महात्मा गांधी के विचारों को आगे बढ़ा रहा मेक इन इंडिया और मेड इन इंडिया: मोहन यादव

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि महात्मा गांधी के स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के विचारों को आगे बढ़ाते हुए देश मेक इन इंडिया और मेड इन इंडिया के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार कर रहा है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती पर कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर परिसर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत का लोकतंत्र पूरी दुनिया में अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है। महात्मा गांधी के स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के विचारों को आगे बढ़ाते हुए देश मेक इन इंडिया और मेड इन इंडिया के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार कर रहा है। मुख्यमंत्री यादव ने पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न से सम्मानित स्व. लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर ओल्ड विधानसभा चौराहे पर स्थित उनकी प्रतिमा पर भी पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि यह सौभाग्य और गर्व का विषय है कि आज हम देश की आजादी के 2 महान नायकों की जयंती मना रहे हैं। महात्मा गांधी ने स्वदेशी, आत्मनिर्भरता और राष्ट्र निर्माण का संदेश दिया, वहीं स्व. लाल बहादुर शास्त्री ने सादगी, ईमानदारी और राष्ट्रसेवा के आदर्श स्थापित किए। इन महापुरुषों के विचार आज भी देश को आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि लंबे समय तक देश में रहे दल विशेष के शासन में अंग्रेजों की सोच और उनकी व्यवस्थाओं की विरासत को आगे बढ़ाया गया। आज प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में स्वदेशी को प्रोत्साहन देकर देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने स्वदेशी के भाव से देश की नई संसद का निर्माण कराया है। मुख्यमंत्री यादव ने भारतीय मूल के कैप्टन स्मित मच्छार की वीरता और मानवीय भावना की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए कहा कि यात्री विमान में इजरायली यात्रियों की जान बचाने के लिए कैप्टन स्मित ने अपनी जान की परवाह किए बिना अदम्य साहस का परिचय दिया। उनका यह कार्य मानवता, कर्तव्य निष्ठा और साहस का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कैप्टन स्मित ने यात्रियों की जान बचाने के साथ आतंकवादियों के नापाक मंसूबों को विफल करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके इस गौरवपूर्ण साहसी कार्य से सभी भारतीयों का सिर गर्व से ऊंचा हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी देशवासियों की ओर से कैप्टन स्मित मच्छार को बधाई दी है।

गृह मंत्री अमित शाह भोपाल में गौपालक सम्मेलन को करेंगे संबोधित, न्याय संहिता पर राज्य स्तरीय प्रदर्शनी का भी होगा उद्घाटन

