एआई के दुरुपयोग पर भड़के विजय देवरकोंडा, जूनियर एनटीआर की सख्त कानून की मांग का किया समर्थन

हैदराबाद। जूनियर एनटीआर ने केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के दुरुपयोग के खिलाफ सख्त कार्रवाई और कड़े नियम बनाने की अपील की है। तेलुगु अभिनेता विजय देवरकोंडा ने जूनियर एनटीआर का समर्थन किया है। जूनियर एनटीआर ने यह अपील अपनी फिल्म ‘देवरा’ के गाने ‘चुट्टामल्ले’ के मॉर्फ किए गए वीडियो के सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद की। विजय देवरकोंडा ने जूनियर एनटीआर की पोस्ट को शेयर करते हुए इस मामले में उनका और उनकी टीम का पूरा समर्थन किया। उन्होंने कहा कि इस वीडियो के लिए जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाना चाहिए और उनके खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। विजय देवरकोंडा ने सवाल उठाया कि समाज में लोग एक-दूसरे के प्रति इतने असंवेदनशील कैसे हो गए हैं। उन्होंने कहा कि एक तरफ पूरी दुनिया में एआई के कारण रोजगार और नौकरियों पर पड़ने वाले असर को लेकर बहस और चिंता हो रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इसी तकनीक का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने इस तरह के मॉर्फ्ड कंटेंट को गंभीर डिजिटल उत्पीड़न बताते हुए कहा कि कानून को ऐसे मामलों को पूरी गंभीरता से लेना चाहिए। विजय देवरकोंडा ने इस मामले के खिलाफ आवाज उठाने वाली टीम को अपना पूरा समर्थन देने की बात भी कही। इससे पहले शनिवार को जूनियर एनटीआर ने कहा था कि उनकी फिल्म ‘देवरा’ के गाने ‘चुट्टामल्ले’ का मॉर्फ्ड वीडियो बनाने और उसे फैलाने वालों के खिलाफ वह हरसंभव कानूनी कार्रवाई करेंगे। जूनियर एनटीआर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मॉर्फ्ड वीडियो की कड़ी निंदा की। उन्होंने एआई का इस्तेमाल करके किसी महिला को अपमानित करने वाली सामग्री तैयार किए जाने को शर्मनाक बताया। जूनियर एनटीआर ने वीडियो बनाने और इसे सोशल मीडिया पर फैलाने वालों को चेतावनी देते हुए कहा कि वह उन्हें नहीं छोड़ेंगे और उनके खिलाफ हरसंभव कानूनी कार्रवाई करेंगे। उन्होंने सोशल मीडिया यूजर्स से भी इस तरह के कंटेंट को न देखने, न शेयर करने और न ही उसके साथ किसी तरह से जुड़ने की अपील की। जूनियर एनटीआर ने कहा कि आज इसका निशाना कोई और है, लेकिन भविष्य में कोई भी इसका शिकार हो सकता है। उन्होंने मामले को गंभीर बताते हुए भारत सरकार और सभी राज्य सरकारों से एआई के दुरुपयोग के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने तथा सख्त नियम बनाने की अपील की। इससे पहले अभिनेत्री जान्हवी कपूर ने भी एआई से बनाए जा रहे कथित फर्जी वीडियो पर आपत्ति जताई। उन्होंने एक्स पर कहा कि एआई से बनाए गए फर्जी वीडियो का प्रसारित होना परेशान करने वाला है। उन्होंने लोगों से इस तरह का कंटेंट न बनाने, न शेयर करने और न ही इसे बढ़ावा देने की अपील की। जान्हवी कपूर ने इसे एआई का स्पष्ट दुरुपयोग बताते हुए कहा कि इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

हम जो हासिल करने आए थे, वह कर दिखाया: मनप्रीत सिंह

काकामिगाहारा। भारतीय हॉकी टीम ने शनिवार को गिफू प्रीफेक्चुरल ग्रीन स्टेडियम में खेले गए फाइनल में मलेशिया को 5-1 से मात देकर एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल बरकरार रखते हुए ओलंपिक गेम्स 2028 के लिए क्वालीफाई कर लिया। भारतीय मिडफील्डर मनप्रीत सिंह ने कहा कि टीम अपने अभियान को लेकर आलोचनाओं के बावजूद अपने लक्ष्य पर केंद्रित रही। एशियन गेम्स से पहले भारतीय टीम की काफी आलोचना हुई थी, लेकिन टीम ने जापान में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने ग्रुप स्टेज के अपने सभी 5 मैच जीते और सेमीफाइनल में पाकिस्तान को 4-3 से मात दी। खिताबी जीत के बाद मनप्रीत ने ‘आईएएनएस’ से ​​कहा, “असल में, बाहर बहुत-सी बातें होती रहती हैं। आलोचनाएं चलती रहती हैं, लेकिन हमारा ध्यान उस पर नहीं था। हम यहां कुछ हासिल करने आए थे, और आज हमने वह हासिल कर लिया।” मनप्रीत ने कहा कि एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल और ओलंपिक के लिए सीधे क्वालीफिकेशन से भारत को अब लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 के लिए क्वालीफिकेशन प्रक्रिया से गुजरने के बजाय अपने खेल के खास पहलुओं को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित करने का मौका मिलेगा। उन्होंने कहा, “एशियन गेम्स हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण टूर्नामेंट था, क्योंकि यहां से हमने सीधे ओलंपिक गेम्स 2028 के लिए क्वालीफाई किया है। अब हमें क्वालीफायर राउंड नहीं खेलना है। हम खुद पर काम कर सकते हैं, उन क्षेत्रों की पहचान कर सकते हैं जहां सुधार की जरूरत है और देख सकते हैं कि हम बेहतर तैयारी के साथ लॉस एंजिल्स कैसे जा सकते हैं।” मनप्रीत ने मलेशिया को काबू में रखने और साथ ही अटैक में मिले मौकों का पूरा फायदा उठाने का श्रेय भारत के डिफेंस को देते हुए कहा, “शुरू से आखिर तक हमारा डिफेंस बहुत अच्छा रहा। जब भी हमें मौके मिले, चाहे पेनल्टी कॉर्नर से हों या फील्ड गोल से, हमने उन्हें गोल में तब्दील किया।” वहीं, फॉरवर्ड दिलप्रीत सिंह ने कहा कि गोल्ड मेडल टीम की लगातार कड़ी मेहनत और लंबे समय की तैयारी का नतीजा था, और लॉस एंजिल्स के लिए सीधे क्वालिफिकेशन भी उनके मुख्य लक्ष्यों में से एक था। दिलप्रीत ने ‘आईएएनएस’ को बताया, “हमारी पूरी टीम बहुत खुश है, क्योंकि हम लंबे समय से इसके लिए ट्रेनिंग कर रहे थे और हमने बहुत कड़ी मेहनत की है। हमारा मकसद गोल्ड जीतना और एलए के लिए अपना क्वालिफिकेशन सुनिश्चित करना था।” दिलप्रीत ने कहा कि टीम ने पाकिस्तान के खिलाफ सेमीफाइनल में मिली मुश्किल जीत से सबक लिया था और फाइनल में बेहतर प्रदर्शन करने के पक्के इरादे के साथ उतरी थी। उन्होंने कहा, “कोई दबाव नहीं था, लेकिन सेमीफाइनल के बाद, जिसे हमने बहुत मुश्किल से जीता था, सभी की सोच यही थी कि हमें वहां की गई गलतियों से सीखना है और फाइनल बड़े अंतर से जीतना है।

