सीएम योगी ने अमर शहीद गुलाब सिंह लोधी को दी श्रद्धांजलि, कहा- 32 साल की उम्र में दी थी शहादत

लखनऊ। स्वाधीनता संग्राम सेनानी अमर शहीद गुलाब सिंह लोधी के 91वें बलिदान दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को झंडेवाला पार्क, अमीनाबाद में उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर सीएम योगी ने कहा कि 23 अगस्त 1935 को मात्र 32 वर्ष की उम्र में भारत माता के महान सपूत अमर शहीद गुलाब सिंह लोधी ने ब्रिटिश हुकूमत को चुनौती देते हुए इसी पार्क में भारत का तिरंगा फहराया था। उस समय तिरंगा स्वाधीनता का प्रतीक था। कायर ब्रिटिश सरकार ने उनके इस साहस का जवाब गोलियों से दिया और वह देश की आजादी के लिए शहीद हो गए। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि गुलाब सिंह लोधी बलिदान हुए लेकिन आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वाधीनता का एक स्वर्णिम पृष्ठ छोड़ गए हैं। उनके बलिदान के महज 12 वर्ष बाद देश ब्रिटिश दासता से मुक्त होकर स्वतंत्र हुआ। सीएम योगी ने कहा कि इस अवसर पर प्रदेश सरकार और उत्तर प्रदेश की जनता की ओर से वह अमर शहीद की पुण्य स्मृतियों को नमन करते हैं। गुलाब सिंह लोधी का जन्म वर्ष 1903 में उन्नाव के एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। बचपन से ही उनके भीतर देश की आजादी के लिए जज्बा था। इसी भावना के साथ उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लिया और लखनऊ आकर देश की स्वाधीनता के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि अमर शहीद गुलाब सिंह लोधी जी की स्मृतियों को जीवंत बनाए रखने के लिए प्रदेश सरकार ने उन्नाव जिले में पार्क, स्वास्थ्य केंद्र और पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय का नामकरण उनके नाम पर करते हुए उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। उत्तर प्रदेश सरकार अपने उन सभी अमर बलिदानियों के पुण्य स्मरण को जीवंत बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत की आजादी के लिए 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अपने आप को बलिदान करने वाली वीरांगना अवंतीबाई लोधी जी के नाम पर अलीगढ़ में स्टेडियम का नामकरण और बदायूं में पीएसी की नई बटालियन का नामकरण किया गया है। लखनऊ में पीएसी की महिला बटालियन का नाम वीरांगना ऊदा देवी पासी के नाम पर रखा गया है। इसी तरह गोरखपुर में नवस्थापित पीएसी महिला बटालियन का नाम वीरांगना झलकारी बाई कोरी के नाम पर तथा औरैया में नए मेडिकल कॉलेज का नाम लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के नाम पर किया गया है। इन सभी महापुरुषों और वीरांगनाओं ने भारत की स्वतंत्रता और सम्मान के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि अमर शहीद गुलाब सिंह लोधी जैसे क्रांतिकारियों ने देश की आन, बान और शान को बनाए रखने के लिए अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया। उनकी स्मृतियों को जीवंत बनाए रखना वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और अमर बलदानियों की स्मृतियों को संरक्षित रखने के लिए स्मारक निर्माण के कार्यक्रम को निरंतर आगे बढ़ाएगी। सीएम योगी ने बताया कि हाल ही में प्रदेश सरकार ने सामाजिक न्याय और देश के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले महापुरुषों के सम्मान में करीब 500 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की है। इस धनराशि से बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर, सद् गुरु रविदास जी महाराज, महर्षि वाल्मीकि जी महाराज समेत अन्य महापुरुषों की प्रतिमाओं पर छाजन लगाने, पार्कों के नवनिर्माण और उन्हें सुरक्षित बनाने के कार्य किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि महापुरुषों के प्रति श्रद्धा और सम्मान का यह क्रम लगातार आगे बढ़ता रहेगा।

कोलकाता होटल अग्निकांड: लाइसेंस जारी करने की मौजूदा व्यवस्था में खामियों की समीक्षा कर रही बंगाल सरकार

