रसिका दुग्गल ने शेयर किया मेलबर्न का अनुभव, कहा- रेखा के साथ ‘उमराव जान’ देखना रहा यादगार

मुंबई, 22 अगस्त (आईएएनएस)। अभिनेत्री रसिका दुग्गल ने भारतीय फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न 2026 में ‘बेस्ट एक्ट्रेस (सीरीज)’ का पुरस्कार जीतकर नया कीर्तिमान हासिल किया है। शनिवार को अभिनेत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी मेलबर्न जर्नी के बारे में बताया। अभिनेत्री रसिका दुग्गल ने इंस्टाग्राम पर मेलबर्न फिल्म फेस्टिव की कुछ झलकियां शेयर कीं। इसमें उनके साथ अभिनेत्री रेखा, रानी मुखर्जी और अभिनेता विजय शामिल हैं। इसके साथ ही स्टेज पर पुरस्कार लेते हुए भी तस्वीर नजर आ रही है। अभिनेत्री ने अपनी इस पोस्ट के जरिए फिल्म फेस्टिवल में यादगार पलों के बारे में बताया। साथ ही, क्लासिक उमराव जान देखने के अनुभव को याद किया और रानी मुखर्जी के बारे में एक इमोशनल किस्सा शेयर किया। लिखा, “लंबी फ्लाइट्स, एक के बाद एक इवेंट्स जल्दी-जल्दी में किया गया मेकअप, मेरा कैमरा खुद कहता है कि अपना लेंस साफ करो और हेडफोन कभी मिलता ही नहीं। इन सबके बावजूद मुझे हैरान होती है कि मैं हमेशा आईएफएफएम से इंसपायर्ड होकर लौटती हूं। मुझे एहसास होता है कि पागलपन भरी जिंदगी वाकई में जीने लायक है। अभिनेत्री ने आगे फिल्म प्रोड्यूसर मिटू भौमिक लांगे और स्टाइलिश नताशा समेत पूरी टीम का शुक्रिया अदा किया। साथ ही, बताया कि अभिनेत्री रेखा कि फिल्म उमराव का असर आज भी बरकरार है। उन्होंने लिखा, “रेखा जी और ऐसी ऑडियंस के साथ फिल्म उमराव जान देखना, जो फिल्म के डायलॉग पूरे कर रही थी और गानों के साथ गा रही थी। एक फिल्म का 45 साल बाद भी ऐसा असर हो सकता है। अभिनेत्री ने आगे रानी मुखर्जी की कहानी के बारे में बताते हुए लिखा, “रानी मुखर्जी को स्कूल के एक नाटक में शकुंतला के रोल के लिए कास्ट न होने की एक खूबसूरत कहानी सुनाते हुए सुनना – जिससे मैं पूरी तरह से जुड़ पाई। पता चला हम सबकी एक शकुंतला वाली कहानी है और जाहिर है, दिल्ली क्राइम सीरीज के लिए अवॉर्ड जीतना भी मेरे लिए खास था।
प्रधानमंत्री मोदी भाजपा मुख्यालय में जारी बैठक में होंगे शामिल, शाम 7 बजे नितिन नवीन की नई टीम को करेंगे संबोधित

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की अध्यक्षता में पार्टी मुख्यालय में जारी नए पदाधिकारियों की बैठक में शामिल होंगे। सूत्रों ने यह जानकारी दी है। सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाजपा की बैठक में शामिल होने के लिए जाएंगे। वे शनिवार शाम करीब 7 बजे भाजपा मुख्यालय में चल रही बैठक में शामिल पदाधिकारियों को संबोधित भी करेंगे। सूत्रों के अनुसार, बैठक का एक मुख्य एजेंडा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में देशभर में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करना होगा। बता दें कि नरेंद्र मोदी ने पहली बार 7 अक्टूबर, 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। तब से वे लगातार सार्वजनिक पद पर बने हुए हैं। 2014 में प्रधानमंत्री बनने से पहले उन्होंने लगभग 13 वर्षों तक गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। वे 12 वर्षों से अधिक समय से इस पद पर हैं। इससे पहले, शनिवार को भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने पार्टी के नए पदाधिकारियों की बैठक की शुरुआत की। नव-नियुक्त राष्ट्रीय पदाधिकारियों की परिचय बैठक के आरंभ में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ का गायन किया गया। इस बैठक में भारतीय जनता पार्टी ने ‘वंदे मातरम’ के सम्मान और उसकी ऐतिहासिक विरासत की रक्षा के संबंध में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी पारित किया। बैठक में भाजपा ने 19 अगस्त को कांग्रेस कार्यसमिति की ओर से 1937 के अपने प्रस्ताव को पुनः स्वीकार करते हुए कांग्रेस के कार्यक्रमों में ‘वन्दे मातरम’ के सिर्फ प्रथम दो पदों के गायन को सीमित करने के निर्णय की कड़ी निंदा की। साथ ही, इसका स्पष्ट शब्दों में विरोध किया गया। नितिन नवीन ने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, “भाजपा ‘वंदे मातरम’ को भारत का राष्ट्रीय गीत, भारत माता के प्रति श्रद्धा की अभिव्यक्ति, स्वतंत्रता संग्राम का मंत्र और भारत की राष्ट्रीय चेतना का अमर प्रतीक मानती है।