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक्शन प्लान बनाने के लिए जम्मू में इंडी गठबंधन की बैठक

जम्मू। जम्मू में शनिवार को इंडी गठबंधन की एक बैठक हुई, जिसमें भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) के कामकाज को लेकर लगाए गए आरोपों और मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर गठबंधन की आगे की रणनीति पर चर्चा की गई। इस बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस के सीनियर नेता और पूर्व मंत्री रमन भल्ला ने की। इसमें शामिल लोगों ने चुनावी मुद्दों और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर चल रहे कैंपेन के तहत गठबंधन के एक्शन प्लान पर चर्चा की। इंडी गठबंधन ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग ‘संस्थागत कब्जे’ का शिकार हो गया है और उन्होंने सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने, उन पर मुकदमा चलाने और उनकी गिरफ्तारी की मांग की है। विपक्षी गठबंधन चुनावी पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़े अपने बड़े कैंपेन के तहत ये मांगें उठा रहा है। यह बैठक जम्मू-कश्मीर में चुनावी प्रक्रिया से जुड़े आरोपों को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों के विरोध-प्रदर्शनों और राजनीतिक कार्यक्रमों के बीच हुई है। कांग्रेस ने 28 सितंबर को पूरे जम्मू-कश्मीर में प्रदर्शन भी किए थे, जिसमें भल्ला ने चुनाव आयोग के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की थी। बैठक में शामिल लोगों ने चुनावी और लोकतांत्रिक मुद्दों पर इंडी गठबंधन के कैंपेन के तहत आगे की कार्रवाई और लामबंदी पर चर्चा की। इंडी गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर एक कैंपेन शुरू किया है और चुनाव आयोग पर चुनावी गड़बड़ियों और वोटर लिस्ट के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (एसआईआर) से जुड़े ‘वोट की चोरी’ का आरोप लगाया है। विपक्षी नेताओं ने ज्ञानेश कुमार पर बड़े पैमाने पर वोटरों के नाम हटाने (एसआईआर के दौरान 13 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए गए) से जुड़े गंभीर सवालों का जवाब न देने का आरोप लगाया है और उनके खिलाफ महाभियोग का नोटिस देने की प्रक्रिया शुरू की है। गठबंधन ने 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक पूरे देश में एक कैंपेन चलाया, जिसमें जिला स्तर पर ‘लोकतंत्र बचाओ’ रैलियां और सार्वजनिक प्रदर्शन शामिल थे। विपक्षी सांसदों ने 6 अक्टूबर को दिल्ली में चुनाव आयोग के दफ्तर तक मार्च करने की घोषणा की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और गठबंधन के अन्य नेताओं ने ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से वोटिंग की व्यवस्था को फिर से लागू करने और भविष्य के चुनावों के लिए एसआईआर से पहले की वोटर लिस्ट का इस्तेमाल करने की मांग की है।

संसदीय समिति के चेयरपर्सन की नियुक्ति पर अभिषेक बनर्जी की आपत्ति, ओम बिरला को लिखा पत्र

नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर रसायन एवं उर्वरक संबंधी संसदीय समिति के चेयरपर्सन की नियुक्ति पर आपत्ति जताई है। उन्होंने नियुक्ति वापस लेने और समिति की अध्यक्षता पार्टी की ओर से नामित सदस्य को देने की मांग की है। अभिषेक बनर्जी ने अपने पत्र में 3 अक्टूबर 2026 के लोकसभा बुलेटिन-पार्ट II संख्या 6185 का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि समिति का चेयरपर्सन ऐसे सदस्य को नियुक्त किया गया है, जिनके खिलाफ दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता की याचिका लोकसभा स्पीकर के पास लंबित है। बनर्जी के मुताबिक, उन्होंने 23 सितंबर 2026 को भेजे पत्रों में अनुरोध किया था कि अयोग्यता संबंधी याचिकाओं पर फैसला होने तक संबंधित 20 सदस्यों को विभाग संबंधी संसदीय स्थायी समितियों में नियुक्ति के लिए विचार से बाहर रखा जाए। अभिषेक बनर्जी ने कहा कि उन्होंने अपने पहले के पत्र में यह भी अनुरोध किया था कि लोकसभा की एक स्थायी समिति की अध्यक्षता तृणमूल कांग्रेस के पास बरकरार रखी जाए। इसके लिए पार्टी ने मौजूदा चेयरपर्सन को ही पद पर बनाए रखने के लिए अपना नामांकन भी भेजा था। उन्होंने आरोप लगाया कि रसायन एवं उर्वरक समिति में की गई नई नियुक्ति में पार्टी की आपत्ति और उसके नामांकन दोनों को नजरअंदाज किया गया। अभिषेक बनर्जी ने अपने पत्र में कहा कि डिजिटल संसद की वेबसाइट पर अभी लोकसभा में एआईटीसी के 28 सदस्य दिखाए जा रहे हैं। वहीं, समिति का चेयरपर्सन नियुक्त किए गए सदस्य ने विलय के आधार पर नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) से अपनी संबद्धता का दावा किया है। बनर्जी के मुताबिक विलय का मामला लंबित अयोग्यता कार्यवाही में विवाद का विषय है। उन्होंने लोकसभा स्पीकर से सवाल किया कि आखिर यह समिति किस राजनीतिक दल के खाते में आवंटित की गई है। बनर्जी ने पूछा कि अगर अध्यक्ष पद एआईटीसी के हिस्से में दिया गया है तो पार्टी की स्पष्ट इच्छा के खिलाफ उसके नामित सदस्य को क्यों बदला गया? अगर यह पद एनसीपीआई को आवंटित किया गया है तो उसकी संबद्धता को किस आदेश के आधार पर मान्यता दी गई और उसे समिति की अध्यक्षता किस आधार पर दी गई? उन्होंने कहा कि किसी सदस्य की पार्टी संबद्धता का मामला लंबित रखते हुए उन्हें संसदीय समिति का चेयरपर्सन नियुक्त करना संसदीय मर्यादा के अनुरूप नहीं है। बनर्जी ने स्पष्ट किया कि इस नियुक्ति को एआईटीसी के हिस्से में दी गई समिति की अध्यक्षता के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से संबंधित नियुक्ति वापस लेने और रसायन एवं उर्वरक समिति की अध्यक्षता एआईटीसी की ओर से विधिवत नामित सदस्य को देने की मांग की है। उन्होंने इसके साथ ही संबंधित सदस्यों के खिलाफ लंबित अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द फैसला लेने का अनुरोध किया है। अभिषेक बनर्जी ने अपने पत्र में उठाए गए सवालों पर लोकसभा स्पीकर से लिखित जवाब भी मांगा है।

अरुणाचल के सीएम पेमा खांडू ने कॉफी की खेती बढ़ाने और किसानों की आय बढ़ाने पर दिया जोर

ईटानगर। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने शनिवार को राज्य में कॉफी की खेती का विस्तार करने, उत्पादकता और बीन की गुणवत्ता में सुधार करने और वैल्यू चेन को मजबूत करके कॉफी उत्पादकों की आय बढ़ाने के लिए मिलकर प्रयास करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने विस्तार की संभावनाओं पर जोर देते हुए कहा कि कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश में अभी सिर्फ 600 हेक्टेयर जमीन पर ही कॉफी की खेती होती है। कॉफी बोर्ड ऑफ इंडिया और राज्य के कृषि विभाग के सहयोग से आयोजित ‘हिल्स टू कप’ कॉफी वर्कशॉप के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कॉफी राज्य के लिए कोई नई चीज नहीं है। इसकी खेती लगभग पांच दशक पहले शुरू हो गई थी। हालांकि, उन्होंने कहा कि इतने सालों में कॉफी की संभावनाओं के बारे में लोगों में काफी जागरूकता नहीं आई और न ही इसे ठीक से बढ़ावा दिया गया। खांडू ने इस वर्कशॉप को अरुणाचल प्रदेश में कॉफी की खेती की नई शुरुआत बताया, क्योंकि यह किसानों, युवा उद्यमियों, तकनीकी विशेषज्ञों और दूसरे संबंधित लोगों को एक मंच पर लाती है। उन्होंने कहा, “एक तरह से, यह अरुणाचल प्रदेश में कॉफी के इतिहास की दिशा में राज्य के आगे बढ़ने का पहला अध्याय है।” मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार कॉफी उगाने वालों और उद्यमियों की मदद के लिए सही नीतियां बनाएगी। उन्होंने बताया कि उन्होंने कृषि अधिकारियों, एक रिटायर्ड पीसीसीएफ और अरुणाचल प्रदेश फॉरेस्ट कॉर्पोरेशन के चेयरमैन वाले तीन सदस्यों के एक दल का गठन किया है, जो आंध्र प्रदेश और दूसरे राज्यों का दौरा करके कॉफी की खेती, उसके तरीकों और विकास के मॉडलों का अध्ययन करेगा। खांडू ने कहा कि यह वर्कशॉप किसानों के सामने आने वाली तकनीकी कमियों और चुनौतियों की पहचान करने में मदद करेगी, जिसके बाद कॉफी बोर्ड ऑफ इंडिया के तकनीकी विशेषज्ञ राज्य सरकार के लिए सुझाव तैयार करेंगे। मुख्यमंत्री ने हिस्सा लेने वालों को भरोसा दिलाया, “वे जो भी सुझाव देंगे, राज्य सरकार आने वाले दिनों में आपको पूरा सहयोग देगी।” उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले पांच-छह सालों में खेती और बागवानी के तहत कई उपाय और योजनाएं शुरू की हैं, लेकिन कॉफी के लिए अब तक कोई खास पॉलिसी नहीं बनाई गई है। खांडू ने कहा कि वह खुद ‘कॉफी बोर्ड ऑफ इंडिया’ से बात करेंगे ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस सेक्टर को सहारा देने के लिए कौन से खास पॉलिसी उपाय किए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि मौजूदा बागानों का एक बड़ा हिस्सा पूर्वी अरुणाचल में ‘अरुणाचल प्रदेश फॉरेस्ट कॉर्पोरेशन’ के तहत आता है, जबकि वर्कशॉप में शामिल कई किसानों ने पायलट या मॉडल प्रोजेक्ट के तौर पर कॉफी की खेती शुरू की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की अलग-अलग तरह की खेती-मौसम की स्थितियां, उपजाऊ जमीन और अलग-अलग मौसम वाले इलाकों की मौजूदगी कॉफी की खेती को बढ़ाने के लिए एक अच्छा आधार देती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मकसद सिर्फ खेती का दायरा बढ़ाना ही नहीं, बल्कि प्रति हेक्टेयर पैदावार, कॉफी बीन्स की क्वालिटी और वैल्यू एडिशन व मज़बूत वैल्यू चेन के जरिए किसानों की आमदनी बढ़ाना भी होना चाहिए। कॉफी को युवा उद्यमियों के लिए एक अच्छा मौका बताते हुए खांडू ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में बढ़ता टूरिज्म सेक्टर कॉफी उगाने वालों और कारोबारियों के लिए और मौके पैदा कर सकता है। उन्होंने कहा, “अरुणाचल आने वाले टूरिस्ट हमेशा कॉफी पसंद करते हैं। अरुणाचल में टूरिज्म के इतने बढ़ने के साथ, यह हमारे युवाओं के लिए एक बहुत अच्छा मौका है।” उन्होंने युवाओं से रोजगार और उद्यमिता के तौर पर कॉफी की खेती, प्रोसेसिंग और इससे जुड़े कारोबारों को आजमाने की अपील की और कहा कि राज्य को इस सेक्टर से जुड़े उभरते मौकों को नहीं गंवाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कॉफी के बढ़ते ग्लोबल मार्केट और एक कमर्शियल फसल के तौर पर इसकी संभावनाओं पर भी रोशनी डाली, साथ ही कॉफी पीने से सेहत को होने वाले फायदों का भी जिक्र किया।