कोलकाता। पिछले सप्ताह बीरभूम जिले के तारापीठ में और मिर्जा गालिब स्ट्रीट पर लगी आग में कुल 18 लोगों की मौत के बाद राज्य सरकार ने होटलों, लॉज और गेस्ट हाउस को लाइसेंस देने की प्रक्रिया में मौजूद कमियों की समीक्षा और उन्हें ठीक करने का काम शुरू कर दिया है। स्टेट फायर सर्विस डिपार्टमेंट के एक अधिकारी ने बताया कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के समय “फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट” और “फायर लाइसेंस” देने की व्यवस्था को विकेंद्रीकृत करने का नीतिगत फैसला लिया गया था। अधिकारी ने बताया, “लाइसेंस देने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए पिछली सरकार ने दो अहम नीतिगत फैसले लागू किए थे। पहला, ऐसे होटलों, लॉज और गेस्ट हाउस के मालिकों से ‘सेल्फ-डिक्लेरेशन’ (स्व-घोषणा) लेने की व्यवस्था शुरू की गई थी। दूसरा, अलग-अलग फायर सर्विस स्टेशनों के स्टेशन अधिकारियों को यह अधिकार दिया गया कि वे सेल्फ-डिक्लेरेशन जमा करने वाले ऐसे हॉस्पिटैलिटी प्रतिष्ठानों के मालिकों को फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट और फायर लाइसेंस जारी कर सकें।” उन्होंने बताया कि जब ये दो सबसे जरूरी सर्टिफिकेट मिल गए, तो संबंधित सिविक बॉडीज से ट्रेड लाइसेंस लेना और उसके बाद बिजली वितरण कंपनियों से बिजली कनेक्शन लेना काफी आसान हो गया। अधिकारी ने कहा, “स्टेशन अधिकारियों से मिले फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट और फायर लाइसेंस की वजह से ऐसे हॉस्पिटैलिटी बिजनेस के मालिक आसानी से ट्रेड लाइसेंस और बिजली कनेक्शन हासिल कर पाए, जबकि सिविक बॉडीज या बिजली कंपनियों की तरफ से शायद ही कोई क्रॉस-चेक किया गया हो।” अब, तारापीठ और कोलकाता में लगी आग के बाद, अलग-अलग लाइसेंस देने की पूरी प्रक्रिया में ये कमियां साफ तौर पर दिख रही हैं, इसलिए नई राज्य सरकार कुछ पॉलिसी में बदलाव करने की योजना बना रही है। राज्य फायर सर्विस अधिकारी के अनुसार, प्रस्तावित पॉलिसी बदलावों का मुख्य मकसद लाइसेंस देने की पूरी प्रक्रिया में कई स्तरों पर जांच की व्यवस्था करना है। विभाग के एक अधिकारी ने बताया, “पहली पॉलिसी जिस पर विचार किया जा रहा है, वह है स्टेशन अधिकारियों के पास मौजूद उस पूर्ण अधिकार को खत्म करना, जिसके तहत वे फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट और फायर लाइसेंस देते हैं। इसके बजाय, ये दोनों सर्टिफिकेट दो-चरणों वाली जांच के बाद दिए जाने चाहिए। पहले स्टेशन अधिकारियों के स्तर पर और फिर उनसे एक या दो स्तर ऊपर के अधिकारियों द्वारा जांच किया जाना जाहिए।” अधिकारी फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट और फायर लाइसेंस के बीच का अंतर भी समझाया। फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट (फायर एनओसी) एक ऐसा दस्तावेज है, जो यह पुष्टि करता है कि कोई इमारत या ढांचा स्थानीय फायर सेफ्टी कोड और आर्किटेक्चर नियमों को पूरा करता है। वहीं, फायर लाइसेंस खास कमर्शियल गतिविधियों या औद्योगिक प्रक्रियाओं के लिए जारी किया गया एक औपचारिक ऑपरेशनल परमिट होता है। विभाग के अधिकारी ने बताया कि एक प्रस्ताव पर भी विचार किया जा रहा है। इसके तहत, फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट और फायर लाइसेंस के आधार पर संबंधित सिविक निकायों द्वारा ट्रेड लाइसेंस और बिजली वितरण कंपनियों द्वारा बिजली कनेक्शन देने की उस व्यवस्था को खत्म किया जाएगा, जिसमें ये लगभग अपने-आप (ऑटोमैटिक रूप से) मिल जाते हैं। प्रस्ताव यह है कि संबंधित सिविक अधिकारियों और बिजली वितरण कंपनियों को ट्रेड लाइसेंस और बिजली कनेक्शन देने से पहले अच्छी तरह जांच करनी चाहिए। इससे ऐसी हॉस्पिटैलिटी इकाइयों द्वारा सुरक्षा पहलुओं को नजरअंदाज करके अपनी दुकानें चलाने की संभावना कम हो जाएगी।

तमिलनाडु में सीपीआई (एम) नेताओं पर हमला, सभी आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग

उलुंदुरपेट। सीपीआई (एम) ने तमिलनाडु के कल्लाकुरिची जिले में उलुंदुरपेट के पास पार्टी के वरिष्ठ नेताओं समेत चार लोगों पर हुए कथित हमले की कड़ी निंदा की है और इसमें शामिल सभी लोगों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की है। सीपीआई (एम) तमिलनाडु के राज्य सचिव पी. शनमुगम ने एक बयान में कहा कि 21 अगस्त की रात आठ लोगों के एक समूह ने जिला सचिव डीएम जयशंकर, पूर्व जिला सचिव डी. एझुमलई, जिला समिति सदस्य डी.एस. मोहन और उनकी कार के ड्राइवर पर हमला किया। यह घटना तब हुई जब नेताओं ने उलुंदुरपेट में होने वाले विरोध प्रदर्शन की तैयारी पूरी कर ली थी। पार्टी के अनुसार, वे किलियाुर गांव से होकर गुजरे और अपनी गाड़ी पार्क की, तभी वडामंगलम गांव के एक समूह ने उन्हें रोका। हमलावरों ने कथित तौर पर नेताओं के साथ बदसलूकी की और सीपीआई (एम) के खिलाफ अपमानजनक बातें कहीं। उन्होंने पार्टी का झंडा भी क्षतिग्रस्त कर दिया और कार में बैठे लोगों पर हमला करने से पहले कार की खिड़कियां तोड़ दीं। पार्टी ने इस घटना को पहले से सोची-समझी और जानलेवा हमला बताया। सीपीआई (एम) ने आरोप लगाया कि यह हिंसा वडामंगलम में प्रधानमंत्री आवास योजना को लागू करने में कथित अनियमितताओं को लेकर चलाए जा रहे उनके अभियान से जुड़ी थी। पार्टी ने आरोप लगाया कि गांव के एक पूर्व पंचायत अध्यक्ष ने योजना के तहत 22 घर बनाने का वादा करके निवासियों से पैसे तो लिए, लेकिन उन्हें पूरा नहीं किया। पार्टी ने प्रभावित निवासियों को एकजुट किया और न्याय तथा उनके पैसे की वापसी की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए। बयान में कहा गया है कि सीपीआई (एम) कार्यकर्ता इलाके के लोगों से जुड़े कई स्थानीय मुद्दों पर भी अभियान चला रहे थे। शनमुगम के अनुसार, पूर्व पंचायत अध्यक्ष पार्टी के दखल से नाराज थे। उन्होंने आरोप लगाया कि आठ लोगों के एक समूह ने, जिसमें पूर्व अध्यक्ष के दो बेटे भी शामिल थे, सीपीआई (एम) की गतिविधियों के जवाब में हमले की योजना बनाई और उसे अंजाम दिया। कलमारुदुर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई है। घायल नेताओं का अस्पताल में इलाज हुआ और वे अब घर लौट आए हैं। हालांकि, पार्टी ने चिंता जताई कि पुलिस ने अब तक केवल एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। सीपीआई (एम) की राज्य कार्यकारी समिति ने तमिलनाडु पुलिस से पूर्व पंचायत अध्यक्ष के दो बेटों सहित सभी आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार करने का आग्रह किया। साथ ही, पार्टी ने मांग की कि स्थानीय निवासियों के समर्थन में अभियान चला रहे नेताओं को निशाना बनाने के लिए जिम्मेदार लोगों को उचित सजा दिलाने के लिए सख्त कानूनी प्रावधान लागू किए जाएं।

राहुल गांधी के प्रदर्शन के दौरान संसद मार्ग थाने की दीवार गंदी करने पर एक की गिरफ्तारी, फिर जमानत पर रिहाई

