आईएसओ 55001:2024 प्रमाणन हासिल करने वाला भारत का पहला मेट्रो संगठन बना डीएमआरसी

नई दिल्ली। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (डीएमआरसी) ने मुंबई मेट्रो लाइन-3 के एसेट मैनेजमेंट सिस्टम के लिए आईएसओ 55001:2024 प्रमाणन हासिल कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। डीएमआरसी भारत का पहला मेट्रो संगठन बन गया है, जिसे परिसंपत्ति प्रबंधन के इस नवीनतम अंतरराष्ट्रीय मानक के अनुरूप प्रमाणित किया गया है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की ओर से जारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि यह उपलब्धि केवल एक प्रमाणन नहीं, बल्कि मेट्रो परिसंपत्तियों के प्रबंधन में रोकथाम-आधारित देखभाल से आगे बढ़कर रणनीतिक, जोखिम-आधारित और जीवन-चक्र आधारित परिसंपत्ति प्रबंधन की दिशा में डीएमआरसी की महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाती है। आईएसओ 55001:2024 के तहत परिसंपत्तियों का प्रबंधन केवल उनके अनुरक्षण तक सीमित नहीं रहता, बल्कि प्रदर्शन, जोखिम, लागत और दीर्घकालिक जीवन-चक्र को संगठन के समग्र उद्देश्यों के साथ जोड़कर किया जाता है। इससे परिसंपत्तियों की विश्वसनीयता एवं उपलब्धता बढ़ाने के साथ-साथ संसाधनों के बेहतर उपयोग और दीर्घकालिक लागत-प्रभावशीलता में भी सहायता मिलती है। डीआरएमसी ने ने यह प्रमाणन रिकॉर्ड समय में हासिल किया है। इसके लिए रणनीतिक संपत्ति प्रबंधन योजना (एसएएमपी) को मजबूत करने, परिसंपत्ति प्रबंधन के उद्देश्यों को संगठनात्मक प्राथमिकताओं से जोड़ने, जोखिम आकलन एवं जीवन-चक्र नियंत्रणों को सुदृढ़ करने और अधिकारियों एवं कर्मचारियों की क्षमता निर्माण पर विशेष ध्यान दिया गया। संपत्ति प्रबंधन व्यवस्था की निरंतर निगरानी केपीआईएस, ऑडिट और प्रबंधन समीक्षा के माध्यम से की जा रही है। विज्ञप्ति के अनुसार, डीएमआरसी मुंबई मेट्रो लाइन-3 के 33.5 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर के परिचालन और रक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहा है, जो कोलाबा, बांद्रा और सीपज को जोड़ता है। इसके अंतर्गत रोलिंग स्टॉक, ट्रैक्शन, सिग्नलिंग, टेलीकम्युनिकेशन, स्टेशन, लिफ्ट, एस्केलेटर, ट्रैक और सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर सहित अनेक महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों का सुरक्षित एवं कुशल प्रबंधन शामिल है। आईएसओ 55001:2024 प्रमाणन के साथ डीएमआरसी ने सुरक्षा, विश्वसनीयता, दक्षता और स्थायित्व के अपने मूल उद्देश्यों को परिसंपत्ति प्रबंधन की एक वैश्विक रूप से मान्य प्रणाली के साथ और मजबूती से जोड़ा है। यह उपलब्धि भारत के शहरी रेल क्षेत्र में वैज्ञानिक, संरचित और जीवन-चक्र आधारित परिसंपत्ति प्रबंधन के लिए एक नया बेंचमार्क स्थापित करती है। साथ ही, यह डीएमआरसी की उस क्षमता को भी प्रदर्शित करती है जिसके माध्यम से वह देश के विभिन्न शहरों में विश्वस्तरीय मेट्रो ओ एंड एम एवं परिसंपत्ति प्रबंधन विशेषज्ञता उपलब्ध करा सकता है।
रसोइयों के कार्यक्रम में योगी का सपा पर हमला, जर्जर स्कूलों के वीडियो पर भी विपक्ष को घेरा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को एक ओर 3.53 लाख रसोइयों के लिए सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी बड़ी घोषणाएं कीं, तो दूसरी ओर समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। लखनऊ में रसोइया सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए योगी ने सपा सरकार के कार्यकाल को कानून-व्यवस्था और शिक्षा व्यवस्था के मुद्दे पर घेरा। उन्होंने स्कूलों की जर्जर इमारतों के वीडियो सामने आने पर भी विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जिनके कार्यकाल में ये भवन बने, वही आज उनकी बदहाली दिखा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था की स्थिति खराब थी और गरीब परिवारों के बच्चे गर्मी में तपते रास्तों और सर्दी में ठिठुरते हुए स्कूल जाने को मजबूर थे। आज बच्चों को यूनिफॉर्म, जूते-मोजे और स्वेटर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था अब नकल से मुक्त होकर बेहतर शिक्षा की दिशा में आगे बढ़ रही है। स्कूलों की जर्जर इमारतों को लेकर सामने आ रहे वीडियो पर सीएम योगी ने कहा कि कुछ लोग ऐसे भवनों को दिखाकर सरकार को कटघरे में खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं। इनमें से कई जर्जर भवन पिछली सरकारों के समय के हैं। सरकार अब ऐसे भवनों को चिह्नित कर नए भवनों में बदलने का काम कर रही है। सरकार ने स्कूलों की व्यवस्था में व्यापक बदलाव किया है। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के विस्तार, बालवाटिका, आईसीटी लैब और अन्य सुविधाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बच्चों को बेहतर वातावरण देने की दिशा में लगातार काम हो रहा है। सीएम योगी ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का नाम लिए बिना उन्हें ‘बबुआ’ कहकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार चलाने के लिए समय और मेहनत दोनों चाहिए। उनकी सरकार लगातार काम करती है और एक-एक योजना तथा विभाग के काम की समीक्षा करती है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो लोग दोपहर में उठते थे, तैयार होने के बाद शाम को जिम जाते थे और फिर महफिल जमती थी, उनके पास प्रदेश के लिए समय कहां था। उन्होंने कहा कि आज सरकार के पास प्रदेश के लिए पर्याप्त समय है और इसी वजह से योजनाओं के परिणाम दिखाई दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने सपा सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार में जमीनों पर कब्जे होते थे और बेटियों की सुरक्षा को लेकर लोगों में चिंता रहती थी। आज प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति बदली है और बेटियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। रक्षाबंधन से पहले मुख्यमंत्री ने पीएम पोषण योजना के तहत परिषदीय और सहायता प्राप्त स्कूलों में कार्यरत 3.53 लाख रसोइयों के लिए चार योजनाओं की घोषणा की। इनमें मानदेय बढ़ाकर 3,000 रुपये करना, दो लाख रुपये की दुर्घटना सहायता, प्रत्येक रसोइया परिवार को सालाना पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज और ड्रेस के लिए मिलने वाली राशि को दोगुना करना शामिल है। लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने 11 रसोइयों को प्रतीकात्मक रूप से कैशलेस चिकित्सा कार्ड वितरित किए। प्रदेशभर से करीब 1,500 रसोइयों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया। जिला और तहसील स्तर पर भी कार्यक्रम आयोजित कर रसोइयों को सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक रसोइयों के लिए सामाजिक सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। सरकार उनके बैंक खाते खुलवाकर मानदेय सीधे खाते में भेजेगी। दुर्घटना की स्थिति में परिवार को दो लाख रुपये की सहायता मिलेगी, जबकि बीमारी की स्थिति में परिवार के सदस्य सूचीबद्ध अस्पताल में सालाना पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज करा सकेंगे। सीएम योगी ने कहा कि रसोइयों का काम केवल बच्चों का पेट भरना नहीं, बल्कि उन्हें पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराकर स्वस्थ बचपन तैयार करना है। उन्होंने रसोइयों से रसोई की साफ-सफाई और निर्धारित मेन्यू के अनुसार भोजन तैयार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि भोजन तैयार करने में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। रसोई में अनधिकृत लोगों का प्रवेश रोकने और भोजन की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है, ताकि खाद्य विषाक्तता जैसी घटनाओं की कोई गुंजाइश न रहे।
एनडीए नेताओं का राहुल गांधी पर हमला, बोले- बताएं कांग्रेस सरकारों ने महिलाओं व युवाओं के लिए क्या किया

