हिंदू-मुस्लिम एकता पर मोहन भागवत के बयान पर अयोध्या के संत बोले- यह उनकी निजी सोच

अयोध्या। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर संतों की प्रतिक्रिया सामने आई है। महंत राजू दास ने कहा कि मुस्लिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, लेकिन कट्टरपंथ को भी बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। आईएएनएस से बातचीत करते हुए महंत राजू दास ने कहा, “संघ प्रमुख की ओर से सही कहा गया है कि मुसलमान के बिना देश अधूरा है। जिन मुसलमानों को राष्ट्र से प्रेम है और संविधान से लगाव है, उन्होंने उनके लिए कहा है। लेकिन ये बात उन लोगों के लिए नहीं कही जा सकती है, जो भारत के टुकड़े होने की बात करते हैं और जिनको संविधान से लगाव नहीं है। मेरा मानना है कि धर्म के आधार पर देश का बंटवारा करके कांग्रेस ने महापाप किया था। कांग्रेस ने हिंदुस्तान को धर्मशाला बना दिया। भारत में रहने वाले सभी हिंदुस्तानी हैं।” हिंदू-मुस्लिम एकता पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने आईएएनएस से कहा, “आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि यह सोचना कि मुसलमानों को भारत में नहीं रहना चाहिए, हिंदू धर्म नहीं है। भगवान राम की पवित्र जन्मभूमि अयोध्या धाम से, मैं, तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य, यह कहना चाहता हूं कि यह बयान आरएसएस का नहीं, बल्कि मोहन भागवत का निजी बयान है। यह सनातन धर्म, राष्ट्र और मानवता के खिलाफ है।” हिंदू-मुस्लिम एकता पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने प्रतिक्रिया दी है। आईएएनएस से बातचीत में उन्होंने कहा, “मोहन भागवत ने कहा है कि मुसलमानों को भारत में नहीं रहने की बात करने वाला हिंदू धर्म का अनुयायी नहीं हो सकता है। मैं भगवान राम की पावन जन्मभूमि अयोध्या धाम से, तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर के तौर पर कहना चाहता हूं कि यह संघ का नहीं, बल्कि मोहन भागवत का निजी विचार है।” जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने कहा कि कोई हमारी संस्कृति को मिटाए, यह बर्दाश्त नहीं है। अगर ऐसा न होता तो देश का बंटवारा न हुआ होता। मोहन भागवत का यह व्यक्तिगत बयान है, इसको संगठन का बयान न समझा जाए। एक और संत ने कहा कि यह मोहन भागवत का भावनात्मक बयान है, जिसका सम्मान किया जाना चाहिए। भारतीय सनातन परंपरा मानवता को अपना अभिन्न हिस्सा मानती है और मानव कल्याण के लिए कामना करती है। भारत धर्मनिरपेक्ष इसलिए है कि देश का मूलभूत मानव, मूलभूत संस्कृति, और मूलभूत परंपरा सनातन से प्रेरित है। हिंदुत्व अपनी विचारधारा पर काम करता है और ऐसा किया जाना चाहिए।

टेस्ट क्रिकेट में नो-बॉल फेंकना चिंताजनक, गेंदबाजों को बहाना नहीं करना चाहिए: सुनील गावस्कर

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम ने हाल में संपन्न 2 टेस्ट मैचों की श्रीलंका सीरीज 1-0 से अपने नाम की। गाले में खेले गए पहले टेस्ट में भारतीय टीम को 165 रन से जीत मिली थी। कोलंबो में खेले गए दूसरे टेस्ट में जीत की स्थिति में होने के बावजूद भारतीय टीम को ड्रॉ से संतोष करना पड़ा। कोलंबो में भारतीय गेंदबाज श्रीलंका की दूसरी पारी में निचले क्रम के बल्लेबाजों को आउट नहीं कर सके और टेस्ट ड्रा रहा। भारतीय टीम के लिए इस सीरीज में देवदत्त पड्डिकल और मानव सुथार के रूप में 2 स्टार मिले। देवदत्त पड्डिकल ने बल्लेबाजी और सुथार ने गेंदबाजी में असाधारण प्रदर्शन किया। गेंदबाजी भारत के लिए चिंता का विषय रही। दूसरे टेस्ट में भारत की तरफ से 13 नो बॉल फेंके गए। यह किसी भी टीम के लिए चिंता का विषय हो सकता है। भारतीय टीम द्वारा फेंके गए नो बॉल की संख्या पर सुनील गावस्कर ने कहा, “भारतीय गेंदबाजों को नो-बॉल पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है। इससे खेल प्रभावित होता है। खेल के बहुत कम पहलू ऐसे होते हैं जो पूरी तरह से खिलाड़ियों के नियंत्रण में होते हैं, और एक बल्लेबाज का गार्ड लेना और एक बॉलर का नो-बॉल न करना, ऐसे ही दो पहलू हैं। खिलाड़ी इंटरव्यू के दौरान कंट्रोल में काम करने की बात करते हैं। आज के दौर में रन-अप को मार्क करने के लिए एक टेप मेजर मौजूद है। इस वजह से गेंदबाजों के पास नो बॉल फेंकने का कोई बहाना नहीं होना चाहिए।” श्रीलंका सीरीज के बाद भारतीय टीम की अगली सीरीज अफगानिस्तान के खिलाफ है। भारत और अफगानिस्तान के बीच तीन टी20 मैच 13, 15 और 17 सितंबर को दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेला जाएगा। भारतीय टीम अफगान सीरीज में अपना दबदबा कायम रखने के लिए उतरेगी।

