अमेरिका पहुंचकर रॉबर्ट डी नीरो से मिले अनुपम खेर, बोले- ‘हर बार उनसे मिलना मेरे लिए खुशी की बात’

मुंबई। अभिनेता अनुपम खेर इन दिनों अपने नाटक ‘जाने पहचाने अनजाने’ के साथ अमेरिका और कनाडा के दौरे पर हैं। अपने इस सफर के दौरान वह कई लोगों से मिले। इस बीच उन्होंने हॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता और अपने करीबी दोस्त रॉबर्ट डी नीरो से उनके घर पर मुलाकात की। अनुपम ने इस मुलाकात की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए और बताया कि उनके दौरे की सबसे खास यादों में यह मुलाकात भी शामिल हो गई है। अनुपम खेर ने इंस्टाग्राम पर मुलाकात की कुछ तस्वीर और वीडियो शेयर की। तस्वीरों और वीडियो में वह रॉबर्ट डी नीरो के साथ नजर आ रहे हैं। दोनों के बीच की दोस्ती साफ दिखाई दे रही है। इस पोस्ट के कैप्शन में उन्होंने लिखा, ”मैं अमेरिका आऊं और अपने सबसे प्यारे दोस्त रॉबर्ट डी नीरो से न मिलूं, ऐसा कैसे हो सकता है। डी नीरो दुनिया के बेहतरीन अभिनेताओं में से एक है। उनसे मिलना हर बार मेरे लिए खुशी की बात होती है। अमेरिका और कनाडा में अपने म्यूजिकल प्ले ‘जाने पहचाने अनजाने’ के साथ चल रहे दौरे के दौरान डी नीरो से मुलाकात सबसे खास अनुभवों में से एक रही।” अपनी पोस्ट में अनुपम खेर ने रॉबर्ट डी नीरो को उनके घर बुलाने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने लिखा, ”धन्यवाद, प्यारे डी नीरो, मुझे अपने घर पर आमंत्रित करने के लिए और स्वादिष्ट भोजन के लिए। हमारी बातचीत और आपकी ओर से दिया गया समय मेरे लिए बहुत मायने रखता है। जब भी मैं आपसे मिलता हूं, तो मेरे अंदर का फैन भी उतना ही उत्साहित हो जाता है, जितना एक दोस्त अपने दोस्त से मिलकर होता है। मैं एक अभिनेता के तौर पर आपको बहुत मानता हूं, लेकिन एक इंसान के रूप में भी मेरे मन में आपके लिए बहुत सम्मान है। मैं सच में खुद को भाग्यशाली मानता हूं कि मैं दुनिया के इस महान अभिनेता को अपना दोस्त कह सकता हूं।” अनुपम खेर ने रॉबर्ट डी नीरो के परिवार का भी आभार जताया। उन्होंने कहा, ”आपके परिवार ने मिलकर इस मुलाकात को एक और खूबसूरत याद बना दिया। मैं इन पलों को अपने साथ घर लेकर जाऊंगा और इसे लंबे समय तक याद रखूंगा। सबसे जरूरी बात, कैप गिफ्ट करने के लिए धन्यवाद। यह गिफ्ट मेरे लिए बहुत मायने रखता है।

जब संजय मिश्रा एक्टिंग छोड़कर ढाबे पर करने लगे थे काम, फिर ऐसे हुई फिल्मों में वापसी

