मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने लॉन्च किया ‘बिहार विद्या साथी’, 75 हजार शिक्षक देंगे ऑनलाइन सहयोग

पटना। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को राज्य के 38 जिलों के 700 सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल विद्यालयों में विद्यार्थियों के लिए 24 घंटे उपलब्ध रहने वाले ‘बिहार विद्या साथी’ ऐप की शुरुआत की। लोक सेवक आवास स्थित ‘संकल्प’ सभागार से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से शुरू किए गए इस डिजिटल प्लेटफॉर्म से करीब तीन लाख विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की दिशा में ‘बिहार विद्या साथी’ महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से विद्यार्थी जब चाहें और जहां से चाहें, पढ़ाई से जुड़ी अपनी समस्याओं का समाधान प्राप्त कर सकेंगे। कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए 24 घंटे लाइव शिक्षक उपलब्ध रहेंगे। उन्होंने बताया कि विद्यार्थी अपनी आवश्यकता और पसंद के अनुसार शिक्षक का चयन कर वन-टू-वन संवाद के माध्यम से पढ़ाई कर सकेंगे। इसके लिए करीब 75 हजार शिक्षक विद्यार्थियों को व्यक्तिगत शैक्षणिक सहयोग उपलब्ध कराएंगे। पढ़ाई के दौरान पाठ से संबंधित किसी समस्या का त्वरित और नि:शुल्क समाधान भी इस मंच के माध्यम से मिल सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कक्षा 9वीं और 10वीं के विद्यार्थियों को सभी विषयों के लिए लाइव ट्यूटर सपोर्ट मिलेगा, जबकि कक्षा 11वीं और 12वीं के विज्ञान वर्ग के विद्यार्थियों के लिए बिहार बोर्ड के साथ जेईई और नीट की तैयारी के लिए डिजिटल अध्ययन सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि आधुनिक एआई आधारित टूल्स के माध्यम से विद्यार्थियों की अवधारणात्मक समझ को मजबूत किया जाएगा। विद्यार्थियों को असीमित अध्ययन और अभ्यास की सुविधा भी मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि 700 विद्यालयों से शुरू की जा रही यह व्यवस्था आगे राज्य के अन्य विद्यालयों तक भी विस्तारित की जाएगी। सम्राट चौधरी ने विद्यार्थियों से अपील की कि वे इस सुविधा का भरपूर लाभ उठाएं और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान कर ज्ञान एवं कौशल को मजबूत करें। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि विद्यार्थी जहां भी हों और जब भी पढ़ें, उनके सवालों का जवाब और शिक्षक का सहयोग हमेशा उपलब्ध रहे। कार्यक्रम के दौरान ‘बिहार विद्या साथी’ ऐप पर आधारित एक लघु फिल्म दिखाई गई। राजकीय कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय, शास्त्रीनगर की छात्राओं जाह्नवी और जिया ने ऐप के उपयोग का प्रदर्शन किया तथा इससे मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी दी। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, उप मुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, शिक्षा विभाग के सचिव राजीव रौशन और बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष डॉ. त्यागराजन एस.एम. समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी जिलों के जिलाधिकारी और विद्यार्थी भी जुड़े।

