भारत-बेल्जियम रक्षा साझेदारी को मिलेगी मजबूती, 10 बड़े समझौतों से बढ़ेगा सैन्य-औद्योगिक सहयोग

नई दिल्ली। भारत और बेल्जियम के बीच रक्षा सहयोग केवल राजनीतिक वार्ता तक सीमित नहीं रहने वाला है। दोनों देश सैन्य प्रशिक्षण, समुद्री सुरक्षा और रक्षा तकनीक के साथ-साथ रक्षा उत्पादन क्षेत्र में भी साझेदारी को जमीन पर उतारने की तैयारी में हैं। बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर और रक्षा एवं विदेश व्यापार मंत्री थियो फ्रांकेन की भारत यात्रा के दौरान रक्षा उद्योग से जुड़े 10 प्रमुख समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। बेल्जियम के प्रधानमंत्री के साथ 15 रक्षा कंपनियों का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है। इनमें से अधिकांश कंपनियों का प्रतिनिधित्व उनके मुख्य कार्यकारी अधिकारी कर रहे हैं। प्रस्तावित समझौतों के तहत बेल्जियम की कई रक्षा तकनीकों का भारत में उत्पादन और असेंबली शुरू होने की संभावना है। इनमें रॉकेट, गोला-बारूद, हथियार प्रणालियां, ड्रोन, रडार और समुद्री सुरक्षा से जुड़ी तकनीक शामिल हैं। बेल्जियम के रक्षा एवं विदेश व्यापार मंत्री थियो फ्रांकेन ने भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र की एक तेजी से उभरती आर्थिक और सैन्य शक्ति बताते हुए कहा, “यूरोप और एशिया की सुरक्षा अब एक-दूसरे से अलग नहीं देखी जा सकती। रूस-यूक्रेन में युद्ध जारी है और वह ईरान तथा उत्तर कोरिया के साथ सैन्य सहयोग बढ़ा रहा है। वहीं चीन हिंद-प्रशांत में लगातार अधिक आक्रामक रुख अपना रहा है। ऐसे में एशिया में होने वाली घटनाओं का असर यूरोप पर और यूरोप की घटनाओं का असर एशिया पर पड़ता है।” फ्रांकेन के मुताबिक, बेल्जियम जैसे खुले व्यापार वाले देश के लिए दुनिया के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा बेहद जरूरी है इसलिए भारत जैसे मजबूत साझेदार के साथ सैन्य, तकनीकी और औद्योगिक स्तर पर सहयोग बढ़ाना समय की जरूरत है। भारत और बेल्जियम के बीच मौजूदा रक्षा पहल की नींव पिछले आर्थिक मिशन के दौरान रखी गई थी। उस दौरान दोनों देशों की कंपनियों के बीच संपर्क बढ़ा और राजनीतिक स्तर पर भी सहयोग के रास्ते खुले। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बेल्जियम के प्रधानमंत्री की बैठक और दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के बीच ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ पर हस्ताक्षर इस बढ़ते विश्वास को संस्थागत रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इस समझौते में दोनों देशों की सेनाओं के बीच प्रशिक्षण, अधिकारियों का आदान-प्रदान, अनुसंधान एवं विकास, सेमिनार, संयुक्त सैन्य अभ्यास और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग का ढांचा तैयार किया जाएगा। दोनों देश रक्षा उद्योग के लिए एक साझा औद्योगिक रोडमैप तैयार करने पर भी काम करेंगे। इसके अलावा बेल्जियम डिफेंस कॉलेज 2027 में अपनी ‘वर्ल्ड स्टडी ट्रिप’ के लिए भारत को मेजबान देश के रूप में चुनने की योजना बना रहा है। फ्रांकेन ने कहा कि अब अगला चरण सिर्फ घोषणाओं का नहीं, बल्कि संयुक्त प्रशिक्षण, औद्योगिक परियोजनाओं और कंपनियों के लिए वास्तविक कारोबारी अवसर पैदा करने का है। भारत के रक्षा उद्योग संगठन सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैनुफैक्चर्स (एसआईडीएम) और बेल्जियम के बेल्जियन सिक्योरिटी एंड डिफेंस इंडस्ट्री (बीएसडीआई) के बीच भी सहयोग समझौता किया जाएगा। इसका उद्देश्य दोनों देशों की रक्षा कंपनियों को भारत की ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत संयुक्त विकास और उत्पादन परियोजनाओं में भाग लेने का रास्ता आसान करना है। बेल्जियम का मानना है कि भारत जिस बड़े पैमाने पर अपनी सशस्त्र सेनाओं का आधुनिकीकरण कर रहा है, उससे उसकी कंपनियों के लिए लंबे समय के बड़े कारोबारी अवसर पैदा हो सकते हैं। दोनों देशों के बीच सहयोग का एक बड़ा क्षेत्र ‘समुद्री सुरक्षा’ है। भारत अपनी नौसेना की माइन काउंटरमेजर्स क्षमता, स्वायत्त समुद्री प्रणालियों, अंडरवाटर रोबोटिक्स और अत्याधुनिक सेंसरों को मजबूत करना चाहता है। बंदरगाहों, पाइपलाइनों और समुद्र के भीतर बिछी डेटा केबल जैसी महत्वपूर्ण बुनियादी संरचनाओं की सुरक्षा भी सहयोग के दायरे में है। इसके अलावा हथियार