भारत में विदेशी राजदूतों ने मनाई गांधीजी की 157वीं जयंती, कहा-सत्य और अहिंसा का संदेश आज भी प्रासंगिक

नई दिल्ली। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं जयंती के अवसर पर भारत में व‍िदेशी राजनय‍िकों ने भी बापू को नमन क‍िया और उनके स‍िद्धांतों और उनकी सीख को याद क‍िया। इस दौरान भारत में नॉर्वे के राजदूत मे-एलिन स्टेनर, जर्मनी के राजदूत जैस्पर विक ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पर पोस्‍ट में माहात्‍मा के साबरमती आश्रम में अपनी यात्रा के अनुभव को साझा क‍िया। भारत में नॉर्वे के राजदूत मे-एलिन स्टेनर ने पोसट में ल‍िखा, ”गांधी जयंती की शुभकामनाएं! साबरमती आश्रम की यात्रा मेरे लिए एक बहुत ही मार्मिक अनुभव था। सत्य, अहिंसा और शांति ऐसे मूल्य हैं, जिन्हें हम नॉर्वे में भी संजोते हैं। गांधीजी का संदेश हम सबको आज भी प्रेरणा देते हैं।” जर्मनी के राजदूत जैस्पर विक ने पोस्‍ट में ल‍िखा, ”आज जब हम महात्मा गांधी का जन्मदिन मना रहे हैं, तो मुझे 2019 में साबरमती आश्रम की अपनी यात्रा की सुखद यादें ताजा हो आती हैं। गांधी जयंती हमें गांधीजी के अहिंसा और मानवीय गरिमा के प्रति सम्मान के संदेश की याद दिलाती है। ऐसे मूल्य जो आज भी पूरी दुनिया में उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने पहले थे। वहीं, भारत में फ्रांस के दूतावास ने ‘एक्‍स’ पर पोस्‍ट में ल‍िखा, ”नई दिल्ली में ‘ग्यारह मूर्ति’ से लेकर स्ट्रासबर्ग में उनकी प्रतिमा तक, गांधीजी का शांति और अहिंसा का संदेश सीमाओं के पार तक फैला हुआ है। फ्रांस उनकी याद को सम्मान देता है, चाहे वह स्मारक डाक टिकट के जरिए हो या फिर कांस्य की उनकी भव्य प्रतिमा के रूप में। गांधी जयंती पर हम एक ऐसी आवाज को नमन करते हैं, जो सचमुच सार्वभौमिक है।” इस अवसर पर यूक्रेनी दूतावास ने भी ‘एक्‍स’ पर पोस्‍ट में ल‍िखा, ”गांधी जयंती के अवसर पर भारत में यूक्रेन का दूतावास भारत के लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं देता है। महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा और मानवीय गरिमा के शाश्वत सिद्धांत दुनिया भर की पीढ़ियों को प्रेरित करते रहें और न्याय, स्वतंत्रता तथा अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान पर आधारित शांति के महत्व को और मजबूत करें।” चीन में भारतीय दूतावास ने भारतीय समुदाय और ‘फ्रेंड्स ऑफ इंडिया’ के साथ मिलकर गांधी जयंती के इस मौके पर जिंताई आर्ट म्यूजियम में महात्मा गांधी की 157वीं जयंती मनाई। राजदूत विक्रम दोराईस्वामी और जिंताई आर्ट म्यूजियम के क्यूरेटर मास्टर युआन ज‍िकुन ने महात्मा गांधी को पुष्पांजलि अर्पित की। चीनी कलाकारों की भावपूर्ण संगीत प्रस्तुति और भारतीय समुदाय के सदस्यों की ओर से गांधीजी के पसंदीदा भजनों के गायन ने शांति, सद्भाव और अहिंसा के उनके सदाबहार संदेश को जीवंत कर दिया। इस अवसर पर हिंदी दिवस प्रतियोगिता 2026 के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया, ताकि हिंदी भाषा के प्रति उनकी रचनात्मकता और उत्साह को सराहा जा सके।

पीएम ई-ड्राइव योजना से 26.59 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री को मिला समर्थन, चार्जिंग बुनियादी ढांचे का भी हुआ विस्तार