पटना। वंदे मातरम विवाद, जेन-जी और राहुल गांधी के युवा संवाद को लेकर बिहार सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव सहित कई नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आई है। आईएएनएस से बातचीत करते हुए रामकृपाल यादव ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ गीत का पूरा गीत गाया जाएगा; हम इसकी स्वागत करते हैं। ‘वंदे मातरम’ में देश की जनता की आत्मा है। ‘वंदे मातरम’ गीत से केवल देशभक्ति का ही इजहार नहीं किया जाता है, बल्कि करोड़ों लोगों को जोड़ने का काम भी होता है। कांग्रेस की ओर से कहा जाता है कि आंदोलन की मुहीम में हमारी प्रमुख भूमिका थी, लेकिन ‘वंदे मातरम’ का पूरा छंद नहीं गाकर दो छंद में खत्म करने का जो निर्णय लिया, यह अशोभनीय है। राहुल गांधी की ओर से युवा संवाद किए जाने को लेकर रामकृपाल यादव ने कहा कि राहुल गांधी की ओर से खुद को स्थापित करने की कोशिश की जा रही है लेकिन जनता ने उनको और उनकी पार्टी को रिजेक्ट कर दी है। राहुल गांधी की ओर से मनुस्मृति की बात की जा रही है, आजादी के 60 वर्षों से भी अधिक कांग्रेस का शासन रहा है। भेदभाव को समाप्त करना इन्हीं की सरकार का दायित्व था। लउनकी सरकार की ओर से खाई को पाटा नहीं गया बल्कि उसको बढ़ाने का काम किया गया। रामकृपाल यादव ने आगे कहा कि राहुल गांधी देश की जनता को ठग रहे हैं। कांग्रेस पार्टी ने तुष्टिकरण की राजनीति की है। इसलिए वे अपनी पार्टी की ओर से किए गए पाप को मिटाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन मिटने वाला नहीं है। आईएएनएस से बातचीत करते हुए राहुल गांधी के बयान पर बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि जब उनकी पार्टी को मौका मिलता है तो वे कुछ करते नहीं हैं। जिन राज्यों में उनकी पार्टी (कांग्रेस) या महागठबंधन की सरकारें हैं, उन राज्यों में महिलाओं के उत्थान के लिए राहुल गांधी ने क्या कदम उठाया है। हमारी ओर से बिहार में महिलाओं को पंचायतों और नगर निकायों के चुनावों में 50 प्रतिशत का आरक्षण दिया गया। हमारी ओर से सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण दिया गया। बिहार पुलिस में लड़कियां 30 हजार से ज्यादा हो गई हैं। हमको मौका मिला तो काम करके दिखाया। मंत्री श्रवण कुमार ने ‘वंदे मातरम’ मामले को लेकर कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और शहीदों के लिए कोई गीत गाई जाती है तो उसका सम्मान करना चाहिए। भाजपा की ओर से जेन-जी की समस्याओं को जानने के लिए तैयार की गई कमेटी को लेकर श्रवण कुमार ने कहा कि समस्या चाहे जिनकी (जेन-जी, किसान, नौजवान) भी हो, सरकार सभी की समस्याओं को सुनती है और अलग-अलग तरीके की समस्याओं को सुनने के लिए राज्य सरकार भी काम कर रही है। अगर कोई राजनीतिक पार्टी इसमें बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेती है, हमारा मानना है कि इसका स्वागत होना चाहिए। जदयू नेता राजीव रंजन ने ‘वंदे मातरम’ मामले को लेकर कहा कि कांग्रेस विचारहीनता के उस दौर से गुजर रही है, जहां राष्ट्रीय आंदोलन के महत्वपूर्ण क्षणों को राजनीति की भेंट चढ़ाने में कोई गुरेज नहीं है। ‘वंदे मातरम’ पर जो अनावश्यक टकराव है, जब यह देश का कानून बन चुका है और इसका मानना सभी के लिए बाध्यकारी है। वैसी स्थिति में दो छंद गाने के लिए कांग्रेस ने जो ये हठ लगातार जारी रखा है, यह दुर्भाग्यपूर्ण है। राहुल गांधी की ओर से युवाओं को संबोधित करने को लेकर राजीव रंजन ने कहा कि कुछ लोगों को संबोधित करने से राहुल गांधी युवाओं का दिल नहीं जीत पाएंगे। 2014 के पहले ज्यादातर कांग्रेस की ही सरकारें रही हैं। जिस पार्टी की 50 वर्षों तक सरकारें बनीं, उन्होंने युवाओं और महिलाओं के लिए क्या किया है? युवा समझ रहे हैं कि उनकी समस्याओं को नरेंद्र मोदी की सरकार और पार्टी समझ रही है।
भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील करीब पूरी हुई, कानूनी और तकनीकी भाषा पर काम जारी : अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर

नई दिल्ली। भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील सैद्धांतिक रूप से करीब पूरी हो गई है और अब दोनों पक्ष कानूनी और तकनीकी भाषा पर कार्य कर रहे हैं। यह जानकारी भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने दी। राष्ट्रीय राजधानी में एक कार्यक्रम में गोर ने कहा कि समझौते की मुख्य बातें तय हो गई थीं और बाकी काम में टेक्स्ट के कुछ हिस्सों को फिर से व्यवस्थित और अंतिम रूप देना शामिल था। गोर ने कहा, “सिद्धांत रूप में, ट्रेड डील का लगभग सारा काम पूरा हो चुका है।” उन्होंने समझौते को अंतिम रूप देने में हुई देरी का मुख्य कारण कानूनी और तकनीकी भाषा से जुड़ी प्रक्रियाओं को बताया। अमेरिकी राजदूत ने अमेरिकी कांग्रेस में प्रस्तावित उस कानून को लेकर जताई जा रही चिंताओं पर भी बात की, जिसके तहत रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस कदम को राजनीतिक दलों के दोनों पक्षों के नेताओं का समर्थन मिल रहा है और इस बात पर जोर दिया कि यह व्हाइट हाउस की तरफ से शुरू की गई पहल नहीं है। गोर ने कहा, “यह ऐसी चीज नहीं है जिसका व्हाइट हाउस ने समर्थन किया हो। आपको राष्ट्रपति ट्रंप का इसे आगे बढ़ाते हुए कोई क्लिप नहीं मिलेगा।” यह मानते हुए कि इस कदम का भारत पर असर पड़ सकता है, उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस-यूक्रेन संघर्ष को खत्म करने पर ध्यान केंद्रित किए हुए हैं। गोर ने कहा, “राष्ट्रपति पहले दिन से ही रूस और यूक्रेन के बीच इस युद्ध को खत्म करना चाहते हैं और वे इसके लिए प्रतिबद्ध हैं।” उन्होंने इस संघर्ष को खत्म करने को “बेहद जरूरी” बताया। गोर ने ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच करीबी रिश्तों पर भी जोर दिया और उनके संबंधों को “गहरी और व्यक्तिगत दोस्ती” बताया। उन्होंने कहा कि दोनों नेता काम करने में विश्वास रखने वाले और नतीजों पर ध्यान देने वाले हैं, और वे आपसी हित के मुद्दों पर तेजी से आगे बढ़ना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “वे दोनों ही आगे की सोचने वाले हैं, तेजी से काम करना चाहते हैं और नतीजों पर ध्यान देते हैं। हमारे राष्ट्रपति प्रधानमंत्री का बहुत सम्मान करते हैं।” 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के बाद जब ट्रंप पद पर नहीं थे, उस समय को याद करते हुए गोर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के लगातार समर्थन ने अमेरिकी राष्ट्रपति पर गहरी छाप छोड़ी थी। उन्होंने कहा, “जब आप ऊंचे ओहदे पर होते हैं, जब आप ओवल ऑफिस में होते हैं, तो हर कोई आपका दोस्त बनना चाहता है। लेकिन जब आप पद पर नहीं होते, तभी आपको असल में पता चलता है कि आपके दोस्त कौन हैं। और उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके सच्चे दोस्त साबित हुए।” गोर के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच आपसी भरोसे ने भारत और अमेरिका के रिश्तों को और मजबूत किया है।
बंगाल की खाड़ी में डूबा कार्गो जहाज: विमान से खोज एवं बचाव अभियान जारी, 2 क्रू मेंबर्स बचाए

नई दिल्ली। बंगाल की खाड़ी में 24 सदस्यीय चालक दल वाला एक व्यापारी जहाज समुद्र में आपदा का शिकार हो गया। पनामा के झंडे वाला यह बल्क कैरियर बंगाल की खाड़ी में डूब गया। जहाज पर 24 क्रू मेंबर्स सवार थे। इसको देखते हुए तुरंत ही भारतीय नौसेना एक्शन में आई। पनामा ध्वज वाले मालवाहक जहाज ‘एमवी ओशन विनर’ के क्रू मेंबर की तलाश में नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल ने संयुक्त रूप से बड़े पैमाने पर खोज एवं बचाव अभियान शुरू किया है। जहाज पर 20 चीनी, 3 म्यांमार और 1 बांग्लादेशी नागरिक सवार थे। इस अभियान में अब तक एक व्यापारिक जहाज एमटी ऐसोपोस ने दो चालक दल सदस्यों को लाइफराफ्ट से बचाया है, जबकि बाकी लोगों की तलाश जारी है। जहाज से संपर्क टूटने के बाद नौसेना ने अपने पी-8आई समुद्री निगरानी विमान को तत्काल खोज एवं बचाव मिशन के लिए लगाया। भारतीय नौसेना के अनुसार, 22 अगस्त को विशाखापत्तनम से करीब 700 किलोमीटर पूर्व एमवी ओशन विनर के संबंध में संकट संदेश प्राप्त हुआ था। इसके बाद नौसेना ने श्री विजय पुरम स्थित समुद्री बचाव समन्वय केंद्र के साथ तालमेल स्थापित किया। साथ ही नौसेना निगरानी मिशन पर तैनात अपने पी-8आई विमान को तत्काल खोज एवं बचाव अभियान के लिए पुन तैनात किया। पी-8आई विमान ने इलाके