रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है शलभासन, जानिए सही विधि और फायदे

नई दिल्ली। योग शरीर और मन को स्वस्थ रखने की एक प्राचीन पद्धति है, जिसके हर आसन का अपना विशेष महत्व है। इन्हीं महत्वपूर्ण आसनों में से एक है शलभासन। यह आसन पीठ, रीढ़ और कोर की मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए बहुत फायदेमंद है। शलभासन करते समय शरीर की मुद्रा ‘शलभ,’ यानी टिड्डे, जिसे अंग्रेजी में ग्रासहॉपर कहते हैं, के समान होती है। शलभासन रीढ़ की हड्डी की सेहत के लिए बहुत ही अच्छा होता है। यह पीठ के बल लेटकर किया जाने वाला एक बेहद लाभकारी आसन है, जो न सिर्फ रीढ़ की हड्डी को मजबूत करता है बल्कि पाचन तंत्र और मांसपेशियों के लिए भी वरदान माना जाता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, शलभासन एक ऐसा योगासन है जिससे रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है और शरीर का वजन नियंत्रित रहता है। इस आसन को नियमित और सही तरीके से करने से पीठ की मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद मिलती है। जिन लोगों को हल्का लोअर बैक दर्द या साइटिका जैसी समस्या रहती है, उनके लिए भी यह आसन उपयोगी हो सकता है, हालांकि किसी भी तरह के गंभीर दर्द या चोट की स्थिति में इसे खुद से करने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है। शलभासन देखने में भले ही आसान लगे, लेकिन इसे करते समय शरीर के कई हिस्से एक साथ काम करते हैं। इस आसन में पेट के बल लेटकर पैरों को ऊपर उठाने का प्रयास किया जाता है। इससे पीठ और कमर के आसपास की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं। यही वजह है कि इसे बैक स्ट्रेंथ बढ़ाने वाले योगासनों में शामिल किया जाता है। शलभासन को करने के लिए सबसे पहले पेट के बल जमीन पर लेट जाएं। अपने हाथों को आगे की ओर फैला दें, हथेलियां ऊपर की ओर और पैर सीधे हों। माथा या ठुड्डी जमीन को छू रही हो। गहरी सांस लें और शरीर को स्थिर करें। सांस छोड़ते हुए दोनों पैरों को एक साथ धीरे-धीरे ऊपर उठाएं। पैरों को सीधा रखें और घुटनों को न मोड़ें। इसके साथ ही हाथों को भी ऊपर की ओर उठाना है। यह कुछ सुपरमैन पोज जैसा है। इस स्थिति में 10-30 सेकेंड तक रुकें, सामान्य रूप से सांस लेते रहें। इसके बाद धीरे-धीरे पैरों और छाती को जमीन पर लाएं और विश्राम करें। इस आसन को करने के दौरान कुछ सावधानियां भी बरतनी जरूरी है। गर्भावस्था, हर्निया, या पीठ/गर्दन की चोट वाले लोग इसे न करें।

कलम की बेबाक आवाज अमृता प्रीतम, जिन्होंने अपनी शर्तों पर लिखी इश्क और समाज की बंदिशें तोड़ने की कहानी

