मध्यावधि चुनाव से पहले ट्रंप का बड़ा संकेत, मतदाता पहचान के लिए लगा सकते हैं राष्ट्रीय आपातकाल

वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह संकेत दिया है कि वह अमेरिका के मध्यावधि चुनावों से पहले मतदाता पहचान और नागरिकता सत्यापन को अनिवार्य बनाने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा आपातकाल घोषित करने की संभावना पर विचार कर सकते हैं। ट्रंप ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। उनके इस बयान ने चुनावी नियमों, मतदाता अधिकारों और संघीय सरकार की शक्तियों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। ट्रंप ने ‘रियल अमेरिकाज वॉयस’ पर वेन एलिन रूट को दिए एक इंटरव्यू में कहा, “इससे भी ज्यादा असामान्य चीजें पहले हो चुकी हैं। फिलहाल मैं इतना ही कहूंगा।” रूट ने ट्रंप से कहा कि अगर सीनेट ‘सेव अमेरिका एक्ट’ को मंजूरी नहीं देती, तो उन्हें आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल करना चाहिए। रूट ने सुझाव दिया कि ऐसी शक्तियों के जरिए फोटो पहचान पत्र, नागरिकता का प्रमाण अनिवार्य किया जा सकता है और डाक के जरिए भेजे जाने वाले मेल-इन बैलेट पर भी सीमाएं लगाई जा सकती हैं। ट्रंप ने इस प्रस्ताव का साफ तौर पर समर्थन नहीं किया, लेकिन उन्होंने बार-बार कहा कि मध्यावधि चुनावों से पहले चुनावी नियमों पर सीनेट को कार्रवाई करनी चाहिए। ट्रंप ने कहा, “सीनेट को ‘सेव अमेरिका एक्ट’ पर आगे बढ़ना होगा। मुझे सच में लगता है कि ऐसा होना चाहिए, क्योंकि लोग इसकी उम्मीद कर रहे हैं और यह जरूरी भी है।” उन्होंने आगे कहा क‍ि हम चाहते हैं कि नागरिकता का प्रमाण हो। और मतदाता पहचान पत्र भी होना चाहिए। ट्रंप ने दावा किया कि कुछ रिपब्लिकन सीनेटर इन उपायों का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने हाउस स्पीकर माइक जॉनसन की तारीफ की और कहा कि प्रतिनिधि सभा इस कानून को पांच बार मंजूर कर चुकी है, लेकिन यह हर बार सीनेट में जाकर अटक जाता है। राष्ट्रपति ने डाक से मतदान की व्यवस्था की भी फिर से आलोचना की। उन्होंने बिना कोई सबूत दिए दावा किया कि यह प्रणाली धोखाधड़ी के लिए संवेदनशील है और खास तौर पर कैलिफोर्निया की चुनावी व्यवस्था पर निशाना साधा। ट्रंप ने कहा क‍ि मेल-इन बैलेट्स बहुत भ्रष्ट हैं। उन्होंने कहा क‍ि कैलिफोर्निया चुनावों के मामले में सबसे भ्रष्ट जगहों में से एक है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि कुछ क्षेत्रों में रिपब्लिकन मतदाताओं को मतपत्र प्राप्त करने में कठिनाई होती है। रूट ने ट्रंप से कहा कि चुनाव संबंधी यह कानून शायद सीनेट से मंजूरी न पा सके। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस इसे पारित कर भी दे, तब भी इसे तुरंत कानूनी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। इसके बाद रूट ने ट्रंप से आग्रह किया कि वे अगले एक महीने के भीतर राष्ट्रीय सुरक्षा आपातकाल घोषित करें। रूट का दावा था कि इससे प्रशासन सीनेट की मंजूरी का इंतजार किए बिना फोटो पहचान पत्र, नागरिकता प्रमाण की अनिवार्यता और मेल-इन वोटिंग पर सीमाएं लागू कर सकेगा। ट्रंप की प्रतिक्रिया ने इस संभावना को ज‍िंदा रखा, लेकिन उन्होंने अपनी सरकार की ओर से इस रास्ते को अपनाने की कोई स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं जताई। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस इस कानून को पारित कर देती है तो इसे अदालत में चुनौती देना ज्यादा मुश्किल हो जाएगा। इंटरव्यू में जिस चुनावी प्रस्ताव पर चर्चा हुई, वह रिपब्लिकन पार्टी के उस व्यापक प्रयास का हिस्सा है जिसके तहत संघीय चुनावों में वोटर पंजीकरण करवाते समय अमेरिकी नागरिकता का दस्तावेजी प्रमाण देना अनिवार्य किया जाए। समर्थकों का कहना है कि इससे चुनावी सुरक्षा और मजबूत होगी। वहीं विरोधियों का तर्क है कि जिन योग्य नागरिकों के पास जरूरी दस्तावेज आसानी से उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें वोटर पंजीकरण कराने में परेशानी हो सकती है। अमेरिकी संघीय कानून पहले से ही गैर-नागरिकों को संघीय चुनावों में मतदान करने से रोकता है। अमेरिका में चुनाव मुख्य रूप से राज्य और स्थानीय प्रशासन की ओर से कराए जाते हैं, जो अमेरिकी संविधान और संघीय कानूनों द्वारा तय ढांचे के तहत काम करते हैं।

