‘मेरे हाथ साफ हैं’, बेटी वीणा के मामले में पिनराई विजयन ने ईडी को दिया जवाब

त्रिशूर। केरल में विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने शनिवार को अपनी बेटी वीना विजयन और खुद का पुरजोर बचाव करते हुए कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि न तो वे और न ही उनके परिवार का कोई सदस्य हवाला लेन-देन में शामिल रहा है। उन्होंने यह बात अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही, जो इस हफ्ते की शुरुआत में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा वीना से जुड़ी जांच के सिलसिले में हवाला लेन-देन का आरोप लगाते हुए बयान जारी करने के बाद हुई थी। विजयन ने अपने दोनों हाथ ऊपर उठाते हुए कहा, “मुझे पूरा भरोसा है कि मेरे परिवार में से कोई भी, जिसमें मैं भी शामिल हूं, किसी भी तरह के हवाला लेन-देन में शामिल नहीं रहा है।” विजयन ने ईडी की कार्यवाही में अपना नाम घसीटने की कोशिशों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। उन्होंने इस मामले में ईडी के सार्वजनिक प्रेस बयान जारी करने के फैसले पर सवाल उठाए खासकर इसमें उन्हें “पी. विजयन पूर्व मुख्यमंत्री” बताए जाने पर। उन्होंने पूछा, “आम तौर पर ऐसे मामलों में इस तरह के प्रेस बयान जारी नहीं किए जाते। उन्हें वेबसाइट पर डाला जाता है। मेरा नाम इस तरह क्यों लिया गया?” विजयन के अनुसार, उनका जिक्र इसलिए किया गया था, ताकि यह धारणा बनाई जा सके कि वे भी इन आरोपों से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा, “यह इसलिए किया गया था, ताकि यह देखा जा सके कि मेरा नाम भी कैसे शामिल किया जा सकता है।” विपक्ष के नेता ने याद दिलाया कि 1996 में उन्हें सीबीआई जांच का सामना करना पड़ा था, जब एक व्यक्ति एजेंसी के सामने पेश हुआ और दावा किया कि उसने उन्हें 1 या 2 करोड़ रुपये दिए थे। कथित तौर पर ऐसा इसलिए किया गया, क्योंकि उसे उम्मीद थी कि विजयन अगले बिजली मंत्री बनेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने जांच में पूरा सहयोग किया था और बाद में उन्हें बरी कर दिया गया। वीणा का बचाव करते हुए विजयन ने कहा कि उन्होंने शुरू से ही जांच में सहयोग किया है और आगे भी ऐसा करती रहेंगी। उन्होंने कहा, “वीणा ने शुरू से ही जांच में सहयोग किया है और आगे भी ऐसा ही करेंगी।” विपक्ष के नेता ने जोर देकर कहा कि उन्हें जांच एजेंसी से कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन, उन्होंने कहा कि वीणा का उनकी बेटी होना इस मामले को एक अलग पहलू देता है। विजयन ने मलयाला मनोरमा मीडिया संगठन पर बार-बार उन्हें निशाना बनाने और मनगढ़ंत खबरें गढ़ने का भी आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ बेबुनियाद खबरें छापी जा रही हैं और सवाल उठाया कि ऐसा अभियान कब तक चल सकता है। उन्होंने कहा, “अगर मामला पिनराई विजयन के खिलाफ हो, तो उन्हें लगता है कि कुछ भी लिखा जा सकता है।” उन्होंने आरोप लगाया कि उनके और उनके परिवार के बारे में विवाद पैदा करने की जान-बूझकर कोशिश की जा रही है। विजयन की ये बातें ईडी के हालिया सार्वजनिक बयान पर उनकी पहली सीधी प्रतिक्रिया हैं। उम्मीद है कि इससे एजेंसी की जांच के नतीजों और उनकी बेटी से जुड़े आरोपों को लेकर चल रही राजनीतिक लड़ाई और तेज हो जाएगी।

