दिल्ली के पुरानी सीलमपुर में गारमेंट की दुकान में लगी आग, कोई हताहत नहीं

नई दिल्ली। दिल्ली के पुरानी सीलमपुर इलाके में रविवार सुबह एक तीन मंजिला इमारत में चल रही गारमेंट की दुकान में आग लग गई। घटना की सूचना मिलते ही दमकल की चार गाड़ियां मौके पर भेजी गईं। अधिकारियों ने बताया कि दमकल कर्मियों ने आग पर काबू पा लिया है। दिल्ली दमकल विभाग के अनुसार, शाहदरा जिले में कुर्ती गारमेंट के गोदाम के रूप में इस्तेमाल हो रही इमारत से सुबह करीब 8:21 से 8:22 बजे आग लगने की सूचना मिली थी। दमकल विभाग के अधिकारी अनूप सिंह ने बताया कि जब दमकल की टीम मौके पर पहुंची तो स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण थी। तंग रास्तों और तेज आग के कारण आग बुझाने में दिक्कत आई। अनूप सिंह ने कहा, “हमें सुबह करीब 8:21 या 8:22 बजे एक इमारत के अंदर आग लगने की कॉल मिली जो कुर्ती गारमेंट के गोदाम के रूप में काम कर रही थी। मौके पर पहुंचने पर स्थिति बेहद खतरनाक थी। यहां फायर इंजन लाने में हमें काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा।” उन्होंने बताया कि दमकल कर्मियों ने किसी तरह गाड़ी को इमारत के करीब लाकर होज पाइप बिछाए और आग बुझाने का काम शुरू किया। आग पर काबू पाने के लिए पांच हौज लाइनें लगाई गईं। अधिकारी ने कहा, “धुआं बहुत ज्यादा था, लेकिन अब आग पर काबू पा लिया गया है।” पुरानी सीलमपुर की इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। दमकल अधिकारी परिसर और आग से हुए नुकसान का आकलन कर रहे हैं। वहीं, राजधानी में एक अन्य आग की घटना में देर रात दिल्ली के राजधानी पार्क मेट्रो स्टेशन के पास टिम्बर मार्केट में भीषण आग लग गई। आग पहली से तीसरी मंजिल तक फैल गई, जिसके बाद 20 से 22 दमकल गाड़ियों को मौके पर लगाया गया। दमकल कर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद स्थिति पर काबू पाया। इस घटना में भी कोई हताहत नहीं हुआ। इस महीने की शुरुआत में दिल्ली के रघुबीर नगर में एक किराए के परिसर में आग लगने से दो ई-रिक्शा चालकों की मौत हो गई थी। पीड़ित कथित तौर पर परिसर में पोर्टेबल ई-रिक्शा बैटरी चार्ज कर रहे थे, तभी यह हादसा हुआ। दिल्ली पुलिस के अनुसार, रघुबीर नगर के आर-17, पहली मंजिल पर आग लगने की पीसीआर कॉल ख्याला पुलिस स्टेशन को सुबह करीब 5:24 बजे मिली थी। अलर्ट के बाद जांच अधिकारी पुलिस कर्मियों के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे। परिसर में दो घायल व्यक्ति मिले, जिनकी पहचान बिहार के भागलपुर निवासी 17 वर्षीय मो. सूफेद और 38 वर्षीय मो. साहमद के रूप में हुई। दोनों ई-रिक्शा चालक के रूप में काम कर रहे थे और आग में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। पुलिस ने किराए के परिसर में पोर्टेबल ई-रिक्शा बैटरी चार्ज करने सहित घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी थी।
ताशकंद में प्रधानमंत्री मोदी का औपचारिक स्वागत, राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ करेंगे अहम वार्ता

ताशकंद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रविवार को उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में औपचारिक स्वागत किया गया। उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया और दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से एक-दूसरे का अभिवादन किया। दिन में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता होगी। इस दौरान दोनों नेता विकसित भारत 2047 और उज्बेकिस्तान-2030 के साझा विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने पर चर्चा करेंगे। रवाना होने से पहले जारी अपने बयान में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “हाल के वर्षों में भारत और उज्बेकिस्तान की रणनीतिक साझेदारी में काफी प्रगति हुई है। मैं राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ अपनी बातचीत को लेकर उत्साहित हूं। हम व्यापार और निवेश, डिजिटल