बिहार के पहाड़ी क्षेत्रों में ईको टूरिज्म और सोलराइजेशन पर जोर, पीपीपी मोड में तेजी से काम करने के निर्देश

पटना। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य के प्राकृतिक और पहाड़ी क्षेत्रों में ईको टूरिज्म और सोलराइजेशन से जुड़ी परियोजनाओं पर तेजी से काम करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जरूरत के अनुसार जन-निजी भागीदारी यानी पीपीपी मोड में ईको टूरिज्म की योजनाएं विकसित की जाएं। साथ ही पहाड़ी क्षेत्रों में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सोलराइजेशन का काम कराया जाए। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में लोक सेवक आवास स्थित ‘संकल्प’ सभागार में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की समीक्षा बैठक हुई। बैठक में विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर ने प्रस्तुतीकरण के जरिए विभाग के कामकाज की जानकारी दी। इस दौरान राज्य में ईको टूरिज्म की संभावनाओं, जलाशयों और डैम के आसपास पर्यटक सुविधाओं के विकास, पौधारोपण और पर्वतीय एवं वन क्षेत्रों में पर्यावरण अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देने की योजनाओं पर चर्चा हुई। बैठक में बांका के ओढ़नी डैम, मुंगेर के खड़गपुर डैम, नवादा के ताराकोल डैम और मुंगेर के जालकुंड डैम के आसपास ईको टूरिज्म और पर्यटक सुविधाएं विकसित करने पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने इन जलाशयों के आसपास पर्यटन सुविधाओं के विकास के काम में तेजी लाने के निर्देश दिए। खड़गपुर डैम के पास ईको टूरिज्म के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा विकसित करने और पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए ‘ग्लास रूम’ बनाने की संभावनाओं पर भी बैठक में चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कसरैया धार, खगड़िया को भी ईको टूरिज्म स्थल के रूप में विकसित करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन स्थानों पर ईको टूरिज्म योजनाओं के लिए पर्याप्त सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं है, वहां जरूरत के मुताबिक जमीन की खरीद या अधिग्रहण किया जाए। इसके बाद पीपीपी मोड के जरिए इन स्थानों पर ईको टूरिज्म परियोजनाएं विकसित की जाएं। उन्होंने ताराकोल और जालकुंड डैम के आसपास ईको टूरिज्म के विकास के लिए जरूरी जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने पहाड़ी और पर्वतीय क्षेत्रों में ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में पर्यटन सुविधाओं के विकास के दौरान पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ सामग्री का इस्तेमाल किया जाए। उन्होंने बांस और लकड़ी जैसी प्राकृतिक सामग्रियों का इस्तेमाल कर पर्यटकों के लिए सुविधाएं विकसित करने को कहा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि जिन स्थानों पर पर्यटन की दृष्टि से रोप-वे की जरूरत है, वहां इसके निर्माण की दिशा में भी काम किया जाए। राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने की दिशा में भी सरकार ने कदम उठाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को इन क्षेत्रों में सोलराइजेशन का काम कराने का निर्देश दिया, ताकि पर्यटन सुविधाओं के विकास के साथ स्वच्छ और हरित ऊर्जा के इस्तेमाल को भी बढ़ाया जा सके। मुख्यमंत्री ने राज्य के बड़े तालाबों और जलाशयों के चारों ओर बड़े पैमाने पर पौधारोपण करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि राज्य में पौधारोपण का जो लक्ष्य तय किया गया है, उसे जल्द से जल्द पूरा किया जाए। सरकार का लक्ष्य राज्य के हरित आवरण क्षेत्र को बढ़ाना है। मुख्यमंत्री ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर सभी परियोजनाओं पर तेजी से काम करने को कहा। उन्होंने कहा कि राज्य के प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण का संरक्षण करते हुए पर्यटन की संभावनाओं को विकसित किया जाना चाहिए। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ पर्यटकों को प्राकृतिक वातावरण में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। बैठक में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. रामचन्द्र प्रसाद, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह और प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरविंदर सिंह समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

वीरों के सम्मान में भी राजनीति करती है कांग्रेस, कैप्टन स्मित मच्छार पर चुप्पी शर्मनाक: रोहन गुप्ता

