हनुमानगढ़ी में दर्शन के बाद मछली की दावत उड़ाते हैं और फिर राम-राम चिल्लाते हैं’, सीएम योगी का अजय राय पर तंज

रायबरेली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को रायबरेली में कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को निशाने पर लिया। उन्होंने अजय राय पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस के नेता हनुमानगढ़ी में दर्शन करने जाते हैं, बाहर निकलकर मछली की दावत उड़ाते हैं और फिर राम-राम चिल्लाते हैं। सीएम योगी ने कहा, “बेशर्मी की भी एक सीमा होती है, इनके सामने तो गिरगिट भी शरमा जाए।” रायबरेली में 879 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करने पहुंचे मुख्यमंत्री ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर परिवारवाद की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इन दलों की राजनीति केवल अपने परिवारों तक सीमित रही है और उन्होंने देश के क्रांतिकारियों तथा महान नायकों को वह सम्मान नहीं दिया, जिसके वे हकदार थे। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर अयोध्या में राम मंदिर का विरोध करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस की राजनीति में विरोधाभास साफ दिखाई देता है। एक तरफ कांग्रेस के नेता मंदिर में दर्शन करते हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके आचरण और बयानों में विरोधाभास नजर आता है। कांग्रेस को यह समझना चाहिए कि भारत की आस्था और परंपरा किसी राजनीतिक दल की जागीर नहीं है। देश की जनता अपने महापुरुषों, धार्मिक आस्थाओं और सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करना जानती है। सीएम योगी ने कहा कि जो समाज अपने पूर्वजों को भूल जाता है, उसका कोई भविष्य नहीं होता। भारत की परंपरा, संस्कृति और आदर्शों को भुलाकर देश के खिलाफ षड्यंत्र करने का कुछ लोगों ने ठेका ले रखा है। उन्होंने मंगल पांडेय, नाना साहब, तात्या टोपे और रानी लक्ष्मीबाई के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वतंत्रता संग्राम की उसी ज्वाला को रायबरेली में राना बेनी माधव बख्श सिंह ने आगे बढ़ाया था। यही कारण है कि आज भी लोग उन्हें सम्मान के साथ याद करते हैं। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति के रूप में राहुल गांधी से देश को कोई अपेक्षा नहीं है, लेकिन नेता प्रतिपक्ष के रूप में वह संसद और लोकतंत्र के प्रति जवाबदेह हैं। राहुल गांधी ने संविधान की शपथ ली है, लेकिन भारत की परंपरा और विरासत को कोसना अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी उत्तर प्रदेश के बाहर जाकर यूपी को बदनाम करते हैं और देश के बाहर जाकर भारत का अपमान करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राहुल गांधी देश विरोधी तत्वों को प्रोत्साहित करने का काम करते हैं। सीएम योगी ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इन दलों की सोच रही है कि सम्मान केवल उनके परिवारों को मिले। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इन दलों ने भारत के महान क्रांतिकारियों और राष्ट्रनायकों को सम्मान देने के लिए क्या किया? उन्होंने कहा कि देश का इतिहास किसी एक परिवार तक सीमित नहीं है। भारत की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक व्यवस्था के निर्माण में असंख्य लोगों का योगदान रहा है और नई पीढ़ी को उनके संघर्ष और बलिदान से परिचित कराना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने वर्ष 1975 के आपातकाल का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि देश ने आपातकाल की ‘काली छाया’ देखी है। ऐसे में लोकतंत्र और संविधान की बात करने वालों को अपने अतीत को भी याद रखना चाहिए। उन्होंने जंतर-मंतर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित अभद्र भाषा के इस्तेमाल का भी जिक्र किया। सीएम योगी ने कहा कि बाद में संबंधित युवती और उसके माता-पिता ने स्वीकार किया कि उनकी ओर से गलत बात कही गई थी। उन्होंने सवाल किया कि कुछ लोग देश को ‘अर्बन नक्सलियों’ के हाथों क्यों सौंपना चाहते हैं। जब भारतीय सेना सीमा पर दुश्मनों से मुकाबला करती है तो कुछ लोग उससे सवाल पूछते हैं। वहीं, अयोध्या में भगवान श्रीराम के अस्तित्व पर सवाल उठाने वालों की राजनीति भी देश देख चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा, आस्था और सांस्कृतिक विरासत के मुद्दों पर दोहरे मापदंड नहीं चल सकते। उन्होंने कहा कि रायबरेली की धरती स्वतंत्रता संग्राम के महानायक राना बेनी माधव बख्श सिंह की कर्मभूमि रही है और इस ऐतिहासिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना सभी की जिम्मेदारी है।