आईआईटी दिल्ली के छात्र ने छठी मंजिल से कूदकर की आत्महत्या, जांच में जुटी पुलिस

नई दिल्ली। दिल्ली के आईआईटी कैंपस में एक छात्र ने कथित तौर पर छठी मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। इस घटना से पूरे परिसर में हड़कंप मच गया। आत्महत्या के कारणों का फिलहाल पता नहीं चल पाया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। छात्र की पहचान ऋषिकेश कुमार के रूप में हुई है, जो आईआईटी दिल्ली से एमएससी (फिजिक्स) की पढ़ाई कर रहा है। वह सेकेंड ईयर का छात्र था। शुरुआती जानकारी के अनुसार, ऋषिकेश कुमार ने कथित तौर पर आईआईटी दिल्ली के शैक्षणिक परिसर में लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स की छठी मंजिल से छलांग लगाई। पुलिस ने बताया कि बताया गया कि सुबह लगभग 8.33 बजे किशनगढ़ थाने को एक पीसीआर कॉल मिली कि आईआईटी दिल्ली कैंपस में एक छात्र इमारत से कूद गया है। पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची और घायल व्यक्ति को आईआईटी दिल्ली कैंपस के अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस के अनुसार, छात्र ऋषिकेश सुबह लगभग 8 बजे वह मुख्य गेट से आईआईटी दिल्ली कैंपस में दाखिल हुआ था। इसके बाद वह लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स गया, लिफ्ट से छठी मंजिल पर पहुंचा और इमारत के सामने की तरफ से (लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स की ओर) कूद गया। दिल्ली पुलिस ने बताया कि छात्र ऋषिकेश शालीमार स्थित शिवालिक हॉस्टल में रहता था। वह अपनी मां के साथ कैंपस के बाहर रह रहा था। जांच और सबूत इकट्ठा करने के लिए क्राइम टीम और एफएसएल टीम को मौके पर बुलाया गया। पुलिस के अनुसार, गिरने से लगी चोटों के अलावा शरीर पर चोट का कोई और स्पष्ट निशान नहीं मिला है। कोई सुसाइड नोट भी नहीं मिला है। मृतक की जेब से एक मोबाइल फोन मिला है, जिसकी जांच तय प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी। पुलिस संस्थान से काउंसलिंग रिकॉर्ड और अन्य जरूरी जानकारी इकट्ठा कर रही है। साथ ही, तथ्यों की पुष्टि की जा रही है।

नवनिर्वाचित राष्ट्रपति मिर्जा फखरुल ने शहीदों को किया नमन, शहीद स्मारक पहुंचकर दी श्रद्धांजलि

ढाका। बांग्लादेश के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने बांग्लादेश के 23वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेने के बाद शन‍िवार को सावर स्थित राष्ट्रीय शहीद स्मारक पहुंचकर मुक्ति संग्राम के शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उन्हें तीनों सेनाओं की टुकड़ी ने राजकीय सलामी दी। बांग्‍लादेश की समाचार एजेंसी यूएनबी की र‍िपोर्ट के अनुसार, मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने शुक्रवार शाम बांग्लादेश के 23वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। शुक्रवार शाम बंगभवन के दरबार हॉल में शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान कार्यवाहक अध्यक्ष बैरिस्टर कैसर कमाल ने शाम 7:37 बजे राष्ट्रपति को पद की शपथ दिलाई। बांग्लादेश के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ने शन‍िवार सुबह 10 बजे सावर स्थित राष्ट्रीय शहीद स्मारक पर जाकर मुक्ति संग्राम के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। समारोह के दौरान तीनों सेनाओं की एक सुसज्जित टुकड़ी ने उन्हें राजकीय सलामी दी, जबकि बिगुल पर ‘लास्ट पोस्ट’ धुन बजाई गई। इस अवसर पर मुक्ति संग्राम मामलों के राज्य मंत्री इशराक हुसैन, सेना प्रमुख जनरल वाकर-उज-जमान, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल हसन महमूद खान, रियर एडमिरल खोंडकार मिसबह उल अजीम तथा अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मौजूद रहे। यूएनबी के अनुसार, इससे पहले स्मारक पहुंचने पर राष्ट्रपति ने राज्य मंत्री, तीनों सेनाओं के प्रमुखों और वहां उपस्थित अन्य अधिकारियों से मुलाकात कर उनका अभिवादन स्वीकार किया। औपचारिक समारोह के बाद राष्ट्रपति मिर्जा फखरुल ने आगंतुक पुस्तिका में अपने हस्ताक्षर किए और स्मारक परिसर में एक पौधा भी लगाया। इसके बाद वह वहां से रवाना हो गए। बीएनपी (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी) के उम्मीदवार मिर्जा फखरुल राष्ट्रपति चुनाव में अपने एकमात्र प्रतिद्वंद्वी, बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11-दलीय विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवार कर्नल (सेवानिवृत्त) ओली अहमद को हराकर राष्ट्रपति निर्वाचित हुए। यह चुनाव गुरुवार को आयोजित किया गया था। ढाका ट्रिब्यून के अनुसार, 78 वर्षीय मिर्जा फखरुल को गुरुवार को हुए राष्ट्रपति चुनाव में संसद सदस्यों ने देश का 23वां राष्ट्रपति चुना। उन्हें 255 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी और 11 दलों के विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवार सेवानिवृत्त कर्नल ओली अहमद को 88 वोट मिले। कुल 349 सांसद मतदान के पात्र थे, जिनमें से 343 ने मतदान किया। यह बांग्लादेश में 35 वर्षों बाद पहला राष्ट्रपति चुनाव था, जिसमें एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में थे। इससे पहले 1991 में राष्ट्रपति पद के लिए मुकाबला हुआ था। उसके बाद लगातार राष्ट्रपति निर्विरोध चुने जाते रहे। फखरुल का राजनीतिक सफर पांच दशक से अधिक पुराना है। राजनीति में आने से पहले वह शिक्षक और वामपंथी विचारों से प्रभावित छात्र कार्यकर्ता रहे। शेख हसीना के लंबे शासनकाल के दौरान वह विपक्ष के प्रमुख चेहरों में रहे और लोकतांत्रिक अधिकारों तथा निष्पक्ष चुनाव की मांग को लेकर बीएनपी के आंदोलनों में अग्रिम पंक्ति में दिखाई दिए।

