2027 चुनाव से पहले यूपी भाजपा ने मजबूत किया मीडिया तंत्र, नई टीम का ऐलान

लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उत्तर प्रदेश में अपने मीडिया तंत्र को नए सिरे से व्यवस्थित करते हुए प्रदेश से लेकर क्षेत्रीय स्तर तक नई जिम्मेदारियां तय कर दी हैं। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की ओर से शनिवार को जारी सूची में 31 प्रदेश प्रवक्ताओं, 25 मीडिया पैनलिस्टों के साथ मीडिया वॉच और क्षेत्रीय मीडिया संयोजकों एवं सह-संयोजकों की जिम्मेदारियां तय की गई हैं। नई व्यवस्था के तहत हिमांशु दुबे और दीपक बघेल को प्रदेश मीडिया सह-संयोजक की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, प्रदेश प्रवक्ता के तौर पर पार्टी ने 31 नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है। प्रदेश प्रवक्ताओं की सूची में डॉ. समीर सिंह, कौशलेंद्र पटेल, मनीष शुक्ला, हरी बाजपेयी, जुगुल किशोर, पंकज त्रिपाठी, ललजी निर्मल, आनंद दुबे, अनवीश त्यागी, आलोक वर्मा, अनिला सिंह, साक्षी दिवाकर, संजय चौधरी, अशोक पाण्डेय, अंकुश त्रिपाठी और समेत अन्य नेताओं को शामिल किया गया है। पार्टी ने प्रदेश मीडिया पैनलिस्टों की भी नई टीम घोषित की है। इसमें अमित बाल्मीकि, चंद्र मोहन चौबे, अपर्णा दीक्षित, धनंजय शुक्ला समेत 25 मीडिया पैनलिस्ट बनाए गए हैं। भाजपा ने मीडिया वॉच की जिम्मेदारी दिवस चतुर्वेदी और मनोज त्रिवेदी को सौंपी है। दोनों पदाधिकारी मीडिया में पार्टी और उससे जुड़े विषयों के कवरेज पर नजर रखने तथा संबंधित गतिविधियों के समन्वय की जिम्मेदारी संभालेंगे। पार्टी ने प्रदेश स्तर के साथ-साथ क्षेत्रीय स्तर पर भी मीडिया टीम का गठन किया है। छह क्षेत्रों में तय हुई मीडिया टीम भाजपा ने पश्चिम, ब्रज, कानपुर, अवध, काशी और गोरखपुर क्षेत्र के लिए मीडिया संयोजक और सह-मीडिया संयोजकों की नियुक्ति की है। पश्चिम क्षेत्र में गजेन्द्र शर्मा को मीडिया संयोजक बनाया गया है। संजय माहेश्वरी, निमित जायसवाल और नितिन शर्मा सह-मीडिया संयोजक होंगे। ब्रज क्षेत्र में अंकित माहेश्वरी को मीडिया संयोजक बनाया गया है। अमित गुप्ता, शशि भूषण गुप्ता, श्याम सुन्दर पराशर और नीशित शर्मा सह-मीडिया संयोजक होंगे। कानपुर क्षेत्र में अनूप अवस्थी मीडिया संयोजक और संजय सिंह सह-मीडिया संयोजक होंगे। अवध क्षेत्र में आकाश मिश्रा को मीडिया संयोजक बनाया गया है। अमित वर्मा, सिद्धार्थ तिवारी, हिमालय वर्मा और दीपक तिवारी सह-मीडिया संयोजक होंगे। काशी क्षेत्र में मधुकर चित्रांश को मीडिया संयोजक बनाया गया है। संतोष सोलापुरकर और शैलेन्द्र मिश्रा सह-मीडिया संयोजक होंगे। गोरखपुर क्षेत्र में राहुल तिवारी को मीडिया संयोजक बनाया गया है। चंदन आर्य और समरेन्द्र विक्रम सिंह को सह-मीडिया संयोजक की जिम्मेदारी दी गई है।
बिगड़ती कानून-व्यवस्था के बीच बांग्लादेश में फैली अराजकता: रिपोर्ट

ढाका। बांग्लादेश में भीड़ के हमलों और तोड़फोड़ की घटनाओं में चिंताजनक बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसमें दिन हो या रात, कोई भी व्यक्ति निशाना बन सकता है, और हिंसा के बाद उसे सही ठहराने के लिए तरह-तरह की बातें या तर्क सामने आते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, चाहे सैकड़ों दरगाहों और खानकाहों (सूफी केंद्रों) को तोड़ना हो या हाल ही में किसी मशहूर कंटेंट क्रिएटर के स्टूडियो में तोड़फोड़, ऐसे कामों को सही ठहराने वालों की कोई कमी नहीं है। यह अराजकता और सामाजिक पतन के चिंताजनक फैलाव को दिखाता है। बांग्लादेश के अखबार ‘प्रोथोम आलो’ की एक रिपोर्ट में कहा गया है, “समृद्ध बांग्लादेश देखने और बनाने का सपना पुराना है। यह सिर्फ भाषणों या साहित्य तक सीमित नहीं है। हजारों लोगों ने अलग-अलग समय पर इस सपने के लिए अपनी जान दी है। कई लोगों ने अपने करियर को बनाने के बजाय इस सपने को पूरा करने पर ध्यान दिया। उनके लिए अपने करीबी लोगों की इच्छाओं से ज्यादा देश का भला जरूरी था। ऐसा कई दूसरे देशों में भी हुआ है। बांग्लादेश के मामले में वह सपना बार-बार अधूरा ही रह गया है।” बांग्लादेश के अखबार ‘न्यू एज’ का हवाला देते हुए कहा गया कि रिवर पुलिस ने पिछले 20 महीनों में नदियों से 900 से ज्यादा शव बरामद किए हैं, जिनमें से सबसे ज्यादा शव ढाका इलाके की जलधाराओं में मिले। इसके अलावा, बांग्लादेश के बंगाली भाषा के अखबार ‘भोरर कागोज’ ने बताया कि इस साल के पहले आठ महीनों में राजधानी के पुलिस स्टेशनों में जबरन वसूली के 723 मामले या शिकायतें दर्ज की गईं। जिन शिकायतों की जांच की