वंदे मातरम की विरासत की रक्षा के लिए भाजपा ने प्रस्ताव किया पारित, सीडब्ल्यूसी के फैसले की निंदा की

नई दिल्ली। वंदे मातरम् के सम्मान और उसकी ऐतिहासिक विरासत की रक्षा के संबंध में भाजपा ने शनिवार को एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया। प्रस्ताव की कॉपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर करते हुए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने लिखा कि भाजपा 19 अगस्त 2026 को कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा 1937 के अपने प्रस्ताव को पुनः स्वीकार करते हुए कांग्रेस के कार्यक्रमों में ‘वन्दे मातरम्’ के केवल प्रथम दो पदों के गायन को सीमित करने के निर्णय की कड़ी निंदा और स्पष्ट शब्दों में विरोध करती है। भाजपा वन्दे मातरम् को भारत का राष्ट्रीय गीत, भारत माता के प्रति श्रद्धा की अभिव्यक्ति, स्वतंत्रता संग्राम का मंत्र और भारत की राष्ट्रीय चेतना का अमर प्रतीक मानती है। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित वन्दे मातरम् ने भारत माता के प्रति भक्ति और समर्पण को काव्यात्मक अभिव्यक्ति दी और राष्ट्रीय जागरण का एक शक्तिशाली माध्यम बना। वन्दे मातरम्, जिसका अर्थ है “हे माता, मैं तुझे नमन करता हूं” 1905 में बंगाल विभाजन के बाद चले स्वदेशी आंदोलन के दौरान प्रतिरोध की हुंकार बना और देश के कोने-कोने तक पहुंचा। नवीन ने आगे पोस्ट में लिखा कि गीत की क्रांतिकारी शक्ति को पहचानते हुए ब्रिटिश साम्राज्य ने इसे बार-बार दबाने का प्रयास किया। 1906 में बरिसाल में इसके सार्वजनिक गायन पर प्रतिबंध लगाया गया, लेकिन इसकी आवाज को दबाया नहीं जा सका। 1907 में स्टुटगार्ट में भीकाजी कामा द्वारा प्रदर्शित ध्वज पर वन्दे मातरम् अंकित था और शीघ्र ही यह राष्ट्रीय आंदोलन की चेतना में गहराई से समाहित हो गया। इसलिए यह इतिहास की विडंबना है कि जिस वन्दे मातरम् को अंग्रेजों ने औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध प्रतिरोध की चेतना जगाने के कारण दबाने का प्रयास किया था, उसी वन्दे मातरम् को कुछ दशकों बाद कांग्रेस ने सांप्रदायिक तुष्टीकरण के नाम पर छह में से केवल दो पदों तक सीमित कर दिया। भाजपा प्रमुख ने कहा कि कांग्रेस ने कभी वन्दे मातरम् के राष्ट्रीय महत्व को स्वीकार किया था, लेकिन बाद में बढ़ते सांप्रदायिक दबाव के आगे झुकती चली गई। 1923 के काकीनाडा कांग्रेस अधिवेशन में जब पंडित विष्णु दिगंबर पलुस्कर ने वन्दे मातरम् गाना प्रारंभ किया, तब कांग्रेस अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद अली ने आपत्ति जताई और अधिवेशन से बाहर चले गए। 28 अक्टूबर 1937 को कांग्रेस कार्यसमिति ने निर्णय लिया कि राष्ट्रीय अवसरों पर वन्दे मातरम् के छह में से केवल प्रथम दो पद गाए जाएंगे। बाद के पदों में धार्मिक संदर्भों को लेकर उठाई गई आपत्तियों को स्वीकार करते हुए कांग्रेस ने राष्ट्रीय गीत के पूर्ण स्वरूप को सीमित किया। यह उस व्यापक तुष्टीकरण की राजनीति का हिस्सा था जिसने सांप्रदायिक और अलगाववादी राजनीति को लगातार अधिक स्थान दिया। इसी राजनीतिक वातावरण में द्विराष्ट्र सिद्धांत को बल मिला और अंततः भारत को विभाजन की त्रासदी झेलनी पड़ी। प्रस्ताव का जिक्र करते हुए नितिन नवीन ने आगे बताया कि इस निर्णय की राजनीतिक पृष्ठभूमि 1938 में मोहम्मद अली जिन्ना और पंडित जवाहरलाल नेहरू के बीच हुए पत्राचार से भी स्पष्ट होती है। मुस्लिम लीग की चौदह मांगों में वन्दे मातरम् को पूरी तरह त्यागने की मांग भी शामिल थी। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने राष्ट्रीय अवसरों पर वन्दे मातरम् के छह में से चार पदों को हटाने के कांग्रेस कार्यसमिति के निर्णय का बचाव और समर्थन किया। इस प्रकार सांप्रदायिक आपत्तियों को राष्ट्रीय गीत के सार्वजनिक स्वरूप को प्रभावित करने की अनुमति दी गई। लेकिन वन्दे मातरम् के इतिहास को केवल उसके कुछ पदों के धार्मिक संदर्भों तक सीमित करना भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास के साथ अन्याय होगा। महात्मा गांधी का जिक्र करते हुए नवीन ने कहा कि उन्होंने स्वयं वन्दे मातरम् के बारे में लिखा था कि इसका स्रोत क्या था और इसकी रचना कब