दिल्ली-एनसीआर में भारी बारिश, कई इलाकों में सड़कों पर भरा पानी

नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में शनिवार को भारी बारिश हुई, जिससे कई जगहों पर जलभराव हो गया, ट्रैफिक पर असर पड़ा और पूरी राजधानी में आम जनजीवन प्रभावित हुआ। कनॉट प्लेस में आउटर सर्कल के पास पानी जमा हो गया, जिसके बाद अधिकारियों को अतिरिक्त पानी निकालने के लिए पंप लगाने पड़े। दुकानदारों में भी चिंता बढ़ गई क्योंकि बारिश का पानी आस-पास की कई दुकानों में घुसने लगा था। ग्रेटर नोएडा और नोएडा के कुछ हिस्सों में भी भारी बारिश हुई, जबकि दिल्ली के कई इलाकों में भी अच्छी-खासी बारिश दर्ज की गई। मंडी हाउस के पास गोल चक्कर पर जलभराव की खबर मिली, जिससे आने-जाने वालों को परेशानी हुई और ट्रैफिक की रफ्तार धीमी पड़ गई। तुगलकाबाद गांव की मुख्य सड़क पर भी ऐसे ही हालात दिखे, जहां जमा बारिश के पानी की वजह से गाड़ियों की आवाजाही में रुकावट आई। राजधानी के कई अन्य हिस्सों में भी दिन भर जोरदार बारिश होती रही। शुक्रवार को दिल्ली में हुई भारी बारिश के एक दिन बाद फिर से बारिश हुई। इस बारिश ने शहर भर में जन्माष्टमी के जश्न में खलल डाला और कई श्रद्धालुओं को अचानक हुई बारिश से परेशानी का सामना करना पड़ा। 4 सितंबर की दोपहर को तेज हवाओं के साथ भारी बारिश हुई। शुक्रवार को दोपहर 3:30 बजे से शाम 5 बजे के बीच सफदरजंग में हवा की रफ्तार लगभग 50 किमी/घंटा और पालम में 30 से 60 किमी/घंटा के बीच रही। शुक्रवार को सुबह 8:30 बजे से शाम 5:30 बजे के बीच पालम में 75.6 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि इसी दौरान सफदरजंग में 32.6 मिमी, लोधी रोड पर 34.6 मिमी और रिज इलाके में 20 मिमी बारिश हुई। खराब मौसम का असर हवाई यातायात पर भी पड़ा। शुक्रवार को दोपहर 3:30 बजे से 4:30 बजे के बीच दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से 9 उड़ानों का रास्ता बदलना पड़ा, क्योंकि भारी बारिश और आंधी-तूफान के कारण उड़ानों के संचालन में बाधा आई। मौजूदा मौसम की स्थिति पर कई वायुमंडलीय प्रणालियों का असर पड़ रहा है। उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश और उससे सटे दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र, मॉनसून ट्रफ और मौसम की अन्य प्रणालियां दिल्ली-एनसीआर में बारिश और आंधी-तूफान में सहायक हो रही हैं। उत्तर-पूर्व राजस्थान से मणिपुर तक फैला एक ट्रफ और दक्षिण गुजरात से झारखंड तक फैला एक और ट्रफ भी इस इलाके पर असर डाल रहे हैं। वायुमंडल के बीच और ऊपरी स्तरों में एक वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (पश्चिमी विक्षोभ) ट्रफ के रूप में बना हुआ है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, रविवार सितंबर को बारिश की गतिविधि में काफी कमी आने की उम्मीद है। सुबह से दोपहर तक कुछ जगहों पर हल्की या बहुत हल्की बारिश हो सकती है। 7 सितंबर से दिल्ली में आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहने की उम्मीद है और बारिश का कोई खास अनुमान नहीं है।

पश्चिम बंगाल : दक्षिण बंगाल में भारी बारिश से राहत, उत्तर बंगाल में सोमवार तक वर्षा का पूर्वानुमान