रीढ़ को बनाना है लचीला और मन को शांत, ‘हाफ कैमल पोज’ है रामबाण उपाय

नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में घंटों एक ही जगह बैठकर काम करना हमारी आदत का हिस्सा बन गया है। इसका असर हमारी रीढ़ की हड्डी, कंधों और गर्दन पर पड़ता है। ऐसे में अर्द्धउष्ट्रासन एक ऐसा उपाय है, जो शरीर को लचीला बनाने के साथ-साथ मन को भी शांत रखता है। ‘अर्द्धउष्ट्रासन’ के नाम से ही ज्ञात होता है कि यह उष्ट्रासन, यानी ऊंट के समान दिखने वाले आसन का आधा रूप है। इसे ‘हाफ कैमल पोज’ के नाम से भी जाना जाता है, जो पूर्ण उष्ट्रासन का एक कम तीव्र रूप है। यह आसन रीढ़ को लचीला बनाने, तनाव को कम करने और शरीर को ऊर्जावान रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आयुष मंत्रालय ने इस आसन के प्रभावशाली फायदों पर रोशनी डाली है। उनके अनुसार, यह पीठ और गर्दन की ताकत को बढ़ाता है। ज्यादातर लोग लंबे समय तक बैठने या मोबाइल देखने की वजह से गर्दन और पीठ दर्द से परेशान रहते हैं। यह आसन उनके लिए राहत देने वाला योगासन है। साथ ही, यह आसन ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है, जिससे शरीर के सभी अंगों को पर्याप्त खून और ऑक्सीजन मिलती है, जिससे शरीर तरोताजा और ऊर्जावान महसूस करता है। इसके अलावा, अर्ध उष्ट्रासन कब्ज और कमर दर्द से राहत देने में भी मददगार है। जब हम इस आसन को नियमित करते हैं, तो पेट की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं और पाचन तंत्र मजबूत होता है। इससे कब्ज जैसी समस्याएं दूर होती हैं और पेट हल्का महसूस होता है। इस योगासन से मानसिक तनाव भी कम होता है। जब शरीर ठीक रहता है तो हमारा मन भी खुश और शांत रहता है। आयुष मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अगर आपको कमर या घुटनों में कोई तकलीफ है तो बिना डॉक्टर से सलाह लिए इस आसन को न करें। अर्द्धउष्ट्रासन एक ऐसा योगासन है, जो सरल होने के साथ-साथ अनेक लाभ प्रदान करता है। इसे योग प्रशिक्षक की देखरेख में शुरू करने से सही तकनीक और सुरक्षा सुनिश्चित होती है। इस आसन को अपनी दिनचर्या में शामिल कर स्वस्थ, लचीला और ऊर्जावान जीवन जिया जा सकता है।

नोएडा में सावन के आखिरी सोमवार पर मंदिरों में उमड़ा आस्था का सैलाब

नोएडा। सावन के आखिरी सोमवार के अवसर पर सोमवार को नोएडा और आसपास के क्षेत्रों के शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह तड़के से ही श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए मंदिरों में पहुंचने लगे। कई प्रमुख मंदिरों के बाहर सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारों से मंदिर परिसर और आसपास का वातावरण भक्तिमय नजर आया। सावन के अंतिम सोमवार को देखते हुए मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और भगवान शिव के जलाभिषेक की व्यवस्था की गई। श्रद्धालुओं ने शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर भगवान शिव की आराधना की। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। महिलाओं और युवाओं के साथ बड़ी संख्या में बुजुर्ग श्रद्धालु भी पूजा-अर्चना के लिए मंदिरों में पहुंचे। भक्तों की भीड़ को देखते हुए मंदिर समितियों की ओर से व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए। श्रद्धालुओं के लिए कतारबद्ध तरीके से दर्शन कराने, पेयजल उपलब्ध कराने और मंदिर परिसर में भीड़ को नियंत्रित करने की व्यवस्था की गई। कई स्थानों पर स्वयंसेवकों को भी तैनात किया गया, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो। सुरक्षा को लेकर भी स्थानीय स्तर पर विशेष सतर्कता बरती गई। सावन के आखिरी सोमवार को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। सुबह के समय मंदिरों में भीड़ सबसे अधिक रही। कई भक्तों ने व्रत रखा और पूरे दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने का संकल्प लिया। मंदिरों में विशेष शृंगार और धार्मिक अनुष्ठानों का भी आयोजन किया गया। कहीं भजन-कीर्तन तो कहीं शिव आराधना के विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। धार्मिक मान्यता के अनुसार सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है और इस दौरान सोमवार का विशेष महत्व होता है। इसी वजह से सावन के प्रत्येक सोमवार को शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। सावन के अंतिम सोमवार को भक्तों में विशेष आस्था देखने को मिली। अब सावन का महीना 28 अगस्त को रक्षाबंधन पर्व के साथ समाप्त होगा। सावन के समापन से पहले आखिरी सोमवार को लेकर नोएडा में सुबह से ही धार्मिक उत्साह का माहौल बना रहा। मंदिरों में दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं ने पूरे श्रद्धाभाव के साथ भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया और सावन के अंतिम सोमवार को धार्मिक आस्था के साथ मनाया।

उत्तर कोरिया ने जापानी नेताओं के यासुकुनी दौरे पर कहा, ‘ये द्वीपीय देश में तबाही का तूफान लाएगा’