मुंबई। बॉलीवुड में कुछ कलाकार ऐसे हैं, जिन्हें पर्दे पर देखते ही चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। संजय मिश्रा भी ऐसे ही कलाकार हैं। ‘गोलमाल’, ‘धमाल’, ‘वध’, ‘भूल भुलैया’ और ‘आंखों देखी’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाकर अपनी खास पहचान बनाई है। रोल छोटा हो या बड़ा, संजय मिश्रा जब भी स्क्रीन पर आते हैं, अपनी एक्टिंग से किरदार में जान डाल देते हैं। उनकी जिंदगी का एक दौर ऐसा भी था, जब उन्होंने एक्टिंग से पूरी तरह दूरी बनाने का फैसला कर लिया था और ऋषिकेश के एक ढाबे पर काम करने लगे थे। 6 अक्टूबर 1963 को जन्मे संजय मिश्रा का बचपन वाराणसी में बीता। इसके बाद उन्होंने दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से पढ़ाई की और 1989 में वहां से ग्रेजुएशन किया। इसके बाद थिएटर और टेलीविजन के जरिए उन्होंने अभिनय की दुनिया में अपनी जगह बनानी शुरू की। फिल्मों में उनका सफर ‘ओह डार्लिंग! ये है इंडिया!’ से शुरू हुआ। इसके बाद वह ‘सत्या’, ‘दिल से..’, ‘वजूद’, ‘राजकुमार’ और ‘फिर भी दिल है हिंदुस्तानी’ जैसी फिल्मों में नजर आए। धीरे-धीरे उनकी पहचान एक ऐसे कलाकार के तौर पर बनने लगी, जो हर तरह के किरदार को अपने अंदाज में निभा सकता है। निजी जिंदगी में आए एक बड़े झटके ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया। पिता के निधन के बाद संजय मिश्रा ने फिल्मों से दूरी बनाने का फैसला कर लिया। वह मुंबई की चमक-दमक से दूर ऋषिकेश चले गए। यहां उन्होंने एक ढाबे पर काम करना शुरू कर दिया और लोगों के लिए ऑमलेट बनाने लगे। यह दौर उनके लिए आसान नहीं था लेकिन उन्होंने अपनी पहचान को पीछे छोड़कर एक आम जिंदगी जीने की कोशिश की। दिलचस्प बात यह है कि ढाबे पर आने वाले कुछ लोग उन्हें पहचान भी लेते थे। लोग उनसे पूछते कि क्या वह वही संजय मिश्रा हैं, जिन्होंने ‘गोलमाल’ में काम किया है। हालांकि संजय मिश्रा अपनी पहचान स्वीकार करने के बजाय मजाक में कह देते थे कि वह उस अभिनेता के हमशक्ल हैं। हालांकि किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था। फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी ने उन्हें दोबारा फिल्मों में आने के लिए मनाया। इसके बाद उन्हें फिल्म ‘ऑल द बेस्ट’ में काम करने का मौका मिला। यहीं से उनके फिल्मी करियर ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली। इसके बाद संजय मिश्रा ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। ‘गोलमाल: फन अनलिमिटेड’ और ‘धमाल’ जैसी फिल्मों में उनकी कॉमेडी ने दर्शकों को खूब हंसाया, तो ‘आंखों देखी’ जैसी फिल्म में उन्होंने अपनी गंभीर अदाकारी का दम दिखाया। इस फिल्म में उनके अभिनय को खूब सराहा गया और उन्हें समीक्षकों की ओर से सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला।

जनता दर्शन : सीएम योगी ने कहा- उचित समस्या को लेकर दूसरी बार फरियादी आए तो जवाबदेही तय

लखनऊ। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार सुबह ‘जनता दर्शन’ में दूरदराज से आए लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। लोगों को समाधान का भरोसा देते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रशासन हर उचित समस्या का समयबद्ध निस्तारण कराए, यदि पीड़ित एक ही समस्या को लेकर दूसरी बार आया और वह समस्या वास्तविक रही तो जवाबदेही तय होगी। उन्होंने कहा कि पीड़ित की संतुष्टि सरकार का ध्येय है। यदि पीड़ित की समस्या वास्तविक है और समय से उसका निस्तारण नहीं हो पाया, तो यह अक्षम्य है। सीएम योगी ने कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों तक पहुंचकर उनकी पीड़ा जानी और आश्वस्त किया कि सभी की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने ‘जनता दर्शन’ में मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया कि हर पीड़ित व्यक्ति की समस्या पर संवेदनशीलता से ध्यान दें और समयबद्ध/पारदर्शी निस्तारण कराएं। इस दौरान कुछ लोगों ने जमीन जबरन कब्जा कर लिए जाने की शिकायत की। इस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि यदि किसी दबंग ने किसी गरीब की जमीन हड़पी है तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। जमीन अवैध या जबरन कब्जे से मुक्त होनी चाहिए। जमीन कब्जामुक्त कराने के साथ जबरन कब्जा करने वालों को कड़ा कानूनी सबक सिखाया जाए। पीड़ित को न्याय और दोषियों को सजा दिलाएं। मुख्यमंत्री कार्यालय ने जनता दर्शन की फोटो शेयर करते हुए लिखा, ”लोक-कल्याण एवं सुशासन की प्रतिबद्धता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास पर आयोजित ‘जनता दर्शन’ में विभिन्न जनपदों से आए नागरिकों की समस्याएं सुनीं तथा संबंधित अधिकारियों को उनके त्वरित एवं प्रभावी निराकरण के निर्देश दिए।” मुख्यमंत्री जनता दर्शन में लगातार फरियादियों से उनके राजस्व के मामले में अधिकारियों को निर्देशित कर रहे हैं। उन्होंने बड़े सख्त लफ्ज़ो में कहा है कि जनता की समस्याओं के समाधान में संवेदनशीलता, पारदर्शिता और समयबद्धता का विशेष ध्यान रखा जाए। पीड़ित को न्याय मिले और दोषियों को उनके कृत्य की सजा मिले, यह प्रशासन की जिम्मेदारी है।

