जैकी श्रॉफ ने वैजयंती माला को दी बर्थडे विश, शेयर किया खास वीडियो

मुंबई। बीते जमाने की लोकप्रिय अभिनेत्री और शास्त्रीय नृत्यांगना वैजयंती माला गुरुवार को अपना जन्मदिन मना रही हैं। इस मौके पर अभिनेता जैकी श्रॉफ ने उन्हें जन्मदिन की बधाई दी। अभिनेता ने इंस्टाग्राम स्टोरीज पर एक वीडियो पोस्ट की। इसमें वे वैजयंती माला के पैर छूकर उनसे आशीर्वाद ले रहे हैं, जिसे देखकर लगता है कि अभिनेता वैजयंती माला को बहुत मानते हैं। वीडियो पोस्ट कर अभिनेता ने लिखा, “जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं वैजयंती माला। आप हमेशा हमारे दिल में रहेंगी।” अभिनेत्री वैजयंती माला की बात करें, तो उन्हें भारतीय सिनेमा में ‘ट्विंकल टोज’ के रूप में जाना जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत मात्र 13 वर्ष की आयु में 1949 की तमिल फिल्म ‘वाझकई’ से की थी। इसके बाद उन्होंने हिंदी सिनेमा में वर्ष 1951 की फिल्म ‘बहार’ से प्रवेश किया, जो उनकी ही तमिल फिल्म का रीमेक थी। इसके बाद अभिनेत्री ने साल 1954 में रिलीज की गई फिल्म नागिन में काम किया था, जिसकी सफलता ने उन्हें हिंदी सिनेमा में एक स्थापित और लोकप्रिय स्टार बना दिया। फिल्म देवदास में चंद्रमुखी के यादगार किरदार के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सह-कलाकार का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला था, जिसे उन्होंने यह कहकर अस्वीकार कर दिया था कि उनका किरदार मुख्य अभिनेत्री के बराबर ही महत्वपूर्ण था। राजकपूर के साथ फिल्म संगम में काम किया, जो बाद में ब्लॉकबस्टर साबित हुई। इस फिल्म में उन्होंने राधा के रूप में उनके आधुनिक और साहसिक अंदाज ने उनके करियर को चरम पर पहुंचाया, जिसके लिए उन्हें तीसरा फिल्मफेयर पुरस्कार मिला था। फिल्मों के अलावा वह एक उम्दा शास्त्रीय नृत्यांगना थीं, जिन्होंने भारतीय नृत्य शैली को मुख्यधारा के सिनेमा में एक नई पहचान दी। करियर के पीक पर उन्होंने डॉक्टर चमनलाल बाली से शादी की और फिल्मों से दूरी बना ली। बाद में वह राजनीति में आईं और लोकसभा व राज्यसभा (कांग्रेस और बाद में भाजपा) की सांसद रहीं। कला के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें 1968 में पद्म श्री और वर्ष 2024 में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।
2026 में 50 गीगावाट सौर ऊर्जा क्षमता जोड़ने की राह पर भारत, घरेलू सप्लाई चेन को मजबूती देने वाली नीतियों से बढ़ी रफ्तार

नई दिल्ली। भारत वर्ष 2026 में सौर ऊर्जा क्षमता वृद्धि का नया रिकॉर्ड बनाने की ओर अग्रसर है। वुड मैकेंजी की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने वर्ष 2026 की पहली छमाही (जनवरी-जून) में 34 गीगावाट डायरेक्ट करंट (जीडब्ल्यूडीसी) सौर ऊर्जा क्षमता जोड़ी है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 38 प्रतिशत अधिक है। मौजूदा रफ्तार को देखते हुए पूरे वर्ष में भारत 50 गीगावाट से अधिक सौर ऊर्जा क्षमता जोड़ सकता है, जो देश के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक विस्तार होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत इस वर्ष अपने सौर ऊर्जा स्थापना इतिहास में किसी भी अन्य वर्ष की तुलना में सबसे अधिक क्षमता स्थापित करने जा रहा है। हालांकि, इस तेज वृद्धि को बढ़ावा देने वाली नीतियां घरेलू सप्लाई चेन पर दबाव भी पैदा कर रही हैं, जिसके चलते निकट अवधि में सौर परियोजनाओं की लागत बढ़ने की संभावना है। विशेषज्ञों के अनुसार, डेवलपर्स ने मॉडल और निर्माताओं की स्वीकृत सूची-II (एएलएमएम-II) की जून 2026 समयसीमा से पहले परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने का प्रयास किया। इसी वजह से वर्ष की पहली छमाही में सौर ऊर्जा परियोजनाओं के निर्माण और कमीशनिंग में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली। वुड मैकेंजी के रिसर्च एनालिस्ट सुरीत सिंह ने कहा कि एएलएमएम-II भारत में पूरी तरह एकीकृत घरेलू सौर सप्लाई चेन विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, सौर मॉड्यूल निर्माण क्षमता की तुलना में देश में सौर