गांधीनगर। भाजपा के राष्ट्रीय सचिव रोहन गुप्ता ने कांग्रेस नेता इमरान मसूद, दिग्विजय सिंह और मल्लिकार्जुन खड़गे की टिप्पणियों के साथ-साथ मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के वीरों के सम्मान के मामले में भी राजनीति करना कांग्रेस की तुष्टीकरण की राजनीति को दर्शाता है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए रोहन गुप्ता ने कहा कि कैप्टन स्मित मच्छार वैश्विक स्तर पर सम्मान पाने वाले नायक हैं। पूरी दुनिया के नेताओं ने उनकी बहादुरी की सराहना की, लेकिन कांग्रेस की ओर से उनके सम्मान में एक शब्द तक नहीं कहा गया। अगर देश के वीरों के सम्मान में भी राजनीति आड़े आती है, तो यह शर्म की बात है। यह किसी राजनीतिक दल या भाजपा का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि देश के एक वीर की बहादुरी का विषय है। कांग्रेस हर मुद्दे में राजनीति करती है और जब देश व देश के वीरों के सम्मान की बात आती है, तब भी राजनीतिक हितों को ऊपर रखती है। उन्होंने कहा कि देश की जनता ऐसी राजनीति को स्वीकार नहीं करेगी। रोहन गुप्ता ने सवाल उठाया कि जब दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के नेताओं ने कैप्टन की बहादुरी की सराहना की, तो कांग्रेस के लिए ऐसा करने में क्या परेशानी थी। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की पदयात्रा को लेकर रोहन गुप्ता ने उन पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने दिग्विजय सिंह के पुराने बयानों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने ही ‘भगवा आतंकवाद’ जैसे शब्दों को चर्चा में लाया था। रोहन गुप्ता ने आरोप लगाया कि देश पर हुए हमलों के संदर्भ में भी दिग्विजय सिंह की ओर से हिंदुओं को लेकर सवाल उठाए गए थे। उन्होंने कहा कि ऐसे में आज हिंदू धर्म और सनातन की बात करने का नैतिक आधार क्या है। रोहन गुप्ता ने कांग्रेस पर सनातन के विरोध में बोलने वालों को राजनीतिक संरक्षण देने और भगवान राम के अस्तित्व को लेकर सवाल उठाने वालों के साथ खड़े होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने कई मुद्दों पर चुप्पी साधी और अब हिंदू धर्म और सनातन की बात कर रही है। दिग्विजय सिंह की पदयात्रा कांग्रेस की बदलती राजनीतिक स्थिति को दिखाती है। दिया जब बुझने वाला होता है तो ज्यादा फड़फड़ाता है और कांग्रेस की मौजूदा स्थिति भी उन्हें कुछ ऐसी ही दिखाई दे रही है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा उन्हें तत्काल निलंबित करने से इनकार किए जाने पर भी रोहन गुप्ता ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश की सर्वोच्च अदालत ने मामले में अपना रुख स्पष्ट कर दिया है और अब इस पर अनावश्यक राजनीति नहीं होनी चाहिए। चुनाव हारने के बाद विपक्षी दल अपनी हार की जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय चुनाव आयोग या अन्य संस्थाओं पर आरोप लगाते हैं। अगर चुनाव आयोग की प्रक्रिया गलत है तो जिन राज्यों में कांग्रेस चुनाव जीतती है, वहां उसी प्रक्रिया को सही क्यों माना जाता है। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में कमियां हो सकती हैं और सुधार की गुंजाइश भी हमेशा रहती है, लेकिन हर चुनावी हार के लिए चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने भी यह संकेत दिया कि केवल किसी अखबार की खबर या लेख के आधार पर गंभीर आरोपों को सही नहीं माना जा सकता। गुप्ता ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि जिन राज्यों में उसे चुनावी सफलता मिलती है, वहां उसे व्यवस्था और चुनाव प्रक्रिया में कोई समस्या नजर नहीं आती, लेकिन जहां उसे हार मिलती है, वहां चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि केरल, कर्नाटक और तेलंगाना में कांग्रेस की सरकार होने पर वहां की चुनावी प्रक्रिया को लेकर इस तरह के सवाल नहीं उठाए जाते, जबकि दूसरी जगह हार मिलने पर चुनाव आयोग को निशाना बनाया जाता है। यह रवैया चुनावी हार स्वीकार नहीं करने की मानसिकता को दिखाता है। रोहन गुप्ता ने कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाते हुए कहा कि राजनीतिक दलों को संस्थाओं पर आरोप लगाने से पहले तथ्यों पर ध्यान देना चाहिए। चुनाव में हार-जीत लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है और हार के बाद लगातार किसी अन्य संस्था पर दोष मढ़ना समाधान नहीं है। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी में हुए छात्र संघ चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि वहां कांग्रेस की राजनीति के बावजूद उसे हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने सवाल किया कि ऐसी हार के लिए भी क्या कांग्रेस किसी दूसरी संस्था को जिम्मेदार ठहराएगी। विपक्ष को अपनी राजनीतिक रणनीति और संगठन के भीतर की कमियों पर विचार करना चाहिए। हर चुनावी हार का ठीकरा किसी अन्य संस्था पर फोड़ने की राजनीति लंबे समय तक नहीं चल सकती और जनता अब इस रवैये को समझ रही है।