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के दक्षिण इलाके में बारिश की तीव्रता कम हो गई है और अगले कुछ दिनों तक कोलकाता सहित इस क्षेत्र में भारी बारिश की कोई चेतावनी नहीं है। हालांकि, उत्तरी इलाके के कई जिलों में सोमवार तक मध्यम से भारी बारिश जारी रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने शनिवार को यह जानकारी दी। मौसम विभाग के अनुसार, एक कम दबाव का सिस्टम अभी भी सक्रिय है, जबकि दक्षिण-पश्चिम मानसून ट्रफ राजस्थान से मणिपुर तक उत्तर बंगाल होते हुए फैला हुआ है, जो राज्य भर में मौसम को प्रभावित कर रहा है। इसके प्रभाव से दक्षिण बंगाल के कई हिस्सों में आने वाले दिनों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की उम्मीद है। अगले 24 घंटों में मुर्शिदाबाद में भारी बारिश होने की संभावना है। उत्तर बंगाल में बारिश की गतिविधि ज्यादा रहेगी। अगले 24 घंटों में मालदा, दक्षिण दिनाजपुर और जलपाईगुड़ी जिलों में भारी बारिश का अनुमान है। सोमवार तक उत्तर बंगाल के अन्य जिलों में भी गरज-चमक और रुक-रुक कर बारिश जारी रहने की संभावना है। कोलकाता में पिछले तीन दिनों से लगातार हो रही बारिश से कई इलाकों में जलभराव हो गया था, लेकिन शुक्रवार को बारिश न होने से लोगों को राहत मिली और जलभराव वाले इलाकों से पानी निकल गया। मौसम विभाग ने कहा है कि अगले तीन से चार दिनों तक शहर में भारी बारिश की कोई संभावना नहीं है, हालांकि कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। अगले 24 घंटों के लिए दक्षिण बंगाल के तट पर मछुआरों के लिए कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है। शुक्रवार को कोलकाता में अधिकतम तापमान 31.08 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से थोड़ा कम है, जबकि न्यूनतम तापमान 25.09 डिग्री सेल्सियस रहा। सापेक्ष आर्द्रता 67 प्रतिशत से 98 प्रतिशत के बीच रही। शनिवार को आसमान में बादल छाए रहने की उम्मीद है, और तापमान लगभग 32 डिग्री और 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है।

बिहार : पटना के गांधीघाट पर खतरे के निशान से 1.91 मीटर ऊपर गंगा, नए उच्चतम जलस्तर की आशंका

पटना। बिहार में गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने बाढ़ की आशंका वाले क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। विभाग के अभियंता प्रमुख की ओर से सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को चेतावनी संवाद जारी कर आवश्यक एहतियाती कदम उठाने को कहा गया है। जल संसाधन विभाग के अनुसार, शनिवार को सुबह 9 बजे पटना के गांधीघाट गेज स्थल पर गंगा का जलस्तर 50.51 मीटर दर्ज किया गया। यह खतरे के निशान 48.60 मीटर से 1.91 मीटर ऊपर है। नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी की प्रवृत्ति बनी हुई है। विभाग ने विशेष रूप से चिंता जताई है कि गंगा इस स्थल पर अपने अब तक के उच्चतम बाढ़ स्तर (एचएफएल) 50.52 मीटर के बेहद करीब पहुंच गई है और पूर्वानुमान के अनुसार गांधीघाट पर नया उच्चतम जलस्तर बनने की संभावना है। विभाग ने कहा है कि जलस्तर बढ़ने के कारण नदी के प्रवाह क्षेत्र, विशेषकर दियारा इलाकों में दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। चेतावनी संवाद में जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया गया है कि बाढ़ आपदा के दृष्टिकोण से सभी आवश्यक एहतियाती कदम तत्काल उठाए जाएं। तटबंध के नदी भाग में बसे लोगों को गंगा के बढ़ते जलस्तर और संभावित खतरे की जानकारी देने के साथ ही आवश्यकता के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है। इसके अलावा बाढ़ आपदा से निपटने के लिए जिलास्तर पर गठित दलों की लगातार गश्ती सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया है। प्रशासन को संवेदनशील इलाकों पर नजर बनाए रखने और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई के लिए तैयार रहने को कहा गया है। जल संसाधन विभाग की निगरानी रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार सुबह 10 बजे गांधीघाट पर गंगा का जलस्तर बढ़कर 50.53 मीटर पहुंच गया, जो खतरे के निशान से करीब 1.93 मीटर ऊपर है। इस समय यहां जलस्तर बढ़ने की प्रवृत्ति दर्ज की गई है और यह निर्धारित एचएफएल 50.52 मीटर से भी मामूली तौर पर ऊपर पहुंच गया है। विभाग की रिपोर्ट में गंगा के अन्य प्रमुख गेज स्थलों पर भी जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर दर्ज किया गया है। बक्सर, बाढ़, दीघाघाट, हाथीदह, मुंगेर, सुल्तानगंज, भागलपुर, कहलगांव में भी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर है। इनमें कई स्थानों पर जलस्तर बढ़ने की प्रवृत्ति दर्ज की गई है। विभाग ने जिला प्रशासन से कहा है कि नदी के बढ़ते दबाव को देखते हुए तटबंधों, दियारा क्षेत्रों और नदी के प्रवाह क्षेत्र में विशेष निगरानी रखी जाए तथा किसी भी संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए राहत और बचाव दलों को सक्रिय रखा जाए।

