विंटर शेड्यूल से पहले स्पाइसजेट का 20 नए विमानों के लिए लीज एग्रीमेंट फाइनल

गुरुग्राम। विंटर शेड्यूल से पहले स्पाइसजेट ने अपनी उड़ानों का विस्तार करने की तैयारी कर ली है। एयरलाइन ने 20 विमानों को शामिल करने के लिए तीन एयरक्राफ्ट ऑपरेटर्स के साथ लीज एग्रीमेंट फाइनल कर लिया है। इनमें 15 बोइंग और 5 एयरबस विमान शामिल हैं, जिन्हें डैम्प और वेट लीज एग्रीमेंट के तहत लिया जा रहा है। कंपनी ने बताया कि ये विमान अक्टूबर के मध्य से नवंबर के मध्य के बीच चरणबद्ध तरीके से बेड़े में शामिल होंगे। यह समय दुर्गा पूजा से शुरू होने वाले विंटर ट्रैवल पीक से ठीक पहले का है। इन विमानों के आने से स्पाइसजेट के घरेलू और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क में क्षमता बढ़ेगी और सर्दियों के साथ-साथ अगले साल के पीक समर सीजन में भी अतिरिक्त क्षमता मिलेगी। इन अतिरिक्त विमानों के साथ, स्पाइसजेट विंटर शेड्यूल के दौरान अपने ऑपरेशन को बढ़ाकर लगभग 200 डेली फ्लाइट्स तक ले जाने की योजना बना रही है। एयरलाइन प्रमुख रूटों पर फ्लाइट्स की फ्रीक्वेंसी बढ़ाएगी और उन बाजारों में कनेक्टिविटी मजबूत करेगी जहां मांग अधिक रहने की उम्मीद है। अतिरिक्त क्षमता से बाजार में अधिक स्थिरता लाने और पीक डिमांड के दौरान हवाई किराए पर दबाव कम करने में भी मदद मिलेगी। पांच एयरबस विमानों में ए321 वेरिएंट भी शामिल होगा, जिसमें बैठने की क्षमता अधिक है और इससे स्पाइसजेट को उन रूटों पर अधिक सीटें उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी जहां मांग मजबूत है। यह बेड़ा विस्तार स्पाइसजेट की क्षमता को बहाल करने और एक बड़े ऑपरेशनल बेड़े के निर्माण की व्यापक योजना का हिस्सा है। स्पाइसजेट के चीफ बिजनेस ऑफिसर देबोजो महर्षि ने कहा, “हम सर्दियों के मौसम की तैयारी इस स्पष्ट फोकस के साथ कर रहे हैं कि जहां हमारे यात्रियों को सबसे ज्यादा जरूरत है, वहां क्षमता जोड़ी जाए। हम जो 20 विमान ला रहे हैं, वे हमें अपने नेटवर्क को मजबूत करने, फ्रीक्वेंसी बढ़ाने और पीक सीजन के दौरान अधिक यात्रा विकल्प प्रदान करने में सक्षम बनाएंगे। ये विमान सर्दियों और गर्मियों दोनों के पीक ट्रैवल पीरियड के दौरान हमारे ऑपरेशन को सपोर्ट करेंगे। साथ ही, क्षमता में अधिक स्थिरता लाने और हवाई किराए पर दबाव कम करने में मदद करेंगे। हमारा लक्ष्य इस सर्दी में लगभग 200 दैनिक उड़ानों तक पहुंचना है जबकि हम अपने परिचालन को एक संतुलित और टिकाऊ तरीके से आगे बढ़ाते रहेंगे।

अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार, ईरान पर कभी भी हो सकते हैं और हमले : ट्रंप