सोल। उत्तर कोरिया ने जापानी नेताओं और सांसदों के विवादित यासुकुनी युद्ध स्मारक दौरे और वहां धार्मिक चढ़ावे भेजने की कड़ी निंदा करते हुए इसे “नियो-मिलिटेरिज्म फ्रेंजी” (नए सैन्यवाद का उन्माद) करार दिया है। प्योंगयांग के मुताबिक रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी का दौरा द्वीपीय देश में तबाही का तूफान लेकर आएगा। योनहाप न्यूज एजेंसी ने बताया कि उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए में प्रकाशित एक टिप्पणी में जापानी राजनेताओं पर सैन्य महत्वाकांक्षाओं को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया। यह प्रतिक्रिया 15 अगस्त को जापान के द्वितीय विश्व युद्ध में आत्मसमर्पण की वर्षगांठ पर यासुकुनी श्राइन में जापानी नेताओं और सांसदों की गतिविधियों के बाद आई है। इसमें कहा गया है कि जापानी प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची की “अचानक की गई उपासना ” से देश भर में “फिर से हमले का माहौल बनाने की उनकी योजना” और “विदेशों में विस्तार की अपनी पुरानी इच्छा को पूरा करने” की उनकी कोशिशें जाहिर हुईं। केसीएनए ने कहा, “अपनी हार के मौके पर जापान की तरफ से भड़काया गया नया सैन्यवादी उन्माद इस द्वीपीय देश में तबाही का तूफान लाएगा।” यासुकुनी श्राइन जापान के युद्ध में मारे गए करीब 24.6 लाख लोगों को सम्मान देता है। इनमें द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान युद्ध अपराधों के लिए दोषी ठहराए गए 14 वर्ग-ए युद्ध अपराधी भी शामिल हैं। इसी वजह से दक्षिण कोरिया और चीन समेत जापान के पड़ोसी देश वहां जापानी नेताओं के दौरे को जापान के सैन्य अतीत को महिमामंडित करने की कोशिश के तौर पर देखते हैं। 15 अगस्त को जापानी प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने यासुकुनी श्राइन के लिए कुछ भेंट भेजी, लेकिन स्वयं वहां नहीं गईं। वहीं जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने श्राइन का दौरा किया। दक्षिण कोरिया ने भी इन दौरों पर कड़ी आपत्ति जताई थी। सोल ने जापान से अपने युद्धकालीन इतिहास का सामना करने और अतीत के लिए वास्तविक पश्चाताप दिखाने की अपील की थी। जापान अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने और राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्योंगयांग पहले भी जापान के सैन्य विस्तार और सुरक्षा नीतियों को ‘नव-सैन्यवाद’ बताते हुए उसकी आलोचना करता रहा है।

दिल्ली: एच1एन1 के बढ़ते मामले को लेकर एक्शन में स्वास्थ्य मंत्री, बुलाई उच्चस्तरीय बैठक