मिशन 2027 की तैयारी में जुटी भाजपा, यूपी मीडिया विभाग की नई टीम घोषित, बनाए गए 31 प्रवक्ता

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने संगठन को मजबूत करने की दिशा में तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में भाजपा उत्तर प्रदेश ने अपने मीडिया विभाग के पदाधिकारियों की नई सूची जारी की है। प्रदेश अध्यक्ष की अनुमति से 31 प्रदेश प्रवक्ता और दो प्रदेश मीडिया सह संयोजक के नाम घोषित किए हैं। प्रदेश प्रवक्ताओं की सूची में डॉ. समीर सिंह, कौशलेन्द्र पटेल, मनीष शुक्ला, हीरो बाजपेयी, जुगल किशोर, राकेश त्रिपाठी, लालजी निर्मल, आनन्द दुबे, अवनीश त्यागी, आलोक वर्मा, अनिला सिंह, साक्षी दिवाकर, संजय चौधरी, अशोक पाण्डेय, एसएन सिंह, मनोज पोसवाल और डॉ. ऋचा सिंह शामिल हैं। इसके अलावा प्रशान्त उमराव, दिलीप श्रीवास्तव, डॉ. अमित कुशवाहा, प्रियंक पाण्डेय, नवीन श्रीवास्तव, रामनिवास यादव, अनुभव चक, डॉ. रजनीश त्यागी, ब्रम्हप्रकाश पाल, आशीष कुमार गुप्ता, डॉ. अंकुश, अभिषेक कृष्ण, प्रताप सिंह नागर और शैलेन्द्र शर्मा अटल को भी प्रदेश प्रवक्ता की जिम्मेदारी दी गई है। भाजपा ने प्रदेश मीडिया सह-संयोजकों की भी घोषणा की है। हिमांशु दुबे और दीपक बघेल को प्रदेश मीडिया सह संयोजक बनाया गया है। नई टीम के जरिए पार्टी मीडिया और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी रणनीति को और मजबूत करने की कोशिश करेगी। उत्तर प्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है। इसे देखते हुए राजनीतिक दल अपनी संगठनात्मक तैयारियों को धार देने में जुटे हुए हैं। भाजपा भी संगठन के अलग-अलग स्तरों पर अपनी टीम को मजबूत करने और आगामी चुनाव की रणनीति के मुताबिक जिम्मेदारियां तय करने में जुटी है। इसी कड़ी में मीडिया विभाग की नई टीम की घोषणा को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रदेश प्रवक्ताओं और मीडिया सह-संयोजकों पर पार्टी की नीतियों, सरकार के कामकाज और राजनीतिक मुद्दों पर भाजपा का पक्ष जनता तथा मीडिया के सामने रखने की अहम जिम्मेदारी होगी।