वॉशिंगटन। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्‍ट्रपत‍ि डोनाल्‍ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना जब चाहे तब ईरान पर नए हमले करने के लिए तैयार है। मंगलवार रात ईरान पर बहुत बड़ा हमला किया गया है और हम जब चाहें, फिर से ऐसा हमला करने के लिए तैयार हैं। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने होर्मुज स्‍ट्रेट के आसपास ईरान की ओर से हाल ही में लगाए गए या दोबारा तैयार किए गए सभी नए उपकरणों को नष्ट कर दिया है। उन्होंने कहा, “हमने होर्मुज स्‍ट्रेट के आसपास उनके सभी नए उपकरणों को खत्म कर दिया, जिन्हें वे फिर से खड़ा करने की कोशिश कर रहे थे।” ईरानी अधिकारियों ने बुधवार को कहा कि मंगलवार रात हुए अमेरिकी हमले में दक्षिणी ईरान में चल रहे एक शादी समारोह को निशाना बनाया गया। ईरान के अनुसार, इस हमले में कम से कम चार लोगों की मौत हुई और कई अन्य घायल हुए। हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने कहा कि वह इन रिपोर्टों की जांच कर रहा है और अमेरिकी सेना जानबूझकर कभी भी नागरिकों को निशाना नहीं बनाती। जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वह वास्तव में होर्मुज स्‍ट्रेट का नाम बदलकर अपने नाम पर रखना चाहते हैं, तो उन्होंने कहा, “नहीं, नहीं… यह सिर्फ एक सुझाव के तौर पर कहा गया था।” इससे पहले ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर मजाकिया अंदाज में लिखा था, “अब जब यह अमेरिका के नियंत्रण में है, तो क्या हमें होर्मुज स्‍ट्रेट का नाम बदलकर ‘ट्रंप स्ट्रेट’ कर देना चाहिए?” उन्होंने पिछले महीने लॉन्ग आइलैंड में एक रैली के दौरान भी कहा था कि ईरान को हराने के बाद वह होर्मुज स्‍ट्रेट को अमेरिकी क्षेत्र घोषित करने पर विचार कर सकते हैं। ट्रंप ने उस समय कहा था, “जब हम ईरान को पूरी तरह पराजित कर देंगे, तो मैं होर्मुज स्‍ट्रेट को अमेरिका का क्षेत्र घोषित कर सकता हूं।” इस बीच, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनके प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने बताया क‍ि महासचिव अमेरिका और ईरान के बीच हुए नए हमलों से बेहद चिंतित हैं। उन्होंने खास तौर पर उन रिपोर्टों पर चिंता जताई जिनमें ईरान में एक शादी समारोह पर हमले और नागरिकों के हताहत होने की बात कही गई है। दुजारिक ने कहा कि गुटेरेस नागरिकों को निशाना बनाने वाले सभी हमलों की निंदा करते हैं। उन्होंने सभी पक्षों को याद दिलाया कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करना चाहिए, जिसमें नागरिकों की सुरक्षा, संतुलित कार्रवाई और अधिकतम सावधानी बरतने जैसे सिद्धांत शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र ने अमेरिका और ईरान से तुरंत सैन्य कार्रवाई रोकने और संयम बरतने की अपील की है।

किम जोंग-उन ने शिक्षा को बताया सरकारी जिम्मेदारी, शिक्षकों को बताया ‘देशभक्त’

सोल। उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन बुधवार को शिक्षकों के सम्मेलन में शामिल हुए। शिक्षकों की प्रशंसा करते हुए कहा कि इनकी भूमिका अगली पीढ़ी के निर्माण में बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने शिक्षकों को देश के भविष्य को तैयार करने की पहली पंक्ति में खड़े ‘देशभक्त’ बताया। योनहाप ने उत्तर कोरिया की न्यूज एजेंसी केसीएनए के हवाले से बताया कि उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग में 15वें राष्ट्रीय शिक्षक सम्मेलन का आयोजन किया गया है। किम जोंग-उन ने उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। उत्तर कोरिया में शिक्षक सम्मेलन फरवरी 2019 के बाद पहली बार आयोजित हुआ। किम ने कहा कि शिक्षा ऐसी सबसे महत्वपूर्ण सरकारी जिम्मेदारी है, जिसे किसी भी अन्य क्षेत्र के काम से पीछे नहीं रहना चाहिए। उन्होंने शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों को समाज में अधिक सम्मान दिए जाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में उत्तर कोरिया की शिक्षा व्यवस्था, पाठ्यक्रम और शैक्षणिक वातावरण में महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं। किम ने इन बदलावों को शिक्षा के क्षेत्र में एक तरह की ‘क्रांति’ करार दिया। सम्मेलन में उत्तर कोरिया के प्रधानमंत्री पाक थाए-सोंग ने पिछले सात वर्षों के दौरान शिक्षा क्षेत्र में हुई प्रगति और कमियों की समीक्षा की। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में मौजूद खामियों को दूर करने और शहरी तथा ग्रामीण इलाकों के बीच शिक्षा के अंतर को कम करने पर जोर दिया। यह लक्ष्य फरवरी में सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया की नौवीं कांग्रेस में भी प्रमुखता से सामने आया था। उत्तर कोरिया के सरकारी अखबार रोडोंग सिनमुन के अनुसार, पिछले शिक्षक सम्मेलन के बाद से देश में करीब 4,320 स्कूलों और किंडरगार्टनों का पुनर्निर्माण या निर्माण किया गया है। इसके अलावा, किम इल-सुंग विश्वविद्यालय समेत प्रमुख विश्वविद्यालयों में क्रेडिट आधारित शिक्षा व्यवस्था लागू की गई है। शिक्षा प्रबंधन को एकीकृत करने के लिए डिजिटल एवं प्रबंधन प्रणालियों से जुड़े सुधार भी किए जा रहे हैं। किम जोंग-उन ने जापान में रह रहे कोरियाई समुदाय के संगठन चोंग्र्योन के सदस्यों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि विदेश में रहते हुए इस समुदाय ने युवाओं को राष्ट्रीय शिक्षा उपलब्ध कराने में भूमिका निभाई है। किम का शिक्षा पर जोर ऐसे समय में आया है जब उत्तर कोरिया अपनी युवा पीढ़ी को राज्य की विचारधारा और राष्ट्रीय लक्ष्यों से जोड़ने पर लगातार जोर देता रहा है।