असम में चाय के 200 साल पूरे होने पर सीएम सरमा ने मनीराम दीवान की प्रतिमा का अनावरण किया

गुवाहाटी। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार को गुवाहाटी टी ऑक्शन सेंटर में मनीराम दीवान की प्रतिमा का अनावरण करके उन्हें श्रद्धांजलि दी। दीवान को शुरुआती भारतीय चाय बागान मालिकों में से एक और एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी माना जाता है। यह कार्यक्रम असम में चाय के 200 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। सरमा ने कहा कि यह श्रद्धांजलि असम के चाय उद्योग में दीवान के योगदान और राज्य के इतिहास में उनके स्थायी स्थान को मान्यता देने के लिए थी। कार्यक्रम में शामिल होने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में सरमा ने कहा कि जब असम ‘असम चाय’ के 200 साल का जश्न मना रहा है, तो हमें पहले भारतीय चाय बागान मालिक और स्वतंत्रता सेनानी मनीराम दीवान का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि गुवाहाटी टी ऑक्शन सेंटर में प्रतिमा का अनावरण दीवान की स्थायी विरासत के प्रति एक श्रद्धांजलि थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि असम में, हम विकास और विरासत दोनों का सम्मान करते हैं। उन्होंने राज्य सरकार के इस बात पर जोर दिया कि विकास के साथ-साथ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को भी संरक्षित किया जाए। यह कार्यक्रम ऐसे समय में आयोजित किया गया है जब असम चाय के साथ अपने जुड़ाव की दो शताब्दियां मना रहा है। चाय उद्योग ने राज्य की अर्थव्यवस्था, पहचान और वैश्विक पहचान में एक अहम भूमिका निभाई है। मणिराम दीवान असम में चाय की खेती के शुरुआती विकास से गहराई से जुड़े थे। उन्होंने शुरुआत में ब्रिटिश प्रशासन के साथ काम किया और अपने खुद के चाय बागान शुरू करने से पहले उभरते हुए चाय उद्योग को अच्छी तरह समझा। उन्हें चाय की खेती में कदम रखने वाले शुरुआती प्रमुख भारतीय उद्यमियों में से एक के तौर पर याद किया जाता है। यह वह समय था जब इस उद्योग पर मुख्य रूप से ब्रिटिश हितों का कब्जा था। बाद में दीवान ब्रिटिश शासन के खिलाफ विरोध में एक प्रमुख व्यक्ति बन गए। 1857 के विद्रोह के दौरान, उन्होंने असम में अहोम राजशाही को बहाल करने की कोशिशों का समर्थन किया और ब्रिटिश सत्ता को चुनौती देने की कोशिश की। अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और 1858 में उन्हें फांसी दे दी गई। इस तरह वे औपनिवेशिक शासन के खिलाफ असम के प्रतिरोध का एक अहम प्रतीक बन गए। असम के आधुनिक चाय उद्योग ने 19वीं सदी में आकार लेना शुरू किया, जब इस इलाके में चाय के देसी पौधे पाए गए। इसके बाद अंग्रेजों ने चाय के कमर्शियल बागान विकसित किए और असम दुनिया के चाय पैदा करने वाले प्रमुख इलाकों में से एक बन गया। समय के साथ, असम की चाय ने अपने खास स्वाद, मजबूत गुण और अनोखी खुशबू के लिए दुनिया भर में पहचान बनाई। यह उद्योग रोजगार का एक बड़ा जरिया बन गया और आज भी राज्य की अर्थव्यवस्था का एक अहम हिस्सा है। 200 साल पूरे होने के इस मौके पर चाय मजदूरों, उत्पादकों, उद्यमियों और उन समुदायों के योगदान पर फिर से ध्यान दिया जा रहा है, जिन्होंने पीढ़ियों से इस उद्योग को बनाए रखा है।

चाइना ओपन: फैन को लगा मेदवेदेव का शॉट, बीच मैच में डिस्क्वालिफाई, फाइनल में पहुंचे जोकोविच

