पीएसजी ने लगातार दूसरी बार जीता यूईएफए सुपर कप, फाइनल में एस्टन विला को हराया

साल्जबर्ग। ख्विचा क्वारात्शेलिया और डिजायर डोए के गोल की मदद से पेरिस सेंट-जर्मेन (पीएसजी) ने यूरोपा लीग विजेता एस्टन विला को 2-1 से हराकर लगातार दूसरी बार यूईएफए सुपर कप का खिताब जीता। मैच के दौरान कभी-कभी एस्टन विला के दबाव में दिखी पीएसजी ने अपने अनुभव, रणनीतिक समझ और व्यक्तिगत प्रदर्शनों की बदौलत जीत हासिल की। पिछले सीजन में पीएसजी के हीरो रहे क्वारात्शेलिया ने स्टेडियन साल्जबर्ग में धूम मचा दी। जॉर्जियाई स्टार ने डूए का पास लिया और फिर अंदर कट करके मार्को बिजोट के ऊपर से एक जोरदार शॉट लगाते हुए गोल का सिलसिला शुरू किया। विला ने भी जोरदार खेल का प्रदर्शन करते हुए कई बार पीएसजी के डिफेंस को भेदने में कामयाबी हासिल की। विला के 17 साल और 212 दिन के खिलाड़ी ब्रायन मैडजो पीएसजी डिफेंस के लिए सबसे मुश्किल साबित हुए। ब्रायन मैडजो ने विला की तरफ से एकमात्र गोल मारा और सबसे कम उम्र के सुपर कप स्कोरर के तौर पर अपना नाम दर्ज करा लिया। खेल के 61वें मिनट में पीएसजी ने बढ़त बनाई। डोए ने सब्सटीट्यूट ओस्मान डेम्बेले की सटीक थ्रू बॉल पर बिजोट को छकाते हुए शानदार गोल किया। उनाई एमरी ने विला के लिए टैमी अब्राहम और रॉस बार्कले जैसे अटैकिंग खिलाड़ियों को भेजा ताकि एक और बराबरी का गोल किया जा सके, लेकिन वे पीएसजी के डिफेंस को तोड़ नहीं सके। पीएसजी ने 2-1 से जीत हासिल की। खिताबी जीत के बाद पीएसजी के कोच लुइस एनरिक ने कहा, “हमें पहले से पता था कि यह मैच मुश्किल होने वाला है। मेरे खिलाड़ियों ने दिखाया कि वे किस मिट्टी के बने हैं। हो सकता है कि हम सबसे अच्छी फिजिकल कंडीशन में न हों, लेकिन एक बार फिर यह हमारे डीएनए और हमारे फैंस का असली प्रदर्शन है, जिसने हमें ट्रॉफी जीतने और स्टैंडर्ड ऊंचा रखने में मदद की है।” पीएसजी ने अपने शानदार 2024–25 और 2025–26 कैंपेन की रफ्तार को जारी रखते हुए एक और ट्रॉफी जीती और अपने इतिहास का दूसरा सुपर कप जीतकर अपना खिताब अपने पास बरकरार रखा। पीएसजी तीसरा क्लब है जिसने लगातार 2 बार यूईएफए का खिताब जीता है। इससे पहले ये उपलब्धि एसी मिलान (1989, 1990) और रियल मैड्रिड सीएफ (2016, 2017) में हासिल की थी।
स्थिर रोजगार बाजार ने 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के पीछे की सच्चाई को किया उजागर : शिवसेना

मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) ने गुरुवार को दावा किया कि सत्तारूढ़ प्रशासन वैश्विक अस्थिरता के बावजूद मजबूत आर्थिक और औद्योगिक विकास को बनाए रखने का बार-बार दावा करता है लेकिन संसद में पेश किए गए सरकार के आधिकारिक आंकड़ों ने इन दावों को गंभीर चुनौती दी है। शिवसेना (यूबीटी) ने कहा कि सांख्यिकी मंत्रालय की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में रोजगार के अवसरों में पिछले एक वर्ष के दौरान न तो बढ़ोतरी हुई और न ही कमी आई। आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के आंकड़े बताते हैं कि देश का रोजगार बाजार पूरी तरह स्थिर बना हुआ है। शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र ‘सामना’ में प्रकाशित संपादकीय में कहा गया कि मंत्रालय की रिपोर्ट देश में रोजगार की मौजूदा स्थिति से जुड़े कई महत्वपूर्ण संकेतक सामने रखती है। मौजूदा तिमाही में बेरोजगारी दर 5.5 प्रतिशत है जबकि एक साल पहले यह 5.6 प्रतिशत थी। वेतनभोगी कर्मचारियों की हिस्सेदारी जून में 51.4 प्रतिशत रही, जो पिछले वर्ष जून में दर्ज 51.2 प्रतिशत से मामूली अधिक है। महिला श्रमिकों की हिस्सेदारी भी 32 प्रतिशत से बढ़कर 32.7 प्रतिशत हुई है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों में लगातार गिरावट जारी है। संपादकीय में कहा गया कि सरकार के समर्थक जहां स्थिर बेरोजगारी दर को अर्थव्यवस्था की मजबूती और लचीलेपन का संकेत बता रहे हैं, वहीं आलोचक शिक्षित युवाओं के बीच गहराते संकट की ओर ध्यान दिला रहे हैं। इसमें कहा गया कि भारत में स्नातक युवाओं की संख्या बढ़कर 6.30 करोड़ हो गई है। चार दशकों में यह संख्या 13 गुना बढ़ी है, जबकि बेरोजगार स्नातकों की संख्या इसी अवधि में 16 गुना