नई दिल्ली। संसद मार्ग पुलिस थाने की दीवार पर ग्रैफिटी बनाने के मामले में दिल्ली पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। यह मामला लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के प्रदर्शन से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान थाने की दीवार पर ग्रैफिटी लिखकर उसे गंदा किया गया था। इस मामले में पुलिस ने दिल्ली संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज की मदद से आरोपी की पहचान की गई और फिर उसे गिरफ्तार किया गया। हालांकि, इस मामले में जमानती धाराओं में एफआईआर दर्ज होने के कारण आरोपी को जमानत पर छोड़ दिया गया है। बता दें कि 21 अगस्त को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी नई दिल्ली के संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचे थे। वे जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के दौरान छात्रों पर पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर चल रही जांच की प्रगति जानने के लिए डीसीपी ऑफिस गए थे। राहुल गांधी पहले कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन गए थे। वहां से वे सीधे संसद मार्ग थाने में स्थित डीसीपी ऑफिस पहुंचे। वे पैलेट गन पीड़ित साहिल को साथ लेकर गए थे और इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने के लिए थाने पहुंचे थे। दिल्ली के डीसीपी ऑफिस में उनके साथ नई दिल्ली के डीसीपी के अलावा जॉइंट सीपी भी डीसीपी रूम में मौजूद थे। डीसीपी ऑफिस से बाहर आते ही राहुल गांधी पीड़ित परिवार के साथ संसद मार्ग पुलिस स्टेशन में धरने पर बैठ गए थे। तब पुलिस की ओर से जानकारी दी गई थी कि शिकायतकर्ता की तरफ से शिकायत दी गई है, जबकि राहुल गांधी शिकायतकर्ता नहीं हैं। पुलिस ने कहा था कि विधिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अधिकारियों की ओर से तब बताया गया था कि 20 जुलाई को दर्ज हुए सभी मामलों की जांच क्राइम ब्रांच के पास है। बाद में पुलिस ने राहुल गांधी की ओर से इस मामले में एफआईआर ली थी। जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन के दौरान घायल हुए छात्र साहिल लोचब की शिकायत पर एफआईआर दर्ज होने के बाद कांग्रेस ने इसे राहुल गांधी की लगातार कोशिशों का नतीजा बताया था।

‘इंस्टाग्राम पर लिखी हर बात को अपनी जिंदगी से जोड़ना सबसे बड़ी भूल’, जान खान ने सोशल मीडिया को लेकर दी सलाह

मुंबई। आज के समय में सोशल मीडिया हमारी जिंदगी का इतना बड़ा हिस्सा बन चुका है कि रिश्तों, प्यार और भावनाओं को समझने का तरीका भी बदलता जा रहा है। इंस्टाग्राम पर किसी की तस्वीर देखकर हम उसकी जिंदगी को खुशहाल मान लेते हैं, किसी का लिखा विचार पढ़कर उसे अपनी कहानी से जोड़ लेते हैं। टीवी अभिनेता जान खान का मानना है कि ऐसा करना सही नहीं है। उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली हर चीज सच नहीं होती और वहां लिखी बातों को अपनी जिंदगी से जोड़ना समझदारी नहीं है। आईएएनएस ने जान खान से जब पूछा कि सोशल मीडिया के दौर में रिश्ते और भावनाएं ऑनलाइन दिखाई देने वाली चीजों से प्रभावित होती हैं, क्या इसका असर उनके शो की कहानी पर भी पड़ता है? इस सवाल के जवाब में जान ने कहा, “दिल से दीवानगी तक एक काल्पनिक कहानी है और इसे वास्तविक जिंदगी की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। सोशल मीडिया पर बनने वाले रिश्तों की दुनिया अलग है और असल जिंदगी के रिश्तों से उसकी तुलना नहीं की जा सकती।” जान ने कहा, ”आज बहुत सी चीजें इंस्टाग्राम पर निर्भर हो गई हैं। लोग अपना काफी समय वहां बिताते हैं और लगातार अलग-अलग तरह के विचार, सलाह और रिश्तों से जुड़ी बातें पढ़ते रहते हैं। समस्या तब होती है, जब लोग इन बातों को बिना सोचे अपनी जिंदगी पर लागू करने लगते हैं।” उन्होंने कहा, ”सोशल मीडिया पर कई बार ऐसे लोग भी रिश्तों और जिंदगी को लेकर बड़ी-बड़ी बातें लिखते हैं, जिन्होंने शायद खुद उन परिस्थितियों का सामना नहीं किया हो। कुछ लोग सिर्फ ज्यादा लोगों तक पहुंचने, चर्चा पाने या व्यूज बढ़ाने के लिए ऐसी बातें लिखते हैं। इसके बाद दूसरे लोग उन विचारों को पढ़कर अपनी जिंदगी से जोड़ने लगते हैं।” अभिनेता ने आगे कहा, “हम सभी अपनी जिंदगी में मुश्किलों से गुजर रहे हैं, लेकिन मैं खुद को इंस्टाग्राम, वहां लिखे विचारों या वहां मिलने वाली कथित सीख से जोड़कर नहीं देखता। यह सब बहुत अस्थायी है। सोशल मीडिया पर कुछ मिनट या कुछ घंटे के लिए लोकप्रिय होने वाली बातें जरूरी नहीं कि लंबे समय तक हमारी जिंदगी के लिए सही साबित हों।’” वहीं, अपने शो ‘दिल से दीवानगी तक’ के बारे में बात करते हुए जान ने बताया कि उन्हें इस कहानी की सबसे ज्यादा दिलचस्प बात इसका लव ट्रायंगल लगा। शो में अबीर, सिया और जहां के बीच रिश्तों की कहानी दिखाई गई है। जान इसमें जहान का किरदार निभा रहे हैं। उन्होंने बताया कि जहान एक ऐसा व्यक्ति है, जिसे समझना आसान नहीं है। उसका अगला कदम क्या होगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। जान ने अपने किरदार को लेकर कहा, ”जहान जैसा किरदार मैंने पहले कभी नहीं निभाया और इसी वजह से वह मेरे लिए खास है। एक अभिनेता के तौर पर मुझे ऐसे किरदार पसंद हैं, जिनमें मुझे कुछ नया करने और अपनी अभिनय क्षमता को आजमाने का मौका मिला। जहान का अलग व्यक्तित्व मेरे लिए इसी तरह की चुनौती लेकर आया है।” ‘दिल से दीवानगी तक’ का प्रसारण ऑलराइट टीवी के मोबाइल ऐप पर हर सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को होता है।

