दिल्‍ली: सीएम रेखा गुप्ता ने ‘दिल्ली को कूड़े से आजादी’ सफाई अभियान का किया शुभारंभ

नई दिल्ली। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को दिल्ली नगर निगम मुख्यालय के केदारनाथ साहनी सभागार में ‘दिल्ली को कूड़े से आजादी-स्वच्छता अभियान 2026′ का शुभारंभ किया और विभिन्न नगर निगम वार्डों को एक करोड़ रुपए की पुरस्कार राशि के लिए प्रतिस्पर्धा करने के लिए प्रोत्साहित किया। सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि यह विशेष स्वच्छता अभियान राजधानी में 2 अक्टूबर तक चलेगा। इसका उद्देश्य शहर की स्वच्छता व्यवस्था को और मजबूत करना, वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देना, सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता सुनिश्चित करना और नागरिकों को स्वच्छता के प्रति अधिक जागरूक बनाकर सार्वजनिक भागीदारी बढ़ाना है। इस अवसर पर स्वच्छता अभियान से संबंधित एक ब्रोशर भी जारी किया गया। केंद्रीय राज्य मंत्री और दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा, दिल्ली के शहरी विकास मंत्री आशीष सूद, दिल्ली के महापौर प्रवेश वाही, मुख्य सचेतक और विधायक अभय वर्मा और अन्य लोग कार्यक्रम में उपस्थित थे। मल्होत्रा ने कहा कि दिल्ली को कूड़े से आजादी का संकल्प केवल स्वच्छता व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वच्छता को लोगों की सोच और व्यवहार का हिस्सा बनाने का एक प्रयास है। महात्मा गांधी द्वारा स्वच्छता को स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ने के प्रयासों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पदभार संभालने के बाद अपने पहले स्वतंत्रता दिवस भाषण में स्वच्छता को एक राष्ट्रीय आंदोलन बनाने का आह्वान किया था। उस समय आलोचनाओं के बावजूद स्वच्छता अभियान पूरे देश में एक जन आंदोलन बन गया और करोड़ों परिवारों को सम्मानजनक शौचालय सुविधाओं तक पहुंच प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने नगर निगम को आर्थिक रूप से मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया है। सरकार के सहयोग से नगर निकाय स्वच्छता और अन्य कई क्षेत्रों में तेजी से काम कर रहा है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि स्वच्छता किसी एक विभाग या एजेंसी की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि दिल्ली को कचरे से मुक्त करने में सरकार का उद्देश्य केवल स्वच्छता अभियान चलाना नहीं है, बल्कि स्वच्छता को नागरिकों के दैनिक व्यवहार और जीवनशैली का हिस्सा बनाना है। सरकारी विभागों, स्थानीय निकायों, बाजार संघों, स्वयंसेवी संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों, औद्योगिक संगठनों, स्वयंसेवी संगठनों और नागरिकों को एक साथ लाया जाएगा ताकि इस अभियान को एक व्यापक जन आंदोलन का स्वरूप दिया जा सके। उन्होंने कहा कि कूड़ा-कचरा और गंदगी दिल्ली की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। प्रतिदिन भारी मात्रा में कचरा उत्पन्न होने के बावजूद, अपर्याप्त प्रसंस्करण के कारण शहर में कूड़े के पहाड़ बन गए हैं। सरकार इन समस्याओं के समाधान के लिए पूरी गंभीरता और दृढ़ संकल्प के साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली नगर निगम की वित्तीय कठिनाइयों का समाधान करना सरकार की प्राथमिकता है।

हॉकी वर्ल्ड कप: बांडुरक का डबल धमाल, भारत को 4-2 से मात देकर अगले दौर में इंग्लैंड