गई, उनमें से 85 प्रतिशत सही पाई गईं। रिपोर्ट में बताया गया कि दोनों मामलों में जानकारी पुलिस से ली गई थी। इसमें सवाल उठाया गया, “बांग्लादेश के समाज में होने वाले असली अपराधों का एक छोटा सा हिस्सा ही पुलिस की जानकारी में आता है। अक्सर, और परेशानी से बचने के लिए पीड़ित अपनी शिकायत दर्ज नहीं कराते। ऐसे में, ये रिपोर्टें एक डरावने आइसबर्ग (बर्फ के पहाड़) के ऊपरी हिस्से जैसी लग सकती हैं। इससे यह सवाल भी उठता है: अगर राजधानी और उसके आसपास के इलाकों का यह हाल है, तो दूर-दराज के गांवों में क्या हो रहा होगा?” रिपोर्ट के मुताबिक, असलियत यह है कि 2024 के बाद कोई भी राजनीतिक व्यवस्था तब तक नहीं टिक सकती जब तक वह लोगों की न्याय की चाहत को पूरा न करे, संसाधनों का समान बंटवारा सुनिश्चित न करे और जनहित में कानूनों और प्रशासन में सुधार न करे। फिर भी, रिपोर्ट में कहा गया है कि ठीक इसी वजह से, मौजूदा राजनीति ऐसे सुधार करने को तैयार नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया, “जबरन गायब करने की घटनाओं को रोकने वाले कानून, मानवाधिकार आयोग कानून, आरएबी में फेरबदल, संसदीय स्थायी समितियों के गठन और कामकाज के तरीके, और साइबर कानून के ड्राफ्ट में अस्पष्ट और खतरनाक प्रावधानों से बहुत कुछ साफ हो गया है।” इस हफ्ते की शुरुआत में बांग्लादेश की अवामी लीग ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी बीएनपी सरकार के दौर में देश में कानून-व्यवस्था की स्थिति चरमरा गई है। उन्होंने हत्या, रेप, भीड़ द्वारा हत्या और लोगों को जबरन गायब करने की चिंताजनक घटनाओं का हवाला दिया। पार्टी ने बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद पर कानून-व्यवस्था के बजाय राजनीतिक बदले की भावना को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बिगड़ते हालात के बावजूद, वे एक मंच पर आए और अवामी लीग को खत्म करने की डींगें हांकते हुए ऐसा करने वालों के लिए इनाम की घोषणा भी की। पार्टी ने कहा, “कानून-व्यवस्था बनाए रखना गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी है। जब कोई मंत्री उस जिम्मेदारी को निभाने में नाकाम रहने के बाद राजनीतिक गिरफ्तारियों के लिए इनाम की घोषणा करने लगता है, तो यह साफ हो जाता है कि इस सरकार के लिए लोगों की सुरक्षा प्राथमिकता नहीं है, बल्कि राजनीतिक बदला लेना प्राथमिकता है।
कप्तान होप ने 20 बाउंड्री के साथ जड़े नाबाद 162 रन, वेस्टइंडीज की 5 विकेट से जीत, मगर वनडे सीरीज भारत के नाम न्यू

चंडीगढ़। वेस्टइंडीज ने कप्तान शाई होप की 162 रनों की नाबाद पारी के दम पर भारत के खिलाफ वनडे सीरीज के तीसरे और अंतिम मैच को 5 विकेट से अपने नाम किया। यह वनडे में वेस्टइंडीज का सबसे बड़ा सफल रन-चेज रहा। भले ही पीसीए इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में आयोजित यह मैच मेहमान टीम के नाम रहा, मगर सीरीज भारत ने 2-1 से जीती। शनिवार को टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने खराब शुरुआत के बावजूद 351/7 का स्कोर खड़ा किया। मेजबानों ने महज 4 रन तक अपने 2 विकेट गंवा दिए थे, जिसके बाद रोहित शर्मा ने ऋतुराज गायकवाड़ (57) के साथ तीसरे विकेट के लिए 132 गेंदों में 137 रन की साझेदारी करते हुए टीम को संभाला। रोहित 85 गेंदों में 3 छक्कों और 10 चौकों के साथ 92 रन बनाकर पवेलियन लौटे। इसके बाद केएल राहुल ने मोर्चा संभाला। उन्होंने नमन धीर के साथ पांचवें विकेट के लिए 43 गेंदों में 65 रन की साझेदारी करते हुए टीम को 225 के स्कोर तक पहुंचाया। नमन धीर 30 रन बनाकर आउट हुए, जिसके बाद डेब्यूटेंट अंशुल कंबोज (17) के साथ केएल राहुल ने 28 गेंदों में 40 रन, जबकि गुरनूर बरार (नाबाद 8) के साथ सिर्फ 26 गेंदों में 61 रन की अटूट साझेदारी करते हुए भारत को विशाल स्कोर तक पहुंचा दिया। केएल राहुल 87 गेंदों में 6 छक्कों और 10 चौकों के साथ 129 रन बनाकर नाबाद रहे। वेस्टइंडीज की तरफ से जायडेन सील्स ने सर्वाधिक 3 विकेट हासिल किए, जबकि कीमो पॉल ने 2 विकेट निकाले। इनके अलावा, एक विकेट गुडाकेश मोती के हाथ लगा। इसके जवाब में वेस्टइंडीज ने 48.2 ओवरों में मुकाबला अपने नाम कर लिया। जॉन कैंपबेल ने शाई होप के साथ पहले विकेट के लिए 41 रन जोड़े। कैंपबेल टीम के खाते में सिर्फ 10 रन का योगदान दे सके। इसके बाद कप्तान शाई होप ने मोर्चा संभाला। शाई होप ने आमिर जंगू के साथ दूसरे विकेट के लिए 109 रन जोड़कर टीम को 150 के स्कोर तक पहुंचाया। जंगू 56 गेंदों में 6 बाउंड्री के साथ 67 रन बनाकर आउट हुए, जिसके बाद होप ने शेरफन