में चोरी के इरादे से घुसे अपराधियों ने सुरक्षा गार्ड बिरसा मुंडा की हत्या कर दी थी। इसके बाद मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे थे। हाईकोर्ट ने मंदिर परिसर में 24 घंटे पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती का निर्देश दिया था। राज्य की ओर से अदालत को बताया गया था कि रांची एसएसपी के निर्देश पर मंदिर में चौबीसों घंटे पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। अदालत ने मंदिर के सुचारू संचालन के लिए अंतरिम वित्तीय व्यवस्था के तहत रांची के उपायुक्त को प्रतिमाह 30 हजार रुपये उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया था।
रामनाथ कोविंद ऊंचे पद पर रहकर भी नहीं भूले सादगी’, पूर्व राष्ट्रपति के आत्मकथा के विमोचन पर नेताओं ने दी प्रतिक्रिया

नई दिल्ली। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा ‘ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माई लाइफ, माई स्ट्रगल्स’ का विमोचन कार्यक्रम विज्ञान भवन के सेंट्रल हॉल में आयोजित किया गया। प्रधानमंत्री ने इस पुस्तक का विमोचन किया। कार्यक्रम में कई नेताओं ने हिस्सा लिया और पूर्व राष्ट्रपति के जीवन और संघर्षों की सराहना की। कार्यक्रम में शामिल होने के बाद भाजपा सांसद कमलजीत सहरावत ने आईएएनएस से कहा, “रामनाथ कोविंद भारत के राष्ट्रपति होने के साथ-साथ एक ऐसे व्यक्ति भी रहे हैं जो जमीन से जुड़े रहे और संघर्षों के रास्ते आगे बढ़े। जब उन्होंने अपनी आत्मकथा लिखी है, तो हम कह सकते हैं कि इस आत्मकथा में भारत की आत्मा दिखाई देगी क्योंकि उन्होंने जिन संघर्षों का सामना किया है।” भाजपा सांसद महेश शर्मा ने कहा, “इस किताब में उनके जीवन के कुछ कम जाने-पहचाने पहलू मिलेंगे, जिससे पता चलता है कि वह कानपुर के एक छोटे से गांव के एक साधारण परिवार से आए और इतनी ऊंचाइयों तक पहुंचे। सादगी और विनम्रता के साथ, जिसका जिक्र उन्होंने खुद भी किया है और जिसका जिक्र प्रधानमंत्री ने भी किया।” राज्यसभा के पूर्व सदस्य भगत सिंह कोश्यारी ने कहा, “रामनाथ कोविंद भारत के राष्ट्रपति रहे। उनके कार्यकाल के दौरान मैं राज्यपाल था लेकिन मेरा जुड़ाव उनसे इससे भी पहले का है। सबसे बड़ी बात यह है कि इतने ऊंचे पद पर पहुंचने के बाद भी रामनाथ कोविंद ने अपनी सादगी, शालीनता और विनम्रता नहीं छोड़ी और एक आम आदमी की तरह अपना जीवन जीते रहे।” जैन धर्मगुरु आचार्य डॉ. लोकेश मुनि ने कहा, “देखिए, आज विज्ञान भवन के सेंट्रल हॉल में हमारे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा का लोकार्पण हुआ। प्रधानमंत्री मोदी ने इस पुस्तक का विमोचन किया।” बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में रामनाथ कोविंद की आत्मकथा ‘ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माई लाइफ, माई स्ट्रगल्स’ का विमोचन किया। इस कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल समेत कई दिग्गज नेता उपस्थित रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “आज हमें पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा के विमोचन का अवसर मिला है। मुझे खुशी है कि इस कार्यक्रम का हिस्सा बनने का सौभाग्य मिला है। रामनाथ कोविंद से बहुत लंबा परिचय रहा है। उन्हें करीब से जानने का भी अवसर मिला है। राष्ट्रपति के रूप में उनके मार्गदर्शन के साथ-साथ उनका मेरे प्रति विशेष स्नेह और आत्मीयता, यह मेरी बहुत बड़ी पूंजी रही है।
