बारामूला में सुरक्षाबलों ने ओवर ग्राउंड वर्कर को किया गिरफ्तार, हथियार और गोला-बारूद बरामद

बारामूला। जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले में सुरक्षाबलों ने संयुक्त अभियान के दौरान एक संदिग्ध ओवर ग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) को गिरफ्तार किया है। उसके कब्जे से अवैध हथियार, गोला-बारूद, मोबाइल फोन और अन्य सामान बरामद किया गया है। जानकारी के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने के उद्देश्य से भारतीय सेना की 46 राष्ट्रीय राइफल्स, स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) बारामूला, सीआरपीएफ की 53वीं बटालियन तथा बीएसएफ की 112वीं बटालियन ने रविवार को नरवाव इलाके के जंडफरान-गोरीवान क्रॉसिंग पर संयुक्त नाका (चेकपोस्ट) लगाया था। इस दौरान आने-जाने वाले लोगों और वाहनों की सघन जांच की जा रही थी। चेकिंग के दौरान गोरीवान की ओर से आ रहा एक व्यक्ति सुरक्षा बलों को देखकर मौके से भागने की कोशिश करने लगा। उसकी संदिग्ध गतिविधि को देखते हुए सुरक्षाबलों के जवानों ने उसे गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ और तलाशी के दौरान उसके पास से एक कैमोफ्लाज रंग की एमपी-5 टाइप पिस्तौल, 10 जिंदा 9 एमएम कारतूस से भरी एक मैगजीन, एक मोबाइल फोन और एक काला बैकपैक बरामद किया गया। गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान एजाज अहमद गनी के रूप में हुई है। वह स्वर्गीय मोहम्मद सुल्तान गनी का पुत्र और बारामूला जिले के नंबलन, शीरी क्षेत्र का निवासी बताया गया है। प्रारंभिक जांच में उसे ओवर ग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) के रूप में चिन्हित किया गया है। ओजीडब्ल्यू वे लोग होते हैं जो प्रत्यक्ष रूप से आतंकवादी संगठन का हिस्सा नहीं होते, लेकिन उन्हें रसद, ठिकाना, सूचना या अन्य प्रकार की सहायता उपलब्ध कराने का काम करते हैं। इस मामले में पुलिस स्टेशन शीरी में संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है। सुरक्षा एजेंसियां अब आरोपी के संपर्कों, गतिविधियों और संभावित आतंकी नेटवर्क से उसके संबंधों की गहन जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि बरामद हथियारों के स्रोत और इनके संभावित इस्तेमाल के बारे में भी जांच की जा रही है। इस कार्रवाई को घाटी में आतंकवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सुरक्षाबलों का कहना है कि घाटी में आतंकवाद और उसके सहयोगी नेटवर्क पर लगातार नजर रखी जा रही है। संयुक्त अभियान आगे भी जारी रहेंगे ताकि क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखी जा सके तथा किसी भी आतंकी साजिश को समय रहते विफल किया जा सके।
परिसीमन वोटों के लिए, प्रतिनिधित्व के लिए नहीं’, भाजपा पर कांग्रेस सांसद ने साधा निशाना