बढ़ गई है। संपादकीय के अनुसार, वर्तमान में हर 10 स्नातक युवाओं में से छह बेरोजगार हैं। अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए संपादकीय में कहा गया कि बेरोजगार युवाओं में से हर तीन में दो के पास डिग्री है। यानी उनके पास आवश्यक शैक्षणिक योग्यता तो है लेकिन रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध नहीं हैं। इसमें दावा किया गया कि नौकरी की तलाश कर रहे हर 1,000 युवाओं में केवल 12 को स्थायी रोजगार मिल पाता है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने कहा कि सांख्यिकी मंत्रालय के आंकड़े केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया के हालिया दावे से सीधे तौर पर विरोधाभास पैदा करते हैं। मांडविया ने कहा था कि सरकार ने अपने 12 साल के कार्यकाल में हर साल 1.7 करोड़ नए रोजगार पैदा किए हैं। पार्टी ने कहा कि ताजा आंकड़े प्रयागराज में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी की ओर से युवाओं में बेरोजगारी को लेकर उठाई गई चिंताओं को भी सही ठहराते हैं। ठाकरे गुट ने आरोप लगाया कि जो सरकार ‘पांच ट्रिलियन’ की अर्थव्यवस्था का दावा करती है, वह पिछले एक वर्ष में एक भी नया रोजगार पैदा करने में विफल रही है। पार्टी ने कहा कि सरकार हर साल दो करोड़ रोजगार पैदा करने के अपने वादे को पूरा करने में नाकाम रही है और इसके कारण लाखों योग्य स्नातकों का भविष्य अनिश्चितता में है। संपादकीय में कहा गया, “यह मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों का ‘आईना’ है और इसे उसी के एक मंत्रालय ने दिखाया है।” संपादकीय में केंद्रीय गृह मंत्री के उस कथित सुझाव पर भी निशाना साधा गया, जिसमें रोजगार नहीं मिलने पर पकौड़े तलने की बात कही गई थी। साथ ही प्रधानमंत्री की युवाओं को संबोधित करने वाली “हैलो फ्रेंड्स” रील का जिक्र करते हुए कहा गया कि सरकार को इस आईने में खुद को देखना चाहिए। शिवसेना (यूबीटी) ने आरोप लगाया कि आर्थिक विकास के बड़े-बड़े दावों के बावजूद रोजगार सृजन के मोर्चे पर जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक बनी हुई है और शिक्षित युवाओं के लिए पर्याप्त तथा स्थायी रोजगार उपलब्ध कराने की चुनौती लगातार गहरी होती जा रही है।
एमएससीआई इंडिया इंडेक्स में अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस सहित शामिल हुए 4 नए शेयर, 3 बाहर

नई दिल्ली। वैश्विक सूचकांक प्रदाता एमएससीआई (मॉर्गन स्टेनली कैपिटल इंटरनेशनल) ने अपनी अगस्त 2026 की आवधिक समीक्षा के तहत अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस समेत चार कंपनियों को एमएससीआई इंडिया इंडेक्स में शामिल किया है, जबकि तीन कंपनियों को इंडेक्स से बाहर कर दिया गया है। ये बदलाव 31 अगस्त 2026 के कारोबार समाप्त होने के बाद प्रभावी होंगे। एमएससीआई के अनुसार, अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस के अलावा जिन अन्य कंपनियों को इंडेक्स में शामिल किया गया है, वे पूंजी बाजार (कैपिटल मार्केट) और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों से संबंधित हैं। हालांकि इंडेक्स से बाहर की गई कंपनियों के नाम इस घोषणा में नहीं बताए गए। एमएससीआई की यह समीक्षा बाजार पूंजीकरण, लिक्विडिटी और फ्री-फ्लोट जैसे प्रमुख मानकों के आधार पर की जाती है। इसी आधार पर तय किया जाता है कि कौन-सी कंपनियां इंडेक्स का हिस्सा बनी रहेंगी और किन्हें इसमें शामिल या बाहर किया जाएगा। इस समीक्षा के साथ एमएससीआई इंडिया डोमेस्टिक स्मॉल कैप इंडेक्स में भी बड़ा फेरबदल किया गया है। इस इंडेक्स में 12 नए शेयर जोड़े गए हैं, जबकि 19 शेयरों को हटाया गया है। इस प्रकार कुल मिलाकर इंडेक्स में सात कंपनियों की शुद्ध कमी हुई है। एमएससीआई इंडेक्स को दुनिया भर के बड़े संस्थागत निवेशक और पैसिव फंड बेंचमार्क के रूप में इस्तेमाल करते हैं। यही वजह है कि इंडेक्स में शामिल होने या बाहर होने वाली कंपनियों के शेयरों में अक्सर निवेशकों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं। इंडेक्स में बदलाव के बाद कई वैश्विक फंड अपने पोर्टफोलियो को नए भार के अनुसार पुनर्संतुलित करते हैं, जिससे संबंधित शेयरों में निवेश