मेरा सपना पूरा हुआ, भगवान और परिवार का शुक्रिया: सारांश जैन

कोलंबो। भारत और श्रीलंका के बीच कोलंबो के सिंहली स्पोर्ट्स क्लब में दूसरा टेस्ट मैच रविवार को शुरू हुआ। ऑलराउंडर सारांश जैन ने इस मैच से अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का आगाज किया है। सारांश को घरेलू क्रिकेट में लंबा समय बिताने के बाद डेब्यू का मौका मिला है। इससे वह बेहद खुश हैं। बाएं हाथ के बल्लेबाज और दाएं हाथ के ऑफ स्पिन गेंदबाज सारांश जैन को डेब्यू कैप दिग्गज ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा ने सौंपी। सारांश को 320 नंबर कैप दी गई। डेब्यू कैप मिलने के बाद सारांश ने भगवान और अपने परिवार का शुक्रिया अदा किया। बीसीसीआई द्वारा सोशल मीडिया पर साझा वीडियो में सारांश ने कहा, “जब भी कोई खिलाड़ी क्रिकेट खेलना शुरू करता है, तो उसका सपना भारत के लिए खेलना होता है। मैंने आज इसे हासिल कर लिया है। इसलिए, मैं भगवान और परिवार का बहुत शुक्रगुजार हूं जिन्होंने मेरा साथ दिया और मुझे यह कामयाबी मिली।” रवींद्र जडेजा से टेस्ट कैप मिलने पर सारांश बेहद खुश दिखे। उन्होंने कहा, “जड्डू भाई एक लेजेंड हैं और अगर मुझे उनसे कैप मिलती है, तो यह मेरे लिए बहुत बड़ा फायदा होगा। मैं बहुत खुश हूं और मैं एक ऐसे ऑल-राउंडर से कैप लेना चाहता था जो मुझे प्रेरित करे क्योंकि मैं भी एक ऑल-राउंडर हूं। मैं इसे पूरा करने की कोशिश करूंगा।” जडेजा ने भी सारांश को डेब्यू टेस्ट कैप देते हुए कहा, “टेस्ट कैप नंबर 320, सारांश, बहुत बढ़िया। आप इतने सालों से घरेलू क्रिकेट में हैं। आपने कड़ी मेहनत की है और लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है, चाहे वह भारत हो या रणजी ट्रॉफी। मुझे लगता है कि यह आपके लिए जीवन में एक बहुत ही महत्वपूर्ण मौका होगा क्योंकि एक क्रिकेटर के रूप में हर किसी का सपना भारत का प्रतिनिधित्व करना और टेस्ट खिलाड़ी बनना होता है।” उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि आपको इस पल का मजा लेना चाहिए, और बिल्कुल भी दबाव नहीं लेना चाहिए। आप जैसे घरेलू क्रिकेट में इतने सारे मैच खेले हैं, वैसे ही यहां खेलें। समर्थन के लिए 14 और खिलाड़ी आपके साथ हैं। इसलिए, दबाव के बजाय इस पल का मजा लें। ऑल द बेस्ट।” 33 साल के सारांश ने मध्यप्रदेश के लिए 2014 में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में डेब्यू किया। 12 साल के लंबे और शानदार सफल घरेलू करियर के बाद सारांश को भारतीय टीम के लिए डेब्यू करने का मौका मिला है। सारांश 1998 में रॉबिन सिंह के बाद 33 साल की उम्र में टेस्ट खेलने वाले सबसे उम्रदराज भारतीय खिलाड़ी भी हैं। दिलचस्प बात यह है कि मुरली विजय और मोहम्मद शमी के बाद सारांश तीसरे ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने आईपीएल कॉन्ट्रैक्ट मिलने से पहले टेस्ट डेब्यू किया। सारांश ने 54 प्रथम श्रेणी मैचों में 31.75 की औसत से 2,223 रन बनाने के साथ ही 188 विकेट ले चुके हैं। मध्यप्रदेश रणजी ट्रॉफी जीतने वाली टीम के सदस्य रहे हैं। इंडिया ए टीम के लिए भी खेल चुके हैं।