नई दिल्ली। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज सिंह ने सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में एच1एन1 (स्वाइन फ्लू) और वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम और नियंत्रण के लिए वर्तमान स्थिति और तैयारियों पर चर्चा करने के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। यह बैठक दोपहर 2 बजे दिल्ली सचिवालय में आयोजित होने वाली है और इसमें स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। बैठक के दौरान, स्वास्थ्य मंत्री द्वारा मौजूदा स्थिति और विभिन्न मौसमी और वेक्टर जनित रोगों के प्रसार को रोकने और नियंत्रित करने के लिए उठाए जा रहे उपायों की समीक्षा किए जाने की उम्मीद है। चर्चा में अस्पतालों की तैयारियों, निगरानी प्रणालियों और मामलों में संभावित वृद्धि से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग की तत्परता पर भी ध्यान केंद्रित किए जाने की संभावना है। इस बैठक में विशेष रूप से स्वाइन फ्लू, डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों के प्रसार को रोकने के लिए उठाए जा रहे कदमों और स्थिति की समीक्षा की जाएगी। डॉ. पंकज सिंह द्वारा दिल्ली भर में बीमारी की मौजूदा स्थिति के संबंध में अधिकारियों से विस्तृत जानकारी प्राप्त करने की उम्मीद है। वे जमीनी स्तर पर निगरानी को मजबूत करने और आने वाले दिनों में संभावित मामलों से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों को बढ़ाने के संबंध में निर्देश भी दे सकते हैं। दिल्ली में मानसून के मौसम के दौरान मौसमी और वेक्टर जनित बीमारियों के बढ़ते खतरे को देखते हुए इस बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस बीच, सफदरजंग अस्पताल ने कहा कि वह स्वाइन फ्लू (एच1एन1 इन्फ्लूएंजा) और अन्य मौसमी बीमारियों से पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए पूरी तरह से सुसज्जित है। अस्पताल ने बताया कि मरीजों के लिए आवश्यक दवाएं, उपचार सुविधाएं और सहायक देखभाल उपलब्ध हैं। दिल्ली में 20 अगस्त को इन्फ्लूएंजा के 159 नए मामले दर्ज किए गए, जिनमें एच1एन1 के 114 मामले शामिल हैं। इसके साथ ही 2026 में एच1एन1 के कुल मामलों की संख्या 1,777 हो गई है। इन्फ्लूएंजा ए के मामले भी बढ़कर 2,392 हो गए हैं। एच1एन1 इन्फ्लूएंजा ए का एक उपप्रकार है और इसे आमतौर पर स्वाइन फ्लू के नाम से जाना जाता है। राष्ट्रीय राजधानी में 2026 में अब तक इन्फ्लूएंजा के कुल 2,602 मामले सामने आए हैं, जिनमें इन्फ्लूएंजा ए के 2,392 और इन्फ्लूएंजा बी के 210 मामले शामिल हैं। 20 अगस्त को इन्फ्लूएंजा बी के चार नए मामले सामने आए, जिससे कुल संख्या 210 हो गई। एच1एन1 इन्फ्लूएंजा ए वायरस का एक उपप्रकार है, जो श्वसन संबंधी बीमारी का कारण बनता है। 2009 के इन्फ्लूएंजा महामारी के दौरान इसे व्यापक रूप से “स्वाइन फ्लू” के नाम से जाना जाने लगा और बाद में यह मनुष्यों में फैलने वाले मौसमी इन्फ्लूएंजा वायरसों में से एक बन गया। इन्फ्लूएंजा के सामान्य लक्षणों में बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, शरीर में दर्द, थकान और नाक बहना या बंद होना शामिल हैं। कई मामलों में लोग कुछ दिनों से लेकर लगभग एक सप्ताह के भीतर ठीक हो जाते हैं। हालांकि, इन्फ्लूएंजा कभी-कभी गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है। खासकर बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और कुछ गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त लोगों में। गंभीर श्वसन संबंधी लक्षण, लगातार तेज बुखार, सांस लेने में कठिनाई, सीने में तकलीफ, भ्रम या स्थिति के बिगड़ने पर तुरंत चिकित्सा जांच की आवश्यकता हो सकती है। इन्फ्लूएंजा मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बात करने पर निकलने वाली श्वसन बूंदों और कणों के माध्यम से फैलता है। हाथों की अच्छी स्वच्छता बनाए रखना, खांसते और छींकते समय मुंह ढकना और बीमार लोगों के निकट संपर्क से बचना संक्रमण के प्रसार को कम करने में सहायक हो सकता है। मौसमी इन्फ्लूएंजा का टीकाकरण भी एक महत्वपूर्ण निवारक उपाय है। खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें जटिलताओं का अधिक खतरा होता है।

27 अगस्त को होगा ‘खेलो इंडिया संवाद’ का आयोजन, पीएम मोदी करेंगे युवाओं को संबोधित

