150 अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को डिपोर्ट करने के लिए कश्मीर से बंगाल भेजा गया

कोलकाता। जम्मू-कश्मीर से निकाले गए कुल 150 अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को डिपोर्ट करने (वापस भेजने) के लिए पश्चिम बंगाल लाया गया है। सूत्रों ने पुष्टि की कि इन अवैध प्रवासियों को भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के विमान से श्रीनगर से बागडोगरा हवाई अड्डे तक लाया गया। एक अधिकारी ने बताया कि उन्हें आगे की कार्रवाई के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के नॉर्थ बंगाल फ्रंटियर के अधिकारियों को सौंप दिया गया है। उन्हें एक डिटेंशन सेंटर में रखा जाएगा और आधिकारिक चैनलों के माध्यम से उन्हें वापस बांग्लादेश भेजने की कोशिश की जाएगी। अधिकारी ने आगे कहा कि अगर बांग्लादेश उन्हें स्वीकार करने से इनकार करता है, तो अवैध प्रवासियों को सीमा पार धकेल दिया जाएगा। यह प्रक्रिया 7 अक्टूबर को होने की संभावना है। अधिकारी ने कहा कि यह प्रक्रिया सीमा के अलग-अलग हिस्सों में चरणबद्ध तरीके से होती है। अवैध प्रवासियों को सीमा की बाड़ के पार ले जाया जाता है और जीरो लाइन के करीब पहुंचाया जाता है। फिर वे खुद बांग्लादेश में प्रवेश करते हैं। पश्चिम बंगाल में बीएसएफ ने पहले भी इसी तरह के डिपोर्टेशन का काम किया है। देश के अलग-अलग हिस्सों में पकड़े गए अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को अक्सर अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार डिपोर्ट करने के लिए पश्चिम बंगाल भेजा जाता है। अधिकारियों ने बताया कि कुछ मामलों में बांग्लादेशी अधिकारी अपने नागरिकों को वापस लेने के लिए तैयार हो जाते हैं, जबकि अन्य मामलों में वे जिम्मेदारी लेने से इनकार कर देते हैं। अधिकारियों के अनुसार, आने वाले दिनों में जम्मू-कश्मीर से और भी अवैध प्रवासियों को दूसरी जगह भेजा जा सकता है। इसके परिणामस्वरूप, डिपोर्टेशन (देश से बाहर भेजने) के लिए और भी बांग्लादेशी नागरिकों को पश्चिम बंगाल लाया जा सकता है। इससे पहले भी गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों से अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को पश्चिम बंगाल के रास्ते ही डिपोर्ट किया गया है। खबरों के मुताबिक, अकेले 2026 में पश्चिम बंगाल के रास्ते लगभग 4,800 से 5,000 अवैध प्रवासियों को बांग्लादेश डिपोर्ट किया गया है। विदेश मंत्रालय द्वारा संसद में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, 2009 और 2011 के बीच 23,653 लोगों को डिपोर्ट किया गया था। गृह मंत्रालय ने यह भी बताया है कि 2014 तक 28,131 अवैध प्रवासियों को डिपोर्ट किया गया था। कई राज्यों में वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (एसआईआर) का काम चल रहा है, ऐसे में अधिकारियों का मानना है कि आने वाले महीनों में और भी लोगों को डिपोर्ट किया जा सकता है।
तेलंगाना: एसीबी ने 4 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए टाउन प्लानिंग ऑफिसर को पकड़ा

हैदराबाद। तेलंगाना के एंटी-करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने सोमवार को एक टाउन प्लानिंग ऑफिसर को 4 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा। गोलकोंडा जोन में ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (जीएचएमसी) के ऑफिस में टाउन प्लानिंग सुपरवाइजर, तुलसाराम सुनीता को एसीबी अधिकारियों ने तब पकड़ा जब वह एक सरकारी काम में मदद करने के बदले शिकायतकर्ता से 8 लाख रुपए की रिश्वत मांग रही थीं और 4 लाख रुपए की पहली किस्त ले रही थीं। एसीबी के अनुसार, आरोपी ऑफिसर ने शिकायतकर्ता से रिश्वत की मांग की और उसे स्वीकार किया। यह रिश्वत जीएचएमसी के डिप्टी कमिश्नर द्वारा जारी आदेशों को नजरअंदाज करने के लिए मांगी गई थी, ताकि शिकायतकर्ता बिल्डिंग का निर्माण जारी रख सके, उसे और परेशान न किया जाए और भविष्य में सहयोग मिले। भ्रष्टाचार-रोधी एजेंसी ने एक बयान में कहा कि आरोपी ऑफिसर