सेल निर्माण क्षमता अभी पर्याप्त गति से नहीं बढ़ पाई है। उनके अनुसार, निकट अवधि में लागत बढ़ना लगभग तय है और डेवलपर्स को कीमतों के स्थिर होने तक चुनौतीपूर्ण दौर से गुजरना पड़ सकता है। इस वर्ष सौर ऊर्जा क्षेत्र में तेजी का एक अन्य कारण अंतरराज्यीय ट्रांसमिशन शुल्क में मिलने वाली छूट का धीरे-धीरे कम होना भी रहा। जुलाई 2026 से कमीशन होने वाली परियोजनाओं के लिए यह छूट 75 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत कर दी गई है, जबकि जुलाई 2028 के बाद इसे पूरी तरह समाप्त करने की योजना है। इसी वजह से कई डेवलपर्स ने समयसीमा से पहले परियोजनाओं को पूरा करने में तेजी दिखाई। हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में यह रफ्तार कुछ धीमी पड़ सकती है, जिसकी मुख्य वजह घरेलू सौर सेल उत्पादन क्षमता की कमी और मॉड्यूल कीमतों में बढ़ोतरी है, जो नई परियोजनाओं के विकास पर दबाव डाल सकती है। फिर भी, कुछ राहत भरे संकेत भी हैं। सरकार ने नेट मीटरिंग और ओपन एक्सेस परियोजनाओं को 31 दिसंबर 2026 तक एएलएमएम-II नियमों से छूट दी है। इससे आने वाले महीनों में अतिरिक्त क्षमता जुड़ने की संभावना बनी हुई है। इसके अलावा, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने जुलाई 2026 में उन परियोजनाओं के लिए भी राहत दी, जो लगभग पूर्ण होने की अवस्था में थीं। मंत्रालय ने 23 जुलाई 2026 तक आवेदन करने वाली परियोजनाओं को एएलएमएम-II की अनिवार्यता से छूट प्रदान करने पर सहमति जताई। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि एएलएमएम-II के लागू होने से चीन से सीधे सौर सेल आयात में कमी आई है। हालांकि आयात पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि इसका स्रोत बदल गया है। शुरुआती 2026 में इंडोनेशिया से सौर सेल आयात लगभग तीन गुना बढ़ गया, जिससे स्पष्ट है कि कंपनियां वैकल्पिक स्रोतों की तलाश कर रही हैं। वर्ष 2026 के पहले पांच महीनों में भारत ने 5 गीगावाट वेफर्स और 20 गीगावाट सौर सेल आयात किए। घरेलू सौर सेल उत्पादन को समर्थन देने के लिए वेफर आयात में सालाना आधार पर 86 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वुड मैकेंजी के एक अन्य रिसर्च एनालिस्ट मैथ्यू थॉमस के अनुसार, जैसे-जैसे देश में अतिरिक्त सौर सेल निर्माण क्षमता स्थापित होगी, कीमतों में धीरे-धीरे स्थिरता आएगी। उनका मानना है कि 2029 तक बाजार अधिक संतुलित स्थिति में पहुंच सकता है, लेकिन इसके लिए नीतिगत स्थिरता और निर्माताओं द्वारा समय पर क्षमता विस्तार बेहद जरूरी होगा।
ऑस्ट्रेलिया के सभी राज्यों में पहुंचा बर्ड फ्लू, तस्मानिया में प्रवासी पक्षी में मिला अत्यधिक संक्रामक एच5एन1

मेलबर्न। ऑस्ट्रेलिया के द्वीपीय राज्य तस्मानिया में गुरुवार को एच5एन1 बर्ड फ्लू (एवियन इन्फ्लूएंजा) का पहला पुष्ट मामला दर्ज किया गया। इसके साथ ही यह खतरनाक वायरस अब ऑस्ट्रेलिया के सभी राज्यों में पाया जा चुका है। तस्मानिया के प्राथमिक उद्योग और जल मंत्री गेविन पियर्स ने पत्रकारों को बताया कि राज्य के उत्तर-पश्चिमी तट पर मृत पाए गए एक प्रवासी ब्राउन स्कुआ पक्षी की जांच में अत्यधिक संक्रामक एच5एन1 एवियन इन्फ्लूएंजा की पुष्टि हुई है। उन्होंने बताया कि इस पक्षी को ‘पार्क्स एंड वाइल्डलाइफ सर्विस’ के कर्मचारियों ने खोजा था, जो तटीय इलाकों में लगातार निगरानी कर रहे थे। इसके साथ ही तस्मानिया, एच5एन1 के मामले की पुष्टि करने वाला ऑस्ट्रेलिया का छठा और अंतिम राज्य बन गया है। इस वायरस का पहला मामला जून में वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया (डब्ल्यूए) में सामने आया था। पियर्स ने कहा कि राज्य की एजेंसियां उद्योग जगत, वन्यजीव विशेषज्ञों और जैव सुरक्षा विशेषज्ञों के साथ मिलकर निगरानी, तैयारी और प्रतिक्रिया व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर काम कर रही हैं। उन्होंने कहा, “मैं तस्मानिया के लोगों को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि हम एच5 बर्ड फ्लू से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और जैसे-जैसे नई जानकारी मिलेगी, हम लगातार अपडेट