नई दिल्ली। राष्ट्रीय खेल दिवस के मौके पर 27 अगस्त को देश भर में एक बड़ा कार्यक्रम “खेलो इंडिया संवाद – खेल की बात, प्रधानमंत्री के साथ” आयोजित किया जाएगा। इस पहल के जरिए देश भर में 1,500 से ज्यादा जगहों पर युवाओं, खिलाड़ियों और शिक्षण संस्थानों को एक साथ लाया जाएगा। इस दौरान पीएम मोदी युवाओं को संबोधित करेंगे। इसके साथ ही खेल जगत की बड़ी हस्तियां भी युवाओं से सीधा संवाद करेंगी। आईआईटी, आईआईएम, एनआईटी, एम्स, प्रमुख मेडिकल कॉलेज और यूनिवर्सिटीज के साथ-साथ अन्य बड़े शिक्षण संस्थान भी इस देशव्यापी अभियान में हिस्सा लेंगे। यह कार्यक्रम खेल-प्रेमी युवाओं और भारत के नीति-निर्माताओं के बीच सीधी बातचीत कराने की एक बड़ी कोशिश है, जिससे युवाओं को अपने विचार, अनुभव और सुझाव साझा करने का मौका मिलेगा। युवा, खेल और युवाओं से जुड़े चार मुख्य विषयों पर अपने विचार, सुझाव और नए आइडिया साझा करेंगे। पहला, बेहतर सुविधाएं, कोचिंग और मौके जमीनी स्तर तक पहुंचाकर खेल इकोसिस्टम को मजबूत करना। दूसरा, वैज्ञानिक तरीके से टैलेंट की पहचान और एथलीट के विकास पर ध्यान देते हुए 2036 ओलंपिक के लिए टैलेंट को तैयार करना। तीसरा, युवा नेतृत्व को मजबूत करना और शासन-प्रशासन में युवाओं की भागीदारी बढ़ाना। चौथा, विकसित भारत के लिए युवाओं का सशक्तिकरण, जिसमें भविष्य के लिए जरूरी स्किल्स, वॉलंटियरिंग और राष्ट्र-निर्माण के मौके शामिल हैं। इस कार्यक्रम के जरिए मिले सुझाव सीधे पॉलिसी बनाने वालों और खेल इकोसिस्टम तक पहुंचाए जाएंगे, जिससे जमीनी स्तर के अनुभवों और युवाओं की उम्मीदों को पॉलिसी बनाने की प्रक्रिया से जोड़ने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे और देश भर के युवाओं को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम की शुरुआत ‘माई भारत’ के स्वयंसेवकों के स्वागत भाषण से होगी। इसके बाद एक खास वीडियो दिखाया जाएगा, जिसमें पिछले 12 वर्षों में भारत के खेल इकोसिस्टम में आए बड़े बदलावों को उजागर किया जाएगा। खेल और युवा शक्ति पर प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस संदेश की मुख्य बातें भी दिखाई जाएंगी। इसके बाद पीएम मोदी का वर्चुअल संबोधन होगा। प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद, देश भर में 1,500 से अधिक जगहों पर कार्यक्रम शुरू होंगे। मनिका बत्रा, दीपा कर्मकार, साइना नेहवाल, गगन नारंग, श्रीजेश, मैरी कॉम, बाइचुंग भूटिया, गोपीचंद, अंजू बॉबी जॉर्ज, कर्णम मल्लेश्वरी, मीराबाई चानू, पी. टी. उषा और जाने-माने क्रिकेटरों समेत भारत के प्रमुख खिलाड़ी और मेडल जीतने वाले लोग युवाओं से सीधे बातचीत करेंगे। खिलाड़ी युवा प्रतिभागियों के साथ अपनी यात्रा, चुनौतियों, नाकामियों, कामयाबियों और खेल से जुड़े अनुभवों को साझा करेंगे। इसका मकसद युवाओं में यह भरोसा जगाना है कि एक चैंपियन का सफर किसी बड़े स्टेडियम से नहीं, बल्कि एक छोटे से मैदान और पहली कोशिश से शुरू होता है। इस कार्यक्रम में सांसद, विधायक, केंद्रीय मंत्री, राज्य मंत्री और राज्यों के खेल मंत्री हिस्सा लेंगे। ये चुने हुए प्रतिनिधि और गणमान्य व्यक्ति युवाओं से बातचीत करेंगे और चार मुख्य विषयों पर उनके विचार और सुझाव जानेंगे। इस कार्यक्रम के तहत ‘विकसित भारत युवा लीडर संवाद’ क्विज आयोजित की जाएगी। युवाओं को ‘माई भारत’ पोर्टल पर रजिस्टर करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा। इसका मकसद युवाओं को सिर्फ एक दिन के कार्यक्रम से आगे ले जाकर, उन्हें लंबे समय तक चलने वाले राष्ट्रीय युवा जुड़ाव इकोसिस्टम का हिस्सा बनाना है।

अपने ही स्कूल में शिक्षक बने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार, छात्रों से बोले- जीवन में बहुत कुछ सिखाता है विद्यालय