प्रवाह देखने को मिलता है। एमएससीआई के मुताबिक, उसका भारत केंद्रित सूचकांक भारतीय शेयर बाजार के लगभग 85 प्रतिशत इक्विटी यूनिवर्स का प्रतिनिधित्व करता है। भारत में निवेश करने वाले कई अंतरराष्ट्रीय निवेशक और वैश्विक फंड इसी सूचकांक को प्रमुख मानक के रूप में देखते हैं। इससे पहले जून में आई एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि एमएससीआई समीक्षा के बाद भारतीय शेयर बाजार में लगभग 30,214 करोड़ रुपए का पैसिव निवेश प्रवाह आ सकता है। उस रिपोर्ट में यह भी संभावना जताई गई थी कि कुछ फार्मा कंपनियां एमएससीआई इंडिया स्मॉल कैप इंडेक्स से आगे बढ़कर एमएससीआई इंडिया स्टैंडर्ड इंडेक्स में शामिल हो सकती हैं। एमएससीआई की घोषणा के बाद अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस के शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली। बीएसई पर कंपनी के शेयर शुरुआती कारोबार में 2.24 प्रतिशत तक उछलकर 1,638 रुपए के इंट्रा-डे उच्च स्तर पर पहुंच गए। स्टॉक एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, कंपनी के शेयर ने पिछले 52 सप्ताह में 1,789 रुपए का उच्चतम स्तर और 745.45 रुपए का न्यूनतम स्तर छुआ है। लंबी अवधि के प्रदर्शन पर नजर डालें तो अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस का शेयर निवेशकों को लगातार बेहतर रिटर्न देता रहा है। पिछले 5 वर्षों में शेयर करीब 64 प्रतिशत, जबकि पिछले 3 वर्षों में लगभग 90 प्रतिशत चढ़ा है। वहीं बीते एक वर्ष में इसने निवेशकों की पूंजी लगभग दोगुनी कर दी है, और करीब 100 प्रतिशत का रिटर्न दिया है।
कोयंबटूर में 824 करोड़ की मेगा ड्रेनेज योजना, तीन इलाकों को मिलेगा भूमिगत सीवर नेटवर्क

कोयंबटूर। कोयंबटूर नगर निगम (सीसीएमसी) ने कलापत्ती, विलानकुरिची और सरवनमपत्ती के कुछ हिस्सों को कवर करने वाले भूमिगत जल निकासी नेटवर्क के लिए 824 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत पर एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की है। प्रस्ताव को मंजूरी के लिए नगर प्रशासन निदेशालय को प्रस्तुत कर दिया गया है। नगर निगम परियोजना के लिए लागत अनुमान को अंतिम रूप दे रहा है और प्रारंभिक कार्य पूरा कर रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य शहर के कई नवनिर्मित और विकासशील क्षेत्रों में स्वच्छता में सुधार करना है। प्रस्तावित नेटवर्क उत्तर और पूर्व क्षेत्रों के उन इलाकों को कवर करेगा जो मौजूदा भूमिगत जल निकासी योजनाओं से बाहर हैं। वर्तमान में, तमिलनाडु जल आपूर्ति और ड्रेनेज बोर्ड सरवनमपट्टी, थुदियालुर, कवुंडमपालयम, वडावल्ली, वीरकेरलम और वेल्लाकिनार में जल निकासी कार्य कर रहा है। इस परियोजना की योजना दीर्घकालिक जनसंख्या और सीवेज उत्पादन के अनुमानों के आधार पर बनाई गई है। प्रस्तावित सेवा क्षेत्र में जनसंख्या 2030 तक 1,30,264, 2045 तक बढ़कर 1,72,132 और 2060 तक 2,24,999 होने का अनुमान है। प्रतिदिन सीवेज उत्पादन 2030 में 13.37 मिलियन लीटर, 2045 में 17.66 मिलियन लीटर और 2060 तक 23.09 मिलियन लीटर होने का अनुमान है। अधिकारियों ने कहा कि अपशिष्ट जल के व्यवस्थित संग्रहण और परिवहन को सुनिश्चित करने के लिए सीवर नेटवर्क को भूभाग के अनुसार डिजाइन किया गया था। इस योजना में 10 सीवेज पंपिंग स्टेशन और पांच सीवेज लिफ्टिंग स्टेशन शामिल हैं। नेटवर्क के माध्यम से एकत्रित सीवेज को ओंडीपुदुर में प्रस्तावित उपचार संयंत्र तक पहुंचाया जाएगा। इस संयंत्र की उपचार क्षमता 17.66 मिलियन लीटर प्रति दिन होगी, और उपचारित अपशिष्ट जल को पास की नोय्याल नदी में छोड़ने का प्रस्ताव है। इस योजना में लगभग 411 किलोमीटर सीवर पाइपलाइन बिछाना और 15,777 मैनहोल का निर्माण करना शामिल है। लगभग 33,637 घरों को सीवर कनेक्शन उपलब्ध कराए जाने की उम्मीद है। एक बार चालू होने के बाद, यह नेटवर्क वार्ड 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 21, 22 और 23 के निवासियों को लाभ पहुंचाएगा। सीसीएमसी आयुक्त कट्टा रवि तेजा ने कहा कि पूरी डीपीआर नगरपालिका प्रशासन निदेशालय को भेज दी गई है। उन्होंने कहा कि यह योजना उत्तर और पूर्वी क्षेत्रों में मौजूदा भूमिगत जल निकासी परियोजनाओं से बाहर रह गए अधिकांश क्षेत्रों को कवर करेगी। निगम केंद्रीय वित्त आयोग के राज्य प्रोत्साहन अनुदान घटक के माध्यम से वित्तीय सहायता प्राप्त करने की योजना बना रहा है। अधिकारियों का मानना है कि यह परियोजना भविष्य की स्वच्छता आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आवश्यक है, क्योंकि कलापत्ती, विलानकुरिची और सरवनमपत्ती में आवासीय और वाणिज्यिक क्षेत्र का तेजी से विस्तार हो रहा है।