पेरिस में भव्य बीएपीएस हिंदू मंदिर तैयार, सितंबर को खुलेंगे कपाट

पेरिस। फ्रांस की राजधानी पेरिस के उपनगर ‘बूसी-सेंट-जॉर्जेस’ में भव्य बीएपीएस स्वामीनारायण हिंदू मंदिर अब अपने ऐतिहासिक उद्घाटन के समीप पहुंच गया है। मंदिर के शिखरों और केंद्रीय गुंबद पर कलश एवं ध्वजा दंड पूजन जैसी पारंपरिक वैदिक रस्में पूरी की जा रही हैं। मंदिर परिसर में साधु-संतों और श्रद्धालुओं ने शांति, सद्भाव और जनकल्याण के लिए वैदिक मंत्रोच्चार और प्रार्थनाएं भी कर रहे हैं। कुछ ऐसे परिवार भी हैं जो अपने बच्चों और नाती-पोतों के साथ भव्य उत्सव के साक्षी बनेंगे। बीएपीएस की आधिकारिक साइट के अनुसार, इस मंदिर का उद्घाटन 2 से 14 सितंबर 2026 तक आयोजित होने वाले 13 दिवसीय ‘फेस्टिवल ऑफ कल्चर’ यानी ‘पेरिस मंदिर महोत्सव’ के दौरान किया जाएगा। यह आयोजन बीएपीएस स्वामीनारायण हिंदू मंदिर के उद्घाटन को समर्पित होगा और इसमें दुनिया के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु और शुभचिंतक शामिल होंगे। महोत्सव के दौरान जल यात्रा, पेरिस में नगर यात्रा, बूसी-सेंट-जॉर्जेस में पालखी यात्रा, प्रतिदिन वैदिक महायज्ञ, मूर्ति-प्रतिष्ठा समारोह, समर्पण सभा और कीर्तन आराधना जैसे अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। बीएपीएस के मुताबिक, पेरिस का यह मंदिर फ्रांस का पहला पारंपरिक हिंदू मंदिर है। इसका निर्माण बूसी-सेंट-जॉर्जेस स्थित एस्पलेनैड डेस रिलिजन्स एट डेस कल्चर्स में किया गया है, जहां विभिन्न धर्मों के उपासना स्थल मौजूद हैं। इस स्थान को धार्मिक विविधता और अंतरधार्मिक सद्भाव के प्रतीक के रूप में विकसित किया गया है। मंदिर की वास्तुकला में सदियों पुरानी भारतीय शिल्प परंपरा का इस्तेमाल किया गया है। मंदिर के पत्थरों को भारत में तराशकर तैयार किया गया और फिर उन्हें फ्रांस ले जाकर भारतीय शिल्पकारों तथा फ्रांसीसी विशेषज्ञों की मदद से मंदिर में स्थापित किया गया। इस मंदिर की नींव रखने का ऐतिहासिक समारोह सितंबर 2022 में हुआ था। इसके बाद जून 2024 में मंदिर की आधारभूत संरचना के निर्माण का महत्वपूर्ण चरण शुरू हुआ। बीएपीएस पेरिस की सोशल मीडिया पोस्ट में महंत स्वामी महाराज से लेकर वरिष्ठ संतों और दुनियाभर के श्रद्धालुओं के एक स्वर में “पेरिस मंदिर महोत्सव नी जय!” के उद्घोष का उल्लेख किया गया है। इसका भाव मंदिर के उद्घाटन को लेकर सामूहिक उत्साह और आध्यात्मिक एकता से जुड़ा है। इन पोस्ट्स में एक परिवार ऐसा भी है जिसकी तीन पीढ़ियां मिलकर सपना साकार होते एक साथ देखेंगी। पहली पीढ़ी 80 के दशक में पहुंची। गुजराती मूल के परिवार के मुताबिक वो दौर ऐसा था जब एक-दो ही हिंदू परिवार रहते थे। फिर दूसरी पीढ़ी ने वो सहा जो विदेशी जमीन पर अक्सर अनजाने लोगों के साथ होता है। लोगों को हिंदू धर्म के बारे में बताते थे तो वो हंसते थे या मजाक उड़ाते थे लेकिन अपने बड़ों से जो सीखा उसे छोड़ा नहीं। हिंदू संस्कृति, संस्कारों और अध्यात्म की मशाल तीसरी पीढ़ी तक पहुंची। ऐसी पीढ़ी जो फ्रेंच तो बोलती है लेकिन विशुद्ध हिंदू रंग में रंगी है। बच्चे बोलते हैं कि अपने बड़ों के साथ सत्संग में जाते थे, अपने धर्म को समझते थे। अब विश्वास नहीं हो रहा कि यहां भी हमारा मंदिर होगा, वाकई हम खुद को भाग्यवान मानते हैं। बच्चे खुश हैं, कहते हैं, “हमारे दोस्त, जब अपनी आंखों के सामने भव्य मंदिर बनते देख रहे हैं तो हमसे हमारे धर्म के बारे में जानने की कोशिश करते हैं और ये हमें बहुत अच्छा लगता है।” मंदिर महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहेगा। बीएपीएस ने इसे भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता, कला और विभिन्न समुदायों के बीच सद्भाव को सामने लाने वाले वैश्विक सांस्कृतिक उत्सव के रूप में प्रस्तुत किया है। पेरिस जैसे वैश्विक सांस्कृतिक केंद्र में भारतीय पारंपरिक वास्तुकला और हिंदू आध्यात्मिक परंपरा का यह नया केंद्र निश्चित तौर पर भारतीय समुदाय के लिए विशेष महत्व रखता है। सितंबर में होने वाला मंदिर महोत्सव इस लंबे निर्माण सफर के समापन और एक नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक बनेगा।