राम मंदिर ट्रस्ट के सीईओ एयर मार्शल (रिटायर्ड) जितेंद्र मिश्रा पहुंचे अयोध्या, बोले-जीवन में दूसरी बार सेवा का मौका मिला

अयोध्या। राम मंदिर ट्रस्ट के नवनियुक्त एयर मार्शल (रिटायर्ड) जितेंद्र मिश्रा गुरुवार को अयोध्या पहुंचे। इस दौरान उनका भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान उन्होंने कहा कि देश सेवा के बाद अब उन्हें भगवान श्रीराम की सेवा का अवसर मिला है। राम मंदिर ट्रस्ट के नवनियुक्त एयर मार्शल (रिटायर्ड) जितेंद्र मिश्रा ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “इस नई ज़िम्मेदारी को संभालने के बाद अयोध्या का यह मेरा पहला दौरा है। पहले मैं जाकर अपना पद संभाल लूं, उसके बाद ही योजनाओं के बारे में बताऊंगा। मैं सलेक्शन कमेटी और ट्रस्ट का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं। यह भगवान राम की कृपा भी है, इसलिए मैं और ज़्यादा कुछ नहीं कहना चाहता। मेरा दिल आभार से भरा है और मैं खुद को बहुत खुशनसीब मानता हूं कि मुझे जिंदगी में दो बार यह जिम्मेदारी मिली है। एक बार देश की सेवा करने की और अब भगवान राम, मंदिर और उसके भक्तों की सेवा करने की, जिसके लिए मुझे इसके संगठन और प्रशासन का काम सौंपा गया है।” एयर मार्शल (रिटायर्ड) जितेंद्र मिश्रा ने कहा कि मैं इसी इलाके का रहने वाला हूं और अक्सर देवरिया, गोरखपुर और वाराणसी जाता रहता हूं। हमारा राज्य और देश तेजी से तरक्की कर रहे हैं और अयोध्या का भी उसी तरह विकास हो रहा है। उन्होंने कहा कि मुझे कार्यभार संभालने दीजिए। भविष्य में और जानकारी दी जाएगी। बता दें कि अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बुधवार को भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को मंदिर का पहला मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किया था। लंबे सैन्य अनुभव और बड़े संस्थानों के संचालन में दक्षता रखने वाले मिश्रा अब राम मंदिर की दैनिक प्रशासनिक व्यवस्था, श्रद्धालु सुविधाओं और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की जिम्मेदारी संभालेंगे। सीईओ के चयन के लिए गठित समिति ने ट्रस्ट को तीन नामों का पैनल सौंपा था। इनमें उत्तर प्रदेश पुलिस के पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश पांडेय, बिहार के पूर्व डीजीपी डॉ. परेश सक्सेना और पूर्व आईएएस दिनेश चंद्र के नाम भी शामिल थे। ट्रस्ट ने विचार-विमर्श के बाद जितेंद्र मिश्रा के नाम पर मुहर लगाई। जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना में करीब चार दशक तक विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं।