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के परिसीमन का विरोध किए जाने पर कांग्रेस नेताओं ने समर्थन किया है। सुखदेव भगत ने कहा कि प्रतिनिधित्व के नजरिए से, बल्कि भाजपा सरकार जानबूझकर इसे वोटों के नजरिए से कर रही है। राहुल गांधी ने शनिवार को सभी दलों से संसद में केंद्र सरकार के परिसीमन विधेयक को पारित करने के प्रयास को विफल करने का आह्वान किया था। इस पर कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “निश्चित रूप से, जिस तरह से जनसंख्या के हिसाब से चीजें संतुलित नहीं हो रही हैं और अगर मैं अपनी निजी राय बताऊं तो मैं परिसीमन के खिलाफ हूं। मैं इसीलिए इसके खिलाफ हूं, क्योंकि असम में जिस तरह से यह किया गया है। वहां भाजपा की सरकार है और वे जानबूझकर इसे वोटों के नजरिए से कर रहे हैं, न कि प्रतिनिधित्व के नजरिए से। उन्होंने कहा, “अगर हम आज संसद में मौजूद 543 सदस्यों को देखें, तो मुझे लगता है कि हमारे कई लोगों को पूरी तरह से भागीदारी का मौका भी नहीं मिलता। हम संसद के अंदर बस एक छोटा सा हिस्सा बनकर रह जाते हैं। क्या संख्या बढ़ाने के बाद उन्हें औचित्य मिल पाएगा। संख्याबल नहीं बढ़ाया जाना चाहिए, बल्कि संसद की गरिमा के अनुरूप एक सार्थक चर्चा और बहस हो, वो महत्वपूर्ण है।” इसी बीच, कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के शानदार प्रदर्शन पर कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा, “निश्चित रूप से सभी बधाई के पात्र हैं। जब हमारे खिलाड़ी वहां इस तरह का प्रदर्शन करते हैं तो हमें गर्व महसूस होता है। तब हमें खुशी होती है और हम उन्हें बधाई देते हैं।” नीट पेपर लीक मामले की सुनवाई कर रहे दिल्ली हाईकोर्ट के जज के तबादले पर कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा, “ऐसे कदमों से हमेशा अविश्वास और शक पैदा होता है।” कुलगाम हमले के बाद सरकारों पर महबूबा मुफ्ती के आरोपों को लेकर कांग्रेस सांसद ने कहा, “यह सामान्य बात नहीं है। इसमें कहीं न कहीं सीमा पार से जुड़ी घटनाएं हो रही हैं। पहलगाम की घटना के बाद भी अगर ऐसी घटना हो रही है, और उसी समय अमरनाथ यात्रा भी चल रही है, तो मेरा मानना है कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों की यह जिम्मेदारी है कि वे देखें कि कहां चूक हुई है या कहां कमी रह गई है। आरोप-प्रत्यारोप से अधिक जरूरी नागरिकों की सुरक्षा है।
चेन्नई में सर्टिफिकेट समेत नागरिक सेवाओं को मिलेगी रफ्तार, 12 नए मिनी तालुक कार्यालय जल्द

चेन्नई। तमिलनाडु सरकार राजस्व सेवाओं को अधिक तेज और सुलभ बनाने के उद्देश्य से चेन्नई में 12 मिनी तालुक कार्यालय स्थापित करने की योजना बना रही है। इन कार्यालयों में समर्पित ई-सेवा केंद्र होंगे, जहां विभिन्न प्रकार के राजस्व प्रमाणपत्रों के लिए आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। राजस्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस प्रस्ताव की औपचारिक घोषणा तमिलनाडु विधानसभा के आगामी सत्र के दौरान होने की उम्मीद है। इसका मकसद मौजूदा तालुक ऑफिसों में काम में होने वाली देरी को कम करना और काम का बोझ घटाना है। ये मिनी तालुक ऑफिस चेन्नई के मौजूदा तालुकों के अधिकार क्षेत्र में ही काम करेंगे, लेकिन इनका पूरा ध्यान सिर्फ सर्टिफिकेट से जुड़ी सेवाओं पर होगा। लोग मुख्य तालुक ऑफिस जाए बिना ही इन सेंटरों पर कम्युनिटी, इनकम, नेटिविटी, विधवा, कानूनी उत्तराधिकारी और रेजिडेंस सर्टिफिकेट के लिए आवेदन कर सकेंगे। अभी चेन्नई में 16 तालुक ऑफिस हैं, जो रेवेन्यू एडमिनिस्ट्रेशन से जुड़े कई तरह के काम संभालते हैं। इस प्रस्तावित पायलट प्रोजेक्ट के तहत अक्सर मांगे जाने वाले राजस्व सर्टिफिकेट (राजस्व प्रमाण पत्र) आसानी से उपलब्ध कराने के लिए मिनी ऑफिस खोलने के लिए 12 जगहें चुनी गई हैं। ये