‘ज्ञानवान, कर्मों में निपुणता के साथ सदाचार से युक्त व्यक्ति कहलाता है श्रेष्ठ’, पीएम मोदी ने साझा किया सुभाषित

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर श्रेष्ठ व्यक्ति के बारे में एक सुभाषित साझा किया। इस सुभाषित के जरिए बताया गया कि वास्तविक अर्थों में श्रेष्ठता क्या है और इसके लिए मनुष्य में कौन-कौन से गुण होने आवश्यक हैं। प्रधानमंत्री मोदी की ओर से संस्कृत श्लोक, “ज्ञानवांश्च तथा वाग्मी कर्मस्वपि च निष्ठितः। एवं युक्तोऽपि न श्रेयान् यदि शीलविवर्जितः॥” साझा किया गया। इसका भावार्थ है कि जो मनुष्य ज्ञानवान्, वाग्मी और कर्मों में निपुण होने के साथ शील एवं सदाचार से युक्त होता है, वही इस संसार में वास्तव में श्रेष्ठ कहलाता है। पीएम मोदी की ओर से साझा किया गया यह श्लोक महाराजा भोज द्वारा रचित सुप्रसिद्ध वास्तुशास्त्र ग्रंथ ‘समराङ्गणसूत्रधार’ के 44वें अध्याय का 16वां श्लोक है। इस श्लोक में एक उत्तम चरित्र और सदाचार के महत्व के बारे में बताया गया है। इस श्लोक के माध्यम से बताया गया है कि कोई व्यक्ति चाहे कितना भी बड़ा ज्ञानी हो, बहुत अच्छा वक्ता (बोलने में कुशल) हो और अपने काम में पूरी तरह निपुण व निष्ठावान हो, यदि उसमें अच्छा चरित्र (शील) नहीं है, तो वह समाज में आदरणीय या कल्याणकारी नहीं माना जा सकता।” इस श्लोक का भावार्थ है कि समाज में ज्ञान को बहुत बड़ा दर्जा दिया गया है। लेकिन ज्ञानी व्यक्ति के पास अच्छा चरित्र होना भी उतना ही जरूरी है। कई लोग अपनी बातों से किसी को भी प्रभावित कर लेते हैं। लेकिन यदि उनके मन में खोट है और उनका चरित्र साफ नहीं है, तो उनकी मीठी बातें केवल दूसरों को धोखा देने का जरिया बन जाती हैं। इसी तरह अपने काम में माहिर होना और उसे पूरी लगन से करना बहुत अच्छी बात है। लेकिन यदि कोई पेशेवर रूप से बहुत सफल है और उसमें नैतिक मूल्य नहीं हैं, तो यह सफलता अधूरी है।
जंतर-मंतर प्रदर्शन में गिरफ्तार 17 छात्रों को पटियाला हाउस कोर्ट से मिली जमानत

नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किए गए 17 लोगों को पटियाला हाउस कोर्ट ने जमानत दे दी है। यह मामला संसद मार्ग थाने में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। गिरफ्तार लोगों में छात्र और स्वतंत्र पत्रकार शामिल हैं। इंडियन यूथ कांग्रेस (आईवाईसी) के मुताबिक, ये लोग कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे को लेकर प्रदर्शन और उसकी कवरेज कर रहे थे। पुलिस ने अदालत के समक्ष सभी आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने की मांग की थी। आरोपियों की ओर से पेश वकीलों ने पुलिस की इस मांग का विरोध किया। बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि आरोपियों के खिलाफ लगाए गए अपराधों में अधिकतम सजा सात साल से कम है। साथ ही, गिरफ्तारी के आधार में किसी भी आरोपी की व्यक्तिगत भूमिका स्पष्ट रूप से नहीं बताई गई है। बचाव पक्ष के वकीलों ने अदालत को यह भी बताया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ आरोपियों को चोटें आई थीं। वकीलों का कहना है कि चोट लगने के बावजूद उन्हें तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई। अदालत के समक्ष यह भी आरोप लगाया गया कि दो आरोपियों ने थाने में हिरासत के दौरान उनके साथ मारपीट किए जाने की शिकायत की है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने सभी 17 आरोपियों को 15-15 हजार रुपये के जमानती बॉन्ड पर जमानत देने का आदेश दिया। इनमें चार महिला आरोपियों को व्यक्तिगत मुचलके पर तत्काल रिहा करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, अन्य 13 आरोपियों की रिहाई जमानतदार पेश किए जाने के बाद होगी। अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से