लखनऊ। भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार सोमवार को अपने पुराने विद्यालय कॉल्विन तालुकदार्स कॉलेज पहुंचे तो बीते दिनों की यादें ताजा हो गईं। कभी इसी विद्यालय में विद्यार्थी बनकर पढ़ाई करने वाले ज्ञानेश कुमार इस बार शिक्षक की भूमिका में नजर आए। उन्होंने कक्षा 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों से सीधे संवाद किया और उन्हें लोकतंत्र, चुनाव, मताधिकार तथा जिम्मेदार नागरिक बनने का पाठ पढ़ाया। अपने छात्र जीवन की यादों को साझा करते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि कॉलेज ने उन्हें केवल किताबी ज्ञान नहीं दिया, बल्कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए अनुशासन, चुनौतियों से लड़ने का साहस और सही विचारों को आत्मसात करने की क्षमता भी दी। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि स्कूल और कॉलेज का समय जीवन का ऐसा दौर होता है, जब अच्छे शिक्षक, वातावरण और अनुभव व्यक्तित्व को गढ़ने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि यहां के शिक्षकों ने उन्हें बहुत कुछ दिया और विद्यालय से मिली सीख आगे चलकर उनके जीवन में बेहद काम आई। विद्यार्थियों से संवाद के दौरान उन्होंने कहा कि जिस तरह उन्हें अपने विद्यालय से बहुत कुछ सीखने का अवसर मिला, उसी तरह आज के विद्यार्थियों को भी अपने शिक्षकों और विद्यालय के वातावरण से मिलने वाली सीख को ग्रहण करना चाहिए। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने विद्यार्थियों को लोकतंत्र में युवाओं की भूमिका से भी अवगत कराया। उन्होंने कहा कि मतदान महज एक अधिकार नहीं, बल्कि देश के भविष्य के निर्माण में भागीदारी का महत्वपूर्ण माध्यम है। जागरूक मतदाता ही मजबूत लोकतंत्र की आधारशिला रखते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने मताधिकार के साथ-साथ उससे जुड़ी जिम्मेदारियों को समझने के लिए प्रेरित किया। संवाद के दौरान विद्यार्थियों ने चुनाव प्रक्रिया, मतदाता बनने की पात्रता, मतदान और निष्पक्ष चुनाव से जुड़े कई सवाल पूछे। ज्ञानेश कुमार ने उनकी जिज्ञासाओं का जवाब देते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में युवा पीढ़ी की सक्रिय और जिम्मेदार भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि कक्षा 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के लिए यह समय खास है। इनमें से कई विद्यार्थी आने वाले समय में पहली बार मतदान करेंगे। ऐसे में उन्हें अभी से अपने अधिकारों, कर्तव्यों और लोकतांत्रिक मूल्यों को समझना चाहिए। कॉल्विन तालुकदार्स कॉलेज पहुंचने पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त अपने पुराने दिनों को याद कर भावुक भी नजर आए। उन्होंने कहा कि लखनऊ से उनका बहुत पुराना और गहरा नाता है। यहीं से शुरुआती शिक्षा हासिल करने के बाद वह उच्च शिक्षा के लिए आगे बढ़े। लंबे समय बाद अपने विद्यालय लौटकर विद्यार्थियों के बीच आना उनके लिए विशेष अनुभव रहा। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन में अलग-अलग दौर आते हैं। आज वे जिस दौर से गुजर रहे हैं, वह उनके व्यक्तित्व और भविष्य को आकार देने वाला समय है। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे अपने शिक्षकों की बातों, विद्यालय के वातावरण और यहां मिलने वाले अनुभवों से अधिक से अधिक सीखने का प्रयास करें। उन्होंने कहा, “इस कॉलेज ने जो-जो चीजें हमें सिखाईं, वे मेरे जीवन में आगे बहुत काम आईं। यहां के बच्चों से संवाद करते हुए मैंने उनसे यही कहा कि जीवन का यह समय ऐसा होता है, जब स्कूल बहुत सारी चीजें देता है। अच्छे शिक्षक और स्कूल का वातावरण बहुत कुछ सिखाते हैं। उन विचारों और सीख को ग्रहण करने वाला होना चाहिए।” ज्ञानेश कुमार ने विद्यार्थियों के साथ संवाद को सुखद अनुभव बताते हुए कहा कि उनके लिए यह मुलाकात एक तरह से अतीत और वर्तमान के बीच संवाद जैसी रही। एक दौर उनका था, जबकि दूसरा दौर आज इन विद्यार्थियों का है। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे समय में मुख्य निर्वाचन आयुक्त का उन विद्यार्थियों से संवाद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो आने वाले समय में मतदाता बनने जा रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान चुनावी साक्षरता और जागरूक मतदाता बनने का संदेश प्रमुखता से दिया गया।

पीयूष गोयल की जापानी कंपनियों से अपील, भारत में अपना परिचालन मजबूत करें; सुजुकी जैसी सफलता दोहराये

