नोएडा के डूब क्षेत्र में बिजली कनेक्शन काटे जाने का मामला गरमाया, रविवार को महापंचायत

नोएडा। नोएडा के डूब क्षेत्र में विकसित की गई अवैध कॉलोनियों में बिजली कनेक्शन काटे जाने का मामला अब लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार की सख्ती के बाद विद्युत विभाग की ओर से बड़ी कार्रवाई करते हुए इन कॉलोनियों में 13 हजार से अधिक बिजली कनेक्शन काटे जाने की बात सामने आई है। बिजली आपूर्ति बंद होने के बाद यहां रहने वाले लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं। वहीं, इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों की ओर से भी विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं। बताया जा रहा है कि नोएडा के डूब क्षेत्र में लंबे समय से बड़ी संख्या में अवैध कॉलोनियां विकसित होती रही हैं। इन कॉलोनियों में हजारों परिवार रह रहे हैं। सरकार और प्राधिकरण की ओर से डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण और अनधिकृत कॉलोनियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में विद्युत कनेक्शनों को लेकर भी सख्त रुख अपनाया गया है। बड़ी संख्या में कनेक्शन काटे जाने के बाद स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्हें अचानक बिजली जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित होना पड़ रहा है। इस मामले को लेकर कई जनप्रतिनिधियों ने भी सरकार और संबंधित विभाग के सामने विद्युत व्यवस्था बहाल करने की मांग उठाई है। जनप्रतिनिधियों का तर्क है कि भले ही डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण का मुद्दा अलग है, लेकिन वहां वर्षों से रह रहे परिवारों को मूलभूत सुविधाओं से पूरी तरह वंचित करना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। लोगों का कहना है कि बिजली कटने से बच्चों की पढ़ाई, पेयजल व्यवस्था, घरेलू कामकाज और छोटे कारोबार तक प्रभावित हो रहे हैं। अब इस पूरे मामले में किसानों की भी एंट्री होने जा रही है। डूब क्षेत्र की कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को किसानों का समर्थन मिलने की संभावना है। इसी मुद्दे को लेकर रविवार को महापंचायत का आयोजन किया जा रहा है। महापंचायत में बिजली कनेक्शन काटे जाने के साथ-साथ डूब क्षेत्र में रहने वाले लोगों की समस्याओं और सरकार की कार्रवाई पर चर्चा की जाएगी। महापंचायत के बाद सरकार और प्रशासन के खिलाफ धरना-प्रदर्शन किए जाने की भी संभावना जताई जा रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मामला और अधिक राजनीतिक एवं सामाजिक रूप ले सकता है। स्थानीय लोगों और किसानों की ओर से सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति तैयार की जा सकती है। हालांकि, प्रशासन और सरकार की ओर से डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण को लेकर लगातार सख्ती की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यमुना के डूब क्षेत्र में अनधिकृत निर्माण और अवैध कॉलोनियों का विस्तार भविष्य में गंभीर समस्या पैदा कर सकता है। बाढ़ और जलभराव की स्थिति में इन इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा भी बड़ा सवाल बन सकती है।

