हल्द्वानी में खड़गे की रैली के बाद रामलीला मैदान में किया गया शुद्धिकरण यज्ञ

हल्द्वानी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुई ‘विजय शंखनाद रैली’ के बाद अब सियासत तेज हो गई है। रैली खत्म होने के बाद मैदान में शुद्धिकरण यज्ञ कराए जा रहे हैं। श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास के अध्यक्ष गिरीश पांडे और पंडित मोहन शास्त्री ने कहा कि रैली के बाद रामलीला मैदान में शुद्धिकरण हवन किया गया। उनका आरोप है कि रैली के दौरान धार्मिक नारों और टिप्पणियों से मैदान की पवित्रता प्रभावित हुई है। गिरीश पांडे ने कहा, “यह यज्ञ इस पवित्र स्थान की पवित्रता को बहाल करने के लिए किया गया था। यह यज्ञ ‘श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास’ की देखरेख में आयोजित किया जा रहा है। हिंदुओं की भावनाएं इसलिए आहत हुईं, क्योंकि मंच पर एक ऐसे व्यक्ति को जगह दी गई जो हिंदू संगठनों की तुलना सांपों से करता है और मुस्लिम समुदाय से उन्हें खत्म करने की अपील करता है।” पंडित मोहन शास्त्री ने कहा, “हम रामलीला मैदान में सद्बुद्धि के लिए यज्ञ कर रहे हैं। दो-तीन दिन पहले, धर्म-विरोधी तत्वों ने हमारे मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान रामचंद्र के खिलाफ बयान दिए और हिंदू धर्म व उसके विनाश के बारे में बातें कहीं।” संगठन के सदस्यों ने खड़गे को सनातन और हिंदू संगठनों का विरोधी बताते हुए कहा कि जिस मैदान में रामलीला का मंचन होता है। वहां ऐसे व्यक्ति के आने के बाद मैदान का शुद्धिकरण किया जाना जरूरी था। संगठन ने खड़गे के पिछले कथित सनातन विरोधी बयानों को भी इसका आधार बताया। कांग्रेस की ‘विजय शंखनाद रैली’ में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल हुए थे। रैली के बाद उनके जाने के बाद हुए इस यज्ञ को लेकर अब राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है। श्री राम सेना का कहना है कि यह यज्ञ उस स्थान की पवित्रता को वापस लाने के लिए किया गया है, जहां धार्मिक कार्यक्रम होते हैं। वहीं कांग्रेस इस कदम को राजनीतिक बताया रही है। फिलहाल हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुए इस शुद्धिकरण यज्ञ के बाद उत्तराखंड की राजनीति में बयानबाजी का दौर तेज हो गया है।
हल्द्वानी में कांग्रेस रैली के बाद ‘शुद्धिकरण’ पर भड़के खड़गे, बोले-धर्म के नाम पर हो रही राजनीति

हलद्वानी। उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस की ‘विजय शंखनाद’ रैली के बाद रामलीला मैदान में हुए ‘शुद्धिकरण हवन’ को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भाजपा और हिंदू संगठनों पर निशाना साधा है। आठ अगस्त को आयोजित कांग्रेस की रैली को खड़गे ने संबोधित किया था। इसके बाद श्रीराम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास की ओर से रामलीला मैदान में शुद्धि हवन किया गया। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस घटनाक्रम पर कहा कि कांग्रेस शुरू से कहती रही है कि देश में दलितों के लिए जगह नहीं है। धर्म के नाम पर लोगों को बांटने की कोशिश की जा रही है। खड़गे ने सवाल उठाया कि रामलीला मैदान सभी राजनीतिक दलों की जनसभाओं के लिए इस्तेमाल होता है, ऐसे में वहां हवन करने की जरूरत क्या थी? कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने कहा कि इस तरह का आयोजन सबसे पहले हिंदू धर्म के ही खिलाफ है। ऐसे कदम देश को बांटने और जातियों के बीच विवाद पैदा करने का काम करते हैं। खड़गे ने कहा कि यह बयान जनता को यह दिखाने के लिए दिया जा रहा है कि सरकार तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपना एजेंडा पूरा होने के बाद ही इस तरह की मांग कर रही है। उन्होंने कहा कि पहले इस संबंध में अन्य दलों से कभी चर्चा नहीं की गई और अब 19 दिन बर्बाद करने के बाद समय बढ़ाने की मांग की जा रही है। उन्होंने सरकार के रवैये को शर्मनाक बताते हुए कहा कि संसद का समय महत्वपूर्ण है और सभी दलों को साथ लेकर काम किया जाना चाहिए। खड़गे के इन बयानों के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने के संकेत हैं। कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर कहा, “कब, अब जब आज वंदे मातरम हो रहा है, जन गण मन हो रहा है। 