प्रणालियों, गोला-बारूद, रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर, कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम तथा काउंटर-ड्रोन तकनीक में भी बेल्जियम की कंपनियों के लिए भारतीय बाजार में संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। बेल्जियम की न्यू लाचौसे और भारत की टेंबो क्लासिक इंजीनियरिंग के बीच होने वाली परियोजना सबसे ठोस औद्योगिक समझौतों में से एक है। इसके तहत दो प्रकार के गोला-बारूद के लिए पूरी उत्पादन लाइन और दो अन्य कैलिबर के लिए उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रस्तावित संयंत्र की क्षमता करीब 10 करोड़ राउंड प्रति वर्ष होगी। परियोजना का अनुमानित मूल्य 5 करोड़ यूरो है और इसकी डिलीवरी 2028 तथा 2029 में निर्धारित की गई है। इसके बाद मशीनरी के रखरखाव, स्पेयर पार्ट्स और आधुनिकीकरण में भी बेल्जियम की कंपनी की भूमिका बनी रहेगी। इसके अलावा दो कंपनियों के बीच हुए सहयोग के तहत बेल्जियम के 70 मिमी रॉकेट अब भारत में भी असेंबल किए जाएंगे। भारतीय कंपनियां इसकी उत्पादन प्रक्रिया में भाग लेंगी। भारत में पूरी तरह निर्मित पहला रॉकेट 2027 की शुरुआत में तैयार होने की उम्मीद है। एक्सैल बेल्जियम और लार्सन एंड टुब्रो के बीच सहयोग भी बेहद महत्वपूर्ण है। एलएंडटी भारत के लिए माइन काउंटरमेजर वेसल बना रही है, जबकि एक्सैल इन जहाजों के लिए समुद्री बारूदी सुरंगों को खोजने, पहचानने और निष्क्रिय करने वाली स्वायत्त प्रणालियां उपलब्ध कराएगी। पहले चरण में 12 जहाजों का कार्यक्रम है, लेकिन भविष्य में यह संख्या 59 तक पहुंच सकती है। बेल्जियम की एफएन हर्स्टल और कल्याणी स्ट्रेटजिक सिस्टम्स भारत में हथियार तथा काउंटर-ड्रोन प्रणालियों के संयुक्त उत्पादन की संभावनाएं तलाशेंगी। बेल्जियम की ओआईपी सेंसर सिस्टम्स और भारत की सरकारी कंपनी इंडिया ओप्टेल के बीच भी सहयोग जारी है। ओआईपी पहले ही अर्जुन एमके-I टैंक के लिए 130 से अधिक साइट उपलब्ध करा चुकी है। अर्जुन एमके-II के लिए कंपनी ने नया फायर-कंट्रोल सिस्टम विकसित किया है, जो लेजर-गाइडेड मिसाइलों को लॉन्च करने में भी सक्षम है। यह सहयोग भविष्य में भारतीय बख्तरबंद वाहनों के नए संस्करणों और अपग्रेड कार्यक्रमों तक बढ़ सकता है। वहीं, भारत के हल्के टैंक जोरावर कार्यक्रम में भी बेल्जियम की जॉन कॉकेरिल डिफेंस महत्वपूर्ण भूमिका हासिल करने की कोशिश कर रही है। कंपनी जोरावर के लिए टरेट (टैंक या युद्धपोत पर लगी वह घूमने वाली संरचना जिसमें तोप या मशीन गन फिट होती है) उपलब्ध कराने की दावेदार है। जोरावर को ऊंचाई वाले इलाकों में सैन्य अभियानों के लिए विकसित किया जा रहा है और इसका संबंध चीन से लगी भारत की सीमा पर सैन्य क्षमता बढ़ाने से भी है। बेल्जियम की पिटागन भारत में अपनी मोबाइल बैरियर तकनीक के उत्पादन और बिक्री
‘हल्द्वानी शुद्धीकरण मामले में एफआईआर तक नहीं,’ खड़गे ने जेपी नड्डा को लिखा पत्र

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखकर हल्द्वानी में हुई शुद्धीकरण की घटना पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि घटना के करीब 24 दिन बाद भी दोषियों पर एफआईआर तक दर्ज नहीं हुई है। मल्लिकार्जुन खड़गे ने पत्र में लिखा, “आपको याद होगा कि 13 अगस्त को राज्यसभा में बहुत दुख और पीड़ा के साथ मैंने हल्द्वानी में हुई मेरी 8 अगस्त की जनसभा के बाद छुआछूत जनित शुद्धीकरण का मुद्दा उठाया था।” मल्लिकार्जुन खड़गे ने याद दिलाया कि उनके हस्तक्षेप पर सदन में जेपी नड्डा ने खड़े होकर कहा था, “मल्लिकार्जुन खड़गे ने जो कहा है, वह सच में बहुत ही दुखदायी विषय है। यह सिर्फ कांग्रेस पार्टी के लिए दुखदायी नहीं बल्कि यह हम सबके लिए दुखदायी है, जो भी बात हुई है, उसकी तहकीकात जरूर होगी। मैं कहना चाहता हूं कि इस तरह की गतिविधि को भारतीय जनता पार्टी कभी भी सपोर्ट नहीं करती है। मैं इसकी भर्त्सना करता हूं और राष्ट्रीय अध्यक्ष भी इसको गहराई से देखेंगे। आपकी भावनाओं को जो ठेस पहुंची है, वह हम सबके लिए खेद का विषय है।” मल्लिकार्जुन खड़गे ने पत्र में लिखा कि जेपी नड्डा ने कहा था कि जांच के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। हांलाकि इस घटना के करीब 24 दिन बीत जाने के बाद भी हल्द्वानी में इस घृणित घटना को अंजाम देने वाले संबंधित संगठन और व्यक्तियों पर प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) तक