सिंटा विवाद पर पूनम ढिल्लो और पद्मिनी कोल्हापुरे बोलीं-‘तानाशाही होती तो 8 लोगों की सहमति क्यों जरूरी होती’

मुंबई। सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (सिंटा) के भीतर चल रहा विवाद अब और गहराता जा रहा है। संस्था की अध्यक्ष पूनम ढिल्लो और वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद्मिनी कोल्हापुरे ने पूर्व महासचिव उपासना सिंह की ओर से लगाए गए आरोपों पर खुलकर जवाब दिया है। उपासना ने दोनों वरिष्ठ अभिनेत्रियों पर संस्था को कथित तौर पर तानाशाही और गैर लोकतांत्रिक तरीके से चलाने का आरोप लगाया था। अब पूनम और पद्मिनी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन आरोपों को खारिज करते हुए अपना पक्ष रखा। जहां पूनम ने कहा कि आरोपों से सिंटा की छवि को नुकसान पहुंचा है, वहीं पद्मिनी ने सवाल किया कि अगर संस्था पर उनका और पूनम का पूरा नियंत्रण होता तो एग्जीक्यूटिव कमेटी में मौजूद इतने वरिष्ठ कलाकारों के बीच फैसले कैसे लिए जाते। सिंटा की प्रेस कॉन्फ्रेंस में पद्मिनी कोल्हापुरे ने सबसे पहले उस आरोप पर जवाब दिया, जिसमें उन्हें और पूनम ढिल्लो को संस्था में तानाशाही चलाने वाला बताया गया था। पद्मिनी ने कहा, ”सिंटा की एग्जीक्यूटिव कमेटी में फैसले किसी एक व्यक्ति की मर्जी से नहीं लिए जाते। किसी भी बैठक को शुरू करने के लिए पहले आठ सदस्यों का कोरम पूरा होना जरूरी है। इसके बाद ही बैठक शुरू होती है और अगर किसी मुद्दे पर फैसला लेना हो तो उसे बहुमत के आधार पर तय किया जाता है।” उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, ”मैं सिंटा में अकेले खड़ी होकर यह फैसला भी नहीं कर सकती कि हमें प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी है। इस तरह के फैसले भी कमेटी की बैठक में चर्चा के बाद लिए जाते हैं।” इसके बाद पद्मिनी ने उन आरोपों पर सवाल उठाया, जिनमें कहा गया था कि कमेटी के सदस्य पूनम या उनके दबाव में काम करते हैं। उन्होंने सिंटा से जुड़े वरिष्ठ कलाकारों का नाम लेते हुए कहा, ”क्या पिंटू जी, राकेश बेदी, यशपाल शर्मा जैसे अनुभवी कलाकार किसी के कहने पर आंख बंद करके चल सकते हैं? इतने वरिष्ठ कलाकारों वाली कमेटी में क्या दो लोग तानाशाही चला सकते हैं।” पद्मिनी ने सिंटा की मौजूदा कमेटी की वैधता को लेकर कहा, ”मैं एक बार फिर स्पष्ट करना चाहती हूं कि यह कमेटी पूरी तरह कानूनी है। कमेटी को भंग नहीं किया गया है। इसे खत्म नहीं किया गया है और हम संविधान के अनुसार काम कर रहे हैं। इस कमेटी से जुड़े सभी लोगों का उद्देश्य सिंटा के सदस्यों के हित में काम करना है। हम सभी यहां सिंटा के सदस्यों के लिए अच्छा काम करने आए हैं।” वहीं, सिंटा की अध्यक्ष पूनम ढिल्लो ने भी उपासना सिंह के आरोपों पर गहरी नाराजगी और दुख जताया। पूनम ने कहा, ”पिछली कमेटी और उसकी महासचिव की ओर से सिंटा के बारे में जिस तरह की बातें की गईं, उससे संस्था की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। संस्था के इतिहास में पहले कभी उसके बारे में इस तरह की गलत बातें नहीं कही गईं, इसलिए मैं इस बात से बहुत दुखी हूं।” उन्होंने कहा, ”हमें कुछ चीजें साफ करनी हैं क्योंकि जब तक सही पक्ष लोगों तक नहीं पहुंचता, तब तक लोग यही सोचेंगे कि जो बातें कही जा रही हैं, वही सच हैं।” दरअसल, यह विवाद इस महीने उस समय तेज हो गया जब सिंटा की 21 सदस्यीय एग्जीक्यूटिव कमेटी के 11 सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया। इनमें आठ निर्वाचित सदस्य थे। इस्तीफा देने वालों में हेमंत पांडे, मुकेश ऋषि, साहिला चड्ढा, हेतल परमार, पुनीत इस्सर, विंदू दारा सिंह, विकास वर्मा और दीपक पराशर शामिल थे। इस्तीफा देने वाले सदस्यों ने संस्था के कामकाज पर भरोसा कम होने की बात कही और नए चुनाव कराने की मांग उठाई। उस समय सिंटा की महासचिव रहीं उपासना सिंह ने इस्तीफों की पुष्टि करते हुए दावा किया था कि सदस्यों ने पूनम ढिल्लो और पद्मिनी कोल्हापुरे के खिलाफ शिकायतें की हैं। इन शिकायतों में पदों के कथित दुरुपयोग, फैसले लेने में निष्पक्षता की कमी और एग्जीक्यूटिव कमेटी से पर्याप्त सलाह न लेने जैसे आरोप शामिल थे। आधिकारिक बातचीत और वित्त से जुड़े मामलों को संभालने के तरीके पर भी सवाल उठाए गए थे। उपासना सिंह ने पूनम और पद्मिनी पर संस्था को कथित तौर पर गैर-लोकतांत्रिक तरीके से चलाने का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया कि जो सदस्य दोनों वरिष्ठ अभिनेत्रियों से सहमत नहीं होते या उनके सामने ‘यस मैडम’ नहीं कहते, उन्हें कारण बताओ नोटिस दिए जाते थे। उपासना और सिंटा के पूर्व कोषाध्यक्ष दीपक पराशर ने यह भी आरोप लगाया कि संस्था के नेतृत्व की ताकत धीरे-धीरे पूनम और पद्मिनी के आसपास केंद्रित हो गई थी।