रदरफोर्ड के साथ तीसरे विकेट के लिए 56 रन जुटाए। रदरफोर्ड 24 रन बनाकर आउट हुए। यहां से शाई होप ने कीमो पॉल (44) के साथ चौथे विकेट के लिए 65 रन जोड़े। इस टीम को 290 के स्कोर पर पांचवां झटका लग गया था। यहां से मैच रोमांचक स्थिति में था, लेकिन होप ने गुडाकेश मोती के साथ 29 गेंदों में 62 रन की अटूट साझेदारी करते हुए टीम को ऐतिहासिक जीत दिलाई। होप 143 गेंदों में 162 रन बनाकर नाबाद रहे। उनकी इस पारी में 3 छक्के और 17 चौके शामिल थे, जबकि गुडाकेश मोती ने 14 गेंदों में नाबाद 19 रन बनाए। भारतीय खेमे से मोहम्मद सिराज, गुरनूर बरार, कुलदीप यादव और नमन धीर ने 1-1 विकेट हासिल किया। वनडे के बाद भारत और वेस्टइंडीज की टीमें 6-17 अक्टूबर के बीच पांच मुकाबलों की टी20 सीरीज खेलेंगी।
राजस्थान: विलुप्ति के कगार से वापसी की ओर ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, संरक्षण कार्यक्रम पहुंचा नए चरण में

नई दिल्ली। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने शनिवार को ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (जीआईबी) संरक्षण कार्यक्रम की सफलता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन की सराहना की। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में यह संरक्षण कार्यक्रम दुनिया के लिए एक उदाहरण बन गया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री ने इस कार्यक्रम में तेजी से हुई प्रगति के लिए केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय, वन विभाग के अधिकारियों, भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों और स्थानीय समुदायों के प्रयासों की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि जीआईबी संरक्षण कार्यक्रम अब इन पक्षियों को दोबारा प्राकृतिक वातावरण में छोड़ने यानी रीवाइल्डिंग के चरण तक पहुंच गया है। भूपेंद्र यादव जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क में कैप्टिव ब्रीडिंग के जरिए तैयार किए गए दो ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को सॉफ्ट-रिलीज फैसिलिटी से जंगल में छोड़ने की प्रक्रिया की शुरुआत के मौके पर बोल रहे थे। इन पक्षियों को रविवार को प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा जाना है। आधिकारिक बयान के मुताबिक, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यक्रम में शामिल हुए। भूपेंद्र यादव ने कहा कि जीआईबी संरक्षण कार्यक्रम की सफलता से पर्यावरण को होने वाले फायदों के साथ स्थानीय समुदायों को इको-टूरिज्म के जरिए आर्थिक लाभ भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि ग्रेट इंडियन बस्टर्ड थार के पारिस्थितिकी तंत्र की एक महत्वपूर्ण प्रजाति है। उन्होंने घास के मैदानों के संरक्षण, भूमि क्षरण रोकने और मध्य एशियाई फ्लाईवे से आने वाले प्रवासी पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में इसके महत्व का जिक्र किया। अपने दौरे पर केंद्रीय मंत्री ने इन्क्यूबेशन और ब्रीडिंग फैसिलिटी की समीक्षा की और जीआईबी संरक्षण कार्यक्रम से जुड़े अधिकारियों एवं वैज्ञानिकों से बातचीत की। रामदेवरा में रीवाइल्डिंग एवियरी का निर्माण राजस्थान वन विभाग ने राजस्थान स्टेट रोड डेवलपमेंट एंड कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन लिमिटेड के माध्यम से कराया है। इसके लिए राजस्थान सरकार ने 9.25 करोड़ रुपए का बजट मंजूर किया था। इसे केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और भारतीय वन्यजीव संस्थान के विशेषज्ञों एवं वैज्ञानिकों की सलाह से तैयार किया गया है। यह बड़ी एवियरी बिना खंभों के बनाई गई है, जिससे कैप्टिव ब्रीडिंग के जरिए तैयार किए गए ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को उड़ने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है। इससे पक्षियों को अपनी उड़ान क्षमता विकसित करने, प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुकूल होने और जंगल में छोड़े जाने से पहले प्राकृतिक व्यवहार अपनाने में मदद मिलती है। कार्यक्रम के दौरान रामदेवरा और सम में स्थित जीआईबी कंजर्वेशन ब्रीडिंग सेंटर की प्रगति की भी समीक्षा की गई। इसके साथ ही जीआईबी संरक्षण की दस साल की यात्रा पर तैयार एक ब्रोशर भी जारी किया गया। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य पक्षी की रीवाइल्डिंग को पूरे प्रदेश के लिए गर्व का दिन बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से थार की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा रहे ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को विलुप्त होने की कगार से वापस लाने में मदद मिली है। मुख्यमंत्री ने जीआईबी संरक्षण कार्यक्रम के लिए राजस्थान सरकार की ओर से दी गई आर्थिक सहायता की भी जानकारी दी। इसके अलावा उन्होंने प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किए गए अन्य प्रयासों का भी जिक्र किया। कार्यक्रम में राजस्थान के वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा के साथ केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