दर्ज नहीं की गई है। उन्होंने लिखा कि इस प्रकरण की सबसे आपत्तिजनक बात यह थी कि रामलीला मैदान के उस स्थल पर, जहां उन्होंने रैली को संबोधित किया था, वहां भारत के संविधान की भावना और मानवीय मूल्यों के विपरीत शुद्धीकरण कराया गया। ये आम तौर पर सभी समझते हैं कि शुद्धीकरण की ये प्रक्रिया सीधे-सीधे छुआछूत से जुड़ी है। मल्लिकार्जुन खड़गे ने उदाहरण देते हुए लिखा, “बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर ने महाड़ आंदोलन में तालाब से पानी पिया था तब भी जातीय दंभ से भरे लोगों ने 108 घड़े गोमूत्र और गोबर डालकर मंत्रोच्चार के साथ शुद्धीकरण किया था। सिर्फ मंत्रोच्चार या हवन करने से शुद्धीकरण की जातिवादी प्रक्रिया पावन नहीं हो जाती है।” कांग्रेस अध्यक्ष ने लिखा, “यह मुद्दा व्यापक तौर पर करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ा है जो इस क्रूर वास्तविकता से रोज रूबरू होते रहते हैं। ऐसे गलत लोगों को सबक देना जरूरी है। इसलिए यह रोष मेरा नहीं बल्कि ऐसे करोड़ों लोगों की अभिव्यक्ति है, यह ऐसी मानसिकता का मुद्दा है, जिससे समाज का एक तबका सीधे जुड़ा है। इस कारण से मैंने सदन में सरकार का ध्यान आकृष्ट करने के लिए इस मुद्दे को उठाया था।” मल्लिकार्जुन खड़गे ने जेपी नड्डा से आग्रह किया है कि वे तथ्यों और राज्यसभा में दिए गए आश्वासन के आलोक में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को निर्देश देते हुए यह सुनिश्चित करें कि हल्द्वानी में उनकी जनसभा के बाद रामलीला मैदान पर हुए शुद्धीकरण की इस घटना में शामिल व्यक्तियों और संगठनों पर एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाए।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर देशभर में 40 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा व्यापार होने की उम्मीद

नई दिल्ली। देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियां जोरों पर है। बड़े पैमाने पर लोग खरीदारी कर रहे हैं। घरों और मंदिरों को सजाया है। जन्माष्टमी सिर्फ आस्था का ही त्योहार नहीं है, बल्कि भारत की ‘सनातन अर्थव्यवस्था’ का एक जीता-जागता प्रतीक है। इस वर्ष जन्माष्टमी के दौरान देशभर में 40 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा व्यापार होने की उम्मीद की जा रही है। रक्षाबंधन के दौरान हुए जबरदस्त व्यापार के बाद इस वर्ष श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर देशभर में 40 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा व्यापार होने का अनुमान है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) की ओर से यह अनुमान अलग-अलग सेक्टर में होने वाली संभावित बिक्री, घर और धार्मिक कामों के लिए खरीदारी, मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर होने वाले खर्च, देशभर में बड़े पैमाने पर होने वाले जश्न और धार्मिक पर्यटन से जुड़े खर्चों पर आधारित है। सीएआईटी के सेक्रेटरी जनरल और भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव सिर्फ भक्ति और आस्था का त्योहार नहीं है, बल्कि यह भारत की संस्कृति, परंपराओं, सामाजिक भागीदारी और आर्थिक गतिविधियों का एक अद्भुत संगम भी है। जन्माष्टमी एक अनोखा त्योहार है जहां आस्था सीधे तौर पर आर्थिक गतिविधियों में बदल जाती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “वोकल फॉर लोकल” (स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने) के आह्वान का असर देश भर के त्योहारों वाले बाजारों में साफ दिख रहा है। भारतीय उत्पादों को ज्यादा प्राथमिकता मिल रही है। जिससे स्थानीय व्यापार, कुटीर उद्योगों, हस्तशिल्प और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को काफी बढ़ावा मिल रहा है। पूजा के सामान से लेकर सजावट और धार्मिक उत्पादों तक, जन्माष्टमी के दौरान स्वदेशी सामान की भारी मांग रहती है। प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि जन्माष्टमी से जुड़ी हर रस्म और जश्न लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ा है। किसान, डेयरी उत्पादक, फूल उगाने वाले, मिठाई बनाने वाले, कपड़े के व्यापारी, मूर्तिकार, कारीगर, महिला उद्यमी, ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर, होटल और रेस्टोरेंट के मालिक और कई तरह की सेवाएं देने वाले लोग इस त्योहार से सीधे या