प्रस्तावित ऑफिस कोडुंगैयूर, एरुक्कनचेरी, पोरुर, मोगाप्पैर, कोरात्तुर, सालिग्रामम, नीलांगराई, पल्लीकरनई, शोलिंगनल्लूर, तिरुवनमियूर/बेसेंट नगर, ट्रिपलिकेन (तिरुवल्लीकेनी) और मनापक्कम में खोले जाएंगे। राजस्व विभाग के अधिकारियों ने बताया कि हेडक्वार्टर के डिप्टी तहसीलदार इन मिनी तालुक ऑफिस के इंचार्ज होंगे। हर सेंटर में एक खास ई-सेवा सुविधा भी होगी, जिससे लोग अपने इलाके के पास ही सर्टिफिकेट से जुड़ी सेवाओं के लिए आवेदन कर सकेंगे और सर्विस का लाभ उठा सकेंगे। यह योजना सबसे पहले पिछली डीएमके सरकार के समय सोची गई थी, जब चेन्नई के तालुक ऑफिस में काम का बोझ बढ़ने और आवेदनों को प्रोसेस करने में लगने वाले समय को लेकर चिंता जताई गई थी। इसके बाद चेन्नई कलेक्ट्रेट ने इन सेंटरों के लिए सही जगहें चुनीं। सिस्टम को और बेहतर बनाने की कोशिशों के तहत, राजस्व विभाग कुछ सर्टिफिकेट पर साइन करने का अधिकार सोशल सिक्योरिटी स्कीम के तहसीलदारों को देने की संभावना पर विचार कर रहा है। ये अधिकारी अभी बुढ़ापा पेंशन और दूसरे कल्याणकारी कार्यक्रमों का काम देखते हैं। अधिकारियों का मानना है कि अधिकार सौंपने से जिम्मेदारियां बेहतर तरीके से बंटेंगी, रेगुलर तहसीलदारों पर काम का बोझ कम होगा और आवेदनों का निपटारा तेजी से हो सकेगा। यह पहल राज्य सरकार की रेवेन्यू एडमिनिस्ट्रेशन को विकेंद्रीकृत करने और जरूरी सरकारी सेवाओं को आसानी से उपलब्ध कराने की बड़ी कोशिश का हिस्सा है। अधिकारियों को उम्मीद है कि अगर चेन्नई में मिनी तालुक सिस्टम सफल रहा, तो इससे मौजूदा ऑफिस में भीड़ कम होगी और सर्टिफिकेट चाहने वाले नागरिकों को इंतजार भी कम करना पड़ेगा।
एटा: ट्रक ने कांवड़ियों के ट्रैक्टर को मारी टक्कर, 7 घायल, एक गंभीर

एटा। उत्तर प्रदेश के एटा जिले में सावन के दौरान कांवड़ यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं के साथ बड़ा सड़क हादसा हो गया। कोतवाली देहात क्षेत्र में हाईवे पर कांवड़ियों से भरे एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को पीछे से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में 7 कांवड़िए घायल हो गए, जिनमें एक की हालत गंभीर बताई जा रही है। गंभीर रूप से घायल श्रद्धालु को बेहतर इलाज के लिए सैफई रेफर किया गया है। जानकारी के अनुसार, सभी श्रद्धालु मैनपुरी जिले के कुरावली थाना क्षेत्र के किशनपुर गांव के रहने वाले हैं। वे ट्रैक्टर-ट्रॉली से सोरों गंगा घाट जा रहे थे, जहां से गंगाजल लेकर अपने क्षेत्र के शिव मंदिरों में जलाभिषेक करना था। ट्रैक्टर में करीब 17 कांवड़िए सवार थे। रास्ते में बारिश होने के कारण वाहन धीरे-धीरे चल रहा था। इसी दौरान पीछे से तेज रफ्तार में आए ट्रक ने ट्रैक्टर को टक्कर मार दी, जिससे ट्रैक्टर पलट गया और मौके पर अफरा-तफरी मच गई। हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और 108 एंबुलेंस की मदद से सभी घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया। घायलों की पहचान रागिनी, निशा, गीतम, सत्यपाल, रघुवीर, संध्या और मुस्कान के रूप में हुई है। इनमें सत्यपाल की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें सैफई मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है, जबकि बाकी छह घायलों का इलाज जिला मेडिकल कॉलेज में चल रहा है। जिला