नई दिल्ली। कुछ लोग लिखते हैं ताकि उनकी बातें कागज पर दर्ज हो जाएं, लेकिन कुछ ऐसे होते हैं जिनकी लिखी हुई बातें लोगों के दिल में उतर जाती है। अमृता प्रीतम उन्हीं चुनिंदा लेखकों में से एक थीं। उन्होंने सिर्फ कविताएं और कहानियां नहीं लिखीं, बल्कि अपने समय की औरत के मन, उसके दर्द, प्रेम, अकेलेपन और सपनों को शब्द दिए। उन्होंने जिंदगी को भी उसी बेबाकी से जिया, जिस बेबाकी से लिखा। समाज की बनाई लकीरों को मानने के बजाय उन्होंने अपनी राह खुद चुनी। 31 अगस्त 1919 को तत्कालीन पंजाब के गुजरांवाला में जन्मीं अमृता प्रीतम का बचपन आसान नहीं था। महज 11 साल की उम्र में उन्होंने अपनी मां को खो दिया। इस कमी ने उनके भीतर एक गहरी तन्हाई पैदा की और इसी तन्हाई में कागज और कलम उनके साथी बन गए। छोटी उम्र से ही उन्होंने लिखना शुरू कर दिया था। महज 16 साल की उम्र में उनका पहला कविता संग्रह ‘अमृत लहरें’ प्रकाशित हुआ। उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ आया 1947 के बंटवारे के समय। लाहौर उनका अपना शहर था, लेकिन हिंसा और दंगों ने लाखों लोगों की तरह उन्हें भी अपना घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया। इसी सफर में उनके भीतर से निकली कविता ‘अज्ज आखां वारिस शाह नूं’ ने बंटवारे के दर्द को ऐसी आवाज दी, जिसे भारत और पाकिस्तान दोनों तरफ सुना गया। इस कविता में उन्होंने खास तौर पर उन औरतों की पीड़ा को सामने रखा, जो बंटवारे की हिंसा में अपना घर, परिवार और सम्मान तक खो बैठी थीं। अमृता की लेखनी की खासियत यही थी कि वह बड़े से बड़े सामाजिक मुद्दे को इंसानी भावनाओं के जरिए सामने रखती थीं। उनके चर्चित उपन्यास ‘पिंजर’ में भी बंटवारे की पृष्ठभूमि है, लेकिन कहानी के केंद्र में एक औरत है—पूरो। उसका जीवन दंगों की भेंट चढ़ जाता है और वह अपनी पहचान, परिवार और सपनों के बीच फंस जाती है। अमृता ने पूरो के जरिए सिर्फ एक लड़की की कहानी नहीं कही, बल्कि उन हजारों महिलाओं की आवाज को शब्द दिए, जिनकी जिंदगी बंटवारे की हिंसा में बदल गई थी। लेकिन अमृता की पहचान सिर्फ बंटवारे पर लिखने वाली लेखिका की नहीं थी। उन्होंने प्रेम को भी उतनी ही गहराई से महसूस किया और लिखा। उनकी जिंदगी में साहिर लुधियानवी का नाम बेहद खास रहा। दोनों के बीच ऐसा रिश्ता था जिसे शायद शब्दों में पूरी तरह बांधना मुश्किल है। मुलाकातें कम थीं, लेकिन एहसास गहरा था। अमृता ने अपनी आत्मकथा ‘रसीदी टिकट’ में साहिर से जुड़े कई किस्से बेहद खूबसूरती से लिखे। साहिर के कमरे से चले जाने के बाद उनकी बुझी हुई सिगरेटों को संभालकर रखना और उन सिगरेट के टुकड़ों में साहिर की मौजूदगी महसूस करना, उनके उस अनकहे प्रेम की कहानी कहता है। हालांकि यह प्रेम अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच सका। बाद में उनकी जिंदगी में चित्रकार इमरोज आए। इमरोज और अमृता का रिश्ता भी अपने आप में अनोखा था। दोनों ने बिना शादी के साथ रहते हुए एक-दूसरे का साथ निभाया। इमरोज अमृता के जीवन में सिर्फ साथी नहीं, बल्कि उनके मौन को समझने वाले इंसान थे। अमृता रात में लिखती थीं और इमरोज कई बार रात के एक बजे उनके लिए चाय बनाकर रख देते थे। बिना किसी शोर-शराबे के चलने वाला यह रिश्ता प्रेम की अपनी अलग परिभाषा बन गया। अमृता ने अपने लेखन में औरत को सिर्फ किसी रिश्ते की पहचान के रूप में नहीं देखा। उनकी कहानियों और कविताओं में औरत अपनी इच्छाओं, फैसलों और भावनाओं के साथ मौजूद है। यही बात उन्हें अपने दौर से आगे की लेखिका बनाती है। उन्होंने समाज के उन नियमों पर सवाल उठाए, जिन्हें अक्सर बिना सोचे-समझे स्वीकार कर लिया जाता था। अमृता प्रीतम को साहित्य अकादमी पुरस्कार, ज्ञानपीठ पुरस्कार, पद्मश्री और पद्मविभूषण जैसे सम्मान मिले, लेकिन उनकी असली पहचान किसी पुरस्कार से बड़ी थी। वह उन पाठकों के दिल में बसीं, जिन्हें उनके शब्दों में अपना दर्द, अपना प्रेम और अपना संघर्ष दिखाई दिया। 31 अक्टूबर 2005 को अमृता प्रीतम ने दुनिया को अलविदा कहा, लेकिन उनकी कलम की आवाज आज भी सुनाई देती है।