परोक्ष रूप से फायदा उठाते हैं। सीएआईटी के अनुसार, 2024 में जन्माष्टमी के दौरान व्यापार लगभग 25 हजार करोड़ रुपए था और 2025 में यह बढ़कर लगभग 30 हजार करोड़ रुपए हो गया। इस वर्ष, ग्राहकों की ज्यादा मांग, सामान और सेवाओं की कीमतों में बदलाव, बढ़ते सामाजिक उत्सव, धार्मिक पर्यटन में बढ़ोतरी, और मॉडर्न रिटेल व डिजिटल कॉमर्स के विकास के कारण, व्यापार में लगभग 30 प्रतिशत की वृद्धि होने और इसके 40 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा होने की उम्मीद है। प्रवीण खंडेलवाल ने बताया कि इस साल जिन उत्पादों की मांग खास तौर पर ज्यादा है, उनमें माखन-मिश्री, दूध, दही, पनीर और अन्य डेयरी उत्पाद, मिठाइयां, फल, सूखे मेवे, पूजा का सामान, फूलों की मालाएं, सजावटी तोरण, झूले, लड्डू गोपाल की मूर्तियां, मुकुट, बांसुरी, मोर पंख, आभूषण और त्योहार के खास कपड़े शामिल हैं। खंडेलवाल की ओर से इस बात पर जोर दिया गया है कि भारतीय त्योहारों को सिर्फ धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजन मानना उनके असली महत्व को कम करके आंकना होगा। दिवाली, होली, रक्षाबंधन, नवरात्रि, गणेश चतुर्थी, जन्माष्टमी, दुर्गा पूजा, करवा चौथ, छठ पूजा और कई अन्य त्योहार लाखों व्यापारियों, कारीगरों, शिल्पकारों, किसानों, महिला उद्यमियों, स्वरोजगार करने वाले लोगों और सेवा प्रदाताओं के लिए आर्थिक अवसरों का एक बड़ा नेटवर्क बनाते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय त्योहारों की सबसे खास बात यह है कि इन मौकों पर होने वाला खर्च सिर्फ उपभोग तक सीमित नहीं रहता; बल्कि यह आय और रोजगार के रूप में समाज के अलग-अलग वर्गों तक पहुंचता है। यह प्रक्रिया भारत की जमीनी स्तर की, समावेशी और विकेंद्रीकृत “सनातन अर्थव्यवस्था” को मजबूत करती है। खंडेलवाल ने कहा कि जन्माष्टमी के दौरान लाखों श्रद्धालु देश भर में अलग-अलग तरीकों से यह त्योहार मनाएंगे, खासकर मथुरा-वृंदावन, द्वारका, नाथद्वारा, दिल्ली, मुंबई, जयपुर, अहमदाबाद, इंदौर, यूपी, महाराष्ट्र, राजस्थान, एमपी, छत्तीसगढ़ और कृष्ण के अन्य प्रमुख मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर। इससे धार्मिक पर्यटन को काफी बढ़ावा मिलेगा और होटल, ट्रांसपोर्ट, रेस्टोरेंट, प्रसाद की बिक्री, फूलों, स्थानीय हस्तशिल्प और संबंधित सेवाओं में अच्छी-खासी आर्थिक गतिविधि होगी। उन्होंने कहा कि भारत की ‘धार्मिक अर्थव्यवस्था’ को अब सिर्फ आध्यात्मिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। इसे एक बड़े आर्थिक इकोसिस्टम के तौर पर भी पहचाना जाना चाहिए जो रोजगार, पर्यटन, स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग और छोटे व्यवसायों को सहारा देता है।
जितेंद्र मिश्रा को सीईओ नियुक्ति करने पर सतीश महाना बोले-पहले देश की रक्षा की, अब निभाएंगे राम मंदिर सेवा की जिम्मेदारी

लखनऊ। अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा एयर मार्शल (रिटायर्ड) जितेंद्र मिश्रा को सीईओ के तौर पर नियुक्त किए जाने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा के स्पीकर सतीश महाना ने इस नियुक्ति का स्वागत किया है। सतीश महाना ने कहा, “पूरे देश ने श्री राम जन्मभूमि मंदिर की सेवा की जिम्मेदारी एक ऐसे व्यक्ति को सौंपी है जिन्होंने अपना पूरा जीवन देश की सेवा में समर्पित किया है। वे पूर्व मार्शल हैं और उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में अहम भूमिका निभाई थी। हिंदू धर्म हमें भारत माता की सेवा के प्रति समर्पित रहने की सीख देता है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम ने कहा था कि मां और मातृभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर हैं। हमारी जन्मभूमि स्वर्ग से भी ज्यादा सुंदर है।” उन्होंने कहा कि एक अनुभवी और देशभक्त अधिकारी के हाथों में मंदिर के प्रबंधन की जिम्मेदारी आने से व्यवस्था और अधिक पारदर्शी और मजबूत होगी। वहीं विपक्ष द्वारा राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की घटना के बाद इस नियुक्ति को डैमेज कंट्रोल बताए जाने पर स्पीकर सतीश महाना ने पलटवार किया। उन्होंने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि चढ़ावा चोरी की घटना हुई। मामले की जांच के लिए एक एसआईटी बनाई गई थी और जो लोग इसके लिए जिम्मेदार पाए गए, उन्हें सजा दी गई है। चोरी में शामिल