तमिलनाडु: सरकार ने 13 लाख परिवारों के लिए सालाना तीन मुफ्त एलपीजी सिलेंडर देने की घोषणा की

चेन्नई। तमिलनाडु सरकार ने एक बड़े घरेलू सहायता कार्यक्रम की घोषणा की है, जिसके तहत राज्य के पात्र परिवारों को प्रति वर्ष तीन मुफ्त एलपीजी सिलेंडर प्रदान किए जाएंगे। “अन्नपूर्णी सुपर सिक्स” योजना के नाम से शुरू की गई इस पहल से लगभग 13 लाख परिवारों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इसे जनवरी में पोंगल त्योहार से लागू किया जाएगा। सरकार का अनुमान है कि इस कार्यक्रम के लिए प्रति वर्ष लगभग 4000 करोड़ रुपये के आवंटन की आवश्यकता होगी। इस योजना के तहत लाभार्थी मौजूदा वितरण प्रणाली के माध्यम से एलपीजी सिलेंडर खरीदेंगे। प्रतिवर्ष तीन सिलेंडरों की लागत सीधे उनके पंजीकृत बैंक खातों में जमा कर दी जाएगी। प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण तंत्र का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वित्तीय सहायता पात्र परिवारों तक बिना किसी देरी या मध्यस्थों की भागीदारी के पहुंचे। जिन परिवारों की वार्षिक आय 25 लाख रुपये तक है, वे इस योजना के लिए आवेदन करने के पात्र होंगे। यह योजना मुख्य रूप से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों, छोटे और सीमांत किसानों, दिव्यांगजनों के परिवारों और समाज के अन्य कमजोर वर्गों को कवर करेगी। सरकार ने तमिलनाडु विधानसभा में नियम 110 के तहत इस पहल की घोषणा की, जो मुख्यमंत्री को सार्वजनिक महत्व के मामलों पर बयान देने की अनुमति देता है। योजना के लागू होने से पहले आवेदन प्रक्रिया, लाभार्थियों के सत्यापन और धनराशि के वितरण के संबंध में विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए जाने की उम्मीद है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य घरेलू खाना पकाने के ईंधन के खर्चों के कारण होने वाले वित्तीय बोझ को कम करना है, विशेष रूप से कम आय वाले परिवारों के बीच। घरेलू खर्चों में वृद्धि के कारण कई परिवारों के लिए एलपीजी रिफिल कराना मुश्किल हो गया है, जिससे उन्हें कभी-कभी खरीदारी स्थगित करनी पड़ती है या खाना पकाने के लिए पारंपरिक ईंधनों पर निर्भर रहना पड़ता है। सरकार द्वारा प्रति वर्ष तीन सिलेंडरों का खर्च वहन करके एलपीजी के निरंतर उपयोग को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ परिवारों को प्रत्यक्ष वित्तीय राहत प्रदान करने की उम्मीद है। इस उपाय से महिलाओं को भी लाभ होने की संभावना है, जो अक्सर उन मामलों में सबसे अधिक प्रभावित होती हैं, जहां परिवार खाना पकाने के लिए लकड़ी और अन्य धुआं पैदा करने वाले ईंधन पर निर्भर रहते हैं। राज्य सरकार को पात्र लाभार्थियों की पहचान करने और उनके एलपीजी उपभोक्ता विवरण को बैंक खातों से जोड़ने के लिए बड़े पैमाने पर सत्यापन अभियान चलाना होगा। कार्यक्रम के सुचारू कार्यान्वयन के लिए राजस्व अधिकारियों, नागरिक आपूर्ति अधिकारियों, बैंकों और तेल विपणन कंपनियों के बीच समन्वय आवश्यक होगा। पंजीकरण, आवश्यक दस्तावेजों और सब्सिडी हस्तांतरण के कार्यक्रम के बारे में अधिक जानकारी पोंगल से पहले घोषित किए जाने की संभावना है।
भारत और मोरक्को द्विपक्षीय व्यापार व बाजार पहुंच बढ़ाने और निवेश के नए अवसर विकसित करने पर दे रहे जोर: जितिन प्रसाद

नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने सोमवार को कहा कि भारत और मोरक्को द्विपक्षीय व्यापार को नए क्षेत्रों तक विस्तारित करने, बाजार पहुंच बढ़ाने और निवेश व औद्योगिक सहयोग के नए अवसर विकसित करने की दिशा में मिलकर काम कर रहे हैं। राज्य मंत्री जितिन प्रसाद, जो 24 से 25 अगस्त तक मोरक्को की आधिकारिक यात्रा पर हैं, मोरक्को के उद्योग एवं व्यापार मंत्री के विदेश व्यापार मामलों के राज्य सचिव उमर हेजीरा के साथ भारत-मोरक्को संयुक्त आयोग (जॉइंट कमीशन) के 7वें सत्र की सह-अध्यक्षता करेंगे। इस बैठक में दोनों देशों के बीच वर्तमान आर्थिक और वाणिज्यिक सहयोग की समीक्षा की जाएगी तथा भविष्य में सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान की जाएगी। बैठक में व्यापार और बाजार पहुंच, उर्वरक उत्पादन एवं आपूर्ति, निवेश, औद्योगिक सहयोग, सीमा शुल्क, कृषि एवं खाद्य सुरक्षा, दवा और स्वास्थ्य सेवा, ऊर्जा एवं खनन, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल परिवर्तन, परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स, आयुष, पर्यटन, शिक्षा और कौशल विकास समेत कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर चर्चा होने की उम्मीद है। यात्रा के दौरान भारत और मोरक्को के बीच खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। यह समझौता मोरक्को के राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कार्यालय (ओएनएसएसए) और भारत के भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के बीच होगा। इस समझौते के तहत आयातित खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा, खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं, विश्लेषणात्मक विधियों तथा आयात प्रक्रियाओं, गुणवत्ता नियंत्रण, नमूना परीक्षण, पैकेजिंग और लेबलिंग से जुड़े विषयों पर सहयोग बढ़ाया जाएगा। साथ ही दोनों देशों के बीच तकनीकी जानकारी और विशेषज्ञता का आदान-प्रदान भी किया जाएगा। संयुक्त आयोग की बैठक में 2026-2030 के लिए भारत-मोरक्को सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम पर भी हस्ताक्षर होने की संभावना है। इस कार्यक्रम के तहत कलाकारों, सांस्कृतिक विशेषज्ञों और पेशेवरों के आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके अलावा, दोनों देशों के संग्रहालयों, पुस्तकालयों और अभिलेखागार संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने, विरासत संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक आयोजनों में सहभागिता को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। भारत और मोरक्को के बीच लंबे समय से मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं और व्यापारिक सहयोग की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं। वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय वस्तु व्यापार लगभग 4 अरब डॉलर रहा। भारत मोरक्को को मुख्य रूप से परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पाद, दवाइयां, वाहन, सिंथेटिक वस्त्र, खाद्य उत्पाद और मसालों का निर्यात करता है। वहीं मोरक्को भारत को मुख्य रूप से फॉस्फेट और उर्वरकों की आपूर्ति करता है, जो भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। मोरक्को यात्रा के दौरान जितिन प्रसाद कई वरिष्ठ मोरक्को नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। वह भारत-मोरक्को संयुक्त व्यापार मंच में भी भाग लेंगे और राजधानी रबात में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। इन बैठकों का उद्देश्य व्यापार, निवेश, संयुक्त उद्यमों और नई कारोबारी साझेदारियों के अवसर तलाशना है। दोनों देश अफ्रीका, यूरोप और एशिया को जोड़ने वाले रणनीतिक व्यापारिक मार्गों का लाभ उठाकर आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाई देने की दिशा में काम कर रहे हैं।
दक्षिण कोरिया: 180 दिन की जांच के बाद स्पेशल काउंसल ने पूर्व राष्ट्रपति यून पर आरोप तय किए

सोल। दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक-योल से जुड़े तमाम मामलों की 180 दिन चली व्यापक विशेष जांच (स्पेशल काउंसल) सोमवार को समाप्त हो गई। विशेष जांचकर्ता क्वोन चांग-यंग की टीम ने जांच के दौरान यून समेत 58 लोगों के खिलाफ आरोप तय किए। विशेष जांच दल ने फरवरी में जांच शुरू की थी। इसका मकसद यून के 2024 के असफल मार्शल लॉ प्रयास, उनकी पत्नी किम कियोंग-ही से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों और 2023 में एक मरीन सैनिक की मौत समेत उन मामलों की दोबारा जांच करना था, जिनकी पिछली तीन विशेष जांच टीमों में पूरी तरह पड़ताल नहीं हो पाई थी। क्वोन की टीम ने यून पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाया। जांच के मुताबिक, उन्होंने अधिकारियों को अमेरिका और अन्य प्रमुख साझेदार देशों के सामने अपने असफल मार्शल लॉ कदम को सही ठहराने के लिए निर्देश दिए थे। पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिन वॉन-सिक और पूर्व प्रधान उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार किम ताए-ह्यो को भी इस मामले में आरोपी बनाया गया