दिल्ली: 15 अगस्त से पहले फुल ड्रेस रिहर्सल, लाल किला-राजघाट के रास्ते बंद, बॉर्डर सील

नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर गुरुवार को दिल्ली पुलिस राजधानी में फुल ड्रेस रिहर्सल करेगी। इसी के चलते सुबह से ही दिल्ली के संवेदनशील इलाकों, बॉर्डरों और लाल किले के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। कई मार्गों को बंद कर ट्रैफिक डायवर्ट किया गया है और चेकिंग अभियान तेज कर दिया गया है। आज गीता कॉलोनी से लाल किला और जामा मस्जिद की तरफ जाने वाले रास्तों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। पूरे रूट पर बैरिकेडिंग की गई और हर आने-जाने वाले वाहन की गहन जांच की गई। आईटीओ से लाल किले की तरफ जाने वाले रास्ते और राजघाट की तरफ जाने वाले रास्ते को पूरी तरीके से बंद कर दिया गया है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की तरफ से रूट डायवर्ट किया गया है। शाहदरा जिले में सुरक्षा और सख्त है। शाहदरा के डीसीपी राजेंद्र प्रसाद मीणा ने बताया, “आज फुल ड्रेस रिहर्सल है। शाहदरा जिला एक बहुत संवेदनशील इलाका है। बॉर्डर के नजरिए से देखें तो उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से सटे हमारे सात बॉर्डर पॉइंट हैं। इन पॉइंट्स पर कल रात 10 बजे से ट्रैफ़िक पूरी तरह बंद कर दिया गया था। हमने पूरे जिले में पिकेट बनाए हैं। हमारे मौजूदा स्थायी पिकेट के अलावा हमने अस्थायी पिकेट भी लगाए हैं।” डीसीपी मीणा ने बताया कि लाल किले के पीछे के इलाके खासकर यमुना रिवरफ्रंट और खादर इलाके में चौबीसों घंटे पेट्रोलिंग की जा रही है। बाहरी फोर्स और स्थानीय स्टाफ दोनों का इस्तेमाल करके इलाके के हर हिस्से में बारीकी से तलाशी ली जा रही है। यह पक्का किया जा रहा है कि वहां कोई अनाधिकृत व्यक्ति न रहे। उन्होंने कहा, “यमुना के पानी में नियमित रूप से नाव से पेट्रोलिंग की जा रही है और 15 अगस्त को सुरक्षा इंतजाम खत्म होने तक यह जारी रहेगी। हमने गीता कॉलोनी और काली नगर पुलिस स्टेशनों के अधिकार क्षेत्र को कवर करने के लिए दो नावें तैनात की हैं। इसके अलावा सभी ईआरवी यानी इमरजेंसी रिस्पॉन्स व्हीकल अपने-अपने इलाकों में लगातार गश्त कर रही हैं।” आगामी 15 अगस्त को देखते हुए यूपी के नोएडा बॉर्डर से दिल्ली में आने-जाने वाले वाहनों की भी सघन तलाशी ली जा रही है। हर गाड़ी को रोककर कागजात और सामान चेक किया जा रहा है। संदिग्ध पाए जाने पर पूछताछ की जा रही है।

झारखंड छात्र आंदोलन: सीबीआई जांच की मांग पर अड़े छात्र, तिरंगा यात्रा निकालने की तैयारी