एक-एक सवाल का दूंगा जवाब, विपक्ष तय करे चर्चा करनी है या हंगामा : गृह मंत्री अमित शाह

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने साफ तौर पर कहा है कि वे गुरुवार को सदन में विपक्ष के एक-एक सवाल का जवाब देंगे। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार संसद में हर तरह की चर्चा के लिए तैयार है। साथ ही, गृह मंत्री ने विपक्ष के हंगामे को लेकर भी निशाना साधा। गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “मोदी सरकार संसद में हर तरह की चर्चा के लिए तैयार है। विपक्ष लोकसभा अध्यक्ष के पास चर्चा का पत्र दे। बुधवार दोपहर 3 बजे से गुरुवार दोपहर 3 बजे तक हम चर्चा करने के लिए तैयार हैं।” वहीं, विरोधी दलों पर निशाना साधते हुए उन्होंने लिखा, “विपक्ष का उद्देश्य चर्चा करना नहीं, हंगामा करना है। मैं गुरुवार को विपक्ष के एक-एक सवाल का जवाब दूंगा। फिर जनता तय करेगी कि कौन चर्चा करना चाह रहा है और कौन भाग रहा है।” वहीं, गृह मंत्री अमित शाह ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “‘लापता’, ‘भाग गए’ और ‘भगोड़े’ हैं, जैसी भाषा भारत के सार्वजनिक और संसदीय जीवन में अभी-अभी सुनाई पड़ रही है। जब से सत्र शुरू हुआ, तब से मैं लगातार संसद आता हूं। मैं अपने चैंबर में बैठता हूं, चूंकि विपक्ष संसद के दोनों सदनों को चलने नहीं दे रहा है, तो वहां जाकर क्या किया जा सकता है?” उन्होंने आगे कहा, “जहां तक चर्चा का सवाल है, सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट कर दिया है कि नीट को लेकर छात्रों के प्रदर्शन पर सभी प्रकार की चर्चा करने के लिए तैयार है। चर्चा के लिए समय सुनिश्चित किया जाए और विपक्ष तैयार हो जाए। विपक्ष इसकी मांग कर रहा था और हमने इसे स्वीकार किया।” शाह ने हमला बोलते हुए कहा, “मैंने भी कह दिया है कि मैं किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हूं, लेकिन वो (विपक्ष) चर्चा ही नहीं होने देना चाहते हैं। अब जनता तय करे कि कौन भाग रहा है।” गृह मंत्री ने यह भी कहा कि आज 3 बजे तक विपक्ष स्पीकर साहब को पत्र दे। आज दोपहर तीन बजे से गुरुवार दोपहर तीन बजे तक हम सभी प्रकार की चर्चा के लिए तैयार हैं। मैं सदन में ही बैठूंगा, सबको सुनूंगा और सब चीजों का जवाब दूंगा। सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है।” अमित शाह ने कहा, “मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा सरकार हर चीज पर चर्चा के लिए तैयार है, बस विपक्ष संसद को चलने दे। हम प्रश्नकाल भी सस्पेंड करने के लिए तैयार हैं, अगर स्पीकर की अनुमति मिले। मैं सभी सवालों पर जवाब देने के लिए तैयार हूं। गुरुवार को दोपहर 3 बजे जवाब दूंगा। अब विपक्ष को तय करना है उनको चर्चा करनी है या हंगामा करना है।” गौरतलब है कि राम मंदिर के चढ़ावे में कथित रूप से गबन और दिल्ली में संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्ष लगातार हमलावर है। विपक्ष ने सदन में अमित शाह की मौजूदगी की मांग की है और छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई के बारे में गृह मंत्री से जवाब मांगा है। इस गतिरोध के कारण संसद के मॉनसून सत्र में बार-बार कामकाज में बाधा आई है।
पिछले एक दशक में टाटा संस का नेतृत्व करना एक बड़ा सम्मान और एक गहरी जिम्मेदारी रही है: एन चंद्रशेखरन