और कैसे हुई, यह अलग बात है। लेकिन बंगाल के विभाजन के दिनों में यह हिंदुओं और मुसलमानों के बीच एक अत्यंत शक्तिशाली युद्धघोष बन गया था। यह साम्राज्यवाद-विरोधी नारा था। जब मैं छोटा था और न आनंदमठ के बारे में जानता था, न उसके अमर रचयिता बंकिम के बारे में, तब भी वन्दे मातरम् ने मुझे अपने प्रभाव में ले लिया था। जब मैंने इसे पहली बार सुना और गाया, तो यह मुझे मंत्रमुग्ध कर गया। मैंने इसके साथ शुद्धतम राष्ट्रीय भावना को जोड़ा। मुझे कभी यह विचार नहीं आया कि यह हिंदुओं का गीत है या केवल हिंदुओं के लिए है। दुर्भाग्य से, आज हम बुरे दौर में आ गए हैं। महात्मा गांधी का यह कथन अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह स्पष्ट करता है कि वन्दे मातरम् का ऐतिहासिक अर्थ केवल उसके कुछ पदों में प्रयुक्त धार्मिक बिंबों तक सीमित नहीं था। करोड़ों भारतीयों के लिए यह स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान साम्राज्यवाद-विरोधी हुंकार और शुद्ध राष्ट्रीय भावना की अभिव्यक्ति बन चुका था। 24 जनवरी 1950 को स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति और संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने घोषणा की कि जन गण मन को राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार किया जाएगा और वन्दे मातरम्, जिसने स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी, को जन गण मन के साथ “समान सम्मान और समान दर्जा” प्राप्त होगा। इस प्रकार स्वतंत्र भारत ने स्वयं अपना संवैधानिक समाधान प्रस्तुत किया। जन गण मन औपचारिक राजकीय प्रोटोकॉल में राष्ट्रगान के रूप में स्थापित हुआ, जबकि वन्दे मातरम् राष्ट्रीय गीत के रूप में समान राष्ट्रीय सम्मान और गौरव के साथ भारत की राष्ट्रीय चेतना में प्रतिष्ठित रहा। लेकिन स्वतंत्रता के बाद धीरे-धीरे वन्दे मातरम् के प्रथम दो पद ही सार्वजनिक गायन की मानक परंपरा बन गए और शेष चार पद नई पीढ़ियों के लिए अपरिचित होते गए। परिणाम यह हुआ कि भारत के पास छह पदों वाला राष्ट्रीय गीत था, लेकिन पीढ़ियां मुख्यतः उसके दो पदों को ही जानती रहीं। नवीन ने आगे पोस्ट में लिखा कि यह केवल किसी राजनीतिक दल से जुड़ा विषय नहीं है। यह भारत के सम्मान और उन असंख्य देशभक्तों की विरासत का प्रश्न है, जिन्होंने राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। भारतीय जनता पार्टी देशवासियों से आह्वान करती है कि वे स्मरण रखें – वन्दे मातरम् के शब्द कभी इतने शक्तिशाली थे कि एक साम्राज्य उनसे भयभीत हो उठा था। अंग्रेजों ने इन्हें दबाने का प्रयास इसलिए किया क्योंकि इन शब्दों ने प्रतिरोध की चेतना जगाई
भगवंत मान की पत्नी पर गंभीर आरोपों के बाद हमलावर विपक्ष, मांगा पंजाब के मुख्यमंत्री का इस्तीफा

चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी के खिलाफ कथित रूप से रेप मामले को दबाने के लिए 5 करोड़ मांगने के आरोपों पर विपक्ष हमलावर है। विपक्ष ने मामले की सीबीआई जांच और मुख्यमंत्री भगवंत मान के इस्तीफे की मांग की है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “आम आदमी पार्टी की महिला विरोधी राजनीतिक पर्दाफाश हुआ। दिनदहाड़े आम आदमी पार्टी का भ्रष्टाचार खुला। और तो और, पार्टी ने इसे दबाने की कोशिश भी की।” प्रदीप भंडारी ने लिखा, “राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने उन आरोपों का संज्ञान लिया है, जिनमें कहा गया है कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी ने रेप के एक मामले को दबाने के लिए 5 करोड़ रुपए की मांग की थी। ये आरोप पंजाब के पूर्व जज जस्टिस रंजीत सिंह ने लगाए हैं। आयोग ने अब पंजाब के मुख्य सचिव और डीजीपी को इस मामले की जांच करने और दो हफ्ते में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।” भाजाप प्रवक्ता ने आगे लिखा, “आम आदमी पार्टी महिलाओं की आवाज दबाती है। महिलाओं के प्रति अरविंद केजरीवाल का रवैया शर्मनाक है।” प्रदीप भंडारी ने सवाल किया कि क्या अब आतिशी और आम आदमी पार्टी की दूसरी महिला नेता इस पर कुछ बोलेंगी? वहीं, शिरोमणि अकाली दल के महासचिव बिक्रम सिंह मजीठिया ने भगवंत मान को ‘गुरु-द्रोही’ बताते हुए इस घटना पर जवाब मांगा। उन्होंने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, “रेप