शीर्ष 10 में से 7 कंपनियों का मार्केटकैप 1.13 लाख करोड़ रुपए घटा, एयरटेल टॉप लूजर

मुंबई। देश की शीर्ष 10 में से सात कंपनियों का मार्केटकैप बीते हफ्ते 1.13 लाख करोड़ रुपए कम हो गया है। इसकी वजह भारतीय शेयर बाजार के मुख्य सूचकांकों में गिरावट होना था। शीर्ष कंपनियों में भारतीय एयरटेल, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक, एलएंडटी, बजाज फाइनेंस, एलआईसी और एचयूएल लूजर्स में शामिल थे। वहीं, टीसीएस, आईसीआईसीआई बैंक और एसबीआई हरे निशान में बंद हुए। भारती एयरटेल का मार्केटकैप 40,500.85 करोड़ रुपए कम होकर 11,74,462.30 करोड़ रुपए हो गया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज का बाजार मूल्यांकन 40,056.32 करोड़ रुपए घटकर 17,38,119.27 करोड़ रुपए पहुंच गया है। एचडीएफसी बैंक का मार्केटकैप 11,558.35 करोड़ रुपए घटकर 11,09,600.70 करोड़ रुपए, बजाज फाइनेंस का मार्केटकैप 10,086.05 करोड़ रुपए कम होकर 6,70,535.57 करोड़ रुपए, एलएंडटी का बाजार मूल्यांकन 6,473.45 करोड़ रुपए कम होकर 5,55,987.49 करोड़ रुपए, एलआईसी का मार्केटकैप 3,162.50 करोड़ रुपए कम होकर 5,32,817.81 करोड़ रुपए और हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (एलयूएल) का मार्केटकैप 1,550.73 करोड़ रुपए कम होकर 4,72,361.83 करोड़ रुपए हो गया है। दूसरी तरफ टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) का मार्केटकैप 16,643.20 करोड़ रुपए बढ़कर 8,48,079.71 करोड़ रुपए, आईसीआईसीआई बैंक का मार्केटकैप 4,475.28 करोड़ रुपए बढ़कर 10,22,805.73 करोड़ रुपए और एसबीआई का मार्केटकैप 599.99 करोड़ रुपए बढ़कर 9,65,568.75 करोड़ रुपए हो गया है। साप्ताहिक गिरावट के बावजूद, रिलायंस इंडस्ट्रीज बाजार पूंजीकरण के हिसाब से भारत की सबसे मूल्यवान कंपनी बनी हुई है। भारती एयरटेल दूसरे स्थान पर रही, इसके बाद एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया, टीसीएस, बजाज फ़ाइनेंस, लार्सन एंड टुब्रो, एलआईसी और हिंदुस्तान यूनिलीवर का स्थान रहा। पिछले हफ्ते बेंचमार्क सेंसेक्स 276.32 अंक या 0.35 प्रतिशत गिरकर 77,264 जबकि निफ्टी में 76.35 अंक या 0.31 प्रतिशत की गिरावट 24,175 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 102.25 अंक या 0.51 प्रतिशत की तेजी के साथ 20,080 और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 333.75 अंक या 0.52 प्रतिशत की बढ़त के साथ 64,069 पर बंद हुआ।
राहुल को दलितों की नहीं सत्ता की चिंता’, चाय वाले बयान पर गिरिराज सिंह का पलटवार

पटना। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के चाय की दुकान वाले बयान पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने राहुल गांधी पर दलित समुदाय की चिंताओं को दूर करने के बजाय सत्ता हासिल करने पर ध्यान केंद्रित करने और राजनीतिक लाभ के लिए समाज में फूट डालने का आरोप लगाया। दरअसल, राहुल गांधी ने शनिवार को किए गए प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि चाय की दुकान पर दो तरह के कप होते हैं। एक कप दलितों को दिया जाता है, जिसे इस्तेमाल करके फेंक दिया जाता है और दूसरा सवर्ण समाज का कप होता है, जो फिर से इस्तेमाल किया जाता है। उनके इस बयान पर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, “मुझे लगता है कि आजकल राहुल गांधी के मन में यही चल रहा है। उन्हें शायद चाय की दुकान खोल लेनी चाहिए। मैंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो देखा कि मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और सोनिया गांधी वहां मौजूद थे। खड़गे उन्हें पानी दे रहे थे। उन्होंने उनका दिया पानी नहीं पिया। तो वे खुद ही छुआछूत को बढ़ावा दे रहे हैं, जबकि पूरा देश और