नई दिल्ली। टाटा ग्रुप के साथ चार दशक पूरे कर चुके एन चंद्रशेखरन ने बुधवार को समूह के प्रमुख के रूप में अपने कार्यकाल को एक बड़ा सम्मान और एक गहरी जिम्मेदारी बताया। टाटा संस के चेयरमैन के रूप में उन्होंने अपने कार्यकाल की समाप्ति के बाद दोबारा नियुक्ति नहीं लेने का फैसला किया है। उनका वर्तमान कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त होगा और उन्होंने कंपनी के बोर्ड को सूचित कर दिया है कि वह इसके बाद चेयरमैन पद के लिए अपना नाम नहीं देंगे। यह फैसला टाटा संस की 18 अगस्त को होने वाली वार्षिक आम बैठक (एजीएम) से पहले सामने आया है। चंद्रशेखरन ने टाटा समूह में अपने 40 वर्षों के सफर को याद करते हुए कहा कि इस प्रतिष्ठित संस्थान का हिस्सा बनना और इसके विकास में योगदान देना उनके लिए सम्मान की बात रही है। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक तक टाटा संस का नेतृत्व करना उनके जीवन की सबसे बड़ी जिम्मेदारियों और उपलब्धियों में शामिल रहा है। अपने बयान में उन्होंने कहा, “मैंने टाटा समूह में अपने पेशेवर जीवन के 40 वर्ष पूरे किए हैं। इस प्रतिष्ठित संस्थान के विकास में योगदान देने का अवसर मेरे लिए अत्यंत संतोषजनक रहा है। पिछले एक दशक से टाटा संस का नेतृत्व करना मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान और एक गहरी जिम्मेदारी रही है।” उन्होंने बताया कि उनका वर्तमान कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त हो रहा है। “सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से मेरे अगले कार्यकाल को पांच वर्षों के लिए बढ़ाने का प्रस्ताव पारित किया था। इस प्रस्ताव की सिफारिश टाटा संस की नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमेटी और बोर्ड ने भी की थी। इसके बाद 24 फरवरी 2026 को इस प्रस्ताव को टाटा संस बोर्ड के समक्ष रखा गया था।” चंद्रशेखरन ने आगे कहा, “हालांकि यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका क्योंकि बोर्ड के एक सदस्य ने इसका समर्थन नहीं किया। सर्वसम्मति का समर्थन नहीं मिलने के कारण मैंने निर्णय को स्थगित करने का विकल्प चुना।” उन्होंने कहा कि उस बोर्ड बैठक को अब छह महीने हो चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है। “टाटा संस एक बहुत बड़ा संस्थान है और समूह की कई रणनीतिक परियोजनाएं इस समय महत्वपूर्ण चरण में हैं। फरवरी 2027 के बाद समूह का नेतृत्व करने के लिए नए नेता की स्पष्टता होना आवश्यक है। यह केवल संगठन के लिए ही नहीं, बल्कि कर्मचारियों, निवेशकों, साझेदारों और अन्य हितधारकों के लिए भी महत्वपूर्ण है।” अपने इस्तीफे के फैसले के बारे में उन्होंने कहा, “इन परिस्थितियों में मैंने आज पहले टाटा संस बोर्ड को सूचित कर दिया है कि 20 फरवरी 2027 को मेरा कार्यकाल समाप्त होने के बाद मैं दोबारा नियुक्ति के लिए अपना नाम प्रस्तुत नहीं करूंगा। मैंने बोर्ड से अनुरोध किया है कि वह जल्द से जल्द उत्तराधिकार पर निर्णय ले, ताकि नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया सुचारु रूप से पूरी हो सके।” बयान के अंत में उन्होंने सभी हितधारकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा, “मैं सभी हितधारकों के समर्थन के लिए आभारी हूं। सादर, चंद्रा।” गौरतलब है कि एन. चंद्रशेखरन 1987 में