सुकमा के गोगुंडा में बुनियादी सुविधाओं ने बदली तस्वीर, सुरक्षा की चुनौती आज भी

सुकमा। छत्तीसगढ़ कभी नक्सलियों का गढ़ माने जाने वाले सुकमा जिले के गोगुंडा इलाके में अब बदलाव की नई तस्वीर दिखाई दे रही है। जिस इलाके में कभी सुरक्षा बल हेलीकॉप्टर से ही पहुंच पाते थे, वहां अब सड़क, बिजली, स्कूल और आंगनबाड़ी जैसी बुनियादी सुविधाएं लोगों का जीवन आसान बना रही हैं, हालांकि इलाके में सुरक्षा की चुनौती अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। गोगुंडा का नाम कभी नक्सल गतिविधियों और दहशत के लिए जाना जाता था। क्षेत्र में आईईडी और नक्सली डंप की मौजूदगी के कारण ग्रामीणों के लिए सामान्य जीवन बेहद मुश्किल था। सड़क और बिजली जैसी सुविधाओं का अभाव था। स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र भी यहां दूर की बात थे। सुरक्षा बलों के जवान कई बार हेलीकॉप्टर के जरिए ही इलाके में पहुंच पाते थे। स्थिति में बदलाव तब शुरू हुआ, जब 74वीं बटालियन सीआरपीएफ ने यहां कैंप स्थापित किया। कैंप की स्थापना के बाद इलाके में सड़क निर्माण शुरू हुआ और बिजली भी पहुंची। इसके साथ ही स्कूल और आंगनबाड़ी जैसी सुविधाएं ग्रामीणों तक पहुंचने लगीं। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के साथ ग्रामीणों में भी नक्सलियों का भय धीरे-धीरे कम हुआ। हालांकि गोगुंडा में चुनौतियां अभी बरकरार हैं। कैंप तक आज भी वाहन से पहुंचना संभव नहीं है। बाइक भी कैंप तक नहीं जा सकती। जवानों और ग्रामीणों को पहाड़ चढ़कर कैंप के शीर्ष तक पहुंचना पड़ता है। इलाके की भौगोलिक स्थिति और आईईडी का खतरा सुरक्षा बलों के लिए लगातार चुनौती बना हुआ है। आईएएनएस की टीम पहली बार इस इलाके में सुरक्षा बलों की गतिविधियों और वहां हो रहे बदलाव को कवर करने पहुंची। सीआरपीएफ जवानों ने हाई रिस्क क्षेत्र में मीडिया टीम का हौसला बढ़ाया और धन्यवाद दिया। जवानों के मुताबिक, इलाके में खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। हर सप्ताह आईईडी मिलने की घटनाएं सामने आती हैं। पुलिस और नक्सली सूत्रों के अनुसार, पूरे क्षेत्र में अब भी बड़ी संख्या में आईईडी जमीन में दबे होने की आशंका है। सीआरपीएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि 2014 में यहां सड़क, स्कूल और अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति बेहद खराब थी। अब सुरक्षा बलों और संयुक्त टीमों के प्रयास से विकास तेजी से हो रहा है। स्थानीय लोग भी मदद के लिए आगे आ रहे हैं और सुरक्षा बलों के साथ सहयोग कर रहे हैं। गोगुंडा में कैंप, सड़क, बिजली और स्कूल का पहुंचना इस बात का संकेत है कि नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा के साथ विकास को आगे बढ़ाकर ही स्थायी बदलाव लाया जा सकता है।

ट्रंप के मेल-इन वोटिंग प्रतिबंधों पर अमेरिकी अदालत की रोक, जज इंदिरा तलवानी बोलीं- मामला काल्पनिक नहीं

वॉशिंगटन। अमेरिका में 2026 के मध्यावधि चुनावों से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन और अदालत के बीच टकराव बढ़ता दिख रहा है। संघीय जिला जज इंदिरा तलवानी ने अमेरिकी डाक सेवा (यूएसपीएस) को मेल-इन और डाक मतपत्रों से जुड़े ट्रंप प्रशासन के नए प्रतिबंध लागू करने से रोकने के लिए प्रारंभिक निषेधाज्ञा जारी की है। यह मामला ट्रंप के उस कार्यकारी आदेश से जुड़ा है, जिसके तहत डाक से भेजे जाने वाले मतपत्रों की प्रक्रिया में कई नए नियम लागू किए जाने थे। इनमें राज्यों से ‘मेल-इन वोटिंग’ पाने वाले मतदाताओं की सूची पहले से जमा कराने और मतपत्रों पर विशेष बारकोड तथा निर्धारित डिजाइन लागू करने जैसी शर्तें शामिल थीं। नियमों का पालन नहीं करने वाले मतपत्रों की डिलीवरी प्रभावित होने की आशंका जताई गई थी। एबीसी न्यूज के अनुसार जज तलवानी ने कहा कि मामला अब काल्पनिक नहीं है, क्योंकि नवंबर के चुनाव के लिए कई राज्यों में मतपत्र भेजने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अदालत के मुताबिक, इस समय नियमों में फेरबदल से मतदाताओं के मतदान के अधिकार पर गंभीर असर पड़ सकता है। यह फैसला ट्रंप प्रशासन और राज्यों के बीच चुनावी अधिकारों को लेकर चल रही लंबी कानूनी लड़ाई का नया अध्याय है। प्रशासन ने अदालत के आदेश को चुनौती दी है और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से नए प्रतिबंधों को बहाल करने की मांग की है। राज्यों को इस अपील पर जवाब देने के लिए 8 सितंबर तक का समय दिया गया है। इससे पहले 24 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत की शुरुआती रोक में से एक को हटाते हुए यूएसपीएस को नियम लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता दिया था। हालांकि, उस समय सुप्रीम कोर्ट ने नियमों की संवैधानिक वैधता पर अंतिम फैसला नहीं दिया था। इस बीच, उत्तरी कैरोलिना में 2026 के मध्यावधि चुनाव के लिए डाक मतपत्र मतदाताओं को भेजे जाने शुरू हो चुके हैं। ऐसे में अदालतों के लगातार बदलते आदेशों ने चुनाव अधिकारियों के सामने प्रक्रिया को लेकर अतिरिक्त चुनौती पैदा कर दी है।