के पास से रिश्वत के 4 लाख रुपए बरामद किए गए। रिश्वत की रकम के अलावा, आरोपी ऑफिसर के पास 2.50 लाख रुपए नकद भी मिले। यह रकम बरामद कर जब्त कर ली गई। एसीबी ने कहा कि आरोपी ऑफिसर ने अनुचित लाभ पाने के लिए अपने कर्तव्यों का पालन गलत और बेईमानीपूर्ण तरीके से किया था। आरोपी ऑफिसर को न्यायिक रिमांड के लिए नामपल्ली में एसपीई और एसीबी मामलों के स्पेशल जज के सामने पेश किया जा रहा है। बयान में कहा गया है कि मामले की जांच चल रही है। एक और मामले में, एसीबी ने रिश्वतखोरी के आरोप में रंगा रेड्डी जिले की मेडिकल और हेल्थ ऑफिसर स्वर्णा कुमारी, हेल्थ इंस्पेक्टर एम. श्रीनिवास और एक प्राइवेट ड्राइवर मड्डुरी कृष्णाया को पकड़ा। एसीबी के अनुसार डीएम एंड एचओ और हेल्थ इंस्पेक्टर के कहने पर ड्राइवर ने शिकायतकर्ता से उसके जब्त किए गए फिजियोथेरेपी सेंटर की चाबियां लौटाने के बदले 1 लाख रुपए की रिश्वत मांगी। एसीबी अधिकारियों ने ड्राइवर के पास से रिश्वत की रकम बरामद की। तीनों आरोपियों को न्यायिक रिमांड के लिए नामपल्ली में एसपीई और एसीबी मामलों के स्पेशल जज के सामने पेश किया जा रहा है।
संबित पात्रा ने राहुल गांधी के ‘फॉर्म 6’ वाले दावों को खारिज किया, कहा- सुप्रीम कोर्ट ने इसे गैरकानूनी नहीं बताया

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने सोमवार को विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर हमला करते हुए उनके फॉर्म 6, निर्वाचन आयोग और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से संबंधित आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने राहुल गांधी पर उच्चतम न्यायालय की कार्यवाही के संबंध में भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप लगाया। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि कांग्रेस नेता ने उच्चतम न्यायालय की टिप्पणियों को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया और गलत रूप से यह दर्शाया कि न्यायालय ने यह स्थापित कर दिया है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने भाजपा को लाभ पहुंचाने के लिए अवैध और एकतरफा रूप से फॉर्म 6 में बदलाव किया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने उच्चतम न्यायालय में सुनवाई के तुरंत बाद सोशल मीडिया मंच एक्स पर यह आरोप लगाए थे। पात्रा के अनुसार, गांधी ने दावा किया था कि यह बिना किसी संदेह के स्थापित हो गया है कि कुमार ने अवैध और एकतरफा तरीके से फॉर्म 6 को बदला है और अपने पद का दुरुपयोग भाजपा की सहायता के लिए किया है। राहुल गांधी ने यह भी कहा था कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराना होगा। भाजपा नेता ने इस व्याख्या को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि उच्चतम न्यायालय ने न तो फॉर्म 6 को अवैध घोषित किया है और न ही उसे खारिज किया है। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने केवल यह स्पष्ट किया है कि उसने किसी भी संशोधित फॉर्म 6 को अनुमोदित नहीं किया है और यह जानने के लिए आधिकारिक अभिलेखों की जांच करना चाहता है कि बदलाव किसने किए हैं। संबित पात्रा के अनुसार, सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने टिप्पणी की थी कि न्यायालय ने किसी भी परिवर्तित फॉर्म 6 को स्वीकृति नहीं दी है और यह स्थापित करने के लिए अभिलेखों की जांच करनी होगी कि संशोधन किसने किया है। पात्रा ने कहा कि इस टिप्पणी को इस न्यायिक निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता कि फॉर्म 6 स्वयं अवैध है। भाजपा नेता ने निर्वाचन आयोग की 26 सितंबर की प्रेस विज्ञप्ति का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि एसआईआर प्रक्रिया के लिए फॉर्म 6 से संलग्न घोषणा को उच्चतम न्यायालय ने बरकरार रखा है। उन्होंने कहा कि गांधी इस विषय को इस प्रकार प्रस्तुत कर भ्रम उत्पन्न कर रहे हैं, मानो पूरे फॉर्म 6 को ही अवैध घोषित कर दिया गया हो। दरअसल, राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने पोस्ट