एमस्टेलवीन। भारतीय पुरुष टीम को ‘एफआईएच वर्ल्ड कप 2026’ के अपने दूसरे ‘पूल-डी’ मैच में इंग्लैंड के खिलाफ 2-4 से हार का सामना करना पड़ा। इंग्लैंड ने 1-2 से पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए जीत के साथ तीन अंक हासिल किए, जिससे जैकरी वालेस की टीम का पूल में टॉप-2 स्थान पक्का हो गया। सोमवार को यह मुकाबला एमस्टेलवीन के वैगनर हॉकी स्टेडियम में खेला गया। इंग्लैंड लगातार दो मैच जीतकर छह अंकों के साथ पूल में शीर्ष पर पहुंच गया है, जिसके साथ उसने अगले दौर के लिए क्वालीफाई कर लिया है। एक जीत और एक हार के साथ भारत दूसरे स्थान पर है। भारतीय टीम अपना आखिरी पूल मैच पाकिस्तान के खिलाफ खेलेगी। ‘हरमनप्रीत एंड कंपनी’ के लिए टॉप-2 में रहने और सेमीफाइनल में जगह बनाने की दौड़ में बने रहने के लिए आगामी हाई-वोल्टेज मैच जीतना बेहद जरूरी है। फिलहाल पाकिस्तान और वेल्स के दो-दो मैचों में एक-एक अंक हैं। सोमवार को खेले गए इस मुकाबले में इंग्लैंड के लिए निकोलस बांडुरक ने दो गोल किए, जबकि स्टुअर्ट रशमेरे और हेनरी क्रॉफ्ट ने एक-एक गोल दागा। भारत के लिए कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने पेनाल्टी कॉर्नर को गोल में बदला, जबकि दिलप्रीत सिंह ने दूसरे क्वार्टर में एक बेहतरीन मूव को गोल में तब्दील किया। मुकाबला तेज रफ्तार से शुरू हुआ। भारत को सातवें मिनट में पहला शानदार मौका मिला। सर्कल के अंदर पांच गज की दूरी पर जरमनप्रीत सिंह के सामने लगभग पूरा गोल खाली था, लेकिन जल्दबाजी में की गई कोशिश नाकाम रही और गेंद बाहर चली गई, जबकि गोलकीपर ओलिवर पेन ने डाइव लगाकर उसे रोकने की कोशिश की थी। रेफरल के बाद इंग्लैंड को 10वें मिनट में पेनाल्टी कॉर्नर मिला, लेकिन मनप्रीत सिंह ने शानदार स्टिक ब्लॉक से उस फ्लिक को रोक दिया। इंग्लैंड ने 14वें मिनट में पहला गोल दागा। एक शानदार एरियल पास ने भारतीय डिफेंस को चौंका दिया, जिससे मोहित के सामने 2 बनाम 1 की स्थिति बन गई और बांडुरक ने शानदार फिनिशिंग के साथ स्कोर 1-0 कर दिया। दूसरे क्वार्टर के दूसरे मिनट में भारत ने बराबरी कर ली। पेनाल्टी कॉर्नर मिलने के बाद हरमनप्रीत ने जोरदार फ्लिक से गेंद को टॉप-लेफ्ट कॉर्नर में पहुंचा दिया, जिससे गोलकीपर को कोई मौका नहीं मिला। बांडुरक ने फिर से इंग्लैंड के लिए खतरा पैदा किया और करीब से गोल करने से बाल-बाल चूक गए, जिसके बाद भारत ने 25वें मिनट में वापसी करते हुए बढ़त बना ली। भारत हाफ-टाइम तक बढ़त बनाए हुए था और उसने इंग्लैंड के तीन शॉट्स के मुकाबले गोल पर आठ शॉट्स लगाकर बेहतर अटैकिंग खेल दिखाया था। हालांकि, ब्रेक के बाद इंग्लैंड ने धैर्यपूर्वक खेल बनाना जारी रखा, जबकि भारत के डिफेंस को भेदना शुरू में मुश्किल रहा। विदेशी टीम ने 39वें मिनट में बराबरी का गोल दागा। दाईं ओर से एक लंबे स्लॅप-पुश के बाद, रशमेरे ने सर्कल के अंदर अपने रिवर्स स्टिक से गेंद को हल्का सा छुआ और गेंद को मोहित के पास से निकालते हुए स्कोर 2-2 कर दिया। इसके बाद इंग्लैंड ने खेल का रुख बदला। 43वें मिनट में, एक और एरियल बॉल की मदद से इंग्लैंड भारत के 23-मीटर एरिया में दाखिल हुआ, जिसमें रशमेरे फिर से शामिल थे। क्रॉफ्ट ने तेजी से हिट किया और मोहित को छकाते हुए अपना पहला वर्ल्ड कप गोल किया और इंग्लैंड को 3-2 की बढ़त दिलाई। हालांकि, भारत ने आखिरी क्वार्टर में वापसी की कोशिश की। 47वें मिनट में जरमनप्रीत को पेनाल्टी कॉर्नर मिला, लेकिन हरमनप्रीत की स्टिक से डिफ्लेक्शन पाने की कोशिश को सतर्क थॉमस सोर्सबी ने नाकाम कर दिया। फिर 50वें मिनट में अभिषेक ने टोमाहॉक शॉट से गोल के करीब पहुंचने की कोशिश की, लेकिन गेंद गोल के सामने से निकल गई। इंग्लैंड ने 55वें मिनट में जीत सुनिश्चित कर दी। गोल के सामने हुई अफरातफरी के बाद भारत को पेनाल्टी कॉर्नर मिला, जिसके बाद बांडुरक ने गोलकीपर सूरज करकेरा के बाईं ओर एक शानदार लो-फ्लाइंग फ्लिक लगाई और अपना दूसरा गोल करते हुए स्कोर 4-2 कर दिया।