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में देश के सहकारिता क्षेत्र को सशक्त, आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने के लिए अनेक महत्वपूर्ण पहल की जा रही हैं। सहकारी संस्थाओं को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की समृद्धि का प्रभावी माध्यम बनाने के साथ-साथ डेयरी सहकारिता के माध्यम से पशुपालकों, दुग्ध उत्पादकों और विशेष रूप से महिला सदस्यों की आय एवं आर्थिक भागीदारी बढ़ाने पर विशेष बल दिया जा रहा है। इसी दिशा में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 3 अक्टूबर 2026 को मध्य प्रदेश के भोपाल स्थित दशहरा मैदान में आयोजित गौपालक सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे तथा न्याय संहिता पर राज्य स्तरीय प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम के प्रारंभ में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह न्याय संहिता पर आयोजित राज्य स्तरीय प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद वे नवीन न्यायिक संहिता के क्रियान्वयन में मध्य प्रदेश पुलिस की उपलब्धियों से संबंधित प्रदर्शनी खंडों का भी अवलोकन करेंगे। कार्यक्रम के दौरान भोपाल में ‘मोरवन प्रोजेक्ट’ के तहत नगर वन विकसित करने के लिए कृषक भारती को-ऑपरेटिव लिमिटेड और मध्य प्रदेश राज्य जैवविविधता बोर्ड के बीच समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान भी किया जाएगा। इसके साथ साथ केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह डेयरी और सहकारिता क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न महत्वपूर्ण परियोजनाओं का भूमिपूजन एवं लोकार्पण करेंगे तथा विभिन्न हितलाभों का वितरण करेंगे। इस अवसर पर अमित शाह उज्जैन में 255 करोड़ रुपए की लागत से स्थापित किए जाने वाले 3 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता के दुग्ध प्रोसेसिंग प्लांट का डिजिटल माध्यम से भूमिपूजन करेंगे। इसके साथ ही भोपाल में 16.5 करोड़ रुपए की लागत से तैयार 40 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले प्रोडक्ट डेयरी प्लांट का लोकार्पण किया जाएगा। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री भोपाल में 12.42 करोड़ रुपए की लागत से तैयार अत्याधुनिक राज्य स्तरीय केंद्रीय प्रयोगशाला का भी लोकार्पण करेंगे। इसके अलावा शिवपुरी में 6.5 करोड़ रुपए की लागत से मिनी डेयरी प्लांट के सुदृढ़ीकरण कार्य का डिजिटल माध्यम से लोकार्पण किया जाएगा। ये परियोजनाएं मध्य प्रदेश में दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता और डेयरी क्षेत्र से जुड़े बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। कार्यक्रम के दौरान भोपाल एवं इंदौर दुग्ध संघ के सदस्यों को सिंगल क्लिक के माध्यम से बोनस का वितरण किया जाएगा। इसके साथ ही गौशालाओं को भी सिंगल क्लिक के माध्यम से सहायता राशि प्रदान की जाएगी। दुग्ध सहकारी समितियों के सदस्यों का सम्मान किया जाएगा और सदस्यों को कुल 15.10 करोड़ रुपए का लाभांश वितरित किया जाएगा। गौपालक सम्मेलन में महिला पशुपालकों की भूमिका को रेखांकित करते हुए ‘गौपालक दीदियों’ को सम्मानित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना के अंतर्गत दो स्वीकृति पत्रों का वितरण भी किया जाएगा।

राजस्थान में 3 से 16 अक्टूबर तक चलेगा ‘सही खान-पान, स्वस्थ राजस्थान’ अभियान

जयपुर। राजस्थान में लोगों को सुरक्षित, पौष्टिक और स्वस्थ खान-पान की आदतों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए 3 से 16 अक्टूबर तक ‘सही खान-पान, स्वस्थ राजस्थान’ अभियान आयोजित किया जाएगा। इसके तहत खाद्य सुरक्षा अधिकारियों, मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब, स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों और अन्य संस्थानों की मदद से विभिन्न जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। अभियान का आयोजन राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव गायत्री राठौड़ के निर्देश पर किया जा रहा है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण आयुक्त अविचल चतुर्वेदी ने बताया कि 3 और 5 अक्टूबर को स्कूलों में ‘ईट राइट डे’ के तहत गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इस दौरान विद्यार्थियों को हेल्दी टिफिन, श्री अन्न यानी मोटे अनाज, हाथ धोने और खाद्य पदार्थों के लेबल पढ़ने के महत्व के बारे में जानकारी दी जाएगी। 6 और 7 अक्टूबर को मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब के जरिए खाद्य पदार्थों में मिलावट की पहचान करने के आसान तरीके बताए जाएंगे। इसके अलावा खाद्य पदार्थों के नमूनों की मौके पर ही जांच भी की जाएगी। 8 और 9 अक्टूबर को ‘स्वस्थ राजस्थान-स्वस्थ थाली दिवस’ आयोजित किया जाएगा। इसके तहत लोगों को नमक, चीनी और तेल का सेवन कम करने के लिए जागरूक किया जाएगा। साथ ही स्थानीय और पौष्टिक खाद्य पदार्थों को अपने भोजन में शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। 11 और 12 अक्टूबर को पैकेटबंद खाद्य पदार्थ खरीदने से पहले उनके लेबल को पढ़ने और समझने के बारे में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। चतुर्वेदी ने बताया कि 13 और 14 अक्टूबर को कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और अस्पतालों में ‘ईट राइट कैंपस’ से जुड़ी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। अभियान का समापन 15 और 16 अक्टूबर को ‘फूड वेस्ट-सेव फूड डे’ की गतिविधियों के साथ होगा। इस दौरान लोगों को भोजन की बर्बादी रोकने के लिए जागरूक किया जाएगा। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण आयुक्त ने बताया कि अभियान के दौरान लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की शपथ भी दिलाई जाएगी। इसमें पैकेटबंद खाद्य पदार्थ खरीदने से पहले उनका लेबल पढ़ना, भोजन में नमक, तेल और चीनी की मात्रा कम करना, सप्ताह में कम से कम तीन दिन साबुत अनाज खाना, प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट योग या शारीरिक व्यायाम करना और भोजन बर्बाद नहीं करने जैसी आदतों को अपनाने के लिए लोगों को प्रेरित किया जाएगा।