पास्टर अंकुर नरूला की बढ़ सकती है मुश्किल, ईडी ने सीलबंद लिफाफे में कोर्ट में दाखिल की रिपोर्ट

नई दिल्ली। जालंधर के पास्टर अंकुर नरूला की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अंकुर नरूला के खिलाफ कोर्ट में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट दाखिल की है। अंकुर नरूला पर चंगाई सभाओं में चमत्कार के नाम पर लोगों को गुमराह करने का आरोप है। पास्टर अंकुर नरूला पर विदेशी मिशनरी को पर्यटक वीजा पर भारत बुलाकर धार्मिक गतिविधियां करवाने के आरोप हैं। इसे विदेशी अधिनियम 1946 का उल्लंघन माना गया है। इसके साथ ही, आरोप है कि नरूला की संस्था ने बिना एफसीआरए विदेशी चंदा प्राप्त किया। इसके इलावा, अभिषेक तेल और घड़ियों की बिक्री बिना जीएसटी बिलों के करने का आरोप है। ऐसे में मनी लॉन्ड्रिंग की आशंकाओं को देखते हुए ईडी ने मामले की जांच शुरू की थी। फिलहाल, जांच एजेंसी ने कोर्ट में सीलबंद लिफाफे में एक रिपोर्ट दाखिल की है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) भी इस मामले में जांच कर रही है। अदालत ने सीबीआई को भी नरूला पर लगे आरोपों की जांच कर सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिया है। अदालत का यह भी निर्देश है कि इस स्टेज पर कोई भी पक्ष मीडिया को केस की जानकारी नहीं देगा। इस मामले में 6 अक्टूबर को अगली सुनवाई होनी है। नरूला जालंधर-नकोदर रोड पर खाम्बरा गांव में पेंटेकोस्टल चर्च के तहत ‘चर्च ऑफ साइन्स एंड वंडर्स’ नाम का चर्च चलाते हैं। हिंदू खत्री परिवार में जन्मे नरूला ने अपने परिवार का मार्बल और टाइल्स का बिजनेस छोड़कर ईसाई धर्म अपनाने का फैसला किया। नरूला ने 2008 में खाम्बरा गांव में ‘चर्च ऑफ साइन्स एंड वंडर्स’ की स्थापना की थी।

संग्राम सिंह और मुधरिमा तुली ने ‘फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल’ को सरकार की बेहतरीन पहल बताया

नई दिल्ली। ‘फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल इवेंट’ का आयोजन नई दिल्ली में हुआ। केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री मनसुख मांडविया के नेतृत्व में हुए इस कार्यक्रम में खेल और सिनेमा से जुड़ी शख्सियतों ने हिस्सा लिया। पहलवान और अभिनेता संग्राम सिंह ने आईएएनएस से कहा, “प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किया गया फिट इंडिया मुहिम कमाल का है। मनसुख मांडविया ने इस इवेंट से साइकिलिंग को जोड़ते हुए इसे व्यापक स्तर पर ला दिया है। साइकिलिंग से हम स्वास्थ्य के साथ-साथ पर्यावरण को अच्छा बना सकते हैं। अगर हम साइकिलिंग से बेस्ट बन सकते हैं, तो फिर साधारण क्यों रहना है।” कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंची अभिनेत्री मधुरिमा तुली ने आईएएनएस से कहा, “मुझे बहुत खुशी है। मैं संडे ऑन साइकिल इवेंट में तीसरी बार आई हूं। मैं जब भी आती हूं तो यहां के लोगों की ऊर्जा मुझे प्रभावित करती है। इस इवेंट का संदेश पूरे देश में तेजी से फैल रहा है। महाराष्ट्र में 40 से 50 के उम्र के बीच की महिलाएं भी इसको फॉलो कर रही हैं। हेल्थ के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी यह मुहिम काफी अच्छी है। मैं खुशकिस्मत हूं कि इस इवेंट का हिस्सा हूं।” मीडिया से बात करते हुए भारतीय टीम के हेड कोच गंभीर ने कहा, “सरकार के द्वारा आयोजित किया जाने वाला फिट इंडिया अभियान एक बेहतरीन पहल है। मेरा मानना है कि देश जितना स्वस्थ रहेगा, उतना ही मजबूत और आत्मनिर्भर रहेगा।” उन्होंने कहा, “फिट इंडिया को एक इवेंट नहीं, बल्कि एक अभियान के नजरिए से देखा जाना चाहिए। युवा या जितने भी लोग इस अभियान से जुड़े हैं, उन्हें कोशिश करनी चाहिए कि इसे देश भर में फैलाएं और लोगों को फिटनेस के बारे में जागरूक करें। एक स्वस्थ और फिट देश ही मजबूत देश हो सकता है।” फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल का यह 88वां संस्करण था। इसे देश भर में 25,000 से ज्यादा जगहों पर आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में हर उम्र वर्ग के लोगों ने हिस्सा लिया।