दिल्ली पुलिस ने नौकरी दिलाने के नाम पर चल रहे दो फर्जी कॉल सेंटर का किया भंडाफोड़, 11 गिरफ्तार

नई दिल्ली। सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के स्पेशल स्टाफ, साइबर पुलिस स्टेशन और रंजीत नगर पुलिस ने रंजीत नगर में नौकरी दिलाने के नाम पर चल रहे दो फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ करते हुए 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। दोनों जगहों से पुलिस ने 13 कंप्यूटर सिस्टम और 5 मोबाइल फोन के साथ-साथ कॉलिंग सॉफ्टवेयर, नौकरी चाहने वालों का डेटा और डिजिटल, फाइनेंशियल सबूत जब्त किए गए। पुलिस ने बताया कि 3 सितंबर को दिल्ली के रंजीत नगर में शादीपुर मेट्रो स्टेशन के पास लाल रतन बिल्डिंग से चल रहे दो संदिग्ध नकली जॉब-प्लेसमेंट, कॉलिंग सेंटरों के बारे में जानकारी मिली। इन दोनों कॉल सेंटर में बेरोजगारों से नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे लिए जा रहे थे। सच्चाई का पता लगाने और जरूरी कार्रवाई के लिए पुलिस की दो टीमें बनाई गईं। एक टीम में रंजीत नगर पुलिस स्टेशन और स्पेशल स्टाफ के लोग शामिल थे, जिन्होंने तकनीकी विश्लेषण और फील्ड वेरिफिकेशन के जरिए जानकारी को और पुख्ता किया। संदिग्ध नेटवर्क की तकनीकी जांच के दौरान, पता चला कि संदिग्ध जॉब-प्लेसमेंट गतिविधि से जुड़ी बहुत सारी कॉल उसी जगह से की जा रही थीं। तकनीकी जानकारी और फील्ड वेरिफिकेशन के आधार पर संदिग्ध जगह पर छापा मारा गया। छापे के दौरान चार महिलाएं और दो पुरुष मौजूद मिले और उन्हें पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। ऑफिस की अच्छी तरह से तलाशी ली गई और नौकरी चाहने वालों से संपर्क करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे कंप्यूटर सिस्टम, कॉलिंग एप्लिकेशन और डिजिटल सामग्री की जांच की गई। जांच में पता चला कि नौकरी चाहने वालों के डेटा और संपर्क विवरण का इस्तेमाल संभावित उम्मीदवारों से संपर्क करने और उन्हें नौकरी के अवसर देने के लिए किया जा रहा था। उम्मीदवारों से अलग-अलग पैकेज के तहत रजिस्ट्रेशन फीस जमा करने के लिए कहा जाता था। इसके बाद कॉलर कुछ दिनों तक नौकरी और आगे की औपचारिकताओं के बारे में भरोसा दिलाकर उम्मीदवारों से संपर्क बनाए रखते थे और फिर वादा की गई नौकरी दिए बिना ही संपर्क बंद कर देते थे। इसी दौरान, स्पेशल स्टाफ और सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के साइबर पुलिस स्टेशन की एक और संयुक्त टीम ने लाल रतन बिल्डिंग से चल रहे एक और संदिग्ध नकली जॉब-प्लेसमेंट कॉल सेंटर के बारे में पक्की जानकारी मिलने पर उस जगह पर भी छापा मारा। पांच पुरुष कर्मचारी कॉलिंग क्यूबिकल्स में काम करते हुए पाए गए और उन्हें पकड़ लिया गया। जब पुलिस ने कॉर्पोरेट ऑथराइजेशन लेटर, प्लेसमेंट एग्रीमेंट या नौकरी पाने वाले असली उम्मीदवारों के रिकॉर्ड मांगे, तो कर्मचारी भर्ती की असली प्रक्रिया साबित करने वाला कोई भी वैध दस्तावेज नहीं दिखा पाए। कंप्यूटर की जांच करने पर कॉलिंग सॉफ्टवेयर और नौकरी चाहने वालों का डेटा मिला। इसके बाद, पूछताछ और आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए उन पांचों कर्मचारियों को थाने लाया गया। इस तरह, नौकरी दिलाने वाले दो फर्जी कॉल सेंटरों से कुल 11 कर्मचारियों को पकड़ा गया। जांच से पता चला कि दोनों कॉल सेंटरों में काम करने का तरीका एक जैसा था। नौकरी चाहने वालों का डेटा और कॉन्टैक्ट डिटेल्स ऑनलाइन जॉब-सर्च और रिक्रूटमेंट प्लेटफॉर्म से हासिल किए गए थे और उनका इस्तेमाल टारगेटेड कॉलिंग के लिए किया जाता था। ऑपरेटर रिक्रूटर बनकर उम्मीदवारों को नौकरी के आकर्षक मौके देते थे। उनका भरोसा जीतने के बाद, उन्होंने अलग-अलग पैकेज के तहत रजिस्ट्रेशन औक प्रोसेसिंग फीस की मांग की, जिसमें 3,500, 1,400 और 1,200 रुपये शामिल थे। पैसे मिलने के बाद कॉलर ने कथित तौर पर नौकरी और आगे की औपचारिकताओं के बारे में भरोसा दिलाकर कुछ समय तक उम्मीदवारों को उलझाए रखा। इसके बाद, वादा की गई नौकरी दिए बिना ही बातचीत बंद कर दी गई। पहले कॉल सेंटर से अर्पित, सकीना, करिश्मा, मीनाक्षी, चंचल और अशोक को पकड़ा गया। वहीं, दूसरे कॉल सेंटर से आसिम, संदीप, गौरव मलिक, ज्ञान सिंह और रोहित को गिरफ्तार किया गया। दोनों फर्जी कॉल सेंटर चलाने वाले मास्टरमाइंड की पहचान करने और उन्हें पकड़ने, नौकरी चाहने वालों के डेटा का स्रोत पता लगाने, पैसों के लेन-देन का पता लगाने, जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की जांच और कथित फ़र्ज़ी जॉब-प्लेसमेंट ऑपरेशन से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने के लिए आगे की जांच चल रही है।