बिहार : नीतीश की विरासत पर उपेंद्र कुशवाहा का दावा, जदयू बोला- निशांत ही संभालेंगे नेतृत्व

पटना। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने पूर्व मुख्यमंत्री और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की इच्छा जताकर बिहार की सियासत में नई बहस छेड़ दी है। राजगीर में आयोजित आरएलएम के विमर्श शिविर में कुशवाहा ने नीतीश कुमार के लंबे राजनीतिक कार्यकाल की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनकी पार्टी इस विरासत को संभालने के लिए तैयार है। कुशवाहा ने कहा कि नीतीश कुमार ने लंबे समय तक बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर बेहतर सेवा दी और अब उन्होंने खुद राजनीति से विश्राम लेने का निर्णय लिया है। उनके सक्रिय राजनीति से पीछे हटने के बाद बिहार की एक बड़ी जमात के सामने यह सवाल है कि उनकी राजनीतिक विरासत को आगे कौन बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि इस विरासत पर दावा करने वाले कई लोग सामने आएंगे, लेकिन राष्ट्रीय लोक मोर्चा का मानना है कि बिहार की जनता के एक बड़े वर्ग की अपेक्षा है कि यह जिम्मेदारी आरएलएम को दी जानी चाहिए। कुशवाहा ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी का दावा है और भविष्य में वह इसमें कितनी सफल होगी, यह समय बताएगा। कुशवाहा ने अपने संबोधन में कहा कि नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री के रूप में बिहार की लंबे समय तक सेवा की और अब उन्होंने स्वयं फुर्सत लेने का निर्णय किया है। उनके अनुसार, नीतीश के राजनीतिक सक्रियता से हटने के बाद उनकी विरासत को लेकर स्वाभाविक रूप से चर्चा शुरू हुई है और कई राजनीतिक दल इस भूमिका को निभाने का दावा करेंगे। कुशवाहा के इस बयान पर जदयू ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बिहार सरकार के मंत्री और जदयू के वरिष्ठ नेता मदन सहनी ने इसे कुशवाहा की व्यक्तिगत इच्छा करार दिया। उन्होंने कहा कि जदयू में नेतृत्व और राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए सक्षम नेताओं की कोई कमी नहीं है। मदन सहनी ने कहा कि जदयू के भीतर यह स्पष्ट है कि नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की क्षमता निशांत कुमार में है। उन्होंने कहा कि पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, विजय चौधरी समेत तमाम वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता इस दिशा में अपना रुख स्पष्ट कर चुके हैं। उन्होंने कुशवाहा पर निशाना साधते हुए कहा कि जदयू को किसी बाहरी व्यक्ति या दूसरे दल के नेता की जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक, पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर स्थिति स्पष्ट है और निशांत कुमार पार्टी की जिम्मेदारी संभालने में पूरी तरह सक्षम हैं। कुशवाहा के दावे और जदयू की प्रतिक्रिया ने बिहार में नीतीश कुमार के बाद नेतृत्व और राजनीतिक विरासत को लेकर नई सियासी चर्चा को जन्म दे दिया है।