सेबी ने फर्जी नोटिस की पहचान आसान बनाई, निवेशकों के लिए नया वेरिफिकेशन सिस्टम लागू

मुंबई। शेयर बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने निवेशकों की सुरक्षा और फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए दो अहम कदम उठाए हैं। एक तरफ सेबी ने फर्जी लेटर और नोटिस की पहचान आसान बनाने के लिए अपने डॉक्यूमेंट नंबर वेरिफिकेशन सिस्टम (डीएनवीएस) को अपग्रेड किया है। वहीं प्रोजेक्ट जागरूक के तहत स्टॉक ब्रोकर्स की वेबसाइट और ट्रेडिंग ऐप पर निवेशक जागरूकता मैसेज दिखाने की व्यवस्था की गई है। सेबी के नाम पर जारी होने वाले फर्जी पत्र और नोटिस के मामलों को देखते हुए डॉक्यूमेंट नंबर वेरिफिकेशन सिस्टम में बदलाव किया गया है। नया सिस्टम सितंबर 2026 से लागू हो गया है। नई व्यवस्था में किसी दस्तावेज को सत्यापित करने के लिए ‘सब्जेक्ट मैटर’ यानी पत्र का विषय भी देना अनिवार्य कर दिया गया है। पहले मुख्य रूप से आउटवर्ड नंबर के आधार पर वेरिफिकेशन किया जाता था। इसका गलत इस्तेमाल कर ठग किसी असली आउटवर्ड नंबर को फर्जी नोटिस पर इस्तेमाल कर सकते थे। नई व्यवस्था में अतिरिक्त जानकारी के मिलान से इस तरह की धोखाधड़ी को रोकने में मदद मिलेगी। अगर किसी व्यक्ति को सेबी के नाम से कोई फिजिकल लेटर, नोटिस या शो-कॉज नोटिस मिलता है तो सेबी की वेबसाइट के जरिए उसकी जांच की जा सकती है। इसके लिए पांच जानकारियां देनी होंगी, जिसमें आउटवर्ड नंबर, पत्र जारी करने वाले अधिकारी का नाम, पत्र जारी होने की तारीख, पत्र का विषय यानी सब्जेक्ट मैटर और प्राप्तकर्ता का नाम शामिल है। अगर सभी जानकारियां रिकॉर्ड से मेल खाती हैं तो सिस्टम यह पुष्टि करेगा कि संबंधित दस्तावेज सेबी की ओर से जारी किया गया है। अगर वेरिफिकेशन के दौरान ‘नो रिकॉर्ड फाउंड’ दिखाई देता है तो संबंधित व्यक्ति ईमेल भेजकर दस्तावेज के बारे में पुष्टि कर सकता है। सेबी ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह सिस्टम केवल इस बात की पुष्टि करता है कि संबंधित पत्र या दस्तावेज सेबी की ओर से जारी किया गया है या नहीं। यह पत्र में लिखे गए कंटेंट की अलग से पुष्टि नहीं करता। सितंबर 2026 से पहले जारी किए गए पत्रों का सत्यापन ईमेल के माध्यम से किया जाएगा। इसके साथ ही सेबी ने निवेशकों में जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रोजेक्ट जागरूक के तहत स्टॉक ब्रोकर्स के लिए नई व्यवस्था की है। इसके तहत ब्रोकर्स को अपनी वेबसाइट और ट्रेडिंग ऐप पर निवेशक जागरूकता से जुड़े संदेश दिखाने होंगे। इस संबंध में 1 अक्टूबर 2026 को सर्कुलर जारी किया गया था। नियम को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की व्यवस्था की गई है। पहले चरण में 5 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक सभी स्टॉक ब्रोकर्स को अपनी वेबसाइट पर सेबी की ओर से दिया गया इन्वेस्टर अवेयरनेस मैसेज और रिस्क डिस्क्लोजर दिखाना होगा। इस अवधि में ट्रेडिंग ऐप पर इन संदेशों को दिखाना स्वैच्छिक रहेगा। दूसरा चरण 1 नवंबर 2026 से शुरू होगा। इसके बाद ब्रोकर्स की वेबसाइट के लैंडिंग पेज पर निवेशक जागरूकता संदेश दिखाना अनिवार्य हो जाएगा। ट्रेडिंग ऐप पर भी जागरूकता संदेश और रिस्क डिस्क्लोजर को बारी-बारी से दिखाना होगा। एक दिन इन्वेस्टर अवेयरनेस मैसेज और अगले दिन रिस्क डिस्क्लोजर दिखाया जाएगा। सेबी के मुताबिक, इन जागरूकता संदेशों को समय-समय पर बदला जा सकता है। ऐसी स्थिति में स्टॉक ब्रोकर्स को नए और अपडेटेड संदेशों को अपनी वेबसाइट तथा ऐप पर दिखाना होगा। यह पहल वर्ल्ड इन्वेस्टर वीक 2026 से पहले की गई है। इससे पहले मई 2023 में सेबी ने निवेशकों को जोखिम के बारे में बताने के लिए रिस्क डिस्क्लोजर से जुड़ी व्यवस्था लागू की थी। इन दोनों कदमों का उद्देश्य निवेशकों को फर्जी दस्तावेजों से बचाने के साथ उन्हें शेयर बाजार से जुड़े जोखिमों और जरूरी सावधानियों के बारे में जागरूक करना है।