नई दिल्ली। पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत जून 2026 तक 26.59 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की बिक्री संभव हुई है। इससे देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में तेजी आई है, चार्जिंग बुनियादी ढांचे का विस्तार हुआ है और घरेलू विनिर्माण इकोसिस्टम मजबूत हुआ है। यह जानकारी सरकार की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में दी गई। 11,900 करोड़ रुपए के बजटीय आवंटन वाली इस योजना की अवधि बढ़ाकर मार्च 2028 तक कर दी गई है। यह योजना इलेक्ट्रिक वाहनों की विभिन्न श्रेणियों और उनसे जुड़े बुनियादी ढांचे को समर्थन देती है। सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, योजना के तहत 28.30 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इसके अलावा ई-बसों, चार्जिंग स्टेशनों और परीक्षण सुविधाओं को भी समर्थन दिया जा रहा है, जिससे पूरे भारत में स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन को बढ़ावा मिल रहा है। पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत 14,028 ई-बसों की तैनाती के लिए करीब 4,391 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। इनमें से अगस्त 2026 तक 14,000 ई-बसों का आवंटन किया जा चुका है। करीब 13,800 ई-बसें सात शहरों—दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, मुंबई, अहमदाबाद, पुणे और सूरत—को आवंटित की गई हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों के सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों (ईवी पीसीएस) और परीक्षण एजेंसियों के अपग्रेड के लिए भी अनुदान सहायता उपलब्ध है। देशभर में ईवी सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों के लिए करीब 2,000 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं। 28 सितंबर 2026 तक तीन तेल विपणन कंपनियों और 10 राज्यों में 8,147 चार्जर लगाने के लिए 851 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं। इसके अलावा, वाहन परीक्षण एजेंसियों के आधुनिकीकरण और उन्नयन के लिए 780 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। लक्षित नीतियों, वित्तीय प्रोत्साहनों और सहायक उपायों के चलते देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी तेजी से आगे बढ़ रही है। यह योजना विभिन्न वाहन श्रेणियों और उनसे जुड़े घटकों के लिए मांग आधारित प्रोत्साहन और बुनियादी ढांचे से जुड़ी सहायता प्रदान करती है। इस योजना के दायरे में ई-2 व्हीलर (ई-2डब्ल्यू), ई-3 व्हीलर (ई-3डब्ल्यू), जिनमें पंजीकृत ई-रिक्शा और ई-कार्ट तथा एल5 श्रेणी के वाहन, ई-एम्बुलेंस, ई-ट्रक, ई-बस, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और परीक्षण एजेंसियों का उन्नयन शामिल हैं। पंजीकृत ई-2डब्ल्यू के लिए 2,500 रुपए प्रति किलोवाट-घंटा का प्रोत्साहन दिया जाता है, जिसकी अधिकतम सीमा 5,000 रुपए प्रति वाहन है। यह लाभ 1.5 लाख रुपए तक की एक्स-फैक्ट्री कीमत वाले वाहनों पर लागू होता है। इसके लिए कुल 2,767 करोड़ रुपए का फंड आवंटित किया गया है। योजना का लक्ष्य 45.79 लाख से अधिक पंजीकृत ई-2डब्ल्यू को समर्थन देना है। सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, पंजीकृत ई-3डब्ल्यू (एल5) के लिए निर्धारित बिक्री लक्ष्य हासिल कर लिया गया है और इस श्रेणी को 26 दिसंबर 2025 को बंद कर दिया गया। वहीं, ई-3डब्ल्यू (ई-रिक्शा और ई-कार्ट) के लिए समर्थन मार्च 2028 तक जारी रहेगा।

तनाव और थकान से हैं परेशान? रोज करें पश्चिमोत्तानासन, मन रहेगा शांत

नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में शरीर को स्वस्थ और मन को शांत रखना बहुत जरूरी है। ऐसे में नियमित रूप से योगासन और संतुलित आहार बेहद जरूरी है। योग के विभिन्न आसनों में पश्चिमोत्तानासन एक बहुत ही फायदेमंद आसन माना जाता है। इसके नियमित रूप से करने से न सिर्फ शरीर में लचीलापन आता है बल्कि पाचन भी बेहतर होता है। संस्कृत में ‘पश्चिम’ का अर्थ शरीर का ‘पिछला हिस्सा’ (पीठ) और ‘उत्तान’ का अर्थ ‘खिंचाव’ होता है। इस आसन में बैठकर आगे की ओर झुकते हुए पूरी पीठ और पैरों की मांसपेशियों को खींचा जाता है। इस आसन में हम बैठकर आगे की ओर झुकते हैं, जिससे पूरी रीढ़ की हड्डी, पेट के अंग और नसों पर सकारात्मक असर पड़ता है। यह आसन हठ योग के 12 मूल आसनों में गिना जाता है। ‘हठयोग प्रदीपिका’ में पश्चिमोत्तानासन का विशेष रूप से वर्णन किया गया है और इसे बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। हठयोग प्रदीपिका के अनुसार, यह आसन शरीर में प्राण वायु (ऊर्जा) को ‘सुषुम्ना नाड़ी’ में प्रवाहित करने में मदद करता है और जठराग्नि (पाचन शक्ति) को तीव्र करता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार पश्चिमोत्तानासन (बैठकर आगे झुकने वाला आसन) रीढ़ की हड्डी, पाचन तंत्र और मानसिक शांति के लिए एक बेहद लाभदायक योगासन है। पश्चिमोत्तानासन के अभ्यास से श्वसन क्षमता में सुधार होता है, जिससे फेफड़े मजबूत होते हैं। खासतौर पर मधुमेह रोगियों के लिए यह आसन बहुत फायदेमंद माना जाता है क्योंकि यह ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करता है। साथ ही, लिवर और किडनी से जुड़ी समस्याओं में भी यह लाभकारी है। मासिक धर्म संबंधी विकारों से राहत दिलाने में पश्चिमोत्तानासन काफी असरदार है। यह पेट के निचले हिस्से में रक्त संचार को बेहतर बनाता है और दर्द को कम करने में मदद करता है। यह आसन हार्मोनल संतुलन बनाए रखता है, जिससे अनियमित पीरियड्स, ज्यादा रक्तस्राव या थकान जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। जिन्हें गंभीर कमर दर्द, स्लिप डिस्क या रीढ़ की हड्डी की कोई गंभीर चोट हो, वे यह आसन न करें। गर्भवती महिलाओं को पेट पर दबाव डालने वाले इस आसन से बचना चाहिए।