देते रहेंगे।” समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया की कृषि मंत्री जूली कॉलिन्स ने मंगलवार को घोषणा की थी कि संघीय सरकार ने एच5एन1 वैक्सीन की शुरुआती 1,500 शीशियां (वायल) खरीदी हैं। इनका उपयोग कैद में रखे गए उच्च जोखिम वाले पक्षियों के टीकाकरण के लिए किया जाएगा। तस्मानिया के पर्यावरण मंत्री गाय बार्नेट ने गुरुवार को कहा कि आवश्यक मंजूरी मिलने के बाद राज्य कैद में रखे गए अत्यंत संकटग्रस्त ऑरेंज-बेलीड पैरट प्रजाति के लगभग 350 पक्षियों का टीकाकरण शुरू करेगा। एवियन इन्फ्लूएंजा ए(एच5एन1) इन्फ्लूएंजा वायरस का एक प्रकार है, जो मुख्य रूप से पक्षियों को संक्रमित करता है, लेकिन कुछ दुर्लभ मामलों में स्तनधारियों और इंसानों को भी प्रभावित कर सकता है। एच5एन1 वायरस की गूज/ग्वांगडोंग वंश पहली बार 1996 में सामने आई थी और तब से यह पक्षियों में लगातार प्रकोप का कारण बनती रही है। साल 2020 के बाद, एच5 क्लेड 2.3.4.4बी नामक एक नए स्वरूप ने अफ्रीका, एशिया और यूरोप के कई देशों में जंगली पक्षियों और पोल्ट्री में अभूतपूर्व स्तर पर मौतें दर्ज कराईं। इसके बाद 2021 में यह वायरस उत्तरी अमेरिका और 2022 में मध्य तथा दक्षिण अमेरिका तक फैल गया।
बेहतर मां की जिम्मेदारी निभाना चाहती हूं, ट्रंप की सलाहकार के तौर पर रहूंगी साथ: कैरोलिन लेविट

वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा की है। उन्होंने इसके पीछे की वजह एक मां के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाना बताया। उन्होंने कहा कि परिवार और दो छोटे बच्चों को समय देने के लिए वह व्हाइट हाउस छोड़ रही हैं, हालांकि लेविट ने स्पष्ट किया कि वह बाहर से ट्रंप की प्रमुख सलाहकार के तौर पर काम करती रहेंगी और रिपब्लिकन पार्टी का समर्थन जारी रखेंगी। कैरोलिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, ”पिछले डेढ़ साल तक व्हाइट हाउस प्रेस सचिव के रूप में सेवा करना मेरे जीवन का सबसे बड़ा सम्मान और सबसे यादगार अनुभव रहा है। मैं राष्ट्रपति ट्रंप की बेहद आभारी हूं कि उन्होंने मुझे इतने असाधारण अवसर दिए। मुझे वेस्ट विंग में काम करने, ओवल ऑफिस में अनगिनत घंटे बिताने, दुनिया भर की यात्राएं करने, विदेशी नेताओं से मिलने और हमारे खूबसूरत देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर हर वर्ग के अमेरिकी नागरिकों से मिलने का मौका मिला।” लेविट ने कहा, ”सबसे बढ़कर मैं राष्ट्रपति की आभारी हूं कि उन्होंने मुझे व्हाइट हाउस के पोडियम से उनकी ओर से बोलने की जिम्मेदारी और सम्मान दिया। मैंने इस प्रशासन की कई ऐतिहासिक उपलब्धियों के बारे में हमेशा गर्व के साथ बात की है। साथ ही मुझे यह सुनिश्चित करने में भी संतोष मिला कि मीडिया जवाबदेह रहे और अमेरिकी लोगों तक राष्ट्रपति ट्रंप की सफलताओं के बारे में सच्ची जानकारी पहुंचे।” कैरोलिन ने बताया कि एक मां होना और इसी दौरान अपने परिवार में एक नए बच्चे का स्वागत करना, जबकि दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण नौकरियों में से एक को निभाना, मेरे जीवन का सबसे संतोषजनक लेकिन सबसे कठिन दौर रहा है। सच कहूं तो अपनी बेटी के जन्म के बाद जब मैं वापस व्हाइट हाउस लौटी, तो मुझे दिल से महसूस हुआ कि व्हाइट हाउस प्रेस सचिव की भूमिका में जितना समय, ऊर्जा और ध्यान देना पड़ता है, उसके साथ मैं अपने दो छोटे बच्चों की वैसी मां नहीं बन पा रही हूं, जिसकी वे हकदार हैं। यही वजह है कि मैंने भारी मन से व्हाइट हाउस छोड़ने और अपने जीवन के एक नए अध्याय की शुरुआत करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने मुझसे कहा है कि मैं बाहर से भी उनकी एक प्रमुख सलाहकार के रूप में काम करती रहूं। मैं हमेशा एमएजीए आंदोलन और रिपब्लिकन पार्टी की खुलकर समर्थक बनी रहूंगी। उन्होंने कहा कि हमारा देश, मेरे विचार में, डेमोक्रेटिक पार्टी के बढ़ते कट्टरपंथी रुझानों से एक गंभीर चुनौती का सामना कर रहा है। मेरा मानना है कि जो लोग इस देश की परवाह करते हैं, उन सभी की जिम्मेदारी है कि वे इस चुनौती का मुकाबला करें। मेरी लड़ाई अब एक नए चरण में प्रवेश कर रही है, लेकिन