भी रिपोर्ट तलब की है। कोर्ट ने डीसीपी, नई दिल्ली से मामले में रिपोर्ट पेश करने को कहा है। इसके अलावा थाना संसद मार्ग क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया है, ताकि प्रदर्शन और गिरफ्तारी से जुड़ी घटनाओं की जांच में इनका इस्तेमाल किया जा सके। अदालत ने उन आरोपियों को आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया है, जिन्होंने प्रदर्शन के दौरान चोट लगने की बात कही है। कोर्ट के निर्देश के बाद अब मामले में पुलिस की कार्रवाई और आरोपियों की ओर से लगाए गए हिरासत में मारपीट के आरोपों पर भी नजर रहेगी। इस बीच, 17 आरोपियों को जमानत मिलने के बाद प्रदर्शन से जुड़े मामले में राजनीतिक हलचल भी तेज हो सकती है। आईवाईसी ने गिरफ्तार लोगों को छात्र और स्वतंत्र पत्रकार बताते हुए उनकी गिरफ्तारी पर सवाल उठाए हैं। वहीं, पुलिस की ओर से दर्ज मामले में लगाए गए आरोपों और जांच की दिशा आने वाले दिनों में स्पष्ट होगी।
खोह नदी के तट पर बसा सिद्धबली मंदिर, मनोकामना पूरी होने पर तोड़ते हैं नारियल

उत्तराखंड। देवभूमि उत्तराखंड अपनी अलौकिक आध्यात्मिक चेतना और प्राकृतिक वैभव के लिए जाना जाता है। इसी पावन धरा पर गढ़वाल के प्रवेश द्वार कोटद्वार में खोह नदी के तट पर स्थित ‘श्री सिद्धबली मंदिर’ भगवान हनुमान को समर्पित एक अत्यंत प्रसिद्ध और प्राचीन सिद्धपीठ है। शिवालिक पहाड़ियों की शांत गोद में बसा यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है बल्कि आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का भी एक अनुपम स्रोत है। मंगलवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंदिर के लिए एक खास पोस्ट किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर का विशेष वीडियो पोस्ट कर लिखा, “पौड़ी गढ़वाल जिले के कोटद्वार में स्थित सिद्धबली मंदिर भगवान हनुमान को समर्पित है। यह मंदिर खास तौर पर हनुमान जयंती और दूसरे धार्मिक आयोजनों के मौके पर बड़ी संख्या में भक्तों को अपनी ओर खींचता है। यह पवित्र जगह अपने शानदार माहौल, लगातार हनुमान चालीसा के पाठ और खास रस्मों के लिए मशहूर है।” मंदिर को लेकर ऐसी मान्यता है कि यहां सच्चे मन से आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और बाबा के दरबार से कोई निराश नहीं लौटता। यहां नारियल चढ़ाने और नारियल तोड़ने की विशेष परंपरा है। मंदिर के चारों तरफ हरी-भरी पहाड़ियों की श्रृंखलाएं और शांत प्राकृतिक वातावरण है, जो भक्तों को अलौकिक शांति प्रदान करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इसी स्थान पर गुरु गोरखनाथ और हनुमान जी महाराज के बीच भेंट व साधना से जुड़े प्रसंग का उल्लेख मिलता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, नाथ संप्रदाय के महान गुरु गुरु गोरखनाथ ने अपने शिष्यों और अनुयायियों के साथ इस पवित्र स्थल पर लंबे समय तक कठोर तपस्या की थी। कहा जाता है कि उनकी साधना से प्रसन्न होकर भगवान हनुमान ने उन्हें यहीं साक्षात दर्शन दिए थे। इसी कारण इस स्थान का नाम ‘सिद्धबली’ (सिद्ध यानी तपस्या से पूर्ण और बली यानी बलशाली हनुमानजी) पड़ा। मंदिर के गर्भ गृह में भगवान हनुमान की मूर्ति स्थापित होने से पहले प्राचीन काल से ही ‘सिद्ध पिंडियां’ विद्यमान हैं, जिनकी पूजा यहां मुख्य रूप से की जाती है।
महिला पत्रकार उत्पीड़न मामला: दिल्ली सरकार ने अधिकारियों के प्रभार संबंधी आदेश में किया बदलाव