अस्पताल के डॉक्टर श्रीजीत ने बताया कि 108 एंबुलेंस के जरिए सात घायल अस्पताल लाए गए थे। इनमें एक मरीज की हालत गंभीर थी, इसलिए उसे बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर भेजा गया है। बाकी छह मरीजों का अस्पताल में इलाज किया जा रहा है और उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर है। हादसे में घायल रागिनी ने बताया कि वे सभी कांवड़ यात्रा पर गंगाजल लेने जा रहे थे, तभी यह दुर्घटना हुई। वहीं घायल श्रद्धालुओं की रिश्तेदार काजल ने कहा कि बारिश की वजह से ट्रैक्टर धीमी गति से चल रहा था, लेकिन पीछे से आए ट्रक ने तेज रफ्तार में टक्कर मार दी, जिससे ट्रैक्टर पलट गया। घायल के परिजन विकास कुमार ने बताया कि हादसे के बाद एंबुलेंस तो समय पर पहुंच गई, लेकिन उस वक्त तक पुलिस मौके पर नहीं पहुंची थी। वहीं एक अन्य परिजन राजेश कुमार ने भी बताया कि ट्रक ने पीछे से जोरदार टक्कर मारी, जिसके कारण सात लोग घायल हो गए।
राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर हमले रोकने को लेकर जताई सहमती, होर्मुज को फिर से खोलने का दिया हवाला

वाशिंगटन। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि तेहरान और कई मिडिल ईस्ट देशों की तरफ से हमले रोकेने की अपील के बाद, अमेरिका ईरान के खिलाफ प्लान किए गए सैन्य कार्रवाई को रोकने पर सहमत हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि एक संभावित समझौते का फ्रेमवर्क बन गया है। ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन डिप्लोमेसी को आगे बढ़ने देने के लिए प्लान किए गए स्ट्राइक को रोकने का फैसला किया है। ट्रंप ने लिखा, “अमेरिका पूरी तरह तैयार तथा हमला करने की स्थिति में है और पूरी ताकत के साथ इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के खिलाफ जाने के लिए तैयार है।” ट्रंप ने आगे कहा कि हालांकि ईरान और मिडिल ईस्ट के दूसरे देशों ने वाशिंगटन से सैन्य कार्रवाई में देरी करने की अपील की है। ट्रंप के अनुसार, प्रस्तावित समझौते में होर्मुज स्ट्रेट को तुरंत, पूरी तरह से खोलना और ईरान के परमाणु खतरे को खत्म करना शामिल होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “इस अपील के आधार पर, मैं दुनिया के भविष्य के लिए और इसी तरह, एक सफल और खुशहाल ईरान के बने रहने के लिए, हमला रोकने पर सहमत हो गया हूं, बशर्ते हम जल्दी से कोई डील कर सकें।” उन्होंने यह भी दावा किया कि इजरायल ने डिप्लोमैटिक रास्ता अपनाने के फैसले का समर्थन किया और कहा, “इजरायल इस कमिटमेंट में मेरे साथ है। सब लोग काम पर लग जाओ और इसे पूरा करो।” ट्रंप ने प्रस्तावित समझौते, उसकी टाइमलाइन या ईरान या इजरायल ने उनके पोस्ट में किए गए दावों की आधिकारिक पुष्टि की है या नहीं, इस बारे में और जानकारी नहीं दी। इससे पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि जब तक ईरान अमेरिकी सेना को धमकी देना बंद नहीं करता और परमाणु हथियार बनाने की कोशिशें नहीं रोकता, तब तक अमेरिका उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई करता रहेगा। उन्होंने ईरानी नेतृत्व के साथ बातचीत के सफल होने की संभावना पर भी संदेह जताया। कैंप डेविड में हुई पहली लाइव टेलीविजन कैबिनेट मीटिंग की अध्यक्षता करने के बाद रिपोर्टरों से बात करते हुए, ट्रंप ने कहा कि सरकार ईरान पर दबाव बनाए रखेगी, भले ही डिप्लोमैटिक बातचीत चल रहे हों। जब राष्ट्रपति से पूछा गया कि आने वाले हफ्तों में क्या उम्मीद करें, तो उन्होंने कहा, “हम उन पर हमला करेंगे और आप जानते हैं किसी समय वे कहेंगे, हम अब और बर्दाश्त नहीं कर सकते।” उन्होंने दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना वाशिंगटन का मुख्य मकसद है। ट्रंप ने कहा, “उनके पास परमाणु हथियार नहीं हो सकता। ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होगा। अगर उनके पास होता, तो मिडिल ईस्ट अब तक खत्म हो चुका होता।” राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान को बहुत ज्यादा सैन्य नुकसान हुआ है, लेकिन उन्होंने जोर दिया कि अभी भी उसकी सीमित क्षमताएं बची हुई हैं।
प्रधानमंत्री मोदी अभिभावक हैं, उनका अपमान मतलब देश का अपमान: इमाम उमर अहमद इलियासी

नई दिल्ली। ऑल इंडिया इमाम संगठन के मुख्य इमाम उमर अहमद इलियासी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में अपशब्दों के इस्तेमाल की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी इस देश के प्रधानमंत्री हैं और अभिभावक के तौर पर हम उन्हें देखते हैं। ये अपशब्द सिर्फ प्रधानमंत्री के लिए नहीं थे, बल्कि देश का भी अपमान हुआ है। इमाम उमर अहमद इलियासी ने अपने एक वीडियो संदेश में कहा, “मेरी भी एक जिम्मेदारी है और एक इमाम के तौर पर मैं अपना फर्ज निभाना चाहता हूं। पिछले एक महीने में, पूरे देश और दुनिया ने 20 जुलाई से शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों को देखा है। हर किसी को विरोध करने का अधिकार है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है। लेकिन यह सब शालीनता के दायरे में रहकर किया जाना चाहिए।” उन्होंने कहा, “विरोध प्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। सरकारी बसों और गाड़ियों में आग लगा दी गई, सड़कें जाम कर दी गईं और आगजनी की घटनाएं हुईं। सरकारी संपत्ति हम सबकी है, इसलिए ऐसी हरकतें आखिरकार जनता का ही नुकसान करती हैं।” इमाम इलियासी ने कहा कि आंदोलन या विरोध करना चाहिए। परिवारों के अंदर भी विरोध और मतभेद होते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं होता कि आप अपने बड़ों का अपमान करें। जिस तरह आंदोलन के अंदर बच्चों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए शब्दों का इस्तेमाल किया, ये अमर्यादित थे। उन्हें और उनकी माता जी के लिए बुरा-भला कहा गया। यह सब देखकर बुरा लगा है। हमारी भारतीय संस्कृति है कि बड़ों का सम्मान करना चाहिए। उमर अहमद इलियासी ने आगे कहा, “नरेंद्र मोदी इस देश के प्रधानमंत्री हैं और अभिभावक के तौर पर हम उन्हें देखते हैं। आंदोलन में जिस तरह की चीजें पूरी दुनिया ने देखी, समझें कि ये अपशब्द सिर्फ प्रधानमंत्री के लिए नहीं थे, बल्कि देश का भी अपमान हुआ है।” उन्होंने यह भी कहा कि आज नरेंद्र मोदी हमारे देश के चुने हुए प्रधानमंत्री हैं और उन्हें 37 देशों से सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिले हैं। यह कोई मामूली उपलब्धि नहीं है। भारत के इतिहास में किसी भी प्रधानमंत्री को ऐसा सम्मान नहीं मिला है। जब आप उनका अपमान करते हैं और उनके लिए अपशब्दों का इस्तेमाल करते हैं, तो क्या हमारे संस्कार हमें यही सिखाते हैं? क्या यही हमारी संस्कृति है? हम क्या संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं? उन्होंने अपनी बात दोहराते हुए कहा, “मैं देख रहा था, जिस तरह आंदोलन हो रहा था। इसको लेकर मैं दुखी हूं। आपने प्रधानमंत्री का जिस तरह अपमान किया है, उससे भारत का भी अपमान हुआ है।