समाज छुआछूत के विरोध में है।” गिरिराज सिंह ने आगे कहा, “मैंने देखा कि जिस चाय की दुकान का फोटो वो दे रहे थे, खुद शीशे के गिलास में पी रहे थे और सब कागज के गिलास में। तो मुझे लगता है ये नौटंकी उन्हीं के दिमाग का खुराफात है। अभी वो कैसे देश में सामाजिक स्तर पर समाज को एक दूसरे से लड़ावें, यही उनके दिमाग में चल रहा है। चाहे विद्यार्थी के नाम पर हो या चाहे किसी और के नाम पर हो।” गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, “राहुल गांधी को दलित समुदाय की कोई चिंता नहीं है। उन्हें देश पर शासन करने की चिंता है। और सत्ता पाने की इस होड़ में, चाहे पूरा देश आग की लपटों में घिर जाए या दलितों और गैर-दलितों के बीच फूट पड़ जाए, उन्हें कोई परवाह नहीं है।” केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने कहा, “पूरा देश यह जानता है कि खड़गे सिर्फ एक मुखौटा हैं। राहुल गांधी जो कुछ भी कहेंगे, वही वे कहेंगे और वे उससे आगे कुछ नहीं बोल सकते। अगर वे बोलेंगे, तो उन्हें सीताराम केसरी याद आ जाएंगे और यह भी कि कैसे उनके कपड़े उतरवाकर उन्हें बाहर निकाला गया था।
सीएम योगी बोले- लखनऊ छावनी बनेगी ‘मॉडल छावनी’, राजधानी में विरासत के साथ आधुनिकता का संगम

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को विकास की नई सौगात देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय रक्षा मंत्री एवं लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह ने रविवार को लखनऊ छावनी को ‘मॉडल छावनी’ के रूप में विकसित करने के लिए 101 करोड़ रुपये की 12 विकास परियोजनाओं का भूमिपूजन एवं शिलान्यास किया। इस अवसर पर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश ने सुरक्षा, सुशासन और विकास की नई यात्रा तय की है। आज उत्तर प्रदेश देश का ‘ग्रोथ इंजन’ बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने जिस विकसित और सशक्त भारत का सपना देखा था, उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में साकार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में उत्तर प्रदेश ने विकास के हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयां हासिल की हैं और लखनऊ इसका जीवंत उदाहरण है। सीएम योगी ने लखनऊ के बदलते स्वरूप का जिक्र करते हुए कहा कि करीब 20 वर्ष पहले लखनऊ रेलवे स्टेशन पर बोर्ड लगा होता था-‘मुस्कुराइए, आप लखनऊ में हैं।’ लेकिन उस समय शहर के जाम, संकरी गलियों और गंदगी को देखकर लोगों को मुस्कुराने के बजाय परेशान होना पड़ता था। आज लखनऊ ने अपनी ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित रखते हुए आधुनिक और स्मार्ट सिटी के रूप में अपनी नई पहचान बनाई है। आज लखनऊ में पुरानी गलियां भी हैं और स्मार्ट रोड तथा सीएम ग्रिड की आधुनिक सड़कें भी हैं। शहर की संकरी गलियों के साथ किसान पथ जैसा आउटर रिंग रोड भी है। एक तरफ ऊदा देवी पासी और महाराजा बिजली पासी जैसी महान विभूतियों की ऐतिहासिक विरासत है तो दूसरी ओर रक्षा और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में ब्रह्मोस जैसी आधुनिक मिसाइलों के निर्माण का केंद्र भी लखनऊ बन रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लखनऊ अपनी चिकनकारी और हस्तशिल्प के लिए पूरी दुनिया में पहचान रखता है। शहर की खानपान और सांस्कृतिक विरासत को भी नई पहचान मिली है। विरासत और आधुनिक विकास का यह संगम लखनऊ को देश के प्रमुख शहरों में अलग पहचान दे रहा है। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के मार्गदर्शन और प्रयासों से लखनऊ छावनी में आधुनिक सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। छावनी परिषद में ठोस कचरा प्रबंधन की एआई आधारित व्यवस्था तैयार की जा रही है। इसके साथ ही स्कूलों में मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग की शुरुआत जैसी पहल भी की जा रही है। इससे सैन्यकर्मियों, पूर्व सैनिकों और छावनी क्षेत्र में रहने वाले आम नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। सीएम योगी ने कहा कि लखनऊ में गोमती नदी को स्वच्छ बनाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि इस वर्ष के अंत तक गोमती नदी को पूरी तरह स्वच्छ बनाने में सफलता मिलेगी। इस दिशा में सेंट्रल कमांड की ओर से मिल रहे सहयोग की भी उन्होंने सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश के सामने पहचान का संकट था। प्रदेश अभाव, अराजकता और उपद्रव की स्थिति से गुजर रहा था, लेकिन आज तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। उत्तर प्रदेश अब इन समस्याओं से बाहर निकलकर देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बन रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की प्रेरणा और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में प्रदेश में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं। एक्सप्रेसवे, रेलवे, मेट्रो और एयर कनेक्टिविटी के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश तेजी से आगे बढ़ा है। लखनऊ मेट्रो के दूसरे चरण को केंद्र से मंजूरी मिलने के बाद इसके कार्य को भी जल्द आगे बढ़ाया जाएगा। उत्तर प्रदेश में देश का सबसे बड़ा एयर कनेक्टिविटी नेटवर्क विकसित हुआ है। वर्तमान में प्रदेश में 17 घरेलू और पांच अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट संचालित हैं। सैनिक स्कूलों के माध्यम से प्रदेश के युवाओं को देश की सुरक्षा जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की सीमाओं की सुरक्षा में सैनिक 24 घंटे तत्पर रहते हैं। ऐसे में सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि छावनी परिषदों में विकास कार्यों के लिए धन की कमी नहीं होने दी जाएगी। लखनऊ छावनी को आदर्श छावनी परिषद के रूप में विकसित करने के लिए सरकार लगातार काम करेगी। छावनी क्षेत्र में रहने वाले नागरिकों और सैन्य परिवारों को बेहतर सड़क, स्वच्छता, शिक्षा, कचरा प्रबंधन और अन्य नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि लखनऊ आज अपनी पुरानी पहचान और आधुनिक विकास, दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है। ब्रह्मोस से लेकर स्मार्ट रोड और विरासत से लेकर आधुनिक बुनियादी ढांचे तक, राजधानी बदलते उत्तर प्रदेश की नई तस्वीर पेश कर रही है।
बाढ़ पीड़ितों के लिए भारत से भेजी गई चौथी 11 टन सहायता सामग्री नेपाल पहुंची

काठमांडू। नेपाल में बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद के लिए भारत की ओर से भेजी गई चौथी सामग्री संबंधित अधिकारियों को सौंप दी गई है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने बताया, “11 टन राहत सामग्री लेकर पहुंची चौथी उड़ान नेपाल पहुंच गई है। विनाशकारी बाढ़ के बाद जारी सहायता अभियान के तहत यह सामग्री संबंधित अधिकारियों को सौंप दी गई है।” इस राहत खेप में खोज और बचाव कार्यों के लिए उपकरणों से लैस टनल टेक्निकल टीम और डीएनए जांच के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम भी शामिल है। भेजी गई राहत सामग्री में कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, प्लास्टिक शीट और स्वच्छता किट शामिल हैं। इससे पहले विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी दी थी कि भारत की चौथी राहत उड़ान काठमांडू पहुंच गई है। उन्होंने लिखा, “यह उड़ान नेपाल के जारी राहत और बचाव कार्यों को सहयोग देने के लिए जरूरी सामग्री और तकनीकी सहायता लेकर पहुंची है।” नेपाल के लिए भारतीय वायुसेना के सी-130 विमान के रवाना होने से पहले भी जयशंकर ने ‘एक्स’ पर बताया था कि विमान में खोज एवं बचाव उपकरणों के साथ सुरंग विशेषज्ञों की टीम, डीएनए विश्लेषण के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञ और फोरेंसिक उपकरण भेजे जा रहे हैं। साथ ही विमान में कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, प्लास्टिक शीट और स्वच्छता किट जैसी राहत सामग्री भी भेजी गई। जयशंकर ने बताया कि 230 फुट लंबे सिंगल-लेन मॉड्यूलर स्टील ब्रिज के लिए जरूरी उपकरण लेकर 16 ट्रक नेपाल पहुंच चुके हैं। उन्होंने कहा कि सात और बेली पुलों की स्थापना के लिए आवश्यक उपकरण भी जल्द भेजे जाएंगे, जबकि इन्हें लगाने वाली तकनीकी टीमें भी जल्द नेपाल पहुंचेंगी। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक भारत की ओर से 68.5 टन राहत सामग्री हवाई मार्ग से काठमांडू पहुंचाई जा चुकी है। इसमें आवश्यक दवाइयां, पोर्टेबल जनरेटर, खाद्य पैकेट, पानी को शुद्ध करने वाली गोलियां और तकनीकी उपकरण शामिल हैं। जयशंकर ने कहा, “नेपाल के राहत और बचाव प्रयासों को हमारा समर्थन लगातार जारी है।” उधर, नेपाल की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक, 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ में अब तक 734 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,498 लोगों से अभी भी संपर्क नहीं हो पाया है। इनमें 589 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
राहुल गांधी के पास कोई मुद्दे नहीं, जो उठाते हैं उसी पर मात खाते हैं : रविशंकर प्रसाद

पटना। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने रविवार को पटना स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में कार्यकर्ताओं के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ का प्रसारण सुना। इसके बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के पास कोई मुद्दा नहीं है और वे जिस मुद्दे को उठाते हैं, उसी पर मात खा जाते हैं। पटना साहिब के सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा, ”राहुल गांधी के पास मुद्दे नहीं हैं। वे जो भी मुद्दा उठाते हैं, उस पर पिट जाते हैं। उन्होंने वंदे मातरम का मुद्दा उठाया तो उस पर भी पिट गए।” उन्होंने कहा कि राजेंद्र प्रसाद और सरदार पटेल समेत देश के प्रमुख नेताओं ने ‘वंदे मातरम’ के सम्मान और उसकी पूरी रचना के गायन की बात कही थी। उन्होंने कहा कि संविधान सभा के अध्यक्ष के तौर पर डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने भी ‘वंदे मातरम’ को देश का राष्ट्रगीत और ‘जन गण मन’ को राष्ट्रगान बताया था। भाजपा नेता ने राहुल गांधी द्वारा मनुस्मृति को लेकर उठाए गए सवालों पर भी निशाना साधा। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि राहुल गांधी ‘होमवर्क नहीं करते’ और कोई उन्हें जो चिट पकड़ा देता है, वह वही बोलने लगते हैं। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री भी जवाब दे चुके हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के दलित व्यक्तित्व से जुड़े सवाल पर भी रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस को घेरा। उन्होंने कहा, ”यह पार्टी का कोई कार्यक्रम नहीं था। क्या कांग्रेस पार्टी का अब यह हाल हो गया है कि वह अपनी हैसियत के लिए अपने अध्यक्ष के दलित व्यक्तित्व को लेकर लड़ रही है?” उन्होंने राहुल गांधी को सलाह देते हुए कहा कि उन्हें यह समझना चाहिए कि जनता न उनकी बात सुनती है और जनता न उनका सम्मान करती है। अपने जन्मदिन को लेकर पूछे गए सवाल पर रविशंकर प्रसाद ने कहा कि वह जन्मदिन मनाते नहीं हैं। उन्होंने बताया कि वह नेपाल में थे और वहीं से लौटकर शनिवार को पटना आए हैं। रविवार को वह प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ कार्यक्रम को सुनने के लिए भाजपा प्रदेश कार्यालय पहुंचे थे। उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं और विशेष रूप से विनय केसरी द्वारा जन्मदिन पर दी गई शुभकामनाओं के लिए सभी का आभार जताया। उन्होंने कहा कि शुभकामनाओं से भीतर से और मजबूती के साथ काम करने की हिम्मत मिलती है।
जयपुर में बिजली गुल होने से नीट पीजी परीक्षा प्रभावित, 5 सितंबर को फिर होगा एग्जाम

जयपुर। जयपुर के सीतापुरा स्थित आईऑन डिजिटल जोन परीक्षा केंद्र पर रविवार को आयोजित नीट पीजी 2026 परीक्षा के दौरान बिजली सप्लाई बाधित होने से अभ्यर्थियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। परीक्षा के बीच बिजली गुल होने से नाराज अभ्यर्थियों और उनके परिजनों ने परीक्षा केंद्र के बाहर हंगामा किया और केंद्र प्रशासन से बिजली व्यवस्था को लेकर जवाब मांगा। अभ्यर्थियों की ओर से परीक्षा प्रभावित होने की आपत्ति भी दर्ज कराई गई। मामला बढ़ने के बाद प्रशासन ने प्रभावित अभ्यर्थियों की परीक्षा दोबारा कराने का फैसला लिया है। एडीएम सिटी के अनुसार, सीतापुरा स्थित इसी परीक्षा केंद्र पर प्रभावित अभ्यर्थियों की परीक्षा 5 सितंबर को दोपहर 3 बजे फिर से आयोजित की जाएगी। इसके लिए संबंधित अभ्यर्थियों को नए री-एडमिट कार्ड जारी किए जाएंगे। प्रशासन की ओर से केंद्र अधीक्षक से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली जा रही है और मामले की रिपोर्ट बोर्ड को भेजी जा रही है। देशभर में रविवार को नीट पीजी 2026 परीक्षा का आयोजन किया गया। इस परीक्षा के लिए कुल 2 लाख 72 हजार 183 अभ्यर्थी पंजीकृत हैं। जयपुर जिले में परीक्षा के लिए 15 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। परीक्षा को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने परीक्षा केंद्रों के आसपास सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए थे। प्रशासन के आदेश के तहत परीक्षा केंद्रों के 300 मीटर के दायरे में कई तरह की पाबंदियां लागू की गईं थी। यह आदेश सुबह 6 बजे से दोपहर 1 बजे तक प्रभावी था। इस दौरान ई-मित्र, फोटोकॉपी सेंटर और साइबर कैफे बंद रखने के निर्देश दिए गए थे। परीक्षा केंद्रों के आसपास मोबाइल फोन, ब्लूटूथ, स्मार्टवॉच सहित अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के इस्तेमाल पर भी रोक लगाई गई थी। इसके अलावा 300 मीटर के दायरे में कोचिंग संस्थानों के संचालन के साथ लाउडस्पीकर और डीजे के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया गया। परीक्षा केंद्रों पर केवल अधिकृत व्यक्तियों को ही प्रवेश की अनुमति दी गई। प्रशासन की ओर से संदिग्ध गतिविधियों और अनावश्यक भीड़ पर विशेष निगरानी रखी गई। परीक्षा से संबंधित अफवाहों को सोशल मीडिया पर फैलाने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी। हालांकि, सीतापुरा केंद्र पर बिजली व्यवस्था बाधित होने की घटना ने परीक्षा प्रबंधन पर सवाल खड़े कर दिए। अब प्रभावित अभ्यर्थियों की परीक्षा 5 सितंबर को दोपहर 3 बजे दोबारा होने से उन्हें राहत मिलने की उम्मीद है।
दलीप ट्रॉफी: ईशान किशन के चोटिल होने पर वैभव सूर्यवंशी ने संभाली ईस्ट जोन की कप्तानी

बेंगलुरु। युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को पहली बार सीनियर फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में टीम की कप्तानी करने का मौका मिला। रविवार को दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल में सेंट्रल जोन के खिलाफ उन्होंने ईस्ट जोन के कार्यवाहक (स्टैंड-इन) कप्तान के रूप में टीम की कमान संभाली। ईस्ट जोन टीम के मौजूदा उप-कप्तान सूर्यवंशी ने सेमीफाइनल के पहले दिन कप्तानी की जिम्मेदारी तब संभाली, जब नियमित कप्तान ईशान किशन मैदान से बाहर चले गए। सेंट्रल जोन की बल्लेबाजी के दौरान विकेटकीपिंग करते हुए किशन के दाहिने अंगूठे में चोट लग गई, जिसके कारण उन्हें मैदान से बाहर जाना पड़ा। ईस्ट जोन के कप्तान की जगह कुमार कुशाग्र ने विकेटकीपर की जिम्मेदारी संभाली, जबकि सूर्यवंशी ने कुछ समय के लिए जोनल टीम के स्टैंड-इन कप्तान की भूमिका निभाई। सूर्यवंशी दलीप ट्रॉफी में चर्चा का विषय रहे हैं। इस युवा खिलाड़ी ने नॉर्थ ईस्ट जोन के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में सिर्फ आठ रन बनाए थे, लेकिन गेंदबाजी में उनका प्रदर्शन शानदार रहा था। उन्होंने महज 11 रन देकर 2 विकेट अपने नाम किए थे। वैभव ने गेंदबाजी करने के अपने अनुभव को भी शेयर किया था। उन्होंने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) डोमेस्टिक द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो में सूर्यवंशी ने कहा, “अगर आप किसी भी बल्लेबाज से पूछें, तो उन्हें हमेशा गेंदबाजी करना पसंद होता है। एक बल्लेबाज को हमेशा गेंदबाजी करने में मजा आता है और एक गेंदबाज को हमेशा बल्लेबाजी करने में उतना ही आनंद आता है।” जोनल टीम के उप-कप्तान और ईशान किशन के सहयोगी के तौर पर नियुक्त किए गए सूर्यवंशी ने कप्तान के उन्हें गेंदबाजी कराने के फैसले के बारे में बात की और खुद को विकेट लेने वाला खिलाड़ी बताया था। उन्होंने आगे कहा, “विरोधी टीम के विकेट नहीं गिर रहे थे, इसलिए मुझे दो या तीन ओवर गेंदबाजी करने के लिए कहा गया। ईशान किशन को लगा कि वह जोखिम उठा रहे हैं, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि मैं विकेट लेने वाला खिलाड़ी हूं।” ईस्ट जोन बनाम सेंट्रल जोन सेमीफाइनल की बात करें तो, टॉस जीतने के बाद ईस्ट जोन ने रजत पाटीदार की कप्तानी वाली सेंट्रल जोन टीम को पहले बल्लेबाजी के लिए बुलाया। पाटीदार की टीम में सारांश जैन की वापसी हुई है। इस ऑफ स्पिन ऑलराउंडर ने इस महीने की शुरुआत में श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो टेस्ट में भारत के लिए डेब्यू किया था। पहले दिन के पहले सेशन में ईस्ट जोन ने सेंट्रल जोन को 32 ओवर में 81/3 पर रोककर उन पर दबाव बनाए रखा। अभिजीत के. सरकार और मुकेश कुमार ने क्रमशः दो और एक विकेट लिए। अभिजीत ने दिन के पहले घंटे में अमन मोखाडे और कुणाल चंदेला को आउट किया, जबकि भारतीय खिलाड़ी मुकेश ने दूसरे घंटे के आखिर में पाटीदार को 12 रनों के स्कोर पर क्लीन बोल्ड किया।
संघ प्रमुख के स्पीच पर विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया, बोले- उनको यह भाषण आरएसएस और भाजपा कार्यकर्ताओं को देना चाहिए

नई दिल्ली। संघ प्रमुख मोहन भागवत की ओर से न्यूयॉर्क में ‘यूनिवर्सल वननेस’ कार्यक्रम में हिंदू-मुस्लिम एकता पर भाषण देने को लेकर नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आई है। हिंदू-मुस्लिम एकता पर संघ प्रमुख के बयान को लेकर कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, “वे बदले हुए लहजे में भाषण देकर लौटे हैं। उन्हें उस जगह बोलने की इजाजत नहीं मिली जहां वे बोलना चाहते थे, इसलिए उन्होंने एक छोटे से कमरे में अपनी बात कही और लोग उन्हें सुनने भी नहीं आए। लेकिन मैं यह कहना चाहता हूं कि भारत का संविधान बहुत स्पष्ट है। यह लिंग, धर्म, जाति और भाषा के भेदभाव के बिना सभी को समानता की गारंटी देता है। अगर कोई कानून का उल्लंघन किए बिना अपने धर्म का पालन करता है, तो भारत में उसे भी वही अधिकार मिलते हैं जो बाकी सभी को मिलते हैं।” कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने कहा, “वे अमेरिका में क्यों भाषण देते हैं? उनको यह भाषण भाजपा और संघ के सभी कार्यकर्ताओं को देना चाहिए। उनके इस भाषण की आवश्यकता देश में है। वे इस देश को बचाने की बजाए बिगाड़ने का काम कर रहे हैं। कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा, “इन लोगों को दोहरा चरित्र है और इनकी हिप्पोक्रेसी की सीमा नहीं रही। वे न्यूयॉर्क में गरीबी दूर करने गए हैं। यहां के लोग अपनी गरीबी दूर करने के लिए अमेरिका गए हैं। वे डंकी रूट से जाते हैं और बेइज्जती सहते हैं। भारत में 80 करोड़ से ज्यादा लोग गरीब हैं, उसकी चिंता नहीं है। आरएसएस के लोग जिस तरह से चुनाव लड़वाते हैं, जमीन पर उतरते हैं और झूठ बोलते हैं और भाजपा को जीत दिलाते हैं, उनसे ज्यादा लालची कोई हो ही नहीं सकता है। सपा सांसद हरेंद्र सिंह मलिक ने कहा, “अच्छा रहेगा कि मोहन भागवत की ओर से भाजपा कार्यकर्ताओं और उनके जो मुख्यमंत्री और मंत्री हैं, उनको ये निर्देश दिया जाए। मोहन भागवत को भी उनके काम और आचरण की समीक्षा करनी चाहिए। टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कहा, “यह अच्छी बात है। हम सभी चाहते हैं कि भारत में एकता और विविधता बनी रहे। लेकिन मुझे नहीं पता कि मोहन भागवत ने जो कहा है, उस पर वे सच में यकीन करते हैं या नहीं।” डीएमके नेता टी.के.एस. इलांगोवन ने कहा, “उन्हें इस बात की कोई परवाह नहीं है कि संविधान क्या कहता है। संविधान हर भारतीय नागरिक को किसी भी धर्म को मानने, उसका पालन करने और उसका प्रचार-प्रसार करने का मौलिक अधिकार देता है। किसी को भी अपनी पसंद का धर्म चुनने या उसका पालन करने से नहीं रोका जा सकता। संविधान का अनुच्छेद 25 यही कहता है। लेकिन उन्हें इन संवैधानिक अधिकारों की कोई परवाह नहीं है। वे असभ्य लोगों जैसा व्यवहार कर रहे हैं। मेरा यही कहना है। उन्हें कानून की कोई परवाह नहीं है।
इंडियन गोल्फर भाटिया 22वें नंबर पर खिसके, होवलैंड टूर चैंपियनशिप में आगे

अटलांटा। अक्षय भाटिया ने बैक नाइन के आखिर में अपनी तीन में से दो बोगी गंवा दीं और टूर चैंपियनशिप के तीसरे राउंड के आखिर में 29 खिलाड़ियों में से टाई-22वें नंबर पर आ गए। दूसरे राउंड के बाद टी-11 पर चल रहे भाटिया के 1-ओवर 71 के स्कोर ने 65-69 और 71 के राउंड के बाद उनका टोटल 5-अंडर कर दिया। भाटिया ने पांचवें होल पर एक शॉट गंवा दिया, जिसे उन्होंने 12वें होल पर वापस पा लिया, लेकिन 14वें और 15वें होल पर लगातार बोगी के कारण 17वें होल पर बर्डी के बावजूद वह फिर से पीछे हो गए। अभी एक और राउंड बाकी है, लेकिन टूर चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई करने की वजह से भाटिया अगले सीजन के सभी चार मेजर्स में अपनी जगह पक्की कर चुके हैं। विक्टर होवलैंड ने अपने पिछले छह लगातार पुट में सात फीट या उससे ज्यादा के चार बर्डी पुट लगाए और 5-अंडर 65 का स्कोर किया। उन्होंने सीजन के आखिरी मुकाबले में एक शॉट की बढ़त ले ली, जो बहुत मुश्किल था। होवलैंड ने आखिर में 8-फीट के दो बर्डी पुट लगाए, जिससे उनका स्कोर 15-अंडर 195 हो गया, जो टूर चैंपियनशिप के नए खिलाड़ी रयान जेरार्ड से एक शॉट आगे था, जिन्होंने 66 के लिए बोगी-फ्री खेला। स्कॉटी शेफलर (66) और क्रिस गॉटरअप (67), जिन्होंने इस साल मिलकर पांच पीजीए टूर टाइटल जीते हैं, 12-अंडर 198 पर तीन शॉट पीछे थे। उनके साथ 46 साल के एडम स्कॉट और लुडविग एबर्ग भी थे। दोनों ने इस साल अपनी पहली जीत की तलाश में 65 का स्कोर किया। इस रेस में रोरी मैकलरॉय भी थे, जिन्होंने दो बोगी कीं, पार-5 18वें होल पर पार स्कोर किया और फिर भी 63 का स्कोर करके पांच शॉट के अंदर आ गए। उनके साथ कैमरन यंग भी थे, जिनकी 10वें होल पर डबल बोगी ने उन्हें 68 के राउंड में पीछे कर दिया। आखिरी दिन जीतने वाले के लिए 10 मिलियन डॉलर दांव पर लगे हैं, जो गोल्फ में किसी एक टूर्नामेंट के लिए सबसे बड़ी आधिकारिक