एक कचौड़ी, दो समोसा’ नारे की नौबत ही क्यों आई: शिवराज सिंह चौहान

भोपाल। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को भोपाल और सांची में आयोजित कार्यक्रमों में शिरकत की। केंद्रीय मंत्री पहले भोपाल स्थित सेज यूनिवर्सिटी में आयोजित श्रीराम फाइनेंस के ‘नवगति’ कार्यक्रम में पहुंचे, जहां उन्होंने छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति की राशि वितरित की और उनसे संवाद किया। इसके बाद वह अपने संसदीय क्षेत्र विदिशा के सांची पहुंचे, जहां उन्होंने रिसर्च सोसायटी फॉर द स्टडीज़ ऑफ डायबिटीज़ इन इंडिया के 11वें वार्षिक सम्मेलन में हिस्सा लिया। सम्मेलन में मधुमेह की बढ़ती चुनौती, इसके उपचार में हो रही प्रगति, नई चिकित्सा तकनीकों और शोध के क्षेत्र में सामने आ रही संभावनाओं को लेकर विशेषज्ञों के साथ चर्चा हुई। इस दौरान शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मधुमेह आज केवल किसी व्यक्ति विशेष की बीमारी नहीं, बल्कि तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। उन्होंने कहा कि इसके प्रभावी उपचार के साथ-साथ बीमारी की रोकथाम, जागरूकता और निरंतर शोध पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि चिकित्सा विज्ञान ने नई तकनीकों और रिसर्च ने उपचार के क्षेत्र में कई नए रास्ते खोले हैं। ऐसे में चिकित्सकों, शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों के बीच बेहतर समन्वय से मधुमेह जैसी बीमारियों के खिलाफ प्रभावी रणनीति तैयार की जा सकती है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा और सम्मान को लेकर समाज से आत्ममंथन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज यह सोचने की जरूरत है कि ऐसी परिस्थितियां क्यों पैदा हो रही हैं, जब बेटियों को पुरुषों के प्रति अविश्वास जताने वाला नारा लिखना पड़ रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर चल रहे नारे ‘एक कचौड़ी, दो समोसा, इन मर्दों का क्या भरोसा’ का जिक्र करते हुए कहा कि यह नारा कभी सार्थक और सफल नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह पूरे समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि कई बार बेटियों को गलत नजरों से देखने वाले लोग कोई अनजान नहीं, बल्कि जान-पहचान के ही होते हैं। ऐसी घटनाओं से यह सवाल उठता है कि आखिर समाज को क्या हो गया है। उन्होंने कहा कि बेटियों का मान-सम्मान और उनकी इज्जत करना केवल परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने पुरुषों, बेटों और उनके माता-पिता से भी आत्ममंथन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि आखिर क्यों ये नौबत आई कि मेरी बेटियों को ये नारा लिखना पड़ रहा है। समाज को इस बात पर गंभीरता से विचार करना होगा कि वह किस दिशा में जा रहा है। यदि बहन और बेटियां पुरुषों पर विश्वास नहीं कर पाएंगी तो समाज और देश कैसे आगे बढ़ेगा। इसके लिए सभी को संकल्प लेना होगा कि बेटियों, बहनों और माताओं का सम्मान किया जाए। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि नारी मेरे लिए मां के समान और बेटी देवी के समान है। उनके सम्मान और सुरक्षा के लिए मैं अपनी ओर से हरसंभव प्रयास करता रहूंगा। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारतीय क्रिकेट टीम के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि एक तरफ भारतीय टीम वनडे वर्ल्ड कप में लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही है और रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बना रही है, वहीं दूसरी ओर एक भारतीय टीम ने पाकिस्तान को हराकर देशवासियों को खुशी का मौका दिया है। उन्होंने कहा कि हम एक साथ कई मोर्चों पर जीत सकते हैं। शिवराज सिंह चौहान ने खिलाड़ियों की उपलब्धियों को देश के आत्मविश्वास और सामर्थ्य से जोड़ते हुए कहा कि भारतीय बेटा-बेटियां लगातार देश का मान बढ़ा रहे हैं। इस दौरान उन्होंने एक विमान हादसे का भी जिक्र करते हुए भारतीय पायलट के साहस की प्रशंसा करते हुए कहा कि जब इजराइल के नागरिकों से भरे एक विमान को क्रैश करने की कोशिश की गई, तब विमान के जांबाज पायलट ने खुद घायल होने के बावजूद हिम्मत नहीं छोड़ी। चोट लगने के बाद भी पायलट ने धैर्य बनाए रखा, हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए विमान को सुरक्षित नीचे उतारा और सैकड़ों यात्रियों की जान बचाई। वहीं, केंद्रीय मंत्री ने एशियन गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन की सराहना करते हुए पदक विजेताओं को बधाई दी। भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन देश का गौरव बढ़ा रहा है। उन्होंने महिला हॉकी टीम की उपलब्धि का भी जिक्र किया और कहा कि टीम ने चीन को हराकर करीब 40 साल बाद उसके खिलाफ जीत दर्ज करते हुए गोल्ड मेडल हासिल किया। उन्होंने कहा कि भारतीय खिलाड़ी लगातार पदक जीत रहे हैं और यह देश के लिए गर्व की बात है। केंद्रीय कृषि मंत्री ने ड्राइवरों के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति की पहल करने पर श्रीराम फाइनेंस लिमिटेड की सराहना करते हुए कहा कि श्रीराम फाइनेंस ने यह पहचाना है कि देश में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले लोगों में ड्राइवर भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ट्रक चालक कई-कई दिनों तक अपने परिवार से दूर रहते हैं। वे चेन्नई, अहमदाबाद, गुवाहाटी जैसे दूर-दराज के शहरों तक सामान पहुंचाने के लिए निकलते हैं और कई बार आठ-आठ दिन तक अपने बच्चों से मिल नहीं पाते। उन्होंने कहा कि सामान्य नौकरी करने वाला व्यक्ति सुबह घर से निकलता है और शाम को लौटकर अपने बच्चों से मिल लेता है। किसान भी खेत में काम करने के बाद शाम को घर लौट आता है, लेकिन ड्राइवर और क्लीनर लंबे समय तक अपने परिवार और बच्चों से दूर रहकर काम करते हैं। शिवराज सिंह चौहान ने भावुक अंदाज में कहा कि हर पिता अपने बच्चों को प्यार करना, उनके साथ खेलना और उनके साथ समय बिताना चाहता है। उन्होंने कहा, हर एक के पास पापा का दिल होता है, लेकिन ड्राइवर अपने बच्चों से दूर रहकर भी देश की सेवा में लगे रहते हैं। उनके मन में अपने बच्चों से दूर रहने का कितना दर्द होता होगा, इसकी कल्पना करना भी मुश्किल है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ड्राइवर केवल वाहन नहीं चलाते, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और लोगों की जिंदगी को गति देते हैं। उन्होंने कहा कि किसान की उपज को मंडी और बाजार तक पहुंचाने से लेकर बच्चों को स्कूल पहुंचाने, निर्माण सामग्री की ढुलाई और मरीजों को अस्पताल ले जाने तक ड्राइवरों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। शिवराज सिंह चौहान ने