एक महीने बाद फिर शुरू हुआ हंगरी का पाक्स न्यूक्लियर प्लांट, नदी का जलस्‍तर सुधरने से चालू हुआ टरबाइन

बुडापेस्ट। हंगरी के प्रधानमंत्री पीटर मैग्यार ने कहा है कि पाक्स परमाणु ऊर्जा संयंत्र की यूनिट-3 का टरबाइन 6 दोबारा चालू कर दिया गया है। यह संभव हो सका क्योंकि आपातकालीन निर्माण कार्यों और डेन्यूब नदी में जलस्तर बढ़ने से रिएक्टर को ठंडा रखने की स्थिति में सुधार हुआ है। यूनिट-3 का टरबाइन 6 इस महीने की शुरुआत में बंद कर दिया गया था। उस समय डेन्यूब नदी का जलस्तर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया था, जिससे संयंत्र को ठंडा करने के ल‍िए नदी से पर्याप्त मात्रा में पानी लेना मुश्किल हो गया था। बुडापेस्ट से लगभग 100 किलोमीटर दक्षिण में स्थित पाक्स परमाणु ऊर्जा संयंत्र में चार वीवीईआर-440 रिएक्टर यूनिट और कुल आठ टरबाइन हैं। यह संयंत्र सामान्य तौर पर हंगरी की कुल बिजली जरूरत का लगभग आधा हिस्सा पूरा करता है। इसके सभी चार रिएक्टरों को ठंडा रखने के लिए डेन्यूब नदी के पानी पर निर्भर रहना पड़ता है। जुलाई के अंत में नदी का जलस्तर बहुत कम हो जाने के कारण संयंत्र को बिजली उत्पादन में भारी कटौती करनी पड़ी थी। संकट के सबसे कठिन दौर में केवल एक टरबाइन ही चालू था। बाद में हालात कुछ बेहतर होने पर 10 अगस्त को दूसरा टरबाइन भी दोबारा शुरू किया गया। शनिवार शाम संयंत्र से किए गए एक लाइव प्रसारण के दौरान मैग्यार ने कहा, “अगर सब कुछ योजना के अनुसार चलता है, तो बुधवार तक परमाणु ऊर्जा संयंत्र अपनी 2,000 मेगावाट की पूरी क्षमता पर पहुंच जाएगा। पहले टरबाइन के बंद होने के लगभग एक महीने बाद सभी आठों टरबाइन फिर से चालू हो जाएंगे।” पिछले सप्ताह सरकार ने संयंत्र के लिए ठंडा करने वाले पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कई आपातकालीन कदम उठाए थे। इन उपायों में पाक्स और डुनास्जेटबेनेडेक के बीच डेन्यूब नदी पर एक डूबा हुआ बांध (वियर) बनाना और नदी के एक हिस्से में 80-मीटर के दो बजरे (बड़ी नाव) को नियंत्रित तरीके से डुबोना शामिल था। मैग्यार ने कहा कि आंशिक रूप से बने बांध और दो बजरे ने प्लांट के पास जलस्तर को लगभग 15 सेंटीमीटर बढ़ा दिया है। इससे डेन्यूब में जलस्तर बहुत कम होने के बावजूद उस समय चल रही दो टरबाइन को चालू रखने में मदद मिली।

12 घंटे में यूक्रेन के 250 ड्रोन मार गिराए, 19 इलाकों में एयर डिफेंस एक्टिव : रूस