नेपाल पहुंचा भारतीय फोरेंसिक दल, नेपाली टीम संग मिलकर करेगा काम

काठमांडू/नई दिल्ली। नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने काठमांडू पहुंचे भारतीय फोरेंसिक टीम से मुलाकात की। ये दल नेपाल की टीम संग मिलकर त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों की पहचान करने में मदद करेगी। इस आपदा के बाद भारत सहित कई देशों के परिवार अपने लापता परिजनों की जानकारी का इंतजार कर रहे हैं। विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर नेपाल स्थित भारतीय दूतावास की पोस्ट को शेयर करते हुए लिखा, राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने नेपाल पहुंचे भारतीय फोरेंसिक टीम के सदस्यों से मुलाकात की। ये टीम अपने नेपाली समकक्षों के साथ मिलकर फ्लैश फ्लड का शिकार हुए लोगों के शवों की पहचान में मदद करने के लिए डीएनए नमूनों का मिलान करेगी। वहीं, राजदूत श्रीवास्तव की एक्स पोस्ट के मुताबिक, “राहत सामग्री लेकर पहुंची चौथी फ्लाइट में आए भारतीय फोरेंसिक टीम के सदस्यों से काठमांडू में मुलाकात की। वे अपने नेपाली समकक्षों संग मिलकर रसुवा में आई भयानक बाढ़ के दौरान जान गंवाने वालों के डीएनए सैंपल का मिलान करेंगे। भारत से 11 टन राहत सामग्री लेकर चौथी फ्लाइट रविवार को नेपाल पहुंची। विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि भारतीय वायुसेना का सी-130 विमान राहत सामग्री के साथ नेपाल पहुंच गया है। इस विमान में सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन में मदद करने वाली एक टनल टेक्निकल टीम और जरूरी उपकरण भेजे गए हैं। यह मिशन भारत के विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय की संयुक्त निगरानी में संचालित किया जा रहा है। नेपाल में 26 अगस्त को मध्य नेपाल और नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ के बाद बड़े स्तर पर खोज और राहत अभियान चलाया जा रहा है। शनिवार तक मृतकों की संख्या 700 पार पहुंच गई है, जबकि 2,000 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, लेकिन सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचों को हुए नुकसान के कारण आपदा ग्रस्त क्षेत्रों तक पहुंचने में कठिनाइयां आ रही हैं।