19 दिन संसद चला और कम से कम 25-26 दिन आपके पास थे तो उस समय आपको ये याद नहीं आया। ये तो मैं समझाता हूं कि लोगों को बताने के लिए उनका ये बयान है। जब आपका एजेंडा पूरा हो गया तब आप तैयार होते हैं, सबके 19 दिन बर्बाद करने के बाद अब समय मांगते हैं। ये शर्म की बात है।
5 फ्लॉप फिल्मों के बाद पायलट बनना चाहते थे मोहनीश बहल, सलमान खान ने बचाया फिल्मी करियर

मुंबई। 1980 के दशक के मध्य में एक युवा अभिनेता अपनी लगातार पांच-छह फिल्मों के फ्लॉप होने के बाद इतना निराश हो चुका था कि उसने बॉलीवुड को हमेशा के लिए अलविदा कहने का मन बना लिया था। यह युवा अभिनेता कोई और नहीं, बल्कि मोहनीश बहल थे। फिल्मों में करियर खत्म मानकर उन्होंने विमानन क्षेत्र में जाने का फैसला किया और अपना कमर्शियल फ्लाइंग लाइसेंस प्राप्त करने की तैयारी शुरू कर दी, लेकिन एक दिन जिम में उनकी मुलाकात उभरते हुए अभिनेता सलमान खान से हुई, जो उनके अच्छे दोस्त बन गए। जब राजश्री प्रोडक्शंस की फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ (1989) के लिए कास्टिंग चल रही थी, तब सलमान खान ने ही खलनायक ‘जीवन’ के रोल के लिए मोहनीश बहल के नाम की सिफारिश की थी। इस एक अवसर ने उनके समाप्त हो चुके करियर को पुनर्जीवित कर दिया। मोहनीश बहल का जन्म 14 अगस्त 1961 को मुंबई में हुआ था। उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि बेहद समृद्ध रही है। उनकी मां, भारतीय सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री नूतन थीं और उनके पिता लेफ्टिनेंट कमांडर रजनीश बहल थे। मोहनीश बहल की नानी शोभना समर्थ और मौसी तनुजा भी जानी-मानी अभिनेत्रियां थीं, जबकि काजोल उनकी चचेरी बहन हैं। उन्होंने 1983 में फिल्म ‘बेकरार’ से सह-अभिनेता के रूप में शुरुआत की, जो बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह असफल रही। इसके बाद ‘तेरी बाहों में’ (1984) भी फ्लॉप रही। रामसे ब्रदर्स की हॉरर फिल्म ‘पुराना मंदिर’ (1984) हिट तो हुई, लेकिन उस दौर में हॉरर फिल्मों को ‘बी-ग्रेड’ सिनेमा माना जाता था, इसलिए इससे मोहनीश बहल के करियर को कोई खास फायदा नहीं हुआ। मोहनीश बहल अपनी किशोरावस्था के सभी दिल टूटने के किस्से अपनी मां से साझा करते थे और नूतन हमेशा उन्हें समझाती थीं कि समय बीत जाता है, जीवन कभी खत्म नहीं होता। ‘मैंने प्यार किया’ (1989) की ऐतिहासिक सफलता ने मोहनीश बहल को बॉलीवुड में स्थापित एक्टर बना दिया, लेकिन उनके करियर का असली टर्निंग पॉइंट तब आया जब राजश्री प्रोडक्शंस ने ही उनकी नकारात्मक छवि को तोड़कर उन्हें एक ‘संस्कारी और आदर्श भाई’ के रूप में पेश किया। ‘हम आपके हैं कौन’ (1994) और ‘हम साथ-साथ हैं’ (1999) ने उन्हें भारतीय परिवारों का चहेता बना दिया। बड़े पर्दे पर अपनी छाप छोड़ने के बाद मोहनीश बहल ने टेलीविजन की ओर रुख किया और वहां भी अपार सफलता प्राप्त की। 2002 में उन्होंने स्टार प्लस के बहुचर्चित मेडिकल ड्रामा ‘संजीवनी: अ मेडिकल बून’ में डॉ. शशांक गुप्ता की भूमिका निभाई। ‘संजीवनी’ भारतीय टेलीविजन पर एचआईवी और अन्य गंभीर चिकित्सा मुद्दों पर संवेदनशीलता से बात करने वाला पहला शो था। उन्हें 2003 में ‘इंडियन टेलीविजन एकेडमी’ (आईटीए) का सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार दिलाया। बाद में उन्होंने ‘कुछ तो लोग कहेंगे’ (2011) में डॉ. आशुतोष की भूमिका निभाई, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा, हालांकि लंबे और थका देने वाले शूटिंग शेड्यूल के कारण उन्हें पीठ में गंभीर दर्द की समस्या हो गई, जिसके चलते उन्हें बीच में ही यह शो छोड़ना पड़ा। 