स्वच्छ भारत मिशन के 12 साल: एआई, रोबोट और ईवी से बदल रही शहरों की सफाई व्यवस्था

नई दिल्ली। स्वच्छ भारत मिशन के 12 साल पूरे होने से पहले गुरुवार को जारी एक सरकारी फैक्टशीट में बताया गया कि शहर साफ-सफाई सेवाओं को आधुनिक बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डिजिटल प्लेटफॉर्म और इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) का इस्तेमाल कर रहे हैं। बयान में कई उदाहरण देते हुए कहा गया कि स्थानीय निकाय कचरे और जल-निकायों के प्रबंधन के लिए एआई से लेकर ईवी तक के साधनों का इस्तेमाल करके सुरक्षित, साफ और ज्यादा कुशल तरीके अपना रहे हैं। रायपुर नगर निगम ने यूपीवाईओजी प्लेटफॉर्म पर आधारित एक डिजिटल ‘फिकल स्लज मैनेजमेंट’ (एफएसएम) डैशबोर्ड प्रोटोटाइप पेश किया। यह प्लेटफॉर्म आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स और नेशनल अर्बन डिजिटल मिशन से जुड़ा है। यह सिस्टम निवासियों को ऑनलाइन डी-स्लजिंग (सेप्टिक टैंक की सफाई) सेवाएं बुक करने, डिजिटल रूप से भुगतान करने और प्रक्रियाओं को डिजिटल रूप से ट्रैक करने की सुविधा देता है। पहले, सेप्टिक टैंक की सफाई सेवाओं के लिए उन्हें नगर निगम कार्यालय जाना पड़ता था। जैसे ही कोई निवासी अपना मोबाइल नंबर या प्रॉपर्टी आईडी डालता है, सिस्टम अपने-आप पता ढूंढ लेता है। बयान में बताया गया कि एक सिंगल-पेज फॉर्म के जरिए डी-स्लजिंग सेवा बुक की जा सकती है। काम पूरा होने के बाद ड्राइवर तस्वीरें अपलोड करते हैं, और डैशबोर्ड शहर को वाहनों की निगरानी करने और संसाधनों की योजना बेहतर ढंग से बनाने में भी मदद करता है। डिजिटल निगरानी, ​​सीवर की मैन्युअल (हाथ से) सफाई से मशीनीकृत सफाई की ओर बढ़ने में मदद करती है। तिरुवनंतपुरम म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने अमायिझानचन नहर की सफाई के लिए एआई-पावर्ड नहर-सफाई सिस्टम, जी-स्पाइडर (एसपीआईडीईआर) रोबोट को पेश किया है। यह रोबोट जमा हुए कचरे का पता लगाने, उसका आकलन करने और उसे हटाने के लिए मशीन विजन और सेंसर इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करता है। यह अलग-अलग तरह के कचरे, पानी के बहाव की स्थितियों और बनावट से जुड़ी चुनौतियों के हिसाब से रियल-टाइम में खुद को ढाल लेता है। इसके ‘फाइव-डिग्री-ऑफ-फ्रीडम’ मैकेनिज्म में मिले-जुले और अनियमित आकार के कचरे को उठाने के लिए बायोमिमेटिक पंजे का इस्तेमाल किया जाता है। निकाले गए कचरे को सीधे तय कलेक्शन गाड़ियों में डाल दिया जाता है। जी-स्पाइडर जहरीली गैसों, दूषित पानी और खतरनाक कचरे के सीधे संपर्क को कम करके कर्मचारियों की सुरक्षा को बेहतर बनाता है। यह पानी के ऊंचे स्तर और लगातार बहाव की स्थितियों में भी काम कर सकता है, जिससे नहर की सफाई का काम तय समय पर और व्यवस्थित तरीके से हो पाता है। गुंटूर शहर में, 200 से ज्यादा इलेक्ट्रिक ऑटो ने शहर भर में घर-घर जाकर कचरा इकट्ठा करने के काम को ज्यादा साफ-सुथरा बना दिया है। हर गाड़ी में जीपीएस ट्रैकिंग लगी है, जिससे कचरा इकट्ठा करने के काम की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा सकती है। इस पहल से हर साल 71,000 लीटर से ज्यादा डीजल की जरूरत खत्म हो गई है और अनुमान है कि इससे एक दशक में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 21,000 टन की कमी आएगी। बयान में कहा गया है कि 2 अक्टूबर 2014 को शुरू हुआ स्वच्छ भारत मिशन अब डिजिटल, सेंसर-बेस्ड और इलेक्ट्रिक शहरी साफ-सफाई व्यवस्था में बदल गया है। तमिलनाडु में ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन ने घर-घर जाकर कचरा इकट्ठा करने के लिए सभी 15 जोन में 5,478 बैटरी से चलने वाले ई-रिक्शा तैनात किए हैं। ये गाड़ियां रोजाना लगभग 40 किलोमीटर चलती हैं और डीजल से चलने वाली कचरा इकट्ठा करने वाली गाड़ियों की जगह ले रही हैं। यह फ्लीट हर दिन लगभग 41 टन कार्बन उत्सर्जन कम करता है, जिससे सालाना 15,160 टन की कमी आती है। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर ने मुख्य इलाकों में घर-घर जाकर कचरा इकट्ठा करने के लिए 100 इलेक्ट्रिक वाहन तैनात किए हैं। इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) के जरिए रियल-टाइम जीपीएस ट्रैकिंग से निगरानी और सेवा में पारदर्शिता बनी रहती है।