पाकिस्तान : पंजाब में पांच साल में महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा के 1.95 लाख से अधिक मामले दर्ज

इस्लामाबाद। पाकिस्तान में महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। एक मानवाधिकार संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, अकेले पंजाब प्रांत में 2021 से 2025 के बीच महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा के 1,95,787 मामले दर्ज किए गए। पीस एंड जस्टिस नेटवर्क पाकिस्तान की ‘नेशनल जेंडर-बेस्ड वायलेंस क्राइम रिपोर्ट 2021-25’ के मुताबिक, पांच वर्षों के दौरान पूरे पाकिस्तान में दर्ज लैंगिक हिंसा के कुल मामलों में लगभग 82 प्रतिशत मामले पंजाब से थे। रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब में घरेलू हिंसा के 14,824 मामले दर्ज किए गए। इनमें 3,746 ऐसे मामले थे, जिनमें महिलाओं की जान चली गई। इसके अलावा, प्रांत में ऑनर किलिंग के 830 और महिलाओं को जलाने के 442 मामले दर्ज किए गए। इनमें एसिड अटैक के 143 और स्टोव से जलाने की 299 घटनाएं शामिल थीं। महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा के भी बड़ी संख्या में मामले दर्ज किए गए। पांच वर्षों के दौरान पंजाब में यौन हिंसा के कुल 20,560 मामले सामने आए। इनमें बलात्कार के 16,827 और सामूहिक बलात्कार के 2,183 मामले शामिल थे। इसके अलावा हिरासत में यौन हिंसा के 189 और परिवार के भीतर यौन शोषण के 1,361 मामले दर्ज किए गए। रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 से 2025 के बीच पंजाब में महिलाओं और लड़कियों के अपहरण के 90,965 मामले दर्ज किए गए। यह रिपोर्ट में दी गई अलग-अलग श्रेणियों में सबसे बड़ी संख्या है। इसके अलावा लैंगिक हिंसा के अन्य प्रकारों से जुड़े 68,165 मामले भी दर्ज किए गए, जिन्हें अलग-अलग श्रेणियों में नहीं बांटा गया। साल के हिसाब से देखें तो पंजाब में 2021 में महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा के 23,032 मामले दर्ज किए गए थे। वर्ष 2022 में यह संख्या बढ़कर 28,080 और 2023 में 35,238 हो गई। इसके बाद 2024 में मामलों की संख्या तेजी से बढ़कर 52,824 हो गई। वर्ष 2025 में यह आंकड़ा और बढ़कर 56,613 पर पहुंच गया। रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि पुलिस के आंकड़े केवल आधिकारिक रूप से दर्ज मामलों को दिखाते हैं। ऐसे में महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा के वास्तविक मामले इससे अधिक हो सकते हैं। पिछले महीने सामने आई एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया था कि पाकिस्तान में लैंगिक हिंसा से निपटने के लिए कई क्षेत्रों को साथ लेकर प्रभावी तरीके से काम करने की जरूरत है। इसकी वजह यह है कि यह समस्या समाज में गहराई से जुड़ी हुई है और इसके पीछे व्यक्तिगत सोच, पारिवारिक परिस्थितियां और सामाजिक मान्यताएं जैसे कई कारण हैं। ‘द फ्राइडे टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में बलात्कार विरोधी कानून, घरेलू हिंसा से जुड़े कानून और महिलाओं के खिलाफ अपराधों को रोकने के लिए कई कानूनी संशोधन किए जाने के बावजूद लैंगिक हिंसा के मामलों में रोकथाम और दोषसिद्धि की दर कम बनी हुई है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी, रूढ़िवादी सोच, सामाजिक वर्जनाएं और जटिल न्यायिक प्रक्रियाएं महिलाओं के खिलाफ हिंसा को प्रभावी तरीके से रोकने में बड़ी बाधाएं बनी हुई हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तानी अधिकारी लैंगिक हिंसा को रोकने के लिए कुछ प्रयास कर रहे हैं, लेकिन ये प्रयास या तो पर्याप्त नहीं हैं या उन्हें इस तरह लागू नहीं किया जा रहा है कि उनके स्पष्ट नतीजे दिखाई दें। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर लैंगिक हिंसा को जड़ से खत्म करना है तो महिलाओं के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देने वाली पूरी व्यवस्था और सामाजिक परिस्थितियों में बदलाव लाना होगा। इसके लिए व्यक्तिगत, पारिवारिक और सामाजिक स्तर पर एक साथ काम करने के साथ कई क्षेत्रों की भागीदारी जरूरी है।