केरल में एनएच-66 पर खड़ी लॉरी से टकराई कार, तमिलनाडु के आठ इंजीनियरिंग छात्रों की मौत

त्रिशूर। केरल के त्रिशूर में भीषण सड़क हादसा हो गया, जिसमें तमिलनाडु के इंजीनियरिंग कॉलेज के आठ छात्रों की मौत हो गई। छात्र जिस कार में यात्रा कर रहे थे, वह शुक्रवार देर रात त्रिशूर जिले के कैपामंगलम में नेशनल हाईवे 66 पर खड़े एक मालवाहक ट्रक से टकरा गई। यह हादसा नेशनल हाईवे के उस हिस्से पर हुआ जहां निर्माण कार्य चल रहा है। यहां एक लॉरी हाईवे पर चल रहे निर्माण कार्य के दौरान बनाए गए डायवर्जन के पास खड़ी थी। इस लॉरी में तमिलनाडु नंबर वाली कार पीछे से आकर टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उसमें सवार 8 लोग अंदर ही फंस गए। हादसे की खबर मिलते ही स्थानीय लोग और बचावकर्मी मौके पर पहुंचे। पीड़ितों को बाहर निकालने के लिए क्षतिग्रस्त वाहन को काटना पड़ा। माना जा रहा है कि कार में सवार सात लोगों की मौत घटनास्थल पर ही हो गई, जबकि एक अन्य पीड़ित को अस्पताल ले जाया गया लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। इसके बाद पुलिस और आपातकालीन कर्मियों ने शवों को आगे की कार्रवाई के लिए भेज दिया। हादसे का शिकार हुए लोग तमिलनाडु के डिंडीगुल में पी.एस.एम. इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र थे। मारे गए पांच लोगों की पहचान अभी तक हुई है। जिनमें सलेम के 20 साल के विश्व, डिंडीगुल के 20 साल के सूर्या और 20 साल के युवासंजीत, मदुरै के 20 साल के संतोष और प्रसन्ना हैं। अधिकारी बाकी तीन पीड़ितों की पहचान करने और उनके रिश्तेदारों को सूचित करने की कोशिश कर रहे थे। कार के खड़ी लॉरी से टकराने की वजहों की जांच की जा रही है। हाईवे निर्माण वाले हिस्से में डायवर्जन के पास खड़ी गाड़ी का वहां होना भी जांच का हिस्सा हो सकता है। सूचना मिलने के तुरंत बाद कैपामंगलम पुलिस स्टेशन के कर्मचारी घटनास्थल पर पहुंचे और जांच शुरू की। घटनाक्रम का सही पता लगाने के लिए पुलिस गाड़ियों की जांच करेगी और घटनास्थल से अन्य सबूत इकट्ठा करेगी। यह दुर्घटना केरल में एनएच-66 के कई हिस्सों पर चल रहे बड़े पैमाने पर निर्माण और चौड़ीकरण के काम के बीच हुई है, जहां अस्थायी डायवर्जन और ट्रैफिक प्रतिबंध लागू किए गए हैं।