टाटा समूह से जुड़े थे। वर्ष 2009 में उन्हें टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) बनाया गया, जहां उन्होंने कंपनी को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। इसके बाद 2017 में उन्हें टाटा संस का चेयरमैन नियुक्त किया गया था। पिछले एक वर्ष के दौरान टाटा समूह को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। एयर इंडिया से जुड़े नियामकीय मामलों, टीसीएस पर मूल्य निर्धारण के दबाव और जगुआर लैंड रोवर पर हुए साइबर हमले जैसी घटनाओं ने समूह को प्रभावित किया। इसके अलावा टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच मतभेद पहले भी सामने आ चुके हैं। वर्ष 2016 में तत्कालीन चेयरमैन साइरस मिस्त्री को हटाए जाने के दौरान भी दोनों संस्थाएं सुर्खियों में रही थीं। अब चंद्रशेखरन के इस फैसले के बाद टाटा समूह के अगले नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। निवेशकों, कर्मचारियों और उद्योग जगत की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि टाटा संस का अगला चेयरमैन कौन होगा और वह समूह को किस दिशा में आगे ले जाएगा।
अजिंक्य रहाणे की नई पारी, श्रीलंका टेस्ट सीरीज से कमेंट्री में डेब्यू करेंगे

मुंबई। हाल ही में क्रिकेट को अलविदा कहने वाले दिग्गज भारतीय बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे इसी खेल में अपनी दूसरी भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। रहाणे 15 अगस्त से गॉल में शुरू हो रही श्रीलंका-भारत टेस्ट सीरीज से कमेंट्री की दुनिया में कदम रखेंगे। 38 साल के रहाणे अब क्रिकेट के मैदान पर अपने बल्ले से नहीं, बल्कि कमेंट्री बॉक्स में माइक पर क्रिकेट की बारीकियों पर अपनी बात रखते हुए नजर आएंगे। भारतीय क्रिकेट में लंबे समय तक सिर्फ टेस्ट फॉर्मेट का हिस्सा रहे रहाणे अपने कमेंट्री करियर का आगाज भी इसी फॉर्मेट से कर रहे हैं। इस अवसर पर रहाणे ने कहा, “मैं सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क और सोनी लीव पर भारत के श्रीलंका दौरे के लिए टेस्ट कमेंट्री में डेब्यू करने के लिए उत्साहित हूं। टेस्ट क्रिकेट हमारे खेल का शिखर है। इतने सालों तक इस फॉर्मेट में भारत का प्रतिनिधित्व करने के बाद, अब खेल को एक अलग नजरिए से देखना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। मैं अनुभव शेयर करने, खेल की बारीकियों को समझने और फैंस को उन फैसलों, रणनीतियों और पलों के बारे में जानकारी देने के लिए उत्सुक हूं जो एक टेस्ट मैच को आकार दे सकते हैं। मुझे उम्मीद है कि मैं फैंस के लिए ब्रॉडकास्ट अनुभव को और बेहतर बना पाऊंगा और उन्हें मैदान पर क्या होता है, इसकी गहरी समझ दे पाऊंगा।” अजिंक्य रहाणे ने 30 जुलाई 2026 को अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की थी। मुंबई से संबंध रखने वाले इस धाकड़ बल्लेबाज ने 2011 में भारतीय टीम में वनडे और टी20 फॉर्मेट में और 2013 में टेस्ट फॉर्मेट में डेब्यू किया था। उन्होंने अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच (टेस्ट) जुलाई 2023 में खेला था। रहाणे ने भारत के लिए 85 टेस्ट, 90 वनडे और 20 टी20 मैच खेले। टेस्ट की 144 पारियों में 12 शतक और 26 अर्धशतक की बदौलत उन्होंने 5,077 रन बनाए। वनडे में 3 शतक और 24 अर्धशतक की मदद से 2,962 और 1 अर्धशतक की मदद से टी20 में 375 रन दर्ज हैं।