एशियन गेम्स 2026 में भारत 85 पदकों के साथ चौथे स्थान पर, कई ऐतिहासिक उपलब्धियां दर्ज

आइची-नागोया। क्रिकेट और हॉकी में दो स्वर्ण पदक जीतने के साथ-साथ तीरंदाजी, मुक्केबाजी और एथलेटिक्स में शानदार प्रदर्शन के दम पर भारत ने एशियन गेम्स 2026 का अभियान पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहते हुए समाप्त किया। भारत ने कुल 85 पदक जीते, हालांकि वह तीन साल पहले हांगझोउ में बनाए गए अपने रिकॉर्ड पदक आंकड़े को पीछे नहीं छोड़ सका। महाद्वीपीय बहु-खेल प्रतियोगिता के 20वें संस्करण में करीब 500 भारतीय खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। भारत ने 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य पदक अपने नाम किए। भारत का 85 पदकों का आंकड़ा एशियन गेम्स में उसका अब तक का दूसरा सबसे बड़ा पदक-प्रदर्शन है। हांगझोउ 2023 में करीब 650 खिलाड़ियों के दल ने रिकॉर्ड 106 पदक जीते थे, जिसमें 28 स्वर्ण, 38 रजत और 40 कांस्य पदक शामिल थे। आइची-नागोया में एथलेटिक्स भारत के लिए सबसे ज्यादा पदक दिलाने वाला खेल रहा, जिसमें 24 पदक मिले। निशानेबाजी में भारत ने 15 पदक जीते, जिनमें तीन स्वर्ण शामिल हैं। स्वर्ण पदकों के मामले में तीरंदाजी सबसे आगे रही, जहां भारत ने पांच स्वर्ण पदक जीते। मुक्केबाजी में भी भारत ने तीन स्वर्ण अपने नाम किए। मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा। वह 2014 इंचियोन एशियन गेम्स में मैरी कॉम के बाद एशियन गेम्स में स्वर्ण जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला मुक्केबाज बनीं। कुश्ती में अमन सहरावत और सुजीत कलकल ने स्वर्ण पदक जीते। टीम खेलों में भी भारत का प्रदर्शन शानदार रहा। भारतीय पुरुष और महिला क्रिकेट टीमों ने अपने खिताब का बचाव किया। पुरुष टीम ने फाइनल में पाकिस्तान और महिला टीम ने श्रीलंका को हराकर स्वर्ण पदक जीता। पुरुष और महिला कबड्डी टीमों ने भी स्वर्ण पदक हासिल किए। भारतीय महिला हॉकी टीम ने 44 साल का इंतजार खत्म करते हुए एशियन गेम्स का खिताब अपने नाम किया। जापान में कई भारतीय खिलाड़ियों ने नए रिकॉर्ड और ऐतिहासिक उपलब्धियां भी दर्ज कीं। प्रणवी उर्स एशियन गेम्स में गोल्फ का स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। वहीं 17 वर्षीय कुमकुम महोद एशियन गेम्स में व्यक्तिगत रिकर्व स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। कुमकुम ने अंकिता भक्त और कीर्ति शर्मा के साथ महिला रिकर्व टीम स्पर्धा में भी स्वर्ण पदक जीता। यह एशियन गेम्स में भारतीय महिलाओं का टीम रिकर्व वर्ग का पहला स्वर्ण रहा। भारत की नीरू धांडा ने महिला ट्रैप स्पर्धा में प्रतियोगिता का पहला व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीता। कुमकुम और सुरूची सिंह ने मिश्रित टीम 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में स्वर्ण जीतकर एशियाई रिकॉर्ड की बराबरी की। एथलेटिक्स में विथ्या रामराज ने महिलाओं की 400 मीटर बाधा दौड़ में 42 साल पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ते हुए कांस्य पदक जीता। पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा में यशवीर सिंह ने रजत और रोहित यादव ने कांस्य पदक जीता। नीरज चोपड़ा चोट के कारण इन खेलों में हिस्सा नहीं ले सके। सावन बरवाल ने मैराथन में 1982 के बाद भारत को पहला पदक दिलाया और इसी दौरान राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी बनाया। सरवेश कुशारे ने पुरुषों की हाई जंप में भारत के 56 साल के पदक सूखे को खत्म किया। बरानिका एलंगोवन एशियन गेम्स में पदक जीतने वाली पहली भारतीय पोल वॉल्टर बनीं। भारत ने कई अन्य खेलों में भी पहली बार पदक जीते। सुचिका तारियाल ने मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स में एशियन गेम्स में भारत का पहला पदक हासिल किया, जबकि जय मीणा ने सॉफ्ट टेनिस में सेमीफाइनल में पहुंचकर देश को इस खेल में पहला पदक दिलाया। मीराबाई चानू ने महिलाओं के 49 किलोग्राम भार वर्ग में रजत पदक जीता। यह एशियन गेम्स में उनका पहला पदक था और इसके साथ ही भारत ने 1998 बैंकॉक एशियन गेम्स के बाद पहली बार भारोत्तोलन में पदक हासिल किया। रोशिबिना देवी ने वुशु में लगातार तीसरा महाद्वीपीय पदक जीता। वहीं सीमा कुमारी ने महिलाओं की 10,000 मीटर स्पर्धा में 16 साल के पदक सूखे को समाप्त किया। अनाहत सिंह ने एशियन गेम्स के एकल वर्ग में रजत पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनकर इतिहास रचा। अनाहत सिंह और अभय सिंह दोनों अपने-अपने एकल फाइनल में हारकर स्वर्ण पदक से चूक गए। भारत ने 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए तीरंदाजी और हॉकी में कोटा भी हासिल किया। आइची-नागोया में सात खेलों- तीरंदाजी, हॉकी, नौकायन, स्क्वैश, सर्फिंग, टेनिस और ट्रायथलॉन में ओलंपिक कोटा दांव पर थे। भारत ने पुरुष और महिला हॉकी के साथ-साथ तीरंदाजी की मिश्रित टीम कंपाउंड और महिला व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धाओं में कोटा हासिल कर अपने एशियन गेम्स अभियान को ओलंपिक से भी जोड़ दिया। भारत का सबसे शानदार प्रदर्शन शुक्रवार को रहा, जब उसने छह स्वर्ण समेत कुल 12 पदक जीते। शनिवार को प्रतियोगिता के 17वें और अंतिम से एक दिन पहले भारत ने नौ पदक हासिल किए। इनमें क्रिकेट और हॉकी के स्वर्ण शामिल थे। व्यक्तिगत स्पर्धाओं में अमन सहरावत, कुमकुम अनिल महोद और गोल्फर प्रणवी उर्स ने स्वर्ण पदक जीते। पुरुष क्रिकेट टीम ने फाइनल में पाकिस्तान को 19 रन से हराकर स्वर्ण पदक बरकरार रखा। कुमकुम अनिल महोद ने महिला व्यक्तिगत रिकर्व में भारत का पहला स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा। अमन सहरावत ने कुश्ती में स्वर्ण, अंतिम पंघाल ने रजत और दीपक पूनिया ने कांस्य पदक जीता। प्रणवी शरत उर्स ने महिला व्यक्तिगत गोल्फ में स्वर्ण जीतकर इतिहास रचा, जबकि भारतीय महिला टीम ने रजत पदक हासिल किया। नीरज चौहान ने कांस्य पदक जीतकर गोल्फ में भारत के लिए ऑल-इंडियन पोडियम भी पूरा किया। इस तरह भारत ने हांगझोउ के रिकॉर्ड प्रदर्शन के मुकाबले कम पदक जीते, लेकिन आइची-नागोया में कई ऐतिहासिक प्रथम, राष्ट्रीय रिकॉर्ड, खिताबों का सफल बचाव और ओलंपिक कोटा हासिल करने जैसी उपलब्धियों के साथ अपना अभियान समाप्त किया।