बीजिंग। पूर्व वर्ल्ड नंबर 1 नोवाक जोकोविच दिग्गज खिलाड़ी डेनिल मेदवेदेव के सेमीफाइनल मैच से बाहर होने के बाद चाइना ओपन के चैंपियनशिप मैच में पहुंच गए। रिकॉर्ड छह बार के चैंपियन जोकोविच 7-5, 5-3, 15/15 के स्कोर पर मैच के लिए सर्विस कर रहे थे, तभी एक गेंद पीछे की दीवार से टकराकर उछली। मेदवेदेव ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए गेंद को मारा, जिससे वह भीड़ में चली गई और एक फैन को लग गई। इसके चलते मेदवेदेव को डिस्क्वालिफाई कर दिया गया। अब 2022 में अस्ताना खिताब जीतने के बाद पहली बार किसी एटीपी 500 टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचे नोवाक जोकोविच का सामना मंगलवार को खिताबी मुकाबले में एलेक्स डी मिनौर से होगा। एटीपी हेड-टू-हेड मुकाबलों में जोकोविच का पलड़ा भारी रहा है और उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के पांचवीं वरीयता प्राप्त खिलाड़ी डी मिनौर के खिलाफ 3-1 की बढ़त बना रखी है। मेदवेदेव और जोकोविच ने बीजिंग के स्टेडियम कोर्ट पर 2 घंटे 29 मिनट तक एक रोमांचक सेमीफाइनल मैच खेला था। पिछले हफ्ते हांगझोऊ चैंपियन बने मेदवेदेव अपनी लगातार आठवीं टूर-लेवल जीत की कोशिश में पूरे आत्मविश्वास के साथ खेल रहे थे, लेकिन जोकोविच ने एक ब्रेक से पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए पहला सेट जीता और दूसरे सेट में अपने प्रतिद्वंद्वी की सर्विस दो बार तोड़कर जीत के करीब पहुंच गए। जोकोविच ने अपनी शानदार बेसलाइन बॉल-स्ट्राइकिंग का प्रदर्शन किया। भले ही प्वाइंट्स के बीच उन्हें कभी-कभी शारीरिक रूप से संघर्ष करते देखा गया, जैसा कि उन्होंने बुयुनचाओकेट और ज्वेरेव के खिलाफ पिछले दो राउंड में किया था। 39 वर्षीय खिलाड़ी ने अपने सामने आए 18 में से 16 ब्रेक प्वाइंट बचाए। सेमीफाइनल मुकाबले को लेकर जोकोविच ने कहा, “सच कहूं तो, यह थोड़ा चौंकाने वाला था। चोटिल व्यक्ति के लिए अफसोस है। सच कहूं तो मैंने देखा नहीं कि क्या हुआ? मुझे उम्मीद है कि उस व्यक्ति को ज्यादा चोट नहीं आई होगी। दूसरी तरफ, मुझे डेनिल के लिए भी बुरा लग रहा है, क्योंकि मैं अच्छी तरह जानता हूं कि किसी बड़े मैच में डिसक्वालिफाई होने पर कैसा महसूस होता है। मैं भी यूएस ओपन 2020 में ऐसे ही हालात में डिसक्वालिफाई हुआ था। मुझे यकीन है कि डेनिल ने ऐसा जानबूझकर नहीं किया। ऐसा हो जाता है।” “मैं जीत से बस तीन प्वाइंट्स दूर था। यह एक बहुत मुश्किल मुकाबला था। मैं बिल्कुल भी तीसरा सेट नहीं खेलना चाहता था। हालात कुछ ऐसे ही लग रहे थे। मुझे नहीं पता कि मैंने कितने ब्रेक प्वाइंट बचाए। यह अविश्वसनीय था। डेनिल के साथ मुकाबला हमेशा कड़ा होता है, और जब वह धीमी परिस्थितियों में अपनी जबरदस्त सर्विस के साथ गेंद को अच्छे से हिट कर रहा हो, तो उसके खिलाफ खेलना बहुत मुश्किल होता है। लेकिन हम आगे बढ़ते हैं।” इससे पहले बीजिंग में क्वार्टर फाइनल के एक रोमांचक मुकाबले में टॉप सीड अलेक्जेंडर ज्वेरेव को हराने के बाद, जोकोविच अब अपने 102वें टूर-लेवल खिताब से बस एक जीत दूर हैं। इससे वह रोजर फेडरर के रिकॉर्ड के करीब पहुंच जाएंगे, जिन्होंने 103 खिताब जीते थे। जिमी कॉनर्स (109 खिताब) ही एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने उनसे ज्यादा खिताब जीते हैं।

बसपा के राष्ट्रीय संयोजक बनने पर बोले आकाश आनंद- मायावती के भरोसे को काम से सही साबित करूंगा