झारखंडः जेएसएससी-सीजीएल रद्द, 2000 से ज्यादा लोगों की नौकरी जाएगी, प्रोजेक्ट भवन के बाहर सफल अभ्यर्थियों का हंगामा

रांची। झारखंड सरकार द्वारा जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले के बाद इस परीक्षा के जरिए चयनित होकर विभिन्न पदों पर कार्यरत अभ्यर्थियों में नाराजगी फैल गई। फैसले की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में चयनित अभ्यर्थी सोमवार को झारखंड मंत्रालय स्थित प्रोजेक्ट भवन के बाहर जुट गए और सरकार के निर्णय के खिलाफ हंगामा किया। जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा के जरिए दो हजार से अधिक अभ्यर्थियों का विभिन्न सरकारी पदों पर चयन हुआ है। नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयनित अभ्यर्थी करीब एक साल से अलग-अलग विभागों में काम कर रहे हैं। परीक्षा रद्द किए जाने की घोषणा के बाद अब इन नियुक्तियों के भविष्य पर सवाल खड़ा हो गया है। प्रोजेक्ट भवन के बाहर जुटे अभ्यर्थियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अपने भविष्य को लेकर चिंता जताई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षा दी थी। परिणाम घोषित होने के बाद उन्हें नियुक्ति पत्र मिला और वे अपने-अपने पदों पर योगदान दे चुके हैं। ऐसे में पूरी परीक्षा को रद्द किए जाने से उनका रोजगार और भविष्य प्रभावित होगा। अभ्यर्थियों ने सरकार से फैसले पर पुनर्विचार करने और उनकी स्थिति को ध्यान में रखते हुए कोई वैकल्पिक रास्ता निकालने की मांग की। उनका कहना था कि यदि परीक्षा में किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन उसका खामियाजा उन अभ्यर्थियों को नहीं भुगतना चाहिए, जिन्होंने चयन प्रक्रिया के बाद नौकरी हासिल की है। सरकार की ओर से जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने का फैसला जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर लिया गया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि एसआईटी और सीआईडी जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। उन्होंने वर्ष 2014 से अब तक की जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं की व्यापक जांच कराने की भी घोषणा की है। सरकार के फैसले के बाद एक ही परीक्षा को लेकर दो अलग-अलग तस्वीरें सामने आई हैं। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलनकारी छात्र इसे अपनी बड़ी जीत के रूप में देख रहे हैं, जबकि परीक्षा के जरिए नियुक्त अभ्यर्थी अपनी नौकरी और भविष्य को लेकर सरकार के फैसले का विरोध कर रहे हैं। अब सरकार के सामने आंदोलनकारी छात्रों की मांग पूरी करने के साथ-साथ जेएसएससी-सीजीएल के जरिए नियुक्त अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर उठे सवालों का समाधान निकालने की चुनौती भी है।