पीएम स्वनिधि योजना की सहायता से 35 लाख महिलाएं जुड़कर बढ़ा रहीं अपना कारोबारः पीएम मोदी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात के 137वें एपिसोड में पीएम स्वनिधि योजना का जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने बताया कि देश भर में 35 लाख महिलाएं इस योजना से जुड़कर अपने कारोबार को आगे बढ़ा रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “हमारे शहरों और कस्बों की सड़कों पर प्रतिदिन सुबह से शाम तक लाखों महिलाएं अपने-अपने काम में जुटी रहती हैं। कोई सब्जी बेचती है तो कोई फल और कोई चाय का ठेला लगाती है। कोई फूल, दीये और पूजा की सामग्री बेचती है। बस थोड़ी सी पूंजी की कमी है, जो इनके कारोबार को आगे बढ़ने से रोक देती है। लेकिन अब ऐसी लाखों बहनों और माताओं को पीएम स्वनिधि योजना से नई ताकत मिल रही है। महिला सशक्तीकरण के इस पहलू की उतनी चर्चा नहीं होती है, जितनी होनी चाहिए। पीएम स्वनिधि योजना की लाभार्थियों में करीब 46 फीसदी महिलाएं हैं, यानी देश भर में 35 लाख महिलाएं इस योजना से जुड़कर अपने कारोबार को आगे बढ़ा रही हैं।” प्रधानमंत्री ने कहा, “गाजियाबाद की बबिता शर्मा इसका एक अच्छा उदाहरण हैं। बबिता शर्मा पूजा सामग्री का एक छोटा सा स्टाल लगाती थीं। फूल, दीये, आगरबत्ती और नारियल जैसी चीजें बेचकर अपने परिवार की आजीविका में हाथ बंटाती थीं। बबिता मेहनत खूब करती थीं, लेकिन कारोबार बढ़ाने के लिए पूंजी की जरूरत थी। इसके बाद बबिता को पीएम स्वनिधि योजना से आर्थिक मदद मिली, जिससे उन्होंने अपने स्टाल पर सामान बढ़ाया और कारोबार का विस्तार किया। इससे ग्राहक बढ़े और आमदनी भी बढ़ी। धीरे-धीरे सड़क के किनारे उनका छोटा सा स्टाल एक दुकान में बदल गया।” पीएम मोदी ने कहा, “इसी तरह बेंगलुरु की टीएस निंगम्मा की मिशाल भी बहुत प्रेरक है। निगम्मा और उनके पति ने मिलकर इडली, डोसा और सांभर बेचने का छोटा सा कारोबार शुरू किया। काम चल पड़ा लेकिन इसे बढ़ाने के लिए पूंजी की जरूरत थी। निग्गमा को भी पीएम स्वनिधि से सहयोग मिला। उन्होंने अपनी कार्ट बेहतर की, सामान थोक में खरीदना शुरू किया और मेन्यू में कई चीजें जोड़ी। इससे ग्राहक बढ़े, आमदनी बढ़ी और परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर हुई। आज निंगम्मा अपने तीन बच्चों को बेहतर शिक्षा देने में सक्षम हुई हैं।” प्रधानमंत्री ने कहा, “जब एक महिला का कारोबार बढ़ता है तो पूरे परिवार का भविष्य आगे बढ़ता है। बच्चों की शिक्षा बेहतर होती है और घर की जरूरतें पूरी होती हैं। इससे महिला के भीतर आत्मविश्वास मजबूत होता है। यही तो है महिला सशक्तीकरण का एक जीवंत रूप। मैं रेहड़ी-पटरी के काम से जुड़ी सभी महिलाओं को उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देता हूं।” बता दें कि पीएम स्वनिधि केंद्रीय क्षेत्र की एक योजना है, जो रेहड़ी-पटरी लगाने वाले विक्रेताओं को किफायती कार्यशील पूंजी, वित्तीय समावेशन और सामाजिक सुरक्षा उपायों के माध्यम से सहायता प्रदान करती है। पीएम स्वनिधि योजना को कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू किया गया था, ताकि उन रेहड़ी-पटरी लगाने वाले विक्रेताओं को किफायती कार्यशील पूंजी ऋण उपलब्ध कराया जा सके, जिनके व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित हुए थे। यह रेहड़ी-पटरी लगाने वाले विक्रेताओं के लिए पहली समर्पित सूक्ष्म-ऋण योजना है, जो अनौपचारिक कार्यबल का एक बड़ा हिस्सा हैं और औपचारिक ऋण तक अक्सर उनकी पहुंच सीमित होती है। इसका उद्देश्य उनके वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देते हुए उनके व्यवसायों के विकास को समर्थन देना है। इस योजना के तहत रेहड़ी-पटरी लगाने वाले विक्रेताओं को क्रमिक ऋण किश्तों के माध्यम से 15,000 रुपये, 25,000 रुपये और 50,000 रुपये तक के बिना गारंटी कार्यशील पूंजी ऋण प्रदान किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त, योजना के अंतर्गत ब्याज सब्सिडी, क्रेडिट गारंटी सहायता और पात्र विक्रेताओं के लिए 30,000 रुपये तक का यूपीआई-लिंक्ड रुपे क्रेडिट कार्ड भी प्रदान किए जाते हैं।

मोहन भागवत के ‘हिंदू-मुस्लिम’ वाले बयान का भाजपा नेताओं ने किया समर्थन, कहा- यही भारत की असली पहचान

नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत द्वारा न्यूयॉर्क में आयोजित कार्यक्रम में हिंदू-मुस्लिम से जुड़े दिए गए बयानों पर भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन सहित भाजपा के नेताओं ने प्रतिक्रियाएं दी। मोहन भागवत ने ‘एक दुनिया, एक मानवता’ कार्यक्रम में कहा कि भारत की पहचान ‘विविधता में एकता’ से है और अगर कोई हिंदू यह मानता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रह सकता। भागवत के बयान पर भाजपा राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने आईएएनएस से कहा, “हिंदू सबको साथ लेकर चलने वाला है। ‘हिंदू’ न तो किसी पंथ का नाम है, न ही किसी धर्म का, और न ही ‘हिंदू’ को पूजा के किसी खास तरीके से बांधा जा सकता है। हिंदू होना जीवन जीने का एक तरीका है। इसलिए, जो व्यक्ति हिंदू है, या हिंदुत्व या हिंदू धर्म में विश्वास रखता है, वह सबको साथ लेकर चलने वाला होता है। उनके लिए सभी पंथों, धर्मों और अलग-अलग रास्तों को मानने वाले लोग बराबर होते हैं। इसीलिए मोहन भागवत ने सही कहा कि कोई व्यक्ति हिंदू नहीं हो सकता अगर वह मुसलमानों के खिलाफ हो या मुसलमानों को अपना हिस्सा न मानता हो।” भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा, “अमेरिका में सरसंघचालक ने जो संदेश दिया, वह उन्होंने पहले भी दिया है। कुछ संकीर्ण सोच वाले लोग हो सकते हैं जो ऐसा सोचते हों। भारत में रहने वाले किसी भी भारतीय नागरिक की पूजा-पद्धति चाहे जो भी हो, वह भारत में ही रहेगा। हिंदुत्व की अवधारणा में भी मुस्लिम समुदाय को कहीं भी अलग-थलग या बाहर नहीं माना जाता है। हम ‘वसुधैव कुटुंबकम’ में विश्वास रखते हैं। लेकिन संघ और भाजपा के बारे में गलतफहमियां और गलत राय बनाकर, कई लोग इसका शिकार हो जाते हैं। मुसलमानों के बिना देश नहीं चल सकता। प्रधानमंत्री भी कहते हैं सबका साथ-सबका विकास-सबका विश्वास। सरसंघचालक ने भी कहा है कि मुसलमानों के बिना इस देश की कोई कल्पना नहीं हो सकती।” भाजपा के राष्ट्रीय सचिव रोहन गुप्ता ने कहा, “मोहन भागवत ने बहुत सही बात कही है। यहां मुद्दा तुष्टीकरण के खिलाफ था, न कि किसी धर्म के खिलाफ। हर धर्म के व्यक्ति को अपनी बात रखने और अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है। जब राजनीतिक पार्टियां तुष्टीकरण के लिए इसका गलत इस्तेमाल करती हैं और उससे पैदा हुई स्थिति से निपटना होता है, तो मोहन भागवत की बात बिल्कुल सही थी। यह किसी धर्म के खिलाफ नहीं था।” भाजपा प्रवक्ता यासिर जिलानी ने कहा, “अमेरिका में उन्होंने (मोहन भागवत) नफरत फैलाने वालों को करारा जवाब दिया है। उन्होंने भारत की असली पहचान दिखाई है और दुनिया भर के लोगों को भारत की समृद्ध संस्कृति से परिचित कराया है। मोहन भागवत ने अमेरिका में जो कहा, वही भारत की असलियत है। यही भारत की पहचान है, यही भारत की मिट्टी और संस्कृति का हिस्सा है। यह बात उन लोगों को समझनी चाहिए जो पिछले एक हफ्ते से नफरत और झूठ के आधार पर उनके खिलाफ बोल रहे हैं, चाहे वो न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी हों या यहां बैठे विपक्ष के सदस्य, जिन्हें लगता है कि आरएसएस का विरोध करके वे आगे बढ़ सकते हैं या कुछ हासिल कर सकते हैं।” भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता तुहिन ए. सिन्हा ने कहा, “अमेरिका में मोहन भागवत ने जो बातें कहीं, वे महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि जो भी हिंदू चाहता है कि भारत ‘मुस्लिम-मुक्त’ हो, वह असल में हिंदू नहीं है। यह उनकी समावेशी सोच और देश-निर्माण व सामाजिक विकास के प्रति आरएसएस की हमेशा से रही प्रतिबद्धता को दर्शाता है। लेकिन चिंता की बात यह है कि राहुल गांधी भारत के जोहरान ममदानी बनते जा रहे हैं। आरएसएस के प्रति जोहरान ममदानी के मन में जैसी नफरत है, वैसी ही राहुल गांधी के मन में भी है और पवन खेड़ा व प्रियांक खड़गे के मन में भी है।” भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. गुरु प्रकाश पासवान ने कहा, “पूरा विश्व एक परिवार है। जन्म-आधारित भेदभाव हमारे समाज और सोच का हिस्सा हो ही नहीं सकता। मोहन भागवत ने जो कहा, वह सटीक है।

टिम कुक के साथ समाप्त होगा एप्पल में एक युग, कंपनी का मार्केटकैप 350 अरब डॉलर से बढ़कर 4 ट्रिलियन डॉलर के पार