में बिखरे हुए लाइफराफ्ट का पता लगाया। इसके बाद नौसेना ने आसपास से गुजर रहे व्यापारिक जहाज एमटी ऐसोपोस से संपर्क कर उसे राहत एवं बचाव कार्य में सहायता करने का अनुरोध किया। नौसेना के अनुसार, 22 अगस्त की देर शाम तक एमटी ऐसोपोस ने दो अलग-अलग लाइफराफ्ट से 24 सदस्यीय चालक दल में से 2 लोगों को सुरक्षित बचा लिया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, जहाज पर 20 चीनी, 3 म्यांमार और 1 बांग्लादेशी नागरिक सवार थे। जानकारी के अनुसार, समुद्री बचाव समन्वय केंद्र को 22 अगस्त को करीब 11 बजकर 48 मिनट पर एमवी ओशन विनर से संपर्क टूटने की सूचना मिली थी। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय खोज एवं बचाव नेटवर्क को सक्रिय करते हुए आसपास मौजूद जहाजों को भी बचाव अभियान में शामिल किया गया। भारतीय नौसेना के साथ भारतीय तटरक्षक बल ने भी अभियान तेज कर दिया है। आईसीजीएस वरद और आईसीजीएस अनमोल को खोज एवं बचाव कार्य के लिए लगाया गया है, जबकि आईसीजीएस विजित को श्री विजय पुरम से अभियान में अतिरिक्त सहायता के लिए रवाना किया गया है। आसपास के अन्य जहाजों को भी सतर्क कर संभावित रूप से बचे लोगों और लाइफराफ्ट की तलाश में मदद करने को कहा गया है। दो लोगों के बचाए जाने के बाद भी 22 चालक दल सदस्य अभी लापता हैं। नौसेना ने कहा है कि वह भारतीय तटरक्षक बल के साथ लगातार समन्वय कर शेष चालक दल सदस्यों का पता लगाने के लिए अभियान चला रही है। एमवी ओशन विनर पनामा के झंडे वाला मालवाहक जहाज था। यह ओडिशा के पारादीप बंदरगाह से लौह अयस्क लेकर सिंगापुर की ओर जा रहा था। जहाज के डूबने के कारणों की अभी पुष्टि नहीं हुई है और बचाव अभियान के साथ-साथ घटना से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटाई जा रही है। इस घटना में भारतीय नौसेना की समुद्री निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता महत्वपूर्ण साबित हुई। संकट संदेश मिलने के बाद पी-8आई विमान को तत्काल खोज एवं बचाव भूमिका में लगाया गया और उसने इलाके में मौजूद लाइफराफ्ट का पता लगाया। इसके बाद पास से गुजर रहे एमटी ऐसोपोस को बचाव कार्य के लिए समन्वित किया गया। नौसेना और तटरक्षक बल का संयुक्त अभियान अब भी जारी है और प्राथमिकता समुद्र में मौजूद शेष 22 चालक दल सदस्यों का जल्द से जल्द पता लगाकर उन्हें सुरक्षित निकालना है।
जेपीएससी-जेएसएसी भर्ती घोटाले की जांच में चौंकाने वाले खुलासे, ओएमआर में हेरफेर से लेकर इंटरव्यू तक करोड़ों की हुई उगाही

रांची। झारखंड के चर्चित जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षा विवाद में सीआईडी और विशेष जांच दल (एसआईटी) की पड़ताल जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, सिंडिकेट के काम करने के संगठित और चौंकाने वाले तरीके उजागर हो रहे हैं। अब तक की जांच और मुख्य आरोपियों के बयान और उनसे चल रही लगातार पूछताछ से यह साफ हो गया है कि परीक्षाओं के विज्ञापन से लेकर अंतिम चयन और इंटरव्यू तक, हर स्तर पर ‘सेटिंग’ की एक समानांतर व्यवस्था सक्रिय थी। सेटिंग के इस खेल में पिछले तीन वर्षों में करोड़ों रुपए की उगाही हुई है, जिसकी समानांतर जांच ईडी ने भी शुरू की है। अब तक जितने भी साक्ष्य मिले हैं, उसके आधार पर जांच एजेंसियों का मानना है कि परीक्षाओं का आयोजन करने वाली आउटसोर्सिंग एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) का पूर्व मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी इस मेरिट स्कैम का सबसे अहम किरदार है। सीआईडी ने शनिवार को अभय तिवारी को तीसरी बार तीन दिनों के लिए रिमांड पर लिया है। उसकी पत्नी सुषमा तिवारी और भाई अक्षय तिवारी को भी आमने-सामने बिठाकर पूछताछ शुरू की गई है। आरोपियों के बयानों से यह खुलासा हुआ है कि भर्ती प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों के लिए बाकायदा दरें तय थीं। 11वीं से लेकर 14वीं जेपीएससी परीक्षाओं में अंतिम चयन और इंटरव्यू में नंबर बढ़ाने के नाम पर करोड़ों रुपये के वारे-न्यारे किए गए। 