सलिल चौधरी की डेथ एनिवर्सरी पर जैकी श्रॉफ ने दी श्रद्धांजलि, शेयर की तस्वीर

मुंबई। मशहूर म्यूजिक कंपोजर सलिल चौधरी की डेथ एनिवर्सरी शनिवार को है। इस मौके पर अभिनेता जैकी श्रॉफ ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। जैकी श्रॉफ ने इंस्टाग्राम पर सलिल चौधरी की एक ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर पोस्ट की, जिसमें वह पियानो बजाते नजर आ रहे हैं। म्यूजिक कंपोजर को टैग कर उन्होंने लिखा, “म्यूजिकल लेजेंड सलिल चौधरी को उनकी डेथ एनिवर्सरी पर याद करते हुए ।” सलिल चौधरी का निधन 5 सितंबर, 1995 को 69 साल की उम्र में हो गया था। 19 नवंबर, 1925 को बंगाल प्रेसीडेंसी के हरिनावी में जन्मे सलिल चौधरी को सिर्फ एक म्यूजिक कंपोजर से कहीं ज्यादा माना जाता था। वह एक गीतकार, गीतकार, कवि, लेखक और थिएटर पर्सनैलिटी थे। उन्होंने हिंदी, बंगाली और मलयालम समेत 13 भाषाओं में फिल्मों के लिए संगीत बनाया। वह बांसुरी, पियानो और एसराज जैसे इंस्ट्रूमेंट्स में भी माहिर थे। एक कंपोजर के तौर पर उनकी पहली बंगाली फिल्म 1949 में ‘परिवर्तन’ थी। हिंदी सिनेमा में उनकी एंट्री 1953 में बिमल रॉय की ‘दो बीघा जमीन’ से हुई। 1958 में बिमल रॉय की ‘मधुमती’ के लिए उनका साउंडट्रैक उनके सबसे मशहूर कामों में से एक है। इस फिल्म में ‘आजा रे परदेसी’, ‘सुहाना सफर और यह मौसम हसीन’, ‘दिल तड़प तड़प के कह रहा है’ और ‘घड़ी घड़ी मोरा दिल धड़के’ जैसे यादगार गाने थे। इसके बाद उन्होंने कई यादगार गाने गाए, जिनमें परख का ‘ओ सजना बरखा बहार आई’, छाया का ‘इतना ना मुझसे तू प्यार बढ़ा’, काबुलीवाला का ‘ऐ मेरे प्यारे वतन’, आनंद का ‘कहीं दूर जब दिन ढल जाए’ और ‘ज़िंदगी कैसी है पहेली’ और छोटी सी बात का ‘ना जाने क्यों’ शामिल हैं। इसके बाद उन्होंने लता मंगेशकर, मुकेश, मन्ना डे, किशोर कुमार और आशा भोसले जैसे प्लेबैक सिंगिंग के कुछ सबसे बड़े नामों के साथ काम किया और ऐसी धुनें बनाईं जो आज भी एवरग्रीन मानी जाती हैं।

शिक्षक गढ़ेंगे विकसित भारत की नींव, 25 करोड़ छात्रों का भविष्य संवार रहे 1 करोड़ 3 लाख से अधिक टीचर : प्रह्लाद जोशी