मौसम विभाग ने राजस्थान के कई हिस्सों में भारी बारिश की दी चेतावनी

जयपुर। राजस्थान के कई हिस्सों में गुरुवार को मानसून के सक्रिय रहने की संभावनाएं है। जयपुर स्थित मौसम केंद्र ने राज्य के कुछ इलाकों में कहीं-कहीं मध्यम से भारी बारिश का अनुमान लगाया है। मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार, गुरुवार को जयपुर, भरतपुर, अजमेर, कोटा, उदयपुर, जोधपुर और बीकानेर डिवीजन के कुछ हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। कुछ इलाकों में स्थानीय मौसम की स्थितियों में अचानक बदलाव और तेज बारिश की संभावना भी है। भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, बीकानेर, जोधपुर, नागौर, पाली, फलोदी और आसपास के इलाकों के लिए मौसम की चेतावनी जारी की गई है। कुछ जगहों पर 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं के साथ आंधी-तूफान और हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। हाल ही में हुई भारी बारिश के कारण टोंक, सवाई माधोपुर, जयपुर, करौली, धौलपुर, बारां, कोटा, दौसा और झालावाड़ सहित कई जिलों में जलभराव की सूचना मिली है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। मौसम विभाग ने संकेत दिया है कि 14 अगस्त से जोधपुर, उदयपुर और अजमेर डिवीजन के अधिकतर हिस्सों में बारिश की गतिविधि धीरे-धीरे कम हो जाएगी। हालांकि, बीकानेर, जयपुर, भरतपुर और कोटा डिवीजन के कुछ हिस्सों में कहीं-कहीं मध्यम से भारी बारिश जारी रह सकती है। 15 अगस्त से, पश्चिमी और उत्तरी राजस्थान के कुछ इलाकों को छोड़कर राज्य के ज़्यादातर हिस्सों में बारिश की गतिविधि कम होने की उम्मीद है। 16 अगस्त को जयपुर, भरतपुर, कोटा और बीकानेर डिवीजन के कुछ हिस्सों में कहीं-कहीं बारिश जारी रह सकती है। वहीं, लोगों को सलाह दी गई है कि वे आंधी-तूफान और बिजली कड़कने के दौरान सावधानी बरतें। खराब मौसम के दौरान लोगों को खुले मैदानों, अकेले खड़े पेड़ों और बिजली के खंभों के पास जाने से बचें। साथ ही, ड्राइवरों को अचानक भारी बारिश से दृश्यता कम होने पर सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
रांची में छात्रों का आंदोलन 21वें दिन भी जारी, सीएम आवास के घेराव की तैयारी, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

रांची। जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन के अगले चरण को लेकर रांची जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। आंदोलनकारी छात्रों ने 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की तैयारी की है। हालांकि आंदोलित छात्रों ने औपचारिक तौर पर इसका ऐलान नहीं किया है, लेकिन खुफिया इनपुट के मद्देनजर कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवास और आसपास के इलाकों में पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है। तमाम सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं। मुख्यमंत्री आवास की सुरक्षा में 100 से अधिक अतिरिक्त सशस्त्र जवानों को लगाया गया है। इनमें झारखंड जगुआर और झारखंड आर्म्ड पुलिस के जवान शामिल हैं। सूचना भवन चौक से राम मंदिर चौक तक बैरिकेडिंग कर सुरक्षा घेरा तैयार किया गया है। मुख्यमंत्री आवास के आसपास करीब 500 मीटर के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को विशेष रूप से मजबूत किया गया है। सुरक्षा कारणों से सूचना भवन से एटीआई की ओर जाने वाले मार्ग को भी बंद किया गया है। पूरे इलाके पर ड्रोन कैमरों से निगरानी रखे जाने की जानकारी है। सुरक्षा इंतजामों के कारण कांके रोड पर यातायात भी प्रभावित हुआ है। मोराबादी और कचहरी चौक की ओर से आने वाले वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से भेजा जा रहा है। छात्रों का आंदोलन करीब 20 दिनों से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जारी है। आंदोलनकारी जेपीएससी और जेएसएससी की विवादित भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच समेत परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं। छात्रों की प्रमुख मांगों में जेपीएससी सिविल सेवा और जेएसएससी-सीजीएल परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक की सीबीआई जांच शामिल है। 