कनेक्टिविटी, रक्षा, ऊर्जा और विकसित भारत तथा यांगी उज्बेकिस्तान के साझा विजन को आगे बढ़ाने पर चर्चा करेंगे।” इससे पहले रविवार को प्रधानमंत्री मोदी ने उज्बेकिस्तान यात्रा के दौरान एक विशेष योग सत्र भी देखा, जिसमें उज्बेकिस्तान के 52 योग साधकों ने हिस्सा लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस योग सत्र की झलकियां अपने सोशल मीडिया अकाउंट ‘एक्स’ पर साझा कीं। वीडियो में उन्होंने कहा, “नमस्ते। आप सभी ने आज बहुत शानदार योग प्रदर्शन किया है। यहां हर उम्र के लोग मौजूद हैं। उज्बेकिस्तान को योग से जोड़ने के लिए मैं अपने मित्र राष्ट्रपति का आभार व्यक्त करता हूं। आप सभी को बहुत-बहुत बधाई।” वीडियो साझा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, “उज्बेकिस्तान योग पसंद करता है!” इस योग सत्र ने प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा में एक खास सांस्कृतिक रंग जोड़ा और यह भी दिखाया कि उज्बेकिस्तान में योग की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। सत्र में शामिल लोगों में योग फेडरेशन ऑफ उज्बेकिस्तान के छह सदस्य भी थे, जिन्होंने जून 2026 में अहमदाबाद में आयोजित प्रथम विश्व योगासन चैम्पियनशिप में अपने देश का प्रतिनिधित्व किया था। प्रधानमंत्री मोदी शनिवार को दो दिवसीय यात्रा पर उज्बेकिस्तान पहुंचे थे। ताशकंद हवाई अड्डे पर मिले गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए उन्होंने राष्ट्रपति मिर्जियोयेव का धन्यवाद भी किया। ताशकंद पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक्स’ पर लिखा, “राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने ताशकंद में मेरा गर्मजोशी से स्वागत किया। उनके इस विशेष सम्मान के लिए मैं उनका आभारी हूं। यह मेरी उज्बेकिस्तान की चौथी यात्रा है, जो हमारे द्विपक्षीय संबंधों की गहराई और लगातार बढ़ती गति को दर्शाती है।” उज्बेकिस्तान में भारतीय समुदाय ने भी प्रधानमंत्री मोदी का भव्य स्वागत किया। लोगों ने ‘मोदी मोदी’, ‘वंदे मातरम्’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए। भारतीय समुदाय की कुछ महिलाओं ने प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करते हुए उन्हें राखी भी बांधी। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कलाकारों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आनंद लिया।
‘धुरंधर’ में ‘घायल-घातक’ के रेफरेंस पर बोले राजकुमार संतोषी, ‘एक मेकर के तौर पर मिला काफी संतोष’

मुंबई। फिल्ममेकर राजकुमार संतोषी की फिल्मों और उनके दमदार डायलॉग्स का असर आज भी दर्शकों के बीच देखने को मिलता है। ‘घायल’, ‘घातक’ और ‘दामिनी’ जैसी फिल्मों ने हिंदी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई है, और इन फिल्मों के कई डायलॉग आज भी लोगों की जुबान पर हैं। ऐसे में जब रणवीर सिंह स्टारर फिल्म ‘धुरंधर’ में उनकी चर्चित फिल्मों ‘घायल’ और ‘घातक’ का रेफरेंस देखने को मिला, तो यह राजकुमार संतोषी के लिए भी खास पल था। फिल्म में रणवीर सिंह का किरदार कहते हुए सुनाई देता है, ‘घायल हूं, इसीलिए घातक हूं।’ आईएएनएस से खास बातचीत में राजकुमार संतोषी ने बताया है कि अपनी फिल्मों के इस रेफरेंस को देखकर उन्हें कैसा महसूस हुआ। आईएएनएस से बात करते हुए राजकुमार संतोषी ने कहा, “एक फिल्ममेकर के लिए इससे बड़ी खुशी की बात नहीं हो सकती कि सालों बाद भी लोग उनके काम को याद रखें। मेरी फिल्मों के डायलॉग आज भी लोगों को याद हैं। यह इस बात का सबूत है कि मैंने अपने करियर में अच्छा काम किया है। यह देख एक फिल्ममेकर के रूप में मुझे काफी संतोष मिला।” ‘धुरंधर’ में रणवीर सिंह के किरदार का डायलॉग ‘घायल हूं, इसीलिए घातक हूं’ को लेकर उन्होंने कहा, “मेरे लिए यह सिर्फ एक डायलॉग का इस्तेमाल नहीं था, बल्कि मेरी फिल्मों की विरासत को आगे की पीढ़ी तक पहुंचाने वाला एक सम्मान भी था। मैं फिल्म के निर्देशक आदित्य धर और पूरी टीम को इसकी सफलता के लिए