बार-बार शरीर में होती है अकड़न? डाइट में शामिल करें ये चीजें, बढ़ेगा लचीलापन

नई दिल्ली। शरीर का लचीलापन सिर्फ इस बात पर निर्भर नहीं करता कि आप कितनी देर तक स्ट्रेचिंग करते हैं। आपके खाने का भी इसमें बड़ा योगदान हो सकता है। अगर शरीर को रोजाना सही मात्रा में प्रोटीन, विटामिन और जरूरी तत्व नहीं मिल रहे हैं तो मांसपेशियों की ताकत और उनकी काम करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। वहीं संतुलित खाना शरीर को व्यायाम के बाद खुद को ठीक करने और मजबूत बनाने में मदद करता है। हालांकि यह बात साफ है कि कोई एक फल, सब्जी या दूसरा खाद्य पदार्थ खाने से शरीर अचानक लचीला नहीं हो जाता। इसके लिए सही खान-पान के साथ नियमित व्यायाम और स्ट्रेचिंग भी जरूरी है। सबसे पहले बात प्रोटीन वाले खाने की तो अंडा, दूध, दही, पनीर, सोया, चना, राजमा और चिकन इसके अच्छे स्रोत हैं। प्रोटीन शरीर की मांसपेशियों को बनाने और उनकी मरम्मत करने में मदद करता है। जब हम कसरत करते हैं तो मांसपेशियों पर थोड़ा दबाव पड़ता है। इसके बाद शरीर को उनकी मरम्मत के लिए अमीनो एसिड की जरूरत होती है, जो प्रोटीन से मिलते हैं। मजबूत और स्वस्थ मांसपेशियां शरीर के अंगों को बेहतर तरीके से हिलाने-डुलाने में मदद करती हैं। प्रोटीन सीधे तौर पर शरीर को लचीला नहीं बनाता, लेकिन लचीलेपन के लिए जरूरी मांसपेशियों को स्वस्थ रखने में मदद करता है। विटामिन सी भी इस मामले में काफी काम का है। आंवला, अमरूद, नींबू, संतरा, कीवी, टमाटर और शिमला मिर्च जैसे खाद्य पदार्थों में विटामिन सी अच्छी मात्रा में पाया जाता है। शरीर में विटामिन सी का एक महत्वपूर्ण काम कोलेजन बनाने में मदद करना है। कोलेजन एक तरह का प्रोटीन है, जो त्वचा के अलावा हड्डियों, जोड़ों और मांसपेशियों को जोड़कर रखने वाले हिस्सों को मजबूती देने में मदद करता है। शरीर में कोलेजन बनाने के लिए विटामिन सी की जरूरत होती है। यही वजह है कि विटामिन सी से भरपूर फल और सब्जियां शरीर के इन हिस्सों की सामान्य सेहत बनाए रखने में मदद करती हैं। अब बात मैग्नीशियम की। बादाम, काजू, तिल, कद्दू के बीज, साबुत अनाज, पालक और दूसरी हरी सब्जियां मैग्नीशियम के अच्छे स्रोत हैं। यह तत्व हमारी मांसपेशियों और नसों के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी होता है। जब हम हाथ-पैर हिलाते हैं तो मांसपेशियां कभी सिकुड़ती हैं और कभी ढीली होती हैं। इस पूरी प्रक्रिया में मैग्नीशियम की भी भूमिका होती है। इसलिए खाने में मैग्नीशियम की पर्याप्त मात्रा रखना मांसपेशियों के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी है। ओमेगा-3 वाली चीजें भी खाने में शामिल की जा सकती हैं। अलसी के बीज, चिया के बीज और अखरोट जैसी चीजों में ओमेगा-3 होता है, जो शरीर में होने वाली सूजन को नियंत्रित करने में मदद करता है। शरीर में ज्यादा सूजन होने पर कई बार मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द हो सकता है। ऐसे में ओमेगा-3 शरीर के सामान्य स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकता है। पानी भी शरीर के लचीलेपन के लिए जरूरी है। कई लोग खाने पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन पानी की मात्रा को नजरअंदाज कर देते हैं। शरीर में पानी की कमी होने पर थकान और कमजोरी महसूस होती है। इससे कसरत करने की क्षमता भी कम हो सकती है। इसलिए दिनभर पर्याप्त पानी पीना जरूरी है। गर्मी में या ज्यादा कसरत करने पर शरीर से पसीने के जरिए पानी निकलता है, ऐसे में पानी की जरूरत और बढ़ सकती है।

पलामू में विधायक आवास के पास युवक की गोली मारकर हत्या, विरोध में सड़क पर उतरे लोग