बांग्लादेश में बढ़ रही बेरोजगारी, अवसरों की कमी से युवा निराश

ढाका। बांग्लादेश के युवा बढ़ते रोजगार संकट का सामना कर रहे हैं। ऐसे युवाओं की तादाद अच्छी खासी है जिनके पास टैलेंट तो है लेकिन अवसरों की कमी के कारण खाली बैठे हुए हैं। स्थानीय मीडिया ने बुधवार को एक देशव्यापी सर्वे का हवाला देते इसकी जानकारी दी। इस सर्वे के नतीजों से पता चलता है कि बेरोजगारी देश भर के युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बनकर उभरी है। “बांग्लादेश में युवाओं की समस्याएं और संभावित समाधान” शीर्षक वाले इस सर्वे में, बांग्लादेश के युवाओं के बीच बेरोजगारी, कौशल की कमी, मानसिक तनाव, डिजिटल लत, ऑनलाइन गैंबलिंग और ड्रग्स का इस्तेमाल बड़ी परेशानी का कारण बने हैं। बांग्लादेशी अखबार ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, यह आकलन सामाजिक सरोकारों से जुड़े संगठन शोपनोपुरी कल्याण संस्था और बांग्लादेश को-क्रिएशन ने मिलकर इंटरनेशनल यूथ डे 2026 को मनाने के लिए किया था। इंटरनेशनल यूथ डे बुधवार को यूनाइटेड नेशंस की थीम “अलग-अलग हालात, एक जैसी उम्मीदें” के तहत मनाया जाता है। हर साल 12 अगस्त को मनाया जाने वाला यह दिन दुनिया भर के युवाओं के सामने आने वाली चुनौतियों और मौकों के बारे में जागरूकता बढ़ाता है और सतत विकास में जरूरी साझेदार के तौर पर उनकी भूमिका को रेखांकित करता है। सर्वे में बांग्लादेश भर से छात्रों, युवा आयोजकों, वॉलंटियर्स, समाज सेवा से जुड़े लोगों, और युवा नवाचारों से जुड़े प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कई जवाब देने वालों ने बेरोजगारी को एक बड़ी चिंता बताया, जबकि सर्वे में युवाओं की मानसिक स्थिति से जुड़ी बढ़ती चुनौतियों पर भी रोशनी डाली गई। डिसेबल वेलफेयर सोसाइटी बांग्लादेश की मेंबर सालेहा के ने युवाओं में बढ़ते तनाव और दबाव को एक बड़ी चिंता बताया। दूसरी ओर, गबुरा वेलफेयर सोसाइटी के आयोजन सचिव रबीउल इस्लाम ने कहा कि भविष्य को लेकर अनिश्चितता, गिरता आत्म विश्वास और सही मार्ग दर्शन की कमी से बांग्लादेश में कई युवा मानसिक दबाव के शिकार हो रहे हैं। इसके अलावा, जियो एवेंजर्स की प्रतिनिधि संजीदा सुमिया सुचोना ने कहा कि सालों की पढ़ाई और कौशल विकास के बाद भी मनचाही नौकरी, वित्तीय स्थिरता और बेहतर जिन्दगी न मिल पाने से कई युवा निराश हो रहे हैं। इस सर्वे में शामिल भागीदारों ने डिजिटल टेक्नोलॉजी पर बहुत अधिक निर्भरता के साथ-साथ ऑनलाइन गैंबलिंग और कसीनो गेम्स में डूबे रहने को भी खतरनाक बताया। इस्लामिक सोसाइटी संघा बुरीमारी के संस्थापक और निदेशक, एमडी शरीफुल इस्लाम अभि ने मोबाइल फोन के गलत इस्तेमाल और ड्रग्स की लत को युवाओं में बढ़ती समस्या का कारण बताया। ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश में मौजूद ‘दीपांचल फाउंडेशन’ के सलाहकार, अमन उल्लाह ने एक अलग मुद्दे की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि कई युवाओं में “ट्रांजिट माइंडसेट” उभर रहा है, जिसमें कई लोग बांग्लादेश को एक अस्थायी पड़ाव के तौर पर देख रहे हैं, न कि ऐसे देश के तौर पर जहां वे अपना भविष्य बना सकें। उन्होंने आगे कहा कि बढ़ती संख्या में युवा विदेश पलायन को सफल भविष्य का मुख्य रास्ता मान रहे हैं।
राजस्थान में अभी तक 10.96 फीसदी कम हुई बारिश, बदला बारिश का पैटर्न