14वीं जेपीएससी में सामान्य और पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए करीब एक करोड़ रुपये, जबकि अनुसूचित जनजाति वर्ग के उम्मीदवारों के लिए लगभग 80 लाख रुपये तक का रेट तय किया गया था। जेपीएससी की पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता से हुई पूछताछ ने इस मामले में ‘ऊपरी दबाव’ की परतें खोल दी हैं। उनके बयानों के मुताबिक, 11वीं, 13वीं और 14वीं जेपीएससी के विवादित परिणाम तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते के सीधे निर्देश और दबाव में जारी किए गए थे। हालांकि, उन्होंने खुद को किसी भी तकनीकी हेरफेर से अलग बताते हुए वरिष्ठों के आदेशों का पालन करने की बात कही है। इस घोटाले का सबसे गंभीर और तकनीकी पहलू ओएमआर शीट से की गई छेड़छाड़ से जुड़ा है। डेटा प्रोसेसिंग से जुड़े तकनीकी प्रोग्रामर मोहम्मद एबाद के बयानों से खुलासा हुआ है कि योजनाबद्ध तरीके से चिन्हित अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट में उत्तर वाले गोलों को खाली छोड़ दिया जाता था। परीक्षा संपन्न होने के बाद जब आधिकारिक उत्तर कुंजी (आंसर की) उपलब्ध हो जाती थी, तब स्कैनिंग और डिजिटल मूल्यांकन के दौरान उन खाली खानों में सही उत्तर भर दिए जाते थे। इसके लिए पहले से तय अभ्यर्थियों के रोल नंबर सीधे तकनीकी टीम तक पहुंचाए जाते थे। सीआईडी फिलहाल मूल ओएमआर शीट, उसकी कार्बन कॉपी और डिजिटल डेटा का फॉरेंसिक मिलान कर इस तकनीकी हेरफेर के साक्ष्य जुटा रही है। जांच में सामने आया कि जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा में चुनिंदा अभ्यर्थियों से 12-12 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि वसूल कर उन्हें परीक्षा से ठीक पहले एक सुरक्षित स्थान पर एकत्र किया गया। वहां उन्हें लगभग 65 प्रश्नों के उत्तर रटवाए गए। जांच एजेंसियां अब इस तकनीकी पहेली को सुलझाने में जुटी हैं कि परीक्षा से ठीक पहले ये प्रश्न और उनके सटीक उत्तर सिस्टम के भीतर से किस माध्यम से बाहर पहुंचे और इस पूरी कड़ी में परीक्षा संचालन संस्थाओं के कौन-कौन से अधिकारी शामिल थे। पूरे मामले में परीक्षा आयोजित करने वाली आउटसोर्स एजेंसी टीडीपीएल की भूमिका जांच के केंद्र में बनी हुई है। एजेंसी के डिजिटल रिकॉर्ड, ओएमआर डेटा तक तकनीकी कर्मचारियों की पहुंच और उस पहुंच के दुरुपयोग की गहन पड़ताल की जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीआईडी ने पूर्व जेपीएससी अध्यक्ष एल. खियांग्ते सहित 25 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। इस वृहद गड़बड़ी के सामने आने के बाद ही राज्य सरकार ने जेएसएससी-सीजीएल समेत 22 भर्ती प्रक्रियाओं को निरस्त करने, 6 को स्थगित करने और 17 अन्य परीक्षाओं को जांच के दायरे में लाने का बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया था। फिलहाल सीआईडी और एसआईटी के सामने सबसे बड़ी चुनौती आरोपियों के इकबालिया बयानों को मूल ओएमआर शीट, फॉरेंसिक डिजिटल साक्ष्यों और वित्तीय लेन-देन के ट्रेल से जोड़कर अदालत में सर्वमान्य साक्ष्य के रूप में स्थापित करने की है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा की समीक्षा की

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा की समीक्षा की। इस बैठक में पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और डीजीपी के अलावा गृह मंत्रालय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, सेना,सहित अन्य केंद्रीय मंत्रालयों एवं राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री की मौजूदगी में हुई इस बैठक में, मल्टी.