अरिजीत सिंह ने ‘तेरा यार हूं मैं’ की टीम के साथ फिर मिलाया हाथ, ‘पहले प्यार दूसरी बार’ का गाना ‘पुराने दिन’ रिलीज

मुंबई। ‘तेरा यार हूं मैं’ जैसे लोकप्रिय गाने के बाद गायक अरिजीत सिंह एक बार फिर संगीतकार रोचक कोहली, गीतकार कुमार और निर्माता-निर्देशक लव रंजन के साथ जुड़े हैं। यह टीम आगामी ड्रामा फिल्म ‘पहले प्यार दूसरी बार’ के नए गाने ‘पुराने दिन’ के लिए साथ आई है। ‘पुराने दिन’ को रोचक कोहली ने संगीतबद्ध किया है, जबकि इसके बोल कुमार ने लिखे हैं। यह गाना फिल्म के छह मुख्य किरदारों के बीच दोस्ती, प्यार और पहली मोहब्बत से जुड़ी भावनाओं को सामने लाता है। फिल्म में तुषार छिब्बर, सरगुन कौर लूथरा, कुणाल वैद, साक्षी वैद्या, स्पर्श वालिया और अलीशा चोपड़ा प्रमुख भूमिकाओं में हैं। खास बात यह है कि फिल्म के छहों मुख्य कलाकार इसी फिल्म से अभिनय की दुनिया में डेब्यू कर रहे हैं। गाने के बारे में संगीतकार रोचक कोहली ने कहा कि ‘तेरा यार हूं मैं’ को आज भी मिल रहा प्यार उनके लिए बेहद खास है। उन्होंने कहा कि ‘पुराने दिन’ के साथ वह लव रंजन, अरिजीत सिंह और कुमार के साथ फिर से जुड़कर एक ऐसी भावना को तलाशने की कोशिश कर रहे हैं, जो उतनी ही सार्वभौमिक है—पहले प्यार की मासूमियत। रोचक ने कहा कि टीम ने ऐसा गाना बनाने की कोशिश की है, जो सुनने में जाना-पहचाना लगे, लेकिन उसमें नयापन भी हो। उन्हें उम्मीद है कि ‘पुराने दिन’ भी श्रोताओं के बीच अपनी जगह बनाएगा और लंबे समय तक लोगों को पसंद आएगा। गीतकार कुमार ने बताया कि ‘तेरा यार हूं मैं’ और ‘पुराने दिन’ दोनों ही दोस्ती और बड़े होने के दौरान बनने वाली यादों की भावनात्मक दुनिया से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि ‘पुराने दिन’ के जरिए उन्होंने कॉलेज की जिंदगी की उस मासूमियत को शब्द देने की कोशिश की है, जब दोस्ती, पहला क्रश और छोटी-छोटी बातें भी बेहद खास लगती थीं। कुमार के मुताबिक, गाने का मकसद उस दौर को याद करना है जिसे लोग पीछे छोड़ चुके हैं, लेकिन उससे जुड़ी भावनाएं आज भी उनके साथ रहती हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि गाने के बोल श्रोताओं को उनकी जवानी, दोस्तों के साथ बिताए समय और पहली भावनाओं की याद दिलाएंगे। ‘पुराने दिन’ फिलहाल टी-सीरीज म्यूजिक पर उपलब्ध है। लव फिल्म्स के बैनर तले प्रस्तुत ‘पहले प्यार दूसरी बार’ का संयुक्त निर्माण लव रंजन और अंकुर गर्ग ने किया है। फिल्म 23 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने की उम्मीद है।

दिल्ली: एलजी टीएस संधू ने रोहिणी में डीडीए स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का किया उद्घाटन, 9 अक्टूबर से हॉकी कप की घोषणा