10 अगस्त को छात्रों ने विधानसभा घेराव किया था। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ था। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया था। बाद में लाठीचार्ज भी हुआ। इस कार्रवाई के बाद आंदोलनकारी छात्रों ने अपना आंदोलन और तेज करने का ऐलान किया था। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर सरकार ठोस निर्णय नहीं लेती, आंदोलन जारी रहेगा। भाजपा समेत विपक्षी दल छात्रों के समर्थन में सरकार पर लगातार दबाव बना रहे हैं। भाजपा नेताओं ने पहले मुख्यमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन भी किया था और उन्हें हिरासत में लिया गया था।
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, लालकिला हमले का मास्टरमाइंड था अल कायदा

वॉशिंगटन। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की एक रिपोर्ट में नवंबर 2025 में दिल्ली के लालकिले पर हुए हमले को ‘अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट’ (एक्यूआईएस) से जोड़ा गया है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यह संगठन धीरे-धीरे एक क्षेत्रीय आतंकवादी नेटवर्क के रूप में विकसित हो रहा है और इसकी वित्तीय तथा लॉजिस्टिक क्षमताएं भी बढ़ रही हैं। यह जानकारी संयुक्त राष्ट्र की ‘एनालिटिकल सपोर्ट एंड सैंक्शंस मॉनिटरिंग टीम’ की 38वीं रिपोर्ट में दी गई है। यह रिपोर्ट इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस), अल-कायदा और उनसे जुड़े संगठनों पर नजर रखने वाली संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की समिति को सौंपी गई थी। रिपोर्ट में कहा गया है, “एक्यूआईएस एक बिखरे हुए समूह से विकसित होकर एक क्षेत्रीय आतंकवादी संगठन के रूप में उभर रहा है।” इसमें कहा गया कि संगठन ने वित्तीय और लॉजिस्टिक नेटवर्क खड़े कर लिए हैं और अब यह बड़े संगठित ढांचे की बजाय छोटे, अलग-अलग और विकेंद्रीकृत समूहों के जरिए काम कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, “नवंबर 2025 में दिल्ली के लालकिले पर हुआ हमला आधिकारिक तौर पर एक्यूआईएस से जुड़ा पाया गया था।” रिपोर्ट में भारत के पड़ोसी देशों में संगठन के संभावित विस्तार को लेकर भी चिंता जताई गई है। इसमें कहा गया, “यह चिंता मौजूद थी कि एक्यूआईएस बांग्लादेश का इस्तेमाल वहां अपनी नई इकाइयां स्थापित करने के लिए कर सकता है।” संयुक्त राष्ट्र के इस आकलन ने इस घटनाक्रम को दक्षिण एशिया की बिगड़ती सुरक्षा स्थिति के व्यापक संदर्भ में देखा है। रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक आतंकवादी खतरा कुल मिलाकर पहले जैसा ही बना हुआ है लेकिन साहेल क्षेत्र और दक्षिण एशिया में इसकी गंभीरता बढ़ी है। रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पार हमलों के चलते क्षेत्रीय तनाव लगातार बना हुआ है। इसमें आरोप लगाया गया कि तालिबान प्रशासन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) को समर्थन देता रहा है, जिसके कारण पाकिस्तान में हमलों में बढ़ोतरी हुई और दोनों पक्षों के बीच सैन्य टकराव भी देखने को मिले। रिपोर्ट के अनुसार, तालिबान लगातार इस बात से इनकार करता रहा है कि वह किसी आतंकवादी संगठन को शरण दे रहा है। हालांकि सदस्य देशों ने चिंता जताई कि यह संघर्ष चरमपंथी संगठनों के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है और पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर सकता है। रिपोर्ट में कहा गया कि अफगानिस्तान में कई आतंकवादी संगठनों की सक्रिय मौजूदगी पड़ोसी देशों और मध्य एशिया के लिए लगातार खतरा बनी हुई है। इसमें कहा गया कि ‘इस्लामिक स्टेट-खुरासान’ (आईएस-के) के खिलाफ अभियान