भारतीय टीम पाकिस्तान को एकतरफा हराएगी, मंधाना और हरमन का दिखेगा जलवा: फैंस

मुंबई। महिला एशिया कप 2026 का सबसे रोमांचक मुकाबला भारत और पाकिस्तान के बीच शनिवार की शाम दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाना है। क्रिकेट फैंस इस मुकाबले का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। भारतीय क्रिकेट फैंस का मानना है कि टीम इंडिया पाकिस्तान के खिलाफ एकतरफा जीत हासिल करेगी। मुंबई में अभ्यास के लिए जुटे युवा क्रिकेटरों और उनके कोच का मानना है कि भारतीय टीम के सामने पाकिस्तान कमजोर है। टीम इंडिया की एकतरफा जीत निश्चित है। आईएएनएस से बात करते हुए प्रशिक्षक ने कहा, “भारतीय टीम एकतरफा मैच जीतेगी। भारतीय टीम के सामने पाकिस्तान बेहद कमजोर है। पाकिस्तान भारत, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका जैसी बड़ी टीमों के खिलाफ हमेशा एकतरफा हारती है। इस मैच में भी यही होगा। भारतीय टीम को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।” एक युवा क्रिकेटर ने कहा, “हमारी टीम अच्छा प्रदर्शन कर रही है। बल्लेबाज, गेंदबाज और ऑलराउंडर सभी अच्छा खेल रहे हैं। मंधाना अच्छे फॉर्म में हैं। ऐसे में हम जीतेंगे।” एक अन्य युवा फैन ने कहा, “मुझे लगता है कि भारतीय टीम जीतेगी। हमारी टीम की बल्लेबाजी में गहराई है और हम गेंदबाजी में भी अच्छा कर रहे हैं। स्मृति मंधाना और कप्तान हरमनप्रीत कौर लंबे समय से अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं, और मुझे पूरी उम्मीद है कि इस मैच में भी उनका प्रदर्शन अच्छा रहेगा।” भारतीय टीम की एकतरफा जीत की बात दोहराते हुए एक युवा फैन ने कहा, “हमने देखा है कि पिछले कुछ समय में भारतीय महिला टीम के प्रदर्शन में भी काफी सुधार आया है। हम जीत जाएंगे। स्मृति मंधाना, हरमनप्रीत कौर, रेणुका ठाकुर सभी अच्छा कर रहे हैं। उम्मीद है कि सभी आज भी अच्छा करें और हम मैच जीतें।” एक फैन ने कहा, “भारत-पाकिस्तान का मैच हमेशा रोमांचक होता है। फैंस हमेशा दोनों टीमों का मुकाबला देखना चाहते हैं। दोनों देशों के बीच हुए मैचों को देखें, तो भारतीय टीम ने ज्यादा जीत दर्ज की है। मैं चाहूंगा कि भारतीय टीम इस मैच में भी जीते।” भारत-पाकिस्तान मैच के रोमांच पर चर्चा करते हुए एक युवा क्रिकेटर ने कहा, “कोई भी खेल हो, मैदान पर जब भी भारत और पाकिस्तान आमने-सामने होते हैं, तो अलग ही रोमांच होता है। पाकिस्तान के खिलाफ हमारी पुरुष और महिला टीम हमेशा अच्छा प्रदर्शन कर रही है। इस मैच में भी हम जीतेंगे।

जापान में भारी बारिश का कहर, याकुशिमा द्वीप पर लैंडस्लाइड की चेतावनी

टोक्यो। जापान में भारी बारिश के बाद याकुशिमा द्वीप पर भूस्खलन की चेतावनी दी गई है। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने शनिवार को दक्षिण-पश्चिमी जापान के कागोशिमा प्रांत स्थित याकुशिमा द्वीप के लिए लेवल-5 यानी ‘सबसे गंभीर आपात चेतावनी’ जारी की। एजेंसी ने लोगों से सुबह के समय अधिकतम सतर्कता बरतने की अपील की। क्योडो न्यूज एजेंसी ने बताया कि जापान मौसम विज्ञान एजेंसी के मुताबिक, लेवल-5 चेतावनी जारी किए जाने का मतलब है कि इलाके में किसी तरह की आपदा घटित होने की आशंका बेहद प्रबल है और कुछ स्थानों पर आपदा हो भी सकती है। याकुशिमा के ओनोआइडा में 24 घंटों में 490.5 मिलीमीटर बारिश हुई, जो उस इलाके के लिए एक रिकॉर्ड है। याकुशिमा द्वीप अपनी प्राकृतिक सुंदरता, जिसमें पुराने देवदार के पेड़ भी शामिल हैं, के लिए मशहूर एक टूरिस्ट स्पॉट है। टाइफून क्रोवान्ह और एक मौसम प्रणाली के प्रभाव के कारण पश्चिमी जापान के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। कई नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने और उनके उफान पर आने की आशंका है। एजेंसी के अनुसार, दक्षिणी क्यूशू क्षेत्र, जिसमें कागोशिमा भी शामिल है, में रविवार सुबह 6 बजे तक 24 घंटे के दौरान 200 मिलीमीटर तक बारिश हो सकती है। अधिकारियों ने भारी बारिश से प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से मौसम संबंधी चेतावनियों पर नजर रखने और भूस्खलन तथा बाढ़ के खतरे वाले इलाकों से सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहने का आग्रह किया है। क्यूशू इलेक्ट्रिक पावर ट्रांसमिशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के अनुसार, शनिवार तड़के शहर में लगभग 20 घरों में बिजली गुल हो गई थी, लेकिन पुलिस और अग्निशमन विभाग को किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली। हाल के हफ्तों में जापान के कई हिस्सों में भारी बारिश हुई है। शनिवार को भूस्खलन की आपातकालीन चेतावनी, अगस्त में टोक्यो के पास चिबा प्रान्त की कुछ नगर पालिकाओं में जारी चेतावनी के बाद आई है, जब भारी बारिश के कारण आई बाढ़ में 13 लोगों की मौत हो गई थी।

तमिलनाडु: मेटूर से छोड़ा गया पानी अपर एनीकट पहुंचा, कम प्रवाह से किसानों की बढ़ी चिंता

तिरुची। कावेरी डेल्टा की सिंचाई के लिए मेटूर बांध से छोड़ा गया पानी तमिलनाडु में तिरुची जिले के मुक्कोंबू स्थित अपर एनीकट तक पहुंच गया है, लेकिन पानी का प्रवाह काफी कम होने से यह चिंता बढ़ गई है कि क्या यह किसानों की सिंचाई की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त होगा। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के निर्देश पर डेल्टा जिलों में खेती को समर्थन देने के लिए 1 सितंबर को मेटूर जलाशय से 7,000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। शुक्रवार सुबह जब पानी अपर एनीकट पहुंचा, तब तक उसका प्रवाह घटकर लगभग 1,500 क्यूसेक रह गया था। जलाशय में अपर्याप्त भंडारण के कारण इस वर्ष मेटूर से पानी छोड़ने में देरी हुई, जिससे कावेरी डेल्टा के कुछ हिस्सों में कुरुवाई की खेती प्रभावित हुई। जलाशय का जलस्तर 92 फीट तक बढ़ने और 8,456 क्यूसेक पानी के प्रवाह के बाद अंततः पानी छोड़ा गया। छोड़ा गया पानी गुरुवार को करूर जिले के मयानूर बैराज तक पहुंच गया। वहां जल प्रवाह प्रारंभ में केवल 2,737 क्यूसेक था, जो बाद में बढ़कर 4,081 क्यूसेक हो गया। इसके बाद लगभग 2,050 क्यूसेक जल मयानूर से ऊपरी एनीकट की ओर छोड़ा गया। शुक्रवार तड़के करीब 6 बजे मुक्कोंबू में पानी पहुंचा। अधिकारियों ने बताया कि बांध पर लगभग 777 क्यूसेक पानी उपलब्ध था और इसका उपयोग पेयजल आवश्यकताओं के लिए किया जा रहा था। हालांकि मयानूर से छोड़े गए 2,050 क्यूसेक में से केवल लगभग 1,500 क्यूसेक ही ऊपरी एनीकट तक पहुंचे। जल प्रवाह में धीरे-धीरे सुधार की उम्मीद करते हुए अधिकारियों ने उपलब्ध 1,500 क्यूसेक पानी कावेरी नदी में ग्रैंड एनीकट या कल्लनई की ओर छोड़ दिया। शनिवार को पानी के कल्लनई पहुंचने की उम्मीद है और अधिकारी रविवार से सिंचाई प्रणालियों की ओर पानी छोड़ना शुरू कर सकते हैं, हालांकि सिंचाई विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि वर्तमान जल प्रवाह डेल्टा क्षेत्र में प्रभावी सिंचाई के लिए आवश्यक स्तर से काफी कम है। उन्होंने कहा कि सिंचाई नेटवर्क को पर्याप्त रूप से चलाने के लिए 16,000 क्यूसेक से अधिक पानी के प्रवाह की आवश्यकता होगी। वर्तमान जलस्तर पर पानी काफी हद तक मुख्य नदी के मार्ग तक ही सीमित रह सकता है, जिससे कृषि क्षेत्रों की सिंचाई करने वाली शाखा नदियों और सिंचाई नहरों तक अपर्याप्त मात्रा में पानी पहुंच पाएगा। किसान पहले से ही सिंचाई नहरों में पर्याप्त पानी छोड़ने की मांग कर रहे हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि आने वाले दिनों में पानी की निकासी में पर्याप्त वृद्धि नहीं होती है, तो वर्तमान प्रवाह से फसलों के लिए पानी का इंतजार कर रहे किसानों को कोई खास राहत मिलने की संभावना नहीं है।

गया ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी की पासिंग आउट परेड, 253 कैडेट भारतीय सेना में हुए शामिल

गया। बिहार के गया में स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी में शनिवार को आयोजित एक समारोह में शॉर्ट सर्विस कमीशन, टेक्निकल एंट्री (पुरुष और महिला) के चौथे बैच को अधिकारी के तौर पर कमीशन किया गया। इस परेड में 253 ऑफिसर कैडेट्स की पासिंग आउट परेड हुई, जिन्होंने भारतीय सेना के कमीशन प्राप्त अधिकारी बनने के लिए ‘अंतिम पग’ (अंतिम कदम) पार किया। इसमें एसएससी (टेक्निकल) पुरुष-65 कोर्स के 218 ऑफिसर कैडेट्स और एसएसी (टेक्निकल) महिला-36 कोर्स के 35 ऑफिसर कैडेट्स शामिल थे। वियतनाम पीपुल्स आर्मी के डिप्टी चीफ ऑफ जनरल स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल ले वान हुओंग परेड के रिव्यूइंग ऑफिसर (समीक्षा अधिकारी) थे। कुशल, सटीक और तालमेल भरी ड्रिल गतिविधियों ने सभी दर्शकों में गर्व की गहरी भावना जगाई। पासिंग आउट परेड के लिए एकेडमी अंडर ऑफिसर पी. शशि कुमार परेड कमांडर थे। रिव्यूइंग ऑफिसर ने उन ऑफिसर कैडेट्स को पदक प्रदान किए, जिन्होंने अपने प्रशिक्षण के दौरान बेहतरीन प्रदर्शन किया था। एकेडमी अंडर ऑफिसर पी. शशि कुमार ने ‘बेस्ट ऑल राउंडर’ चुने जाने पर प्रतिष्ठित ‘स्वोर्ड ऑफ ऑनर’ (सम्मान की तलवार) जीता। उन्हें गोरखा राइफल्स में कमीशन किया गया है। एकेडमी अंडर ऑफिसर पी. शशि कुमार ने ओवरऑल ऑर्डर ऑफ मेरिट में पहला स्थान हासिल करने पर स्वर्ण पदक जीता। उन्हें गोरखा राइफल्स में कमीशन किया गया है। बटालियन अंडर ऑफिसर दीपक सिंह रावत ने ओवरऑल ऑर्डर ऑफ मेरिट में दूसरा स्थान हासिल करने पर रजत पदक जीता। उन्हें राजपूत रेजिमेंट में कमीशन किया गया है। एकेडमी कैडेट एडजुटेंट नवनीत सिंह ने ओवरऑल ऑर्डर ऑफ मेरिट में तीसरा स्थान हासिल करने पर कांस्य पदक जीता। उन्हें पैरा स्पेशल फोर्सेज में कमीशन किया गया है। कालिधर कंपनी ने ओवरऑल चैंपियन कंपनी बनने के लिए ‘चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ बैनर’ जीता। पासिंग आउट कोर्स के ऑफिसर कैडेट्स को संबोधित करते हुए रिव्यूइंग ऑफिसर ने युवा मिलिट्री लीडर्स को नई सोच अपनाने और लगातार अपनी जानकारी बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने मकसद के साथ नेतृत्व करने, नई टेक्नोलॉजी में महारत हासिल करने और तेजी से बदलते युद्ध के मैदान में हालात के अनुसार ढलने की जरूरत पर जोर दिया। भारतीय सेना के मुख्य मूल्यों को बनाए रखते हुए उन्होंने शांति और युद्ध के समय प्रभावी कमांड के लिए परंपरा और भविष्य की सोच वाली लीडरशिप का मेल बिठाने के लिए उन्हें प्रोत्साहित किया। पिप्पिंग सेरेमनी ऑफिसर कैडेट्स और उनके परिवारों के लिए संतुष्टि और गर्व का एक शानदार पल था। महीनों की अटूट लगन और कड़ी मेहनत के नतीजे के तौर पर, यह उनकी यात्रा का एक अहम पड़ाव था। बिगुल बजते ही उनके कंधों पर स्टार लगाए गए, जो उनके कमीशंड ऑफिसर बनने का प्रतीक था। देश की सेवा करने की गंभीर शपथ एकेडमी एडजुटेंट लेफ्टिनेंट कर्नल प्रखर धागत ने दिलाई। गर्व से सिर उठाकर और मकसद से भरे दिलों के साथ, नए कमीशंड ऑफिसर्स सम्मान और कर्तव्य से भरी जिंदगी की ओर अपना ‘पहला कदम’ बढ़ाने के लिए गर्व से आगे बढ़े।

शिक्षकों संग पीएम मोदी की खास बातचीत, पब्लिक स्पीकिंग पर मांगे टिप्स, बच्चों की ‘रिपोर्टिंग स्किल्स’ पर भी ली चुटकी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि शिक्षक दिवस समाज में शिक्षकों के अहम योगदान की सराहना करने का दिन है। उन्होंने यह भी कहा कि यह डॉ. एस. राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि देने का भी दिन है। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने नेशनल टीचर्स अवॉर्ड’ (राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार) विजेताओं के साथ मुलाकात की झलकियां भी साझा की। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “शिक्षक दिवस हमारे समाज में शिक्षकों के अहम योगदान की सराहना करने का दिन है। यह डॉ. एस. राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि देने का दिन भी है। कल जब नेशनल टीचर्स अवॉर्ड्स के विजेताओं को 7, एलकेएम (लोक कल्याण मार्ग) बुलाया गया, तो क्या हुआ, देखिए।” पीएम मोदी से संवाद करते समय एक महिला अध्यापिका ने बताया कि वह बच्चों को नवाचारी तरीके से साक्षात्कार लेना सिखा रही हैं। इस पर प्रधानमंत्री ने पूछा कि बच्चे घर जाकर मम्मी-पापा का भी इंटरव्यू करते होंगे? पीएम मोदी की इस बात पर महिला टीचर ने ‘हां’ में जवाब दिया। फिर पीएम मोदी ने कहा कि बच्चे अपने माता-पिता से पूछते होंगे कि खाना क्यों पकाया? ऐसा क्यों पकाया? यह निर्णय किसने किया था? बजट कितना खर्च किया था? इस पर महिला अध्यापिका ने कहा कि मेरे स्कूल के सारे बच्चे रिपोर्टर ही बनना चाहते हैं! एक अन्य महिला शिक्षक ने पीएम मोदी को बताया कि वह बच्चों को केमिस्ट्री पढ़ाने के साथ एनवायरमेंट एजुकेशन भी पढ़ाती हूं। मैं बच्चों को कॉन्फिडेंस के साथ पब्लिक स्पीकिंग के लिए भी मेंटर करती हैं और उन्हें राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया है। इस पर प्रधानमंत्री ने पूछा, “आप बच्चों को पब्लिक स्पीकिंग सिखाती हैं। अगर मैं आपका विद्यार्थी हूं और एक अच्छा वक्ता बनना चाहता हूं, तो मुझे क्या करना चाहिए? कोई टिप्स दीजिए।” जवाब में शिक्षिका ने कहा, “आपको कॉन्फिडेंस में रहना चाहिए।” इस पर प्रधानमंत्री और शिक्षिका दोनों हंस पड़े। शिक्षिका ने कहा, “सर, आपका ऑरा देखकर मुझे थोड़ा डाउट हो गया।” इस पर पीएम मोदी ने कहा कि यानी मतलब आपको पब्लिक स्पीकर बनना है तो ऑरा नहीं होना चाहिए। महिला टीचर ने कहा कि होना चाहिए। इस पर पीएम मोदी ने कहा कि फिर तो लोग सुनेंगे ही नहीं, औरा (आभा) ही देखते रहेंगे। महिला टीचर ने कहा कि आपको देखते ही रहेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संवाद को आगे बढ़ाते हुए कहा कि हो सकता है कि कोई बच्चा शिक्षा में ठीक नहीं होगा। लेकिन परमात्मा ने हर एक को कोई न कोई ताकत दी है। उसके टैलेंट पहचानने के लिए कोई कोशिश करते हैं आप टीचर लोग? इस पर एक महिला टीचर ने कहा, “बहुत सारी कोशिश करते हैं, असल में वही हमारी कोशिश होती है, क्योंकि मेरा मानना है कि हमारे विद्यालय या हमारी कक्षा में जितने बच्चे हैं, उन सभी में अलग-अलग खूबी है। अलग-अलग टैलेंट है, अलग-अलग चैलेंज है और एक शिक्षक के नाते मैं उन सारे टैलेंट्स की पहचान करती हूं।” एक पुरुष अध्यापक ने कहा, “आपने (पीएम मोदी) एकलव्य खोल कर एक स्कूल नहीं बनाया, बल्कि लगभग मेरे हिसाब से कई परिवारों को जोड़ा हैं। ऐसे लोगों को जोड़ा जो फर्सट जनरेशन लर्नर हैं, जिन्होंने कभी स्कूल नहीं देखे। उनके बच्चे आज हमारे यहां से एनआईटी, आईआईटी का सपना देख रहे हैं। मेडिकल क्वालीफाई कर रहे हैं।” महिला अध्यापिका ने कहा, “शोध का विषय ब्रेस्ट कैंसर रहा है। ब्रेस्ट कैंसर आज भी एक ऐसा विषय है जिसमें महिलाएं बात करने से बहुत हिचकती हैं। कुछ चीजें हमारी क्षमता में है जो हम कर सकते हैं, जैसे कि प्राइमरी स्क्रीनिंग या कुछ ऐसी बातें उनको बताना कि वह ब्रेस्ट कैंसर को पहचान सकें और डॉक्टर की सलाह की जरूरत है। मैं इन विषयों पर काम करती हूं।” इस पर पीएम मोदी ने कहा, “आप इसी विषय में काम कर रही हैं तो मैं काशी का सांसद हूं। मैंने वहां ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस अभियान शुरू किया है। मुझे खुशी है कि महिलाएं सामने से आकर अपना चेकअप कराती हैं, पहले ऐसी स्थिति नहीं थी। दूसरे एक अच्छा अनुभव आया। अभी तो एक दिन में अधिकतम लोगों की जांच करने का गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड उन्होंने रजिस्टर किया।” प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “एक विषय है स्क्रीन टाइम, जो अब एक तरह का एडिक्शन बन गया है। मेरे मन में एक विचार आता है, अगर बच्चा खेलकूद में ज्यादा रुचि लेने लगे, मैदान में खेलने लगे, तो वह धीरे-धीरे इस एडिक्शन से बाहर आ सकता है। हमें बच्चों को ज्यादा से ज्यादा क्रिएटिविटी से जोड़ना चाहिए और ऐसे कार्यक्रमों को आदत बनाना चाहिए।” प्रधानमंत्री ने कहा, “अब जैसे ड्रग्स का मामला है। कई बार पता ही नहीं चलता कि क्या हो रहा है, कोई आकर कुछ दे जाता है। क्या इस बारे में शिक्षकों में लगातार जागरूकता है? क्या कोई बारीकी से यह ऑब्जर्व कर रहा है कि किसी बच्चे के व्यवहार में बदलाव तो नहीं आ रहा? मैं पूरे शिक्षा जगत से कहना चाहता हूं कि हमें किताबों और सिलेबस से बाहर निकलकर बच्चों की जिंदगी में झांकना होगा। बचपन को मरने नहीं देना है, और बचपन को बनाए रखने का सबसे बड़ा काम शिक्षक ही कर सकता है।

कर्नाटक के बेलगावी में मजदूरों को खुदाई में मिले सोने के 14 प्राचीन सिक्के, प्रशासन को लौटाए

बेलगावी। कर्नाटक के बेलगावी जिले के सौंदत्ती तालुक के इंचल गांव में मजदूरों को खुदाई के दौरान सोने के सिक्कों से भरा मटका मिला है। मजदूरों ने ईमानदारी की मिसाल पेश करते हुए सभी सिक्के प्रशासन को सौंप दिए, जिसके बाद तालुक प्रशासन ने उनकी खूब सराहना की। यह घटना इंचल गांव में बीसीएम हॉस्टल के पास काम के दौरान हुई। वीबी जीरामजी योजना के तहत काम कर रहे दिहाड़ी मजदूरों को काम करते समय जमीन में एक मिट्टी का बर्तन मिला। जब बर्तन को खोला गया तो उसमें 14 सोने के सिक्के निकले। सिक्कों का वजन 54.8 ग्राम है और इनकी कीमत करीब 8.27 लाख रुपए आंकी गई है। मजदूरों ने सिक्के अपने पास रखने के बजाय ईमानदारी दिखाते हुए अधिकारियों को सौंप दिया। सभी सिक्के पंचायत विकास अधिकारी (पीडीओ) और तालुक पंचायत स्टाफ की मौजूदगी में सौंदत्ती तहसीलदार को सौंपे गए। सौंदत्ती के तहसीलदार मल्लिकार्जुन हेग्गनवर ने सभी सिक्कों को सरकारी खजाने में जमा करा दिया। मजदूरों को मिले 14 सिक्कों पर हाथी की तस्वीर बनी हुई है। इतिहास के जानकारों के मुताबिक हाथी तलकाडु के गंगा वंश का शाही प्रतीक था। ये सिक्के 10वीं से 15वीं शताब्दी के बीच के हैं। इतने पुराने और ऐतिहासिक महत्व के सिक्के मिलना इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस मामले में तालुक प्रशासन ने मजदूरों की ईमानदारी की तारीफ की है। अधिकारियों ने कहा कि अगर मजदूर चाहते तो सिक्के छुपा सकते थे, लेकिन उन्होंने ईमानदारी का परिचय देकर एक अच्छी मिसाल पेश की है।

फरक्का जल संधि से बिहार को हुआ नुकसान, 12 जिलों में ‘नीतीश संवाद’ के जरिए लोगों को जागरूक करेगी जेडीयू

पटना। जनता दल (यूनाइटेड) ने फरक्का जल संधि और बिहार के जल संसाधनों से जुड़े मुद्दों को लेकर राज्य में जनजागरूकता अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद संजय कुमार झा ने कहा कि पार्टी ‘नीतीश संवाद’ कार्यक्रम के तहत 12 जिलों की यात्रा करेगी। इस दौरान बिहार के साथ हुए अन्याय और फरक्का बैराज व जल संधि के कारण राज्य को हुए नुकसान के बारे में लोगों को जानकारी दी जाएगी। जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद संजय कुमार झा ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि हम 12 जिलों का दौरा शुरू कर रहे हैं। हमारे राज्य जेडीयू अध्यक्ष रमेश कुशवाहा और मैं मिलकर यह यात्रा कर रहे हैं। इसका मुख्य मकसद लोगों तक पहुंचना और जागरूकता फैलाना है। हम लोगों को बिहार के साथ हुए गंभीर अन्याय और फरक्का जल संधि के कारण पिछले 30 साल में राज्य को हुए भारी नुकसान के बारे में बताएंगे। चूंकि यह संधि इस दिसंबर में खत्म होने वाली है और हमारे नेता नीतीश कुमार व हमारी पार्टी ने हमेशा फरक्का बैराज और फरक्का जल संधि का विरोध किया है, इसलिए हमारा रुख साफ है: इस संधि को मौजूदा रूप में आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। अगर किसी विकल्प पर विचार किया जाता है, तो उसमें बिहार की पानी से जुड़ी चिंताओं का समाधान 2050 तक की ज़रूरतों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। संजय कुमार झा ने कहा कि वह पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा के साथ मिलकर यह यात्रा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों तक पहुंचना और बिहार के हितों से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता पैदा करना है। जेडीयू का दावा है कि फरक्का जल संधि के कारण पिछले करीब 30 वर्षों में बिहार को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने कहा कि फरक्का जल संधि की मौजूदा अवधि दिसंबर में समाप्त होने वाली है। ऐसे में पार्टी ने इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। संजय झा के मुताबिक, नीतीश कुमार के नेतृत्व में जेडीयू शुरू से ही फरक्का बैराज और फरक्का जल संधि का विरोध करती रही है। पार्टी का मानना है कि मौजूदा स्वरूप में इस संधि को आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। जेडीयू नेता ने यह भी कहा कि यदि संधि के स्थान पर किसी वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार किया जाता है तो उसमें बिहार के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। खास तौर पर राज्य की जल संबंधी समस्याओं और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ऐसी व्यवस्था तैयार होनी चाहिए, जो वर्ष 2050 तक बिहार की आवश्यकताओं का समाधान कर सके। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कश्मीर को लेकर बकिंघम के मेयर की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी भी विदेशी मेयर को भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है। सरावगी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न अंग हैं और इस पर कोई बहस नहीं हो सकती। स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े मामले पर भी सरावगी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने घटना को जातिगत रंग देने की राजनीति की आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह का रवैया उचित नहीं है। उन्होंने राजनीतिक दलों से ऐसे मामलों में जातिगत आधार पर राजनीति से बचने की अपील की। बिहार में मेडिकल शिक्षा के विस्तार को लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि समस्तीपुर के श्री राम जानकी कॉलेज और छपरा मेडिकल कॉलेज को एमएमबीएस की 50-50 सीटों की मंजूरी मिली है। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा का आभार जताया। उनके मुताबिक, इन मंजूरियों से राज्य में मेडिकल शिक्षा के अवसर बढ़ेंगे और आने वाले समय में स्वास्थ्य क्षेत्र को भी इसका लाभ मिलेगा।

तमिलनाडु में डेंगू और स्वाइन फ्लू के मरीज बढ़े, डेंगू के 13,573 मामले सामने आए और नौ लोगों की मौत

चेन्नई। तमिलनाडु में पिछले साल की तुलना में डेंगू और स्वाइन फ्लू के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसे देखते हुए डॉक्टर अधिक सावधानी बरतने और बचाव के कड़े उपाय करने की सलाह दे रहे हैं। जन स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों से पता चलता है कि 1 जनवरी से 30 अगस्त 2026 के बीच राज्य भर में डेंगू के 13,573 मामले सामने आए और नौ लोगों की मौत हुई। हालांकि मौत की दर अभी भी काफी कम है, लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स जुलाई और अगस्त के दौरान संक्रमण के मामलों में हुई उल्लेखनीय बढ़ोतरी को लेकर चिंतित हैं। जनवरी में डेंगू के 1,722, फरवरी में 1,322, मार्च में 1,228, अप्रैल में 1,201 और मई में 1,062 मामले सामने आए। जून में मामलों में फिर से बढ़ोतरी शुरू हुई, जब संक्रमण के 1,384 मामले दर्ज किए गए। इसके बाद जुलाई में 2,339 और अगस्त में 3,315 मामले सामने आए। पिछले साल की तुलना में यह बढ़ोतरी काफी अहम है। पिछले साल जुलाई में डेंगू के 1,880 मामले थे जो इस साल जुलाई में बढ़कर 2,339 हो गए, जबकि अगस्त में संक्रमण के मामले 1,832 से बढ़कर 3,315 हो गए। चेन्नई में सबसे ज़्यादा मामले सामने आए हैं। जनवरी से अगस्त के बीच राज्य में कुल 13,573 संक्रमण के मामलों में से 2,584 मामले यहीं दर्ज किए गए। इसके बाद कोयंबटूर में 1,999 मामले सामने आए। मामलों में इस बढ़ोतरी ने चिंता बढ़ा दी है क्योंकि चेन्नई सहित तमिलनाडु में मानसून का समय अभी आना बाकी है। पिछले साल तमिलनाडु में डेंगू के 25,533 मामले दर्ज किए गए थे। यह संख्या 2022 और 2024 के बीच देखे गए ज़्यादा मामलों की तुलना में काफी कम थी। स्वाइन फ्लू के संक्रमण में भी बढ़ोतरी हुई है। तमिलनाडु में इस साल 1,500 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं और संक्रमण के मामलों के लिहाज से यह देश के राज्यों में दूसरे स्थान पर है। हेल्थ डेटा से भी पता चलता है कि हाल के वर्षों की तुलना में खासकर जून, जुलाई और अगस्त के दौरान मामलों में काफी बढ़ोतरी हुई है। अगस्त में हुई बढ़ोतरी खास तौर पर ध्यान देने लायक है, पिछले साल इसी महीने में स्वाइन फ्लू के सिर्फ 46 मामले थे, जो इस साल बढ़कर 645 हो गए हैं। सरकारी डॉक्टरों का कहना है कि चेन्नई में आबादी का अधिक घनत्व और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी सावधानियों का ठीक से पालन न करना संक्रमण फैलने की वजह बन रहा है। उन्होंने कहा कि स्वाइन फ्लू से पीड़ित लोगों को कम से कम पांच दिनों तक खुद को अलग-थलग (आइसोलेट) रखना चाहिए। डॉक्टरों ने बुखार या सांस लेने में तकलीफ वाले लोगों को भीड़-भाड़ वाली सार्वजनिक जगहों पर जाने से बचने, जरूरत पड़ने पर मास्क पहनने और समय पर डॉक्टर से सलाह लेने की भी सलाह दी। डेंगू से बचाव के लिए अधिकारियों ने घरों और काम की जगहों के आस-पास जमा पानी और मच्छरों के पनपने की जगहों को खत्म करने पर जोर दिया है। डॉक्टरों का कहना है कि आने वाले बारिश के महीनों में संक्रमण को और बढ़ने से रोकने के लिए साफ-सफाई, मच्छरों पर नियंत्रण, लोगों में जागरूकता और समय पर इलाज बहुत जरूरी होगा।

शिक्षक दिवस पर अमित शाह सहित केंद्रीय मंत्रियों ने भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को दी श्रद्धांजलि

नई दिल्ली। पूर्व राष्ट्रपति, महान शिक्षाविद, आदर्श शिक्षक, ‘भारत रत्न’ डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्रियों और कई राज्यों के मुख्यमंत्री ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि मैं उन शिक्षकों को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं जिन्होंने ज्ञान की खोज में छात्रों की पीढ़ियों का मार्गदर्शन करके भारत की निरंतर प्रगति का मार्ग प्रशस्त किया है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने एक्स पर पोस्ट किया, “शिक्षक दिवस पर मैं उन शिक्षकों को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं जिन्होंने ज्ञान की खोज में छात्रों की पीढ़ियों का मार्गदर्शन कर भारत की निरंतर प्रगति का मार्ग प्रशस्त किया है। साथ ही मैं दार्शनिक और राजनेता भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णनको उनकी जयंती पर नमन करता हूं। उनकी अमूल्य विरासत ज्ञान-समृद्ध भारत के निर्माण के लिए हमारे लिए प्रेरणा की एक शाश्वत ज्योति के समान है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने लिखा कि शिक्षक दिवस की पूरे शिक्षक परिवार को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। देश और समाज के निर्माण में शिक्षकों की अग्रणी भूमिका रही है। आज का यह दिन, भारत के पूर्व राष्ट्रपति डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी की जयंती के उपलक्ष्य पर मनाया जाता है। मैं उनकी स्मृति को नमन करते हुए उनके प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने लिखा कि पूर्व राष्ट्रपति, महान शिक्षाविद्, आदर्श शिक्षक एवं ‘भारत रत्न’ डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी की जयंती पर उन्हें कोटिशः नमन करता हूँ। किसी भी राष्ट्र की समृद्धि और जागरूक समाज के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। शिक्षक केवल ज्ञान का प्रकाश नहीं फैलाते, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, संस्कार और भविष्य को भी आकार देते हैं। समाज और राष्ट्र को प्रगति के पथ पर अग्रसर करने वाले सभी शिक्षकों को ‘शिक्षक दिवस’ की हार्दिक शुभकामनाएं। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “पूर्व राष्ट्रपति, महान शिक्षाविद, आदर्श शिक्षक, ‘भारत रत्न’ डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर कोटि-कोटि नमन एवं ‘शिक्षक दिवस’ पर सभी गुरुजनों को प्रणाम और देशवासियों को हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं! गुरु से बड़ा दूसरा कोई भगवान नहीं होता है। यह सत्य है कि ईश्वर की भाँति कच्ची माटी को गढ़कर गुरु उसमें प्राण फूँक देते हैं। हम सभी पर अपने गुरुजनों का आशीर्वाद सदैव बना रहे, यही मंगलकामनाएं हैं। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लिखा, “पूर्व राष्ट्रपति, भारत रत्न, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर सादर नमन करता हूं। उनका जीवन भारतीय ज्ञान परंपरा, शिक्षा के उच्च आदर्शों और मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पण का प्रेरणास्रोत है। उनके विचार, चरित्र निर्माण और राष्ट्र सेवा के सशक्त आधार हैं। राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के अवसर पर भावी पीढ़ियों को ज्ञान, संस्कार और जीवन-मूल्यों से समृद्ध करने वाले सभी गुरुजनों के प्रति मैं हृदय से सम्मान व्यक्त करता हूं तथा उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देता हूं। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “शिक्षा के माध्यम से नई पीढ़ी को सही दिशा, संस्कार और जीवन-मूल्यों से समृद्ध बनाने वाले सभी सम्मानित शिक्षकों को शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं एवं महान शिक्षाविद्, पूर्व राष्ट्रपति ‘भारत रत्न’ डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर सादर नमन।” उन्होंने आगे लिखा कि गुरु केवल अक्षर ज्ञान प्रदान करने वाले नहीं, बल्कि जीवन को सार्थक दिशा देने वाले पथप्रदर्शक होते हैं। उनके मार्गदर्शन से विद्यार्थी अपनी क्षमताओं को पहचानते हैं, आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ते हैं और जिम्मेदार एवं संवेदनशील नागरिक के रूप में राष्ट्र की प्रगति में योगदान देते हैं। हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “देश के पूर्व राष्ट्रपति एवं महान शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर उन्हें सादर नमन। गुरु-शिष्य की हमारी महान परंपरा में शिक्षक बच्चों को ज्ञान और संस्कार देने के साथ-साथ उनके जीवन को सही दिशा भी प्रदान करते हैं। शिक्षक दिवस के अवसर पर हिमाचल प्रदेश के सभी शिक्षकों को हार्दिक शुभकामनाएं।” मुख्यमंत्री ने लिखा कि गुणात्मक शिक्षा के क्षेत्र में साढ़े तीन वर्षों की हमारी यात्रा 21वें स्थान से 5वें स्थान तक पहुँची है। निरंतर प्रयासों का ही परिणाम है कि हिमाचल प्रदेश ने पूर्ण साक्षर राज्य बनने का गौरव हासिल किया है। यह उपलब्धि हमारे शिक्षकों के समर्पण, लगन एवं अथक परिश्रम का प्रमाण है। ‘प्रबलः कर्मसिद्धान्तः’ अर्थात् कर्म कभी व्यर्थ नहीं जाता। इसी विश्वास के साथ हमें अपने प्रयासों को और गति देते हुए शिक्षा के क्षेत्र में हिमाचल को नई ऊंचाइयों तक ले जाना है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “भारत के द्वितीय राष्ट्रपति, महान शिक्षाविद् एवं भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर सादर नमन एवं शिक्षक दिवस की आप सभी को अनंत-असीम शुभकामनाएं। आइए, अपने जीवन को ज्ञान, संस्कार और दिशा देने वाले सभी गुरुजनों के प्रति सदैव सम्मान एवं आभार व्यक्त करें।

भाजपा यूपी प्रभारी विनोद तावड़े लखनऊ दौरे पर, आगामी चुनावी को लेकर करेंगे बैठक

लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े शनिवार को पार्टी के नव-नियुक्त राज्य प्रभारी के रूप में पहली बार उत्तर प्रदेश का दौरा करेंगे। उनकी यात्रा का मुख्य उद्देश्य संगठन की तैयारियों और राज्य की चुनावी रणनीति पर ध्यान केंद्रित करना है। अपनी नई भूमिका में पहली यात्रा के दौरान, तावड़े उत्तर प्रदेश में राजनीतिक, चुनावी और संगठनात्मक गतिशीलता का आकलन करने और 2027 के विधानसभा चुनावों के मद्देनजर पार्टी के लिए आगे की राह पर विचार-विमर्श करने के लिए एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में भाग लेंगे। भाजपा नेता अपनी यात्रा के दौरान दो सत्रों में बैठकें करेंगे। वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पदाधिकारियों और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं से बातचीत करेंगे। इन चर्चाओं में संगठन को विभिन्न स्तरों पर मजबूत करने, पार्टी की चुनावी तैयारियों की समीक्षा करने और राज्य में आने वाली राजनीतिक चुनौतियों से पहले पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए एक व्यापक कार्ययोजना तैयार करने पर ध्यान केंद्रित किए जाने की उम्मीद है। तावडे से यह भी उम्मीद की जाती है कि वे पार्टी संगठन के कामकाज, इसकी चुनावी संभावनाओं और उन क्षेत्रों के बारे में वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों से प्रतिक्रिया लेंगे जहां सरकार और संगठन के बीच अधिक समन्वय की आवश्यकता हो सकती है। यह बैठक इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भाजपा देश के सबसे चुनावी रूप से महत्वपूर्ण राज्यों में से एक, उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक रणनीति का आकलन करना जारी रखे हुए है। इसके अतिरिक्त, पार्टी नेतृत्व द्वारा अपनी संगठनात्मक संरचना को मजबूत करने और अपने कार्यकर्ताओं के बीच अधिक तत्परता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उपायों पर चर्चा करने की उम्मीद है। विचार-विमर्श के दौरान, पार्टी एक ऐसी रणनीति की नींव भी रख सकती है जिसके तहत आगामी चुनाव में 200 से अधिक मौजूदा विधायकों को टिकट देने से इनकार किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश विधानसभा के सभी 403 सदस्यों को चुनने के लिए 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है।