ईरान ने तोड़फोड़ करने वाले चार संगठित नेटवर्क के 31 सदस्यों को हिरासत में लिया

तेहरान। ईरान के इंटेलिजेंस मंत्रालय ने शनिवार को घोषणा की कि उसके सुरक्षा बलों ने दक्षिण-पूर्वी केरमान प्रांत में ‘तोड़फोड़’ करने वाले चार संगठित नेटवर्क के 31 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इन नेटवर्क का संबंध कथित तौर पर अमेरिका और इजराइल से बताया जा रहा है। मंत्रालय ने अपनी वेबसाइट पर जारी एक बयान में कहा कि नेटवर्क के सदस्यों को सिरजान काउंटी में हिरासत में लिया गया। साथ ही कहा गया कि हिरासत में लिए गए लोग लोगों की सुरक्षा को खतरे में डालने और सार्वजनिक व निजी संपत्ति को नष्ट करने के लिए अमेरिका और इजराइल के ‘दुश्मनों की साजिशों’ को अंजाम देने की कोशिश कर रहे थे। सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रालय का कहना है कि ये नेटवर्क सड़कों पर दंगे और तबाही मचाने की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने बड़ी संख्या में मोलोटोव कॉकटेल और सार्वजनिक संपत्ति (जैसे शहरी निगरानी कैमरे) को नुकसान पहुंचाने वाले उपकरण भी तैयार किए थे। इसमें आगे कहा गया कि नेटवर्क के सदस्यों ने ईरान में जनवरी के अशांति के दौरान ‘बड़े पैमाने पर क्रूर और विनाशकारी’ हरकतें की थीं। इनमें गवर्नर कार्यालय की इमारत में आग लगाना, बैंकों, सरकारी इमारतों और सार्वजनिक व निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाना, पुलिस स्टेशनों पर हमला करना और शहरी निगरानी कैमरों को नष्ट करना शामिल था। गुरुवार को ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने ब्रिटिश सरकार के उस दावे को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि ईरान ने दक्षिण-पश्चिम इंग्लैंड में अमेरिकी वायु सेना के बेस, रॉयल एयर फोर्स (आरएएफ) फेयरफोर्ड के पास हाल ही में हुई एक घटना में ‘भूमिका निभाई’ है। सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार को ब्रिटिश पुलिस ने एयरबेस के पास ग्लूसेस्टरशायर के ग्रामीण इलाके में पांच लोगों को ‘विस्फोटक और आतंकवाद से जुड़े अपराधों’ के संदेह में हिरासत में लिया। उन्हें यह जानकारी मिली थी कि तीन वैन बेस की ओर जाती देखी गई थीं। अरागची ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में इस दावे का खंडन किया। इससे एक दिन पहले ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने एक साक्षात्कार में कहा था, “इस बात के मजबूत संकेत हैं कि आरएएफ फेयरफोर्ड में सप्ताहांत में जो हुआ, उसमें ईरान की भूमिका थी, लेकिन निश्चित रूप से यह अभी भी एक जारी, जटिल और गंभीर पुलिस जांच का विषय है।” वैन में सोमवार को मिली चीजों की जांच और लंदन भर में उनसे जुड़े पतों की छानबीन के बाद उन पांचों लोगों को पुलिस जमानत पर रिहा कर दिया गया। अरागची ने कहा, “पीएम बर्नहैम का कहना है कि यूके सरकार इस बात की पुष्टि कर सकती है कि हमारा मानना है कि आरएएफ फेयरफोर्ड की घटना में ईरान की भूमिका थी।” उन्होंने आगे कहा, “मैं ईरान के इस विचार की पुष्टि कर सकता हूं कि विदेशी देशों के लिए काम करने वाले तथाकथित आतंकवादियों को रिहा करने से ही सब कुछ साफ हो जाता है। आप गलत दिशा में सोच रहे हैं।
दिल्ली: एनडीएमसी के सुविधा कैंप में जनता की 91 शिकायतें मिलीं

नई दिल्ली। नई दिल्ली म्युनिसिपल काउंसिल (एनडीएमसी) के 100 से ज्यादा अधिकारियों ने शनिवार को एमडीसीसी कन्वेंशन सेंटर, जय सिंह रोड, नई दिल्ली में सिविक एजेंसी के मासिक ‘सुविधा कैंप’ में 91 से ज्यादा जन-शिकायतें प्राप्त कीं। इसकी जानकारी एक अधिकारी ने दी। एक अधिकारी ने बयान में कहा कि एनडीएमसी के सेक्रेटरी राहुल सिंह ने ‘सुविधा कैंप’ में 30 विभागों के 100 अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम का नेतृत्व किया और लोगों की शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया की व्यक्तिगत रूप से निगरानी की। ‘सुविधा कैंप’ में लोगों की 91 शिकायतें मिलीं, जिन पर संबंधित विभागों ने तुरंत कार्रवाई की। ज्यादातर शिकायतें कार्मिक, सिविल इंजीनियरिंग, बागवानी, जन स्वास्थ्य, प्रवर्तन, वाणिज्यिक, कर और संपदा विभागों से संबंधित थीं। बयान में कहा गया है कि शिकायत दर्ज कराने के अलावा, बड़ी संख्या में नागरिक एनडीएमसी की विभिन्न नागरिक सेवाओं और नागरिक कल्याण पहलों के बारे में जानकारी और मार्गदर्शन लेने के लिए भी कैंप में आए। सेक्रेटरी ने नागरिकों से बातचीत की, मिली शिकायतों की प्रकृति की समीक्षा की और विभागों के प्रमुखों को समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और