स्थानीय राजनीति से रखेंगे दूरी, रेजीनगर के विकास के लिए सीधे केंद्र से बात करूंगा: हुमायूं कबीर

मुर्शिदाबाद। आम जनता उन्नयन पार्टी के अध्यक्ष और विधायक हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद में कई राजनीतिक और स्थानीय मुद्दों को लेकर बयान दिया है। उन्होंने रेजीनगर के विकास, प्रस्तावित हवाई अड्डे के परिसर से मस्जिद हटाने के मुद्दे और कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी की राजनीतिक भूमिका को लेकर अपनी बात रखी। रेजीनगर को लेकर आम जनता उन्नयन पार्टी के अध्यक्ष हुमायूं कबीर ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि यदि संबंधित आठ विधानसभा क्षेत्रों को मॉडल निर्वाचन क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा सकता है, तो यह स्थानीय लोगों के हित में होगा। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर वह स्थानीय स्तर पर नेताओं के बीच चल रही खींचतान में पड़ने के बजाय सीधे दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व से बातचीत करेंगे और आवश्यकता बड़ी को इस संबंध में केंद्रीय मंत्रियों और नितिन नवीन से भी मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर समीक बाबू और संबंधित पक्ष के बीच लगातार मतभेद और खींचतान चल रही है। ऐसे में उनके बीच पड़ने के बजाय वह सीधे केंद्र के नेताओं से अपनी बात रखने को प्राथमिकता देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि रेजीनगर और आसपास के क्षेत्रों के विकास के लिए ठोस पहल होती है, तो स्थानीय जनता को इसका लाभ मिलेगा। हवाई अड्डे के परिसर में स्थित मस्जिद को लेकर भी हुमायूं कबीर ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि केंद्र में भाजपा की सरकार है और पश्चिम बंगाल में भी भाजपा की सरकार होने के कारण उन्हें लगता है कि मस्जिद को हटाने की कोशिश की जा रही है। कबीर ने कहा कि सरकार की मंशा मस्जिद को हटाने की है और यह प्रक्रिया आज नहीं तो कल आगे बढ़ सकती है। इस मामले में अंतरिम आदेश के जरिए मस्जिद को हटाने की कार्रवाई को रोका जा सकता था। अधिकारियों का रुख ऐसा दिखाई दे रहा है कि वे मस्जिद को हटाने के फैसले पर दृढ़ हैं। कबीर ने कहा कि कानून सरकार बनाती है और अंततः प्रशासन को सरकार के फैसलों और निर्देशों का पालन करना होता है। वहीं, कांग्रेस और अधीर चौधरी से जुड़े सवाल पर हुमायूं कबीर ने कहा कि वह इस मामले पर ज्यादा टिप्पणी नहीं करना चाहते। अधीर चौधरी लंबे समय से ममता बनर्जी के राजनीतिक विरोधी रहे हैं। उन्होंने कहा कि 1998 में तृणमूल कांग्रेस के गठन के बाद से ही अधीर चौधरी लगातार ममता बनर्जी का विरोध करते रहे हैं। कबीर ने यह भी कहा कि ममता बनर्जी की पार्टी लंबे समय से पश्चिम बंगाल की सत्ता में है, जबकि 2026 के विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ कांग्रेस को राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति कमजोर हुई है और पार्टी अपनी दिशा को लेकर संघर्ष कर रही है। कबीर ने यह भी आरोप लगाया कि अधीर चौधरी अतीत में राहुल गांधी के खिलाफ बयान दे चुके हैं और सोनिया गांधी से भी संपर्क कर चुके हैं।