मेदिनीनगर। झारखंड के पलामू जिले के हुसैनाबाद थाना क्षेत्र में बुधवार देर रात बदमाशों ने एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी। मृतक की पहचान ओमप्रकाश सिंह उर्फ छोटू सिंह के रूप में हुई है। वारदात पुरंदर बीघा गांव के पास जपला-दंगवार मुख्य सड़क पर विधायक संजय कुमार सिंह यादव के आवास के पास हुई। जानकारी के अनुसार, ओमप्रकाश सिंह अपनी स्कॉर्पियो रोककर किसी व्यक्ति से बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान बदमाशों ने उनकी कनपटी में गोली मार दी। उन्होंने भागने की कोशिश की लेकिन हमलावरों ने उन पर कई गोलियां बरसाईं। मौके पर ही उनकी मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, ओमप्रकाश सिंह का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है। हुसैनाबाद थाने में उसके खिलाफ आर्म्स एक्ट और शराब तस्करी सहित करीब आठ मामले दर्ज थे। वह कुछ महीने पहले ही जेल से जमानत पर बाहर आया था। पुलिस हत्या के पीछे पुरानी रंजिश और आपसी दुश्मनी समेत अन्य संभावित कारणों की भी जांच कर रही है। घटना की सूचना मिलते ही हुसैनाबाद थाना प्रभारी चंदन कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के इलाके की नाकेबंदी कर जांच शुरू की। वारदात के समय मौके पर एक संदिग्ध मोटरसाइकिल देखे जाने की जानकारी मिली है। फायरिंग के तुरंत बाद मोटरसाइकिल सवार वहां से तेजी से निकल गया। पुलिस को आशंका है कि वारदात में एक से अधिक अपराधी शामिल हो सकते हैं। पलामू के एसपी कपिल चौधरी ने बताया कि अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए पुलिस की विशेष टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि शुरुआती जांच और स्थानीय इनपुट के आधार पर पुलिस को कुछ महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। इनके आधार पर तकनीकी और जमीनी स्तर पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। पुलिस जपला-दंगवार मुख्य सड़क और विधायक आवास के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाल रही है। अपराधियों के भागने के संभावित रास्तों की भी जांच की जा रही है। घटनास्थल के आसपास के मोबाइल टावरों से जुड़े डेटा की भी पड़ताल की जा रही है। इसके अलावा मृतक के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल और वारदात से पहले वह किससे बात कर रहा था, इसकी भी जांच की जा रही है। घटना के बाद आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने सड़क जाम कर विरोध जताया। पुलिस के समझाने और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने के बाद गुरुवार सुबह करीब 7.30 बजे जाम हटाया गया। इसके बाद पुलिस की मौजूदगी में शव को पोस्टमार्टम के लिए हुसैनाबाद अनुमंडलीय अस्पताल भेजा गया।

कुमाऊं का दूसरा सबसे बड़ा वैष्णवी शक्तिपीठ है मां दूनागिरी मंदिर, जानें पौराणिक कथा

उत्तराखंड। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्थित मां दूनागिरी मंदिर आस्था और अध्यात्म का एक प्रमुख केंद्र है। अल्मोड़ा जिले के द्वारहाट क्षेत्र में ऊंची पहाड़ी पर बसा यह मंदिर 51 शक्ति पीठों में से एक माना जाता है। साथ ही, यह कुमाऊं क्षेत्र का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण वैष्णवी शक्तिपीठ में से एक है। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्तों को करीब 500 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं लेकिन मान्यता है कि सच्चे मन से दर्शन करने वालों की हर मनोकामना पूरी होती है। पौराणिक कथाओं से जुड़ा यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी प्रसिद्ध है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को भी मंदिर की भव्यता के बारे में बताया। साथ ही, लोगों से एक बार मंदिर दर्शन करने की अपील की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो पोस्ट कर लिखा, “अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट इलाके में मौजूद मां दूनागिरी मंदिर आस्था, अध्यात्म और प्राकृतिक सुंदरता का एक दिव्य संगम है। मां आदिशक्ति भगवती को समर्पित यह पवित्र धाम अनगिनत भक्तों की श्रद्धा का केंद्र है। नवरात्रि के पावन मौके पर यहां खास पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यक्रम होते हैं, जिसके दौरान भक्त दूर-दूर से माँ के दर्शन के लिए आते हैं। अल्मोड़ा जिले में आने पर इस दिव्य मंदिर के दर्शन जरूर करें।” मां दूनागिरी मंदिर, में मां दुर्गा के वैष्णवी रूप (मां दूनागिरी देवी) की पिंडी रूप में पूजा की जाती है। इसे कुमाऊं क्षेत्र का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण वैष्णवी शक्तिपीठ माना जाता है। रामायण का इतिहास रामायण और महाभारत काल से जुड़ा माना जाता है। इसके अनुसार, जब हनुमान जी लक्ष्मण जी के लिए संजीवनी बूटी लाने वास्ते द्रोणागिरी पर्वत को ले जा रहे थे, तब इस पर्वत का एक हिस्सा यहां गिरा था। ऐसा भी कहा जाता है कि पांडवों के गुरु द्रोणाचार्य ने यहां तपस्या की थी। भारत के ज्यादातर देवी मंदिर में नारियल फोडने की प्रथा रहती है, लेकिन इस मंदिर ऐसा नहीं किया जाता है। दरअसल, यहां चढ़ाए जाने वाले प्रसाद (सूखे नारियल) को तोड़ा नहीं जाता है, बल्कि श्रद्धालुओं को साबुत वापस दिया जाता है। मंदिर परिसर में निरंतर भंडारे का आयोजन किया जाता है।

हिंदू देवी-देवताओं का जिक्र, इसलिए ‘वंदे मातरम’ पर आपत्ति जताना बचकानी सोच: गीतांजलि अंगमो