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में एक बार फिर बड़ी जिम्मेदारी मिलने के बाद आकाश आनंद की प्रतिक्रिया सामने आई है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोमवार को आकाश आनंद को दोबारा पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त करने का ऐलान किया। इसके बाद आकाश आनंद ने मायावती का आभार जताते हुए कहा कि उन्होंने जो भरोसा उन पर जताया है, उसे अपने काम से सही साबित करना अब उनकी जिम्मेदारी है। आकाश आनंद ने मायावती को संबोधित करते हुए कहा, ”बहन कु. मायावती, सादर चरणस्पर्श। आपने मुझे क्षमा किया और बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी दोबारा सौंपी। इस भरोसे के लिए मैं तहे दिल से आपका आभारी हूं और इसे मैं हल्के में कभी नहीं ले सकता हूं।” आकाश आनंद ने कहा कि पिछले कुछ समय में उन्होंने काफी कुछ सीखा है। उनकी सबसे बड़ी सीख यह रही कि बहुजन मूवमेंट किसी एक व्यक्ति से कहीं बड़ा है। उन्होंने बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर और बसपा संस्थापक कांशीराम का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों ने जो रास्ता दिखाया और मायावती ने जिस रास्ते पर अपना पूरा जीवन लगाया, उस पर चलना उनके लिए सौभाग्य की बात है। आकाश आनंद ने कहा कि मायावती के दिशा-निर्देशन में पार्टी और बहुजन मूवमेंट का हित उनके लिए सर्वोपरि रहेगा। उन्होंने कहा, ”मैं अपने सभी व्यक्तिगत हितों को त्यागकर, अनुशासन और पूरी निष्ठा के साथ, संगठन को मजबूत करने के लिए दिन-रात काम करूंगा।” आकाश आनंद ने अपनी नई जिम्मेदारी को लेकर कहा कि मायावती ने एक बार फिर उन पर भरोसा किया है और अब इसे अपने काम से सही साबित करना उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने अपने संदेश का समापन ‘जय भीम, जय भारत’ के साथ किया। इससे पहले बसपा प्रमुख मायावती ने सोमवार को आकाश आनंद को एक बार फिर पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त करने का ऐलान किया। मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि पार्टी और बहुजन आंदोलन के हित को ध्यान में रखते हुए काफी सोच-विचार के बाद यह फैसला लिया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने के बाद अब पार्टी का काम सुचारू तरीके से चलेगा और संगठन में बार-बार बदलाव करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मायावती ने कहा कि पिछले कुछ समय में आकाश आनंद के व्यक्तित्व और कार्यशैली में बदलाव देखने को मिला है। उन्होंने पार्टी में वापसी के लिए हाल में आकाश आनंद द्वारा सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट का भी जिक्र किया। बसपा प्रमुख के मुताबिक, पार्टी के ज्यादातर लोगों की राय थी कि आकाश आनंद के अनुरोध को स्वीकार करते हुए उन्हें उनकी पिछली जिम्मेदारियों के साथ फिर से पार्टी के लिए काम करने का मौका दिया जाना चाहिए। मायावती ने बताया कि आकाश आनंद के पिता आनंद कुमार और उनके छोटे भाई ईशान आनंद ने भी इस फैसले पर अपनी सहमति जताई है। उन्होंने ईशान आनंद की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने बिना किसी पद के भी पार्टी की ओर से दी जाने वाली जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ निभाने की बात कही है। मायावती ने अपने फैसले को पार्टी में अनुशासन बनाए रखने से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि बहुजन समाज ही उनका बड़ा परिवार है और उसका हित तथा कल्याण उनके लिए सबसे ऊपर है। बसपा प्रमुख ने कहा कि पार्टी में अनुशासन बनाए रखने के लिए उन्हें पिछले दिनों कई सख्त फैसले लेने पड़े और इन फैसलों में उनके अपने भाई-बहन या परिवार के लोग भी अपवाद नहीं रहे। उन्होंने कहा कि आकाश आनंद का व्यक्तित्व पार्टी के लिए काफी हद तक ठीक रहा है, लेकिन पिछले दिनों उनसे जुड़े कुछ कारणों की वजह से संगठन में कई बार बदलाव करने पड़े। मायावती ने कहा कि बसपा बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर और कांशीराम के त्याग, संघर्ष और आदर्शों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ी है और देश की राजनीति में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सर्वसमाज को साथ लेकर जोरदार तैयारी कर रही है।

अशोक गहलोत का चुनाव आयोग पर हमला, सीईसी के इस्तीफे और केंद्र के हस्तक्षेप की मांग

जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के तुरंत इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले में दखल देने का आग्रह किया है। भारत निर्वाचन आयोग के कामकाज और मतदाता सूची के ‘विशेष गहन संशोधन’ (एसआईआर) के दौरान लिए गए फैसलों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों को लेकर चल रहे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए गहलोत ने कहा कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को उन याचिकाओं पर नोटिस जारी किए, साथ ही कोर्ट ने सीईसी को निलंबित करने का कोई अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि संबंधित अधिकारियों से जवाब मिलने के बाद वह मामले की जांच करेगा। गहलोत ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग ने न केवल देश के भीतर बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विश्वसनीयता हासिल की है, और दूसरे देश चुनाव कराने में उसका मार्गदर्शन और सहयोग लेते रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में आयोग के कामकाज ने उसकी निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ियों को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोपों का जिक्र करते हुए गहलोत ने कहा कि ऐसी चिंताएं पहले भी उठाई गई थीं, लेकिन उन पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त के विपक्ष से बात करने के तरीके की भी आलोचना की और कहा कि देश की चुनाव संस्था के प्रमुख को सभी राजनीतिक दलों का सम्मान करना चाहिए। गहलोत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही ने चुनाव आयोग के कामकाज पर उठ रहे सवालों को और बढ़ा दिया है। उन्होंने कोर्ट की इस बात का जिक्र किया कि आयोग के फैसले सर्वसम्मति या बहुमत से लिए जाने चाहिए, और कोर्ट ने यह भी साफ किया था कि उसने फॉर्म 6 के किसी बदले हुए वर्शन को मंजूरी नहीं दी है। उन्होंने कहा कि इन हालात को देखते हुए अब बस उनके इस्तीफे की ही गुंजाइश बची है। गहलोत ने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस मामले में दखल क्यों नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को कुमार का इस्तीफा सुनिश्चित करना चाहिए ताकि विवाद खत्म हो सके और सत्ता पक्ष और विपक्ष अपनी-अपनी जिम्मेदारियों पर ध्यान दे सकें।

गाजियाबाद: रामलीला मैदान में रावण का पुतला बनाते समय विस्फोट; पांच घायल, दो दीवारें गिरीं

गाजियाबाद। गाजियाबाद के साहिबाबाद थाना क्षेत्र में सोमवार सुबह रामलीला मैदान में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब सामुदायिक केंद्र भवन के एक बड़े हॉल में अचानक आग लग गई। प्रारंभिक सूचना में आग पटाखों की दुकान में लगने की बात सामने आई थी, जिसके बाद दमकल विभाग की टीम तत्काल मौके के लिए रवाना हुई। हालांकि घटनास्थल पर पहुंचने के बाद पता चला कि आग किसी पटाखे की दुकान में नहीं, बल्कि रामलीला मैदान के पीछे स्थित सामुदायिक केंद्र के बड़े हॉल में लगी थी। हादसे में पांच लोग घायल हुए हैं। सभी घायलों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां से उन्हें आगे जीटीबी अस्पताल रेफर किए जाने की जानकारी मिली है। फायर विभाग के अनुसार, सोमवार 5 अक्टूबर 2026 को सुबह करीब 9:26 बजे फायर स्टेशन साहिबाबाद के कंट्रोल रूम को रामलीला मैदान, शनि चौक स्थित पटाखों की दुकान में आग लगने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही मुख्य अग्निशमन अधिकारी गाजियाबाद, प्रभारी अग्निशमन अधिकारी साहिबाबाद और फायर स्टेशन साहिबाबाद से तीन फायर टेंडर तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना किए गए। दमकल की टीम मौके पर पहुंची तो स्थिति अलग मिली। टीम ने देखा कि आग रामलीला मैदान के बैक साइड स्थित सामुदायिक केंद्र भवन के एक बड़े हॉल में लगी थी। फायर यूनिट ने तत्काल अग्निशमन वाहनों से पंपिंग कर आग पर काबू पाने का अभियान शुरू किया। कुछ ही देर में आग को पूरी तरह बुझा दिया गया और घटनास्थल को शांत कर दिया गया। आग बुझाने के बाद दमकल टीम ने हॉल का बारीकी से निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सामने आया कि हॉल के अंदर रामलीला कार्यक्रम के लिए रावण का पुतला तैयार करने का काम चल रहा था। फायर विभाग के अनुसार, प्रथम दृष्टया आशंका है कि पुतला तैयार करने के दौरान आतिशबाजी अथवा किसी अन्य विस्फोटक सामग्री के इस्तेमाल के कारण उसमें विस्फोट हुआ, जिसके बाद हॉल में आग लग गई। विस्फोट इतना तेज था कि भवन की दो दीवारें भी गिर गईं। हादसे के बाद मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। घटना की जानकारी मिलते ही घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया। फायर यूनिट ने अस्पताल पहुंचकर घायलों की स्थिति के बारे में जानकारी ली। अस्पताल से बताया गया कि घायलों को बेहतर उपचार के लिए जीटीबी अस्पताल रेफर किया गया है। फायर विभाग की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक, हादसे में कुल पांच लोग घायल हुए हैं। इनमें दो घायलों की पहचान ऋषभ और हरेंद्र के रूप में हुई है, जबकि तीन अन्य घायलों के नाम अभी स्पष्ट नहीं हो सके हैं। सभी घायलों का उपचार कराया जा रहा है। फिलहाल आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया है। घटनास्थल पर दमकल टीम द्वारा आवश्यक निरीक्षण किया गया है। विस्फोट और आग लगने के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि रावण का पुतला तैयार करते समय किस प्रकार की सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा था और सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं।