में आरोप लगाया था कि उच्चतम न्यायालय की कार्यवाही से यह स्थापित हो गया है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने अवैध और एकतरफा तरीके से फॉर्म 6 में बदलाव किया है। उन्होंने कथित बदलाव को भाजपा की सहायता के लिए मुख्य निर्वाचन आयुक्त के पद के दुरुपयोग के एक और प्रमाण के रूप में बताया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि लोकतंत्र पर हमले के रूप में उल्लेखित इस मामले में कथित रूप से शामिल मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य लोगों को जवाबदेह ठहराना होगा। हालांकि, भाजपा ने तर्क दिया कि राहुल गांधी की व्याख्या उच्चतम न्यायालय द्वारा सुनवाई के दौरान कही गई बातों से कहीं आगे है। संबित पात्रा ने कहा कि न्यायालय ने इस पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला है कि विवादित बदलाव किसने किए या क्या वे बदलाव अवैध थे। भाजपा प्रवक्ता ने एसआईआर प्रक्रिया के लिए दस्तावेज़ीकरण पर निर्वाचन आयोग के रुख को स्पष्ट करते हुए उच्चतम न्यायालय के 27 मई, 2026 के निर्णय का भी हवाला दिया। भाजपा प्रवक्ता ने तर्क दिया कि उच्चतम न्यायालय का निर्णय ऐसी व्याख्या का समर्थन नहीं करता। पात्रा ने इस आरोप का भी खंडन किया कि एसआईआर का निर्णय एकतरफा रूप से लिया गया था। उन्होंने कहा कि 24 जून, 2025 को जारी बिहार एसआईआर आदेश को तीनों निर्वाचन आयुक्तों ने सर्वसम्मति से अनुमोदित किया था। पात्रा के अनुसार, निर्वाचन आयोग ने स्वयं अपनी तथ्य-जांच प्रतिक्रिया में इस स्थिति को दोहराया था। भाजपा ने कहा कि यह निर्णय आयोग द्वारा सामूहिक रूप से लिया गया था और घोषणा से जुड़े सार्वजनिक रिकॉर्ड को इस बात के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया कि तीनों निर्वाचन आयुक्तों ने इस प्रक्रिया में भाग लिया था। उन्होंने गांधी पर आरोप लगाया कि वे इस निर्णय को एक व्यक्ति की कार्रवाई के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं, जबकि भाजपा द्वारा उद्धृत निर्वाचन आयोग की स्थिति के अनुसार, यह तीन सदस्यीय आयोग का सर्वसम्मत निर्णय था।पात्रा ने राफेल लड़ाकू विमान विवाद के संबंध में गांधी की ओर से पहले की गई उच्चतम न्यायालय की आलोचना का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि गांधी ने पहले राफेल मामले में उच्चतम न्यायालय ने क्या कहा था, इस बारे में गलत दावे किए थे और बाद में उन्हें न्यायालय के समक्ष अपने बयानों पर स्पष्टीकरण देना पड़ा था। पात्रा ने तर्क दिया कि फॉर्म 6 विवाद में भी एक समान प्रवृत्ति उभर रही है, जहां पूरी कानूनी अभिलेखों की जांच से पहले ही उच्चतम न्यायालय की टिप्पणियों की राजनीतिक व्याख्या की जा रही है। उन्होंने राजनीतिक नेताओं से आग्रह किया कि संवैधानिक संस्थाओं से जुड़े सार्वजनिक आरोप लगाने से पहले वे निर्णयों और आधिकारिक दस्तावेजों का ध्यानपूर्वक अध्ययन करें। पात्रा द्वारा उठाया गया एक अन्य मुद्दा यह दावा था कि निर्वाचन आयोग ने फॉर्म 6 और एसआईआर से संबंधित अपनी 26 सितंबर की प्रेस विज्ञप्ति को वापस ले लिया है। पात्रा ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि प्रेस विज्ञप्ति वापस नहीं ली गई है। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग ने इस विषय पर तथ्य-जांच जारी की है और 26 सितंबर की विज्ञप्ति आयोग के सार्वजनिक रिकॉर्ड का हिस्सा बनी हुई है। भाजपा नेता के अनुसार, उच्चतम न्यायालय में सुनवाई के बाद प्रेस विज्ञप्ति वापस लिए जाने की बात कहने वाली खबरें असत्य हैं। उन्होंने राहुल गांधी पर संवैधानिक संस्थाओं के विरुद्ध आरोप लगाकर भ्रम और अस्थिरता पैदा करने का प्रयास करने का आरोप लगाया। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि राजनीतिक मतभेद वैध हैं, लेकिन दावा किया कि उच्चतम न्यायालय और निर्वाचन आयोग का चुनिंदा रूप से उल्लेख नहीं किया जाना चाहिए या उन्हें इस तरह प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए,