2019 में 17 साल बाद उन्होंने ‘संजीवनी 2’ के साथ उसी प्रतिष्ठित डॉ. शशांक के रूप में वापसी की, जिसने पुरानी यादों को एक बार फिर से ताजा कर दिया। निजी जीवन में, मोहनीश बहल ने 23 अप्रैल 1992 को अभिनेत्री एकता सोहिनी (आरती बहल) से विवाह किया। उनकी दो बेटियां हैं, जिनका नाम प्रनूतन और कृषा हैं। उनकी बड़ी बेटी प्रनूतन ने भी परिवार की विरासत को आगे बढ़ाते हुए 2019 में सलमान खान द्वारा निर्मित फिल्म ‘नोटबुक’ से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की। मोहनीश बहल की आखिरी फिल्म साल 2019 में आई ‘पानीपत’ थी। इन दिनों वह अभिनय के बजाय अपने परिवार की प्रॉपर्टी और व्यावसायिक कामों को संभाल रहे हैं तथा अपनी निजी जिंदगी पर ध्यान दे रहे हैं।
सिर्फ नेटवर्किंग नहीं, अच्छा व्यवहार और ईमानदारी भी जरूरी: अंगद हसीजा

मुंबई। अभिनेता अंगद हसीजा इंडस्ट्री इन दिनों टीवी सीरियल ‘तुमसे तुम तक’ में नजर आ रहे हैं। अभिनेता का मानना है कि मनोरंजन जगत में आज के मुकाबले पहले मौके कम और कॉम्पटिशन ज्यादा था। उन्होंने कहा, “आज के समय में एक्टर्स और न्यूकर्म के पास ज्यादा मौके हैं, क्योंकि अगर आपको टीवी पर काम नहीं मिल रहा है, तो वेब सीरीज, अलग-अलग चैनल और प्लेटफॉर्म ट्राई कर सकते हैं। जब मैं इंडस्ट्री में आया था तो हमारे लिए ज्यादा मौके नहीं थे। बस कुछ ही बड़े चैनल हुआ करते थे और उनके शो बहुत सक्सेसफुल हुआ करते थे और उनमें काम मिलना मुश्किल था। अब बहुत ज्यादा ऑप्शन हैं, बहुत सारे चैनल और प्लेटफॉर्म हैं जो पहले नहीं थे। इसलिए, मैं कहूंगा कि एक्टर्स के लिए चीजें ज्यादा आसान हो गई हैं।” उन्होंने आगे कहा, “मैं यह नहीं कहूंगा कि एक एक्टर को स्ट्रगल नहीं करना पड़ता, लेकिन सबसे बड़ी चीज जिस पर मैं यकीन करता हूं, वह है किस्मत। अगर आपकी किस्मत आपके साथ है, तो आप कुछ भी कर सकते हैं।” अभिनेता ने बातचीत में बताया कि काम के साथ नेटवर्किंग भी जरूरी है। इसका मतलब ये नहीं कि सिर्फ नेटवर्किंग से ही काम मिलेगा। मुझे लगता है कि अगर आप एक अच्छे एक्टर हैं और अपने काम को लेकर ईमानदार हैं, लेकिन आपका व्यवहार भी मायने रखता है और यही आपको आगे लेकर जाएगा।” अभिनेता से आईएएनएस ने सवाल किया, “पहले निगेटिव लीड्स को अलग तरह से दिखाया जाता था और ऑडियंस सालों तक कैरेक्टर्स से जुड़ी रहती थी। क्या आपको लगता है कि आज के टेलीविजन ने उस तरह का कनेक्शन खो दिया है?” अभिनेता ने माना कि पहले शो चार या पांच साल तक चलते थे और उनसे जुड़े रहते थे। उन्होंने कहा, “जब आप इतने वर्षों तक हर दिन कुछ देखते हैं, तो वह आपकी जिंदगी का हिस्सा बन जाता है, लेकिन अब टेलीविजन शो इतने लंबे समय तक नहीं चलते। बहुत कम शो चार या पांच साल तक चलते हैं, यही वजह है कि लोग शायद उनसे उसी तरह कनेक्ट न कर पाएं। साथ ही, मुझे लगता है कि यह एक अच्छी बात भी है क्योंकि दर्शकों को अलग-अलग तरह की कहानियां मिल रही हैं और एक्टर्स को अलग-अलग काम करने को मिल रहे हैं। नहीं तो, इतने सालों के बाद आप बोर हो सकते हैं। टेलीविजन समय के हिसाब से बदल रहा है।
जैकी श्रॉफ ने वैजयंती माला को दी बर्थडे विश, शेयर किया खास वीडियो

मुंबई। बीते जमाने की लोकप्रिय अभिनेत्री और शास्त्रीय नृत्यांगना वैजयंती माला गुरुवार को अपना जन्मदिन मना रही हैं। इस मौके पर अभिनेता जैकी श्रॉफ ने उन्हें जन्मदिन की बधाई दी। अभिनेता ने इंस्टाग्राम स्टोरीज पर एक वीडियो पोस्ट की। इसमें वे वैजयंती माला के पैर छूकर उनसे आशीर्वाद ले रहे हैं, जिसे देखकर लगता है कि अभिनेता वैजयंती माला को बहुत मानते हैं। वीडियो पोस्ट कर अभिनेता ने लिखा, “जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं वैजयंती माला। आप हमेशा हमारे दिल में रहेंगी।” अभिनेत्री वैजयंती माला की बात करें, तो उन्हें भारतीय सिनेमा में ‘ट्विंकल टोज’ के रूप में जाना जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत मात्र 13 वर्ष की आयु में 1949 की तमिल फिल्म ‘वाझकई’ से की थी। इसके बाद उन्होंने हिंदी सिनेमा में वर्ष 1951 की फिल्म ‘बहार’ से प्रवेश किया, जो उनकी ही तमिल फिल्म का रीमेक थी। इसके बाद अभिनेत्री ने साल 1954 में रिलीज की गई फिल्म नागिन में काम किया था, जिसकी सफलता ने उन्हें हिंदी सिनेमा में एक स्थापित और लोकप्रिय स्टार बना दिया। फिल्म देवदास में चंद्रमुखी के यादगार किरदार के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सह-कलाकार का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला था, जिसे उन्होंने यह कहकर अस्वीकार कर दिया था कि उनका किरदार मुख्य अभिनेत्री के बराबर ही महत्वपूर्ण था। राजकपूर के साथ फिल्म संगम में काम किया, जो बाद में ब्लॉकबस्टर साबित हुई। इस फिल्म में उन्होंने राधा के रूप में उनके आधुनिक और साहसिक अंदाज ने उनके करियर को चरम पर पहुंचाया, जिसके लिए उन्हें तीसरा फिल्मफेयर पुरस्कार मिला था। फिल्मों के अलावा वह एक उम्दा शास्त्रीय नृत्यांगना थीं, जिन्होंने भारतीय नृत्य शैली को मुख्यधारा के सिनेमा में एक नई पहचान दी। करियर के पीक पर उन्होंने डॉक्टर चमनलाल बाली से शादी की और फिल्मों से दूरी बना ली। बाद में वह राजनीति में आईं और लोकसभा व राज्यसभा (कांग्रेस और बाद में भाजपा) की सांसद रहीं। कला के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें 1968 में पद्म श्री और वर्ष 2024 में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।
2026 में 50 गीगावाट सौर ऊर्जा क्षमता जोड़ने की राह पर भारत, घरेलू सप्लाई चेन को मजबूती देने वाली नीतियों से बढ़ी रफ्तार

नई दिल्ली। भारत वर्ष 2026 में सौर ऊर्जा क्षमता वृद्धि का नया रिकॉर्ड बनाने की ओर अग्रसर है। वुड मैकेंजी की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने वर्ष 2026 की पहली छमाही (जनवरी-जून) में 34 गीगावाट डायरेक्ट करंट (जीडब्ल्यूडीसी) सौर ऊर्जा क्षमता जोड़ी है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 38 प्रतिशत अधिक है। मौजूदा रफ्तार को देखते हुए पूरे वर्ष में भारत 50 गीगावाट से अधिक सौर ऊर्जा क्षमता जोड़ सकता है, जो देश के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक विस्तार होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत इस वर्ष अपने सौर ऊर्जा स्थापना इतिहास में किसी भी अन्य वर्ष की तुलना में सबसे अधिक क्षमता स्थापित करने जा रहा है। हालांकि, इस तेज वृद्धि को बढ़ावा देने वाली नीतियां घरेलू सप्लाई चेन पर दबाव भी पैदा कर रही हैं, जिसके चलते निकट अवधि में सौर परियोजनाओं की लागत बढ़ने की संभावना है। विशेषज्ञों के अनुसार, डेवलपर्स ने मॉडल और निर्माताओं की स्वीकृत सूची-II (एएलएमएम-II) की जून 2026 समयसीमा से पहले परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने का प्रयास किया। इसी वजह से वर्ष की पहली छमाही में सौर ऊर्जा परियोजनाओं के निर्माण और कमीशनिंग में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली। वुड मैकेंजी के रिसर्च एनालिस्ट सुरीत सिंह ने कहा कि एएलएमएम-II भारत में पूरी तरह एकीकृत घरेलू सौर सप्लाई चेन विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, सौर मॉड्यूल निर्माण क्षमता की तुलना में देश में सौर सेल निर्माण क्षमता अभी पर्याप्त गति से नहीं बढ़ पाई है। उनके अनुसार, निकट अवधि में लागत बढ़ना लगभग तय है और डेवलपर्स को कीमतों के स्थिर होने तक चुनौतीपूर्ण दौर से गुजरना पड़ सकता है। इस वर्ष सौर ऊर्जा क्षेत्र में तेजी का एक अन्य कारण अंतरराज्यीय ट्रांसमिशन शुल्क में मिलने वाली छूट का धीरे-धीरे कम होना भी रहा। जुलाई 2026 से कमीशन होने वाली परियोजनाओं के लिए यह छूट 75 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत कर दी गई है, जबकि जुलाई 2028 के बाद इसे पूरी तरह समाप्त करने की योजना है। इसी वजह से कई