नई दिल्ली। राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी और शिक्षा राज्य मंत्रियों ने देशभर के शिक्षकों को शुभकामनाएं दी हैं और महान विद्वान, दार्शनिक और शिक्षक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को नमन किया है। शिक्षा मंत्रालय ने प्रह्लाद जोशी का वीडियो संदेश ‘एक्स’ पोस्ट पर शेयर किया। वीडियो संदेश में केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने डॉ. एस राधाकृष्णन को याद करते हुए देशभर के शिक्षकों के समर्पण और योगदान की सराहना की। उन्होंने बताया कि इस वर्ष स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र से जुड़े 82 उत्कृष्ट शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री ने अपने संदेश में कहा कि इन सभी शिक्षकों की उपलब्धियां अलग-अलग हैं, लेकिन इनका उद्देश्य एक ही है कि अपने विद्यार्थियों को बेहतर अवसर देना और उनका भविष्य उज्जवल बनाना। उन्होंने कहा कि इस बार सम्मानित किए जा रहे 82 शिक्षकों में स्कूल शिक्षण से 48, उच्च शिक्षण से 21, और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय से 13 शिक्षक शामिल हैं। प्रह्लाद जोशी ने कहा, “यह सम्मान केवल उन 82 शिक्षकों तक सीमित नहीं है। यह देश के 1 करोड़ 3 लाख से अधिक शिक्षकों का प्रतिनिधित्व करता है, जो हर दिन लगभग 25 करोड़ विद्यार्थियों तक शिक्षण पहुंचाते हैं और उनके भविष्य को दिशा दे रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा, “मैं उन सभी राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त करने वाले शिक्षकों को बधाई देता हूं, साथ ही देश के सभी शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त करता हूं, जिनके निरंतर प्रयास से हमारी आने वाली पीढ़ियां तैयार हो रही हैं। हमारा विश्वास है कि भारत के उज्जवल भविष्य की मजबूत नींव अच्छी शिक्षण और समर्पित शिक्षकों से ही तैयार होती है। हमारे शिक्षक जिस पीढ़ी को आज तैयार कर रहे हैं, वही आने वाले समय में भारत को नई ऊंचाई तक ले जाएगी और विकसित भारत में उनका योगदान रहेगा।” मंत्री ने बताया कि पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों ने नवाचार, तकनीक, समावेशी शिक्षा, खेल, कला और कौशल के माध्यम से विद्यार्थियों को बेहतर अवसर देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वहीं, केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री सुकांत मजूमदार ने भी शिक्षकों को शुभकामनाएं दीं। शिक्षा मंत्रालय ने उनके वीडियो संदेश को शेयर किया। वीडियो संदेश में उन्होंने कहा, “एक शिक्षक का प्रभाव कक्षा से कहीं आगे तक जाता है- जिज्ञासा को बढ़ावा देना, आत्मविश्वास बनाना और युवा दिमागों को बेहतर भविष्य को आकार देने के लिए ज्ञान और मूल्यों के साथ सशक्त बनाना।” सुकांत मजूमदार ने देशभर के शिक्षकों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए उनके समर्पण और अमूल्य योगदान का जश्न मनाया, जो कल के नेताओं को आकार दे रहे हैं और 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में मदद कर रहे हैं। इसी कड़ी में केंद्रीय राज्यमंत्री जयंत चौधरी ने भी शिक्षक दिवस पर संदेश दिया। शिक्षा मंत्रालय ने उनके वीडियो संदेश को शेयर किया। वीडियो संदेश में उन्होंने भारत के पूर्व राष्ट्रपति एवं महान शिक्षाविद डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को स्मरण करते हुए इस वर्ष राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित होने वाले 82 उत्कृष्ट शिक्षकों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने देशभर के सभी शिक्षकों की मेहनत, लगन और समर्पण की सराहना करते हुए शिक्षा के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान को नमन किया।

राजभर ने अखिलेश पर साधा निशाना, कहा- ‘कम से कम भगवान कृष्ण के तो बनकर रहिए भाई’