एमपीएससी छात्रों के आंदोलन पर सरकार गंभीर, सचिव हटाए गए, अध्यक्ष पर भी होगा फैसला: एकनाथ शिंदे

मुंबई। महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) की परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग को लेकर चल रहे छात्रों के आंदोलन पर राज्य सरकार ने गंभीर रुख अपनाया है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि सरकार इस पूरे मामले को सकारात्मकता से देख रही है और छात्रों के भविष्य के साथ कोई खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, “हमारे विधायक और सांसद खुद जाकर आंदोलन कर रहे छात्रों से मिले हैं और उनका ज्ञापन लिया है। ओमराजे के क्षेत्र के भी कुछ छात्र उनसे मिले थे। यह छात्रों का आंदोलन है और सरकार इस मामले को सकारात्मकता से देख रही है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि परीक्षाओं में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए और केवल मेरिट को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। किसी भी तरह की गड़बड़ी या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शिंदे ने कहा, “मैं तो कह रहा हूं कि इसमें पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए। परीक्षा में आखिर विद्यार्थियों के भविष्य का सवाल है। मेरिट होना चाहिए। इसमें कोई भी गैर-व्यवहार नहीं होना चाहिए। विद्यार्थियों के जीवन के साथ किसी को भी खेलने का अधिकार नहीं है।” सरकार की कार्रवाई का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि इसी के चलते सरकार ने सचिव को तत्काल पद से हटा दिया है। एमपीएससी सचिव पद पर तैनात हरपलकर को पद से दूर कर दिया गया है। एकनाथ शिंदे ने कहा, “सचिव को तो तुरंत सरकार ने साइड में कर दिया है। एमपीएससी के विद्यार्थियों का जो आंदोलन शुरू है, उस बारे में सरकार ने गंभीरता से संज्ञान लिया है। अगर कुछ गलत हुआ है तो उसको सुधारा जाना चाहिए, यही सरकार की भूमिका है।” वहीं, एमपीएससी अध्यक्ष को हटाने की छात्रों की मांग पर भी सरकार विचार कर रही है। उपमुख्यमंत्री ने बताया कि अध्यक्ष को लेकर छात्रों की मांग पर भी मुख्यमंत्री ने गंभीरता से संज्ञान लिया है और इस संबंध में राज्यपाल से चर्चा जारी है। उन्होंने कहा, “अब जो अध्यक्ष के बारे में मांग की गई है, उस पर भी मुख्यमंत्री ने गंभीरता से लिया है। राज्यपाल से भी उनकी चर्चा शुरू है। ये संवैधानिक पद होने की वजह से इस बारे में जो भी प्रक्रिया है, वो मुख्यमंत्री ने भी गंभीरता से ली है, इसलिए उस पर भी सही निर्णय होगा।” सरकार का स्पष्ट रुख है कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मेरिट को ही महत्व दिया जाएगा और यदि कोई गलती हुई है तो उसे सुधारा जाएगा।
केरल: प्रियंका गांधी की पर्यटन पहल और सरकार की योजना से आकार ले रहा ‘ब्रांड वायनाड’

तिरुवनंतपुरम। वायनाड को एक बेहतर तरीके से प्रबंधित वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में नई पहचान देने की तैयारी है। राज्य सरकार मंगलवार को अपने चर्चित ‘ब्रांड वायनाड’ प्रोजेक्ट की शुरुआत करने जा रही है। वायनाड की सांसद प्रियंका गांधी भी पिछले कुछ समय से ऐसी पहल की वकालत करती रही हैं। प्रियंका गांधी पहाड़ी जिले की प्राकृतिक सुंदरता, संस्कृति और एडवेंचर टूरिज्म की संभावनाओं को सामने लाने के लिए व्यापक स्तर पर पर्यटन को बढ़ावा देने की बात करती रही हैं। पर्यटन मंत्री पीसी विष्णुनाध मंगलवार को वायथिरी विलेज रिजॉर्ट में इस प्रोजेक्ट की शुरुआत करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि मंत्री टी. सिद्दीकी करेंगे। इस पहल को वीडी सतीशन सरकार के 100 दिवसीय एक्शन प्रोग्राम में शामिल किया गया है। यह प्रोजेक्ट इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसका उद्देश्य वायनाड को केवल एक पारंपरिक हिल स्टेशन की पहचान से आगे ले जाना है। इसे प्रकृति, स्थानीय जीवन, कृषि और आदिवासी संस्कृति को जोड़ने वाले एक खास पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने की योजना है। प्रियंका गांधी वायनाड में बेहतर