टैरिफ के झटकों के बावजूद ग्लोबल ट्रेड मजबूत बना हुआ है: प्रमुख डब्ल्यूटीओ प्रमुख

वॉशिंगटन। वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन की प्रमुख न्गोजी ओकोन्जो-इवेला की ओर से कहा गया कि अमेरिका के कड़े टैरिफ, ईरान युद्ध, ऊर्जा की ऊंची कीमतों और नियमों पर आधारित ट्रेडिंग सिस्टम पर बढ़ते दबाव के बावजूद ग्लोबल ट्रेड उम्मीद से कहीं ज्यादा मजबूत बना हुए हैं। उन्होंने व्यापार में एआई की वजह से आई तेजी की ओर इशारा किया, साथ ही यह चेतावनी भी दी कि यह सिस्टम अभी भी कमजोर बना हुआ है। डब्ल्यूटीओ की डायरेक्टर-जनरल ने कहा कि दुनिया के सामानों का 72 प्रतिशत व्यापार अभी भी डब्ल्यूटीओ की ‘मोस्ट-फेवर्ड-नेशन’ (सबसे पसंदीदा देश) शर्तों के तहत हो रहा है। इससे पारंपरिक व्यापार नियमों पर भारी दबाव होने के बावजूद व्यवसायों को स्थिरता और भविष्य का अंदाज़ा लगाने की सुविधा मिलती है। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक सामान व्यापार ने डब्ल्यूटीओ के अनुमानों से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है, जिसमें पिछले साल की बढ़ोतरी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े उत्पादों का 42 प्रतिशत हिस्सा रहा। ओकोन्जो-इवेला ने सीएनएन के साथ एक इंटरव्यू में कहा, “मैं पूरी ईमानदारी से कहूंगी कि हम भी इस मजबूती से हैरान हैं और इसके लिए आभारी हैं।” यह इंटरव्यू ऐसे समय में हुआ जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तहत अमेरिकी व्यापार नीति में बुनियादी बदलाव हुए हैं, वाशिंगटन और बीजिंग के बीच तनाव बढ़ा है, ईरान युद्ध के कारण ऊर्जा बाज़ारों में व्यवधान आया है, और वैश्विक शिपिंग मार्गों पर दबाव बना हुआ है। ओकोन्जो-इवेला ने कहा, “हम देखते हैं कि दुनिया का कितना व्यापार असल में डब्ल्यूटीओ के नियमों के अनुसार हो रहा है।” उन्होंने कहा, “मेरा मतलब है, जैसा कि आपने कहा, दुनिया वैसी नहीं रही जैसी पहले थी और वैश्विक व्यापार नियम दबाव में हैं, फिर भी हम पाते हैं कि दुनिया का 72 प्रतिशत व्यापार, यानी वैश्विक वस्तुओं का व्यापार अभी भी डब्ल्यूटीओ की शर्तों, यानी ‘मोस्ट-फेवर्ड-नेशन’ शर्तों के तहत हो रहा है।” उन्होंने कहा, “इसे ही हम ‘प्रेडिक्टेबल स्टेबल’ (भरोसेमंद और स्थिर) कहते हैं।” ओकोन्जो-इवेला ने कहा कि कंपनियां मल्टीलेटरल ट्रेडिंग सिस्टम पर भरोसा करती रहती हैं क्योंकि उन्हें निश्चितता की ज़रूरत होती है। उन्होंने कहा, “हम बिजनेस से बात करते हैं, और उन्हें अपने व्यापार के तरीके में कुछ स्थिरता और निश्चितता की जरूरत होती है।” उन्होंने कहा कि शायद सबसे हैरान करने वाली बात असल व्यापार में हुई बढ़ोतरी की मजबूती रही है।