नई दिल्ली। दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी) टीएस संधू ने गुरुवार को रोहिणी में दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के एक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन किया। उन्होंने सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के बीच लोकप्रिय स्थानीय ‘आरंभ लाइब्रेरी’ का भी दौरा किया और युवाओं को अनुशासन और दृढ़ संकल्प का मंत्र दिया। रोहिणी के सेक्टर-33 में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के उद्घाटन समारोह के दौरान संधू ने घोषणा की कि युवा खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने और हॉकी जैसे टीम खेलों में उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए एलजी कप फॉर हॉकी का आयोजन 9 से 18 अक्टूबर तक किया जाएगा। यह स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स करीब 8.11 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है और इसका बिल्ट-अप एरिया लगभग 10,974 वर्ग मीटर है। इसे रोहिणी, बाहरी दिल्ली और उत्तर-पश्चिम दिल्ली के आसपास के इलाकों के निवासियों को बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। लाइब्रेरी में छात्रों से बातचीत करते हुए एलजी संधू ने कहा कि इस लाइब्रेरी की छात्रों के बीच काफी मांग है। इसे देखते हुए रोहिणी की लाइब्रेरी का विस्तार किया जाएगा। इसके लिए ऊपरी मंजिल का इस्तेमाल करते हुए 40 से अधिक अतिरिक्त सीटें बनाई जाएंगी। लाइब्रेरी के दौरे के बाद उपराज्यपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, “दिल्ली सरकार के मंत्री रविंद्र इंद्राज सिंह के साथ रोहिणी के सेक्टर-11 स्थित डीडीए की ‘आरंभ लाइब्रेरी’ का दौरा किया और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के साथ समय बिताया। उनके साथ बैठकर उनकी तैयारी, चुनौतियों और दबाव के बारे में जाना और अपने छात्र जीवन के अनुभव भी उनके साथ साझा किए।” एलजी संधू ने एक्स पर कहा, “मेरा संदेश सरल था: सकारात्मक, नियमित और अनुशासित रहें। असफलताओं को सफलता की सीढ़ी बनाएं और अपने लक्ष्य से कभी नजर न हटाएं। इन युवा छात्रों का साहस, समर्पण और दृढ़ संकल्प प्रेरणादायक है। आगे बढ़ते रहें, सीखते रहें और खुद पर विश्वास रखें। सफलता जरूर मिलेगी।” उपराज्यपाल ने कॉलेजों के आसपास स्ट्रीट लाइटिंग और सीसीटीवी कवरेज को मजबूत करने तथा पुलिस गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए थे। इसके साथ ही कॉलेज परिसरों के पास समर्पित नोडल पुलिस अधिकारी और पिंक बूथ की व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए गए। उन्होंने बुधवार को दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के महिला कॉलेजों के प्राचार्यों, डीयू के कुलपति योगेश सिंह और दिल्ली पुलिस, परिवहन विभाग, लोक निर्माण विभाग, डीडीए तथा दिल्ली मेट्रो के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की थी। बैठक में कॉलेज परिसरों और उनके आसपास तथा आवागमन के दौरान छात्राओं की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। लगभग सभी कॉलेजों ने बैठक में कुछ सामान्य समस्याएं उठाईं। इनमें ई-रिक्शा से जुड़ी समस्या, सुरक्षित लास्ट-माइल कनेक्टिविटी की कमी, फुटपाथ और पैदल रास्तों पर अतिक्रमण, अनियंत्रित वेंडिंग, अंधेरे वाले स्थान और पर्याप्त रोशनी की कमी, कॉलेज परिसरों के पास असुरक्षित पार्क, सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति, अश्लील हरकतों की घटनाएं तथा ज्यादा पिंक बूथ और पुलिस गश्त की जरूरत जैसे मुद्दे शामिल थे। यह बैठक एलजी संधू के पिछले तीन दिनों के दौरान दौलत राम कॉलेज और इंद्रप्रस्थ कॉलेज के औचक दौरे तथा 25 सितंबर को बोंटा पार्क के अचानक निरीक्षण के बाद हुई। इन दौरों का उद्देश्य महिला छात्रों और स्थानीय निवासियों की सुरक्षा से जुड़ी जमीनी समस्याओं को सीधे समझना था।

अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों से दुनिया तक पहुंचा शांति का संदेश