रांची। झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में गड़बड़ियों के खिलाफ छात्रों का विरोध प्रदर्शन 20वें दिन भी जारी है। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में 6 छात्र अभी भूख हड़ताल पर हैं। छात्र परीक्षाओं में गड़बड़ियों की सीबीआई जांच, रिफॉर्म और जिम्मेदारी तय करने की मांग पर अड़े हैं। इस बीच तिरंगा यात्रा निकालने की भी योजना बना रहे हैं। छात्र नेता रवींद्र ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा, “आज विरोध प्रदर्शन का 20वां दिन है। मेरे दो साथी भूख हड़ताल पर हैं और दो को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कई अन्य छात्र भी भूख हड़ताल पर हैं। सरकार से मेरी अपील है कि हम सभी छात्र हैं, इसलिए कृपया हमें यहां लंबे समय तक न रहने दें और हमारी मांगें पूरी करें।” हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी भी कीमत पर अपनी मांगो से समझौता नहीं करेंगे। जब तक मांगे पूरी नहीं हो जाती तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा, “हम सरकार के हमसे बात करने के लिए तैयार होने का इंतजार कर रहे हैं। हम मुख्यमंत्री की मौजूदगी में बातचीत करना चाहते हैं।” रवींद्र ने कहा, “हम स्वतंत्रता दिवस की तैयारी कर रहे हैं और एक भव्य तिरंगा यात्रा की योजना बना रहे हैं। जब से हम यहां हैं, हम कई तरह की गतिविधियां आयोजित कर रहे हैं, जिनमें से हर एक यह संदेश देती है कि यहां के छात्र शिक्षित और जागरूक हैं। इससे पहले हमने सरकार को यह दिखाने के लिए एक मौन मार्च निकाला था कि नारे लगाने और शोर मचाने के बाद, अब हम शांतिपूर्वक अपना संदेश पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।” वहीं, झारखंड पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज करने पर उन्होंने कहा, “कल हमारी एसएसपी के साथ बैठक हुई थी, लेकिन उन्होंने इस बात का जिक्र नहीं किया कि छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा रही हैं। हमारा विरोध प्रदर्शन ऐतिहासिक था, जिसमें छात्रों ने अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाई और उसे मजबूत किया। अगर प्रशासन को लगता है कि कुछ असामाजिक तत्व मौजूद थे जो छात्रों के आंदोलन को भटकाने की कोशिश कर रहे थे तो सरकार को उनकी पहचान करनी चाहिए। ऐसा करते समय, उन्हें यह ध्यान रखना चाहिए कि वहां लगभग 50,000 छात्र मौजूद थे। अगर एक या दो प्रतिशत ऐसे अवांछित या असामाजिक तत्व थे, तो केवल उन्हीं लोगों की पहचान की जानी चाहिए और छात्रों को किसी भी तरह से परेशान नहीं किया जाना चाहिए।” इस बीच विरोध कर रहे छात्र पीयूष कुमार सिंह ने कहा, “फिलहाल, हम इसी तरह अपना शांतिपूर्ण और अनुशासित विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। जब तक बातचीत का अगला दौर नहीं होता या हमारी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। हम न्याय चाहते हैं और हमें मंत्री पर पूरा भरोसा है कि हमें न्याय मिलेगा। हमें सरकार से उम्मीद है, इसीलिए हम यहां बैठे हैं। हम अपने मुख्यमंत्री से गुजारिश करते हैं कि वे जल्द से जल्द हमारी समस्याओं का समाधान करें।

केला खाने का सही समय कौन सा? सुबह, खाली पेट या रात, जानिए क्या कहता है विज्ञान

नई दिल्ली। बहुत से लोग केले को नाश्ते, वर्कआउट से पहले या बाद में और कभी-कभी रात की हल्की भूख के समय भी खा लेते हैं। इसको लेकर सोशल मीडिया में कई तरह की धारणाएं मौजूद हैं। कोई इसे सुबह खाली पेट खाने की सलाह देता है तो कोई रात में केला खाने को नुकसानदायक बताता है, लेकिन वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो केले को खाने का कोई एक समय नहीं है। केला एक आम फल है, जो कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, पोटैशियम और विटामिन बी6 जैसे पोषक तत्वों से भरपूर है। इसे आप अपनी सहूलियत और शरीर की जरूरत के हिसाब से खा सकते हैं। अमेरिकी नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ के अनुसार , एक केले में करीब 422 मिलीग्राम पोटैशियम और 0.4 मिलीग्राम विटामिन बी6 होता है। पोटैशियम नसों और मांसपेशियों के काम और शरीर में पानी के संतुलन के लिए जरूरी है, जबकि विटामिन बी6 प्रोटीन के इस्तेमाल और कई एंजाइम संबंधी प्रक्रियाओं में मदद करता है। केले में कार्बोहाइड्रेट भी अच्छी मात्रा में होता है। इसी वजह से जिम जाने वाले और खिलाड़ी इसे स्नैक के तौर पर खाना पसंद करते हैं। इससे तुरंत ऊर्जा मिलती है, लेकिन सिर्फ केला खाने से शरीर की सभी पोषक जरूरतें पूरी नहीं होंगी। इसे संतुलित भोजन का एक हिस्सा मानना बेहतर है। अगर खाली पेट केला खाना सही है या गलत, तो अगर किसी को सुबह केला खाने से कोई परेशानी नहीं होती, तो इसे नाश्ते में शामिल किया जा सकता है। वहीं जिन लोगों को खाली पेट फल खाने के बाद पेट फूलने या भारीपन जैसी समस्या महसूस होती है, वे ब्रेड, ओट्स या दही के साथ ले सकते हैं। केला-दूध का शेक या स्मूदी बहुत आम है। केला कार्बोहाइड्रेट देता है, जबकि दूध प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व उपलब्ध कराता है। अगर किसी व्यक्ति को दूध और केला दोनों आसानी से पचते हैं तो यह कॉम्बिनेशन सामान्य डाइट का हिस्सा हो सकता है। समस्या तब आती है जब किसी को लैक्टोज से दिक्कत होती है। ऐसे में गैस या पेट फूलने की शिकायत हो सकती है लेकिन इसका इस स्थिति को सिर्फ केले से जोड़ना सही नहीं होगा। रात में केला खाने से कोई न लेकिन अगर रात में खाने के बाद पेट भारी लगता है, तो इसे दिन में लेना बेहतर रहेगा। डायबिटीज और किडनी के मरीजों को थोड़ी सावधानी रखनी चाहिए। डायबिटीज में केले में मौजूद शर्करा ब्लड शुगर बढ़ा सकती है, इसलिए मात्रा का ध्यान रखें। किडनी की बीमारी में शरीर से अतिरिक्त पोटैशियम बाहर निकालना मुश्किल हो जाता है। इसलिए ऐसे मरीजों को डॉक्टर या डाइटीशियन से पूछकर ही केला खाना चाहिए। केला एक अच्छा और सस्ता फल है। यह एनर्जी देता है और पोटैशियम, फाइबर की कमी पूरी करता है, लेकिन किसी एक फल पर निर्भर रहना ठीक नहीं। सेहत के लिए केले के साथ-साथ दूसरे फल, सब्जी, दाल, साबुत अनाज और प्रोटीन को भी डाइट में शामिल करना जरूरी है।