मॉस्को। रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि उसकी वायु रक्षा प्रणालियों ने 12 घंटों के भीतर यूक्रेन के 250 ड्रोन को नष्ट कर दिया। मंत्रालय के अनुसार, शनिवार सुबह 8 बजे से शाम 8 बजे (मॉस्को समय) के बीच रूसी एयर डिफेंस सिस्टम ने मॉस्को समेत 19 इलाकों में 250 यूक्रेनी फिक्स्ड-विंग ड्रोन मार गिराए। इसके अलावा, मॉस्को के मेयर सर्गेई सोब्यानिन ने बताया कि पिछले एक सप्ताह में मॉस्को क्षेत्र की ओर उड़ान भरने वाले ड्रोन की संख्या 2,600 से अधिक रही है। उन्होंने कहा कि इनमें से ज्यादातर ड्रोन शहर से दूर बाहरी इलाकों में ही वायु रक्षा प्रणालियों की ओर से निष्क्रिय कर दिए गए। मेयर के अनुसार, मॉस्को की ओर आते समय कुल 493 ड्रोन नष्ट किए गए। इससे पहले शुक्रवार को रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि रूसी सेना ने पिछले एक सप्ताह में 11 बस्तियों पर कब्जा किया और यूक्रेनी सेना के खिलाफ एक बड़े और नौ सामूहिक हमले किए। मंत्रालय के मुताबिक, ये 11 बस्तियां खारकीव, डोनबास और जापोरिज्जिया क्षेत्रों में स्थित हैं। रूसी हमलों का निशाना यूक्रेन के रक्षा उद्योग से जुड़े प्रतिष्ठान, लॉजिस्टिक्स हब, ऊर्जा और परिवहन ढांचा, जमीनी रोबोटिक सिस्टम बनाने वाली इकाइयां, ड्रोन निर्माण केंद्र और उनसे जुड़े अन्य संयंत्र थे। मंत्रालय ने कहा कि मिसाइल लॉन्चिंग ठिकानों, गोला-बारूद और ईंधन भंडार, आपूर्ति केंद्रों तथा यूक्रेनी सैनिकों और विदेशी लड़ाकों के अस्थायी ठिकानों पर भी हमले किए गए। पब्लिक ब्रॉडकास्टर ‘सुस्पिलने’ के अनुसार, यूक्रेनी ऊर्जा मंत्री डेनिस श्म्यहाल ने शुक्रवार को कहा कि सरकार ने सर्दियों से पहले ऊर्जा सुविधाओं की सुरक्षा और विभिन्न क्षेत्रों की तैयारी मजबूत करने के लिए 35 अरब रिव्निया (लगभग 78.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर) आवंटित किए हैं। सुस्पिलने के अनुसार, संसद को संबोधित करते हुए श्म्यहाल ने कहा कि लगभग 200 द्वितीय-स्तरीय सुरक्षा ढांचों का निर्माण पहले ही पूरा किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि कोई भी रक्षा प्रणाली 100 प्रतिशत सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकती, लेकिन जिन ऊर्जा सुविधाओं को संरक्षित किया गया है, उन्हें नुकसान होने की स्थिति में कुछ ही हफ्तों में दोबारा ठीक किया जा सकता है।

लिस्बन पहुंचा आईएनएस सुदर्शिनी, दुनिया को दे रहा है दोस्ती का संदेश

नई दिल्ली।भारतीय नौसेना का पाल प्रशिक्षण पोत आईएनएस सुदर्शिनी पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन पहुंचा है। अपनी लंबी समुद्री यात्रा ‘लोकायन 2026’ के तहत तीन मस्तूलों वाला यह शानदार नौसैनिक पोत टैगस नदी से होते हुए लिस्बन पहुंचा। इस दौरान पारंपरिक नौकायन तथा समुद्री कौशल का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। नौसेना के मुताबिक लिस्बन, आईएनएस सुदर्शिनी की 7 महीने लंबी समुद्री यात्रा का 15वां बंदरगाह पड़ाव है। इतने लंबे समुद्री अभियान के दौरान यह पोत विभिन्न देशों के बंदरगाहों तक पहुंचकर भारत की समुद्री परंपरा, नौकायन कौशल और मित्रता का संदेश पहुंचा रहा है। तीन मस्तूलों और पारंपरिक पालों से सुसज्जित आईएनएस सुदर्शिनी को देखकर समुद्री यात्रा की पुरानी परंपराओं की झलक भी मिलती है। आधुनिक नौसैनिक तकनीक के दौर में यह पोत प्रशिक्षु नौसैनिकों को समुद्र की परिस्थितियों को समझने, पारंपरिक नौकायन कौशल सीखने और चुनौतीपूर्ण समुद्री वातावरण में काम करने का व्यावहारिक अनुभव देता है। आईएनएस सुदर्शिनी की यह लिस्बन यात्रा काफी महत्वपूर्ण है। यह भारत और पुर्तगाल के बीच लंबे समय से चले आ रहे समुद्री संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। इस यात्रा के दौरान पोत पर तैनात नौसैनिक अधिकारी, चालक दल और प्रशिक्षण ले रहे कैडेट यहां पुर्तगाली नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों, स्थानीय प्रशासन तथा वहां रह रहे भारतीय समुदाय के साथ विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। पुर्तगाल की इस यात्रा में पेशेवर अनुभवों का आदान-प्रदान किया जाएगा। दोनों नौसेनाओं के बीच जहाजों का पारस्परिक निरीक्षण और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन गतिविधियों का उद्देश्य दोनों देशों के नौसैनिकों के बीच आपसी समझ और सहयोग को बढ़ाना है। दरअसल ‘लोकायन 2026’ केवल एक प्रशिक्षण अभियान नहीं है, बल्कि इसके जरिए भारत दुनिया के विभिन्न देशों के साथ मित्रता, सहयोग और सौहार्द के रिश्तों को मजबूत करने का संदेश भी दे रहा है। लिस्बन में आईएनएस सुदर्शिनी की मौजूदगी भारत और पुर्तगाल के बीच समुद्री संपर्क की ऐतिहासिक विरासत को भी रेखांकित करती है। भारतीय नौसेना का यह पाल पोत जहां एक ओर प्रशिक्षु नौसैनिकों को समुद्र की चुनौतियों के लिए तैयार कर रहा है, वहीं दूसरी ओर विभिन्न देशों में भारत की समुद्री विरासत और वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना का संदेश भी पहुंचा रहा है। लोकायन 2026 के तहत आईएनएस सुदर्शिनी की यात्रा लगातार आगे बढ़ रही है और हर नया पड़ाव भारत की समुद्री मित्रता को दुनिया के नए हिस्सों तक पहुंचा रहा है।