बुनियादी ढांचा तैयार करने और पर्यटन स्थल के रूप में जिले का बड़े स्तर पर प्रचार करने की वकालत करती रही हैं। उनसे पहले वायनाड के सांसद रहे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी कई बार जिले की पर्यटन संभावनाओं पर अधिक ध्यान देने की मांग की थी। उन्होंने पर्यटन के जरिए स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के अवसर बढ़ाने पर भी जोर दिया था। अब सरकार की पहल इस सोच को औपचारिक रूप देने की कोशिश है। ‘ब्रांड वायनाड’ के केंद्र में जिम्मेदार पर्यटन यानी रेस्पोंसिबल टूरिज्म होगा। इसके तहत होमस्टे को आधुनिक बनाने के साथ वायनाड को एक सुरक्षित और टिकाऊ वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में बढ़ावा दिया जाएगा। इस योजना में केवल दर्शनीय स्थलों को दिखाने के बजाय पर्यटकों को अलग-अलग अनुभव देने पर जोर रहेगा। इसमें कॉफी के बागान, स्थानीय भोजन, कृषि जीवन, आदिवासी विरासत, ग्रामीण अनुभव और जिले का खास प्राकृतिक वातावरण शामिल होगा। वायनाड की कॉफी, मसाले, पारंपरिक चावल की किस्मों और शहद को भी पर्यटन के अनुभव से जोड़ा जाएगा। जीआई टैग वाली वायनाड रोबस्टा कॉफी को ‘फार्म-टू-कप’ मॉडल के जरिए वैश्विक स्तर पर प्रमोट किया जाएगा। एन ऊरू हेरिटेज विलेज का विस्तार किया जाएगा, ताकि वायनाड की मूल आदिवासी संस्कृति को बेहतर तरीके से दुनिया के सामने पेश किया जा सके। इसके अलावा 50 करोड़ रुपए की लागत से एक ट्राइबल यूनिवर्सिटी और हेरिटेज नॉलेज सेंटर भी स्थापित किया जाएगा। सरकार की योजना वायनाड सीएसआर एक्सचेंज शुरू करने, ई-वेस्ट मुक्त अभियान चलाने और जिले के विकास में कॉरपोरेट क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने की भी है। इस योजना में पर्यटन को केवल पहाड़ियों पर ज्यादा पर्यटकों को लाने तक सीमित नहीं रखा गया है। नई सोच के तहत वायनाड के प्राकृतिक नजारे, स्थानीय लोग, उत्पाद, संस्कृति और जीवनशैली को मिलाकर पूरे जिले को एक अलग ‘ब्रांड’ के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है। सरकार के लिए असली परीक्षा यह होगी कि ‘ब्रांड वायनाड’ की यह योजना बेहतर तरीके से प्रबंधित पर्यटन को जमीन पर कितना सफल बना पाती है और इससे वायनाड में रहने वाले स्थानीय लोगों की आमदनी में कितनी बढ़ोतरी होती है।
जावेद अख्तर ने सीजेपी पर टिप्पणी से जुड़े फर्जी संदेश को किया खारिज, बोले- मेरे नाम से फैलाई जा रही झूठी बातें

मुंबई। दिग्गज पटकथा लेखक जोड़ी सलीम-जावेद के सदस्य और मशहूर लेखक जावेद अख्तर ने हाल ही में उनके नाम से वायरल किए गए एक फर्जी संदेश को लेकर सफाई दी है। जावेद अख्तर ने सोमवार को ‘एक्स’ अकाउंट पर एक लंबा नोट लिखकर उन दावों को खारिज किया जिनमें कहा गया था कि उन्होंने सीजेपी के फाउंडर अभिजीत दिपके की आलोचना की है। उन्होंने बताया कि वह मैसेज नकली है। उन्होंने लिखा, “मैं जावेद अख्तर, सभी को बताना चाहता हूं कि सोशल मीडिया पर चल रहा वह नकली मैसेज, जिसमें कहा गया है कि मैंने सीजेपी की आलोचना की है और अभिजीत दिपके को बुरा-भला कहा है, पूरी तरह से झूठा है।” उन्होंने कहा, “मुझे हैरानी है कि जो लोग दिपके और सीजेपी का विरोध कर रहे हैं, उन्हें मुझ जैसे व्यक्ति से विश्वसनीयता उधार लेने की जरूरत पड़ रही है। क्या हालत हो गई है? दुखद है।” सोशल मीडिया पर एक नकली मैसेज फैलाया गया, जिसमें दावा किया गया कि जाने-माने गीतकार और पटकथा लेखक ने अभिजीत दिपके और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की आलोचना की है। उस मैसेज में दिपके को अरविंद केजरीवाल का ‘कठपुतली’ बताया गया और सीजेपी पर भाजपा विरोधी एजेंडा चलाने का आरोप लगाया गया। इस बीच, अभिजीत दिपके के नेतृत्व वाली कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर एक नया विरोध अभियान शुरू किया है। यह आंदोलन 2 अक्टूबर को मुंबई में शुरू हुआ, जिसमें पुलिस द्वारा प्रदर्शन की अनुमति न दिए जाने के बावजूद सैकड़ों समर्थक शिवाजी पार्क में जमा हुए। सीजेपी चुनाव आयोग द्वारा वोटर लिस्ट (मतदाता