विश्व अंग दान दिवस : ‘जिंदगी के सफर में’ विराम से भी संभव जीवनदान…

नई दिल्ली। सांसें थम जाने के बाद भी अगर किसी इंसान के अंग किसी जरूरतमंद के शरीर में मौजूद रहें, तो यह इंसानियत की एक बड़ी मिसाल है। अगर कोई अंग दान करता है, तो यह कई परिवारों को मुस्कुराने का मौका दे सकता है। इसी संदेश के साथ हर साल 13 अगस्त को ‘विश्व अंगदान दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का मकसद अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ उन तमाम मिथकों और गलतफहमियों को दूर करना भी है, जो किसी जरूरतमंद तक जीवन पहुंचने की राह में बाधा बनते हैं। अंगदान वह प्रक्रिया है, जिसमें किसी व्यक्ति की सहमति और निर्धारित कानूनी-चिकित्सकीय प्रक्रिया के तहत उसके स्वस्थ अंग या ऊतक किसी ऐसे मरीज को प्रत्यारोपित किए जाते हैं, जिसका संबंधित अंग काम नहीं कर रहा हो। परिस्थितियों के अनुसार जीवित व्यक्ति भी कुछ अंगों या अंग के हिस्से का दान कर सकता है, जबकि मृत्यु के बाद भी उपयुक्त अंगों और ऊतकों का दान संभव है। गुर्दा, हृदय, फेफड़े, आंखों समेत कई अंग गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को नया जीवन दे सकते हैं। कुछ परिस्थितियों में एक दाता से प्राप्त अंगों और ऊतकों से कई लोगों की जिंदगी बचाने या उनके जीवन की गुणवत्ता बेहतर करने में मदद मिल सकती है। अक्सर कहा जाता है कि एक अंगदाता आठ लोगों तक की जान बचाने में योगदान दे सकता है, हालांकि वास्तविक संख्या दाता की चिकित्सकीय स्थिति और उपलब्ध अंगों पर निर्भर करती है। किडनी, लिवर, हृदय, फेफड़े जैसे महत्वपूर्ण अंगों के खराब हो जाने पर कई मरीजों के सामने प्रत्यारोपण ही जीवन बचाने का विकल्प रह जाता है। समस्या यह है कि जरूरतमंद मरीजों की संख्या और उपलब्ध अंगों के बीच बड़ा अंतर है। यही वजह है कि अंगदान के लिए स्वैच्छिक रूप से आगे आना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। केवल इच्छा जताना ही नहीं, बल्कि अपने परिवार को भी अपनी इच्छा के बारे में बताना जरूरी है, ताकि जरूरत पड़ने पर परिवार उस निर्णय को समझ सके और उसका सम्मान कर सके। भारत में सरकार और स्वास्थ्य संस्थाओं की ओर से अंगदान को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन देश में अंग और ऊतक दान तथा प्रत्यारोपण की व्यवस्था को समन्वित करने वाली महत्वपूर्ण संस्था है। अंगदान के संदर्भ में सड़क दुर्घटनाओं और गंभीर मस्तिष्क चोटों का भी विशेष महत्व है, क्योंकि कुछ मामलों में ब्रेनडेड के बाद व्यक्ति के स्वस्थ अंगों का दान संभव हो सकता है। ब्रेनडेड की स्थिति में चिकित्सकीय और कानूनी मानकों के अनुसार अंगदान की संभावना पैदा हो सकती है। यही वह क्षेत्र है, जहां जागरूकता, प्रशिक्षित चिकित्सा व्यवस्था और परिवार की सहमति महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अंग प्रत्यारोपण का इतिहास इंसानी संवेदना और चिकित्सा विज्ञान के अद्भुत मेल की कहानी भी है। रोनाल्ड ली हेरिक ने वर्ष 1954 में अपने जुड़वां भाई रिचर्ड हेरिक को एक किडनी दान की थी। इस ऐतिहासिक प्रत्यारोपण को डॉक्टर जोसेफ मरे और उनकी टीम ने अंजाम दिया। यह सफल जीवित-दाता किडनी प्रत्यारोपण चिकित्सा इतिहास में मील का पत्थर बना। बाद में डॉ. जोसेफ मरे को अंग और कोशिका प्रत्यारोपण से संबंधित उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए 1990 में शरीर क्रिया विज्ञान या चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया। 13 अगस्त को विश्व स्तर पर अंगदान के प्रति जागरूकता से जुड़ा दिवस मनाया जाता है। भारत ने अंगदान और प्रत्यारोपण के लिए कानूनी और संस्थागत व्यवस्था भी विकसित की है। अंगदान को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमियों में से एक यह है कि इसके लिए केवल युवा और पूरी तरह स्वस्थ व्यक्ति ही पात्र होते हैं। वास्तविकता यह है कि अंगदान की उपयुक्तता व्यक्ति की उम्र से ज्यादा उसकी चिकित्सकीय स्थिति और संबंधित अंग की स्थिति पर निर्भर करती है। जीवित व्यक्ति कुछ परिस्थितियों में एक किडनी या लिवर के एक हिस्से का दान कर सकता है। मृत्यु के बाद भी उपयुक्त अंगों और ऊतकों का दान संभव हो सकता है। 18 वर्ष से कम उम्र के संभावित दाताओं के मामले में पंजीकरण और दान से जुड़े निर्णयों के लिए माता-पिता या कानूनी अभिभावक की सहमति आवश्यक होती है। अंगदान का संकल्प लेना महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी जरूरी है कि व्यक्ति अपनी इच्छा के बारे में अपने परिवार को बताए। मृत्यु के बाद अंगदान की प्रक्रिया में परिवार की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। ऐसे में परिवार अगर पहले से व्यक्ति की इच्छा से परिचित हो, तो कठिन समय में निर्णय लेना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है। अंगदान को लेकर समाज में कई तरह की गलत धारणाएं मौजूद हैं, उम्र को लेकर भ्रम, बीमारी को लेकर डर, धार्मिक मान्यताओं को लेकर आशंका या यह सोच कि अंगदान के बाद शरीर का सम्मान नहीं किया जाएगा। चिकित्सा विज्ञान में हुई प्रगति ने इनमें से कई भ्रांतियों को चुनौती दी है। किसी व्यक्ति के अंगदान की उपयुक्तता का निर्णय चिकित्सकीय विशेषज्ञ संबंधित परिस्थितियों और अंगों की स्थिति के आधार पर करते हैं। इसलिए केवल किसी बीमारी, उम्र या पूर्व स्वास्थ्य समस्या के आधार पर खुद को संभावित दाता मानने से इनकार कर देना उचित नहीं है। भारत में प्रत्यारोपण की संख्या बढ़ रही है, लेकिन जरूरत और उपलब्धता के बीच अंतर अब भी बड़ी चुनौती है। हाल के वर्षों में देश में प्रत्यारोपण सुविधाओं और बुनियादी ढांचे में विस्तार हुआ है, फिर भी मृतक-दाता अंगदान की दर को और बढ़ाने की जरूरत बनी हुई है। इसके लिए लोगों को सिर्फ अंगदान के लिए प्रेरित करना पर्याप्त नहीं है। उन्हें सही जानकारी देना भी उतना ही जरूरी है। अंगदान का फैसला व्यक्तिगत है, लेकिन उसका प्रभाव सामाजिक और मानवीय होता है। जागरूकता, वैज्ञानिक सोच और परिवार से संवाद के जरिए प्रतीक्षा सूची में जिंदगी की उम्मीद लगाए बैठे अनेक मरीजों तक मदद पहुंचाई जा सकती है।