असम: मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को संवेदनशील और जनकेंद्रित पुलिस व्यवस्था मजबूत करने का दिया निर्देश

गुवाहाटी। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार को राज्य की कानून व्यवस्था की समीक्षा की और पुलिस अधिकारियों को आधुनिक, संवेदनशील और जनकेंद्रित पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने का निर्देश दिया। उन्होंने अपराधों की रोकथाम और प्रभावी जांच पर विशेष जोर देने को कहा। मुख्यमंत्री सरमा ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) हरमीत सिंह तथा पुलिस और गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में राज्य की समग्र कानून व्यवस्था की स्थिति और पुलिस प्रशासन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों की समीक्षा की गई। बैठक में बाल विवाह और बहुविवाह की रोकथाम, अपराध नियंत्रण की रणनीतियां, होमगार्ड और ग्राम रक्षा दलों से जुड़े सुधार, डायल-112 आपातकालीन सेवा, पुलिस बटालियन से संबंधित परियोजनाएं, पुलिस आवास और पुलिस थानों के अधिकार क्षेत्र के पुनर्गठन जैसे विषयों पर चर्चा हुई। सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने जांच प्रक्रिया को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आपराधिक मामलों को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाना चाहिए और समयबद्ध तथा प्रभावी जांच सुनिश्चित की जाए, ताकि अपराधियों को सजा मिल सके और दोषसिद्धि दर में सुधार हो। यह समीक्षा ऐसे समय में हुई है जब असम में आपराधिक मामलों की जांच की गति को लेकर चिंता जताई जा रही है। राज्य सरकार ने 6 जुलाई को विधानसभा में बताया था कि वर्ष 2016 से अब तक दर्ज लगभग 10 लाख मामलों में से केवल करीब 54 प्रतिशत मामलों में ही आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल किए गए हैं। वर्ष 2016 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पहली बार राज्य में सत्ता में आई थी। मुख्यमंत्री सरमा पहले भी कई बार पुलिस व्यवस्था में सुधार, जांच तंत्र को मजबूत करने और नागरिकों को बेहतर सुरक्षा सेवाएं उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दे चुके हैं। इसी बीच, असम के मुख्य सचिव रवि कोटा ने सोमवार को असम राइफल्स (पूर्व) के महानिरीक्षक मेजर जनरल इंदरजीत सिंह भिंडर से मुलाकात की। दोनों के बीच राज्य और पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र की सुरक्षा तथा विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। रवि कोटा के अनुसार, बैठक में नागरिक प्रशासन और सुरक्षा बलों के बीच बेहतर समन्वय, विशेष रूप से सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और विकास कार्यों को लेकर विचार-विमर्श किया गया। मुख्य सचिव ने पूर्वोत्तर में शांति और सुरक्षा बनाए रखने में असम राइफल्स की भूमिका की सराहना की। उन्होंने क्षेत्र के विभिन्न समुदायों के साथ असम राइफल्स की निरंतर भागीदारी और योगदान को भी महत्वपूर्ण बताया।

कैनेडियन ओपन: बेन शेल्टन लगातार दूसरी बार फाइनल में, सेमीफाइनल में लर्नर टीएन को हराया