चलाने और अन्य संगठनों को नियंत्रित करने की कोशिशों के बावजूद तालिबान आतंकवाद की समस्या को पूरी तरह दबाने में सफल नहीं रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक एक्यूआईएस, ‘इत्तेहाद-उल-मुजाहिदीन पाकिस्तान’ नामक संगठन की मुख्य ताकत भी है, जिसे कई हमलों के लिए जिम्मेदार बताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया कि एक्यूआईएस के कुछ नेता अब भी काबुल में मौजूद हैं और कथित तौर पर उन्हें अफगान पहचान पत्र भी जारी किए गए हैं। इससे तालिबान और इस संगठन के बीच करीबी सहयोग के संकेत मिलते हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि अल-कायदा ने टीटीपी को वैचारिक मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और अन्य प्रकार का समर्थन दिया है। अप्रैल में अल-कायदा के आधिकारिक मीडिया प्लेटफॉर्म ने सार्वजनिक रूप से तालिबान का समर्थन किया और पहली बार पाकिस्तान के खिलाफ टीटीपी की गतिविधियों का भी खुलकर समर्थन किया। इस्लामिक स्टेट और अल-कायदा के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध व्यवस्था की शुरुआत 1999 से पारित विभिन्न प्रस्तावों के आधार पर हुई थी। इसकी मॉनिटरिंग टीम हर छह महीने में स्वतंत्र रिपोर्ट पेश करती है ताकि सदस्य देश आतंकवादी खतरों का आकलन कर सकें और संपत्तियां फ्रीज करने, यात्रा प्रतिबंध लगाने तथा हथियारों पर रोक जैसे उपायों को प्रभावी ढंग से लागू कर सकें।
होर्मुज पर निर्भरता घटाने की तैयारी में जापान, कनाडा से पहुंची कच्चे तेल की पहली खेप

नई दिल्ली। जापान ने मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के बीच कनाडा से कच्चे तेल की पहली खेप हासिल की है। इस मौके पर जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची ने कनाडा को एक महत्वपूर्ण साझेदार बताते हुए इस प्रयास को दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग की दिशा में बड़ी सफलता बताया। जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, ”बुधवार को मध्य पूर्व की स्थिति बिगड़ने के बाद पहली बार कनाडा का कच्चा तेल लेकर एक टैंकर जापान पहुंचा है। कनाडा आर्थिक सुरक्षा के क्षेत्र में जापान का एक महत्वपूर्ण साझेदार है, और यह ऐसा क्षेत्र है जिसे बढ़ावा देने पर मैं स्वयं भी विशेष जोर दे रही हूं।” तकाइची ने बताया कि इस वर्ष छह मार्च को जब कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी जापान आए थे, तब हमने दोनों देशों के संबंधों को ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ के नए स्तर तक ले जाने पर सहमति जताई थी। साथ ही, हमने ‘जापान-कनाडा शिखर सम्मेलन संयुक्त वक्तव्य’ पर हस्ताक्षर किए थे, जो दोनों देशों के बीच पहला ऐसा शिखर दस्तावेज था। खास तौर पर कच्चे तेल के मुद्दे पर, प्रधानमंत्री कार्नी के साथ हुई बैठक में हमने ‘कनाडाई कच्चे तेल की खरीद’ को जापान-कनाडा रणनीतिक साझेदारी के एक ठोस उदाहरण के रूप में चर्चा का विषय बनाया था। उन्होंने बताया कि कच्चे तेल की यह आपूर्ति ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में जापान और कनाडा के बीच सहयोग की एक बड़ी सफलता है। इससे पहले दोनों देश एलएनजी (एलएनजी) और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (एसएमआर) के क्षेत्र में भी सहयोग कर चुके हैं। यह हमारे लिए बेहद खुशी की बात है और जापान की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिहाज से इसका विशेष महत्व है। तकाइची ने कहा, ”कनाडा, जो ‘मुक्त और खुला इंडो-पैसिफिक’ को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी साझा करने वाला एक भरोसेमंद सहयोगी देश है, आगे भी हमारे साथ मिलकर काम करता रहेगा।” पीएम तकाइची ने कहा कि कच्चे तेल की वैकल्पिक आपूर्ति के बारे में बात करें तो सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर ऐसी आपूर्ति व्यवस्थाएं विकसित करने में पूरी कोशिश कर रहे हैं जो होर्मुज स्ट्रेट पर निर्भर न हों। अगस्त महीने के लिए भी फिलहाल हमारा अनुमान है कि बिना तेल भंडार से तेल निकाले, पिछले वर्ष के औसत मासिक स्तर के करीब 100 प्रतिशत आपूर्ति हासिल की जा सकती है। उन्होंने बताया कि अब तक जापान को मध्य