सूची) के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) का विरोध कर रही है और उसने इस प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। चुनाव आयोग का कहना है कि इस संशोधन का उद्देश्य योग्य मतदाताओं को बनाए रखते हुए डुप्लिकेट, मृत और अयोग्य मतदाताओं के नाम हटाना है। सीजेपी ने घोषणा की है कि यह अभियान गोवा, बेंगलुरु और कोलकाता सहित अन्य शहरों तक भी फैलाया जाएगा। दिपके ने दिल्ली लौटने की भी घोषणा की है और कहा है कि अगर मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा नहीं देते हैं तो 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। दिल्ली पुलिस ने 4 अक्टूबर को एक प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था।
बंगाल: कोलकाता से यूरोप के लिए सीधी उड़ानें शुरू करने की दिशा में पहल का केंद्रीय मंत्री ने दिया भरोसा

कोलकाता। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू ने सोमवार को कहा कि उनका मंत्रालय जल्द ही अलग-अलग एयरलाइन कंपनियों के साथ बातचीत शुरू करेगा, ताकि कोलकाता को यूरोप के विभिन्न शहरों से जोड़ने वाली सीधी उड़ानें शुरू की जा सकें। नायडू सोमवार को पश्चिम बंगाल में चार नए एयरपोर्ट के विकास के लिए केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय और राज्य सरकार के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के लिए कोलकाता पहुंचे थे। इस दौरान पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने नायडू से लंदन समेत यूरोप के विभिन्न शहरों के लिए कोलकाता से सीधी उड़ानें शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का अनुरोध किया। नायडू ने मुख्यमंत्री को भरोसा दिया कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय इस मुद्दे पर जल्द ही अलग-अलग एयरलाइन कंपनियों से बातचीत शुरू करेगा। नायडू ने कहा कि मंत्रालय का लक्ष्य पश्चिम बंगाल में कुल आठ नए एयरपोर्ट स्थापित करना है। इनमें से चार एयरपोर्ट के लिए सोमवार को एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इस मामले में राज्य सरकार को पूरा सहयोग देगी। नए एयरपोर्ट के विकास का काम केंद्र और राज्य के बीच तालमेल से किया जाएगा। रनवे के नवीनीकरण और टर्मिनल बिल्डिंग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जबकि एयरपोर्ट से जुड़े तकनीकी पहलुओं की जिम्मेदारी केंद्र सरकार संभालेगी। सोमवार को जिन चार नए क्षेत्रीय एयरपोर्ट के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए, उनमें: पुरुलिया जिले का छर्रा, दक्षिण दिनाजपुर जिले का बालुरघाट, अलीपुरद्वार जिले का हासीमारा सिविल एन्क्लेव, पश्चिम मेदिनीपुर जिले का कलाईकुंडा शामिल हैं। हासीमारा और कलाईकुंडा भारतीय वायुसेना के महत्वपूर्ण बेस भी हैं। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि इन चार नए एयरपोर्ट के विकास से पश्चिम बंगाल में हवाई संपर्क का बुनियादी ढांचा और बेहतर होगा। जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार की रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम के तहत हुए समझौते में राज्य सरकार जरूरी जमीन, एयरपोर्ट तक पहुंचने वाली सड़कें, बिजली और पानी की आपूर्ति के साथ बुनियादी सुरक्षा की व्यवस्था करेगी। वहीं, केंद्र सरकार एयरपोर्ट के मुख्य बुनियादी ढांचे को विकसित करेगी। एमओयू पर हस्ताक्षर के मौके पर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू से पश्चिम बंगाल में एक पायलट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट स्थापित करने का भी अनुरोध किया।
उत्तराखंड में अलग कैंपेन नहीं चलेगा, सिर्फ कांग्रेस बैनर के तहत होगा प्रचार: केसी वेणुगोपाल