भुवनेश्वर। पर्यावरणविद् और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो ने पूर्ण ‘वंदे मातरम’ के गायन का विरोध करने वालों को करारा जवाब दिया है। उन्होंने कहा है कि ‘वंदे मातरम’ गाने पर इस आधार पर आपत्ति जताना कि इसमें हिंदू देवी-देवताओं का जिक्र है, ‘बचकानी सोच’ दिखाता है। उन्होंने कहा कि भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक बातों को धार्मिक पहचान के छोटे नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। गीतांजलि आंग्मो ने ‘वंदे मातरम’ के बारे में आईएएनएस से कहा, “वंदे मातरम को लेकर कई रुकावटें या आपत्तियां हैं। पहले तो लोग कहते हैं कि जब इसे लिखा गया था, तब भारत एक नेशन-स्टेट भी नहीं था, तो यह भारत के लिए कैसे हो सकता है? फिर, वे बताते हैं कि बाद के छंदों में हिंदू देवताओं का जिक्र है, तो दूसरे धर्मों के लोग इसे कैसे गा सकते हैं? अब, यह इसे देखने का बहुत बचकाना तरीका है।” उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब हम सूफी कविता पढ़ते हैं या कोई गजल सीखते हैं, तो हम उसे उर्दू में सीखते हैं और गाते हैं। लेकिन ऐसा तो नहीं है कि अगर कोई हिंदू सूफी कविता गाएगा तो उसका धर्म भ्रष्ट हो जाएगा। गीतांजलि अंगमो ने कहा कि वेद और उपनिषद 10 हजार साल पुराने ग्रंथ हैं। वे संस्कृत में लिखे गए हैं। उन्होंने कहा, “अगर हम इटालियन ओपेरा सीखते हैं तो वो लेटिन में होता है। अगर उसे सीखना है तो हम उस भाषा का इस्तेमाल करते हैं। हम उसको सेलिब्रेट करते हैं। अंगमो ने कहा कि अगर हम गायती मंत्र गाते हैं या योगा करते हैं, जिसमें संस्कृत श्लोक हैं, तो संस्कृत को हिंदू धर्म के साथ जोड़ना और राजनीतिक दल के साथ जोड़ना गलत है। संस्कृत एक बहुत पुरानी भाषा है। उन्होंने कहा कि उच्च मंत्र हमें प्रेरित करते हैं, ताकि हम परेशानियों से और अच्छे से लड़ सकें। अंग्मो ने आगे कहा, “इसलिए, यह कहना कि ‘जब दूसरी समस्याएं हैं तो वंदे मातरम क्यों?’, सही नजरिया नहीं है। वंदे मातरम दूसरी समस्याओं के खिलाफ नहीं है। वंदे मातरम एक ऐसी भावना है जो हमें उन समस्याओं से लड़ने के लिए प्रेरित करती है।” अंगमो ने कहा कि वंदे मातरम में हिंदू देवी-देवताओं के संदर्भों को केवल धार्मिक दृष्टिकोण से देखने के बजाय प्रतीकात्मक रूप से भी समझा जा सकता है। उन्होंने कहा, “दुर्गा हैं। दुर्गा शक्ति का प्रतीक हैं। लक्ष्मी समृद्धि का प्रतीक हैं। इसलिए, अगर किसी को गीत गाने से कोई आपत्ति है, तो आप उसे बदल नहीं सकते। पहले दो छंद इसलिए चुने गए थे, क्योंकि गीत बहुत लंबा था। इसका मतलब यह नहीं है कि बाकी छंदों को स्वीकार नहीं किया गया था। आप किसी भी कलाकृति को काट नहीं सकते।” गीतांजलि अंगमो ने कहा कि हम यूरोपियन देशों से अलग हैं। हम अपने देश को सिर्फ एक जमीन का टुकड़ा, एक राजनीतिक इकाई या एक भौगोलिक इकाई के तौर पर नहीं देखते हैं। 