किसी भी व्यक्ति को सजा मिलनी चाहिए। हालांकि कुछ लोगों की हरकतों की वजह से संस्थाओं को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। ट्रस्ट ने शिकायत दर्ज कराई और सरकार ने मामले का संज्ञान लिया। जांच में दोषी पाए गए लोगों पर कार्रवाई हुई है और वे जेल में हैं।” उधर हैदराबाद में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र राव ने भी इस नियुक्ति को सही कदम बताया। उन्होंने कहा, “अयोध्या में जो बदलाव हुए हैं और ट्रस्ट ने जो नियुक्तियां की हैं, वे बहुत अच्छे ढंग से की गई हैं। मुझे लगता है कि अयोध्या को लेकर चल रही बहस जल्द ही खत्म हो जाएगी और प्रशासनिक मामलों को संभाल लिया जाएगा।
विमेंस एशिया कप: 5 रन देकर 7 विकेट, कप्तान अट्टापट्टू की हैट्रिक, श्रीलंका ने इंडोनेशिया को 75 रन से रौंदा

दुबई। कप्तान चामरी अट्टापट्टू के शानदार प्रदर्शन की बदौलत श्रीलंका ने बुधवार को विमेंस एशिया कप 2026 के छठे मुकाबले मे इंडोनेशिया के खिलाफ 75 रन से बड़ी जीत हासिल की। इस मुकाबले में अट्टापट्टू ने 3.3 ओवरों में सिर्फ 5 रन देकर 7 विकेट झटके, जिसमें अंतिम गेंदों पर हैट्रिक भी शामिल रही। दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में टॉस गंवाकर बल्लेबाजी के लिए उतरी श्रीलंकाई टीम 20 ओवरों में 7 विकेट खोकर 124 रन ही बना सकी। टीम को 5 के स्कोर पर इमेशा दुलानी (3) के रूप में पहला झटका लग गया था। इसके बाद कप्तान अट्टापट्टू ने संजना काविंदी के साथ दूसरे विकेट के लिए 22 रन जोड़े। संजना 15 रन बनाकर आउट हुईं, जबकि अट्टापट्टू 13 गेंदों में 9 ही रन बना सकीं। इस टीम ने 62 के स्कोर तक अपने 6 विकेट गंवा दिए थे, जिसके बाद निलाक्षिका सिल्वा ने काव्या काविंदी के साथ सातवें विकेट के लिए 36 गेंदों में 50 रन की साझेदारी करते हुए टीम को शतक के पार पहुंचाया। निलाक्षिका 35 गेंदों में 4 बाउंड्री के साथ 50 रन बनाकर आउट हुईं, जबकि काव्या ने नाबाद 15 रन बनाए। विपक्षी खेमे से नी लुह देवी ने सर्वाधिक 3 विकेट निकाले। सांग मेप्रियानी ने 2 विकेट चटकाए। इसके जवाब में इंडोनेशिया 18.3 ओवरों में सिर्फ 49 रन पर सिमट गई। मारिया कोराजोन (6) ने रहमावती पंगेस्तुती (10) के साथ पहले विकेट के लिए 3.4 ओवरों में 18 रन की साझेदारी की, लेकिन इस जोड़ी के टूटने के बाद विकेटों का पतझड़ लग गया। छठे ओवर की पहली और दूसरी गेंद पर चामरी अट्टापट्टू ने विकेट हासिल किए। उनके पास हैट्रिक का शानदार मौका था, लेकिन यहां कामयाबी हाथ नहीं लग सकी। इंडोनेशियाई टीम 17.3 ओवरों में 46 रन तक 7 विकेट गंवा चुकी थी। अगला ओवर एक बार फिर से चामरी अट्टापट्टू के हाथों में था, जिन्होंने 19वें ओवर की शुरुआत नी कादेक अरियानी (2) को बोल्ड करने के साथ की। अगली गेंद पर उन्होंने सांग मेप्रियानी (0) को एलबीडब्ल्यू आउट किया। ओवर की तीसरी गेंद पर लक्ष्मी परिमिता (0) को एलबीडब्ल्यू करने के साथ आखिरकार अट्टापट्टू ने हैट्रिक पूरी कर ली। इसी के साथ श्रीलंका ने 75 रन से जीत हासिल की। श्रीलंका की तरफ से अट्टापट्टू ने 7 विकेट निकाले, जबकि काव्या काविंदी, सुगंधिका कुमारी और कविशा दिलहारी ने 1-1 विकेट हासिल किया।
उत्तराखंड में नए निकाहनामे पर वक्फ बोर्ड के चेयरमैन ने कहा- ‘मुस्लिम समुदाय को अपराध से बचाना मकसद’

देहरादून। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड मुस्लिम समुदाय के लिए यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) के नियमों के अनुसार एक नया निकाहनामा तैयार कर रहा है। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स ने कहा है कि इसका मकसद मुस्लिम समुदाय को उन मुश्किलों और अपराधों से बचाना है जिनका सामना उन्हें करना पड़ सकता है। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से नए निकाहनामा के बारे में विस्तार से बात की। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में यूसीसी लागू करने वाला उत्तराखंड पहला राज्य बना। यूसीसी लागू होने के बाद बहुविवाह पर रोक लग गई है, तीन तलाक पर पाबंदी है और हलाला जैसी प्रथाओं को अपराध माना गया है। इसे ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने अपनी पिछली बैठक में मुस्लिम समुदाय के लिए एक नया निकाहनामा लाने का फैसला किया, ताकि यूसीसी का सख्ती से पालन हो सके।” शादाब शम्स ने कहा, “नए निकाहनामे से समाज में जागरूकता आएगी और लोग इन समस्याओं से बच सकेंगे। कोई भी व्यक्ति अब एक से अधिक शादी नहीं कर पाएगा। अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी और फ्रांस जैसे विकसित देशों में एक व्यक्ति एक ही पत्नी के साथ रहता है, और यहां भी ऐसा ही होना चाहिए। ये सभी बातें निकाहनामे में लिखी जाएंगी, ताकि कोई किसी को धोखा न दे सके।” उन्होंने कहा कि निकाहनामे के साथ लगे हलफनामे में दी गई जानकारी भी पूरी तरह सच होनी चाहिए। अगर कोई इसका उल्लंघन करता है या गलत जानकारी देता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हमने इसी दिशा में यह निकाहनामा तैयार किया है। हम सभी जानते हैं कि राज्य में कई बार माहौल तब खराब हुआ है जब किसी ने धर्म बदलकर शादी की है। चूंकि सभी मस्जिदें और मदरसे वक्फ बोर्ड के अंतर्गत आते हैं, और कुछ वक्फ संपत्तियां भी बोर्ड के अधिकार क्षेत्र में हैं, इसलिए यह वक्फ बोर्ड की जिम्मेदारी है कि वह सुनिश्चित करे कि कोई गड़बड़ न हो और नियमों का उल्लंघन करने पर जवाबदेही तय की जाए। शादाब शम्स ने आगे कहा, “इसलिए वक्फ बोर्ड उन्हीं निकाह कराने वाले काजी और इमामों की नियुक्ति करेगा, जो सही लाइन के ऊपर निकाह पढ़ा पाएंगे। यानी निकाह वही काजी और इमाम करा पाएंगे, जिन्हें वक्फ बोर्ड नियुक्त करेगा। इसी निकाहनामे पर निकाह होगा। अलग से किसी दस्तावेज पर निकाह नहीं होगा। काफी बड़ा निकाहनामा है, जिसमें विस्तृत और सही जानकारी देनी होगी।” वक्फ बोर्ड के चेयरमैन ने यह भी कहा कि निकाह के समय लोगों को जागरुक कर दिया जाएगा कि किसी का धर्मपरिवर्तन कराकर निकाह कराएंगे तो वह अपराध की श्रेणी में माना जाएगा। अब धर्म परिवर्तन कराकर किसी बच्ची का निकाह नहीं हो सकता है। अगर कोई ऐसा करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा, “अगर दो अलग-अलग धर्मों के लोगों को शादी करनी है तो कोर्ट जा सकते हैं। ऐसा नहीं होगा कि घर पर किसी को बुलाकर उसका धर्म परिवर्तन कराएं और निकाह करा दें। अब इसके ऊपर रोक रहेगी। इससे यह भी फायदा होगा कि किसी मौलाना को किसी कानूनी कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसलिए वे न गलत करेंगे और न उन्हें सजा मिलेगी। इसलिए समाज को सही दिशा देने का काम यह वक्फ का नया निकाहनामा करेगा।
बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर भारत पहुंचे, पीएम मोदी से करेंगे बातचीत

नई दिल्ली। बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर गुरुवार को तीन दिवसीय यात्रा पर भारत पहुंचे। पिछले साल फरवरी में पदभार संभालने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा है। बेल्जियम के रक्षा मंत्री थियो फ्रेंकेन भी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं। दिल्ली पहुंचने पर विदेश मंत्रालय ने उनका स्वागत किया। विदेश मंत्रालय ने ‘एक्स’ में लिखा, “भारत में आपका स्वागत है। बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर का आधिकारिक यात्रा पर नई दिल्ली पहुंचने पर बहुत गर्मजोशी से स्वागत। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने उनकी अगवानी की। यह यात्रा घनिष्ठ और बहुआयामी भारत-बेल्जियम साझेदारी को और मजबूत करने का अवसर देती है।” बेल्जियम के प्रधानमंत्री, पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। यह यात्रा द्विपक्षीय व्यापार, रक्षा सहयोग, नवीकरणीय ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और व्यापक भारत-ईयू संबंधों को मजबूत करने पर केंद्रित है। विदेश मंत्रालय ने पहले कहा था कि बार्ट डी वेवर और पीएम मोदी गुरुवार को मिलेंगे, जिसके दौरान दोनों द्विपक्षीय संबंधों के पूरे आयाम के साथ-साथ आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे। पीएम डी वेवर भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के संदर्भ में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के एक व्यापारिक कार्यक्रम में मुख्य भाषण भी देंगे। नई दिल्ली में अपने कार्यक्रम समाप्त करने के बाद बार्ट डी वेवर मुंबई जाएंगे, जहां वह हीरा (डायमंड), बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों सहित विभिन्न हितधारकों के साथ बातचीत करेंगे। विदेश मंत्रालय ने कहा था, “यह यात्रा भारत-बेल्जियम साझेदारी को और मजबूत करने और व्यापार और निवेश, रक्षा और सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा, कनेक्टिविटी