कांग्रेस ने यूपी में आराधना मिश्रा ‘मोना’ को बनाया प्रदेश अध्यक्ष, परगट सिंह को पंजाब की कमान

नई दिल्ली। कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश और पंजाब में संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए नए प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति की है। पार्टी ने आराधना मिश्रा ‘मोना’ को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (यूपीसीसी) का अध्यक्ष नियुक्त किया है। वहीं कांग्रेस सांसद इमरान मसूद को प्रदेश कांग्रेस का वर्किंग प्रेसिडेंट बनाया गया है। कांग्रेस की ओर से जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक, उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी में दो वरिष्ठ उपाध्यक्षों की भी नियुक्ति की गई है। इनमें देविंदर निषाद और आलोक प्रसाद शामिल हैं। सभी नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू होंगी। पार्टी ने उत्तर प्रदेश कांग्रेस के निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के योगदान की सराहना की है। इसके साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष ने उत्तर प्रदेश में कांग्रेस विधायक दल के नेता के पद पर चौधरी वीरेंद्र सिंह की नियुक्ति के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है। यह नियुक्ति भी तत्काल प्रभाव से प्रभावी होगी। कांग्रेस ने पंजाब में भी प्रदेश संगठन की कमान बदली है। पार्टी अध्यक्ष ने परगट सिंह को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीपीसीसी) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। कांग्रेस ने पंजाब कांग्रेस के निवर्तमान अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के योगदान की भी सराहना की है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि पंजाब में विभिन्न चुनाव संबंधी समितियों के वर्किंग प्रेसिडेंट, चेयरपर्सन और को-चेयरपर्सन पहले की तरह अपने पदों पर बने रहेंगे। कांग्रेस के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल की ओर से दोनों नियुक्तियों से संबंधित प्रेस रिलीज जारी की गई। इन नियुक्तियों के साथ कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश और पंजाब में अपने प्रदेश संगठन में नेतृत्व स्तर पर बदलाव किया है। उत्तर प्रदेश में आराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश अध्यक्ष और इमरान मसूद को वर्किंग प्रेसिडेंट की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि पंजाब में परगट सिंह प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष होंगे।

नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला हॉकी टीम को गोल्ड मेडल जीतने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि उनकी इस उपलब्धि और 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए सीधे क्वालिफिकेशन ने इस जीत को और भी खास बना दिया है। भारतीय महिला टीम ने जापान के गिफू प्रीफेक्चुरल ग्रीन स्टेडियम में खेले गए फाइनल में मौजूदा चैंपियन चीन को 1-0 से हराया। इसके साथ ही टीम ने 1982 के बाद पहली बार एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीता और महाद्वीपीय खिताब के लिए 44 साल का इंतजार खत्म किया। राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “एशियन गेम्स में शानदार गोल्ड मेडल जीत के लिए भारतीय महिला हॉकी टीम को बहुत-बहुत बधाई। लंबे इंतजार के बाद आपके दृढ़ संकल्प, कौशल और जोश भरे खेल की बदौलत गोल्ड मेडल भारत लौटा है, जिससे पूरे देश को बहुत गर्व और खुशी मिली है। ओलंपिक 2028 खेलों के लिए सीधे क्वालिफिकेशन हासिल करने से यह जीत और भी खास हो गई है।” राष्ट्रपति मुर्मु ने देशभर के युवा खिलाड़ियों पर टीम के असर का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा, “आप देशभर की अनगिनत युवा लड़कियों के लिए प्रेरणा हैं। आगे के सफर के लिए आप सभी को मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं।” केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी भारत की बेटियों को गोल्ड जीतने पर बधाई दी। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, “लड़कियों ने गोल्ड जीतकर रचा इतिहास। हमारी महिला हॉकी टीम ने एशियन गेम्स में गोल्ड जीतकर इतिहास में एक गौरवपूर्ण पल दर्ज किया है। मैदान पर अपने दबदबे और हुनर ​​का शानदार उदाहरण पेश करते हुए वे देश के लिए यह गौरवशाली पल लेकर आई हैं। हमारी चैंपियंस को बहुत-बहुत बधाई।” भारत की यह ऐतिहासिक जीत लालरेम्सियामी के 10वें मिनट में किए गए गोल से मिली। उन्होंने सलीमा टेटे और साक्षी के साथ मिलकर बनाए गए एक शानदार मूव को एक जबरदस्त रिवर्स हिट के साथ गोल में तब्दील किया। इसके बाद भारतीय डिफेंस ने अपनी मामूली बढ़त को बनाए रखने के लिए मजबूत खेल दिखाया। अनुभवी गोलकीपर सविता पूनिया ने पेनल्टी स्ट्रोक पर एक हाथ से अहम बचाव करते हुए चीन को बराबरी करने से रोक दिया। भारत ने सेमीफाइनल में जापान को 7-2 से हराने से पहले पूल ए में अपने चारों मैच जीतकर टॉप स्थान हासिल किया था। इस गोल्ड मेडल जीत के साथ ही टीम ने लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 खेलों के लिए सीधे क्वालिफिकेशन भी पक्का कर लिया। यह जीत एशियन गेम्स में भारत का महिलाओं की हॉकी में केवल दूसरा गोल्ड मेडल है। इससे पहले टीम ने 1982 में नई दिल्ली में यह खिताब जीता था।

छत्तीसगढ़ के सीएम ने स्मृति ईरानी से की मुलाकात, जनकल्याणकारी योजनाओं पर की चर्चा

नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शुक्रवार को नई दिल्ली में भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव, छत्तीसगढ़ की प्रदेश प्रभारी एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी से मुलाकात की। इससे पहले सीएम साय ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष से भी मुलाकात की थी। मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ में चल रहे विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तार से जानकारी साझा की। उन्होंने विशेष रूप से बस्तर में हो रहे विकास और बदलते स्वरूप पर चर्चा करते हुए बताया कि क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल, सिंचाई, पर्यटन, रोजगार और आजीविका से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में महिलाओं के सशक्तीकरण, युवाओं के कौशल विकास और रोजगार, किसानों की आय एवं कृषि आधारित गतिविधियों तथा आदिवासी समुदायों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका से जुड़ी योजनाओं की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार का प्रयास है कि विकास योजनाओं का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग और प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचे। मुख्यमंत्री ने राज्य में हो रहे विकास कार्यों और जनहितकारी योजनाओं की प्रगति से भी उन्हें अवगत कराया। इससे पहले सीएम साय ने नई दिल्ली में महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर उन्हें सादर नमन किया। सीएम ने सोशल मीडिया पर लिखा कि नई दिल्ली स्थित छत्तीसगढ़ सदन में सत्य और अहिंसा की प्रतिमूर्ति महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री स्व. लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन किया। महात्मा गांधी जी का सत्य और अहिंसा का मार्ग और शास्त्री जी का ‘जय जवान-जय किसान’ का मंत्र हम सभी को सदैव राष्ट्रसेवा और जनकल्याण के लिए प्रेरित करता रहेगा। आइए, उनके विचारों और आदर्शों से प्रेरणा लेकर छत्तीसगढ़ को आत्मनिर्भर, समृद्ध और सशक्त बनाने के संकल्प को मजबूत करें। सीएम साय ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से भी मुलाकात की। उन्होंने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी देते हुए लिखा कि भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से नई दिल्ली स्थित उनके आवास पर शिष्टाचार भेंट की। उनके कुशल एवं ऊर्जावान नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी संगठनात्मक रूप से निरंतर सशक्त हो रही है और राष्ट्रसेवा के संकल्प के साथ नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर है।

पढ़ रहा था हनुमान चालीसा, भगवान ने ही मुझे बचाया’, पीएम मोदी के सामने भावुक हुए स्मित मच्छार, सुनाई आपबीती