डेवलपर्स ने समयसीमा से पहले परियोजनाओं को पूरा करने में तेजी दिखाई। हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में यह रफ्तार कुछ धीमी पड़ सकती है, जिसकी मुख्य वजह घरेलू सौर सेल उत्पादन क्षमता की कमी और मॉड्यूल कीमतों में बढ़ोतरी है, जो नई परियोजनाओं के विकास पर दबाव डाल सकती है। फिर भी, कुछ राहत भरे संकेत भी हैं। सरकार ने नेट मीटरिंग और ओपन एक्सेस परियोजनाओं को 31 दिसंबर 2026 तक एएलएमएम-II नियमों से छूट दी है। इससे आने वाले महीनों में अतिरिक्त क्षमता जुड़ने की संभावना बनी हुई है। इसके अलावा, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने जुलाई 2026 में उन परियोजनाओं के लिए भी राहत दी, जो लगभग पूर्ण होने की अवस्था में थीं। मंत्रालय ने 23 जुलाई 2026 तक आवेदन करने वाली परियोजनाओं को एएलएमएम-II की अनिवार्यता से छूट प्रदान करने पर सहमति जताई। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि एएलएमएम-II के लागू होने से चीन से सीधे सौर सेल आयात में कमी आई है। हालांकि आयात पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि इसका स्रोत बदल गया है। शुरुआती 2026 में इंडोनेशिया से सौर सेल आयात लगभग तीन गुना बढ़ गया, जिससे स्पष्ट है कि कंपनियां वैकल्पिक स्रोतों की तलाश कर रही हैं। वर्ष 2026 के पहले पांच महीनों में भारत ने 5 गीगावाट वेफर्स और 20 गीगावाट सौर सेल आयात किए। घरेलू सौर सेल उत्पादन को समर्थन देने के लिए वेफर आयात में सालाना आधार पर 86 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वुड मैकेंजी के एक अन्य रिसर्च एनालिस्ट मैथ्यू थॉमस के अनुसार, जैसे-जैसे देश में अतिरिक्त सौर सेल निर्माण क्षमता स्थापित होगी, कीमतों में धीरे-धीरे स्थिरता आएगी। उनका मानना है कि 2029 तक बाजार अधिक संतुलित स्थिति में पहुंच सकता है, लेकिन इसके लिए नीतिगत स्थिरता और निर्माताओं द्वारा समय पर क्षमता विस्तार बेहद जरूरी होगा।
ऑस्ट्रेलिया के सभी राज्यों में पहुंचा बर्ड फ्लू, तस्मानिया में प्रवासी पक्षी में मिला अत्यधिक संक्रामक एच5एन1

मेलबर्न। ऑस्ट्रेलिया के द्वीपीय राज्य तस्मानिया में गुरुवार को एच5एन1 बर्ड फ्लू (एवियन इन्फ्लूएंजा) का पहला पुष्ट मामला दर्ज किया गया। इसके साथ ही यह खतरनाक वायरस अब ऑस्ट्रेलिया के सभी राज्यों में पाया जा चुका है। तस्मानिया के प्राथमिक उद्योग और जल मंत्री गेविन पियर्स ने पत्रकारों को बताया कि राज्य के उत्तर-पश्चिमी तट पर मृत पाए गए एक प्रवासी ब्राउन स्कुआ पक्षी की जांच में अत्यधिक संक्रामक एच5एन1 एवियन इन्फ्लूएंजा की पुष्टि हुई है। उन्होंने बताया कि इस पक्षी को ‘पार्क्स एंड वाइल्डलाइफ सर्विस’ के कर्मचारियों ने खोजा था, जो तटीय इलाकों में लगातार निगरानी कर रहे थे। इसके साथ ही तस्मानिया, एच5एन1 के मामले की पुष्टि करने वाला ऑस्ट्रेलिया का छठा और अंतिम राज्य बन गया है। इस वायरस का पहला मामला जून में वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया (डब्ल्यूए) में सामने आया था। पियर्स ने कहा कि राज्य की एजेंसियां उद्योग जगत, वन्यजीव विशेषज्ञों और जैव सुरक्षा विशेषज्ञों के साथ मिलकर निगरानी, तैयारी और प्रतिक्रिया व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर काम कर रही हैं। उन्होंने कहा, “मैं तस्मानिया के लोगों को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि हम एच5 बर्ड फ्लू से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और जैसे-जैसे नई जानकारी मिलेगी, हम लगातार अपडेट देते रहेंगे।” समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया की कृषि मंत्री जूली कॉलिन्स ने मंगलवार को घोषणा की थी कि संघीय सरकार ने एच5एन1 वैक्सीन की शुरुआती 1,500 शीशियां (वायल) खरीदी हैं। इनका उपयोग कैद में रखे गए उच्च जोखिम वाले पक्षियों के टीकाकरण के लिए किया जाएगा। तस्मानिया के पर्यावरण मंत्री गाय बार्नेट ने गुरुवार को कहा