पीड़िता उस पुलिस फोर्स से क्या न्याय की उम्मीद कर सकती है जो आपके (भगवंत मान) इशारों पर नाचती है?” मजीठिया ने कहा, “भगवंत मान की पत्नी पर 5 करोड़ रुपए की रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप लगा है और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने आपके डीजीपी और मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी है। आरोप है कि आपकी पुलिस पीड़िता के बजाय आरोपी को बचाने में लगी है। आपके कहने पर, आरोपी को कथित तौर पर रेप के दो मामलों में जमानत मिल गई और उसे आजाद छोड़ दिया गया।” अकाली नेता ने कहा, “अगर आपमें हिम्मत है, तो सच सामने लाएं। आपका ‘अस्थायी डीजीपी’ 5 करोड़ रुपए की मांग के आरोप की जांच नहीं कर सकता, क्योंकि आप खुद गृह मंत्री भी हैं। भगवंत मान को पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए तुरंत इस मामले को सीबीआई को सौंपने की सिफारिश करनी चाहिए। भगवंत मान, आपकी पत्नी पर 5 करोड़ रुपए की मांग करने का गंभीर आरोप लगा है। नैतिक आधार पर आपने पंजाब के लोगों का भरोसा खो दिया है। तुरंत पंजाब के राज्यपाल को अपना इस्तीफा भेजें।
विपक्षी नेताओं ने भाजपा पर निशाना साधा, उदयवीर सिंह बोले- उन्हें ‘पी’ अक्षर से परेशानी है

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के नेता उदयवीर सिंह ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से 52 नेताओं को बुलेटप्रूफ जैकेट दिए जाने और अखिलेश यादव की ओर से जयंत चौधरी पर टिप्पणी को लेकर प्रतिक्रिया दी है। आईएएनएस से बातचीत करते हुए अखिलेश यादव की ओर से जयंत चौधरी पर टिप्पणी को लेकर उदयवीर सिंह ने कहा, “वे चौधरी चरण सिंह के व्यक्तित्व को छोटा करने की कोशिश कर रहे हैं। समाजवादियों ने चौधरी चरण सिंह के नेतृत्व में काम किया है। उनके आदर्श और विचार को लेकर आज भी चल रहे हैं। चौधरी चरण सिंह भाजपा के खिलाफ थे, किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ थे। लेकिन आरएलडी उनके (भाजपा) साथ चली गई, वो उसको सोचना है। चौधरी चरण सिंह एक विचार और विचारधारा हैं।” उदयवीर सिंह ने कहा कि स्वार्थ के कारण लोग चौधरी चरण सिंह को छोटा करने की कोशिश कर रहे हैं। यादव, मुस्लिम, गुर्जर और जाट सभी वर्ग के लोग उनको नेता मानते थे। अब कुछ लोगों की ओर से एक जाति में घेरने की कोशिश की जा रही है। समाजवादी पार्टी चौधरी चरण सिंह की विचारधारा पर चलती है; उनको अपना आदर्श मानती है। उदयवीर सिंह आगे कहा, “सीएम योगी सोच-विचार, पाकिस्तान, हिंदू और मुसलमान से आगे न जानते हैं और न सोच सकते हैं। उनके लिए ‘पी’ अक्षर से परेशानी है। उन्होंने इन 10 वर्षों में जिन लोगों को परेशान किया है, वे सभी लोग अब इनकी सरकार को परेशानी में डालने वाले हैं। वे सत्ता से हटने वाले हैं, इसलिए वे नाराजगी में इधर-उधर बोल रहे हैं। उनको इतना ही याद रखना है कि ये सारे पीड़ित, शोषित और वंचित समाज के लोग इकट्ठे होकर उनके विचार को नष्ट करेंगे। इसलिए उनको ‘पी’ से परेशानी याद रखना चाहिए। सरकार की ओर से बुलेटप्रूफ जैकेट दिए जाने को लेकर उदयवीर सिंह ने कहा, “सरकार के शीर्ष स्तर के लोग ही परेशान हैं। उन्हें या तो बुलेटप्रूफ जैकेट भौकाल के लिए चाहिए, या तो योगी सरकार में उनको अपनी सुरक्षा का विश्वास नहीं है। नेताओं की सुरक्षा तो होनी चाहिए, लेकिन जब चुनाव नजदीक आता है, तो असुरक्षा की भावना से घिरी सरकारें बहुत लोगों को रेवड़ी बांट कर प्रेरित करने की कोशिश करती हैं। अखिलेश यादव के पीडीए में ‘पी’ को लेकर सीएम योगी के बयान पर कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने कहा, “इनका पाकिस्तान के बिना काम नहीं चलता। देश के पिछड़े, पंडित, पीड़ित और देश में परिवर्तन की लहर इनको नहीं दिखाई देती है। इस बार भाजपा का ‘पी’ से पाकिस्तान वाला नैरेटिव हम लोगों की ओर से पूरा नहीं होने दिया जाएगा। ओपी राजभर को लेकर अखिलेश यादव के बयान पर सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि ओम प्रकाश राजभर की ओर से मानसिक विक्षिप्त की तरह व्यवहार किया जा रहा है। जितना ही वे भाजपा के पक्ष में बातें करने की कोशिश करते हैं, उतना ही वे अपने समाज से दूर जा रहे हैं। भाजपा की संगत के कारण उनके पास एक भी विधायक नहीं रहा। उनके