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को फ्लाईदुबई के विमान में सवार 174 यात्रियों की जान बचाने वाले भारतीय पायलट स्मित मच्छार से वीडियोकॉल पर बात की। उन्होंने स्मित मच्छार के साहस, धैर्य और सूझबूझ की प्रशंसा की। इस दौरान, स्मित मच्छार ने कहा कि वे मुश्किल दौर में हनुमान चालीसा पढ़ते हैं और उस समय भी वे हनुमान चालीसा ही पढ़ रहे थे। उन्हें पता है कि भगवान ने ही उन्हें बचाया है। फ्लाईदुबई के कैप्टन स्मित मच्छार बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने भावुक दिखे। उन्होंने कहा, “आप मेरे सबसे बड़े ‘आइडल’ हैं। आज आप जिस तरह से हौसला-अफजाई कर रहे हैं, मुझे बहुत गर्व महसूस हो रहा है।” पीएम मोदी के सामने आपबीती सुनाते हुए स्मित मच्छार ने कहा, “मैं अपनी जिंदगी के लिए लड़ रहा था। मैं गिर चुका था। मेरे इतने घाव लग चुके थे कि मैं गिर गया था। यह ऐसा समय था, जब मुझे लगा कि अगर अब मैंने कुछ नहीं किया तो।” स्मित ने कहा, “मैं पिछले 11 साल से जहाज उड़ा रहा हूं। मुझे आंख बंद करके भी पता चल जाता है कि जहाज में क्या हो रहा है। जब मैं नीचे गिरा हुआ था, तब मुझे एहसास हो रहा था कि जहाज नीचे जा रहा है। मुझे पता था कि यही समय है। मार खा रहा था और मैंने दरवाजा खोल दिया। मैं ताकत से हिसाब से कर रहा था और पता था कि मैं इन सभी को नहीं मरने दे सकता। इसके बाद अन्य लोग वहां आ गए। उन सभी लोगों की भी इसमें उतनी भी भूमिका थी।” बातचीत के दौरान स्मित ने बताया कि उस कठिन घड़ी में भी वे हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे थे। उन्होंने कहा, “उस समय मैं हनुमान चालीसा बोल रहा था और मुझे पता है कि मुझे भगवान ने ही बचाया है।” प्रधानमंत्री मोदी ने स्मित की प्रशंसा करते हुए कहा कि आपने इतना बड़ा काम किया है कि हर देशवासी और पूरी दुनिया के लोग भी आपको देखने, आपसे बात करने के लिए आतुर हैं। उन्होंने आगे कहा, “आपने जो हनुमान चालीसा की बात बताई है। इसके लिए मैं भूपेंद्रभाई (स्मित मच्छार के पिता) और गीताबेन (स्मित मच्छार की मां) को प्रणाम करूंगा कि आपको ऐसे संस्कार दिए।” स्मित मच्छार ने कहा, “मैं रोज सुबह पूजा करता हूं। उस समय मेरा दो साल का बेटा गोद में होता है और मैं हनुमान चालीसा सुनाता हूं। आज हम लोग देश से दूर हैं, लेकिन हमारी संस्कृति से दूर नहीं होना चाहिए।” इस बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने स्मित मच्छार को ‘वीर पुरुष’ बताते हुए कहा कि हम सभी आपकी दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। भारत आपका स्वागत करने के लिए उत्सुक है।

गया जी के देवघाट पर विदेशी तीर्थयात्रियों ने किया पिंडदान, पितरों की मोक्ष की कामना