यह अभी खत्म नहीं हुई है। कैरोलिन ने कहा, ”मैं एक बार फिर राष्ट्रपति, प्रथम महिला और पूरे ट्रंप परिवार का वर्षों से मिले उनके स्नेह और उदारता के लिए धन्यवाद करती हूं। हमारी शानदार चीफ ऑफ स्टाफ सूसी वाइल्स का भी धन्यवाद, जिन्होंने अभियान में मुझे नियुक्त करने के पहले दिन से ही मुझ पर भरोसा किया और मुझे आगे बढ़ने का मौका दिया। साथ ही राष्ट्रपति के मंत्रिमंडल, मेरे स्टाफ, सहयोगियों और व्हाइट हाउस के उन सभी मित्रों का भी धन्यवाद, जो हमारे देश के लिए इतनी मेहनत करते हैं। इतने प्रतिभाशाली और समर्पित लोगों के साथ काम करना मेरे लिए सम्मान की बात रही है और आने वाले ढाई वर्षों में उनकी सफलताओं को देखकर मुझे खुशी होगी।” कैरोलिन ने कहा मैं अपने प्यार करने वाले और हमेशा साथ देने वाले पति तथा अपने परिवार का धन्यवाद करती हूं, जिन्होंने मुझे यह जिम्मेदारी निभाने के लिए बहुत त्याग किए।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कपिलेश्वर मंदिर का वीडियो साझा किया, लिखा-अल्मोड़ा आने पर शिवधाम के दर्शन अवश्य करें

देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को अल्मोड़ा के कपिलेश्वर शिव मंदिर का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किया है। सावन के पावन महीने में उन्होंने श्रद्धालुओं से शिवधाम का दर्शन करने के लिए आग्रह किया है। सीएम धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वीडियो साझा करते हुए लिखा, “अल्मोड़ा शहर से लगभग 12 किलोमीटर दूर सिमल्टी गांव के पास स्थित कपिलेश्वर शिव मंदिर उत्तराखंड के प्राचीन मंदिरों में से एक माना जाता है। कत्यूरी शासनकाल में निर्मित यह मंदिर अपनी विशिष्ट स्थापत्य कला और आध्यात्मिक आभा के लिए विशेष पहचान रखता है।” उन्होंने लिखा, “पवित्र सावन मास में यहां विशेष पूजा-अर्चना एवं धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होता है, जिससे मंदिर का वातावरण और भी भक्तिमय हो उठता है। अल्मोड़ा जनपद आगमन पर इस शिवधाम के दर्शन अवश्य करें।” मुख्यमंत्री की ओर से 12 अगस्त को ऋषिकेश के पास पौड़ी गढ़वाल जिले में स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर का एक वीडिया साझा कर जानकारी दी गई थी। उन्होंने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा था, “ऋषिकेश के निकट पौड़ी गढ़वाल जनपद में स्थित देवाधिदेव महादेव को समर्पित नीलकंठ महादेव मंदिर अत्यंत पावन तीर्थस्थल है। पौराणिक मान्यताओं और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण यह धाम सावन मास में विशेष आस्था का केंद्र बन जाता है।” सीएम ने आगे लिखा था, “देशभर से लाखों शिवभक्त कांवड़ में गंगाजल लेकर नीलकंठ महादेव पहुंचते हैं और भोलेनाथ का जलाभिषेक कर उनकी कृपा एवं आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। पौड़ी गढ़वाल जनपद आगमन पर आप भी इस पावन मंदिर के दर्शन अवश्य करें।” मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से 11 अगस्त को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा था, “कांवड़ मेला-2026 के सफल एवं सुव्यवस्थित आयोजन में सहभागी बने देशभर से आए सभी शिवभक्तों का हृदय से आभार एवं अभिनन्दन।” उन्होंने लिखा था, “इस वर्ष देवभूमि उत्तराखण्ड ने श्रद्धा के ऐसे विराट स्वरूप का साक्षात्कार किया, जहां करोड़ों शिवभक्तों की आस्था के साथ सेवा, अनुशासन और व्यवस्था का अद्भुत समन्वय दिखाई दिया। इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आगमन भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा और उत्तराखण्ड की सेवा एवं आतिथ्य परंपरा में उनके विश्वास को दर्शाता है।” सीएम धामी ने लिखा था, “इस विशाल जनसमागम को सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित बनाने में प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, आपदा प्रबंधन दल, स्वच्छता कर्मियों, स्वयंसेवी संगठनों, धार्मिक-सामाजिक संस्थाओं एवं स्थानीय नागरिकों का योगदान सराहनीय रहा। महादेव से प्रार्थना है कि समस्त शिवभक्तों पर उनकी कृपा बनी रहे और सभी की मनोकामनाएं पूर्ण हों। हर हर महादेव!