कुछ एमएलए भाजपा में तो कुछ सपा में चले गए। अखिलेश यादव के ‘चवन्नी’ वाले बयान पर जयंत चौधरी की ओर से पलटवार करने को लेकर सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि ‘चवन्नी’ वाला हल्का शब्द जयंत चौधरी की ओर इस्तेमाल किया गया था, किसी और ने नहीं किया था। इस शब्द की जिम्मेदारी उनको लेनी पड़ेगी। वे चौधरी चरण सिंह के पोते हैं, हम सभी लोगों की ओर से चौधरी चरण सिंह का सम्मान किया जाता है, लेकिन चौधरी चरण सिंह ने कभी इस तरह की अवसरवादिता के लिए ये पार्टी नहीं बनाई थी। कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने बाबा रामदेव को लेकर कहा, “रामदेव तो पहले ही सलवार पहनकर भाग गए थे। बृजभूषण शरण सिंह का यह कहना सही है। और बृजभूषण शरण सिंह जी ने जो कहा है, उससे साफ पता चलता है कि भारतीय जनता पार्टी के अपने खेमे में ही काफी बेचैनी है। लोग आपस में ही लड़ रहे हैं। एक दूसरे पर नकली उत्पादों का आरोप लगा रहा है, तो दूसरा पहले वाले पर कुछ और आरोप लगा रहा है। जिन्हें सत्ता में अपना हिस्सा मिल रहा है, वे चुप हैं और जिन्हें हिस्सा नहीं मिल रहा, वे आपस में लड़ रहे हैं, चाहे वह बृजभूषण हों या बाबा रामदेव।
तकनीकी सहयोग में आर्मेनिया का बड़ा साझेदार बनकर उभरा भारतीय सेना: रक्षा मंत्रालय

येरेवन। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि आर्मेनिया अपने रक्षा उपकरणों की खरीद में विविधता लाना चाहता है और इस क्रम में भारत सैन्य-तकनीकी सहयोग में उसका प्रमुख साझेदार बनकर उभरा है। दोनों देशों के बहुपक्षवाद और रणनीतिक स्वायत्तता पर समान विचार हैं। येरेवन में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने मंगलवार को आर्मेनिया के उप विदेश मंत्री मनात्सकान सफार्यान के साथ सार्थक चर्चा की। रक्षा मंत्रालय ने कहा, “उनकी चर्चा भारत और आर्मेनिया के बीच बढ़ती रक्षा साझेदारी पर केंद्रित रही। आर्मेनिया अपनी रक्षा खरीद में विविधता लाने का प्रयास कर रहा है और ऐसे में भारत सैन्य-तकनीकी सहयोग में आर्मेनिया का प्रमुख साझेदार बनकर उभरा है, क्योंकि दोनों देश बहुपक्षवाद और रणनीतिक स्वायत्तता पर समान विचार रखते हैं।” रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने येरेवन में आर्मेनिया के रक्षा उप मंत्री कारेन ब्रुत्यान से भी मुलाकात की और भारत-आर्मेनिया रक्षा सहयोग के पूरे दायरे की समीक्षा की। रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बताया, “रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने 18 अगस्त 2026 को येरेवन में आर्मेनिया के रक्षा उप मंत्री कारेन ब्रुत्यान से मुलाकात की। दोनों पक्षों ने क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण, रक्षा औद्योगिक सहयोग और अनुसंधान एवं विकास सहित भारत-आर्मेनिया रक्षा सहयोग के पूरे दायरे की समीक्षा की। उन्होंने आपसी सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।” दिन में इससे पहले सचिव ने आर्मेनिया की वाजगेन सरगस्यान मिलिट्री अकादमी का दौरा किया और नई दिल्ली के सहयोग से स्थापित आईटी लैब का जायजा लिया। मिलिट्री अकादमी के दौरे के दौरान सिंह को भारत द्वारा आपूर्ति किए गए हथियार प्रणालियों की भी जानकारी दी गई। उन्होंने क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण में बढ़ते सहयोग को रेखांकित किया और आपसी हित के क्षेत्रों में आर्मेनिया का समर्थन करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने मिलिट्री अकादमी के संकाय, अधिकारियों और कर्मचारियों को संबोधित किया और चरित्र निर्माण, निर्णय क्षमता विकसित करने और नेतृत्व कौशल बढ़ाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। मंत्रालय ने कहा, “उन्होंने क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण में बढ़ते भारत-आर्मेनिया सहयोग को रेखांकित किया और आपसी हित के क्षेत्रों में आर्मेनिया की सहायता करने के लिए भारत के समर्थन को दोहराया।” अकादमी में सचिव सिंह ने मिलिट्री अकादमी के प्रमुख मेजर जनरल आर्सेन मांगसर्यान से भी मुलाकात की और क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण के क्षेत्रों में भारत और आर्मेनिया के बीच बढ़ते सहयोग को रेखांकित किया। मंत्रालय के अनुसार, उन्होंने भारत और आर्मेनिया के रक्षा प्रशिक्षण संस्थानों के बीच और अधिक संबंध बनाने को भी प्रोत्साहित किया ताकि रक्षा साझेदारी को और मजबूत किया जा सके।