मॉन्ट्रियल। गत चैंपियन बेन शेल्टन ने अपने साथी अमेरिकी खिलाड़ी लर्नर टीएन को सेमीफाइनल में 6-2, 6-3 से हराकर कैनेडियन ओपन के फाइनल में जगह बना ली। यह लगातार दूसरा मौका है, बेन शेल्टन ने इस टूर्नामेंट के फाइनल में जगह बनाई। 2026 में अपना खिताब बचाने उतरे बेन शेल्टन का प्रदर्शन शानदार रहा है। सेमीफाइनल में पहुंचने से पहले, वह ड्रॉ में अकेले ऐसे खिलाड़ी थे जिन्होंने टूर्नामेंट में एक भी सेट नहीं गंवाया था और यह ट्रेंड बुधवार को भी जारी रहा। 1995 के बाद पहली बार मॉन्ट्रियल में फाइनल में पहुंचने वाले सभी खिलाड़ी अमेरिकी हैं। आंद्रे अगासी ने पुराने जैरी पार्क स्टेडियम में खेले गए फाइनल टूर्नामेंट में पीट सम्प्रास को हराकर खिताब जीता था। 31 साल बाद, दुनिया के नंबर 10 शेल्टन का मुकाबला गुरुवार रात आईजीए स्टेडियम में दुनिया के नंबर 31 खिलाड़ी ब्रैंडन नाकाशिमा से होगा। टीएन के खिलाफ पहले पांच गेम कड़े मुकाबले वाले थे, और शेल्टन को शुरुआत में एक ब्रेक पॉइंट भी बचाना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपने विपक्षी की तेज शुरुआत का सामना किया। शुरुआती सेट में 4-2 से आगे रहे शेल्टन ने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। शेल्टन ने दूसरे सेट की शुरुआत में फिर से सर्व तोड़ी, ऐसा लगा कि आखिरी फ्रेम में 4-1 पर टीएन के लॉब का पीछा करते हुए बैक वॉल से टकराने से ही उनकी गति धीमी हुई, जिससे उन्हें अपनी कोहनी पर लगे कट के इलाज के लिए मेडिकल टाइमआउट लेना पड़ा। शेल्टन गुरुवार को चैंपियन के तौर पर खेलते हुए लगातार दूसरी बार खिताब जीतने के इरादे से उतरेंगे। फाइनल में शेल्टन का मुकाबला ब्रैंडन नाकाशिमा से होगा। नाकाशिमा ने सेमीफाइनल में राफेल जोडार को हराकर फाइनल में जगह बनाई है। नाकाशिमा का यह पहला एटीपी मास्टर्स 1000 फाइनल मुकाबला है।

लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, हंगामे के बीच मानसून सत्र में कई अहम बिल हुए पास

नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र इस बार हंगामे की भेंट चढ़ गया। गुरुवार को लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई। इसके साथ ही मानसून सत्र का समापन हुआ। गुरुवार को सुबह 11 बजे राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के साथ लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई। राष्ट्रगीत के सभी छह पद बजाए गए। इस दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सदन में मौजूद रहे। राष्ट्रगीत के बाद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी। इस बार स्पीकर ओम बिरला ने सत्र के दौरान लोकसभा के कामकाज और उत्पादकता का ब्यौरा देने वाला पारंपरिक समापन भाषण भी नहीं पढ़ा। गौरतलब है कि इस बार पूरे सत्र में राम मंदिर के चढ़ावे में कथित तौर पर गबन और नीट पेपर लीक के मुद्दे पर हंगामा जारी रहा। विपक्ष ने नीट पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई का भी विरोध किया। साथ ही, विपक्ष ने सदन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी नहीं होने पर सवाल उठाए और छात्रों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पर सरकार का जवाब मांगा। उधर, लोकसभा में विपक्ष के लगातार हंगामे के बीच सरकार कई अहम बिल पास कराने में सफल हुई। कुछ बिल विपक्ष के सदस्यों की ओर से चर्चा में हिस्सा नहीं होने पर बिना किसी बहस के लोकसभा से पास हुए। मानसून सत्र में लोकसभा से पारित होने वाले विधेयकों में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, केरल राज्य का नाम आधिकारिक रूप से बदलकर ‘केरलम’ करने वाले केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, कराधान और अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक शामिल रहे। वहीं, लोकसभा ने बुधवार को विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (एफसीआरए), 2026 को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) भेजने के प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित किया।

‘हर घर तिरंगा’ कैंपेन को लेकर प्रियांक खड़गे ने साधा निशाना, लिखा-बांटते फिरते हैं ‘देशभक्त’ होने का सर्टिफिकेट

नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस को राष्ट्रभक्ति के उत्सव में बदलने के लिए देशभर में भाजपा की ओर से ‘हर घर तिरंगा’ कैंपेन चलाया जा रहा है। इसे लेकर कांग्रेस नेता और कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट में लिखा, “भाजपा को अपना ‘हर घर तिरंगा’ कैंपेन आरएसएस हेडक्वार्टर से शुरू करना चाहिए। प्रियांक ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में लिखा, “आजादी के बाद पांच दशकों से ज्यादा समय तक आरएसएस ने अपने नागपुर हेडक्वार्टर पर भारत का राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया। तिरंगा आधिकारिक तौर पर 2002 में ही फहराया गया था। हर भारतीय को देशभक्ति का पाठ पढ़ाने से पहले शायद भाजपा को पहले यह बताना चाहिए कि उसकी वैचारिक मूल संस्था ने तिरंगे के बजाय भगवा ध्वज को क्यों चुना और इतने लंबे समय तक उसके अपने हेडक्वार्टर से राष्ट्रीय ध्वज क्यों नदारद रहा?” प्रियांक खड़गे ने सवाल करते हुए लिखा, “एक सीधा सा सवाल अब भी बाकी है कि आपने आरएसएस के कितने ऐसे रूट मार्च देखे हैं जिनमें स्वयंसेवक पूरी यूनिफॉर्म में गर्व के साथ भारतीय तिरंगा लेकर मार्च करते हैं? एक भी नहीं। और ये लोग हर किसी को ‘देशभक्त’ होने का सर्टिफिकेट बांटते फिरते हैं। बता दें कि दिल्ली भाजपा की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा गया, “हर घर तिरंगा अभियान के तहत आइए, स्वतंत्रता दिवस को राष्ट्रभक्ति के उत्सव में बदलें। अपने घर, प्रतिष्ठान और कार्यस्थल पर तिरंगा फहराकर देश के प्रति सम्मान, गौरव और एकता का संदेश जन-जन तक पहुंचाएं। तिरंगे के साथ अपनी फोटो/सेल्फी लें और ‘हर घर तिरंगा’ के साथ सोशल मीडिया पर साझा करें।” भाजपा ने एक अन्य पोस्ट में लिखा, “डल झील, शिकारे, तिरंगा और पूरे रोंगटे खड़े हो गए! कश्मीर की खूबसूरती के बीच, शान से लहरता तिरंगा…यही है नए कश्मीर की नई पहचान! यहां सुकून है, विकास है और हर दिल में देश के लिए गर्व है। ये सिर्फ एक नजारा नहीं…नए कश्मीर की एनर्जी है!

लेह में भूकंप के तेज झटके, 5.5 रही तीव्रता, 10 किलोमीटर की गहराई पर था केंद्र

लेह। लेह में गुरुवार सुबह 6:05 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के अनुसार, रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 5.5 दर्ज की गई। भूकंप का केंद्र जमीन से सिर्फ 10 किलोमीटर नीचे था और इसका केंद्र बिंदु 36.881 डिग्री नॉर्थ, 74.402 डिग्री ईस्ट पर दर्ज किया गया। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी ने ‘एक्स’ पोस्ट के जरिए बताया कि फिलहाल किसी के हताहत होने या बड़े नुकसान की कोई खबर नहीं है। उथला भूकंप होने के कारण झटके काफी तेज महसूस किए गए। उथला भूकंप वह भूकंप है जिसका उद्गम केंद्र पृथ्वी की सतह से 0 से 70 किलोमीटर की गहराई के भीतर होता है। वैज्ञानिकों के अनुसार भूकंप पृथ्वी की सतह से लेकर 700 किलोमीटर तक की गहराई में आ सकते हैं। यूएसजीएस के आंकड़ों के मुताबिक इस पूरी रेंज को तीन हिस्सों में बांटा गया है, जिमसें उथला, मध्यम और गहरा भूकंप शामिल हैं। उथले भूकंप आमतौर पर ज्यादा खतरनाक माने जाते हैं। इसकी वजह यह है कि इनमें भूकंपीय तरंगों को सतह तक पहुंचने में कम दूरी तय करनी पड़ती है। इससे जमीन ज्यादा जोर से कांपती है और इमारतों को नुकसान पहुंचने और जानमाल की हानि की आशंका बढ़ जाती है। इससे पहले 5 अगस्त 2026 को दोपहर 3:36 बजे अरुणाचल प्रदेश के अपर सियांग जिले में भी भूकंप आया था। इसकी तीव्रता 5.4 मापी गई थी। उस भूकंप का केंद्र 29.008 डिग्री नॉर्थ, 94.739 डिग्री ईस्ट पर था और गहराई 17 किलोमीटर थी। मुख्य झटके से 5 मिनट पहले 3.6 तीव्रता का एक फोरशॉक भी आया था। मुख्य भूकंप के दो घंटे के भीतर केंद्र के उत्तर में 5.1 तीव्रता का एक बड़ा आफ्टरशॉक और कई छोटे झटके भी दर्ज किए गए थे। उस भूकंप का केंद्र डिब्रूगढ़ (असम से लगभग 171 किमी उत्तर, चांगलांग, अरुणाचल प्रदेश से 233 किमी उत्तर-पश्चिम, ईटानगर से 241 किमी उत्तर-पूर्व, जोरहाट, असम से 256 किमी उत्तर और मोकोकचुंग, नागालैंड से 299 किमी उत्तर में था। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।