सोना इस हफ्ते चार हजार रुपए और चांदी आठ हजार रुपए से अधिक सस्ती हुई

नई दिल्ली। सोने और चांदी में इस हफ्ते बड़ी गिरावट देखने को मिली, जिससे दोनों कीमती धातुओं का दाम क्रमश: 4,000 रुपए और 8,000 रुपए से अधिक घट गया। इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का दाम इस हफ्ते 4,694 रुपए कम होकर 1,54,884 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जबकि पहले यह 1,59,578 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था। 22 कैरेट सोने की कीमत कम होकर 1,41,874 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है, जो कि पहले 1,46,173 रुपए प्रति 10 ग्राम थी। 18 कैरेट सोने का दाम कम होकर 1,16,163 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 1,19,684 रुपए प्रति 10 ग्राम था। इस हफ्ते 24 कैरेट सोने में सबसे न्यूनतम दाम 2 सितंबर को शाम के सत्र में 1,51,184 रुपए प्रति 10 ग्राम देखा गया। वहीं, उच्चतम दाम 31 अगस्त को शाम के सत्र में 1,55,835 रुपए प्रति 10 ग्राम देखा गया। सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट देखने को मिली है। चांदी का दाम 8,436 रुपए कम होकर 2,35,456 रुपए प्रति किलो हो गया है, जो कि पहले 2,43,892 रुपए प्रति किलो था। इस हफ्ते चांदी में उच्चतम दाम 31 अगस्त को शाम के सत्र में 2,37,199 रुपए प्रति किलो देखा गया। वहीं, न्यूनतम दाम 3 सितंबर को सुबह के सत्र में 2,28,360 रुपए प्रति किलो देखा गया। आईबीजेए की ओर से दिन में दो बार सुबह और शाम के सत्र में सोने और चांदी की कीमतों को जारी किया जाता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने का दाम करीब 4,500 डॉलर प्रति औंस और चांदी का दाम 66 डॉलर प्रति औंस के करीब था। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सोने और चांदी में गिरावट की वजह अमेरिका और ईरान में तनाव बढ़ना था। अमेरिका की ओर से ईरान पर लगातार हमले किए जा रहे हैं। वहीं, ईरान भी मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहा है। इससे बॉन्ड यील्ड, डॉलर और कच्चा तेल भी मजबूत हो गया है।

यूपी : सहारनपुर कलेक्ट्रेट के अंदर बनी मस्जिद पर ध्वस्तीकरण कार्रवाई, जिला अदालत के फैसले के बाद प्रशासन का एक्शन