व्यवस्थित समाधान के लिए निर्देश जारी किए। सेक्रेटरी ने इस बात पर जोर दिया कि सेवा वितरण में नागरिकों की संतुष्टि मुख्य होनी चाहिए और तेजी से तथा अधिक पारदर्शी समाधान के लिए ‘जन सुविधा पोर्टल’ का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। कैंप की एक मुख्य बात नागरिकों और विभागीय अधिकारियों के बीच सीधी बातचीत थी, जिससे लोगों की चिंताओं को तुरंत समझा जा सका और समाधान की प्रक्रिया में तेजी आई। बयान में कहा गया है कि नीति-स्तर पर जांच की जरूरत वाले मामलों पर भी चर्चा की गई और नागरिकों को समाधान के लिए तय प्रक्रिया और अपेक्षित समय-सीमा के बारे में जानकारी दी गई। एनडीएमसी के चेयरमैन मनोज कुमार द्विवेदी ने कहा कि नागरिकों और कर्मचारियों को प्रशासन के केंद्र में रखते हुए नागरिक एजेंसी ने एनडीसीसी कन्वेंशन सेंटर में अपना मासिक ‘सुविधा कैंप’ आयोजित किया। उन्होंने कहा कि ‘सुविधा कैंप’ जानकारी, सहायता और शिकायतों के समाधान के लिए हमारा सिंगल-विंडो प्लेटफॉर्म है, जो निवासियों और वरिष्ठ अधिकारियों के बीच सीधी बातचीत को संभव बनाता है। उन्होंने बताया कि एनडीएमसी के सेक्रेटरी इसे और अधिक प्रभावी और परिणाम-उन्मुख बनाने के उपायों पर चर्चा करने के लिए विभागों के प्रमुखों के साथ भी बैठक करेंगे। उन्होंने कहा कि कैंप के लिए हमारे मार्गदर्शक सिद्धांत मामलों का तेजी से समाधान, बार-बार आने वाली शिकायतों के मूल कारणों का विश्लेषण और सेवा वितरण में व्यवस्थित सुधार लाना होंगे।
मतदाता सूची में गड़बड़ी पर स्पष्ट हो चुकी है स्थिति, ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देंगे: रामदास अठावले

नवी मुंबई। केंद्रीय राज्यमंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए) के अध्यक्ष रामदास अठावले ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके के आंदोलन और सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि हर बार किसी अधिकारी के इस्तीफे की मांग करना उचित नहीं है। इस दौरान अठावले ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के पक्ष में नहीं है। अभिजीत दीपके के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए रामदास अठावले ने कहा कि आंदोलनकारी इशारे तो देते हैं, लेकिन केवल इशारों से कोई समाधान नहीं निकलेगा। एक बार धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के रूप में आंदोलनकारियों को सफलता मिली है, लेकिन हर बार इसी तरह की सफलता मिले, यह जरूरी नहीं है। अठावले ने अपने आंदोलन के दिनों का जिक्र करते हुए कहा कि जब वे भी आंदोलन करते थे तो पुलिस ने कई बार उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा था। अगर लगातार इस तरह के इशारे दिए जाते रहेंगे और पुलिस अपना काम करती रहेगी तो आंदोलनकारियों को समझ आएगा कि आंदोलन क्या होता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की जा रही बयानबाजी पर भी आपत्ति जताई। अठावले ने कहा कि प्रधानमंत्री देश के प्रधानमंत्री हैं और उनसे अपनी मांगें रखना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन इस तरह की बयानबाजी करना कि ऐसा होगा या वैसा होगा, उचित नहीं है। दिपके को इस तरह की बयानबाजी से बचना चाहिए। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अठावले ने कहा कि वह इस्तीफा नहीं देंगे और आंदोलनकारियों को जितना आंदोलन करना है, वे कर सकते हैं। रामदास अठावले ने कहा कि उनकी पार्टी का स्पष्ट मत है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा नहीं देना चाहिए। मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर आरोप लगाए गए हैं, लेकिन ज्ञानेश कुमार ने इस संबंध में स्थिति स्पष्ट की है। अगर किसी मतदाता का नाम गलती से या मतदाता सूची तैयार करने की स्थानीय प्रक्रिया के दौरान हट गया है, तो संबंधित व्यक्ति को अपना नाम दोबारा जुड़वाने का अधिकार है। इसके लिए प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा चुकी है। ऐसे में फिलहाल ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करने की जरूरत नहीं है। रामदास अठावले ने महाराष्ट्र सरकार में आरपीआई को अपेक्षित राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं मिलने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी को न तो एमएलसी की सीट मिल रही है और न ही विधानसभा में जगह मिली है। उन्होंने मांग की कि आने वाले कॉरपोरेशन में कम से कम दो चेयरमैन पद आरपीआई को दिए जाएं। इसके अलावा राज्यपाल कोटे से होने वाली पांच एमएलसी नियुक्तियों में से कम से कम एक सीट आरपीआई को देने की मांग उन्होंने रखी। अठावले ने आगे कहा कि आने वाली विभिन्न कमेटियों में भी आरपीआई कार्यकर्ताओं को प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिला, तालुका और राज्य स्तर की कमेटियों में पार्टी के कार्यकर्ताओं को उचित भागीदारी मिलनी चाहिए।