सपा सांसदों ने सरकार पर संसदीय परंपराओं और नियमों की अनदेखी का लगाया आरोप

नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद रामगोपाल यादव ने सरकार पर संसदीय परंपराओं और नियमों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सत्ता पक्ष की जिद के कारण पूरे सत्र के दौरान कई विधेयक जबरदस्ती पारित कराए गए। उन्होंने कहा कि जिस तरीके से इन विधेयकों को पारित कराया गया, वह संसदीय लोकतंत्र की स्थापित परंपराओं के अनुरूप नहीं है। विपक्ष ऐसी कार्यप्रणाली को स्वीकार नहीं कर सकता। सपा सांसद रामगोपाल यादव ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि सरकार में बैठे लोगों को अपने अहंकार या जिद को विपक्ष की जायज मांगों के रास्ते में नहीं आने देना चाहिए। संसद में कानून बनाने के लिए नियम और परंपराएं निर्धारित हैं और उनका पालन किया जाना जरूरी है। गृह मंत्री अमित शाह के संसद में बयान देने की तैयारी के मुद्दे पर सपा सांसद ने कहा कि सरकार की ओर से बताया गया है कि विपक्षी दल अपने सवाल लोकसभा अध्यक्ष को लिखित रूप में दें, जिनका जवाब दिया जाएगा। उन्होंने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह संसद की स्थापित परंपरा नहीं रही है। उन्होंने कहा, “हमेशा से यही तरीका रहा है कि मंत्री सदन में बयान देते हैं और इसके बाद सभी दलों के सांसद तय समय के भीतर अपने सवाल पूछकर संबंधित मुद्दों पर स्पष्टीकरण मांगते हैं। संसद इसी तरह काम करती है।” रामगोपाल यादव ने कहा कि विपक्ष इस व्यवस्था को स्वीकार नहीं कर सकता और केवल इसलिए अपनी आपत्ति वापस नहीं लेगा कि सत्ताधारी दल बार-बार यह आरोप लगा रहा है कि विपक्ष संसद से भाग रहा है। उन्होंने कहा कि यदि हर दिन संसदीय परंपराओं और रीति-रिवाजों को तोड़ा जाएगा, तो विपक्ष ऐसी प्रक्रिया में शामिल क्यों हो। सरकार को लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली और विपक्ष की भूमिका का सम्मान करना चाहिए। महाराष्ट्र सरकार की ओर से टैक्सी और ऑटो-रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य किए जाने के फैसले पर भी रामगोपाल यादव ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देश में कोई भी व्यक्ति इस तरह के कदम से सहमत नहीं है और किसी भी सरकार को ऐसा फैसला नहीं लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी “विविधता में एकता” है। अगर देश के भीतर लोगों को भाषा के आधार पर बांटने की कोशिश की जाती है, तो यह बेहद संकीर्ण सोच को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि भाषा के नाम पर विभाजन देश की एकता और सामाजिक सौहार्द के लिए उचित नहीं है। राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपों के मुद्दे पर भी सपा सांसद ने सरकार से सदन में बयान देने की मांग की। उन्होंने कहा कि विपक्ष केवल इस मामले पर सरकार का बयान चाहता है। उनके अनुसार, आस्था से जुड़े मामले में गंभीर चोरी के आरोप लगे हैं और यह घटना ऐसी जगह हुई, जो सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की निगरानी में थी। वहीं, उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार बनने पर आजम खान को गृह मंत्री बनाए जाने संबंधी सपा विधायक शिवपाल सिंह यादव के बयान पर पार्टी सांसद हरेंद्र मलिक ने कहा कि जब भी प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनी है, आजम खान सरकार का हिस्सा रहे हैं और आगे भी रहेंगे।
हर घर तिरंगा अभियान: जेपी नड्डा ने आवास पर फहराया राष्ट्रीय ध्वज, राम मोहन नायडू ने लिया तिरंगा रैली में हिस्सा

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने गुरुवार को ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत अपने आवास पर राष्ट्रीय ध्वज स्थापित किया। उन्होंने कहा कि आज हमारा संकल्प ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत’ के निर्माण का है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश के प्रति समर्पण, राष्ट्रभक्ति और एकता बेहद जरूरी है। जेपी नड्डा ने कहा, “हम सब जानते हैं कि भाजपा की ओर से 9 अगस्त से 15 अगस्त तक पूरे देश में ‘तिरंगा यात्रा’ और ‘हर घर तिरंगा’ अभियान चलाया जा रहा है। इसी के तहत देश के हर शहर और गांव में तिरंगा यात्राएं निकाली जा रही हैं, जिनमें लोग देशभक्ति के गानों के साथ अपने आप को समावेश कर रहे हैं। सब जानते हैं कि देश की आजादी के 75 साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री मोदी ने 2022 में यह आह्वान किया था कि यह कोई सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनआंदोलन बनना