सहारनपुर। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में प्रशासन ने छह बुलडोजर का इस्तेमाल करके सहारनपुर कलेक्ट्रेट के अंदर बनी एक मस्जिद को गिरा दिया है। यह ध्वस्तीकरण कार्रवाई जिला अदालत के उस फैसले के बाद की गई, जिसमें सरकारी जमीन पर बनी इस इमारत को अवैध घोषित करने वाले बेदखली के आदेश को सही ठहराया गया था। आईएएनएस से बातचीत करते हुए डीआईजी अभिषेक सिंह ने कहा, “सहारनपुर जिले में जिला कलेक्ट्रेट परिसर के अंदर सरकारी जमीन पर एक अवैध निर्माण पाया गया था, जिसके बारे में सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ मस्जिद कमेटी ने पहली अपील दायर की थी। उनकी अपील खारिज कर दी गई है और सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा गया है। इसी आदेश के तहत, इस अवैध निर्माण को गिराने का काम किया जा रहा है।” डीआईजी अभिषेक सिंह की ओर से बताया गया कि प्रशासन की ओर से जितने भी लीगल रिस्पॉन्सिबिलिटी थी, उसको पूरा किया है। कानूनी प्रक्रिया के अंतर्गत ही कार्रवाई की जा रही है। त्योहारों और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पीएसी और आरएएफ मिली है। बता दें कि कैराना की सांसद इकरा हसन को पुलिस ने नजरबंद कर दिया था। सांसद इकरा हसन कलेक्ट्रेट मस्जिद के मुद्दे पर सहारनपुर जाने की तैयारी कर रही थीं। उनकी मां और पूर्व सांसद तबस्सुम हसन ने इस कार्रवाई की आलोचना की और कहा कि उनका परिवार जनता की सेवा के लिए प्रतिबद्ध है। सहारनपुर में मस्जिद गिराए जाने को लेकर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा, “देखिए, बात सिर्फ मस्जिद की नहीं है, देश के कानून और संविधान का उल्लंघन हो रहा है। आप यह साबित नहीं कर सकते कि जमीन आपकी है। खसरा रिकॉर्ड के आधार पर आपने दावा किया है कि यह सरकारी कलेक्ट्रेट की जमीन है। लेकिन कलेक्ट्रेट की जमीन आज भी वहीद खान और याकूब खान के नाम पर दर्ज है, जिनकी जमींदारी के भीतर मस्जिद बनाई गई थी। यह अभी भी कायम है।” इमरान मसूद ने आगे कहा, “मस्जिद वक्फ बोर्ड के साथ पंजीकृत है, लेकिन आपने वक्फ बोर्ड को पार्टी नहीं बनाया। जहां तक वक्फ बाय यूजर का सवाल है, मैं जेपीसी का सदस्य था, और वक्फ बाय यूजर स्थापित करता है कि यह एक मस्जिद है, वहां लगातार नमाज अदा की जाती रही है और ये सभी गतिविधियां होती रही हैं।

शिक्षक दिवस पर राहुल गांधी और खड़गे ने दी शुभकामनाएं, डॉ. एस राधाकृष्णन को किया नमन

नई दिल्ली। शिक्षक दिवस पर लोकसभा में नेता-प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने देश के सभी शिक्षकों को शुभकामनाएं दी और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को उनकी जयंती पर याद किया। राहुल गांधी ने फेसबुक पर पोस्ट करते हुए लिखा, “भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर उन्हें सादर नमन। राष्ट्रीय शिक्षक दिवस पर सभी गुरुजनों को हार्दिक शुभकामनाएं। अपने ज्ञान, सेवा और समर्पण से आप छात्रों का भविष्य संवारते हैं और देश की आने वाली पीढ़ियों को दिशा देते हैं। आपका योगदान अमूल्य है।” राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाया और पोस्ट में लिखा, “आज भारत की शिक्षा व्यवस्था हमारे सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। हमें मिलकर ऐसी व्यवस्था बनानी है, जहां हर छात्र को समान अवसर, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और एक उज्ज्वल भविष्य मिले।” वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, “शिक्षक ही लोगों की सोच को आकार देते हैं, उनमें अच्छे संस्कार डालते हैं और हमारे देश के भविष्य की नींव रखते हैं। शिक्षक दिवस पर हम उन सभी शिक्षकों का सम्मान करते हैं, जिनका ज्ञान, धैर्य और समर्पण पीढ़ियों को प्रेरित करता है। हम भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एस. राधाकृष्णन को भी श्रद्धांजलि देते हैं, जो एक महान दार्शनिक, शिक्षक और राजनेता थे। उनकी बुद्धिमत्ता हमेशा प्रेरणा देती रहेगी।” बता दें कि डॉ. राधाकृष्णन का योगदान शिक्षा के क्षेत्र में बहुत बड़ा रहा है। साल 1948 में उनकी अध्यक्षता में ‘विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग’ का गठन किया गया था, जिसने स्वतंत्र भारत में उच्च शिक्षा की रूपरेखा तैयार की और ‘विश्वविद्यालय अनुदान आयोग’ (यूजीसी) की स्थापना की मजबूत सिफारिश की थी। 1952 में वे भारत के पहले उपराष्ट्रपति बने और 1962 में देश के दूसरे राष्ट्रपति बने, लेकिन इसके बाद भी उनका जीवन बेहद सादा रहा। कहा जाता है कि जब वे राज्यसभा के सभापति थे, तो सदन में तीखी बहस होने पर वे अचानक संस्कृत के श्लोक या बाइबिल की पंक्तियां पढ़ने लगते थे, जिससे तनाव भरा माहौल तुरंत शांत हो जाता था। 1962 में जब उन्होंने राष्ट्रपति का पद संभाला, तो उनके कुछ पुराने छात्रों और दोस्तों ने 5 सितंबर को उनका जन्मदिन बड़े स्तर पर मनाने की इजाजत मांगी। इस पर उन्होंने बड़ी विनम्रता से जवाब दिया, जो उनके महान चरित्र का सबसे बड़ा सबूत है। उन्होंने कहा था, “मेरा जन्मदिन मनाने के बजाय, यदि 5 सितंबर को ‘शिक्षक दिवस’ के रूप में मनाया जाए, तो यह मेरे लिए गर्व की बात होगी।” तभी से हर साल 5 सितंबर को देशभर में शिक्षक दिवस मनाया जाता है।