महिला एशिया कप: पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ मिलाने पर क्या बोले भारतीय टीम के हेड कोच अमोल मजूमदार?

दुबई। महिला एशिया कप 2026 में रविवार का दिन क्रिकेट फैंस के लिए रोमांचक होने वाला है। दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में भारतीय महिला टीम और थाइलैंड के बीच मुकाबला होने वाला है। हालांकि, टूर्नामेंट में भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले मैच का इंतजार है। दोनों देशों के बीच मुकाबला 5 सितंबर को होना है। भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से आपसी रिश्ते सहज नहीं हैं। अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद क्रिकेट के मैदान पर भी दोनों देशों के बीच दूरियां साफ दिखी हैं। पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के कप्तान और टीम (पुरुष और महिला) एक दूसरे के साथ हाथ नहीं मिलाते। एशिया कप 2026 में क्या यह सिलसिला कायम रहेगा या टूटेगा। इसे लेकर फैंस के मन में सवाल है। पाकिस्तान के खिलाफ होने वाले मैच के दौरान क्या भारतीय टीम पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ मिलाएगी? इस सवाल का जवाब थाइलैंड के साथ होने वाले मैच से पहले आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय टीम के कोच अमोल मजूमदार ने दिया। उन्होंने कहा, “देखिए, हम मैदान पर सबसे अच्छा क्रिकेट खेलने की कोशिश करते हैं, और मैदान के बाहर की चीजों पर हम ध्यान नहीं देते। हम उस दिन सबसे अच्छा क्रिकेट खेलने की कोशिश करते हैं, और जब हम वह मैच खेलेंगे तो इस बारे में बात करेंगे। लेकिन अभी, थाइलैंड के खिलाफ मैच पर ध्यान दे रहे हैं।” थाइलैंड ने टूर्नामेंट की शुरुआत जीत के साथ की है। अपने पहले मैच में थाइलैंड ने हांगकांग को 6 रन से हराया था। भारतीय टीम का टूर्नामेंट में यह पहला मैच है और निश्चित रूप से थाइलैंड के खिलाफ टीम सावधान रहेगी। थाइलैंड के खिलाफ मैच से जुड़े सवाल पर मजूमदार ने कहा, “हमें टूर्नामेंट की अच्छी शुरुआत पर फोकस करना होगा। हम आक्रामक क्रिकेट खेलते हुए बेहतर परिणाम हासिल करने का प्रयास करेंगे।” भारतीय टीम का हाल में टी20 फॉर्मेट में प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। इस पर मजूमदार ने कहा, “हम फॉर्म पर ज्यादा ध्यान नहीं देते। आप पिछले छह महीनों में टी20 हमारे प्रदर्शन पर बात कर रहे हैं। हम जानते हैं कि इस टीम में सुधार की बहुत गुंजाइश है। टीम में युवा खिलाड़ी हैं। हम अच्छा और आक्रामक क्रिकेट खेलने की कोशिश कर रहे हैं।