नई दिल्ली। महिला पत्रकारों से उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े एक अधिकारी के अनुरोध के बाद, दिल्ली सरकार ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार सौंपने वाले आदेश में संशोधन किया है। अपने एक्स हैंडल पर जारी आधिकारिक स्पष्टीकरण के अनुसार, दिल्ली सरकार ने बताया कि 5 अक्टूबर, 2026 के एक आदेश में दिल्ली, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पुलिस सेवा (डीएएनआपीएस) के 12 अधिकारियों को अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त के पद का वर्तमान कार्यभार सौंपा गया था। अब सहायक पुलिस आयुक्त विवेक भगत के संबंध में इस आदेश में संशोधन किया जा रहा है। इन अधिकारियों को अतिरिक्त ड्यूटी का काम सौंपने का प्रस्ताव 25 अगस्त को ही शुरू कर दिया गया था, यानी उन हालिया घटनाओं से काफी पहले जिनकी वजह से लोगों का ध्यान इस ओर गया। 5 अक्टूबर, 2026 को जरूरी मंजूरी मिलने के बाद ही इसके आदेश जारी किए गए। आदेश में बताया गया है कि वर्तमान कार्यभार सौंपना एक अस्थायी प्रशासनिक व्यवस्था है। इससे संबंधित अधिकारियों को कोई आर्थिक फायदा नहीं मिलता और न ही उन्हें उस पद पर नियमित रूप से काम करने वाले अधिकारियों की तरह कोई कानूनी जिम्मेदारी निभाने की इजाजत मिलती है। विवेक भगत ने अपनी स्वेच्छा से अनुरोध किया है कि महिला पत्रकारों के कथित उत्पीड़न के मामले में पूरी जांच होने और उसके संतोषजनक रूप से संपन्न होने तक वे वर्तमान कार्यभार की जिम्मेदारी नहीं लेंगे। उनके अनुरोध को देखते हुए 5 अक्टूबर के आदेश में बदलाव किया जा रहा है और इसे केवल बाकी बचे 11 अधिकारियों के लिए फिर से जारी किया जाएगा। यह घटनाक्रम महिला पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार की खबरों के बाद दिल्ली पुलिस की बढ़ती जांच-पड़ताल के बीच सामने आया है। अधिकारियों ने साफ किया है कि मूल प्रस्ताव इस विवाद से पहले का था और यह व्यवस्था पूरी तरह से अस्थायी है। उम्मीद है कि जल्द ही बदला हुआ आदेश जारी किया जाएगा, जिसमें जांच का नतीजा आने तक अधिकारी के पद से अलग होने का फैसला शामिल होगा। अधिकारियों ने फिर से कहा कि अस्थायी चार्ज के साथ कोई वित्तीय या कानूनी फायदा नहीं मिलता है, जिसका मतलब है कि इस व्यवस्था का दायरा सीमित है। जांच की प्रगति या उसके बाद की किसी प्रशासनिक कार्रवाई के बारे में और जानकारी नहीं दी गई है। सरकार का कहना है कि अतिरिक्त चार्ज सौंपने की प्रक्रिया हाल के आरोपों से अलग, तय नियमों और समय-सीमा के अनुसार की गई थी।
दिल्ली-एनसीआर में आज और कल बारिश की संभावना, तेज हवाओं से प्रदूषण में आई मामूली राहत

नई दिल्ली। दिल्ली और इसके आसपास के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, दिल्ली समेत पूरे एनसीआर में मंगलवार और बुधवार को बारिश होने के आसार हैं। स्थानीय मौसम रिपोर्ट के अनुसार, 6 अक्टूबर को दिल्ली में गरज के साथ बारिश होने के साथ पूर्वानुमान है। हालांकि, इस दौरान अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। वहीं, नमी का स्तर 55 से 45 प्रतिशत के बीच रह सकता है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 7 अक्टूबर को दिल्ली में आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं। तापमान 34 डिग्री सेल्सियस से लेकर 22 डिग्री सेल्सियस तक रहने की संभावना है। 8 अक्टूबर को भी आंशिक बादल छाए रहेंगे और तापमान 34 से 22 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा। 9 अक्टूबर को तापमान में मामूली गिरावट दर्ज की जा सकती है, जहां अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। 10 और 11 अक्टूबर को भी आंशिक बादल छाए रहने का अनुमान है, जिसमें तापमान 32 से 33 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना रहेगा। मौसम में इस बदलाव और तेज हवाओं के चलने से दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण स्तर में कुछ हद तक गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, हवा की गुणवत्ता में सुधार अभी भी पूरी तरह से संतोषजनक नहीं है। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली के विभिन्न इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) ‘खराब’ से ‘बहुत खराब’ श्रेणी में बना हुआ है। दिल्ली के प्रमुख इलाकों की बात करें तो मुंडका में एक्यूआई 280, नरेला में 255, ओखला फेज-2 में 223 और नॉर्थ कैंपस में 205 दर्ज किया गया है, जो ‘खराब’ श्रेणी में आते हैं। वहीं, मंदिर मार्ग (160), नजफगढ़ (166), नेहरू नगर (145), एनएसयूटी जफरपुर (154) और पटपड़गंज (149) जैसे इलाकों में एक्यूआई ‘मध्यम’ श्रेणी में है। नोएडा की बात करें तो यहां के सेक्टर-116 में एक्यूआई 267 दर्ज किया गया है, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। सेक्टर-62 में यह 185 है, जबकि सेक्टर-125 में 136 और सेक्टर-1 में 137 दर्ज किया गया है। सबसे चिंताजनक स्थिति गाजियाबाद की है, जहां कई इलाकों का एक्यूआई लाल निशान यानी ‘बहुत खराब’ श्रेणी को पार कर चुका है। गाजियाबाद के संजय नगर में एक्यूआई 322 दर्ज किया गया है, जो बेहद खतरनाक स्तर है। इसी तरह, वेव सिटी में एक्यूआई 305 और वसंधारा में 243 दर्ज किया गया है। गोविंदपुरम में एक्यूआई 148 और इंदिरापुरम में 151 दर्ज किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में बारिश होने से प्रदूषण के स्तर में और गिरावट आने की उम्मीद है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि बारिश के बाद अगर हवा की गति धीमी पड़ जाती है, तो प्रदूषक तत्व वातावरण में जमा हो सकते हैं, जिससे स्थिति फिर से बिगड़ सकती है।
फ्लाईदुबई फ्लाइट पर हमले की कोशिश के पीछे ईरान का हाथ होने का शक: ट्रंप

वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उनका व्यक्तिगत तौर पर मानना है कि फ्लाईदुबई की एक फ्लाइट पर हमले की कोशिश के पीछे ईरान का हाथ था। हालांकि, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि उन्होंने अभी तक ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं देखा है, जो इस घटना को सीधे तेहरान से जोड़ता हो। जब एक रिपोर्टर ने ट्रंप से पूछा कि क्या फ्लाईदुबई से जुड़ी कथित आतंकी हमले की घटना के लिए ईरान जिम्मेदार था, तो उन्होंने कहा, “हां, मुझे ऐसा लगता है। व्यक्तिगत तौर पर मैं यही मानता हूं।” हालांकि, ट्रंप ने अपने दावे के समर्थन में कोई सबूत नहीं दिया। वहीं, फ्लाईदुबई की घटना और इसमें ईरान की संभावित भूमिका के बारे में पूछे जाने पर वेंस ने ज्यादा सावधानी से जवाब दिया। वेंस ने सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ का जिक्र करते हुए कहा, “इस बारे में मैं जॉन रैटक्लिफ और खुफिया विभाग के अधिकारियों की राय पर भरोसा करूंगा।” उन्होंने कहा, “मैं इस मामले में किसी आधिकारिक घोषणा से पहले कुछ नहीं कहना चाहता। हम निश्चित रूप से इसकी जांच कर रहे हैं, लेकिन अभी तक मैंने ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं देखा है जिससे किसी नतीजे पर पहुंचा जा सके।” वेंस ने कहा कि इस घटना के बाद अमेरिका में विदेशी पायलटों से जुड़ी प्रक्रियाओं की भी जांच की जा रही है। उन्होंने कहा, “हम अमेरिका में अपनी प्रक्रियाओं की समीक्षा कर रहे हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जिन लोगों से उड़ान की सुरक्षा को खतरा हो सकता है, उन्हें विमान उड़ाने की जिम्मेदारी न मिले।” ब्रिटेन में सामने आए एक अलग संदिग्ध सुरक्षा खतरे को लेकर ट्रंप प्रशासन ज्यादा भरोसे के साथ ईरान की संभावित भूमिका की बात करता नजर आया। ट्रंप ने पुष्टि की कि एक खतरे की वजह से अमेरिकी बमवर्षक विमानों को दूसरी जगह भेजा गया था। जब उनसे पूछा गया कि क्या कोई खास खतरा सामने आया था, तो ट्रंप ने कहा, “हां, मुझे लगता