‘न्यायाधीश संविधान के संरक्षक हैं’, एसआईआर को लेकर जज की बातों पर अभिषेक मनु सिंघवी की प्रतिक्रिया

नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर जस्टिस उज्जल भुइयां और पूर्व जस्टिस नरीमन के उठाए सवालों और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के कथित विरोध पर प्रतिक्रिया दी है। पत्रकारों से बातचीत में अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, “जस्टिस नरीमन सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज हैं। इससे पहले वे वरिष्ठ वकील थे। उनका नाम बड़े आदर से लिया जाता है। उन्हें निष्पक्षता के सिवा किसी तरह का पक्ष लेते नहीं देखा गया है। वे आम आदमी पर बोल रहे थे। आम आदमी के लिए इससे बड़ी बात क्या है कि उसका वोट ही हटा दिया जाए। आम आदमी का सबसे बड़ा मानवाधिकार अगर कोई है, तो गणतंत्र में मतदान का अधिकार है। इसलिए उन्होंने सच कहा है। मैं उनकी इस बात का स्वागत करता हूं।” अभिषेक मनु सिंघवी ने आगे कहा, “जस्टिस उज्जल भुइयां विद्यार्थियों के स्थल पर बोल रहे थे। उन्होंने जो कहा है, उसमें कोई त्रुटि नहीं निकाल सकता। मेरा मानना है कि अगर इन वक्तव्यों को देखा जाए तो संवैधानिक संरक्षक का इससे ज्यादा महत्वपूर्ण कार्य क्या होगा? संविधान के संरक्षक यही न्यायाधीश हैं। उन्होंने बिल्कुल सत्य कहा है। मेरी आशा और विश्वास है कि इसी प्रकार के स्वतंत्र व्यक्तित्व से सुधार आएगा।” ज्ञानेश कुमार को लेकर अपने बयान पर सफाई देते हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, “पूरा इंटरव्यू छपा है। मैंने कहा था कि कई लोग बिना वजह कानून का दरवाजा खटखटाते हैं, जबकि उन्हें कानून की सीमाएं पता होती हैं और कई बार गलत तरीके से या जानबूझकर उस चीज को वैधता दे देते हैं। हर चीज का हल अदालत के दरवाजे पर नहीं होता। मेरा सिर्फ इतना कहना है कि सोच-समझकर कानून के पास जाना चाहिए।

लड़कियों का प्रदर्शन उतना अच्छा नहीं रहा’, एशियन गेम्स 2026 में भारतीय पहलवानों के प्रदर्शन से संतुष्ट नहीं बृजभूषण सिंह