बधाई देता हूं। आदित्य धर एक अच्छे फिल्ममेकर हैं और मैं चाहता हूं कि वह भविष्य में भी इसी तरह अच्छी फिल्में बनाते रहें।” आईएएनएस के सवाल पर संतोषी ने कहा, ”हां, फिल्म में डायलॉग इस्तेमाल किए जाने की जानकारी मुझे तुरंत मिल गई थी। मुझे इस बात की खुशी थी कि डायलॉग को फिल्म में सही तरीके से इस्तेमाल किया गया है।” राजकुमार संतोषी का सिनेमा में योगदान काफी खास रहा है। ‘घायल’ में सनी देओल के साथ उनकी जोड़ी ने दर्शकों को एक ऐसी फिल्म दी, जिसने एक्शन और इमोशन दोनों को मजबूत तरीके से पेश किया। इसके बाद ‘दामिनी’ में उन्होंने सामाजिक मुद्दे को बेहद असरदार तरीके से पर्दे पर उतारा।
किसने क्या पहना, क्या खाया इस पर निशाना नहीं साधना चाहिए : अभिनेता रजा मुराद

लखनऊ। आउटफिट, हिजाब और निजी पसंद को लेकर देश में एक बार फिर बहस तेज है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश के बाद यह मुद्दा कानूनी दायरे से निकलकर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है। वहीं, बॉलीवुड में भी समय-समय पर पहनावे को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संस्थागत अनुशासन के बीच संतुलन कैसे कायम हो तथा क्या किसी व्यक्ति के पहनावे और खान-पान को सार्वजनिक बहस का विषय बनाया जाना चाहिए? इन्हीं मुद्दों पर बॉलीवुड के वरिष्ठ अभिनेता रजा मुराद ने बेबाक राय रखी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन इसके साथ आत्म-संयम भी जरूरी है। उनका कहना है कि विवाद पैदा कर चर्चा में रहने के बजाय लोगों को अपने काम, प्रदर्शन और समाजसेवा के जरिए पहचान बनानी चाहिए। आईएएनएस की रजा मुराद से हुई बातचीत के प्रमुख अंश: सवाल: ड्रेस को लेकर एक अलग तरह की बहस चल रही है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। आप इस पूरे मामले को किस नजरिए से देखते हैं? जवाब : देखिए, इलाहाबाद हाईकोर्ट का एक ऑर्डर आया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि यूनिफॉर्म में हिजाब नहीं पहनना चाहिए। अब देखिए, ये प्रजातंत्र है। जिस बच्ची ने पिटीशन दायर की थी, वह चाहे तो सुप्रीम कोर्ट जा सकती है। कई बार हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया है। अगर उसे लगता है कि उसके साथ इंसाफ नहीं हुआ है, तो सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे उसके लिए खुले हैं और सुप्रीम कोर्ट का जो भी निष्पक्ष फैसला होगा, उसे हमें मानना चाहिए। आपको अपनी बात कहने और जायज बात को मनवाने का हक है। सवाल: क्या आपको लगता है कि हम लोगों के पहनावे को जरूरत से ज्यादा सार्वजनिक बहस का विषय बना रहे हैं? जवाब : विवादित बात करेंगे तो विवाद फैलता जाएगा। विवाद को फैलाना आजकल एक रिवाज बन गया है। ऐसी विवादित बात करो जिससे आप चर्चा में रहो। मैं ऐसी बातों में विश्वास नहीं रखता। अगर चर्चा में रहना है तो काम, परफॉर्मेंस और समाजसेवा के जरिए चर्चा में रहें, बजाय इसके कि किसी की बुराई करके या किसी के लिबास पर बात करके करके चर्चा में आया जाए। यह निजी मामला है कि कौन क्या पहने। सवाल: आपने निजी पसंद की बात कही। क्या पहनावा और खान-पान किसी व्यक्ति के निजी जीवन का हिस्सा होना चाहिए? जवाब : मैं क्या पहनता हूं, मैं क्या खाता हूं, ये मेरा निजी ख्याल है, मेरी निजी जिंदगी है और इसे जीने का मुझे पूरा हक है। मेरे घर में क्या पक रहा है, ये मेरी चारदीवारी का मामला है। मैं क्या पहन रहा हूं, ये मेरा निजी मामला है। आपको जो पहनना है, पहनिए, लेकिन उसमें अश्लीलता नहीं होनी चाहिए। अब किसी को लिबास में अश्लीलता दिखाई देती है, किसी को फैशन दिखाई देता है। इन बातों से जितना दूर रहें, उतना बेहतर है। सवाल: बीते दिनों बॉलीवुड में भी ड्रेस को लेकर कई विवाद सामने आए। कृति सेनन और कंगना रनौत से जुड़ा विवाद भी चर्चा में रहा। आप इनको किस नजरिए से देखते हैं? जवाब : कुछ विवाद पैदा हो जाते हैं, कुछ विवादों को पैदा किया जाता है। कुछ लोगों को मालूम होता है कि हम यह बात करेंगे तो