सहारनपुर : मस्जिद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर नेताओं की प्रतिक्रिया, इकरा हसन बोलीं- हमारी आवाज दबाई नहीं जा सकती

सहारनपुर। सहारनपुर कलेक्ट्रेट के अंदर बनी एक मस्जिद पर शनिवार को प्रशासन की ओर से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई है। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में छह बुलडोजर लगाकर मस्जिद गिराई गई है। प्रशासन की ओर से यह कार्रवाई जिला अदालत के फैसले के बाद की गई है। इस मामले को लेकर नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आई है। कार्रवाई का विरोध कर रहीं कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन को सहारनपुर जाने से पहले उनके आवास पर रोक दिया गया। सांसद ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए सवाल उठाया कि क्या निर्वाचित जनप्रतिनिधि को अधिकारियों से मिलने से भी रोका जा सकता है। पुलिस से बातचीत करते हुए इकरा हसन का वीडियो सामने आया है। पुलिसकर्मी उनसे यात्रा न करने की अपील कर रहे हैं, जिस पर इकरा हसन ने पूछा कि हमको किस वजह से रोका जा रहा है। इस दौरान इकरा हसन और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी बातचीत भी हुई। इकरा हसन ने कहा कि उनका सवाल सरकार और प्रशासन से है कि क्या एक निर्वाचित सांसद को अपने क्षेत्र की जनता से जुड़े किसी विषय पर अधिकारियों से मिलना भी अपराध हो गया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि जनता की आवाज उठाने के लिए चुने जाते हैं और उन्हें रोककर उस आवाज को दबाया नहीं जा सकता। इस दौरान इकरा हसन की मां और पूर्व सांसद तबस्सुम हसन भी उनके आवास पर मौजूद रहीं। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उनका परिवार किसी दबाव से डरने वाला नहीं है और वे लोगों की सेवा के लिए राजनीति में हैं। सहारनपुर जाने से रोके जाने के बाद इकरा हसन ने भी स्पष्ट किया कि वह जनता से जुड़े मुद्दे पर अधिकारियों से बात करने के लिए जा रही थीं। उन्होंने कहा कि एक सांसद को इस तरह रोकना लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। वहीं, प्रशासन की कार्रवाई को देखते हुए कलेक्ट्रेट और आसपास के इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। मौके पर पुलिस के अलावा पीएसी और आरआरएफ के जवानों को तैनात किया गया। किसी भी व्यक्ति को मस्जिद के आसपास जाने की अनुमति नहीं दी गई। अधिकारियों के मुताबिक, कार्रवाई से पहले कानूनी प्रक्रिया के तहत नोटिस और अपील समेत सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी की जा चुकी हैं। सपा एमएलसी शाहनवाज खान ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, “पिछले महीने 17 तारीख को सिटी मजिस्ट्रेट की ओर से एक फैसला दिया गया था जिसमें इस मस्जिद को अवैध बताकर कुछ फाइन लगा दिया गया था। हमारे जिम्मेदार लोग कोर्ट गए और उनको स्टे मिला। इसके बाद स्थिति सामान्य चल रही थी। सिटी मजिस्ट्रेट को सही मानते हुए कार्रवाई कर दी गई। हायर कोर्ट में चैलेंज देने के लिए फैसले में 30 दिनों के लिए रिलीफ दी गई थी। आज अचानक बात सामने आ रहे हैं कि मस्जिद को शहीद किया जा रहा है।” सपा एमएलसी शाहनवाज खान ने कहा कि हम लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे तो दोनों दरवाजे बंद थे और वहां अलग-अलग अफवाहें उड़ रही थीं। उस वक्त वहां उतनी फोर्स नहीं थी, जितनी अब बताई जा रही है। मैंने जिलाधिकारी से बात की तो उन्होंने मुझे अपने आवास पर बुलाया। हम सभी लोगों ने डीएम से मुलाकात की और अपनी शंका जाहिर की। मेरी सबसे अपील है कि शहर की मोहब्बत को बचाना सबसे जरूरी है। जिलाधिकारी ने हम लोगों को आश्वासन दिया कि जो भी होगा वो कानून के दायरे में होगा। पूर्व सांसद हाजी फजलुर्रहमान ने भी प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि मस्जिद पक्ष जिला अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाने की तैयारी में था, लेकिन उससे पहले ही प्रशासन ने ध्वस्तीकरण शुरू कर दिया। सहारनपुर मंडल के डीआईजी अभिषेक सिंह के मुताबिक, जिला अदालत से अपील खारिज होने के बाद प्रशासन ने मस्जिद हटाने की कार्रवाई शुरू की। उन्होंने कहा कि कार्रवाई से पहले नोटिस, सुनवाई और अपील की प्रक्रिया पूरी की गई है और इसी के बाद ध्वस्तीकरण का निर्णय लिया गया। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से पहले शुक्रवार रात यह अफवाह फैल गई थी कि प्रशासन मस्जिद को गिराने पहुंचने वाला है। इसके बाद बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए। सूचना मिलने पर प्रशासन और पुलिस की टीम वहां पहुंची और लोगों को हटाया। बता दें कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को लेकर पिछले कुछ समय से विवाद चल रहा था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 10 फरवरी 2025 को बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने जिलाधिकारी से शिकायत कर मस्जिद को सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण बताते हुए कार्रवाई की मांग की थी। शिकायत में मस्जिद परिसर में बने कमरों और डाकघर से किराया वसूले जाने का भी आरोप लगाया गया था। इसके बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर मामले की जांच कराई गई। प्रशासन का दावा है कि जांच में निर्माण सरकारी जमीन पर पाया गया। इसके बाद 24 मार्च 2025 को नगर मजिस्ट्रेट की अदालत में कार्रवाई के लिए याचिका दाखिल की गई। नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने 16 जुलाई 2026 को मस्जिद को अवैध निर्माण मानते हुए उसे हटाने का आदेश दिया। साथ ही कब्जेदारों से 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति वसूलने के निर्देश दिए गए और उन्हें 30 दिन का समय दिया गया। मस्जिद पक्ष ने नगर मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती देते हुए 20 जुलाई को जिला अदालत का रुख किया। मामले की सुनवाई के बाद 2 सितंबर को जिला जज सतेंद्र कुमार की अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए मस्जिद पक्ष की अपील खारिज कर दी।