टोक्यो। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को जापानी कंपनियों से भारत में अपना परिचालन मजबूत करने की अपील करते हुए कहा कि वे सुजुकी जैसी सफलता को देश में दोहराये और हम भारत में काम कर रही जापानी कंपनियों में से 1,580 सुजुकी को उभरते हुए देखना चाहते हैं। जापान चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (जेसीसीआई) की जापान-भारत बिजनेस कंसल्टेटिव कमिटी (जेआईबीसीसी) और भारतीय दूतावास के साथ एक गोलमेज बैठक को संबोधित करते हुए, गोयल ने कहा कि भारत की युवा वर्कफोर्स, तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और लंबे समय की विकास की महत्वाकांक्षाएं जापानी व्यवसायों के लिए बड़े अवसर प्रदान करती हैं। गोयल ने देश में पिछले चार दशकों में सुजुकी के सफर का जिक्र करते हुए कहा, “आज हम भारत से कुछ सबसे बड़े और सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाले ऑपरेशन होते हुए देख रहे हैं।” केंद्रीय मंत्री ने कहा, “हम उन 1,580 कंपनियों के लिए ऐसा ही सफर देखना चाहते हैं जिनका आप प्रतिनिधित्व करते हैं। हम चाहते हैं कि भारत से 1,580 ‘सुजुकी’ जैसी कंपनियां उभरें।” गोयल ने कहा कि भारत और जापान को अपने राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ का इस्तेमाल व्यापारिक सहयोग को मजबूत करने और आने वाले दशक के लिए अपनी आर्थिक साझेदारी को आकार देने में करना चाहिए। उन्होंने कहा, “भारत में पहले से ही बड़ी संख्या में जापानी कंपनियां काम कर रही हैं। मेरा मानना ​​है कि इस दशक में यह संख्या मौजूदा स्तर से दोगुनी हो जानी चाहिए।” केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत की कामकाजी उम्र की आबादी की औसत आयु 30 साल से कम है और उम्मीद है कि यह कई दशकों तक युवा बनी रहेगी, जिससे जापानी कंपनियों को बड़ी संख्या में कुशल लोगों और उपभोक्ता बाजार तक पहुंच मिलेगी। उन्होंने भारत के उस लक्ष्य पर भी जोर दिया जिसके तहत देश अपनी आजादी के 100 साल पूरे होने पर, यानी 2047 तक, मौजूदा 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था से बढ़कर 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना चाहता है। गोयल ने कहा, “यह एक बड़ा लक्ष्य है, लेकिन 1.4 अरब भारतीय इसे हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।” केंद्रीय मंत्री 24 अगस्त से 27 अगस्त के बीच जापान की चार दिवसीय यात्रा पर हैं और 200 से ज्यादा प्रतिनिधियों वाले भारतीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं।

5-दिवसीय बैंकिंग और पीएलआई योजना को लेकर बैंक यूनियनों का आंदोलन तेज, 11 सितंबर को देशव्यापी हड़ताल का ऐलान

नई दिल्ली। बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों के नौ प्रमुख संगठनों के संयुक्त मंच यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन तेज करने का फैसला किया है। यूनियनों ने 11 सितंबर को राष्ट्रव्यापी हड़ताल की घोषणा की है। यूएफबीयू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती है तो 28 सितंबर से तीन दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल और उसके बाद 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी। इसके अलावा, यूएफबीयू ने कहा है कि सरकार और बैंक प्रबंधन द्वारा प्रमुख मांगों पर अपेक्षित प्रगति नहीं होने के कारण यह निर्णय लिया गया है। यह फैसला रविवार को आयोजित संगठन की बैठक में लिया गया। यदि प्रस्तावित हड़तालें लागू होती हैं, तो देशभर में विशेष रूप से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की सेवाओं पर व्यापक असर पड़ सकता है। बैंकिंग लेनदेन, शाखा सेवाएं, चेक क्लीयरिंग और अन्य नियमित कार्य प्रभावित होने की आशंका है। यूनियंस का कहना है कि पांच-दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था उनकी प्रमुख मांगों में शामिल है। यूएफबीयू के अनुसार, इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) ने 8 मार्च 2024 को हुए 12वें द्विपक्षीय समझौते और 9वें संयुक्त नोट के तहत इस प्रस्ताव पर सहमति जताई थी। प्रस्ताव के अनुसार, सोमवार से शुक्रवार तक प्रतिदिन कार्य अवधि में 40 मिनट की वृद्धि की जानी थी और शनिवार को अवकाश रखा जाना था। यूनियनों का आरोप है कि इस प्रस्ताव को सरकार के पास भेजे जाने के बावजूद दो वर्षों से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। यूनियंस ने बैंक अधिकारियों के लिए लागू की जा रही परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना का भी विरोध किया है। उनका कहना है कि सरकार द्वारा प्रस्तावित योजना और आईबीए के साथ हुई सहमति में अंतर है। यूएफबीयू के मुताबिक, सरकारी योजना के तहत स्केल-IV और उससे ऊपर के अधिकारियों को व्यक्तिगत प्रदर्शन के आधार पर 365 दिनों तक के मूल वेतन के बराबर पीएलआई मिल सकता है। वहीं कर्मचारी वर्ग और स्केल-III तक के अधिकारियों को अधिकतम 15 दिनों के मूल वेतन और महंगाई भत्ते के बराबर ही प्रोत्साहन राशि मिलेगी। यूनियनों का कहना है कि प्रोत्साहन प्रणाली बैंक के समग्र प्रदर्शन से जुड़ी होनी चाहिए और सभी कैडरों के लिए समानता सुनिश्चित करनी चाहिए। यूएफबीयू की अन्य प्रमुख मांगों में पेंशन का अद्यतन (पेंशन अपडेटेशन), पेंशनधारकों के लिए समान महंगाई भत्ता फॉर्मूला और राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के दायरे में आने वाले कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना में स्विच करने का विकल्प शामिल हैं।