है कि हम यह कह सकते हैं। वे विमान बिना किसी वजह के वहां से नहीं गए थे।” उन्होंने कहा, “कुछ धमकियां मिली थीं और दुश्मन को मौका देने के बजाय हम उसे पकड़ेंगे और हराएंगे। लेकिन विमानों को वहीं क्यों छोड़ें? इसलिए हमने उन्हें थोड़ा इधर-उधर किया।” बाद में ट्रंप से पूछा गया कि क्या ईरान ब्रिटेन में लड़ाकू ड्रोन लेकर आया था और क्या इसी वजह से विमानों को हटाने का फैसला लिया गया। इस पर उन्होंने कहा, “मैं आपको यह नहीं बता सकता, लेकिन अगर उन्होंने ऐसा किया है तो उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।” ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को पता है कि धमकी के पीछे कौन लोग थे। उन्होंने कहा, “हमें धमकी मिली थी। अगर हमें धमकी दी जा रही है, तो हम अपने विमानों को दूसरी जगह ले जा सकते हैं और इससे खतरा कुछ कम हो जाता है। हमें यह भी पता है कि धमकी देने वाले लोग कौन हैं और अब वे बड़ी मुश्किल में हैं।” जब उनसे पूछा गया कि क्या उन लोगों का संबंध ईरान से है, तो ट्रंप ने कहा, “उनका संबंध ईरान से होगा।
स्विस राष्ट्रपति को पीएम मोदी ने दिए खास तोहफे, भारत की समृद्ध विरासत और ‘नई पहचान’ की मिली झलक

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ परमेलिन को भारत की समृद्ध विरासत और नई पहचान को दर्शाते हुए दो बेहद खास तोहफे भेंट किए। इन तोहफों में भारत में बनी अवॉर्ड विनिंग चीज़ और कश्मीर की सदियों पुरानी काष्ठ शिल्प कला की झलक देखने को मिली। स्विट्जरलैंड दुनिया भर में अपनी कई तरह की चीज़ के लिए मशहूर है। ऐसे में पीएम मोदी ने स्विस राष्ट्रपति को भारत की खालिस चीज़ भेंट की। भारत के तीन अलग-अलग इलाकों की मिठास और खटास इनकी पहचान थीं: एक चीज़ कश्मीर के गुलमर्ग का, दूसरा ओडिशा के कोणार्क और तीसरा महाराष्ट्र येऊर का था। ये तोहफा भारत की बढ़ती हुई चीज़ बनाने की परंपरा की एक झलक पेश करता है। गुलमर्ग की फ्रेंच-स्टाइल ब्री चीज़ दिल के आकार की, सॉफ्ट और क्रीमी ब्री चीज़ है जो पाश्चुरीकृत गाय के दूध से बनाई जाती है। इसका बाहरी हिस्सा बर्फ जैसा सफेद होता है। मिट्टी और मशरूम जैसा स्वाद मुंह में घुल जाता है। इसे 2026 में ब्राजील में हुए ‘मुन्जियाल दो केजियो दो ब्राजील’ (वर्ल्ड चीज अवार्ड्स ब्राजील) में सुपर गोल्ड अवॉर्ड मिल चुका है। कोणार्क की फ्रेंच टॉमी-स्टाइल चीज़ का भी अंदाज हटके है। यह एक देसी अंदाज की चीज़ है जिसका बाहरी छिलका प्राकृतिक है। यह खाने में मुलायम होती है। स्वाद नमकीन और चटपटा होता है, खासियत ये कि जैसे ही मुंह में घुलती है तो आखिर में हल्का नींबू जैसा स्वाद आता है। इसने 2023 में नॉर्वे में हुए वर्ल्ड चीज़ अवॉर्ड्स में गोल्ड और 2025 में स्विट्जरलैंड में सिल्वर मेडल जीता था। येऊर की माउंटेन-स्टाइल चीज़ भी कमतर नहीं है, जिसकी प्रेरणा स्विस ग्रुयेरे चीज़ है। बड़ी मेहनत से तैयार होती है। इसे लगभग 8 से 9 महीने तक पकाया जाता है, जिससे इसमें नटी, मीठा और हर्बल फ्लेवर आता है। इसके बाहरी हिस्से पर गुलाब की पंखुड़ियों और सौंफ की सजावट इसे एक अलग भारतीय-अल्पाइन लुक देती है। यह फोंड्यू और ग्रिल्ड डिशेज के लिए बेहद शानदार मानी जाती है। चीज़ के अलावा पीएम मोदी ने स्विस राष्ट्रपति को कश्मीरी अखरोट की लकड़ी से बना हाथ से नक्काशी किया हुआ वॉल पैनल भी भेंट किया। यह वॉल पैनल कश्मीर की सदियों पुरानी लकड़ी पर नक्काशी की विरासत को दर्शाता है। इसे प्रीमियम हिमालयी अखरोट की लकड़ी से बनाया गया है और इस पर गहरी नक्काशी की गई है। इस पैनल पर पारंपरिक परिदृश्य, फूल-पत्तियां, इंसानी आकृतियां, घोड़े, बग्घियां और गांव के जीवन को दर्शाया गया है। यह पैनल कश्मीरी कारीगरों के कौशल और शिल्प कौशल का जश्न मनाता है, जो स्वदेशी और मध्य