गया। मोक्ष की भूमि के रूप में विख्यात गया में चल रहे पितृ पक्ष मेले का आकर्षण अब सात समुंदर पार तक पहुंच गया है। इस वर्ष पितृ पक्ष 2026 के पावन अवसर पर रूस, जर्मनी, इटली, स्पेन, पुर्तगाल नीदरलैंड समेत कई देशों से आए 48 विदेशी तीर्थयात्रियों ने देवघाट पर अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए पूरे विधि-विधान के साथ पिंडदान किया। विदेशी तीर्थयात्रियों के साथ आए पुरोहित ने जानकारी देते हुए बताया कि इस पावन तिथि पर विदेश से आए श्रद्धालु गया के वातावरण और यहां की व्यवस्थाओं से अत्यंत संतुष्ट हैं। उन्होंने कहा कि इटली, जर्मनी, स्पेन, पुर्तगाल और नीदरलैंड जैसे देशों से आए लोग यहां के पवित्र माहौल में आनंद की अनुभूति कर रहे हैं। सरकार और प्रशासन की ओर से सुरक्षा और सहयोग की जो व्यवस्था की गई है, उससे भी संतुष्ट हैं। पुरोहित ने कहा कि गया की यह धरती ही इतनी पवित्र और शक्तिशाली है कि यहां आकर हर किसी को आध्यात्मिक शांति मिलती है। उन्होंने बताया कि इस बार कुल 48 विदेशी श्रद्धालु पिंडदान के लिए आए हैं। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में पिंडदान कराना संभव नहीं होने के कारण उन्हें तीन समूहों में बांटा गया है। पहले दिन 22 लोगों ने, दूसरे दिन 8 लोगों ने और तीसरे दिन बाकी के लोग पिंडदान करेंगे। ये सभी श्रद्धालु अपने दिवंगत परिजनों – किसी ने अपने पति को खोया है, किसी ने अपने बच्चों को, तो किसी ने अपनी बहन या मां को – उनकी आत्मा की शांति के लिए इस मोक्ष भूमि पर आए हैं। पुरोहित ने बताया कि आने वाले समय में अफ्रीका से भी श्रद्धालुओं के जत्थे के गया आने की उम्मीद है। पिंडदान करने आई रूस की एक महिला श्रद्धालु क्सेनिया ने अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा, “मैं इस विशेष अनुभव के लिए गया आई हूं। मुझे पूरी उम्मीद है कि यह अनुष्ठान मेरे दिवंगत माता-पिता, दादी और दादाजी की आत्मा के लिए बहुत फलदायी होगा। गया में यह मेरा पहला अनुभव है और मैं पहली बार यहां आई हूं। मुझे विश्वास है कि सब कुछ बहुत अच्छा होगा।” एक अन्य विदेशी महिला श्रद्धालु एलेक्जेंड्रा, जो जर्मनी के बर्लिन में रहती हैं, ने कहा कि गया एक बेहद पवित्र भूमि है। उन्होंने कहा, “यहां आकर बहुत अच्छा लग रहा है। हम देखते हैं कि यहां लोग अपनी परंपराओं का कितना सम्मान करते हैं। हमें यहां बहुत ही स्वागत और सुरक्षित महसूस हो रहा है। हम यहां आने का अवसर मिलने के लिए बहुत आभारी हैं।” एलेक्जेंड्रा ने बताया कि वह हिंदू परंपराओं के बारे में अध्ययन कर चुकी हैं और यह उनका दूसरी बार गया आना है। तीन साल पहले भी वह पिंडदान के लिए आई थीं। इस बार वह अपने साथ और भी लोगों को लेकर आई हैं, जो हिंदू परंपरा और पूर्वजों को सम्मान देने वाले इस अनुष्ठान में गहरी रुचि रखते हैं। उन्होंने कहा, “लोग समझते हैं कि पितरों को सम्मान देने से न केवल उनके जीवन में बल्कि आने वाली पीढ़ियों के जीवन में भी सकारात्मक लाभ होता है, इसलिए वे इसे करना चाहते हैं। दुनिया में बहुत से लोग हर जगह घूमते हैं, लेकिन गया की इस पवित्र भूमि पर आने का सौभाग्य बहुत कम समूहों को ही मिलता है। इसलिए हम सभी यहां आकर खुद को बहुत विशेष और धन्य महसूस कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि भले ही यह उनके लिए एक अलग संस्कृति है और शुरुआत में वे थोड़ा असहज थीं, लेकिन यहां के लोगों का व्यवहार बहुत ही अच्छा रहा। उन्होंने कहा, “यहां के लोग बहुत स्वागत करने वाले हैं, हमें देखकर मुस्कुराते हैं और उत्सुकता से सवाल पूछते हैं, इसलिए अब हम यहां बहुत सहज महसूस कर रहे हैं।