इस पर विवाद होगा और विवाद होगा तो उनकी चर्चा होगी। हर इंसान को अपनी बात कहने का हक है। हमारे मुल्क में प्रजातंत्र है, फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन है, लेकिन खुद अपनी एक हद और सेल्फ-सेंसरशिप होनी चाहिए कि हमें कहां तक कहना है। कोई ऐसी बात नहीं होनी चाहिए जिससे सुनने वाला या जिसके बारे में कहा जा रहा है, वह आहत महसूस करे। हर एक्शन का रिएक्शन होता है। सवाल: तो क्या आपको लगता है कि आज विवाद में बने रहना, काम के जरिए चर्चा में रहने से आसान रास्ता बन गया है? जवाब : अपना काम कीजिए देश के प्रति, देशवासियों के प्रति। अपना कर्तव्य निभाइए और चर्चा में रहिए। इन बातों का कोई मतलब नहीं है कि किसने क्या पहना है और कौन क्या खा रहा है। इस पर निशाना नहीं साधना चाहिए।
‘विकसित भारत’ की यात्रा हर मोहल्ले, हर बस्ती और हर परिवार तक पहुंचनी चाहिए : राजनाथ सिंह

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि ‘विकसित भारत’ की यात्रा बड़े शहरों से शुरू होकर हर मोहल्ले, हर बस्ती और हर परिवार तक पहुंचनी चाहिए। बदलाव केवल इमारतों में नहीं होना चाहिए, हमारी पहचान में भी होना चाहिए। रक्षा मंत्री का कहना था कि आज भारत विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, ” विकसित भारत का अर्थ केवल बड़ी-बड़ी परियोजनाएं और आधुनिक इमारतें नहीं हैं। विकसित भारत का अर्थ है कि जब बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा मिले, जब किसी परिवार के घर में साफ पानी पहुंचे, जब किसी युवा को खेलने और अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिले और जब किसी दिव्यांग बच्चे को यह महसूस न हो कि वह समाज से पीछे है। यही विकास है।” राजनाथ सिंह ने रविवार को लखनऊ कैंटोनमेंट में विकास से जुड़ी अनेक परियोजनाओं के शिलान्यास समारोह को संबोधित किया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि लखनऊ छावनी में हो रहा यह विकास केवल ईंट, सीमेंट, और मशीनों का विकास नहीं है; यह लोगों के जीवन को बेहतर बनाने का प्रयास है। कहीं घर तक पानी पहुंचाने का प्रयास है, कहीं बच्चे को शिक्षा और अवसर देने का प्रयास है, कहीं जरूरतमंद को इलाज उपलब्ध कराने का प्रयास है, और कहीं युवाओं को खेल तथा भविष्य की नई दिशा देने का प्रयास है। राजनाथ सिंह ने कहा कि लखनऊ छावनी परिषद ने ब्रिटिश काल से चले आ रहे कुछ बाजारों के नाम बदलकर उन्हें भारत के स्वतंत्रता संग्राम, सामाजिक चेतना और राष्ट्रसेवा से जुड़े महान व्यक्तित्वों के नाम दिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा, ”आज का दिन लखनऊ छावनी के लिए बड़ा महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि आज हम लगभग 101 करोड़ रुपये की लागत से 12 विकास परियोजनाओं का शिलान्यास कर रहे हैं। ये 12 परियोजनाएं 12 संकल्प हैं, एक बेहतर छावनी का संकल्प, एक स्वच्छ छावनी का संकल्प, बेहतर जलापूर्ति का संकल्प, बच्चों के बेहतर भविष्य का संकल्प, युवाओं को खेल के बेहतर अवसर देने का संकल्प, सम्मानजनक नागरिक सुविधाओं का संकल्प और आधुनिक तकनीक के साथ आगे बढ़ती हुई छावनी का संकल्प।” रक्षामंत्री ने कहा कि उन्हें प्रसन्नता है कि उत्तर प्रदेश सरकार, रक्षा मंत्रालय, और उद्योग जगत मिलकर विकास के इस कार्य को आगे बढ़ा रहे हैं। जब केंद्र और राज्य सरकार की सोच एक दिशा में चलती है, तो विकास की गति कई गुना बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि वह लखनऊ छावनी परिषद की पूरी टीम की सराहना करना चाहते हैं। लखनऊ छावनी परिषद के अधिकारियों और कर्मचारियों ने यह दिखाया है कि यदि सोच स्पष्ट हो, लक्ष्य स्पष्ट हो और काम करने की इच्छा हो, तो सीमित संसाधनों के बीच भी बड़े परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। उन्होंने अपेक्षा की कि यही गति आगे भी बनी रहेगी।
ऑस्ट्रेलिया में आव्रजन-विरोधी मार्च, राजनीतिक हलचल बढ़ी

सिडनी। ऑस्ट्रेलिया की राजनीति में आव्रजन (इमिग्रेशन) का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में है। देश के प्रमुख शहरों में रविवार को ‘मार्च फॉर ऑस्ट्रेलिया’ के बैनर तले जुटी भीड़ ने बड़े पैमाने पर प्रवासन का विरोध किया। आयोजकों ने दावा किया कि पिछले साल से चल रहे इन प्रदर्शनों ने देश में आव्रजन-विरोधी राजनीति को नई ऊर्जा दी है और इसका सीधा फायदा दक्षिणपंथी ‘वन नेशन’ को मिला है। सिडनी के बेलमोर पार्क में आयोजित ‘फ्री स्पीच’ रैली में 300 से अधिक लोग जुटे। किसी संभावित तनाव को देखते हुए 70 से ज्यादा पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। इनमें दंगा नियंत्रण दस्ते के जवान और घुड़सवार पुलिसकर्मी भी शामिल थे। रैली के विरोध में हाइड पार्क में काउंटर-प्रोटेस्ट भी आयोजित किया गया। राष्ट्रवादी समूह ‘रिवाइव ऑस्ट्रेलिया’ के संस्थापक ब्रायन मार्लो ने रैली का नेतृत्व किया। उन्होंने दावा किया कि अगस्त 2025 में शुरू हुए ‘मार्च फॉर ऑस्ट्रेलिया’ आंदोलन ने लोगों को आव्रजन और राष्ट्रीय पहचान जैसे मुद्दों पर लामबंद किया। मार्लो ने ‘वन नेशन’ के हालिया चुनावी प्रदर्शन को इसी राजनीतिक माहौल से जोड़ते हुए कहा कि पार्टी उपचुनावों में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही है। उन्होंने पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के सीक्रेट उपचुनाव में ‘वन नेशन’ की जीत का भी जिक्र किया। हालांकि, यहां एक दिलचस्प विरोधाभास भी दिखाई देता है। रैली में ‘वन नेशन’ समर्थक मौजूद थे और कुछ लोगों ने पार्टी की टी-शर्ट भी पहन रखी थी, लेकिन आयोजकों के सोशल मीडिया मंचों पर हाल के दिनों में वन नेशन की नीतियों की आलोचना भी हुई है। सबसे बड़ा मतभेद प्रवासन की संख्या को लेकर है। वन नेशन की ओर से सालाना शुद्ध प्रवासन के लिए 1.30 लाख का लक्ष्य स्वीकार करने के संकेत दिए गए हैं, जबकि रैली में शामिल कई लोग इससे कहीं अधिक सख्त रुख की मांग कर रहे थे। भीड़ ने ‘रीमाइग्रेशन’ और बड़े पैमाने पर प्रवासन खत्म करने जैसे नारों का समर्थन किया। आव्रजन अब केवल आर्थिक नीति का विषय नहीं रह गया है। यह रोजगार, आवास, जनसंख्या वृद्धि, सामाजिक सेवाओं और राष्ट्रीय पहचान से जुड़े सवालों के साथ राजनीतिक बहस का हिस्सा बन चुका है। ‘वन नेशन’ का बढ़ता समर्थन इसी असंतोष को राजनीतिक रूप देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
चेन्नई की जलकुंभी से भरी व्यासर्पदी नहर में बढ़ा बाढ़ का खतरा

चेन्नई। व्यासार्पडी के शास्त्री नगर के निवासी बाढ़ को लेकर चिंतित हैं क्योंकि लगातार बारिश से जलकुंभी (जलीय पादप) और कचरे से बुरी तरह अवरुद्ध नहर में पानी का खराब प्रवाह उजागर हो गया है। शास्त्री नगर फर्स्ट स्ट्रीट के किनारे व्यासर्पडी नहर का एक हिस्सा जलकुंभी से ढका हुआ है, जिससे पानी के बहने के लिए बहुत कम जगह बची है। नहर एक हरे कालीन की तरह दिखती है, जिसके नीचे जमा पानी दुर्गंध और मच्छरों व कीड़ों के प्रकोप को और बढ़ा देता है। स्थानीय निवासियों ने बताया कि जलीय खरपतवार कई महीनों से अनियंत्रित रूप से फैल रहा था। शहर में रुक-रुक कर हो रही बारिश के कारण, उन्हें आशंका है कि भारी बारिश से नहर में पानी भर सकता है और आसपास की सड़कों और घरों में बाढ़ आ सकती है। शास्त्री नगर के अन्ना सलाई पर पुल के निर्माण से स्थिति और भी जटिल हो गई है। पुल के पास जलमार्ग के कुछ हिस्से निर्माण कार्य के दौरान अवरुद्ध हो गए हैं, जिससे जल निकासी धीमी हो गई है और फर्स्ट स्ट्रीट और आसपास के आवासीय क्षेत्रों में बारिश का पानी जमा हो रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि रात में नहर के पास कूड़ा भी फेंका जा रहा है, जिससे जलमार्ग और भी अवरुद्ध हो रहा है। उन्होंने ग्रेटर चेन्नई नगर निगम से आग्रह किया कि शहर में भारी बारिश होने से पहले जलकुंभी (जलीय पादप) और जमा हुए कचरे को साफ किया जाए। एक निवासी ने बताया, “पिछले पांच महीनों से यहां जलकुंभी उग रही है। कुछ लोग रात में नहर के किनारे कचरा भी फेंक देते हैं। इससे पानी का बहाव और बाधित होता है। दुर्गंध और मच्छरों का प्रकोप रोज़ाना की परेशानी है।” एक अन्य निवासी, नागमणि ने कहा कि पुल के निर्माण कार्य के कारण कुछ स्थानों पर पानी का प्रवाह अवरुद्ध हो गया है, जिसके परिणामस्वरूप आवासीय क्षेत्रों में बारिश का पानी जमा हो गया है। उन्होंने निर्माण कार्य पूरा करने और तब तक निर्बाध जल निकासी सुनिश्चित करने के लिए अस्थायी व्यवस्था करने का आह्वान किया। निवासियों ने चेतावनी दी कि देरी से कार्रवाई करने पर सार्वजनिक स्वास्थ्य और नागरिक जीवन दोनों के लिए दोहरी समस्या उत्पन्न हो सकती है। घरों में बाढ़ आने के खतरे के अलावा, लंबे समय तक पानी जमा रहने से मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन सकती हैं और वेक्टर जनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। नगर निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अन्ना सलाई पर बने पुल के एक तरफ का काम पूरा हो चुका है और दूसरी तरफ का निर्माण कार्य प्रगति पर है। नगर निगम ने नहर से घनी वनस्पति हटाने के लिए रोबोटिक उत्खनन यंत्र की मांग की है। अधिकारी ने बताया कि उपकरण के घटनास्थल पर पहुंचते ही जलकुंभी हटाने का अभियान शुरू हो जाएगा। हालांकि, स्थानीय निवासी चाहते हैं कि नहर को तत्काल साफ किया जाए और भारी बारिश के एक और दौर से पहले उसमें पानी का प्रवाह बहाल किया जाए।
अखिलेश यादव ने बहनों का त्योहार भी घोटाले में बदल दिया: ओपी राजभर

अंबेडकर नगर। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर की ओर से जेपीएनआईसी को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा गया। आईएएनएस से बातचीत करते हुए जेपीएनआईसी को लेकर ओम प्रकाश राजभर ने कहा, “अखिलेश यादव को पहले यह बताना चाहिए कि जेपीएनआईसी जनता के लिए बनी इमारत थी या सैफई के लिए कोई प्राइवेट बंगला। शुरू में इस प्रोजेक्ट की लागत 200 करोड़ रुपये बताई गई थी, लेकिन इस पर 865 करोड़ रुपये खर्च हुए। जनता के टैक्स के पैसे का गलत इस्तेमाल और बंटवारा इसका एक नया उदाहरण है। योगी सरकार ने इसे पीपीपी मॉडल के तहत फिर से जनता के लिए खोलने का फैसला किया है। इसीलिए उन्हें परेशानी हो रही है।” ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर हमला बोलते हुए कहा, “इनके (अखिलेश यादव) राज में पूर्वांचल के गरीब बच्चों इंसेफेलाइटिस से जान चली जाती थी। अब 12 करोड़ से ज्यादा लोगों को मुफ्त इलाज किया जा रहा है। अखिलेश यादव को पता नहीं है कि 2016 की तुलना में डकैती 90 प्रतिशत, लूट 85 प्रतिशत, हत्या 47 प्रतिशत और दुष्कर्म की घटनाएं 53 प्रतिशत घट गई हैं। अखिलेश यादव के राज में हर जिले में एक माफिया होता था। अब माफियाओं की संपत्ति जब्त की जा रही है। ओपी राजभर ने आगे कहा, “अखिलेश यादव के राज में लाल टोपी वाले थाने में कब्जा करते थे। रक्षा बंधन को लेकर अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए ओम प्रकाश राजभर ने कहा, “आपने (अखिलेश यादव) अपने ही दफ्तर में राखी घोटाला किया! पहले आपने 11,000 रुपये के इनाम का ऐलान किया, लेकिन जब महिलाएं आईं, तो आपने उन्हें सिर्फ 1,100 रुपये वाले लिफाफे थमा दिए। बहनों का त्योहार भी घोटाले में बदल दिया। ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि योगी सरकार में 9 सालों में पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के जरिए 9.5 लाख सरकारी नौकरियां दी हैं और 6 महीनों में 1 लाख नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव के राज में विज्ञापन निकलता था। ‘चाचा और भतीजा’ दुकान खोल देते थे। उनकी सरकार में पैसे पर नौकरी दी जाती थी। अखिलेश यादव को जाट तब याद आता है, जब चुनाव आता है। ओम प्रकाश राजभर ने कहा, “देखिए, 3 सितंबर 2013 को हाई कोर्ट ने कहा था कि 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का फायदा सिर्फ 12 जातियां ही उठा रही हैं। इसे बाकी जातियों में बांटा जाना चाहिए और आरक्षण दिया जाना चाहिए। इसी मुद्दे पर, पिछली सरकार के समय राजनाथ सिंह ने 2001 में हुकुम सिंह जी की अध्यक्षता में एक सामाजिक न्याय समिति बनाई थी। उन्होंने 27 प्रतिशत आरक्षण को 7 प्रतिशत, 9 प्रतिशत और 11 प्रतिशत में बांटा था।” आरक्षण मामले को लेकर ओम प्रकाश राजभर ने कहा, “आज जो व्यक्ति डीएम, एसपी, डीआईजी, आईजी, मुख्यमंत्री, राष्ट्रपति या राज्यपाल बन गया है, उनके बेटे को आरक्षण की क्या जरूरत है? आरक्षण उन गरीबों के लिए है जो अभी तक विकास की मुख्यधारा से नहीं जुड़ पाए हैं। आरक्षण की जरूरत उन्हीं को है। इसलिए हमारा मानना है कि आरक्षण गरीबों को मिलना चाहिए और अमीरों के लिए आरक्षण बंद कर दिया जाना चाहिए।
वित्त मंत्री सीतारमण ने अमेरिका में भारतीय समुदाय को किया संबोधित, कई सीईओ से की मुलाकात

शिकागो। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत के महावाणिज्य दूतावास के कार्यालय में अमेरिका में रहने वाले भारतीय समुदाय से बातचीत की और उन्हें संबोधित किया। रविवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, वित्त मंत्री सीतारमण ने विदेशों में बसे भारतीयों की भूमिका की सराहना करते हुए उन्हें एक ऐसी मजबूत ताकत बताया जो भारत की ‘सॉफ्ट पावर’, वैश्विक प्रतिष्ठा और द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ाती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत अपनी तकनीकी क्षमताओं, कुशल वर्कफोर्स और बढ़ते इनोवेशन इकोसिस्टम का इस्तेमाल करके न सिर्फ एक बड़ा बाजार बन सकता है, बल्कि ऑटोनॉमस डिफेंस सिस्टम (खुद से चलने वाले रक्षा सिस्टम) को डेवलप करने, टेस्ट करने और बनाने के लिए एक ग्लोबल हब भी बन सकता है। उन्होंने शिकागो में हयात के प्रेसिडेंट और सीईओ मार्क एस. होपलामैजियन से मुलाकात की। वित्त मंत्रालय के एक बयान के मुताबिक, बातचीत में भारत के प्रति हयात की लगातार प्रतिबद्धता और देश के टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के विकास के नए दौर में प्रवेश करने के साथ अपनी मौजूदगी को और बढ़ाने के मौकों पर चर्चा हुई। उन्होंने भारत की बेहतर होती कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर दिया, जिससे टूरिज्म और कमर्शियल डेस्टिनेशन के नए रास्ते खुल रहे हैं और टियर-2 और टियर-3 शहर आर्थिक गतिविधियों और यात्रा के अहम केंद्र के तौर पर उभर रहे हैं। वित्त मंत्री ने डेस्टिनेशन-बेस्ड टूरिज्म (किसी खास जगह पर केंद्रित पर्यटन) में बढ़ते मौकों पर भी जोर दिया, जिसमें आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, वेलनेस, मेडिकल, नेचर और अनुभव-आधारित टूरिज्म शामिल हैं। साथ ही, उन्होंने हयात को अपनी ग्लोबल विशेषज्ञता और एसेट-लाइट मॉडल का इस्तेमाल करके भारतीय डेवलपर्स और निवेशकों के साथ साझेदारी को और मजबूत करने के लिए प्रोत्साहित किया। यह जानकारी वित्त मंत्रालय ने एक्स पर एक पोस्ट के जरिए दी। वित्त मंत्री सीतारमण ने हयात के भारत में बढ़ते कामकाज के लिए ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ हॉस्पिटैलिटी’ के जरिए टैलेंट डेवलपमेंट के मौकों और ‘गिफ्ट सिटी’ को संभावित फाइनेंसिंग और ट्रेजरी हब के तौर पर इस्तेमाल करने का सुझाव भी दिया। इससे पहले उन्होंने ‘शील्ड एआई’ के को-फाउंडर और प्रेसिडेंट ब्रैंडन त्सेंग से मुलाकात की। बातचीत में ‘शील्ड एआई’ के भारत के साथ जुड़ाव और एआई-इनेबल्ड ऑटोनॉमी, अनमैन्ड सिस्टम और अगली पीढ़ी की डिफेंस टेक्नोलॉजी (जिसमें आर एंड डी, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट, को-डेवलपमेंट और को-प्रोडक्शन शामिल हैं) के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के मौकों पर चर्चा हुई। वित्त मंत्री ने भारत में ‘शील्ड एआई’ की लगातार दिलचस्पी का स्वागत किया और देश के तेजी से बढ़ते डिफेंस टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम, मजबूत इंजीनियरिंग और एआई टैलेंट और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग व इनोवेशन में बढ़ती