राजद के मार्च पर पप्पू यादव बोले- ‘राजनीतिक एजेंडा स्वीकार नहीं करेंगे लोग’, तेजस्वी को दी राहुल से सीखने की सलाह

नई दिल्ली/पटना। बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने 19 अगस्त को तेजस्वी यादव के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राजभवन मार्च को लेकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि लोग अब राजनीतिक एजेंडे को स्वीकार नहीं करेंगे। साथ ही, पप्पू यादव ने तेजस्वी को राहुल गांधी और अखिलेश यादव के सीखने की सलाह दी। समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए सांसद पप्पू यादव ने राजद के मार्च पर कहा, “जेन-जी और अल्फा के आने से राजनीति का स्वरूप बदल गया है। लोगों का राजनीतिक दलों से भरोसा उठ गया है, सिवाय शायद एक-दो प्रतिशत नेताओं के। लगभग 98-99 प्रतिशत नेता बिहार के भविष्य के बारे में देखना पसंद नहीं करते। बिहार भी ऐसे लोगों के बारे में सोचना नहीं चाहता।” उन्होंने आगे कहा, “अगर वे (तेजस्वी यादव) कुछ सीखना चाहते हैं, तो उन्हें राहुल गांधी और अखिलेश यादव से सीखना चाहिए। लेकिन सीखने की कोई इच्छा नहीं है। वे कुंभकर्ण की तरह गहरी नींद में ही रहना चाहते हैं। इसलिए, लोग अब राजनीतिक एजेंडे को स्वीकार नहीं करेंगे और राजनीतिक एजेंडे का आम लोगों से कोई लेना-देना नहीं रह जाएगा। इसलिए राजनीतिक पार्टियों, खासकर छोटे दलों की दुकानें खत्म होने जा रही हैं।” वहीं, बिहार में शराबबंदी पर एनसीएईआर की स्टडी के बारे में पप्पू यादव ने कहा, “बिहार में असल में क्या सफल हुआ है? शराबबंदी फेल हो गई है, ड्रग्स हर घर तक पहुंच गया है और अपराध बहुत बढ़ गया है। ऐसा लगता है कि सिर्फ नेता और अधिकारी ही खुद को बचा पा रहे हैं। आम आदमी भगवान भरोसे है। गरीबी चरम पर है।” सांसद ने कहा कि सरकार में बहुत अधिक भ्रष्टाचार है। जिस चीज की कीमत एक हजार रुपए है, उसका बिल 15 हजार रुपए बनाया जा रहा है। नगर निगमों में भी भ्रष्टाचार है। अस्पतालों से लेकर नगर निगमों तक, अरबों-खरबों रुपये लूटे गए हैं। उन्होंने अपनी बातों को दोहराते हुए कहा कि शराबबंदी कभी सफल नहीं रही। शराबबंदी के तरीकों को बदलने की जरूरत थी और उसका मूल्यांकन किया जाना चाहिए था। 20-25 सालों में सरकार ने कोई मूल्यांकन ही नहीं किया है। शराबबंदी के कारण आर्थिक रूप से नुकसान राज्य को हुआ है और ड्रग्स भी घर-घर पहुंचा है। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के रांची छात्र आंदोलन में शामिल होने की घोषणा पर पप्पू यादव ने कहा, “रघुवर दास और भाजपा का अब कोई भविष्य नहीं बचा है। उन पर और उनके नेताओं पर भ्रष्टाचार के कई आरोप हैं। सबसे पहले, उन्हें इन मुद्दों पर भाजपा के अंदर ही विरोध-प्रदर्शन करना चाहिए। चार पूर्व मुख्यमंत्री हैं, उनकी ही लड़ाई चल रही है। रघुवर दास की अब कोई साख या आधार नहीं बचा है। सबसे पहले, उन्हें इस बात का जवाब देना चाहिए कि झारखंड की जनता से क्या-क्या लूटा गया। उन्हें देखना चाहिए कि उनकी सरकार के समय कितने पेपर लीक हुए।