पैसे ही नहीं हैं हमारे पास’, भीड़ जुटाने के आरोप पर कांग्रेस का भाजपा पर पलटवार

पुणे। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के पुणे में शनिवार को होने वाले ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर बयानबाजी का दौर लगातार जारी है। इस कार्यक्रम को लेकर भाजपा द्वारा पैसे देकर भीड़ जुटाने के आरोपों पर कांग्रेस नेताओं ने पलटवार किया है। कांग्रेस नेता यशोमती ठाकुर ने भाजपा के पैसे देकर भीड़ इकट्ठा करने के आरोप पर पलटवार करते हुए कहा, “हमारे पास पैसे ही नहीं हैं। भाजपा के अकाउंट देखो और हमारे अकाउंट देखो। हम कहां से देंगे पैसे? पैसे ही नहीं हैं हमारे पास। कांग्रेस एक दम उत्साह में है, बच्चे उत्साह में है।” कांग्रेस विधायक विश्वजीत कदम ने कहा कि यह कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं के साथ सीधा संवाद है। उन्होंने कहा, “100 प्रतिशत पक्का है। यह कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है। यह युवाओं के साथ बातचीत है। भाजपा एक साधारण बातचीत से क्यों डरती है? उन्हें ही इसका मतलब समझना चाहिए। 30,000 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। तो 30,000 का आंकड़ा क्या होगा?” वहीं कांग्रेस नेता बालासाहेब थोरात ने दावा किया कि कार्यक्रम को लेकर छात्रों में जबरदस्त उत्साह है। उन्होंने कहा, “माहौल ये है कि पंडाल का सवाल नहीं है, ये मैदान का सवाल नहीं है, पूरा पुणे लोगों से भर रहा है।” कांग्रेस नेता सतीश उर्फ बंटी पाटिल ने कहा, “यह छत्रपति शिवाजी महाराज जी की भूमि है, सावित्रीबाई फुले जी की भूमि है और इसमें महिलाओं के लिए, लड़कियों के लिए एक कार्यक्रम हो रहा है, इसके लिए हमें, महाराष्ट्रवासियों को बहुत खुशी है कि आज पूरे देश में युवा वर्ग की जो आवाज है, वो सिर्फ राहुल गांधी हैं। ये पिछले अनेक सालों से सिद्ध हुआ है और ‘छात्रों की गूंज’ के माध्यम से, उनकी समस्या पूरे देश के सामने लाकर उसको सुलझाने की कोशिश करेंगे।

कनाडा का जवाब, ‘अमेरिकी टैरिफ के बदले डॉलर फॉर डॉलर शुल्क पर होगा काम’