नई दिल्ली। एप्पल के मौजूदा सीईओ टिम कुक का कार्यकाल 31 अगस्त को समाप्त हो रहा है और उनकी जगह अब जॉन टर्नस कार्यभार संभालेंगे। हालांकि, कुक कंपनी के बोर्ड एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के रूप में कार्य करते रहेंगे। कुक का सीईओ के रूप में कार्यकाल काफी हद तक सफल रहा है। उन्होंने यह जिम्मेदारी अगस्त 2011 में स्टीव जॉब की खराब सेहत के बाद दी गई थी। कुक के 15 वर्षों के कार्यकाल में कंपनी का मार्केटकैप 350 बिलियन डॉलर से बढ़कर 4 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो गया है। इस दौरान एप्पल के शेयर की कीमत 13 डॉलर से बढ़कर 320 डॉलर के करीब पहुंच गई है, जो कि करीब 25 गुना की बढ़ोतरी को दिखाता है। कुक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक एप्पल को एक ऐसे बिजनेस में बदलना है जो सिर्फ हार्डवेयर तक सीमित नहीं है। ऐप स्टोर, एप्पल म्यूजिक और एप्पल पे जैसी सर्विसेज ने कंपनी को तेज ग्रोथ हासिल करने में मदद की है। सर्विसेज सेगमेंट से अब सालाना 100 अरब डॉलर से ज्यादा की कमाई होती है और इसमें एप्पल के हार्डवेयर बिजनेस के मुकाबले ज्यादा मार्जिन मिलता है। कुक ने एप्पल की चिप स्ट्रैटेजी में भी एक बड़ा बदलाव किया। कंपनी ने इंटेल पर अपनी निर्भरता खत्म की और एप्पल सिलीकॉन प्लेटफॉर्म के तहत मैक कंप्यूटर के लिए अपने प्रोसेसर डिजाइन करना शुरू किया। इस बदलाव से एप्पल को परफॉर्मेंस, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और अपने बड़े हार्डवेयर-सॉफ्टवेयर इकोसिस्टम पर ज्यादा कंट्रोल मिला। उनके कार्यकाल में नए तरह के प्रोडक्ट्स भी आए। एप्पल ने 2015 में एप्पल वॉच लॉन्च की, जिसमें हेल्थ, फिटनेस और रोजमर्रा की कनेक्टिविटी पर फोकस किया गया था। एक साल बाद, कंपनी ने एयरपॉड्स लॉन्च किए, जिससे वायरलेस ईयरबड्स एक आम कंज्यूमर कैटेगरी बन गए और एप्पल के लिए कमाई का एक और बड़ा जरिया तैयार हुआ। हालांकि, कुक का सफर हमेशा आसान नहीं रहा। 2012 में लॉन्च हुए एप्पल मैप्स को शुरुआती दिनों में गलत और अधूरी जानकारी के कारण काफी आलोचना का सामना करना पड़ा था। हाल ही में, 2023 में लॉन्च किए गए विजन प्रो मिक्स्ड-रियलिटी हेडसेट को बड़े पैमाने पर अपनाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा है, क्योंकि इसकी ज्यादा कीमत ग्राहकों के लिए एक बड़ी रुकावट बन गई है। आखिरकार एप्पल ने अपने महत्वाकांक्षी इलेक्ट्रिक और ऑटोनॉमस व्हीकल प्रोग्राम, जिसे ‘प्रोजेक्ट टाइटन’ के नाम से जाना जाता था, को भी बंद कर दिया। कई सालों के डेवलपमेंट, ज्यादा लागत और कमर्शियल सफलता को लेकर अनिश्चितता के कारण कंपनी को इस प्रोजेक्ट को रोकना पड़ा। शायद एप्पल के अगले दौर से जुड़ा सबसे बड़ा सवाल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का है। जहां माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और ओपनएआई ने कंज्यूमर और एंटरप्राइज प्रोडक्ट्स में एआई को शामिल करने के लिए तेजी से कदम उठाए हैं, वहीं एप्पल ने ज्यादा सोच-समझकर और नपे-तुले तरीके से काम किया है, जिसमें प्राइवेसी, सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन और ऑन-डिवाइस कंप्यूटिंग पर जोर दिया गया है। यह रणनीति कुक के उत्तराधिकारी, जॉन टर्नस के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित हो सकती है। एप्पल ने अपने इकोसिस्टम में एआई क्षमताएं लाने में प्रगति की है, लेकिन कंपनी पर प्रतिद्वंद्वियों की रफ्तार का मुकाबला करने का दबाव बढ़ रहा है। कुक की एप्पल यात्रा असाधारण फाइनेंशियल ग्रोथ, सफल नए बिजनेस और प्रोडक्ट्स, और साथ ही ऐसी कोशिशों का मिला-जुला अनुभव रही है जो उम्मीदों पर खरी नहीं उतरीं। फिर भी, एप्पल के विस्तार और बदलाव में उनके योगदान को नजरअंदाज करना मुश्किल है।

ओडिशा सरकार का बड़ा फैसला, पत्नी को गुजारा भत्ता न देने वाले सरकारी कर्मचारियों की सैलरी से कटेगा पैसा

भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने उन सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने का फैसला किया है जो कोर्ट के आदेश के बाद भी अपनी पत्नी या बच्चों को गुजारा भत्ता नहीं देते। अब ऐसे कर्मचारियों की सैलरी से सीधे पैसे काटकर उनकी पत्नी और बच्चों के खाते में भेजे जाएंगे। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) की ओर से रविवार को जारी बयान के अनुसार, सीएम मोहन चरण माझी ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है। राज्य स्तरीय शिकायत सुनवाई के दौरान हर बार दो से तीन ऐसी शिकायतें आ रही थीं, जिनमें महिलाएं और बच्चे सरकारी कर्मचारियों द्वारा गुजारा भत्ता या एलिमनी न देने से परेशान थे। सरकार के अनुसार, कई पुरुष कर्मचारियों ने अदालतों के स्पष्ट आदेश के बावजूद अपनी पत्नी या बच्चों को भरण-पोषण की राशि नहीं दी। तलाक से जुड़े मामलों में एलिमनी न देने की भी इसी तरह की शिकायतें मिली हैं। इस मामले को गंभीरता से देखते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि कोर्ट द्वारा तय की गई राशि को संबंधित कर्मचारी की सैलरी से सीधे काटकर पत्नी या बच्चों के बैंक खाते में ट्रांसफर किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा, “राज्य का सरकारी कर्मचारी होते हुए कोर्ट के आदेश की अवहेलना करना और अपनी पत्नी और बच्चों के साथ ऐसा अन्याय करना राज्य सरकार के लिए पूरी तरह अस्वीकार्य है।” मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद जारी नई गाइडलाइन के तहत विभागीय ड्राइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर (डीडीओ) को कटौती की जिम्मेदारी दी गई है। जैसे ही भरण-पोषण के भुगतान का कोर्ट का आदेश मिलेगा, डीडीओ संबंधित कर्मचारी का मासिक वेतन बिल बनाते समय कोर्ट द्वारा तय राशि काट लेगा और उसे इलेक्ट्रॉनिक रूप से उसकी पत्नी और बच्चों के बैंक खातों में जमा कर देगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कोर्ट द्वारा निर्देशित भरण-पोषण से जुड़े मामलों को ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम (एचआरएमएस) से जोड़ने का भी निर्देश दिया है। इसका मकसद प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और ऑटोमेटेड बनाना और न्यायिक आदेशों का समय पर पालन सुनिश्चित करना है।

बिन्नू ढिल्लों के बर्थडे पार्टी पर सजी सितारों से भरी महफिल, पार्टी में बी प्राक से जानी तक ने लगाए ठुमके

मुंबई। पंजाबी सिनेमा के लोकप्रिय कॉमेडियन और अभिनेता बिन्नू ढिल्लों ने अपना जन्मदिन इस बार बेहद खास अंदाज में मनाया। उनके बर्थडे सेलिब्रेशन में पंजाबी म्यूजिक और फिल्म इंडस्ट्री के कई जाने-माने चेहरे एक साथ नजर आए। पार्टी में ऐसा माहौल बना कि गाने, डांस और दोस्तों की मस्ती ने पूरे जश्न को यादगार बना दिया। मशहूर पंजाबी सिंगर जसबीर जस्सी ने अब सोशल मीडिया पर इस खास सेलिब्रेशन की झलक शेयर की है, जिसमें बिन्नू ढिल्लों के साथ कई बड़े कलाकार जमकर मस्ती करते दिखाई दे रहे हैं। जसबीर जस्सी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर बिन्नू ढिल्लों के जन्मदिन की तस्वीरें और वीडियो शेयर की हैं। इन झलकियों में वह बिन्नू ढिल्लों और दूसरे दोस्तों के साथ पार्टी को एन्जॉय करते नजर आए। तस्वीरों से लेकर वीडियो तक, हर जगह सेलिब्रेशन का माहौल काफी खुशनुमा दिखाई दे रहा है। जसबीर जस्सी की ओर से शेयर किए गए वीडियो में वह खुद गाना गाते नजर आ रहे हैं। उनके गाने की धुन पर बी प्राक, कुलविंदर बिल्ला, जानी, निर्मल ऋषि और सुनीता धीर डांस करते और मस्ती करते दिखाई दिए। जसबीर जस्सी ने इस वीडियो के साथ कैप्शन में लिखा, ”बिन्नू वीर के जन्मदिन पर बॉलीवुड और पॉलीवुड की कई हस्तियों की मौजूदगी से महफिल में खूब रौनक रही।” बिन्नू ढिल्लों और जसबीर जस्सी के बीच काफी अच्छा बॉन्ड देखने को मिलता है। पार्टी की तस्वीरों में दोनों एक-दूसरे के साथ मस्ती करते और कैमरे के लिए पोज देते नजर आए। बिन्नू ढिल्लों को उनके दोस्तों और इंडस्ट्री से जुड़े कलाकारों ने सोशल मीडिया के जरिए उन्हें शुभकामनाएं भी दीं। बिन्नू ढिल्लों पंजाबी एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के सबसे लोकप्रिय कॉमेडी एक्टर्स में से एक हैं। उन्होंने अपनी कॉमिक टाइमिंग और खास अंदाज से लंबे समय तक दर्शकों का मनोरंजन किया है। ‘नौकर वाइफ दा’ जैसी फिल्मों से पहचान बनाने वाले बिन्नू ने धीरे-धीरे पंजाबी सिनेमा में अपनी अलग जगह बनाई। उनकी खासियत यह रही कि कॉमेडी के साथ-साथ उन्होंने अलग तरह के किरदारों में भी खुद को साबित किया। बिन्नू ने हिंदी फिल्मों में भी काम किया है। वह ‘शहीद-ए-आजम’ और ‘देव डी’ जैसी फिल्मों में सपोर्टिंग रोल में नजर आए। इसके अलावा, साल 2010 में उन्होंने निर्देशन के क्षेत्र में भी कदम रखा। उन्होंने ‘नॉटी बाबा इन टाउन’ नाम के प्ले का निर्देशन किया, जिसका मंचन अमेरिका और कनाडा में किया गया था। इसके बाद बिन्नू ढिल्लों ने पंजाबी फिल्मों में लगातार काम किया और अपनी कॉमेडी के दम पर दर्शकों के बीच मजबूत पहचान बनाई। ‘कैरी ऑन जट्टा’, ‘सिरफिरे’, ‘रौला पै गया’, ‘तू मेरा 22 मैं तेरा 22’, ‘लकी दी अनलकी स्टोरी’, ‘रंगली’ और ‘वेख बरातां चलियां’ जैसी फिल्मों में उनके काम को खूब पसंद किया गया।