जयपुर। राजस्थान में पिछले दो दिनों में औसतन लगभग 20 मिमी बारिश हुई है, जिससे लंबे समय से बारिश की कमी झेल रहे राज्य के कई हिस्सों को राहत मिली है। हालांकि, हाल की बारिश के बावजूद राज्य में कुल बारिश अभी भी सामान्य से कम दर्ज की जा रही है और अलग-अलग जिलों और डिवीजनों में इसमें काफी अंतर है। इस मानसून सीजन में अब तक राज्य में 242.63 एमएम बारिश हुई है, जबकि उम्मीद 272.49 एमएम की थी। इस तरह राज्य में कुल बारिश में 10.96 प्रतिशत की कमी है। अब तक सात जिलों में सामान्य से अधिक बारिश हुई है, जबकि 18 ज़िलों में सामान्य बारिश दर्ज की गई है। वहीं, 16 जिलों में अब भी सामान्य से कम बारिश हो रही है, जिससे राज्य में बारिश के अलग-अलग पैटर्न का पता चलता है। हाल ही में हुई दो दिन की बारिश से कई इलाकों में बारिश की स्थिति में सुधार हुआ है, खासकर उन जगहों पर जहां बारिश की भारी कमी थी। हालांकि, इस बारिश का फायदा पूरे राज्य में एक जैसा नहीं मिला है। कोटा और उदयपुर डिवीजन उन इलाकों में शामिल हैं, जहां सामान्य से कम बारिश का सबसे अधिक असर पड़ा है। इन डिवीजनों में आम तौर पर मानसून के दौरान अच्छी बारिश होती है, लेकिन हाल ही में हुई भारी बारिश के बावजूद यहां अब भी कमी बनी हुई है। जिन इलाकों में बारिश का स्तर मौसम के औसत से कम रहता है, वहां बारिश का असमान वितरण खेती, जल संसाधनों और ग्रामीण आजीविका के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। इस साल राज्य में कुल बारिश पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में काफी कम रही है। पिछले साल इस समय तक राजस्थान में 410.76 मिमी बारिश दर्ज की गई थी, जबकि इस साल यह आंकड़ा 242.63 मिमी है। यह बड़ा अंतर इस मौसम में मानसून की असमान प्रगति को दर्शाता है। हालांकि, हाल ही में हुई बारिश से सूखे से प्रभावित कई इलाकों को काफी राहत मिली है और उम्मीद है कि इससे प्रभावित क्षेत्रों में मिट्टी की नमी और पानी की उपलब्धता में सुधार होगा। राज्य के कुछ हिस्सों में और बारिश होने का अनुमान है, इसलिए आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति यह तय करने में अहम होगी कि क्या राजस्थान अपनी बाकी बारिश की कमी को पूरा कर पाएगा या नहीं।
गौतमी कपूर ने शेयर किया वर्कआउट वीडियो, बोलीं- ‘शरीर के साथ ध्यान की भी परीक्षा’

मुंबई। आज के समय में फिल्म और टीवी की दुनिया के सितारे सिर्फ अपने काम के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी सेहत और फिटनेस के लिए भी चर्चा में रहते हैं। कई कलाकार खुद को फिट रखने के लिए रोज कसरत करते हैं और इसकी तस्वीरें या वीडियो अपने चाहने वालों के साथ साझा करते हैं। अभिनेत्री गौतमी कपूर भी अपनी फिटनेस को लेकर काफी सजग रहती हैं। उन्होंने भी कसरत करते हुए अपना एक वीडियो साझा किया। गौतमी कपूर ने पिलाटे्स स्टूडियो से यह वीडियो साझा किया है। वीडियो में वह शरीर को एक खास स्थिति में रखते हुए कसरत करती दिखाई दे रही हैं। इस दौरान वह इक्विपमेंट की मदद से अपने शरीर को थोड़ी देर के लिए हवा में रखती है। बता दें कि इस स्थिति में पेट और कमर की मांसपेशियों का भी इस्तेमाल करना पड़ता है। इसमें शरीर को बैलेंस रखना आसान नहीं होता। इसके लिए शरीर की ताकत के साथ-साथ पूरा फोकस करना पड़ता है। गौतमी की इस पोस्ट के साथ लिखा है, “चलो शुरू करते हैं… यह शरीर को संभालने और पूरे ध्यान