नई दिल्ली। भारत के लिए 2 अक्टूबर की तारीख राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती का दिन है, लेकिन पूरी दुनिया के लिए यह उस विचार को याद करने का अवसर है, जिसने संघर्ष के बीच भी शांति, संवाद और अहिंसा का रास्ता दिखाया। गांधी जयंती और अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस का एक ही दिन पड़ना इस तारीख को एक अनूठा महत्व देता है। एक तरफ यह भारत की राष्ट्रीय स्मृति से जुड़ा दिन है, तो दूसरी तरफ संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से यह मानवता के लिए एक सार्वभौमिक संदेश बन चुका है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व किया और अहिंसा के दर्शन को अपनी विचारधारा और रणनीति का आधार बनाया। देखते ही देखते गांधी का नाम शांति और मानवतावाद की एक ऐसी आवाज के रूप में उभरा, जिसे आज भी याद किया जाता है। अहिंसा के इसी विचार को वैश्विक स्तर पर पहचान उस समय मिली, जब संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 15 जून 2007 को प्रस्ताव पारित किया। इसी प्रस्ताव के जरिए 2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। इस प्रस्ताव का उद्देश्य अहिंसा के संदेश का प्रसार करना था। इस प्रस्ताव को व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिला। महासभा के 140 से अधिक देशों ने इसे सह-प्रायोजित किया। भारत की ओर से तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री आनंद शर्मा ने प्रस्ताव पेश किया और इस प्रस्ताव को बिना मतदान के सर्वसम्मति से पारित किया गया। संयुक्त राष्ट्र के इस संकल्प में अहिंसा के सिद्धांत की सार्वभौमिक प्रासंगिकता और शांति, सहिष्णुता, समझ और अहिंसा की संस्कृति को सुनिश्चित करने की इच्छा को रेखांकित किया गया। यानी गांधी का विचार दुनिया के सामने एक ऐसे सिद्धांत के रूप में रखा गया, जिसका संबंध मानव समाज के व्यापक भविष्य से है। महात्मा गांधी के लिए अहिंसा केवल एक विचार नहीं थी, बल्कि संघर्ष का एक रास्ता थी। भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में उन्होंने इसी नीति के जरिए शांति के संदेश को आगे बढ़ाया। गांधी के विचारों की व्यापकता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि संयुक्त राष्ट्र में उनके संदेश को आज की वैश्विक परिस्थितियों से जोड़कर याद किया जाता है। वहां होने वाले कार्यक्रमों और महासचिव के वक्तव्यों में गांधी के दर्शन को दुनिया के मौजूदा संघर्षों के संदर्भ में रखा जाता है। इन संदेशों में यह बात सामने आती है कि सत्य और अहिंसा में गांधी का विश्वास किसी भी हथियार से कहीं अधिक शक्तिशाली माना गया। भारत में 2 अक्टूबर का दिन गांधी जयंती के रूप में मनाया जाता है। राजघाट पर श्रद्धांजलि, सांस्कृतिक और शैक्षिक कार्यक्रमों के साथ गांधीजी के आदर्शों को रेखांकित करने वाले जन-अभियान इस दिन का हिस्सा होते हैं। 2 अक्टूबर का संदेश सिर्फ गांधी को याद करने तक सीमित नहीं है। यह उनके विचारों को सार्वजनिक जीवन और सामाजिक अभियानों के जरिए जीवंत रखने का अवसर भी बनता है। गांधी जयंती और अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस की सबसे खास बात यही है कि एक ही दिन राष्ट्रीय श्रद्धांजलि और वैश्विक संदेश का रूप ले लेता है। भारत में गांधी की स्मृति से जुड़ा यह दिन संयुक्त राष्ट्र के जरिए दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचता है। बेल्जियम, अमेरिका, स्पेन, सर्बिया, स्विट्जरलैंड, थाईलैंड, कजाकिस्तान और नीदरलैंड जैसे देशों में भी इस अवसर पर स्मरणोत्सव आयोजित किए जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस का मूल संदेश यही है कि संघर्ष का जवाब हमेशा संघर्ष नहीं होना चाहिए। शांति, सहिष्णुता, समझ और संवाद को सामाजिक जीवन का हिस्सा बनाने की जरूरत है। संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव ने भी शिक्षा और जन-जागरूकता के जरिए अहिंसा के संदेश को व्यापक बनाने पर जोर दिया। महात्मा गांधी को दुनिया न केवल अहिंसा और मानवतावाद के प्रति उनके अटूट समर्पण के लिए याद करती है, बल्कि एक ऐसे आदर्श के रूप में भी देखती है, जिसके आधार पर सार्वजनिक जीवन, राजनीतिक विचारों, सरकारी नीतियों और साझा भविष्य की उम्मीदों को परखा जा सकता है। 2 अक्टूबर की अहमियत सिर्फ इसलिए नहीं है कि यह गांधी का जन्मदिन है। यह उस विचार को दोहराने का दिन भी है, जो कहता है कि दुनिया की दिशा हिंसा से नहीं, बल्कि शांति और अहिंसा से तय हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस एक ओर गांधी को श्रद्धांजलि है तो दूसरी ओर पूरी दुनिया के लिए यह याद दिलाने वाला दिन है कि संघर्ष के बीच भी संवाद की गुंजाइश रहती है।

पश्चिम बंगाल: राज्यपाल के नाम पर फर्जी कॉल को लेकर लोक भवन ने किया आगाह, तस्वीर के अनधिकृत इस्तेमाल पर भी सख्ती