लखनऊ। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर राजभर ने अखिलेश यादव के एक कथित साक्षात्कार का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि वह खुद को यदुवंशी कहते हैं, लेकिन भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण का नाम लेने से क्यों बचते हैं। उन्होंने अखिलेश पर तंज कसते हुए कहा, “कम से कम भगवान कृष्ण के तो बनकर रहिए भाई।” राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि अखिलेश जी, कम से कम भगवान कृष्ण के तो बनकर रहिए भाई। आपका एक इंटरव्यू देखा। पत्रकार ने सीधा सवाल पूछा—जय श्री राम बोलूं या जय श्री कृष्ण? सवाल साफ था लेकिन आपने तड़ाक से बात ही बदल दी। माइक पर एक बार भी जय श्री राम या जय श्री कृष्ण बोलने की हिम्मत नहीं जुटा सके। उन्होंने कहा कि कैसे खुद को यदुवंशी कहते हैं महाराज? इतना भी क्या 18 प्रतिशत वोट का डर कि अपने भगवान का नाम तक खुलकर न ले सको? उनके दर्शन करने, उनकी जन्मस्थली तक न जा सको? यही हाल रहा तो आपकी अपनी बिरादरी भी एक दिन पूछ बैठेगी कि क्या आप लोग वाकई यदुवंशी हैं? राजभर ने कहा कि सच तो ये है कि आपका मन केवल एक ही तरफ लगता है। तभी तो पैगम्बर-ए-इस्लाम के जन्मोत्सव पर लखनऊ में होने वाले कार्यक्रम की सफलता की कामना आप खुलकर करते हैं। टोपी तक लगा लेते हैं। सही बात तो ये है कि आप न राम के हुए, न कृष्ण के और न ही यदुवंश के। अरे महाराज, किसी के तो सगे बन जाइए! मंत्री ओम प्रकाश ने कहा कि खैर, आपको कृष्ण जन्माष्टमी की अनंत शुभकामनाएं। उम्मीद है कि किसी दिन आपका जमीर जगेगा और आप भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर की मांग का समर्थन करेंगे। किंतु ये तभी होगा जब भगवान श्रीकृष्ण की आप पर कृपा होगी। जय श्री राम। जय श्री कृष्ण। जय परशुराम। जय महाराजा सुहेलदेव। जय सुभासपा। जय सनातन।

तमिलनाडु में डीएमके नेता केएन नेहरू के ठिकानों पर एसीबी की छापेमारी

चेन्नई। तमिलनाडु में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने शनिवार को डीएमके के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री केएन नेहरू और उनके भाई रविचंद्रन से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की। शनिवार सुबह शुरू हुई यह तलाशी अभियान 19 अलग-अलग जगहों पर चलाया जा रहा है, जिसमें चेन्नई और तिरुचिरापल्ली के ठिकाने शामिल हैं। चेन्नई में अधिकारियों ने मायलापुर, अड्यार, थिरुवनमियुर, अन्ना नगर और अभिरामपुरम सहित कई इलाकों में स्थित परिसरों में तलाशी ली। वहीं, तिरुचिरापल्ली में एसबी की टीम चार गाड़ियों में केएन नेहरू के थिल्लई नगर स्थित घर पर पहुंची और घर तथा उनसे जुड़ी अन्य संपत्तियों की तलाशी शुरू की। उनके भाई रविचंद्रन से जुड़ी संपत्तियों को भी इस ऑपरेशन में कवर किया गया। जब तलाशी शुरू हुई, तब केएन नेहरू घर पर नहीं थे, लेकिन छापेमारी की सूचना मिलते ही वे अपने थिल्लई नगर स्थित आवास पर लौट आए। इस कार्रवाई की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में डीएमके कार्यकर्ता और समर्थक उनके घर के बाहर जमा हो गए। पूर्व मंत्री अनबिल महेश और अन्य वरिष्ठ डीएमके नेता भी उनके आवास पर पहुंचे। इस दौरान बाहर कार्यकर्ताओं के जमा होने से तनाव का माहौल बन गया। यह छापेमारी ऐसे समय में हुई है जब पहले भी इनकम टैक्स विभाग और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने टेंडर आवंटन में अनियमितताओं के आरोपों के सिलसिले में केएन नेहरू और रविचंद्रन से जुड़े ठिकानों पर तलाशी ली थी। अब राज्य की भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी की इस कार्रवाई ने पूर्व मंत्री और उनके सहयोगियों से जुड़ी जांच को एक नया मोड़ दे दिया है। अधिकारी परिसरों और दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं। इस तलाशी अभियान के समय को लेकर भी राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि यह कार्रवाई तब हो रही है जब तमिलनाडु विधानसभा का सत्र चल रहा है। केएन नेहरू डीएमके के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री हैं और वर्तमान में विधानसभा में विपक्ष के उपनेता के महत्वपूर्ण पद पर हैं। चेन्नई और तिरुचिरापल्ली में एक साथ कई संपत्तियों पर छापेमारी से राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। अधिकारियों की ओर से इस ऑपरेशन के दौरान जब्ती या बरामद दस्तावेजों को लेकर अभी और जानकारी का इंतजार है।