और लोगों के बीच संबंधों सहित आपसी हित के क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने के साथ-साथ भारत-ईयू और भारत-यूरोप संबंधों को और गहरा करने का अवसर प्रदान करेगी।” बेल्जियम सितंबर 1947 में स्वतंत्र भारत के साथ राजनयिक संबंध स्थापित करने वाले पहले यूरोपीय देशों में से एक था। ब्रसेल्स में भारतीय दूतावास के अनुसार, भारत और बेल्जियम के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंध कानून के शासन, संघवाद और बहुलवाद के प्रति प्रतिबद्धता सहित साझा मूल्यों पर आधारित हैं। बेल्जियम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का भी समर्थन करता है।
भारतीयों के लिए जल्द बंद हो सकते हैं ईबी-1 ग्रीन कार्ड, अमेरिका ने दी चेतावनी

वॉशिंगटन। अमेरिका ने चेतावनी दी है कि भारतीयों के लिए रोजगार आधारित प्रथम श्रेणी (ईबी-1) ग्रीन कार्ड की उपलब्धता आने वाले कुछ हफ्तों में खत्म हो सकती है। इसकी वजह इस श्रेणी में बहुत अधिक आवेदन और बढ़ती मांग बताई गई है। इस कारण पहले से ही लंबे इंतजार का सामना कर रहे भारतीय आवेदकों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने अपने सितंबर वीजा बुलेटिन में कहा कि भारत से जुड़े ईबी-1 आवेदनों की संख्या इतनी अधिक है कि वित्तीय वर्ष 30 सितंबर को खत्म होने से पहले इस श्रेणी के लिए निर्धारित वीजा संख्या पूरी तरह इस्तेमाल हो सकती है। विदेश विभाग ने कहा, “ईबी-1 श्रेणी में भारत के लिए उपलब्ध वीजा संख्या वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले पूरी हो सकती है। यदि ऐसा होता है तो आने वाले हफ्तों में इस श्रेणी को अस्थायी रूप से ‘अनुपलब्ध’ घोषित करना पड़ सकता है।” साथ ही विभाग ने कहा कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर उचित बदलाव किए जाएंगे। ईबी-1 रोजगार आधारित पहली प्राथमिकता वाली कैटेगरी है, जिसमें असाधारण क्षमता वाले लोग, बेहतरीन प्रोफेसर और रिसर्चर, और कुछ मल्टीनेशनल एग्जीक्यूटिव और मैनेजर जैसे प्राथमिकता वाले वर्कर शामिल हैं। यह चेतावनी भारतीयों के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की अन्य प्रमुख श्रेणियों में पहले से ही भारी बैकलॉग है। सितंबर के लिए ईबी-1 इंडिया की फाइनल एक्शन डेट 15 अक्टूबर 2022 निर्धारित की गई है। इसका मतलब है कि सामान्य तौर पर केवल उन्हीं भारतीय आवेदकों के मामलों पर अंतिम कार्रवाई हो सकती है जिनकी प्राथमिकता तिथि 15 अक्टूबर 2022 से पहले की है। ईबी-2 श्रेणी, जिसमें उच्च डिग्री वाले पेशेवर और विशेष योग्यता वाले लोग शामिल होते हैं। सितंबर वीजा बुलेटिन में ‘यू’ यानी ‘अनुपलब्ध’ दिखाई गई है। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, ‘यू’ का अर्थ है कि इस अवधि में उस श्रेणी के लिए कोई वीजा जारी नहीं किया जा सकता। ईबी-2 इंडिया अगस्त में भी उपलब्ध नहीं था और सितंबर में भी उपलब्ध नहीं है। रोजगार आधारित तीसरी प्राथमिकता वाली कैटेगरी में भी बैकलॉग बहुत ज्यादा है। सितंबर के लिए ईबी-3 इंडिया की ‘फाइनल एक्शन डेट’ 1 जनवरी, 2014 है, जिसका मतलब है कि कतार 12 साल से भी ज्यादा पुरानी है। तुलना के लिए ईबी-3 कैटेगरी में ज्यादातर देशों (जिनका नाम बुलेटिन में अलग से नहीं है) के लिए तारीख 1 सितंबर, 2024 है। मुख्य तौर पर चीन के लिए एक जनवरी, 2022 और फिलीपींस के लिए एक अगस्त 2023 है। भारत के लिए ईबी-5 इन्वेस्टर कैटेगरी (जो किसी खास ग्रुप के लिए आरक्षित नहीं है) भी सितंबर में ‘फाइनल एक्शन’ के लिए उपलब्ध नहीं है, हालांकि ग्रामीण प्रोजेक्ट्स, ज्यादा बेरोजगारी वाले इलाकों और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए आरक्षित ईबी-5 कैटेगरी सभी देशों के लिए ‘करंट’ (यानी खुली हुई) बनी हुई है।
अनुष्का रंजन ने सुनाई अपनी प्रेग्नेंसी जर्नी, बोलीं-लगता था मेरी ही बॉडी में कमी है