बिहार में बाढ़ : पप्पू यादव का सरकार पर हमला, बोले-गाद नासा ने नहीं, बिहार की व्यवस्था ने जमा की

पटना। पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने बिहार में बाढ़ और बाढ़ नियंत्रण के नाम पर होने वाले खर्च को लेकर राज्य और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि बाढ़ के स्थायी समाधान के बजाय हर साल राहत और निर्माण के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। पटना में सोमवार को एक प्रेस वार्ता में पप्पू यादव ने उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी के कथित बयान पर तंज कसते हुए कहा कि यदि बिहार में बारिश और बाढ़ के लिए नासा जिम्मेदार है, तो नदियों में जमा गाद के लिए भी नासा ही जिम्मेदार होगा। उन्होंने सवाल किया कि एंटी-इरोशन के नाम पर एक करोड़ रुपए से अधिक खर्च हुए हैं तो क्या वह पैसा भी नासा लेकर चला गया? उन्होंने कहा कि 1990 से अब तक बिहार में जाति, धर्म और मजहब के नाम पर खुली लूट हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि हर साल एक ही स्थान पर बांध क्यों टूटता है और बार-बार उसी ठेकेदार को काम क्यों दिया जाता है। उन्होंने नेताओं, मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि बाढ़ बिहार के लिए नासूर बन चुकी है और इस साल तीन बार बाढ़ की स्थिति बनी है। सांसद ने कहा कि फरक्का संधि दिसंबर में समाप्त हो रही है, लेकिन बिहार की बाढ़ समस्या को लेकर गंभीर पहल नहीं हो रही है। उन्होंने सवाल किया कि असम, पंजाब और नेपाल को मदद मिलती है, लेकिन बिहार को क्यों नहीं। उन्होंने दावा किया कि 2008 में तत्कालीन केंद्र सरकार ने बिहार की बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित कर 1,000 करोड़ रुपए दिए थे, जबकि 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5,000 करोड़ रुपए की घोषणा की थी, लेकिन उनके अनुसार बिहार को राशि नहीं मिली। पप्पू यादव ने कहा कि चुनाव के समय भाजपा हिंदू-मुसलमान करती है, लेकिन बाढ़ आने पर उसका हिंदुत्व डूब जाता है। इसी तरह विपक्ष चुनाव में जाति की राजनीति करता है, लेकिन बाढ़ में उसकी जाति भी डूब जाती है। उन्होंने सांसदों और विधायकों पर भी बाढ़ पीड़ितों की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नेता चुनाव के समय हेलीकॉप्टर से जनता के बीच पहुंचते हैं, लेकिन आपदा के समय उनकी जिम्मेदारी और संवेदनशीलता भी दिखाई देनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने छपरा और नौतन में करीब 60 लाख रुपए की सहायता दी है और टूटे घरों के लिए 10 से 25 हजार रुपए तक की मदद की है। उन्होंने सवाल किया कि जिन सांसदों के पास पर्याप्त संसाधन हैं, उन्होंने बाढ़ पीड़ितों के लिए क्या किया। उन्होंने कहा कि बाढ़ और निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं की जांच होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि वह इस संबंध में करीब 50 पत्र लिख चुके हैं और सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दाखिल की है। उन्होंने कहा कि 1990 के बाद बिहार में रहे सिंचाई मंत्रियों और अधिकारियों की संपत्ति की जांच कराई जानी चाहिए।

‘अपराधियों में डर पैदा करने की जरूरत’, दिल्ली में रेप की घटनाओं पर सख्त सुप्रीम कोर्ट, पुलिस को दिए निर्देश