एशियाई प्रभावों से आकार लेने वाली क्षेत्र की विशिष्ट कलात्मक परंपराओं को दर्शाता है। इसके अलावा पीएम की ओर से राष्ट्रपति कैरोलिन पार्मेलिन को कच्छी शॉल और सादेली बॉक्स भेंट की गई। ये दोनों ही गुजरात की बुनाई और सजावटी कारीगरी की समृद्ध परंपराओं को दर्शाते हैं। सूरत का सादेली बॉक्स अलग-अलग तरह की सामग्रियों को बारीकी से जोड़कर और उनकी परतें बनाकर बनाए गए बारीक ज्यामितीय पैटर्न के लिए जाना जाता है, जबकि कच्छी शॉल कच्छ का एक रंग-बिरंगा हाथ से बुना हुआ कपड़ा है, जो ज्यामितीय डिजाइनों के लिए पहचाना जाता है।
बंगाल: नौकरी दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी के मामले में तृणमूल पंचायत प्रमुख गिरफ्तार

कोलकाता। उत्तर 24 परगना जिले के स्वरूपनगर की चारघाट पंचायत में तृणमूल कांग्रेस की पूर्व पंचायत प्रमुख को नौकरी दिलाने के नाम पर आर्थिक धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। उनके पति, निखिल रंजन बिस्वास को पहले ही इसी आरोप में गिरफ्तार किया जा चुका है। यह गिरफ्तारी तब हुई जब कथित तौर पर धोखाधड़ी का शिकार हुए लोगों ने इस जोड़े के खिलाफ मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से शिकायत की। पुलिस ने गिरफ्तार महिला की पहचान बसंती बिस्वास के तौर पर की है। राज्य में सरकार बदलने के बाद उनके खिलाफ स्थानीय पुलिस स्टेशन में कई शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। मुख्य आरोप जबरन वसूली और आर्थिक धोखाधड़ी से जुड़े हैं। आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल के दौरान बसंती और उनके पति निखिल ने स्वरूपनगर के रहने वाले मजार अली समेत कई लोगों से भारी रकम ली थी। इसके बदले में, उन्होंने कथित तौर पर उन सभी को सरकारी नौकरी दिलाने का वादा किया था। शिकायत करने वालों का कहना है कि उन्होंने 2023 में कई लाख रुपए दिए थे, लेकिन उन्हें कोई नौकरी नहीं मिली। बाद में उन्होंने अपने पैसे वापस मांगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जब उन्होंने पैसे वापस मांगे तो बिस्वास दंपत्ति ने कथित तौर पर उन्हें धमकी दी। शिकायत करने वालों का कहना है कि उन्होंने यह मुद्दा पहले भी उठाया था, लेकिन बसंती पर कोई कार्रवाई नहीं हुई क्योंकि उस समय उनकी अपनी पार्टी सत्ता में थी। सरकार बदलने के बाद, शिकायतकर्ता मजार अली समेत कई लोग न्याय की गुहार लेकर मुख्यमंत्री की जनसुनवाई में पहुंचे। मुख्यमंत्री ने मामला सुना और प्रशासन को कार्रवाई करने का निर्देश दिया। निखिल को 12 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था और वह अभी भी न्यायिक हिरासत में है। उसकी पत्नी बसंती को सोमवार को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक, उसे बशीरहाट सब-डिविजनल कोर्ट में पेश किया जाएगा। बसंती की गिरफ्तारी के बाद, शिकायतकर्ता मजार अली ने बताया कि वह पहले आईसीडीएस कर्मचारी थीं और बाद में तृणमूल पंचायत प्रधान बनीं। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्होंने करोड़ों रुपए की संपत्ति जमा की और नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं से पैसे लिए। अली ने कहा कि उन्हें वही सजा मिलनी चाहिए जिसके वे हकदार हैं। मुख्यमंत्री ने हमारी अपील पर प्रतिक्रिया दी है। इस धोखाधड़ी गिरोह में कुछ और लोग भी शामिल हैं। उम्मीद है कि उन्हें भी जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता वृंदाबन सरकार ने कहा कि बसंती विश्वास की गिरफ्तारी ने स्थानीय लोगों के बीच एक स्पष्ट संदेश भेजा है।
आकाश आनंद फिर बने बसपा के राष्ट्रीय संयोजक, मायावती ने सौंपी संगठन की कमान