शिकायतों के बाद एक्शन में खाद्य सुरक्षा विभाग, बेंगलुरु क्लब और ब्लिंकिट सुविधा केंद्र का किया निरीक्षण

बेंगलुरु। फूड सेफ्टी को लेकर शिकायत मिलने के बाद अधिकारियों ने पिछले 24 घंटों में बेंगलुरु के एक क्लब और मेंगलुरु में एक ऑनलाइन ग्रॉसरी रिटेल फैसिलिटी पर छापेमारी की है। इस दौरान एक्सपायर्ड फूड प्रोडक्ट्स जब्त किए गए और स्टोरेज एरिया को अस्थायी रूप से सील कर दिया गया। बेंगलुरु में अधिकारियों ने 3 सितंबर को डॉलर्स कॉलोनी के पास सहकारनगर स्थित चेयरमैन्स क्लब में स्पेशल इंस्पेक्शन किया। जांच में कई गड़बड़ियां मिलीं। क्लब में 40 किलो एक्सपायर्ड मिर्च और बिना सही लेबल वाले फूड प्रोडक्ट्स पाए गए। अधिकारियों को किचन में अनधिकृत आर्टिफिशियल कलर भी मिले और किचन की हालत बेहद अस्वच्छ पाई गई। साथ ही वेज और नॉन-वेज फूड प्रोडक्ट्स को एक साथ स्टोर किया जा रहा था, जिससे फूड सेफ्टी और हाइजीन को लेकर गंभीर चिंता पैदा हुई। एक्सपायर्ड प्रोडक्ट्स को जब्त कर लिया गया और क्लब की किचन को बंद कर सील कर दिया गया। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। वहीं मेंगलुरु में फूड सेफ्टी अधिकारियों ने फलनीर स्क्वायर में चल रही ब्लिंकिट की ऑनलाइन रिटेल फैसिलिटी का निरीक्षण किया। यह कार्रवाई एक उपभोक्ता की शिकायत के बाद की गई, जिसमें कहा गया था कि प्लेटफॉर्म से खरीदे गए अंडे टूटे हुए थे और एक अंडे के अंदर कथित तौर पर कीड़ा मिला था। शिकायत स्वास्थ्य मंत्री यूटी खादर को सौंपी गई थी, जिसके बाद अधिकारियों ने फैसिलिटी का निरीक्षण किया। जांच के दौरान अधिकारियों को वहां टूटे हुए अंडों वाले पैकेट मिले। संबंधित कर्मचारियों को तुरंत उन प्रभावित अंडों के पैकेट को हटाने और नष्ट करने का निर्देश दिया गया। एहतियात के तौर पर और फूड स्टोरेज एरिया की पूरी तरह से सफाई और सैनिटाइजेशन सुनिश्चित करने के लिए स्टोरेज रूम को अस्थायी रूप से बंद कर सील कर दिया गया। खाद्य सुरक्षा विभाग ब्लिंकिट फैसिलिटी को नोटिस जारी करेगा और इस घटना के बारे में मैनेजमेंट से जवाब मांगेगा। इंस्पेक्शन के निष्कर्षों और कंपनी के जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग द्वारा खाद्य सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करने और तय हाइजीन और स्टोरेज नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ एक्शन लेने के प्रयासों के तहत की गई है।