पूर्व और अमेरिका के अलावा मध्य एवं दक्षिण अमेरिका, एशिया-प्रशांत क्षेत्र, मध्य एशिया और अफ्रीका से भी कच्चा तेल मिल चुका है। इस नई खेप के साथ अब कनाडा भी उन देशों की सूची में शामिल हो गया है। तकाइची ने कहा, ”सरकार आगे भी कच्चे तेल की वैकल्पिक आपूर्ति को बढ़ावा देती रहेगी। हमारा लक्ष्य जापान की कुल जरूरतों को पूरा करना है। साथ ही भंडार से तेल निकालने की जरूरत को कम से कम रखना है। सरकार यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेगी कि जापानी लोगों के दैनिक जीवन, आजीविका और देश की आर्थिक गतिविधियों पर किसी तरह का नकारात्मक असर न पड़े।
तमिलनाडु के पेट्रोल पंप डीलरों ने बैंक खाता फ्रीज होने के विरोध में यूपीआई भुगतान बंद करने की दी चेतावनी

चेन्नई। तमिलनाडु के पेट्रोल पंप संचालकों ने डिजिटल भुगतान, विशेषकर यूपीआई ट्रांजैक्शन, को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो राज्य भर के पेट्रोल पंप यूपीआई और अन्य कैशलेस भुगतान स्वीकार करना बंद कर सकते हैं। डीलरों का आरोप है कि साइबर अपराध जांच के दौरान उनके बैंक खातों को फ्रीज कर दिया जाता है, जबकि विवादित लेनदेन में उनकी कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं होती। तमिलनाडु पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन (टीएनपीडीए), जो राज्य के लगभग 5,000 पेट्रोल पंपों का प्रतिनिधित्व करती है, ने इस मामले में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से हस्तक्षेप की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि डिजिटल भुगतान से जुड़े बढ़ते जोखिमों के कारण पेट्रोल पंप संचालकों के लिए कैशलेस भुगतान सुविधा जारी रखना मुश्किल होता जा रहा है। मुख्यमंत्री को लिखे एक पत्र में टीएनपीडीए के अध्यक्ष के.पी. मुरली ने कहा कि पेट्रोल पंप संचालकों को साइबर अपराध जांच में घसीटा जा रहा है, जबकि वे केवल ग्राहकों से पेट्रोल या डीजल की बिक्री के बदले वैध भुगतान प्राप्त करते हैं। एसोसिएशन के अनुसार, पेट्रोल पंप संचालकों के पास यह जांचने की कोई व्यवस्था नहीं होती कि यूपीआई या अन्य डिजिटल माध्यम से भुगतान करने वाला ग्राहक कौन है अथवा उसके द्वारा भेजी गई राशि पहले किसी कथित साइबर धोखाधड़ी से जुड़े खाते से होकर गुजरी है या नहीं। राज्य में डिजिटल भुगतान का उपयोग तेजी से बढ़ा है। एक औसत पेट्रोल पंप पर प्रतिदिन 200 से 500 डिजिटल लेनदेन होते हैं, जबकि कई आउटलेट्स पर कुल आय का आधे से अधिक हिस्सा यूपीआई और अन्य कैशलेस माध्यमों से आता है। डीलरों का कहना है कि समस्या तब पैदा होती है जब किसी ग्राहक द्वारा किया गया भुगतान बाद में साइबर अपराध जांच के दायरे में आ जाता है। जांच एजेंसियों के निर्देश पर बैंक संबंधित राशि पर रोक लगा देते हैं या कई मामलों में पूरे बैंक खाते को फ्रीज कर देते हैं। पेट्रोल पंप संचालकों का तर्क है कि किसी एक संदिग्ध लेनदेन के कारण पूरे कारोबारी खाते को फ्रीज करना उचित नहीं है। इससे उनके दैनिक संचालन पर गंभीर असर पड़ता है, क्योंकि ईंधन खरीदने, कर्मचारियों का वेतन देने और अन्य आवश्यक खर्चों के लिए बैंकिंग सेवाओं का निर्बाध संचालन जरूरी होता है। एसोसिएशन ने पुलिस कार्रवाई को लेकर भी चिंता जताई है। उसका आरोप है कि कुछ मामलों में पेट्रोल पंप संचालकों को सुबह-सुबह पूछताछ के लिए ले जाया गया, जबकि शुरुआत में उन्हें यह भी नहीं बताया गया कि किस लेनदेन की जांच की जा रही है। टीएनपीडीए का कहना है कि अधिकृत डिजिटल भुगतान माध्यमों के जरिए भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारियों को केवल इस कारण संदिग्ध नहीं माना जाना चाहिए कि बाद में किसी लेनदेन पर साइबर अपराध की जांच शुरू हो गई। एसोसिएशन ने राज्य सरकार से ऐसी सुरक्षा व्यवस्था बनाने की मांग की है, जिससे वैध व्यवसायियों के बैंक खातों को बिना पर्याप्त आधार के फ्रीज न किया जाए और उन्हें अनावश्यक पुलिस कार्रवाई का सामना न करना पड़े। डीलरों ने चेतावनी दी है कि यदि कोई व्यावहारिक समाधान नहीं निकाला गया, तो तमिलनाडु के पेट्रोल पंप यूपीआई और अन्य डिजिटल भुगतान सुविधाएं बंद कर नकद लेनदेन की ओर लौटने के लिए मजबूर हो सकते हैं।