घुटनों, कूल्हों और रीढ़ को मजबूत बनाता है भद्रासन, बरतें ये सावधानियां

नई दिल्ली। प्राचीन काल से योग हमारी संस्कृत्ति का अभिन्न हिस्सा रहा है। योग के अनेकों आसनों में भद्रासन काफी महत्व रखता है। यह आसन देखने में जितना आसान लगता है, उतना ही शरीर के लिए फायदेमंद होता है। संस्कृत में ‘भद्र’ का अर्थ होता है ‘कल्याणकारी’ या ‘शुभ’। इसलिए इसे कल्याणकारी आसन भी कहा जाता है। यह आसन न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक शांति के लिए भी बहुत लाभकारी माना जाता है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह आसन घुटनों, कूल्हों और रीढ़ की हड्डी को मजबूत करता है। यह मासिक धर्म की ऐंठन को कम करने, गुर्दे, और प्रोस्टेट के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में भी प्रभावी है। महिलाओं के लिए भद्रासन विशेष रूप से फायदेमंद है। गर्भवती महिलाओं के लिए यह आसन कूल्हों और जांघों की मांसपेशियों को मजबूत करता है, जिससे प्रसव आसान होता है। यह मासिक धर्म की तकलीफों को कम करने और तनाव को दूर करने में भी मदद करता है। ये आसन जांघों, घुटनों, टखनों और पेल्विस यानी कूल्हे के पास की मांसपेशियों को अच्छे से खींचता है, मजबूत बनाता है और लंबा करता है। रीढ़ की हड्डी सीधी करता है। इस आसन में आप अपने बैठने वाली हड्डियों को जमीन पर टिकाते हैं। इससे रीढ़ की हड्डी अपने आप लंबी और सीधी हो जाती है। इस आसन को करने से एकाग्रता बढ़ती है और दिमाग तेज होता है। सिरदर्द, कमर दर्द, आंखों की कमजोरी, अनिद्रा और हिचकी जैसी समस्याओं में भी राहत मिलती है। आयुष मंत्रालय के अनुसार इसको करने से पाचन तंत्र बेहतर होता है और कब्ज जैसी शारीरिक समस्या भी कम होती है। साथ ही भोजन अच्छे से पचता है और दिमाग तेज रहता है। सिरदर्द, कमर दर्द, अनिद्रा जैसी समस्याओं से निजात मिलती है। भद्रासन महिलाओं से लेकर हर उम्र के लोग कर सकते हैं, लेकिन योग विशेषज्ञ कुछ सावधानियां भी बरतने की सलाह देते हैं। वहीं, घुटने या कूल्हों में गंभीर दर्द हो तो डॉक्टर की सलाह लें। शुरुआत में ज्यादा जोर नहीं देना चाहिए और अभ्यास का समय धीरे-धीरे बढ़ाना चाहिए।