की परीक्षा है।” यह वीडियो लोगों का ध्यान खींच रहा है। गौतमी कपूर की निजी जिंदगी की बात करें तो उन्होंने अभिनेता राम कपूर से शादी की है। दोनों की मुलाकात साल 2000 में धारावाहिक ‘घर एक मंदिर’ के सेट पर हुई थी। मुलाकात के बाद दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और करीब दो साल तक एक-दूसरे को जानने के बाद उन्होंने फरवरी 2003 में शादी कर ली। दोनों दो बच्चों के माता-पिता हैं। अभिनय की बात करें तो गौतमी को सीरियल ‘कहता है दिल’ में जया के किरदार से खास पहचान मिली थी। इसके अलावा वह ‘परवरिश – सीजन 2’ में भी नजर आ चुकी हैं। वहीं राम कपूर ने 1999 में धारावाहिक ‘न्याय’ से अभिनय की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने ‘हीना’, ‘संघर्ष’ और ‘कविता’ जैसे शोज में काम किया। राम कपूर को सबसे बड़ी लोकप्रियता ‘बड़े अच्छे लगते हैं’ से मिली। उन्होंने टेलीविजन के साथ फिल्मों में भी अपनी पहचान बनाई और ‘धड़कन’, ‘हजारों ख्वाहिशें ऐसी’, ‘कार्तिक कॉलिंग कार्तिक’, ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’ और ‘एजेंट विनोद’ जैसी फिल्मों में काम किया है। हाल के समय में वह ‘लॉक अप 2’ में भी दिखाई दिए।
‘उम्र सिर्फ एक नंबर, आत्मविश्वास और अंदाज कभी पुराने नहीं होते’ ईशा कोप्पिकर ने साझा की खास तस्वीरें

मुंबई। बढ़ती उम्र को लेकर अब लोगों की सोच भी बदल रही है। खासकर मनोरंजन जगत की अभिनेत्रियां अपने अनुभवों के साथ यह बताती नजर आती हैं कि उम्र किसी की खूबसूरती, आत्मविश्वास या पहचान तय नहीं करती। अभिनेत्री ईशा कोप्पिकर भी इसी सोच को लेकर अपनी बात सामने रखती रही हैं। इस कड़ी में उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उम्र, आत्मविश्वास, फिटनेस, मातृत्व, प्यार और जिंदगी में आए बदलावों को लेकर खुलकर बात की। ईशा ने इंस्टाग्राम पर अपनी कुछ खूबसूरत और स्टाइलिश तस्वीरें पोस्ट कीं और कहा, ”उम्र सिर्फ एक नंबर है। अब मैं पहले से थोड़ी ज्यादा आत्मविश्वासी, अपनी पसंद को लेकर ज्यादा सजग और खुद को लेकर पहले से ज्यादा बेबाक हूं। असली खूबसूरती और अंदाज उम्र में नहीं, बल्कि इस बात में है कि इंसान समय के साथ खुद को कितना बेहतर बनाता है।” ईशा ने लिखा, ”मैं अब बेहतर चुनाव करती हूं, गहराई से प्यार करती हूं और जिंदगी के हर पड़ाव को खास बनाने की कोशिश करती हूं। मैं वही लड़की हूं, लेकिन अब मेरे स्टैंडर्ड बेहतर हैं, सपने बड़े हैं, आसपास लोगों की संख्या कम है और यादें पहले से ज्यादा हैं।” ईशा की पोस्ट की पहली तस्वीर पर लिखा, ”तब भी पसंदीदा थीं और आज भी पसंदीदा हैं।” इसके बाद ईशा ने अपनी वर्कआउट से जुड़ी तस्वीर साझा की। इसमें वह व्यायाम करती दिखाई दीं और तस्वीर पर लिखा था, ”फिटनेस को कुछ समय का शौक नहीं, बल्कि लाइफस्टाइल बनाना भी अपने आप में खास है। 20 साल बाद भी मेहनत जारी है।” एक अन्य तस्वीर में ईशा ने मां होने के अनुभव को लेकर अपनी खुशी जाहिर की। तस्वीर पर लिखा था, ”’मां होना भी अपने आप में खास है और इसके बावजूद अपने भीतर की उस लड़की को जिंदा रखना भी जरूरी है।” प्यार और रिश्तों को लेकर भी ईशा ने अपनी सोच साझा की। उन्होंने लिखा, ”मैं आज भी प्यार में मिलने वाली उस खास खुशी और एहसास पर विश्वास करती हूं, लेकिन अब रिश्तों को लेकर मेरी पसंद और उम्मीदें पहले से बेहतर हैं।” ईशा ने एक तस्वीर के साथ यादों को