मस्जिदों को अवैध बताकर ध्वस्तीकरण का अभियान तत्काल रोके सरकार: मायावती

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने उत्तर प्रदेश में मस्जिदों समेत अन्य धार्मिक स्थलों को अवैध बताकर ध्वस्त किए जाने की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए सरकार से इसे तत्काल रोकने की अपील की है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक और धर्मनिरपेक्ष सरकार की जिम्मेदारी सभी धर्मों के मानने वालों तथा उनके धार्मिक स्थलों का समान रूप से सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करना है। मायावती ने बिना समुचित कानूनी प्रक्रिया के किसी आरोपी का मकान गिराए जाने को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा और ‘कानून द्वारा कानून का राज’ सुनिश्चित करने की मांग की। मायावती ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सिलसिलेवार पोस्ट के जरिए कहा कि जिला सहारनपुर की मस्जिद समेत पूरे उत्तर प्रदेश में आए दिन मस्जिदों को काफी आपत्तिजनक तरीके से अवैध बताकर उन्हें ध्वस्त करने का जो सरकारी अभियान चल रहा है, वह उचित नहीं है। सरकार को ऐसे नकारात्मक हालात से बचने के लिए इस पर तत्काल रोक लगानी चाहिए और समस्या के समाधान के अन्य उपाय करने चाहिए। बसपा प्रमुख ने कहा कि संवैधानिक धर्मनिरपेक्ष सरकार की जिम्मेदारी सभी धर्मों को मानने वाले लोगों और उनके धार्मिक स्थलों का समान आदर-सम्मान एवं सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि इस्लाम धर्म में मस्जिदें हर दिन इबादत और दिन में कई बार जमात के साथ नमाज पढ़ने का मुख्य व अभिन्न अंग हैं। इसे ध्यान में रखते हुए भारतीय परंपरा के अनुरूप सम्मान देना देश और व्यापक जनहित में जरूरी है। उन्होंने कहा कि बिना नियम-कानून का समुचित अनुपालन किए किसी भी अभियुक्त का मकान ध्वस्त कर उसके पूरे परिवार को सामूहिक तौर पर सजा देकर बेघर कर देने की कार्रवाइयों से लोग काफी विचलित हैं। ऐसे मामलों में सरकार को कानून के मुताबिक कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए और ‘कानून द्वारा कानून का राज’ का व्यवहार करना जरूरी है। मायावती ने कहा कि केवल सरकार ही नहीं, बल्कि माननीय न्यायालय भी इस ओर समुचित ध्यान दें तो यह उचित होगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में सभी लोगों को सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने की जरूरत है और पार्टी की भी यही अपील है। बता दें कि उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में शनिवार सुबह कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया। प्रशासन के मुताबिक, सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने मस्जिद के निर्माण को सरकारी जमीन पर अवैध करार दिया था। इस आदेश के खिलाफ मस्जिद समिति की ओर से दायर पहली अपील भी खारिज हो चुकी थी। प्रशासन की कार्रवाई के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस तथा आरआरएफ के जवान तैनात रहे। मस्जिद ध्वस्त किए जाने के बाद इलाके में तनाव की स्थिति को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है।