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के लोक भवन ने राज्यपाल के नाम पर किए जा रहे फर्जी फोन कॉल और उनकी तस्वीर के अनधिकृत इस्तेमाल को गंभीरता से लिया है। लोक भवन ने सरकारी अधिकारियों, संगठनों और आम लोगों के लिए एडवाइजरी जारी कर संदिग्ध कॉल या संदेश मिलने पर सावधानी बरतने और उसकी सत्यता की जांच करने की सलाह दी है। लोक भवन के मुताबिक, उसके संज्ञान में आया है कि कुछ लोग फोन पर खुद को राज्यपाल बताकर या लोक भवन से जुड़े होने का झूठा दावा कर रहे हैं। हाल ही में मोबाइल नंबर 9836205162 और 9836874913 से इस तरह के कॉल किए जाने की जानकारी सामने आई। इनमें से एक कॉल करने वाले ने कथित तौर पर खुद को गवर्नर हाउस का ‘आकाश सिंह’ बताया, जबकि दूसरे ने खुद को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल बताया। लोक भवन ने स्पष्ट किया है कि आकाश सिंह नाम का कोई व्यक्ति लोक भवन में कार्यरत नहीं है। एक अन्य मामले में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल की तस्वीर का उनकी सहमति या अनुमति के बिना एक कार्यक्रम की प्रचार सामग्री में इस्तेमाल किया गया। यह कार्यक्रम कोलकाता में आयोजित किया जाना प्रस्तावित था। लोक भवन ने इन दोनों मामलों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों से घटनाओं के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करने को कहा गया है। राज्यपाल की तस्वीर के अनधिकृत इस्तेमाल के मामले में लोक भवन ने संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई रिपोर्ट भी मांगी है। लोक भवन ने सरकारी अधिकारियों, विभिन्न संगठनों और आम जनता से कहा कि राज्यपाल या लोक भवन के नाम से आने वाले किसी भी अनचाहे या संदिग्ध फोन कॉल, संदेश अथवा दावे पर उसकी सत्यता की पुष्टि किए बिना भरोसा न करें और न ही उसके आधार पर कोई कदम उठाएं। एडवाइजरी में यह भी स्पष्ट किया गया है कि उचित अनुमति के बिना किसी कार्यक्रम या प्रचार के लिए राज्यपाल के नाम, तस्वीर या पदनाम का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। लोक भवन ने लोगों से अपील की है कि अगर उन्हें राज्यपाल या लोक भवन के नाम से ऐसा कोई संदिग्ध संदेश या कॉल मिलता है, अथवा राज्यपाल के नाम, तस्वीर या पदनाम के अनधिकृत इस्तेमाल की जानकारी मिलती है, तो इसकी सूचना तत्काल आधिकारिक माध्यमों से दी जाए।

ईडी का एक्शन, कोलकाता के 15 ठिकानों पर छापेमारी, दुर्गा पूजा फंड में गड़बड़ी का मामला

कोलकाता। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के कोलकाता जोन- I ने कोलकाता के 15 ठिकानों पर पीएमएलए, 2002 की धारा 17 के तहत तलाशी और जब्ती अभियान चलाया। यह कार्रवाई मासआर्ट (महानिर्बान रोड मास आर्ट) सोसाइटी द्वारा अपने दुर्गा पूजा ‘प्रीव्यू शो’ के प्रबंधन में की गई कथित वित्तीय अनियमितताओं के संबंध में की गई। ईडी के टारगेटेड लोकेशन में मासआर्ट सोसाइटी के आवासीय और कार्यालय परिसर, इसके पदाधिकारी, पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन और अन्य करीबी सहयोगी शामिल थे। ईडी की जांच कोलकाता पुलिस आयुक्तालय के तहत बउबाजार पुलिस स्टेशन द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 316(2), 318(4), 336(2), 336(3), 338, 340(2) और 61(2) का इस्तेमाल किया गया है। इस तलाशी अभियान को जयदीप मुखर्जी द्वारा इंद्रनील सेन (पूर्व राज्य मंत्री, पश्चिम बंगाल सरकार), मधुचंदा सेन (मासआर्ट की अध्यक्ष) के खिलाफ एक लिखित शिकायत के बाद शुरू किया गया, जिसमें ध्रुबज्योति बोस (मासआर्ट के सचिव), सायंतन मैत्रा (मासआर्ट के उपाध्यक्ष) और रंजन चटर्जी (मासआर्ट के कोषाध्यक्ष) के साथ अन्य अज्ञात व्यक्ति शामिल थे। आरोपी ने कथित तौर पर यूनेस्को प्रायोजित इकाई होने का झूठा दावा करके जनता से 2022 और 2025 के बीच मासआर्ट के माध्यम से भारी मात्रा में धन एकत्र किया, बाद में उन धन का उपयोग व्यक्तिगत लाभ के लिए किया। जांच से पता चला है कि आरोपी व्यक्तियों ने व्यवस्थित रूप से दुर्गा पूजा देखने का व्यावसायीकरण किया और व्यक्तिगत लाभ के लिए एक सार्वजनिक उत्सव को प्रभावी ढंग से एक व्यावसायिक उद्यम में बदल दिया। आगे खुलासा हुआ कि आरोपी ने मासआर्ट के माध्यम से कोलकाता के 24 चयनित दुर्गा पूजा पंडालों में ‘प्रीव्यू शो’ के लिए आम जनता को 1,749 से 5,499 रुपए तक के टिकट बेचे। इस धोखाधड़ी योजना का एक मुख्य तत्व मासआर्ट द्वारा व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए यूनेस्को के आधिकारिक नाम, सद्भावना और लोगों का भ्रामक और अनधिकृत शोषण था। जांच से पता चला है कि अकेले दो वर्ष की अवधि (2023 और 2024) में एक लाख से अधिक ऐसे टिकट जारी किए गए थे। टिकटों की बिक्री से प्राप्त आय को या तो बैंक खातों से नकद निकासी के माध्यम से या विविध खर्चों की आड़ में बट्टे खाते में डाल दिया गया। जांच से पता चला है कि पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री के रूप में इंद्रनील सेन के कार्यकाल के दौरान पर्यटन और सांस्कृतिक मंत्रालय से 85 करोड़ रुपए से अधिक के कई टेंडर ध्रुबज्योति बोस और दीपेश रॉय के स्वामित्व वाली संस्थाओं को दिए गए थे। दोनों व्यक्तियों को इंद्रनील सेन के करीबी सहयोगियों के रूप में जाना जाता है। इन संस्थाओं ने बाद में इंद्रनील सेन के रिश्तेदारों द्वारा नियंत्रित संस्थाओं को बड़ी रकम हस्तांतरित की। इसके अलावा, इन निविदाओं को सुरक्षित करने वाली संस्थाओं के बैंक खातों से बड़े पैमाने पर नकद निकासी देखी गई है। इसके अलावा, जांच से पता चला है कि इंद्रनील सेन और उनकी स्वामित्व वाली कंपनी ऑक्टेव रिकॉर्ड्स के बैंक खातों में उनके कार्यकाल के दौरान 3.8 करोड़ रुपए से अधिक की नकदी जमा की गई थी। इसके अतिरिक्त, ऑक्टेव रिकॉर्ड्स के बैंक खाते से लगभग 30 लाख रुपए की राशि बैंकिंग चैनलों के माध्यम से पश्चिम बंगाल की तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हस्तांतरित की गई थी, जिसके बारे में इंद्रनील सेन ने दावा किया है कि इसका भुगतान रॉयल्टी के रूप में किया गया था। तलाशी और जब्ती की कार्यवाही के दौरान आपत्तिजनक डिजिटल उपकरण और दस्तावेजी साक्ष्य पाए गए और उचित प्रावधानों के तहत जब्त कर लिए गए। वहीं, ईडी की ओर से मामले से संबंधित आगे की जांच जारी है।