चेयरमैन चंद्रशेखरन के इस्तीफे के बाद टाटा ग्रुप के शेयरों में बड़ी बिकवाली; टीसीएस करीब 6 प्रतिशत तक टूटा

मुंबई। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के इस्तीफे की घोषणा के बाद बुधवार को टाटा ग्रुप की सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। निवेशकों ने नेतृत्व परिवर्तन की खबर पर सतर्क रुख अपनाया, जिसके चलते समूह की कई प्रमुख कंपनियों के शेयर करीब 6 प्रतिशत तक टूट गए। सबसे ज्यादा दबाव टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के शेयरों में देखने को मिला, जो कारोबार के दौरान करीब 5.9 प्रतिशत तक गिर गया। कारोबार के दौरान इसने 2,300.10 रुपए का दिन का निचला स्तर छुआ। हालांकि खबर लिखे जाने तक यह 4.7 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,328 रुपए के स्तर पर ट्रेड करते नजर आए। वहीं, इसके बाद टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स (टीएमपीवी) के शेयरों में करीब 4 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। सत्र के दौरान यह 334.20 रुपए के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया, जो 3.85 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है। इसके अलावा, टाटा स्टील के शेयर भी 2 प्रतिशत से ज्यादा फिसल गए और एक समय यह 2.4 प्रतिशत गिरकर 183.60 रुपए के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गए। इसके अलावा, टाइटन के शेयर भी दिन में 2.65 तक गिरकर 4,992 रुपए के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गए। वहीं, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स में करीब 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके साथ ही निवेशकों की बिकवाली का असर समूह की अन्य कंपनियों पर भी देखने को मिला। टाटा एलेक्सी, टाटा कम्युनिकेशंस, टाटा टेक्नोलॉजीज, टाटा पावर, ट्रेंट और टाटा मोटर्स (कमर्शियल व्हीकल्स) के शेयर भी कारोबार के दौरान 2 प्रतिशत तक लुढ़क गए, हालांकि बाद में इनमें कुछ रिकवरी देखने को मिली। वहीं टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन और तेजस नेटवर्क्स भी लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। हालांकि सभी कंपनियों में गिरावट नहीं रही। टाटा केमिकल्स इस माहौल में भी मजबूती दिखाने वाला प्रमुख शेयर रहा और इसमें करीब 2 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। चंद्रशेखरन ने बुधवार को घोषणा की कि वह टाटा संस के चेयरमैन पद के लिए दोबारा नियुक्ति नहीं मांगेंगे। हालांकि वह अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा करेंगे, जो फरवरी 2027 में समाप्त होगा। उनका यह फैसला टाटा संस की 18 अगस्त को होने वाली वार्षिक आम बैठक (एजीएम) से ठीक पहले सामने आया है। एन. चंद्रशेखरन का कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त होगा। उन्होंने तीसरे कार्यकाल के लिए खुद को उपलब्ध नहीं कराने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही भारत के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में से एक टाटा समूह में उनके लगभग नौ वर्षों के नेतृत्व का अध्याय समाप्त होने की दिशा में बढ़ गया है। टाटा संस देश के सबसे बड़े कारोबारी समूह की होल्डिंग कंपनी है, जिसके तहत टीसीएस, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाइटन जैसी दिग्गज कंपनियों के अलावा एयर इंडिया जैसी गैर-सूचीबद्ध कंपनियां भी आती हैं। समूह की 30 से अधिक कंपनियां विभिन्न क्षेत्रों में कारोबार करती हैं, जिनमें आईटी, ऑटोमोबाइल, धातु, विमानन, ऊर्जा और एफएमसीजी शामिल हैं। गौरतलब है कि चंद्रशेखरन 1987 में टाटा समूह से जुड़े थे। वह करीब 30 वर्षों तक टीसीएस में विभिन्न भूमिकाओं में रहे और 2009 में इसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) बने। उनके नेतृत्व में टीसीएस देश की सबसे मूल्यवान कंपनी बनी। इसके बाद जनवरी 2017 में उन्हें टाटा संस का चेयरमैन नियुक्त किया गया था। अब उनके इस्तीफे के बाद निवेशकों की नजर इस बात पर टिकी है कि टाटा समूह का अगला नेतृत्व किसके हाथों में जाएगा और भविष्य की रणनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी।