बाराबंकी में पांच मरीज मिलने के बाद स्वाइन फ्लू को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

बाराबंकी। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में स्वाइन फ्लू के पांच मरीज मिलने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। इनमें एक जेल अधिकारी भी शामिल हैं। सभी संक्रमित मरीजों का इलाज लखनऊ में चल रहा है और उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है। मामले सामने आने के बाद जिला स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी कर दिया है। बाराबंकी के डिप्टी सीएमओ डॉ. लव गुप्ता ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि स्वास्थ्य विभाग स्वाइन फ्लू को लेकर पूरी तरह गंभीर है और हर स्तर पर तैयारी पूरी कर ली गई है। उन्होंने कहा, “हम पूरी तरह से तैयार हैं और सभी सीएचसी पर दवाइयां उपलब्ध हैं। जिला अस्पताल में बच्चों के टीकाकरण के लिए भी व्यवस्था की गई है। इसके अलावा सभी डॉक्टरों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं और सभी जरूरी एडवाइजरी जारी कर दी गई है।” डॉ. गुप्ता ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है, यह सामान्य फ्लू जैसे लक्षण वाला बुखार है जो ठीक हो जाता है। उन्होंने बचाव के उपाय बताते हुए कहा कि लोग भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें, रुमाल और मास्क का इस्तेमाल करें, खास तौर पर जिन लोगों को खांसी या जुकाम हो रहा है, वे विशेष सावधानी बरतें। उन्होंने जिले में मिले मामलों की जानकारी देते हुए बताया कि बाराबंकी में अभी दो मरीज बिंदौरा और अर्बन बाराबंकी क्षेत्र में मिले हैं, जिनका निरीक्षण किया जा चुका है और उनका उपचार किया जा रहा है। उनकी स्थिति सामान्य है और ज्यादा गंभीर नहीं है, लेकिन उन्हें पूरी निगरानी में रखा गया है। इसके अलावा दो मरीज हैदरगढ़ और दरियाबाद में मिले हैं, जो लखनऊ में ही रहते थे, उनका भी इलाज चल रहा है और उनकी स्थिति स्थिर है। आज एक नया मामला मसौली में सामने आया है, जिसकी टीम जांच कर रही है और उसके आसपास के संपर्क में आए लोगों की भी जांच की जाएगी। डॉ. गुप्ता ने बताया कि जिला प्रशासन की ओर से भी सभी को एडवाइजरी जारी कर दी गई है। जिला चिकित्सालय और सभी सीएचसी पर स्वाइन फ्लू के लिए अलग से वार्ड की व्यवस्था की जा रही है। जिन लोगों में बुखार, खांसी, जुकाम जैसे सामान्य लक्षण दिख रहे हैं, अगर उनमें स्वाइन फ्लू जैसे लक्षण मिलते हैं तो उनकी टेस्टिंग और इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
एडोब ने अनिल चक्रवर्ती को नया सीईओ नियुक्त किया, शांतनु नारायण संभालेगें एग्जीक्यूटिव चेयरमैन का पद

नई दिल्ली। सॉफ्टवेयर कंपनी एडोब ने अपने नए प्रेसिडेंट और मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में अनिल चक्रवर्ती को नियुक्त करने का ऐलान किया है। वे शांतनु नारायण की जगह लेंगे। वर्तमान में अनिल चक्रवर्ती एडोब के कस्टमर एक्सपीरियंस ऑर्केस्ट्रेशन बिजनेस और वर्ल्डवाइड फील्ड ऑपरेशंस के प्रेसिडेंट हैं। वे 1 दिसंबर 2026 से निदेशक मंडल में भी शामिल होंगे। वहीं शांतनु नारायण अब एग्जीक्यूटिव चेयरमैन की भूमिका में जाएंगे। वे चक्रवर्ती के साथ मिलकर काम करेंगे ताकि ट्रांजिशन सुचारू रूप से हो सके और एडोब के ट्रांसफॉर्मेशन को सपोर्ट मिल सके। इस नियुक्ति पर शांतनु नारायण ने कहा, “एडोब के सामने असीम संभावनाएं हैं, क्योंकि हमारा नए मार्केट कैटेगरी और वर्ल्ड-क्लास प्रोडक्ट बनाने का ट्रैक रिकॉर्ड रहा है। अनिल एक अनुभवी ट्रांसफॉर्मेशनल लीडर हैं जो मूल्यों, ईमानदारी और बिजनेस की गहरी समझ के साथ नेतृत्व करते हैं। उनका व्यापक ग्राहकों के लिए कैटेगरी-डिफाइनिंग प्रोडक्ट बनाने का सिद्ध रिकॉर्ड रहा है।” उन्होंने कहा, “मुझे पूरा विश्वास है कि एआई के इस युग में एडोब की ग्रोथ के लिए अनिल ही सही व्यक्ति हैं। मैं एग्जीक्यूटिव चेयर के रूप में उनके साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हूं।” नए सीईओ अनिल चक्रवर्ती ने कहा कि वे क्रिएटिविटी, प्रोडक्टिविटी और कस्टमर एक्सपीरियंस के लिए एजेंटिक सॉफ्टवेयर के अगले युग में एडोब के नेतृत्व को बढ़ाने के लिए उत्साहित हैं। उन्होंने कहा, “एडोब का इतिहास भविष्य को बनाने का रहा है, न सिर्फ अपनी टेक्नोलॉजी के जरिए बल्कि अपने लोगों और ग्राहकों के प्रति प्रतिबद्धता के जरिए भी। शांतनु के असाधारण नेतृत्व में बीते दशकों में एडोब के बिजनेस मॉडल में बदलाव आया है, जिससे हम ग्रोथ के अगले अध्याय के लिए अच्छी स्थिति में हैं।” बता दें कि अनिल चक्रवर्ती जनवरी 2020 में एडोब से जुड़े थे। तब वे एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट और डिजिटल एक्सपीरियंस बिजनेस के जनरल मैनेजर बने थे। सितंबर 2020 में उन्हें वर्ल्डवाइड फील्ड ऑपरेशंस की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी दी गई। दिसंबर 2021 में उन्हें डिजिटल एक्सपीरियंस और वर्ल्डवाइड फील्ड ऑपरेशंस का प्रेसिडेंट बनाया गया। इससे पहले अनिल चक्रवर्ती चार साल तक इनफॉर्मैटिका में सीईओ के रूप में काम कर चुके हैं, जो एंटरप्राइज क्लाउड डेटा मैनेजमेंट की एक बड़ी कंपनी है।
नोएडा : जन्माष्टमी पर 600 से अधिक पुलिसकर्मी संभालेंगे व्यवस्था, इस्कॉन मंदिर के आसपास ट्रैफिक डायवर्जन

नोएडा। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर शुक्रवार को नोएडा के विभिन्न मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। जन्माष्टमी पर मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए पुलिस और ट्रैफिक विभाग ने सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था को लेकर व्यापक तैयारियां की हैं। खासतौर पर सेक्टर-33 स्थित इस्कॉन मंदिर में भारी भीड़ उमड़ने की संभावना को देखते हुए मंदिर के आसपास ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जन्माष्टमी के मद्देनजर शहर के प्रमुख मंदिरों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। 600 से अधिक पुलिसकर्मियों को सुरक्षा ड्यूटी में लगाया गया है। इनमें करीब डेढ़ कंपनी पीएसी, 20 निरीक्षक और 300 से अधिक पुलिसकर्मी शामिल हैं। मंदिरों के आसपास पुलिस बल की तैनाती के साथ-साथ भीड़ नियंत्रण और यातायात को सुचारु बनाए रखने के लिए अतिरिक्त व्यवस्था की गई है। सेक्टर-33 स्थित इस्कॉन मंदिर में जन्माष्टमी पर सबसे अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई गई है। इसे देखते हुए ट्रैफिक पुलिस ने मंदिर के आसपास वाहनों के आवागमन में बदलाव किया है। एटीपीसी अंडरपास की ओर से गिझौड़ चौराहे और गिझौड़ चौक से एटीपीसी की ओर जाने वाले वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित रहेगा। गिझौड़ से अट्टा अंडरपास की ओर जाने वाले वाहन होशियारपुर तिराहे और संबंधित वैकल्पिक मार्गों से होकर निकल सकेंगे। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एडोबी बिल्डिंग के पास पार्किंग की व्यवस्था की गई है। वहीं, वीवीआईपी वाहनों के लिए सेक्टर-33/34 तिराहे से प्रवेश कर शिल्प हाट की पार्किंग में वाहन खड़े करने की व्यवस्था की गई है। ट्रैफिक पुलिस ने सेक्टर-31/25 चौराहे से सेक्टर-60, सेक्टर-62 और इंदिरापुरम की ओर जाने वाले वाहनों के लिए भी वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किए हैं। ऐसे वाहन स्पाइस मॉल, एडोबी चौक और सेक्टर-22, 23 व 54 होते हुए गिझौड़ की ओर जा सकेंगे। इससे मंदिर के आसपास यातायात का दबाव कम करने की कोशिश की जाएगी। जन्माष्टमी के दौरान इस्कॉन मंदिर के अलावा शहर के अन्य प्रमुख मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ पहुंचने की संभावना है। पुलिस ने सभी प्रमुख मंदिरों में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए हैं। मंदिर परिसरों के आसपास पुलिस बल तैनात रहेगा और आवश्यकता के अनुसार वाहनों का मार्ग परिवर्तित किया जाएगा। सेक्टर-19 स्थित सनातन धर्म मंदिर के आसपास भी जरूरत पड़ने पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया जाएगा। डीएम चौक से राय रेजीडेंसी और टेलीफोन एक्सचेंज की ओर जाने वाले यातायात को नियंत्रित किया जाएगा। इसी तरह सेक्टर-2 स्थित मंदिर के आसपास संदीप पेपर मिल चौराहे से गोलचक्कर चौक के बीच जरूरत के अनुसार वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित किया जा सकता है। पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि जन्माष्टमी के दौरान मंदिरों के आसपास अनावश्यक रूप से वाहन न ले जाएं और निर्धारित पार्किंग स्थलों का ही इस्तेमाल करें।
ऑस्ट्रेलिया: सिडनी में मिला बर्ड फ्लू के खतरनाक एच5एन1 स्ट्रेन का पहला मामला

सिडनी। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में बर्ड फ्लू के खतरनाक एच5एन1 स्ट्रेन का पहला कन्फर्म केस रिपोर्ट किया गया है। न्यू साउथ वेल्स (एनएसडब्ल्यू) की कृषि मंत्री तारा मोरियार्टी ने पत्रकारों को बताया कि अगस्त के आखिर में सिडनी के नॉर्दर्न बीच में मिले एक ‘ग्रेटर क्रेस्टेड टर्न’ (एक तरह का समुद्री पक्षी) में टेस्टिंग के दौरान एच5एन1 स्ट्रेन का पता चला। जून में इस खतरनाक स्ट्रेन के ऑस्ट्रेलिया की मुख्य भूमि पर पहुंचने के बाद सिडनी में यह पहला कन्फर्म केस है। मोरियार्टी ने कहा कि जिन सिडनी निवासियों के पास पालतू पक्षी या मुर्गियां हैं, उन्हें जंगली पक्षियों के संपर्क में आने से बचने के लिए सावधानी बरतनी चाहिए और जिनके पास कुत्ते हैं, उन्हें यह निश्चित करना चाहिए कि वे मरे हुए जानवरों के शव न खाएं या जंगली पक्षियों का पीछा न करें। नॉर्दर्न बीचेस काउंसिल की स्थानीय मेयर, सू हीन्स ने कहा कि यह केस शायद कई केसों में से पहला होगा और इस इलाके को इस खतरनाक स्ट्रेन के संभावित विनाशकारी असर के लिए तैयार रहना चाहिए, जिसने दुनिया भर में लाखों पक्षियों की जान ली है। सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, संघीय सरकार के ताजा डेटा के मुताबिक, बुधवार तक पूरे ऑस्ट्रेलिया में एच5एन1 बर्ड फ्लू के 468 कन्फर्म मामले सामने आए हैं, जिनमें से 20 मामले एनएसडब्ल्यू में हैं। एनएसडब्ल्यू सरकार ने कहा कि राज्य में कमर्शियल पोल्ट्री झुंडों, कैद में रखे गए पक्षियों या मवेशियों में इसका कोई मामला नहीं मिला है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, एच5एन1 कई इन्फ्लूएंजा वायरस में से एक है जो पक्षियों में ‘एवियन इन्फ्लूएंजा’ (या बर्ड फ्लू) नाम की बहुत तेजी से फैलने वाली सांस की बीमारी का कारण बनता है। इंसानों सहित स्तनधारी जीवों में भी इसके संक्रमण के मामले दर्ज किए गए हैं। एच5एन1 इन्फ्लूएंजा वायरस का संक्रमण इंसानों में कई तरह की बीमारियां पैदा कर सकता है, जो हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकती हैं और कुछ मामलों में यह जानलेवा भी हो सकता है। इसके मुख्य लक्षण सांस से जुड़े होते हैं, लेकिन कंजंक्टिवाइटिस (आंख आना) और सांस से न जुड़े अन्य लक्षण भी देखे गए हैं। ऐसे लोगों में भी ए(एच5एन1) वायरस का पता चला है जो संक्रमित जानवरों या उनके वातावरण के संपर्क में आए थे, लेकिन जिनमें कोई लक्षण नहीं दिखे थे। एच5एन1 एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस का ‘गूज/ग्वांगडोंग-लीनिएज’ (वंश) सबसे पहले 1996 में सामने आया था और तब से यह पक्षियों में बीमारी फैला रहा है। 2020 के बाद से, इन वायरस के एक वैरिएंट के कारण कई देशों में जंगली पक्षियों और पोल्ट्री की बहुत बड़ी संख्या में मौतें हुई हैं। यह वायरस सबसे पहले अफ्रीका, एशिया और यूरोप में फैला, फिर 2021 में उत्तरी अमेरिका और 2022 में मध्य और दक्षिण अमेरिका तक पहुंच गया। 2021 से 2022 के बीच, यूरोप और उत्तरी अमेरिका में एवियन इन्फ्लूएंजा का सबसे बड़ा और सबसे लंबा प्रकोप देखा गया, जिसमें जंगली पक्षियों में यह वायरस असामान्य रूप से लंबे समय तक बना रहा। 2022 से, इन्फ्लूएंजा ए(एच5) – जिसमें इन्फ्लूएंजा ए(एच5एन1) भी शामिल है – वायरस के कारण स्तनधारी जीवों में भी जानलेवा प्रकोप की खबरें बढ़ रही हैं। संभावना है कि ऐसे और भी प्रकोप हुए हों जिनका पता नहीं चला या जिनकी रिपोर्ट नहीं की गई। जमीन और समुद्र, दोनों जगह रहने वाले स्तनधारी जीव इससे प्रभावित हुए हैं। इनमें फर के लिए पाले जाने वाले जानवर, सील और सी लायन शामिल हैं। साथ ही, लोमड़ी, भालू, ऊदबिलाव, रैकून, बिल्ली, कुत्ते, गाय, बकरी और अन्य जंगली व पालतू जानवरों में भी इसका पता चला है।
अभिनेत्री होने के नाते हर प्रोजेक्ट में बेस्ट देने की कोशिश करती हूं : अश्मेता बख्शी

मुंबई। अभिनेत्री अश्मेता बख्शी इन दिनों टेलीविजन सीरीज ‘108 बेस हॉस्पिटल- उरी’ में नजर आ रही हैं। अभिनेत्री ने बताया कि उनकी अभिनय की दुनिया में उनका सफर रोलर-कोस्टर राइड की तरह रहा है। अभिनेत्री का मानना है कि जब आप किसी भी फील्ड में काम करते हैं, तो उतार-चढ़ाव होना आम बात है। उन्होंने बताया, “मैंने बहुत सारे रोल किए हैं और एक एक्टर के तौर पर, मैं इतने अलग-अलग तरह के किरदार निभाकर खुद को खुशकिस्मत महसूस करती हूं। यह एक खूबसूरत सफर रहा है।” अभिनेत्री से आईएएनएस ने सवाल किया, “आपने फिल्म, वेब सीरीज और टेलीविजन में काम किया है, तो आपको इन मीडिया में क्या फर्क लगता है और आपको कौन सा माध्यम ज्यादा सही लगता है?” अभिनेत्री ने इस सवाल का जवाब देते हुए कहा, “मीडिया कोई भी हो करनी तो आपको एक्टिंग ही है, हमें जो लिखा मिलता है बस उसी में बेस्ट देने की कोशिश करते हैं। ऐसा कभी नहीं होता कि अगर आप कोई फिल्म कर रहे हैं, तो आप ज्यादा मेहनत करेंगे और अगर आप कोई सीरियल कर रहे हैं, तो आप कम मेहनत करेंगे।” अभिनेत्री ने आगे कहा, ” मुझे लगता है कि मेकर्स को फर्क पता होता है। यह मेकिंग से आता है, चाहे वह डायलॉग्स में हो, किसी चीज को लिखने के तरीके में या खुद मीडियम में, लेकिन एक आर्टिस्ट के लिए, यह बस वह काम है जो वे कर रहे हैं।” अभिनेत्री का कहना है कि वह अभिनेत्री होने के नाते किसी भी प्रोजेक्ट में अपना बेस्ट देने की कोशिश करती हैं। फिर, चाहे वह फिल्म, सीरियल हो या वेब सीरीज। अभिनेत्री अश्मिता बख्शी टेलीविजन सीरीज ‘108 बेस हॉस्पिटल – उरी’ में आर्मी मेजर/नर्स अनीता सोलंकी के किरदार में नजर आ रही हैं, जो युद्ध या संघर्ष वाले क्षेत्र में तैनात सैन्य डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ का हिस्सा हैं। उनके साथ स्मिता बंसल भी शो में नर्स की भूमिका निभा रही हैं। इस प्रोजेक्ट में उनके साथ एरिका फर्नांडिस और शहीर शेख जैसे कलाकार भी नजर आ रहे हैं। यह शो कलर्स टीवी और जियोहॉटस्टार पर प्रसारित होता है।
सिर्फ पूजा ही नहीं, राम मंदिर से हो समाज सेवा; सीईओ से ईमानदारी की उम्मीद : अनिरुद्धाचार्य

मथुरा। कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने राम मंदिर के नए सीईओ जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने शुक्रवार को आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि यह अच्छी बात है और अब उन्हें जो जिम्मेदारी मिली है, उम्मीद है कि वह पूरी ईमानदारी के साथ अपना काम करेंगे। उन्होंने कहा कि भगवान से भी यही प्रार्थना है कि वह अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभाएं। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में मंदिर केवल पूजा-पाठ के लिए नहीं बनाए जाते, बल्कि इनके माध्यम से समाज के लिए कई तरह के काम किए जाते हैं। मंदिरों से गुरुकुल चलें, वेदों का प्रचार हो, गौशालाएं संचालित हों, गायों की रक्षा हो और सनातन संस्कृति का प्रचार-प्रसार हो, यही मंदिरों के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल रहा है। उन्होंने अपने गौरी गोपाल मंदिर का उदाहरण देते हुए कहा कि यह एक छोटा-सा मंदिर है, लेकिन यहां से कई सामाजिक सेवाएं संचालित हो रही हैं। उनके अनुसार, मंदिर से 175 बच्चे पढ़ रहे हैं, गौशाला में करीब 400 गायें हैं और 150 से ज्यादा नंदी हैं। इसके अलावा रोजाना हजारों लोगों के लिए अखंड रसोई के माध्यम से भोजन की व्यवस्था की जाती है। उन्होंने बताया कि यहां कक्षा एक से 12वीं तक सीबीएसआई बोर्ड का एक विद्यालय भी बनाया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने की योजना है। अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि अगर एक छोटे से मंदिर के माध्यम से इतने बड़े स्तर पर सामाजिक कार्य किए जा सकते हैं, तो राम मंदिर के माध्यम से इससे कहीं बड़े स्तर पर समाज के हित में काम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मंदिर से मिलने वाले धन का इस्तेमाल वेदों के प्रचार, गुरुकुलों के निर्माण, गौसेवा और राष्ट्रहित से जुड़े सामाजिक कार्यों में किया जाना चाहिए। उन्होंने मंदिर के धन से सेना को आर्थिक रूप से मजबूत करने की बात पर भी अपनी राय रखी। उनका कहना है कि अगर मंदिर के माध्यम से सेना को आर्थिक रूप से मजबूत किया जाए या राष्ट्रहित में उसकी मदद की जाए, तो यह भी एक अच्छा कार्य हो सकता है। हालांकि, उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि समय के साथ मंदिरों के उद्देश्य और उनकी भूमिका में बदलाव आया है और अब इनके उद्देश्य क्या रह गए हैं, यह भगवान ही जाने। चंपत राय को ट्रस्ट से बाहर किए जाने और उनकी जगह गोविंद देव गिरी को नया महासचिव बनाए जाने पर उन्होंने कहा कि वह उस बैठक में मौजूद नहीं थे, जिसमें किसी को रखने या हटाने का फैसला लिया गया। इसलिए इस मामले में वह किसी के बारे में कुछ नहीं कह सकते। उनसे इस फैसले को लेकर कोई राय नहीं ली गई थी। अगर उनसे राय मांगी जाती, तो वह जरूर बताते कि किसी को हटाने या रखने की वजह क्या होनी चाहिए। वहीं, इस दौरान जन्माष्टमी को लेकर अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि यह भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य का उत्सव है और इस दिन हर किसी को खुशी मनानी चाहिए। भगवान के आगमन के अवसर पर लोगों को अपने घरों में तैयारी करनी चाहिए, सुबह स्नान करके पूजा करनी चाहिए और शाम को भगवान का अभिषेक कर प्रेम और श्रद्धा के साथ जन्माष्टमी मनानी चाहिए। उन्होंने कीर्तन और भगवान के नाम का जाप करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि समय के साथ त्योहार मनाने के तरीके जरूर बदले हैं, लेकिन जन्माष्टमी का महत्व नहीं बदला। आज लोगों के पास जितना समय होता है, वे उसी के अनुसार उत्सव में शामिल होते हैं। किसी के पास ज्यादा समय है तो वह भव्य आयोजन करता है और किसी के पास कम समय है तो वह अपने घर में ही पूजा करके भगवान का जन्मोत्सव मनाता है। आरक्षण के मुद्दे पर भी अनिरुद्धाचार्य ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि जब तक किसी व्यक्ति को जरूरत है, तब तक उसे सहायता मिलनी चाहिए। लेकिन अगर कोई व्यक्ति पढ़-लिखकर आगे बढ़ गया है, कमाने लगा है और आर्थिक रूप से सक्षम हो गया है, तो उसे मिलने वाली सहायता ऐसे लोगों तक पहुंचनी चाहिए जिन्हें वास्तव में उसकी जरूरत है। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति गरीबी रेखा से ऊपर आ गया है और उसे अब उस सहायता की आवश्यकता नहीं है, तो उसका लाभ गरीबों को दिया जाना चाहिए।
मध्य प्रदेश: इंदौर में पानी की टंकी में नवविवाहित महिला का शव मिला, हिरासत में पति

इंदौर। पुलिस ने शुक्रवार को बताया कि प्रेम विवाह के महज 25 दिन बाद इंदौर में एक नवविवाहित महिला अपने घर के बाहर पानी की टंकी में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाई गई। पुलिस रिकॉर्ड में मृतक की पहचान वंदना कुशवाहा के रूप में हुई है। गुरुवार को राउ पुलिस स्टेशन क्षेत्र के नेहरू नगर इलाके में एक पानी की टंकी में मृतक का शव मिला था। पड़ोसियों की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने शव बरामद किया और उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने बताया कि महिला के शरीर पर चोट के निशान मिले हैं। उसके पति उपेंद्र पटेल और देवर को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। एसीपी निधि सक्सेना ने कहा, “प्रथम दृष्टया यह मामला हत्या का प्रतीत होता है। हालांकि, मौत का सटीक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा।” पुलिस के मुताबिक, वंदना और पटेल पहले नेहरू नगर में रहते थे। बाद में उनका परिवार राजनगर में एक किराए के मकान में शिफ्ट हो गया। बताया जाता है कि पटेल की नशे की लत की समस्या के कारण ऐसा हुआ। इसके बाद 11 अगस्त को दोनों ने प्रेम विवाह कर लिया और वंदना पटेल के घर में उनके साथ रहने लगीं। पुलिस ने बताया कि वंदना के परिवार ने चंदन नगर पुलिस स्टेशन में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बाद में उसका बयान दर्ज किया गया और चूंकि वह बालिग थी, उसने पटेल के साथ रहने की इच्छा जताई। उसके परिवार ने पुलिस को यह भी बताया कि पटेल की नशे की लत को लेकर दंपति के बीच अक्सर झगड़े होते थे। यह घटना गुरुवार दोपहर को तब सामने आई जब पड़ोसियों ने कथित तौर पर वंदना के घर के अंदर से चीखने की आवाज सुनी। पुलिस ने बताया कि कुछ ही देर बाद पटेल बाहर आया और पड़ोसियों ने उसकी कमीज पर खून के धब्बे देखे। जब घर में लंबे समय तक कोई गतिविधि नहीं हुई, तो पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी। सक्सेना ने बताया, “पुलिस मौके पर पहुंची और घर के बाहर पानी की टंकी से वंदना का शव बरामद किया। पति और उसके भाई से पूछताछ की जा रही है और मौत से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।” पुलिस ने बताया कि पोस्टमार्टम से मौत के कारण के संबंध में महत्वपूर्ण सबूत मिलने की उम्मीद है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के दौरान जुटाए गए सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सीजेपी का पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने पर प्रदर्शन, सौरव दास बोले-2800 अपराधियों पर क्यों नहीं हुई कार्रवाई

नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ता निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ हुई मारपीट के मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। इस मामले को लेकर दिल्ली में फिर से प्रदर्शन शुरू हो गया है। सीजेपी के नेता सौरव दास और राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका अपनी कार्यकर्ता निशु आजाद और उनके पिता संजय के लिए न्याय की मांग को लेकर नई दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंचे। इस दौरान निशु आजाद भी थाने पहुंचीं। सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने मीडिया से कहा कि जंतर-मंतर पर जब उनका शांतिपूर्ण प्रदर्शन चल रहा था, तब वहां हिंसा हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि यह आपराधिक गैंग दिल्ली में पहले से हिंसा करती आ रही है। उन्होंने कहा, “ये लोग इतने समय से दिल्ली में खुलेआम क्यों घूम रहे हैं, ये हमारी समझ से परे है। दिल्ली पुलिस बार-बार कह रही थी कि जंतर-मंतर पर 2,800 से ज्यादा घोर अपराधियों की पहचान की गई तो आप उन लोगों को ये छूट क्यों देना चाह रहे हैं? हमने कहा कि उन 2,800 अपराधियों की पहचान की जाए और यदि उन्होंने कोई संगीन अपराध किया है तो आप उनके खिलाफ कार्रवाई करें, जेल में डालें। क्या कानून व्यवस्था दिल्ली में इतनी दुर्बल हो गई है? दिल्ली पुलिस को जवाब देना चाहिए।” सौरव दास ने कहा कि आज वे इसलिए आए हैं क्योंकि उस घटना के बाद से अब तक दिल्ली पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है। पहले दिन से वे सभी छात्रों के साथ खड़े हैं और आगे भी खड़े रहेंगे। उनकी मांग है कि जो 2,800 गुंडे आए थे, उनकी पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए। वही, सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान उनकी साथी निशु के पिता संजय आजाद के साथ मारपीट हुई और उनका सिर फोड़ा गया। यह घटना खुलेआम हुई। आशुतोष रांका ने कहा, “लगातार हमारी टीम और सौरव दिल्ली पुलिस से मांग करते रहे कि इन गुंडों को गिरफ्तार करें, इन पर हत्या के प्रयास का चार्ज लगाएं लेकिन दिल्ली पुलिस सोती रही। अब देश की राजधानी में हालात ऐसे हो गए हैं कि गुंडे ये खुलेआम कबूल कर रहे हैं कि उन्होंने संजय का सिर फोड़ा और उनकी पूरी कोशिश उन्हें जान से मारने की थी।” उन्होंने कहा कि आरोपी खुद कबूल कर रहा है कि उस पर हत्या के प्रयास का केस बनता था लेकिन दिल्ली पुलिस ने उस व्यक्ति के साथ कुछ नहीं किया। आज देश और लोकतंत्र के लिए शर्मनाक दिन है जहां खुलेआम गुंडागर्दी करने वाले दावा करता है कि उसने किसी को जान से मारने का प्रयास किया लेकिन उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। सीजेपी ने मांग की है कि जिन लोगों ने खुद अपनी पहचान बताई है, उन्हें गिरफ्तार किया जाए और उन पर हत्या के प्रयास समेत सभी संगीन धाराएं लगाई जाएं। दरअसल, सोशल मीडिया पर वायरल एक पॉडकास्ट क्लिप में स्वतंत्र भारद्वाज नामक व्यक्ति ने दावा किया है कि संजय आजाद के सिर पर वार उसी ने किया था। साथ ही, उसने राजनीतिक प्रभाव के चलते अपने खिलाफ बड़ी कानूनी कार्रवाई नहीं होने की बात भी कही। इसी वीडियो के सामने आने के बाद सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास, आशुतोष रांका और अन्य कार्यकर्ता पटेल चौक से संसद मार्ग थाने पहुंचे हैं और निशु के पिता के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं।
ट्रंप दावा: ईरान की सैन्य क्षमता बहुत कमजोर, युद्ध जल्द खत्म होगा

वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी सेना ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने दावा किया कि ईरान के साथ युद्ध जल्द ही खत्म हो जाएगा। उनके परमाणु ठिकानों पर नजर रखी जा रही है और होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिका का नियंत्रण है। जीबी न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, “हम पहले ही जीत चुके हैं क्योंकि अब वे परमाणु हथियार नहीं बना सकते।” ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस संघर्ष में इसलिए शामिल हुआ क्योंकि वह ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देना चाहता। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका की ओर से तीन परमाणु ठिकानों पर हमला किए जाने से पहले ईरान परमाणु हथियार बनाने से केवल दो से चार सप्ताह दूर था। उन्होंने कहा कि वे ठिकाने पूरी तरह नष्ट कर दिए गए हैं। राष्ट्रपति ने बताया कि अमेरिका अपनी अंतरिक्ष निगरानी क्षमता का इस्तेमाल करके उन परमाणु स्थलों और ‘पिकएक्स माउंटेन’ नामक एक अन्य स्थान पर नजर रख रहा है। उन्होंने कहा कि हमें पता है कि वहां कौन अंदर जा रहा है और कौन बाहर आ रहा है। अंतरिक्ष से आप किसी व्यक्ति के नाम वाले बैज तक पढ़ सकते हैं। ट्रंप का कहना है कि इन तीन परमाणु स्थलों पर मौजूद सामग्री अब पहाड़ों के लाखों टन मलबे के नीचे दब चुकी है, जिससे उसे निकालना बेहद कठिन होगा। उन्होंने यूरोपीय देशों को भी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ईरान के पास परमाणु हथियार होता, तो उसका खतरा अमेरिका की तुलना में यूरोप के लिए ज्यादा होता। ब्रिटिश पत्रकार बेव टर्नर से बातचीत में ट्रंप ने कहा, “मैं आपके देश को भी इस खतरे से बचा रहा हूं, क्योंकि अगर ईरान के पास परमाणु हथियार होता, तो उसके यूरोप के खिलाफ इस्तेमाल होने की संभावना अमेरिका से ज्यादा होती।” ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान की नौसेना और वायुसेना को परास्त कर दिया है तथा हाल ही में उसके रडार सिस्टमों को भी निशाना बनाया है। उन्होंने कहा, हम होर्मुज स्ट्रेट को नियंत्रित करते हैं। वहां हमारा मजबूत नियंत्रण है। हम हर रात 30 से 40 नौकाओं को निष्क्रिय कर रहे हैं और वहां से काफी मात्रा में तेल बाहर आ रहा है। ट्रंप ने कहा कि ईरान की अर्थव्यवस्था तेजी से कमजोर हो रही है और वहां महंगाई 300 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। हालांकि, इंटरव्यू के दौरान उन्होंने इस दावे के समर्थन में कोई प्रमाण नहीं दिया। राष्ट्रपति ने युद्ध का बचाव करते हुए कहा कि उन्हें अमेरिकी मतदाताओं को इसका उद्देश्य समझाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि मैंने सही काम किया है। अमेरिकी लोग पहले वेनेजुएला में मेरे कदम का भी विरोध कर रहे थे, लेकिन जब हम सफल हुए तो सभी ने कहा कि यह अच्छा फैसला था। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को जो नुकसान पहुंचा है, उसका असर कई दशकों तक रहेगा।
एयरफोर्स और आईआईटी की पहल, फ्लाइट टेस्ट क्रू के लिए मास्टर्स डिग्री प्रोग्राम

नई दिल्ली। कॉकपिट में बैठे वायुसेना के जांबाज पायलटों की भूमिका काफी अहम होती है। आसमान के इन रखवालों को तकनीकी रूप से और अधिक सक्षम बनाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। इसके तहत वायुसेना के ‘एयर फोर्स टेस्ट पायलट स्कूल’ ने देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी संस्थान के साथ हाथ मिलाया है। इस पहल के अंतर्गत वायु योद्धाओं के लिए एक खास मास्टर्स डिग्री प्रोग्राम शुरू किया जा रहा है। इस नई पहल के अंतर्गत भारतीय वायुसेना और आईआईटी बॉम्बे ने सैन्य विमानन के क्षेत्र में एक सहयोगात्मक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य फ्लाइट टेस्ट क्रू (टेस्ट पायलट और फ्लाइट टेस्ट इंजीनियर) के लिए एक विशेष मास्टर्स डिग्री प्रोग्राम शुरू करना है। इस फ्रेमवर्क के तहत भारतीय वायुसेना के एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट स्थित एयर फोर्स टेस्ट पायलट स्कूल और आईआईटी बॉम्बे मिलकर काम करेंगे। इस समझौते के दौरान पर वायुसेना के सहायक प्रमुख (प्रोजेक्ट्स) एयर वाइस मार्शल आशीष श्रीवास्तव और आईआईटी बॉम्बे के निदेशक प्रोफेसर शिरीष केदारे उपस्थित रहे। गौरतलब है कि विभिन्न आईआईटी संस्थान सुरक्षा बलों के साथ मिलकर कई महत्वपूर्ण शोध व शैक्षणिक कार्यक्रमों को आगे बढ़ा रहे हैं। सैन्य यूनिफॉर्म से लेकर आधुनिक टेक्नोलॉजी तक आईआईटी के शोधकर्ताओं द्वारा कई शोध किए गए हैं। इस पहल का उद्देश्य सैन्य उड़ान परीक्षण के व्यावहारिक अनुभव को आईआईटी बॉम्बे की उन्नत शैक्षणिक, तकनीकी और अनुसंधान क्षमताओं के साथ जोड़ना है। यह प्रोग्राम टेस्ट पायलटों और फ्लाइट टेस्ट इंजीनियरों को उच्चस्तरीय तकनीकी ज्ञान प्रदान करेगा, जिससे वे सैन्य विमानों और एविएशन प्रणालियों का सटीक मूल्यांकन कर सकेंगे। साथ ही यह कदम देश के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के विजन को गति देगा और स्वदेशी मिलिट्री एयरोस्पेस इकोसिस्टम को मजबूत करेगा। सैन्य विमानन में किसी भी नए एयरक्राफ्ट या एविएशन सिस्टम को बेड़े में शामिल करने से पहले उसकी उड़ान परीक्षण प्रक्रिया अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यह अकादमिक साझेदारी रक्षा क्षेत्र की तकनीकी क्षमताओं को और अधिक मजबूत करेगी तथा भारत को एयरोस्पेस तकनीक के क्षेत्र में स्वायत्त बनाने में मदद करेगी।