एजेंसी सेंटर के सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर बने स्टैंडिंग फोकस ग्रुप ने अब तक हुई प्रगति और कॉरिडोर की सुरक्षा को और मज़बूत करने के लिए अपनी सिफ़ारिशों के बारे में प्रेजेंटेशन दिया। बैठक के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर में चल रही उन सभी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की स्थिति की समीक्षा की जो इसकी सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने पीआईओ गतिविधियों जनसांख्यिकीय बदलावों घुसपैठ और सीमा से जुड़े मामलों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार सिलिगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा अभेद्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सीमा सुरक्षा के लिए तुष्कोणीय अप्रोच के कॉन्सेप्ट पर ज़ोर दिया और सभी एजेंसियों को इसे पूरी स्पिरिट के साथ लागू करने का निर्देश दिया। कॉरिडोर में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के महत्व पर ज़ोर देते हुए शाह ने वहां मौजूद सभी एजेंसियों को सभी लंबित कार्यों को तय समय.सीमा के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया।केंद्रीय गृह मंत्री ने बैठक में मौजूद सभी एजेंसियों को निर्देश दिया कि वे कॉरिडोर में अपने और संस्थान खोलकर अपनी मौजूदगी बढ़ाएं। उन्होंने कॉरिडोर में मौजूद सभी अहम प्रतिष्ठानों की सुरक्षा का भी जायजा लिया और उन्हें सुरक्षित रखने के लिए सभी ज़रूरी कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने सिलीगुड़ी कॉरिडोर को अतिक्रमण मुक्त रखने का भी निर्देश दिया। उन्होंने सिलीगुड़ी कॉरिडोर में घुसपैठ को रोकने के लिए हर ज़रूरी कदम उठाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री को उत्तर बंगाल में और सैनिक स्कूल खोलने की संभावनाओं पर विचार करने का सुझाव दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री से उत्तर बंगाल में सीनियर एनसीसी कैडेट्स की संख्या बढ़ाने की दिशा में काम करने को भी कहा। साथ ही उन्होंने राज्य सरकार से सिलीगुड़ी कॉरिडोर में सिविल डिफेंस और होम गार्ड्स की व्यवस्था को मजबूत करने का आग्रह किया।
कोच्चि स्थित सीएसएल द्वारा निर्मित तीसरी पनडुब्बी रोधी उथले जल की नौका, मैंग्रोल नौसेना को सुपुर्द

कोच्चि। कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) कोच्चि द्वारा निर्मित तीसरी उथले जल की पनडुब्बी रोधी युद्धक नौका मंगरोल को 21 अगस्त 2026 को भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया। इस जहाज में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है और यह पानी के भीतर निगरानी तटीय जलक्षेत्र में पनडुब्बी रोधी अभियान (एएसडब्ल्यू) निम्न तीव्रता समुद्री अभियान (एलआईएमओ)और बारूदी सुरंगों से बचाव की क्षमताओं से सुसज्जित है। यह जहाज वाटरजेट से संचालित होता है और अत्याधुनिक टॉरपीडो पनडुब्बी रोधी रॉकेट उन्नत रडार और सोनार से लैस है। मैंग्रोल नाम गुजरात के जूनागढ़ जिले में स्थित तटीय शहर और छोटे बंदरगाह मैंग्रोल से लिया गया है जो समुद्री मत्स्य पालन उद्योग का एक प्रमुख बंदरगाह है। यह जहाज भारतीय नौसेना के पूर्व माइनस्वीपर आईएनएस मैंग्रोल की विरासत को भी दर्शाता है, जो 2004 तक सेवा में रहा, और इस प्रकार विशिष्ट युद्धपोतों के नामों को संरक्षित करने की नौसैनिक परंपरा को जारी रखता है।मैंग्रोल की सुपुर्दगी भारतीय नौसेना के स्वदेशी जहाज निर्माण के सफर में एक और मील का पत्थर है और सरकार के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण की पुष्टि करती है। यह जहाज स्वदेशी रक्षा विनिर्माण प्रणाली की बढ़ती ताकत का प्रमाण है।
सभी राज्य किसानों के डिजिटल सर्वे को फास्ट-ट्रैक करे: शिवराज सिंह

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में शुरू हुए डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन और दलहन आत्मनिर्भरता मिशन की प्रगति और आगे की रणनीति पर पूसा में राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित हुआ। इसमें केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राथमिकता के अनुरूप यह काफ़ी महत्वपूर्ण कार्य है जिसका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना दालों में आत्मनिर्भरता लाना और खेती से जुड़ी सेवाओं को डिजिटल व पारदर्शी बनाकर खेतों तक वास्तविक असर पहुँचाना है। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा, असम के मंत्री पियूष हजारिका, अरुणाचल प्रदेश के मंत्री ग्रेबियल डेन्वांग बागसू, नागालैंड के मंत्री महात यंथन और केंद्रीय कृषि सचिव अतीश चन्द्रा समेत राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अब समय आ गया है कि योजनाओं का असर सिर्फ रिपोर्टों में नहीं बल्कि खेतों में और किसानों की जेब में दिखेय उन्होंने राज्यों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि आप करेंगे तो जरूर होगा और कहा कि जिन जगहों पर गंभीरता और कौशल से काम हुआ है वहाँ लक्ष्यों को 100 प्रतिशत से ऊपर हासिल किया गया जबकि जहाँ कोशिश कम रही वहां परिणाम पीछे रहे इसलिए उन्होंने राज्यों से पूरी जिम्मेदारी और समयबद्ध कार्रवाई की अपेक्षा रखी। उन्होंने फार्मर आईडी के महत्व पर विशेष जोर दिया और बताया कि फार्मर आईडी बनने के बाद भुगतान सीधे किसान के खाते में जा रहे हैं जिससे भुगतान तेज़ और पारदर्शी हुआ हैय महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के उदाहरण देते हुए केंद्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि समय पर भुगतान से बड़े पैमाने पर लाभ देखा गया और केंद्र ने फार्मर आईडी बनवाने और शिविर चलाने के लिए फंड भी उपलब्ध करवाया हैए इतना ही नहीं उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीकी रूप से एक महीने के भीतर आईडी बनना संभव है पर यह तभी होगा जब शिविर ईमानदारी और सही तरीके से चलें और पैसा कार्यक्रम के नाम पर बर्बाद न हो।
महेश्वरी समाज की सेवाए त्याग और सामाजिक प्रतिबद्धता की गौरवशाली एवं प्रेरणादायी विरासत रही है:लोक सभा अध्यक्ष

नई दिल्ली। लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने जयपुर के महेश्वरी समाज को महेश्वरी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर की स्थापना के माध्यम से मानव सेवा की अपनी यात्रा में एक नए और महत्वपूर्ण अध्याय का शुभारंभ करने के लिए बधाई दी।संस्थान के शिलान्यास समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि महेश्वरी समाज की सेवाए त्यागए समर्पण और सामाजिक दायित्व की एक गौरवशाली एवं अत्यंत प्रेरणादायी विरासत रही है। यह ऐसी विरासत है जिसने समाज को आलोकित किया है और पीढ़ियों को प्रेरणा दी है। शिक्षा के प्रसार में समाज के ऐतिहासिक योगदान का उल्लेख करते हुए बिरला ने कहा कि वर्ष 1926 में जब भारत ब्रिटिश शासन के अधीन था और नगरों एवं गांवों दोनों में शिक्षा के अवसर अत्यंत सीमित थेए तब महेश्वरी समाज के दूरदर्शी सदस्यों ने एक प्रबुद्धए सुसंस्कृत और प्रगतिशील समाज के निर्माण के लिए शिक्षा के महत्व को भली.भांति समझ लिया था। सीमित संसाधनों और अनेक कठिन चुनौतियों के बावजूद उन्होंने उल्लेखनीय प्रतिबद्धता के साथ अपने संसाधनों को एकजुट कर विद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना की। बिरला ने आगे कहा कि महेश्वरी समाज ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में भी सार्थक योगदान दिया तथा पूज्य भामाशाह से जुड़ी त्याग और राष्ट्रभक्ति की अमर परंपरा को आगे बढ़ाया। अत्यंत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी समाज जनसेवा के अपने संकल्प पर अडिग रहा। जहाँ शिक्षा की सुविधाओं का अभाव थाए वहाँ विद्यालय स्थापित किए गए और जहाँ दूर.दराज से आने वाले यात्रियों के लिए ठहरने की व्यवस्था नहीं थी वहाँ धर्मशालाओं का निर्माण कर उन्हें आश्रय और सुविधा प्रदान की गई।लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि महेश्वरी समाज की सेवा.भावना किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रही। विद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों से लेकर अस्पतालोंए औषधालयोंए सामुदायिक केंद्रोंए छात्रावासों और छात्रवृत्तियों तकए महेश्वरी समाज ने सदैव समाज के समक्ष विद्यमान आवश्यकताओं और चुनौतियों को पहचानने तथा उनके समाधान के लिए सामूहिकता और संवेदनशीलता के साथ कार्य किया है।कोविड-19 महामारी से उत्पन्न अभूतपूर्व चुनौती का उल्लेख करते हुए बिरला ने कहा कि भारत ने अपनी सामूहिक सामाजिक चेतना और एक.दूसरे की देखभाल एवं सहायता करने की अपनी प्राचीन परंपरा से अपार शक्ति प्राप्त की।