मध्य नाइजीरिया में रात भर हुए हमले में लगभग 30 लोगों की मौत, स्थानीय मीडिया का दावा

अबुजा। नाइजीरिया के मध्य राज्य प्लेटो में बंदूकधारियों के एक समूह ने रात में एक समुदाय पर हमला किया, जिसमें लगभग 30 लोग मारे गए और कई अन्य घायल हो गए। स्थानीय मीडिया ने मंगलवार को इसका दावा किया। वैनगार्ड अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, यह हमला तब हुआ जब भारी हथियारों से लैस बंदूकधारियों ने मंगू लोकल गवर्नमेंट एरिया के बिनपर समुदाय में घर-घर जाकर लोगों पर हमला किया। यह हमला सोमवार रात और मंगलवार सुबह के बीच हुआ। अखबार ने हमले में बचे लोगों के हवाले से यह जानकारी दी। सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, चश्मदीद डेनियल मूसा ने बताया, “बंदूकधारियों ने सो रहे लोगों के दरवाजे खोले और उनकी हत्या कर दी।” एक अन्य निवासी जॉयस पामा ने फोन पर सिन्हुआ को बताया कि मंगलवार सुबह दफनाने से पहले लगभग 30 शव बरामद किए गए थे। स्थानीय मीडिया ने बताया कि हमले के बाद कुछ निवासी लापता हैं, जबकि समुदाय के नेता लोगों की गिनती कर रहे हैं। अभी तक किसी भी समूह ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। प्लेटो राज्य नाइजीरिया के ‘मिडिल बेल्ट’ में स्थित है, जो देश के ज्यादातर मुस्लिम आबादी वाले उत्तर और ज्यादातर ईसाई आबादी वाले दक्षिण को जोड़ता है। हाल के वर्षों में इस राज्य में बार-बार हिंसा हुई है, जिसमें अक्सर अलग-अलग समुदायों के बीच जमीन और संसाधनों को लेकर विवाद शामिल रहे हैं। पिछले सप्ताह, नाइजीरिया के उत्तर-पश्चिमी राज्य केब्बी में सुरक्षा बलों और संदिग्ध डकैतों के बीच हुई गोलीबारी में कुल 29 लोग मारे गए, जिनमें 10 पुलिसकर्मी और दो आम नागरिक शामिल थे। केब्बी राज्य पुलिस ने एक बयान में कहा कि सोमवार शाम पड़ोसी जमफारा राज्य से आ रहे मोटरसाइकिल सवार बंदूकधारियों को राफिन मकुकु इलाके में सुरक्षा बलों ने रोका, जिसके बाद हुई मुठभेड़ में 17 डकैत मारे गए। बयान में कहा गया है कि कुछ बंदूकधारी गोली लगने के बावजूद घटनास्थल से भाग निकले, जिससे डकैतों के बीच मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका है। बंदूकधारियों द्वारा इस्तेमाल की जा रही चार मोटरसाइकिलें भी बेकार हो गईं। पुलिस ने बताया कि गोलीबारी के दौरान दो सुरक्षाकर्मी भी घायल हुए। उन्होंने मारे गए पुलिसकर्मियों को ‘बहादुर जवान’ बताया, जिन्होंने ‘राज्य के लोगों की रक्षा करते हुए अपनी जान दे दी।’ नाइजीरिया को कई तरह की सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिनमें आतंकवाद, अपहरण, डकैती, सशस्त्र उग्रवाद, छोटे और हल्के हथियारों का प्रसार और किसानों व पशुपालकों के बीच संघर्ष शामिल हैं।
हरियाणा ने पूर्व-अग्निवीरों के लिए नौकरी के अवसर बढ़ाए

चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने पूर्व-अग्निवीरों के लिए रोजगार के मौकों को काफी बढ़ाया है। सरकार ने कुछ खास पदों पर सीधी भर्ती में 20 प्रतिशत हॉरिजॉन्टल रिजर्वेशन दिया है। इसके अलावा, अन्य ग्रुप-सी पदों में 5 प्रतिशत और स्किल स्पेशलाइजेशन से जुड़े ग्रुप-बी पदों में 1 प्रतिशत हॉरिजॉन्टल रिजर्वेशन की सुविधा भी दी गई है। ये निर्देश मंगलवार को मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने जारी किए। 20 प्रतिशत हॉरिजॉन्टल रिजर्वेशन होम डिपार्टमेंट में पुलिस कॉन्स्टेबल, इंडियन रिजर्व बटालियन (आईआरबी) में कॉन्स्टेबल, स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (एसडीआरएफ) में कॉन्स्टेबल, फॉरेस्ट गार्ड, जेल विभाग में वार्डन, माइनिंग गार्ड, वाइल्डलाइफ गार्ड, और फायर ऑपरेटर-कम-ड्राइवर के पदों पर लागू होगा। 20 प्रतिशत रिजर्वेशन के कैटेगरी-वाइज़ बंटवारे में वंचित अनुसूचित जातियों के लिए दो प्रतिशत, अन्य अनुसूचित जातियों के लिए दो प्रतिशत, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए दो प्रतिशत, और अनारक्षित श्रेणी के लिए नौ प्रतिशत का प्रावधान है। इसलिए, दोनों अनुसूचित जाति श्रेणियों को मिलाकर 20 प्रतिशत रिजर्वेशन का चार प्रतिशत हिस्सा मिलता है। 