मराठी को ज्ञान की भाषा बनाएंगे: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस

मुंबई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार को कहा कि मराठी सिर्फ बातचीत का जरिया नहीं है, बल्कि यह समृद्ध संस्कृति की वाहक और गौरवशाली इतिहास की साक्षी भी है। सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि विशाल शब्दावली, समृद्ध साहित्यिक परंपरा और विविध बोलियों से संपन्न मराठी भाषा 21वीं सदी में डिजिटल भाषा और ज्ञान की भाषा के रूप में और अधिक सशक्त होगी। मराठी के रोजमर्रा के इस्तेमाल को बढ़ाने के साथ-साथ उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डिजिटल टेक्नोलॉजी, क्वांटम कंप्यूटिंग, स्पेस टेक्नोलॉजी और बायोटेक्नोलॉजी जैसे आधुनिक क्षेत्रों में भी इसके इस्तेमाल को बढ़ाने पर जोर दिया। मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलने के मौके पर मुख्यमंत्री फडणवीस ‘शास्त्रीय मराठी भाषा सप्ताह’ और ‘शास्त्रीय मराठी भाषा सम्मान दिवस’ ​​की शुरुआत के अवसर पर बोल रहे थे। यह बताते हुए कि मराठी मूल रूप से प्राचीन और शास्त्रीय भाषा है, मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि केंद्र सरकार से शास्त्रीय भाषा के रूप में आधिकारिक मान्यता मिलना सभी मराठी भाषियों के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलने से राष्ट्रीय स्तर पर महाराष्ट्र की भाषाई और सांस्कृतिक विरासत को पहचान मिली है। लोगों को इतिहास की याद दिलाते हुए उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने स्वराज्य के विजन के साथ-साथ अपनी भाषा पर भी जोर दिया था। उन्होंने राज्य प्रशासन में मराठी को बढ़ावा देने और शासन-व्यवस्था में इसके इस्तेमाल को नई दिशा देने के लिए प्रयास किए थे। यह बताते हुए कि दुनिया में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में मराठी 13वें स्थान पर है, मुख्यमंत्री ने इसके वैश्विक स्वरूप पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 20वीं सदी में तैयार किए गए मराठी विश्वकोश (ज्ञानकोश) और शब्दरत्नाकर में 11 लाख से 13 लाख के बीच शब्द शामिल थे। उन्होंने तुलना करते हुए बताया कि ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी में लगभग 6,00,000 शब्द हैं, जबकि मैंडरिन, स्पैनिश और फेंच जैसी भाषाओं में लगभग 3,00,000 से 3,50,000 शब्द हैं। राज्य सरकार द्वारा प्रकाशित आधिकारिक मराठी शब्दकोश में अभी लगभग 3,00,000 शब्द हैं, और मुख्यमंत्री ने इसके शब्द-भंडार को बढ़ाकर 13 लाख (1.3 मिलियन) शब्द करने के लिए अगले संस्करणों पर काम करने की जरूरत पर जोर दिया। मराठी के समृद्ध शब्द-भंडार का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसकी विश्वकोशीय और शब्दकोशीय परंपराओं के महत्व को रेखांकित किया। अलग-अलग शब्दकोशों में दर्ज लाखों शब्द मराठी की गहरी भाषाई विरासत को दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि यह शब्द-भंडार सिर्फ गर्व का विषय नहीं रहना चाहिए, बल्कि आधुनिक ज्ञान-निर्माण में इसका प्रभावी ढंग से इस्तेमाल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विज्ञान, तकनीक, अर्थशास्त्र, शिक्षा और शोध से जुड़े कॉन्सेप्ट्स को मराठी में उपलब्ध कराने से यह सचमुच ज्ञान की भाषा बन जाएगी। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि डिजिटल तकनीक की वजह से बातचीत के माध्यम तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे माहौल में मराठी को पारंपरिक इस्तेमाल तक ही सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि नई तकनीक के साथ जोड़ना चाहिए। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में भाषा की प्रभावी मौजूदगी बढ़ाने, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जानकारी और ज्ञान के संसाधन उपलब्ध कराने, और ओटीटी प्लेटफॉर्म व सोशल मीडिया पर उच्च-गुणवत्ता वाला मराठी कंटेंट बनाने के लिए ‘मराठी एआई’ का इस्तेमाल करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने भरोसा जताया कि क्वांटम कंप्यूटिंग, स्पेस टेक्नोलॉजी और बायोटेक्नोलॉजी जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में ज्ञान के संसाधन उपलब्ध कराने से युवा पीढ़ी अपनी मातृभाषा में आधुनिक ज्ञान को अपना सकेगी। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि मराठी सिर्फ महाराष्ट्र की पहचान नहीं, बल्कि उसका आत्म-सम्मान भी है। उन्होंने कहा कि संत ज्ञानेश्वर से लेकर छत्रपति शिवाजी महाराज तक की समृद्ध विरासत से सजी मराठी भाषा अब समुद्र पार कर चुकी है और दुनिया भर में अपनी छाप छोड़ चुकी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भविष्य में मराठी के वैश्विक विस्तार को तेज करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को भाषा से जोड़ने के लिए डिजिटल मीडिया, सोशल नेटवर्क, पॉडकास्ट, गेमिंग और कोडिंग जैसे आधुनिक क्षेत्रों में मराठी के इस्तेमाल को बढ़ाना जरूरी है। मराठी भाषा मंत्री उदय सामंत ने कहा कि राज्य सरकार मराठी भाषा और संस्कृति को संरक्षित करने, बढ़ावा देने और वैश्विक स्तर पर फैलाने के लिए प्रतिबद्ध है, और इसके सर्वांगीण विकास के लिए कई महत्वाकांक्षी पहल शुरू की गई हैं। उन्होंने बताया कि पुणे की डेक्कन यूनिवर्सिटी में मराठी के लिए एक ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’, लंदन में छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर एक ‘ग्लोबल मराठी सेंटर’, राज्य भर की विभिन्न क्षेत्रीय बोलियों के लिए 100 शब्दकोश और नौ ‘मराठी कौशल विकास केंद्र’ स्थापित करने का काम चल रहा है।