नई दिल्ली। उत्तराखंड में आगामी चुनावों को लेकर कांग्रेस ने अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत से मुलाकात के बाद साफ कर दिया कि राज्य में कोई भी अलग-अलग कैंपेन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए इस मुलाकात की जानकारी दी। उन्होंने लिखा, “चुनाव वाले राज्य उत्तराखंड में चल रहे कैंपेन पर चर्चा करने के लिए उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत से मुलाकात की।” वेणुगोपाल ने अपनी पोस्ट में पार्टी की आगे की रणनीति को लेकर स्थिति साफ की। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट किया गया कि सभी कैंपेन उत्तराखंड के सभी नेताओं के साथ मिलकर, सिर्फ कांग्रेस के बैनर तले और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में चलाए जाएंगे, जिनका एकमात्र मकसद पार्टी की जीत सुनिश्चित करना होगा। उन्होंने सख्त लहजे में कहा, “पार्टी अलग-अलग कैंपेन बर्दाश्त नहीं करेगी। केवल वही सामूहिक कार्यक्रम होंगे, जिनकी योजना पार्टी संगठन ने बनाई है।” दरअसल, पिछले कुछ दिनों से उत्तराखंड कांग्रेस में अलग-अलग गुटों द्वारा अपने स्तर पर कार्यक्रम और कैंपेन चलाए जाने की खबरें सामने आ रही थीं। इसे लेकर पार्टी हाईकमान चिंतित थे। इसी को लेकर वेणुगोपाल ने हरीश रावत से मुलाकात कर एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की है। हरीश रावत उत्तराखंड कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ और प्रभावशाली नेताओं में से एक हैं और उनका राज्य की राजनीति में बड़ा जनाधार है। ऐसे में चुनाव से पहले पार्टी किसी भी तरह की गुटबाजी से बचना चाहती है। वेणुगोपाल ने भरोसा जताया कि राज्य इकाई एकजुट होकर चुनाव लड़ेगी। उन्होंने लिखा, “पार्टी को भरोसा है कि पूरी राज्य इकाई की ऊर्जा और कड़ी मेहनत से हम उत्तराखंड में जीत हासिल करेंगे।
समय पर इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं पूरी करने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी: नितिन गडकरी

नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को गुजरात में आयोजित ‘चिंतन शिविर 2026- ए नेशनल कॉन्क्लेव ऑन हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर’ का उद्घाटन करते हुए कहा कि देश में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और परियोजना क्रियान्वयन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और संयुक्त प्रयास आवश्यक हैं। इस दो दिवसीय आयोजन में विभिन्न राज्यों के परिवहन और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, क्रियान्वयन एजेंसियों के प्रतिनिधि और अन्य हितधारक शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य राजमार्ग विकास, परियोजना क्रियान्वयन और अवसंरचना निर्माण से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करना है। गडकरी ने कहा कि चिंतन शिविर केंद्र और राज्यों को एक साझा मंच उपलब्ध कराता है, जहां वे जमीनी स्तर के अनुभवों को साझा कर सकते हैं और राजमार्ग विकास में सामने आने वाली चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान तलाश सकते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि विभिन्न राज्यों द्वारा अपनाई गई सफल कार्य प्रणालियों और नवाचारों की पहचान की जानी चाहिए तथा जहां संभव हो, उन्हें दूसरे राज्यों में भी लागू किया जाना चाहिए। इससे परियोजनाओं के क्रियान्वयन और अवसंरचना निर्माण के परिणामों को बेहतर बनाया जा सकेगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में राजमार्ग विकास का फोकस गुणवत्ता, सुरक्षा, गति और विश्वस्तरीय मानकों पर होना चाहिए। उन्होंने परियोजनाओं की शुरुआत से पहले बेहतर योजना बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। गडकरी ने बताया कि डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करते समय विस्तृत सर्वेक्षण, सड़क के संरेखण (एलाइनमेंट) की योजना, भूमि अधिग्रहण, उपयोगिताओं के स्थानांतरण और आवश्यक वैधानिक मंजूरियों की समय पर व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। यदि प्रारंभिक स्तर पर तैयारी बेहतर हो, तो परियोजनाओं में देरी और लागत वृद्धि को काफी हद तक रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा को भी राजमार्ग नियोजन और परियोजना डिजाइन