ओटावा। कनाडा की अमेरिका के साथ व्यापार समझौते की समयसीमा शुक्रवार आधी रात तक थी। ये बिना किसी अंतिम नतीजे पर पहुंचे समाप्त हो गई। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिकी टैरिफ का “डॉलर फॉर डॉलर” जवाब देने का ऐलान किया है। कार्नी ने इसे लेकर बयान जारी किया। विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ये बयान पोस्ट किया गया। उन्होंने कहा, ” कनाडाई अधिकारियों ने बातचीत में पूरी ईमानदारी से काम किया, लेकिन अंतिम समय में अमेरिका की ओर से प्रस्तावित शर्तों में किए गए बदलाव अनुचित और आर्थिक रूप से नुकसानदेह थे। इन बदलावों से किसी भी संभावित समझौते की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा हो गया।” अमेरिका की ओर से लगाए जा रहे 50 प्रतिशत टैरिफ का जिक्र करते हुए कार्नी ने कहा कि कनाडा अपने श्रमिकों और कारोबारों की सुरक्षा के लिए उतने ही मूल्य का जवाबी शुल्क लगाएगा। अमेरिकी टैरिफ से कनाडा के करीब 20 अरब डॉलर मूल्य के उत्पाद प्रभावित होंगे। इनमें हॉकी स्टिक से लेकर चिकित्सा उपकरणों तक कई तरह के सामान शामिल हैं। दोनों देशों के बीच पिछले साल करीब 880 अरब डॉलर का वस्तुओं और सेवाओं का कारोबार हुआ था। वहीं, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने बातचीत विफल होने को कनाडा के लिए “गंवाया हुआ अवसर” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि कनाडा ने पहले जिन प्रतिबद्धताओं पर सहमति जताई थी, उनसे पीछे हटते हुए नई मांगें रखीं, जिससे दोनों पक्षों के बीच बना संतुलन बिगड़ गया। कनाडा ने स्टील, एल्युमीनियम, वाहन और लकड़ी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में अमेरिकी रियायतों की मांग की थी, लेकिन ट्रंप प्रशासन इन पर सहमत नहीं हुआ। इस टकराव का आर्थिक असर भले सीमित हो, लेकिन इसका राजनीतिक प्रभाव बड़ा माना जा रहा है। इससे अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको के बीच उत्तर अमेरिकी व्यापार समझौते के भविष्य को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। कनाडा के ओंटारियो प्रांत के प्रीमियर डग फोर्ड ने कार्नी के फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि कनाडा को अमेरिकी कदम का “टैरिफ के बदले टैरिफ, डॉलर के बदले डॉलर” जवाब देना चाहिए। कनाडाई चैंबर ऑफ कॉमर्स की अध्यक्ष कैंडेसा लांग ने अमेरिकी टैरिफ को “उत्तर अमेरिकी प्रतिस्पर्धा पर बड़ा प्रहार” बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे अमेरिकी उपभोक्ताओं की लागत बढ़ेगी और कनाडा में ग्राहक, निवेश तथा छोटे कारोबार प्रभावित होंगे।

देवदत्त पड्डिकल ने तीसरे नंबर के लिए अपनी दावेदारी मजबूत कर दी है: मोहम्मद कैफ

नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका के बीच रविवार से कोलंबो में टेस्ट सीरीज के दूसरे और आखिरी मैच की शुरुआत हो रही है। पहला टेस्ट जीत सीरीज में 1-0 से आगे चल रही टीम इंडिया की कोशिश दूसरा टेस्ट जीत क्लीन स्वीप करने की होगी। वहीं, श्रीलंका जीत दर्ज कर सीरीज में बराबरी की कोशिश करेगी। पहले टेस्ट में भारत की तरफ से तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए बाएं हाथ के बल्लेबाज देवदत्त पड्डिकल ने पहली पारी में शतक लगाया था। पड्डिकल ने 167 रन की पारी खेली थी, जो भारत के लिए निर्णायक साबित हुई। पड्डिकल ने दूसरी पारी में भी 44 रन बनाए थे और भारत की 165 रन की जीत के बाद उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया था। भारतीय टीम के पूर्व बल्लेबाज और अपने क्षेत्ररक्षण के लिए मशहूर रहे मोहम्मद कैफ का मानना है कि शतकीय पारी के बाद टेस्ट में तीसरे नंबर के बल्लेबाज के रूप में देवदत्त पड्डिकल का पलड़ा भारी हो गया है। कैफ ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा, “साई सुदर्शन को मौका दिया गया और उन्होंने हर तीसरी या चौथी पारी में अर्धशतक लगाया। लेकिन दूसरा खिलाड़ी (पड्डिकल) 160 रन बना रहा है और मैन ऑफ द मैच बन रहा है। इसलिए, एक हर तीसरी पारी में 50 रन बनाता है, और दूसरा असरदार पारी खेलता है। शुभमन गिल की कप्तानी में मदद करने वाले और भारत की डब्ल्यूटीसी उम्मीदों को जिंदा रखने वाले खिलाड़ी की अहमियत ज्यादा मायने रखेगी। पड्डिकल ने अपनी दावेदारी मजबूती से पेश की है।” चेतेश्वर पुजारा के संन्यास के बाद भारतीय टीम टेस्ट में तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए बेहतर विकल्प की तलाश में है। साई सुदर्शन और देवदत्त पड्डिकल इस जगह को भरने के लिए काफी आगे नजर आ रहे हैं। पड्डिकल के कोलंबो में होने वाले दूसरे टेस्ट के प्रदर्शन पर उनके आगे का भविष्य निर्भर करेगा।