बिहार में बाढ़ का कहर जारी, गंगा के उफान से कई जिलों में लाखों लोग प्रभावित

पटना। बिहार में गंगा समेत कई प्रमुख नदियों के जलस्तर में लगातार वृद्धि से बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। जल संसाधन विभाग के शनिवार सुबह के आंकड़ों के अनुसार गंगा, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और घाघरा समेत कई नदियां विभिन्न स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक, भागलपुर, भोजपुर, पटना, सारण और वैशाली में ही करीब 7.8 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। इसके अलावा कई अन्य जिलों में भी निचले इलाकों में पानी फैलने से हजारों लोग प्रभावित हुए हैं। भागलपुर के खरीक प्रखंड की राघोपुर पंचायत में गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण काजीकौरैय-राघोपुर मार्जिनल बांध 23 अगस्त की रात करीब 30 मीटर लंबाई में क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद पंचायत के पांच वार्डों में पानी फैल गया, जिससे करीब 5,000 लोग प्रभावित हुए हैं। प्रशासन की ओर से प्रभावित लोगों के लिए छह सामुदायिक रसोई केंद्र चलाए जा रहे हैं। इनके माध्यम से अब तक करीब 70,600 थालियों में भोजन कराया जा चुका है। भोजपुर में गंगा के जलस्तर में वृद्धि के कारण निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। जिले के चार प्रखंडों की करीब 2.84 लाख आबादी प्रभावित हुई है। प्रशासन की ओर से 13 सामुदायिक रसोई केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जहां अब तक करीब 8,300 थालियों में भोजन कराया गया है। पटना जिले में भी गंगा के बढ़ते जलस्तर ने निचले इलाकों में मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जिले के नौ प्रखंडों में करीब 2.32 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। फिलहाल आठ सामुदायिक रसोई केंद्र चल रहे हैं, जिनसे करीब 5,900 थालियों में भोजन उपलब्ध कराया गया है। शनिवार से सात और स्थानों पर सामुदायिक रसोई केंद्र शुरू किए जा रहे हैं। सारण जिले के पांच प्रखंडों में करीब 20 हजार आबादी प्रभावित हुई है। यहां एक सामुदायिक रसोई केंद्र के माध्यम से अब तक करीब 500 थालियों में भोजन कराया गया है। वैशाली में तीन प्रखंडों की करीब 85 हजार आबादी बाढ़ से प्रभावित है। यहां एक सामुदायिक रसोई केंद्र के साथ एक राहत शिविर भी संचालित किया जा रहा है, जिसमें 326 लोग शरण लिए हुए हैं। इसके अलावा अरवल में 32 हजार, बक्सर में 10 हजार, बेगूसराय में 21,700, समस्तीपुर में 11,800, खगड़िया में 8,500, मुंगेर में 38 हजार और कटिहार में 36 हजार लोग निचले इलाकों में पानी फैलने से प्रभावित हुए हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में आवागमन के लिए प्रशासन की ओर से 18 जिलों में कुल 693 नावों का परिचालन किया जा रहा है। इनमें वैशाली में सबसे अधिक 155, समस्तीपुर में 88, भोजपुर में 87, पटना में 70, मधेपुरा में 58, खगड़िया में 43 और पूर्णिया में 35 नावें चल रही हैं। राहत सामग्री के तौर पर 11 जिलों में अब तक 7,107 पॉलीथिन शीट वितरित की गई हैं। वहीं पश्चिम चंपारण, पटना और वैशाली में बाढ़ प्रभावित परिवारों के बीच 1,764 सूखा राशन पैकेट भी बांटे गए हैं। जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, गंगा का जलस्तर पटना के गांधी घाट पर खतरे के निशान से 1.83 मीटर और हाथीदह में 1.61 मीटर ऊपर है। कहलगांव में गंगा 1.22 मीटर तथा पुनपुन नदी श्रीपालपुर में 2.68 मीटर ऊपर बह रही है। सरकार और जिला प्रशासन की टीमें लगातार जलस्तर की निगरानी के साथ राहत एवं बचाव कार्यों में जुटी हैं।