गिरिराज का राहुल गांधी पर हमला, कहा-उद्दंड लड़के की तरह करते हैं काम

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में लगातार गतिरोध बना हुआ है। विपक्ष नीट पेपर लीक, विभिन्न राज्यों में छात्र आंदोलनों पर पुलिस कार्रवाई और अन्य मुद्दों पर गृह मंत्री अमित शाह से सदन में सीधे जवाब चाहता है। वहीं, सत्ता पक्ष का आरोप है कि सरकार चर्चा के लिए तैयार है लेकिन विपक्ष अपनी गलतियां छिपाने के लिए सदन से भाग रहा है। इस बीच केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। गिरिराज सिंह ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, “राहुल गांधी उस व्यक्ति का नाम है जो गांव के किसी शरारती बच्चे की तरह व्यवहार करते हैं। उनके चेहरे देखिए, उनके भाव देखिए, उनके बात करने का तरीका देखिए। हमारे एक सांसद ने ठीक ही कहा है कि वह एक उद्दंड लड़के की तरह काम करते हैं।” गिरिराज सिंह ने कहा, “वह विपक्ष के नेता हैं और कहते हैं ‘मैं चुनौती देता हूं।’ आप कैसी चुनौती दे रहे हैं? संसदीय प्रणाली की अपनी मर्यादा होती है। क्या आप अमित शाह से अपनी तुलना करेंगे? उन्होंने काम करके दिखाया है कि कैसे अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाया गया और सीएए को लागू किया गया। आप चाहते हैं कि देश में आतंकवाद फैले। आप ‘अर्बन नक्सल’ की भूमिका निभा रहे हैं। अगर आपमें हिम्मत है तो संसदीय प्रणाली के अनुरूप बात करें और दूसरों की भी सुनें। आप ‘हिट-एंड-रन’ जैसा व्यवहार करते हैं।” उन्होंने राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए कहा, “अमित शाह ने उनकी असलियत उजागर कर दी है। राहुल गांधी में नीट पर चर्चा करने की हिम्मत नहीं है। जब पैलेट गन के मुद्दे पर चर्चा होगी, तो नीट पर भी चर्चा होगी। जब ऐसा होगा, तो देश के अन्य राज्यों पर भी चर्चा होगी – पंजाब, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और झारखंड पर भी बात होगी। इसलिए, उनमें हिम्मत नहीं है। कांग्रेस को खुद पर शर्म आनी चाहिए।” गिरिराज सिंह ने कहा, “खड़गे जी, जो इतने वरिष्ठ नेता हैं, वे राहुल गांधी की ‘चाटुकारिता’ में लगे रहते हैं। उन्होंने दो-तीन पीढ़ियां देखी हैं, फिर भी वे राहुल गांधी की चापलूसी करते रहते हैं। वे कांग्रेस को डुबो देंगे और संसदीय प्रणाली को नुकसान पहुंचाएंगे।