20 प्रतिशत रिजर्वेशन के दायरे में आने वाले पदों को छोड़कर, अन्य ग्रुप सी पदों के लिए राज्य सरकार ने पूर्व-अग्निवीरों के लिए पांच प्रतिशत हॉरिजॉन्टल रिजर्वेशन तय किया है। राज्य सरकार ने उन मामलों के लिए भी प्रक्रिया तय की है जिनमें रिजर्व्ड पॉइंट के लिए कोई उपयुक्त पूर्व-अग्निवीर उपलब्ध नहीं होता है। ऐसी स्थिति में, लागू प्रावधानों के अनुसार, संबंधित वर्टिकल रिजर्वेशन श्रेणी के उपयुक्त उम्मीदवार से खाली पद को भरा जा सकता है। पुलिस कॉन्स्टेबल, फॉरेस्ट गार्ड, जेल वार्डन, माइनिंग गार्ड, वाइल्डलाइफ गार्ड और फायर ऑपरेटर-कम-ड्राइवर के पदों के लिए आवेदन करने वाले पूर्व-अग्निवीरों को फिजिकल स्क्रीनिंग टेस्ट (पीएसटी) से छूट दी जाएगी, जो आम तौर पर इन भर्तियों की पात्रता प्रक्रिया का हिस्सा होता है। राज्य सरकार ने उस मौजूदा प्रावधान को बनाए रखा है जिसके तहत पूर्व-अग्निवीरों को ग्रुप सी पदों के लिए कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (सीईटी) से छूट मिलती है। उन्हें विज्ञापित पदों के लिए अपनी ट्रेनिंग के दौरान सीखी गई स्किल्स से संबंधित टेस्ट से भी छूट दी जाएगी। हालांकि, पूर्व-अग्निवीरों को विज्ञापित पदों के लिए भर्ती एजेंसी द्वारा निर्धारित लिखित परीक्षा में शामिल होना होगा।
पश्चिम बंगाल के मंत्री ने टीएमसी के दौर में चाय बागानों में भ्रष्टाचार का लगाया आरोप

कोलकाता। बंगाल के पर्यटन मंत्री शंकर घोष ने मंगलवार को आरोप लगाया कि तृणमूल के दौर में उत्तरी बंगाल में चाय बागान की कई जमीनें गैर-कानूनी तरीके से बेची गईं और इस गैर-कानूनी बिक्री से मिली रकम तृणमूल पार्टी फंड में गई। उन्होंने कहा कि इस पैसे का इस्तेमाल राज्य में तृणमूल के चुनाव प्रचार में किया गया। सिलीगुड़ी से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक शंकर घोष ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता बनर्जी के दौर में चाय बागान की जमीनों के ट्रांसफर की जांच की मांग की और ‘संस्थागत भ्रष्टाचार’ का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की सरकार ने पहले ही अलग-अलग सरकारी सेक्टरों में भ्रष्टाचार की जांच के लिए रिटायर्ड जस्टिस बिस्वजीत बसु की अध्यक्षता में एक कमीशन बनाया है। पर्यटन मंत्री ने कहा कि वह मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर उनसे अनुरोध करेंगे कि वे कमीशन के जरिए जमीन ट्रांसफर, लीज और कमर्शियल इस्तेमाल से जुड़े सभी मामलों की जांच करवाएं। उन्होंने कहा कि वह जांच करेंगे कि चाय बागान की जमीनों का इस्तेमाल कैसे और किसके फायदे के लिए किया गया। पर्यटन मंत्री ने उत्तरी बंगाल के चाय बागानों में चाय पर्यटन (टी टूरिज्म) को और बढ़ावा देने की योजना की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि वह कई चाय बागान मालिकों और संगठनों के साथ समझौते करके पुराने बंगलों में पर्यटकों के ठहरने की व्यवस्था करेंगे। उन्होंने कहा, “हमारी योजना चाय बागानों के मजदूरों और निवासियों को पर्यटन उद्योग से जोड़कर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की है। इस सिस्टम पर जोर दिया जाएगा, ताकि स्थानीय लोगों और चाय बागान के मजदूरों को पर्यटन से सीधा फायदा हो।” पुराने बंगलों के साथ-साथ, चाय बागानों के अंदर होमस्टे बनाने की भी योजना है। मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य चाय बागानों को सिर्फ चाय उत्पादन वाले इलाकों के बजाय महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों में बदलना है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार संतुलन बनाए रखेगी ताकि पर्यटन के विस्तार से चाय बागानों की मूल पहचान और चाय उद्योग के हितों को कोई नुकसान न पहुंचे। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार ने चाय बागान के इलाके का 15 प्रतिशत हिस्सा कमर्शियल कामों के लिए इस्तेमाल करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
फडणवीस केंद्र में नहीं जाएंगे, मुख्यमंत्री के रूप में ही काम करेंगे : छगन भुजबल