फिलीपींस की राजधानी में बाढ़ के बाद बीमारी का संकट, तेजी से बढ़ रहा लेप्टोस्पायरोसिस

मनीला। फिलीपींस की राजधानी में संक्रामक रोगों के एक बड़े अस्पताल में लेप्टोस्पायरोसिस के मामले 50 तक पहुंच गए हैं और वहीं दो लोगों की मौत हो गई है। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार इसकी वजह मूसलाधार बारिश और उसके बाद आई व्यापक बाढ़ है। समाचार एजेंसी सिंहुआ ने स्थानीय मीडिया टीवी5 के हवाले से बताया कि स्वास्थ्य विभाग (डीओएच) द्वारा संचालित संक्रामक रोगों के लिए राष्ट्रीय रेफरल केंद्र, सैन लाजारो अस्पताल ने लेप्टोस्पायरोसिस के मरीजों के लिए एक एक्सप्रेस लेन खोली है। डीओएच के अनुसार, अब तक देश भर से 3,760 मामले सामने आए और आशंका है कि गुजरते दिनों के साथ ये संख्या और बढ़ेगी। स्थानीय मीडिया की शुक्रवार की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य फिलीपींस के इलोइलो प्रांत में पिछले आठ महीनों में लेप्टोस्पायरोसिस से करीब 10 लोगों की मौत हुई है। इलोइलो प्रांत में मरने वालों की संख्या 2025 की इसी अवधि में इस बीमारी से मरने वाले लोगों की संख्या से दोगुनी है। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, लोगों से आग्रह किया गया है कि अगर उन्हें संक्रमित होने का अंदेशा है तो प्रोफिलैक्सिस या बचाव वाली एंटीबायोटिक्स तुरंत लें। इस बीच, नागरिक सुरक्षा कार्यालय ने शुक्रवार को बताया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून और उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के कारण कुल 88 शहरों और नगर पालिकाओं ने आपदा की स्थिति घोषित की गई है। सबसे बुरी तरह प्रभावित प्रांतों में सेंट्रल लुजोन के पम्पांगा, बाटान और बुलाकान शामिल हैं; यह देश का सबसे बड़ा मैदानी इलाका है जो लुजोन के मुख्य द्वीप पर मनीला के उत्तर में स्थित है। पम्पांगा प्रांत में, आधे से ज्यादा गांव अभी भी जलमग्न हैं, जिसके लगभग 10 लाख (1 मिलियन) लोगों पर इसका असर पड़ा है और कृषि को लगभग 1.4 बिलियन पेसो (लगभग 22.68 मिलियन अमेरिकी डॉलर) का नुकसान हुआ है। बाटान प्रांत ने आपदा की स्थिति घोषित की है और लगभग 8,000 निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। बुलाकान प्रांत में, बाढ़ से हुए नुकसान के कारण सांता मारिया का एक पुल बंद रहा। ‘आपदा की स्थिति’ फिलीपींस सरकार द्वारा जारी की गई एक आधिकारिक आपातकालीन घोषणा है, जो तब की जाती है जब कोई गंभीर प्राकृतिक आपदा, महामारी या बड़ा संकट किसी शहर, प्रांत या पूरे देश को अपनी चपेट में लेता है।

केके की आवाज में बसता था हर दिल का अफसाना, कभी अपने प्यार को पाने के लिए की थी सेल्समैन की नौकरी