जीवन का असली पैमाना इस बात में है कि आप समाज को कितना लौटाते हैं: मोहन भागवत

न्यूयॉर्क। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने लोगों से निजी दौलत और भौतिक सफलता से आगे देखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जीवन का असली पैमाना इस बात में है कि आप समाज को कितना लौटाते हैं। यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि हर व्यक्ति दूसरों के काम और योगदान पर निर्भर है। इसी वजह से समाज को वापस देने की जिम्मेदारी भी बनती है। संघ प्रमुख ने कहा, “हम कितना कमाते हैं यह महत्वपूर्ण नहीं है। हम कितना बांटते हैं यह महत्वपूर्ण है।” उन्होंने सवाल उठाया कि क्या करियर को सिर्फ पैसा और भौतिक सुख पाने का जरिया मानना चाहिए। क्या करियर सिर्फ पैसा है? क्या करियर सिर्फ भौतिक खुशी है? मोहन भागवत ने कहा कि भारतीय परंपराएं धन या भौतिक उपलब्धि को खारिज नहीं करतीं। वे दोनों को मानव जीवन का वैध हिस्सा मानती हैं, लेकिन एकमात्र उद्देश्य नहीं। यहां तक कि हमारे उपनिषद भी हमें बताते हैं कि केवल मोक्ष के पीछे मत भागो। आपको भौतिक सफलता भी हासिल करनी है। उन्होंने तर्क दिया कि कोई भी व्यक्ति खुद को पूरी तरह से सेल्फ-मेड नहीं कह सकता, क्योंकि उसका जीवन माता-पिता, किसान, मजदूर और कई अन्य लोगों के सहारे चलता है। उन्होंने पूछा, “हम सभी जीवन के इस मुकाम तक आए हैं। हम बड़े हुए हैं, हम सीख रहे हैं, और हम आगे बढ़ेंगे। हमें यह क्षमता किसने दी? यह शरीर हमें किसने दिया, हमारे माता-पिता ने। दुनिया में कहीं खेती हो रही है। इसीलिए आप खा पा रहे हैं। अगर किसान खेती करना बंद कर दें, तो आप क्या खाएंगे? आप कपड़े पहन रहे हैं क्योंकि मिलें हैं। मजदूर काम कर रहे हैं। कपास उगाने वाले किसान अभी भी हैं। हम सब कुछ किसी और के कारण पाते हैं। हम दुनिया से लेते हैं। और इसलिए हमें वापस भी देना है।” उन्होंने कहा कि भौतिक सुख की तलाश कभी स्थायी संतुष्टि नहीं दे सकती। उन्होंने इस बात को समझाने के लिए डोनट्स का उदाहरण दिया। उन्होंने हंसते हुए कहा, “अगर मुझे न्यूयॉर्क के डोनट्स पसंद हैं, तो मैं डोनट्स खाऊंगा। एक बार में कितने डोनट्स खा सकता हूं? मुझे नहीं पता। मैं डायबिटिक हूं। कल सुबह मैं 50 और खाने के लिए तैयार हो जाऊंगा। तो भौतिक खुशी क्षणिक है, संतुष्ट नहीं कर सकती, और अगर भौतिक सुख की अधिकता है, तो वह विफल भी हो सकती है।” मोहन भागवत ने कहा कि मनुष्य में अपने फैसलों के परिणामों के बारे में सोचने की विशेष क्षमता है। सोच की दिशा ही तय करती है कि वह सिर्फ अपने लिए जी रहा है या दूसरों के लिए भी जिम्मेदारी ले रहा है। संघ प्रमुख ने कहा, “आप सोच सकते हैं, लेकिन आप किस तरह से सोचते हैं, वह महत्वपूर्ण है। अगर आप सही तरीके से सोचते हैं, तो आप भगवान के करीब जाते हैं। अगर आप गलत तरीके से सोचते हैं, तो आप पशु जगत के करीब जाते हैं।” उन्होंने कहा, “हमें एक-दूसरे का ख्याल रखना होगा। हमें इस तरह ख्याल रखना होगा कि मेरा जीवन जीवन को बनाए रखे।

क्या आपकी डाइट में पर्याप्त कैल्शियम है? जानिए स्रोत, फायदे और रोजाना कितनी जरूरत