चाहिए।” उन्होंने कहा, “आज हर घर पर तिरंगा फहराया जाता है। आज मुझे भी अपने निवास पर परिवार के साथ तिरंगा फहराने का सौभाग्य मिला। मेरे साथ ही देश के करोड़ों लोग अपने-अपने घरों पर तिरंगा फहराकर इस जनआंदोलन का हिस्सा बन रहे हैं और राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत होकर भारत को आगे बढ़ाने का संकल्प ले रहे हैं।” नड्डा ने यह भी कहा कि आज हमारा संकल्प ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत’ के निर्माण का है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश के प्रति समर्पण, राष्ट्रभक्ति और एकता बेहद जरूरी है। इसलिए मैं भी इस तिरंगा यात्रा और हर घर तिरंगा अभियान के जनआंदोलन में स्वयं को सहभागी मानता हूं और देशवासियों को इसकी हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। आइए, हर घर तिरंगा फहराएं और राष्ट्रभक्ति की भावना के साथ ‘विकसित व आत्मनिर्भर भारत’ के निर्माण का संकल्प लें। वहीं, दिल्ली में गुरुवार को नागर विमानन मंत्रालय ने ‘हर घर तिरंगा’ पहल के तहत तिरंगा रैली निकाली। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने राजीव गांधी भवन से इस रैली को झंडी दिखाई और इसका नेतृत्व किया। केंद्रीय मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा, “पिछले 12 सालों में हमारे देश ने जिस तरह से विकास किया है और हमारे सम्मानित प्रधानमंत्री के विजन से आगे बढ़ा है, उसी तरह हमने अपने मंत्रालय में भी कई अहम उपलब्धियां हासिल की हैं। आज एक आम नागरिक भी गर्व के साथ हवाई यात्रा कर सकता है। हम इस सेक्टर को अधिक मजबूत बनाएंगे और इसे आगे ले जाएंगे। हम ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।” राम मोहन नायडू ने कहा, “आजादी की लड़ाई के दौरान हमारे पूर्वजों के संघर्ष का सम्मान करना और उससे प्रेरणा लेना हमारी जिम्मेदारी है। हमारे सम्मानित प्रधानमंत्री ने राष्ट्रगीत के बारे में भी एक अच्छा फैसला लिया था और संसद ने इसे उचित सम्मान दिलाने के लिए एक कानून पास किया था। सभी ने इसे स्वीकार किया है और कश्मीर से कन्याकुमारी तक के लोग राष्ट्रगीत से जुड़े हुए हैं। यह हमारे लिए बहुत अच्छी बात है।
‘हर घर तिरंगा’ अभियान में सीएम भूपेंद्र पटेल ने लिया हिस्सा, लिखा-‘राष्ट्रीय यज्ञ में शामिल होने का संकल्प लें’

गांधीनगर। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गुरुवार को घर की छत पर तिरंगा फहराकर ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में हिस्सा लिया। ‘हर घर तिरंगा’ अभियान देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस और वंदे मातरम गीत की 150वीं वर्षगांठ की थीम पर आयोजित किया गया है। इस अभियान के तहत पूरे गुजरात में 70 लाख से ज्यादा घरों पर तिरंगा फहराया जाएगा। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी के मार्गदर्शन में 9 से 17 अगस्त तक पूरे देश में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान आयोजित किया जा रहा है। देश की आजादी की 80वीं वर्षगांठ और ‘वंदे मातरम’ के 150वें उत्सव के इस पावन अवसर पर, आज सुबह गांधीनगर स्थित अपने आवास पर मैंने तिरंगा फहराया और राष्ट्र के प्रति समर्पण का संकल्प दोहराया। उन्होंने लिखा, “सीमावर्ती गांवों से लेकर महानगरों तक, आइए हम गुजरात में ज़्यादा से ज़्यादा घरों पर तिरंगा फहराएं; आइए हम सब उत्साह के साथ इस महान राष्ट्रीय यज्ञ में शामिल होने का संकल्प लें।” उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी अहमदाबाद में बुधवार को निकाले गए तिरंगा यात्रा में शामिल हुए थे। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा था, “देशभक्ति की भव्य यात्रा-तिरंगा यात्रा! आजादी के 80वें जश्न के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में और ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत हमें अहमदाबाद में भारी जनसमूह के साथ आयोजित तिरंगा यात्रा में शामिल होने का मौका मिला। हर्ष संघवी ने लिखा था, “प्रधानमंत्री मोदी के आह्वान को स्वीकार करते हुए, सभी के सहयोग और देशभक्ति की भावना से, ‘हर घर तिरंगा’ अभियान, जो भारत माता की महिमा का गुणगान करता है, पूरे देश में फैल गया है। भाजपा की ओर से सोशल मीडिया पर लिखा गया, “दिल्ली की धरती पर निकली भव्य तिरंगा यात्रा राष्ट्रभक्ति, एकता और राष्ट्रीय गौरव का अद्भुत संदेश दे रही है। आइए, स्वतंत्रता के इस पावन पर्व पर हर घर तिरंगा लहराएं और देश की एकता, अखंडता एवं संप्रभुता के प्रति अपने संकल्प को और मजबूत करें। हर घर तिरंगा, हर दिल तिरंगा!