क्षमताओं पर जोर दिया। एडीएम के ईवीपी और सीएफओ, मोनीश पटोलावाला के साथ हुई बैठक में भारत के प्रति एडीएम की लंबे समय से चली आ रही प्रतिबद्धता और कृषि, भोजन, पोषण, टेक्नोलॉजी और सस्टेनेबल वैल्यू चेन में अपनी भागीदारी को और गहरा करने के अहम मौकों पर चर्चा हुई। वित्त मंत्री ने भारत में एडीएम के निवेश का स्वागत किया, जिसमें किसानों के साथ बढ़ती साझेदारी, एफपीओ के साथ जुड़ाव और बेंगलुरु में अपनी ग्लोबल टेक्नोलॉजी और एआई क्षमताओं की स्थापना शामिल है। उन्होंने भारतीय किसानों के साथ संबंधों को और मजबूत करने और रीजेनरेटिव व सस्टेनेबल खेती को बढ़ावा देने के मौकों पर जोर दिया, साथ ही फूड प्रोसेसिंग, इनोवेशन और उभरती टेक्नोलॉजी में भारत की क्षमताओं का लाभ उठाने की बात कही।
एक और झील फटने की आशंका के चलते नेपाल में बाढ़ की चेतावनी जारी, भोटेकोसी नदी का जलस्तर बढ़ा

काठमांडू। नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (एनडीआरआरएमए) ने नई बाढ़ चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि रसुवा जिले में भोटेकोसी नदी का जलस्तर और बढ़ गया है। अथॉरिटी के अनुसार, एक और झील फटने की संभावना जताई गई है। अथॉरिटी ने सैटेलाइट तस्वीर के आधार पर शनिवार देर रात बताया था कि रसुवागढ़ी सीमा बिंदु से लगभग 18 किलोमीटर ऊपर की ओर ‘ल्हेंडे खोला’ नदी का प्रवाह रुक गया है। इसके कारण करीब 0.11 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में एक झील बन गई है। झील फटने से एक और खतरनाक बाढ़ का खतरा बना हुआ है। अथॉरिटी ने रविवार सुबह जारी एक सूचना में कहा, “रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग और चितवन जिलों सहित प्रभावित इलाकों में खोज, बचाव और राहत कार्यों में लगे सभी लोग, नदियों के किनारे रहने वाले नागरिक और अन्य संबंधित लोगों से अनुरोध है कि वे सतर्क रहें।” जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग के अंतर्गत आने वाले बाढ़ पूर्वानुमान प्रभाग के अनुसार, धाडिंग जिले के गल्छी क्षेत्र में, जो भोटेकोसी नदी के नीचे की ओर स्थित है, त्रिशूली नदी का जलस्तर सामान्य स्तर से तीन मीटर ऊपर पहुंच गया है। बाढ़ पूर्वानुमान प्रभाग के मुताबिक, 26 अगस्त को धाडिंग में बाढ़ का स्तर 14 मीटर से अधिक दर्ज किया गया था। अधिकारियों के अनुसार, त्रिशूली नदी में जलस्तर बढ़ने का मुख्य कारण रसुवा के भोटेकोसी क्षेत्र से आया बाढ़ का पानी है। जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग के एक अधिकारी ने कहा, “फिलहाल ज्यादा खतरा नहीं है, क्योंकि लोग पहले ही नदी किनारे वाले इलाकों से सुरक्षित स्थानों पर जा चुके हैं।” एनडीआरआरएमए लगातार इस बात को लेकर चेतावनी देता रहा है कि एक और बड़ी बाढ़ आ सकती है, क्योंकि ‘ल्हेंडे खोला’ नदी, जो भोटेकोसी नदी की एक सहायक नदी है, उसका प्रवाह बाधित हो गया है। अथॉरिटी ने शनिवार देर रात जारी बयान में कहा, “27 अगस्त 2026 को सुबह 11:44 बजे ली गई सैटेलाइट तस्वीर के शुरुआती विश्लेषण के आधार पर पता चलता है कि रसुवागढ़ी सीमा बिंदु से लगभग 18 किलोमीटर ऊपर की ओर ल्हेंडे खोला नदी का प्रवाह रुक गया है। इसके कारण करीब 0.11 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में एक झील बन गई है।” बयान में कहा गया, “इस बात का खतरा बना हुआ है कि झील को रोकने वाला प्राकृतिक बांध टूट सकता है, जिससे एक और बड़ी बाढ़ आ सकती है। इसलिए नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों और सभी संबंधित पक्षों से सतर्क रहने और बेहद सावधानी बरतने की अपील की जाती है।” अथॉरिटी ने बताया कि शुरुआती आकलन से संकेत मिले हैं कि उस क्षेत्र में कुछ और झीलें भी बनी हो सकती हैं। प्राधिकरण के अनुसार 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ में अब तक 675 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,498 लोग अब भी लापता हैं। लापता लोगों में 589 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।