नई दिल्ली। हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए कई तरह के पोषक तत्वों की जरूरत होती है और कैल्शियम उनमें से एक बेहद जरूरी खनिज है। आमतौर पर कैल्शियम का नाम सुनते ही सबसे पहले हड्डियों और दांतों का ख्याल आता है, लेकिन इसकी भूमिका सिर्फ इतनी ही नहीं है। इसलिए रोज की डाइट में पर्याप्त कैल्शियम लेना जरूरी है। कैल्शियम हमारी हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शरीर में मौजूद कैल्शियम का बड़ा हिस्सा हड्डियों और दांतों में संग्रहित रहता है। इसके अलावा यह मांसपेशियों के सही तरीके से काम करने में मदद करता है। दिल की सामान्य धड़कन और रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया में भी कैल्शियम की भूमिका होती है। कैल्शियम की जरूरत सिर्फ बच्चों को बढ़ती हड्डियों के लिए नहीं, बल्कि हर उम्र के व्यक्ति को होती है। उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों की मजबूती बनाए रखने के लिए भी पर्याप्त कैल्शियम और संतुलित आहार जरूरी है। कैल्शियम पाने के लिए हमेशा सप्लीमेंट की जरूरत हो, ऐसा नहीं है। संतुलित डाइट के जरिए भी इसे हासिल किया जा सकता है। दूध और दूध से बने उत्पाद जैसे दही और पनीर कैल्शियम के अच्छे स्रोत माने जाते हैं। इसके अलावा सोयाबीन, बादाम, दालें, अंजीर, मूली, गाजर और हरी पत्तेदार सब्जियों को भी अपनी डाइट में शामिल किया जा सकता है। अलग-अलग खाद्य पदार्थों को मिलाकर खाने से डाइट ज्यादा पौष्टिक और संतुलित बनती है। सिर्फ कैल्शियम खाना ही काफी नहीं है। शरीर कैल्शियम को अच्छी तरह अवशोषित कर सके, इसके लिए विटामिन-डी भी महत्वपूर्ण है। इसलिए कैल्शियम युक्त भोजन के साथ विटामिन-डी के पर्याप्त स्रोतों और स्वस्थ जीवनशैली पर भी ध्यान देना चाहिए। आम तौर पर वयस्कों के लिए कैल्शियम की दैनिक आवश्यकता लगभग 1.0 से 1.5 ग्राम प्रतिदिन बताई जाती है। हालांकि वास्तविक जरूरत उम्र, लिंग और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। इसलिए अपनी व्यक्तिगत जरूरत के लिए डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह लेना बेहतर है।

पेरिस में दिलजीत दोसांझ का पंजाबी तड़का, एफिल टॉवर के सामने दिए देसी पोज

मुंबई। पंजाबी सिंगर-एक्टर दिलजीत दोसांझ, जो अभी अपने बहुप्रतीक्षित ‘ऑरा वर्ल्ड टूर 2026’ के तहत यूके और यूरोप के दौरे पर हैं, ने पेरिस में बिताए समय की झलकियां शेयर कीं। उन्होंने इंस्टाग्राम पर फ्रांस की राजधानी में बिताए अपने समय की एक झलक दिखाई। दिलजीत ने सोशल मीडिया पर अपनी कुछ तस्वीरें शेयर कीं और कैप्शन लिखा, “पेरिस में प्योर रोमांस था, कल वियना में,” जिससे पता चलता है कि उनके यूरोप दौरे का अगला पड़ाव वियना है। अपने खास पंजाबी अंदाज के लिए मशहूर दिलजीत ने पेरिस के बैकग्राउंड में अपना देसी टच भी जोड़ा। इन तस्वीरों में ‘उड़ता पंजाब’ के एक्टर को एफिल टॉवर के सामने अलग-अलग पोज देते हुए देखा जा सकता है। उन्होंने अपने पेरिस कॉन्सर्ट की झलकियां भी शेयर कीं, जिनमें वेन्यू के अंदर का जबरदस्त माहौल दिखाई दे रहा है। तस्वीरों में फैंस दिलजीत के लिए जोश के साथ चीयर करते दिख रहे हैं, जबकि एक दिल को छू लेने वाले पल में सिंगर अपने फैंस के हाथों को चूमते हुए नजर आ रहे हैं। कुछ दिन पहले, दिलजीत दोसांझ ने प्राग में बिताए अपने समय की झलक दिखाई थी, जहां उन्होंने अपने चल रहे ‘ऑरा वर्ल्ड टूर’ के कॉन्सर्ट्स के बीच चेक गणराज्य की राजधानी को एक्सप्लोर किया। सोशल मीडिया पोस्ट्स की एक सीरीज के जरिए उन्होंने शहर की आर्किटेक्चर, खाने, वॉटरवेज और लोकल कल्चर की झलकियां दिखाईं। एक वीडियो में दिलजीत को प्राग के वॉटरवेज़ में बोट राइड का मजा लेते हुए भी देखा गया। अपनी पंजाबी जड़ों के मुताबिक, उन्होंने अपने सिग्नेचर भांगड़ा मूव्स दिखाए और कुछ लोकल लोगों और बोट क्रू के सदस्यों को भी यह डांस सिखाया, जिन्होंने खुशी-खुशी उनके स्टेप्स को फॉलो किया। टूर की बात करें तो, दिलजीत के बर्लिन कॉन्सर्ट के साथ उनके ‘ऑरा वर्ल्ड टूर 2026’ के तहत यूके और यूरोप के नौ शहरों में होने वाले एरीना टूर की शुरुआत हुई। सिंगर-एक्टर इसके बाद डबलिन, मिलान और एम्स्टर्डम जैसी कई अहम जगहों पर अपनी म्यूजिक परफॉर्मेंस देंगे। इस टूर का एक मुख्य आकर्षण लंदन के वेम्बली स्टेडियम में दिलजीत की बहुप्रतीक्षित परफॉर्मेंस होगी, जो दुनिया के सबसे मशहूर वेन्यूज में से एक है।