राशि है। होवलैंड आखिर में ग्रीन्स पर अपना बेस्ट दे रहे थे – 13वें होल पर बर्डी के लिए 11 फीट, 14वें होल पर पार बचाने के लिए 18 फीट, 15वें होल पर पेनिनसुला-ग्रीन पर बर्डी के लिए 11 फीट, 16वें होल पर 7-फुट का पार पुट और उनकी आखिरी बर्डी। जेरार्ड ने अच्छा खेला, खासकर बैक नाइन पर, दोनों पार 5 पर बर्डी लगाईं और इस साल अपनी पहली जीत के मौके के लिए गेम में बने रहे। मैकलरॉय ने भी यही किया, सात शॉट पीछे से शुरुआत की और उनके पास खोने के लिए बहुत कम था। शेफलर ने भी बोगी-फ्री खेला और 8 से 12-फीट की रेंज में कुछ और बर्डी मौकों का फायदा नहीं उठा पाने का अफसोस जताया। वह इस सीजन में कमाल की निरंतरता के साथ खेल रहे हैं, जिससे वह करियर मनी लिस्ट में टाइगर वुड्स की जगह लेने की कगार पर हैं।
आईसीसी का बड़ा फैसला, श्रीलंका से छीनी महिला चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी: रिपोर्ट्स

नई दिल्ली। इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) ने श्रीलंका से पहली बार होने वाली महिला चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी का अधिकार छीन लिया है। नए मेजबान देश को लेकर फैसला आईसीसी की अगली बैठक में लिया जाएगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह फैसला तब लिया गया जब आईसीसी ने तय किया कि वह श्रीलंका में टूर्नामेंट की मेजबानी के साथ आगे नहीं बढ़ सकता, क्योंकि श्रीलंका क्रिकेट (एसएलसी) को सरकार द्वारा नियुक्त एक अंतरिम प्रशासन चला रहा है। महिला क्रिकेट में अगले साल पहली बार चैंपियंस ट्रॉफी खेली जाएगी, जिसकी शुरुआत 14 फरवरी से होगी, जबकि फाइनल मुकाबला 28 फरवरी 2027 को खेला जाना है। इस टूर्नामेंट में कुल छह टीमें हिस्सा लेंगी। ‘संडे टाइम्स’ की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि श्रीलंका ने टूर्नामेंट की मेजबानी का अधिकार खो दिया है और नए मेजबान देश का फैसला आईसीसी बोर्ड की अगली बैठक में किया जाएगा। एसएलसी ट्रांसफॉर्मेशन कमेटी के सेक्रेटरी प्रकाश शैफ्टर ने साप्ताहिक अखबार से कहा, “हां, इसे श्रीलंका से दूसरी जगह ले जाया गया है। यह टूर्नामेंट किसी दूसरी जगह पर खेला जाएगा, लेकिन अभी मुझे पक्का नहीं पता कि यह कहां खेला जाएगा।” इंटरनेशनल क्रिकेट संस्था का कहना है कि सदस्य देशों में सरकार का कोई दखल नहीं होना चाहिए। आईसीसी ने एसएलसी के प्रतिनिधियों को आईसीसी बोर्ड की बैठक में शामिल होने की इजाजत देने से भी मना कर दिया था, क्योंकि बोर्ड को एक ट्रांसफॉर्मेशन कमेटी चला रही थी। पिछले महीने एक बयान में आईसीसी ने एसएलसी से जितनी जल्दी हो सके चुनाव कराने को कहा था। आईसीसी ने एक बयान में कहा था, “आईसीसी बोर्ड को श्रीलंका क्रिकेट के बारे में जानकारी मिली और उन्होंने बदले हुए संविधान की दिशा में हुई प्रगति पर ध्यान दिया। उन्होंने जल्द से जल्द चुनाव कराने की जरूरत पर जोर दिया और इस बात पर सहमति जताई कि श्रीलंका क्रिकेट अभी के लिए आईसीसी बोर्ड की बैठकों में प्रतिनिधित्व करने में असमर्थ रहेगा।” अंतरिम कमेटी ने खेल मंत्री को संविधान का एक ड्राफ्ट सौंपा है। प्रस्तावित बदलाव कानूनी प्रक्रिया से गुजरेंगे और फिर संसद में पेश किए जाएंगे। हालांकि, इस प्रक्रिया के जल्दी पूरी होने की संभावना नहीं है। इसके अलावा, श्रीलंका चैंपियंस ट्रॉफी में हिस्सा लेने से भी पूरी तरह चूक सकता है। आईसीसी रैंकिंग में शीर्ष पांच टीमों के क्वालिफाई करने की उम्मीद है, जबकि मेजबान देश छठी टीम होगी। श्रीलंकाई टीम अभी दुनिया में छठे नंबर पर है, और अगर टूर्नामेंट को ऐसे देश में ले जाया जाता है जो आईसीसी रैंकिंग में शीर्ष छह से बाहर है, तो श्रीलंका क्रिकेट टीम टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले पाएगी।