विदेश मंत्री जयशंकर स्वतंत्रता दिवस समारोह से पहले ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में हुए शामिल

नई दिल्ली। देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस से पहले ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में देशभर से लोग जुड़ रहे हैं। इसी कड़ी में विदेश मंत्री एस जयशंकर भी गुरुवार को इस अभियान का हिस्सा बने। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने आवास पर लहराते राष्ट्रीय ध्वज के साथ एक तस्वीर ‘एक्स’ पर शेयर की। तस्वीर के साथ उन्होंने कैप्शन में लिखा “हर घर तिरंगा।” विदेश मंत्रालय ने भी जयशंकर की पोस्ट को रीशेयर करते हुए लिखा, “हर दिल में तिरंगा, हर घर में तिरंगा।” ‘हर घर तिरंगा’ अभियान आजादी का अमृत महोत्सव के तहत शुरू किया गया था। इसका मकसद नागरिकों को अपने घरों में राष्ट्रीय ध्वज लगाने और स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर तिरंगा फहराने के लिए प्रोत्साहित करना है। अभियान की सोच यह थी कि अब तक लोगों का राष्ट्रीय ध्वज से रिश्ता ज्यादा औपचारिक और संस्थागत रहा है। इसे व्यक्तिगत गर्व और सम्मान की अभिव्यक्ति बनाने के लिए लोगों को घर-घर तिरंगा लाने के लिए कहा गया। इससे तिरंगा देश से व्यक्तिगत जुड़ाव का प्रतीक बने और साथ ही राष्ट्र निर्माण और राष्ट्रीय एकता के प्रति सामूहिक संकल्प को भी दर्शाए। इस साल ‘हर घर तिरंगा 2026’ को ‘वंदे मातरम के 150 साल’ की भावना को समर्पित किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को देशवासियों से 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाने और स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि देने के लिए ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की थी। इंस्टाग्राम रील में पीएम मोदी ने कहा था, “15 अगस्त को गौरव के साथ मनाएं, स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दें, विकसित भारत का संकल्प लें। हर घर तिंरगा, घर घर तिंरगा, हर मन तिंरगा।” उन्होंने कैप्शन में लिखा था, “आइए, हर घर तिरंगा को हर घर का उत्सव बनाएं।” वहीं, ‘एक्स’ पर पीएम मोदी ने लिखा था, “हमारा तिरंगा हमारा गर्व है और देश के लिए हमेशा सर्वश्रेष्ठ देने की प्रेरणा का स्रोत है।” उन्होंने कहा था, “आइए ‘हर घर तिरंगा’ आंदोलन में उत्साह से भाग लें और विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने के अपने सामूहिक संकल्प को दोहराएं।