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में रेप की हालिया घटनाओं पर सख्ती दिखाते हुए दिल्ली पुलिस को अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा है कि आपको अपराध करने की सोच रखने वाले व्यक्ति के मन में डर पैदा करना होगा। दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते रेप और दूसरे अपराधों पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। सोमवार को इसी ‘सुओ मोटो’ मामले में जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच ने सुनवाई की। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा है कि जरूरत पड़ने पर वे सख्त रुख अपनाएं। कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसे लोग भी होंगे जो आर्टिकल 21 की बात करेंगे, यानी वे मानवाधिकार समूह जो अपराधियों के साथ बुरे बर्ताव का विरोध करते हैं। कोर्ट ने कहा कि अधिकारी ऐसे समूहों की परवाह किए बिना, रेप जैसे घिनौने अपराध करने वाले अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकते हैं। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा कि जब तक आप अपराधियों के मन में यह डर पैदा नहीं करते कि ‘अगर हमने ऐसा कुछ किया तो मारे जाएंगे’, तब तक आप ऐसे अपराधों को रोक नहीं पाएंगे। आपको ऐसे अपराध करने की सोच रखने वाले व्यक्ति के मन में डर पैदा करने की जरूरत है। जस्टिस जेबी पारदीवाला ने कहा, “दुर्गा पूजा और दिवाली जैसी छुट्टियों के दौरान, ये बदमाश और गुंडे अधिक सक्रिय हो जाते हैं। आपको उनके मन में डर पैदा करना होगा। उन्हें पकड़कर जेल में डालना ही एकमात्र समाधान नहीं है। अफसरों, हालात के मुताबिक अपनी जिम्मेदारी निभाएं। हमें निराश न करें। छेड़छाड़ या रेप का शिकार होने वाली हर महिला और लड़की हमारी बहन और मां के समान है। अपनी जिम्मेदारी निभाएं। इसे एक चुनौती के तौर पर लें। ऐसी घटनाओं को न होने दें।” सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से एनसीआर क्षेत्र में महिलाओं की सुरक्षा के बारे में जानकारी देते हुए एक एफिडेविट फाइल करने को कहा। मामले में 16 नवंबर को अगली सुनवाई होगी।

योगासन करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान, आयुष मंत्रालय ने बताए अभ्यास से जुड़े नियम

नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में खुद को स्वस्थ और तनावमुक्त रखने के लिए योग एक अच्छा माध्यम माना जाता है। नियमित योग अभ्यास से शरीर को सक्रिय रखने और मानसिक शांति पाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, योग का पूरा लाभ उठाने के लिए केवल आसन करना ही काफी नहीं है, बल्कि अभ्यास से पहले कुछ जरूरी नियमों का ध्या न रखना भी आवश्यक है। आयुष मंत्रालय ने योग अभ्यास से जुड़े ऐसे ही कई दिशा-निर्देश बताए गए हैं, जिन्हें अपनाकर अभ्यास को अधिक सहज और सुरक्षित बनाया जा सकता है। योग के सामान्य नियमों में सबसे पहले स्वच्छता का महत्व बताया गया है। इसका मतलब शरीर के साथ-साथ अभ्यास के आसपास के वातावरण और मन को भी स्वच्छ और शांत रखना है। योग हमेशा ऐसी जगह पर करना चाहिए, जहां शोर-शराबा कम हो और व्यक्ति बिना किसी परेशानी के अपना ध्यान अभ्यास पर लगा सके। योग करने से पहले शरीर और मन को आराम की स्थिति में रखना चाहिए। जल्दबाजी या अत्यधिक थकान में योगाभ्यास करने से बचना बेहतर है। इसके अलावा अभ्यास शुरू करने से पहले शौच करना जरूरी है, ताकि पेट हल्का रहे और अभ्यास के दौरान किसी तरह की असहजता न हो। अभ्यास के दौरान आरामदायक कपड़े पहनना भी जरूरी है। हल्के और ढीले सूती कपड़े शरीर को आसानी से हिलाने-डुलाने में मदद करते हैं। योगाभ्यास करने के लिए योग मैट, दरी, गद्दे या मुड़े हुए कंबल का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे जमीन पर बैठने और आसन करने में सुविधा रहती है। योग हर व्यक्ति के लिए एक जैसा नहीं होता। अगर किसी को पुरानी बीमारी, शरीर में लगातार दर्द या दिल से जुड़ी समस्या है, तो योगासन शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य योग विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही आसनों का चुनाव करना जरूरी है। इसी तरह गर्भावस्था के दौरान भी योग अभ्यास को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए। ऐसी स्थिति में योग विशेषज्ञ की सलाह से उपयुक्त अभ्यास करना बेहतर रहता है।