है। विशेष जांच दल ने यून की पत्नी किम कियोंग-ही के खिलाफ भी आरोप तय किए। उन पर 2022 में राष्ट्रपति भवन के स्थानांतरण से जुड़ी परियोजना में कथित रूप से अनुचित हस्तक्षेप करने का आरोप है। जांचकर्ताओं के अनुसार, उन्होंने निर्माण कार्य का ठेका ऐसी कंपनी को दिलाने के लिए हस्तक्षेप किया, जिसे वे अयोग्य मानते थे। जांच का कार्यकाल समाप्त होने के बाद विशेष जांच दल ने 150 लोगों से जुड़े 46 मामले पुलिस को आगे की जांच के लिए सौंप दिए। इसका मतलब है कि सभी मामलों में अंतिम कार्रवाई विशेष जांच दल के स्तर पर नहीं हुई और कुछ मामलों की जांच अब नियमित पुलिस एजेंसियां आगे बढ़ाएंगी। यह जांच फरवरी में शुरू हुई थी और बाद में इसकी अवधि बढ़ाकर 23 अगस्त तक की गई थी। राष्ट्रीय सभा ने जुलाई में जांच की अवधि 30 दिन बढ़ाने के साथ टीम में तैनात सरकारी अधिकारियों की अधिकतम संख्या 130 से बढ़ाकर 150 करने को मंजूरी दी थी। यून के खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई दक्षिण कोरिया की राजनीति में बेहद संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है। दिसंबर 2024 में उनके मार्शल लॉ लागू करने के असफल प्रयास के बाद देश में बड़ा राजनीतिक संकट पैदा हुआ था और अंततः उन्हें राष्ट्रपति पद से हटा दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा सांसद कृपानाथ के निर्वाचन के खिलाफ कांग्रेस नेता की चुनाव याचिका को किया बहाल

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को भाजपा सांसद कृपानाथ मल्लाह के निर्वाचन के खिलाफ कांग्रेस नेता हाफिज राशिद अहमद चौधरी की चुनाव याचिका को बहाल कर दिया। गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कृपानाथ मल्लाह के निर्वाचन के खिलाफ चुनाव याचिका रद्द कर दी थी। इसके खिलाफ अपील पर सोमवार को जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने याचिका बहाल की। जस्टिस चंद्रन ने फैसला सुनाते हुए कहा, “संविधान पीठ के पिछले फैसले के आधार पर हमने अपील मंजूर कर ली है।” चूंकि चुनावी याचिका को फिर से बहाल कर दिया गया है, इसलिए गुवाहाटी हाई कोर्ट इस पर नए सिरे से सुनवाई करेगा। कांग्रेस नेता हाफिज राशिद अहमद चौधरी ने चुनाव जीतने वाले उम्मीदवार के खिलाफ भ्रष्ट आचरण का आरोप लगाते हुए चुनाव याचिका दायर की थी। विजयी उम्मीदवार ने 18,360 मतों के अंतर से चुनाव जीता था। इससे पहले, गुवाहाटी हाईकोर्ट ने अप्रैल 2025 में याचिका को प्रक्रिया संबंधी खामियों के आधार पर खारिज किया था। हाईकोर्ट के समक्ष मल्लाह की ओर से याचिका की प्रस्तुति और दस्तावेजों के प्रमाणीकरण से जुड़े सवाल उठाए गए थे। मूल चुनाव याचिका में कांग्रेस नेता ने 47 मतदान केंद्रों पर बूथ कैप्चरिंग सहित मतदान प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप लगाए थे। उन्होंने मतदाता मतदान और गिनती के आंकड़ों में भी अंतर का दावा किया था। हाफिज राशिद अहमद चौधरी ने कांग्रेस के टिकट पर करीमगंज संसदीय क्षेत्र से कृपानाथ मल्लाह के खिलाफ 2024 का संसदीय चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में हाफिज राशिद को कुल 5,26,733 वोट मिले थे, जबकि भाजपा के उम्मीदवार के तौर पर कृपानाथ मल्लाह को 5,45,093 वोट मिले थे। दोनों के बीच हार-जीत का यह अंतर 18,360 वोटों का था। इस चुनाव में तीसरे स्थान पर ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के प्रत्याशी सहाबुल इस्लाम चौधरी थे, जिन्हें कुल 29,205 वोट हासिल हुए।
राहुल गांधी पर योगी का तीखा हमला, बोले-भारत की परंपरा और विरासत को कोसना जन्मसिद्ध अधिकार समझते हैं

रायबरेली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रायबरेली के सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के मनुस्मृति संबंधी बयान को लेकर उन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के रूप में देश को उनसे बहुत अपेक्षा नहीं है, लेकिन भारत की संसद में नेता प्रतिपक्ष के पद पर होने के नाते उनकी लोकतंत्र और संविधान के प्रति जवाबदेही है। इसके बावजूद वह भारत की परंपरा और विरासत को कोसना अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझते हैं। रायबरेली में वीर सेनानायक राणा बेनी माधव बख्श सिंह की जयंती पर आयोजित भाव समर्पण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने पिछले दिनों महाराष्ट्र में राहुल गांधी का एक बयान पढ़ा, जिसमें उन्होंने कहा था कि महिलाएं मनुस्मृति के बंधन को तोड़कर बाहर आएं। योगी ने कहा, “राहुल जी, राहुल गांधी के रूप में देश आपसे बहुत अपेक्षा नहीं करता लेकिन भारत की संसद में नेता प्रतिपक्ष के रूप में आपको देश के लोकतंत्र के प्रति जवाबदेह बनाता है।” उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने संविधान की शपथ ली है, लेकिन इसके बावजूद वह भारत की परंपरा और विरासत को कोसना अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझते हैं। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी उत्तर प्रदेश से बाहर जाते हैं तो प्रदेश को लांछित और अपमानित करते हैं और भारत से बाहर जाते हैं तो देश का अपमान करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की सेना जब सीमाओं पर दुश्मनों से लड़ती है तो राहुल गांधी सेना के जवानों से प्रमाण मांगते हैं। आतंकवाद के खिलाफ देश की लड़ाई में भी वह देशद्रोही तत्वों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रोत्साहित करते हैं। योगी ने कहा कि अयोध्या में प्रभु श्रीराम के अस्तित्व पर भी कांग्रेस की ओर से प्रश्न खड़े किए गए। उन्होंने राहुल गांधी की लोकतंत्र के प्रति निष्ठा पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश 1975 में आपातकाल की काली छाया देख चुका है। मुख्यमंत्री ने मनु और भारतीय परंपरा के संदर्भ में कहा कि यदि राहुल गांधी को मनु के बारे में जानना है तो उन्हें अथर्ववेद, शतपथ ब्राह्मण और मत्स्य पुराण पढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा और मूल्यों को विस्मृत करने वाला समाज अपने भविष्य का निर्माण नहीं कर सकता। योगी ने कहा कि आज देश जिस आजादी का अनुभव कर रहा है, उसके पीछे अनगिनत लोगों का बलिदान है। इसी बलिदानी परंपरा में वीर सेनानायक राणा बेनी माधव बख्श सिंह का महत्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने कहा कि जो चिंगारी बैरकपुर में मंगल पांडेय ने जलाई, उसे मेरठ में धनसिंह गुर्जर ने आगे बढ़ाया और नाना साहब व तात्या टोपे ने कानपुर के बिठूर से उसे नई ज्वाला का रूप दिया। उन्होंने कहा कि झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने इस संघर्ष को आगे बढ़ाया और अवध में इस लड़ाई का नेतृत्व राणा बेनी माधव ने किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र ने जनता को इतनी ताकत दी है कि जो सरकार जनभावनाओं का अनादर करती है, जनता उसे सत्ता से अपदस्थ करने की शक्ति रखती है। उन्होंने कहा कि देश की स्वतंत्रता के लिए असंख्य लोगों ने अपना सर्वस्व न्योछावर किया और आज की पीढ़ी का दायित्व है कि वह उनके संघर्ष, त्याग और मूल्यों को विस्मृत न होने दे।
सुदेश बेरी की नई फैमिली कॉमेडी ‘हे भगवान बचा ले’ जल्द होगी रिलीज, रिश्तों की अहमियत बताएगी फिल्म

मुंबई। हिंदी सिनेमा में परिवार और रिश्तों पर बनी फिल्मों का अपना अलग प्रभाव रहा है। इस कड़ी में अभिनेता सुदेश बेरी अब एक नई फैमिली कॉमेडी फिल्म ‘हे भगवान बचा ले’ के साथ बड़े पर्दे पर नजर आने वाले हैं। फिल्म में कॉमेडी के साथ भावनाओं और पारिवारिक रिश्तों को भी कहानी का अहम हिस्सा बनाया गया है। फिल्म की कहानी एक ऐसे परिवार पर आधारित है, जिसके सदस्य हमेशा किसी न किसी बात को लेकर आपस में उलझते रहते हैं, लेकिन एक अनोखी घटना के बाद उन्हें अपने रिश्तों की असली कीमत समझ आती है। ‘हे भगवान बचा ले’ में सुदेश बेरी के साथ अनिल धवन, सोनिका गिल, क्षितिज पंवार, शालिनी ठाकुर, जनार्दन झा, मीनाक्षी, कुंदन कुमार, प्रमोद सैनी और शिव कुमार शर्मा नजर आएंगे। फिल्म का मकसद सिर्फ दर्शकों को हंसाना नहीं, बल्कि हंसी और भावनाओं के जरिए यह बताना भी है कि जिंदगी में परिवार और अपने रिश्ते सबसे बड़ी दौलत होते हैं। फिल्म की कहानी एक ऐसे परिवार से शुरू होती है, जिसके सदस्य एक-दूसरे से प्यार तो करते हैं, लेकिन उनके बीच अक्सर झगड़े होते रहते हैं। छोटी-छोटी बातों पर होने वाली बहस और मतभेद ने घर के माहौल को ऐसा बना दिया है कि परिवार के लोग एक-दूसरे के साथ होते हुए भी खुश नहीं हैं। इसी बीच उनकी जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आता है, जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी। कहानी में परिवार का सामना भगवान से होता है और उन्हें अपनी एक इच्छा मांगने का मौका मिलता है। अब सवाल यह है कि जब किसी इंसान को भगवान से अपनी मनचाही चीज मांगने का मौका मिले तो वह क्या मांगेगा? फिल्म में इस सवाल का जवाब काफी दिलचस्प तरीके से दिया गया है। शुरुआत में ऐसा लग सकता है