गोंडा। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद और भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह का कहना है कि एशियन गेम्स 2026 में भारतीय पहलवानों का प्रदर्शन उनकी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। बृजभूषण ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि कम से कम 8 मेडल आएंगे, लेकिन महिला पहलवानों का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। बृजभूषण शरण सिंह ने ‘आईएएनएस’ के साथ बात करते हुए कहा, “देखिए, इस बात कुश्ती में जो हमारा अनुमान था वो नहीं हुआ। लड़कियों का प्रदर्शन उतना अच्छा नहीं रहा। मेरा मानना था कि कुल 8 मेडल आएंगे, जिसमें 3 गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल होंगे, लेकिन आए छह मेडल। इसके बाद भी साल 1966 के बाद यह पहली बार इतना शानदार नतीजा है। कह सकते हैं कि एशियन गेम्स 2023 के बराबर ही हमारे मेडल आए, लेकिन इस बार गोल्ड मेडल की संख्या ज्यादा रही।” उन्होंने आगे कहा, “अभी कुश्ती पर काम करने की जरूरत है, क्योंकि पिछले दो से तीन साल कुश्ती में उथल-पुथल रही जिससे बहुत अच्छे खिलाड़ी अपना प्रदर्शन नहीं दोहरा सके। इस समय सरकार, खेल संघ और खिलाड़ियों की सामंजस्य बनी हुई है। यह जो 6 मेडल एशियन गेम्स में आए हैं, हमारा प्रयास रहेगा कि यही छह मेडल ओलंपिक में भी आएं।” अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर पूछे गए सवाल पर बृजभूषण शरण सिंह ने स्पष्ट किया कि वह वर्ष 2027 में होने वाला विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। अगले संसदीय चुनाव को लेकर उन्होंने कहा कि समय आने पर फैसला किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अभी संसदीय चुनाव लड़ने को लेकर कोई बयान नहीं दिया जा सकता है। एशियन गेम्स 2026 में भारतीय पुरुष और महिला पहलवानों ने मिलकर कुल छह मेडल जीते। अमन सहरावत 57 किलोग्राम फ्रीस्टाइल वर्ग में गोल्ड मेडल जीतने में सफल रहे। वहीं, सुजीत कलकल ने पुरुषों की 65 किलोग्राम की फ्रीस्टाइल रेसलिंग में स्वर्ण पदक जीता। नितेश सिवाच ग्रीको-रोमन के 97 किलोग्राम वर्ग में सिल्वर मेडल जीतने में सफल रहे। महिला पहलवान अंतिम पंघाल ने 53 किलोग्राम की फ्रीस्टाइल रेसलिंग में सिल्वर मेडल जीता, तो दीपक पूनिया ने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। ग्रीको-रोमन रेसलिंग के 87 किलोग्राम वर्ग में पुरुष पहलवान सुनील कुमार भी ब्रॉन्ज मेडल जीतने में कामयाब रहे।

दक्षिण कोरिया में मछली पकड़ने वाली नाव पलटी, 9 लोग बचाए गए और दो लापता

सोल। दक्षिण कोरिया के लोकप्रिय पर्यटन द्वीप जेजू के पास सोमवार तड़के मछली पकड़ने वाली एक नाव पलट गई। नाव में सवार 11 लोगों में से नौ को आसपास मौजूद मछली पकड़ने वाली नौकाओं की मदद से सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि नाव के कप्तान और इंडोनेशिया के एक चालक दल सदस्य का अभी तक पता नहीं चल पाया है। योनहाप न्यूज एजेंसी ने बताया कि जेजू कोस्ट गार्ड के मुताबिक, 29 टन की तटीय लॉन्गलाइन मछली पकड़ने वाली नाव चाग्वी द्वीप से करीब 65 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में समुद्र में तड़के करीब 3 बजकर 4 मिनट पर पलट गई। हादसे की सूचना मिलने के बाद तटरक्षक बल ने तुरंत बचाव अभियान शुरू किया। हादसे के समय आसपास मछली पकड़ रही नौकाएं सबसे पहले मदद के लिए पहुंचीं। उन्होंने नाव पर मौजूद नौ विदेशी चालक दल सदस्यों को बाहर निकाला। बचाए गए लोगों में आठ इंडोनेशियाई और एक वियतनामी नागरिक शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार सभी नौ लोगों की हालत फिलहाल स्थिर है। हालांकि, नाव के कप्तान और एक इंडोनेशियाई चालक दल सदस्य अब भी लापता हैं। दोनों की तलाश के लिए दक्षिण कोरियाई तटरक्षक बल ने बड़े पैमाने पर अभियान शुरू किया है। हेलीकॉप्टरों और गश्ती नौकाओं को घटनास्थल पर भेजा गया है। एक नौसैनिक पोत और कई नागरिक मछली पकड़ने वाली नौकाएं भी तलाश अभियान में शामिल की गई हैं। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, हादसे के समय समुद्र की स्थिति भी चुनौतीपूर्ण थी। घटनास्थल के आसपास उत्तर-पश्चिमी हवाएं 12 से 14 मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से चल रही थीं और समुद्र में करीब दो मीटर ऊंची लहरें उठ रही थीं। ऐसे मौसम में लापता लोगों की तलाश के साथ बचाव दल की सुरक्षा भी एक बड़ी चिंता बनी हुई है। हादसे का कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है। अधिकारी यह भी पता लगाने में जुटे हैं कि नाव पर वास्तव में कितने लोग सवार थे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार नाव ने रवाना होते समय आठ लोगों के सवार होने की सूचना दी थी, लेकिन हादसे के बाद अधिकारियों को पता चला कि नाव पर कुल 11 लोग मौजूद थे। दक्षिण कोरिया के प्रधानमंत्री हान सियोंग-सुक ने अधिकारियों को उपलब्ध सभी संसाधनों और कर्मचारियों को बचाव अभियान में लगाने का निर्देश दिया है। उन्होंने लापता लोगों की सही संख्या और पहचान की पुष्टि करने के साथ-साथ राहत एवं बचाव दल की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया है। दक्षिण कोरियाई समुद्री अधिकारियों के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती समुद्र में लापता दोनों लोगों का जल्द से जल्द पता लगाना है। खराब समुद्री परिस्थितियों के बीच तटरक्षक बल और अन्य बचाव दल लगातार तलाशी अभियान चला रहे हैं।