परगट सिंह ने पंजाब कांग्रेस के नए अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने के बाद गुरुद्वारा बंगला साहिब में टेका मत्था

चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस के नए अध्यक्ष बनने के बाद परगट सिंह ने शनिवार को गुरुद्वारा श्री बंगला साहिब में मत्था टेका। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करके इसकी जानकारी दी। परगट सिंह ने लिखा, “नानक नाम चढ़दी कला, तेरे भाणे सरबत दा भला। पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी मिलने पर मैंने गुरुद्वारा श्री बंगला साहिब में मत्था टेक कर गुरु साहिब का शुक्रिया अदा किया और सबकी भलाई के लिए अरदास की।” उन्होंने लिखा, “गुरु साहिब कृपा करें ताकि मैं इस जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी, विनम्रता और पंजाब की सेवा की भावना के साथ निभा सकूं।” मीडिया से बात करते हुए परगट सिंह ने कहा, “पंजाब गुरुओं के नाम पर बसता है और पंजाबियों ने हमेशा नफरत की राजनीति को हराया है। देश भर में जो नफरत की राजनीति की जा रही है, उसे पंजाबी कभी स्वीकार नहीं करेंगे।” उन्होंने कहा, “दूसरा, पंजाब ने ऐतिहासिक रूप से हमेशा आक्रमणकारियों और लुटेरों के खिलाफ खड़े होकर लड़ाई लड़ी है। पंजाब की मौजूदा सरकार भी मनमानी और लूटपाट कर रही है। घरों और संपत्तियों पर अवैध कब्जा तक इन लुटेरों के जरिए करवाया जा रहा है। पंजाब के खजाने का भी उसी तरह दुरुपयोग हो रहा है। मेरा मानना है कि पंजाबियों को पंजाब के लिए खड़ा होना चाहिए।” जब उनसे पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा, “बिल्कुल भी कोई गुटबाजी नहीं है। जब भी आप पंजाब की राजनीति या पंजाब टीम पर चर्चा करना चाहें, तो आप मुझसे बात कर सकते हैं। मैं एक टीम प्लेयर हूं। सभी वरिष्ठ नेताओं का मेरे दिल में बहुत सम्मान है और हम हर फैसला सर्वसम्मति से लेंगे।” मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर पूछे गए सवाल पर परगट सिंह ने कहा, “सभी को निमंत्रण मिलेगा और उन्हें पूरा सम्मान दिया जाएगा और हमारे आगे बैठाया जाएगा, इसलिए इस बारे में बिल्कुल भी कोई मुद्दा नहीं है।” उन्होंने पूर्व अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को लेकर कहा, “अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने हमारे अध्यक्ष के रूप में लगभग चार से पांच साल तक सेवा की, कड़ी मेहनत की और अच्छा काम किया, लेकिन संगठन में भूमिकाएं एक चलती-फिरती प्रक्रिया है। कल मैं सचिव या महासचिव के रूप में सेवा कर रहा था और आज हम एक सामूहिक इकाई के रूप में काम करते हैं। राजा वड़िंग हमारी टीम के लिए मूल्यवान हैं और हमारे बीच मतभेद या विभाजन का कोई निशान नहीं है। मैं सभी वरिष्ठ नेताओं का सम्मान करता हूं, वे मेरा सम्मान करते हैं और हमारी एकमात्र प्राथमिकता और फोकस पंजाब है।” पंजाब चुनाव की तैयारियों पर परगट सिंह ने कहा, “हमारी टीम बहुत अच्छी है। हम एक टीम के रूप में आगे बढ़ते हैं। हमारे पास बहुत समय है। ये दूसरी टीमें 15-20 मिनट भी नहीं टिक पाएंगी।