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने सोमवार को बड़ा फैसला लेते हुए आकाश आनंद को एक बार फिर पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त कर दिया। पार्टी से उनकी वापसी के बाद अब उन्हें पूर्व में दी गई जिम्मेदारी फिर से सौंपते हुए संगठन में सक्रिय भूमिका निभाने का मौका दिया गया है। मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा कि पार्टी और बहुजन आंदोलन के हित में काफी सोच-विचार के बाद यह फैसला लिया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने के बाद अब पार्टी में सब कुछ ठीक और सुचारू ढंग से चलेगा तथा संगठन में बार-बार बदलाव करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मायावती ने कहा कि आकाश आनंद के व्यक्तित्व और कार्यशैली में पिछले कुछ समय में बदलाव देखने को मिला है। पार्टी में वापसी के लिए हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर आकाश आनंद की ओर से किया गया पोस्ट भी इसकी पुष्टि करता है, जिसकी काफी चर्चा हुई थी। बसपा प्रमुख ने कहा कि पार्टी के अधिकांश लोगों की राय थी कि आकाश आनंद के अनुरोध को स्वीकार करते हुए उन्हें पूर्व की जिम्मेदारियों के साथ फिर से पार्टी में काम करने का अवसर दिया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि आकाश आनंद के पिता आनंद कुमार के साथ-साथ उनके छोटे भाई ईशान आनंद ने भी इस संबंध में अपनी सहमति जताई है। मायावती ने कहा कि ईशान आनंद ने मिशनरी भावना का परिचय देते हुए कहा कि वह बिना किसी पद के भी मायावती के दिशा-निर्देशन में पार्टी की ओर से सौंपे जाने वाले कार्यों को पूरी ईमानदारी और निष्ठा से निभाएंगे। मायावती ने अपने फैसले को पार्टी में अनुशासन बनाए रखने की कवायद से जोड़ते हुए कहा कि बहुजन समाज ही उनका विराट परिवार है और उसका हित एवं कल्याण उनके लिए सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि पार्टी में अनुशासन कायम रखने के लिए पिछले दिनों उन्होंने कई सख्त फैसले लिए हैं और उनके अपने भाई-बहन तथा उनके परिवार के लोग भी इन फैसलों से अपवाद नहीं रहे हैं। उन्होंने कहा कि आकाश आनंद का व्यक्तित्व पार्टी में काफी हद तक ठीक रहा है, लेकिन पिछले दिनों उनसे जुड़े कुछ कारणों के चलते संगठन में कई बार जरूरी बदलाव करने पड़े। इसके बाद आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को भी राजनीति से संन्यास लेना पड़ा। मायावती ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर और मान्यवर कांशीराम के त्याग, संघर्ष और आदर्शों से प्रेरणा लेकर बसपा ने देश की राजनीति में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर सर्वसमाज को साथ लेकर जोरदार तैयारी कर रही है। आकाश आनंद को फिर से राष्ट्रीय संयोजक बनाए जाने को इसी चुनावी तैयारी के बीच पार्टी के संगठनात्मक स्तर पर महत्वपूर्ण फैसले के तौर पर देखा जा रहा है। मायावती ने कहा कि अब पार्टी और आंदोलन के हित में लिए गए इस निर्णय के साथ उन्हें उम्मीद है कि संगठन आगे सुचारू ढंग से काम करेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आगे की स्थिति काफी हद तक आकाश आनंद के आचरण और कार्यशैली पर निर्भर करेगी। बसपा प्रमुख ने आकाश आनंद को उनके राजनीतिक भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए उन्हें, उनके छोटे भाई ईशान आनंद और पिता आनंद कुमार को अपना प्यार और आशीर्वाद दिया। साथ ही उन्होंने मुश्किल परिस्थितियों में साथ देने के लिए बहुजन समाज के लोगों और अपने शुभचिंतकों का आभार जताया।
एसआईआर के खिलाफ कांग्रेस का बड़ा ऐलान, 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होगी महारैली