आइसलैंड: ईयू से जुड़ने की बहस पर जनमत संग्रह, वोटों की गिनती में कांटे की टक्कर

नई दिल्ली। आइसलैंड में यूरोपीय संघ (ईयू) से जुड़ने की दिशा में अगला कदम उठाने को लेकर हुए जनमत संग्रह के वोटों की गिनती जारी है। शुरुआती रुझानों में दोनों पक्षों के बीच बेहद करीबी मुकाबला देखने को मिल रहा है। इस जनमत संग्रह में लोगों से सीधे ईयू की सदस्यता पर फैसला करने के लिए नहीं कहा गया है। सवाल यह है कि क्या आइसलैंड को यूरोपीय संघ की सदस्यता के लिए लंबे समय से रुकी बातचीत फिर से शुरू करनी चाहिए। यानी ‘हां’ की जीत होने पर भी आइसलैंड तुरंत ईयू का सदस्य नहीं बनेगा, बल्कि ब्रसेल्स के साथ सदस्यता वार्ता का नया दौर शुरू होगा। शुरुआती मतगणना में ‘हां’ और ‘नहीं’ के बीच अंतर बेहद कम रहा। स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 1.52 लाख वोटों की गिनती के बाद ‘नहीं’ पक्ष को 50.1 प्रतिशत और ईयू सदस्यता वार्ता दोबारा शुरू करने के पक्ष में पड़े वोटों को 49.9 प्रतिशत समर्थन मिला। ऐसे में अंतिम नतीजे को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। अपना वोट डालने के बाद प्रधानमंत्री क्रिस्त्रून फ्रॉस्टाडॉटिर ने मीडिया वेबसाइट ‘एमबीएल डॉट आईएस’ से बात की। उन्होंने कहा, “यह एक अच्छा दिन है। अब हम उस मोड़ पर पहुंच गए हैं जहां यह फैसला देश के हाथ में है। या तो हम इन बातचीत में शामिल हों, एक अच्छा समझौता करने की कोशिश करें और फिर देखें कि क्या होता है, या फिर यूरोपीय संघ के बारे में चर्चा को कुछ समय के लिए एक तरफ रख दें। मैं बस यह जानने के लिए उत्सुक हूं कि देश का क्या कहना है, मुझे पता है कि देश सही फैसला करेगा।” आइसलैंड ने 2009 के वित्तीय संकट के बाद ईयू की सदस्यता के लिए आवेदन किया था। उस समय देश की अर्थव्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही थी। हालांकि, बाद में राजनीतिक परिस्थितियां बदलीं और 2013 के बाद सदस्यता को लेकर बातचीत ठंडे बस्ते में चली गई। अब एक बार फिर यह मुद्दा देश की राजनीति के केंद्र में है। समर्थकों का मानना है कि यूरोपीय संघ के साथ गहरे संबंध आइसलैंड को आर्थिक स्थिरता और बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल में मजबूती दे सकते हैं। वहीं विरोधी पक्ष का कहना है कि ईयू की सदस्यता से देश की स्वतंत्र आर्थिक नीतियों और महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधनों पर उसका नियंत्रण कमजोर हो सकता है। इस बहस में मछली पालन सबसे बड़ा और संवेदनशील मुद्दा है। आइसलैंड की अर्थव्यवस्था और पहचान में मत्स्य उद्योग की अहम भूमिका है। ईयू में शामिल होने के विरोधियों को आशंका है कि यूरोपीय संघ की साझा मत्स्य नीति लागू होने से देश को अपने समुद्री संसाधनों और मछली पकड़ने के अधिकारों पर समझौता करना पड़ सकता है। मतदान से पहले हुए सर्वेक्षणों में भी देश की जनता बंटी हुई नजर आई थी। कुछ सर्वेक्षणों में बातचीत दोबारा शुरू करने के विरोध में मामूली बढ़त दिखी, जबकि कुछ में समर्थक पक्ष आगे था। यही वजह है कि जनमत संग्रह के नतीजों को बेहद अहम माना जा रहा है। प्रधानमंत्री क्रिस्त्रून फ्रॉस्टाडॉटिर की सरकार ने कहा है कि वह जनता के फैसले का सम्मान करेगी। अगर ‘हां’ पक्ष जीतता है तो आइसलैंड और यूरोपीय संघ के रिश्तों में एक नया अध्याय शुरू हो सकता है। वहीं ‘नहीं’ की जीत देश के ईयू से दूरी बनाए रखने के मौजूदा रुख को मजबूती देगी।