यह भारतीय एथलेटिक्स के लिए बड़ी उपलब्धि’, पीएम मोदी ने की गुलवीर सिंह के ऐतिहासिक प्रदर्शन की तारीफ

‘नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 10वें दिन भारत का प्रदर्शन लाजवाब रहा। देश की झोली में 7 गोल्ड समेत कुल 16 मेडल आए। भारतीय एथलीट गुलवीर सिंह ने लॉन्ग-डिस्टेंस रेस में सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रचा। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुलवीर को बधाई दी है। प्रधानमंत्री ने गुलवीर की प्रशंसा करते हुए अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “गुलवीर सिंह ने इतिहास रच दिया है। उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुषों की 5000 मीटर दौड़ में ब्रॉन्ज मेडल जीता है। उन्हें बधाई। इस शानदार प्रदर्शन के साथ, वह एक ही कॉमनवेल्थ गेम्स में एथलेटिक्स के दो मेडल जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए हैं। वह पुरुषों की 5000 मीटर दौड़ में कॉमनवेल्थ गेम्स का मेडल जीतने वाले पहले भारतीय भी हैं। यह वाकई भारतीय एथलेटिक्स के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। उन्हें मेरी शुभकामनाएं।” पीएम मोदी ने भारतीय मुक्केबाजों के प्रदर्शन की भी सराहना की। उन्होंने अंकुश पंघाल को गोल्ड, नरेंद्र को सिल्वर जीतने पर बधाई दी। प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा, “बहुत खुशी है कि नरेंद्र बेरवाल ने कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुषों के 90+ किग्रा बॉक्सिंग इवेंट में सिल्वर मेडल जीता है। पूरी प्रतियोगिता के दौरान जबरदस्त साहस और दृढ़ संकल्प दिखाने के लिए उन्हें बधाई। भविष्य में उन्हें और भी कई उपलब्धियां मिलें।” 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुषों की 80 किग्रा बॉक्सिंग कैटेगरी में गोल्ड मेडल जीतने पर अंकुश पंघाल पर गर्व है। गेम्स के दौरान उनकी ताकत और हुनर वाकई तारीफ के काबिल थे। उनके भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं। उम्मीद है कि उनकी यह कामयाबी और भी कई युवा बॉक्सर्स को बेहतरीन प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करेगी।” पीएम मोदी ने जूडो में ब्रॉन्ज जीतने पर उन्नति शर्मा को बधाई देते हुए लिखा, “जूडो में भारत के लिए एक और कामयाबी। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिलाओं के 63 किग्रा वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीतने पर उन्नति शर्मा को बधाई। खेलों के दौरान उनका समर्पण और दृढ़ संकल्प साफ तौर पर दिखाई दिया। उम्मीद है कि वह भविष्य में भी अपने सभी प्रयासों में बेहतरीन प्रदर्शन करती रहेंगी।
भाजपा विधायक देवेश कुमार का इस्तीफा, मंत्री दीपक प्रकाश के बिहार विधान परिषद में प्रवेश की संभावना