पर्यटन और युवाओं को बढ़ावा देने के लिए महाराष्ट्र में एयर शो कराने की मांग, केंद्रीय मंत्री जाधव ने राजनाथ सिंह को लिखा पत्र

नई दिल्‍ली। केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से अनुरोध किया है कि वे 23-25 ​​नवंबर के दौरान महाराष्ट्र के प्रतिष्ठित पर्यटन स्थलों में भारतीय वायु सेना की सूर्य किरण एरोबेटिक डिस्प्ले टीम द्वारा प्रदर्शन आयोजित करने पर विचार करें। इनमें बुलढाणा जिले की लोनार क्रेटर झील भी शामिल है। केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने रक्षा मंत्री को लिखे पत्र में सूर्य किरण टीम की सटीकता, कौशल और समन्वित हवाई युद्धाभ्यास के लिए उसकी प्रतिष्ठा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन भारत की विमानन क्षमताओं को प्रदर्शित करते हैं। ये जनता की रुचि को प्रेरित करते हैं और युवाओं को भारतीय वायु सेना में अवसरों का पता लगाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। जाधव ने विशेष रूप से लोनार क्रेटर झील का उल्लेख किया, जो महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में स्थित एक अनूठी प्राकृतिक संरचना है और अपनी विशिष्ट भूवैज्ञानिक और पर्यावरणीय विशेषताओं के कारण पर्यटकों को आकर्षित करती है। यह झील अपने खारे और क्षारीय जल और मनमोहक क्रेटर परिदृश्य के लिए जानी जाती है। मंत्री ने अजंता और एलोरा गुफाओं की ओर भी ध्यान दिलाया, जिन्हें उनकी उत्कृष्ट सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व के लिए विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त है। ये दोनों स्थल यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में अंकित हैं। जाधव ने रक्षा मंत्रालय से अनुरोध किया है कि वह 23, 24 या 25 नवंबर में से किसी भी दिन लोनार, अजंता और एलोरा में सूर्य किरण एरोबेटिक डिस्प्ले प्रदर्शन और उससे संबंधित प्रेरणादायक कार्यकलापों के आयोजन के लिए आवश्यक अनुमोदन प्रदान करे और संबंधित अधिकारियों को उचित निर्देश जारी करे। प्रस्तावित एयर शो का उद्देश्य इन स्थलों में एक विशिष्ट सार्वजनिक आकर्षण जोड़ना है। साथ ही, ये भारत की विमानन उत्कृष्टता का प्रदर्शित करते हैं और महाराष्ट्र की समृद्ध प्राकृतिक, सांस्कृतिक और विरासत पर्यटन क्षमता को उजागर करते हैं।