कैनेडियन ओपन: ब्रैंडन नाकाशिमा ने राफेल जोडार को हराकर फाइनल में जगह बनाई

मॉन्ट्रियल। ब्रैंडन नाकाशिमा ने अपने पहले एटीपी मास्टर्स 1000 फाइनल में जगह बना ली है। सेमीफाइनल में नाकाशिमा ने बेहतरीन फॉर्म में चल रहे स्पेन के राफेल जोडार को हराकर फाइनल में जगह बनाई। नाकाशिमा ने 7-6 (3), 6-4 से जीत दर्ज की। हार के साथ ही राफेल जोडार का राफेल नडाल के बाद कैनेडियन ओपन फाइनल में पहुंचने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बनने का सपना टूट गया। मुकाबले की बात करें, तो टाई-ब्रेक पर एक कड़ा शुरुआती सेट जीतने के बाद, नाकाशिमा ने दूसरे सेट में 5-4 पर सर्विस करते हुए चार ब्रेक पॉइंट बचाए। नाकाशिमा ने जोदार के शुरुआती दो सर्विस गेम में बिना कोई ब्रेकथ्रू किए छह ब्रेक पॉइंट हासिल किए। उन्होंने आसानी से सर्व बनाए रखा, इससे पहले कि जोदार को 4-4 पर ओपनर में नाकाशिमा की सर्व पर अपना एकमात्र मौका मिला। हालांकि, नाकाशिमा 0-30 से बच गए। टाईब्रेक में, जोदार के फोरहैंड से नेट में उनके विरोधी को 2-4 के लिए पहला मिनी-ब्रेक मिला। दूसरे सेट की शुरुआत में, नाकाशिमा ने एक चतुर हाफ-वॉली विनर बनाया और जोदार की दूसरी सर्व पर अटैक किया। जोडार ने फिर से सर्व गंवा दी और 0-2 पर बने रहे। नाकाशिमा ने फिर दो ब्रेक पॉइंट बचाए। जोडार ने बाद में फिर से पकड़ बनाए रखी, 2-4 पर एक और ब्रेक पॉइंट और 3-5 पर दो मैच पॉइंट बचाए, जिसमें से एक शानदार ड्रॉप शॉट से मिला। नाकाशिमा दो बार बुरी तरह चूकने के बाद 0-30 पर आ गए। जोडार ने उसे तब जाने दिया जब उसके बैकहैंड पासिंग शॉट ने नाकाशिमा को वॉली का मौका दिया। एक ब्रेक पॉइंट आया लेकिन नाकाशिमा ने सर्व को बाहर मार दिया। जोडार ने एक और मैच पॉइंट बचाया जब उसका बैकहैंड बेसलाइन को छू गया और 26-शॉट की रैली खत्म हुई और वह एक बार फिर बैकहैंड पासिंग शॉट के साथ लाइन पर टिका रहा। नाकाशिमा ने 28 विनर्स और 28 अनफोर्स्ड एरर्स के साथ मैच खत्म किया। 25 साल के खिलाड़ी, जो अपने पहले मास्टर्स 1000 सेमीफाइनल में खेल रहे थे, एटीपी लाइव रैंकिंग में 22वें नंबर पर हैं। शुक्रवार को एटीपी की ताजा रैंकिंग अपडेट में वह अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग हासिल कर सकते हैं।

तरुण तेजपाल को अवार्ड देने वाली कांग्रेस अब चुप क्यों : सुधांशु त्रिवेदी

नई दिल्ली। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने गुरुवार को भाजपा मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विवादास्पद पत्रिका ‘तहलका’ और कांग्रेस के बीच संबंधों पर सवाल उठाए। उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा खंडपीठ के ताजा फैसले का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर चुप क्यों है। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, “अभी हाल ही में विवादास्पद मैगजीन तहलका के एडिटर इन चीफ तरुण तेजपाल जी को बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा खंडपीठ के द्वारा 2013 के बलात्कार के एक आरोप में दोषी पाया गया और उन्हें 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई।” उन्होंने कहा कि यह विषय आज इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इतने दिन बीत जाने के बाद भी कांग्रेस की तरफ से एक भी शब्द नहीं आया है। न किसी विपक्षी की तरफ से न अपने को नारी हितों के स्वयंभू अलंबरदार बताने वाले किसी भी संस्थान की तरफ से यह सुनाई पड़ा है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा, “यह दर्शाता है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हो या नारी की प्रताड़ना हो, इस पर सोच कितनी एकांगी, एक पक्षी और पूर्वाग्रह ग्रस्त है।” सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, “यह संभवतः इसलिए है क्योंकि यह वही बिजनेस हाउस है जिसने 2001 में एक विचित्र प्रकार का स्टिंग ऑपरेशन किया था।” उन्होंने बताया कि जब अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने जस्टिस शैलेंदु नाथ फुकन की अध्यक्षता में एक जांच आयोग का गठन किया था तो स्टिंग करने वाले ग्रुप ने पूरे टेप्स को वेरीफाई करने के लिए देने से मना कर दिया था। इससे ज्यादा संदेह और नहीं उत्पन्न हो सकता। सुधांशु त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि जब जांच आयोग की रिपोर्ट आ गई, तब तक सरकार बदल गई थी। कांग्रेस की सरकार ने उस जांच रिपोर्ट को सदन के पटल पर कभी नहीं रखा। भारतीय जनता पार्टी द्वारा बहुत विषय उठाने के बाद केवल उसकी समरी रिपोर्ट 41 पेज की सदन के पटल पर रखी गई और कभी रिपोर्ट रखी नहीं गई। सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस और तरुण तेजपाल के संबंधों पर सीधे सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “आज जब वह अपराधी सिद्ध हो चुके हैं तो मैं याद दिलाना चाहता हूं कि इनका और कांग्रेस का क्या संबंध है।” सुधांशु त्रिवेदी के अनुसार, “सोनिया गांधी, जो यूपीए के समय में सुप्रीम लीडर थीं। उन्होंने 25 से 27 दिसंबर 2004 को तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम साहब को पत्र लिखा कि साहब तहलका और इसके फाइनेंसर्स की किसी प्रकार की प्रताड़ना नहीं होनी चाहिए। उनके साथ सकारात्मक व्यवहार होना चाहिए। उनके साथ कोई अनफेयर ट्रीटमेंट नहीं होना चाहिए।” उन्होंने कहा, “2010 में तत्कालीन लॉ मिनिस्टर वीरप्पा मोइली ने इनको जर्नलिज्म में एक्सीलेंस का अवार्ड दिया।” सुधांशु त्रिवेदी ने ने सवाल किया, “आज कांग्रेस पार्टी से पूछना चाहते हैं कि आपकी सरकार ने जिसको एक्सीलेंस ऑफ जर्नलिज्म अवार्ड दिया, उसकी आज यह स्थिति है और आपके मुंह से एक शब्द नहीं निकल रहा है।” उन्होंने साल 2013 का हवाला देते हुए कहा, “दिग्विजय सिंह ने कहा कि इन्होंने एक बहुत शानदार काम किया कम्युनल फोर्सेस के अगेंस्ट फाइट करने में।” साथ ही 2021 का हवाला देते हुए कहा, “जब तरुण तेजपाल लोअर कोर्ट से बरी होने में सफल हो गए थे, तो उन्होंने कांग्रेस पार्टी को धन्यवाद दिया था कि उन्होंने इस रेप केस में उनकी बहुत मदद की।” सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, “अब मैं कांग्रेस पार्टी से पूछना चाहता हूं कि आप स्पष्ट रूप से बताएं कि आप दोनों के बीच में यह क्या संबंध था। मुझे लगता है इससे ज्यादा मीडिया और सरकारों को बदनाम करने का कोई प्रमाण भारत की राजनीति में नहीं हो सकता।” सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि आज की स्थिति में इसका रेलेवेंस यह है कि यह स्थापित होता है कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से आपराधिक प्रवृत्ति के संदिग्ध लोगों को मीडिया में प्रयोग करके राष्ट्रवादी सरकारों के खिलाफ साजिश करती रहती है। इसलिए भाजपा का कांग्रेस से सवाल है, “कांग्रेस ने अभी तक इस पर जवाब क्यों नहीं दिया?” प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में उन्होंने शायराना अंदाज में कहा, “राष्ट्रवाद के महामेरु पर वार बहुत ही हल्का था और राष्ट्रवाद को रोकने को साजिशों का तहलका था।” उन्होंने कहा, “कांग्रेस आज पूरी तरीके से एक्सपोज हो गई है।