नेपाल में बाढ़ के 9 दिन बाद बचावकर्मियों को सुरंग से दो लोगों को सुरक्ष‍ित न‍िकाला

काठमांडू। नेपाल में पिछले हफ्ते आई विनाशकारी बाढ़ के बाद बचावकर्मियों ने शुक्रवार को त्रिशूली 3-ए हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से दो लोगों को जिंदा निकाला। इसके बाद यह उम्मीद जगी है कि अंदर अभी और लोग भी फंसे हो सकते हैं। त्रिशूली नदी क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ को नौ दिन बीत चुके हैं। बाढ़ अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को बहा ले गई थी। इस दौरान दर्जनों जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचा। इसी बीच, त्रिशूली 3-ए हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले दो कर्मचारियों को जिंदा बचा लिया गया। ऊर्जा, जल संसाधन और सिंचाई मंत्री के सचिवालय ने बताया कि बचाए गए लोगों में काठमांडू के रहने वाले 45 वर्षीय कबीर महर्जन और सप्तरी जिले के 30 वर्षीय संजय साह शामिल हैं। महर्जन अपर त्रिशूली 3-ए की हाइड्रोपावर ऑटोमेशन परियोजना में सुपरवाइजर हैं, जबकि साह फोरमैन के रूप में काम कर रहे थे। सचिवालय के अनुसार, दोनों को हेलिकॉप्टर से काठमांडू के अस्पताल ले जाया गया। शुक्रवार को सबसे पहले संजय साह को बचाया गया और उसके बाद कबीर महर्जन को सुरक्षित निकाला गया। इस सफल बचाव अभियान से पहले बचावकर्मियों को सुरंग के भीतर से लोगों की आवाजें सुनाई दी थीं। इसके बाद अंदर फंसे लोगों से संपर्क भी स्थापित कर लिया गया था। आवाज सुनने के बाद नेपाल सेना और सशस्त्र पुलिस बल ने उन्हें निकालने की कोशिशें और तेज कर दीं। लगातार की गई मेहनत के बाद आखिरकार यह प्रयास सफल रहा। 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ ने त्रिशूली नदी घाटी में भारी तबाही मचाई थी। नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (एनडीआरआरएमए) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस आपदा में कम से कम 1,252 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि गुरुवार शाम तक 5,053 लोग लापता थे। बाढ़ की वजह से 60 मेगावाट की अपर त्रिशूली 3ए परियोजना समेत कई जलविद्युत परियोजनाओं और महत्वपूर्ण सड़क संपर्क मार्गों को भी नुकसान पहुंचा। तब से बचाव दल कठिन परिस्थितियों में उन लोगों की तलाश कर रहे हैं जो सुरंगों और अन्य ढांचों के भीतर फंस गए हो सकते हैं। मंत्री के सचिवालय के अनुसार, नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और चीनी विशेषज्ञों की संयुक्त टीम मौके पर तैनात है। बचाव कार्य में पांच खुदाई मशीनें (एक्सकेवेटर), कंप्रेसर और ब्रेकर लगाए गए हैं। सुरंग तक पहुंच बनाने के लिए ड्रिलिंग और अन्य खुदाई का काम भी तेज कर दिया गया है। सुरंग के अंदर एक बड़ी चट्टान मिली थी, जिसे हटाने के लिए विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया, ताकि रास्ता साफ हो सके और खोज एवं बचाव अभियान आगे बढ़ाया जा सके।