अमेरिकी सीनेटरों ने ‘स्पेस फोर्स’ की तैयारी मजबूत करने को पेश किया बिल, गार्डियंस की ट्रेनिंग बढ़ेगी

वॉशिंगटन। अमेरिका के दो सीनेटरों ने दोनों पार्टियों के समर्थन वाला एक बिल पेश किया, जिसका उद्देश्य ‘स्पेस फोर्स’ की तैयारियों को मजबूत करना है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब चीन अंतरिक्ष क्षेत्र में अपनी सैन्य और व्यावसायिक क्षमताओं का तेजी से विस्तार कर रहा है। अलबामा की रिपब्लिकन सीनेटर केटी ब्रिट और नेवादा की डेमोक्रेटिक सीनेटर कैथरीन कॉर्टेज मास्टो ने बुधवार को ‘स्पेस सुपीरियोरिटी रेडीनेस एक्ट 2026’ पेश किया। इस विधेयक के तहत ‘स्पेस फोर्स’ के सदस्यों, जिन्हें गार्डियंस कहा जाता है, के लिए वॉरगेमिंग, मॉडलिंग, सिमुलेशन और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी संभावित संघर्ष की स्थिति में अमेरिकी अंतरिक्ष ऑपरेटर अंतरिक्ष में बढ़त कायम रख सकें और उसे बनाए रख सकें। अमेरिकी सैन्य बल काफी हद तक अंतरिक्ष आधारित प्रणालियों पर निर्भर हैं। ये प्रणालियां मिसाइल चेतावनी, नेविगेशन, संचार, खुफिया जानकारी, निगरानी, टोही और लक्ष्य निर्धारण जैसे महत्वपूर्ण कामों में मदद करती हैं। यदि ये सेवाएं बाधित होती हैं, तो किसी संघर्ष की शुरुआत में अमेरिकी सैन्य अभियानों पर गंभीर असर पड़ सकता है। सीनेटर केटी ब्रिट ने कहा, “यह अच्छी तरह दर्ज है कि चीन अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रभुत्व हासिल करने के लिए दृढ़ संकल्पित है और वह वाणिज्यिक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निवेश करके अपने अंतरिक्ष कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रहा है।” उन्होंने कहा, “स्पेस सुपीरियोरिटी रेडीनेस एक्ट 2026 यह दिखाता है कि युद्ध संचालन के क्षेत्र के रूप में अंतरिक्ष कितना महत्वपूर्ण हो चुका है।” ब्रिट के अनुसार, चीन के साथ किसी संभावित संघर्ष की स्थिति में अमेरिका को अंतरिक्ष पर नियंत्रण बनाए रखने में सक्षम होना चाहिए। साथ ही उसके पास उभरते खतरों का सामना करने के लिए आवश्यक संसाधन और क्षमताएं भी होनी चाहिए। इस प्रस्तावित कानून के तहत ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम अनिवार्य किए जाएंगे जो अंतरिक्ष अभियानों में अमेरिका की बढ़त बनाए रखने के लिए जरूरी रणनीतियों, तकनीकों और प्रक्रियाओं पर केंद्रित होंगे। विधेयक में यह भी प्रावधान है कि प्रशासन कांग्रेस को चीन की वाणिज्यिक अंतरिक्ष क्षमताओं और उनके संभावित सैन्य उपयोगों पर एक सार्वजनिक रिपोर्ट सौंपे। कानून बनने के 180 दिनों के भीतर यह रिपोर्ट पेश करनी होगी। दोनों सीनेटरों ने अमेरिका-चीन आर्थिक और सुरक्षा समीक्षा आयोग की उन चेतावनियों का हवाला दिया, जिनमें कहा गया है कि बीजिंग तेजी से अपनी अंतरिक्ष और काउंटरस्पेस क्षमताओं का विकास कर रहा है। सीनेटर कैथरीन कॉर्टेज ने कहा, “अंतरिक्ष एक अत्याधुनिक क्षेत्र है जिसे हमें गंभीरता से लेना होगा। कम्युनिस्ट चीन अंतरिक्ष में अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ा रहा है और अमेरिका पीछे रहने का जोखिम नहीं उठा सकता।” हाल ही में दोनों सीनेटरों ने ग्रीनलैंड स्थित पिटुफिक स्पेस बेस का दौरा किया था, जो मिसाइल चेतावनी, मिसाइल रक्षा और अंतरिक्ष निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कॉर्टेज मास्टो ने कहा, “सीनेटर ब्रिट और मैंने हाल ही में पिटुफिक स्पेस बेस में अमेरिकी स्पेस फोर्स के शानदार काम को करीब से देखा। मुझे विश्वास है कि यदि गार्डियंस को आवश्यक उपकरण, प्रशिक्षण और संसाधन मिलते रहे, तो वे किसी भी खतरे का सामना करने के लिए तैयार रहेंगे।” ब्रिट ने अमेरिकी स्पेस कमांड के मुख्यालय को हंट्सविल, अलाबामा स्थानांतरित करने के प्रयासों का भी समर्थन किया है। उन्होंने मार्शल स्पेस फ्लाइट सेंटर और स्पेस लॉन्च सिस्टम का भी समर्थन किया है, जिसने हाल ही में आर्टेमिस-II मिशन को शक्ति प्रदान की थी। अमेरिकी स्पेस फोर्स की स्थापना दिसंबर 2019 में अमेरिकी सशस्त्र बलों की छठी शाखा के रूप में की गई थी। यह वायु सेना विभाग के अंतर्गत काम करती है और अंतरिक्ष में सैन्य अभियानों के लिए बलों को संगठित करने, प्रशिक्षित करने और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी निभाती है।
कोलंबिया में भूकंप में बढ़ता जा रहा मौत का आंकड़ा, अब तक 265 ने गंवाई जान, 496 अब भी लापता

नई दिल्ली। पश्चिमी कोलंबिया में सोमवार को आए 7.4 तीव्रता के भूकंप में मरने वालों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। राष्ट्रपति अबेलार्डो डे ला एस्प्रीएला ने बताया कि इस विनाशकारी भूकंप में अब तक 265 लोगों की मौत दर्ज की गई है। वहीं 496 लोग अभी भी लापता हैं। रूसी समाचार एजेंसी ‘टास’ की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति अबेलार्डो ने बताया कि कोलंबिया के पश्चिमी हिस्से में आए भूकंप में मरने वालों की संख्या बढ़कर 265 हो गई है। 3,494 लोग घायल हुए हैं और लापता लोगों की संख्या बढ़कर 496 हो गई है। राष्ट्रपति के मुताबिक, इस आपदा में 11,347 घर पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, जबकि 53,526 घरों को नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा 140 इमारतें ढह गई हैं। वहीं 179 स्वास्थ्य केंद्रों और चिकित्सा संस्थानों को भी संरचनात्मक नुकसान हुआ है। समाचार एजेंसी ‘टास’ के अनुसार, दस अगस्त को चोको विभाग के सैन जोस देल पाल्मार शहर के पास 7.4 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसके बाद बड़े पैमाने पर तबाही हुई। राष्ट्रपति ने बताया कि राहत और बचाव कार्य अभी भी जारी हैं, जबकि अधिकारियों की कोशिश है कि लापता लोगों का जल्द से जल्द पता लगाया जा सके। दुनियाभर के कई नेताओं ने कोलंबिया के लोगों के प्रति अपनी संवेदना और समर्थन व्यक्त किया है। यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने हर संभव मदद की बात कही। प्रेसिडेंट उर्सुला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, ”कोलंबिया में खोज और बचाव अभियान लगातार जारी हैं, और ऐसे समय में यूरोपीय संघ (ईयू) हर संभव तरीके से देश की मदद कर रहा है। सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों की सहायता के लिए 20 लाख यूरो की मदद उपलब्ध कराई जा रही है।” उन्होंने कहा कि कोलंबिया की ओर से सिविल प्रोटेक्शन मैकेनिज्म सक्रिय किए जाने के बाद, यूरोपीय संघ स्थानीय जरूरतों के अनुसार सहायता पहुंचाने और उसे जमीनी आवश्यकताओं से मेल कराने के लिए काम कर रहा है। यही है यूरोपीय एकजुटता और सहयोग की भावना।