मुंबई। अभिनेत्री अनुष्का रंजन अपने पति-अभिनेता आदित्य सील के साथ नेहा धूपिया और अंगद बेदी के शो ‘डबल डेट’ में गई थीं, जहां उन्होंने आईवीएफ के दौरान आने वाली शारीरिक और भावनात्मक चुनौतियों के बारे में बात की। दरअसल, नेहा धूपिया और अंगद बेदी के शो ‘डबल डेट’ में कपल अपने बच्चों के जन्म से पहले गए थे और यह शो रिकॉर्ड किया था। अनुष्का ने अपनी जर्नी के शुरुआती दिनों को याद किया और बताया कि वह और उनके पति आदित्य सील पहले नेचुरली कंसीव करने की कोशिश कर रहे थे। अभिनेत्री अनुष्का रंजन ने बताया कि उन्हें ‘आईयूआई’ के बारे में सलाह दी गई थी, जो ‘आईवीएफ’ से कम मुश्किल प्रोसेस है लेकिन उसमें भी दवाइयां और इंजेक्शन लेने पड़ते हैं। अनुष्का रंजन ने कहा, “शुरुआत में हम नेचुरली बच्चे करने की कोशिश कर रहे थे और डॉक्टर्स ने भी हमें छह महीने या एक साल तक कोशिश करने की सलाह दी थी। फिर एक प्रोसेस होता है जिसे ‘आईयूआई’ कहते हैं, जो ‘आईवीएफ’ का हल्का वर्जन है। इसमें भी काफी दवाइयां लेनी पड़ती हैं लेकिन इंजेक्शन कम लेने पड़ते थे, 3 या 4 इंजेक्शन पर दवाइयां बहुत खानी पड़ती थीं। तो वो दवाइयां भी मुझे अजीब सा महसूस कराती थीं।” अभिनेत्री ने बताया कि उन्होंने आखिर में आईवीएफ करवाने का फैसला क्यों किया। उन्होंने कहा, ‘आईयूआई’ के मुकाबले आईवीएफ में बच्चा कंसीव करने के चांज ज्यादा होते हैं लेकिन इस पूरी प्रोसेस में भावनात्मक असर बहुत पड़ता है। आपको लगने लगता है कि मेरी बॉडी में ही कुछ कमी है, कुछ तो गलत है। एक लड़की होने के नाते मुझे शराब नहीं पीनी चाहिए थी या नॉनवेज नहीं खाना चाहिए था। फिर शर्म भी आने लगी कि कैसे किसी को बताएं कि हम बच्चा प्लान कर रहे हैं।” वहीं, अभिनेता आदित्य सील ने बताया कि इस प्रोसेस के दौरान अनुष्का रंजन शारीरिक दर्द और भावनात्मक तनाव से गुजर रही थीं, जिसे देखकर उन्होंने तय किया था कि अगर यह कोशिश कामयाब नहीं हुई, तो वे दोबारा आईवीएफ नहीं करवाएंगे। कपल ने यह भी बताया कि उन्होंने गोद लेने का विकल्प भी रखा था। उनका मानना था कि अगर वे बायोलॉजिकली बच्चा पैदा नहीं कर पाए, तो भी वे किसी बच्चे को प्यार भरी और अच्छी जिंदगी देना चाहते हैं।
नोएडा-ग्रेटर नोएडा में पुलिस का व्यापक चेकिंग और गश्त अभियान, बस-टैक्सियों की सघन जांच

नोएडा/ग्रेटर । गौतमबुद्धनगर पुलिस ने आमजन की सुरक्षा और शहर में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के लिए नोएडा और ग्रेटर नोएडा के विभिन्न इलाकों में व्यापक चेकिंग और गश्त अभियान चलाया। पुलिस की अलग-अलग टीमों ने सड़कों पर उतरकर सार्वजनिक वाहनों, खासकर बस और टैक्सियों की सघन जांच की। पुलिस की तरफ से यह अभियान पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के मार्गदर्शन और निर्देश पर चलाया गया। निर्देश मिलने के बाद ग्रेटर नोएडा जोन के सभी थाना क्षेत्रों में पुलिस टीमों को सक्रिय किया गया। टीमों ने सार्वजनिक वाहनों को रोककर उनके जरूरी दस्तावेज की जांच की। इस दौरान वाहनों की खिड़कियों पर लगी काली फिल्म, अनधिकृत रूप से किए गए बदलाव, प्रकाश व्यवस्था और यातायात नियमों के पालन की भी पड़ताल की गई। चेकिंग के दौरान संदिग्ध पाए गए वाहनों और व्यक्तियों के खिलाफ पुलिस ने आवश्यक कानूनी कार्रवाई की। ग्रेटर नोएडा में सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए एसीपी-1 कृष्ण पाल सिंह पुलिस बल के साथ सड़क पर उतरे। उन्होंने थाना नॉलेज पार्क क्षेत्र के परी चौक मेट्रो स्टेशन के आसपास फुट पेट्रोलिंग की। इस दौरान उन्होंने पुलिसकर्मियों को संदिग्ध वाहनों की जांच के लिए आवश्यक स्थानों पर बैरिकेडिंग लगाने और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा। साथ ही क्षेत्र में तैनात पीसीआर और पीआरवी वाहनों को लगातार भ्रमणशील रहने के निर्देश दिए। इसके साथ ही प्रमुख और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर पुलिस अधिकारियों ने पैदल गश्त कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। वहीं नोएडा में एसीपी-1 प्रवीण कुमार सिंह ने पुलिस बल के साथ थाना सेक्टर-20 और सेक्टर-39 क्षेत्रों में पैदल गश्त की। इस दौरान संदिग्ध वाहनों की जांच करने के साथ सुरक्षा और यातायात व्यवस्था का जायजा लिया गया। पुलिस अधिकारियों ने पीसीआर और पीआरवी वाहनों को लगातार क्षेत्र में गश्त करने के निर्देश दिए। थाना सेक्टर-142 क्षेत्र में एडवांट कट के पास भी बस और टैक्सियों की सघन चेकिंग की गई। पुलिस ने वाहनों के दस्तावेज, काली फिल्म, अनधिकृत परिवर्तन और प्रकाश व्यवस्था की जांच की। अधिकारियों ने सभी थाना प्रभारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित चेकिंग अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। पुलिस के मुताबिक, आमजन की सुरक्षा और सुगम यातायात व्यवस्था के लिए यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।