पीएम मोदी ने इटली की सबसे लंबे समय तक पीएम रहने पर मेलोनी को दी बधाई, बोले-यह बहुत बड़ी उपलब्धि

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को बधाई दी। मेलोनी हाल ही में इटली के युद्धोत्तर इतिहास की सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाली प्रधानमंत्री बन गई हैं। मोदी ने उनके उज्ज्वल भविष्य और आगे की सफलता के लिए शुभकामनाएं भी दीं। प्रधानमंत्री मोदी ने मेलोनी की इस उपलब्धि पर उन्हें बधाई देते हुए कहा कि उनकी सरकार ने भारत और इटली के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने दोनों देशों के लोगों के लिए बेहतर और समृद्ध भविष्य बनाने के लिए सहयोग जारी रखने की बात भी कही। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पर पोस्ट में लिखा, “मेरी मित्र प्रधानमंत्री मेलोनी को इटली के युद्धोत्तर इतिहास की सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाली प्रधानमंत्री बनने पर हार्दिक बधाई। यह उपलब्धि उनके नेतृत्व में इटली की जनता के विश्वास और भरोसे को दर्शाती है।” उन्होंने कहा, “उनकी दोस्ती ने भारत-इटली विशेष रणनीतिक साझेदारी को मजबूत बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। मैं दोनों देशों के लोगों के लिए समृद्ध भविष्य बनाने हेतु हमारे करीबी सहयोग को आगे बढ़ाने का इंतजार कर रहा हूं। आने वाले वर्षों में उनकी निरंतर सफलता के लिए मेरी शुभकामनाएं।” गौरतलब है कि जॉर्जिया मेलोनी की सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी के कार्यकाल के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए इटली गणराज्य के युद्धोत्तर इतिहास की सबसे लंबे समय तक चलने वाली सरकार का दर्जा हासिल किया है। मेलोनी ने 22 अक्टूबर 2022 को इटली की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में पद संभाला था। शुक्रवार को उनकी सरकार ने सत्ता में 1,413 दिन पूरे कर लिए। इससे पहले जुलाई में मेलोनी ने भी प्रधानमंत्री मोदी को भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी थी। उन्होंने दोनों देशों के लोगों के लिए नए अवसर बनाने के लिए साथ काम करने की इच्छा भी जताई थी। उस समय सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्‍स’ पर मेलोनी ने लिखा था, “पीएम मोदी को बधाई, जो आज भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं। हाल के हफ्तों में रोम में उनसे फिर मुलाकात करना खुशी की बात रही। हमने मिलकर एक ऐसी विशेष रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत की है, जो भविष्य को ध्यान में रखते हुए हमारे देशों और हमारे लोगों के लिए नए अवसर पैदा करेगी।” मई में प्रधानमंत्री मोदी दो दिन की आधिकारिक यात्रा पर इटली गए थे। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और राष्ट्रपति सर्जियो मातारेला से मुलाकात की थी। बैठक के दौरान मोदी और मेलोनी ने दोनों देशों के रिश्तों को विशेष रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने का फैसला किया। दोनों नेताओं ने उच्च स्तरीय संपर्कों में आई तेजी का स्वागत किया और बहुपक्षीय कार्यक्रमों के दौरान भी नेताओं की वार्षिक बैठकें आयोजित करने पर सहमति जताई। साथ ही, मंत्रिस्तरीय और संस्थागत स्तर पर नियमित बैठकों को जारी रखने का भी फैसला किया गया। इसी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने मेलोनी को एक हल्का-फुल्का और अनोखा उपहार भी दिया था। उन्होंने उन्हें “मेलोडी” टॉफी का एक पैकेट भेंट किया था। दोनों नेताओं के बीच हंसी-मजाक भरा यह पल बाद में मेलोनी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर भी साझा किया। उन्होंने वहां इस उपहार का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी का धन्यवाद किया। वीडियो साझा करते हुए मेलोनी ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी हमारे लिए एक उपहार लाए हैं, एक बहुत ही अच्छी टॉफी, मेलोडी। इस उपहार के लिए धन्यवाद।