पीओके में पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों के खिलाफ बेल्जियम में कश्मीरी समुदाय ने निकाला

मार्च ब्रसेल्स। बेल्जियम में रहने वाले कश्मीरी समुदाय ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों की निंदा की गई। कश्मीरी समुदाय ने राजधानी ब्रसेल्स में यूरोपियन पार्लियामेंट से यूनाइटेड नेशंस के ऑफिस तक एक विरोध मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने बुधवार को पाकिस्तानी सेना के खिलाफ नारे लगाए गए और पीओके में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों की ओर अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित करने की मांग की। इन उल्लंघनों में जरूरी सेवाओं पर रोक और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल का क्रूर इस्तेमाल शामिल है। प्रदर्शनकारियों ने पीओके में पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से की गई क्रूर कार्रवाई के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग की। इस हफ्ते की शुरुआत में पीओके स्थित मानवाधिकार दस्तावेजीकरण और निगरानी संस्था जम्मू-कश्मीर मानवाधिकार वेधशाला (जेकेएचआरओ) ने 5 जून से 5 अगस्त के बीच कब्जे वाले इलाके में बढ़ती अशांति के दौरान 93 नागरिकों की मौत दर्ज की। पिछले हफ्ते हजारों कश्मीरी प्रवासियों ने इटली के बोलोग्ना शहर में विरोध मार्च निकाला और पीओके में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पाकिस्तानी सेना की क्रूरता की निंदा की। प्रदर्शनकारियों ने नागरिक समाज समूह ‘जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी’ (जेएएसी) के साथ एकजुटता व्यक्त की और क्षेत्र में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के अभियानों को समाप्त करने की मांग की। जेएएसी ने सोशल मीडिया पर कहा कि इटली में कश्मीरियों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे पाकिस्तानी सेना द्वारा निहत्थे नागरिकों के ‘नरसंहार’ के खिलाफ आवाज उठाएं। उन्होंने कहा, “शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी केवल अपने बुनियादी अधिकारों की मांग कर रहे हैं।” हाल ही में, कई ब्रिटिश सांसदों ने सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान पीओके में नागरिकों के खिलाफ पाकिस्तानी सेना की क्रूरता पर गहरी चिंता व्यक्त की थी। ब्रिटिश लेबर पार्टी के सांसद लियाम बायरन ने कहा था कि पीओके में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ गोलीबारी की खबरें बेहद चिंताजनक हैं। पीओके में नागरिकों की हत्या को ‘त्रासदी’ बताते हुए एक अन्य ब्रिटिश सांसद अदनान हुसैन ने कहा कि पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से अत्यधिक या गैर-कानूनी बल के किसी भी इस्तेमाल की पूरी, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच होनी चाहिए।