कि परिवार के लोग करोड़ों रुपए, कीमती हीरे या कोई लग्जरी चीज मांगेंगे। लेकिन कहानी यहां दर्शकों को चौंका देती है। परिवार के सदस्य दौलत और कीमती सामान की जगह अपनों को मांगते हैं। यही फिल्म का सबसे बड़ा संदेश है। फिल्म यह समझाने की कोशिश करती है कि जिंदगी में असली ‘हीरे’ हमारे परिवार के लोग हैं। इसी सोच को फिल्म की लाइन ‘हमारे असली हीरे हमारा परिवार हैं’ के जरिए सामने रखा गया है। कहानी यह बताती है कि कई बार इंसान अपने ही लोगों की कीमत तब समझता है, जब उन्हें खोने का डर सामने आता है। फिल्म का निर्देशन मनोज सिंह ने किया है। फिल्म का निर्माण रवि खन्ना ने किया है, जबकि रश्मिता दास को-प्रोड्यूसर और अख्तर खान एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर हैं। फिल्म की कहानी, स्क्रीनप्ले और डायलॉग तपन भट्ट ने लिखे हैं। सिनेमैटोग्राफी धर्मेंद्र बिस्वास ने संभाली है और एडिटिंग नितेश टैंक ने की है। एवरीबडी प्रोडक्शन के बैनर तले बनी फिल्म की शूटिंग मुंबई की अलग-अलग लोकेशंस पर हुई है। अब यह फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है। हालांकि मेकर्स ने अभी फिल्म की रिलीज डेट की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
अजय राय के मछली दावत पर सियासत जारी, एनडीए के नेता बोले-मानसिक दिवालियापन

नई दिल्ली। सावन के महीने में अयोध्या के तरुन इलाके के अर्पित मैरिज लॉन में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के स्वागत समारोह के दौरान मछली की दावत को लेकर विवाद खड़ा हो गया। कार्यक्रम में मछली पकाए जाने का एक वीडियो सामने आने के बाद भाजपा और एनडीए के नेताओं ने आलोचना करते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी। अजय राय के स्वागत समारोह के दौरान आयोजित मछली दावत पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आर.पी. सिंह ने आईएएनएस से कहा, “वे खुद को हिंदू बताने की कोशिश कर रहे हैं, इसीलिए वे अयोध्या जाते हैं, लेकिन वे भूल जाते हैं कि यह सावन का महीना है। सावन के दौरान मांस और मछली से दूर रहना चाहिए। लहसुन और प्याज से भी दूर रहना चाहिए, लेकिन ये नए तरह के सनातनी हैं, जो दिखावे के लिए सनातन का काम करना चाहते हैं, दिखावे के लिए मंदिर जाते हैं, लेकिन सनातन परंपराओं का पालन नहीं करते हैं।” अजय राय पर पलटवार करते हुए भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, “पवित्र श्रावण मास में अयोध्या में मछली दावत देना मानसिक दिवालियापन को दर्शाता है। सनातन के प्रति असहिष्णुता, अराजकता और उदंडता के जरिए खुद को सेक्ल्युरिज्म का सियासी सूरमा साबित करने में लगे हुए हैं, इससे उनका सूपड़ा साफ हो जाएगा।” यूपी सरकार के मंत्री नरेंद्र कश्यप ने कहा, “अयोध्या धाम भगवान श्री राम की जन्मभूमि है और दुनिया भर के लोगों की आस्था इससे जुड़ी है। कांग्रेस नेताओं को खुद यह समझना चाहिए कि ऐसे धार्मिक शहर में अगर हो सके तो, किसी का स्वागत मांसाहारी भोजन से करने से बचना चाहिए। किसी का स्वागत करने के और भी कई तरीके हो सकते हैं।” डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा, “यह बहुत दुखद है। अयोध्या धाम हमारा पवित्र स्थल है, यह भगवान राम लला का निवास स्थान है और वहां इस तरह की दावत का आयोजन, वह भी सावन के महीने में यह कांग्रेस की संस्कृति को दर्शाता है।” अजय राय के मछली दावत पर मंत्री संजय निषाद ने कहा, “कांग्रेस से पूछा जाना चाहिए कि ऐसा क्यों? वे मंदिरों में भी जाएंगे और मछली भी खाएंगे। हमारा कहना है कि निषाद सर्वाहारी है। वे गरीब और विस्थापित हैं। मछली खाना उनकी परंपरा है, वे हमेशा मछली खाएंगे। असल मुद्दा यह है कि निषाद गरीब क्यों हैं और वे अशिक्षित क्यों हैं? कांग्रेस जाल फेंककर और मछली खिलाकर निषादों को फंसाना चाहती है।” छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम अरुण साव ने कहा, “कांग्रेस पार्टी ने बार-बार भगवान राम के प्रति अपनी भावनाएं जाहिर की हैं। अजय राय बार-बार इस तरह की राजनीति करते हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
रेलवे ने स्वच्छ पीने के पानी की सुविधाओं के लिए विशेष अभियान शुरू किया

नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने अपने नेटवर्क पर एक विशेष सफाई अभियान शुरू किया है। इसका उद्देश्य रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों के लिए सुरक्षित और साफ पीने का पानी लगातार उपलब्ध कराना है, जिसके लिए पीने के पानी की टंकियों और फिल्ट्रेशन सिस्टम की सफाई और उन्हें कीटाणु-मुक्त करने का काम किया जा रहा है। यह जानकारी एक आधिकारिक बयान में सोमवार को दी गई। यह पहल इंडियन रेलवे में पीने के पानी की क्वालिटी मैनेजमेंट को बेहतर बनाने के लिए एक बड़े एक्शन प्लान का हिस्सा है। इसमें सिर्फ आखिरी पॉइंट पर पानी की टेस्टिंग करने के बजाय, पूरे पीने के पानी के सिस्टम की बार-बार जांच और रखरखाव पर जोर दिया गया है। साथ ही, पानी के सोर्स और इस्तेमाल की जगह, दोनों ही जगहों पर पानी की क्वालिटी की टेस्टिंग करने पर भी ध्यान दिया जाएगा। इस अभियान के दौरान, जोनल रेलवे पानी के सोर्स, ट्रीटमेंट और फिल्टरेशन प्लांट, जमीन के नीचे और ऊपर बने टैंक, पीवीसी टैंक, वॉटर बूथ, नल और पानी निकालने वाली जगहों की पूरी जांच करेगी। पीने के पानी के सभी टैंक खाली किए जाएंगे, उनकी गाद निकाली जाएगी, उन्हें रगड़कर साफ किया जाएगा और कीटाणु-मुक्त किया जाएगा। बयान में कहा गया है कि टैंक के ढक्कन कसकर बंद हों और वेंट व ओवरफ्लो पॉइंट को पक्षियों, जानवरों और काई से बचाने के लिए जरूरी उपाय भी किए जाएंगे। इस अभियान में उन कमियों की भी पहचान की जाएगी जिन्हें ठीक करने की जरूरत है। जहां भी जरूरत होगी, वहां खराब टैंक, पाइपलाइन और फिल्टर की मरम्मत की जाएगी या उन्हें बदला जाएगा। साथ ही, यह भी पक्का किया जाएगा कि पीने लायक और पीने लायक न होने वाले पानी के सिस्टम के बीच कोई क्रॉस-कनेक्शन न हो। पीने के पानी के सिस्टम से जुड़ी सभी पाइपलाइनों में लीकेज की जांच की जाएगी और पानी की बर्बादी रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। उन जगहों पर खास ध्यान दिया जाएगा जहां पीने का पानी निकालने के लिए हैंड पंप और बोरवेल का इस्तेमाल हो रहा है। जोनल रेलवे यह पक्का करेगा कि ऐसे सिस्टम से मिलने वाला पानी दूषित न हो और पीने के लिए सुरक्षित हो। रेलवे बोर्ड ने जोनल रेलवे को वॉटर कूलर और पानी साफ करने वाले सिस्टम की अच्छी तरह से जांच करने का निर्देश दिया है। कूलर में लगे पानी के टैंकों की अच्छी तरह सफाई की जाएगी, कूलर, पाइपलाइन और नल में लीकेज को तुरंत ठीक किया जाएगा और वॉटर-कूलर से पानी लेने वाली जगहों के आस-पास पूरी तरह साफ-सफाई बनाए रखी जाएगी। वॉटर कूलर के लिए यूवी/आरओ प्यूरिफिकेशन सिस्टम ठीक से काम कर रहे हैं या नहीं, इसकी जांच की जाएगी और जहां जरूरत होगी, वहां इन्हें लगाया जाएगा। जहां भी जरूरी होगा, वहां तय समय पर मेंटेनेंस, सर्विसिंग, ओवरहॉलिंग और फिल्टर कैंडल व अन्य पुर्जों को समय पर बदलने का काम किया जाएगा। सिस्टम की हालत और जरूरत के आधार पर, नए यूवी/आरओ सिस्टम लगाने या पुराने सिस्टम को बदलने का काम भी तेजी से (मिशन मोड में) किया जाएगा। सफाई, प्यूरिफिकेशन और क्वालिटी की निगरानी के लिए तय नियम वॉटर वेंडिंग मशीनों पर भी लागू होंगे, ताकि यह पक्का किया जा सके कि इन मशीनों से मिलने वाला पीने का पानी सुरक्षा और साफ-सफाई के जरूरी मानकों को पूरा करता हो। अधिकारी चुनिंदा जगहों से पानी के सैंपल की फिजिकल, केमिकल और बैक्टीरियोलॉजिकल जांच करेंगे। इन जगहों में पानी के स्रोत, ट्रीटमेंट के बाद निकलने वाली जगह (आउटलेट), टैंक, कूलर, वेंडिंग मशीन और कुछ खास नल या बूथ शामिल होंगे, जहां भी ऐसा करना मुमकिन हो। रोजाना पानी में बचे क्लोरीन (रेसिडुअल-क्लोरीन) की निगरानी भी की जाएगी और जरूरत पड़ने पर तुरंत दोबारा क्लोरीन मिलाया जाएगा या कोई और जरूरी कदम उठाया जाएगा। रेलवे बोर्ड ने जोनल रेलवे को यह भी निर्देश दिया है कि वे नए ओवरहेड और अंडरग्राउंड टैंक बनाने और पुराने टैंक बदलने के लिए पहले से मंजूर हो चुके कामों की निगरानी करें और उन्हें तेजी से पूरा करें। इन मंजूर कामों का ब्यौरा तैयार किया जाएगा और जहां भी जरूरत होगी, नए कामों की मंजूरी की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जोनल रेलवे स्टेशन के हिसाब से उन कमियों का ब्यौरा और उन्हें ठीक करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देंगे। इस व्यवस्था से कमियों की व्यवस्थित निगरानी में मदद मिलेगी और यह पक्का हो सकेगा कि स्पेशल ड्राइव के दौरान पहचानी गई समस्याओं को तय समय के भीतर हल किया जाए। बयान में कहा गया है कि इस एक्शन प्लान में रेलवे कॉलोनियों और काम करने की जगहों पर पीने के पानी की सुविधाओं के लिए भी ऐसे ही उपाय करने की योजना है, ताकि यात्रियों के लिए बनी जगहों के अलावा सुरक्षित और साफ-सुथरे पीने के पानी पर भी ध्यान दिया जा सके।