तमिलनाडु सरकार राशन की दुकानों से रियायती दरों पर प्याज बेचने की योजना बना रही

चेन्नई। खुदरा कीमतों में वृद्धि के कारण राज्य भर में आम लोगों के बजट पर दबाव पड़ने के बाद, तमिलनाडु का सहकारी क्षेत्र राशन की दुकानों के माध्यम से रियायती कीमतों पर प्याज बेचने की तैयारी कर रहा है। रसोई में इस्तेमाल होने वाली एक आम सामग्री, प्याज, पिछले कुछ हफ्तों में महंगी हो गई है। बड़ी प्याज, जो पिछले महीने के अंत में लगभग 30 रुपये प्रति किलो मिल रही थी, अब कई खुदरा बाजारों में लगभग 60 रुपये प्रति किलो बिक रही है। छोटी प्याज, या शैलोट, की कीमतों में भी भारी वृद्धि हुई है, जो पिछले महीने लगभग 40-50 रुपये प्रति किलो थी, अब बढ़कर लगभग 70 रुपये प्रति किलो हो गई है। इस वृद्धि से उन उपभोक्ताओं पर और भी बुरा असर पड़ा है जो पहले से ही कई आवश्यक सब्जियों की ऊंची कीमतों से परेशान हैं। बाजार दरों के स्थिर बने रहने के कारण, सहकारी क्षेत्र ने थोक में प्याज की खरीद करके और प्रचलित खुदरा स्तरों से काफी कम कीमतों पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से उनकी आपूर्ति करके हस्तक्षेप करने का निर्णय लिया है। इस पहल के तहत, राज्य ने नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया से संपर्क किया है और 70,000 किलोग्राम प्याज के आवंटन की मांग की है। केंद्रीय एजेंसी से प्याज मिलने के बाद, प्याज को तमिलनाडु भर के राशन दुकानों में वितरित किया जाएगा। इनके 30 से 40 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच बिकने की उम्मीद है, जिससे उपभोक्ताओं को खुले बाजार की कीमतों की तुलना में 30 रुपये प्रति किलोग्राम तक की राहत मिलेगी। अधिकारियों ने बताया कि पहली खेप से आगे की मात्रा मंगाने से पहले मांग का आकलन करने में मदद मिलेगी। प्रस्तावित हस्तक्षेप का उद्देश्य परिवारों को तत्काल राहत प्रदान करना और अचानक हुई मूल्य वृद्धि के प्रभाव को कम करना है। पहले भी सरकार द्वारा सहकारी संस्थाओं और राशन की दुकानों का उपयोग आवश्यक वस्तुओं को नियंत्रित कीमतों पर बेचने के लिए किया जाता रहा है, जब भी आपूर्ति की कमी या मौसमी उतार-चढ़ाव के कारण खुदरा कीमतों में तेजी से वृद्धि होती थी। रियायती बिक्री कार्यक्रम शुरू होने के दौरान अधिकारियों से थोक और खुदरा बाजारों में प्याज की कीमतों और उपलब्धता पर नजर रखने की उम्मीद की जाती है।