नई दिल्ली। देश में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ बड़े अभियान का ऐलान किया है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोमवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि पार्टी 25 अक्टूबर से 25 नवंबर तक एक महीने का विशेष अभियान चलाएगी। जयराम रमेश ने कहा, “कांग्रेस पार्टी एक महीने का कार्यक्रम चलाएगी। हम घर-घर जाकर हर बूथ पर चुनाव आयोग द्वारा हटाए गए नामों को फिर से जुड़वाने की कोशिश करेंगे। छह राज्यों की जानकारी बूथ के स्तर पर अभी हमारे पास है। हमारे पास अभी करीब 10 लाख बूथ हैं, करीब 13 से 13.5 करोड़ नाम हैं। एक महीने के अंदर पूरा कांग्रेस संगठन का प्रयास होगा कि वे घर-घर जाकर 13.5 करोड़ नाम जो काटे गए हैं, उन्हें एकत्रित करके और उजागर करके उनका नाम सूची में लाने का काम करेंगे।” उन्होंने बताया, “इस अभियान के तहत 1 नवंबर को रामलीला मैदान में एक महारैली का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए गठबंधन की सारी पार्टियों और विपक्षी पार्टियों को निमंत्रण दे रहे हैं। 26 नवंबर को हमेशा संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसलिए 25 और 26 नवंबर को छह अलग-अलग जगहों से दिल्ली चलो यात्रा की शुरुआत होगी। वोट बचाओ, देश बचाओ और सीईसी हटाओ के नारे को लेकर रैलियां होंगी।” इससे पहले जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए सीईसी ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का जिक्र किया। उन्होंने लिखा, “सुप्रीम कोर्ट ने आज एक याचिका पर सुनवाई की, जिसमें सीईसी ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड करने की मांग भी की गई है।” उन्होंने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया कामचलाऊ, गैरकानूनी और लापरवाह तरीके से चलाई जा रही है, जिसकी सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा और रिटायर्ड जजों ने भी आलोचना की है। पर्याप्त उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना बड़े पैमाने पर अंधाधुंध नाम हटाए जा रहे हैं। जयराम रमेश ने लिखा, “सुप्रीम कोर्ट के पास हमारे लोकतंत्र की बुनियाद के लिए बेहद महत्वपूर्ण इस संस्था में जनता का भरोसा बहाल करने का एक असाधारण अवसर है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में जवाब मांगा है, हालांकि कोर्ट ने कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया है।” उन्होंने चुनाव आयोग की विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अतीत में ईसीआई और सीईसी पर भरोसा किया है, लेकिन यह भरोसा महान सुकुमार सेन जैसे पहले सीईसी द्वारा स्थापित मर्यादित और सक्षम कामकाज पर आधारित था। उस विरासत से बनी साख का दावा ज्ञानेश कुमार नहीं कर सकते। जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि फॉर्म 6 में दुर्भावनापूर्ण बदलाव, जिसके बारे में संकेत दिया गया था कि उसे सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी हासिल है, सीईसी के छलपूर्ण आचरण का गंभीर उदाहरण है। उन्होंने कहा, “सीईसी ने न सिर्फ झूठ बोला है, बल्कि प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के इशारे पर कानून का उल्लंघन भी किया है और संविधान की भावना और उसके शब्दों के साथ विश्वासघात किया है।” वहीं, कांग्रेस के आधिकारिक एक्स हैंडल पर पोस्ट किया गया, “वोट देने का अधिकार गैरकानूनी तरीके से छीनना देश विरोधी काम है और ज्ञानेश कुमार ने भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए ऐसा किया है। यह देशद्रोह है और इसमें शामिल सभी लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। आज इंदिरा भवन में कांग्रेस के महासचिवों, राज्य प्रभारियों और राज्य अध्यक्षों के साथ वोट चोरी के मुद्दे पर एक अहम बैठक हुई, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, विपक्ष के नेता राहुल गांधी और महासचिव केसी वेणुगोपाल मौजूद थे।