अब पलायन नहीं, अपनी माटी में हुनर दिखा रहे कारीगर : मुख्यमंत्री योगी

भदोही। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जिस उत्तर प्रदेश में कभी कारीगर और हस्तशिल्पी रोजी-रोजगार के लिए पलायन को मजबूर थे, आज उन्हें अपनी ही माटी में हुनर दिखाने का मंच मिल रहा है। तकनीक, डिजाइन और बाजार के साथ बेहतर कनेक्टिविटी और सुरक्षा मिली है। भदोही का कालीन आज दुनिया के बाजार में अपनी पहचान बना रहा है। मुख्यमंत्री रविवार को संत रविदास नगर, भदोही के कारपेट एक्सपो मार्ट में 4 से 7 अक्टूबर तक आयोजित इंडिया कारपेट एक्सपो के स्वर्ण जयंती संस्करण का शुभारंभ करने के बाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने फीता काटकर एक्सपो का शुभारंभ किया और स्टॉलों पर जाकर कारीगरों व हस्तशिल्पियों के उत्पाद देखे। एक्सपो में 227 से अधिक एग्जीबिटर्स और 65 देशों के 450 से अधिक विदेशी बायर्स हिस्सा ले रहे हैं। इनमें ब्रिक्स देशों के 106 बायर्स हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में हताशा और निराशा थी। दंगा, कर्फ्यू, उपद्रव और माफियागिरी के कारण कारोबार का माहौल नहीं था। कारीगर को काम नहीं मिलता था और देशी-विदेशी खरीदार भी नहीं आते थे। सरकार ने वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना में भदोही के कालीन को शामिल कर कारीगरों को तकनीक, डिजाइन और बाजार से जोड़ा। मुख्यमंत्री ने कहा कि संत रविदास नगर और सिल्क क्लस्टर से 6,100 करोड़ रुपए का निर्यात हो रहा है। देश के कुल कालीन निर्यात में संत रविदास नगर, मिर्जापुर और वाराणसी के सिल्क क्लस्टर की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत है। अकेले संत रविदास नगर में 2,500 एमएसएमई यूनिट हैं, जिनका वार्षिक टर्नओवर 10 हजार करोड़ रुपए है। इस उद्योग से पांच लाख से अधिक लोगों को सीधे रोजगार मिला है। उन्होंने बताया कि जनपद में निर्मित 90 प्रतिशत कालीन अमेरिका, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और ब्रिटेन समेत विभिन्न देशों को निर्यात किए जाते हैं। भदोही के हस्तनिर्मित कालीन को जीआई टैग भी मिला है। कारपेट और टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी में तकनीकी शिक्षा, डिजाइनिंग और डाइंग के प्रशिक्षण के लिए भदोही में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कारपेट टेक्नोलॉजी स्थापित है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी का सीधा लाभ कालीन उद्योग को मिल रहा है। गंगा एक्सप्रेसवे का विंध्य एक्सप्रेसवे के रूप में विस्तार होने पर संत रविदास नगर से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट छह घंटे में पहुंचा जा सकेगा। वहां की कार्गो सुविधा से भदोही की कालीन दुनिया के बाजार तक आसानी से पहुंच सकेगी। साथ ही वाराणसी से हल्दिया के बीच इनलैंड वाटरवे और वाराणसी में लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी कार्गो सुविधा उपलब्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश में उपद्रव, कर्फ्यू और दंगा नहीं होते। कोई माफिया खुली जीप में पिस्टल लहराकर किसी को धमका नहीं सकता और बेटी व व्यापारी की सुरक्षा में सेंध नहीं लगा सकता। उन्होंने कहा कि प्रदेश को 50 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। 15 लाख करोड़ रुपए के प्रस्तावों की ग्राउंड ब्रेकिंग हो चुकी है और साढ़े सात लाख करोड़ रुपए के उद्योग बहुत जल्द धरातल पर उतरने जा रहे हैं। प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई यूनिट हैं और प्रत्येक यूनिट को पांच लाख रुपये का सुरक्षा बीमा कवर दिया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में करीब 14 हजार कारखाने थे, जिनकी संख्या अब 35 हजार से अधिक हो गई है। देश के 55 प्रतिशत मोबाइल फोन और 60 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट का निर्माण उत्तर प्रदेश में हो रहा है। डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के छह नोड पर काम चल रहा है और प्रदेश में 12 निजी औद्योगिक पार्क विकसित किए जा रहे हैं। निवेश मित्र, निवेश सारथी और उद्यमी मित्र जैसी व्यवस्थाओं के जरिये निवेशकों को सुविधा दी जा रही है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में देश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क का 60 प्रतिशत हिस्सा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भदोही के हुनरमंद हाथों से तैयार कालीन आज दुनिया के बड़े-बड़े प्रतिष्ठानों की शोभा बढ़ा रहे हैं। देश के नए संसद भवन में बिछा कालीन भी संत रविदास नगर में तैयार हुआ है। जिले के पास जीआई टैग, ओडीओपी का प्लेटफार्म, कारपेट एक्सपो मार्ट और मजबूत निर्यात तंत्र है। उन्होंने बताया कि लखनऊ और हरदोई के बीच एक हजार एकड़ में पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क विकसित किया जा रहा है। प्रदेश के प्रत्येक जनपद में लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल एंप्लॉयमेंट एंड स्किलिंग जोन बनाने की तैयारी है। यहां उद्योगों की मांग के अनुसार कुशल मैनपावर तैयार की जाएगी। सीएम योगी ने कहा कि 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में छह लाख से अधिक विजिटर पहुंचे। डेढ़ लाख से अधिक बी2बी बैठकें हुईं। इसमें 2,400 से अधिक एग्जीबिटर्स और 650 से अधिक विदेशी खरीदार शामिल हुए।