‘अगर मजाक में हो रहा है तो दिक्कत नहीं,’ समय रैना के शो में इमिग्रेंट्स पर जोक से हुए विवाद पर बोले मनोज बाजपेयी

मुंबई। एक्टर मनोज बाजपेयी ने कॉमेडियन समय रैना के शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ में प्रवासियों पर किए गए मजाक से जुड़े विवाद पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अगर मजाक में हो रहा है तो दिक्कत नहीं। हमें खुद पर और एक-दूसरे पर हंसना सीखना चाहिए, सम्मान के साथ। उन्होंने दिल्ली में बस ड्राइवर के ‘ए बिहारी’ कहने का अपना किस्सा भी सुनाया। दरअसल एक्टर मनोज बाजपेयी ने हाल ही में अपनी आने वाली फिल्म ‘लास्ट मैन इन टॉवर’ के प्रमोशन के दौरान आईएएनएस से ​​बात की। जब उन्हें कॉमेडियन के शो में हुई उस घटना के बारे में बताया गया, तो उन्होंने कहा कि अगर यह सब मजाक में हो रहा है, तो मुझे इससे कोई दिक्कत नहीं है। इस शो में शेरोन वर्मा और समय रैना ने मजाक-मजाक में एक-दूसरे की पृष्ठभूमि का मजाक उड़ाया था। मनोज ने ​​कहा, “हमें खुद पर और साथ में भी हंसना सीखना चाहिए। किसी को भावनाओं को आहत किए बिना एक-दूसरे पर हंसना चाहिए और फिर बुरा नहीं मानना ​​चाहिए। हमें यही सीखना चाहिए। हमारे अंदर खुद को लेकर ह्यूमर होना चाहिए, लेकिन साथ ही सम्मान भी होना चाहिए – न सिर्फ अपने लिए, बल्कि उस व्यक्ति के लिए भी जिसके साथ आप बैठे हैं और वह व्यक्ति कहां से आया है, इसके लिए भी। यह बहुत जरूरी है। अगर दो लोग एक-दूसरे के साथ सहज होते हैं, तो वे हमेशा एक-दूसरे पर हंसते हैं।” इसके बाद एक्टर ने राष्ट्रीय राजधानी में अपने शुरुआती दिनों की एक घटना का जिक्र किया, जब एक बस ड्राइवर ने उनसे सख्ती से बात की थी। उन्होंने आगे कहा, “जब मैं दिल्ली में था, तब मैं 18 साल का था, और मैं बस में सामने वाले दरवाजे से चढ़ने की कोशिश कर रहा था क्योंकि यह मेरा पहला अनुभव था। इसलिए, मुझे शहर के नियमों का पता नहीं था। ड्राइवर ने मेरी तरफ देखा और चिल्लाया, ‘ए बिहारी, पिछले गेट से चढ़ो’। उसे पता नहीं था कि मैं बिहार से हूं, लेकिन असल में मैं बिहार से ही हूं। उसके लिए, जो भी व्यक्ति ऐसी बेवकूफी भरी गलती करता था, वह बिहार से ही होता था। मुझे बुरा नहीं लगा क्योंकि पहली बात, वह सही था कि मैं बिहार से हूं। दूसरी बात, मैं भी गलत नहीं था क्योंकि मैं शहर में नया था और बिल्कुल अनजान था।” उन्होंने आगे कहा, “जब मैंने अलग-अलग राज्यों के लोगों से दोस्ती की, तो हम एक-दूसरे पर हंसा करते थे। हमें कभी बुरा नहीं लगा या हम कभी आहत नहीं हुए। लेकिन हां, समस्या तब होती है जब कोई बाहर से आकर आपके लिए या समुदाय के लिए परेशानी का कारण बन जाता है। तब दिक्कत होती है। उससे पहले तो हमें एक-दूसरे पर और खुद पर भी हंसने में सक्षम होना चाहिए। यह एक बहुत ही स्वस्थ समाज की निशानी है।

गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच बड़े हनुमान मंदिर के गर्भगृह में पहुंचा पानी, बजरंगबली का हुआ प्राकृतिक जलाभिषेक

प्रयागराज। प्रयागराज में गंगा और यमुना नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ने से संगम क्षेत्र में पानी का फैलाव बढ़ता जा रहा है। बढ़ते जलस्तर के बीच संगम स्थित प्रसिद्ध बड़े हनुमान मंदिर के गर्भगृह में भी गंगा का पानी प्रवेश कर गया। इसके बाद लेटे हुए हनुमान जी का मां गंगा ने प्राकृतिक जलाभिषेक किया। संगम स्थित प्रसिद्ध बड़े हनुमान मंदिर में पानी पहुंचने का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें सीढ़ियों से होकर गंगा का पानी गर्भगृह की ओर जाता दिखाई दे रहा है। बताया जा रहा है कि नेपाल में भारी बारिश और हिमालयी क्षेत्रों में लगातार हो रही वर्षा के चलते गंगा के जलस्तर में बीते कुछ दिनों से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। इसका असर उत्तर प्रदेश और बिहार के गंगा किनारे बसे शहरों में भी दिखाई दे रहा है। वाराणसी, प्रयागराज के अलावा बिहार के बक्सर, पटना और मुंगेर में भी गंगा का पानी नदी के सामान्य बहाव क्षेत्र से आगे बढ़ गया है। प्रयागराज में गंगा-यमुना के बढ़ते जलस्तर के कारण संगम क्षेत्र में स्थित बड़े हनुमान मंदिर तक पानी पहुंच गया। मंदिर के गर्भगृह में गंगा का पानी प्रवेश करने के बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए हैं। अब जब तक गर्भगृह में गंगा का पानी मौजूद रहेगा, श्रद्धालु लेटे हुए हनुमान जी के प्रत्यक्ष दर्शन नहीं कर सकेंगे। हालांकि, मंदिर परिसर के बाहर स्थित छोटे हनुमान जी के मंदिर में श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना कर रहे हैं। मंदिर में गंगा का पानी प्रवेश करने के बावजूद पंडितों ने पूजा-पाठ किया। श्रद्धालुओं के बीच भी इस प्राकृतिक दृश्य को लेकर उत्साह और आस्था का माहौल दिखाई दे रहा है। दर्शन के लिए पहुंचे लोगों का कहना है कि वे बड़े हनुमान जी के दर्शन करने आए थे, लेकिन मां गंगा ने स्वयं बजरंगबली का जलाभिषेक कर दिया। श्रद्धालुओं ने इसे बेहद अद्भुत और धार्मिक आस्था से जुड़ा दृश्य बताया। उनका कहना है कि हर साल जब गंगा का जलस्तर बढ़ता है तो मां गंगा लेटे हुए हनुमान जी को स्नान कराती हैं। गंगा के पानी से गर्भगृह में हुए इस प्राकृतिक अभिषेक को देखने के लिए संगम क्षेत्र में लोगों की भीड़ भी जुट रही है। प्रशासन की ओर से लगातार बढ़ते जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। गंगा और यमुना के जलस्तर में बढ़ोतरी के चलते निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है।