कि आवश्यक मंजूरी मिलने के बाद राज्य कैद में रखे गए अत्यंत संकटग्रस्त ऑरेंज-बेलीड पैरट प्रजाति के लगभग 350 पक्षियों का टीकाकरण शुरू करेगा। एवियन इन्फ्लूएंजा ए(एच5एन1) इन्फ्लूएंजा वायरस का एक प्रकार है, जो मुख्य रूप से पक्षियों को संक्रमित करता है, लेकिन कुछ दुर्लभ मामलों में स्तनधारियों और इंसानों को भी प्रभावित कर सकता है। एच5एन1 वायरस की गूज/ग्वांगडोंग वंश पहली बार 1996 में सामने आई थी और तब से यह पक्षियों में लगातार प्रकोप का कारण बनती रही है। साल 2020 के बाद, एच5 क्लेड 2.3.4.4बी नामक एक नए स्वरूप ने अफ्रीका, एशिया और यूरोप के कई देशों में जंगली पक्षियों और पोल्ट्री में अभूतपूर्व स्तर पर मौतें दर्ज कराईं। इसके बाद 2021 में यह वायरस उत्तरी अमेरिका और 2022 में मध्य तथा दक्षिण अमेरिका तक फैल गया।
बेहतर मां की जिम्मेदारी निभाना चाहती हूं, ट्रंप की सलाहकार के तौर पर रहूंगी साथ: कैरोलिन लेविट

वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा की है। उन्होंने इसके पीछे की वजह एक मां के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाना बताया। उन्होंने कहा कि परिवार और दो छोटे बच्चों को समय देने के लिए वह व्हाइट हाउस छोड़ रही हैं, हालांकि लेविट ने स्पष्ट किया कि वह बाहर से ट्रंप की प्रमुख सलाहकार के तौर पर काम करती रहेंगी और रिपब्लिकन पार्टी का समर्थन जारी रखेंगी। कैरोलिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, ”पिछले डेढ़ साल तक व्हाइट हाउस प्रेस सचिव के रूप में सेवा करना मेरे जीवन का सबसे बड़ा सम्मान और सबसे यादगार अनुभव रहा है। मैं राष्ट्रपति ट्रंप की बेहद आभारी हूं कि उन्होंने मुझे इतने असाधारण अवसर दिए। मुझे वेस्ट विंग में काम करने, ओवल ऑफिस में अनगिनत घंटे बिताने, दुनिया भर की यात्राएं करने, विदेशी नेताओं से मिलने और हमारे खूबसूरत देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर हर वर्ग के अमेरिकी नागरिकों से मिलने का मौका मिला।” लेविट ने कहा, ”सबसे बढ़कर मैं राष्ट्रपति की आभारी हूं कि उन्होंने मुझे व्हाइट हाउस के पोडियम से उनकी ओर से बोलने की जिम्मेदारी और सम्मान दिया। मैंने इस प्रशासन की कई ऐतिहासिक उपलब्धियों के बारे में हमेशा गर्व के साथ बात की है। साथ ही मुझे यह सुनिश्चित करने में भी संतोष मिला कि मीडिया जवाबदेह रहे और अमेरिकी लोगों तक राष्ट्रपति ट्रंप की सफलताओं के बारे में सच्ची जानकारी पहुंचे।” कैरोलिन ने बताया कि एक मां होना और इसी दौरान अपने परिवार में एक नए बच्चे का स्वागत करना, जबकि दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण नौकरियों में से एक को निभाना, मेरे जीवन का सबसे संतोषजनक लेकिन सबसे कठिन दौर रहा है। सच कहूं तो अपनी बेटी के जन्म के बाद जब मैं वापस व्हाइट हाउस लौटी, तो मुझे दिल से महसूस हुआ कि व्हाइट हाउस प्रेस सचिव की भूमिका में जितना समय, ऊर्जा और ध्यान देना पड़ता है, उसके साथ मैं अपने दो छोटे बच्चों की वैसी मां नहीं बन पा रही हूं, जिसकी वे हकदार हैं। यही वजह है कि मैंने भारी मन से व्हाइट हाउस छोड़ने और अपने जीवन के एक नए अध्याय की शुरुआत करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने मुझसे कहा है कि मैं बाहर से भी उनकी एक प्रमुख सलाहकार के रूप में काम करती रहूं। मैं हमेशा एमएजीए आंदोलन और रिपब्लिकन पार्टी की खुलकर समर्थक बनी रहूंगी। उन्होंने कहा कि हमारा देश, मेरे विचार में, डेमोक्रेटिक पार्टी के बढ़ते कट्टरपंथी रुझानों से एक गंभीर चुनौती का सामना कर रहा है। मेरा मानना है कि जो लोग इस देश की परवाह करते हैं, उन सभी की जिम्मेदारी है कि वे इस चुनौती का मुकाबला करें। मेरी लड़ाई अब एक नए चरण में प्रवेश कर रही है, लेकिन यह अभी खत्म नहीं हुई है। कैरोलिन ने कहा, ”मैं एक बार फिर राष्ट्रपति, प्रथम महिला और पूरे ट्रंप परिवार का वर्षों से मिले उनके स्नेह और उदारता के लिए धन्यवाद करती हूं। हमारी