नई दिल्ली। “कोई कहे, कहता रहे कितना भी हमको दीवाना, हम लोगों की ठोकर में है ये जमाना, जब साज है, आवाज है, फिर किसलिए हिचकिचाना।” यह वो आवाज थी जो बस दिल में उतर जाती थी। यह आवाज कॉलेज के गलियारों में गूंजती थी। यह आवाज कानों में ईयरफोन लगाकर सुनी गई पहली मोहब्बत की भी थी। बात हो रही है कि दिवंगत गायक केके की। केके का पूरा नाम कृष्ण कुमार कुन्नथ था। 23 अगस्त 1968 को केके दिल्ली में जन्मे, लेकिन परिवार मलयाली था। केके ने सेंट मैरी स्कूल से स्कूल की पढ़ाई पूरी की और किरोड़ीमल कॉलेज से कॉमर्स में ग्रेजुएशन पूरी की। उन्होंने दो साल की उम्र से ही गाना शुरू कर दिया था और वे अपने कॉलेज के रॉक बैंड का हिस्सा भी थे। उन्हें यूटीवी के लिए सिंगर लेस्ली लुईस का एक मिनट का जिंगल गाने का मौका मिला, जिससे उनके करियर की शुरुआत हुई। किशोर कुमार की गायकी और आरडी बर्मन का संगीत केके पर बड़ा गहरा असर डालता था, लेकिन बॉलीवुड में गायक बनना इतना आसान नहीं होता है। केके ने जिंगल्स बनाने शुरू किए। बॉलीवुड में आने से पहले केके ने अनेकों जिंगल्स बनाए। इसके बाद उन्होंने मुंबई का रुख किया। उनकी जिंदगी का एक किस्सा यह बताया जाता है कि ग्रेजुएशन के बाद छह-आठ महीने केके ने सेल्समैन की नौकरी भी की। यह नौकरी उन्होंने इसलिए की कि उन्हें शादी करनी थी। एक लड़की से उन्हें प्यार था और उसके परिवार को दिखाना था कि लड़का नौकरी करता है। हालांकि, छह-आठ महीने बाद केके समझ चुके थे कि उनकी नियति सेल्समैन बने रहना नहीं था। उनकी मंजिल कुछ और थी जिसको तलाशने के लिए केके ने खुद को आजमाना शुरू कर दिया। 1999 में जब भारतीय क्रिकेट टीम वर्ल्ड कप खेलने जा रही थी, तब केके ने टीम के लिए ‘जोश ऑफ इंडिया’ गाना गाया। इस गाने ने टीम इंडिया में खूब जोश भरा। बिना किसी ट्रेनिंग और हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में बिना किसी गॉडफादर के, युवा केके ने 1990 के दशक की शुरुआत में म्यूजिक कंपोजरों के दरवाजे खटखटाना शुरू कर दिया था। “तड़प तड़प के इस दिल से आह निकलती रही, मुझको सजा दी प्यार की, ऐसा क्या गुनाह किया, तो लुट गए हां लुट गए, तो लुट गए हम तेरी मोहब्बत में” बॉलीवुड फिल्म के लिए गाने का उनका सपना तब सच हुआ, जब विशाल भारद्वाज ने उन्हें संपूर्ण सिंह गुलजार की फिल्म ‘माचिस’ (1996) में “छोड़ आए हम” गाना गाने के लिए कहा। लेकिन उन्हें बड़ी पहचान संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ (1999) के बेहद लोकप्रिय गाने “तड़प तड़प” से मिली। केके की खासियत उनके गानों का ताजापन और जोश था। जहां बॉलीवुड एक के बाद एक रोमांटिक गाने बना रहा था, वहीं केके के शुरुआती हिट गाने दोस्ती और जिंदगी के उतार-चढ़ाव व पुरानी यादों के खट्टे-मीठे एहसास के बारे में थे। चाहें “छोड़ आए हम वो गलियां, जहां तेरे पैरों के कंवल गिरा करते थे, हंसे तो दो गालों में भंवर पड़ा करते थे।” या “सच कह रहा है दीवाना दिल, दिल ना किसी से लगाना। झूठे हैं यार के वादे सारे, झूठी हैं प्यार की कस्में।” बॉलीवुड में केके की आवाज ने ऐसा जादू किया कि उनके पास लंबी फेहरिस्त बनती चली गई। वे लोगों के दिलों में भी बस चुके थे। केके की आवाज में एक अलग कशिश थी। उन्होंने हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, मराठी, बंगाली, असमिया और गुजराती भाषाओं की फिल्मों में गाने रिकॉर्ड किए। केके कोलकाता में लाइव परफॉर्म कर रहे थे, लेकिन स्टेज के इस कलाकार ने स्टेज पर ही आखिरी सांस ली। केके को उन लोगों के सामने हार्टअटैक आया, जो इस बेहतरीन गायक के फन के मुरीद थे। केके 53 साल की उम्र में 31 मई 2022 को इस दुनिया को छोड़कर चले गए। हालांकि, कलाकार कभी मरता नहीं है, केके अपनी हमेशा गूंजने वाली आवाज के जरिए श्रोताओं के दिलों में जिंदा हैं।