पटना,। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक देवेश कुमार द्वारा बिहार विधान परिषद से इस्तीफा देने के बाद शुक्रवार को बिहार में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गईं, जिससे पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के उच्च सदन में प्रवेश का रास्ता खुल गया। देवेश कुमार शुक्रवार शाम को पिछले दरवाजे से बिहार विधान परिषद पहुंचे और अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंप दिया। उनके इस्तीफे के समय राज्य भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी सहित कई वरिष्ठ भाजपा नेता उपस्थित थे। इस्तीफे के बाद विधान परिषद की खाली सीट के लिए दीपक प्रकाश को मनोनीत करने की तैयारियां चल रही हैं। दीपक प्रकाश वर्तमान में बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री हैं लेकिन वे विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं हैं। संविधान के अनुच्छेद 164(4) के तहत, राज्य विधानमंडल के सदस्य न होने वाले मंत्री को मंत्रिपरिषद में नियुक्त होने के छह महीने के भीतर किसी भी सदन की सदस्यता प्राप्त करनी होगी। यह मुद्दा राजनीतिक रूप से विवादास्पद हो गया था। विपक्षी दलों ने बार-बार यह सवाल उठाया कि दीपक प्रकाश विधानमंडल की सदस्यता के बिना मंत्री कैसे बने रह सकते हैं। यह मामला सर्वोच्च न्यायालय तक भी पहुंचा, जहां राज्य सरकार से जवाब मांगा गया। देवेश कुमार के इस्तीफे से विधान परिषद की एक सीट खाली हो गई है और सत्ताधारी एनडीए ने इस समस्या का समाधान ढूंढ लिया है। औपचारिक नामांकन और चुनाव प्रक्रिया पूरी होने पर दीपक प्रकाश को इस खाली सीट से उम्मीदवार बनाया जा सकता है। विपक्ष का कहना है कि संवैधानिक आवश्यकताओं का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए जबकि सत्ताधारी एनडीए ने दावा किया है कि कानून के अनुसार सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। राजनीतिक विश्लेषक देवेश कुमार के इस्तीफे को बिहार सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम मानते हैं। यदि दीपक प्रकाश विधान परिषद के लिए निर्वाचित होते हैं, तो इससे उनके मंत्री पद से संबंधित तात्कालिक संवैधानिक मुद्दा हल हो जाएगा और उन्हें राज्य विधानमंडल में औपचारिक स्थान प्राप्त हो जाएगा। उनकी उम्मीदवारी के संबंध में आधिकारिक घोषणा की प्रतीक्षा है।
कुलगाम आतंकी हमले में घायल दूसरे मजदूर ने भी तोड़ा दम, ईंट भट्ठे पर करता था काम

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले के केलम गांव में शुक्रवार को हुए आतंकवादी हमले में मरने वालों की संख्या शनिवार को बढ़कर दो हो गई। अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ के एक और घायल मजदूर ने सुबह श्रीनगर के एक अस्पताल में दम तोड़ दिया। मृतकों की पहचान दीपक रैट्रे (24) और बोपिंदर (28) के तौर पर हुई है। दोनों छत्तीसगढ़ के रहने वाले थे और कुलगाम जिले के केलम गांव में एक ईंट भट्ठे पर मजदूरी का काम करते थे। अधिकारियों ने बताया कि बोपिंदर को शुक्रवार देर शाम गंभीर हालत में अनंतनाग शहर के सरकारी मेडिकल कॉलेज से श्रीनगर शहर के सौरा स्थित सुपर स्पेशलिटी शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एसकेआईएमएस) में शिफ्ट किया गया था। आज सुबह एसकेआईएमएस में उनकी मौत हो गई।” शुक्रवार शाम आतंकवादियों ने केलम गांव में दो बाहरी ईंट भट्ठा मजदूरों को बहुत करीब से गोली मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया था। दोनों घायल मजदूरों को अनंतनाग शहर के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां घायलों में से दीपक गंभीर चोटों के कारण मौत हो गई, जबकि डॉक्टरों ने बोपिंदर को बेहतर इलाज के लिए एसकेआईएमएस रेफर कर दिया गया था। शुक्रवार सुबह उसने भी दम तोड़ दिया। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा समेत स्थानीय राजनीतिक और धार्मिक नेताओं ने भी इस हमले की कड़ी निंदा की है। सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर दी है और हमलावरों का पता लगाने के लिए तलाशी अभियान शुरू किया है। यह घटना हालिया आतंकवादी हिंसा के जवाब में कश्मीर घाटी में आतंकवाद-रोधी अभियानों के तेज होने के बीच हुई है। 22 जुलाई को आतंकवादियों ने जम्मू-कश्मीर आर्म्ड पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की हत्या कर दी थी, जब वे अनंतनाग शहर में यात्रा ड्यूटी पर तैनात थे।
स्वतंत्रता दिवस समारोह से पहले दिल्ली में 2 से 16 अगस्त तक ड्रोन और छोटे हवाई उपकरणों के उड़ाने पर रोक

नई दिल्ली, । दिल्ली पुलिस ने स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए राजधानी में 2 से 16 अगस्त तक ड्रोन सहित सभी तरह के छोटे हवाई प्लेटफॉर्म उड़ाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 163 के तहत जारी किया गया यह आदेश 15 दिनों तक लागू रहेगा, जिसमें 15 अगस्त के समारोह से पहले और तुरंत बाद की अवधि शामिल है। आधिकारिक आदेश के अनुसार, ऐसी खबरें मिली हैं कि कुछ आपराधिक, असामाजिक तत्व या आतंकवादी उप-पारंपरिक हवाई प्लेटफार्मों का उपयोग करके आम जनता, गणमान्य व्यक्तियों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं।” खुफिया एजेंसियों से मिले इनपुट में आशंका जताई गई है कि असामाजिक तत्व या आतंकवादी ड्रोन और अन्य छोटे हवाई प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर आम लोगों, वीआईपी, संवेदनशील सरकारी भवनों और स्वतंत्रता दिवस समारोह को निशाना बनाने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसे किसी भी खतरे को पहले ही खत्म करने के लिए यह प्रतिबंध लगाया गया है। बीएनएसएस के तहत प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए दिल्ली पुलिस आयुक्त ने निर्देश दिया कि अधिसूचित अवधि के दौरान दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीटी) के अधिकार क्षेत्र में कहीं भी इन चीजों को उड़ाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। आदेश में कहा, “मैं स्वतंत्रता दिवस समारोह-2026 के अवसर पर दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के ऊपर पैराग्लाइडर, पैरामोटर, हैंगग्लाइडर, यूएवी, यूएएस, माइक्रोलाइट विमान, रिमोट से संचालित विमान, हॉट एयर बैलून, छोटे आकार के संचालित विमान, क्वाडकॉप्टर या विमान से पैरा जंपिंग आदि जैसे गैर-पारंपरिक हवाई प्लेटफार्मों की उड़ान पर रोक लगाता हूं।” दिल्ली पुलिस ने यह भी चेतावनी दी है कि इस निर्देश का उल्लंघन करने पर “भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 के तहत दंडनीय कार्रवाई की जाएगी।” यह आदेश 31 जुलाई को जारी किया गया था और इसमें निर्दिष्ट किया गया है कि यह 2 अगस्त से प्रभावी होगा और 16 अगस्त तक (दोनों दिन शामिल) 15 दिनों की अवधि के लिए लागू रहेगा या जब तक कि इसे वापस नहीं ले लिया जाता।