लेकर भी दिलचस्प बात कही। उन्होंने लिखा, ”सिर्फ तस्वीरें जमा करने के बजाय यादें जमा करना खास है। हालांकि तस्वीरें भी अब काफी अच्छी आती हैं।” अपनी तस्वीरों की इस पूरी सीरीज के आखिर में ईशा ने लिखा, ”20 साल बाद भी पसंदीदा हूं और अब भी अपने अंदाज में खास हूं।” काम की बात करें तो ईशा कोप्पिकर ने हिंदी सिनेमा की कई चर्चित फिल्मों में काम किया है। वह ‘फिजा’, ‘कंपनी’, ‘पिंजर’, ‘डॉन’, ‘सलाम-ए-इश्क’, ‘क्या कूल हैं हम’ और ‘एक विवाह… ऐसा भी’ जैसी फिल्मों का हिस्सा रही हैं।
मुंबई भूस्खलन हादसे में मरने वालों की संख्या छह हुई, चार लोग घायल

मुंबई। मुंबई के कुर्ला (पश्चिम) के अशोक नगर, टेकड़ी क्रमांक 3 पर बुधवार सुबह हुए भूस्खलन में अब तक 6 लोगों की मौत की प्रशासन ने पुष्टि की है। वहीं, हादसे में घायल हुए 4 लोगों का इलाज कुर्ला भाभा अस्पताल में चल रहा है। दरअसल, मुंबई में लगातार हो रहे बारिश के कारण बुधवार सुबह 3 से 3.45 बजे के बीच अचानक पहाड़ का कुछ हिस्सा चॉल के 2 से 3 घरों पर गिर गया। सूचना मिलते ही बृहन्मुंबई महानगरपालिका के अधिकारी, कर्मचारी, श्रमिक, मुंबई अग्निशमन दल, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), मुंबई पुलिस, एंबुलेंस और अन्य सभी एजेंसियां मौके पर पहुंचीं और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। राजावाड़ी अस्पताल की सीएमओ डॉ. शीतल राउत ने बताया कि मोहम्मद समीर अंसारी (14), साहिल हुसैन अब्दुल काजी (19), अज्ञात (45), अबान आरिफ शेख (2), मन्नत आरिफ शेख (4) और मर्जिना आरिफ शेख (27) को अस्पताल लाने पर मृत घोषित कर दिया गया। कुर्ला भाभा अस्पताल के एमएस डॉ. वर्मा ने बताया कि हादसे में घायल सोहेल अंसारी (18), मोहम्मद अंसारी (14), नईमुद्दीन इकबाल खान (28) और साजिद अंसारी (16) का इलाज किया जा रहा है और सभी की हालत स्थिर है। मुंबई की महापौर रितू तावडे ने एक्स पर पोस्ट में कहा, “कुर्ला वेस्ट में अशोक नगर, हिल नंबर 3 पर बुधवार सुबह हुई भूस्खलन की दुर्भाग्यपूर्ण घटना की जानकारी मिलने पर मैंने घटनास्थल पर गया और बचाव कार्यों का निरीक्षण किया। इस दुखद घटना में मिट्टी और मलबा कुछ घरों पर गिर गया, जिससे लोगों की जान चली गई। इस मुश्किल समय में मैंने प्रभावित परिवारों के दुख में हिस्सा लिया और उन्हें सांत्वना दी। मैंने उन्हें यह भरोसा भी दिलाया कि प्रशासन हर संभव मदद दे रहा है और आगे भी देता रहेगा।” महापौर ने कहा, “बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी), मुंबई फायर ब्रिगेड, एनडीआरएफ, मुंबई पुलिस और 108 एम्बुलेंस सेवाओं समेत सभी संबंधित विभाग बचाव कार्य करने के लिए घटनास्थल पर युद्धस्तर पर काम कर रहे हैं। हालांकि, घटनास्थल तक पहुंचने का रास्ता बहुत संकरा होने के कारण बचाव कार्यों में मुश्किलें आ रही हैं, फिर भी मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए ज़ोर-शोर से कोशिशें की जा रही हैं।” महापौर ने कहा, “इस त्रासदी में जान गंवाने वाले हर व्यक्ति के परिवार को 4 लाख की तत्काल आर्थिक सहायता दी जाएगी, जबकि घायलों को इलाज के लिए 50,000 रुपये की चिकित्सा सहायता दी जाएगी। हम मृतकों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हैं। हम घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हैं। बचाव कार्य पूरा होने तक प्रशासन स्थिति पर बारीकी से नजर रखे हुए है।