राफेल लड़ाकू विमानों व सुखोई-30 एमकेएम के साथ भारतीय वायु सेना के युद्धाभ्यास

नई दिल्ली।भारतीय वायु सेना ने दो महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यासों को अंजाम दिया है। इन युद्धाभ्यासों में ऑस्ट्रेलिया में आयोजित ‘पिच ब्लैक 2026’ और मलेशिया में किया गया ‘उदारा शक्ति 2026’ शामिल हैं। भारतीय वायुसेना के योद्धा यहां राफेल लड़ाकू विमानों, सुखोई-30एमकेएम और एफ ए-18 हॉर्नेट विमानों के साथ नजर आए। दोनों युद्धाभ्यासों में भारतीय वायु सेना की ऑपरेशनल पहुंच, सामरिक समन्वय और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक रक्षा साझेदारियों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित की गई। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि ऑस्ट्रेलियाई ‘पिच ब्लैक 2026’ अभ्यास के दौरान भारतीय वायु सेना ने 20 से अधिक देशों की वायु सेनाओं के साथ यह अभ्यास किया। यहां भारतीय वायु सेना ने अपने फ्रंट लाइन लड़ाकू विमान ‘राफेल’ तैनात किए थे। यहां उच्च जोखिम वाले और बहु-क्षेत्रीय ऑपरेशनल वातावरण में आयोजित जटिल लार्ज फोर्स एम्प्लॉयमेंट मिशनों को अंजाम दिया गया। वायुसेना का मानना है कि इस अभ्यास ने साझेदार देशों के बीच बेहतर तालमेल, अनुभवों से सीखने और संयुक्त रूप से प्रभावी ढंग से काम करने की क्षमता को बढ़ावा दिया। वायुसेना की टुकड़ी ऑस्ट्रेलिया में अभियान पूरा करने के बाद सीधे ‘उदारा शक्ति 2026’ अभ्यास के लिए मलेशिया के सुबांग पहुंची। यहां वायु योद्धाओं ने रॉयल मलेशियाई वायु सेना के साथ मिलकर सुखोई-30एमकेएम और एफ ए-18 हॉर्नेट विमानों के साथ युद्धाभ्यास किया। यह उच्च-तीव्रता वाला हवाई युद्ध अभियानों एवं संयुक्त सामरिक युद्धाभ्यास था। इस द्विपक्षीय अभ्यास का मुख्य उद्देश्य हवाई युद्ध की रणनीति को बेहतर बनाना, विषय विशेषज्ञों के बीच अनुभवों (एसएमईई) का आदान-प्रदान करना और संयुक्त परिचालन क्षमता को अधिक प्रभावी बनाना था। इन दोनों ही युद्धाभ्यासों के दौरान वायुसेना की गतिविधियां केवल कॉकपिट तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि रखरखाव की प्रक्रियाओं, मिशन योजना से जुड़ी जानकारी के आदान-प्रदान और सांस्कृतिक मेल-जोल तक विस्तारित हुईं। इससे दोनों देशों के विभिन्न रैंकों के सैन्यकर्मियों के बीच पेशेवर संबंध व आपसी भाईचारा और मजबूत हुआ।