शानदार चीफ ऑफ स्टाफ सूसी वाइल्स का भी धन्यवाद, जिन्होंने अभियान में मुझे नियुक्त करने के पहले दिन से ही मुझ पर भरोसा किया और मुझे आगे बढ़ने का मौका दिया। साथ ही राष्ट्रपति के मंत्रिमंडल, मेरे स्टाफ, सहयोगियों और व्हाइट हाउस के उन सभी मित्रों का भी धन्यवाद, जो हमारे देश के लिए इतनी मेहनत करते हैं। इतने प्रतिभाशाली और समर्पित लोगों के साथ काम करना मेरे लिए सम्मान की बात रही है और आने वाले ढाई वर्षों में उनकी सफलताओं को देखकर मुझे खुशी होगी।” कैरोलिन ने कहा मैं अपने प्यार करने वाले और हमेशा साथ देने वाले पति तथा अपने परिवार का धन्यवाद करती हूं, जिन्होंने मुझे यह जिम्मेदारी निभाने के लिए बहुत त्याग किए।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कपिलेश्वर मंदिर का वीडियो साझा किया, लिखा-अल्मोड़ा आने पर शिवधाम के दर्शन अवश्य करें

देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को अल्मोड़ा के कपिलेश्वर शिव मंदिर का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किया है। सावन के पावन महीने में उन्होंने श्रद्धालुओं से शिवधाम का दर्शन करने के लिए आग्रह किया है। सीएम धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वीडियो साझा करते हुए लिखा, “अल्मोड़ा शहर से लगभग 12 किलोमीटर दूर सिमल्टी गांव के पास स्थित कपिलेश्वर शिव मंदिर उत्तराखंड के प्राचीन मंदिरों में से एक माना जाता है। कत्यूरी शासनकाल में निर्मित यह मंदिर अपनी विशिष्ट स्थापत्य कला और आध्यात्मिक आभा के लिए विशेष पहचान रखता है।” उन्होंने लिखा, “पवित्र सावन मास में यहां विशेष पूजा-अर्चना एवं धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होता है, जिससे मंदिर का वातावरण और भी भक्तिमय हो उठता है। अल्मोड़ा जनपद आगमन पर इस शिवधाम के दर्शन अवश्य करें।” मुख्यमंत्री की ओर से 12 अगस्त को ऋषिकेश के पास पौड़ी गढ़वाल जिले में स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर का एक वीडिया साझा कर जानकारी दी गई थी। उन्होंने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा था, “ऋषिकेश के निकट पौड़ी गढ़वाल जनपद में स्थित देवाधिदेव महादेव को समर्पित नीलकंठ महादेव मंदिर अत्यंत पावन तीर्थस्थल है। पौराणिक मान्यताओं और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण यह धाम सावन मास में विशेष आस्था का केंद्र बन जाता है।” सीएम ने आगे लिखा था, “देशभर से लाखों शिवभक्त कांवड़ में गंगाजल लेकर नीलकंठ महादेव पहुंचते हैं और भोलेनाथ का जलाभिषेक कर उनकी कृपा एवं आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। पौड़ी गढ़वाल जनपद आगमन पर आप भी इस पावन मंदिर के दर्शन अवश्य करें।” मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से 11 अगस्त को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा था, “कांवड़ मेला-2026 के सफल एवं सुव्यवस्थित आयोजन में सहभागी बने देशभर से आए सभी शिवभक्तों का हृदय से आभार एवं अभिनन्दन।” उन्होंने लिखा था, “इस वर्ष देवभूमि उत्तराखण्ड ने श्रद्धा के ऐसे विराट स्वरूप का साक्षात्कार किया, जहां करोड़ों शिवभक्तों की आस्था के साथ सेवा, अनुशासन और व्यवस्था का अद्भुत समन्वय दिखाई दिया। इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आगमन भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा और उत्तराखण्ड की सेवा एवं आतिथ्य परंपरा में उनके विश्वास को दर्शाता है।” सीएम धामी ने लिखा था, “इस विशाल जनसमागम को सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित बनाने में प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, आपदा प्रबंधन दल, स्वच्छता कर्मियों, स्वयंसेवी संगठनों, धार्मिक-सामाजिक संस्थाओं एवं स्थानीय नागरिकों का योगदान सराहनीय रहा। महादेव से प्रार्थना है कि समस्त शिवभक्तों पर उनकी कृपा बनी रहे और सभी की मनोकामनाएं पूर्ण हों। हर हर महादेव!