का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए। दुर्घटना संभावित स्थलों की पहचान कर निर्माण और योजना चरण में ही उपयुक्त सुरक्षा उपायों को शामिल करने से सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकती है। चिंतन शिविर के विषयगत सत्रों में परियोजनाओं के क्रियान्वयन संबंधी चुनौतियों, सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों और ऐसे व्यावहारिक समाधानों पर चर्चा की जा रही है, जिन्हें देशभर में दोहराया जा सके। गडकरी ने नई तकनीकों, नवाचारी निर्माण पद्धतियों और कम लागत वाली लेकिन टिकाऊ निर्माण सामग्रियों के अधिक व्यापक उपयोग का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इससे परियोजनाओं की गुणवत्ता बेहतर होगी और निर्माण एवं रखरखाव लागत दोनों में कमी आएगी। उन्होंने राज्यों और क्रियान्वयन एजेंसियों से आग्रह किया कि वे अपने नवाचारों और जमीनी अनुभवों को साझा करें, ताकि पूरे देश को उनका लाभ मिल सके। गडकरी ने कहा कि सड़क निर्माण और रखरखाव को और बेहतर बनाने के लिए अनुसंधान, तकनीक और निरंतर सुधार पर विशेष ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि यदि परियोजनाओं की योजना, क्रियान्वयन, सुरक्षा और तकनीकी नवाचारों पर समान रूप से ध्यान दिया जाए, तो भारत विश्वस्तरीय सड़क अवसंरचना के निर्माण में और तेजी से आगे बढ़ सकता है।
रणजी ट्रॉफी: 19 वर्षीय म्हात्रे बने मुंबई के उप-कप्तान, सूर्यकुमार यादव टीम से बाहर

नई दिल्ली। मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (एमसीए) ने रणजी ट्रॉफी के पहले मैच में 19 वर्षीय आयुष म्हात्रे को उप-कप्तान नियुक्त किया है। इसके साथ ही 42 बार की चैंपियन टीम ने सीजन के पहले मैच के लिए चुनी गई अपनी 16 सदस्यीय टीम में सूर्यकुमार यादव को स्थान नहीं दिया है। मुंबई 11 अक्टूबर से चंडीगढ़ के खिलाफ अपने नए सीजन की शुरुआत करेगी। यह मैच वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाना है। मुंबई इस साल की प्रतियोगिता में राजस्थान, तमिलनाडु, रेलवे, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के साथ एलीट ‘ग्रुप डी’ में है। भारत को टी20 वर्ल्ड कप खिताब जिताने वाले सूर्यकुमार यादव ने खुद को चयन के लिए उपलब्ध बताया था, लेकिन इसके बावजूद उनका चयन नहीं हुआ। ऐसा इसलिए था, क्योंकि राजेश पवार की अगुवाई वाली चयन समिति ने रेड-बॉल फॉर्मेट में युवा खिलाड़ियों को प्राथमिकता देने का फैसला किया है। पवार ने अन्य चयनकर्ताओं के साथ एक घंटे तक बैठक की, जिसमें कप्तान सिद्धेश लाड, मुख्य कोच ओंकार साल्वी और क्रिकेट सलाहकार व पूर्व भारतीय क्रिकेटर और मुख्य चयनकर्ता दिलीप वेंगसरकर भी शामिल हुए। मुंबई को सीम-बॉलिंग ऑलराउंडर शार्दुल ठाकुर की कमी भी खलेगी। शार्दुल के दाहिने हाथ की बीच की उंगली में ट्रेनिंग के दौरान फ्रैक्चर हो गया था और वे कम से कम शुरुआती दो मैच नहीं खेल पाएंगे। भारतीय ओपनर यशस्वी जायसवाल का नाम भी टीम में शामिल किया गया है, जिससे बल्लेबाजी क्रम मजबूत होगा और उन्हें नवंबर में न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली टेस्ट सीरीज की तैयारी के लिए मैच खेलने का अहम मौका मिलेगा। म्हात्रे आईपीएल 2026 के दौरान हैमस्ट्रिंग की चोट के कारण लगभग पांच महीने तक प्रतिस्पर्धी क्रिकेट से दूर रहे थे, उस समय वे चेन्नई सुपर किंग्स के लिए खेल रहे थे। म्हात्रे और लाड ने हाल ही में बीकेसी इनडोर सुविधा में फिटनेस टेस्ट पास किया और अपनी मैच फिटनेस साबित करने के लिए कांगा लीग में भी खेले। ओपनर दिव्यांश सक्सेना ने भी प्री-सीजन प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन के दम पर मुंबई की रणजी ट्रॉफी टीम में वापसी की है। मुंबई की टीम: सिद्धेश लाड (कप्तान), यशस्वी जायसवाल, आयुष म्हात्रे (उप-कप्तान), दिव्यांश सक्सेना, मुशीर खान, सरफराज खान, सुवेद पारकर, आकाश आनंद (विकेटकीपर), हार्दिक तामोरे (विकेटकीपर), शम्स मुलानी, तनुष कोटियन, अथर्व अंकोलेकर, तुषार देशपांडे, मोहित अवस्थी, सिल्वेस्टर डिसूजा और ओंकार तरमाले।