उत्तराखंड में सीनियर और जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के स्टाइपेंड में की गई बढ़ोतरी : सीएम धामी

बनबसा। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को बनबसा स्थित एनएचपीसी परिसर में राज्य कैबिनेट की बैठक की अध्यक्षता की। चंपावत जिले में राज्य कैबिनेट की बैठक पहली बार आयोजित की गई। बैठक में सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास, स्वास्थ्य, चारधाम यात्रा, यातायात व्यवस्था और विभिन्न जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने बताया कि बैठक में करीब 25 से 26 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विचार-विमर्श किया गया। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से कहा कि राज्य सरकार ने सीनियर और जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की है। पहले यह राशि करीब 75 हजार रुपये थी, जिसे अब बढ़ाकर एक लाख रुपये से अधिक कर दिया गया है। इसके अलावा देहरादून, लालकुआं और बिंदुखत्ता समेत अन्य क्षेत्रों में ‘क्लास बी’ भूमि के नियमितीकरण की समय-सीमा को एक वर्ष के लिए बढ़ाया गया है। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों को लेकर भी कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। सरकार का प्रयास है कि राज्य सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों का लाभ दूरदराज के सीमावर्ती इलाकों तक पहुंचे। बनबसा और टनकपुर क्षेत्र चंपावत जिले का हिस्सा हैं और यहां ‘आदर्श चंपावत’ के विजन के तहत विकास कार्य किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन क्षेत्रों में सभी विभाग सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। कैबिनेट के साथ वरिष्ठ अधिकारियों के यहां पहुंचने से विकास कार्यों को नई गति मिलेगी। चारधाम यात्रा को लेकर भी बैठक में विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि यात्रा सुचारू रूप से संचालित हो और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलें, इसके लिए सड़कों की स्थिति और अन्य व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कैंची धाम में श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने पर भी विचार किया गया। मुख्यमंत्री ने बताया कि बैठक में ‘सेवा संकल्प अभियान’ को लेकर भी चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के देशसेवा और समर्पण के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर 7 तारीख को सभी जिलों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। धामी ने कहा कि बनबसा और टनकपुर नेपाल सीमा से सटे क्षेत्र हैं और दोनों देशों के लोगों के बीच लंबे समय से सामाजिक एवं सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। उन्होंने कहा कि यहां की संस्कृति और परंपराओं में काफी समानता है तथा दोनों ओर के लोगों के बीच ‘रोटी-बेटी’ के रिश्ते भी हैं। सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास और यहां के लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आगे भी महत्वपूर्ण फैसले लेती रहेगी।