1600 के दशक के बाद दुनियाभर में अनेक देश बने हुए हैं। उससे पहले, भारत एक सभ्यतागत, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान था। उत्तर में कश्मीर से लेकर दक्षिण तक और बाएं से दाएं, हर कोई सवाल करता था, आखिरी सच्चाई क्या है? यह आध्यात्मिक प्रश्न भारत की पहचान थी।” उन्होंने कहा कि हम भारत को माता कहते हैं। वंदे मातरम हमें यह दिखाता है और फोकस कराता है तो आप अपनी मां (भारत) से कैसे जुड़ेंगे? हमारा जन्म भी मां से होता है और हमारा पालन-पोषण भी मां के जरिए होता है। उन्होंने कहा, “एक राष्ट्रीय गीत के तौर पर यह हमेशा से मौजूद था, लेकिन लोगों की यादों से यह धीरे-धीरे मिटता जा रहा था। आजादी के दिन लालकिले से इसे गाए जाने में 80 साल लग गए, और मुझे लगता है कि यह एक स्वागत योग्य कदम है।” उन्होंने कहा, “क्योंकि ‘मां’ एक प्रतीक के तौर पर है। श्री अरबिंदो ने कहा था कि जब बंकिम चंद्र चटर्जी ने ‘आनंदमठ’ लिखा, तो वे सिर्फ एक उपन्यासकार नहीं थे। वे एक ऋषि थे। ऋषि वे द्रष्टा होते हैं जो देख सकते हैं, इसलिए उन्होंने इस जमीन को सिर्फ एक भौतिक भू-भाग के तौर पर नहीं, बल्कि ‘शक्ति’, एक जीवित सत्ता, के तौर पर देखा। यह ‘मां’ एक जीवित सत्ता है, जिसके साथ आप रिश्ता बना सकते हैं। इसलिए इसमें 80 साल नहीं लगने चाहिए थे। शायद अगर हमें यह समझ पहले होती, तो आज हमें भारत के बंटवारे की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता।” अंग्मो ने यह भी कहा कि ‘वंदे मातरम’ को लेकर असहमति आम नागरिकों के बीच उतनी नहीं है, जितनी राजनीतिक चर्चाओं में दिखाई देती है। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि आम लोगों के बीच उतनी समस्या है जितनी कभी-कभी राजनीतिक एजेंडे के कारण बनी चर्चाओं में होती है। कई बार, राजनेता अपने एजेंडे के लिए बंटवारे वाली सोच को बढ़ावा देते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “वंदे मातरम एक जोश भरने वाला नारा बन गया, क्योंकि इसने लोगों को प्रेरित किया। इसलिए, ध्रुवीकरण की वजह से आप इसे नकार नहीं सकते। आपको इसे स्वीकार करना होगा।” अंगमो ने भारत के अलग-अलग संस्कृतियों को अपनाने के लंबे इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि देश ने अपनी परंपराओं को छोड़े बिना ही दूसरी संस्कृतियों के असर को अपनाया है। उन्होंने कहा, “भारत ने हमेशा बाहर से आए प्रभावों को अपनाया है। चाहे वह मुगल प्रभाव हो या कोई और सांस्कृतिक प्रभाव, भारत ने बहुत कुछ अपनाया और आत्मसात किया है। लेकिन अपनाने का मतलब यह नहीं है कि हमें अपनी उस संस्कृति को दिखाने में शर्म आनी चाहिए जो दस 10,000 साल पहले से मौजूद है। हमें दूसरों को जगह देने के लिए खुद को छोटा नहीं करना चाहिए।” उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का उदाहरण दिया, जिन्होंने भारतीय सोच की अलग-अलग धाराओं को गहराई से समझा था। उन्होंने कहा कि किसी दूसरी परंपरा को जानने-समझने से अपनी आस्था कमजोर नहीं होती। उन्होंने कहा, “अब्दुल कलाम उपनिषद, गीता और श्री अरबिंदो की रचनाएं पढ़ते थे। मैं खुद सूफी कविताएं पढ़ती हूं। इससे धर्म के दूषित होने का कोई सवाल ही नहीं उठता। अगर कोई हिंदू उर्दू बोलता है या कोई मुसलमान संस्कृत बोलता है, तो इससे उनका धर्म दूषित नहीं होता। बल्कि,