मुंबई। भाजपा की नई टीम, वंदे मातरम विवाद और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के दिल्ली दौरे पर जारी चर्चाओं के बीच मंत्री पंकजा मुंडे और मंत्री छगन भुजबल ने प्रतिक्रिया दी। पंकजा मुंडे ने भाजपा की नई टीम में महिलाओं को महत्वपूर्ण स्थान दिए जाने की सराहना की, जबकि छगन भुजबल ने फडणवीस के दिल्ली दौरे के बाद की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पद छोड़कर केंद्र में जाने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। भाजपा की नई टीम में महिलाओं को स्थान दिए जाने पर पंकजा मुंडे ने पार्टी नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि भाजपा महिलाओं को केवल संख्या के लिहाज से ही नहीं, बल्कि उनकी योग्यता के आधार पर भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देती रही है। प्रधानमंत्री मोदी के पहले मंत्रिपरिषद में सुषमा स्वराज, स्मृति ईरानी समेत कई महिलाओं को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया था। भाजपा की मौजूदा टीम में भी महिलाओं को जिम्मेदारियां दी गई हैं। भाजपा द्वारा महिलाओं को संगठन में महत्वपूर्ण स्थान देना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। पार्टी हमेशा इसी तरह के निर्णय लेती रही है। ‘वंदे मातरम’ पर जारी विवाद को लेकर मुंडे ने कहा कि उन्होंने इससे संबंधित खबरों को विस्तार से नहीं देखा है, इसलिए वह किसी व्यक्ति या बयान पर टिप्पणी नहीं करना चाहतीं। हालांकि, वंदे मातरम के महत्व को लेकर उन्होंने कहा कि यह देश की वंदना है और भारत के गौरव से जुड़ा है। वंदे मातरम जितना गाया जाए, उतना ही बेहतर है और इसके सम्मान में किसी तरह की कमी नहीं होनी चाहिए। महाराष्ट्र में पालक मंत्री की नियुक्ति को लेकर छगन भुजबल ने कहा कि महायुति के बाहर किसी व्यक्ति को मंत्री नहीं बनाया गया है। जिन नेताओं को मंत्री की जिम्मेदारी दी गई है, वे महायुति के घटक दलों से हैं और सभी मिलकर सरकार चलाने का काम कर रहे हैं। उन्हें मंत्री की नियुक्ति को लेकर किसी प्रकार की आपत्ति नहीं है। इसमें पार्टी को फायदा या नुकसान का सवाल नहीं होना चाहिए। यह पद किसी राजनीतिक लाभ-हानि के लिए नहीं बनाया जाता। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के दिल्ली दौरे और प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद उनके केंद्र की राजनीति में जाने की अटकलों पर भुजबल ने कहा कि फडणवीस कई बार स्पष्ट कर चुके हैं कि वह मुख्यमंत्री के रूप में ही काम करते रहेंगे। मीडिया में इस बात को लेकर चर्चा चल रही है कि फडणवीस दिल्ली जाएंगे या नहीं जाएंगे, लेकिन उन्हें ऐसी कोई जानकारी नहीं है। इस मामले पर शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत के बयान पर छगन भुजबल ने तंज भरे लहजे में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष का कोई नेता मुख्यमंत्री फडणवीस के बारे में इतनी अच्छी बात कह रहा है तो यह उनके लिए गर्व की बात है। पुणे में सड़क पर गड्ढे के कारण हुई मौत के मामले में छगन भुजबल ने कहा कि सड़क निर्माण और मरम्मत के दौरान नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसियों और ठेकेदारों की होती है। उन्होंने नाशिक की सड़कों और वहां मौजूद गड्ढों का जिक्र करते हुए कहा कि अलग-अलग जिलों के गड्ढों की तुलना नहीं की जानी चाहिए। जहां बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य चल रहे हैं, वहां काम के दौरान कुछ असुविधाएं हो सकती हैं, लेकिन इससे लोगों की जान जोखिम में नहीं पड़नी चाहिए। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण या अन्य काम के दौरान दुर्घटनाएं होती हैं और लोगों की मौत होती है, तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित काम करने वाली एजेंसियों की होनी चाहिए। इसमें नगर निगम, संबंधित प्राधिकरण, अधिकारी और ठेकेदार सभी की जवाबदेही तय होनी चाहिए। यदि सड़क के एक हिस्से में काम चल रहा है तो दूसरी तरफ वाहनों की आवाजाही के लिए सड़क पूरी तरह सुरक्षित और सुगम होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ठेकेदार की जिम्मेदारी है कि जिस तरफ काम नहीं हो रहा है, उस तरफ की सड़क को अच्छी स्थिति में रखा जाए, ताकि वाहन आसानी और सुरक्षित तरीके से निकल सकें। सड़क के गड्ढों को भरना भी वैज्ञानिक तरीके से किया जाना चाहिए। केवल गड्ढे में सामग्री डाल देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सड़क की गुणवत्ता और मजबूती सुनिश्चित करना जरूरी है।