रांची में बिना ट्रेड लाइसेंस के चल रहे 20 कोचिंग संस्थानों पर नगर निगम का शिकंजा, तीन दिन में सीलिंग की दी चेतावनी

रांची। झारखंड की राजधानी रांची में नियमों को दरकिनार कर चलाए जा रहे कोचिंग सेंटरों के खिलाफ नगर निगम ने सख्त अभियान शुरू किया है। निगम की इंफोर्समेंट टीम ने बिना वैध ट्रेड लाइसेंस के चल रहे 20 बड़े कोचिंग संस्थानों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इन सभी संस्थानों को चेतावनी दी गई है कि वे 72 घंटे (तीन दिन) के भीतर कागजी प्रक्रिया दुरुस्त कर लाइसेंस प्राप्त करें, अन्यथा उनके परिसरों को अनिश्चितकाल के लिए सील कर दिया जाएगा। नगर निगम की ओर से कराए गए सर्वे के अनुसार, राजधानी में करीब 1,364 व्यावसायिक शैक्षणिक संस्थान सक्रिय हैं, जिनमें कोचिंग संस्थानों की संख्या 831 है। चौंकाने वाली बात यह है कि इतनी बड़ी संख्या के बावजूद केवल 68 कोचिंग सेंटरों ने ही नगर निगम से ट्रेड लाइसेंस ले रखा है। राजस्व की इस भारी चपत और गैर-कानूनी संचालन को गंभीरता से लेते हुए निगम प्रशासन ने अब पूरे शहर में बड़े पैमाने पर जांच अभियान छेड़ने का निर्णय लिया है। निगम ने पहले चरण में जिन कोचिंग सेंटरों को नोटिस जारी किया है, उनमें अमान्स मोशन एकेडमी, न्यूटन ट्यूटोरियल्स, सीएलएटी प्रेप, पाठशाला, करियर फाउंडेशन, एमएस लर्निंग रिसोर्सेज, डिजाइन क्वेस्ट, एमबीए अचीवर्स, ग्रैविटी एजुकेशन, नेशनल सीएलएटी एकेडमी, मास्टर माइंड्स, पेजेस लाइब्रेरी, द ब्लैक बोर्ड, एके एकेडमी और हिनू स्थित डी-क्यूब क्लासेज समेत कई अन्य नाम शामिल हैं। निगम ने स्पष्ट किया है कि बिना पूर्व अनुमति या वैधानिक अनुज्ञप्ति के व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन ‘झारखंड नगरपालिका अधिनियम, 2011’ की धारा 455 तथा ‘झारखंड नगरपालिका अनुज्ञप्ति नियमावली, 2017’ की कंडिका 19 एवं 20 का सीधा उल्लंघन है। जारी नोटिस के जरिए संस्थानों को निर्देश दिया गया है कि वे समय सीमा के भीतर कानूनी औपचारिकताएं पूरी करें और अपने परिसरों से अवैध होर्डिंग्स व प्रचार सामग्री हटाएं। नगर निगम के अनुसार, शहर के कोने-कोने में चल रहे अन्य शैक्षणिक व व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की भी सघन जांच होगी। निर्धारित समयावधि बीतने के बाद बिना लाइसेंस पाए जाने वाले संस्थानों पर बिना किसी रियायत के सीलिंग की जाएगी।