घरेलू और युद्ध संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहे पुत‍िन, अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा प्रतिबंधों का असर : मार्को रुबियो

वॉशिंगटन। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि रूस के भीतर यूक्रेन की ओर से किए जा रहे हमले और पश्चिमी देशों के प्रतिबंध मिलकर रूसी अर्थव्यवस्था पर असर डाल रहे हैं। उन्होंने बताया कि अमेरिका और यूक्रेन के बीच ऐसी व्यवस्था पर बातचीत चल रही है, जिनसे यूक्रेन भविष्य में उन्नत मिसाइल रोधी रक्षा प्रणालियों का उत्पादन कर सके। एक इंटरव्यू में रूस, ईरान और यूक्रेन युद्ध पर बात करते हुए रुबियो ने कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस समय कई घरेलू और युद्ध संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। हमलों के साथ-साथ प्रतिबंधों का रूसी अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा असर उनकी बड़ी चिंताओं में शामिल है। हालांकि रुबियो ने आर्थिक नुकसान के बारे में कोई विशेष आंकड़ा नहीं दिया और न ही किसी खास यूक्रेनी हमले का नाम लिया। हाल के समय में यूक्रेन लंबी दूरी के ड्रोन और अन्य हथियारों का इस्तेमाल करके रूस के अंदर सैन्य और ऊर्जा से जुड़े ठिकानों को निशाना बना रहा है। वहीं अमेरिका और उसके सहयोगी देश लगातार प्रतिबंधों के जरिए मॉस्को पर दबाव बनाए हुए हैं। रुबियो ने यूक्रेन की ओर से पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम और इंटरसेप्टर मिसाइलों की बढ़ती मांग पर भी बात की। उन्होंने कहा क‍ि आज पूरी दुनिया अधिक एयर इंटरसेप्टर मिसाइलें चाहती है। यह सिर्फ यूक्रेन की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की सबसे बड़ी रक्षा जरूरत बन गई है। अमेरिका को दूसरे देशों को हथियार देने से पहले अपनी रक्षा जरूरतों का भी ध्यान रखना पड़ता है। उन्होंने कहा, “हमारी अपनी न्यूनतम रक्षा आवश्यकताएं हैं और उन्हें पूरा करना हमारी प्राथमिकता है। उसके बाद ही हम अन्य देशों को मदद दे सकते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका अपनी उपलब्ध क्षमता और संसाधनों के अनुसार यूक्रेन की सहायता जारी रखेगा। जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका यूक्रेन को मिसाइल रक्षा प्रणालियां बनाने का लाइसेंस देने के खिलाफ है, तो रुबियो ने बताया कि इस विषय पर बातचीत जारी है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कोई समझौता हो भी जाता है तो इससे यूक्रेन की तत्काल जरूरतें पूरी नहीं होंगी। फैक्ट्रियां खड़ी करने और उत्पादन बढ़ाने में कई साल लगते हैं। इसलिए यह भविष्य में संभव हो सकता है, लेकिन इससे मौजूदा समस्या का तुरंत समाधान नहीं होगा। रुबियो ने बताया कि अमेरिका और यूक्रेन के बीच ड्रोन तकनीक को लेकर भी सहयोग की संभावनाओं पर बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा क‍ि अगर कोई ऐसा समझौता बनता है जो अमेरिका के हित में भी हो, तो हम निश्चित रूप से उस दिशा में आगे बढ़ेंगे। बातचीत जारी है और यह प्रक्रिया अभी चल रही है। हालांकि उन्होंने फिलहाल किसी नए समझौते की घोषणा नहीं की। रुबियो ने सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ की हालिया रूस यात्रा को लेकर चल रही अटकलों को भी खारिज किया। उन्होंने उन रिपोर्टों को गलत बताया जिनमें कहा गया था कि यह यात्रा डोनाल्ड ट्रंप, व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की संभावित त्रिपक्षीय बैठक से जुड़ी थी।

प्रधानमंत्री मोदी ने वाराणसी में बाढ़ का लिया जायजा, अधिकारियों को दिए युद्धस्तर पर राहत कार्य करने के निर्देश

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में बाढ़ की स्थिति को लेकर मेयर अशोक तिवारी और कलेक्टर सत्येंद्र कुमार से फोन पर विस्तृत जानकारी ली। पीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि नागरिकों को कम से कम परेशानी हो, यह सुनिश्चित किया जाए। प्रधानमंत्री ने प्रभावित लोगों को राहत शिविरों में मिल रही सुविधाओं का भी जायजा लिया। उन्होंने बाढ़ प्रभावितों को तत्काल हर जरूरी सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने अतिरिक्त राहत सामग्री की जरूरत होने पर तत्काल व्यवस्था करने को कहा है। पीएम ने बाढ़ और राहत कार्यों पर लगातार नजर रखते हुए युद्धस्तर पर राहत पहुंचाने के निर्देश दिए। पीएम मोदी वाराणसी निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा सांसद हैं और शहर में हो रही गतिविधियों के बारे में स्थानीय प्रशासन के साथ लगातार संपर्क में हैं। इससे पहले बुधवार को गंगा नदी का जलस्तर चेतावनी के निशान से ऊपर चला गया था। जिला प्रशासन ने नावों का संचालन रोक दिया और बाढ़ प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ा दी। केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार, वाराणसी में गंगा का जलस्तर 70.29 मीटर दर्ज किया गया, जो 70.26 मीटर के चेतावनी स्तर से ऊपर है। नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी से निचले इलाकों और घाटों के पास रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। वाराणसी में गंगा का खतरे का स्तर 71.26 मीटर तय किया गया है, जबकि अब तक का सबसे ज्यादा बाढ़ का स्तर 73.90 मीटर दर्ज किया गया है। मौजूदा बाढ़ के हालात को देखते हुए प्रशासन ने एहतियात के तौर पर गंगा नदी में नावों का संचालन रोक दिया है। अधिकारियों ने श्रद्धालुओं, स्थानीय निवासियों और पर्यटकों से भी अपील की है कि वे घाटों की ओर न जाएं और तेज बहाव वाले इलाकों में जाने से बचें।