सपा सांसदों ने सरकार पर संसदीय परंपराओं और नियमों की अनदेखी का लगाया आरोप

नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद रामगोपाल यादव ने सरकार पर संसदीय परंपराओं और नियमों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सत्ता पक्ष की जिद के कारण पूरे सत्र के दौरान कई विधेयक जबरदस्ती पारित कराए गए। उन्होंने कहा कि जिस तरीके से इन विधेयकों को पारित कराया गया, वह संसदीय लोकतंत्र की स्थापित परंपराओं के अनुरूप नहीं है। विपक्ष ऐसी कार्यप्रणाली को स्वीकार नहीं कर सकता। सपा सांसद रामगोपाल यादव ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि सरकार में बैठे लोगों को अपने अहंकार या जिद को विपक्ष की जायज मांगों के रास्ते में नहीं आने देना चाहिए। संसद में कानून बनाने के लिए नियम और परंपराएं निर्धारित हैं और उनका पालन किया जाना जरूरी है। गृह मंत्री अमित शाह के संसद में बयान देने की तैयारी के मुद्दे पर सपा सांसद ने कहा कि सरकार की ओर से बताया गया है कि विपक्षी दल अपने सवाल लोकसभा अध्यक्ष को लिखित रूप में दें, जिनका जवाब दिया जाएगा। उन्होंने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह संसद की स्थापित परंपरा नहीं रही है। उन्होंने कहा, “हमेशा से यही तरीका रहा है कि मंत्री सदन में बयान देते हैं और इसके बाद सभी दलों के सांसद तय समय के भीतर अपने सवाल पूछकर संबंधित मुद्दों पर स्पष्टीकरण मांगते हैं। संसद इसी तरह काम करती है।” रामगोपाल यादव ने कहा कि विपक्ष इस व्यवस्था को स्वीकार नहीं कर सकता और केवल इसलिए अपनी आपत्ति वापस नहीं लेगा कि सत्ताधारी दल बार-बार यह आरोप लगा रहा है कि विपक्ष संसद से भाग रहा है। उन्होंने कहा कि यदि हर दिन संसदीय परंपराओं और रीति-रिवाजों को तोड़ा जाएगा, तो विपक्ष ऐसी प्रक्रिया में शामिल क्यों हो। सरकार को लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली और विपक्ष की भूमिका का सम्मान करना चाहिए। महाराष्ट्र सरकार की ओर से टैक्सी और ऑटो-रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य किए जाने के फैसले पर भी रामगोपाल यादव ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देश में कोई भी व्यक्ति इस तरह के कदम से सहमत नहीं है और किसी भी सरकार को ऐसा फैसला नहीं लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी “विविधता में एकता” है। अगर देश के भीतर लोगों को भाषा के आधार पर बांटने की कोशिश की जाती है, तो यह बेहद संकीर्ण सोच को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि भाषा के नाम पर विभाजन देश की एकता और सामाजिक सौहार्द के लिए उचित नहीं है। राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपों के मुद्दे पर भी सपा सांसद ने सरकार से सदन में बयान देने की मांग की। उन्होंने कहा कि विपक्ष केवल इस मामले पर सरकार का बयान चाहता है। उनके अनुसार, आस्था से जुड़े मामले में गंभीर चोरी के आरोप लगे हैं और यह घटना ऐसी जगह हुई, जो सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की निगरानी में थी। वहीं, उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार बनने पर आजम खान को गृह मंत्री बनाए जाने संबंधी सपा विधायक शिवपाल सिंह यादव के बयान पर पार्टी सांसद हरेंद्र मलिक ने कहा कि जब भी प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनी है, आजम खान सरकार का हिस्सा रहे हैं और आगे भी रहेंगे।