ड्रोन भारतीय वायुसेना के लिए क्रांतिकारी नहीं, बल्कि विकासवादी बदलाव: एयर चीफ मार्शल एपी सिंह

नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने शनिवार को कहा कि ड्रोन भारतीय वायुसेना के लिए कोई क्रांतिकारी बदलाव नहीं हैं, बल्कि यह क्षमताओं के विकास की प्रक्रिया का हिस्सा हैं। उन्होंने लोइटरिंग एम्युनिशन के लिए अलग ड्रोन फोर्स बनाने की जरूरत से भी इनकार किया। एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि लोइटरिंग एम्युनिशन का इस्तेमाल दुश्मन के बीच भ्रम पैदा करने और कुछ लक्ष्यों को निशाना बनाने में मदद करता है। हालांकि, भारतीय वायुसेना में ड्रोन से जुड़ी क्षमताएं दशकों से मौजूद हैं। उन्होंने कहा, “जहां तक अलग ड्रोन फोर्स की बात है, भारतीय वायुसेना में ये चीजें दशकों से मौजूद हैं। ये क्षमताएं हमारे पास दशकों से हैं। इसलिए मैं कह सकता हूं कि ड्रोन भारतीय वायुसेना के लिए क्रांतिकारी नहीं हैं। हां, ये विकासवादी बदलाव जरूर हैं।” एयर फोर्स डे से पहले मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि वायुसेना में ड्रोन की संख्या, म्यूनिशन और ड्रोन तथा हथियारों के प्रकार लगातार बढ़ रहे हैं। हालांकि, अलग ड्रोन फोर्स बनाने की जरूरत पर उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि हमें अलग ड्रोन फोर्स की जरूरत है।” उन्होंने कहा कि ड्रोन को मौजूदा सैन्य ढांचे का हिस्सा बनाकर अन्य हथियार प्रणालियों के साथ मिलकर संचालित किया जाना चाहिए। एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि अलग-अलग हथियारों को अलग-अलग संचालित करने के बजाय उन्हें एक साथ इस्तेमाल करना जरूरी है, ताकि उनका प्रभाव अधिक प्रभावी हो। उन्होंने कहा, “हमने अलग फोर्स बनाने के बारे में नहीं सोचा है, बिल्कुल नहीं।” हालांकि, एयर चीफ मार्शल ने संकेत दिया कि वायुसेना में कुछ विशेष ड्रोन यूनिट मौजूद रहेंगी। उन्होंने कहा कि ऐसी यूनिट पहले से हैं और जरूरत पड़ने पर इनकी संख्या बढ़ाई जा सकती है। बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास ‘तरंग शक्ति’ के बारे में एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि इस तरह के बहुराष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अभ्यासों का उद्देश्य आपसी सहयोग, इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाना और एक-दूसरे के अनुभवों तथा काम करने के तरीकों से सीखना है। उन्होंने कहा कि हर अभ्यास से कुछ नए अनुभव और परिणाम सामने आते हैं। इस बार नए विमान भी अभ्यास में शामिल हुए हैं। एफ-35 लड़ाकू विमान पहली बार भारत में किसी बहुराष्ट्रीय अभ्यास में हिस्सा ले रहे हैं। इसके अलावा कुछ नए देशों ने भी अपने सैन्य विमान और अन्य संसाधनों के साथ अभ्यास में भाग लिया है, जबकि कुछ देश पहली बार पर्यवेक्षक के तौर पर शामिल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे अभ्यासों में एक साझा संचार व्यवस्था विकसित करना भी महत्वपूर्ण है, ताकि विभिन्न देशों की सेनाएं एक-दूसरे के साथ प्रभावी तरीके से संवाद कर सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल अंग्रेजी भाषा में संवाद की बात नहीं है, बल्कि एक-दूसरे की कार्यप्रणाली और संदेश को समझने की क्षमता विकसित करने से जुड़ा है। एयर चीफ मार्शल ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि तरंग शक्ति के दूसरे चरण से भारतीय वायुसेना को कई महत्वपूर्ण सबक मिलेंगे, जिनके आधार पर वह अपनी क्षमताओं में सुधार कर सकेगी। साथ ही, इसमें शामिल अन्य देश भी अभ्यास से सीख लेकर वापस जाएंगे। ‘तरंग शक्ति’ का आयोजन 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक जोधपुर एयरबेस पर किया जा रहा है। इसमें 40 देशों के 2,000 से अधिक सैन्यकर्मी और 80 से अधिक विमान हिस्सा ले रहे हैं।
कर्नाटक: गृह लक्ष्मी योजना के ऑडिट पर टिप्पणी को लेकर केएएस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग

बेंगलुरु। कर्नाटक के अकाउंटेंट जनरल (ऑडिट-I) जहांगीर इनामदार ने मुख्य सचिव शालिनी रजनीश को पत्र लिखकर कर्नाटक प्रशासनिक सेवा (केएएस) के अधिकारी एन. महेश बाबू के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है। महेश बाबू पर गृह लक्ष्मी योजना के ऑडिट से जुड़े मामले में अकाउंटेंट जनरल (एजी) और प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल के खिलाफ आपत्तिजनक और धमकी भरी टिप्पणी करने का आरोप है। आईएएनएस के पास उपलब्ध पत्र के मुताबिक, इनामदार ने कर्नाटक स्टेट वुमेंस डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर महेश बाबू के नाम से सामने आई टिप्पणियों की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित आचरण नियमों और सीसीए नियमों के तहत अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जानी चाहिए। जहांगीर इनामदार ने अधिकारी से कर्नाटक के अकाउंटेंट जनरल और प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल से बिना शर्त सार्वजनिक माफी मांगने के निर्देश देने की भी मांग की है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की ओर से गृह लक्ष्मी योजना के तहत करीब 225 करोड़ रुपए के दुरुपयोग का मुद्दा उठाए जाने की बात सामने आई थी। इसमें मृत और फर्जी लाभार्थियों से जुड़े खातों में पैसे ट्रांसफर किए जाने का मामला भी शामिल है। पत्र के मुताबिक, मीडिया रिपोर्टों में महेश बाबू के नाम से ऐसी टिप्पणियां सामने आने का दावा किया गया है जिनमें उन्होंने अकाउंटेंट जनरल के खिलाफ अपमानजनक और धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल किया तथा उन पर शारीरिक हमला करने की बात कही। उन्होंने सीएजी की संवैधानिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि यह मामला केवल दो अधिकारियों के बीच व्यक्तिगत विवाद का नहीं है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 148 के तहत सीएजी एक संवैधानिक प्राधिकरण है। वहीं, राज्यों की आय और खर्च का ऑडिट अनुच्छेद 149 और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कर्तव्य, शक्तियां और सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1971 के तहत किया जाता है। सीएजी की रिपोर्ट संविधान के अनुच्छेद 151(2) के तहत राज्य विधानमंडल के समक्ष रखी जाती है। पत्र में कहा गया कि अकाउंटेंट जनरल और प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल पर उनके आधिकारिक कामकाज को लेकर हमला करना एक संवैधानिक संस्था और सार्वजनिक धन के खर्च की जानकारी पाने के विधानमंडल के अधिकार पर हमला करने जैसा है। इनामदार ने कहा कि ऐसी टिप्पणियां किसी भी नागरिक की ओर से स्वीकार्य नहीं हो सकतीं। मामला इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि ये आरोप एक सेवारत केएएस अधिकारी पर लगे हैं, जो उस निगम का नेतृत्व कर रहे हैं जिसकी योजना का ऑडिट किया जा रहा है। इनामदार के मुताबिक, ऐसी टिप्पणियों का वित्तीय पारदर्शिता और चुनावी अवधि के दौरान प्रशासन की निष्पक्षता पर भी असर पड़ सकता है। उन्होंने इस पहलू की भी कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों से अलग स्वतंत्र रूप से जांच करने की मांग की। इनामदार ने कहा कि गृह लक्ष्मी योजना के ऑडिट का एकमात्र उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी धन उन महिलाओं तक पहुंचे, जिनके लिए यह योजना बनाई गई है। उन्होंने कहा कि ऑडिट में सहयोग करके और उसकी जांच से सामने आने वाले तथ्यों पर कार्रवाई करके इस उद्देश्य को हासिल किया जा सकता है, न कि ऑडिट से जुड़े तथ्यों को सामने लाने वाले अधिकारियों के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करके। इनामदार ने कहा कि संवैधानिक प्राधिकरण को कथित तौर पर निशाना बनाने वाली सार्वजनिक टिप्पणियां ऑडिट प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाने के साथ जवाबदेही सुनिश्चित करने वाली राज्य की संस्थागत व्यवस्था की विश्वसनीयता को भी प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने कर्नाटक सरकार से महेश बाबू के नाम से सामने आई टिप्पणियों की जल्द जांच कराने और उनके सही पाए जाने पर उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने मांग की है कि अधिकारी उसी सार्वजनिक मंच पर बिना शर्त माफी मांगें, जहां टिप्पणियां की गई थीं। इनामदार ने यह भी स्पष्ट किया कि गृह लक्ष्मी योजना के बारे में इनपुट राज्य सरकार के अनुरोध पर एक आधिकारिक डी.ओ. पत्र के माध्यम से दिए गए थे। पत्र में पहले ही स्पष्ट किया गया था कि ऑडिट अभी अंतिम रिपोर्ट के चरण तक नहीं पहुंचा है। उपलब्ध इनपुट सीमित डेटा के आंशिक ऑडिट के दौरान सामने आई शुरुआती टिप्पणियों पर आधारित थे। इसलिए इन्हें ऑडिट के अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।